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पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा फिर पड़ा उल्टा: बालाकोट स्ट्राइक की बरसी पर अभिनंदन के 2 मिनट के वीडियो में 16 कट

पाकिस्तानी सेना के इंटर-सर्विस पब्लिक रिलेशंस यूनिट ने विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान (Abhinandan Varthaman) का एक और प्रोपेगेंडा वाला वीडियो जारी किया है। अभिनंदन भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के वही पायलट हैं, जिन्होंने दो साल पहले 27 फरवरी को भारतीय सीमा में घुसे पाकिस्तानी विमानों को खदेड़ दिया था। इस दौरान वह पाकिस्तानी सीमा में पहुँच गए थे, जिसके दो दिन बाद उन्हें वहाँ से रिहा किया गया। अब जो वीडियो जारी हुआ है, उसे लेकर ये पुष्टि नहीं हो पाई है कि वह कब का है।

महज दो मिनट के इस वीडियो (Abhinandan Varthaman Video) में कम से कम 16 एडिट्स हैं। इस वीडियो में अभिनंदन कश्मीर में शांति लाने और भारत-पाकिस्तान में कोई अंतर ना होने की बात करते दिख रहे हैं। इसके साथ ही वह वीडियो में पाकिस्तानी सेना की खातिरदारी की तारीफ कर रहे हैं। लेकिन वीडियो में इतने ज्यादा कट हैं कि इसकी सत्यता पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि पाकिस्तान वीडियो के जरिए अपनी अच्छी छवि पेश करने की कोशिश करना चाहता है।

एडिटेड वीडियो में अभिनंदन कह रहे हैं, “ऊपर से नीचे आते वक्त पैराशूट से मैंने दो मुल्क देखे। दोनों में मुझे फर्क पता नहीं चला, दोनों एक जैसे खूबसूरत हैं। जब मैं नीचे गिरा तो मुझे पता नहीं चला कि मैं पाकिस्तान में हूँ या अपने देश हिंदुस्तान में, दोनों मुल्क एक जैसे ही लगे। मुझे चोट लगी थी काफी गहरी और मैं हिल नहीं पा रहा था। मैंने कोशिश की यह जानने की कि मैं कहाँ हूँ। जब मुझे पता चला कि मैं अपने मुल्क में नहीं हूँ तो मैंने भागने की कोशिश की। मेरे पीछे लोग भागे थे और वो काफी उत्तेजित लग रहे थे और वे चाहते थे कि मुझे पकड़ लें। तभी पाकिस्तानी आर्मी के दो जवान आए, उन्होंने मुझे पकड़ा और बचाया। एक कप्तान, उन्होंने इन लोगों से बचाया यूनिट तक ले गए जहाँ फर्स्ट एड दिया गया हॉस्पिटल ले जाया गया। वहाँ जाँच हुई और एड दिया गया, तब से आपकी खातिरदारी के साथ मैं यहाँ पर हूँ। क्या हो रहा है कश्मीरी के साथ वह न आपको पता है न मुझे पता है। हमें शांति से सोचना चाहिए।”

कायराना करतूतों से ध्यान भटकाने की कोशिश

बेशक वीडियो जारी कर पाकिस्तान अपनी छवि अच्छी बनाने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन उसकी हरकतों से उसी की पोल खुल गई है। उसने ऐसा कर अपने सैनिकों की उन कायराना करतूतों से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश की है, जिसके तहत वो पीओके (POK) और बलूचिस्तान (Balochistan) के लोगों पर अत्याचार करते हैं। इस वीडियो की एडिटिंग इतनी खराब है कि पाकिस्तान ने इसे जारी कर अपने खुद के पैर पर ही कुल्हाड़ी मारने वाला काम किया है।

सीआरपीएफ के काफिले पर किया था हमला

साल 2019 में 14 फरवरी वाले दिन जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले (Pulwama District) में स्थित लेथपोरा में जम्मू कश्मीर नेशनल हाईवे पर सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। बाद में जब इस घटना की जाँच की गई तो पता चला कि इसके पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) का हाथ है। इसके फिर 12 दिन बाद 26 फरवरी को आईएएफ के लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बालाकोट में घुस कर जैश के ठिकानों पर बम बरसाए थे।

पाकिस्तान को मिली थी नाकामी

फिर अगले दिन पाकिस्तान ने इसका बदला लेने की कोशिश की लेकिन भारत के लड़ाकू विमानों ने उसकी ये कोशिश भी नाकाम कर दी। भारत के इस एक्शन की दुनिया के कई देशों ने सराहना की थी। क्योंकि इसका मकसद केवल और केवल आतंकवादियों का सफाया करना था। 

पहले तो पाकिस्तान ने किसी तरह की एयर स्ट्राइक (Balakot Airstrike) से इनकार कर दिया था लेकिन बाद में उसने भी एयर स्ट्राइक की बात मान ली थी। इसके साथ ही उसने बालाकोट तक मीडिया को नहीं जाने दिया था। मीडिया को वहाँ तक पहुँचने में दो महीने तक का वक्त लग गया था, जिसके चलते वहाँ हुए कुल नुकसान का ठीक से पता नहीं चल सका था।

‘अब भी लगता है डर, नहीं हुई नुकसान की भरपाई’: दिल्ली दंगों में जिस पार्किंग में जली थी दर्जनों गाड़ियाँ, 1 साल बाद हम फिर पहुँचे वहीं

दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के दौरान फरवरी 2020 के अंतिम हफ्ते में उत्तर-पूर्वी इलाके के जिन हिस्सों को निशाना बनाया गया था, उनमें शिव विहार भी शामिल था। वहाँ के राजधानी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल के किस्से तो आपने भी सुने होंगे, जिसके मालिक फैसल फारूक का इन दंगों में बड़ा रोल सामने आया था और उसकी गिरफ़्तारी भी हुई थी, लेकिन उसे दिसंबर 2020 में जमानत भी मिल गई। यही स्कूल दंगों के समय इस्लामी भीड़ का अड्डा बना था।

इसी स्कूल की छत पर एक बड़ा सा गुलेल पाया गया था, जहाँ से पास में स्थित शिव मंदिर को भी निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। वहाँ से भारी मात्रा में पत्थर, पेट्रोल बम और गुलेल बरामद हुए थे। बगल में स्थित DRP पब्लिक स्कूल को जला दिया गया था। हालाँकि, अब एक साल बाद दोनों ही स्कूलों में जनवरी से कक्षाएँ चल रही हैं, लेकिन आसपास के लोगों का कहना है कि जुमें के दिन अभी भी तनाव का माहौल पैदा हो जाता है।

आसपास का यातायात चालू है और माहौल शांतिपूर्ण है, लेकिन लोगों के मन से अभी भी वो मंजर ठीक से निकला नहीं है। पहले उन्हीं सड़कों पर मलबे और ईंट-पत्थर पड़े हुए थे। इसी स्कूल के बगल में एक पार्किंग एरिया स्थित था, जहाँ बड़ी संख्या में पार्क गाड़ियों में पहले जमकर लूटपाट की गई फिर तोड़फोड़ के साथ वहाँ भी आग लगाया गया था। भारी नुकसान हुआ था। अब इस हादसे के एक वर्ष बाद इस पार्किंग एरिया के मालिक गजेंद्र परिहार ने ऑपइंडिया से बातचीत की।

इस दौरान उन्होंने कहा कि अब तक उन्हें 50,000 रुपए के अतिरिक्त कोई भी मुआवजा नहीं मिला है और उन्हें उम्मीद भी नहीं है कि उन्हें हुए नुकसान के एवज में उन्हें कुछ मिलेगा। उलटा वो खुद के ही रुपए लगा कर अपने कारोबार को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। गजेंद्र ने बताया कि जिनकी गाड़ियाँ टूटी थीं, वो भी अपनी गाड़ियाँ ले गए और उन्हें भी कोई मुआवजा नहीं मिला। गजेंद्र का कुल 13 लाख रुपए का नुकसान हुआ था।

1 वर्ष पूर्व दिल्ली दंगों के समय कुछ ऐसा था इस पार्किंग एरिया का हाल

उन्होंने बताया कि अब वो पार्किंग भी नहीं चलाते हैं, क्योंकि फिर से दंगों का डर बना हुआ है। वो छोटे-छोटे कार्यक्रमों के आयोजन के लिए जगह देते हैं। बकौल परिहार, उन्होंने इसे शादी-विवाह की जगह के रूप में विकसित किया है, ताकि नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सके और ज़िन्दगी पटरी पर लौट आए। उन्होंने जुमें के दिन तनावपूर्ण माहौल होने की पुष्टि करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस के दिन लाल किले में हुई हिंसा के समय भी उन्हें डर लगा था कि कहीं भीड़ यहाँ न आ जाए।

हालाँकि, उन्हें अभी तक कोई धमकी नहीं मिली है लेकिन उनके पार्किंग एरिया को जलाने वालों को वो अब भी पहचानने से इंकार करते हैं। कारण पूछने पर उन्होंने दावा किया कि भीड़ में दंगाइयों की संख्या 2000-2500 थी और अधिकतर ने मास्क लगाए हुए थे। उन्होंने बताया कि लोग तलवार-डंडों सहित कई हथियारों से लैस थे। फरवरी 24, 2021 को शाम 5 बजे के करीब ज़बरदस्त हिंसा शुरू हुई थी और 1 दिन पहले गाड़ियों में लूटपाट हुई थी।

पार्किंग एरिया रही संपत्ति के मालिक गजेंद्र परिहार

उन्होंने उस मंजर को याद करते हुए कहा कि मुख्य रूप से हुई हिंसा के 1 दिन पहले ही गाड़ियों की शीशे तोड़ डाली गई थीं और उनमें से कीमती सामान लूट लिए गए थे। उन्होंने बताया कि राजधानी स्कूल से गुलेल से पत्थर और हाथों से भी पेट्रोल बम फेंका गया था। गजेंद्र ने बताया कि FIR में उन्होंने डर से कई चीजें नहीं बताई हैं और किसी को निशाना नहीं बनाया है, क्योंकि उन्हें इसी क्षेत्र में रहना है।

इसीलिए, उन्होंने FIR में खुद की संपत्ति को हुए नुकसान की बात को ही प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने कहा कि इन सबके लिए कौन जिम्मेदार है, ये वो कह नहीं सकते। उन्होंने बताया कि वो खुद अपनी जान बचा कर यहाँ से भाग निकले थे और 3-4 दिन बाद वहाँ से लौटे। उन्हें खुद को हुए नुकसान और उस मंजर से उबरने के लिए पूरा एक साल लग गया। जनवरी 2021 से उन्होंने अपने काम को फिर से शुरू किया है।

उक्त पार्किंग एरिया के केयरटेकर ने भी उस समय के अपने अनुभव साझा किए और कहा कि फरवरी 23, 2020 की रात को 1 बजे से ही पत्थरबाजी शुरू हो गई थी और वो तब यहीं बैठे हुए थे। उन्होंने बताया कि बोतलों में भर-भर के पेट्रोल बम राजधानी स्कूल और सामने की छत से आ रहे थे, ताकि गाड़ियों में आग लग जाए। साथ ही बच्चों के खेलने वाले कंचे भी गुलेल से मारे जा रहे थे। उन्होंने कहा कि 250-300 लोग भीतर घुस गए थे।

