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₹2000 में ‘गंदी बात’ वाली हिरोइन की पोर्न, अपलोड की थी खुद की 87 वीडियो: गिरफ्तार

मुंबई में अभिनेत्री और मॉडल गहना वशिष्ठ को पोर्न वीडियो शूट कर के अपनी वेबसाइट पर डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मुंबई पुलिस को पोर्न इंडस्ट्री के एक बड़े नेटवर्क के बारे में पता चला है, जिसमें कई अभिनेत्री, प्रोडक्शन कंपनियाँ और ऐसे मॉडल्स शामिल हो सकते हैं। ये सभी मोबाइल एप्स और वेबसाइट्स पर पोर्न फ़िल्में शूट कर के डालते रहे हैं। गहना वशिष्ठ को ‘मिस एशिया बिकनी क्राउन’ विजेता के रूप में जाना जाता है।

वो हिंदी और तेलुगु सिनेमा की फिल्मों के अलावा कई एडवर्टाइजमेंट वीडियोज में भी देखी जाती रही हैं। उनसे शनिवार (फ़रवरी 6, 2021) की शाम को पूछताछ की गई। उन्होंने अपनी वेबसाइट पर 87 पोर्न/अश्लील-आपत्तिजनक वीडियोज अपलोड की थी, जिन्हें देखने के लिए सब्सक्रिप्शन लेना होता था। चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए 2000 रुपए देने होते थे। उन्हें रविवार को कोर्ट में पेश किया जाना है।

पुलिस ने बताया कि उन्हें 3 ऐसे पीड़ितों की शिकायत मिली है, जिन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जबरन पोर्न वीडियोज शूट करने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद मुंबई पुलिस ने मलाड के मढ़ द्वीप स्थित ग्रीन पार्क बंगलो में तलाशी ली। इसके बाद यास्मीन बेग खान उर्फ़ रोवा, प्रतिभा नलावडे, मोनू गोपालदास जोशी, भानुसूर्यम ठाकुर, मोहम्मद आसिफ और सैफी को धर-दबोचा। इन एप्स के सब्सक्रिप्शन से जुटाए गए 36 लाख रुपए एक बैंक अकाउंट में मिले, जिसे सीज कर दिया गया।

पुलिस को वहाँ एक पीड़िता भी मिली, जिसे पुनर्वास गृह में भेजा गया है। यास्मीन प्रोडूसर/डायरेक्टर थी, सैफी कैमरामैन था, प्रतिभा ग्राफिक डिजाइनर थी, जोशी वीडियो में अभिनय करता था और ठाकुर अस्सिस्टेंट था। पुलिस को एक HD वीडियो कैमरा, 6 मोबाइल फोन्स, 1 लैपटॉप, स्पॉटलाइट, कैमरा स्टैंड, पोर्न कंटेंट वाला मेमोरी कार्ड और और पोर्न वीडियो शूट के स्क्रिप्ट्स मिले हैं। इन्होंने ‘फिल्मों में अभिनय’ के नाम पर नए चेहरों के लिए विज्ञापन भी दिया था।

गहना वशिष्ठ को हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय OTT वेब सीरीज के लिए साइन किया गया था। गहना वशिष्ठ डाइबिटीज से पीड़ित रही हैं और नवंबर 2019 में उन्हें हार्ट अटैक भी आया था, जिसके बाद वो कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रही थीं। वो कोमा में जाते-जाते बची थीं। उन्होंने एकता कपूर के ‘Alt Balaji’ की वेब सीरीज ‘गन्दी बात’ में अहम किरदार निभाया था। साथ ही वो ‘Ullu’ एप की सीरीज में भी दिखी थीं। वो ‘Nuefliks’ की ‘मदहोशी’ में भी नजर आई थीं।

अर्णब गोस्वामी का ट्विटर हैंडल @arnab_5222, लगाए मुंबई के DCP पर घटिया आरोप: पैरोडी हैंडल को असली समझ केस दर्ज

मुंबई पुलिस के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) अभिषेक त्रिमुखे ने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक अर्णब गोस्वामी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंने दावा किया है कि अर्णब गोस्वामी ने ट्विटर पर उनके खिलाफ टिप्पणियाँ की और बयान दिए। इसके लिए उन्होंने ट्विटर हैंडल ‘@arnab_5222‘ का भी जिक्र किया है। आइए, देखते हैं डिफेमेशन सूट में इस सम्बन्ध में क्या लिखा गया है।

इसके ‘Annexure B’ में लिखा है कि उपर्युक्त ट्विटर हैंडल को ‘मुख्य आरोपित (अर्णब गोस्वामी)’ द्वारा चलाया जाता है इसके 1.802 लाख (अब 2.001 लाख) फॉलोवर्स भी हैं। दावा किया गया है कि इस हैंडल से कई मानहानिजनक ट्वीट्स किए गए और जो बातें टीवी न्यूज़ टेलीकास्ट के दौरान कही जाती हैं, उन्हीं भड़काऊ चीजों को इस ट्विटर हैंडल के माध्यम से एक बड़ी ऑडियंस के समक्ष दोहराया जाता है और फिर से सर्कुलेट किया जाता है।

दावा किया गया है कि उन ट्वीट्स का कोई सन्दर्भ ही नहीं हैं और उन्हें जानबूझ कर याचिकाकर्ता को बदनाम करने के लिए फैलाया गया है। साथ ही ‘Annexure C’ में उन ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट्स भी डाले गए हैं। इसके बाद 6 ट्वीट्स की सूची पेश की गई है, जो इस हैंडल द्वारा किया गया था। दावा किया गया है कि उनके पास इन सभी के स्क्रीनशॉट्स मौजूद हैं। आइए देखते हैं किन ट्वीट्स को उन्होंने मानहानि वाला माना है।

