उत्तर प्रदेश के वाराणसी में युवती के साथ गैंगरेप करने के मामले में शामिल बाकी आरोपितों की पुलिस ने पहचान कर ली है। उनमें से दो आरोपितों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। पुलिस बाकी आरोपितों की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। इनमें से 7 आरोपितों की पहचान किया जाना अभी बाकी है। पुलिस ने इनकी पहचान के लिए सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जाँच की।
लालपुर पुलिस जिन दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान नरपतपुर डुबकियाँ निवासी राज खान और लल्लापुरा निवासी मोहम्मद शहबाज के रूप में हुई है। युवती के साथ दुष्कर्म में ये दोनों भी शामिल थे। पुलिस ने दोनों आरोपितों का मेडिकल कराने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है। बता दें कि इस मामले में कुल 23 में से 13 आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं।
इसके बाद पुलिस कमिश्नर ने डीसीपी (क्राइम) प्रमोद कुमार की अध्यक्षता में एक SIT गठित की है। यह मामले की सत्यतता की जाँच करेगी। टीम में महिला IPS अधिकारी ADCP वरुणा जोन और इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी शामिल हैं। पुलिस कमिश्नर ने बताया की ऐसे मामलों की विवेचना में 60 दिन लगते हैं, लेकिन पुलिस प्रयास करेगी कि 30 दिनों में रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्यवाही की जाए।
उधर, आरोपितों के परिजनों ने लड़की पर ही आरोप लगाए हैं। कुछ आरोपितों के परिजनों का कहना है कि युवती खुद लड़कों के साथ गई थी। उन्होंने लड़की के चैट और इंस्टाग्राम भी पुलिस को दिखाए। परिजनोें ने युवती के उन सात दिनों के मोबाईल लोकेशन, चैट हिस्ट्री और स्क्रीनशॉर्ट्स शामिल हैं। परिजनों द्वारा दिए गए सबूतों के आधार पर ही जाँच के लिए यह SIT गठित की गई है।
पीड़ित छात्रा का उपचार जारी है। उसे हेपेटाइटिस-B पॉजिटिव पाया गया है। इसके बाद से उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल छात्रा की हालत में सुधार है। डॉक्टर का कहना है कि लंबे वक्त तक नशे करने के कारण छात्रा को पीलिया हो गया है। पीड़ित छात्रा की मेडिकल हिस्ट्री भी ट्रॉमा सेंटर और IMS-BHU को भेजा गया है।
होटल कॉन्टिनेन्टल का मालिक और गैंगरेप का मास्टरमाइंड अनमोल गुप्ता की जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी। वही पीएम मोदी की नाराजगी के बाद DCP वरुणा चंद्रकांत मीणा को हटा कर उन्हे वाराणसी से DGP ऑफिस, लखनऊ भेज दिया गया। आरोप है की DCP मीणा ने इस मामले में कोई कठोर कदम नहीं उठाया और न ही लापरवही बरते वाले अफसरों पर कोई रिपोर्ट दी ।
बता दें कि लगभग दो सप्ताह पहले वाराणसी में स्नातक की एक छात्रा से 23 लड़कों ने 7 दिनों तक गैंगरेप किया था। उसके बाद उसे सड़क पर फेंक कर भाग गए थे। इसके बाद छात्रा अपने घर पहुँची थी और घटना के बारे में परिजनों को बताया था। उसकी हालत को देखते हुए उसे अस्पताल पहुँचाया गया था। लड़की के बयान पर 12 लोगों के नामजद रिपोर्ट और 11 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी।
जिन 11 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी, उनमें से 9 की पहचान पुलिस ने कर ली है। उनकी गिरफ्तारी के प्रयास के दौरान दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। बाकी 7 चिन्हित आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रयास कर रही है। वहीं, जिन दो आरोपितों की पहचान बाकी है, उनकी पहचान के लिए पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगालने सहित तमाम काम कर रही है।
बिहार के वैशाली में मोहम्मद साहिल सिद्दीकी अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मिलकर दूसरी लड़कियों को ब्लैकमेल करता था और उनका पॉर्न बनाता था। बिहार पुलिस ने लड़कियों का पोर्न बनाकर उसे विदेश में बेचने वाले इस सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। 17 साल की एक नाबालिग लड़की की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज करके मुख्य आरोपित मोहम्मद साहिल को गिरफ्तार कर लिया है।
यह मामला तब खुला, जब एक पीड़िता का वीडियो 26 मार्च को वायरल हो गया। हालाँकि, लोक-लाज से पीड़िता ने परिजनों ने चुप्पी साधे रखी। आखिरकार पीड़िता के पिता ने 2 अप्रैल 2025 को जंदाहा थाने में इसकी शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता ने बताया कि मोहम्मद साहिल अपनी गर्लफ्रेंड गुलशन खातून के साथ मिलकर लड़कियों को फँसाता है और फिर उनका पोर्न बनाता है।
पीड़िता ने बताया कि वह कंप्यूटर क्लास के लिए जंदाहा बाजार जाती थी। वहीं पर उसकी दोस्ती गुलशन खातून से हुई। इसके बाद दोनों साथ घुमने-फिरने से लेकर साथ में रेस्टोरेंट में खाना खाने जाने लगे। जब पीड़िता का गुलशन पर विश्वास बढ़ गया तो उसने पीड़िता को अपने प्रेमी मोहम्मद साहिल से मिलवाया। एक दिन गुलशन उसे खाने के बहाने लेकर होटल में गई। वहाँ गुलशन ने उसकी तस्वीरें ले लीं।
अपनी शिकायत में पीड़िता ने बताया कि उसकी तस्वीरों को गुलशन के प्रेमी साहिल ने एडिट करके ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। साहिल कहता था कि अकेले मिलो वर्ना उसकी सारी अश्लील तस्वीरें वह पीड़िता के घरवालों को भेज देगा। मोहम्मद साहिल की धमकी से पीड़िता डर गई और आखिरकार उससे मिलने के लिए चली गई। वहाँ साहिल ने उसे खाना खिलाया।
उस खाने में नशीला पदार्थ मिला हुआ था। खाना खाने के बाद वह बेहोश गई। इसके बाद मोहम्मद साहिल ने उसका रेप किया और उसका वीडियो बना लिया। अश्लील वीडियो के आधार पर वह पीड़िता को ब्लैकमेल करने लगा और उससे जबरन शारीरिक संबंध बनाने लगा। पीड़िता का आरोप है कि एक दिन मोहम्मद साहिल और गुलशन ने उसे पकड़ कर बुरी तरह से पीटा और उसका मोबाइल छीन लिया।
