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पत्थरबाजों से बच्चों को बचाने के लिए सड़क पर लेट गईं हिंदू महिलाएँ, दुर्गा मंदिर से निकली शोभा यात्रा को मोहम्मद अलाउद्दीन की छत पर जमा ‘मुस्लिम भीड़’ ने बनाया निशाना: देखिए Video

बिहार के दरभंगा में नवरात्र के पहले ही दिन हिंदुओं पर हमला हुआ है। यहाँ अलाउद्दीन नाम के व्यक्ति के घर पर इकट्ठा हुए मुस्लिमों ने जमकर पथराव किया, जिसमें कई लोग घायल हो गए। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ये वही जगह है, जहाँ होली पर भी हिंदुओं पर हमला हुआ था। हालाँकि तब पुलिस और ग्रामीणों की आपसी बातचीत से मामला सुलझा लिया गया था, लेकिन नवरात्र के पहले दिन पथराव के बाद से पूरे इलाके में तनाव है और तीन थानों की पुलिस फोर्स को तैनात किया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के केवटगामा पंचायत में दुर्गा मंदिर से कलश शोभायात्रा के बाद लौट रहे श्रद्धालुओं पर अचानक पत्थरों की बारिश शुरू हो गई। ये हमला इतना चौंकाने वाला था कि महिलाएँ और बच्चे चीखते-चिल्लाते इधर-उधर भागने लगे। लोगों का कहना है कि ये हमला मुस्लिमों ने किया, जो पहले से छत पर इकट्ठा होकर शोभायात्रा का इंतजार कर रहे थे।

ये घटना रविवार (30 मार्च 2025) की शाम करीब साढ़े चार बजे की है। गाँव वालों ने बताया कि पछियारी रही गाँव में रहने वाले मोहम्मद अलाउद्दीन के घर की छत पर मुस्लिम जमा थे। जैसे ही शोभायात्रा वहाँ से गुजरी, इन लोगों ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। पत्थर अचानक ऊपर से गिरने लगे, जिससे नीचे चल रहे श्रद्धालु घबरा गए। कुछ महिलाओं ने बताया कि वो अपने बच्चों को बचाने के लिए सड़क पर ही लेट गईं, ताकि पत्थरों से चोट न लगे। हमले की वजह से कई लोग मामूली रूप से घायल भी हुए।

पथराव की सूचना मिलते ही कुशेश्वरस्थान, तिलकेश्वर और बिरौल थानों से भारी पुलिस बल गाँव पहुँचा। पुलिस ने हालात को काबू में किया, लेकिन गाँव का माहौल अभी भी तनावपूर्ण है। लोग अपने घरों में डरे हुए हैं और बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। पंचायत के पूर्व मुखिया आलोक कुमार उर्फ विकास कुमार ने बताया कि इस तरह की घटनाएँ गाँव की एकता को तोड़ रही हैं।

कुशेश्वरस्थान थानाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने कहा कि स्थिति अब नियंत्रण में है और गाँव में पुलिस तैनात कर दी गई है। एसएसपी जगुनाथ रेड्डी ने भी भरोसा दिलाया कि हालात सामान्य हैं और किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। लेकिन गाँव वालों का कहना है कि ये शांति बस ऊपरी है, अंदर ही अंदर डर और गुस्सा अभी भी बना हुआ है।

होली के दिन भी हिंदुओं पर हुआ था हमला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2 सप्ताह पहले होली के दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ था। उस दिन गाँव में होली खेल रहे युवकों पर मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने हमला कर दिया था। पहले तो मामूली बहस हुई, लेकिन फिर बात बढ़ गई और लाठी-डंडों के साथ पत्थरबाजी शुरू हो गई। कई युवक घायल हो गए थे और गाँव में तनाव फैल गया था। उस वक्त पुलिस ने दोनों पक्षों से बात की और पीआर बॉन्ड भरवाकर मामला शांत कराया था। गाँव वालों ने उम्मीद की थी कि अब सब ठीक हो जाएगा, लेकिन रविवार को फिर से पथराव की घटना ने पुराने जख्मों को हरा कर दिया।

सृष्टि के पहले दिन से काल की गणना, चंद्र और सूर्य ग्रहण की अग्रिम जानकारी: दुनिया के सबसे प्राचीन और सटीक कैलेंडर ‘विक्रम संवत’ का वर्ष 2082 शुरू, जानिए किसने और कब की थी शुरुआत

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के साथ ही आज रविवार (30 मार्च 2025) को हिंदू नव वर्ष 2082 की शुरुआत हो गई। इसे नव संवत्सर या विक्रम संवत भी कहा जाता है। कहा जाता है सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्नों में से एक महान खगोलविद वाराह मिहिर ने इस कैलेंडर की शुरुआत की थी और उसका नाम विक्रम संवत या विक्रमी संवत रखा था। माना जाता है कि ब्रह्मा ने इसी दिन सृष्टि की रचना की थी। यानी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सृष्टि उत्पन्न हुई थी।

देश-दुनिया भले ही पोप ग्रेगरी द्वारा विकसित ग्रेगोरियन कैलेंडर प्रचलित हो, लेकिन विक्रम संवत आज भी भारतीय और नेपाल मूल के लोगों के जीवन का अंग है। नेपाल ने विक्रम संवत वाला हिंदू कैलेंडर ही लागू है। वहीं, भारत सहित दुनिया भर के हिंदू शादी-विवाह से लेकर अन्य शुभ मुहूर्त एवं पर्व-त्यौहार इसी कैलेंडर पर आधारित कालगणना से तय करते हैं। विक्रम संवत दुनिया का सबसे वैज्ञानिक एवं सटीक कालगणना है।

