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‘लव जिहाद’ के खिलाफ बने कानूनों पर रोक लगाने से SC का इनकार, तीस्ता सीतलवाड़ जैसों ने लगाई थी कई याचिकाएँ

हाल ही में विभिन्न राज्य सरकारों ने ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून बनाया, ताकि महिलाओं की प्रताड़ना रोकी जा सके। उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और असम में ऐसे कानून बने, जबकि कर्नाटक, मध्य प्रदेश और हरियाणा में इसकी तैयारी चल रही है। ये सभी भाजपा शासित राज्य हैं। इन कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में धड़ल्ले से याचिकाएँ दाखिल की गई हैं, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इन कानूनों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

हालाँकि, इन याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई हेतु स्वीकार भी कर लिया है। इन याचिकाओं में ‘लव जिहाद’ के खिलाफ बने राज्य सरकारों के कानूनों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस बात का डर जताया है कि अन्य राज्यों में भी इसी तरह के कानून आ रहे हैं, जो ठीक नहीं है। इन कानूनों को धोखे से शादी और जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए लाया गया है, ताकि महिलाएँ इसका शिकार न बनें।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि किसी भी शादी को लेकर ये साबित करना कि ये धर्मांतरण के लिए नहीं किया गया है – कपल्स पर ही इसका सारा दारोमदार थोप दिया गया है, जो आपत्तिजनक है। लेकिन, जब उन्होंने इन कानूनों के लागू होने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की माँग की, तो मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इसके लिए याचिएकाकर्ताओं को उन राज्यों के हाईकोर्ट्स में जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो इन मुद्दों पर चर्चा कर के दलीलें सुनने के पक्ष में है, बजाए कि इसे अभी रोकने के। इस मामले में राज्य सरकारों का पक्ष जानने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (जनवरी 4, 2021) को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकारों को नोटिस भी जारी किया। इस पीठ में जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम और जस्टिस एएस बोपन्ना भी शामिल थे। विकास ठाकरे और तीस्ता सीतलवाड़ के NGO ने ये याचिकाएँ दायर की हैं।

इन याचिकाकर्ताओं ने अपने वकीलों के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि ‘लव जिहाद’ कानून की आड़ में पुलिस ने कई निर्दोष लोगों को उठा लिया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि इलाहबाद हाईकोर्ट में ऐसी याचिकाओं पर पहले से ही सुनवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि जब कई हाईकोर्ट्स में केस पेंडिंग हैं तो सुप्रीम कोर्ट को सुनना चाहिए। CJI ने कहा कि वो देखेंगे कि ये कानून ‘दमनकारी’ (आरोपों के हिसाब से) हैं या नहीं।

हाल ही में उत्तर प्रदेश में लव जिहाद पर बने कानून के खिलाफ 104 रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों ने सीएम योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखते हुए इसे नफरत की राजनीति का केंद्र बताया था। जिस पर योगी सरकार के मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि उन अधिकारियों को सेवा के दौरान गलत तरीके से हासिल की गई संपत्ति को खोने का डर सता रहा है। हालाँकि, इससे दोगुने से भी ज्यादा अधिकारियों ने पत्र लिख कर कानून का समर्थन भी किया।

बदायूँ गैंगरेप: प्राइवेट पार्ट में रॉड डाल कर फाड़ी गई महिला की आँत, खून रोकने के लिए ठूँसी गई रुई और कपड़ा

उत्तर प्रदेश के बदायूँ में अधेड़ उम्र की महिला के साथ हुआ दुष्कर्म दिल्ली के निर्भया कांड की याद दिलाने वाला है। पूरा मामला उघैती थाना क्षेत्र का है। वहाँ एक 50 वर्षीय महिला रविवार (जनवरी 3, 2021) को मंदिर जाने के लिए घर से तो जरूर निकली। लेकिन बाद में खून से लथपथ उसकी लाश मिली। पोस्टमार्टम हुआ तो उसके साथ हुई नृशंसता का खुलासा हुआ।

रिपोर्ट के मुताबिक, महिला के साथ केवल गैंगरेप ही नहीं किया गया बल्कि उसके प्राइवेट पार्ट में रॉड डाली गई और उसके भीतर के अंगों (आंँतों) को भी फाड़ दिया गया। दुष्कर्म के दौरान महिला का एक पैर और पसली भी तोड़ी गई। जाँच में पता चला कि महिला के शरीर से सारा खून बह जाने के कारण उसकी मौत हुई।

शव का पोस्टमार्टम करते हुए स्वयं तीन महिला डॉक्टरों का पैनल हैरान हो गया। जाँच में उन्होंने पाया कि वारदात को अंजाम देने वाले आरोपितों ने पहले महिला के प्राइवेट पार्ट में रॉड घुसाई और जब खून तेजी से बहने लगा तो उसे रोकने के लिए उन्होंने गुप्तांग में कपड़े व रुई घुसा दी। घटनास्थल पर महिला के सारे कपड़े खून से सने मिले थे।

महिला के साथ हैवानियत की हद पार करने वालों में एक का नाम महंत बाबा सत्यनारायण है और दूसरा उसका साथी वेदराम व तीसरा सत्यनारायण का ड्राइवर जसपाल है। कथिततौर पर, तीनों ने महिला के साथ पहले बर्बतापूर्वक बलात्कार किया जिसके बाद उसी रात 12 बजे उसकी मौत हो गई। 

बता दें कि इस घटना को लेकर महिला के परिजनों ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि वह सूचित किए जाने के बावजूद घटनास्थल पर समय से नहीं पहुँचे। और जब पहुँचे तब शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

