Home Blog Page 4339

नंदबाबा मंदिर में नमाज पढ़ने वाला फैजल खान निकला कोरोना पॉजिटिव, 14 दिन की न्यायिक हिरासत में

मथुरा के नंदगाँव स्थित मंदिर में नमाज पढ़ने वाला फैजल खान कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। फैजल खान को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उसकी कोरोना जाँच कराई गई, जो पॉजिटिव आई है। रिपोर्ट आने के बाद उसे एम्बुलेंस के जरिए अदालत लाया गया, जहाँ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने स्वयं कोर्ट से बाहर आकर उसे देखा और 14 दिनों की न्यायिक रिमांड पर भेज दिया। शनिवार को थाना बरसाना क्षेत्र के नंद गाँव स्थित नंद मंदिर में शनिवार को खुदाई खिदमतगारों ने नमाज पढ़ी थी, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल शुरू हो गई है।

29 अक्टूबर को पढ़ी थी मंदिर में नमाज

29 अक्टूबर को फैसल ने अपने साथी चाँद के साथ बरसाना के नंदगाँव स्थित नंदबाबा मन्दिर में नमाज पढ़ी। इस मामले की फोटो 1 नबम्बर को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कम्प मच गया था। मामले में सेवायत कान्हा गोस्वामी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिस पर पुलिस ने धारा 153a, 295, 505 में मामला दर्ज कर फैसल को सोमवार की देर शाम दिल्ली के जामिया नगर से गिरफ्तार कर लिया।

सेवायत ने दर्ज कराई थी एफआईआर

मामले में मंदिर के सेवायत गोस्वामी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि 29 अक्टूबर को दोपहर करीब साढ़े 12 बजे फैजल खान और चाँद मोहम्मद, जो दिल्ली के खुदाई खिदमतगार संस्था के सदस्य हैं, इसी संस्था के आलोक रतन और नीलेश गुप्ता के साथ आए। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि मुस्लिम युवकों ने बिना अनुमति लिए और जानकारी के मंदिर प्रांगण में नमाज अदा की और नमाज पढ़ते हुए के अपने फोटो अपने साथियों से सोशल मीडिया पर वायरल कराए। इनके इस कृत्य से हिन्दू समुदाय की भावनाएँ आहत हुई हैं और आस्था को गहरी चोट पहुँची है। 

हिन्दुओं ने मंदिर में हवन कर के गंगाजल से शुद्धिकरण किया। श्रद्धालुओं ने कहा कि बिना अनुमति मंदिर में घुस नमाज पढ़ने के कारण उन्हें शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी। भक्तों ने पंडितों के साथ बैठ कर पूरी प्रक्रिया के साथ हवन-पूजन किया। वहीं विश्व हिन्दू परिषद ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘नमाज जिहाद’ करार दिया। 

मथुरा: ईदगाह मस्जिद में हनुमान चालीसा पढ़कर लगाए ‘जय श्री राम’ के नारे, 4 हिन्दू युवक गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में मथुरा के एक मंदिर में नमाज पढ़ने के बाद गोवर्धन इलाके की ईदगाह में चार युवकों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया। ईदगाह मस्जिद में मंगलवार (नवंबर 3, 2020) सुबह किए गए इस हनुमान चालीसा पाठ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस एक्शन में आई और तत्काल चारों युवकों को हिरासत में ले लिया गया। युवकों का शांतिभंग की धाराओं में चालान कर जेल भेज दिया गया।

जानकारी के मुताबिक, ईदगाह में हनुमान चालीसा पढ़ने वाले युवकों के नाम सौरभ, राघव मित्तल, कान्हा और कृष्णा ठाकुर हैं। ये सभी गोवर्धन इलाके में ही रहते हैं। हालाँकि अभी तक इस मामले में किसी तरह की कोई तहरीर नहीं दी गई है लेकिन सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल होने के बाद चारों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बाद में पुलिस ने इनका शांतिभंग की धारा में चालान कर दिया। युवकों का कहना है कि वे भाईचारा बढ़ाने के लिए मस्जिद में हनुमान चालीसा पढ़ने गए थे। 

हिरासत में लिए गए 4 युवकों ने कहा, “हमने ईदगाह में हनुमान चालीसा का पाठ कर सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया है जब मुस्लिम नंद भवन में नमाज अदा कर सकते हैं तो हम भी ईदगाह में हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं।” इसके साथ ही उन्होंने ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगाए।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मथुरा जनपद हिंदू-मुस्लिम सौहार्द के प्रतीक के रूप में जाना जाता है और ऐसे में किसी भी समुदाय के व्यक्तियों को अमन की फिजा को बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी और ऐसे कार्य करने वालों के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी।

फैजल खान ने मंदिर में पढ़ी थी नमाज

बता दें कि इससे पहले ब्रज चौरासी कोस यात्रा करते हुए दो मुस्लिम युवकों द्वारा नंदगाँव स्थित नंदबाबा मंदिर परिसर में नमाज अदा करने के फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। जिसके बाद यूपी पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया था। हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान फैजल खान और चाँद मोहम्मद के रूप में हुई थी।

सेवायत ने दर्ज कराई थी एफआईआर

मामले में मंदिर के सेवायत गोस्वामी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि 29 अक्टूबर को दोपहर करीब साढ़े 12 बजे फैजल खान और चाँद मोहम्मद, जो दिल्ली के खुदाई खिदमतगार संस्था के सदस्य हैं, इसी संस्था के आलोक रतन और नीलेश गुप्ता के साथ आए। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि मुस्लिम युवकों ने बिना अनुमति लिए और जानकारी के मंदिर प्रांगण में नमाज अदा की और नमाज पढ़ते हुए के अपने फोटो अपने साथियों से सोशल मीडिया पर वायरल कराए। इनके इस कृत्य से हिन्दू समुदाय की भावनाएँ आहत हुई हैं और आस्था को गहरी चोट पहुँची है। 

हिन्दुओं ने मंदिर में हवन कर के गंगाजल से शुद्धिकरण किया। श्रद्धालुओं ने कहा कि बिना अनुमति मंदिर में घुस नमाज पढ़ने के कारण उन्हें शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी। भक्तों ने पंडितों के साथ बैठ कर पूरी प्रक्रिया के साथ हवन-पूजन किया। वहीं विश्व हिन्दू परिषद ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘नमाज जिहाद’ करार दिया। 