जानकारों का कहना है कि विक्रम संवत सूर्य की और चंद्र की गति, दोनों की गति पर आधारित है। दुनिया का ये अकेला कैलेंडर है, जो गणना करके सूर्य ग्रहण या चंद्र का पहले ही घोषणा कर देता है कि इस दिन को इतने बजे सूर्य या चंद्र ग्रहण लगेगा। इस कैलेंडर के जरिए किसी भी खगोलीय स्थिति की गणना वर्षों पहले लगाई जा सकती है। इस तरह की खगोलीय जानकारी पश्चिमी कैलेंडरों से नहीं मिलती है।

सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्नों में शामिल आचार्य वाराह मिहिर ने पृथ्वी द्वारा सूर्य के चक्कर लगाने की एकदम सटीक गणना की है। उसी गणना के आधार पर उन्होंने दिन और रात के समय का निर्धारण किया है। इसमें पल, प्रतिपल, घटी, मुहूर्त और पहर होते हैं। इन्हीं के आधार पर तिथियों का निर्धारण एवं उनकी गणना की जाती है। इतना ही नहीं, यह कैलेंडर साल में आने वाले विभिन्न ऋतुओं के अलावा नक्षत्रों के बारे में भी बताता है।

अति प्राचीन ग्रंथ ‘सूर्य सिद्धांत’ में कहा गया है कि पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाने में 365 दिन 15 घटी 31 पल तथा 24 प्रतिपल लगाती है। विक्रम संवत में 12 मास होते हैं और मास सिर्फ 30 दिन का होता है। यह मास 15 दिन के दो पक्ष में बँटा होता है, जो शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष का होता है। विक्रम संवत में हर तीन साल पर एक मास बढ़ जाता है, जिसे अधिमास या मलमास कहा जाता है।

दरअसल, मासों की गणना या निर्माण पृथ्वी की अपनी कक्षा से नहीं की गई, इसका निर्धारण चंद्रमा के पृथ्वी के चारों ओर की कक्षा से किया गया। इसलिए इसे चंद्र मास भी कहते हैं। चंद्रमा का एक मास 30 चंद्र तिथियों का होता है, परंतु वह सौर मास (सूर्य मास) से लगभग आधा दिन छोटा होता है। दोनों मासों में सामंजस्य बैठाने के लिए भारतीय ज्योतिषाचार्यों ने मलमास या अधिमास का विधान किया। 

यह अधिमास या मलमास इसलिए होता है, ताकि सूर्य वर्ष से एकरूपता लाई जा सके। इसी के कारण हिंदू महीनों, वर्ष, ऋतुओं एवं खगोलीय गणना में सटीकता रहती है। विक्रम संवत से ऋतु परिवर्तन की सटीक जानकारी, नक्षत्रों की स्थिति, ग्रहों की स्थिति, सूर्य या चंद्र ग्रहण का काल, तिथि और मुहूर्त की गणना सटीक होती है। वहीं, यूरोप में पहले एक साल 360 दिन का हुआ करता था।

विक्रम संवत का जिक्र ब्रह्म पुराण में भी है। इसमें कहा गया है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा ब्रह्मा का पहला दिन है और सृष्टि के कालचक्र का भी पहला दिन है। विक्रम संवत की शुरुआत इसी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरुआत ईसा मसीह के जन्म से होती है। इसे ईसाई कैलेंडर भी कहा जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर विक्रम संवत से 57 साल पीछे चल रहा है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार अभी साल 2025 चल रहा है, विक्रम संवत के अनुसार यह 2082 चल रहा है।

विक्रम संवत को हिंदू से लेकर जैन धर्मग्रंथों में इस संवत को शुरू करने में सम्राट विक्रमादित्य का नाम लिया जाता है। जैन ग्रंथ कल्काचार्य में कहा गया है कि विक्रम काल की स्थापना सम्राट विक्रमादित्य ने आकाश नाम के राजा को हराने के बाद की थी। इस दिन को उन्होंने विजय हासिल की थी। हालाँकि, ये राजा कौन हैं, ये स्पष्ट नहीं है। हिंदू ग्रंंथों कहा गया है कि उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने शकों पर इसी दिन जीत हासिल की थी।

ये वही सम्राट विक्रमादित्य हैं, जिनके दरबार में आयुर्वेद के जनक धन्वंतरि, जैन संन्यासी एवं नीति शास्त्र के ज्ञाता क्षपणक, बौद्ध ज्ञाता अमर सिंह, विद्वान कवि शंकु, कवि घटखर्पर, राजकवि कालिदास, तंत्र शास्त्र के ज्ञानी वेताल भट्ट, व्याकरण के आचार्य वररुचि, खगोलशास्त्री वाराह मिहिर शामिल थे। इनमें अमर सिंह और वाराह मिहिर का जन्म क्षत्रिय कुल में हुआ था, जबकि कालिदास और वेताल भट्ट ब्राह्मण कुल के थे। बाकी वैश्य एवं आज दलित कहे जाने वाले समुदाय से भी थे।

कहा जाता है कि विक्रम संवत से पहले युधिष्ठिर संवत, कलियुग संवत, सप्तर्षि संवत आदि प्रचलन में आए थे। माना जाता है कि सभी संवत की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होती ही थी, लेकिन अन्य बातें स्पष्ट नहीं थीं। इसके बाद विक्रम संवत अस्तित्व में आया और इसमें तिथि से लेकर तिथि, मास, संवत्सर (यानी वर्ष), नक्षत्र आदि की स्पष्टता थी।

‘एम्पुरान’ से हटेंगे वे सीन जिनमें हिंदुओं किया गया बदनाम, मोहनलाल ने माँगी माफी: गोधरा दंगों पर बनी फिल्म में ‘हिंदू बेरहम-मुस्लिम पीड़ित’ का प्रोपेगेंडा किया प्रमोट