अर्णब गोस्वामी के ट्विटर हैंडल को लेकर किया गया दावा

पहला ट्वीट अगस्त 16, 2020 की है। इसमें पूछा गया है कि पुलिस की सर्विस ज्वाइन करने से पहले मुंबई के DCP ने देश की सेवा करने की शपथ ली थी या फिर महाराष्ट्र के राजनेताओं की? साथ ही इसमें हैशटैग के जरिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सुशांत सिंह राजपूत की मौत की CBI जाँच की माँग की गई है। दूसरा ट्वीट अगस्त 7 का है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आरोपित रिया चक्रवर्ती मुंबई के DCP के साथ पिछले 1 वर्ष से संपर्क में थीं।

इसमें दावा किया गया है कि ये वही DCP हैं, जिन्होंने सुशांत के परिवार के निवेदन को दो-दो बार ठुकरा दिया। इसे ब्रेकिंग न्यूज़ बताते हुए ‘वॉरियर फॉर SSR’ का हैशटैग भी लगाया गया है। इस ट्वीट में पुलिस पर जाँच के नाम पर 55 दिनों तक नाटक करने का आरोप लगाते हुए DCP पर ‘मानसिक रोगी’ महेश भट्ट को चाय पर बुलाने का आरोप लगाया गया है। साथ ही सवाल दागा गया था कि रिया का असली कारोबार क्या है?

उसी दिन किए गए तीसरे ट्वीट में एक खबर का जिक्र किया गया है, जिसके अनुसार मुंबई पुलिस के DCP अभिषेक त्रिमुखे ने रिया चक्रवर्ती को पूछताछ के लिए बुलाया है। साथ ही पूछा गया है, “देश मुझे बताए, मात्र 21 सेकेंड्स की कैसी पूछताछ?” चौथे ट्वीट में DCP से रिया के संपर्कों और उनके बीच हुई कॉल्स और संदेशों का विवरण माँगा गया है। 5वें ट्वीट में इसी आरोप को दोहराया गया है। पेश किए गए अंतिम ट्वीट में रिया और DCP के बीच कई बार कुछ सेकेंड्स की बात होने का दावा करते हुए पूछा गया है कि कौन सी सूचनाएँ आरोपित को दी गईं?

इसे अर्णब गोस्वामी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल होने का किया गया दावा

जब हमने इस यूजरनेम वाले ट्विटर हैंडल को चेक किया तो इस पर स्पष्ट लिखा है कि ये एक ‘अनाधिकारिक पैरोडी हैंडल’ है। साथ ही इसे ‘फैन पेज’ भी बताया गया है। इस पर कोई ब्लू टिक भी नहीं है। इस हैंडल से कंगना रनौत, नीता अम्बानी और सोनू निगम के पैरोडी/फेक हैंडल्स से किए गए ट्वीट्स भी रीट्वीट किए जाते हैं। इंस्टाग्राम पर भी ऐसा ही हैंडल बना कर रखा गया है। कहीं नहीं लिखा है कि इसे अर्णब गोस्वामी चलाते हैं।

असली बात ये है कि अर्णब गोस्वामी न तो किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हैं और न ही उनकी तरफ से कोई टीम या फैन पेज है, जो उनका प्रतिनिधित्व करता हो। उनके बयान को ‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ और ‘रिपब्लिक भारत’, इन दोनों मीडिया संस्थानों के हैंडलों के जरिए ही जारी किया जाता है। ट्विटर पर वो चर्चा में ज़रूर रहते हैं लेकिन उनका कोई ट्विटर हैंडल नहीं।

पालघर में नौसेना के जवान को जिंदा जलाया, हो चुकी थी सगाई… 3 महीने बाद थी शादी: पिता को न्याय की उम्मीद

महाराष्ट्र का पालघर विवादों से पिछा नहीं छुड़ा पा रहा। साधुओं की मॉब लिंचिंग के बाद अब यहाँ एक और हत्या की गई है। इंडियन नेवी के 27 साल के जवान को जिंदा जला दिया गया।

झारखंड के राँची के रहने वाले सूरज कुमार इंडियन नेवी में ‘लीडिंग सी मैन’ के तौर पर तैनात थे। वह 30 जनवरी की रात से लापता थे। 6 फरवरी को पालघर के किसी स्थानीय नागरिक ने जले हुए सूरज कुमार को देखा और इसकी जानकारी पुलिस को दी।

सूरज कुमार के पिताजी मिथिलेश दूबे ने बताया कि उन्हें अपने बेटे के लिए न्याय चाहिए। यह बात वो मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुँचाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उनके बेटे ने मरने से पहले अपनी किडनैपिंग और जला कर मारने की बात महाराष्ट्र पुलिस को बताई है और उन्हें न्याय चाहिए।

अत्यधिक जलने से मौत

पुलिस ने घायल और जले हुए सूरज कुमार को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। यहीं पर होश में आने के बाद उन्होंने अपने बारे में और किडनैप किए जाने से संबंधित सारी बात पुलिस को बताई थी।

जिला अस्पताल में हालत बिगड़ने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें मुंबई रेफर कर दिया। मुंबई में उन्हें इंडियन नेवी के के अस्पताल INS अश्विनी लाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस संबंध में पालघर के एसपी ने बताया कि तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। घोलवड पुलिस थाने में आईपीसी की धारा 302, 307, 364 ए, 392, 342, 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस की जाँच जारी है।

राँची से चेन्नै से पालघर

27 साल के सूरज कुमार छुट्टी बिता कर 30 जनवरी को राँची से लौट रहे थे। उन्हें कोयंबटूर के पास INS अग्रणी पर लौटना था। वो फ्लाइट से चेन्नई एयरपोर्ट उतरे और बाहर निकले। रात के लगभग 9 बज चुके थे। यहीं पर 3 लोगों ने उन्हें किडनैप कर लिया।

