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मोहम्मद शमी की बेटी ने खेली होली, रंग-गुलाल वाली तस्वीर देख गाली देने लगे इस्लामी कट्टरपंथी: कहा- जाहिल-बेशर्म… रमजान का महीना है शर्म करो

भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी लगातार इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। इस बार कट्टरपंथियों ने उनकी बेटी को अपना निशाना बनाया है। मोहम्मद शमी की बेटी के होली खेलने को लेकर कट्टरपंथी भड़क गए हैं रमजान, इस्लाम, इल्म आदि का ज्ञान दे रहे हैं। शमी की बेटी से जुमे की नमाज का समय पूछा जा रहा है, उनकी परवरिश पर प्रश्न उठाए जा रहे हैं।

इस्लामी कट्टरपंथियों का यह गुस्सा मोहम्मद शमी की पूर्व पत्नी हसीन जहाँ की एक पोस्ट पर निकला है। हसीन जहाँ ने शुक्रवार (14 मार्च, 2025) को अपनी बेटी आयरा शमी की एक फोटो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा की थी। इसमें दिखता है कि आयरा रंग खेल कर आई हैं।

आयरा के कपड़ों और चेहरे आदि पर रंग-गुलाल लगा हुआ था। हसीन जहाँ ने इसी फोटो के साथ होली की शुभकामनाएँ भी दी। इसी फोटो को देखने के बाद इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए और हसीन जहाँ तथा उनकी बेटी को लेकर बुरा भला कहने लगे।

जुनैद नाम के एक व्यक्ति ने शमी की बेटी की फोटो पर लिखा, “जुमे की नमाज पहले पढ़ी है या बाद में?”

वहीं एक और अकाउंट ने लिखा, “रमजान मंथ है यार शर्म करो।”

मोहम्मद शमी बेटी होली

इमरान शेख ने हसीन जहाँ पर प्रश्न उठाए और कहा, “वाह क्या तालीम दी है बेटी को!”

कुछ कट्टरपंथियों ने गालियाँ तक लिखीं और चाकू-बन्दूक वाले इमोजी कमेन्ट किए।

शमी की बेटी को इस्लाम सिखाने वालों ने उनकी माँ हसीन जहाँ को भी इसमें घसीट लिया। उनको बेशर्म और जाहिल करार दिया गया।

अब्दुल कलाम ने लिखा, “जाहिल औरत को रमजान महीने में भी शर्म नहीं आई, मैं इसे अभी ब्लॉक कर रहा हूँ।”

मोहम्मद शमी बेटी होली

साकिब आलम ने लिखा, “बेशर्म औरत *सी।’ रहेब नाम के एक शख्स ने यह पूछ लिया कि आखिर वह मुस्लिम हैं भी या नहीं।

यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब मोहम्मद शमी इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर आए हों। हाल ही में चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान उन्होंने ग्राउंड पर जूस पी लिया था। इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए थे। उनकी यह तस्वीर सामने आने के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उन्हें गुनहगार बताया था।

मौलाना ने कहा था, “इस्लाम ने रोज़े को फर्ज़ करार दिया है। सभी पर रोज़ा फर्ज़ है। अगर कोई जानबूझकर रोज़ा नहीं रखता, तो वह गुनहगार है। ऐसा ही क्रिकेटर मोहम्मद शमी ने किया। उन्होंने रोज़ा न रखकर बहुत बड़ा गुनाह किया है। शरिया की नज़र में यह कटघरे में खड़े हैं और मुजरिम हैं…।”

झारखंड से पंजाब तक होली का जश्न कट्टरपंथियों को नहीं आया रास: गिरीडीह में दुकानें-गाड़ियाँ फूँकी, लुधियाना की मियाँ मार्केट में ईंट-पत्थर-बोतलें मारी

झारखंड के गिरिडीह जिले में शुक्रवार (14 मार्च 2025) को होली जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच जमकर झड़प हो गई। यह घटना घोरथंबा इलाके में हुई, जहाँ मुस्लिमों ने होली जुलूस के रास्ते का विरोध किया। इसके बाद दोनों पक्षों में बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते पथराव और हिंसा में बदल गई। इस झड़प में कई लोग घायल हो गए। गुस्साई भीड़ ने कम से कम तीन दुकानों और कई गाड़ियों में आग लगा दी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुँचकर हालात को काबू में करने की कोशिश की। गिरिडीह के एसपी डॉ. बिमल ने बताया कि दोनों समुदायों और उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। उन्होंने कहा, “पहचान होने के बाद सख्त कार्रवाई होगी। अभी स्थिति नियंत्रण में है और किसी को गंभीर चोट नहीं आई है।” खोरीमहुआ के एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद ने भी कहा कि शांति बहाल करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

उप विकास आयुक्त स्मिता कुमारी ने इसे कुछ असामाजिक तत्वों की शरारत बताया। उन्होंने कहा, “होली के मौके पर इन लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। कुछ दुकानों और वाहनों में आग लगाई गई, लेकिन अब सब कंट्रोल में है। घटना के कारणों की जाँच चल रही है।” पुलिस का कहना है कि उपद्रवियों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा।

होली के त्योहार को देखते हुए पूरे झारखंड में पुलिस पहले से ही मुस्तैद थी। राँची और बाकी जिलों में भी चौकसी बढ़ाई गई थी।

लुधियाना में दो पक्षों में झड़प, 10 लोग घायल

इस बीच, लुधियाना के फोकल प्वाइंट इलाके में बिहारी कॉलोनी के पास शुक्रवार (14 मार्च 2025) को मस्जिद के आसपास पथराव के बाद दो समूहों में झड़प हो गई। इस घटना में 10 लोग घायल हो गए। पुलिस ने मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक, झड़प के दौरान दोनों पक्षों ने ईंट-पत्थर और बोतलें चलाईं, जिससे कुछ गाड़ियों में भी तोड़फोड़ हुई। घटना का वीडियो भी सामने आया है।

