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पाकिस्तान लौटने की मियाद पूरी, 600+ वापस गए, जो नहीं गए उन्हें हो सकती है 3 साल की जेल-₹3 लाख जुर्माना भी: 800+ भारतीय स्वदेश लौटे





पहलगाम आतंकी हमले के बाद केन्द्र सरकार ने पाकिस्तानियों को भारत छोड़ने की जो मियाद दी थी वो पूरी हो गयी है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में पाकिस्तानी भारत नहीं छोड़ पाए हैं। भारत छोड़ने में विफल रहने वाले पाकिस्तानियों को 3 साल की जेल या 3 लाख रुपए का जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है।

रविवार (27 अप्रैल 2025) अटारी बॉर्डर से लगभग 627 लोग पाकिस्तान लौटे। इनमें 9 डिप्लोमैट और अधिकारी शामिल हैं। भारत ने 12 कटैगरी के अंतर्गत सार्क वीजा रखने वाले पाकिस्तानियों को रविवार तक भारत छोड़ने का आदेश दिया था। हालाँकि मेडिकल वीजा रखने वालों के लिए अंतिम तिथि 29 अप्रैल है।

जिन 12 कटैगरी के वीजा धारकों को रविवार तक भारत छोड़ना था, वे हैं – आगमन पर वीजा, व्यवसाय, फिल्म, यात्रा, तीर्थयात्रा, ग्रुप तीर्थयात्रा, पर्यटन, सम्मेलन, पर्वतारोहण, स्टूडेंट्स वीजा और मेडिकल वीजा।

महाराष्ट्र में 5 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी हैं जिनमें से करीब 1 हजार शॉर्ट टर्म वीजा पर हैं। इनलोगों को पाकिस्तान भेजा जा रहा है। बिहार सरकार ने 27 अप्रैल की डेडलाइन तक 19 पाकिस्तानियों को वापस भेजा।

तेलंगाना में 208 पाकिस्तानियों की उपस्थिति की जानकारी है जिनमें से 156 लॉन्ग टर्म वीजा और 13 शॉर्ट टर्म वीजा और 39 मेडिकल और व्यापार वीजा पर आए हुए हैं जिन्हें वापस भेजा गया है। केरल में 104 पाकिस्तानी के होने की जानकारी मिली है जिनमें से 99 लॉन्ग टर्म वीजा और बाकी टूरिस्ट और मेडिकल वीजा पर हैं।

राजस्थान की बात करें तो यहां सीमावर्ती क्षेत्रों में पाकिस्तानियों की संख्या काफी है। जैसलमेर में 6 हजार से अधिक पाकिस्तानी लॉन्ग टर्म वीजा पर हैं। कुल पाकिस्तानी नागरिक की बात करें तो ये आँकड़ा करीब 20 हजार है।

भारत ने पाकिस्तान से अपने लोगों को वापस बुलाया है। रविवार को 116 भारतीय जिनमें एक डिप्लोमैट शामिल हैं, वो भारत पहुंचे। 26 अप्रैल को 342 भारतीय जिनमें 13 डिप्लोमैट्स शामिल हैं, भारत की धरती पर कदम रखा। 25 अप्रैल को 287 भारतीय वापस लौटे जबकि 24 अप्रैल को 105 भारतीय पाकिस्तान से वापस आए थे यानी 27 अप्रैल तक कुल 849 भारतीय वापस स्वदेश लौट चुके हैं।

17 मदरसे सीज, 89 अवैध निर्माण समतल… नेपाल बॉर्डर पर चला योगी सरकार का बुलडोजर: ऑपइंडिया ने किया था ‘डेमोग्राफी जिहाद’ का खुलासा

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भारत-नेपाल सीमा पर अवैध रूप से बने ढाँचों पर कार्रवाई की है। यहाँ कब्जा कर बनाए गए 80 से अधिक ढाँचे गिरा दिए गए हैं। नेपाल सीमा में मदरसों पर भी कार्रवाई हुई है। योगी सरकार ने एक दर्जन से अधिक मदरसे सील कर दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कार्रवाई 25 अप्रैल, 2025 से 27 अप्रैल, 2025 के बीच की गई है। इसमें नेपाल से सीमा साझा करने वाले जिले बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और लखीमपुर खीरी में कार्रवाइयाँ की गई हैं। कई जगह अवैध रूप से बनाई गई मस्जिदों को चिन्हित भी किया गया है।

योगी सरकार ने श्रावस्ती जिले में बिना किसी अनुमति के चल रहे 17 मदरसे सील कर दिए हैं। यह मदरसे नेपाल से सटी जमुनहा और भिनगा तहसील में चल रहे थे। इनको चलाने वाले मुस्लिम कोई भी वैध अनुमति पूछे जाने पर नहीं दिखा पाए, इसके बाद प्रशासन ने इन पर ताला जड़ दिया।

वहीं बहराइच जिले में नेपाल सीमा के 10 किलोमीटर के इलाके में बनाए गए 89 अतिक्रमण हटाए गए हैं। इनमें से 63 पहले हटाए गए थे जबकि 26 को बाद में जमींदोज कर दिया गया। बहराइच में ऐसे और भी निर्माण चिन्हित किए जा रहे हैं, जिन पर आगे कार्रवाई हो सकती है।

इसके अलावा नेपाल से सीमा साझा करने वाले जिले सिद्धार्थनगर में भी प्रशासन ने 5 जगह मस्जिद-मदरसे का अवैध अतिक्रमण पाया है। उनको भी चिन्हित कर लिया गया है। महाराजगंज जिले में 19 अवैध कब्जे पाए गए हैं, जिनको खाली करने की कवायद चालू हो गई है।

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले की सीमा भी नेपाल से सटती है। यहाँ भी 67 अवैध कब्जे हटाए जाने की कार्रवाई चल रही है। प्रशासन के डर के चलते कई लोग अपने कब्जे खुद हटा रहे हैं। लखीमपुर खीरी जिले में भी अवैध नमाज स्थल पर कार्रवाई की गई है।

लखीमपुर खीरी की पलिया तहसील में एक जगह पर अवैध रूप से नमाज पढ़वाई जा रही थी, यहाँ मस्जिद बनाने की तैयारी थी। इसे प्रशासन ने खाली करवा दिया है। लखीमपुर खीरी में और भी ऐसी जगहें पहचानी जा रही हैं, जहाँ अवैध कब्जा किया गया है।