नरगिस ने अपने अब्बा मोहम्मद के साथ मिल कर ब्वॉयफ्रेंड अभिषेक को किया किडनैप, फिरौती की रकम से होता निकाह

महाराष्ट्र की ठाणे पुलिस ने सोमवार (नवंबर 3, 2020) को वाराणसी निवासी नरगिस जावेद नाम की 20 साल की युवती, उसके पिता मोहम्मद और उनके 5 अन्य साथियों को गिरफ्तार किया है।

नरगिस समेत इन सभी आरोपितों पर आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर अभिषेक गुप्ता नाम के लड़के का अपहरण किया। उसका शोषण किया और उससे फिरौती भी माँगी।

जानकारी के अनुसार, अभिषेक आरोपित युवती का ब्वॉयफ्रेंड है। पुलिस का कहना है कि नरगिस के घरवालों ने अभिषेक को सबक सिखाने के लिए साजिश के तहत उसका अपहरण किया और फिरौती के पैसे से वह नरगिस की शादी किसी और से करवाना चाहते थे।

असिस्टेंट कमिशनर (वाग्ले एस्टेट डिवीजन) जयंत बाजबाले ने सोमवार (नवंबर 2, 2020) को बताया कि 20 वर्षीय अभिषेक गुप्ता नरगिस जावेद के साथ रिश्ते में थे। वह हाल में ठाणे आए थे। यहाँ वह आईटी क्षेत्र में जॉब करते थे।

पुलिस बताती है कि जब दोनों के रिश्ते के बारे में लड़की के घरवालों को पता चला, तो वह काफी नाराज हुए। उन्होंने नरगिस को वापस बुलवाया। इसके बाद नरगिस के अब्बा मोहम्मद ने अभिषेक को सबक सिखाने का मन बनाया।

नरगिस के अब्बा उसे लेकर मुंबई गए और वहाँ पूरा षड्यंत्र रचा। उन्होंने अभिषेक के अपहरण का प्लान बनाया ताकि उसके परिवार से फिरौती की रकम माँग सकें और नरगिस का निकाह किसी और के साथ करवा सके।

इसी साजिश के तहत शनिवार को जब अभिषेक अपने काम पर थे, उनकी गर्लफ्रेंड नरगिस जावेद ने दोपहर बाद उन्हें फोन करके वसई स्थित एक रेस्तरां में बुलाया।

पुलिस अधिकारी के अनुसार, “अभिषेक गुप्ता जब वहाँ पहुँचे तो 7 लोगों के समूह ने अभिषेक का एक एसयूवी में अपहरण कर लिया। पहले वह सब उन्हें मानोर ले गए और फिर विरार के बलूच नगर स्थित एक फ्लैट में ले गए। उन्होंने गुप्ता के साथ मारपीट की और उनके भाई को फोन कर 4 लाख रुपए माँगे।”

स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, अधिकारियों ने युवक को बरामद करने के बाद सूचना दी कि तकनीकी जानकारी के सहारे पुलिस की टीमों ने रविवार देर रात गुप्ता को बचाने का अभियान शुरू किया था, जो सोमवार सुबह तक चला। आखिर में गुप्ता को फ्लैट से मुक्त करा लिया गया, जहाँ उसका अपहरण करके उसे रखा गया था। उन्होंने कहा कि फिरौती के लिए अपहरण और अन्य आरोपों में दो महिलाओं सहित 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

कुरान और गीता में हिंसा एक नहीं है: ‘अधर्मी से युद्ध’ और ‘विधर्मी को काटने’ में हिंदू-मुसलमान का अंतर है

ऑस्ट्रिया पर हुए इस्लामी हमले के बाद जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्कल ने अपने बयान में कहा है कि इस्लामी आतंक हमारा साझा दुश्मन है। यहाँ ध्यातव्य यह है कि उन्होंने ‘रेडिकल इस्लामी टेरर’ नहीं कहा, बस इस्लामी टेरर कहा है।

वैसे ही, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने भी ‘रेडिकल’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था। इसका सीधा अर्थ बस यह है कि अब लोगों तो आतंक का सही रूप, अपने सही रूप में ही दिख रहा है न कि ‘सेकुलर’ शब्दावली के साथ।

राष्ट्राध्यक्षों के संबोधन बहुत ही ध्यान से, एक-एक शब्द को सोच कर, लिखे जाते हैं। अगर वहाँ से किसी शब्द को हटाया गया है जो हमेशा प्रयोग में आता था, इसका मतलब है कि अब इन्होंने इस मामले को सही दिशा में देखना शुरु कर दिया है।

इस्लाम में रेडिकल कुछ नहीं है, इस्लाम स्वयं में ही रेडिकल है। रेडिकल से मतलब यह है कि वो हमें इस्लाम से प्रेम करने कहते हैं, लेकिन उनके लिए हम काफिर हैं और मारने योग्य। वो कहते हैं कि मुस्लिमों से प्रेम करो, लेकिन उनके लिए अल्लाह से इतर बाकी हर चीज गलत और घृणित है।

रेडिकल और होता क्या है? तुम मंदिर में नमाज पढ़ो, लेकिन हम मस्जिद में रामलीला की बात भी करें तो तुम्हें कष्ट होने लगेगा। तुम हर उस व्यक्ति की हत्या सही बताते हो जो जाने-अनजाने में एक खास व्यक्ति या किताब का अपमान कर देता है, फिर कहते हो कि हम इस्लाम से प्रेम करें!

ये तो बताओ कि जब तुम्हारी किताब में हत्या, लिंचिंग, गुलामों की खरीद-बिक्री, बलात्कार, लूट-पाट सब जायज है, फिर किसी भी विवेकशील व्यक्ति को तुम्हारे मजहब से प्रेम कैसे हो सकता है? आश्चर्य की बात तो यह है कि तुम्हें ही अपने मजहब से प्रेम कैसे हो सकता है अगर वो उपरिलिखित बातें सही मानता है!

जब बर्बरता तुम्हारी शिक्षा की आधारशिला है, हत्या तुम्हारे लिए एक सम्मानजनक कर्म है, बलात्कार पुण्य और काफिरों के धार्मिक स्थल तोड़ना जन्नत-उल-फिरदौस में कमरे रिजर्व करवाता है, फिर कोई सामान्य बुद्धि-विवेक वाला तुम्हें या तुम्हारे मजहब को स्नेहाशिक्त भाव से कैसे देख सकता है?