सूत्रों के अनुसार, मस्जिद के सामने डीजे बजाने की घटना के बाद झड़प सामने आई है। इसके बाद मस्जिद के बाद पुलिस बल की तैनात की गई है। डीजे बजाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई। इसके बाद उन्होंने एक दूसरे पर पत्थर भी फेंके। सूचना मिलते ही पुलिस के सीनियर अधिकारी मौके पर पहुँचे और हालात को काबू में किया।

एडीसीपी पीएस विर्क ने कहा कि आज होली का त्यौहार है और एक तरफ मस्जिद है। दूसरी तरफ प्रवासी रहते हैं। वे डीजे बजा रहे थे। इसी को लेकर प्रवासियों और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच कहासुनी हो गई। उन्होंने एक-दूसरे पर पत्थर भी फेंके। पुलिस मौके पर पहुँची और स्थिति नियंत्रण में है। एफआईआर दर्ज कर ली गई है और कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है और शांति बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

सड़कों पर बिखरी लाशें, औरतों को नंगा कर घूमा रहे, डर से देश छोड़ भाग रहे लोग… इस्लामी हुकूमत में रहेगा सीरिया, अंतरिम राष्ट्रपति ने 5 साल के लिए किया कबूल

सीरिया में असद अल-बशर की सरकार का तख्तापलट के बाद वहाँ इस्लामवादियों का शासन लागू कर दिया गया है। सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने एक संवैधानिक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किया है। इस घोषणा-पत्र में कहा गया है कि बदलाव के दौर से गुजर रहे देश में पहले पाँच वर्ष इस्लामी शासन रहेगा। दरअसल, सीरिया तख्तापलट के बाद से हिंसा के दौर से गुजर रहा है।

नए संविधान में कहा गया है कि इस्लाम देश के राष्ट्रपति का धर्म है, जैसा कि पिछले संविधान में था। मसौदा समिति के अनुसार, दस्तावेज़ यह भी मानता है कि इस्लामी न्यायशास्त्र यानी शरिया ‘कानून का मुख्य विधायी स्रोत’ है, न कि ‘एक मुख्य स्रोत’। इसमें शक्तियों के पृथक्करण, न्यायिक स्वतंत्रता, मीडिया की स्वतंत्रता, महिला अधिकारों की गारंटी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात कही गई है।

संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत गेइर पेडरसन ने इसका स्वागत किया है और कहा है कि यह कानूनी शून्यता को भरने वाला कदम है। वहीं, उत्तर-पूर्वी सीरिया में कुर्द नेतृत्व वाले प्रशासन ने संवैधानिक घोषणा की निंदा की है और कहा है कि यह सीरिया की वास्तविकता और इसकी विविधता का खंडन करता है। सीरिया में नया एवं स्थायी संविधान लागू होने तक घोषणा-पत्र वाली व्यवस्था लागू रहेगी।

बता दें कि इस साल जनवरी में विद्रोही सैन्य समूहों के कमांडरों ने शारा को सीरिया का अंतरिम राष्ट्रपति बनाया था। सत्ता में आने के तुरंत बाद शारा ने असद शासन में साल 2012 में बनाए गए संविधान को रद्द कर दिया। इसके साथ ही उस समय की संसद, सेना और सुरक्षा एजेंसियों को भंग कर दिया था। इस घोषणापत्र से दस दिन पहले शारा ने इसका मसौदा तैयार करने के लिए 7 सदस्यीय समिति गठित की थी।

सुन्नी मुस्लिम अल-शरा के नेतृत्व वाली सरकार का दूसरे इस्लामी समूह समर्थन नहीं करते हैं। इनमें एक अल्पसंख्यक अलावी समूह है, जो पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद का समर्थन करता है। बशर भी इसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। अलावी सहित कई धार्मिक एवं जातीय समूह अल-शरा पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए उनका विरोध करते हैं। यही कारण है कि दोनों समूहों के विद्रोही आमने-सामने हैं।

सीरिया वॉर मॉनिटर का दावा किया है कि इन झड़पों में लगभग 1,500 लोग मारे गए हैं। ब्रिटेन के मानवाधिकार संगठन ‘सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स’ ने 9 मार्च 2025 चौंकाने वाला आँकड़ा जारी किया। इसमें 745 नागरिकों के अलावा 125 सरकारी सैनिक और असद के वफादार 148 लड़ाके भी मारे गए हैं। ये हिंसा गुरुवार (6 मार्च 2025) से शुरू हुई और अब तक थमने का नाम नहीं ले रही।

फिर से क्यों सुलग रहा है सीरिया

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सब तब शुरू हुआ जब गुरुवार (6 मार्च 2025) को तटीय शहर जबलेह के पास सुरक्षा बल एक भगौड़े अपराधी को पकड़ने पहुँचे, लेकिन इस दौरान उन पर कथित तौर पर असद के समर्थकों ने घात लगाकर हमला कर दिया। इसके बाद हालात बेकाबू हो गए। नई सरकार का कहना है कि वो असद के बचे हुए लड़ाकों के हमलों का जवाब दे रही है। हालाँकि झड़पें बदले की कार्रवाई में बदल गईं।

सुन्नी लड़ाकों ने 7 मार्च को अलावी गाँवों और कस्बों में घुसकर लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। अलावी समुदाय के ज्यादातर पुरुषों को सड़कों पर या उनके घरों के बाहर ही गोली मार दी गई। कई जगहों पर घरों को लूटा गया और फिर आग के हवाले कर दिया गया। महिलाओं को नंगा करके सड़क पर घुमाया गया। बनियास जैसे शहरों में हालात इतने खराब हैं कि सड़कों पर शव बिखरे पड़े रहे।