किडनैप करने वालों ने उन्हें रिवॉल्वर दिखा कर कीमती मोबाइल फोन भी छीन लिया था। 3 दिनों तक किडनैपरों ने सूरज कुमार को चेन्नै में ही रखा, सफेद रंग की SUV में घुमाते रहे। इस दौरान 10 लाख रुपए की फिरौती भी उनके परिवार से माँगी गई।

पैसा नहीं मिलने पर और अपने प्लान में कामयाब नहीं होने पर अपराधी सूरज कुमार को पालघर ले गए। शुक्रवार (5 फरवरी 2021) को पालघर के डहाणू तलासरी के वेवजी इलाके में स्थित जंगल में उन्होंने हाथ-पैर बाँध कर सूरज कुमार के शरीर पर पेट्रोल डाली और आग लगा दी।

सगाई तो हुई लेकिन नहीं हो सकी शादी

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार 15 जनवरी 2021 को सूरज की सगाई हुई थी। इसी साल मई में उनकी शादी होने वाली थी।

क्यों पालघर है विवादों में

पालघर में 2 साधुओं समेत 1 ड्राइवर की लिंचिंग हुई थी। न्यूज नेशन के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया ने इस मामले में खुलासा किया था कि पुलिस ने हत्या के बाद कई घंटों तक शवों की सुध नहीं ली थी।

उन्होंने दावा किया था, “पालघर संतों की क्रूर और निर्मम हत्या के बाद उनकी देह 9 घंटे तक सड़क पर लावारिस पड़ी रही। दरअसल पुलिस वाले हत्या के बाद भाग खड़े हुए थे। रात भर ड्राइवर और दो संतों की हत्या के बाद भी पुलिस ने सुध नहीं ली।”

पालघर में मिशनरियों का प्रभाव होने की बात भी पता चली है। यहाँ 2019 में ही मिशनरियों का एक वीडियो सामने आया था, जो बताता है कि वो धर्मान्तरण के लिए क्या-क्या कर रहे हैं। यहाँ के मिशनरी लगातार लोगों में हिन्दू देवी-देवताओं और साधु-संतों के ख़िलाफ़ ज़हर भरने में लगे रहते हैं।

इस वीडियो में मिशनरी कहते दिख रहे हैं कि गणपति तो हाथी हैं और हनुमान एक बन्दर हैं, ऐसे झूठे भगवान तुम्हें कैसे बचा सकते हैं? साथ ही वो जीसस क्राइस्ट को स्वीकार करने की अपील भी कर रहे हैं।

फरार दीप सिद्धू की विदेशी महिला मित्र कर रही सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड: पुलिस ने किया नया खुलासा

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी, 2021) के दिन लाल किले पर हुई हिंसा के मामले में पंजाबी एक्टर दीप सिद्धू पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। लेकिन दीप सिद्धू अभी भी पुलिस की पहुँच से दूर है। सिद्धू की तलाश में क्राइम ब्रांच की कई टीमें पंजाब में छापेमारी कर रही हैं। पुलिस ने पंजाबी एक्टर के ऊपर एक लाख का इनाम भी घोषित किया है। लेकिन इन सबके बीच दीप सिद्धू की ओर से एक के बाद एक वीडियो संदेश जारी किए जा रहे हैं, जिसको लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। 

हालाँकि, अब एक्टर दीप सिद्धू के बारे में पुलिस को एक चौंकाने वाली जानकारी मिली है। दावा किया गया है कि पंजाबी एक्टर जो भी वीडियो फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करता है, उसके पीछे सिद्धू की एक बेहद करीबी महिला मित्र है। 

जानकारी के मुताबिक, दीप सिद्धू वीडियो बनाता जरूर है लेकिन उसे अपलोड उसकी बेहद करीबी महिला मित्र करती है। ये महिला मित्र भारत से बाहर विदेश में बैठकर सिद्धू के वीडियो अपलोड करती है। कहा जा रहा है कि इसके पीछे सिद्धू की चाल जाँच एजेंसियों को भटकाने की है। यानी दीप सिद्धू एक पेशेवर अपराधी की तरह पुलिस के साथ लुका-छिपी का खेल खेल रहा है। 

गौरतलब है कि हाल ही में सिद्धू ने अपने फेसबुक पेज पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कई वीडियो जारी किये थे। जिसमें उसने आरोप लगाया था कि किसान यूनियन के नेता लाल किले में मौजूद थे। उसने कहा कि उसके पास उन नेताओं के वीडियो सबूत हैं जो लाल किले में मौजूद थे और उनके चेहरे ढके हुए थे।

सिद्धू ने दावा किया कि अगर वह उत्तेजित प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित नहीं करता, तो चीजें हाथ से निकल जातीं, लेकिन अब हर कोई उन्हें बलि का बकरा बना रहा है और कह रहा है कि उन्होंने लोगों को लाल किले की ओर बढ़ने के लिए उकसाया।

एक अन्य वीडियो में NDTV का, विशेष रूप से पत्रकार रवीश कुमार का नाम लेते हुए, सिद्धू ने कहा कि उसने सोचा था कि रवीश एक समझदार पत्रकार हैं, लेकिन जिस तरह से उन्होंने उसे अपने शो में पेश किया, वह निराशाजनक था। उन्होंने सिर्फ इसलिए कहा क्योंकि रवीश अपने प्राइम टाइम शो में उसके नाम का इस्तेमाल करना चाहते थे, उन्होंने सिद्धू से बात करने और उनका पक्ष जानने की कोशिश नहीं की। उसने यह भी दावा किया कि उन्होंने बरखा दत्त के साथ साक्षात्कार के बाद मीडिया को साक्षात्कार देना बंद कर दिया, क्योंकि वहाँ उसे गलत तरीके से दिखाया गया था।

रचित जाट को गोलियों से भून सिगरेट सुलगाते रहे शारिक़, शादाब, शहजाद: UP पुलिस ने धरा तो रोने लगे, लगेगा NSA

