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बॉलीवुड प्रोड्यूसर फिरोज नाडियाडवाला के घर से मिला गाँजा, पहले भी हो चुकी है 3 महीने की जेल

फिल्म निर्माता फिरोज नाडियाडवाला के घर नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रेड मारी है। शनिवार से ही मुंबई में एनसीबी की एक बड़ी ड्राइव चल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिरोज नाडियाडवाला के घर से ड्रग्स बरामद होने की बात सामने आई है। माना जा रहा है की अब जल्द ही NCB फिरोज को पूछताछ के लिए समन भेजेगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिरोज नाडियाडवाला के घर से 10 ग्राम गाँजा बरामद हुआ है। NCB की टीम शनिवार देर रात नाडियाडवाला के घर पहुची थी। हालाँकि इस दौरान फिरोज नाडियाडवाला अपने घर पर मौजूद नहीं थे। फ़िल्म निर्माता के घर से एनसीबी ने गाँजे के साथ 3 मोबाइल फ़ोन भी जब्त किया।

7-8 नवंबर की रात से ही एनसीबी कई ड्रग्स पैडलर्स के घर में छापेमारी कर रही थी। लोखंडवाला, मलाड, अंधेरी और नवी मुंबई में अभी भी छापेमारी चल रही है। लगातार ड्रग्स मामले में हो रही छापेमारी के चलते प्रोड्यूसर का नाम ड्रग्स केस में पकड़े गए संद‍िग्धों से पूछताछ के चलते सामने आया है। NCB ने नवी मुंबई तथा मुंबई के अलग-अलग क्षेत्रों में छापेमारी की थी, जहाँ से एजेंसी ने कमर्श‍ियल क्वांट‍िटी में मैरिजुआना तथा MD बरामद किया।

छापेमारी में इस्माइल शेख नाम के ड्रग्स पेडलर के साथ चार अन्य लोगों को भी NCB ने पकड़ा, जिनसे पूछताछ चल रही है। वहीं बीते सप्ताह NCB ने साउथ अफ्रीकन मूल के अगिसिलाओस डेमेट्रिएड्स को हिरासत में लिया था। इनका रिश्ता अर्जुन रामपाल से था। अगिसिलाओस, अर्जुन रामपाल की गर्लफ्रेंड गैब्रिएला डेमेट्र‍िएड्स के भाई हैं।

बता दें कि फिरोज नाडियाडवला हेरा फेरी, आवारा पागल दीवाना, आन: मेन एट वर्क, फूल एंड फाइनल, वेलकम, कारतूस जैसी कई हिट फिल्मों के प्रोड्यूसर हैं। इससे पहले इनकम टैक्स बकाया मामले में फिरोज नाडियाडवाला को तीन महीने की जेल भी हो चुकी है।

प्राइवेट पार्ट में हुआ इन्फेक्शन तो शौहर ने दे दिया तलाक: दूसरी महिला से निकाह के लिए ₹1.5 लाख भी माँगे

गुजरात के खेड़ा में एक 24 वर्षीय महिला को उसके शौहर ने सिर्फ इसीलिए तीन तलाक दे दिया, क्योंकि उसेक प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन हो गया था। महिला ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया है कि गर्भधारण के दौरान वो गंभीर ‘वेजाइनल इन्फेक्शन’ से पीड़ित हो गई थी। शनिवार (अक्टूबर 31, 2020) को खेड़ा टाउन थाने में पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज की है। पीड़िता का नाम शबाना सईद है।

शबाना ने आर्ट्स से स्नातक किया है। उसने बताया कि उसका निकाह सिद्दीकी अली सैयद से हुआ था। मई 2, 2019 को दोनों के परिवारों की मर्जी ने उनका निकाह हुआ था। उसका शौहर सिद्दीकी अली सैयद एक प्राइवेट कम्पनी में नौकरी करता है। उसने बताया कि निकाह के कुछ दिनों बाद से ही वो अजीब व्यवहार करने लगा था और छोटे-मोटे मुद्दों पर लड़ाई-झगड़ा किया करता था। वो हमेशा दुर्व्यवहार करता था।

पीड़िता का कहना है कि कभी-कभी वो उसे छोड़ देने की धमकी भी देता था। जुलाई में शबाना ने अपना मेडिकल चेकअप कराया, जिसके बाद उसे पता चला कि वो गर्भवती है। गायनकोलॉजिस्ट ने उसे ‘प्रॉपर हाइजीन’ मेंटेन करने को कहा और अपना खान-पान ठीक रहने की सलाह दी। हालाँकि, वो इस पर अमल नहीं कर पाई क्योंकि घरेलू कामकाज के कारण उसे फुर्सत नहीं मिलती थी और इसी कारण उसे इन्फेक्शन हो गया।

पीड़िता का कहना है कि वो अपने शौहर को बार-बार इसके बारे में बताती रही लेकिन वो जरा भी गंभीर नहीं था और उसे डॉक्टर के पास भी लेकर नहीं गया। करीब एक महीने पहले, उसे अचानक से खून की उल्टियाँ आने लगीं। साथ ही उसे काफी तेज बुखार भी रहता था। इसके बाद उसके अम्मी-अब्बू उसे डॉक्टर के पास लेकर गए, जहाँ पता चला कि उसके प्राइवेट पार्ट में संक्रमण है, उसे ‘वेजाइनल इन्फेक्शन’ हो गया है।

FIR के अनुसार, पीड़िता 4 दिनों तक अस्पताल में रही और उसके शौहर को जैसे ही उसकी बीमारी के बारे में पता चला, वो अस्पताल से चला गया और फिर नहीं आया। इलाज के दौरान वो खेड़ा के गोबलाज गाँव स्थित अपने अम्मी-अब्बू के घर ही रही। अक्टूबर 27, 2020 को उसका शौहर अचानक से वहाँ आ धमका और उसने शबाना के परिवार वालों के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। वो धमकाने भी लगा।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया है कि वो बार-बार 1.5 लाख रुपए की माँग कर रहा था, ताकि वो किसी अन्य महिला के साथ निकाह कर सके। जब शबाना सो रही थी, तभी उसने उसके सामने जाकर तीन बार तलाक शब्द का प्रयोग किया और फिर निकल गया। जब वो सोकर नींद से उठी तो उसे पता चला कि उसे तीन तलाक दे दिया गया है। इन्फेक्शन के कारण ‘तीन तलाक’ दिए जाने के बाद शबाना ने खेड़ा पुलिस के समक्ष मुस्लिम वीमन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन डाइवोर्स) एक्ट के तहत केस किया।

‘तीन तलाक’ की मान्यता को क़ानूनी रूप से ख़त्म किए जाने के बावजूद मुस्लिम महिलाओं के साथ ऐसी प्रताड़ना की वारदातें होती रहती हैं। अगस्त 2020 में उत्तर प्रदेश के कानपुर में हिना परवीन को उसके शौहर नूरजादे ने सऊदी अरब जाकर मोबाइल से ही तीन तलाक दे दिया था। ससुराल वालों ने पीट-पीटकर घर से भगा दिया था। कार्रवाई के बदले थाने के दारोगा मंसूर अहमद ने उसे शरीयत मानने की सलाह दी।

‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ – PM मोदी ने अमेरिका जाकर किया था प्रचार – कॉन्ग्रेसी-AAP नेता माँग रहे माफी – फैक्ट चेक

जो बायडेन के 46वें अमेरिकी राष्ट्रपति चुने जाने के कुछ ही घंटों बाद दंगों के आरोपित कॉन्ग्रेस नेता हार्दिक पटेल और और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी ने झूठ फैलाना शुरू कर दिया। इन्होंने अपने फैलाए गए झूठ में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन किया था। 

गुजरात कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष (working president) ने ट्विटर पर राष्ट्रपति पद के लिए चुने गए जो बायडेन और उपराष्ट्रपति कामला हैरिस को बधाई दी। इसके बाद उन्होंने लिखा कि वह इस बात को लेकर आश्वस्त थे कि बायडेन अमेरिका को संगठित करेंगे और देश को सही दिशा दिखाने में अहम भूमिका निभाएँगे।

इतना कहने के बाद उन्होंने मिथ्या प्रचार भी शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी ज़मीन पर कहा था, “अबकी बार ट्रंप सरकार”। आसान शब्दों में उनका यह आरोप था कि ऐसा करके प्रधानमंत्री मोदी दूसरे देश के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप कर रहे हैं।

भारत और अमेरिका के रिश्तों का राजनीतिकरण करते हुए हार्दिक पटेल ने इसके बाद कहा, “मैं इस बात की उम्मीद करता हूँ कि भारत और भारत के नागरिकों को इस कदम की कीमत नहीं चुकानी पड़े।” फिर हार्दिक पटेल ने खुद ही 130 करोड़ भारतीय लोगों की तरफ से इस बात को भूल जाने की बात भी कह दी। इसके बाद हार्दिक ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात का अनुमान था कि देश अमेरिका की नई सरकार के साथ रूचि के साथ काम करेगा।       

हार्दिक पटेल के अलावा कॉन्ग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी ट्विटर पर एक ख़बर साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हॉस्टन में डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन करते हुए कहा नारा लगाया था, “अबकी बार ट्रंप सरकार”। यानी मनीष तिवारी ने भी हार्दिक पटेल की तरह ही झूठ फैलाया। बड़े अक्षरों में लिखते हुए मनीष तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाया कि वह अंतरराष्ट्रीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक नेता का पक्ष लेकर पक्षपात कर रहे हैं। फिर उन्होंने लिखा कि वह आशा करते हैं कि भविष्य में इसकी वजह से भारत को किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं हो। 

क्या प्रधानमंत्री मोदी ने वाकई डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन किया? 

इस तरह के दावों के ठीक विपरीत जिसमें कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी का कहना था कि प्रधानमंत्री मोदी दूसरे देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पक्ष लेकर दखल दे रहे हैं, प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में किसी का पक्ष नहीं लिया। कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी और हार्दिक पटेल द्वारा किए गए दावे भ्रामक हैं क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप की कैम्पेन टीम द्वारा साल 2016 के अमेरिकी चुनावों के पहले चलाए गए कैम्पेन का उल्लेख कर रहे थे। 

पिछले साल सितंबर महीने के दौरान हॉस्टन (टेक्सस) में हुए विशालकाय आयोजन ‘हाउडी मोदी’ में प्रधानमंत्री मोदी ने याद दिलाया था कि 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में प्रचार के दौरान भारतीय प्रवासियों के समक्ष डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, “अबकी बार ट्रंप सरकार”। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “भारत के भीतर हम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बहुत अच्छे से जुड़े हुए हैं। उनके शब्द, “अबकी बार ट्रंप सरकार” आज भी हमारे आस पास गूँजते हैं। साल 2016 में अक्टूबर महीने के दौरान अमेरिकी चुनाव प्रचार के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका के भारतीय और हिन्दू लोगों के पास वाइट हाउस में एक दोस्त होगा। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी के प्रख्यात नारे (2014 आम चुनाव) अबकी बार मोदी सरकार का उपयोग किया। ऐसा करते हुए ट्रंप ने कहा, “अबकी बार ट्रंप सरकार”।

अमेरिका में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के इस चुनावी नारे का उल्लेख किया था ना कि वह 2020 के अमेरिकी चुनाव के लिए ट्रंप का समर्थन कर रहे थे जैसा कि दावा किया जा रहा है। फिर भी मनीष तिवारी और हार्दिक पटेल ने दो देशों के बीच तकरार की स्थिति बनाने के लिए झूठ का प्रचार किया। 

कॉन्ग्रेस पसंद लोगों ने भी फैलाया झूठ 

सिर्फ यह दो नेता ही नहीं बल्कि कॉन्ग्रेस प्रिय और कॉन्ग्रेस से जुड़े तमाम नेताओं ने इस मुद्दे पर काफी झूठ फैलाया। 

पूर्व कॉन्ग्रेस नेता और वर्तमान शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस मुद्दे पर झूठ फैलाया। 

कई अन्य मोदी विरोधी लोग भी यह करते हुए जम कर कूदे। 

पूर्व सीपीआई (एम) नेता जो पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के लिए भाषण लिखा करते थे और जिन्होंने लाल कृष्ण आडवाणी के लिए बतौर रणनीतिकार काम किया था, उन्होंने भी यह झूठ फैलाया। इसके अलावा आम आदमी पार्टी नेताओं ने भी इस मुद्दे पर मिथ्या प्रचार किया। 

तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेताओं भी यही किया। 

मोदी के ट्रम्प को समर्थन पर कॉन्ग्रेस का झूठ 

यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है, जब कॉन्ग्रेस पार्टी और मीडिया से जुड़े लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर मिथ्या प्रचार किया हो। पिछले साल हाउडी मोदी आयोजन के ठीक बाद कॉन्ग्रेस और मीडिया से जुड़े तमाम लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया था कि वह अमेरिका के चुनाव प्रभावित कर रहे हैं। 

कॉन्ग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने तो स्पष्ट रूप से आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप के लिए प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाने का प्रयास किया कि वह अमेरिका में बतौर भारत के प्रधानमंत्री गए हैं न कि अमेरिकी चुनाव के स्टार प्रचारक के रूप में। इसके बाद मीडिया ने भी इस झूठ को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। द हिन्दू (the hindu) की को-चेयरपर्सन मालिनी पार्थसारथी ने भी इसे आभासी प्रचार (virtual promotion) करार दिया था। इसके बाद ब्लूमबर्ग ने भी इस बयान की गलत व्याख्या करते हुए इसे लोगों के बीच पेश किया था।           

अब नक्सलियों पर लगाम की तैयारी में जुटे अमित शाह, जून 2021 तक बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र से सफाए की योजना: रिपोर्ट

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नजर अब नक्सलियों के खात्मे पर है। नक्सल समस्या को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले महीने मीटिंग की। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश से नक्सलवाद को खत्म करने के लिए नए सिरे से कदम बढ़ाने को कहा है। देश में माओवाद विरोधी अभियानों की गति पर असंतोष व्यक्त करते हुए, शाह ने पिछले महीने आयोजित एक समीक्षा बैठक में ‘क्या, क्यों और कहाँ समस्या है, यह पता लगाने के लिए एक सख्त ऑडिट’ के लिए कहा।

इस बात की जानकारी न्यूज 18 को एक अधिकारी ने दी है। रिपोर्ट के मुताबिक मीटिंग में अधिकारियों से उन बलों की जानकारी भी माँगी गई है, जो नक्सलवादियों के ठिकानों को खत्म नहीं कर पा रहे हैं। सीआरपीएफ (CRPF) के अधिकारी ने न्यूज 18 को बताया है कि बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र में अगली गर्मियों तक माओवादियों के मजबूत ठिकानों को खत्म करने का लक्ष्य दिया गया है।

शाह की समीक्षा बैठक के तुरंत बाद, सीपीआई माओवादी, दक्षिण उप जोनल ब्यूरो, बस्तर ने 2 नवंबर को एक बयान जारी किया और दावा किया कि प्रहार -3 नामक एक ऑपरेशन की योजना छत्तीसगढ़ में भी नवंबर 2020 से जून 2021 के बीच बनाई जा रही है।

बयान में कहा गया, “जनता आंदोलन दबाने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिस बलों को तैनात करके युद्ध अभियान चलाने का फैसला किया है। ये अभियान नए तरीके का सल्वा जुडूम जैसा है।” इसमें आगे कहा गया है, “मोदी और भूपेश बघेल सरकार ने एक सैन्य अभियान के तहत हजारों केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को भेजा है। हेलीकॉप्टर, हथियार और गोला-बारूद हासिल करने के लिए करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं।”

केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार के विजय कुमार ने ऑपरेशन का नाम या समय की पुष्टि करने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने न्यूज 18 को बताया कि गृह मंत्री ने राज्यों और केंद्रीय बलों से कहा है कि वे नक्सल विरोधी रणनीति में कमजोर पहलू को खत्म करने के लिए तत्काल प्रभाव से बेहतर समन्वय के साथ काम करें। उन्होंने कहा, “गृह मंत्री ने राज्यों की मदद करने के लिए एक समीक्षा की। कौन प्रदर्शन नहीं कर रहा है, कौन सा राज्य पर्याप्त नहीं कर रहा है, राज्यों को आगे कैसे मदद की जा सकती है, इस पर चर्चा की गई।”

क्या है नक्सलवाद

नक्सलवाद देश की एक बड़ी समस्या है। सत्ता के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता चारू मजूमदार और कानू सान्याल के सशस्त्र आंदोलन का नाम है नक्सलवाद। ये आंदोलन 1967 में पश्चिम बंगाल के गाँव नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ था। मजूमदार चीन के कम्यूनिस्ट नेता माओत्से तुंग के बड़े प्रशंसकों में से एक थे और वो मानते थे कि भारतीय मजदूरों और किसानों की दुर्दशा के लिए सरकारी नीतियाँ जिम्मेदार हैं।

नक्सवाद के पीछे का मर्म

आमतौर पर नक्सल प्रभावित जिले को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा इतना पैसा मुहैया करवाया जाता है कि अगर उस पूरे पैसे को ठीक तरह से खर्च किया जाए तो जिले और राज्य की तस्वीर बदल सकती है। मगर ऐसा हो नहीं पाता है। आपको जानकर हैरानी होगी की नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की अधिकांश आबादी बिना बिजली और शौचालय के रहती है। अगर कोई बीमार होता है तो उसके लिए पास में कोई ढंग का अस्पताल भी मयस्सर नहीं हैं। अगर अस्पताल होता है भी तो उसके लिए मरीजों को मीलों दूर चलकर जाना पड़ता है। इन क्षेत्रों के लिए आवंटित होने वाला पैसा कहाँ चला जाता है पता नहीं चलता है।

बिना शादी के साथ रहने, शराब पीने और समलैंगिकता… सऊदी अरब ने बदला इस्लामी कानून का स्वरूप

सऊदी अरब ने शनिवार (7 नवंबर 2020) को इस्लामी क़ानून से जुड़े तमाम पहलुओं में बुनियादी परिवर्तन किए। यह क़ानून अविवाहित जोड़ों को साथ रहने की अनुमति देने, शराब संबंधी नियमों में छूट और ऑनर किलिंग का अपराधिकरण करने की बात करता है।

निजी स्वतंत्रता के दायरे को बढ़ाना एक देश के प्रारूप में बदलाव दर्शाता है, जो पर्यटकों के बीच खुद को पाश्चात्य सोच, बेहतर व्यापार और अवसरों की तलाश करने वालों के लिए सही जगह के रूप में स्थापित करना चाहता है। इतना सब इस बात के बावजूद हो रहा है कि इस्लामी क़ानून के चलते विदेशी लोगों पर तमाम मामले दर्ज किए गए थे। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह कदम सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में सुधार, सामाजिक परिदृश्य में बदलाव और यहाँ की सहिष्णुता के सिद्धांत को बनाए रखने के लिए उठाया जा रहा है। इस कदम को सऊदी अरब और इजरायल सरकार के बीच रिश्ते सामान्य करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है, जिसकी अगुवाई अमेरिका ने की थी। इसके चलते सऊदी अरब में इजरायली निवेश और इजरायली पर्यटक भी आएँगे। 

इसके अलावा सऊदी अरब गगनचुम्बी इमारतों के गढ़ दुबई में ‘वर्ल्ड एक्सपो’ की मेजबानी करने वाला है। इस बात का विशेष ध्यान रखते हुए भी इस्लामी क़ानून में नरमी का कदम उठाया गया है। इस आयोजन में काफी कुछ दाँव पर भी लगा है। इस आयोजन के तहत सऊदी में काफी बड़े पैमाने पर निवेश और पर्यटक आने की संभावना जताई गई है। शुरुआत में इसे अक्टूबर के दौरान कराने की योजना बनाई गई थी लेकिन महामारी की वजह से इसे टाल दिया गया था। 

इस मुद्दे पर अमीराती फिल्म निर्माता अब्दल्लाह अल काबी ने कहा, “मेरे लिए इससे ज्यादा ख़ुशी की बात और क्या ही होगी, जो यह नए क़ानून प्रगतिशील और सार्थक हैं।” अल काबी की तमाम कला कृतियों ने समलैंगिकता और लिंग के आधार पर समानता के मुद्दे पर सकारात्मक मिसाल पेश की है। उन्होंने यह भी कहा कि साल 2020 सऊदी अरब के कठिन और बदलाव का साल था। 

इस्लामी क़ानून में किए गए संशोधन के तहत 21 साल से अधिक आयु के लोगों द्वारा शराब के सेवन, बिक्री और रखने पर लगाया जाने वाला जुर्माना ख़त्म कर दिया गया। हालांकि सऊदी अरब के बार, क्लब और विलासिता भरे तटीय शहरों में शराब सार्वजनिक तौर पर बेची जाती है। इसके बावजूद वहाँ के नागरिकों को शराब खरीदने, रखने या लेकर जाने के लिए सरकार से अनुमति (लाइसेंस) की ज़रूरत पड़ती थी। इसके पहले तक मुस्लिम समुदाय के लोगों को शराब के सेवन की अनुमति का कोई प्रावधान नहीं था लेकिन नियमों में परिवर्तन के बाद वह भी आज़ादी के साथ ऐसा कर सकते हैं। 

एक और संशोधन के अनुसार सऊदी अरब में अविवाहित जोड़ों को साथ रहने की अनुमति नहीं थी, इसके पहले तक आपराधिक कृत्य माना जाता था। अधिकारी विदेश से आने वाले लोगों पर इस संबंध में विशेष रूप से निगरानी रखते थे, जिसकी वजह से विदेशी पर्यटकों के बीच काफी भय रहता था। आत्महत्या का प्रयास भी इस्लामी क़ानून के अनुसार कार्रवाई के दायरे में आता था, इसे भी अब से अपराध की श्रेणी से बाहर रखा जाएगा। 

इसके अलावा महिला अधिकारों को बढ़ावा और महिलाओं को समानता देने के लिए सऊदी अरब की सरकार ने ऑनर किलिंग का बचाव करने वालों कानूनों को ख़त्म करने का निर्णय लिया है। ऐसा देश जहाँ पर विदेशियों की संख्या वहाँ के नागरिकों से ज़्यादा होती है, संशोधन के बाद विदेशियों को शादी और तलाक जैसे मुद्दों पर इस्लामी शरिया क़ानून को नज़रअंदाज़ करने का मौक़ा देता है। 

इस घोषणा में उस तरह के व्यवहारों पर कुछ नहीं कहा गया है, जो स्थानीय रीति रिवाजों के लिए अपमानजनक साबित होते थे और इनकी वजह से काफी विदेशी जेल भी जा चुके थे। इसमें समलैंगिकता, क्रॉस ड्रेसिंग और सार्वजनिक रूप से प्यार जाहिर करने जैसी प्रक्रियाएँ शामिल थीं।

दरअसल सऊदी अरब में परम्परागत इस्लामी रिवाज़ काफी ज़्यादा प्रभावी थे। इस पर क्विंसी इंस्टीट्यूट फॉर रिस्पांसिबल स्टेट क्राफ्ट के रिसर्च फेलो एनेले शेलिन (Annelle Sheline) ने ट्विटर पर लिखा, “बड़े बदलाव बिना किसी प्रकार के घर्षण के भी संभव हैं। क्योंकि दुबई और आबू धाबी जैसे मुख्य शहरों में लोगों की जनसंख्या काफी कम है।”                 

‘सोनिया गाँधी को असली नाम से बुलाया, इसीलिए पप्पू सेना अर्णब को दे रही यातनाएँ’: कंगना ने ठाकरे सरकार को बताया ‘फासिस्ट’

अभिनेत्री कंगना रनौत ने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी और उनके प्रताड़ना के आरोपों पर बोलते हुए कहा है कि ड्रग माफिया की पोल खोलने, ‘BullyDawood’ में बच्चों की तस्करी के व्यापार की पोल खोलने और सोनिया गाँधी को उनके ‘असली नाम’ से बुलाने के लिए उनके साथ ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकतर लोगों को ये भी नहीं पता कि वरिष्ठ पत्रकार को जेल में क्यों डाला गया है?

लोगों को समझाते हुए कंगना रनौत ने बताया कि 2018 में एक शख्स ने आत्महत्या की थी और उन्होंने अपने सुसाइड नोट में कुछ लोगों के नाम लिखे थे, जिनमें अर्णब गोस्वामी का नाम भी था। कंगना रनौत ने बताया कि जहाँ उक्त शख्स ने सुसाइड नोट में दावा किया था कि अर्णब गोस्वामी ने उनके रुपए नहीं दिए, वहीं ‘रिपब्लिक’ की टीम का कहना है कि उन्होंने रुपए लौटा दिए थे। उन्होंने कहा कि ये तो भगवान निर्णय ले सकते हैं कि किसी के पैसे न देने पर कोई आत्महत्या कर सकता है या नहीं।

कंगना रनौत ने ट्विटर पर जारी किए गए वीडियो में आगे कहा कि अगर ऐसा हो सकता है तो ये ‘आत्महत्या के लिए उकसाने’ का मामला है या नहीं। उन्होंने कहा कि ये मामला ऐसा है या नहीं कि इसमें इतना बड़ा ट्रायल हो, ये भी सोचने वाली बात है। कंगना ने कहा कि ये सबको पता है कि अर्णब को क्यों जेल ले जाया गया है। उन्होंने कहा कि ‘पप्पू सेना’ द्वारा उन्हें यातनाएँ दी जा रही हैं क्योंकि उन्होंने सोनिया गाँधी का ‘असली नाम’ लिया।

कंगना रनौत ने महाराष्ट्र की सरकार को ‘फासिस्ट’ करार देते हुए कहा कि ‘पप्पू सेना’ ने ये बेवकूफी कर के अर्णब गोस्वामी को आज तक का सबसे लोकप्रिय पत्रकार बना दिया है और उन्हें शायद पता नहीं है कि वो उन्हें जितनी यातनाएँ देंगे, टॉर्चर करेंगे, उनकी लोकप्रियता बढ़ती ही जाएगी। कंगना रनौत ने कहा कि इतिहास ‘पप्पू सेना’ को इसी रूप में याद रखेगा कि उन्होंने संविधान के चौथे स्तम्भ के साथ ऐसी ज्यादती की थी।

साथ ही उन्होंने कहा कि इतिहास अर्णब गोस्वामी को एक हीरो के रूप में याद रखेगा। उन्होंने कहा कि ये लड़ाई सिर्फ उनकी या अर्णब की नहीं है, बल्कि पूरी सभ्यता और भारतवर्ष की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में हाईकोर्ट खुद कह रहा है कि ये गलत है लेकिन बाहर कोई कुछ नहीं बोल रहा। उन्होंने उदाहरण दिया कि अमेरिका में ट्रम्प में लाख बुराइयाँ हों लेकिन वो आतंकवाद को ‘इस्लामी आतंकवाद’ कहते हैं और कोरोना को ‘चाइनीज वायरस’ कहते हैं।

इधर अर्णब गोस्वामी ने खुलासा किया है कि पुलिस उनसे कह रही है कि वो उन्हें उनके वकीलों से संपर्क ही नहीं करने देगी। उन्होंने कहा, “मेरी ज़िंदगी खतरे में है। मैं भारत की जनता को, पूरे देश की जनता को बताना चाहता हूँ कि मेरी जान खतरे में है।”

अर्णब गोस्वामी इससे पहले अलीबाग क्वारंटाइन सेंटर में ज्यूडिसियल कस्टडी में थे। अब सभी की नजरें सोमवार को आने वाले बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर टिकी हुई हैं।

MP में कॉन्ग्रेस समर्थक कंप्यूटर बाबा का 2 एकड़ में फैला अवैध आश्रम ध्वस्त: कार्रवाई में बाधा डालने पर 6 गिरफ्तार

मध्यप्रदेश के इंदौर में कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के साथ अपने राजनीतिक संबंधों के कारण चर्चा में रहने वाले कंप्यूटर बाबा का जम्बूड़ी हप्सी गाँव में सरकारी जमीन पर बने अवैध आश्रम को रविवार (8 नवंबर, 2020) सुबह जिला प्रशासन द्वारा ढहा दिया गया। बता दें बाबा राज्य में उपचुनाव से पहले भाजपा के खिलाफ सक्रिय रूप से प्रचार कर रहे थे।

कंप्यूटर बाबा के नाम से जाने जाने वाले नामदेव दास त्यागी ने अपना आश्रम 46 एकड़ में फैला रखा था। जानकारी के अनुसार बाबा ने इंदौर में गोमतगीरी क्षेत्र में 2 एकड़ सरकारी स्वामित्व वाली गौशाला भूमि का अतिक्रमण किया था। नगर निगम ने दो महीने पहले कंप्यूटर बाबा को नोटिस दिया था। निगम ने उनसे अवैध संपत्ति को खाली करने और 2000 का जुर्माना भरने के लिए कहा था।

जिला प्रशासन ने रविवार को बुलडोजर के साथ अतिक्रमित स्थल पर पहुँचकर बाबा के अवैध आश्रम को जमींदोज कर दिया। कलेक्टर मनीष सिंह के निर्देशन में टीम का नेतृत्व एडीएम अजय देव शर्मा और एसडीएम और पुलिस अधिकारियों ने किया। इतना ही नहीं प्रशासन की इस कार्रवाई में बाधा डालने वाले 6 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है।

गौरतलब है कि कंप्यूटर बाबा को मध्य प्रदेश में पिछली भाजपा सरकार के तहत मंत्री पद दिया गया था लेकिन उन्होंने छह महीने बाद उस पद को त्यागते हुए राज्य में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के आलोचक बन गए थे। जिस दौरान उन्हें कॉन्ग्रेस पार्टी के करीब जाते देखा गया था। चुनावों के दौरान कंप्यूटर बाबा ने भोपाल से कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की जीत के लिए हठ योग का आयोजन किया था। उस चुनाव में दिग्विजय का सामना भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर से था। कॉन्ग्रेस के सत्ता में आने के बाद उन्हें कमलनाथ सरकार द्वारा रिवर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।

ध्वस्तीकरण की कॉन्ग्रेस नेता ने की आलोचना

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने प्रशासन की कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा, “इंदौर में बदले की भावना से कंप्यूटर बाबा का आश्रम व मंदिर बिना किसी नोटिस दिए तोड़ा जा रहा है। यह राजनैतिक प्रतिशोध की चरम सीमा है। मैं इसकी निंदा करता हूँ।”

कंप्यूटर बाबा का कॉन्ग्रेसी नेता दिग्विजय को समर्थन

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पिछले साल मई में भोपाल में एक यज्ञ किया था जिसमें कई साधुओं को आमंत्रित किया गया था। वहीं भोपाल लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के समर्थन में कम्प्यूटर बाबा ने हठ योग किया और भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ जीत का आशीर्वाद दिया था। हालाँकि बाद में साधु (जो अनुष्ठान में उपस्थित थे) ने खुलासा किया कि उनका कॉन्ग्रेस के चुनाव अभियान से कोई लेना-देना नहीं था, और वे नहीं जानते थे कि कार्यक्रम राजनीतिक उद्देश्यों के लिए आयोजित किया गया था।

पूर्व IAS शशिकांत सेंथिल होंगे कॉन्ग्रेस में शामिल: जम्मू-कश्मीर से 370 हटने पर दिया था इस्तीफा

कर्नाटक-कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी एस शशिकांत सेंथिल सोमवार (नवंबर 9, 2020) को चेन्नई में कॉन्ग्रेस में शामिल होंगे। बता दें कि दक्षिण कन्नड़ ज़िले में उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) का पद संभाल रहे सेंथिल ने पिछले साल जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद सितंबर में अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा था, ”मेरे लिए ऐसे समय पर प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर काम करते रहना अनैतिक होगा जब हमारे समृद्ध लोकतंत्र के मौलिक आधारभूत स्तंभों से समझौता किया जा रहा है।”

तमिलनाडु मामलों के प्रभारी AICC दिनेश गुंडू राव ने ET को बताया, “सेंथिल समुदायों के बीच संघर्ष, धार्मिक मुद्दों पर हिंसा और भाजपा की नीतियों के कारण परेशान हैं। वह देश को एकजुट करने के प्रयासों में शामिल होना चाहते हैं। वह राहुल गाँधी के साथ अपने विचारों पर चर्चा कर चुके हैं। पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर उनका लाभ लेगी।”

शशिकांत सेंथिल गुंडू राव और राज्य कॉन्ग्रेस अध्यक्ष केएस अलागिरी की उपस्थिति में पार्टी में शामिल होंगे। 41 वर्षीय पूर्व नौकरशाह ने ट्वीट किया, “मैं सभी को सूचित करना चाहूँगा कि मैंने लड़ाई जारी रखने के अपने प्रयास में कॉन्ग्रेस पार्टी में शामिल होने का फैसला किया है। मैं एक ऐसा कार्यकर्ता रहा हूँ जो अपने पूरे जीवन में कम से कम विशेषाधिकार प्राप्त लोगों के लिए एक आवाज बनने की कोशिश कर रहा है, जहाँ भी मैं था और अपनी अंतिम साँस तक ऐसा ही करता रहूँगा।”

शशिकांत का कहना है कि कॉन्ग्रेस के नेता उन्हें पार्टी में पाकर खुश हैं और वह इसके संगठनात्मक ढाँचे का हिस्सा होंगे। उन्होंने कहा, “मैं एक विशिष्ट विधायक या सांसद नहीं रहूँगा। मैं चुनाव की दिशा में काम करूँगा और कॉन्ग्रेस के मूल्यों का प्रसार करूँगा। मेरा महत्वपूर्ण कर्तव्य राजनीतिक समाधान की ओर, समाज या व्यक्तियों के रूप में सभी को एक साथ लाना है। मुझे विश्वास है कि 2024 में हम निश्चित रूप से सेंध लगाएँगे।”

सेंथिल ने जम्मू-कश्मीर से अनुछेद 370 हटाने और विशेष दर्जे को समाप्त करने के विरोध में आईएएस से इस्तीफा दे दिया था। वह तब दक्षिण कन्नड़ के डिप्टी कमिश्नर थे। उस समय, शशिकांत ने कहा था कि उनके राजनीति में शामिल होने का कोई संकेत नहीं है क्योंकि वह अकादमिक ग्रुप से संबंधित हैं। उन्होंने कहा था, “मेरे लिए पैटर्न बहुत स्पष्ट है और मैं नौकरशाही के बाहर काम करूँगा ताकि स्पष्टता के साथ इस बारे में आम जनता को सूचित किया जा सके। लेकिन, राजनीति में शामिल होने का कोई सवाल ही नहीं है क्योंकि मैं अकादमिक क्षेत्र में हूँ।”

दरभंगा एयरपोर्ट पर आपका स्वागत है! बेंगलुरु से उतरा पहला यात्री विमान, भावुक मिथिला वासियों ने बजाई तालियाँ

बिहार के दरभंगा में एयरपोर्ट का स्वप्न अब साकार हो गया है क्योंकि यात्री विमान के उतरने के साथ ही इसका शुभारम्भ हो गया है। दीपावली और छठ से पहले बिहार को नई सौगात मिली है। ये पहला विमान है, जो दरभंगा एयरपोर्ट पर उतरा है। ये विमान रविवार (नवंबर 8, 2020) को सुबह 11:45 बजे जब दरभंगा एयरपोर्ट पर पहुँचा तो लोगों ने तालियों से उसका स्वागत किया। साथ ही विमान को ‘वाटर सैल्यूट’ भी दिया गया।

इसके साथ आज के दिन से ही दरभंगा से दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई के लिए तीन जोड़ी स्पाइस जेट की फ्लाइट शुरू हो गई है। प्रतिदिन ऑपरेट होनी वाली तीन जोड़ी फ्लाइट के लिए बुकिंग सितम्बर 20 से ही शुरू हो गई थी। इन तीन शहरों से यहाँ आवागमन करने वाले यात्रियों की संख्या ज्यादा है। हालाँकि, कोरोना काल में आए दीपावली और छठ के कारण उत्साह इस बार कम है। अब लोगों को पटना एयरपोर्ट पर उतरने की मजबूरी नहीं होगी।

मिथिलांचल के लोग दरभंगा या इसके आसपास के शहरों के हैं तो वो सीधे दरभंगा आ सकते हैं। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इन तीनों फ्लाइट के 8 नवंबर से शुरू होने की घोषणा दो महीने पहले पटना में की थी। दरभंगा एयरपोर्ट का एरिया 1,400 वर्गमीटर है और ये भारतीय वायुसेना के अंतर्गत आता है। हवाई अड्डे के 6 चेक-इन काउंटरों वाले अंतरिम टर्मिनल भवन का निर्माण पूरा हो चुका है।

बोइंग 737-800 जैसे विमानों के लिए अनुकूल दरभंगा एयरपोर्ट अपने टर्मिनल में व्यस्त समय में 100 यात्रियों को सँभालने की ताकत रखता है। ‘हिंदुस्तान’ की खबर के अनुसार, पहली उड़ान बेंगलुरु से उड़ान भरकर 11:05 बजे दरभंगा एयरपोर्ट में लैंड करेगी। यही फ्लाइट दिल्ली के लिए 11:45 बजे दरभंगा से टेकऑफ करने के बाद दिल्ली 1:40 बजे दोपहर में पहुँचेगी। फिर ये दिल्ली से 2:20 में निकलेगी।

बिहार के जल संसाधन मंत्री और जदयू महासचिव संजय कुमार झा ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि तमाम आशंकाओं को पीछे छोड़ते हुए आज वह शुभ दिन आ गया, जब मिथिला से देश के प्रमुख शहरों के लिए सीधी उड़ान का बड़ा सपना साकार होने जा रहा है। उन्होंने उन सभी लोगों का धन्यवाद किया, जिन्होंने इसके लिए प्रयास किया था। साथ ही कहा, “दरभंगा एयरपोर्ट पर आपका स्वागत है।” उन्होंने कहा कि ये दिन उन्हें भावुक कर देने वाला है।

करीब तीन दशक से ऊपर से की जा रही दरभंगा एयरपोर्ट की माँग आखिरकार 2018 में सुनी गई थी, जब नए एयरपोर्ट का शिलान्यास हुआ। इसके बावजूद लोगों को, पिछले अनुभवों के कारण, कम ही भरोसा था कि सचमुच कभी एयरपोर्ट बनेगा। लेकिन करीब दो वर्षों में एयरपोर्ट का काम पूरा हो चुका है और अब यहाँ से स्पाइस जेट की तीन उड़ानें दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई जाएँगी। मोदी सरकार ने बिहार वासियों से किया वादा पूरा किया।

‘मैं एर्दोआँ को सबक सिखाऊँगा, तुर्की को कीमत चुकानी पड़ेगी’ – जो बायडेन के वीडियो से लिबरलों को मिर्ची

जहाँ एक तरफ लिबरल जमात जो बायडेन के अमेरिकी राष्ट्रपति चुने जाने से खुश है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि इससे आतंकवाद को लेकर अमेरिका के रुख में शायद ही कोई बदलाव आएगा। इसका कारण है दुनिया में नया खलीफा बनने चले तुर्की को लेकर उनका रुख। जो बायडेन ने तुर्की को लेकर कहा था कि वो एक ‘असली समस्या’ है और इसे लेकर वो उसे सख्त हिदायत जारी करते।

जो बायडेन ने कहा था कि वो तुर्की को सबक सिखाते, भले ही इसके लिए उन्हें ‘सिचुएशन रूम’ में हजारों घंटे ही क्यों न व्यतीत करना पड़े या फिर सीरिया या ईराक में स्थिति सुधारने के लिए क्यों न कुछ भी करना पड़े। चुनाव प्रचार के समय ही उन्होंने साफ़ कर दिया था कि वो तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआँ (Erdogan) से बात कर उन्हें चेता देते कि उन्होंने जो कुछ भी किया है, इसके लिए उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।

इधर आर्मेनियन असेंबली ऑफ अमेरिका ने भी जो बायडेन को बधाई देते हुए माँग की है कि अमेरिका में अजरबैजान और तुर्की के प्रभाव को लेकर जाँच बिठाई जाए। उसने ISIS के साथ तुर्की के गठबंधन के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि क्षेत्र में अशांति के लिए तुर्की ही जिम्मेदार है और उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। अमेरिका में आर्मेनिया के नागरिकों ने भी तुर्की पर शिकंजा कसने की माँग की है।

वहीं अब तुर्की की राजधानी अंकारा में भी जो बायडेन को लेकर हलचल तेज हो गई है और तुर्की के नेता कह रहे हैं कि वो नए अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ संबंधों को ठीक करने के लिए सारी कोशिशें करेंगे। ‘ग्रीक सिटी टाइम्स’ ने अनुमान लगाया है कि ट्रम्प के साथ तो एर्दोआँ के मित्रता भरे थोड़े-बहुत रिश्ते भी थे, लेकिन अब तुर्की को आशंका है कि नए राष्ट्रपति नई शर्तें लेकर आएँगे, जिससे उसे खासी परेशानी होने वाली है।

तुर्की के विदेश मंत्री का भी कहना है कि डोनाल्ड ट्रम्प के साथ उनके मुल्क के गंभीर रिश्ते थे और अब आगे चुनौती भरा समय होने वाला है। डोनाल्ड ट्रम्प ने तुर्की के खिलाफ लगे कुछ प्रतिबंधों को ढीला कर दिया था, जिन्हें फिर से वापस लाया जा सकता है। साथ ही मध्य-पूर्व में तुर्की के हस्तक्षेप को कम किया जाएगा। तुर्की के ही एक पत्रकार ने स्वीकार किया है कि अब अमेरिकी कॉन्ग्रेस उसके मुल्क के खिलाफ कार्रवाई करेगा।

बता दें कि तुर्की दक्षिण एशियाई देशों में अपना विस्तार करना चाहता है। लेकिन, दूसरी तरफ इस इलाके में सऊदी अरब का प्रभाव किसी से छुपा नहीं है। इसके लिए तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआँ और उनकी सरकार की तरफ से तमाम प्रयास जारी हैं। उसका नतीजा है कि तुर्की ने अपनी छवि बतौर एक रेडिकल इस्लामिक देश स्थापित कर ली है। जुलाई 2020 में तुर्की की सरकार ने बाईज़ानटाईन कैथेद्रल हगिया सोफिया संग्रहालय को मस्जिद में तब्दील कर दिया था।