हयात तहरीर अल-शाम के लिए मुसीबत

ये हिंसा उस गुट ‘हयात तहरीर अल-शाम’ (HTS) के लिए बड़ा झटका है, जिसने असद को हटाकर सत्ता हासिल की थी। HTS के नेतृत्व में विद्रोही समूहों ने दमिश्क पर कब्जा किया था, लेकिन अब उनके सामने अपने ही देश को संभालने की चुनौती है। अलावी समुदाय के खिलाफ ये हमले सीरिया में गहरी धार्मिक और जातीय दरार को दिखाते हैं। अगर ये हालात काबू में नहीं आए, तो ये हिंसा और खतरनाक रूप ले सकती है।

होली का जश्न मना रहे हिंदुओं ने मस्जिद पर किया ‘हमला’: रत्नागिरी का जो Video दिखा प्रलाप कर रहे जुबैर-ओवैसी जैसे इस्लामवादी, उसकी हकीकत महाराष्ट्र पुलिस ने बताई

महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में होली के मौके पर गुरुवार (13 मार्च 2025) को एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो में कुछ हिंदू लोग मस्जिद के गेट के पास एक लकड़ी का तना लिए दिखे। इसको लेकर मोहम्मद जुबैर, असदुद्दीन ओवैसी और कुछ इस्लामी ग्रुपों ने दावा किया कि हिंदुओं ने मस्जिद पर हमला किया। ऐसा सबकुछ होली के जश्न के दौरान हुआ।

अल्टन्यूज के मोहम्मद जुबैर ने ये वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “ये शर्मनाक वीडियो महाराष्ट्र के राजापुर कस्बे से निकलकर सामने आया है, जिसमें आप लोग देख सकते हैं कि होली के दौरान लोग शिमगा (लकड़ी का टुकड़ा) लेकर मस्जिद के पास पहुँचे और उसे गेट में 3-4 फीट तक घुसाने की कोशिश की, वो भी दो बार। कुछ लोग और पुलिस ने रोकने की कोशिश की, पर कामयाब नहीं हुए।” उसने ये भी कहा कि नेशनल मीडिया हमेशा ऐसी बातों को नजरअंदाज करता है या सही ठहराता है।

जुबैर के पोस्ट के बाद मकतूब मीडिया ने भी ये वीडियो शेयर कर दिया। मकतूब मीडिया अक्सर हिंदुओं को निशाना बनाने और मुस्लिमों के गुनाहों को छिपाने के लिए जाना जाता है।

फिर ऑब्जर्वर पोस्ट नाम का एक और इस्लामिस्ट ग्रुप भी पीछे नहीं रहा और उसने भी वही वीडियो शेयर किया।

इन सबके बाद असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट करके पूछा कि क्या कानून अपना रास्ता खुद बनाएगा। उसने कहा कि पुलिस के सामने मस्जिद पर हमला होना शर्मनाक है।

सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हल्ला मचा दिया कि हिंदुओं की भीड़ ने मस्जिद को निशाना बनाया और ये मुस्लिमों पर जुल्म का सबूत है।

रत्नागिरी पुलिस ने सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों को किया खारिज

हालाँकि रत्नागिरी पुलिस ने इन सारी बातों को साफ नकार दिया। पुलिस ने कहा कि मस्जिद में कोई जबरदस्ती घुसने की बात नहीं हुई, जैसा सोशल मीडिया पर कहा जा रहा था। जिसने ये गलत वीडियो सबसे पहले डाला, वो पोस्ट अब हट चुकी है। हाँ, कुछ लोग अभी भी गलत बातें फैला रहे हैं, पर उस पर पुलिस ने कुछ नहीं बोला। पुलिस ने बताया कि ये सब कोकण इलाके की पुरानी परंपरा का हिस्सा था, इसमें कुछ गलत नहीं हुआ।

‘The Hindu’ अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, ये सब बुधवार शाम 7:30 बजे जवाहर चौक में हुआ। वहाँ शिमगा का जुलूस निकला था, जिसमें ‘मडाची मिरवणूक’ नाम की रस्म होती है। ये जुलूस सखालकरवाडी से शुरू होकर 2 किलोमीटर दूर ढोपेश्वर मंदिर तक जाता है। रास्ते में मस्जिद की सीढ़ियों पर लकड़ी का गट्ठा (पेड़ का तना) कुछ देर रखा जाता है। पुलिस ने बताया कि कोकण की परंपराएँ अलग हैं।

SP धनंजय कुलकर्णी ने कहा कि इस रस्म में जुलूस मस्जिद की सीढ़ियों पर रुकता है और लकड़ी को गेट से छुआ जाता है। मुस्लिम लोग नारियल देकर इसका स्वागत करते हैं। उस रात कुछ नारेबाजी और हंगामा हुआ, जिसके लिए महाराष्ट्र पुलिस एक्ट की धारा 135 में FIR हुई। जाँच चल रही है। हालात शाँत हैं।

खास बात ये कि ‘The Hindu’ ने लिखा कि वहां के मुस्लिमों ने भी इसे परंपरा माना। एक स्थानीय मुस्लिम ने कहा कि हर पाँच साल में होली के वक्त ये जुलूस निकलता है और मस्जिद की सीढ़ियों पर रुकता है। ये नीना देवी की पूजा के लिए होता है। हाँ, उसने ये भी कहा कि इस बार लकड़ी को गेट में ठोका गया, पर पुलिस ने इसे गलत बताया। पुलिस ने साफ किया कि कोई हमला नहीं हुआ, ये बस एक रिवाज था। गलत वीडियो फैलाने की कोशिश हुई, पर सच सामने आ गया।

इस्लामी आतंकियों को शह, तोड़े जा रहे हिंदुओं के मंदिर: बांग्लादेश के राजदूत ने अपनी ही सरकार का मुखौटा उतारा, बताया- भारत विरोधी भावना भड़का रहा है मोहम्मद यूनुस

प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्तापलट करके सत्ता में आए मोहम्मद यूनुस की सच्चाई अब उनकी ही सरकार के लोग खोलने लगे हैं। किस तरह आतंकियों के सहारे शेख हसीना को सत्ता से हटाया और अब बांग्लादेश में हिन्दुओं की हालत क्या है, इसका हाल मोरक्को में बांग्लादेश के राजदूत ने बताया है। उन्होंने यूनुस को तानाशाह कहा है।