एक तरफ राजनीतिक लाभ लेने के लिए किसान आंदोलन में जाट-मुस्लिम एकता की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी तरफ इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है। ऐसा ही एक ताजा मामला सामने आया है उत्तर प्रदेश के बिजनौर से।

बिजनौर जिले के हल्दौर के कस्बा झालू में सरे बाजार एक युवक रचित जाट को दिनदहाड़े गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया गया। बेव सीरीज ‘मिर्जापुर’ स्टाइल में सरेबाजार कत्ल करने वाले मुस्लिम हमलावर बेखौफ थे। उन्हें न पुलिस का खौफ था और ही कानून का डर। अपराधी कत्ल कर मौका ए वारदात से भागने के बजाय दुकान के बाहर बैठ गए और आराम से सिगरेट पीते रहे। बीच-बीच में फायरिग कर तमंचे लहराते हुए गवाही देने वालों को जान से मारने की धमकी देते रहे।

मामला हल्दाैर कस्बे झालू में काेतवाली नगर क्षेत्र के गाँव स्याैहारा गिरधर निवासी 27 वर्षीय रचित जाट की गाेलियाें से भूनकर हत्या का है। रचित बाजार में खरीदारी करने गया था। इसी दौरान वहाँ मोहल्ले के ही रहने वाले शारिक, शादाब, शहजाद, शहबाज और एक अन्य युवक पहुँचे। इन्होंने पुरानी रंजिश को लेकर रचित के साथ बहस की और उसके तुरंत बाद ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसा दी।

रचित गोली लगने के बाद जान बचाने के लिए एक दुकान में घुस गया लेकिन हमलावरों ने इसे दुकान में भी नहीं छोड़ा और इस तरह सबके सामने रचित काे गोलियों से भून डाला। एसपी सिटी डॉक्टर धर्मवीर सिंह हत्या की वारदात की खबर मिलते ही मौके पर पहुँचे। पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।





वह यूपी पुलिस के सामने भी लोगों से चिल्ला-चिल्लाकर कहते रहे कि उनका यह वीडियो यूट्यूब पर आना चाहिए। एक आरोपित के फरार होने की बात भी कही जा रही है। बिजनौर के एसपी डॉ धर्मवीर सिंह के मुताबिक चारों आरोपियों पर एनएसए के तहत कार्रवाई की जाएगी। बिजनौर एसपी ने इस मामले की जाँच करा कर 24 घंटे के अंदर कार्यवाही करने का भरोसा दिया है।

कातिल इस कदर बेखौफ थे कि सनसनीखेज हत्याकांड के बाद दुकान के बाहर गेट पर ही बैठ गए। हवाई फायरिग कर गवाही देने वाले की भी हत्या की धमकी दी। फिर तमंचा लहराते हुए वेब सीरीज स्टाइल में सिगरेट जलाई, धुएँ का छल्ला उड़ाते हुए फिर से हवाई फायरिग की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हत्यारोपित 30 मिनट बाद तक मौके पर मौजूद रहे।

सिगरेट सुलगाते हत्यारे

पुलिस मौके पर पहुँची और उन्हें बाइक पर बैठा लिया। इस दौरान बाइक पर बैठते समय भी उनके चेहरों पर कोई खौफ नहीं था। हालाँकि, गिरफ्तारी के बाद अब चारों लड़कों की अकड़ यूपी पुलिस के सामने कम होती दिखने लगी। बताया जा रहा है कि सभी आरोपित बाद में यूपी पुलिस के आगे गिड़गिड़ाने लगे थे।

गौरतलब है कि कृषि कानून के खिलाफ देश की राजधानी दिल्ली बॉर्डर पर दो महीने से ज्यादा समय से किसान आंदोलन जारी है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि इस आंदोलन से किसानों की माँग भले ही अभी तक पूरी न हुई हो, लेकिन सामाजिक और राजनीतिक चेतना जरूर जगा दी है। जाट और मुस्लिम भी दंगों की बात भूलकर करीब आ गए हैं। लेकिन जमीनी स्तर की कलह इस नैरेटिव को बार-बार झूठलाती नजर आती है।

फिर भी मीडिया में यह माहौल बनाने की कोशिश जारी है कि किसान आंदोलन के चलते लोग अपनी पुरानी रंजिश और अदावत भुलाकर एक साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ध्यान रहे, साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे ने जाटों और मुस्लिमों के बीच गहरी खाई पैदा कर दी थी, जिसे अब सात साल के बाद पटने का दावा किया जा रहा था कि आज बिजनौर की यह घटना फिर सामने आ गई है। बताया जा रहा था कि जाट के साथ मुस्लिम, दलित, सिख सहित तमाम समुदाय के लोग किसानों के हक के लिए गाजीपुर बॉर्डर से लेकर पश्चिम यूपी में हो रही महापंचायतों में दिख रहे हैं। हालाँकि इसकी जमीनी वास्तविकता इससे इतर नजर आ रही है।

आगरा में बन रहे मुगल संग्रहालय का नाम छत्रपति शिवाजी के नाम रखने पर उनके वंशज ने की CM योगी की सराहना

छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज भाजपा सांसद उदयनराजे भोसले ने आगरा में निर्माणाधीन मुगल संग्रहालय का नाम छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर रखने के लिए उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को उपहार देते हुए उनके फैसले की सराहना की है। वहीं भाजपा सांसद ने इसका वीडियो अपने ट्विटर एकाउंट पर भी शेयर किया है।

योगी आदित्यनाथ ने 14 सितंबर 2020 को आगरा में 141 करोड़ रुपए में बन रही मुगल संग्रहालय का नाम बदलने का फैसला करते हुए यह ऐलान किया था कि संग्रहालय अब छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम से जाना जाएगा। यह निर्णय पिछले साल आगरा मंडल के विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में लिया गया था।