उन्होंने बताया, “कोई बैटरी लूट कर ले गया तो कोई डेक उठा कर ले गया। फरवरी 25 को इसे आग के हवाले कर दिया गया। मुझे भी खासी चोट लगी थी। मुझे अब तक इसका कोई मुआवजा नहीं मिला है। उस समय मेरा बेटा भी मेरे साथ था, जिसकी जान बचाना मेरी प्राथमिकता थी। किसी तरह हम लोग बच कर भागे। मैंने अपने 12 साल के बच्चे को किसी तरह बाहर कूदा दिया। उसे बचाने के लिए ही मुझे भीतर आना पड़ा।”

उक्त पार्किंग एरिया के केयरटेकर ने साझा किए अपने अनुभव

केयरटेकर ने बताया कि उस घटना को याद करके उन्हें अब भी काफी दुःख और दर्द होता है, इसीलिए वो लोग किसी मीडिया वाले के सामने उस सम्बन्ध में बात भी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि माहौल अब ठीक है लेकिन वक़्त का कोई भरोसा नहीं। उन्होंने कहा कि जब तक पुलिस की मौजूदगी है, तब तक कोई दिक्कत नहीं होगी और पहले लोगों का जोर इस पर है कि वो अपने नुकसान की भरपाई करें।

1 साल पहले ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान स्थानीय लोगों ने बताया था कि उक्त पार्किंग एरिया को उन्हीं मजहबी दंगाइयों ने तबाह किया, जो राजधानी स्कूल को ‘अटैक बेस’ बनाए हुए थे। राजधानी स्कूल में तोड़फोड़ वाली ख़बर मीडिया में ख़ूब चलीं लेकिन किसी ने यह नहीं बताया कि ये तोड़फोड़ एकदम दिखावटी था। वो स्कूल, जिसके दरवाजे पर ही लिखा हुआ था- “नो सीएए, नो एनपीआर“।

एक खबर के अनुसार तो आसपास ही स्थित दो-तीन पार्किंग क्षेत्रों में कुल 170 गाड़ियों को आग के हवाले किया गया था। कई गाड़ियाँ कबाड़ हो गई थीं। पार्किंग की छत पर पत्थर और बम पड़े हुए मिले थे। कारों को तो छोड़िए, वहाँ स्थित हिन्दुओं के घरों और दुकानों तक को जला डाला गया था। पुलिस अधिकारी तक घायल हुए थे। घरों में दुबके लोगों के पास भी इसका धुआँ पहुँचा था। मंदिर के बाद वाली गली में लोग अपनी बहू-बेटियों की इज्जत बचाने के लिए अड़े रहे थे।

नीरव मोदी के विशेषज्ञ गवाह काट्जू की लंदन की कोर्ट में फजीहत, जज ने ‘फर्जी दलीलों’ को बताया निजी अजेंडा

पीएनबी घोटाले में भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को उचित बताते हुए लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट (Westminster Magistrate Court, UK) के जिला जज सैम्यूल गूजी ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काट्जू की दलीलों को घोर असंवेदनशील बताया। काट्जू ने नीरव मोदी की पैरवी में भाजपा सरकार की तुलना हिटलर से करते हुए कहा था कि सरकार की नजर में नीरव मोदी यहूदी है और वह उसे सभी आर्थिक समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराएगी।

ब्रिटेन की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि नीरव मोदी को अपने खिलाफ मामले में भारतीय अदालतों के समक्ष जवाब देना है और ऐसे कोई प्रमाण नहीं है कि जिससे संकेत मिलता हो कि भारत में उसके मामले की निष्पक्ष सुनवाई नहीं होगी। इसके साथ ही, जज ने भारत के सेवानिवृत जज अभय थिप्से और मार्कंडेय काट्जू की तरफ से भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के समर्थन में एक्सपर्ट के रूप में राय को पूरी तरह से खारिज कर दिया और मार्कंडेय काट्जू की गवाही पर भी सवाल खड़े किए।

काट्जू ने की नीरव मोदी की पैरवी

मार्कंडेय काटजू ने वेस्टमिंस्टर कोर्ट में एक्सपर्ट के रूप में नीरव मोदी के पक्ष में बाते कही थीं। उन्होंने कहा था कि भारत के ज्यूडिशियरी का अधिकांश हिस्सा भ्रष्ट है और जाँच एजेंसियाँ सरकार की ओर झुकाव रखती हैं, लिहाजा नीरव मोदी को भारत में निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिलेगा। 

जज ने बयान को बताया गैर विश्वसनीय बताया 

यूके के जज गूजी ने न केवल काट्जू की टिप्पणी को अनुचित और हैरान करने वाला बताया बल्कि कहा कि मेरी नजर में उनकी राय निष्पक्ष और विश्वसनीय नहीं थी। न्यायाधीश ने कहा कि मार्कंडेय काट्जू ने भारतीय ज्यूडिशियरी में इतने ऊँचे ओहदे पद पर काम किया है, इसके बावजूद उनकी पहचान ऐसे मुखर आलोचक के रूप में रही है जिनका अपना एजेंडा होता है। मुझे उनके सबूत के साथ ही उनका व्यवहार भी सवालों के घेरे में लगा। डिस्ट्रिक्ट जज सैमुअल गूजी ने काटजू के गवाही की कड़ी निंदा की और इस साक्ष्य को ‘गैर निष्पक्ष और गैर विश्वसनीय’ करार दिया।

