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लाल किले के दंगाइयों की तलाश में पंजाब पहुॅंची दिल्ली पुलिस और NIA की टीम, बॉर्डर पर इंटरनेट बंद

दिल्ली में 26 जनवरी पर हिंसा मामले में एक्शन की शुरुआत हो गई है। घटना में शामिल आरोपितों की धर-पकड़ के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में पुलिस द्वारा विभिन्न स्थानों पर छापेमारी भी की जा रही है। खबर है कि दिल्ली पुलिस ने लाल किले पर धार्मिक झंडा फहराने के मामले में वांछित तरनतारन के 2 आरोपितों की तलाश में जालंधर में दबिश दी है।

न्यूज़ एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, जालंधर के डीसीपी का कहना है, ”जानकारी मिली थी कि दिल्ली हिंसा में शामिल तरनतारन के दो युवक जालंधर में छिपे है। NIA और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने छापा मारा। हालाँकि, दोनों इलाके में नहीं मौजूद मिले।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस लाल किले पर झंडा लहराने वाले जुगराज की तलाश में कई जगहों पर लगातार छापेमारी कर रही है। इसी छानबीन के तहत दिल्ली पुलिस और एनआईए की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को भी जालंधर के बस्ती बावा खेल में छापेमारी की थी। हालाँकि, उनके पहुँचने से पहले आरोपित और उसके घर के सदस्य फरार हो चुके थे। घर पर ताला लगा हुआ था।

इंटरनेट पर लगा रोक

रिपोर्ट्स के मुताबिक गाजीपुर, सिंघु और टिकरी बॉर्डर व आस-पास के इलाकों में 31 जनवरी यानी कल तक के लिए सभी टेलीकॉम सर्विसेज पर रोक लगा दी गई है। यानी कल तक इन इलाकों में फोन, इंटरनेट की सेवा नहीं मिल सकेगी। प्रशासन ने यह फैसला किसान के प्रदर्शन की स्थिति सामान्य बनाए रखने के लिए किया है।

गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार, 29 जनवरी की रात 11 बजे से ही इंटरनेट सेवाएँ रोक दी गईं। ये सेवाएँ 31 जनवरी तक बाधित रहेंगी। सुरक्षा कारणों की वजह से सरकार द्वारा यह कदम उठाया गया है।

गौरतलब है कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के दौरान किसानों ने हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया था। सबसे शर्मनाक बात ये थी कि दंगाई किसानों ने लाल किले के प्राचीर पर चढ़कर एक विशेष संगठन का झंडा लगा दिया। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। इस घटना में 394 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। घटना की जाँच उसी दिन से जारी है।

बता दें कि लाल किले में हुई हिंसा और बर्बरता की घटना की जाँच के लिए एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसीपी ललित मोहन नेगी को नया इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है। इस घटना के कई वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें सभी प्रदर्शनकारियों के हाथों में डंडे देखे जा सकते हैं। वहीं कई लोग घोड़े पर सवार देखे जा सकते हैं। इन वीडियोज में कहीं दंगाई पुलिस की गाड़ियों को तोड़फोड़ रहे हैं तो कहीं आक्रामक तरीके से ट्रैक्टर चलाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

‘यह तो शुरुआत है’: जैश के दावों की जाँच कर रही एजेंसियाँ, इजरायल को 2012 से तार जुड़े होने का शक

दिल्ली स्थित इजरायली दूतावास के पास शुक्रवार (जनवरी 29, 2021) शाम धमाका हुआ था। कम तीव्रता वाले इस धमाके में कोई हताहत नहीं हुआ था लेकिन कुछ गाड़ियों के शीशे टूट गए थे। इसके बाद पूरी राजधानी को अलर्ट पर रखा गया था। एयरपोर्ट, सरकारी इमारतों और अहम जगहों की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।

जैश उल हिन्द ने इस धमाके की ज़िम्मेदारी ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ मैसेजिंग एप्लीकेशन टेलीग्राम पर प्राप्त हुए संदेश (मैसेज) से इसका दावा किया गया है। इसमें लिखा है, “सबसे ताकतवर अल्लाह की रहमत और मदद से, जैश उल हिन्द के सैनिकों ने दिल्ली के अति सुरक्षित क्षेत्र में घुसपैठ की और IED हमले को अंजाम दिया। इसके बाद कई प्रमुख शहर निशाने पर होंगे। यह तो बस एक शुरुआत है। इसके ज़रिए हम भारत सरकार द्वारा किए गए अत्याचारों का बदला लेंगे।” मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियॉं दावे की पुष्टि करने में जुटी हैं।