मलयालम सिनेमा के सुपरस्टार मोहनलाल की फिल्म ‘L2: एम्पुरान’ रिलीज के बाद से ही विवादों में घिरी है। फिल्म में 2002 के गोधरा दंगों को जिस तरह दिखाया गया और हिंदुओं के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाया, उससे हिंदू समुदाय भड़क गया। कई लोगों का कहना है कि फिल्म में हिंदुओं को गलत और बेरहम दिखाया गया, जिससे उन्हें दुख पहुँचा है।

इस बवाल के बाद मोहनलाल ने रविवार (30 मार्च 2025) को फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट लिखी और अपने फैन्स से माफी माँगी। उन्होंने कहा कि फिल्म में कुछ सीन और बातें ऐसी थीं, जिनसे उनके चाहने वालों को ठेस पहुँची, और वो इसके लिए शर्मिंदा हैं। मोहनलाल ने वादा किया कि फिल्म से वो सारी चीजें हटा दी जाएँगी, जो लोगों को परेशान कर रही हैं।

‘एम्पुरान’ फिल्म ‘लूसिफर’ का सेकंड पार्ट है, जिसे एक्टर-डायरेक्टर पृथ्वीराज सुकुमारन ने बनाया है। फिल्म में पृथ्वीराज का किरदार जायद मसूद है, जिसकी कहानी शुरू होती है गोधरा दंगों से। फिल्म में दिखाया गया कि कैसे हिंदू कट्टरपंथियों ने एक मुस्लिम परिवार को बेरहमी से मार डाला। इसके अलावा, उस वक्त गुजरात में सत्ताधारी बीजेपी और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया। ये सीन देखकर हिंदू संगठनों में गुस्सा भड़क गया। लोगों ने सोशल मीडिया पर मोहनलाल और पृथ्वीराज को खूब खरी-खोटी सुनाई। कुछ ने इसे ‘लव जिहाद’ की कहानी को बढ़ावा देने वाला बताया, तो कुछ ने कहा कि ये हिंदुओं को बदनाम करने की साजिश है।

मोहनलाल ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मुझे पता चला कि ‘एम्पुरान’ में कुछ राजनीतिक और सामाजिक बातों ने मेरे चाहने वालों को बहुत दुख पहुँचाया। एक कलाकार के तौर पर मेरा फर्ज है कि मेरी कोई फिल्म किसी राजनीतिक आंदोलन, विचारधारा या धर्म के खिलाफ नफरत न फैलाए। इसलिए मैं और एम्पुरान की टीम अपने प्रियजनों को हुई तकलीफ के लिए दिल से माफी माँगते हैं। हमने फैसला किया है कि फिल्म से वो सारी चीजें हटा देंगे।” उन्होंने ये भी कहा कि पिछले 40 सालों से उनके फैन्स ही उनकी ताकत हैं और उनके बिना मोहनलाल कुछ भी नहीं।

विवाद इतना बढ़ गया कि फिल्म के प्रोडक्शन हाउस ने ऐलान किया कि ‘एम्पुरान’ से 17 सीन हटाए जाएँगे। इनमें दंगों के सीन और महिलाओं के खिलाफ हिंसा दिखाने वाले हिस्से शामिल हैं। दूसरी तरफ, बीजेपी की युवा शाखा भारतीय जनता युवा मोर्चा के स्टेट जनरल सेक्रेटरी के. गणेश ने पृथ्वीराज पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पृथ्वीराज के ‘विदेशी कनेक्शन’ की जाँच होनी चाहिए।

गणेश ने दावा किया कि उनकी पिछली फिल्में जैसे ‘कुरुथी’ और ‘जन गण मन’ भी ‘देश विरोधी’ थीं। उन्होंने पृथ्वीराज के जॉर्डन में फिल्म ‘आडुजीवितम’ की शूटिंग के दौरान उनके संपर्कों पर भी सवाल उठाए।

गोधरा दंगे 27 फरवरी 2002 को शुरू हुए थे, जब अयोध्या से लौट रहे 59 कारसेवकों को साबरमती एक्सप्रेस के एक कोच में जिंदा जला दिया गया था। ये हमला मुस्लिमों की भीड़ ने किया था। इसके बाद गुजरात में भयानक दंगे भड़क उठे। लेकिन ‘एम्पुरान’ में सिर्फ हिंदुओं को दोषी दिखाने की कोशिश ने लोगों का गुस्सा बढ़ा दिया। सच ये है कि गोधरा की घटना को लेकर सालों से राजनीति होती रही है, पर उस ट्रेन में जलाए गए कारसेवकों की बात कम ही होती है। इस फिल्म ने उस पुराने दर्द को फिर से कुरेद दिया।

मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

हिंदुओं के जलाए खेत, दुकानें भी लूटीं… बंगाल के मालदा के बाद मुर्शिदाबाद में हिंदुओं को बनाया गया निशाना: BJP नेता का दावा, पुलिस बोली- अफवाह फैलाई तो होगी कार्रवाई

पश्चिम बंगाल में मालदा के बाद अब मुर्शिदाबाद से हिंदुओं को टारगेट करने का मामला उजागर हुआ है। खबर मुर्शिदाबाद के झाऊबोना से है जहाँ कहा जा रहा है कि इस्लामी भीड़ द्वारा हिंदुओं के खेतों में आग लगा दी गई और दुकानों को लूट लिया गया। इस संबंध में जानकारी भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने अपने एक्स पर साझा की है।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “ममता बनर्जी के तुष्टिकरण शासन में हिंदुओं पर एक और भयानक हमला! जिहादी भीड़ ने मोथाबारी में उत्पात मचाने के बाद झाउबोना, नौदा (मुर्शिदाबाद) में आतंक फैलाया।”