न्यायाधीश गूजी ने कहा, “अलबत्ता, कुछ राजनीतिक व्याख्यान को गलत सलाह करार दिया जा सकता है, मीडिया, ब्रॉडकास्टिंग व सोशल मीडिया लिंक, जो बचाव पक्ष की तरफ से बड़ी मात्रा में मेरे सामने पेश किये गए, में ऐसा कुछ भी नहीं जो यह संकेत दें कि मुकदमे की सुनवाई को प्रभावित करने के लिये राजनेता किसी तरह का दखल दे रहे हैं। एनडीएम (नीरव दीपक मोदी) के मुकदमे की तो छोड़िए, सुनवाई प्रक्रिया ऐसे किसी प्रभाव को लेकर अतिसंवेदनशील होगी।”

वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के जज ने कहा, “मैं ऐसे किसी भी प्रतिवेदन को खारिज करता हूँ कि भारत सरकार ने जानबूझकर मीडिया में इसे इतना चर्चित किया है। मैं न्यायमूर्ति काट्जू की विशेषज्ञ राय को भी काफी कम तवज्जो देता हूँ।” ब्रिटिश जज ने अपने आदेश में कहा, ऐसा कोई ठोस या भरोसेमंद सबूत नहीं है, कि भारत में न्यायपालिका अब स्वतंत्र नहीं है या एक निष्पक्ष सुनवाई करने में सक्षम नहीं है।

‘भारतीय सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज का बर्ताव हैरान करने वाला’

नीरव मोदी के मामले पर मीडिया ट्रायल के प्रभाव के आलोचक होने के बावजूद वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत के न्यायाधीश ने इस बात पर हैरानी जताई कि खुद सुप्रीम कोर्ट के जज रह चुके काट्जू ने ब्रिटेन में कार्यवाही के दौरान दिए जाने वाले साक्ष्यों के संबंध में पत्रकारों को जानकारी देने का चौंकाने वाला फैसला लिया, मीडिया में अपना तूफान खड़ा किया और मीडिया के हितों को देखा।

गूजी ने बचाव पक्ष द्वारा पेश किए गए एक अन्य गवाह उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अभय थिप्से की भी आलोचना की जिन्होंने बचाव पक्ष के गवाह के तौर पर पेश होते हुए यह बताया था कि कैसे भारतीय अदालतों में यह मामला चलेगा। बता दें कि नीरव मोदी मामले में काट्जू पिछले साल एक विशेषज्ञ गवाह के तौर पर वेस्टमिंस्टर कोर्ट में पेश हुए थे।

गौरतलब है कि PNB घोटाले मामले में भगौड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की याचिका को लंदन की अदालत ने गुरुवार (फरवरी 25, 2021) को ठुकराते हुए उसके भारत प्रत्यर्पित किए जाने को मंजूरी दे दी। अदालत ने फैसला सुनाते हुए भारत की न्यायपालिका को निष्पक्ष कहा।

वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के जज सैमुअल गोजी ने कहा कि यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि नीरव मोदी को भारत में कई सवालों के जवाब देने हैं। उन्होंने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि अगर उन्हें प्रत्यर्पित किया गया तो उनके साथ न्याय नहीं होगा। 

मध्य प्रदेश में मिलावटखोरी पर मिलेगी उम्रकैद की सजा, शिवराज सिंह सरकार का सख्त फैसला

मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार के मंत्रिमंडल ने शुक्रवार (फरवरी 27, 2021) को खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों को आजीवन कारावास देने के लिए दंड कानून (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2021 को मंजूरी दे दी। इसकी जानकारी राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दी। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों को अब कड़ी सजा दी जाएगी।

नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों को अब सख्त सजा दी जाएगी। इसको देखते हुए (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2021 को मंजूरी दी गई है। इसमें व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।” बता दें कि दिसंबर 2019 में मिलावट से पैदा होने वाले खतरों को लेकर भोपाल में जागरूकता रैली निकाली गई थी। 

रैली में सभी आयु वर्ग के लोगों ने हिस्सा लिया था। यह रैली राजधानी के रोशनपुरा से लाल परेड तक निकाली गई थी। इसमें लोगों ने मिलावट के खिलाफ नारे लगाए थे और शुद्ध खाद्य उत्पादों की माँग की थी। जगह-जगह मिलावट को लेकर छापे मारे जाते हैं। पिछले दिनों शहद में मिलावट का मामला देश भर में चर्चा में छाया रहा था। बता दें कि देश भर में खाद्य पदार्थो में मिलावट का काम किया जाता है। इसकी रोकथाम के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहती है।

दरअसल, पहले मिलावट का आरोप सही साबित होने पर 6 महीने की सजा का ही प्रावधान था। 6 महीने की सजा को बढ़ाकर पहले तीन साल कर दिया गया था। अब इसे संशोधित करते हुए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान कर दिया गया है। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मिलावट को सबसे बड़ा अपराध बताया। उन्होंने कहा कि मिलावट से बड़ा कोई अपराध नहीं।

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री ने कहा कि मिलावटखोरी सीधे-सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ है। इसलिए सजा को और बढ़ाया गया है। इसके अलावा एक्सपायरी डेट वाली वस्तु बेचने पर भी सजा के प्रावधान को मंजूरी दी गई है। मिलावट पर कसावट अभियान से सरकार को उम्मीद है कि मिलावटखोरी पर नकेल कसने में सफलता मिलेगी।

ठाकरे के IT मंत्री ने सोशल मीडिया व OTT प्लेटफॉर्म पर केंद्र के नियमों को बताया तानाशाही और लोकतंत्र के लिए खतरा