मोरक्को में बांग्लादेश के राजदूत हारून अल रशीद ने सारे आरोप अपनी सरकार पर जड़े हैं। उन्होंने कहा है कि बांग्लादेश गर्त में जा रहा है और पश्चिमी देश इस पर चुप हैं। रशीद ने कहा है कि बांग्लादेश में सत्ता पाने के लिए भारत विरोधी भावना पैदा की गई है।

आतंकी अभियान था हसीना का तख्तापलट

राजदूत रशीद ने आरोप लगाया है कि बांग्लादेश में 5 अगस्त, 2024 को सत्ता में हुआ फेरबदल एक आतंकी अभियान का परिणाम था। उन्होंने कहा, “5 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश ने अपने इतिहास में से एक सबसे काले दिनों में से एक का अनुभव किया- एक सुनियोजित आतंकवादी हमले से प्रधानमंत्री शेख हसीना की वैध सरकार को उखाड़ फेंककर इसकी नींव हिला दी गई। जब देश जल रहा था और सारी व्यवस्थाएँ जार-जार हो रहीं थी, तब मोहम्मद यूनुस सत्ता हथियाने आया था।”

रशीद ने कहा है कि यह विश्व इतिहास के सबसे सफल आतंकी अभियान में से एक कहा जाएगा। रशीद ने कहा कि इस आतंकी अभियान की शुरुआत कुछ लोगों ने इंटरनेट पर हसीना सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार से की। उन्होंने कहा कि शेख हसीना के शासन में बोलने की आजादी का फायदा उठाते हुए मुस्लिमों को भड़काया गया और उनके मन में भारत के प्रति घृणा भारी गई। इसके अलावा हिन्दुओं के खिलाफ भी हिंसा भड़काई।

यूनुस सरकार के मंत्री आतंकी

हारून रशीद ने कहा है कि मोहम्मद यूनुस की सरकार में हिज़्ब उत-तहरीर, आईएस और अल-कायदा के आतंकी खुले आम घूम रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जुलाई-अगस्त में शेख हसीना के खिलाफ हिंसा करने वाले लोग भी इन्हीं संगठनों ने आए थे।

रशीद ने कहा कि इन पर कार्रवाई के बजाय यूनुस सरकार ने इनकी बचा कर रखा है, उन्हें सरकार में जगह दी है और उन्हें मंत्री बनाया है। रशीद ने आरोप लगाया कि यूनुस की सरकार में बांग्लादेश पहचान मिटाई जा रही है। हिन्दू मंदिर तोड़े जा रहे हैं। महिलाओं और हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहे हैं।

हसीना नहीं, यूनुस ने किए अत्याचार

रशीद ने कहा है कि शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट करने के बाद यूनुस सरकार लोगों को प्रताड़ित करने में लगी है। उन्होंने लिखा, “अगर मानवाधिकार उल्लंघन की सही मायने में जाँच की जाए, तो एक भयावह सच्चाई सामने आएगी। यूनुस के संरक्षण में सिर्फ़ 15 दिनों में किए गए अत्याचार शेख हसीना के पूरे कार्यकाल में किए गए अत्याचारों से कहीं ज़्यादा थे।”

रशीद ने लिखा, “उन दो हफ़्तों में बांग्लादेश में आतंक का बोलबाला हो गया। भीड़ ने सैकड़ों पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी- गर्भवती महिलाओं ने दया मांगी, लेकिन उन्हें भी मार दिया गया। सैकड़ों अवामी लीग समर्थकों को पीट-पीटकर मार डाला गया, उनके शवों को चेतावनी के तौर पर छोड़ दिया गया। ऐसी बर्बरता सदियों में नहीं देखी गई।”

मोहम्मद यूनुस है तानाशाह

रशीद ने आरोप लगाया कि मोहम्मद यूनुस स्वयं एक तानशाह है। उन्होंने कहा कि यूनुस ने सत्ता में आते ही शेख हसीना के काल में अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोप हटवा लिए। रशीद ने कहा है कि मोहम्मद यूनुस ने अपना मुखौटा उतार फेंका है और वह कोई सुधार नहीं बल्कि एक तानाशाह है।

रशीद के अनुसार, यूनुस ने हाल ही में आरोप लगाया कि शेख हसीना ने बांग्लादेश को गाजा की तरह छोड़ा है, इस बात में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। रशीद ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में बीते कुछ सालों में हुए विकास को मिटाने की कोशिश यूनुस कर रहे हैं।

उन्होंने मोहम्मद यूनुस पर पश्चिमी देशों की चुप्पी को लेकर भी प्रश्न उठाए हैं। रशीद ने कह़ा कि मोहम्मद यूनुस ने स्वयं ही अमेरिका में एक आतंकी की प्रशंसा की। उन्होंने यूनुस की ग्रामीण बैंक पर भी देश के लोगों के शोषण का आरोप जड़ा है।

रशीद ने कह़ा है कि उन्होंने बंगबंधु मुजीबुर रहमान के ऊपर एक किताब लिखी, इसलिए वह प्रताड़ित किए जा रहे हैं। रशीद ने कहा कि उनका देश उनसे चुरा लिया गया है। उन्होंने स्वयं को एक प्रताड़ित राजनयिक बताया है।

हारुन रशीद 2023 में मोरक्को में बांग्लादेश के राजदूत नियुक्त किए गए थे। वह काफी लम्बे अनुभव वाले राजनयिक हैं और इससे पहले कई देशों में बड़ी जिम्मेदारियाँ संभाल चुके हैं। उन्होंने ही अब बांग्लादेश की यूनुस सरकार के खिलाफ बगावत कर दी है और उसकी सच्चाई बता दी है।