इसके बाद दोनों ने उसकी अश्लील तस्वीरों को वायरल कर दिया। वहीं, पीड़िता के पिता का कहना है कि मोहम्मद साहिल कई लड़कियों को ब्लैकमेल करके उनका अश्लील वीडियो बनाता था और उन्हें विदेश में बेचकर पैसे कमाता था। पिता का कहना है कि मोहम्मद साहिल सिद्दीकी जिहादी मानसिकता का व्यक्ति है और इसी मानसिकता के तहत वह लड़कियों का वीडियो बनाकर वायरल करता था।
इस घटना को लेकर डीएसपी अबू जफर आलम ने बताया कि मामला दर्ज करके आरोपित को जेल भेज दिया गया है। डीएसपी ने कहा कि साहिल और उसकी गर्लफ्रेंड द्वारा वायरल वीडियो, नशीली दवाओं के इस्तेमाल और पोर्न वीडियो विदेश भेजने के आरोपों की जाँच की जा रही है। अगर जाँच में ये मामले सही पाए जाते हैं तो आरोपितों पर और गंभीर धाराएँ जोड़ी जा सकती हैं।
पुलिस का कहना है कि साहिल अपनी प्रेमिका गुलशन लड़कियों को मीठी-मीठी बातों से बहलाती-फुसलाती थी और फिर उसे साहिल के पास लेकर जाती थी। कुछ लड़कियों को वह प्रेम करने का नाटक करता था और फिर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाता था। इसके बाद उनका वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता था और कुछ से रुपए भी ऐंठता था।
पुलिस का कहना है कि मोहम्मद साहिल जिन लड़कियों को अपना शिकार बनाया, उसमें दूसरे धर्म की लड़कियाँ भी शामिल हैं। वह इन लड़कियों से जितनी बार संबंध बनाता था, उतनी बार उनका वीडियो रिकॉर्ड करता था और फोटो खींचता था। इन फोटोे और वीडियो को वह दूसरी जगह बेचता था। विरोध करने वाली लड़कियों का वह फोटो-वीडियो वायरल भी कर देता था।
पुलिस का यह भी कहना है कि मोहम्मद साहिल की प्रेमिका गुलशन खातून नशा की आदी है। अपने जाल में फँसाने वाली लड़कियों को भी नशा देती थी। आरोपित ने सोशल मीडिया पर कई लड़कियों के फोटो और वीडियो वायरल किए हैं। हालाँकि, कई लड़कियों के शिकार बनने के बावजूद कोई भी परिवार शायद लोक-लाज की डर से अभी सामने नहीं आया है, सिवाय पीड़िता के।
बॉलीवुड निर्देशक अनुराग कश्यप ने आगामी फिल्म ‘फुले’ की रिलीज में देरी और उस पर सेंसरशिप को लेकर ब्राह्मण समुदाय और सेंसर बोर्ड (CBFC) पर तीखा हमला बोला है। अनुराग कश्यप ने आरोप लगाया कि फिल्म की रिलीज को ब्राह्मण समुदाय के विरोध के कारण ही टाला गया है। अनुराग कश्यप ने यह भी सवाल उठाया कि एक फिल्म जो रिलीज नहीं हुई है, उसका कुछ समूहों द्वारा विरोध क्यों किया जा रहा है और उन्हें कैसे पहुँच मिली।
फिल्म की रिलीज टली, सोशल मीडिया पर आक्रोश
इस विवाद के बीच, निर्देशक आनंद महादेवन और कलाकार प्रतीक गाँधी और पत्रलेखा की यह फिल्म, जो ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले के जीवन पर आधारित है, अब 25 अप्रैल को रिलीज होने की संभावना है। वहीं अनुराग कश्यप की टिप्पणियों से सोशल मीडिया पर लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है, जहाँ कई लोगों ने उनकी भाषा और अभिव्यक्ति की आलोचना की है।
अनुराग कश्यप की ओर की सवाल किया गया, “कौन है असली च****?, लोग च**** नहीं, आप ब्राह्मण लोग हो या फिर आप के बाप हैं जो ऊपर बैठे हैं। फैसला कर लो।” इसी पोस्ट पर एक इंस्टाग्राम यूजर ने अनुराग कश्यप को कहा, “ब्राह्मण तुम्हारे बाप हैं। जितना तुम्हारी उनसे सुलगेगी उतना तुम्हारी सुलगाएँगे।” अनुराग कश्यप ने यूजर को जवाब में कहा, ब्राह्मण पे मूतूँगा… कोई दिक्कत?
इंस्टाग्राम पर अनुराग कश्यप का विवादास्पद बयान
अनुराग कश्यप ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में कहा, “मेरी जिंदगी का पहला नाटक ज्योतिबा और सावित्री बाई फुले पर था। भाई अगर जातिवाद नहीं होता इस देश में ज्योतिबा बाई फुले और सावित्री बाई फुले को क्या ज़रूरत थी लड़ने की। अनुराग कश्यप ने आगे लिखा, “अब ये ब्राह्मण लोगों को शर्म आ रही है या वो शर्म में मारे जा रहे हैं या फिर एक अलग ब्राह्मण भारत में जी रहे हैं जो हम देख नहीं पा रहे हैं, च**** कौन है कोई तो समझाए।”
अनुराग कश्यप ने सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, “मेरा सवाल यह है कि जब फिल्म सेंसरशिप के लिए जाती है, तो बोर्ड में 4 सदस्य होते हैं। आखिर समूहों और विंग्स को फिल्मों तक पहुँच कैसे मिलती है, जब तक कि उन्हें इसकी अनुमति न दी जाए? पूरी प्रणाली ही धाँधली है।”
इसके अलावा फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने पंजाब 95, तीस, धड़क 2 जैसी फिल्मों को लेकर भी टिप्पणी की है। अनुराग ने कहा कि ऐसी फिल्में सेंसरशिप के प्रकोप का सामना करती है और रिलीज होने से रुक जाती है। उन्होंने मोदी सरकार को कहा, “मुझे नहीं पता कि इस जातिवादी, क्षेत्रवादी, नस्लवादी सरकार के एजेंडे को उजागर करने वाली और कितनी फिल्मों पर रोक लगाई गई है।”
अनुराग कश्यप ने आगे कहा, “उन्हें (मौजूदा सरकार) अपना चेहरा आईने में देखने में शर्म आती है। क्या उन्हें इतनी शर्म आती है कि वे खुलकर ये तक नहीं बता सकते कि फिल्म में ऐसा क्या दिखाया गया है, जो उन्हें परेशान करता है।”
क्या अब ₹2000 से अधिक के ऑनलाइन लेनदेन पर सरकार GST (वस्तु एवं सेवा कर) लगाने जा रही है? इसमें कोई शक नहीं है कि UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) ने ऑनलाइन लेनदेन की दुनिया में क्रान्ति ला दी है। इसका अंदाज़ा आप इसी से लगा सकते हैं कि अकेले 2024 में 17 हजार करोड़ से अधिक लेनदेन सिर्फ़ UPI के माध्यम से हुए। 2023 के मुक़ाबले इसमें 45% की उछाल देखी गई। UPI आज सब्जी के ठेलों से लेकर ऑटो स्टोर तक में इस्तेमाल में लाया जाता है।
UPI पेमेंट्स पर अब लगेगा GST?