गौरतलब है कि ऑपइंडिया ने उत्तर प्रदेश की नेपाल से सटने वाली सीमा पर ग्राउंड रिपोर्ट की थी और बताया था कि यहाँ कैसे इस्लाम अपने पैर फैला रहा और डेमोग्राफी भी तेजी से बदल रही है। इस ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया था कि मात्र बलरामपुर जिले में ही नेपाल सीमा पर 108 मदरसे और 150 मस्जिदें बन गई थीं।

यह भी सामने आया था कि नेपाल सीमा के इलाकों में बाहर से भी पैसा आया है। कई जगह पर मंदिरों की जमीन कब्जे की भी बात सामने आई थी। इसके बाद यूपी सरकार ने सीमाई इलाकों में एक्शन भी लिया था। यह एक्शन भी उसी कड़ी का हिस्सा है।

‘अपने घर बुलाकर कपड़े उतारने को कहा’ एक्ट्रेस ने साजिद खान के लिए कहा- इससे घटिया आदमी नहीं देखा: फिल्म प्रोड्यूसर पर पहले भी कई अभिनेत्रियों ने लगाए थे यौन उत्पीड़न के केस

टीवी सीरियल ‘इश्कबाज’ और ‘मिले जब हम तुम’ में नजर आईं एक्ट्रेस नवीना बोले ने बॉलीवुड डायरेक्टर साजिद खान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कास्टिंग काउच को लेकर एक हैरान करने वाला खुलासा किया है। नवीना ने साजिद को ‘बहुत बुरा आदमी’ बताया और कहा कि साजिद ने उन्हें अपने घर बुलाकर कपड़े उतारने के लिए कहा था। यह खुलासा नवीना ने सुभोजीत घोष के यूट्यूब चैनल पर दिए एक इंटरव्यू में किया। उन्होंने यह भी बताया कि साजिद ने इंडस्ट्री में कई दूसरी महिलाओं के साथ भी बुरा बर्ताव किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवीना ने कहा, “एक ऐसा भयानक आदमी था, जिससे मैं जिंदगी में कभी नहीं मिलना चाहती। उसका नाम साजिद खान है। उसने महिलाओं की बेइज्जती करने की सारी हदें पार कर दीं।” उन्होंने बताया कि यह वाकया 2004-2006 के बीच का है, जब वे ग्लैड्रैग्स में हिस्सा ले रही थीं। उस वक्त साजिद फिल्म ‘हे बेबी’ पर काम कर रहे थे। नवीना ने कहा, “जब साजिद ने मुझे बुलाया, मैं बहुत खुश थी। लेकिन उनके घर पहुँचने पर उन्होंने कहा, ‘तुम कपड़े उतारकर लॉन्जरी में क्यों नहीं बैठ जातीं? मुझे देखना है कि तुम कितनी सहज हो।'”

नवीना ने आगे बताया कि साजिद ने उनसे कहा, “तुमने स्टेज पर बिकिनी पहनी थी, तो इसमें क्या दिक्कत है? तुम यहाँ आराम से बैठ सकती हो।” नवीना ने जवाब दिया, “मुझे घर जाना है। अगर आपको मुझे बिकिनी में देखना है, तो फिल्म में पहनूँगी, लेकिन अभी मैं कपड़े नहीं उतार सकती।” किसी तरह वे वहाँ से निकलने में कामयाब रहीं। एक्ट्रेस नवीना बोले ने बताया कि इसके बाद साजिद ने उन्हें कम से कम 50 बार फोन किया और पूछा कि वे क्यों नहीं आ रही हैं और कहाँ हैं।

नवीना ने यह भी खुलासा किया कि एक साल बाद, जब वे मिसेज इंडिया में हिस्सा ले रही थीं, साजिद ने फिर उन्हें फोन कर किसी रोल के लिए बुलाया। नवीना ने कहा, “वो शायद इतनी सारी लड़कियों के पीछे पड़ता था कि उसे याद ही नहीं था कि एक साल पहले उसने मेरे साथ ऐसा बर्ताव किया था।”

बता दें कि साजिद खान पर पहले भी कई महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। साल 2018 में भारत के #MeToo आंदोलन के दौरान कई अभिनेत्रियों और मॉडल्स ने साजिद पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इनमें शर्लिन चोपड़ा, रेचल व्हाइट और एक पत्रकार शामिल थीं। हालाँकि बाद में साजिद को इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन (IFTDA) से क्लीन चिट मिल गई थी। इस नए खुलासे ने एक बार फिर साजिद खान को विवादों में ला दिया है।

दुश्मन देश की भाषा बोले कर्नाटक के CM सिद्धारमैया, बोले- युद्ध की जरूरत नहीं: भाजपा ने कहा- पड़ोसी की कठपुतली हैं कॉन्ग्रेस नेता, मिले निशान-ए-पाकिस्तान पुरस्कार

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान तनाव पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का बयान सुर्खियों में है। हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें कर्नाटक के दो लोग भी शामिल थे। पत्रकारों ने जब सिद्धारमैया से पूछा कि भारत को पाकिस्तान के खिलाफ कितना सख्त रुख अपनाना चाहिए, तो उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के साथ जंग की कोई जरूरत नहीं है। हम जंग के हक में नहीं हैं। हमें सख्त कदम उठाने चाहिए और अपनी सुरक्षा को और मजबूत करना चाहिए।”

सिद्धारमैया के बयान का वीडियो पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। पाकिस्तानी मीडिया इसे दिखाकर दावा कर रहा है कि भारत में ही सरकार के खिलाफ आवाजें उठ रही हैं।

इस बयान पर बीजेपी ने सिद्धारमैया पर तीखा हमला बोला है। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा, “सिद्धारमैया पाकिस्तान की कठपुतली की तरह बोल रहे हैं। ऐसे संवेदनशील वक्त में, जब सीमा पर जंग का खतरा है, उनका बयान शर्मनाक है।” अशोक ने तंज कसते हुए सिद्धारमैया को ‘पाकिस्तान रत्न‘ कहा और ‘X’ पर लिखा, “बधाई हो! अगर आप पाकिस्तान गए, तो शाही स्वागत होगा। शायद पाकिस्तान आपको निशान-ए-पाकिस्तान पुरस्कार दे दे।”