महाराष्ट्र की ठाकरे सरकार के आईटी मंत्री ने शनिवार (फरवरी 27, 2021) को सोशल मीडिया और ओवर-द-टॉप (ओटीटी) प्लेटफ़ॉर्म्स के सम्बन्ध में केंद्र सरकार के नियमों का विरोध किया और उन्हें ‘तानाशाही’ और लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया।

समाचार पत्र ‘इंडियन एक्स्प्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र की ठाकरे सरकार में सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री सतेज पाटिल सतेज पाटिल ने कहा कि इन नियमनों का सख्ताई से विरोध करने की आवश्यकता है क्योंकि वे व्यक्तियों की निजता और संविधान द्वारा दिए गए फ्री स्पीच के अधिकार का उल्लंघन करते हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्र के इस कदम का बड़े स्तर पर विरोध करना होगा और इस तरह के कथित तानाशाही नियमों को इस लोकतांत्रिक देश के लोगों द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा। पाटिल ने कहा कि कुछ नौकरशाह यह फैसला कर रहे हैं कि किसी मीडिया प्लेटफॉर्म पर क्या प्रकाशन किए जाने की जरूरत है और क्या नहीं? इसे भारत में प्रेस की आजादी पर हमला बताते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह का आदेश कानून के सामने नहीं टिकेगा।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में 25 फरवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जैसे कि फेसबुक और ट्विटर के साथ-साथ ओटीटी दिग्गजों जैसे- नेटफ्लिक्स आदि के लिए नियमों और दिशानिर्देशों की घोषणा की है।

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स को अफसरों की नियुक्ति करनी होगी और किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट को चिन्हित किए जाने के बाद 24 घंटे में हटाना होगा। साथ ही, इन प्लेटफ़ॉर्म्स को भारत में अपने नोडल ऑफिसर, रेसिडेंट ग्रीवांस ऑफिसर की तैनाती करनी होगी और हर महीने कितनी शिकायतों पर एक्शन हुआ, इसकी भी जानकारी देनी होगी।

केंद्र सरकार अब इस मुद्दे पर प्रभावी दिशा निर्देश लेकर आई है, जिसके दायरे में पूरा डिजिटल मीडिया, OTT और सोशल मीडिया होगा। चाहे वह एक तरफ फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर, इन्स्टाग्राम हों या दूसरी तरफ अमेज़न प्राइम, नेटफ्लिक्स, ऑल्ट बालाजी, ज़ी फाइव, एमएक्स प्लेयर। ये सभी दिशा निर्देश आगामी 3 महीने के भीतर लागू कर दिए जाएँगे।

सोशल मीडिया के मुद्दे पर दिशा निर्देशों की जानकारी देते हुए केन्द्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कई अहम बातें बताई। उन्होंने कहा कि भारत में हर सोशल मीडिया मंच का स्वागत है लेकिन दो आयामी कार्यप्रणाली स्वीकार नहीं की जाएगी। अगर कैपिटल हिल पर हमला हुआ तब सोशल मीडिया ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया। जब लाल किले पर भीषण हमला हुआ तब सोशल मीडिया ने दोतरफ़ा चरित्र का उदाहरण दिया। इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

क़ानून मंत्री ने कहा, “एक ग्रीवांस मैकेनिज्म (grievance mechanism) बनाना होगा और इसके तहत एक ग्रीवांस ऑफिसर (निराकरण अधिकारी) का नाम भी रखना होगा। ये अधिकारी अनिवार्य रूप से भारत का ही होना चाहिए। जिसे मिलने वाली शिकायत को 24 घंटे के भीतर दर्ज करना होगा और 15 दिन के अंदर निराकरण करना होगा। उसे इसका भी ध्यान रखना होगा कि उसे कितनी शिकायतें प्राप्त हुई और कितनों का निराकरण हुआ।” 

बांग्लादेशी लेखक मुश्ताक अहमद की जेल में मौत होने पर ढाका में जबरदस्त प्रदर्शन: 15 पुलिसकर्मी समेत 35 लोग घायल

बांग्लादेश में डिजिटल सुरक्षा कानून का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार लेखक एवं स्तंभकार की जेल में मौत हो जाने पर शुक्रवार (फरवरी 26, 2021) को राजधानी ढाका में एक व्यस्त चौराहे को प्रदर्शनकारियों ने जाम कर दिया। बांग्लादेश के इस कानून को आलोचकों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटने वाला बताया है। बता दें कि मृत लेखक मुश्ताक अहमद (53) को सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने को लेकर पिछले साल मई में गिरफ्तार कर लिया गया था। 

दरअसल, उन्होंने कोरोना वायरस महामारी से निपटने में प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के तौर-तरीकों की आलोचना की थी। अहमद की जमानत याचिका कम से कम 6 बार नामंजूर कर दी गई थी। हालाँकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मुश्ताक अहमद की मौत कैसे हुई। 

गृह मंत्री असदुज्जमान खान ने शुक्रवार को कहा कि घटना की जाँच की जाएगी। इस बीच, सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी ढाका विश्वविद्यालय परिसर के पास जुट गए, जबकि कई अन्य ने सोशल मीडिया पर अपना रोष प्रकट किया। प्रदर्शनकारियों ने डिजिटल कानून रद्द करने की माँग की और ‘हम न्याय चाहते हैं’ का नारा लगाया। 

लेखक मुश्ताक अहमद की हिरासत में मौत पर शोक व्यक्त करने और विरोध प्रदर्शन करने के लिए शुक्रवार शाम ढाका विश्वविद्यालय में एकत्र हुए वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच संघर्ष में कम से कम 35 लोग और पुलिस घायल हो गए। जिसमें से 20 प्रदर्शनकारी और 15 पुलिसकर्मी शामिल हैं।