तख्तापलट को क्रान्ति बताने की होती रही है कोशिश

गौरतलब है कि जुलाई-अगस्त महीने में बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार के खिलाफ प्रदर्शन चालू हुए थे। प्रदर्शन का कारण पहले आरक्षण बताया गया था। शेख हसीना सरकार ने यह मुद्दा सुलझा दिया था। हालाँकि, इसका असल मकसद हसीना का तख्तापलट था।

कुछ ही दिनों में यह प्रदर्शन हिंसक हो चुका था और इसमें इस्लामी आतंकी भी शामिल हो चुके थे। उन्होंने ही बांग्लादेश में पुलिस, हिन्दू और आवामी लीग के लोगों पर हमले किए और अंत में शेख हसीना को निशाना बनाया। शेख हसीना को मजबूरी में देश छोड़ना पड़ा।

इस हिंसक कार्यवाही को लगातार क्रान्ति बताकर पेश किया जाता है। हालाँकि, शेख हसीना समर्थक बार बार कह चुके हैं कि पश्चिमी देशों के दबाव में आने के चलते उनका तख्तापलट हुआ है। बीते दिनों यह भी स्पष्ट हुआ था कि इस तख्तापलट में सेना के हाथ संयुक्त राष्ट्र ने बाँध दिए थे।

हिंदू कर रहे थे भजन-कीर्तन, पूजा स्थल में घुसकर की तोड़फोड़, मूर्तियों को किया खंडित: बंगाल का वीडियो BJP ने शेयर किया, पुलिस धमकाती दिखी

पश्चिम बंगाल में एक बार फिर एक हिंदू मंदिर पर हमला किया गया है। यह मंदिर पूर्बी मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम ब्लॉक 2 के कमालपुर गाँव में स्थित है। इस हमले की जानकारी भाजपा नेता अमित मालवीय ने शुक्रवार (14 मार्च) को होली के दिन सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर दी। उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को खंडित अवस्था में देखा जा सकता है।

ममता बनर्जी द्वारा शासित पश्चिम बंगाल की इस घटना को लेकर मालवीय ने लिखा, “नंदीग्राम ब्लॉक 2 के अमदाबाद क्षेत्र के कमालपुर में वहाँ के लोग पिछले मंगलवार से ही पूजा-अर्चना में लगे हुए थे। जब पूजा और राम नारायण कीर्तन निर्बाध रूप से जारी रहा तो कुछ लोगों को भगवान श्रीराम के नाम का जाप बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने पूजा स्थल पर जाकर तोड़फोड़ की और मूर्तियों को अपवित्र कर दिया।”

अमित मालवीय के पोस्ट का स्क्रीनशॉट

वायरल वीडियो में एक व्यक्ति को यह कहते हुए सुना गया, “यह एक गंभीर स्थिति है… पुलिस मौन है… आप देख सकते हैं कि पुलिस कुछ नहीं कर रही है।” वीडियो में दिख रहा है कि एक पुलिसकर्मी अपवित्र एवं खंडित की गईं हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों का वीडियो रिकॉर्ड करने वाले व्यक्ति को धमका रहा है।

पश्चिम बंगाल में मूर्ति तोड़ने के हालिया मामले

इसी साल यानी 2025 में 7 मार्च को शेख इंदु नाम के एक मुस्लिम व्यक्ति ने देवी शीतला की मूर्ति को तोड़ दिया और फिर उसे आग लगा दी थी। यह घटना पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बरुईपुर शहर में हुई। सोशल मीडिया पर जली हुई मूर्तियों और क्षतिग्रस्त हिंदू मंदिर के दृश्य देखे जा सकते हैं। मंदिर में तोड़फोड़ करे वाले शेख इंदु को स्थानीय लोगों ने शेख इंदु को पकड़ लिया था।

पश्चिम बंगाल की बरुईपुर पुलिस का पोस्ट

बरुईपुर पुलिस ने 7 मार्च को एक ट्वीट पोस्ट किया था, जिसमें दावा किया गया था कि आरोपित ‘विक्षिप्त’ है और उसे ‘मानसिक स्वास्थ्य’ संबंधी समस्याएँ हैं। पोस्ट में कहा गया था, “स्थानीय लोगों ने उसे (आरोपित को) पकड़ लिया और पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। मामला दर्ज कर लिया गया है और जाँच जारी है। हिरासत में लिया गया व्यक्ति बाहरी है और उसे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हैं।”

इसी तरह 9 मार्च 2025 को पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता दिलीप घोष ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर काली मंदिर पर हमले और हिंदू देवता की मूर्ति के साथ तोड़फोड़ की जानकारी दी। यह घटना पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट शहर के शंखचूरा बाजार में हुई थी। भाजपा नेता ने कहा था कि मंदिर पर हमला स्थानीय TMC नेता शाहनूर मंडल के नेतृत्व में हुआ था।

बंगाल के बशीरहाट पुलिस द्वारा किया गया ट्वीट

भाजपा नेता के पोस्ट के कुछ घंटों के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने रविवार (9 मार्च 2025) को सोशल मीडिया पर दावा किया कि इस जघन्य अपराध के पीछे कोई सांप्रदायिक पहलू नहीं है। पश्चिम बंगाल सत्ताधारी TMC की मुखिया ममता बनर्जी की पुलिस ने दावा किया कि देवी काली की मूर्ति को तोड़ने वाले चरमपंथी को ‘मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या’ है।

बदन में सोना लपेटकर लाने वाली हिरोइन पर कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार मेहरबान, CID जाँच का आदेश वापस: IPS पिता के कहने पर ही रान्या राव को मिली प्रोटोकॉल सुविधाएँ

बेंगलुरु एयरपोर्ट पर सोना तस्करी के लिए पकड़ी गई अभिनेत्री रान्या राव को प्रोटोकॉल का फायदा मिलता था। यह फायदा रान्या के सौतेले पिता और DG रैंक के पुलिस अधिकारी के कहने पर दिए जाते थे। यह खुलासा DRI की पूछताछ में हुआ है। इस बीच इस मामले में CID जाँच का आदेश कॉन्ग्रेस सरकार ने वापस ले लिया है। पूछताछ से और भी जानकारियाँ सामने आई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, DRI पूछताछ में राज्य के प्रोटोकॉल अफसर बसावराज इब्ब्लूर ने बताया कि रान्या की पैरवी उसके पिता करते थे। उसके पिता DGP रामचंद्र राव के कहने पर ही प्रोटोकॉल सुविधाएँ दी जाती थीं। बसावराज ने वर्तमान मामले में भी रामचंद्र राव की संलिप्तता को लेकर बात की है।