वहीं भारत में इजरायल के राजदूत रोन मल्का (ron malka) ने इसके तार 2012 में अपने राजनयकि पर हुए हमले से जुड़े होने का अंदेशा जताया है। इजरायली राजदूत ने कहा कि दोनों घटनाओं में संबंध हो सकता है। हम जाँच कर रहे हैं।    

दरअसल 13 फरवरी 2012 को दिल्ली में इजरायली राजनयिक की कार में धमाका किया गया था। दो बाइक सवार हमलावरों ने इजरायली राजनयिक की पत्नी की गाड़ी में बम चिपका दिया था। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को इस धमाके के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

दिल्ली पुलिस ने 7 मार्च 2012 को इस मामले में जर्नलिस्ट मोहम्मद अहमद काजमी को गिरफ्तार किया था। वह ईरानी मीडिया समूह के लिए काम करते था। दिल्ली पुलिस ने दावा किया था कि उसने 3 ईरानी नागरिकों के साथ मिल धमाके को अंजाम दिया था। जुलाई 2012 में दिल्ली पुलिस इस नतीजे पर पहुँची थी कि आतंकी ईरान की मिलिट्री और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुए हुए थे।         

AAP नेता ने दिल्ली हिंसा पर पुलिस की रिपोर्ट मानने से किया इनकार, तलवार से हमले को बताया ‘आत्मरक्षा’

26 जनवरी को दिल्ली में हुई हिंसा पर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सौरभ भारद्वाज ने पुलिस वर्जन को मानने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा, “मैं पुलिस के वर्जन को नहीं मानूँगा। मैं सिर्फ इसलिए भरोसा नहीं कर लूँगा कि पुलिस कह रही है तो सही कह रही है। पुलिस का वर्जन सरकारी वर्जन होता है। जो सरकार कहेगी वो पुलिस करेगी।”

इतना ही नहीं, सौरभ भारद्वाज ने उस शख्स का भी समर्थन किया, जिसने अलीपुर SHO प्रदीप पालीवाल पर तलवार से हमला किया था। उनका कहना था कि उस शख्स ने आत्मरक्षा के लिए SHO पर हमला किया था। अलीपुर SHO पर तलवार से हमला किए जाने के बारे में सवाल पूछने पर उन्होंने कहा, “जहाँ तक मुझे पता चला है, किसानों के ऊपर हमले किए, पुलिस की मौजूदगी में हमले हुए। पुलिस ने घेर-घेर कर निहत्थे किसानों को पीटा। ऐसी बहुत वारदातें हैं और इन वारदातों में हो सकता है कि एक वारदात ऐसा भी हुआ हो कि किसी को 15 लोग घेर कर मार रहे हों तो उसने ‘आत्मरक्षा’ के लिए कुछ किया हो। पूरी की पूरी वीडियो देखी जानी चाहिए और उसके बाद ही फैसला करना चाहिए।”

बता दें कि अलीपुर SHO पर हमला किए जाने के मामले में पुलिस ने शुक्रवार (जनवरी 29, 2021) को 44 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है। ट्रैक्टर रैली के दौरान भड़की हिंसा को लेकर दिल्ली के पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने कहा कि शांतिपूर्ण रैली की शर्त थी, लेकिन किसानों ने तय रूट की अनदेखी की। उन्होंने कहा कि जो हिंसा हुई, वह नियम और कानूनों की अनदेखी करने के कारण हुई। उन्होंने प्रेस को सम्बोधित करते हुए कहा कि कई पुलिसकर्मी जख्मी हुए लेकिन उन्होंने संयम बरते रखा।

गौरतलब है कि ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा में तीन सौ से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। ये पुलिसकर्मी लाल किला, आईटीओ और नांगलोई समेत बाकी जगह पर हुई हिंसा के दौरान घायल हुए। इनमें से कुछ घायल पुलिसकर्मियों ने घटना का आँखों देखा मंजर बयान किया।

हिंसा के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए उत्तरी दिल्ली के वजीराबाद थाने के एसएचओ पीसी यादव ने आपबीती सुनाते हुए बताया, “हम लाल किले में तैनात थे जब कई लोग वहाँ घुस गए। हमने उन्हें लाल किले की दीवार से हटाने की कोशिश की, लेकिन वे आक्रामक हो गए। हम किसानों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करना चाहते थे, इसलिए हमने यथासंभव संयम बरता।”