योगी आदित्यनाथ के हवाले से एक प्रेस बयान में कहा गया था, “मुगल हमारे नायक कैसे हो सकते हैं? इसकी जगह शिवाजी का नाम राष्ट्रवाद और आत्मसम्मान की भावना को बढ़ावा देगा।”

सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि सीएम योगी ने यह स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार राष्ट्रवादी विचारों को पोषित करने वाली है। गुलामी की मानसिकता के प्रतीक चिन्हों को छोड़, राष्ट्र के प्रति गौरवबोध कराने वाले विषयों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

हालाँकि, आगरा में मुगल संग्रहालय का नाम छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम से बदलने पर सपा और कॉन्ग्रेस के नेताओं ने सीएम योगी आदित्यनाथ की काफी आलोचना की थी।

गौरतलब है कि आगरा में मुगल संग्रहालय की आधारशिला जनवरी 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रखी थी। जब यह पूरा हो जाएगा, तो यह आगरा का चौथा संग्रहालय होगा, जिसमें शहर के सभी ऐतिहासिक स्मारकों का मॉडल रखा जाएगा।

विभिन्न युगों के अनुसार आगरा के डिजिटल मानचित्र भी विभिन्न उत्खनन स्थलों के विवरण के साथ संग्रहालय में रखे जाएँगे। इसमें महाभारत काल के साथ-साथ मुगल बादशाह अकबर के अधीन आगरा का पौराणिक ‘आगरा वन’ भी शामिल होगा। इसके अलावा आगरा के हस्तशिल्प को भी संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा।

पंजाब के चक्काजाम में दिखा खालिस्तानी ‘भिंडरावाले’ का झंडा, ‘मोदी मर जा हाय-हाय’ के लगे नारे: देखें वीडियो

यह खबर तो बहुत पहले से ही सामने आ चुकी है कि देश में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन को खालिस्तानी तत्वों द्वारा हाइजैक किया जा चुका है। जिसका पहले भी साबुत सामने आए और आज भी सबूत मिला। लुधियाना में किसानों के चक्का जाम के दौरान एक ट्रैक्टर पर जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीर के साथ एक ध्वज लगा हुआ दिखाई दिया। सोशल मीडिया पर इसका एक वीडियो वायरल हो रहा है।

न्यूज एजेंसी एएनआई ने लुधियाना के चक्का जाम की एक वीडियो जारी की है जिसमें एक ट्रैक्टर पर लगे झंडे में जरनैल सिंह भिंडरावाले जैसी तस्वीर दिख रही है। साथ ही कथिततौर भीड़ द्वारा ‘मोदी मर जा… हाय हाय’ के नारे भी लगाए जा रहे हैं। किसान आंदोलन में भिंडरावाले की तस्वीर दिखने से पंजाब में राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्मा सकता है।

वीडियो मे एक तरफ लोग गुजरते हुए दिखाई दे रहे हैं वहीं कुछ लोग नारे भी लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा वहाँ खड़े एक ट्रैक्टर पर खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीर वाला एक झंडा लगा हुआ दिखाई दे रहा है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या शनिवार को बुलाए गए चक्का जाम में खालिस्तानी तत्व भी हिस्सा ले रहे थे?

बता दें कि जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार में मारा गया भिंडरावाला सिखों के धार्मिक समूह दमदमी टकसाल का प्रमुख था। भिंडरावाला ने सिखों के लिए अलग देश खालिस्तान की माँग की थी। इतना ही नहीं खालिस्तानी अलगाववादी उसे अपना आदर्श मानते हैं।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे कथित ‘किसानों’ ने आज (6 फरवरी 2021) ‘चक्का जाम’ का आह्वान किया था। यह चक्का जाम उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर पूरे देश में दोपहर 12 से 3 बजे के बीच करने का ऐलान था। हालाँकि, शांतिपूर्ण प्रदर्शन का भरोसा देने के बावजूद सरकार ने 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली की आड़ में हुए उपद्रव को देखते हुए पुलिस और सुरक्षाबल पूरी तरह मुस्तैद थे।

गौरतलब है कि हालिया सोशल मीडिया पर खालिस्तानी समर्थक धालीवाल का एक वीडियो वायरल हुआ था। आरोप है कि धालीवाल के संगठन पोयटिक जस्टिस फाउंडेशन ने ही स्‍वीडिश एक्टिविस्‍ट ग्रेटा थनबर्ग द्वारा साझा किए गए ‘टूलकिट’ को बनाया था। ताकि भारत को विश्व में बदनाम किया जा सके।

वायरल वीडियो में खालिस्तानी समर्थक धालीवाल द्वारा भारत विरोधी भड़काने वाले बयानों को सुना जा सकता है। क्लिप में वह कहता है, “यदि कृषि कानून कल वापस हो जाते हैं, तो यही हमारी जीत नहीं होगी। कृषि कानूनों की वापसी के साथ जंग की शुरुआत होगी और इसका अंत यहीं नहीं होगा। किसी को यह मत बताने दीजिए कि यह लड़ाई कृषि कानूनों को वापस लेने के साथ खत्‍म हो जाएगी, क्योंकि वे इस आंदोलन से ऊर्जा खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। वे आपको बताने की कोशिश कर रहे हैं कि आप पंजाब से अलग हो, और आप खालिस्तान आंदोलन से अलग हो, आप नहीं हो।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, धालीवाल का यह वायरल वीडियो 26 जनवरी को भारतीय दूतावास के बाहर प्रदर्शन के दौरान शूट किया गया था। हालाँकि, ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है।

‘माँ, माटी, मानुष के नाम पर ममता सरकार ने बंगाल को धोखा दिया’: JP नड्डा ने कहा- अब TMC का जाना और BJP का आना तय