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ‘X’ पर लिखा, “कॉन्ग्रेस पाकिस्तान को बचाने में लगी है। सिद्धारमैया मुस्लिम वोटों के लिए ऐसा बोल रहे हैं, जबकि पाकिस्तानी आतंकी हिंदुओं की हत्या कर रहे हैं।” उन्होंने एक पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल की क्लिप भी शेयर की, जिसमें सिद्धारमैया का बयान दिखाया गया था।

इस मामले में खुद को चारों तरफ से घिरता देख सिद्धारमैया ने सफाई दी। उन्होंने ‘X’ पर लिखा, “मैंने कहा कि जंग आखिरी रास्ता है, पहला नहीं। केंद्र ने भी माना कि पहलगाम हमला हमारी खुफिया और सुरक्षा चूक की वजह से हुआ। पहले इसे ठीक करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि केंद्र ने सिंधु जल संधि रद्द करने जैसे कदम उठाए हैं, जिनका वे स्वागत करते हैं। सिद्धारमैया ने यह भी कहा, “पाकिस्तान आर्थिक रूप से टूट चुका है। उसे कुछ खोने का डर नहीं। भारत को सोच-समझकर कदम उठाने चाहिए। दुनिया भारत के साथ है। हमें इसका फायदा उठाकर पाकिस्तान को सबक सिखाना चाहिए।”

सिद्धारमैया ने देशवासियों से एकजुट होने की अपील की और कहा कि कुछ लोग देश में युद्धोन्माद फैलाकर माहौल खराब कर रहे हैं। केंद्र को ऐसे लोगों पर भी कार्रवाई करनी चाहिए।

जिस पाकिस्तान के लोगों के जख्मों पर भारत लगाता मरहम, वही पीठ में घोंपते रहे खंजर: भारत ने पहली बार मेडिकल वीजा भी किया रद्द, कहा- 29 अप्रैल तक लौट जाओ

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को इस्लामी आतंकवादियों ने खौफनाक हमला किया। उन्होंने हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया, 26 लोगों की जान ली और कई को घायल कर दिया। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंट फ्रंट (TRF) ने ली। पाकिस्तान के समर्थन वाला यह हमला उसकी भारत के प्रति दुश्मनी को फिर से उजागर करता है। इसके बाद भारत सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं।

भारत ने सभी पाकिस्तानी नागरिकों को 27 अप्रैल तक देश छोड़ने का आदेश दिया है। हालाँकि, दीर्घकालिक वीजा (लॉन्ग टर्म वीजा-LTV) वाले पाकिस्तानी हिंदुओं को इससे छूट दी गई है। मेडिकल वीजा पर आए पाकिस्तानी नागरिकों को भी 29 अप्रैल तक वापस जाने को कहा गया है। भारत ने सालों तक पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश के प्रति उदारता दिखाई, लेकिन अब साफ कर दिया है कि विश्वासघात का जवाब दया नहीं होगा।

भारत की निर्णायक प्रतिक्रिया- सामान समेटो और निकलो

पाकिस्तान बार-बार भारत की पीठ में छुरा घोंपता रहा है। अब भारत ने सहनशीलता छोड़ दी है। विदेश मंत्रालय ने मेडिकल वीजा धारकों को 29 अप्रैल तक वापस जाने का आदेश दिया है। किसी भी तरह के वीजा विस्तार की अनुमति नहीं होगी। मौजूदा वीजा भी रद्द किए जा रहे हैं। यह आदेश गंभीर बीमारियों का इलाज करा रहे मरीजों पर भी लागू है। यह दिखाता है कि पाकिस्तान ने अपने दोगलेपन से भारत के सब्र की कितनी परीक्षा ली।

ये निर्देश सख्ती से लागू किए गए हैं ताकि कोई शक न रहे। भारत ने साफ कर दिया है कि आतंक फैलाने वाले देश के नागरिकों का स्वागत नहीं किया जा सकता, भले ही वे इलाज के लिए आए हों।

पाकिस्तानियों के लिए खुला रहा भारत का दिल

दशकों से भारत ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए अपने दरवाजे खुले रखे, खासकर उन लोगों के लिए जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। जिनका इलाज रुकना नहीं चाहिए था, उनके लिए वीजा की प्रक्रिया को तेज किया गया। हार्ट सर्जरी, कैंसर का इलाज, अंग प्रत्यारोपण जैसे मामलों में हजारों पाकिस्तानियों को भारत में प्रवेश मिला।

भारत ने दोनों देशों के बीच तनाव के बावजूद वीजा नियमों में ढील दी। कई बार दस्तावेजों की दिक्कतों को नजरअंदाज किया, जो पाकिस्तानियों के लिए आम बात थी। भारत ने उनके शरीर को ठीक किया, कई बार मुफ्त इलाज दिया, लेकिन दूसरी तरफ पाकिस्तान अपनी आतंकी फैक्ट्रियों से भारत का खून बहाता रहा। भारत ने बार-बार करुणा दिखाई, लेकिन विश्वासघात की भी एक सीमा होती है।

अब नहीं सहेगा हिंदुस्तान


पहलगाम हमले से बहुत पहले भारत ने पाकिस्तानी नागरिकों, खासकर मेडिकल वीजा के लिए साफ और व्यवस्थित नियम बनाए थे। मेडिकल वीजा के लिए आवेदन डिप्लोमेटिक चैनल से करना पड़ता था। इलाज के लिए आने वालों को सिर्फ तीन महीने का वीजा मिलता था। अगर राज्य सरकार या FRRO सिफारिश करता, तो चिकित्सा दस्तावेजों के आधार पर वीजा बढ़ाया जाता था। मरीज के साथ सिर्फ एक तीमारदार को अनुमति थी।

सुरक्षा मंजूरी लेना अनिवार्य था। फिर भी, भारत ने ज्यादातर मामलों में मानवीय आधार पर प्रक्रिया को तेज किया। आवेदकों को अपनी पूरी जानकारी, इलाज की जरूरत का सबूत और बैकग्राउंड जांच की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। इसके बाद ही वीजा मिलता था।

केवल कुछ चुनिंदा मान्यता प्राप्त अस्पतालों को ही पाकिस्तानी मरीजों का इलाज करने की इजाजत थी। यह सुनिश्चित करता था कि इलाज सरकार की निगरानी में हो। तीमारदारों को भी अलग से सुरक्षा मंजूरी लेनी पड़ती थी।