उसने बताया है कि रामचंद्र राव ने उसे फोन किया था और रान्या के एयरपोर्ट से निकलने के लिए ग्रीन चैनल तैयार करने को कहा था। रान्या ने भी बसावराज से फोन पर बात की थी। यह पूछताछ में खुलासा हुआ है। इस खुलासे के बाद रामचंद्र राव के इस मामले में रोल को लेकर और भी प्रश्न उठे हैं।

राव को लेकर जाँच राज्य के एक वरिष्ठ IAS अधिकारी को दी गई है। कयास हैं कि वह अब राव को नोटिस जारी कर सकते हैं। उनको छुट्टी पर भेजे जाने के कयास लगाए जा रहे हैं। इस मामले में अब जाँच के बाद ही स्थिति साफ़ हो पाएगी। वहीं कॉन्ग्रेस सरकार ने रान्या राव मामले में CID जाँच के लिए दिया गया आदेश वापस ले लिया है।

कर्नाटक सरकार ने मामले की गंभीरता बढ़ते देख 10 मार्च को CID जाँच का आदेश दिया था। हालाँकि यह आदेश 11 मार्च को गृह विभाग ने वापस ले लिया। इसके बाद राज्य सरकार की मंशा पर प्रश्न उठने लगे। काफी बवाल होने के बाद राज्य सरकार ने इस मामले में एक सफाई जारी की।

गृह विभाग ने एक नोटिस में बताया कि मामले की जाँच पहले ही IAS गौरव गुप्ता कर रहे हैं, ऐसे में CID जाँच नहीं करवाई जाएगी। हालाँकि, यह कारण कई लोगों को समझ नहीं आया। क्योंकि IAS गुप्ता की जाँच का केंद्र रामचंद्र राव का रोल है।

इस मामले में भाजपा ने भी राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार को घेरा है। वहीं इस बीच रान्या राव से ही DRI की पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। रान्या राव ने बताया है कि उसे दुबई एयरपोर्ट पर सोना एक अनजान आदमी ने दिया था और वह चला गया था।

इसके बाद सोने को छुपाने के लिए रान्या ने स्वयं एक टेप खरीदा था। इस टेप से उन्होंने यह सोना शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर चिपकाया। टॉयलेट पेपर से इसको कवर किया गया था। यहाँ तक इसके लिए कैंची भी रान्या राव पहले से बैग में रख कर लाइ थी।

यह भी पूछताछ में पता चला कि रान्या राव ने अपने जूते और जींस में तक सोना रख लिया था। यह कुल 14 किलो से अधिक सोना था जिसकी कीमत ₹12 करोड़ है। रान्या राव को बेंगलुरु में गिरफ्तार कर लिया गया था। उनके पास सोना मिलने के बाद लगातार इस मामले की जाँच चल रही है।

‘कोई भी हिंदू संगठन आए, तुम्हें गाँव में नहीं रहने देंगे’: ग्रामीणों का दावा मुस्लिमों ने होली मनाने से रोका, गुजरात पुलिस ने बताया ‘जमीन का विवाद’

अहमदाबाद के बावला तालुका में मेणी गाँव से एक चौंकाने वाली खबर आई है। यहाँ के हिंदुओं का आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने उन्हें होली न मनाने की धमकी दी। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में गाँववाले अपनी शिकायत बता रहे हैं। एक हिंदू महिला ने कहा कि वो खेत में खाना ले जा रही थी, तभी अकबर झीणा नाम का शख्स कोदाली लेकर उन्हें मारने दौड़ा। उसने खेत में जाने से भी रोका। एक व्यक्ति ने बताया कि अकबर ने गाँव छोड़ देने की धमकी दी।

अमरतभाई नाम के शख्स ने कहा, “उन्होंने बोला कि तुम होली-धूलेटी क्यों मनाते हो, ये देख लेंगे। PSI मुस्लिम महिला है, इसलिए हमारी शिकायत नहीं सुनती। पुलिस कहती है कि कुछ नहीं है, सब सुलझा देंगे, लेकिन हमें गाँव छोड़ना पड़ सकता है।”

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के धंधुका पदाधिकारी नीतिनभाई चौहान ने ऑपइंडिया से कहा कि मेणी गाँव में 40% हिंदू और 60% मुस्लिम हैं। आसपास के गाँवों में भी मुस्लिम बहुमत है। उनका दावा है कि 2 साल से हिंदुओं को परेशान किया जा रहा है। पहले हिंदू महिलाओं से छेड़छाड़ की शिकायतें आईं। हाल ही में एक महिला से छेड़छाड़ हुई, तो उसके पति ने विरोध किया। इसके बाद मुस्लिमों ने उसे गाड़ी से निकालकर पीटा।

अब होली के मौके पर धमकाया जा रहा है कि हम तोड़फोड़ करेंगे, देखेंगे कि तुम होली कैसे मनाओगे? चौहान ने कहा कि हिंदुओं ने शांति बनाए रखने के लिए पुलिस और सरकार से मदद माँगी। मामलातदार को अर्जी भी दी। हमारी तो सुनवाई नहीं होती, लेकिन मुस्लिमों की शिकायत पुलिस ने तुरंत दर्ज कर ली।

हिंदू संगठनों का कहना है कि मुस्लिमों ने हिंदुओं की जमीन को खोद दिया और खेत का रास्ता बंद कर दिया। धमकी दी कि “कोई भी हिंदू संगठन आए, तुम्हें गाँव में नहीं रहने देंगे।” VHP का दावा है कि होली का मुद्दा छुपाने के लिए जमीन विवाद की बात उठाई गई।