वहीं डीसीपी नॉर्थ, दिल्ली के ऑपरेटर संदीप ने बताया, “कई हिंसक लोग अचानक लाल किला पहुँच गए। नशे में धुत किसान या वे जो भी थे, उन्होंने हम पर अचानक तलवार, लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से हमला कर दिया। स्थिति बिगड़ रही थी और हिंसक भीड़ को नियंत्रित करना हमारे लिए बहुत मुश्किल हो रहा था।”

उपद्रवियों ने महात्मा गाँधी की प्रतिमा तोड़ी, 2016 में भारत सरकार ने अमेरिकी शहर को भेंट में दी थी

अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रान्त के एक पार्क में लगी महात्मा गाँधी की प्रतिमा क्षतिग्रस्त कर दी गई है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने इस दुर्भावनापूर्ण और घृणित कृत्य की निंदा की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ घटना 28 जनवरी 2021 की बताई जा रही है।

अमेरिकी शहर डेविस की यह प्रतिमा भारत सरकार ने 2016 में भेंट दी थी। कांसे की बनी यह प्रतिमा 6 फीट लम्बी है और इसका वज़न 294 किलो है।   

विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए बयान में कहा गया, “उत्तरी कैलिफोर्निया के डेविस शहर स्थित सेन्ट्रल पार्क में मौजूद महात्मा गाँधी की मूर्ति को कुछ अनजान और उपद्रवी तत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिया है। यह प्रतिमा 2016 में भारत सरकार द्वारा भेंट की गई थी। हम शांति और सार्वभौमिक सम्मान के प्रतीक के साथ किए गए घृणित और दुर्भावनापूर्ण कार्य की आलोचना करते हैं।” 

मंत्रालय का कहना था कि वाशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास ने पूरे प्रकरण की जाँच और कठोर कार्रवाई के लिए अमेरिकी राज्य मंत्री के साथ इस मामले का ज़िक्र किया है। वहीं सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने सिटी ऑफ़ डेविस और स्थानीय क़ानून अधिकारियों के साथ इस घटना को लेकर विरोध दर्ज कराया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी इस घटना की आलोचना की है। 

घटना पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय का कहना है कि ये अस्वीकार्य है और जल्द से जल्द आरोपितों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा डेविस शहर के मेयर ने भी इस घटना पर रोष प्रकट किया है। उनका कहना है कि इस मामले पर जाँच शुरू कर दी गई है, आरोपित जल्द गिरफ्तार कर लिए जाएँगे। 

बताया जाता है कि अमेरिका के उत्तरी कैलिफोर्निया स्थित डेविस के सेन्ट्रल पार्ट में मौजूद महात्मा गाँधी की मूर्ति गुरुवार (28 जनवरी 2021) को अराजक तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त कर दी गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ फ़िलहाल मूर्ति को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है, इसकी मरम्मत के बाद वापस पुरानी जगह पर स्थापित कर दिया जाएगा।   

129 अपराधी मारे गए, ₹933 करोड़ की संपत्ति जब्तः योगी राज में 37511 अपराधी जेल में ठूँसे गए

उत्तर प्रदेश में इस वर्ष पंचायत चुनाव होने हैं, जिसे 4 चरणों में संपन्न कराए जाने की योजना है। इसके बाद 2022 में विधानसभा चुनाव होंगे, जिसके परिणामों के हिसाब से 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए नैरेटिव तैयार किया जाएगा। इन सबके बीच योगी आदित्यनाथ की सरकार अपराध को नियंत्रित करने के लिए सख्त बनी हुई है। माफियाओं और गैंगस्टर्स के खिलाफ कार्रवाई जारी है। 129 अपराधी मारे गए हैं।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने जानकारी दी है कि मार्च 20, 2017 (जब योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की कमान संभाली) से लेकर दिसंबर 31, 2020 तक कुल 129 अपराधी विभिन्न पुलिस मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं। इसके अलावा विभिन्न माफियाओं की अब तक 933 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति जब्त की जा चुकी है। हालाँकि, इस अवधि में 13 पुलिसकर्मी बलिदान भी हुए।