मीडिया खबरों के अनुसार, महंत ने महिला के कुएँ में गिरने की कहानी बना कर पहले दोनों आरोपितों को मदद के लिए बुलाने की बात कही और ऐसे जाहिर किया जैसे पता ही नहीं कि हुआ क्या। इसके बाद पुलिस उन्हीं के बयान के आधार पर टालमटोल करने लगी। वहीं इंस्पेक्टर राघवेंद्र प्रताप सिंह ने दावा भी किया कि उन्होंने महिला कांस्टेबल से महिला का शरीर दिखवाया था, लेकिन उसके शरीर पर ऐसा कोई चोट का निशान नहीं मिला था। 

पुलिस की लापरवाही के उजागर होने के बाद एसएचओ को निलंबित कर दिया गया है। वहीं तीनों आरोपितों में दो को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है। बदायूँ के एसएसपी ने बताया कि 50 साल की महिला की मौत के मामले में पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 और 376 डी के तहत मामला दर्ज किया है। फरार आरोपित की धड़-पकड़ के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, मृतक महिला के पति का कहना है कि घटना वाले दिन देर रात महंत और उसके दो लोग उनकी पत्नी को अपने साथ लेकर आए और उनके सामने उसके कुएँ में गिरने की झूठी कहानी बनाई। पति के मुताबिक, महिला उस समय जिंदा थी, इससे पहले वह तीनों से कुछ पूछ पाते, वह सारे गाड़ी छोड़ कर वहाँ से फरार हो गए।  थोड़ी देर में महिला ने भी दम तोड़ दिया। उसके गुप्तांग समेत शरीर के कई हिस्सों पर कई चोटें थी। महिला के बेटे ने कहा, “हमें पक्का पता था कि पुजारी और उसके साथी झूठ बोल रहे हैं। वह मेरी माँ को अस्पताल नहीं ले गए।”

‘इस्लाम में हॉट मम्मियों का विग पहनना हराम’: अभिनेत्री को ‘ब्लैक विडो’ के कॉस्ट्यूम में देख भड़के इस्लामी कट्टरपंथी

एक मलेशियन अभिनेत्री ने ‘ब्लैक विडो’ के कॉस्ट्यूम में तस्वीरें सोशल मीडिया पर अपलोड कर दी, जिसके बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने उनके खिलाफ बयानबाजी शुरू कर दी है। मलेशिया की रेबेक्का नूर अल इस्लाम (Rebecca Nur Al Islam) ने ‘ब्लैक विडो’ फिल्म की स्टाइल में पोज देते हुए इंस्टाग्राम पर तस्वीरें शेयर की, जिसमें वो लाल रंग की विग पहने हुए दिख रही हैं। इससे पहले वो हर तस्वीर में हिजाब में ही दिखती थीं। कट्टरपथिंयों ने इसे हराम करार दिया।

रेबेक्का नूर अल इस्लाम की इन तस्वीरों को देख कर इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए और उन्होंने विग पहनने को इस्लाम में हराम बताया। उनका कहना है कि हिजाब की जगह इस लाल रंग के विग से भी असली बाल ढके ही हुए हैं, लेकिन फिर भी ये इस्लाम में जायज नहीं है। इसके अलावा उन्होंने एक पार्टी की कुछ तस्वीरें भी शेयर की, जिसमें वो हँसी-खेल में एक गेम खेलती हुई दिख रही हैं, जिससे इस्लामी नाराज दिखे।

असल में उस ‘गेम’ में 34 वर्षीय अभिनेत्री की आँखों पर पट्टी बँधी हुई थी और उन्हें कई पुरुषों को छू कर पहचानना था कि उनमें से उनका पति कौन है। हालाँकि, गौर से देखा जाए तो ‘ब्लैक विडो’ के कॉस्ट्यूम में भी वो काले रंग का हिजाब पहनी हुई हैं और उसके ऊपर से ही उन्होंने विग लगाया था। नूर मोहम्मद नामक यूजर ने सलाह दी कि वो अपना नाम ‘रेबेक्का अल-जाहिल’ रख लें। मुहम्मद फैज नामक फेसबुक यूजर ने भी इसे हराम बताया।

रेबेक्का के ‘गेम’ को लेकर भी नाराज दिखे कई मुस्लिम

रामी जाम्ब नामक व्यक्ति ने उन्हें सलाह दी कि हिजाब पहनना अल्लाह की सलाह है और उन्हें इतनी समझ होनी चाहिए। इंस्टाग्राम पर उनके 7.33 लाख फॉलोवर्स हैं, जिनमें से कई ने उन्हें हिजाब पहनने और विग न पहनने की सलाह दी। एक ने तो यहाँ तक लिख डाला कि ‘इस्लाम में हॉट मम्मियों का विग पहनना हराम है।’ उसने लिखा कि ये कलंक है। मलय भाषा में भी कइयों ने उन्हें इस्लाम के तौर-तरीकों को लेकर ज्ञान दिया।

हाल ही में एक टीवी प्रेजेंटर ने बताया था कि एक मौलवी ने कहा था कि भौंहों के साथ कुछ भी छेड़छाड़ करना इस्लाम में महिलाओं के लिए हराम है। इसके बाद टीवी प्रेजेंटर सायरा खान ने बिकनी में अपनी तस्वीर भेजी, जिसमें वो पेट के बल लेटी हुई थीं। उन्होंने ‘Peach’ नामक फल की इमोजी भेजी और मौलवी को लिखा – “ऐ पिछड़े प्रागैतिहासिक डायनासोर, मेरे  (Peach Emoji) को किस कर लो।” इसके बाद एक इंस्टाग्राम यूजर ने उन्हें धमकाया था कि अगर वो अपने जीवन का महत्व समझती हैं तो इस्लाम को इन सबसे दूर रखें।