जानता हूँ कि तुम संख्याबल और मार-काट करने की क्षमता के दम पर पूरी दुनिया की हर सड़क पर बम, चाकू, गोली या गाड़ी चला कर हत्याकांड कर सकते हो। तुमने फ्रांस में वही किया, कनाडा और रूस में किया, विएना में किया। जहाँ तुम्हारी इच्छा है, वहाँ कर लोगे। लेकिन उससे यह तो नहीं बदल जाता कि तुम कौन हो।

तुम्हारी भीतरी तहों तक को सबने देखा है, कुछ सहज कारणों से उपेक्षा करते रहे, लेकिन अति हर उदारवादी को एक समय के बाद सत्य को बोलने पर विवश कर ही देती है क्योंकि किसी मजहबी आतंकी के लिए तुम्हारी बच्ची भी काफिर ही है। उसे इससे मतलब नहीं कि तुमने इस्लामी आतंक को कभी कट्टरपंथी इस्लामी आतंक या ‘आतंक का कोई मजहब नहीं होता’ कह कर छुपाया था, उसे मतलब बस इससे है कि तुम पहले भी काफिर थे, आज भी हो।

कुरान और गीता में ‘हिंसा’ और कन्ट्रोल एफ

इनकी पूरी जमात की एक प्रतिशत ग्रेजुएट औरत जनसंख्या के पढ़े लिखे अब हर दूसरी किताब में ‘हिंसा’ ढूँढ रहे हैं। बात यह है कि ‘कंट्रोल एफ’ कर के हिंसा ढूँढने में अक्सर ‘संदर्भ’ गायब हो जाते हैं। गधों को भी घास और घास की तस्वीर का फर्क पता होता है लेकिन कुछ लोग हैं जिन्हें लगता है कि उन्हीं की तरह बाकी जनसंख्या भी मूर्खता की विष्ठा का फेसपैक लगा कर सो रही है।

पहली बात तो यह है कि चार किताबों के नाम हेडलाइन में लिख देने मात्र से आपको उसका ज्ञान भी हो, ऐसा साबित नहीं हो जाता। दूसरी बात, जिनकी पूरी जमात (वैचारिक और मजहबी) यह मानने को तत्पर रहती हो कि हिन्दी या संस्कृत ‘भगवा आतंकियों द्वारा राष्ट्र के भगवाकरण का प्रयास है’, वो यह दावा करे कि उसने गीता पढ़ी है, या उसको समझा है, तो मैं नहीं मानता।

तीसरी बात, जब भाषाई ज्ञान न हो और मैक्समूलर जैसे ईसाई वैचारिक आतंकवादियों के अनुवाद और फिर उसके भी अनुवाद को आधार मान कर सनातन ग्रंथों के अर्थ निकाले जाएँ तो ‘वेद गड़ेरियों का गीत है’, यही समझ में आएगा। इसलिए, शीर्षक में तूरा, कुरान, बाइबिल और गीता का नाम लिखने भर तुम्हारा ज्ञान कम और मूर्खता अधिक झलकती है।

जहाँ तक गीता में हिंसा की बात है, तो वहाँ यह तो नहीं लिखा हुआ कि पूरी दुनिया में हिन्दुओं के अलावा जो भी है, उसको बिना बात के ही काट दो। जबकि कुरान में बिलकुल यही बात लिखी हुई है कि जो भी शिर्क करता है, काफिर है, मूर्तिपूजा करता है, वो वाजिब-उल-कत्ल है। कुरान तो कहता है कि काफिरों का घात लगा कर इंतज़ार करो और मार डालो।

जिस मजहब के लिए इंसान की इंसानियत, उसकी अच्छाई, नेकी, परोपकार, व्यक्तित्व, हरेक आयाम सिर्फ और सिर्फ इसी बात पर सही या गलत हो जाते हैं कि वो मुस्लिम है या काफिर, उस मजहब को तुम हिन्दुओं के साथ एक वाक्य में लिख भी कैसे सकते हो? ये तो हिन्दुओं की ईशनिंदा है कि किसी घृणित बात सिखाने वाले के साथ उसका नाम जोड़ा जा रहा है।

गीता में अधर्मी से युद्ध की बात है, न कि गैरहिन्दू से। युद्ध के भी नियम हैं, न कि घात लगा कर मारने की बात है। अगर किसी दूसरे ने अधर्म के पक्ष में लड़ते हुए नियमों को तोड़ कर किसी का वध किया, तो उसका वध भी नियम तोड़ कर करना युद्ध के लिए आवश्यक है।

लिखने वाले को यहाँ ‘धर्म’ का प्रयोग ‘रिलीजन’ के संदर्भ में लगता है, जबकि धर्म का अर्थ यहाँ यथोचित कर्म से है।

गीता में धर्म और अधर्म है, वहाँ विधर्म नहीं है। यहाँ धर्म का मतलब सीधा है कि जो व्यक्ति और समाज के लिए जायज है। अहिंसा सनातनियों के मूल में है, लेकिन अधर्म का नाश करना भी समाज के लिए आवश्यक है। जबकि तुम जिस किताब को गीता के साथ प्रयोग कर रहे हो, उसमें ‘अधर्म’ तो तुम्हें स्वयं ही करने को कहा जा रहा है सिर्फ इसलिए कि सामने वाला किसी और की पूजा करता है।

तुम्हारे लिए तो हर विधर्मी स्वतः अधर्मी भी हो जाता है जो कि पूर्णतः असत्य और पक्षपाती मापदंड है। हिन्दुओं के दृष्टिकोण से विधर्मी तो डॉक्टर कलाम भी थे, लेकिन वो अधर्मी नहीं थे। विधर्मी अल्बर्ट आइन्सटाइन भी थे, लेकिन वो अधर्मी नहीं थे। लेकिन, तुम्हारे लिए तो डॉक्टर कलाम भी अपने मजहब का होने के बाद भी ‘अधर्मी’ हो गए क्योंकि वो तुम्हारे कठमुल्लों के हिसाब से नहीं चलते थे। और आइन्स्टाइन के मजहब से तो तुम्हारी जंग तुम्हारे मजहब के शुरुआत से ही है।