इसी अवधि में अब तक उत्तर प्रदेश की पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत 12,032 मामले दर्ज किए हैं और 37,511 अपराधियों को जेल भेजा जा चुका है। साथ ही 525 अपराधियों को NSA के तहत जेल भेजने की कार्रवाई की गई है। हाल ही में कई ऐसे पुलिसकर्मियों को भी बर्खास्त किया गया है, जो अपराध में या अपराधियों का साथ देने में संलिप्त पाए गए थे। यूपी में पूर्ववर्ती सरकार के दौरान हुई भर्तियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया।

राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध भी कम हुए हैं। NCRB (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो) द्वारा जारी किए गए आँकड़ों के अनुसार, देश के 21 बड़े राज्यों के मुकाबले उत्तर प्रदेश में महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएँ कम हुईं और राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे रहीं। महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध के मामले में 2019 में देश का कुल औसत 62.4 फीसदी दर्ज किया गया जबकि उत्‍तर प्रदेश में 55.4 रहा।

प्रयागराज में जिस तरह से अतीक अहमद और मऊ में मुख़्तार अंसारी जैसे खाकी पहनने वाले माफियाओं पर कार्रवाई हुई है, वो हाल के महीनों में बड़ी खबरें बनीं। अकेले प्रयाग जिले की बात करें तो यहाँ ऐसे 49 माफियाओं के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई हुई है। साथ ही जिस तरह से दंगों से निपटने के लिए उपद्रवियों की संपत्ति नीलाम करने का फैसला लिया गया, उसे अन्य राज्यों ने भी अपनाया और दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

लात मार नीचे गिराया, माँ-बहन की गाली देते हुए बरसाए थप्पड़; खालिस्तानियों की पिटाई के बाद रोए थे राकेश टिकैत: रिपोर्ट

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत के रोने की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल किए गए थे, जिसके बाद कई नेताओं ने मामले को जातिवादी बना दिया, तो कइयों ने सहानुभूति लहर पर सवार होकर ‘किसान आंदोलन’ को फिर से ज़िंदा कर दिया। उनके रोने से 2 दिन पहले गणतंत्र दिवस (जनवरी 26, 2021) के दिन दिल्ली की ‘ट्रैक्टर रैली’ में जम कर हिंसा हुई थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या खालिस्तानियों ने उनकी पिटाई की थी?

मीडिया पोर्टल ‘Kreatey’ पर प्रकाशित एक खबर के अनुसार, राकेश टिकैत के रोने से पहले खालिस्तानियों ने टेंट के भीतर ही उनकी पिटाई की थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले कुछ कट्टर सिखों ने उन्हें थप्पड़ और लातों से तो मारा ही था, साथ ही उनसे पैसे वापस लेने की भी धमकी दी थी। जबकि राकेश टिकैत ने रोते हुए दावा किया था कि प्रशासन किसानों का दमन कर रहा है और उनका आत्महत्या करने का मन कर रहा है।

‘kreately’ की खबर के अनुसार, जनता में जिस तरह से 26 जनवरी की हिंसा के बाद आंदोलनकारियों के प्रति गुस्सा व्याप्त हो गया था, उसके बाद खालिस्तानियों ने जाटों के खिलाफ भड़काऊ बयान देते हुए आपत्तिजनक वीडियो भी जारी किए थे। ऐसे में 1 दिन पहले दिल्ली पुलिस से लेकर केंद्र सरकार तक को मीडिया के सामने धमकी देने वाले राकेश टिकैत का इस तरह रोना अजीब था।

इस खबर में आगे दावा किया गया है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस से कुछ ही देर पहले आंदोलन की फंडिंग कर रही खालिस्तानियों की टीम राकेश टिकैत से मिलने पहुँची थी। उक्त टीम टिकैत से काफी नाराज़ थी। वहाँ उपस्थित लोगों के हवाले से दावा किया गया है कि वहाँ उन खालिस्तानियों ने BKU के वरिष्ठ नेता को माँ-बहन की गालियाँ दी। फिर उन्हें टेंट में ले जाकर एक जोरदार लात मारी, जिससे वो जमीन पर गिर गए।

उन पर थप्पड़ बरसाए जाने की बात भी कही जा रही है। खबर में आगे लिखा है कि इस तरह हुई पिटाई और पैसे वापस लेने की धमकियों के कारण ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में राकेश टिकैत की आँखों से आँसू निकल आए और वो रो पड़े। बताया गया है कि उसी रात को उनका ब्लड प्रेशर भी हाई हो गया, जिसके बाद पुलिस ने उनके इलाज के लिए डॉक्टर भेजा। अभी तक BKU ने इस पर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है।