मोदी सरकार की हर योजना को लेकर एक गिरोह विशेष में डर का माहौल बनाने की आदत घुस गई है। ठीक उसी पैटर्न का अनुसरण करते हुए अब ये भय फैलाया जा रहा है कि 2000 रुपए से अधिक के UPI लेनदेन पर अब केंद्र सरकार 18% GST वसूल करेगी। ऊपर से ‘ET Now’ ने एक लेख के जरिए इस अफवाह को और हवा दी, जिसका शीर्षक था – “₹2000 से अधिक के UPI लेनदेन पर GST? जानिए विशेषज्ञ क्या कहते हैं।” ये ख़बर शुक्रवार (18 अप्रैल, 2025) को प्रकाशित की गई।
इसके बाद भाजपा विरोधी गिरोह सोशल मीडिया पर सक्रिय हुआ और करदाताओं पर एक और बोझ डालने का आरोप लगाने लगा।
Beta Nirmala, I’m hearing rumors about an 18% GST on UPI transactions above ₹2,000. Please let me know beforehand—so I can take the blame! ? pic.twitter.com/OIhmwxtBVl
AAP से जुड़े कपिल नामक एक शख्स ने भी इस अफवाह को आगे बढ़ाया। कई पोस्ट्स में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अपमानजनक तस्वीरें शेयर की गईं। कपिल ने दावा किया कि जिनके पास व्हाइट मनी है, सिर्फ़ वही लोग UPI का इस्तेमाल करते हैं और अब सरकार उनपर भी टैक्स का बोझ डालने जा रही है।
ख़ुद को ‘क्रिप्टो एजुकेटर’ बताने वाले सुमित कपूर ने भी सायरन की इमोजी के साथ लिखा कि इस फ़ैसले से लोगों के रोज़ाना ख़र्च करने के तौर-तरीके, छोटे कारोबार और मध्यम वर्ग बुरी तरह प्रभावित होंगे। साथ ही उसने ‘डिजिटल इंडिया’ पर भी सवाल उठाया।
?NEW UPI GST RULE?
▪️Indian govt is reportedly considering imposing Goods & Services Tax on UPI transactions exceeding ₹2,000.
▪️The change will drastically impact daily spending, especially for small businesses, freelancers, and middle-class families.
आइए, अब जानते हैं कि सच्चाई क्या है। असल में ‘ET Now’ बिना किसी सरकारी स्रोत का हवाला दिए हुए ये ख़बर प्रकाशित कर दी जो अटकलों के अलावा और कुछ भी नहीं है। ख़बर में ही उसने ये भी लिख दिया कि ये एक काल्पनिक स्थिति हो सकती है, क्योंकि सरकार आजकल डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा दे रही है। इसने लिखा कि ऐसी सिर्फ़ चर्चा है। चर्चा कहाँ है, इसने नहीं बताया। लेनदेन पर GST की कोई चर्चा नहीं है टैक्स लगेगा भी तो सिर्फ सर्विस चार्ज पर – ट्रांजैक्शन पर नहीं।
2000 से ऊपर के पेमेंट्स पर GST: जानिए क्या है सच
ये भी जानने लायक बात है कि पेमेंट एग्रीगेटर्स 0.5% से लेकर 2% तक का चार्ज कैशलेश ट्रांजैक्शंस पर लेते हैं। इसको ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ नाम दिया जाता है। क्रेडिट कार्ड वगैरह पर इसे लिया जाता है, UPI पर ये फ़िलहाल लागू नहीं है। RuPay क्रेडिट कार्ड पर भी ऐसा कोई फी नहीं लगता। UPI सर्विस प्रोवाइडर आना ख़र्च निकाल सकें, इसीलिए UPI पर MDR लाने की चर्चा तो है लेकिन अभी बात आगे नहीं बढ़ी है। क्रेडिट कार्ड या वॉलेट से लिंक्ड प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPIs) के माध्यम किए गए पेमेंट्स पर 1.1% का सर्विस चार्ज लगता है, लेकिन ये ग्राहक नहीं बल्कि मर्चेंट देते हैं।
1% से भी कम UPI पेमेंट वॉलेट या क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किए जाते हैं, इसीलिए लगभग 99.9% पेमेंट्स पर कोई शुल्क नहीं वसूला जाता। ये स्पष्ट कर दिया गया है कि P2P (पीयर टू पीयर) या P2M (पीयर टू मर्चेंट) ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा। P2P का अर्थ हुआ 2 लोगों के बीच ट्रांजैक्शन, बिजनेस ट्रांजैक्शन इससे अलग है। 2000 रुपए से नीचे के क्रेडिट कार्ड या वॉलेट्स के माध्यम से होने वाले UPI पेमेंट्स पर MDR लगाने के लिए प्रस्ताव GST काउंसिल की बैठक में पिछले साल आया था, लेकिन इसे अबतक स्वीकार नहीं किया गया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर बांग्लादेश को लताड़ लगाई है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा को लेकर भारत पर टिप्पणी की थी। विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश को खुद का रिकॉर्ड ठीक करने की सलाह दी है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार (18 अप्रैल, 2025) को बांग्लादेश की टिप्पणी पर कहा, “हम पश्चिम बंगाल की घटनाओं के संबंध में बांग्लादेश की ओर से की गई टिप्पणियों को खारिज करते हैं। यह बांग्लादेश में होने वाले अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न पर भारत की चिंता के बराबर में एक मुद्दा खड़ा करने का छिपा हुआ फर्जी प्रयास है।”
उन्होंने आगे कहा, “वहाँ ऐसे कृत्यों के अपराधी खुलेआम घूमते रहते हैं। उलटी सीढ़ी टिप्पणियाँ करने और अपनी महानता दिखाने के बजाय बांग्लादेश को अपने देश मे अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।”
बांग्लादेश को भारत की यह कड़े शब्दों वाली टिप्पणी उसके मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव के बयान के बाद सामने आई है। यूनुस के प्रेस सलाहकार शफीकुल आलम ने गुरुवार (17 अप्रैल, 2025) को भारत के खिलाफ जहर उगला था।