जिस जेल में अहमद बंद थे, उस जेल के वरिष्ठ अधीक्षक मोहम्मद गियास उद्दीन ने कहा कि लेखक गुरुवार शाम को बेहोश हो गए थे और उन्हें जेल के अस्पताल में ले जाया गया था। इसके बाद जेल के गार्ड ने उन्हें नजदीकी शहर गाजीपुर में इलाज के लिए ले गए, लेकिन वहाँ जाते ही उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

मानवाधिकार संगठनों, ह्यूमन राइट्स वाच और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बांग्लादेश से मामले की जाँच करने का अनुरोध किया है। न्यूयार्क की ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (सीपीजे) ने भी यह माँग की है कि बांग्लादेश सरकार को यह कानून रद्द करना चाहिए और अहमद की मौत की जाँच करनी चाहिए। पुलिस का आरोप है कि अहमद ने राष्ट्र की छवि धूमिल करने की कोशिश की और भ्रम फैलाया।

गौरतलब है कि 2014 के डिजिटल सुरक्षा कानून के तहत बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम, इसके संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान, राष्ट्रगान या राष्ट्रध्वज के खिलाफ किसी तरह का दुष्प्रचार करने पर 14 साल तक की कैद की सजा का प्रावधान किया गया है। 

सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने या लोक व्यवस्था में विघ्न डालने पर 10 साल तक की कैद की सजा का भी इसमें प्रावधान किया गया है। सीपीजे ने एक बयान में एक सह आरोपित एवं राजनीतिक काटूर्निस्ट कबीर किशोर को जेल से रिहा करने की माँग की है। उन्हें पिछले साल गिरफ्तार किया गया था। सीपीजे के एशिया मामलों के वरिष्ठ शोधार्थी ने कहा, ‘‘बांग्लादेश सरकार को अहमद की मौत की स्वतंत्र जाँच की अनुमति देनी चाहिए।’’ 

बाल श्रीराम भी खिलौनों से खेलते थे, चतुरंग और पच्चीसी प्राचीन भारत में भी लोकप्रिय: PM मोदी ने ‘भारत खिलौना मेला’ का किया उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (फरवरी 27, 2021) को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से ‘भारत खिलौना मेला 2021’ का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आप सभी से बात करके ये पता चलता है कि हमारे देश के खिलौना उद्योग में कितनी बड़ी ताकत छिपी हुई है, इस ताकत को बढ़ाना, इसकी पहचान बढ़ाना, आत्मनिर्भर भारत अभियान का बहुत बड़ा हिस्सा है। उन्होंने कहा कि ये पहला ‘Toy Fare’ केवल एक व्यापारिक या आर्थिक कार्यक्रम भर नहीं है।

बकौल पीएम मोदी, ये कार्यक्रम देश की सदियों पुरानी खेल और उल्लास की संस्कृति को मजबूत करने की एक कड़ी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सिंधु घाटी सभ्यता, मोहनजोदारो और हड़प्पा के दौर के खिलौनों पर पूरी दुनिया ने रिसर्च की है। प्राचीन काल में दुनिया के यात्री जब भारत आते थे, तो भारत में खेलों को सीखते भी थे, और अपने साथ लेकर भी जाते थे। आधुनिक लूडो तब ‘पच्चीसी’ के रुप में खेला जाता था।

प्रधानमंत्री ने याद किया कि आज जो शतरंज दुनिया में इतना लोकप्रिय है, वो पहले ‘चतुरंग या चादुरंगा’ के रूप में भारत में खेला जाता था और हमारे धर्मग्रन्थों में भी बाल राम के लिए अलग-अलग कितने ही खिलौनों का वर्णन मिलता है। ‘Reuse और Recycling’ की बात करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह ये भारतीय जीवनशैली का हिस्सा रहे हैं, वही हमारे खिलौनों में भी दिखता है। उन्होंने बताया कि ज़्यादातर भारतीय खिलौने प्राकृतिक और इको-फ्रेंडली चीजों से बनते हैं, उनमें इस्तेमाल होने वाले रंग भी प्राकृतिक और सुरक्षित होते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे यहाँ खिलौने ऐसे बनाए जाते थे जो बच्चों के चहुँमुखी विकास में योगदान दें। आज भी भारतीय खिलौने आधुनिका फैंसी खिलौनों की तुलना में कहीं सरल और सस्ते होते हैं, सामाजिक-भौगोलिक परिवेश से जुड़े भी होते हैं। उन्होंने गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने की एक कविता का जिक्र किया, जिसमें कहा गया है- ‘एक खिलौना बच्चों को खुशियों की अनंत दुनिया में ले जाता है। खिलौना का एक-एक रंग बच्चे के जीवन में कितने ही रंग बिखेरता है।’ उन्होंने आगे कहा:

“हमारी परंपराओं, खानपान, और परिधानों में ये विविधताएँ एक ताकत के रूप में नजर आती है। इसी तरह भारतीय खिलौना उद्योग भी इस खास भारतीय नजरिए को, भारतीय विचारबोध को प्रोत्साहित कर सकती हैं। खिलौनों का जो वैज्ञानिक पक्ष है, बच्चों के विकास में खिलौनों की जो भूमिका है, उसे अभिभावकों को समझना चाहिए और अध्यापकों को स्कूलों में भी उसे प्रयोग करना चाहिए। इस दिशा में देश भी प्रभावी कदम उठा रहा है, व्यवस्था में जरूरी कदम उठा रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्ले-आधारित और गतिविधि-आधारित शिक्षा को बड़े पैमाने पर शामिल किया गया है। ये ऐसी शिक्षा व्यवस्था है जिसमें बच्चों में पहेलियों और खेलों के माध्यम से तार्किक और रचनात्मक सोच बढ़े, इस पर विशेष ध्यान दिया गया है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने खिलौना उद्योग को 24 प्रमुख क्षेत्रों में दर्जा दिया है और ‘National Toy Action Plan’ भी तैयार किया गया है, जिसमें 15 मंत्रालयों और विभागों को शामिल किया गया है ताकि ये उद्योग प्रतियोगिता से भरा बने, देश खिलौनों में आत्मनिर्भर बनें और भारत के खिलौने दुनिया में जाएँ। उन्होंने कहा कि इस पूरे अभियान में राज्यों को बराबर का भागीदार बनाकर ‘Toy Cluster’ विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इसके साथ ही देश खिलौना पर्यटन की संभावनाओं को भी मजबूत कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज खिलौना मेला के इस अवसर पर हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम इस ऊर्जा को आधुनिक अवतार दें, इन संभावनाओं को साकार करें। उन्होंने कहा कि अगर आज ‘मेड इन इंडिया’ की डिमांड है तो आज ‘हैंड-मेड इन इंडिया’ की डिमांड भी उतनी ही बढ़ रही है। पीएम ने भारत में बने खिलौनों पर जोर दिया।

अगस्त 2020 में ‘मन की बात’ में भी खिलौनों पर पीएम मोदी ने विस्तृत बातचीत करते हुए कहा था कि भारत के कुछ क्षेत्र Toy Clusters यानी खिलौनों के केन्द्र के रूप में भी विकसित हो रहे हैं। जैसे, कर्नाटक के रामनगरम में चन्नापटना, आन्ध्र प्रदेश के कृष्णा में कोंडापल्ली, तमिलनाडु में तंजौर, असम में धुबरी, उत्तर प्रदेश का वाराणसी – कई ऐसे स्थान हैं, कई नाम गिना सकते हैं। उन्होंने बड़ी बात बताई थी कि वैश्विक खिलौना इंडस्ट्री, 7 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक की है।

चीन ने छात्रों को ऑस्ट्रेलिया पढ़ने जाने से रोका, ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार को किया गिरफ्तार: दोनों देशों के रिश्तों में बढ़ी दरार

चीन और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों में दरार बढ़ती ही जा रही है। चीन ने अब ऑस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालयों का बॉयकॉट शुरू कर दिया है और वहाँ के एजेंट्स चीनी छात्रों से कह रहे हैं कि वो ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने नहीं जाएँ। ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटीज पहले से ही कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मंदी से जूझ रही है, ऐसे में इसका उन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। मेलबर्न विश्वविद्यालय के उप-कुलपति डंकन मास्केल ने भी इसकी पुष्टि की है।

ऑस्ट्रेलिया की कई यूनिवर्सिटीज ऐसी हैं, जिनकी आय का एक बड़ा हिस्सा विदेशी छात्रों से ही आता रहा है। लेकिन, महामारी के बाद सीमाओं को सील किए जाने और फ्लाइट्स पर पाबंदी लगने के कारण उनकी हालत पस्त हो गई है। 2019-20 में ऑस्ट्रेलिया में शिक्षा क्षेत्र से ही वहाँ की अर्थव्यवस्था को $37.5 बिलियन (275900 करोड़ रुपए) का योगदान मिला था। वैक्सीन के आने के बाद उम्मीद है कि रौनक फिर लौटेगी।

लेकिन, चीन ने परेशानी खड़ी कर दी है। चीन के स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी वहाँ की एजेंसियों को कह रहे हैं कि वो छात्रों को सलाह देते समय ऑस्ट्रेलिया के किसी भी यूनिवर्सिटी की अनुशंसा न करें, ताकि चीनी छात्र वहाँ दाखिला न ले पाएँ। ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा मंत्री एलेन टज ने चीन के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि शिक्षा ग्रहण करने के लिए ऑस्ट्रेलिया सबसे सुरक्षित और सबसे बेहतर स्थानों में से एक है।

उन्होंने कहा कि चीन अफवाहें फैला रहा है और वो लोगों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि उनका देश शिक्षा के लिए सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि हम रेसिज्म और हिंसा को बर्दाश्त नहीं करते हैं, जबकि चीन खुद को बाकियों से श्रेष्ठ समझता है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ग्लोबल टाइम्स ने भी दावा किया है कि ऑस्ट्रेलिया में चीनी छात्रों पर हिंसक हमले हो रहे हैं और इससे उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

उधर चीन में काम करने वाले पत्रकार भी चीन छोड़ कर भाग रहे हैं। चीन के सरकारी टीवी सीजीटीएन में कार्यरत एक ऑस्ट्रेलियाई कर्मचारी को ‘अवैध’ रूप से देश की गोपनीय सूचनाओं को चीन से बाहर भेजने के संदेह में गिरफ्तार कर लिया गया है। इस गिरफ्तारी ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। चीनी अधिकारियों का दावा है कि चेंग को अवैध रूप से देश की गोपनीय सूचनाओं को बाहर भेजने के संदेह में गिरफ्तार किया गया है।

ऑस्ट्रेलिया के पीएम ने कुछ ही महीनों पहले कहा था कि चीन को खुद पर शर्म आनी चाहिए। पीएम स्कॉट मॉरिसन ने कहा था कि सैन्य गतिविधि देश के राष्ट्रीय हितों का मसला है और इस बारे में उनका देश ही तय करेगा। उन्होंने कहा था कि ऑस्ट्रेलिया अब चीन के दबाव के आगे नहीं झुकेगा। असल में चीन ने ऑस्ट्रेलिया को अपने दूतावास के माध्यम से दस्तावेजों का पिटारा सौंपा था, जिसमें 14 शिकायतों की सूची है।