उन्होंने ट्वीट में आगे बताया कि जिहादी भीड़ ने अंधेरे की आड़ में, जानबूझकर हिंदुओं के पान के खेतों में आग लगा दी और झाउबोना और त्रिमोहिनी बाज़ार में दुकानों को लूट लिया और निर्दोष हिंदुओं पर हिंसक हमले किए।

भाजपा नेता ने इस्लामी भीड़ के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की माँग की है और कहा कि बंगाल में हिंदू दोयम दर्ज के नागरिक बनकर रह गए हैं। प्रदेश सीएम पर आरोप लगाते हुए वह बोले कि ममता की शर्मनाक तुष्टिकरण की राजनीति ने बंगाल के हिंदुओं के जीवन को खतरे में डाल दिया हैं लेकिन हिंदू डरते नहीं हैं। पूरा हिंदू समुदाय इस उत्पीड़न के खिलाफ एकजुट हो रहा है।

पुलिस ने अफवाह फैलाने वालों को दी चेतावनी

इस मामले में बता दें कि एक तरफ जहाँ भाजपा नेता ने हिंदुओं पर हमले की जानकारी दी है, वहीं बंगाल पुलिस ने शांति बनाए रखने की अपील है। उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल पुलिस ने दोहराया है कि शांति और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सांप्रदायिक विवाद को बढ़ावा देने की कोशिश करने वाले, अफवाह फैलाने वालों से भी कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाएगा। हम सभी से अपील करते हैं कि सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और शांत रहें।”

बंगाल के मालदा में हिंसा

गौरतलब है कि इससे पहले खबर आई थी पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के मोथाबारी गाँव में भी मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं का धार्मिक जुलूस देखते हुए हमला किया। उस समय भी पुलिस ने यही कहा था कि अफवाहें न फैलाई जाएँ। लेकिन बता दें कि, मालदा को लेकर हर मीडिया में ऐसी खबर आई थीं कि 26 मार्च को मोथाबाड़ी मस्जिद में नमाज हो रही थी। इस दौरान वहाँ से हिंदुओं का एक धार्मिक जुलूस गुजर रहा था। जुलूस में लोग जयकारे लगाते जा रहे थे। इससे मुस्लिम नाराज हो गए और उन्होंने वहाँ से गुजरने एवं जयकारे लगाने का विरोध किया। बाद में भीड़ उग्र हो गई और कई हिंदुओं के घरों, दुकानों और गाड़ियों को लूटकर उनमें तोड़फोड़ एवं आगजनी की।

बंगाल पुलिस ने बाद में इस सबंध में कार्रवाई करते हुए 34 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया। और, एहतियात के तौर पर प्रशासन ने इलाके में इंटरनेट सेवा बंद कर दी थी। इसके साथ रैपिड एक्शन फोर्स की तीन कंपनियों को तैनात किया गया था। मगर, ईद की नमाज और त्योहार को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में धारा 144 नहीं लागू की।

‘नमाज पढ़ो, गोमांस खाओ, रोजा रखो’: जिस हिंदू का ड्राइवर था अहमद रजा, उसकी ही बेटी से किया ‘लव जिहाद’; पैसे-गहने हड़पे, 3 बार कराया गर्भपात

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में लव जिहाद का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक हिंदू युवती की जिंदगी उस वक्त नर्क बन गई, जब उसके अपने घर में ड्राइवर रहे अहमद रजा ने उसे प्रेम के झूठे जाल में फँसाया और फिर शादी के नाम पर उसका शारीरिक-मानसिक शोषण शुरू कर दिया। युवती का कहना है कि अहमद ने न सिर्फ उसकी भावनाओं से खिलवाड़ किया, बल्कि उसे रोजा रखने, नमाज पढ़ने और गोमांस खाने तक का दबाव डाला।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बस्ती जिले के वाल्टरगंज थाना क्षेत्र की पीड़िता अपने घर में अहमद रजा को ड्राइवर के तौर पर देखती थी। जमदाशाही के रहने वाले अब्दुल नईद का बेटा अहमद रोज उसके साथ छेड़खानी करता था। लोकलज्जा के डर से उसने कभी परिवार को कुछ नहीं बताया। लेकिन फरवरी 2024 में अहमद ने चाकू की नोक पर उसके साथ बलात्कार किया। जब उसने पुलिस में जाने की धमकी दी, तो अहमद ने शादी का वादा कर उसे चुप करा दिया। परिजनों ने इस शादी से इनकार कर दिया, लेकिन अहमद ने झाँसा देकर उसे घर से भगा लिया। वो अपने साथ दो सोने के हार, तीन सोने की चेन, एक लाख रुपये, कार, स्कूटी, कूलर और वाशिंग मशीन तक ले गया।

शुरुआत में अहमद उसे अपनी रिश्तेदारी में ले गया, फिर रूधौली थाना क्षेत्र के पुरैना चौराहे पर किराए का मकान लेकर रहने लगा। शादी की बात पर टालमटोल करता रहा, लेकिन बाद में उसने शादी कर ली। मगर ये शादी खुशियों की बजाय दर्द की कहानी बन गई।

युवती का आरोप है कि एक दिन अहमद के माता-पिता और बहनें मोमिना व फातिमा आए और बोले, “नमाज पढ़ो, गोमांस खाओ, रमजान में रोजा रखो।” जब उसने मना किया, तो उसे गालियाँ दी गईं और मारपीट की गई। उसका कहना है कि अहमद ने उसके सारे जेवर बेच दिए, स्कूटी 35 हजार में गिरवी रख दी और सारा पैसा अपने घरवालों को दे दिया। सबसे दर्दनाक ये कि उसका तीन बार गर्भपात करवाया गया और अब वो फिर गर्भवती है।

पीड़ित लड़की ने हिम्मत दिखाते हुए वाल्टरगंज थाने में शिकायत दर्ज की। डीएसपी सत्येंद्र भूषण तिवारी ने बताया कि केस दर्ज कर लिया गया है और अहमद की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगी हुई है। जाँच और मेडिकल रिपोर्ट के बाद कोर्ट में बयान दर्ज होंगे।

विश्व हिंदू महासंघ के जिलाध्यक्ष अखिलेश सिंह ने चेतावनी दी कि अगर पीड़िता को जल्द न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन होगा। ये मामला सिर्फ एक लड़की की कहानी नहीं, बल्कि समाज के सामने एक सवाल है- आखिर कब तक मासूम जिंदगियाँ ऐसे शोषण का शिकार बनती रहेंगी?

पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की सुरक्षा घटाई, नुकसान की वसूली भी: क्यों फिर से राजशाही-हिंदू राष्ट्र बनने के लिए सुलग रहा नेपाल, क्या आवाज दबा पाएगी वामपंथी सरकार?

नेपाल में राजशाही और हिंदू राष्ट्र की बहाली की माँग को लेकर राजधानी काठमांडू में हुए प्रदर्शन और उसमें हुई हिंसा को लेकर पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह पर कार्रवाई हुई है। नेपाल के प्रधानमंत्री खड्ग प्रसाद शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की सुरक्षा में भारी कटौती कर दी है और उनका पासपोर्ट रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं, पूर्व राजा पर 7.93 लाख नेपाली रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

बता दें कि शुक्रवार (28 मार्च 2025) को राजशाही एवं हिंदू राष्ट्र समर्थकों को पुलिस ने रोकने के लिए लाठी-चार्ज किया था। इसके बाद प्रदर्शनकारी उग्र हो गए। कहा जा रहा है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई, जिसमें एक पत्रकार और एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई। वहीं, 100 से अधिक लोग भी घायल हो गए हैं। इस हिंसा के बाद राजधानी में सेना को तैनात कर दिया गया है।

काठमांडू के नागरिक निकाय ने प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति और पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह पर जुर्माना लगाया है। काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी (केएमसी) ने महाराजगंज में ज्ञानेंद्र शाह के आवास पर पत्र भेजकर 7,93,000 नेपाली रुपए मुआवजा देने को कहा है। यह जुर्माना सड़कों और फुटपाथों पर कचरे फैलाने और भौतिक संरचनाओं को नुकसान पहुँचाने के लिए लगाया गया है।

KMC ने अपने पत्र में राजा ज्ञानेंद्र शाह पर कचरा प्रबंधन अधिनियम 2020 और काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी फाइनेंस एक्ट 2021 का उल्लंघन का हवाला दिया है। पत्र में कहा गया है, “पूर्व सम्राट के आह्वान पर आयोजित विरोध प्रदर्शन ने महानगर की विभिन्न संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया और राजधानी शहर के पर्यावरण को प्रभावित किया है।” उधर, ओली सरकार ने उनका पासपोर्ट रद्द करने का आदेश दिया है।

पूर्व राजा ज्ञानेंंद्र शाह की सुरक्षा भी ओली सरकार ने घटा दी है। उनकी सुरक्षा में पहले 25 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते थे। अब उसे घटा कर 16 सुरक्षाकर्मी कर दिया गया है। बता दें कि पुलिस ने राजशाही समर्थक राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवींद्र मिश्रा, महासचिव धवल शमशेर राणा, स्वागत नेपाल, शेफर्ड लिम्बू और संतोष तमांग जैसे राजतंत्र समर्थक नेताओं सहित 51 लोगों को हिरासत में लिया है।

भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता से नेपाली परेशान

दरअसल, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के मुखिया एवं प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार ने हिंदू राष्ट्र और राजशाही की बहाली की माँग करने वालों के खिलाफ शुरू से कठोर रवैया अपनाया हुआ है। वहीं, विपक्षी दल नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी सेंटर) के प्रमुख पुष्प कलम दहल प्रचंड ने हिंसा के लिए पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह पर कार्रवाई के लिए ओली से कहा था।

प्रचंड कुख्यात माओवादी से लेकर नेपाल में प्रधानमंत्री तक रह चुके हैं। उन्होंने राजशाही के खिलाफ हिंसक अभियान चलाया था, जिसमें नेपाल के हजारों लोग मारे गए थे। आखिरकार साल 2008 में नेपाल में राजशाही का अंत हुआ तो प्रचंड प्रमुख बने। हालाँकि, नेपाल राजनीतिक अस्थिरता का केंद्र बन गया है। पिछले 17 साल वहाँ 13 सरकारें बनीं। हालात बदतर हो गए हैं।

लोगों का आरोप हैं कि नेपाल को राजनीतिक अस्थिरता के साथ-साथ वित्तीय अस्थिरता में भी झोंक दिया गया है। बेरोजगारी और गरीबी लगातार बढ़ रही है और नेपाल की सारी पार्टियाँ भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उनका ध्यान जनता के कल्याण में लगने के बजाय जनता को लूटने-खसोटने में है। इसको देखते हुए व्यापारी दुर्गा प्रसाद ने राजशाही और हिंदू राष्ट्र की बहाली की माँग उठाई।

नेपाल में राजशाही का समर्थन करने वाले कई राजनीतिक दल भी हैं। इन सबने मिलकर संयुक्त जन आंदोलन समिति बनाई। इनका कहना है कि 1991 के संविधान को नेपाल में बहाल की जाए। समिति का कहना है कि इस संविधान में राजशाही के साथ-साथ बहुदलीय संसदीय लोकतंत्र प्रणाली की मान्यता है। इसके साथ ही इसमें नेपाल को ‘हिंदू राष्ट्र’ बताया गया है, जो कि लोकतंत्र में धर्मनिरपेक्ष कर दिया गया है।