#करें_योगदान_रामलला_के_धाम: रामभक्तों पर कट्टरपंथियों के पथराव और मजहबी घृणा के बीच जारी है वर्चुअल मुहिम

राम मंदिर निर्माण हेतु समूचे भारत में चंदा इकट्ठा करने के लिए मुहीम चलाई जा रही है। इसका मकसद सिर्फ यही है कि सैंकड़ों लोगों के सपने को आम जनता के योगदान से साकार किया जाए। इसके लिए हर प्रदेश में रामभक्त अपनी रैली करके भक्तिमय माहौल बना रहे हैं। इसी का नतीजा है कि आज सुबह ट्विटर पर हैशटैग #करें_योगदान_रामलला_के_धाम ट्रेंड करने लगा, जिसमें लोगों ने राम मंदिर बनाने के लिए योगदान देने का आह्वान किया।

हैशटैग के साथ हो रहे ट्वीट को देख कर यही लगता है कि राम मंदिर को लेकर देश के कोने कोने में उत्साह है। कहीं वीएचपी द्वारा 4 लाख ग्रामों में जाकर 11 करोड़ परिवारों से योगदान देने की बात बताई जा रही है तो कहीं मंदिर का प्रस्तावित रूप साझा करके अनुरोध किया जा रहा है कि इसके निर्माण में सहयोग की बहुत आवश्यकता है। अब तक इस वर्चुअल मुहीम पर करीब 37 हजार के करीब ट्वीट किए जा चुके हैं और आज सुबह से ये टॉप 10 में ट्रेंड कर रहा है।

मगर, इस माहौल में ये ध्यान देने वाली बात है कि रामभक्तों के लिए घर घर जाकर चंदा देने के लिए लोगों को प्रेरित करना इतना भी आसान कार्य नहीं है। जगह जगह पर कट्टरपंथी ताक लगाए बैठे हैं। अभी पिछले दिनों इंदौर जिले के चाँदन खेड़ी गाँव में 29 दिसंबर 2020 को हिंदूवादी संगठन के लोगों पर पथवराव की घटना सामने आई थी। पूरे हमले में 12 लोग के घायल हुए थे। पड़ताल में पता चला कि मस्जिद के सामने कुछ कार्यकर्ता हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे और रैली निकालने वाले जय श्रीराम कह रहे थे, जिससे पूरा विवाद पैदा हुआ और बात पत्थरबाजी व तोड़फोड़ तक पहुँच गई। 

इसी प्रकार उज्जैन के बेगमबाग से भी ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। वहाँ ‘रामनिधि संग्रहण’ रैली निकालने के दौरान मुस्लिम समुदाय के अराजक तत्वों ने हिन्दू संगठन पर पथराव किया था। इसके बाद दोनों समुदायों के बीच झड़प हुई और इलाके में तनाव व्याप्त हो गया था। वहाँ खड़ी कई गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। तोड़फोड़ और पथराव की इस घटना में लगभग 10 लोग घायल हुए थे।

बता दें कि एक ओर जहाँ वर्चुअल मुहीम अपने जोरों पर है और दूसरी ओर कट्टरपंथियों’ का चेहरा भी हिंदूवादी संगठनों की रैलियों पर पत्थरबाजी करके सामने आ रहा है, तो ऐसे में ये जानने की आवश्यकता है कि हकीकत में राम मंदिर के लिए लोग कितना बढ़ चढ़ कर योगदान रहे हैं और किस तरह कई मुश्किलें आने के बाद भी रामभक्तों के प्रयास सफल हो रहे हैं।

दो दिन पहले की खबर है कि मात्र 2 दिन में गाजियाबाद से राम मंदिर के लिए लोगों ने 5 करोड़ रुपए का दान दे दिया । एक अकेले रामभक्त ने पूरे 2 करोड़ 51 लाख 1 रुपए दिए हैं। हर प्रसाद नाम के इस भक्त का कहना है कि वह अपनी जवानी से राम मंदिर आंदोलन में जुड़े रहे हैं और अब अपनी आँखों के सामने जब उसको बनता देख रहे हैं तो वह कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते। उन्होंने इस पावन कार्य के लिए पर्चियाँ बनवाई हैं, जिसमें कम से कम दान की राशि 10 रुपए रखवाई गई है, वहीं ज्यादा से ज्यादा में दान श्रद्धालु अपनी इच्छानुसार दे सकते हैं।

केवल अधिकृत ट्रस्ट को ही दें अपना योगदान

पिछले दिनों राम मंंदिर निर्माण के नाम पर, आस्था के नाम पर कुछ लोग ठगी करने लगे थे। जिसके कारण आपको भी काफी सावधान रहने की जरूरत है, ताकि आपके साथ कोई भी ट्रस्ट या व्यक्ति धार्मिक आस्था के नाम पर पैसे न ऐंंठ सकें। अगर आप अपनी आस्था से दान देना चाहते हैं तो राम मंदिर निर्माण के लिए बनाए गए अधिकृत ट्रस्ट को ही दें। जिसके लिए डीएम ने जिस वेबसाइट के बनने की बात कही है।

कोरोना गाइडलाइंस की अनदेखी.. नाबालिगों को बुलाकर परोसी अश्लीलता: मुनव्वर फारूकी की जमानत याचिका दूसरी बार रद्द

अपने तथाकथित हास्य कार्यक्रमों के जरिए हिन्दू देवी-देवताओं को निशाना बनाने वाले कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी (Munawar faruqui) की जमानत याचिका लगातार दूसरी बार खारिज हो गई। इंदौर के सत्र न्यायलय ने उसे मंगलवार (जनवरी 5, 2021) को जमानत देने से इनकार कर दिया। भाजपा के एक स्थानीय विधायक के बटे ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश यतींद्र कुमार गुरु ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ये आदेश दिया।