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा पश्चिम बंगाल के दौरे पर हैं। बंगाल में बढ़ते राजनीतिक तापमान के बीच उन्होंने आज नदिया जिले के नवद्वीप में ‘परिवर्तन यात्रा’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने ममता सरकार पर जमकर हमला बोला। जेपी नड्डा ने कहा कि मुझे पश्चिम बंगाल की जनता का रुख साफ नजर आ रहा है कि परिवर्तन आएगा और कमल खिलेगा। यहाँ से TMC का जाना तय हो चुका है।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा, “ये माँ, माटी, मानुष के नाम पर आई सरकार ने बंगाल की जनता के साथ धोखा किया। 10 साल में ममता सरकार में माता को लूटा गया, बंगाल की अस्मिता पर आघात पहुँचाया गया, माटी की इज्जत भी नहीं की गई और मानुष की रक्षा नहीं की गई। यहाँ आया क्या तानाशाही। प्रशासन का राजनीतिकरण, पुलिस का क्रिमिनलाइजेशन और भ्रष्टाचार का इंस्टीट्यूशनाइजेशन हुआ।”

परिवर्तन यात्रा से पहले एक रैली को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा, “बंगाल की संस्कृति को ममता जी नहीं संभाल सकती, इसकी सुरक्षा बीजेपी के कार्यकर्ता करेंगे। ममता जिस तरह मेरे नाम के आगे विशेषण लगाती हैं, वो बताता है कि आपने बंगाल की संस्कृति का निरादर किया है।”

नड्डा ने कहा, “मैं देख रहा हूँ कि बंगाल की जनता ने टोलाबाजी की सरकार, कटमनी वाली सरकार, भ्रष्टाचार की सरकार को जड़ से उखाड़ कर फेंकना तय कर लिया है। यहाँ सिंचाई की व्यवस्था नहीं है। यहाँ स्टोरेज की व्यवस्था नहीं है। अब बंगाल में कमल खिलेगा और बंगाल में विकास होगा, ये मेरा आपसे वादा है।”

उन्होंने आगे कहा कि, बीजेपी ने तय किया है कि परिवर्तन यात्रा के माध्यम से बंगाल की जनता को जगाएँगे, उनको बताएँगे। बल्कि मुझे तो लगता है कि अब बंगाल की जनता जाग चुकी है। टीएमसी ने यहाँ भ्रष्टाचार को संस्थागत बना दिया था, प्रशासन का राजनीतिकरण कर दिया और पुलिस के साथ-साथ उसका इस्तेमाल क्रिमिनल एक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए किया गया।

वहीं बंगाल में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों पर नड्डा ने ममता सरकार को घेरते हुए कहा कि बंगाल में आज महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा अत्याचार हो रहा है। रेप के केस सबसे ज्यादा बंगाल में हो रहे हैं, घरेलू हिंसा सबसे ज्यादा बंगाल में हो रही है। बंगाल की मुख्यमंत्री एक महिला है, फिर भी महिलाओं की इज्जत न हो, तो बंगाल को परिवर्तन चाहिए।

रोड शो के दौरान ममता सरकार को विकास की राह में रोड़ा बताते हुए नड्डा ने कहा, “जो हर्षोल्लास मैं देख रहा हूँ वो बताता है कि मोदी जी के काम जो उन्होंने किए हैं और जो उन्होंने बंगाल को देने का प्रयास किया है, जिसे ममता जी ने रोकने का काम किया है। उससे यहाँ की जनता त्रस्त और दुःखी है।”

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बनर्जी के तानाशाह रवैए को लेकर कहा, “ममता बनर्जी अपने जिद और ईगो के कारण मोदी के पीएम किसान सम्मान कार्यक्रम को लागू नहीं होने दिया। हमारे बंगाल के 70 लाख किसान 14,000 रुपए के सहयोग से वंचित रहे। जब 25 लाख किसानों ने केंद्र को खुद अर्जी भेज दी तो कहती हैं कि मैं भी लागू करूँगी लेकिन अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।”

जय श्री राम के नारे पर ममता बनर्जी की बौखलाहट पर कटाक्ष करते हुए भाजपा नेता ने कहा, “जब हम बोलते हैं तो सामने से नारे लगते हैं जय श्री राम। जब मैं यहाँ आया तो हेलीपैड से सारे रास्ते मैं हाथ हिलाता था तो उधर से कहते थे जय श्री राम और ममता दी को जय श्री राम से इतना गुस्सा क्यों आता है। किसानों की सेवा की होती तो ये दिन देखने को नहीं मिलती।”

बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, “बंगाल की जनता के स्वास्थ्य की चिंता मोदी जी ने की थी। अब ममता जाएगी, रास्ते का रोड़ा खत्म होगा और मोदी जी का आयुष्मान भारत बंगाल की जनता को मिलेगा।” उन्होंने कहा कि आज जिस तरह से बंगाल में सरकार चल रही है, उसमें कोई भी व्यक्ति सरकार के विरोध में बोले, तो उसे जेल में डालने का काम ममता जी कर रही हैं। जिसने भी ममता जी के विरोध में बोला उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।

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रेल बजट को लेकर TMC के डेरेक ओ ब्रायन ने संसद में फैलाया झूठ, रेल मंत्रालय ने किया बेनकाब

संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव (Motion of Thanks) में शामिल होकर भाषण देते हुए तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने यूनियन बजट की आलोचना की और इसे दृष्टिकोण रहित बताया। उन्होंने कहा, “भारत का पहला पेपरलेस बजट 100 फ़ीसदी विज़नलेस बजट भी है। इस फर्जी बजट की नीति है भारत को बेचना।” 