राजशाही बनाम लोकशाही की जंग

वर्तमान व्यवस्था से निराश और नेपाल के लोगों में राजशाही की जोर पकड़ती माँग को देखते हुए पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह भी एक्टिव हो गए। इस साल फरवरी में ज्ञानेंद्र शाह ने कहा था, “समय आ गया है कि हम देश की रक्षा करने और राष्ट्रीय एकता लाने की जिम्मेदारी लें।” इसके बाद से बाद से राजशाही समर्थकों में उत्साह आ गया और वे काठमांडू सहित देश भर में इसके समर्थन में रैलियाँ निकालने लगे।

उधर, नेपाल के लोकतंत्र समर्थक सभी माओवादी पार्टी के नेताओं ने ‘समाजवादी मोर्चा’ बनाकर राजशाही आंदोलन का विरोध किया। पुष्पकमल दहल प्रचंड की नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी केंद्र और पूर्व प्रधानमंत्री माधव नेपाल की सीपीएन-यूनिफाइड सोशलिस्ट पार्टी ने राजशाही आंदोलन का विरोध किया। प्रचंड के नेतृत्व में विपक्षी दलों के मोर्चा ने भी काठमांडू में एक अलग रैली की।

प्रचंड की रैली में शामिल लोगों ने कसम खाई की वे राजशाही को बहाल नहीं होने देंगे। वहीं, नेपाल में राजतंत्र का विरोध करने वाली एक सिविल सोसायटी ने 24 मार्च 2025 को ‘राजशाही को बहाल करने के उद्देश्य से राजनीतिक रूप से सक्रिय होने’ के लिए पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की आलोचना की थी। सोसायटी में चरण परसाई, सुशील पायकुरेल, कनकमणि दीक्षित, मोहना अंसारी, दिनेश त्रिपाठी, हीरा बीसोकरमा, राजन कुइकेल और रीता परियार शामिल हैं।

इसमें कई लोग वकील एवं अन्य पेशे से संबंधित हैं। इन्हें माओवादी पार्टियों का समर्थक माना जाता है। सिविल सोसायटी के नेताओं ने एक संयुक्त बयान में कहा था,”ज्ञानेंद्र शाह का राजनीतिक सक्रियता में उतरना उनके पूर्वजों के राष्ट्र निर्माण के प्रयासों को विफल करता है और अपने पड़ोसियों एवं दुनिया के सामने देश को कमजोर करने का खतरा पैदा करता है।”

माओवादी पार्टियों की सक्रियता और फिर सिविल सोसायटी के बयान के बाद राजशाही समर्थकों की ‘संयुक्त जन आंदोलन समिति’ ने गुरुवार (27 मार्च) को घोषणा की थी कि यदि सरकार एक हफ्ते के भीतर उनसे समझौता नहीं करती तो वे उग्र प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद समिति ने 28 मार्च को एक विरोध प्रदर्शन शुरू किया। समिति के लोगों का कहना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और पुलिस ने लाठी चार्ज करके उग्र बना दिया। वहीं, प्रशासन सारा दोष प्रदर्शनकारियों को दे रहा है।

नोएडा की एक कोठी में 400+ लड़कियों को किया नंगा, Video बना पोर्न साइट डाला: मियाँ-बीवी चला रहे थे रैकेट, ED छापेमारी से सामने आया इंटरनेशनल लिंक

नोएडा में उज्जवल किशोर और नीलू श्रीवास्तव नाम की पति-पत्नी की जोड़ी पिछले पाँच साल से एक कोठी में गंदा धंधा चला रहे थे। इनका काम था सोशल मीडिया से लड़कियों को मॉडलिंग का लालच देकर पोर्न वीडियो बनाना और उसे साइप्रस की कंपनी टेक्नियस लिमिटेड को बेचना। ये कंपनी XHamster और Stripchat जैसी मशहूर पोर्न वेबसाइट्स चलाती है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जब नोएडा के सेक्टर-105 की इस कोठी में छापा मारा, तो सारा खेल खुल गया। इस रैकेट से इन्होंने 15.66 करोड़ रुपये कमाए और नीदरलैंड के एक गुप्त खाते में 7 करोड़ रुपये जमा किए। कुल मिलाकर 22 करोड़ से ज्यादा की कमाई का पता चला है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी की टीम जब कोठी में पहुँची, तो वहाँ 8 लाख रुपये नकद मिले और तीन मॉडल्स भी मौजूद थीं, जो शूटिंग कर रही थीं। इन मॉडल्स के बयान लिए गए हैं। दंपत्ति ने अपनी कंपनी ‘सबडिजी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के जरिए ये धंधा चलाया।

बाहर से देखने में लगता था कि ये विज्ञापन, मार्केट रिसर्च और जनमत सर्वेक्षण का काम करते हैं, लेकिन असल में ये विदेशी पोर्न साइट्स के लिए अश्लील कंटेंट बना रहे थे। सोशल मीडिया पर फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के जरिए ये लोग मॉडल्स को ढूँढते थे। विज्ञापन में मॉडलिंग का झाँसा देकर लड़कियों को बुलाया जाता था। ज्यादातर मॉडल्स दिल्ली-एनसीआर से थीं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोएडा में पाँच साल में 400 से ज्यादा लड़कियों को इस धंधे में झोंका गया। वीडियो शूटिंग में हाफ फेस शो, फुल फेस शो और न्यूड जैसी कैटेगरी थीं। काम के हिसाब से मॉडल्स को पैसे मिलते थे, लेकिन कुल कमाई का सिर्फ 25% ही उन्हें दिया जाता। बाकी 75% ये दंपत्ति खुद रखते थे।