राकेश टिकैत के रोने का असर ही था कि मुजफ्फरनगर के सिसौली में भारतीय किसान यूनियन (BKU) के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने महापंचायत बुला ली। यह महापंचायत राजकीय इंटर कॉलेज (GIC) में हुई। स्थल पर कई पड़ोसी राज्यों के किसान जुटने लगे थे और सब मिल कर सिसौली के राजकीय इंटर कॉलेज ग्राउंड में पहुँच गए थे। गौरतलब है कि गाजीपुर प्रशासन से अल्टीमेटम मिलने के बाद नरेश टिकैत ने धरना वापस लेने का फैसला किया था, लेकिन इस वीडियो के सामने आने के बाद फैसला बदल दिया गया।

जिस आंदोलन से दंगे भड़के, हिंसा हुई; वह नोबल शांति पुरस्कार के लिए नामित

‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ (black lives matter) आंदोलन को शांति के नोबल पुरस्कार के लिए नामित किया गया है, जबकि इस आंदोलन के समर्थकों ने पूरे अमेरिका को हिंसा की आग में झोंक दिया था। इस आंदोलन की शुरुआत 2013 में पैट्रिस क्यूलर्स (Patrisse Cullors), एलिशिया गर्जा (Alicia Garza) और ओपल टॉमपेटी (Opal Tometi) ने की थी। मई 2020 में अफ्रीकी अमेरिकी व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद यह आंदोलन राष्ट्रीय विमर्श का विषय बना। 

शनिवार (30 जनवरी 2021) को ब्लैक लाइव्स मैटर के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने सूचना देते हुए बताया, “हमने वैश्विक इतिहास का सबसे बड़ा सामाजिक आंदोलन आयोजित किया। आज हमें शांति के नोबल पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। लोग हमारी वैश्विक ख्याति के लिए जागरूक हो रहे हैं: नस्लीय न्याय के लिए और आर्थिक असमानता, श्वेत आधिपत्य, नस्लभेद ख़त्म करने के लिए। यह तो सिर्फ हमारी शुरुआत है।” 

द गार्डियन (The Guardian) में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ ब्लैक लाइव्स मैटर्स ने बताया, “जिस तरह हमारे प्रयासों की वजह से तमाम व्यवस्थित बदलाव आए हैं, उसकी वजह से ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स आंदोलन’ को नोबल पुरस्कार 2021 के लिए नामित किया गया।” सोशलिस्ट लेफ्ट पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद (Norwegian MP) पीटर एड (Petter Eide) ने नामांकन दाखिल किया था।   

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पीटर ने दावा किया कि इस आंदोलन ने नस्लीय अन्याय से लड़ने के लिए वैश्विक स्तर पर जागरूकता फैलाई। कई अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान के तहत जितने भी विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए गए उसमें अधिकांश शांतिपूर्ण थे। बेशक हिंसा की कुछ घटनाएँ हुई थीं, लेकिन उनके पीछे की वजह पुलिस थी या फिर आंदोलन का विरोध करने वाले। 

अमेरिका में राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में सेवा प्रदान करने वाले किसी भी राजनेता के पास शांति के नोबल पुरस्कार के लिए नामांकन करने का अधिकार होता है। उन्हें 2000 से कम शब्दों में अपना आवेदन प्रस्तुत करना होता है। नामांकन से जुड़े दस्तावेज़ जमा करने की अंतिम तिथि 1 फरवरी है, विजेता नामों का ऐलान अक्टूबर में किया जाएगा। इसके 2 महीने बाद दिसंबर की 10 तारीख को पुरस्कार वितरण समारोह होगा। 

जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या और हिंसात्मक प्रदर्शन 

46 वर्षीय अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की एक मिनिपोलिस पुलिस अधिकारी के हाथों मौत हो गई थी। कथित तौर पर उस मिनिपोलिस पुलिस अधिकारी ने फ्लॉयड की गर्दन पर लगभग 9 मिनट तक अपना घुटना रखा। जॉर्ज फ्लॉयड इस दौरान घुटना हटाने की गुहार लगाता रहा।