शफीकुल आलम ने कहा, “हम मुर्शिदाबाद में साम्प्रदायिक हिंसा में बांग्लादेश को शामिल करने के किसी भी प्रयास का दृढ़ता से खंडन करते हैं… हम भारत और पश्चिम बंगाल सरकार से अल्पसंख्यक मुस्लिम आबादी की पूरी तरह से सुरक्षा के लिए सभी कदम उठाने की अपील करते हैं।”
शफीकुल आलम का बयान उन रिपोर्ट्स के बाद आया था जिनमें मुर्शिदाबाद हिंसा में बांग्लादेशी घुसपैठियों के शामिल होने की बात कही गई थी। बांग्लादेश ने भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर यह ज्ञान तब दिया है जब उसके यहाँ खुद ही हिन्दुओं समेत बाकी अल्पसंख्यकों पर लगातार हमले हुए हैं।
3 अप्रैल, 2025 को राज्यसभा में विदेश मंत्रालय द्वारा दिए गए एक उत्तर के अनुसार, 5 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से 23 मार्च, 2025 तक 2400 से अधिक हमले हिन्दुओं या बाकी अल्पसंख्यकों पर हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया है कि यह मसला उसने बांग्लादेश के साथ उठाया भी है।
इससे पहले भी बांग्लादेश भारत विरोधी बयान देता आया है। हालाँकि, इस बार भारत ने उसे तगड़ा जवाब दिया है।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा बनाए गए वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 की संवैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति को भी समय सीमा देते हुए निर्देश जारी किया था। अब उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने न्यायपालिका पर फिर से निशाना साधा है और कहा कि वह अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर विधायिका के मामले में हस्तक्षेप कर रही है।
उपराष्ट्रपति धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 142 लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ एक ‘परमाणु मिसाइल’ बन गया है, जो न्यायपालिका के पास 24 घंटे उपलब्ध होता है।। उपराष्ट्रपति का बयान ऐसे समय में आया है, जब संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित वक्फ अधिनियम के कुछ प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई और उसे रोकने की बात कही।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा, “हाल ही में एक निर्णय के माध्यम से राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है। हम कहाँ जा रहे हैं? देश में क्या हो रहा है? हमने लोकतंत्र के लिए इस दिन की कभी उम्मीद नहीं की थी। हमारे पास ऐसे न्यायाधीश हैं जो कानून बनाएँगे, कार्यकारी कार्य करेंगे, सुपर-संसद के रूप में कार्य करेंगे और उनकी कोई जवाबदेही नहीं होगी, क्योंकि देश का कानून उन पर लागू नहीं होता है।”
उपराष्ट्रपति ने कहा, “हम ऐसी स्थिति नहीं बना सकते, जहाँ आप (सुप्रीम कोर्ट) भारत के राष्ट्रपति को निर्देश दें। वह भी किस आधार पर? संविधान के तहत आपके पास एकमात्र अधिकार अनुच्छेद 145(3) के तहत संविधान की व्याख्या करना है।” उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 145(3) के अनुसार किसी महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दे पर कम-से-कम 5 न्यायाधीशों वाली पीठ द्वारा निर्णय लिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब पाँच न्यायाधीशों वाली पीठों का निर्णय निर्धारित किया गया था, तब सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या आठ थी। धनखड़ ने बिल के संबंधित मामले को लेकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति के खिलाफ निर्णय दो न्यायाधीशों वाली पीठ द्वारा दिया गया था। अब सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है।
Article 142 has become a nuclear missile against Democratic forces available to judiciary 24×7.
We cannot have a situation where you direct the President of India and on what basis?
The only right you have under the Constitution is to interpret the Constitution under Article… pic.twitter.com/ctmd1L2KUW
उन्होंने यहाँ तक कहा कि संविधान पीठ में न्यायाधीशों की न्यूनतम संख्या बढ़ाने के लिए अनुच्छेद 145(3) में संशोधन करने की आवश्यकता है। उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा के प्रशिक्षुओं के छठे बैच को संबोधित करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति को बिल पर तीन महीने में निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो संबंधित राज्यपाल द्वारा भेजा गया विधेयक कानून बन जाता है।
न्यायपालिका की वर्तमान हालात पर बात करते हुए उपराष्ट्रपति ने न्यायाधीश यशवंत वर्मा का भी जिक्र किया। ये वही जज हैं, जिनके घर पर इस साल होली के दिन नोटों से भरे बोरों में आग लग गई थी। मामले में भारी विवाद के बाद भी सुप्रीम कोर्ट उन्हें दिल्ली से इलाहाबाद हाई कोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया और मामले की जाँच के लिए आंतरिक कमिटी बना दी गई।
धनखड़ ने कहा, “14 और 15 मार्च की रात को नई दिल्ली में एक न्यायाधीश के निवास पर एक घटना घटी। सात दिनों तक किसी को इसके बारे में पता नहीं चला। हमें खुद से सवाल पूछने होंगे। इसमें हुई देरी को क्या समझा जा सकता है? क्या यह क्षमा योग्य है? क्या इससे कुछ बुनियादी सवाल नहीं उठते? किसी भी सामान्य स्थिति में और सामान्य परिस्थितियाँ कानून के शासन को परिभाषित करती हैं।”