इतने सख्त नियमों के बावजूद, भारत ने गंभीर मामलों में लचीलापन दिखाया। वीजा विस्तार, फॉलो-अप सर्जरी या अतिरिक्त परामर्श के लिए विशेष अनुमति दी जाती थी। मेडिकल वीजा धारकों को वापस भेजने का फैसला अचानक नहीं लिया गया। यह सावधानीपूर्वक बनाई गई नीति का हिस्सा है, जो पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों के समर्थन से कमजोर पड़ गई।

हजारों पाकिस्तानियों को भारत में जीवन रक्षक इलाज मिला। कुछ मामले खास तौर पर चर्चा में रहे।

पाकिस्तान किशोरी आयशा राशन का हृदय प्रत्यारोपण

अप्रैल 2024 में, पाकिस्तान की 19 वर्षीय आयशा राशन की चेन्नई के एमजीएम हेल्थ केयर अस्पताल में जीवन रक्षक हृदय प्रत्यारोपण सर्जरी हुई। इस सर्जरी में 35 लाख रुपए तक का खर्च अनुमानित था, पर इसे निःशुल्क तौर पर किया गया। ऐश्वर्यम ट्रस्ट की ओर से आर्थिक सहायता दी गई।

पाकिस्तानी लड़की अफशीन गुल की रीढ़ की सर्जरी

2022 में पाकिस्तान के सिंध से आई 13 वर्षीय अफशीन गुल को करेक्टिव स्पाइन सर्जरी के लिए भारत के दिल्ली में अपोलो अस्पताल में भर्ती किया गया। बचपन में गिरने के कारण वह गर्दन में गंभीर विकृति से जूझ रही थी। डॉ राजगोपालन कृष्णन ने इस जटिल सर्जरी को निःशुल्क किया। सर्जरी के बाद अफशीन जीवन में पहली बार खुद चलने, बोलने और खाना खा सकने में सक्षम हुई।

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज मेडिकल वीजा के लिए हस्तक्षेप

2017 में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने तीन साल की पाकिस्तान बच्ची की ओपन हार्ट सर्जरी और एक पाकिस्तानी व्यक्ति के लिवर ट्रांसप्लांट के लिए सामने से तत्काल आधार पर वीजा की अनुमति दी थी।

पाकिस्तानी व्यक्ति जफर अहमद लाली के लिए जटिल हृदय सर्जरी

2015 में 57 वर्षीय जफर अहमद लाली को भारत में जटिल हृदय सर्जरी के लिए मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में लाया गया था। एक खराब वाल्व और कई ब्लॉकेज होने की जटिलता के बावजूद डॉक्टरों ने भारत में यह सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की और अहमद को नई जिंदगी दी।

पाकिस्तानी बच्ची नूर फातिमा की हृदय सर्जरी

2003 में पाकिस्तानी बच्ची नूर फातिमा को भारत में निःशुल्क हृदय सर्जरी की गई और उसे नया जीवन दिया गया। इस तरह के इलाज भारत पाकिस्तान के रिश्तों में मजबूती लाने और सद्भावना के इरादे से किए गए थे।

पाकिस्तान की छुरा घोंपने की न बदलने वाली आदत

भारत ने कई बार पाकिस्तान के सामने दोस्ती का हाथ बढ़ाया, लेकिन जवाब में सिर्फ विश्वासघात ही मिला। भले ही भारतीय अस्पतालों ने असंख्य पाकिस्तानियों की जान बचाई हो, पर पाक की सेना और आतंकी संगठनों ने सीमा पर मौत ही भेजी। लाहौर वार्ता के ठीक बाद कारगिल युद्ध से लेकर 26/11 के मुंबई हमले और अब पहलगाम आतंकी हमलों समेत तमाम आतंकी साजिशों के जरिए पाकिस्तानी आतंकियों ने शांति प्रयासों को भंग किया है।

पाकिस्तान की ओर से यह संदेश दशकों से ही बगैर बदले चल रहा है – यह दोस्ताना रिश्ते नहीं जंग चाहता है। कितनी भी सद्भावना, वीजा, जीवन रक्षक सर्जरी हो जाए लेकिन ये सभी दशकों से भरी नफरत को मिटा नहीं पाएंगे।

बस अब काफी हो गया


हर देश के लिए एक समय आता है जब उसे संवेदनशीलता छोड़कर आत्मसम्मान चुनना पड़ता है। पाकिस्तानी मेडिकल वीजा धारकों को वापस भेजने का फैसला क्रूर नहीं है। यह भारत के अस्तित्व की बात है। बार-बार दया का बदला निर्दोष लोगों की मौत से नहीं लिया जा सकता। भारत ने आखिरकार सख्ती दिखाने का फैसला किया है। अब राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं होगा।

पाकिस्तानी जनता को भी समझना चाहिए कि सहानुभूति की एक सीमा होती है। हिंसा को बढ़ावा देने वाले देश के साथ उदारता नहीं चल सकती।

भारत की सद्भावना को कभी अहमियत नहीं दी गई। आतंकी मुल्क को यह मुफ्त में दी गई। खासकर तब, जब उनके नेता जंग की हर कोशिश करते रहे। हमारा भरोसा टूट चुका है और इसके जुड़ने की उम्मीद हर पल कम हो रही है। पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजने का आदेश सिर्फ प्रशासनिक कदम नहीं है। यह एक प्रतीक है, जो पाकिस्तान को बताता है कि भारत की उदारता को कमजोरी न समझा जाए। जब तक पाकिस्तान अपने आतंकी नेटवर्क को खत्म नहीं करता, उसे न मदद मिलेगी, न सहानुभूति, और न ही खुला दरवाजा।

मूल रूप से ये समाचार अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित की गई है। मूल रिपोर्ट को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।

जहाँ लिद्दर किनारे रचा गया ‘जय सोमनाथ’, शिव ने नंदी बैल को छोड़ा: पहलगाम के कण-कण में है शिवत्व, आज जहाँ 80% मुस्लिम कभी वहीं अर्धांगिनी संग विचरते थे पशुपति