उसने यह भी कहा कि वह साँस नहीं ले पा रहा है। लेकिन पुलिस अधिकारी नहीं पिघला और फ्लॉयड की मौत हो गई। इसके बाद लोगों का गुस्सा पुलिस के प्रति भड़क गया और हिंसक रूप ले लिया।

30 मई 2020 को यह विरोध-प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया, जिसके कारण कई शहरों में कर्फ्यू लगाना पड़ा। फिलाडेल्फिया में प्रदर्शनकारियों ने मियामी में राजमार्ग को यातायात को बंद करने के दौरान एक मूर्ति को गिराने की कोशिश भी की थी।

PM मोदी को गालियाँ, तिरंगे को गिराने की बातें और AK-47 की धमकी: लाल किले के दंगाइयों का वीडियो

गणतंत्र दिवस (जनवरी 26, 2021) के दिन को जिस तरह से ‘किसान आंदोलन’ और ट्रैक्टर रैली के नाम पर उपद्रवियों ने दिल्ली में हिंसा की और लाल किला पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया, उसके बाद आंदोलन पर कई सवाल खड़े हो गए। अब फेसबुक पेज ‘द सैफरन सोर्ड’ ने एक वीडियो पोस्ट किया है। इसमें पीएम नरेंद्र मोदी को अपशब्द कहते हुए भारतीय तिरंगे को गिराने की बातें की जा रही हैं।

उक्त वीडियो किसी प्रदर्शनकारी द्वारा शूट किया गया प्रतीत होता है, जो आंदोलन के दौरान लाल किला पर चले रहे घटनाक्रम की कमेंट्री भी कर रहा है। वीडियो की शुरुआत में उक्त सिख व्यक्ति ‘वाहेगुरु-वाहेगुरु’ के नारे लगा रहा होता है और साथ में कह रहा होता है कि वो तिरंगे को हटा कर खालसा के निशान को लगा देगा। आसपास सभी लोग सेल्फी लेते हुए इस घटना को कैमरे में कैद कर रहे हैं। लाल किला मामले में अब तक 44 गिरफ्तार हुए हैं।

उक्त व्यक्ति ‘शांति के बाद क्रांति’ और ‘प्यार के बाद हथियार’ की बातें भी कर रहा है। लाल किला का दरवाजा खोलने के लिए गाली-गलौज भी चल रहा होता है और वो व्यक्ति कहता है कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं। वो लोगों को डंडे तैयार रखने को कहता है और ‘चक दे फट्टे’ और ‘नप दे गिल्ली’ के नारे लगा रहा होता है। इस वीडियो में वो लाल किले में पेशाब करने और टट्टी करने की बातें भी करता है। वीडियो में उक्त बातें की जाती हैं:

  • 0:00 से 0:18 तक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गालियाँ देते हुए भारतीय तिरंगे को गिरा देने की बातें।
  • 0:19 से 0:36 तक: पुलिस को धमकी दी जा रही है कि अगर उन्होंने दरवाजे नहीं खोले तो हथियारों का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • 1:37 से 1:48 तक: वो लोगों को डंडे तैयार रखने की सलाह देता है, अगर लाल किले का दरवाजा नहीं खोला गया तो।
  • 1:49 से 2:23 तक: वो पीएम मोदी को अपशब्द बकते हुए कहता है कि ‘इनको’ एके-47 से ठोक कर मारेंगे, समझाओ इनको।
  • 2:24 से 4:01 तक: सारे लोग मिल कर लाल किला परिसर के दरवाजे को तोड़ डालते हैं और भीतर घुसने में कामयाब होते हैं।
  • 4:02 से 4:12 तक: पीएम मोदी को गालियाँ।
  • 4:13 से 8:10 तक: लाल किले की प्राचीर पर चढ़ कर किसानों के, खालिस्तान के और खालसा के झंडे फहराए जाते हैं। सुरक्षा बलों को नीचे जाने के लिए धमकी दी जाती है। ये वही जगह है, जहाँ से प्रधानमंत्री प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ध्वजारोहण करते हैं।
  • 6:30 से 6:40 तक: खालिस्तानी झंडे लहराए जाते हैं।

वीडियो में उक्त व्यक्ति ‘जो बोले, सो निहाल’ के नारे लगवाते हुए युवकों को सलाह देता है कि वो लाल किला परिसर के गेट के पार चले जाएँ और उसे तोड़ डालें। दरवाजा खुलते ही सभी अंदर घुस जाते हैं। इस दौरान पीएम मोदी को अपशब्द कहते हुए ‘हाय-हाय’ के नारे लगाए जाते हैं और साथ ही पुलिस को कहा जा रहा है, “तुमलोग शांति रखो। हमलोग नहीं जाएँगे, तुम जाओ। देखों सिखों की महान कुर्बानी।”