चौहान ने कहा कि उस्मान समा नाम के व्यक्ति ने मुस्लिमों से कहा है कि वो समाज (मुस्लिमों) को 50 हजार देगा, कोई मुस्लिमों की तरफ से पीछे न हटे। इन पैसों से केस भी लड़ा जाएगा। हिंदुओं का कहना है कि पुलिस शुरू में शिकायत नहीं ले रही थी, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद मजबूरी में ली। एक महिला ने कहा कि पुलिस मौके पर भी नहीं आती।

दूसरी तरफ अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस का कहना है कि ये कोई सांप्रदायिक मामला नहीं है। पुलिस के मुताबिक, ये दो पड़ोसी किसानों के बीच जमीन का झगड़ा था, जो सुलझ गया।

नलसरोवर थाने की PSI अमी घोरी ने ऑपइंडिया से कहा कि दोनों पक्षों की शिकायतें ली गई हैं, कोई भेदभाव नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “गाँव में होली भाईचारे से मनाई जाएगी। दोनों समुदाय के लोग थाने में बात कर रहे हैं।” लेकिन हिंदू संगठनों ने समाधान की बात नकारी। गाँव वालों का कहना है कि वो डर में हैं और पुलिस उनकी सुन नहीं रही।

रीना, किरण और अब गौरी… क्या तीसरा निकाह करेंगे आमिर खान? रिश्ता किया कन्फर्म, लिवइन में रह रहे: कहा- वह हर दिन मेरे लिए कुछ नया करती है, बहुत सुकून मिलता है

बॉलीवुड के सुपरस्टार आमिर खान की जिंदगी में नई कहानी शुरू हो गई है। 60 साल के होने से ठीक एक दिन पहले, गुरुवार को उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड गौरी स्प्राट को मीडिया से मिलवाया। आमिर ने कहा कि वो गौरी के साथ पिछले डेढ़ साल से रिलेशनशिप में हैं और अब छुपाने की जरूरत नहीं है।

ये मुलाकात मुंबई में एक छोटे से प्रोग्राम में हुई। आमिर ने हँसते हुए बताया, “मुझे लगा ये सही मौका है कि आप सब उनसे मिल लें। वैसे भी, कल रात वो शाहरुख और सलमान से मिली थीं।” आमिर 14 मार्च को 60 साल के हो रहे हैं और इस मौके पर वो सबके सामने गौरी को लाए।

गौरी के साथ सुकून मिलने की कही बात

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गौरी बेंगलुरु की रहने वाली हैं। वो और आमिर 25 साल से एक-दूसरे को जानते हैं। डेढ़ साल पहले गौरी मुंबई आईं, तो दोनों की फिर से मुलाकात हुई। आमिर ने कहा, “हमारी मुलाकात अचानक हुई, फिर बातचीत चलती रही और सब अपने आप आगे बढ़ गया।” गौरी का एक 6 साल का बेटा है और वो अब आमिर की प्रोडक्शन कंपनी में काम करती हैं।

आमिर ने बताया कि गौरी के साथ वो बहुत खुश और सुकून में हैं। उन्होंने अपनी पुरानी शादियों का जिक्र करते हुए कहा, “मैं खुशकिस्मत हूँ कि मेरे रिश्ते हमेशा मजबूत रहे। रीना के साथ 16 साल, फिर किरण के साथ 16 साल गुजारे। किरण के साथ आज भी अच्छा रिश्ता है। गौरी के साथ अब सुकून मिलता है।”

एक्स वाइफ्स के साथ रिश्ता अच्छा

गौरी ने कहा कि वो एक समझदार और दयालु इंसान चाहती थीं, जो उन्हें आमिर में मिला। आमिर ने मजाक में शादी के बारे में कहा, “60 की उम्र में पता नहीं शादी मुझे शोभा देती है कि नहीं।” उन्होंने ये भी बताया कि उनके बच्चे इस रिश्ते से खुश हैं। आमिर की दो शादियाँ हो चुकी हैं। पहली पत्नी रीना दत्ता फिल्म प्रोड्यूसर थीं और दूसरी पत्नी किरण राव डायरेक्टर हैं। दोनों से उनके रिश्ते आज भी अच्छे हैं। आमिर ने कहा, “मेरी एक्स-वाइफ्स के साथ रिश्ता बहुत अच्छा है, मैं सचमुच खुशकिस्मत हूँ।”

मुंबई में सैलून चलाती हैं गौरी स्प्राट

आमिर के फैंस के लिए ये खबर चौंकाने वाली थी, क्योंकि डेढ़ साल तक किसी को भनक नहीं लगी। अब वो अपनी जिंदगी के इस नए चैप्टर को खुलकर जी रहे हैं। गौरी को बॉलीवुड की चमक-धमक की आदत नहीं है, लेकिन वो धीरे-धीरे इसे समझ रही हैं। गौरी स्प्राट बेंगलुरु की रहने वाली हैं। उनके पिता तमिल-ब्रिटिश और माँ पंजाबी-आयरिश हैं, लेकिन वो खुद को भारतीय कहती हैं। गौरी ने लंदन से फैशन कोर्स किया और मुंबई में BBlunt सैलून चलाती हैं। उनकी माँ रीटा बेंगलुरु में सैलून चलाती थीं। गौरी को एक 6 साल का बेटा है। वो भी तलाकशुदा हैं।

बता दें कि आमिर की आने वाली फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ जून में रिलीज होगी, जो उनकी हिट फिल्म ‘तारे जमीन पर’ का सीक्वल है। इसके अलावा वो ‘लाहौर 1947’ नाम की एक हिस्टोरिकल ड्रामा फिल्म भी प्रोड्यूस कर रहे हैं, जिसे राजकुमार संतोषी डायरेक्ट कर रहे हैं। 60वाँ जन्मदिन वो परिवार और दोस्तों के साथ डिनर करके मनाएँगे, जिसमें गौरी भी शामिल होंगी।