मुनव्वर फारूकी गुजरात के जूनागढ़ का रहने वाला है। इंदौर के एक कार्यक्रम में हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने के कारण लोगों ने उसकी पिटाई कर के साथियों सहित पुलिस को सौंप दिया था। मुनव्वर फारूकी के साथ-साथ उसके साथी नलिन यादव की जमानत याचिका भी ख़ारिज हो गई। उसने ही इस कार्यक्रम का आयोजन किया था। उसके वकील ने मामला राजनीतिक दबाव में दर्ज किए जाने का आरोप लगाया था।

वकील ने कोर्ट में ये भी दावा किया कि इन दोनों के खिलाफ लगाए गए आरोप अस्पष्ट हैं। उसने कहा कि ये दोनों कलाकार हैं और नववर्ष के अवसर पर इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने ऐसी कोई भी टिप्पणी नहीं की थी, जिससे किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचे। हालाँकि, अभियोजन पक्ष के वकील विमल मिश्रा ने जमानत याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कार्यक्रम अश्लीलता से भरा था और उसमें नाबालिग लड़के-लड़कियों को भी बुलाया गया था।

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के आलोक में जारी किए गए दिशानिर्देशों के हिसाब से इस कार्यक्रम के लिए प्रशासन की अनुमति लेना अनिवार्य था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। शहर के एक कैफे में आयोजित इस कार्यक्रम में हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक भी बनाया गया। इससे पहले शनिवार को भी इन दोनों की जमानत याचिका ख़ारिज कर दी गई थी। इस मामले में कुल 5 आरोपित हैं।

ये मामला तुकोगंज थाना क्षेत्र का है। स्थानीय भाजपा विधायक के बेटे एकलव्य सिंह गौड़ ने जनवरी 1,2021 की रात को थाने में मुनव्वर फारूकी समेत 5 को आरोपित बनाते हुए मामला दर्ज कराया था। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित के साथ-साथ गोधरा कांड का मजाक बनाए जाने का भी आरोप है। एकलव्य अपने साथियों के साथ कार्यक्रम में आए थे और उन्होंने पाया कि कॉमेडी के नाम पर आपत्तिजनक सामग्रियाँ परोसी जा रही हैं।

‘लाइव हिंदुस्तान’ की खबर के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने जानकारी दी है कि इस विवादास्पद कार्यक्रम को लेकर 5 आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड विधान (IPC) की धारा 295-ए (किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से जान-बूझकर किए गए विद्वेषपूर्ण कार्य), धारा 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के उद्देश्य से जान-बूझकर कहे गए शब्द) और अन्य सम्बंधित प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया था।

पिछली बार सुनवाई के दौरान फारुकी के वकील अंशुमन श्रीवास्तव ने अदालत में बहस के दौरान कहा था कि यह मामला पार्टीगत राजनीति से प्रेरित होकर दर्ज कराया गया है। श्रीवास्तव ने कथित कॉमेडियन के पक्ष में पैरवी करते हुए करते हुए मामले में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया था। वकील अंशुमन श्रीवास्तव मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी लीगल सेल के सचिव और राज्य प्रवक्ता हैं।

नाश्ते में आर्सेनिक ट्राइऑक्साइड जहर देकर हुई थी मारने की कोशिश: ISRO के शीर्ष वैज्ञानिक तपन मिश्रा का खुलासा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)के शीर्ष वैज्ञानिक तपन मिश्रा (Tapan Misra) ने मंगलवार (जनवरी 5, 2021) को खुलासा किया कि उन्हें तीन साल से अधिक समय पहले जहर देकर मारने की कोशिश हुई थी। अपने हालिया फेसबुक पोस्ट ‘लॉन्ग केप्ट सीक्रेट’ में उन्होंने इस बात का खुलासा किया कि मई 23, 2017 को बेंगलुरु में इसरो मुख्यालय में पदोन्नति साक्षात्कार के दौरान उन्हें घातक आर्सेनिक ट्राइऑक्साइड जहर देकर मारने की कोशिश की गई थी।

मिश्रा ने अंदेशा जताया कि उन्हें डोसे की चटनी में जहर देकर मारने की कोशिश हुई थी, जिसके बाद उन्हें तनाव और दर्द से उबरने में 2 साल लग गए। अपने पोस्ट में उन्होंने अपनी हत्या के प्रयासों में अमेरिका की संलिप्ता भी बताई। तपन ने लिखा कि साल 2019 में अचानक एक भारतीय अमेरिकी प्रोफेसर उनके कार्यालय में दिखाई दिया और उन्हें जहर देने की इस घटना पर चुप रहने को भी कहा गया। इससे पहले उन्हें ईमेल के जरिए भी सैंकड़ों धमकियाँ मिलती रहती थीं। वह बताते हैं कि कई बार सुरक्षा एजेंजजियों ने उन्हें आगाह करके बचाया था।

जहर दिए जाने के अपने आरोपों पर वैज्ञानिक तपन मिश्रा ने कहा, “कोई निश्चित रूप से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को कुछ नुकसान पहुँचाना चाहता था। एकमात्र उपाय अपराधी को पकड़ना और उन्हें दंडित करना है।”

अपने फेसबुक पोस्ट में मिश्रा ने उन सहकर्मियों के प्रति भी दुःख व्यक्त किया है, जो उन्हें इस हमले के बाद नकारने लगे थे। वह कहते हैं कि लाख प्रयासों के बाद उन्हें आज भी न्याय नहीं मिला है। उनके मुताबिक, ISRO के दो अध्यक्षों ने तो उनके विरोध पर आँख मूंद ली है और उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा।