फिर ये गीता की हिंसा और कुरान की हिंसा एक जैसी कैसे हो जाएगी? तुम्हारे कॉन्सेप्ट बहुत सरल हैं कि जो भी गैरमुस्लिम है, मौका मिलते की काट दो। इस्लाम का विशुद्ध मूलमंत्र यही है है कि काफिरों को देखते ही मार दो क्योंकि वो बहुईश्वरवादी है, मूर्तिपूजक है। कोई मुझे इस्लाम की दूसरी परिभाषा समझा दे उसी किताब से निकाल कर जिसका अनुसरण ये करते हैं। नहीं दिखा पाएँगे क्योंकि इस्लामी चश्में में दुनिया मुस्लिम और काफिर के अलाव कुछ और देख ही नहीं सकती।

आज जब हर गली में मुस्लिम चाकू मारता फिर रहा है, जब तुम्हारे पुराने हिमायती स्वयं तुम्हारे आतंक से आहत हो कर, तुम्हारा नाम ले कर तुम्हें दुत्कार रहे हैं, ‘रेडिकल’ शब्द लगा कर ‘वो सच्चा मुसलमान नहीं हो सकता’ के दायरे से अलग कर रहे हैं, तब तुम्हें याद आ रही है कि बाइबिल, तूरा और गीता में क्या लिखा हुआ है।

गीता को समझने और ट्वायलेट पेपर के रोल से चार विच्छेद के बाद पेपर फाड़ कर निवृत्त होने में अंतर है। किसी किताब में हर एक पंक्ति सीधी है, दूसरे का एक श्लोक तो छोड़ो, एक शब्द समझनें में पूरा दिन निकल जाएगा। गीता तो छोड़ो, अभी दुर्गा पूजा बीती है, उसके महिषासुरमर्दिनी स्त्रोत के ‘अयि गिरिनंदिनि…’ से ‘शैलसुते’ तक के हर संदर्भ को समझने में जैनाब सिकंदर जैसों का सप्ताह बीत जाएगा। और ये दावा करती हैं कि इन्होंने गीता में हिंसा के संदर्भ को समझ लिया है। इन्हें जिस श्लोक का वर्णन किया है उसमें प्रयुक्त ‘धर्म’ का मतलब ‘रिलीजन’ लगता है, और ये समझा रही हैं कि किस किताब में क्या लिखा हुआ है।

खैर, सामने वाले की समझ के स्तर से ही बातें करनी चाहिए इसीलिए, मैं बहुत गहरे न उतर कर बातों को सामान्य ही रख रहा हूँ। सीधा सवाल यह है कि किस हिन्दू ने, ईसाई ने, यहूदी ने आधुनिक समाज में, पिछले पाँच दशकों में, अपने राम, ईसा या यहोवा के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने पर तीसरे देश में गर्दन काट दी? इस्लाम के अलावा किस धर्म या रिलीजन के व्यक्ति ने व्यवस्थित आतंकवाद का सहारा ले कर पूरी दुनिया के लगभग हर बड़े शहर को निशाना बनाया है?

किस हिन्दू, ईसाई या यहूदी ने संगठन बना कर पूरी दुनिया को कई बार ‘ख़िलाफ़त’ के नीचे लाने का सपना देखा है? किस हिन्दू, ईसाई या यहूदी राष्ट्र ने खुल्लमखुल्ला यह कहा है कि उसी के धर्म या रिलीजन का शासन पूरे विश्व पर एक दिन होना चाहिए? जबकि ईसाई और यहूदी तो तुम्हारे जैसे ही हैं, एक ही ईश्वर को पूजते हैं, फिर भी तुमने क्रूसेड तो किए ही, आज भी वही तुम्हारे जानी दुश्मन बने बैठे हैं।

इसके बाद भी, कौन सा देश या समूह आज भी आम मुस्लिम समाज को निशाना बना रहा है? लेकिन इस्लामी आतंक का निशाना किसी देश की सेना या संगठन की जगह आम नागरिक ही तो बनते हैं। संकटमोचन मंदिर में पूजा करने तो सामान्य हिन्दू जाता है, नोट्रेडेम बेसिलिका में तो सामान्य ईसाई प्रार्थना करने जाता है, स्टैडटेम्पल सेनेगॉग में तो सामान्य यहूदी जाता है आराधना करने, फिर उन परिसरों में बम धमाके, चाकूबाजी और गोली कौन चला रहा है?

कभी सुना है कि गीता पढ़ने वाले ने मस्जिद के सामने किसी का गला रेत दिया? कभी सुना है कि रामायण के श्लोक पढ़ते हुए किसी मस्जिद में किसी हिन्दू ने बम रख दिया हो? कभी सुना है कि सड़क पर ‘जय श्री राम’ कहते हुए हिन्दू किसी मुस्लिम को चाकू मार रहा है? नहीं सुना होगा क्योंकि ऐसा होता ही नहीं। ऐसी विकृति गीता पढ़ने वालों में अनुपस्थित है। अगर उपस्थित होती तो भारत इस्लामी आतंक को मुहम्मद बिन कासिम के दौर से ले कर बुरहान वनी तक नहीं झेलता रहता। वहीं, जब पहला कदम रखा था, काट कर फेंक देते।

इसलिए, गीता जब लिखती हो, तो वो G, i, t और a नहीं है, भले ही टाइप करने में क्षण भर लगे। इतना सहज नहीं है हिन्दुओं को नीचा दिखाना। हिन्दू ने गीता न भी पढ़ी हो, तब भी वो जानता है कि किसी की हत्या करना पाप है। एक साँप को रास्ते से हटा कर फेंकने वाले भीष्म को, अपने कई जन्मों के बाद जहाँ उन्होंने धर्माचरण के अलावा कुछ गलत किया ही नहीं, अंततः एक अधर्मी के साथ खड़े होने पर बाणों की शय्या पर उतने ही दिन, उसी पीड़ा को सहते हुए गुजारने पड़े थे, जिससे वो सर्प गुजरा था जो फेंकने के बाद काँटों पर गिर गया था।

हम बचपन से यही सीखते हैं। हम अपने बच्चों को चाकू दे कर बकरे को हलाल करना और अपनी पत्नियों को हलाला करना, दोनों ही नहीं सिखाते। बच्चे चींटी भी मारते हैं तो माँ-बाप कहते हैं कि जीव हत्या का पाप चढ़ेगा, और पत्नी को तो खैर अर्धांगिनी और वामांगी माना गया है, न कि ससुर या किसी मुल्ले के उपभोग की वस्तु। इसलिए, फर्जी के ज्ञान मत दिया करो।