अनुच्छेद 142, जिसे उपराष्ट्रपति ने परमाणु मिसाइल कहा
संविधान के अनुच्छेद 142 में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और डिक्री को देने का अधिकार और उसे लागू करने आदि से संबंधित से संबंधित है। अनुच्छेद 142 के उपबंध-1 सुप्रीम कोर्ट को ये अधिकार देता है कि उसके पास आए किसी भी मामले में वह न्याय के लिए डिक्री या आदेश पारित कर सकेगा। यह डिक्री या आदेश पूरे भारत में लागू होगा।
इसके उपबंध-2 में कहा गया है कि इस संंबंध में संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून के अधीन रहते हुए सुप्रीम कोर्ट पूरे भारत के किसी भी क्षेत्र के किसी व्यक्ति को हाजिर होने, दस्तावेज प्रस्तुत करने, अवमानना की जाँच करने या दंड देने का समस्त अधिकार उसके पास होगा। इस तरह अनुच्छेद 142 में स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट को संसद द्वारा पारित कानून के दायरे में ही काम करना है।
हालाँकि, बात यहीं खत्म नहीं होती। कॉलेजियम के तर्ज पर सुप्रीम कोर्ट ने इसकी भी काट निकाली है। पिछले कुछ वर्षों में अनुच्छेद 142 की व्याख्या और उसके प्रयोग के विभिन्न उदाहरण पेश किए गए। हाल ही में भारत के सुप्रीम कोर्ट के पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में निर्णय देकर एक कानूनी ढाँचा विकसित किया।
यह ढाँचा संविधान के अनुच्छेद 142 की व्याख्या और उसके प्रयोग से संबंधित था। इस निर्णय ‘एशियन रीसर्फेसिंग ऑफ रोड एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य बनाम सीबीआई के पिछले निर्णय से बिल्कुल उलट था। सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट बार के फैसले में एशियन रीसर्फेसिंग के निर्णय को पलट दिया था। इसमें अनुच्छेद 142 के तहत नए दिशा-निर्देश जारी करने के अलावा अंतरिम आदेशों से संबंधित पहलुओं को भी शामिल किया।
इसमें विचार किया गया कि अंतरिम आदेश को रद्द करने या संशोधित करने का हाई कोर्ट का अधिकार क्या है और क्या अंतरिम आदेश किसी विशेष समय की समाप्ति पर खुद ही समाप्त हो सकता है। एशियन रिसर्फेसिंग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसी मुद्दे पर विचार किया था। उस दौरान शीर्ष न्यायालय ने माना था कि जब तक अंतरिम आदेश का समय ना बढ़ाया न जाए, वह आदेश की तारीख से 6 महीने बाद स्वतः समाप्त हो जाता है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने उस फैसले को उलट दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एशियन रीसर्फेसिंग मामले में निर्धारित समय बीत जाने पर अंतरिम आदेशों की स्वतः समाप्ति की शर्त लागू रहने योग्य नहीं थी और इसलिए इसे खारिज कर दिया। इसके बाद अनुच्छेद 142 में दिए गए अधिकारों के तहत उसने नए दिशा-निर्देश जारी किए।
इसके तहत सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्या कोई न्यायालय अंतरिम आदेश पारित करते समय कोई समय सीमा तय कर सकता है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि अनुच्छेद 142 के तहत शक्ति का उपयोग प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को दबाने या वादियों के मूल अधिकारों को दबाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 142 के तहत अधिकार क्षेत्र का उपयोग विवेक से और केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए, ताकि विवादों का निष्पक्ष और न्यायपूर्ण समाधान निकाला जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया कि अनुच्छेद 142 द्वारा दी गई शक्तियों का उद्देश्यपूर्ण न्याय सुनिश्चित करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने एशियन रीसर्फेसिंग में पहले दिए गए निर्णय को खारिज करते हुए कहा कि अनुच्छेद 226(3) के तहत पारित स्थगन आदेश को रद्द करने के लिए अनिवार्य शर्त स्थगन आदेश हटाने के लिए आवेदन दाखिल करना और न्यायालय द्वारा न्यायिक विवेक का प्रयोग करना है। इस आवेदन पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय नहीं लिया जाता है तो स्थगन आदेश स्वतः समाप्त नहीं होता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्थगन आदेश तब तक प्रभावी रहता है, जब तक कि इसके रद्द करने के लिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए आवेदन का कारणों के साथ निपटारा नहीं हो जाता। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अदालतों को मामलों के निपटान के लिए कठोर समय-सीमा नहीं लगानी चाहिए, जब तक कि कोई असाधारण परिस्थिति न हो।
अपने इस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने जो नया गाइडलाइन तय किया उसके अनुसार, अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग न्यायालय द्वारा अपने समक्ष पक्षकारों के लिए पूर्ण न्याय करने के लिए किया जा सकता है, लेकिन ऐसा करने में न्यायालय अन्य अधिकार क्षेत्रों में अन्य वादियों के पक्ष में पारित वैध न्यायिक आदेशों को रद्द नहीं करेगा।
राष्ट्रपति को निर्देश देने के लिए उपराष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट पर क्यों भड़के?