फेसबुक पोस्ट का पहला हिस्सा

अपने पोस्ट की शुरुआत में उन्होंने कई वैज्ञानिकों की संदिग्ध मौत का उल्लेख किया। उन्होंने 1971 में प्रोफेसर विक्रम साराभाई, 1999 में डॉ एस श्रीनिवासन की आकस्मिक मौत और 1994 में नम्बी नारायण के साथ हुई साजिश का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने (तपन मिश्रा) कभी सोचा भी नहीं था कि वह इन रहस्यों का एक हिस्सा बनेंगे।

उन्होंने आशंका जताई कि उन्हें लगता है कि डोसे की चटनी में मिलाकर जहर दिया गया जिसके कारण वह असहनीय पीड़ा से गुजरे। उन्होंने मलद्वार से खून के रिसाव के कारण 30-40% खून का गँवाया। ISRO के वैज्ञानिक के मुताबिक, उन्हें दो सालों तक साँस लेने में तकलीफ, त्वचा पर अजीब फोड़े-फुंसियाँ, शरीर की खाल का उतरना, हाथ-पाँव के नाखूनों का जाना, शरीर के हर बाहरी व आंतरिक हिस्से में फंगल इन्फेक्शन.. ये सब झेलना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनका इलाज टीएमएच मुंबई और दिल्ली एम्स में भी चला।

फॉरेंसिक विशेषज्ञ ने उन्हें बताया कि उन्होंने अपने पूरे करियर में ऐसा हत्या का प्रयास नहीं देखा। वह अपने पोस्ट में उन साथियों का और गृह मंत्रालय की सुरक्षा एजेंसियों का आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने जहर के हमले को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी। वह बताते हैं कि उनके मुताबिक उन्हें मॉलिक्यूलर लेवल सस्पेंशन पर जहर दिया गया, वो भी गरिष्ठ भोजन के ठीक बाद।

ऐसा सस्पेंशन रंगरहित, खुशबू रहित और स्वादरहित होता है, इसलिए इसे लेकर संदह नहीं किया जा सकता। ये पेट में जाता है और लाल रक्त कणिकाओं को नष्ट करता है, जो बाद में रक्त धमनियों में इकट्ठा होती है और व्यक्ति हार्ट अटैक से दो या तीन घंटे बाद मर जाता है। मिश्रा इसे अपनी खुशकिस्मती कहते हैं कि उन्होंने उस दिन लंच नहीं किया था। वह इस हमले को कोई जासूसी अटैक बताते हैं, जिनका मकसद एक ऐसे वैज्ञानिक को हटाना था, जिसने सैन्य और वाणिज्यिक महत्व के महत्वपूर्ण योगदान दिया हो।

फेसबुक पोस्ट का दूसरा हिस्सा

वह 3 मई, 2018 का जिक्र करते हैं और याद करते हैं कि कैसे सुरक्षा एजेंसियों के कारण उस दिन उनकी जान बच पाई और एक भयावह घटना में 100 करोड़ की लैब क्षतिग्रस्त हो गई। इसी तरह 19 जुलाई, 2019 को एक भारतीय अमेरिकी वैज्ञानिक ने उन्हें उनके कार्यालय में आकर भविष्य में इस सम्बन्ध में एक भी शब्द न बोलने को कहा। उसी साल 12 जुलाई, 2019 को उनकी सुरक्षा के साथ एक भारी खिलवाड़ हुआ और उन्हें हाइड्रोजन साइनाइड दिया गया। इस जहर का असर इतना भयावह था कि उन्हें मिर्गी आई, उनकी यादश्त चली गई। वह कहते हैं उस दिन बचे तो सिर्फ़ अपने PSO के कारण। उसने उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया और फौरन वहाँ उनका इलाज शुरू हुआ। उनके मुताबिक, शायद ये सब चंद्रयान 2 की लॉन्च डेट पर मौजूद रहने से रोकने के लिए हुआ।

फेसबुक पोस्ट का तीसरा हिस्सा

वह अपने पोस्ट में ऐसी ही कई चौंकाने वाली बातों का जिक्र करते हैं। वह लिखते हैं कि पिछले दो सालों में उन्होंने अपने क्वार्टर में कई बार कोबरा और क्रेट जैसे जहरीले साँपों को देखा है। जबकि कार्बोलिक एसिड वेंट्स को हर 10 फीट पर डाला जाता है, फिर भी साँप घुसने में कैसे कामयाब रहा? वह अपनी चार बिल्लियों और सिक्योरिटी स्टाफ के शुक्रगुजार हैं कि उनके कारण ये साँप हर बार पकड़ लिए गए। वह कहते हैं कि कुछ तीन महीने पहले उन्हें उस सुरंग का पता चला, जहाँ से साँप आ रहे थे जिसके बाद उन्होंने उसे बंद करवा दिया।

उन्होंने अपने पोस्ट में अपने बेटे पर सितंबर में हुए एक और हमले के प्रयास का जिक्र किया। उन्होंने अपने साथियों, बुद्धिजीवियों से उनकी आपबीती आगे तक पहुँचाने की अपील की और अपने व अपने परिवार की सुरक्षा की माँग की। मिश्रा अपने साथ हुई घटनाओं के मद्देनजर बताते हैं कि उन्हें विश्वास है कि ऐसे लोग हमारे सिस्टम में मौजूद हैं और वैज्ञानिकों की रहस्यमय मौतों व हमारे संस्थानों के विनाश के लिए जिम्मेदार हैं।