पहलगाम – ये नाम सुनते ही ख़ौफ़ का एक मंज़र सामने आ जाता है, मंगलवार (22 अप्रैल, 2025) को जो हुआ वो याद करके रक्त में उबाल उठने लगता है। अनंतनाग जिले में स्थित इसी क्षेत्र की बैसरन घाटी में आतंकियों ने उस दिन जो ख़ूनी खेल खेला, हर हिन्दू उसे व्यक्तिगत क्षति मानकर चल रहा है। कारण – हिन्दुओं को निशाना बनाया गया, पैंट खोलवाकर देखा गया कि खतना हुआ है या नहीं। जो कलमा नहीं पढ़ पाए, उन्हें मार डाला गया। जिनकी आईडी कार्ड में मुस्लिम नाम नहीं था, उन्हें मार डाला गया।

एक-एक कर 28 लाशें गिरा दी गईं। महिलाओं को छोड़ दिया गया, उन्हें कहा गया कि जाओ मोदी को बता देना। पहलगाम के कई स्थानीय लोग वो घोड़े पर पर्यटकों को घुमाने वाले भी इस साज़िश में शामिल मिले, कइयों की जाँच चल रही है। इस घटना के बारे में सुनकर आपकी राय ऐसी ही बनेगी कि पहलगाम कोई इस्लामी इलाक़ा है, तो आप ग़लत हैं। आज भले ही पहलगाम में 81% मुस्लिम हों और हिन्दुओं की जनसंख्या मात्र 17% पर सीमित होकर रह गई हो, पहलगाम के कण-कण में शिवत्व का वास है। आइए, समझाते हैं कैसे।

पहलगाम का ऐतिहासिक महत्व, हिन्दू धर्म से जुड़ा है इतिहास

अनंतनाग जिले में स्थित पहलगाम ही वो तहसील है, जहाँ बाबा बर्फानी विराजते हैं, हर वर्ष अमरनाथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। लिद्दर नदी के किनारे स्थित पहलगाम, अनंतनाग के जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर की दूसरी पर स्थित है, समुद्र-तल से 7200 फ़ीट ऊपर। यही कारण है कि गर्मियों में लंबे समय से ये एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल रहा है, ख़ासकर के जोड़ों के लिए। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता उन्हें लुभाती है। वहीं विदेशी पर्यटक भी यहाँ आते रहे हैं। बैसरन के अलावा ‘बेताब’ (1983) फिल्म के नाम पर लोकप्रिय ‘बेताब घाटी’ भी यहाँ आकर्षण का केंद्र रही है।

‘मिशन कश्मीर’ (2000), ‘जब तक है जान’ (2012), ‘हैदर’ (2014) और ‘बजरंगी भाईजान’ (2015) जैसी बड़ी फिल्मों की शूटिंग यहाँ पर हो चुकी है। पहलगाम के इतिहास की बात करें तो यहाँ पाषाणकालीन संस्कृति के ही प्रमाण मिलते हैं। अमरनाथ यात्रा का पारंपरिक रूट भी पहलगाम होकर ही जाता है, यात्री यहीं पहला पड़ाव डालते हैं। पहलगाम तहसील मुख्यालय से अमरनाथ धाम की दूरी 42 किलोमीटर है। शेषनाग और पंचतरणी – इन दोनों स्थलों पर यात्री रात्रि-पड़ाव डालते हैं।

इन नामों से ही आपको पता चल रहा होगा कि इस क्षेत्र का इतिहास कैसा रहा है। शेषनाग नामक स्थान पर मान्यता है कि यहाँ स्वयं शेषनाग विराजते हैं। रात्रि विश्राम करने वाले यात्रियों को लिद्दर नदी की कल-कल बहती धारा शांति देती है और वहाँ का जलवायु व ठंडी हवाएँ श्रद्धालुओं को शीतलता प्रदान करती है। श्रद्धालु लिद्दर नदी में स्नान भी करते हैं। रास्ते में अमरनाथ धाम जाने के लिए पिस्सू घाटी को पार करना पड़ता है। ये भी जानने वाली बात है कि कारगिल युद्धक्षेत्र से अमरनाथ धाम की दूरी 80 किलोमीटर ही है।

अमरनाथ गुफा का इतिहास अत्यंत प्राचीन है, 12वीं सदी के महाकवि कल्हण रचित इतिहास-ग्रन्थ ‘राजतरंगिणी’ में भी इसका वर्णन मिलता है। अमरनाथ धाम का महत्व ये है कि यहीं पर भगवान शिव ने अमरता का सूत्र माँ पार्वती को दिया था। कहते हैं कि कोई और ये रहस्य न सुन पाए, इसीलिए उन्होंने इतनी दूर इस ऊँचे स्थल को चुना। उन्होंने पहलगाम में नंदी बैल को, चंदनबाड़ी में चन्द्रमा को, शेषनाग झील के किनारे सर्पों को और महागुणस पर्वत पर अपने बेटे गणेश को छोड़ा। 19वीं सदी में कश्मीर के राजा गुलाब सिंह ने कई तीर्थस्थलों का विकास करवाया, जिसमें अमरनाथ धाम भी शामिल है।

छठी शताब्दी में मिहिरकुल नामक हूण शासक ने पहलगाम में मिहिरेश्वर मंदिर की स्थापना कराई थी, जिसे आज मामलेश्वर के रूप में भी जाना जाता है। सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करवाने वाले स्वतंत्रता सेनानी कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी ने युवावस्था के दौरान पहलगाम की घाटी में लिद्दर नदी के किनारे बैठकर ही ‘जय सोमनाथ’ नामक उपन्यास की रचना की, जिसमें सोमनाथ के विभाग और ध्वंस का वर्णन किया गया। महमूद गजनी के हमले के बारे में लिखते हुए उन्होंने हिन्दुओं की वेदना को उकेरा।

जम्मू कश्मीर का इतिहास: सनातन में हैं जड़ें, पुराना विभाग वापस लाने की ज़रूरत

कहीं भी जब कश्मीर का नाम आता है तो आपने क्या पढ़ा है? कहीं आपने पढ़ा होगा कि जहाँगीर ने इसे ‘धरती का स्वर्ग’ कहा, तो कहीं आपने पढ़ा होगा कि मुगलों को ये ख़ास प्रिय था। जिन महर्षि कश्यप के नाम पर कश्मीर का नाम पड़ा, कितनी बार कश्मीर के साथ अपने उनका नाम पढ़ा है? कितनी बार आपने कवि कल्हण और उनकी कृति ‘राजतरंगिणी’ के बारे में सुना है? कल्हण ने कश्मीर को माता कहा, उन्होंने तभी भविष्यवाणी कर दी थी कि अगर कश्मीर असुरक्षित हो गया तो सबकुछ नष्ट हो जाएगा।