कोर्ट के कुरान बाँटने के आदेश को ठुकराने वाली ऋचा भारती के पिता की गोली मार कर हत्या, शव को कुएँ में फेंका

झारखंड स्थित राँची की ऋचा भारती का नाम तब प्रकाश में आया था जब उन्होंने कोर्ट द्वारा कुरान बाँटने के दिए गए आदेश को ठुकरा दिया था। अब बिहार के नालंदा में ऋचा भारती के पैतृक गाँव में उनके पिता प्रकाश उर्फ़ मोहन कुमार की गोली मार कर हत्या कर दी गई है। गत 19 फरवरी को उनके पिता को कुछ बदमाशों ने गोली मार दी। ऋचा की माँ द्वारा दर्ज कराई गई FIR के अनुसार, ये घटना उस समय घटी, जब ऋचा के पिता और उनकी माँ रात के 8.30 बजे दालान से अपने घर जा रहे थे।

ऋचा भारती के परिवार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, वो अपने खेत के पास ही थे कि तभी आठ बदमाशों ने कन्धों पर रायफल रखकर उन्हें घेर लिया और फायरिंग करने लगे। चंद्रमौली प्रसाद और रंजीत कुमार जब मोहन कुमार पर फायरिंग करने लगे तो वो घायल होकर वहीँ गिर गए। इसके बाद गुंडों ने घायल मोहन कुमार के गले में फंदा लगाया और उन्हें घसीटते हुए पास के कुँए में फेंक दिया।

बताया गया है कि जब परिवार के लोग उनके पीछे जाने लगे तो उन पर भी फायरिंग की गई। इसी बीच वहाँ पुलिस भी पहुँच गई। ऋचा की माँ ने FIR में बताया है कि इसका कारण रंजीत कुमार और चंद्रमौली की पुरानी रंजीश है। वो उन्हें मारना चाहते थे। 19 फरवरी को मौका पाते ही उन लोगों ने शिकायतकर्ता के पति मोहन कुमार की हत्या कर दी। व्यक्तिगत दुश्मनी में ये हत्या हुई है। हालाँकि, इस मामले का कुरान वाले केस से कोई लेनादेना नहीं है।

ऋचा ने आरोप लगाया है कि अब तक पुलिस ने इस मामले में किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया है। परिवार ने 8 नामजदों के बारे में अपनी शिकायत में बताया है और पुलिस इस पर जाँच करने की बात कह रही है।

ऋचा भारती की सुरक्षा को लेकर राँची में भी सवाल उठे थे। ऋचा भारती को झारखण्ड पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसके लिए ऑपइंडिया ने आवाज़ उठाई थी। तब राँची के भाजपा सांसद संजय सेठ ने भी परिवार से बात कर के मदद का आश्वासन दिया था। अपनी शिकायत में ऋचा ने पुलिस को बताया था कि उनके घर के सामने मुस्लिम युवक थूक कर चले जाते हैं और चिल्लाते हुए कहते हैं, “कुरान की बेहूरमती का बदला, ऋचा भारती हम तुमसे लेकर रहेंगे‘।

दिल्ली: बहन से छेड़खानी का विरोध करने पर युवक की चाकू गोद कर हत्या, तीनों आरोपित फरार

राजधानी दिल्ली में एक युवक को बहन से छेड़खानी का विरोध करने की सजा चाकू खाकर भुगतनी पड़ी। दिल्ली स्थित कालकाजी इलाके में एक 17 साल के युवक ने जब तीन लड़कों द्वारा अपनी बहन का पीछा करने और छेड़खानी करने पर आपत्ति जताई तो आरोपितों ने उसके पेट में चाकू उतार दिया। इस घटना में घायल युवक को एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने बताया कि पुलिस स्टेशन कालका जी में एक लड़के के संबंध में एक पीसीआर कॉल आई थी, जिसे सर्वोदय विद्यालय नंबर 2, कालकाजी के पास छुरा घोंपा गया था और उसे इलाज के लिए एम्स ट्रॉमा ले जाया जा रहा था।

पुलिस के अनुसार, घटना के समय उनके साथ मौजूद चश्मदीद (घायल की बहन) उम्र -18, ने कहा कि तीन लड़के उसका पीछा कर रहे थे और उस पर अश्लील टिप्पणी कर रहे थे। इस पर जब उसके भाई ने आपत्ति की, तो उन्होंने उसके साथ मारपीट की और उनमें से एक ने उसके पेट के बाईं ओर चाकू मार दिया और मौके से फरार हो गया।

घायल युवक की बहन ने के अनुसार, “यह 2-3 दिनों से चल रहा था। उन्होंने मेरे भाई के साथ मारपीट की और आपत्ति जताने पर उसे चाकू मार दिया।”

पुलिस ने बताया कि इस सम्बन्ध में एफआईआर नंबर 95/2021 यू/एस 307/354 (डी) / 509/34 आईपीसी दर्ज की गई हैं और आगे की जाँच चल रही है। हमलावरों की संख्या तीन से चार के बीच बताई जा रही है। मारपीट और हमला करने वाले सभी युवक नौजवान ही थे। बताया जा रहा है कि जिस समय घायल युवक को चाकू मारा गया, उस दौरान वहाँ पर काफी भीड़ मौजूद थी, लेकिन कोई भी युवक की मदद के लिए आगे नहीं आया।