हमने अपने पिछले आर्टिकल में बताया था कि क्या सुप्रीम कोर्ट भारत के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति को निर्देश सकते हैं या नहीं। इस आर्टिकल में हमने कई कानून पहलुओं पर विचार किया था। कई लोगों के मन में सवाल उठता होगा कि भारत में पदों की वरीयता क्रम क्या है। इससे भी साफ हो जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति को निर्देश दे सकता है या नहीं।
अगर वरीयता क्रम की बात की जाए तो राष्ट्रपति को देश का सर्वोच्च पद है। राष्ट्रपति को भारत का पहला नागरिक कहा जाता है। इतना ही नहीं, राष्ट्रपति और संसद को मिलाकर ही भारत बनता है और वह संघ के प्रशासन का प्रमुख होता है। इसी प्रशासन का एक अंग न्यायपालिका भी है। इस तरह देश का सर्वोच्च राष्ट्रपति का होता है।
भारत में राष्ट्रपति और राज्यपाल ही ऐसे दो पद हैं, जिनके खिलाफ अदालती कार्रवाई नहीं की जा सकती है। भारत के संविधान ने अनुच्छेद 361 के तहत इसका प्रावधान किया है। यह अनुच्छेद राष्ट्रपति और राज्यपालों के खिलाफ अदालती कार्यवाही से सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ना ही इन दोनों को किसी मामले में नोटिस जारी कर सकता है और ना ही निर्देश दे सकता है।
राष्ट्रपति के बाद देश में दूसरा सर्वोच्च पद उपराष्ट्रपति का होता है। इसके बाद तीसरे नंबर पर प्रधानमंत्री आते हैं। देश का चौथा सर्वोच्च पद राज्यपाल का होता है, जो उनके कार्य वाले राज्यों में होता है। इसके बाद वरीयता क्रम में पाँचवें स्थान पर पूर्व राष्ट्रपति आते हैं। इसके बाद भारत के उपप्रधानमंत्री का पद वरीयता क्रम में 5A स्थान पर आता है।
भारत में अधिकारियों का वरीयता क्रम (साभार: www.mha.gov.in)
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और लोकसभा स्पीकर का पद एक समान होता है। दोनों वरीयता क्रम में छठे नंबर पर आते हैं। इसके बाद सातवें नंबर पर केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री अपने राज्यों में होते हैं। योजना आयोग के उपाध्यक्ष, पूर्व प्रधानमंत्री, राज्यसभा और लोकसभा में विपक्ष के नेता भी सातवें क्रम पर ही आते हैं।
भारत रत्न से सम्मानित व्यक्ति का क्रम 7A होता है। आठवें क्रम में राजदूत, भारत द्वारा मान्यता प्राप्त राष्ट्रमंडल देशों के आयुक्त, अपने राज्य के बाहर मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल होते हैं। नौंवें क्रम पर सुप्रीम कोर्ट के आते हैं। इसके बाद 9A पर संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, मुख्य चुनाव आयुक्त और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) आते हैं।
वरीयता क्रम मेें 10वें स्थान पर राज्यसभा के उपसभापति, राज्यों के उपमुख्यमंत्री, लोकसभा के उपसभापति, योजना आयोग (वर्तमान में नीति आयोग) के सदस्य और केंद्र सरकार के राज्यमंत्री आते हैं। वहीं, 11वें स्थान पर भारत के अटॉर्नी जनरल, कैबिनेट सचिव और अपने-अपने केंद्रशासित प्रदेशों के भीतर लेफ्टिनेंट गवर्नर (उपराज्यपाल) तक शामिल हैं। वरीयता क्रम में 12वें स्थान पर पूर्ण जनरल या समकक्ष रैंक के पद पर कार्यरत चीफ ऑफ स्टाफ।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा फैलाई गई हिंसा में नया खुलासा हुआ है। हिंसा फैलाने वाले मुस्लिम कट्टरपंथियों को पहले से ही मालूम था कि कहाँ बम फेंकना है और कहाँ आग लगाना है क्योंकि हिंदुओं के घरों पर काली स्याही से निशान बना दिए गए थे।
इसका खुलासा NMF न्यूज की एक ग्राउंड रिपोर्ट से हुआ। एनएमएफ के पत्रकार पंकज प्रसून ने मुर्शिदाबाद हिंसा में टारगेट किए गए हिंदुओं के घरों के सामने से रिपोर्टिंग की जिसमें पत्रकार को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि हिंदुओं के घरों पर काली स्याही लगाई गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि हिंसा करने वाले इस्लामिक कट्टरपंथियों को पता था कि किस हिंदू घर पर बम फेंकना है और कहाँ आग लगाना है?
पत्रकार पंकज प्रसून ने हिंसा का शिकार हुए स्थानीय लोगों से भी बातचीत की। बातचीत के दौरान पता चला कि मुस्लिम भीड़ गलियों में घुसी और हिंदुओं के घरों पर काली स्याही देखकर उन्हें निशाना बनाया, आगजनी की और लूटपाट मचाई।
11 अप्रैल 2025 को मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में नए वक्फ संशोधन कानून के विरोध में मुसलमानों ने हिंसा की। खासतौर पर हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा, तोड़फोड़, आगजनी की घटनाएँ देखी गई थी। हिंसा की शुरुआत जुम्मे की नमाज के बाद मुर्शिदाबाद के सुती और समसेरगंज इलाकों से हुई थी।
मुर्शिदाबाद हिंसा में 11 अप्रैल 2025 के ही दिन इस्लामिक कट्टरपंथियों ने एक हिंदू पिता (गोविंद दास) और उनके पुत्र की भी हत्या कर दी थी। इसके अलावा मुसलमानों ने एक हिंदू दंपति की मिठाई की दुकान को तहस-नहस कर किया और सामान लूट लिया।
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हिंसा में फँसी एक एंबुलेंस को आग के हवाले कर दिया और ड्राइवर की बेरहमी से पिटाई की। हिंसा का शिकार हुआ एक हिंदू व्यक्ति ने बताया कि हमलावर बाहर से नहीं आए थे, वे स्थानीय मुसलमान थे।
मुर्शिदाबाद हिंसा में एक अन्य हिंदू पीड़ित ने एएनआई को बताया, “उन्होंने (इस्लामिक कट्टरपंथियों) वाहनों को नष्ट कर दिया, हमारा सामान लूट लिया और दुकानों में भी आग लगा दी।” पीड़ित ने आगे बताया, “मैं रात को सो नहीं पाया। हम जाग रहे थे और डरे हुए थे। जब यहाँ हिंसा हो रही थी, तब कोई पुलिस बल नहीं था।”
मुर्शिदाबाद हिंसा का शिकार हुआ एक हिंदू व्यापारी अमर भगत की पत्नी मंजू भगत ने आजतक के एक रिपोर्टर को बताया, ” भीड़ सामने के गेट से घुसने का प्रयास कर रही थी, लेकिन दरवाजा तोड़ नहीं पाई। इसके बाद मुस्लिम कट्टरपंथी पीछे के गेट से घुसने लगे। पीड़िता ने आगे बताया कि इनलोगों ने बाइक तोड़ दी, घर में मौजूद टेबुल-कुर्सी, गद्दा, सोफा वगैरह को तहस-नहस कर दिया और कीमती सामानों को लूट लिया।
पीड़ितों ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने उनके कॉल का भी कोई जवाब नहीं दिया जबकि हिंसा शमशेरगंज पुलिस स्टेशन से करीब 500 मीटर की दूरी पर हो रही थी। हिंसा के दौरान स्थिति इतनी खतरनाक हो गई थी कि हजारों हिंदुओं ने वहाँ से पलायन किया। ये घरों से भाग कर नावों के जरिए नदी पार किया और मालदा में शरण लेने के लिए मजबूर हो गए।
बॉलीवुड अभिनेत्री उर्वशी रौतेला कभी अपने सोशल मीडिया पर दिए गए परिचय तो कभी अपनी उपबल्धियों पर दिए गए अटपटे बयानों के कारण चर्चा में रहती हैं। इस बार भी उनके सुर्खियों में आने का कारण ऐसा ही है। ‘डाकू महाराज’ फिल्म की एक्ट्रेस ने दावा किया है कि उत्तराखंड में उनके नाम पर मंदिर बनाया गया है। उन्होंने ये दावा सिद्धार्थ कनन के यूट्यूब चैनल पर इंटरव्यू देने के दौरान किया।
वीडियो में 20 मिनट के बाद देख सकते हैं कि जब यूट्यूबर सिद्दार्थ कन्नन ने उर्वशी रौतेला से पूछा ‘बद्रीनाथ मंदिर के दर्शन करने जाओगे तो उसके बाजू में एक टेंपल है, उर्वशी।’ जब कनन ने पूछा कि मंदिर आपके नाम पर है, आपके लिए डेडीकेटेड है? तो जवाब में उर्वशी बोलीं- “हाँ वहाँ उर्वशी मंदिर है।”
जब कनन ने उनसे बार-बार पूछा कि क्या वो मंदिर उनको समर्पित है, तब भी वो हाँ कहती रहीं। आगे उन्होंने ये भी कहा कि वो चाहती हैं कि उनके नाम पर मंदिर साउथ में भी हो।
“I have a mandir on my name in the North, now I want a temple in the South for my fans.”