इनके खातों में विदेश से पैसे क्रिप्टो और अंतरराष्ट्रीय डेबिट कार्ड के जरिए आते थे। नीदरलैंड के खाते से भी इन्होंने भारत में नकदी निकाली। ईडी का कहना है कि ये FEMA कानून का उल्लंघन है, क्योंकि पोर्न से कमाई को सर्विस फीस बताकर छिपाया गया। इस रैकेट का नेटवर्क साइप्रस, यूरोप और अफ्रीका तक फैला था।

जाँच में पता चला कि उज्जवल पहले रूस के सेक्स सिंडिकेट से जुड़ा था। उसका तजुर्बा इस धंधे में काम आया। कोठी को दिल्ली के एक डॉक्टर से किराए पर लिया गया था और वहाँ स्टूडियो बनाया गया। शूटिंग के लिए कैमरे, लाइट्स और बाकी साजो-सामान तैयार रखे जाते थे। जब धंधा बढ़ा, तो इन्होंने सोशल मीडिया पर ऑडिशन की खबरें फैलाकर और लड़कियों को फँसाया।

इन मॉडल्स को मोटी कमाई का लालच दिया जाता, लेकिन हकीकत में उनका शोषण होता था। ईडी ने बैंक लेनदेन की जाँच शुरू की है और सूत्रों का कहना है कि जल्द ही और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

अगर वो CD चल जाती… अब साथी पत्रकार ने खोली राजदीप सरदेसाई की पोल, कहा- उन्होंने ही ‘कैश फॉर वोट स्कैम’ का स्टिंग दबाया, तब वे TV में मेरे बॉस थे

अपने आपको ‘निष्पक्ष’ कहकर कॉन्ग्रेस के लिए रोना रोने वाले राजदीप सरदेसाई का एक बार फिर काला सच सामने आया है। उनके पूर्व साथी और वरिष्ठ पत्रकार मनोज रंजन त्रिपाठी ने कहा है कि कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के समय में राजदीप ने ‘कैश फॉर वोट स्कैम’ का स्टिंग दबा दिया था। त्रिपाठी ने यह बात शुभांकर मिश्रा के पॉडकॉस्ट के दौरान की। बातचीत आप 1 घंटे 22 मिनट से लेकर 1 घंटे 26 मिनट के बीच सुन सकते हैं।

मनोज रंजन त्रिपाठी ने मीडिया इंडस्ट्री के ‘दिग्गज’ पत्रकार को लेकर बताया कि कैसे संसद में जब ये स्कैम उजागर हुआ, उससे पहले 2008 में इस पर स्टिंग हो चुका था। लेकिन, तब राजदीप सरदेसाई उनके बॉस थे और उन्होंने इस स्टिंग ऑपरेशन को दबा दिया।

मनोज रंजन ने कहा कि अगर वो सीडी चल जाती तो अमर सिंह से लेकर कई बड़े नेता इसमें फँसते… लेकिन राजदीप बॉस थे। मनोज रंजन ने बातचीत में साफ तौर पर कहा कि अगर ये पॉडकॉस्ट राजदीप देख लें तो भी उन्हें कोई दिक्कत नहीं, क्योंकि जो वो बोल रहे वो सच हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजदीप ने स्टिंग को दबाया और वो ऐसे सौ लोग को जानते हैं जिन्हें पता है राजदीप ने स्टिंग को दबाया।

इस खुलासे के बाद अब लोग राजदीप सरदेसाई से जवाब माँग रहे हैं।

बता दें कि ये पहली बार नहीं है कि राजदीप के ऊपर यूपीए काल में इस स्टिंग को दबाने का आरोप लगा हो। इससे पूर्व दूरदर्शन न्यूज़ के एंकर अशोक श्रीवास्तव ने ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को लेकर खुलासा किया था।

उन्होंने कहा था, जब कैश फॉर वोट कांड हुआ था, राजदीप सरदेसाई जिस चैनल के हेड थे अगर वो उस स्टिंग ऑपरेशन को प्रसारित कर देता तो शायद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार गिर जाती।

अशोक श्रीवास्तव ने आगे बताया, “मनमोहन सिंह की सरकार को बचाने के लिए पैसों का जो लेनदेन हुआ था, उस पर एक स्टिंग ऑपरेशन हो गया था। राजदीप सरदेसाई उस स्टिंग ऑपरेशन को देखने के बाद एक संपादक के रूप में निर्णय लिया कि इसे टेलीकास्ट करने से पहले वो इसकी जाँच करेंगे। आपने जाँच के नाम पर कई महीनों तक उसे रोक कर रखा। मनमोहन सिंह की सरकार बन गई, उसके बाद राजदीप सरदेसाई को पद्मश्री सम्मान दिया जाता है।”

अशोक श्रीवास्तव के बाद ये खुलासा मनोज रंजन त्रिपाठी ने किया है जो बड़े-बड़े मीडिया संस्थानों में बतौर पत्रकार सेवा दे चुके हैं और राजदीप के साथ काम करने का अनुभव रखते हैं। इस पॉडकॉस्ट में उन्होंने मीडिया इंडस्ट्री पर भी बात की। बताया कि उनके सामने ऐसा हुआ है कि वो लाशों के बीच खड़े रहे और उन्हें कैमरे पर आने से पहले TIE पहनने को कहा गया है कि कितने भी वीभत्स विजुअल हों, पहले टाई पहनकर ही सामने आएँगे।

कंबल-तिरपाल से लेकर भोजन तक, अस्पताल से लेकर NDRF का अभियान तक… म्यांमार की मदद के लिए सबसे पहले पहुँचा भारत: भूकंप में 1600+ मौतें