ऑपइंडिया की तपन मिश्रा से बातचीत

बता दें कि तपन मिश्रा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अहमदाबाद स्थित अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के निदेशक के रूप में सेवा दे चुके हैं। ऑपइंडिया ने इस पोस्ट को देखने के बाद तपन मिश्रा से बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने बातचीत करते हुए कहा, “सरकार और राजनीतिक तंत्र से मेरा निवेदन है कि जो लोग देश का निर्माण करते हैं, अगर हम उनकी रक्षा नहीं करते हैं, अगर हम अपनी संपत्ति की रक्षा नहीं करते हैं, तो कल हमारा देश नष्ट हो जाएगा।”

मोबाइल चोर था झारखंड का तबरेज अंसारी, साथी चोर आरिफ पकड़ा गया दो फोन के साथ; भीड़ ने की थी पिटाई

आपको झारखंड के सरायकेला-खरसावाँ जिले के सरायकेला थाना इलाके के धातकीडीह गाँव में करीब डेढ़ साल पहले तबरेज अंसारी (Tabrez Ansari) नामक चोर की मौत का मामला याद होगा। तबरेज अंसारी की मौत के मामले के सहारे पूरे देश में ‘मॉब लिंचिंग’ का माहौल होने का दुष्प्रचार भी फैलाया गया था। अब इस घटना के दिन चोरी किए गए दो मोबाइल फोन्स के साथ खरसा के कदमडीहा गाँव निवासी आरिफ अंसारी (Arif Ansari) को दबोच लिया गया है। पुलिस लगातार इस मामले पर नजर बनाए हुए थी।

आरिफ अंसारी इससे पहले भी मोबाइल फोन्स की चोरी और चोरी किए गए मोबाइल फोन्स की खरीद-फरोख्त करने के मामले में जेल जा चुका है। उस पर पहले से ही कई मामले दर्ज हैं। थाना प्रभारी सनोज कुमार चौधरी इस पूरे मामले में अनुसंधान का नेतृत्व कर रहे और उन्होंने पूरी सजगता के साथ जाँच करते हुए आरोपित आरिफ को गिरफ्तार किया। वो मृतक तबरेज अंसारी का साथी था और चोरी का सामान बेचा करते थे।।

इस पूरे मामले को संसद में भी उठाया गया था और केंद्र के साथ-साथ झारखंड में भी भाजपा की सरकार होने के कारण विपक्षी दलों और नेताओं ने ‘मुस्लिमों की मॉब लिंचिंग’ का मामला उठाते हुए तबरेज अंसारी की मौत के मामले में राजनीति की थी। उससे ‘जय श्री राम’ बुलवाए जाने के आरोपों के अलावा ‘हिंदूवादी गुंडों’ को उसकी हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। मोबाइल फोन्स की चोरी का ये मामला जून 17, 2019 का है, जो धातकीडीह गाँव में घटी थी। गाँव के हेमसागर प्रधान और राजेश प्रमाणिक ने दर्ज कराया था।

ये मोबाइल फोन्स उनके घर से ही चोरी हो गए थे। इसके बाद से ही पुलिस ने इन चोरी हुए मोबाइल फोन्स के EMI नंबरों को नोट कर के उन्हें ट्रेसिंग के लिए सर्विलांस पर रख दिया था और इस पर नजर रखी गई थी। हाल ही में, चोरी हुए ये दोनों मोबाइल फोन्स ऑन किए गए, जिससे पुलिस तुरंत सतर्क हो गई। छानबीन के बाद पुलिस आरिफ अंसारी के घर पहुँची और उसे चोरी हुए मोबाइल फोन्स के साथ गिरफ्तार कर लिया।

सरायकेला थाना अंतर्गत धातकीडीह गाँव में हुई चोरी की घटना के बाद ही ग्रामीणों ने तबरेज अंसारी नामक चोर को पकड़ के पीटा था। मोहम्मद इरफान और नुमेर अली नामक उसके दो साथी भागने में सफल रहे थे। ये दोनों अब भी फरार हैं और पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी है। फरार आरोपितों के खिलाफ उनके परिजनों ने भी गुमशुदगी का कोई मामला नहीं दर्ज कराया है। पिटाई के 3 दिन बाद तबरेज अंसारी की मौत हुई थी।

सितम्बर, 2019 में झारखंड पुलिस ने तबरेज अंसारी की मौत के मामले में दायर आरोप-पत्र से हत्या की धारा को हटा दिया था। पुलिस ने डॉक्टरों की रिपोर्ट (पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट) का हवाला देते हुए कहा था कि तबरेज की मौत तनाव और कार्डियक अरेस्ट (हृदयाघात) की वजह से हुई थी। झारखंड पुलिस के इस फैसले के बाद सभी 11 आरोपितों के ऊपर से हत्या संबंधी IPC की धारा (धारा 302) हटा ली गई थी।

उमर खालिद ने ताहिर हुसैन के साथ मिल कर रची थी दिल्ली दंगों की साजिश: कोर्ट ने कहा- पर्याप्त सबूत हैं मौजूद

दिल्ली की एक अदालत ने माना है कि जेनएयू के पूर्व छात्रनेता उमर खालिद और आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने पिछले साल की शुरुआत में राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा की साजिश रची थी। कोर्ट ने एक बयान में कहा कि शुरुआती सबूतों से ऐसा ही प्रतीत होता है। आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया जाँच निष्कर्षों के अनुसार, JNU के छात्र नेता रहे उमर खालिद और AAP के पार्षद रहे ताहिर हुसैन ने मिल कर नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों की साजिश रची थी – ये मानने के वाजिब आधार हैं। चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दिनेश कुमार ने ये बातें कही।