अब लोग उनकी इस बात को सुन ये पूछ रहे हैं कि क्या अभिनेत्री इस गलतफहमी में हैं कि वो खुद देवी हैं और लोग उनकी पूजा करने मंदिर जाते हैं। लोग उर्वशी के बयान की खूब खिल्ली उड़ा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि उर्वशी रौतेला अपना मानसिक संतुलन को खो चुकी हैं। लोग उन्हें पागल बोल रहे हैं। कहा जा रहा है कि ये महिला ठीक है या फिर इसे त्वरित कोई मेडिकल मदद चाहिए।
एक यूजर ने तो ये तक कहा कि ये औरत अपनी दुनिया में जीती है बस। इसे बाकी दुनिया से कोई लेना-देना नहीं है।
बता दें कि उर्वशी रौतेला ने बद्रीनाथ में उर्वशी मंदिर को लेकर कहा है कि वहाँ उनकी पूजा होती है। जबकि हकीकत तो यह है कि ये मंदिर अपसरा उर्वशी देवी को समर्पित है। लोग जब बद्रीनाथ में दर्शन करने आते हैं तो यहाँ भी दर्शन के लिए पहुँचते हैं। ये मंदिर, बद्रीनाथ मंदिर से 1.5 किलोमीटर दूर बामनी गाँव में पवित्र अलकनंदा नदी के तट पर बसा है।
अमेरिका में एक इस्लामी शहर बनाने की कर रहे मुस्लिमों के एक समूह को झटका लगा है। इस्लामी शहर को लेकर तैयार किए गए प्लान पर कई तरह की जाँच चालू हो गई है। अमेरिका में यह इस्लामी 400 एकड़ में बसाए जाने की योजना मुस्लिम बना रहे थे। इसके लिए जमीन भी खरीद ली गई थी। यहाँ सब कुछ इस्लामी कायदे कानून से किया जाना था। बड़ी संख्या में मुस्लिमों ने इस नए इस्लामी शहर में प्लॉट भी खरीद लिए थे। अब इस प्रोजेक्ट पर तलवार लटक रही है। अमेरिकी नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वह शरिया शहर को अनुमति नहीं देंगे।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला अमेरिका के टेक्सास राज्य से जुड़ा है। यहाँ के प्लानो शहर की एक मस्जिद की कमिटी ने यह इस्लामी शहर बनाने का इरादा बनाया था। इसका नाम ईस्ट प्लानो इस्लामिक सेंटर (EPIC) है। यह टेक्सास की बड़ी और अमीर मस्जिदों में से एक है। यह एक संगठन के रूप में भी रजिस्टर्ड है। इस नए प्रोजेक्ट का ऐलान 2024 में हुआ था।
यहाँ आने वाले मुस्लिमों ने टेक्सास में ही एक अलग इस्लामी शहर बसने के इरादे से 400 एकड़ जमीन खरीदी। यह जमीन इसी मस्जिद ने कुछ बैंकर आदि की मदद से खरीदी थी। यह जमीन टेक्सास के शहर जोसफिन से 40 मील की दूरी पर है। यहीं पर यह शहर बसाने की योजना बनाई गई थी।
EPIC सिटी की वेबसाइट के अनुसार, इस शहर की प्लानिंग इस्लाम को आगे रख कर की गई है। EPIC की योजना के अनुसार, इस इस्लामी शहर में 1000 घर बनाए जाने हैं। इसके अलावा इस इस्लामी शहर में कई घर वाली इमारतें भी बनती। यह इस्लाम को ध्यान में रख कर शरिया के अनुसार किया जाता।
इस इस्लामी शहर में मदरसे, स्कूल और एक कॉलेज तथा मस्जिद आदि बनाए जाने की भी योजना थी। इसके अलावा ईद की नमाज पढ़ने के लिए मैदान भी बनाए जाने थे। इस प्रोजेक्ट के बारे में डाली गई वीडियो में लिखा गया है कि अल्लाह इसे पूरी करने में मदद करे।
लाखों डॉलर में बिक रहे थे प्लॉट
इस इस्लामी शहर में सबसे छोटे प्लॉट की कीमत लगभग $2 लाख (लगभग ₹1.70 करोड़) रखी गई थी। इनकी कीमत बढ़ते-बढ़ते $5 लाख तक जाती थी। प्लॉट की कीमत उतनी ही अधिक रखी गई थी, जितना वह मस्जिद के नजदीक होता। मस्जिद के नजदीक वाले प्लॉट 15% तक प्रीमियम पर बेचे जाने थे।
अमेरिका भर के मुस्लिमों का इस पूरे प्रोजेक्ट में काफी रुचि थी। इसी के चलते इस इस्लामी शहर के प्लॉट हाथोहाथ बिक रहे थे। लगभग 450 मुस्लिमों ने इस शहर में अपने प्लॉट बुक भी करवा दिए थे। इसके लिए उन्होंने मोटा पैसा भी दे दिया था ताकि समय आने पर इस इस्लामी शहर में बसा सके।
अब कसा शिकंजा
यह इस्लामी शहर कुछ वर्षों के भीतर बस जाना था। इसके बाद यहाँ हजारों मुस्लिम इस्लामी तरीके से रह सकते। इस बीच इस इस्लामी शहर को लेकर लोग चिंतित हो गए। उन्होंने अमेरिका में एक पूरा इस्लामी शहर बसने और यहाँ दूसरे धर्म के लोगों को जगह ना दिए जाने को लेकर चिंताएँ व्यक्त की।
इसके बाद इसका विरोध शुरू हुआ। टेक्सास राज्य के गवर्नर ग्रेग एबट इस शहर के बसने के खिलाफ हैं। अमेरिका के कानूनों के अनुसार, किसी भी इलाके में दूसरे किसी धर्म या रंग के लोगों को बसने से रोका नहीं जा सकता। इस पर सजा का प्रावधान है।
इन सब चिंता के बीच गवर्नर एबट ने साफ़ कर दिया है कि वह टेक्सास में एक ‘शरिया शहर’ नहीं बसने देंगे। उन्होंने कहा कि ना तो टेक्सास में शरिया कानून चलेगा और ना ही शरिया शहर को ही अनुमति दी जाएगी। गवर्नर एबट ने सिर्फ इतना ही नहीं किया बल्कि इस मामले में जाँच के आदेश दिए हैं।
To be clear, Sharia law is not allowed in Texas.