उन्होंने कश्मीर के राजाओं को शिव का अंश माना। कितनी बार आपने पढ़ा है कि कश्मीर माँ शारदा की भूमि है? कितनी बार आपको बताया गया कि ऐतिहासिक ग्रंथों में इसे ‘शारदा क्षेत्र’ कहा गया है। ‘नीलमत पुराण’ में कश्मीर को ‘कश्मीरा’ कहा गया है, इस क्षेत्र को साक्षात् देवी पार्वती का रूप बताया गया है – कितने बच्चों ने किताबों में पढ़ा ये? अगर महाभारत में अर्जुन के दिग्विजय का वर्णन पढ़ा दिया जाए तो कश्मीर का उस समय का भूगोल पता चल जाएगा। मुगलों ने ये बोला, मुगलों ने वो बोला – बाकी का इतिहास कहाँ गया? डेमोग्राफी के साथ गायब?

जम्मू कश्मीर स्थित शारदापीठ आज पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर है। जब शंकराचार्य यहाँ आए थे तो उन्हें यहाँ के पंडितों को शास्त्रार्थ के जरिए हराना पड़ा था, तभी उनके लिए मंदिर के दरवाजे खुले थे। हिन्दू धर्म में शास्त्रार्थ की परंपरा रही है, हथियारों के जरिए अपनी बात मनवाने की नहीं। कश्मीर का इतिहास शैव इतिहास है, हिन्दू धर्म का इतिहास है। श्रीनगर से पहलगाम जाते समय रास्ते में अवंतीपुरा पड़ता है, वहाँ के मंदिर भी काफी प्राचीन व लोकप्रिय हैं।

मान्यता ये भी है कि पहले पहलगाम का नाम ‘बैलगाम’ था, क्योंकि शिव ने अपने बैल को यहाँ छोड़ा था। इस बार भी अमरनाथ यात्रा 27 जून से शुरू होने वाली है, इस आतंकी हमले को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करके रखी जाएगी। जब भी पहलगाम का नाम आए तो ये ज़रूर ध्यान में रखें कि ये क्षेत्र शिवत्व को अपने भीतर समेटे हुए है, इसका कण-कण शिव-शिव बोलता है। पहलगाम कहिए या बैलगाम, अगर ये क्षेत्र पाकिस्तान में होता तो शायद इसका भी कुछ उर्दू नाम रख दिया जाता।

दिल्ली में रह रहे हैं 5000 पाकिस्तानी, IB ने तैयार की लिस्ट: 18 साल पहले क्रिकेट मैच देखने कानपुर आए 28 लोग भी गायब, पहलगाम अटैक के बाद तलाश तेज

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के सभी शॉर्ट टर्म वीजा रद्द कर दिए हैं। इस फैसले के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) ने देशभर में पाकिस्तानी नागरिकों की तलाश शुरू कर दी है। इस बीच, कानपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ साल 2007 में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट सीरीज देखने आए 32 पाकिस्तानी नागरिकों में से 28 पिछले 18 साल से लापता हैं। हैरानी की बात यह है कि कानपुर पुलिस और एलआईयू के पास इनका कोई रिकॉर्ड तक नहीं है।

बता दें कि 2007 में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट सीरीज के दौरान कानपुर में ग्रीनपार्क स्टेडियम में मैच हुआ था। इस दौरान कई पाकिस्तानी प्रशंसक भारत आए थे। इनमें से 32 लोग अपने देश वापस नहीं लौटे। ये सभी इक्जम्पटेड फॉर पुलिस रिपोर्ट (ईपीआर) वीजा पर थे, जिसके तहत उन्हें किसी भी जिले में जाने पर पुलिस को सूचना देने की जरूरत नहीं थी। इसी का फायदा उठाकर ये लोग अचानक गायब हो गए। पुलिस ने तलाश शुरू की, लेकिन सिर्फ चार लोगों का पता चला, जिन्हें पाकिस्तान वापस भेज दिया गया। बाकी 28 का आज तक कोई सुराग नहीं मिला। एलआईयू के एडीसीपी राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि ईपीआर वीजा के चलते लापता लोगों की जानकारी जुटाना मुश्किल है।

आईबी ने दिल्ली पुलिस को सौंपी 5000 पाकिस्तानियों की लिस्ट

दिल्ली में भी स्थिति गंभीर है। आईबी ने दिल्ली पुलिस को करीब 5000 पाकिस्तानी नागरिकों की सूची सौंपी है, जिन्हें देश छोड़ने को कहा गया है। फॉरेन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (एफआरआरओ) ने यह सूची दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच को दी है, जो अब जिलों में सत्यापन कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सेंट्रल और नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में सबसे ज्यादा पाकिस्तानी नागरिक रह रहे हैं। मजनू का टीला में करीब 900 और सिग्नेचर ब्रिज के पास 600-700 लोग हैं। दिल्ली पुलिस को दो सूचियाँ मिली हैं, एक में 3000 और दूसरी में 2000 नाम हैं, जिनमें कुछ नाम दोहराए गए हैं। इनका सत्यापन जारी है, क्योंकि कई लोग पहले ही देश छोड़ चुके हैं।

विदेश मंत्रालय ने 27 अप्रैल, 2025 से सभी पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए हैं, सिवाय लॉन्ग टर्म वीजा (एलटीवी), डिप्लोमैटिक और ऑफिशियल वीजा के। मेडिकल वीजा भी 29 अप्रैल तक ही वैध रहेंगे। हालाँकि, हिंदू पाकिस्तानी नागरिकों के एलटीवी को छूट दी गई है। कानपुर में 50 पाकिस्तानी नागरिक एलटीवी पर रह रहे हैं, जिनमें 42 मुस्लिम और 8 हिंदू परिवार शामिल हैं। ये लोग 60 और 90 के दशक में आए थे और यहीं शादी कर बस गए हैं। पुलिस इन पर नजर रख रही है।

पहलगाम हमले के बाद भारत ने कई कड़े कदम उठाए हैं, जिनमें से वीजा छूट योजना और सिंधु जल संधि को निलंबित करना शामिल है। अब खुफिया एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन लापता पाकिस्तानी नागरिकों को ढूँढना है, जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। सुरक्षा एजेंसियाँ इस बात से चिंतित हैं कि ये लोग देश के किसी भी हिस्से में हो सकते हैं। दिल्ली और कानपुर में चल रही तलाश के साथ ही अन्य राज्यों में भी जाँच तेज कर दी गई है।