इंटरनेट के किसी पेज पर या पायरेटेड पीडीएफ कॉपी पर ‘कंट्रोल एफ’ से ‘किल, वॉर या फाइट’ जैसे शब्द ‘फाइंड’ तो कर लोगी, लेकिन जनम बीत जाएगा, मतलब समझ में नहीं आएगा क्योंकि तुम जैसों की औकात नहीं है सनातन ग्रंथों के एक शब्द को भी समझना। क्योंकि तुम्हारा मस्तिष्क मजहबी घृणा से इतना सना हुआ है कि वहाँ विवेकपूर्ण बातों के लिए स्थान ही नहीं बचा है।

इसलिए, हे देवि! अपने दोनों अंगुष्ठों, तर्जनियों, मध्यमाओं, अनामिकाओं और कनिष्ठाओं के और तरह से उपयोग करो बजाय इसके कि कैसे हिन्दू और इस्लाम को एक दिखा दें। तुम्हारी एक किताब है, हमारी टीकाएँ इतनी हैं, कि जन्म-जन्मांतर बीत जाएँगे उनको खोजने, पढ़ने, समझने और तुलनात्मक अध्ययन में।

‘अश्लील बातें करता था, अकेले में मिलने बुलाता था’: कॉन्ग्रेस नेता को जूतों से पीटने के बाद लड़कियों ने पुलिस को सौंपे सबूत

उत्तर प्रदेश के जालौन में कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष अनुज मिश्रा पर लड़कियों के साथ छेड़छाड़ और उनके साथ फोन पर अश्लील बातचीत करने का आरोप लगा है। इसके बाद लड़कियों ने ही मिल कर उनकी धुनाई कर दी थी। अब इस मामले में दोनों पीड़ित लड़कियों ने पुलिस को सबूत उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने पुलिस को कॉल रिकॉर्डिंग्स दिए हैं। लड़कियों ने कहा कि वो अकेले में मिलने के लिए भी बुलाते थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

साथ ही उस कॉन्ग्रेस नेता ने धमकाया भी था कि अगर लड़कियों ने पुलिस में शिकायत की तो अच्छा नहीं होगा। रविवार (नवंबर 1, 2020) की दोपहर दोनों लड़कियों ने तंग आकर उसे मिलने के लिए बुलाया और उसकी पिटाई कर दी। जालौन कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष अनुज मिश्रा की जूतों से पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया था। युवती की तहरीर पर उनके खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था। पुलिस उन्हें उठा कर थाने लेकर गई थी।

जालौन पुलिस ने इस मामले की जाँच सीओ सिटी और महिला थाना प्रभारी को सौंपी है। बता दें कि जालौन कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष अनुज मिश्रा को दो युवतियों ने दोपहर 12 बजे के करीब रेलवे स्टेशन के पास मिलने को बुलाया था। अनुज मिश्रा जैसे ही रेलवे स्टेशन पर पहुँचे, दोनों युवतियों ने चप्पलों और थप्पड़ों से उनकी जम कर धुनाई शुरू कर दी। मिश्रा ने कई बार युवतियों के पैर पकड़ कर माफी माँगी, लेकिन वो पिटाई करती रहीं।

लड़कियों को उन्होंने धमकाया था कि पुलिस में शिकायत करने पर वो मारेंगे। हालाँकि, अनुज मिश्रा का कहना है कि उधारी के रुपए माँगने पर साजिश के तहत उनके साथ मारपीट की गई है। उनका कहना है कि उनकी बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान से मकान के निर्माण के लिए युवतियों ने ईंट व गिट्टी की उधार खरीददारी थी और रुपए माँगने पर स्टेशन पर बुलाया था और वो वहाँ रुपए लेने गए तो साजिश के तहत उनकी पिटाई का वीडियो वायरल कर दिया गया।

कोतवाल ने बताया है कि इस मामले की जाँच के लिए और अनुज मिश्रा के आरोपों कि सच्चाई का पता लगाने के लिए दोनों ही युवतियों की कॉल रिकॉर्डिंग्स को खँगाला जाएगा। जिलाध्यक्ष इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं। फ़िलहाल उन्हें 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उन्हें उरई जिला कारागार में रखा गया है। कॉन्ग्रेस नेताओं का कहना है कि उक्त युवती को पार्टी की जिला कमिटी से 2 दिनों पहले हटा दिया गया था, इसीलिए उसने द्वेष में आकर इस घटना को अंजाम दिया।

बता दें कि वायरल हुए वीडियो में दोनों लड़कियाँ कॉन्ग्रेस नेता से पूछ रही हैं, “अब लड़कियों को गाली दोगे? अब छेड़खानी करोगे? अब लड़कियों पर ट्राय करोगे?” जिस पर कॉन्ग्रेस नेता अनुज मिश्रा लड़कियों के पैर पकड़ कर उनसे माफ़ी माँगते हैं, उन्हें बहन कह कर संबोधित करते हैं और अंत में कहते हैं कि अब वह ऐसा कभी नहीं करेंगे। सोशल मीडिया पर नेटिज़न्स के बीच इस वीडियो को लेकर काफी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। 

टैगोर इंटरनेशनल स्कूल ने हिंदू छात्राओं को हिजाब पहनाकर दिलवाया इस्लाम का संदेश, पहले भी रह चुका है विवादों में

टैगोर इंटरनेशनल स्कूल एक बार फिर से विवादों में है। दरअसल इस बार इस स्कूल ने अपनी हिंदू छात्राओं से इस्लामिक त्योहार ईद पर लोगों का अभिवादन करते समय हिजाब पहनने के लिए कहा। इसका एक वीडियो स्कूल के YouTube चैनल पर अगस्त 04, 2020 को अपलोड किया गया जिसे कैप्शन दिया गया, “ईद-उल-अजहा के शुभ अवसर पर बधाई।”

वीडियो में, इशिता वर्मा नाम की एक छात्रा ने इस्लामिक त्योहार के बारे में जानकारी दी। जिसे सुनकर ऐसा लगता है कि उसने इसे पहले से याद किया हो। हालाँकि, वीडियो से यह पता नहीं चल पा रहा है कि इशिता वर्मा किस कक्षा की छात्रा है। वीडियो में इशिता बताती है कि किस तरह से इब्राहीम (इस्लामी ग्रंथों में इब्राहिम) अल्लाह की आज्ञा से अपने 13 साल के बेटे इस्माइल का बलिदान करने के लिए तैयार था मगर देवदूत गेब्रियल ने इसे रोक दिया।