Nor are Sharia cities.
Nor are “no go zones“ which this project seems to imply.
Bottom line. The project as proposed in the video is not allowed in Texas. https://t.co/5Sw5VdXD31
EPIC के इस्लामी शहर पर अब कई मामले में जाँच चल रही है। टेक्सास के अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन ने इस मामले में 4 अलग-अलग जाँच के आदेश दिए हैं। इस सब के बाद इस शहर के भविष्य पर संकट मंडराने लगा है। हालाँकि, अभी स्पष्ट नहीं है कि यह प्रोजेक्ट धरातल पर उतर पाएगा या नहीं। राष्ट्रपति ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद से इसके आसार और कम हो गए हैं।
दिल्ली के सीलमपुर में एक 17 वर्षीय हिन्दू लड़के की हत्या के बाद भय का माहौल है। चाकुओं से गोदे जाने के बाद नाबालिग को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हमलावरों की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं। नाराज़ पीड़ितों ने विरोध प्रदर्शन किया, सड़क भी जाम किया। पुलिस पर पक्षपात के आरोप लगे हैं। इलाक़े में बड़ी संख्या में जवानों को तैनात किया गया है। मृतक का नाम कुणाल है, जिन्होंने बताया कि बेटा दूध और समोसा लेने के लिए बाहर निकला था।
सीलमपुर में हिन्दू लड़के की हत्या, CM योगी से मदद की गुहार
साहिल और गुसरा नामक 2 व्यक्तियों पर हत्या के आरोप लगे हैं। मृतक के परिवार का कहना है कि पुलिस ने पैसे लेकर पहले इन दोनों को छोड़ दिया था। माँ ने बताया कि साथ में एक लड़की भी थी, पहले भी एक लड़की तमंचे के साथ पकड़ी गई थी लेकिन फिर उसे छोड़ दिया गया था। उन्होंने बताया कि कुणाल किसी से लड़ता नहीं था, उसे घेरकर मारा गया। स्थानीय लोगों ने यूपी मॉडल लागू करने की बात करते हुए कहा कि दोषियों को फाँसी दिया जाना चाहिए। सीलमपुर के लोगों ने विरोध में चौपाल लगाकर कहा कि आरोपितों के घरों पर बुलडोजर चले।
उन्होंने कहा कई अगर यही चलता रहा तो सीलमपुर अगला कश्मीर, बांग्लादेश या पश्चिम बंगाल बन जाएगा। उस इलाक़े में 3 ही हिन्दू परिवार बचे हैं अब। स्थानीय निवासियों ने बताया कि बहन-बेटियों को छेड़ा जाता है, मकान बिक रहे हैं, लोग पलायन कर रहे हैं और हिन्दुओं को निशाना बनाया जा रहा है। अबतक इस मामले में कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है। स्थानीय लोगों ने यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाते हुए पोस्टर लगाए हैं। लोगों का कहना है कि पिछले 6-7 वर्षों में आधा दर्जन हत्याएँ हो चुकी हैं।
‘रसूखदार’ आरोपितों पर हाथ डालने से बचती है पुलिस
स्थानीय लोगों की मानें तो आरोपितों के रसूखदार होने के कारण उन्हें पुलिस छोड़ देती है। पार्षदों-विधायकों से उनके राजनीतिक संबंध होते हैं, इसीलिए पुलिस हाथ नहीं डालती। लोगों ने ‘मकान बिकाऊ हैं’ के पोस्टर लगाए हैं। पीड़ित परिवार गिहारा समाज से आता है। नवंबर 2024 में भी समाज के कुछ लड़कों से सोहेल नामक युवक का झगड़ा हुआ था। कुणाल गाँधीनगर में एक कपड़े की दुकान पर काम करता था। वारदात से पहले वो अपनी दादी को अस्पताल छोड़ने गया था। गिहारा समाज के लोग इस घटना के पीड़ित परिवार का साथ देने पहुँचे हैं।
उधर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी पुलिस कमिश्नर से बातचीत करके घटना की जानकारी ली है। उन्होंने बताया कि आरोपितों में जिन-जिन के नाम आए हैं, उनकी धर-पकड़ होगी। उन्होंने कहा कि कुणाल के परिवार को न्याय मिलेगा।
कौन है सीलमपुर की ‘लेडी डॉन’ जिकरा, जिसका हत्याकांड में आ रहा नाम
इस हत्याकांड में ‘लेडी डॉन’ जिकरा का नाम भी आ रहा है। इसकी आधिकारिक पुष्टि तो नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों की मानें तो इसी जिकरा और उसके भाइयों ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया है। जिकरा आर्म्स एक्ट के मामले में जेल भी जा चुकी है। घटना से 15 दिन पूर्व ही वो जेल से बाहर आई थी। इलाक़े में एक लाला नामक बदमाश भी है, जिसकी जिकरा से दुश्मनी चलती है। लोगों का कहना है कि कुणाल से जिकरा ने लाला के बारे में पूछा, मना करने पर उसकी हत्या कर दी गई।
जिकरा के भाई का नाम साहिल है, वो भी इस हत्याकांड में शामिल था। रील बनाने की शौक़ीन जिकरा सीलमपुर की ही रहने वाली है। अपने साथ तमंचा लेकर चलती रही है। इंस्टाग्राम पर भी उसके 15,000 से अधिक फॉलोवर्स हैं। पटपड़गंज के विधायक रवींद्र नेगी भी मौके पर पहुँचे, जिन्होंने स्थानीय पार्षद पर ड्रग्स के धंधे का आरोप लगाया।