कोर्ट ने मंगलवार (दिसंबर 5, 2020) को पूरक आरोप-पत्र का संज्ञान लेते हुए उक्त टिप्पणी की। दिल्ली में फ़रवरी 2020 के अंतिम सप्ताह में हिन्दू-विरोधी दंगे भड़क गए थे, जिसमें 50 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। कोर्ट ने कहा कि खजूरी खास में हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में उमर खालिद के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, जिससे इस मामले में जाँच आगे बढ़ाया जा सकता है।

कोर्ट ने एक गवाह के बयान का भी अध्ययन किया। इसके बारे में कोर्ट ने कहा कि ये बयान ये दिखाने के लिए पर्याप्त है कि उक्त अवधि में उमर खालिद दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपित ताहिर हिस्सें से लगातार संपर्क में था, जिस पर इन दंगों की फंडिंग के साथ-साथ लोगों को लूटपाट और सम्पत्तियों को जलाने के लिए भड़काने का आरोप है। कोर्ट ने इस आरोप को भी नोट किया कि उमर खालिद ने घूम-घूम कर दिल्ली में लोगों को भड़काया और आपराधिक षड्यंत्र रचे।

गवाहों ने अपने बयान में बताया कि उन्होंने ताहिर हुसैन को लोगों में रुपए बाँटते हुए देखा था, ताकि वो CAA के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों में आ सकें। कोर्ट ने ये भी नोट किया कि इन आरोपितों द्वारा भड़काए जाने के बाद लोग इकट्ठे हुए और सम्पत्तियों को जलाया गया, तोड़फोड़ की गई। गवाहों ने उमर खालिद, खालिद सैफी और ताहिर हुसैन को शाहीनबाग़ आंदोलन के दौरान साथ भी देखा था।

अब कोर्ट की हरी झंडी के बाद इस मामले में जाँच आगे बढ़ेगी। इससे पहले उमर खालिद ने कोर्ट में दावा किया था कि उसे पता ही नहीं है कि उसके ऊपर क्या आरोप तय किए हैं। उसने अपने वकील को चार्जशीट न दिए जाने का आरोप ददिल्ली पुलिस पर लगाया था। कड़कड़डूमा कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि उसे चार्जशीट की कॉपी उपलब्ध करा दी जाएगी। उसने इस मामले में फेयर ट्रायल का अधिकार न मिलने का आरोप लगाया था।

इससे पहले कट्टरपंथी मुस्लिम और हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के आरोपित उमर खालिद ने कथित तौर पर पुलिस के सामने कबूल किया था कि वह मुस्लिम समूहों को संगठित करने, उन्हें उकसाने और बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रचने में शामिल था। 2020 की शुरुआत में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के हिंदू विरोधी दंगों के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद के खिलाफ बुधवार को चार्जशीट दाखिल की थी। 

केरल में आतंकी कैंप चलाने के लिए PFI ने जमा की थी मोटी रकम: ED का खुलासा- धार्मिक द्वेष बढ़ाना, देश की अखंडता को तोड़ना था मकसद

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जाँच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार (जनवरी 05, 2021) को कथित तौर पर दावा किया कि इस समूह ने केरल में आतंकी कैंप चलाने के लिए भारी मात्रा में फंड इकट्ठा कर लिया था।

PMLA (धनशोधन रोकथाम कानून) कोर्ट में केंद्रीय एजेंसी ने यह दावा PFI के छात्र नेता व मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में पकड़े गए रऊफ शरीफ की जमानत याचिका का विरोध करते हुए किया। एजेंसी ने अपने बयान में बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय जाँच एजेंसी द्वारा विशेष अदालत में दायर चार्जशीट के आधार पर अपनी जाँच शुरू की थी।

उन्होंने कहा कि एनआईए द्वारा साल 2013 में दायर आरोप पत्र के मुताबिक PFI व SDPI के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने अपने कार्यकर्ताओं को विस्फोटकों और हथियारों का इस्तेमाल सिखाने के लिए आपराधिक षड्यंत्र किया और कन्नूर जिले के नारथ में एक आतंकवादी शिविर का आयोजन किया। 

चार्जशीट के अनुसार, इस कैंप का आयोजन धर्मों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, उन्हें आतंकवादी गतिविधियों के लिए तैयार करने और इस तरह राष्ट्र की एकता व अखंडता को खतरे में डालने के लिए प्रतिबद्ध कृत्यों के लिए किया गया था। 

ईडी ने कहा, ‘‘पीएफआई ने आतंकवादी शिविरों के आयोजन के लिए और उससे जुड़ी गतिविधियों व साम्प्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाने के लिए पर्याप्त धन जमा कर लिया था… जाँच के दौरान पीएफआई के कई बैंक खातों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का विश्लेषण किया गया।”

रऊफ की बेल याचिका का विरोध करते हुए ईडी ने रऊफ के पास पहुँची विदेशी सहायतों का जिक्र किया और उन्हें बेहद संदिग्ध बताया। एजेंसी ने कहा कि कई दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस को हाल में की गई छापेमारी में बरामद किया गया है, जिनसे खुलासा होता है कि बहुत भारी मात्रा में फंड एकत्रित किए गए।

एजेंसी ने इस बात पर भी गौर करवाया कि चूँकि ये विदेशी फंड पीएफआई के बैंक अकॉउंट में नहीं नजर आते, इसलिए ये बात साफ है कि इन्हें हवाला या फिर अंडरग्राउंड चैनल के माध्यम से भेजा गया। 