ब्रायन का कहना था कि सरकार ने रेलवे, हवाई अड्डे और बंदरगाह बेच दिए हैं। इसके अलावा उन्होंने भारतीय रेलवे की कार्यप्रणाली पर भी कई आलोचनात्मक टिप्पणी की। उन्होंने भारतीय रेलवे पर पश्चिम बंगाल में 31 परियोजनाओं को आश्रय देने का आरोप लगाया। इसके अलावा कई परियोजनाओं को एसपीवी (SPV) मॉडल के अंतर्गत लेकर आने की भी आलोचना की, जिसमें राज्य सरकार भी हितधारक (stakeholder) बन जाती है। टीएमसी सांसद के मुताबिक़ रेलवे संघीय ढांचे (federalism) के मामले में असफल रहा है। क्योंकि एसपीवी प्रणाली के तहत राज्य सरकार को परियोजना का 50 फ़ीसदी खर्च उठाना होता है। जबकि इसके पहले तक परियोजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी। 

मोदी सरकार के रेलवे बजट को आम बजट मिलाने के फैसले को लेकर टीएमसी सांसद ने कहा कि अब कोई अलग रेलवे बजट नहीं है।

रेल मंत्रालय ने ब्रायन की बातों का करारा जवाब देते हुए मंत्रालय द्वारा लिए गए फैसले की वकालत की। इस मुद्दे पर जारी किए गए बयान में रेलवे मंत्रालय ने कहा कि अब रेलवे के खर्च आम बजट के साथ पेश किए जाते हैं। इसका मतलब ये नहीं है कि रेलवे के संसाधनों में कटौती की जाती है। मंत्रालय का कहना है कि बजट विलय के फैसले ने रेलवे को सरकारी नीतियों के केंद्र में लाया है और अधिकांश क्षेत्रीय आवंटन सुनिश्चित किए हैं। बयान के मुताबिक़, “विलय के फैसले की वजह से मल्टी मोडाल ट्रांसपोर्ट प्लानिंग (multi modal transport planning) में मदद मिली है। जो 1.07 लाख करोड़ रुपए की मदद से स्पष्ट है जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 53 फ़ीसदी अधिक है।” 

पश्चिम बंगाल को नज़रअंदाज़ करने के आरोपों का जवाब देते हुए मंत्रालय ने जानकारी दी। जिसके मुताबिक़ पश्चिम बंगाल में आधारभूत संरचना और सुरक्षा परियोजनाओं के अंतर्गत 2021-22 में 6636 करोड़ का बजट जारी किया गया है जो कि अभी तक का सबसे बड़ा बजट है। यह पिछले साल की तुलना में 26 फ़ीसदी ज़्यादा है और 2009-14 की तुलना में लगभग 51 फ़ीसदी ज़्यादा है।

पश्चिम बंगाल के लिए जारी की गई परियोजनाओं की जानकारी देते हुए मंत्रालय ने बताया कि प्रदेश को 53 परियोजनाएं दी जा रही हैं। जिसमें से 34 का टोकन आवंटन पूरा हो चुका है। इसमें से कुछ परियोजनाएं 45 साल पुरानी, लगभग 1974-75 के बीच की हैं जिन्हें भूमि अधिग्रहण, प्रदेश सरकार या स्थानीय कारणों के चलते टाला जा रहा था। अब इनके लिए धनराशि का आवंटन इनकी प्रगति और प्राथमिकता के आधार पर किया जाता है। इसलिए अब एक परियोजना में किसी तरह की समस्या आती है तो मंत्रालय उसके लिए धनराशि आवंटित नहीं करेगा।   

इसके अलावा मंत्रालय ने कुछ परियोजनाओं के लिए एसपीवी प्रोजेक्ट लागू करने का कारण भी बताया है। फ़िलहाल कुछ परियोजनाओं का खर्चा केंद्र सरकार ही उठाती है और कुछ को तमाम कारणों की वजह से एसपीवी के दायरे में रखा गया है। यह मॉडल रेलवे में संसाधनों की बढ़ोतरी करने के लिए तैयार किया गया है। मंत्रालय का कहना है कि एसपीवी की मदद से राज्य सरकारों को आर्थिक निर्णय लेने में मदद मिलेगी और उनकी भागीदारी बढ़ेगी। 

राज्य सरकारें भी ऐसे प्रोजेक्ट चाहती हैं जो जनता की माँग पर आधारित होते हैं। ऐसे प्रोजेक्ट नहीं चाहती हैं जो रेलवे के लिए फ़ायदेमंद होते हैं। एसपीवी प्रणाली के तरह राज्य सरकारों को परियोजनाओं का चुनाव करने की आज़ादी होगी और निजी सहायता, मुफ़्त ज़मीन और वायबिलीटी गैप फंडिंग (Viability Gap Funding) की मदद से बेहतर बनाने का विकल्प होगा। 

इन परियोजनाओं के लिए रेलवे मंत्रालय मुफ़्त ज़मीन और 50 फ़ीसदी खर्च की साझेदारी के विकल्प पर विचार कर रहा है। इसकी वजह से परियोजना में शामिल हित धारकों में समन्वय स्थापित होगा और प्रोजेक्ट के लिए अतिरिक्त फंड की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा रेल मंत्रालय ने उस आरोप को भी खारिज कर दिया है कि मंत्रालय ने पिंक बुक जारी नहीं की है। मंत्रालय के मुताबिक़ यह 3 फरवरी को जारी की गई थी और पब्लिक डोमेन पर मौजूद है। 

दरअसल, रेल मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से पहले ही निवेदन किया था कि वो भूमि अधिग्रहण, अतिक्रमण हटाने और क्षेत्रीय समस्याओं का जल्द से जल्द निस्तारण करे। जिसकी वजह से रेलवे के लगभग तीन दर्जन प्रोजेक्ट रुके हुए हैं लेकिन ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई नहीं की है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि वह ममता बनर्जी से निवेदन करना चाहते हैं वह प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए प्रोजेक्ट के लिए ज़मीन प्रदान करें।