YouTube screengrab

इसके तुरंत बाद, एक और हिंदू लड़की, दीक्षा पंडित स्क्रीन पर इस्लामी आस्था के पाँच स्तंभों के बारे में दर्शकों को सूचित करती है। उसने भी हिजाब पहना हुआ था। ईद मुबारक की कामना करने के लिए वीडियो में भाग लेने वालों में मुस्लिम छात्र भी थे। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्रक्रिया में हिंदू लड़कियों को शामिल करने की क्या जरूरत थी।

यह सेक्युलरिज्म के उसी ब्रांड की तरह प्रतीत होता है जिसकी माँग होती है कि सांप्रदायिक सौहार्द और बेहतर पारस्परिक संबंधों की खातिर हिंदू घुटनों पर झुकें। इसके अलावा, हिंदू लड़कियों को हिजाब पहनाने का कोई औचित्य नहीं है, विशेष रूप से एक ऐसी उम्र में, जिसमें वे खुद के लिए खुल कर नहीं सोच सकती हैं।

वीडियो में जो दिखाया जा रहा है, उससे साफ पता चल रहा है कि ब्रेनवॉश किए गए बच्चों का इस्तेमाल करके दूसरे बच्चों के ब्रेनवॉश की भी कोशिश की जा रही है। टैगोर इंटरनेशनल स्कूल वही है, जो हाल ही में एक एलजीबीटी की पैरवी करने वाले समूह ‘नजरिया क्यूएफआरजी’ की एक एक्टिविटी के कारण विवादों में था। इस एक्टिविटी में बच्चों के लिए ऐसी कलरिंग बुक दी गईं थीं, जिनमें हस्तमैथुन करने वाली नग्न महिलाओं वाली कलर बुक शामिल थीं।

उन्होंने हादिया के मुद्दे पर भी बच्चों का ब्रेनवॉश किया। हादिया वही लड़की है जिसने अपने पति से शादी करने के लिए इस्लाम धर्म कबूला था। एएनआई इसकी जाँच कर रही है। कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पीएफआई ने इसके ऊपर अदालती मामलों में 1 करोड़ रुपए खर्च किए।

इस तरह से हादिया के लव जिहाद मामले के बारे में बच्चों का ब्रेनवॉश करने के बाद, अब यह हिंदू लड़कियों को हिजाब पहनकर वीडियो पर दिखा रहा है। यह एक अत्यंत घातक परम्परा है, जिसके विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।

‘तेरा मुँह काला हो जाएगा’: जावेद अख्तर ने कंगना रनौत के खिलाफ दायर किया मानहानि का मुकदमा

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत पर एक और केस दर्ज हुआ है और इस बार ये काम किया है फिल्म इंडस्ट्री के वरिष्ठ गीतकार जावेद अख्तर ने। फिल्मों के गाने लिखने वाले जावेद अख्तर ने कंगना रनौत के खिलाफ FIR लिखवा दी है। उन्होंने कंगना रनौत पर मानहानि का मुकदमा दायर किया है। ये मामला कंगना रनौत के उस बयान से जुड़ा है, जब उन्होंने ऋतिक रौशन से विवाद के मामले में जावेद अख्तर पर धमकी देने का आरोप लगाया था।

‘स्पॉटबॉय’ की खबर के अनुसार, जावेद अख्तर से जुड़े लोगों का कहना है कि वो काफी सहनशील स्वभाव के हैं, लेकिन ये चीजें काफी समय से चल रही थीं और इस मामले में एक्शन लेना आवश्यक हो गया था। अब ये मामला कोर्ट में पहुँच गया है और जावेद अख्तर का कहना है कि वो लम्बी लड़ाई लड़ने के लिए भी तैयार हैं। उन्होंने कोर्ट के बाहर किसी प्रकार का समझौता करने से भी इनकार कर दिया है। अब मानहानि के मुकदमे पर सुनवाई होगी।

जिस तरह से कंगना रनौत के खिलाफ एक-एक कर महाराष्ट्र सरकार और बीएमसी के बाद अब बॉलीवुड के सेलेब्रिटीज सामने आ रहे हैं, उससे उनकी कानूनी मुश्किलें बढ़नी तय लग रही हैं। जावेद अख्तर ने इस बात से इनकार कर दिया है कि उन्होंने कंगना रनौत को किसी भी प्रकार की धमकी दी थी। कंगना रनौत की बहन रंगोली चंदेल ने भी उन पर आरोप लगाए थे। ऋतिक ने भी कंगना के खिलाफ केस किया था, जो बाद में बंद हो गया था।

कंगना रनौत फ़िलहाल अपने भाई की शादी में व्यस्त हैं, जो उनके हिमाचल प्रदेश के मनाली स्थित आवास पर आयोजित किया जा रहा है। मेहंदी का कार्यक्रम हो भी चुका है और सब शादी की तैयारियाँ हो रही हैं। कंगना रनौत ने अपने परिवार के साथ जाकर प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को भी इस समारोह में आने का आमंत्रण दिया। राज्य में जल शक्ति, राजस्व, बागवानी, सैनिक कल्याण मंत्रालय संभालने वाले भाजपा नेता महेंद्र सिंह ठाकुर भी इस समारोह में उपस्थित रहेंगे, जो कंगना के पारिवारिक मित्र हैं।

कंगना रनौत ने ‘रिपब्लिक टीवी’ पर बताया था कि जावेद अख्तर ने उन्हें अपने घर बुला कर कहा, “तुम्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी क्योंकि वह तुम्हें जेल में बंद कर देंगे। उन्होंने (ऋतिक रोशन) तुम्हारे खिलाफ़ सारे सबूत इकट्ठा कर लिए हैं। वह समझ चुके हैं कि केस पूरी तरह उनके हाथों में है। तुम्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी क्योंकि तेरा मुँह काला हो जाएगा तो तू जाएगी कहाँ?” अब जावेद अख्तर ने इस बयान को लेकर कंगना के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया है।

ऋतिक से अनबन की बात खुद कंगना ने भी कबूली थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि शक्तिशाली रोशन परिवार उनके पीछे पड़ा हुआ है। रंगोली चंदेल के मुताबिक, इस विवाद के दौरान जावेद अख्तर ने कंगना को अपने घर बुलाया था। उसे अपने कहे अनुसार चलने की सलाह दी थी। वे चाहते थे कि कंगना उनकी बात मान ऋतिक से माफ़ी माँग ले। इससे इनकार किए जाने पर उन्हें जावेद अख्तर ने धमकाया था।

भाजपा-कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं में झड़प के बाद 6 घायल, कॉन्ग्रेस नेता समेत 6-7 पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज

मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों के लिए हो रहे उपचुनावों के दौरान आज (नवंबर 3, 2020) भाजपा व कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं में आपसी भिड़ंत की खबरें आ रही हैं।

स्थानीय चैनल बता रहे हैं कि लसूड़िया थाना क्षेत्र के सांवेर में आज फिर कॉन्ग्रेस-भाजपा नेताओं में भिड़ंत हो गई है। फिलहाल पुलिस ने मौके पर स्थिति को संभाला है। इसके अलावा एक मामला धार जिले के बदनावर इलाके से भी आया है, जहाँ 6 लोगों के घायल होने की खबर है

जानकारी के मुताबिक यह भिड़ंत सोमवार को हुई थी, जिसमें 6 लोग घायल हुए थे। इनमें से 2 की हालत गंभीर है। वहीं पुलिस ने हत्या के प्रयास और मारपीट के पूरे केस में 7 लोगों के ख़िलाफ़ (कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 6 के ख़िलाफ़) मामला दर्ज किया है।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, जिला पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह ने बताया कि जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर तिलगारा में सोमवार दोपहर लगभग एक बजे चुनाव प्रचार के दौरान दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के वाहन आमने-सामने आ गए।

इसके बाद दोनों में विवाद हो गया। पुलिस ने 7 लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया है। आरोपितों में से चार लोगों की शिनाख्त कर ली गई है। ये चारों कॉन्ग्रेस के पदाधिकारी हैं।

बता दें कि कार्यकर्ताओं में यह भिड़ंत उस समय हुई, जब सभी कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों से पार्टियों का प्रचार करके लौट रहे थे। इसी दौरान एक विवाद के ऊपर दोनों पक्षों में झड़प हो गई। जब तक पुलिस मौके पर पहुँची, वहाँ 6 लोग घायल थे। इन सबको पुलिस ने नजदीक के अस्पताल में पहुँचाया।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पुलिस ने इस संबंध में ब्लॉक कॉन्ग्रेस प्रमुख निरंजन सिंह पवार और पूर्व पंचायत अध्यक्ष अभिषेक मोदी के खिलाफ आईपीसी की धारा 307 के तहत केस दर्ज किया। इनके अलावा कॉन्ग्रेस आईटी सेल के जिलाध्यक्ष अश्विन पाटीदार, पूर्व पार्षद साजिद खान, टिंकू और अर्जुन चौहान के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। दोनों पार्टियों के जिलाध्यक्षों ने एक दूसरे की पार्टी पर झड़प का आरोप मढ़ा है।

जंगलराज वाले चाहते हैं कि छठी मैया की धरती पर ‘जय श्री राम’ के नारे न लगें: PM मोदी, किया बिहार के सैनिकों को नमन

जहाँ बिहार में मंगलवार (नवंबर 3, 2020) को दूससरे चरण का मतदान चल रहा है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सहरसा में जनसभा को सम्बोधित किया। सहरसा और अररिया सहित अन्य इलाकों में तीसरे व अंतिम चरण में मतदान होगा। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि वो बीते दिनों में बिहार के करीब हर क्षेत्र में गए हैं। जनभावनाओं को देखा है, समझा है। अभी दूसरे चरण के मतदान के जो ट्रेंड मिल रहे हैं, उसने तस्वीर साफ कर दी है। उन्होंने भरोसा जताया कि बिहार का जनादेश स्पष्ट है, बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने जा रही है।

पीएम मोदी ने लालू यादव के राज को याद करते हुए कहा कि जंगलराज ने बिहार के सामर्थ्य के साथ जो विश्वासघात किया, उसे बिहार का हर नागरिक अच्छे से जानता है। उन्होंने कहा कि जुबान पर बार-बार गरीब का नाम वालों ने गरीब को ही चुनाव से दूर कर दिया था। बिहार के गरीब को अपनी मर्जी की सरकार बनाने का अधिकार ही नहीं था। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि अपने एक वोट की ताकत कम मत आँकना।

प्रधानमंत्री मोदी ने सहरसा में कहा कि जिस प्रकार से श्रीकृष्ण ने एक उँगली पर गोवर्धन को उठाया था, जिस प्रकार से ग्वालों ने समर्थन किया था, वैसे ही आपकी उँगली पर लोकतंत्र के सौभाग्य का चिह्न लगने वाला है। उन्होंने कहा कि आपके एक-एक वोट की ताकत बिहार के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है। बकौल पीएम मोदी, आत्मनिर्भर बिहार यानी बिहार का आईटी हब के रूप में विकास। आत्मनिर्भर बिहार यानी बिहार में नए दुग्ध प्रोसेसिंग यूनिट का विकास।

उन्होंने आगे कहा कि आत्मनिर्भर बिहार यानी बिहार में नए कृषि उत्पादक संघों का निर्माण। आत्मनिर्भर बिहार यानी बिहार के कुटीर उद्योगों का विकास। पीएम मोदी ने आश्वासन दिया कि बिहार के लोग आत्मनिर्भर भारत-आत्मनिर्भर बिहार के लिए प्रतिबद्ध हैं, कटिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में एक नए उदीयमान, आत्मनिर्भर और गौरवशाली अतीत से प्रेरित बिहार की नींव रखी जा चुकी है।, अब इस मजबूत नींव पर एक भव्य और आधुनिक बिहार के निर्माण का समय है।

सहरसा में पीएम मोदी ने कहा कि बीते दशक में CM नीतीश के नेतृत्व में NDA सरकार ने आत्मनिर्भर बिहार की मजबूत नींव रखी है। बिहार में बिजली, पानी, सड़क जैसी मूल सुविधाएँ आज गाँव-गाँव पहुँच चुकी हैं। उन्होंने आँकड़े गिनाए कि आज बिहार देश के उन राज्यों में है, जहाँ बिजली की खपत सबसे अधिक होती है। साथ ही कहा कि जनधन योजना के कारण, कोरोना के इस संकट काल में बिहार की लाखों बहनों के बैंक खाते में सीधे सैकड़ों करोड़ रुपए जमा हो पाए हैं।