बेल याचिका के विरोध में ईडी ने कोर्ट को बताया कि उनके द्वारा दिए गए सबूतों से साबित होता है कि पीएफआई का छात्र समूह सीएफआई (कैम्पस फ्रंट ऑफ़ इण्डिया) लगातार मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल रहा और देश भर में अपराध व गैर कानूनी गतिविधियों को करवाता रहा।

ईडी ने आरोप लगाया कि शरीफ ने हाथरस पहुँचे तीन सदस्यों में से अतीक उर रहमान को सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने और सम्प्रदायिक दंगे करवाने के लिए फंड ट्रांसफर किया। इसके अतिरिक्त, आरोपित के अकॉउंट से निकाले गए रुपयों को भी जाँच एजेंसी ने संदिग्ध कहा।

बता दें कि पिछले दिनों पीएफआई सदस्य रऊफ शरीफ़ को केरल के तिरुअनंतपुरम एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया था। वह ओमान भागने की फ़िराक में था। हाथरस केस में रऊफ पर जातीय दंगे भड़काने की साजिश रचने का आरोप है।

गौरतलब है कि हाल में ईडी ने कोर्ट में हलफनामा दायर किया था, जिसमें कहा गया था कि पीएफआई को वर्षों से अब तक 100 करोड़ रुपए से ज्यादा राशि फंड के रूप में मिली। इतना ही नहीं इस संगठन पर शांति बिगाड़ने का भी आरोप लगा।

वहीं, पीएफआई के राष्ट्रीय सचिव ने सभी आरोपों को खारिज किया और ईडी पर आरोप मढ़ा कि उन्हें भाजपा शासित प्रदेश में उपकरण की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। 26 दिसंबर को पीएफआई ने अपने अकॉउंट में आने वाले फंड को पब्लिक डोनेशन बताया और कहा कि उनके पास हर चीज का हिसाब है।

‘ठाकुर’ लिखे जूते बेच रहा नासिर लिया हिरासत में तो यूपी पुलिस पर भड़कीं RJ सायमा

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में नासिर को पुलिस ने हिरासत में लिया है। वो ‘ठाकुर’ लिखे जूते बेच रहा था, जिसके बाद कुछ लोगों ने शिकायत की थी कि इससे किसी खास जाति के खिलाफ घृणा फैलाई जा रही है और उसे अपमानित किया जा रहा है। यूपी में सरकार जातिवाद और जातीय वैमनस्य को लेकर पहले से ही सख्त है। पुलिस ने दुकानदार नासिर को हिरासत में लिया, जिसके बाद रेडियो मिर्ची की RJ सायमा भड़क गईं।

अब दुकानदार कह रहा है कि वो तो सिर्फ इन जूतों को बेचने का काम करता है, इसे बनाती तो कंपनी है। पुलिस ने जानकारी दी कि इस सम्बन्ध में थाना गुलावठी पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत है। अभियोग में नामित अभियुक्त पुलिस हिरासत में है एवं अग्रिम विवेचनात्मक कार्रवाई की जा रही है। RJ सायमा ने इसे मजाक बताते हुए लिखा कि पकड़ना ही है तो उन्हें पकड़ें जिन्होंने ये जूते बनाए, एक बेचारे दुकानदार को हिरासत में क्यों?

जबकि सच्चाई ये है कि लोगों की शिकायत पर कंपनी के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ है। इस मामले में IPC की धाराओं 153-A (धर्म, भाषा, नस्ल वगैरह के आधार पर लोगों में नफरत फैलाने की कोशिश करना), 323 (किसी को स्वेच्छा से चोट पहुँचाना) और 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं कुछ लोगों का दावा था कि ये ‘ठाकुर फुटवियर’ की कंपनी है।

उनका दावा है कि जैसे ‘बजाज’ अपना नाम अपने स्कूटरों पर छापता है, ठीक उसी तरह ये भी जूतों पर ‘ठाकुर’ शब्द लिखता है। इस पूरे विवाद के बाद यूपी पुलिस ने भी स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस ने कहा है कि इस प्रकरण में वर्तमान विधि व्यवस्था के अनुसार जो सुसंगत था वह एक्शन लिया गया है, यदि पुलिस एक्शन न लेती तो बहुत से लोग उलटी/भिन्न प्रतिक्रिया देते। बुलंदशहर पुलिस ने कहा, “अतः, पुलिस ने नियम का पालन किया है। कृपया इसे इसी रूप में देखें।”

हालाँकि, जिस युवक ने शिकायत दर्ज कराई है उसका कहना है कि दुकानदार नासिर ने उसके साथ झगड़ा भी किया था। उसने जब ‘ठाकुर’ लिखे जूतों पर आपत्ति जताई तो वो लड़ाई पर उतर आया, जिसके बाद उसने पुलिस में शिकायत की। असल में शिकायत दर्ज कराने वाले ने ही आरोप लगाया है कि इस मामले में दुकानदार और कंपनी, दोनों ही दोषी हैं। पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है, जिसके बाद सुसंगत कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

RJ सायमा अक्सर अपनी कट्टरवादी विचारधारा के कारण विवादों में रहती हैं। अक्टूबर 2020 में  ‘रेडियो मिर्ची’ ने एक ट्वीट में ‘जिहाद, आतंकवाद नहीं है’ लिखकर इस्लामी कट्टरपंथियों का बचाव किया गया था। साथ ही RJ सायमा की ‘उर्दू की पाठशाला’ में ‘काफिर’ अंग्रेजी में ‘Non Believer’ बताया गया था, अर्थात किसी चीज में अविश्वास करने वाला। उन्होंने इस शब्द के महिमामंडन के लिए एक शायरी भी पढ़ी थी: ‘एक बेवफा के प्यार में हद से गुजर गए, काफिर के प्यार ने हमें काफिर बना दिया।‘