इस वीडियो को किसी खालिस्तानी पेज ने अपलोड किया था, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया। लेकिन, इसी बीच 'द सैफरन सोर्ड' नामक फेसबुक पेज ने इस वीडियो को पोस्ट कर खालिस्तानी एजेंडे का खुलासा किया। 

बता दें कि गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान लाल किले में हुई हिंसा और बर्बरता की घटना की जाँच के लिए एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसीपी ललित मोहन नेगी को नया इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है। इस घटना के कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें सभी प्रदर्शनकारियों के हाथों में डंडे देखे जा सकते हैं। वहीं कई लोग घोड़े पर सवार देखे जा सकते हैं। इन वीडियोज में कहीं दंगाई पुलिस की गाड़ियों को तोड़फोड़ रहे हैं तो कहीं आक्रामक तरीके से ट्रैक्टर चलाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

केजरीवाल को ‘क्रांतिकारी’ सलाह दे लाइमलाइट में पुण्य प्रसून वाजपेयी, कहा- मौकापरस्ती छोड़ें और साथ आएँ

तथाकथित ‘किसान’ आंदोलन के टुकड़े-टुकड़े होते नज़र आ रहे हैं। ख़ासकर, 26 जनवरी 2021 को प्रदर्शन की आड़ में हुए उपद्रव के बाद। लेकिन वामपंथी जमात ‘प्रदर्शन की चिंगारी’ को उन्माद की हवा देने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। ऐसी ही उन्मादी तत्परता नज़र आई ‘क्रांतिकारी’ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी में, जब उन्होंने ट्विटर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और इच्छाधारी आंदोलनकारी योगेन्द्र यादव को इस मुद्दे पर मशविरा दिया।  

पुण्य प्रसून ने अपने ट्वीट में लिखा कि AAP के मुखिया किसान आंदोलन का समर्थन करते हैं। योगेन्द्र यादव किसान आंदोलन के नेता हैं लेकिन दोनों एक-दूसरे को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। लिब्राट समुदाय के विराट पत्रकार वाजपेयी जी ने सुझाव दिया कि दोनों को अपने मतभेद भुलाकर साथ आना चाहिए तभी यह आंदोलन सफल होगा। इसके बाद वाजपेयी जी ने ट्वीट में लिखा, “बंटने से बचें, मौकापरस्ती छोड़ें और साथ आएँ। तभी सफल होंगे।” 

हाल ही में गणतंत्र दिवस के मौके पर हुई हिंसा के बाद तमाम कृषि संगठनों ने ‘किसान’ आंदोलन से पल्ला झाड़ा और प्रदर्शन स्थल को अलविदा कह दिया। लाल किले पर तिरंगे का अपमान करने के बाद आस-पास के स्थानीय लोगों ने भी प्रदर्शनकारियों का खुल कर विरोध किया। विरोध-प्रदर्शन दो महीने से जारी है जिसकी वजह से कई बड़े रास्ते भी जाम हैं, नतीजतन स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दो दिन पहले हरियाणा के कई गाँव वालों ने दिल्ली-जयपुर राजमार्ग पर प्रदर्शनकारियों को अल्टीमेटम जारी किया कि वह जल्द से जल्द आवागमन का रास्ता खाली करें। बीते दिन (29 जनवरी 2021) को सिंघु बॉर्डर पर स्थानीय लोगों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटना हुई थी। यह वही स्थानीय लोग हैं जो प्रदर्शनकारियों को खाने और पानी की मदद देकर आंदोलन का समर्थन कर रहे थे। 

ऐसी ख़बरें सामने आने का सीधा अर्थ है कि आंदोलन की ज़मीन खोखली हो रही है। यानी पुण्य प्रसून वाजपेयी सरीखे वामपरस्त पत्रकारों की चिंता में इज़ाफा। इसलिए उन्होंने देश के इच्छाधारी और अवसरवादी राजनेताओं को सलाह देना शुरू कर दिया है।