PoK में बाढ़ का अलर्ट, झेलम में बढ़ा जलस्तर: पाकिस्तान लगा रहा ‘जलयुद्ध’ का आरोप, जानिए क्या है मामला

पहलगाम में हुए इस्लामी आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। भारत ने इसके बाद सिंधु जल समझौता निलंबित कर दिया है। इसके बाद से पाकिस्तान पर सूखे का खतरा मंडराया है। सूखे के उलट पाकिस्तानी अब भारत पर झेलम नदी में बाढ़ लाने का आरोप लगा रहे हैं।

शनिवार (26 अप्रैल, 2025) को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में झेलम नदी के जलस्तर में अचानक तेज वृद्धि देखी गई है। इसके बाद यहाँ के सबसे शहर मुजफ्फराबाद में इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भारत ने पाकिस्तान के अधिकारियों को बिना किसी पूर्व चेतावनी के पानी छोड़ दिया है।

चकोठी सीमा से लेकर मुजफ्फराबाद शहर तक स्थानीय लोगों ने नदी के तेजी से बढ़ते जलस्तर को देखा। इससे उनमें डर का माहौल बन गया है। मुजफ्फराबाद में जलस्तर बढ़ने के चलते सायरन बजाए जा रहे हैं और मस्जिदों से चेतावनी दी जा रही है।

यहाँ तक कि नदी के किनारे बसे हटियन बाला, घारी दुपट्टा, मझोई में अफरा-तफरी मच गई और यहाँ रहने वालों को ऊँची जगहों पर भागना पड़ा। घारी दुपट्टा के एक निवासी ने बताया, “हमें इसका बिलकुल भी अंदाजा नहीं था। उसने बताया कि मस्जिदों के लाउडस्पीकर से भागने का ऐलान किया गया।

पाकिस्तान का दावा है कि यह पानी अचानक नहीं बढ़ा है बल्कि भारत ने जानबूझ कर यह हरकत की है। पाकिस्तान का दावा है कि पहलगाम में हुए आंतकी हमले के जवाब में भारत अब पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है और इसे पानी रणनीति में शामिल कर रहा है।

पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषक जावेद सिद्दीकी ने “सिंधु जल समझौताको स्थगित करने की भारत की धमकी फर्जी नहीं थी। आज पानी छोड़ा जाना एक जोरदार और स्पष्ट मैसेज था।” झेलम के जलस्जतर में बढ़ोतरी की मुजफ्फराबाद प्रशासन ने भी पुष्टि की है। PoK के कुछ हिस्सों में आधिकारिक तौर पर आपातकाल की घोषणा की गई है।

रिपोर्ट बताती हैं कि पानी का अचानक बहाव भारत के अनंतनाग में चकोठी से चालू हुआ। इसको लेकर तमाम वीडियो भी सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं। इनमें तमाम पाकिस्तानी जलस्तर बढ़ने की बात कर रहे हैं और भारत को दोष दे रहे हैं।

झेलम के जलस्तर में यह बढ़ोतरी अगर सही में भारत का कदम है तो यह सिंधु जल समझौते के ताबूत में अंतिम कील साबित हो सकती है। भारत ने इस समझौते को 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद ‘निलंबित’ कर दिया था और कहा था कि पाकिस्तान जब तक आतंक पर कार्रवाई नहीं करेगा तब तक वह इस पर अमल नहीं करेगा।

इस हमले में 27 लोगों की मौत हो गई थी। इस्लामी आतंकियों ने इस हमले में धर्म पूछ-पूछ कर लोगों को गोलियाँ मारी थी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों पर कैबिनेट समिति की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें इस समझौते को निलंबित करने का निर्णय लिया गया था।

जोधपुर में शौकत अली की दुकान के सामने भगवा झंडे का अपमान, सड़क पर उतरे लोग: पश्चिम बंगाल से आकर राजस्थान में कट्टरता का धंधा, हिंदुओं ने की कार्रवाई की माँग

राजस्थान के जोधपुर शहर में आने वाले घोड़ा चौक इलाके में शनिवार (26 अप्रैल 2025) की रात एक भगवा झंडे को लेकर बड़ा विवाद हो गया। ये इलाका शहर का मशहूर ज्वेलरी और बुलियन ट्रेडिंग हब है, जहाँ संकरी गलियों में घरों पर भगवा झंडे लगे थे। सुबह एक झंडा नीचे गिर गया और दुकान कर्मचारी की स्कूटी पर जा पड़ा। कर्मचारी ने दुकान खोलने के बाद उस झंडे को हटाने की कोशिश की, लेकिन ये हरकत सामने लगे सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गई। थोड़ी ही देर में वीडियो वायरल हो गया, जिसके बाद मामला गरमा गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों से जुड़े लोग मौके पर जमा हो गए और कर्मचारी पर भगवा झंडे का अपमान करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि ये हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला कदम है। देखते ही देखते भीड़ बढ़ने लगी और प्रदर्शन शुरू हो गया।

प्रदर्शनकारी दुकान मालिक शौकत अली के खिलाफ भी कार्रवाई की माँग करने लगे। उनका आरोप था कि शौकत अली पड़ोसी देश से आए लोगों को पनाह देता है और उसकी सोच कट्टर है। शौकत अली घटना के बाद से फरार बताया जा रहा है।

हंगामा बढ़ता देख भारी पुलिस बल मौके पर पहुँचा। जोधपुर के डीसीपी आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि सुबह 11:30 बजे सादर बाजार के एसएचओ से सूचना मिली थी। पुलिस ने कर्मचारी को हिरासत में ले लिया, जिसकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। कर्मचारी और दुकान मालिक दोनों पश्चिम बंगाल के बताए जा रहे हैं। भीड़ ने बाजार बंद करने की माँग की, जिसके बाद बाजार कुछ देर के लिए बंद कर दिया गया। करीब 300-400 लोग मौके पर जमा थे। बाद में प्रदर्शनकारी सोजती गेट पुलिस चौकी के सामने इकट्ठा हुए और सख्त कार्रवाई की माँग की।