रेल मंत्री के मुताबिक़ राज्य सरकार की वजह से इन परियोजनाओं में समय लग रहा है, पहले वामपंथी सरकार और अब तृणमूल सरकार। 45 वर्ष पुरानी परियोजनाएं रुकी हुई हैं। पहले रेल मंत्रालय ने बिना ज़मीन और फंड्स की उपलब्धता देखे प्रोजेक्ट आवंटन कर दिया था। इसकी वजह से रेलवे के बहुत से प्रोजेक्ट रुके हुए हैं। लेकिन अब प्रक्रिया बदल चुकी है, अब रेलवे सिर्फ तब प्रोजेक्ट शुरू करता है अगर उसके पास ज़मीन होती है। 

अब नाबालिग बहन से रेप की सजा बॉम्बे हाईकोर्ट ने की रद्द, कहा- POCSO कानून में नाबालिगों में सहमति से सेक्स अपरिभाषित

बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने उस 19 वर्षीय लड़के को सुनाई जाने वाली दस साल के कठोर कारावास की सजा को रद्द कर दिया है, जिस पर अपनी चचेरी बहन के साथ रेप का आरोप था। इसके लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का तर्क यह है कि नाबालिग की सहमति (Minor consent) पर कानूनी नजरिया साफ नहीं है। दरअसल, 19 साल के लड़के को अपने साथ रहने वाली नाबालिग चचेरी बहन के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी पाया गया था।

जानकारी के मुताबिक लड़की की उम्र 15 साल है और वह आठवीं कक्षा में पढ़ती है। लड़की दो सालों से अपने चाचा के घर पर रह रही थी। सितंबर 2017 में लड़की ने अपनी एक दोस्त को बताया कि उसके चचेरे भाई ने उसको गलत तरीके से हाथ लगाया था, जिसके बाद से उसके पेट में दर्द रहने लगा है। उसकी दोस्त ने उसकी यह बात अपनी क्लास टीचर को बताई।

पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने दिए ये बयान

जब टीचर ने पीड़ित लड़की से इस बारे में पूछा तो लड़की ने टीचर को अपने साथ हुए यौन शोषण की जानकारी दी और बताया कि उसका चचेरा भाई उसके साथ क्या करता है। तीन मार्च 2018 को उस लड़के के खिलाफ FIR दर्ज की गई। लेकिन जब FIR के बाद बच्ची का मेडिकल चेकअप किया गया, तो कोई बाहरी चोट नहीं पाई गई।

पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि साल 2017 के सितंबर, अक्तूबर और फिर 2018 की फरवरी में उसके चचेरे भाई ने उसके साथ यौन शोषण किया। दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने पीड़ित बच्ची का बयान दर्ज किया गया। बयान में पीड़िता ने यह भी बताया कि यह सहमति से किया गया कार्य था और केवल एक बार नहीं, बल्कि चार-पाँच बार। लड़की ने मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए गए बयान में कहा कि उसने जो बयान पुलिस के सामने दिए थे, वे टीचर के आग्रह पर दिए गए थे।

कोर्ट ने नाबालिगों की सहमति पर दिया यह तर्क

निचली अदालत की तरफ से लड़के को दोषी ठहराए जाने के बाद लड़के ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की और जमानत की माँग की। तथ्यों को देखने के बाद न्यायमूर्ति शिंदे ने कहा कि हालाँकि कानून में नाबालिगों की सहमति को वैध नहीं माना गया है, लेकिन नाबालिगों के बीच सहमति से बनाए गए यौन संबंधों पर कोई कानूनी स्पष्टता नहीं है या कानूनी नजरिया साफ नहीं है।

न्यायमूर्ति शिंदे ने कहा, “मैं इस तथ्य से भी अवगत हूँ कि नाबालिगों के बीच सहमति से यौन संबंध एक कानूनी अस्पष्ट क्षेत्र रहा है, क्योंकि नाबालिग द्वारा दी गई सहमति को कानून की दृष्टि में एक वैध सहमति नहीं माना जाता है।” न्यायालय ने कहा कि इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि पीड़िता ने अपना बयान पलटा था और यहाँ तक ​​कि उसकी माँ अभियोजन पक्ष से भी नहीं मिली थी। 

बेंच ने आगे कहा कि ट्रायल के दौरान भी आरोपित को जमानत दी गई थी और उसने इसका दुरुपयोग नहीं किया था। इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने आरोपित की सजा को रद्द कर दिया है और लड़के को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट तय समय में लड़के की अपील पर सुनवाई करेगा।

गौरतलब है कि बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने 19 जनवरी को अपने एक फैसले में कहा था कि ‘स्किन टू स्किन’ स्पर्श हुए बिना या कपड़ों के ऊपर से नाबालिग पीड़िता को ‘स्पर्श करना’ पॉक्सो कानून (POCSO Act) या यौन अपराधों पर बाल संरक्षण कानून के तहत यौन हमला नहीं माना जा सकता। हालाँकि चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की अगुवाई वाली देश की शीर्ष कोर्ट ने इस फैसले पर 27 जनवरी को रोक लगा दी थी।

इसके बाद एक और मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच की एकल पीठ ने यह फैसला दिया कि किसी लड़की का हाथ पकड़ना और आरोपित का पैंट की जिप खोलना प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज ऐक्ट, 2012 (POCSO) के तहत यौन हमले की श्रेणी में नहीं आता। 

बुधवार (जनवरी 29, 2021) को बॉम्बे हाई कोर्ट का एक और फैसला सामने आया। ये भी रेप से जुड़ा मामला था। इस मामले में भी निचली अदालत ने 26 साल के आरोपित को रेप का दोषी पाया था, लेकिन जस्टिस पुष्पा ने उसे बरी कर दिया। जस्टिस पुष्पा ने तर्क दिया, “बिना हाथापाई किए युवती का मुँह दबाना, कपड़े उतारना और फिर रेप करना एक अकेले आदमी के लिए बेहद असंभव लगता है।”