म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप में अब तक 1,644 लोग मारे जा चुके हैं, 3408 घायल हैं और सैकड़ों लापता हैं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने चेतावनी दी कि मृतकों की संख्या 10,000 से ज्यादा हो सकती है। इमारतें मलबे में बदल गईं, पुल टूट गए, मस्जिदें और मठ तबाह हो गए। इस भयानक आपदा के बीच भारत ने सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाया और ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ शुरू किया। भारत की राहत सामग्री और बचाव टीम ने म्यांमार के लोगों के लिए उम्मीद की किरण जगाई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने 80 सदस्यों वाली एनडीआरएफ (नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) टीम को म्यांमार भेजा, जो शहरी खोज और बचाव कार्यों में माहिर है। शनिवार (29 मार्च 2025) को भारतीय वायुसेना का C-130J विमान हिंडन एयर फोर्स स्टेशन से राहत सामग्री लेकर नेपीडा पहुँचा। इस विमान में कंबल, तिरपाल, स्वच्छता किट, स्लीपिंग बैग, सोलर लैंप, खाद्य पैकेट और रसोई सेट जैसी जरूरी चीजें शामिल थीं।

नेपीडा में भारतीय राजदूत अभय ठाकुर और म्यांमार के विदेश मंत्रालय के अधिकारी मॉन्ग मॉन्ग लिन ने टीम का गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद एनडीआरएफ टीम रविवार सुबह मांडले पहुँची, जहाँ वह सबसे पहले बचाव कार्य में जुट गई। म्यांमार का हवाई अड्डा आंशिक रूप से बंद है, फिर भी भारत ने तेजी दिखाई।

एनडीआरएफ के डीआईजी मोहसिन शाहेदी ने बताया कि अगले 24-48 घंटे बेहद अहम हैं। भारत ने राहत कार्य को दो चरणों में बाँटा। कई सी-130 विमान म्यांमार पहुँच चुके हैं। पहली टीम में एनडीआरएफ के जवान गए, तो दूसरी टीम में फील्ड हॉस्पिटल, आर्मी रेक्यूअर की टीम और मेडिकल हेल्प के साथ राहत सामग्री भेजी गई है। इसके अलावा कोलकाता में एक रिजर्व टीम भी तैयार रखी गई है, जो जरूरत पड़ने पर तुरंत रवाना होगी।

भूवैज्ञानिक जेस फीनिक्स ने कहा कि इस भूकंप की ताकत 334 परमाणु बमों के बराबर थी और आफ्टरशॉक महीनों तक आ सकते हैं। म्यांमार में चल रहा गृहयुद्ध और कम्यूनिकेशन ब्लॉकेज राहत कार्यों को मुश्किल बना रहा है।

इस बीच, म्यांमार की शैडो सरकार एनयूजी ने दो हफ्ते का संघर्षविराम घोषित किया ताकि राहत पहुँच सके। चीन ने 37 सदस्यों वाली टीम और रूस ने 120 बचावकर्मियों के साथ आपात सामग्री भेजी है। वहीं, म्यांमार की सैन्य सरकार ने नेपीडा और मांडले समेत छह क्षेत्रों में आपातकाल लगाया है। हालाँकि उसकी खुद की क्षमता सीमित है।

बता दें कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सैन्य प्रमुख जनरल मिन आंग ह्लाइंग एक दिन पहले ही बातचीत भी की है। उन्होंने फोन पर बातचीत में म्यांमार को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।

वक्फ बिल के विरोध में काली पट्टी बाँध पहुँचे नमाज पढ़ने, हो गई चाकूबाजी: जानिए मध्य प्रदेश की मस्जिद में मुस्लिमों के बीच ही क्यों बची मारकाट

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में रमजान के आखिरी जुमे की नमाज के दौरान बड़ा हंगामा हो गया। बेगमगंज की मकबरा मस्जिद में वक्फ संशोधन बिल 2024 के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दो मुस्लिम पक्षों में झड़प हो गई। प्रदर्शनकारी पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को निशाना बना रहे थे, लेकिन काली पट्टी बाँधने को लेकर 2 पक्षों में भिडंत हो गई। इस झड़प में चाकूबाजी हुई, जिसमें चार लोग घायल हो गए। पुलिस ने तीन हमलावरों – शकील अहमद पठान, लईक पठान और नवेद पठान को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार (28 मार्च 2025) को दोपहर करीब 1 बजे जोहर की नमाज के लिए लोग मस्जिद में जमा थे। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने एक दिन पहले वक्फ बिल के खिलाफ काली पट्टी बाँधकर विरोध करने की अपील की थी।

सैयद सावेश अली और उनके साथियों ने इस अपील पर काली पट्टी बाँधी, जिसका मुस्लिम त्योहार कमेटी के अध्यक्ष शकील अहमद पठान ने विरोध किया। उन्होंने सावेश से कहा कि मस्जिद में पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ राजनीतिक विरोध के लिए काली पट्टी बाँधने से पहले कमेटी से इजाजत लेनी चाहिए थी।

सावेश ने उनकी बातों का विरोध किया, जिसके बाद बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते बहस हाथापाई में बदल गई। शकील अहमद पठान और उनके भाइयों लईक पठान और नवेद पठान ने सावेश और उनके साथियों पर चाकुओं से हमला कर दिया। इस हमले में सैयद सावेश अली, सैयद नवेद अली, सैयद अहद अली और सैयद शारिक अली घायल हो गए। सैयद नवेद अली को गंभीर हालत में रायसेन जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि बाकी तीन का इलाज बेगमगंज के सिविल अस्पताल में चल रहा है।

चाकूबाजी की वजह से मस्जिद में भगदड़ मच गई। खून से फर्श लाल हो गया, जिसके चलते अलविदा की नमाज एक घंटे देर से पढ़ी गई। सावेश अली की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया।

बेगमगंज थाना प्रभारी राजीव उइके ने बताया कि शकील अहमद पठान, लईक पठान और नवेद पठान को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके खिलाफ धारा 296, 115(2), 118(1), 351(2) और 3(5) बीएनएस के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच चल रही है।