जोधपुर ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन सोनी ने भी शौकत अली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दुकान मालिक की कट्टर सोच के बारे में पहले से शिकायतें थीं। पुलिस ने भीड़ को समझाने की कोशिश की और कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस चौकी में बातचीत की और एक एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने कहा कि कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। शाम तक हालात काबू में आ गए और बाजार फिर से खोल दिया गया। हालाँकि, इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

सिर्फ रेप-ब्लैकमेल नहीं, हिंदू लड़कियों को सिगरेट से भी जलाता था भोपाल का ‘मुस्लिम गैंग’: पीड़िताओं को बुर्का पहनाए-रोजे रखवाए, फैजान के फोन में मिले Videos

मध्य प्रदेश के भोपाल में हिंदू लड़कियों को फँसाने के सुनियोजित पैटर्न का अब खुलासा हो चुका है। पकड़े गए आरोपितों ने स्वीकार किया है कि वो गरीब हिंदू लड़कियों को फँसाते थे, उनका बलात्कार करते थे, पीड़िताओं की वीडियो बनाते थे, उन्हें ब्लैकमेल करते थे और दूसरों से उनका रेप करवाते थे।

अब पुलिस इनसे आगे पूछताछ कर रही है। अभी तक शहर के पाँच अलग-अलग थानों में मुस्लिम गैंग के कम से कम 12 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। पाँच थानों के नाम बागसेवनिया, अशोक गार्डन, जहाँगीराबाद, बैरागढ़ और श्यामा हिल्स हैं।

बागसेवनिया, अशोक गार्डन, जहाँगीराबाद के मामलों में जहाँ मुख्य रूप से फरहान कान, साहिल, अली, अबरार और शमशुद्दीन का नाम सामने आया है। वहीं बैरागढ़ और श्यामा हिल्स के केस में शाहरुख, जुनैद, जोया और फैजान के नामों का पता चला है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फैजान इस पूरे कांड में मुख्य आरोपित है। उसके फोन से कई लड़कियों की अश्लील वीडियो मिली है। एक वीडियो में तो दिख रहा है कि वो एक साथ तीन लड़कियों का रेप कर रहा था। उन्हें बेरहमी से पीट रहा था और उनके शरीर को सिगरेट से दाग रहा था।

इससे पहले फरहान को लेकर सामने आया था कि उसने पीड़िता को कॉलेज में रहते हुए अपने जाल में फँसाया था। बाद में उसका रेप करके उसकी वीडियो बनाकर और लड़कियों को भी फँसाया था। जब पीड़िता ने इन हरकतों का विरोध किया तो उसे मीट खिला दिया गया। उसे धमकाया गया कि वो अपनी और सहेलियों को भी फरहान और उसके दोस्तों से मिलवाए।

फरहान का ही दोस्त साहिल खान था। अशोक गार्डन में डांस सिखाने वाले साहिल को लेकर जानकारी सामने आई है कि वो अपनी एकेडमी में गरीब हिंदू लड़कियों को लाता था। उन्हें फिर बड़े-बड़े सपने दिखाकर लॉन्ज ले जाता था और बाद में उनका बलात्कार करके वीडियो बनाता था।

फरहान के ग्रुप के सदस्यों ने एक पीड़िता की नाबालिग बहन को फाँसा था। उसके साथ अली ने होटल में गलत काम किया था और बाद में वीडियो फरहान के साथ साझा की थी। फरहान ने भी वीडियो के दम पर ब्लैकमेल करके दोबारा लड़की के साथ उसका रेप किया था।

इन तीनों की इस घटिया हरकत में मदद करने वालों का नाम शमशुद्दीन, अबरार और नबील हैं। शम्सुद्दीन केवल लड़कियों को 500-500 रुपए के लालच लड़कियों लाने-छोड़ने का काम नहीं करता था बल्कि उन्हें गाँजा पिलाता था। इसी तरह अबरार अपना कमरा इन्हें देता था ताकि वो रेप कर सकें और नबील लड़कियों को बदनाम करने में शामिल था।

अब मामला बैरागढ़ और श्यामलहिल्स का। मुख्य आरोपित शाहरुख, अयान और अरबाज हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ये तीनों ही गरीब परिवार के लड़के हैं लेकिन जब हिंदू लड़कियों को फँसाना होता था तो इनके पास महंगी बाइकें आ जाती थीं और ये लड़कियों को बड़े-बड़े होटल में ले जाते थे।

इसके बाद वहाँ ये लड़कियों से संबंध बनाते थे और उनका वीडियो रिकॉर्ड करके धमकाते थे। पुलिस इन केसों का पैटर्न देखने के बाद ये जाँच रही है कि आरोपितों के पास आखिर इन सब चीजों के लिए रुपया आ कहाँ से रहा था? क्या इस कांड के पीछे कोई बाहरी हाथ था या हिंदू घृणा में ये लोग लड़कियों को फँसाते थे?

मालूम हो कि भोपाल में लव जिहाद का ये पैटर्न बिलकुल ‘द केरल स्टोरी’ की कहानी से जोड़कर भी देखा जा रहा है। इस मामले में भी सामने आया है कि मुस्लिम लड़की, हिंदू लड़कियों की मुलाकात मुस्लिम लड़कों से कराती थी और फिर रेप करने में उन्हें जगह देती थी। जोया को पुलिस ने इसी आरोप में गिरफ्तार किया है। उसने ही अपने पड़ोस की लड़की को शाहरुख से मिलवाया था। जब शाहरुख ने उसका रेप कर दिया तो अयान के साथ भी पीड़िता को संबंध बनाने को कहे गए थे।

इस केस में कुछ पीड़िताओं ने ये भी खुलासा किया है कि ये गैंग उनका ब्रेनवॉश करती थी। उन्हें बुर्का पहनने को, रोजा रखने को मजबूर करती थी और निकाह व धर्मांतरण का दबाव बनाती थी। इतना ही नहीं गाँजा पिलाकर रेप किया जाता था, चलती कार में बलात्कार होता था, पोर्न देखने को मजबूर किया जाता था, बात न सुनने पर गले पर छुरी रखकर दुष्कर्म होते थे। पुलिस अब आरोपितों को पकड़कर बिहार से बंगाल तक दबिश दे रही है। मामले की जाँच के लिए एसआईटी भी गठित है। वहीं मुख्यमंत्री यादव ने स्कूल, कॉलेज की छात्राओं के हुए घिनौने काम पर चिंता जताते हुए इस मामले में सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं।