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ANI के खिलाफ आपमानजनक टिप्पणी हटाओ: दिल्ली हाई कोर्ट ने Wikipedia को दिया आदेश, कहा- तटस्थ रहो, ऑनलाइन ब्लॉग मत बनो

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (8 अप्रैल 2025) को विकिपीडिया की उसके ‘विचारपरक’ और ‘पक्षपाती’ कंटेंट के लिए आलोचना की। दरअसल, विकिपीडिया ने भारतीय न्यूज एजेंसी ‘एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)’ को अपने पेज पर केंद्र सरकार का ‘प्रोपगेंडा टूल’ यानी दुष्प्रचार उपकरण बताया था। इसके खिलाफ ANI ने अदालत का रूख किया था।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता वाली दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि विकिपीडिया को ‘विश्वकोश’ के रूप में देखा जाता है। इसलिए इसे एक ऑनलाइन ब्लॉग की तरह दिखने के बजाय तटस्थ रहना चाहिए। यदि विकिपीडिया मध्यस्थ होने का दावा करता है तो वह मामले के गुण-दोष के आधार पर अदालत के फैसले को चुनौती नहीं दे सकता।

हाई कोर्ट ने कहा, “ईमानदारी से कहें तो हम सभी विकिपीडिया का उल्लेख करते हैं। मुझे अच्छी तरह याद है कि जब बच्चे हाई स्कूल में होते हैं तो विकिपीडिया देखते हैं। बच्चों को इसके बारे में सिखा सकते हैं… शब्द ‘पीडिया’ विश्वकोश से आया है। एक विश्वकोश को बहुत तटस्थ होना चाहिए। विकिपीडिया इस तरह से एक महान सेवा कर रहा है… यदि आप इस तरह से पक्ष लेना शुरू करते हैं तो यह किसी ब्लॉग की तरह हो जाता है।”

विकिपीडिया के मध्यस्थ होने के दावे को लेकर खंडपीठ ने कहा, “आपने पहले ही दलील दी है कि आप एक मध्यस्थ हैं। IT नियमों के तहत उनका काम केवल अदालत के निर्देशों को लागू करना है। आप गुण-दोष के आधार पर इसका बचाव नहीं कर सकते। यदि आप एक मध्यस्थ हैं और अदालत आपको इसे हटाने का निर्देश देती है तो आप गुण-दोष के आधार पर बहस भी नहीं कर सकते।”

इससे पहले हाई कोर्ट की एकल जज ने 2 अप्रैल को अपने आदेश विकिपीडिया को ANI के खिलाफ अपमानजनक सामग्री हटाने और इस तरह के कंटेंट को आगे प्रकाशित करने पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। जज ने एएनआई के पेज में संपादन पर रोक लगाने के लिए लगाए गए प्रोटेक्शन स्टेट को भी हटाने का निर्देश दिया था।

इसमें थोड़ा संशोधन करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि विकिपीडिया को अपमानजनक सामग्री को हटाना होगा, लेकिन यदि इसी तरह की सामग्री फिर से दिखाई देती है तो ANI को वह सूचित कर सकता है, जिससे आगे की कार्रवाई के लिए विकिपीडिया को प्रेरित किया जा सके। वहीं, ANI के पेज पर प्रोटेक्शन स्टेट हटाने के एकल जज के फैसले को भी स्थगित कर दिया।

दरअसल, एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ विकिपीडिया ने दिल्ली हाई कोर्ट में डबल बेंच में अपील की थी। इसके बाद बेंच ने यह आदेश दिया। जुलाई 2024 में उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने विकिपीडिया को समन जारी किया था और उसे ANI के विकिपीडिया पेज पर संपादन करने वाले तीन लोगों के बारे में जानकारी का खुलासा करने का आदेश दिया था।

जब ANI ने शिकायत की कि विकिपीडिया ने इस निर्देश का पालन नहीं किया है तो एकल न्यायाधीश ने विकिपीडिया के आचरण पर कड़ी आपत्ति जताई और न्यायालय की अवमानना ​​का नोटिस जारी किया। विकिपीडिया के एक अधिकृत प्रतिनिधि को 25 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का भी आदेश दिया था। इसके बाद विकिपीडिया ने अपील में डिवीजन बेंच का रुख किया।

डिविजन बेंच में ANI और विकिपीडिया एक समझौते पर पहुँचे। इस समझौते के तहत विकिपीडिया ने उन यूजर्स को नोटिस देने पर सहमति जताई, जिन्होंने पेज का संपादन किया था। इसके बाद विकिपीडिया ने उन तीन उपयोगकर्ताओं को नोटिस दिया जिन पर एएनआई की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाले अपमानजनक संपादन करने का आरोप था।

गौरतलब है कि डिवीजन बेंच ने विकिपीडिया पर हाई कोर्ट के मामले से संबंधित ‘एशियन न्यूज इंटरनेशनल बनाम विकिमीडिया फाउंडेशन’ शीर्षक वाला पेज होस्ट करने के लिए भी आलोचना की और इसे हटाने का आदेश दिया। इस आदेश के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसके बाद जस्टिस नवीन चावला और रेणु भटनागर की बेंच ने मामले की सुनवाई बंद कर दी, क्योंकि जस्टिस नवीन चावला ने खुद को मामले से अलग कर लिया था।

बीत गए ‘कहाँ गई… बड़ा याद आती है’ वाले दिन, लौट आई ‘रिबेल किड्स’: अपूर्वा मुखीजा की नई सनसनी- दीवारों के भी कान होते हैं

आज से कुछ दशक पहले लोग चिट्ठी गायब होने पर पोस्टमैन को कोसते थे। अब इंस्टाग्राम पोस्ट गायब हो तो लोग सीधे ब्रह्मांड को दोष देने लगते हैं। अपूर्वा मुखीजा ने इंस्टा से सबकुछ डिलीट कर दिया!- जैसे ही ये खबर फैली, पूरे इंटरनेट में ऐसा कोहराम मचा, जैसे ‘कॉफी विद करण’ में कोई सलमान की शादी की तारीख बता दे।

‘द रिबेल किड’ यानी अपूर्वा, जिन्हें लोग इंस्टाग्राम की रंगीली विदूषी मानते थे, अचानक सबकुछ मिटा के गायब हो गईं। 21 दिनों तक उनकी कोई स्टोरी नहीं। कोई पोस्ट नहीं। एक बार को तो लगा कि शायद वो हिमालय चली गई हैं, फिल्टर के बिना ध्यान लगाने।

जब फॉलोअर्स हुए अनफॉलो

हमारे देश में दो चीज़ों का खास महत्व है- धार्मिक कर्मकांड और इंस्टाग्राम फॉलोअर्स। अपूर्वा ने एक झटके में दोनों की तरह अपने अकाउंट की पवित्रता का जलाभिषेक कर डाला। सभी को अनफॉलो किया और प्रोफाइल में ‘निंबू-मिर्ची’ टाँग दी। 2.9 मिलियन ‘रेबेलियंस’ को संपत्ति का दर्जा दिया।

अपूर्वा मुखीजा इंस्टाग्राम
‘द रेबेल किड’ उर्फ अपूर्वा मुखीजा का इंस्टाग्राम पर शून्य फॉलोइंग (साभार: Instagram – the.rebel.kid)

जनता ने सोचा, “कहीं किसी ने कुछ कह दिया होगा”। कुछ लोगों ने उनके डिलीटेड पोस्ट्स पर थ्योरी बनाई जैसे NASA वाले एलियन्स पर बनाते हैं। एक ट्रेंडसेटर ने यहाँ तक कह दिया, “यार, ये तो डिजिटल रिडेम्प्शन है, मैं भी आज सबकुछ डिलीट कर रहा हूँ।”

पर जनाब! डिलीट करने के बाद उनकी रील्स पर सिर्फ 42 लाइक्स आए और वह दोबारा अपूर्वा को फॉलो करने लगे। बस फर्क इतना था कि अब उन्हें फॉलो-बैक नहीं मिला।

टैलेंट तो गया पर ट्रोल्स आ गए

अब इस किस्से का सबसे मसालेदार हिस्सा आता है- ‘इंडियाज़ गॉट लैटेंट’। नाम से तो लगा था कोई मज़ेदार टैलेंट शो है, लेकिन निकला ऐसा अखाड़ा, जहाँ कंटेंट क्रिएटरों को नाटक, ड्रामा और धमकियों की तीर-कमान से नवाज़ा गया।

शो में अपूर्वा मुखीजा को बुलाया गया। सबने सोचा अब उनके ह्यूमर का जादू चलेगा। लेकिन हो गया उल्टा। एक और पैनलिस्ट ने ऐसा बयान दे डाला कि विवाद का मिर्ची पाउडर पूरे शो में छिड़क गया।

और फिर शुरू हुई असली चटनी – धमकियों की बाढ़, चरित्र हनन, ट्रोलिंग, मीम्स, ट्विटर थ्रेड्स और कानून के झंडे। रिपोर्ट्स के अनुसार, अपूर्वा पर FIR दर्ज कर दी गई जैसे वो कोई गैंगस्टर हों और इंस्टाग्राम की गली में कोई रील की डकैती कर ली हो।

21 दिन बाद जब ‘दीवारों के भी कान होते हैं’

21 दिन बाद, अपूर्वा का ‘कमबैक’ हुआ। हाँ वही जिसकी उम्मीद हमे अपने जीवन से है। अपूर्वा का इंस्टा ब्रॉडकास्ट एक लाइन से वायरल हो गई “दीवारों के भी कान होते हैं।”

अपूर्वा मुखीजा ब्रॉडकास्ट चैनल
अपूर्वा ने ब्रॉडकास्ट चैनल पर लिखा ‘दीवारों के भी कान होते हैं’ (साभार : Instagram Broadcast ‘Rebellions’)

जनता ने इसे ऐसे पढ़ा जैसे कुरान की आयत हो या गुरुजी का संकेत। कोई बोला, “ये उन ट्रोल्स के लिए है।” दूसरा बोला, “नहीं रे! ये शो के प्रोड्यूसर के लिए है।” तीसरा चिल्लाया, “मैं तो इसे अपनी एक्स को भेजूंगा!”

फिर आया दूसरा पोस्ट, “इसलिए शुक्रिया।” अब जनता का दिमाग पूरी तरह फ्राई हो गया। शुक्रिया किसे? धमकी देने वालों को? FIR करने वालों को? या फिर भगवान को जिन्होंने 21 दिन तक वाईफाई बंद रखा?

डिजिटल शांति या सोशल मीडिया का सन्नाटा?

21 दिनों तक अपूर्वा ने सोशल मीडिया पर ‘ब्रह्मचारी’ जीवन बिताया। न रील, न ट्रेंडिंग ऑडियो, न फोटो डंप। उनके फैन क्लब वालों ने एक याचिका तक बना दी, “Bring Apoorva Back, or We Quit Instagram”।

इधर ट्रोल्स भी कंफ्यूज थे। एक ने कहा, “हमने तो मज़ाक उड़ाया पर वो चली गई, अब किसपे मीम बनाएँ?” इतने में दूसरे ने कहा, “चुप रहो! वो वापस आई है और उसके पास स्क्रीनशॉट्स हैं।”

जिन्हें कहानियाँ सुनानी आती हैं, उन्हें चुप कराना मुश्किल

अपूर्वा की कहानी महज एक इंटरनेट सेंसेशन की नहीं बल्कि उस डिजिटल समाज की है, जहाँ एक लड़की जब बोलती है, तो ट्रोल्स की तलवारें खिंच जाती हैं। अपूर्वा की स्टोरी टेलिंग की प्रतिभा का हर कोई फैन है। इसीलिए उसे चुप कराना मुश्किल है।

वो इंस्टाग्राम पर हँसी-मज़ाक करती, फनी रील बनाती, समाज पर तंज कसती थी। लेकिन जैसे ही उसने एक मंच पर कुछ ऐसा कहा जो ‘व्यवस्था’ को पसंद नहीं आया, उसके खिलाफ धमकियाँ शुरू हो गईं। FIR तक हुई। और सबसे बड़ी विडंबना तो यह थी कि एक शो जिसका नाम ‘India’s Got Latent’ था, उसने असली टैलेंट को ही चुप करवा दिया।

अपूर्वा लौट चुकी है

आज की डिजिटल दुनिया में कोई लड़की ज़्यादा बोलती है तो ‘Feminism’ की कैटेगरी में आती है। कभी उसे ‘Attention Seeker’ कहा जाता है। कभी ‘Over Sensitive’ और जब वो चुप हो जाती है तो वही लोग कहते हैं – “कहाँ गई? बड़ा याद आती है!”

पर अब अपूर्वा लौट चुकी हैं। उनके पास शब्द भी हैं, स्क्रीनशॉट भी। उनके पास व्यंग्य भी है, व्यथा भी। और सबसे बड़ी बात- उनके पास उनके फॉलोअर्स का वो भरोसा है, जो जानता है कि ‘दीवारों के भी कान होते हैं’। पर ‘रिबेल किड’ की आवाज़ अब गूँगी नहीं रही।

मल्लिकार्जुन खड़गे को अध्यक्ष तो बनाया, पर पार्टी बैठक में ही कुर्सी दिया किनारे: BJP ने शेयर किया सोनिया-राहुल गाँधी के सोफे वाला Video, कहा- दलित विरोधी है कॉन्ग्रेस

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कॉन्ग्रेस पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया है। दरअसल, मंगलवार (8 अप्रैल 2025) की शाम अहमदाबाद में कॉन्ग्रेस की कार्यसमिति की बैठक के दौरान का एक वीडियो सामने आया, जिसमें साबरमती आश्रम में हुई प्रार्थना सभा में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को किनारे बैठा दिया गया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी बड़े आराम से बीच में सोफे पर बैठे हैं, वहीं खड़गे को किनारे पर एक अलग कुर्सी थमा दी गई। भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर कॉन्ग्रेस पर जमकर हमला बोला।

भाजपा आईटी सेल के इंचार्ज अमित मालवीय ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “पहले खड़गे जी का सम्मान करना सीखो। वह कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनकी कुर्सी किनारे पर लगाने का क्या मतलब था? यह साफ़ दर्शाता है कि कॉन्ग्रेस दलित विरोधी है।”

सचमुच, ये घटना कॉन्ग्रेस के लिए शर्मिंदगी का सबब बन गई। दलित समाज से आने वाले और मौजूदा समय में पार्टी के सबसे बड़े नेता यानी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ ऐसा व्यवहार देखकर कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी फैल रही है। लोग पूछ रहे हैं कि अगर कॉन्ग्रेस अपने अध्यक्ष को ही सम्मान नहीं दे सकती, तो दलित समाज के लिए क्या उम्मीद रखेगी?

वहीं, कॉन्ग्रेस इस मुद्दे पर सफाई देने में जुट गई, लेकिन उसका बचाव कमजोर नजर आ रहा है। दूसरी तरफ, राहुल गाँधी भाजपा पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाते नहीं थकते। उन्होंने हाल ही में कहा, “बीजेपी संविधान और दलितों पर हमला कर रही है।” मगर अब उनका ये बयान खुद उनकी पार्टी पर भारी पड़ रहा है। खरगे के साथ हुए इस अपमान ने कॉन्ग्रेस की दोहरी नीति को उजागर कर दिया। एक ओर वो दलितों के हितैषी होने का दावा करती है, दूसरी ओर अपने ही नेता को किनारे कर देती है।

ये पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस पर ऐसा आरोप लगा हो। पहले भी प्रियंका गाँधी वाड्रा के नामांकन के दौरान खड़गे को बाहर खड़ा रहना पड़ा था। तब भी भाजपा ने कहा था कि कॉन्ग्रेस में दलितों की कोई इज्जत नहीं। अब साबरमती आश्रम का ये वाकया कॉन्ग्रेस के लिए और मुश्किल खड़ी कर रहा है। जनता के बीच संदेश जा रहा है कि कॉन्ग्रेस सिर्फ वोट की राजनीति करती है, सम्मान देने की बात हो तो पीछे हट जाती है।

यासीन भटकल सहित IM के 5 आतंकियों की सजा-ए-मौत हाई कोर्ट ने रखी बरकरार, वकील बोले- सुप्रीम कोर्ट जाएँगे: दिलसुखनगर ब्लास्ट में 18 लोगों की हुई थी मौत

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में साल 2013 में हुए दिलसुखनगर विस्फोट को 12 साल बीत चुके हैं। इस मामले में मंगलवार (08 अप्रैल 2025) को तेलंगाना हाई कोर्ट ने लगभग 45 दिनों की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने इस मामले में पाँच दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखा है। बता दें कि दिसंबर 2016 में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने सभी आरोपितों को मौत की सजा सुनाई थी। दोषियों ने इस फैसले के खिलाफ तेलंगाना हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में शामिल जस्टिस के. लक्ष्मण और पी. श्रीसुधा ने विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखा और दोषियों की अपीलें खारिज कर दीं। हाई कोर्ट ने कहा कि यह मामला ‘Rarest of the Rarest’ की श्रेणी में आता है। इसमें निर्दोष लोगों की जानें गईं और समाज में आतंक फैलाया गया। अदालत ने कहा कि दोषियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, जो उनकी संलिप्तता को साबित करते हैं।

वहीं, दिलसुखनगर विस्फोट मामले पर अधिवक्ता मोहम्मद शुजाउल्लाह खान ने कहा, “मैं अभियुक्त संख्या 6 का वकील हूँ। हम सुप्रीम कोर्ट में आदेश के खिलाफ अपील करने जा रहे हैं, क्योंकि हम अपने देश की न्याय प्रणाली में विश्वास करते हैं। निर्णय की प्रति अभी तक नहीं दी गई है और न्यायाधीश ने कहा है कि प्रतियाँ आज उपलब्ध होंगी। इसके बाद हम सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।”

NIA कोर्ट से मौत की सजा

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने साल 2016 में उत्तर प्रदेश का रहने वाला असदुल्ला अख्तर उर्फ ​​हड्डी, पाकिस्तानी जिया-उर-रहमान उर्फ ​​वकास, बिहार का रहने वाला मोहम्मद तहसीन अख्तर उर्फ ​​हसन उर्फ मोनू, कर्नाटक का रहने वाला मोहम्मद अहमद सिद्दीबापा उर्फ ​​यासीन भटकल, महाराष्ट्र का रहने वाला एजाज शेख उर्फ ​​समर अरमान टुंडे और सैयद मकबूल जुबेर को मौत की सजा सुनाई थी। जुलाई 2024 में पुरानी बीमारी के इलाज के दौरान मकबूल की मृत्यु हो गई थी।

विस्फोट में 18 की मौत, मुख्य आरोपित फरार

दरअसल, 21 फरवरी 2013 को हैदराबाद के दिलसुखनगर क्षेत्र में दोहरे बम विस्फोट हुए, जिनमें 18 लोगों की मौत हुई और 131 से अधिक लोग घायल हुए थे। पहला विस्फोट शाम 6:58 बजे बस स्टॉप पर हुआ था और उसके कुछ सेकंड बाद दूसरा विस्फोट पास के रेडियो मिर्ची सेंटर के करीब हुआ था। इन विस्फोटों में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेज़ (IEDs) का उपयोग किया गया था।

इन्हें टिफिन बॉक्स में छिपाकर साइकिलों पर रखा गया था। मामले की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने शुरू की तो पता चला कि इस आतंकी हमले में इंडियन मुजाहिदीन का हाथ और इसका सरगना यासीन भटकल और उसका भाई रियाज भटकल है। रियाज भटकल अभी तक फरार है। वहीं, यासीन भटकल को साल 2013 में नेपाल सीमा के नजदीक गिरफ्तार किया गया था।

10, 20, 34 और अब चीनी माल पर 104% टैरिफ, अमेरिका ने किया ‘डंडा’ तो चीन ने भारत से लगाई गुहार: कहा- इससे वैश्विक अस्थिरता आएगी, हमारे साथ आइए

अमेरिका और चीन के बीच चल रहा व्यापार का तनाव बढ़ता जा रहा है। ताजा खबर के अनुसार अमेरिका ने चीन पर अब 50 फीसद अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिसके बाद टैरिफ की कुल दर 104 फीसद पहुँच गई है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिका का यह फैसला 9 अप्रैल 2025 यानी आज से ही प्रभावी होगा।

बता दें कि अमेरिका द्वारा चीन पर इतना अधिक टैरिफ लगाने का फैसला उस समय लिया गया जब चीन ने बदला लेने के लिहाज से 34 % टैरिफ अमेरिका पर लगाया और बातचीत के बाद भी उसे हटाने पर माना नहीं। उनके प्रतिशोधात्मक टैरिफ से पहले अमेरिका ने चीन पर 20% अतिरिक्त टैरिफ ही लगाया था

इसके बाद, 2 अप्रैल को एक रिसिप्रोकल टैरिफ के तहत 34% का शुल्क लगाया गया। इस मुद्दे पर कुछ समय बात चली, मगर कोई हल न निकलने पर अब, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर एक और 50% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिससे कुल मिलाकर चीनी वस्तुओं पर प्रभावी टैरिफ दर 104% तक पहुँच गई। शुरुआत में ये दर केवल 10 फीसद थी।

ट्रंप का कहना है कि चीन पर लगाया गया 104% टैरिफ भले सुनने में अजीब लगे, लेकिन हकीकत तो ये है कि चीन भी कई चीजों में अमेरिका से 100 फीसद से ज्यादा टैरिफ लेता है। उन्होने अमेरिका को नोचा है। अब उनकी बारी है।

चीन ने की आलोचना

गौरतलब है कि चीन ने इस नए टैरिफ के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने कहा कि चीन किसी भी बाहरी दबाव का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और उन्होंने अमेरिका के इस कदम को आर्थिक धौंस दिखाने वाला बताया। उन्होंने यह भी कहा कि चीन अपनी आर्थिक नीतियों में स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, भले ही बाहरी चुनौतियाँ बढ़ें।

भारत को साथ खड़े होने को कहा

इसी प्रकार अमेरिका के कदम के खिलाफ भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका का यह कदम वैश्विक व्यापार में अस्थिरता पैदा कर रहा है और इसे ‘टैरिफ का दुरुपयोग’ करार दिया। यू जिंग ने इस दौरान भारत के साथ संबंधों पर भी बात की। उन्होंने कहा चीन और भारत के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंध एक-दूसरे के पूरक हैं और इनका आधार पारस्परिक लाभ पर है।

इसके साथ ही, उन्होंने यह भी आग्रह किया कि दोनों देशों को मिलकर इस कठिनाई का सामना करना चाहिए। उनका मानना है कि अमेरिका का यह कदम विकासशील देशों को उनके विकास के अधिकार से वंचित करने वाला है। यू जिंग ने आगे कहा कि सभी देशों को बहुपक्षीयता का समर्थन करना चाहिए और एकतरफावाद के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्रेड वॉर और टैरिफ युद्धों में कोई विजेता नहीं होता है।

‘2013 के वक़्फ़ क़ानून ने मुस्लिम कट्टरपंथियों और भू-माफियाओं के हौसले किए बुलंद’: ‘राइजिंग भारत समिट’ में बोले PM मोदी – ईसाइयों-गुरुद्वारों की जमीनें हड़पी गईं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने CNN-News18 द्वारा आयोजित ‘Rising Bharat Summit’ में वक़्फ़ संशोधन क़ानून को सामाजिक न्याय की दिशा में एक ठोस और बड़ा क़दम करार दिया। रामेश्वरम के पम्बन पुल के हाल ही में हुए उद्घाटन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि क़रीब 100 वर्ष पहले अंग्रेजों ने वहाँ पुल बनाया था, लेकिन सुनामी के कारण वो क्षतिग्रस्त हो गया। पीएम मोदी ने कहा कि लोग माँग करते रहे लेकिन कोई काम नहीं हुआ, हमारी सरकार आई तो देश को पहले वर्टीकल-लिफ्ट सी-ब्रिज मिला।

पीएम मोदी ने इस दौरान ‘Delay is the enemy of Development’ (देरी विकास का दुश्मन है) का नारा दिया। पीएम मोदी ने जानकारी दी कि पिछले 100 दिनों में सेना के लिए मेड इन इंडिया लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर खरीद को हरी झंडी मिली और वक्फ कानून में संशोधन का बिल पास हुआ। बकौल पीएम मोदी, ये 100 दिन 100 फैसलों से भी बढ़कर है, ये 100 संकल्पों के सिद्धि का है। उन्होंने मुद्रा योजना के 10 वर्ष पूरे होने की भी चर्चा की और बताया कि कैसे पहले खाता खोलने के लिए भी बैंक गारंटी चाहिए थी, लोन तो सामान्य परिवारों के लिए सपना हुआ करता था।

उन्होंने जानकारी दी कि पिछले एक दशक में इस योजना के तहत 52 करोड़ लोन बिना गारंटी के दिए गए, जबतक ट्रैफिक लाइट रेड से ग्रीन होती है तबतक 100 मुद्रा लोन क्लियर हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि जबतक किसी OTT पर आप एक एपिसोड खत्म करते हैं, तबतक 5000 मुद्रा लोन जारी कर दिए जाते हैं। इसकी वजह से 11 करोड़ लोगों को पहली बार स्वरोजगार के लिए ऋण मिला है। बकौल पीएम मोदी, ये 11 करोड़ लोग फर्स्ट टाइम एन्टरप्रेनर बनेंगे।

पीएम मोदी ने बताया कि 37 लाख करोड़ रुपए का लोन मुद्रा के जरिए दिया गया, कई देशों की तो इतनी GDP भी नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले पिछड़े जिलों में अधिकारियों को ‘पनिशमेंट पोस्टिंग’ के लिए भेजा जाता था – ये सोच थी ‘पिछड़ा को पिछड़ा रहने देने की’। पीएम मोदी ने बताया कि इन जिलों में उनकी सरकार ने काम किया और आज वही Aspirational (आकांक्षी) जिले विकास की नई गाथा लिख रहे हैं, वहाँ के युवा कह रहे हैं – ‘हम भी कर सकते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि जब विकास को आकांक्षाएँ मार्गदर्शित करती हैं तो वो टिकाऊ भी होती है और समावेशी भी। पीएम मोदी ने कहा कि अलग मुल्क का विचार सामान्य मुस्लिम परिवारों का नहीं बल्कि कुछ कट्टरपंथियों का था, जिसने तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली कॉन्ग्रेस ने खाद-पानी दिया जिससे कट्टरपंथी नेताओं को सत्ता और दौलत मिली, जबकि ग़रीब व पसमांदा मुस्लिमों को उपेक्षा, अशिक्षा और बेरोजगारी मिली। वहीं मुस्लिम महिलाओं को शाहबानो जैसा अन्याय मिला जहाँ उनका अधिकार कट्टरपंथ की भेंट चढ़ गया, उन्हें मिला चुप रहने का आदेश और कट्टरपंथियों को मिला खुला लाइसेंस।

पीएम मोदी ने 2013 में वक़्फ़ क़ानून में हुए संशोधन को मुस्लिम कट्टरपंथियों और भू-माफियाओं को ख़ुश करने का प्रयास बताते हुए कहा कि इस क़ानून ने संविधान के ऊपर खड़े होने का भ्रम खड़ा किया। पीएम मोदी के अनुसार, संविधान द्वारा खोले गए न्याय के रास्तों को वक़्फ़ क़ानून ने संकुचित कर दिया, जिससे भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हुए। उन्होंने इस दौरान केरल में ईसाई परिवारों, कर्नाटक में किसानों और हरियाणा में गुरुद्वारों पर वक़्फ़ के कब्जे का जिक्र किया।

पीएम मोदी ने कहा कि सिर्फ़ एक नोटिस आता था और लोग अपने ही घर के लिए कागज़ ढूँढ़ते रह जाते थे। उन्होंने देश की संसद को सर्व समाज और मुस्लिमों के हित में शानदार क़ानून बनाने के लिए बधाई देते हुए कहा कि इससे वक़्फ़ की भावना की भी रक्षा होगी और महिलाओं व पसमांदा मुस्लिमों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे, ये 75 वर्ष में संसद में दूसरी सबसे लंबी डिबेट थी – दोनों सदनों को मिला कर 16 घंटे चर्चा हुई, JPC की 38 बैठकें हुईं, 128 घंटे चर्चा हुई और देशभर से लगभग 1 करोड़ ऑनलाइन सुझाव आए।

पीएम मोदी ने कहा कि ये दिखाता है कि हमारा लोकतंत्र सिर्फ़ संसद की चहारदीवारी तक सीमित नहीं है बल्कि जन-भागीदारी से चलता है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान ये भी ऐलान किया कि जल्द ही भारत क दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। उन्होंने कहा कि विकास की इस अभूतपूर्व गति को भारत के युवा और उनके आकांक्षाएँ व महत्वाकांक्षाएँ ड्राइव कर रही हैं। 2025 के 100 दिन पूरे होने के उपलक्ष्य में पीएम मोदी ने कहा कि इनमें हुए निर्णयों में भी युवा आकाँक्षाओं की झलक दिखेगी, जिसमें भविष्य की मजबूत नींव रखी गई।

वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 लागू, केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया कैविएट : 10 याचिकाओं पर 15 अप्रैल से हो सकती है सुनवाई

वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 मंगलवार (8 अप्रैल 2025) से लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर इसे हकीकत में बदल दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 अप्रैल को इसे मंजूरी दी और अब अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने इसे लागू कर दिया है।

इस बीच, इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 10 से ज्यादा याचिकाएँ दायर हो चुकी हैं। डीएमके, कॉन्ग्रेस के इमरान प्रतापगढ़ी और मोहम्मद जावेद, AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी, राजद के मनोज झा, फैयाज अहमद और आप के अमानतुल्ला खान ने इसे चुनौती दी है। जमीयत उलमा-ए-हिंद और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी खिलाफ हैं। इनका कहना है कि ये कानून गलत है और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर चोट करेगा।

सुप्रीम कोर्ट 15 अप्रैल को इन याचिकाओं पर सुनवाई कर सकता है। दूसरी तरफ, केंद्र सरकार भी सुप्रीम कोर्ट पहुँची है और कैविएट दाखिल कर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार को सुने बिना बिना कोई भी एकतरफा आदेश पारित नहीं किया जाए। अदालत कोई भी आदेश पारित करने से पहले केन्द्र सरकार की दलील भी सुने।

बता दें कि संसद के दोनों सदनों में खूब बहस और हंगामे के बाद ये कानून पास हुआ था। लोकसभा में 288 सांसदों ने हामी भरी, तो 232 ने विरोध किया। राज्यसभा में 128 वोट पक्ष में और 95 खिलाफ पड़े।

बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल जैसे बड़े वकील जमीयत की ओर से लड़ रहे हैं और सरकार भी तैयार है। अब सबकी नजर 15 अप्रैल पर टिकी है कि आगे क्या होगा।

गाड़ियाँ फूँकी, पुलिस पर पत्थरबाजी, सड़क पर उपद्रव… जैसे CAA के समय जलाई थीं ट्रेनें, वैसे ही अब बंगाल से शुरू हुई वक्फ बिल विरोधी हिंसा

जहाँ एक तरफ संसद के दोनों सदनों से पारित होने और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद वक्फ संशोधन अधिनियम कानून बन गया है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में इसके खिलाफ हिंसा भी शुरू हो गई है। इस्लामी भीड़ इस कानून के खिलाफ सड़क पर उतरी। उपद्रवियों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया है, जिसमें पुलिस की गाड़ियाँ भी शामिल हैं। कुछ पुलिसकर्मियों ने इन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उपद्रवियों ने पुलिस को भी नहीं छोड़ा। कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।

मुस्लिम संगठनों ने मुर्शिदाबाद में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। पुलिस ने जब उन्हें समझाने-बुझाने की कोशिश की तो इन्होंने पुलिस पर ही पत्थरबाज़ी शुरू कर दी। अंततः पुलिस को भी इन हिंसक उपद्रवियों को रोकने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। बता दें कि अब तक एक दर्जन याचिकाएँ नए वक्फ कानून के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में दायर की जा चुकी है। फ़िलहाल मौके पर भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है।

‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ (AIMPLB) ने भी 11 अप्रैल से देशभर में बंद का आह्वान किया है। भीड़ में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों को देखा जा सकता है। एक वीडियो में पुलिस का वाहन सड़क पर गिरा हुआ और धू-धूकर जलता हुआ दिखाई दे रहा है। कई अन्य वाहन भी फूँक दिए गए। बता दें कि इससे पहले मणिपुर में वक्फ बिल का समर्थन करने पर भाजपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष का घर जला दिए जाने की ख़बर सामने आई थी।

पश्चिम बंगाल में भाजपा के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने भी कई वीडियो शेयर करके दिखाया कि कैसे मुर्शिदाबाद में इस्लामी भीड़ उत्पात मचा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल में एक सप्ताह में इस तरह की 4 घटनाएँ सामने आ चुकी हैं – बेलडांगा, मोथाबाड़ी, नौदा और जंगीपुर। उन्होंने बताया कि जो मुर्शिदाबाद कभी गौड़ महाधिराज शशांक का स्थल था, ममता बनर्जी के राज में अब इस्लामी भीड़ यहाँ मनमानी करती फिर रही है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के एक बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण खो चुकी हैं।

अमित मालवीय ने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी द्वारा दिए गए भड़काऊ भाषण इस तरह की घटनाओं का कारण हैं। उन्होंने याद दिलाया कि ये वही क्षेत्र है जहाँ कार्तिक पूजा के दौरान हिन्दुओं पर हमले किए गए थे। अमित मालवीय ने इस्लामी भीड़ की इस हरकत को संविधान का खुला अपमान व उल्लंघन करार दिया। बता दें कि मुर्शिदाबाद एक ऐसा इलाक़ा है जहाँ हिन्दू अल्पसंख्यक हैं। मुस्लिमों की जनसंख्या यहाँ 67% के पार चली गई है। वहीं हिन्दू यहाँ मात्र एक तिहाई रह गए हैं।

ये भी याद करना चाहिए कि 2019 में CAA के खिलाफ हिंसा भी पश्चिम बंगाल से ही शुरू हुई थी। कई रेलवे स्टेशनों और रेल पटरियों के अलावा रेलगाड़ियों को भी निशाना बनाया गया था। दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए हिन्दू विरोधी दंगों से ढाई महीने पहले 13 दिसंबर, 2019 को ही पश्चिम बंगाल में हिन्दू विरोधी हिंसा शुरू हो गई थी। एक ट्रेन में आग लगा दी गई थी। कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ा था। एक यात्री ने बताया था कि मस्जिद से घोषणा के बाद हजारों लोगों ने ट्रेन रोकी और तोड़फोड़ की।

52 करोड़ लोन, फायदा पाने वालों में 70% महिलाएँ, 1+ करोड़ को रोजगार: मुद्रा योजना के 10 साल पूरे, जानिए कैसे आए बदलाव

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने मंगलवार (8 अप्रैल 2025) को 10 साल पूरे कर लिए। 2015 में शुरू हुई ये योजना सूक्ष्म और लघु उद्योगों को सस्ते और आसान ऋण देकर उन्हें मजबूत करने के मकसद से लॉन्च की गई थी। इन 10 सालों में इस योजना ने समाज में गहरे बदलाव लाए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने बीते एक दशक में मुद्रा योजना की उपलब्धियाँ गिनाईं। उन्होंने लिखा, “आज हम मुद्रा योजना के 10 वर्ष मना रहे हैं। मैं उन सभी को बधाई देता हूँ, जिनके जीवन में इस योजना से बेहतरी आई है। इस दशक में मुद्रा योजना ने कई सपनों को सच किया है। उन लोगों को भी वित्तीय सहायता देकर सशक्त बनाया गया है, जिन्हें पहले कभी अनदेखा किया गया था। यह दिखाता है कि भारत के लोगों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है।”

पीएम मुद्रा योजना की उपलब्धियाँ

आँकड़ों की बात करें तो प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत इन 10 वर्षों में 52 करोड़ से ज्यादा लोन बाँटे गए हैं, जिनकी कुल कीमत 32.61 लाख करोड़ है। सबसे खास बात ये है कि इसमें 70% लाभार्थी महिलाएँ रही हैं, जिन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का मौका मिला। इसके अलावा, इस योजना ने एक करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार के अवसर दिए हैं। ये आँकड़े बताते हैं कि मुद्रा योजना ने न सिर्फ आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया, बल्कि सामाजिक ढाँचे को भी मजबूत किया है।

वित्त मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “व्यापार का एक कदम आगे बढ़ाने की सोच सिर्फ बड़े शहरों तक ही नहीं, बल्कि छोटे कस्बों और गाँवों तक भी पहुँची है, जहाँ पहली बार उद्यमी बने लोग अपनी किस्मत बदल रहे हैं। सोच में बदलाव आ रहा है- लोग अब नौकरी खोज नहीं रहे, बल्कि नौकरी दे रहे हैं।”

क्रेडिट फ्लो में आई बढ़त

SBI की रिपोर्ट्स के अनुसार, मुद्रा योजना के कारण ही सूक्ष्म, लघु एवँ मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के क्रेडिट फ्लो में उछाल देखा गया है। एमएसएमई का ऋण वित्त वर्ष 2014 में ₹8.51 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में ₹27.25लाख करोड़ हो गया है। 2025 में इसके ₹30 करोड़ तक जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। बैंक के क्रेडिट में एमएसएमई की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2014 में 15.8% से बढ़कर 2024 में लगभग 20% तक हो गई। यह भारतीय अर्थव्यवस्था में एमएसएमई की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है।

इस विस्तार से छोटे कस्बों और और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापार को वित्तीय सहायता पाने के लिए सक्षम बनाया है, जो पहले संभव नहीं था। इससे भारत की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बेहतर हुई और जमीनी स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिला है।

मुद्रा योजना से जुड़े व्यवसायों से 2015 से 2018 के बीच लोगों को एक करोड़ से अधिक नौकरियाँ मिली। महिलाओं और सामाजिक रूप से कमजोर समुदाय को मुद्रा योजना सशक्त बना रही है। इस योजना के तहत सबसे बड़ी उपलब्धियों में एक यह भी है कि कुल लाभार्थियों में से 68% महिलाएँ हैं। मुद्रा योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और देश भर में महिला उद्यमियों के आगे बढ़ाने में सहायता की है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2016 और 2025 के बीच, मुद्रा योजना के तहत प्रति महिला कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) की दर 13% तक बढ़कर ₹62,679 हो गई। वहीं, प्रति महिला वृद्धिशील जमा राशि 14% की CAGR से बढ़कर 95,269 रुपए हो गई। महिलाओं को अधिक फंड देने वाले राज्यों में महिलाओं द्वारा संचालित एमएसएमई उद्यमों के जरिए अधिक रोजगार मिला है।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में, पीएम मुद्रा योजना की समावेशी दृष्टिकोण ने पारंपरिक ऋण बाधाओं को तोड़ा है। SBI की एक रिपोर्ट के अनुसार, 50% मुद्रा खाते SC, ST और OBC उद्यमियों के पास हैं जिससे वित्त की व्यापक पहुँच को दर्शाता है। साथ ही 11% मुद्रा ऋण धारक अल्पसंख्यक समुदाय से हैं, जिससे इस योजना के हाशिए पर पड़े समुदायों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में सक्रिय भागीदार बनने में सक्षम बनाया है।

एक दशक में खुले 52 करोड़ ऋण अकाउंट

पिछले 10 वर्षों में मुद्रा योजना ने 52 करोड़ से अधिक ऋण खाते खोलने में सहायता की, जो उद्यमशीलता की गतिविधि में बढ़ोतरी द्खाता है। किशोर लोन के शेयर (50,000 से 5 लाख रुपए) वित्त वर्ष 2016 में 5.9% से बढ़कर 2025 में 44.7% हो गए हैं। ये छोटे उद्योगों की असल प्रगति को दिखाता है। तरुण श्रेणी (5 लाख से 10 लाख रुपए) में भी तेजी आ रही है जो यह सिद्ध करती है कि मुद्रा योजना महज व्यवसाय शुरू करने के बारे में नहीं पर साथ ही उन्हें बढ़ाने में मदद करती है।

आधिकारिक आँकड़े बताते हैं कि औसत ऋण का आकार तीन गुणा तक बढ़ गया है। 2016 में यह 38 हजार रुपए था, 2023 में 72 हजार रुपए हुआ और 2025 में 1.02 लाख रुपए तक हो गया है। यह बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं और बाजार की गहराई को दर्शाता है। इसके अलावा वित्त वर्ष 2023 में ऋण वितरण में 36 फीसद की बढ़त दर्ज हुई, जो देश भर में उद्यमशीलता के विश्वास के साथ पुनरुद्धार के संकेत हैं।

तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक मुद्रा ऋण वितरण

वित्त मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा कि 28 फरवरी 2025 तक तमिलनाडु ने ₹3,23,647.75 करोड़ के साथ सबसे अधिक ऋण वितरण दर्ज किया है। वहीं, उत्तर प्रदेश इसमें ₹3,14,360.86 करोड़ के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इसमें कर्नाटक ₹3,02,146.41 करोड़ के साथ तीसरे स्थान पर हैं। इनके बाद पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र का स्थान है। केंद्र शासित प्रदेशों में जम्मू और कश्मीर में 21,33,342 ऋण खातों में ₹45,815.92 करोड़ के साथ ऋण वितरण में सबसे आगे है।

देश भर में लोगों की बदली जिंदगी

दिल्ली में अपने घर पर रहकर कपड़े सिलने का काम करने वाली कमलेश ने अपना काम बढ़ाया, तीन अन्य महिलाओं को रोजगार दिया और अपने बच्चों को एक अच्छे स्कूल में पढ़ा रही हैं। बिंदू ने रोजाना 50 झाड़ू से व्यवसाय शुरू किया, अब 500 झाड़ू रोजाना की एक यूनिट शुरू कर चुकी हैं। मंत्रालय के अनुसार, अब ये अपवाद नहीं है। लोग बड़े कदम बढ़ा रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं।

पूर्व जज के खिलाफ रेप केस सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज, शादी का झाँसा दे यौन शोषण का था आरोप: कहा- सहमति से बने संबंध, रिश्ते बिगड़ने पर दर्ज कराया मामला

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (7 अप्रैल, 2025) को एक पूर्व जज को बड़ी राहत दी है। उस पर बलात्कार, धोखाधड़ी और धमकी का आरोप है। महिला ने दावा किया है कि पूर्व न्यायिक अधिकारी ने शादी का झूठा वादा किया और उसका शोषण किया था।

जस्टिस BV नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि पूर्व अधिकारी और महिला दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे और महिला को पूरी जानकारी थी कि पुरुष शादीशुदा है। हालाँकि, वो अपने पार्टनर से अलग रहता था।

कोर्ट ने कहा कि महिला इस रिश्ते के परिणाम को अच्छी तरह से जानती थी और रिश्ते में खटास आने के बाद उसने आपराधिक मुकदमा दायर किया था।

सहमति से संबंध के बाद विवाह के लिए मजबूर नहीं कर सकते: कोर्ट

कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि यदि कोई एक पक्ष दूसरे से अलग होने का निर्णय ले लेता है तो उसे संबंध से हटने का अधिकार है। सहमति से बनाए गए संबंधों के आधार पर शादी करने के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता।

खंडपीठ ने कहा, “हमने पाया है कि रिश्तों में खटास आने पर आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। हर सहमति पर आधारित संबंध, जिसमें विवाह की संभावना हो सकती है, यदि बाद में रिश्ता टूट जाए तो उसे झूठे विवाह के बहाने का रंग नहीं दिया जा सकता।” सुप्रीम कोर्ट फरवरी 2024 के कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें 2015 के मामले से पूर्व न्यायिक अधिकारी को बरी करने से इनकार कर दिया था।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि वह हल्दिया में तत्कालीन न्यायाधीश से अपने तलाक के केस के दौरान मिली थी। उसने दावा किया कि न्यायाधीश ने उससे शादी करने का वादा किया, आर्थिक मदद की और कुछ दिनों तक उसके साथ शारीरिक संबंध भी बनाए।

महिला ने आरोप लगाया कि तलाक हो जाने के बाद पूर्व जज उससे मिलने में आनाकानी करने लगा और धीरे-धीरे सारे संपर्क तोड़ दिए। पहले न्यायाधीश ने उसके बेटे की परवरिश का खर्च भी उठाने की बात कही थी लेकिन बाद में मुकर गया।