इसकी महत्ता की बात करते हुए पीएम मोदी ने याद दिलाया कि यही जनधन योजना है, जिसके कारण कोरोना काल में भी बिहार के लाखों किसान परिवारों के बैंक खाते में सीधी मदद पहुँच पाई है। उन्होंने बताया कि मुद्रा योजना के तहत बिहार में करीब ढाई करोड़ ऋण बिना गारंटी के आवंटित किए जा चुके हैं। इसमें करीब पौने 2 करोड़ तो महिला उद्यमी हैं। 50 लाख से अधिक साथी ऐसे हैं, जिन्होंने पहली बार इस योजना के तहत ऋण लिया है। पीएम ने कहा:

“बिहार के हर जिले में कम से कम एक ऐसा उत्पाद है, जो देश और विदेश के बाजारों में धूम मचा सकता है। आत्मनिर्भर बिहार के लिए हर जिले में इन उत्पादों को निखारने, सँवारने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योग लगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। NDA सरकार हमारे किसानों के उत्पादों को कितना संरक्षण दे रही है, इसका बहुत बड़ा उदाहरण है हमारा जूट से जुड़ा सेक्टर। आज जब देश सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति की तरफ तेज़ी से अपने कदम बढ़ा रहा है, तो इसका सीधा लाभ हमारे जूट किसानों को हो रहा है, जूट उद्योग को हो रहा है। पहले जितनी खादी बिकती थी, उससे कई गुना ज्यादा खादी आज बिक रही है। लोग खरीद रहे हैं, दुनिया में भी माँग बढ़ रही है। 2014 से पहले 25 साल में जितने वर्ष की खादी हमारे देश में बिकी थी, उससे ज्यादा की खादी सिर्फ पिछले 5 साल में बिक चुकी है।”

पीएम मोदी ने सहरसा की जनसभा के माध्यम से देश के 130 करोड़ देशवासियों को आग्रह किया कि वो आने वाले दिनों में धनतेरस, दीवाली, छठ जैसे त्यौहारों पर जितना संभव हो सके, लोकल चीजें ही खरीदें। उन्होंने कहा कि इससे दीवाली सिर्फ आपके घर ही नहीं, उस गरीब सामान बेचने वाले के घर भी होगी। उन्होंने कहा कि बिहार की अनेकों वीर माताएँ, अपने लाल, अपनी लाडली को राष्ट्ररक्षा के लिए समर्पित करती हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि कैसे बिहार के शूरवीर देश की सीमा, देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देते हैं, देश की रक्षा करते हैं। उन्होंने लोगों से पूछा कि बिहार को जंगलराज बनाने वालों के साथी, उनके करीबी क्या चाहते हैं, आपको पता है? फिर खुद ही जवाब देते हुए बोले कि वो चाहते हैं, आप भारत माता की जय के नारे न लगाएँ। बकौल पीएम, छठी मैया को पूजने वाली इस धरती पर, जंगलराज के साथी चाहते हैं कि भारत माता की जय के नारे न लगें।

पीएम मोदी ने बिहार के सहरसा की जनसभा में आगे कहा कि वो (जंगलराज बनाने वाले और उनके साथी) चाहते हैं, आप ‘जय श्री राम’ भी न बोलें, बिहार के चुनाव प्रचार में माँ भारती का जयकारा करना इन लोगों को रास नहीं आ रहा। उन्होंने भरोसा जताया कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार दोबारा बनाने का संकल्प साकार होने जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि हमें पूरी शक्ति के साथ एक-एक वोटर के पास जाना है और इस बार वोटिंग के और जीत के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ने हैं।

‘राहुल राठौर नाम बताया था आसिफ के बेटे ने, बहला-फुसला कर भगा ले गया मेरी बेटी को’ – रेवाड़ी केस में नया खुलासा

हरियाणा के रेवाड़ी में 16 साल की एक नाबालिग लड़की के गायब होने के कई दिनों बाद उसके माता-पिता ने आरोप लगाया कि उसे एक मुस्लिम लड़का बहला-फुसला कर अपने साथ ले गया। माँ ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले एक जेसीबी चालक ने उनकी बेटी को फँसाया और 11 अक्टूबर को उसे भगा ले गया।

अब माँ ने खुलासा किया कि पिछले 6 महीने से उनके चचेरे भाई के लिए जेसीबी चलाने वाले मुस्लिम लड़के ने लड़की के परिवार के करीब आने के लिए खुद को हिंदू बताया था। मुस्लिम लड़के ने अपनी पहचान छुपा लिया और खुद को ‘राहुल राठौर’ बताया था। जबकि उसके पिता का नाम आसिफ़ है और वह मूल रूप से हरियाणा के फ़िरोज़पुर झिरका के पास के एक गाँव से है। 

माँ ने कहा कि मुस्लिम लड़का उनके चचेरे भाई के लिए जेसीबी चलाते हुए नियमित रूप से उनके घर आने-जाने लगा। इसके बाद वो बिना उनकी जानकारी के चुपचाप नाबालिग लड़की से मिलने लगा और आखिरकार उसे बहला-फुसला कर भगा ले गया।

इसके साथ ही नाबालिग पीड़िता के परिवार ने पुलिस पर भी मामले को ठीक से नहीं देखने पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस मामले पर ध्यान नहीं दे रही है। वो उनकी बेटी को वापस लाने की पूरी कोशिश नहीं कर रहे हैं।

पीड़िता की दुखी और परेशान माँ ने कहा, “हम खुद को मार देंगे। जो भी करना होगा, हम करेंगे। सड़कों को ब्लॉक करना हो या पुलिस स्टेशन के सामने प्राण त्यागना, हम सब करेंगे। हर दिन मरने की तुलना में एक बार मरना बेहतर है।”

इस बीच, पुलिस ने जानकारी दी है कि उन्होंने कई टीमों का गठन किया है, जो पीड़िता और आरोपित की तलाश के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं। खौल थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह ने कहा, “हमें 11 अक्टूबर से एक नाबालिग लड़की के लापता होने की सूचना मिली। उनके परिवार के लिए काम करने वाला एक लड़का लड़की के साथ लापता है। हमने एक मामला दर्ज किया है और लड़की को खोजने के लिए कई जगहों पर छापे मारे हैं। एक बार लड़की का पता लगाने के बाद सब कुछ सामने आ जाएगा।”

गौरतलब है कि हरियाणा के रेवाड़ी से यह मामला उस समय सामने आया, जब कुछ दिनों पहले ही तौसीफ नाम के मुस्लिम युवक ने निकिता तोमर नामक हिंदू लड़की को दिनदहाड़े गोली चला कर मार डाला। निकिता की गलती बस यही थी कि उसने धर्म परिवर्तन करने से मना किया था।