योगेन्द्र यादव आम आदमी पार्टी के नेता और इसके राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रह चुके हैं। इन्होंने 2014 के आम चुनावों में आप के टिकट पर गुरुग्राम संसदीय क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा था, जिसमें इनकी जमानत जब्त हो गई थी। कुछ समय बाद अरविन्द केजरीवाल और योगेन्द्र यादव के रिश्तों में खटास आ गई थी और इच्छाधारी आंदोलनकारी को 2015 में ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के चलते बाहर कर दिया गया था। इनके साथ साथ पार्टी के वकील प्रशांत भूषण को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था, जब उन्होंने केजरीवाल के ‘तानाशाही रवैये’ पर खुल कर बात की थी। 

पुण्य प्रसून वाजपेयी को तब से ‘क्रांतिकारी’ कहा जाता है जब उन्होंने केजरीवाल के साक्षात्कार की व्याख्या करने के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया था। वह केजरीवाल को साक्षात्कार के बाद इसके बारे में बता रहे थे, हालाँकि सब कुछ कैमरे में रिकॉर्ड हो गया था। वीडियो वायरल हुआ और दोनों की ‘संयुक्त क्रांति’ धराशायी हो गई।      

जिस महिला से उद्धव के मंत्री धनंजय मुंडे के दो बच्चे, उससे समझौता करेंगेः: बॉम्बे HC ने नियुक्त किया मध्यस्थ

महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मामलों के मंत्री धनंजय मुंडे ने उस महिला के साथ विवाद मध्यस्थ के जरिए सुलझाने की बात कही है, जिसके साथ उन्होंने संबंधों की बात कबूल की थी। कुछ दिनों पहले खबर आई थी कि इस महिला के साथ उनके दो बच्चे हैं। अब उक्त महिला और धनंजय मुंडे ने बॉम्बे हाईकोर्ट को सूचित किया है कि वे दोनों अदालत से बाहर मध्यस्थ के जरिए मामले को सुलझाएँगे। महिला की बहन गायिका रेनू शर्मा ने भी मुंडे पर रेप के आरोप लगाए थे, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया।

राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के नेता धनंजय मुंडे ने दिसंबर 2020 में बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर अनुरोध किया था कि अदालत महिला को उनके साथ ली गई ‘व्यक्तिगत एवं प्राइवेट तस्वीरों और वीडियोज’ को सोशल मीडिया पर डालने से रोकें। उन्होंने आरोप लगाया था कि महिला ने सोशल मीडिया पर ऐसी कई तस्वीरें अपलोड कर रखी हैं। उनके निवेदन को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने महिला को आदेश जारी किया था।

गुरुवार (जनवरी 28, 2021) को बॉम्बे HC में एके मेनन की एकल पीठ ने इस मामले में सुनवाई की। दोनों के अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट को सूचित किया कि दोनों पक्षों ने अदालत के बाहर इस मामले को सुलझाने की इच्छा जताई है। दोनों पक्षों ने मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश वीके थिलरमानी को मध्यस्थ के रूप में नियुक्त किए जाने पर सहमति जताई। जस्टिस मेनन ने मध्यस्थ से जल्द ही सभी पक्षों की बैठक बुलाने को कहा है।

महिला की बहन और गायिका रेनू शर्मा ने भी धनंजय मुंडे के खिलाफ दायर की गई अपनी शिकायत को वापस ले लिया था। विवाद में आने के बाद मुंडे ने दावा किया था कि उन्होंने उस महिला के साथ हुए बच्चों को स्कूल में भर्ती कराया, उन्हें अपना नाम दिया और साथ ही उनके नाम पर अचल सम्पत्तियाँ भी खरीदी हैं। दिसंबर में मुंडे को इस मामले में अंतरिम राहत दी गई थी, जो फ़िलहाल जारी रहेगी। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने इस मामले में चुनाव आयोग के पास शिकायत भेजी थी।

इससे पहले मुंडे ने कहा था, “साल 2019 से करुणा, उसकी बहन रेनू और भाई ब्रिजेश ने मुझे ब्लैकमेल करना शुरू किया और मुझसे पैसे माँगने लगे। उन्होंने मुझे मारने की धमकी भी दी। 12 नवंबर 2020 को मैंने इस बाबत एक शिकायत भी करवाई थी। रेनू ने फर्जी और बदनाम करने वाले आरोप सोशल मीडिया पर पोस्ट करने शुरू किए। सारे आरोप निराधार हैं और सब कुछ उनके पैसे लेने के लिए करुणा और ब्रिजेश के प्लान का हिस्सा है।”