बलोच कूट रहे, तालिबानी घर में घुसकर मार रहे… अपनी ही लगाई आग में जल रहे बेटा पाकिस्तान, अब बाप-बाप (भारत) मत चिल्लाओ

क्वेटा से पेशावर जा रही जाफ़र एक्सप्रेस को हाल ही में बलोच विद्रोहियों ने हाइजैक कर लिया। इसमें 400 से अधिक यात्री सवार थे। इनमें से बड़ी संख्या पाकिस्तान के फौजियों की थी। पाक फ़ौज ने इसके बाद एक ऑपरेशन चालू किया। दावा किया कि 24 घंटे के भीतर ऑपरेशन खत्म हुआ और 33 विद्रोही मारे गए। बलूचिस्तान विद्रोहियों ने इसे नकार दिया और बताया कि उसने 100 से अधिक फौजी मारे और साथ ही उसका कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। दोनों तरफ के दावों के बीच पाक फौज और उसके दावों की असलियत खुल कर सामने आ गई।

सामने आ गई पाक फौज की नाकामी

11 मार्च को हुई बोलान दर्रे में ट्रेन हाइजैक की इस घटना ने फिर से पाक फ़ौज की अक्षमता दुनिया के सामने रख दी। हर कदम पर वह एकदम बेखबर और बिना किसी एक्शन प्लान के नजर आई। उसकी सबसे पहली नाकामी तो तब रही जब बलोच विद्रोहियों ने बिना किसी प्रतिरोध के ट्रेन अगवा कर ली।

उन्होंने एक सुरंग के पास धमाका किया और ट्रेन में मौजूद 400 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया। बलोच विद्रोहियों की इस योजना की पाक फ़ौज को भनक तक नहीं लगी। यहाँ तक कि ट्रेन में सवार उसके फौजी वापसी में एक गोली तक नहीं चला पाए।

इसके बाद पाक फौज ने यहाँ ऑपरेशन चालू करने का दावा किया। इसमें पाकिस्तान के विशेष कमांडो तक शामिल हुए। लेकिन इन्हें ट्रेन तक पहुँचने में ही ढेरों समस्याएँ आईं। पाक फ़ौज के दसवें हिस्से के बराबर भी हथियार नहीं रखने वाले बलोच विद्रोहियों ने ट्रेन के पास आने वाले फौजियों को मार गिराया।

फ़ौज ने अपनी नाकामी को छुपाने के लिए पाकिस्तान के मीडिया में कोई भी खबर चलाने पर रोक लगा दी। हालाँकि, इससे उसका झूठ नहीं छुपा। बलोच विद्रोहियों ने बताया कि उसके जवाब के चलते पाक फ़ौज को वापस भागना पड़ा।

पाक फ़ौज ने घटना के तुंरत बाद ही ऑपरेशन चालू किया था। यह उसकी खुद की जमीन पर हुई घटना थी। ना ही कोई बातचीत हो रही थी और ना ही कोई विदेशी मदद बलोच विद्रोही पा रहे थे जो इसको मुक्त करवाने में समस्याएँ आती लेकिन पाक फौज सारी स्थितियाँ अपने पक्ष में होने के बाद भी ऑपरेशन में नाकाम रही और 100 से अधिक जवान मारे गए।

उसकी विफलता के चक्कर में कई गैर बलोची भी मौत के घाट उतार दिए गए। बलोच विद्रोहियों ने स्पष्ट कर दिया है कि ट्रेन उनके ही कब्जे में है और बंधक भी उनके ही पास हैं।

वजीरिस्तान, कुर्रम… तोरखम: सब जगह फेल

पाक फ़ौज को इस घटना के बाद 200 कफ़न इकट्ठा करते अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने देखा। हालाँकि, यह कोई अकेली घटना नहीं है जिसने पाक फ़ौज की नाकामी दिखाई हो।

नवम्बर महीने में पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह राज्य के कुर्रम इलाके में शिया और सुन्नियों के बीच जोरदार लड़ाई हुई। इसके चलते एक रास्ता बंद हो गया और 100 से अधिक लोग मारे गए। नवम्बर से लेकर अब तक यह सड़क नहीं खुलवा पाई है। लगातार इस इलाके में हिंसा हो रही है।

खैबर का सिर्फ यही इलाका नहीं बल्कि उत्तरी वजीरिस्तान, बाजौर और कई इलाके पिछले दो दशक से अशांत हैं। खैबर के बड़े हिस्से में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का कब्जा है। यहाँ पाकिस्तान सरकार का हुक्म नहीं चलता।

यहाँ से निकले आतंकी लगातार कराची से लेकर पेशावर तक हमले करते हैं। इनको जवाब देने में पाकिस्तान की फ़ौज विफल है। बड़े नेता अख्तर मेंगल ने स्पष्ट किया है बलूचिस्तान अब पाकिस्तान के हाथ से निकल चुका है। बाकी नेताओं ने भी यही बात दोहराई है।

बलूचिस्तान में कई बार चीन के नागरिकों पर हमले हो चुके हैं। इसके चलते चीन ने अपनी सेना भेजने तक का कदम उठाने का विचार किया था। यह पाक फ़ौज की नाकामी का एक बड़ा उदाहरण था। यहाँ तक कि अब तोरखम जैसे सीमाई इलाकों में अफगानिस्तान तालिबान भी पाक फ़ौज के फौजियों को लगातार मार गिराता है।

इन इलाकों में कई घंटे तक फायरिंग चलती है, इन सब पर भी सेना रोक नहीं लगा पाती।

छद्म युद्ध ही लड़ सकती है पाक फ़ौज

बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वाह और सिंध के इलाकों में पाक फौज की नाकामी यह दिखाती है कि वह वर्तमान में कोई सीधी लड़ाई लड़ने में सक्षम नहीं है। वह केवल और केवल भाड़े के आतंकी तैयार कर छद्म युद्ध लड़ सकती है। भारत से भी 1948, 1965 और 1971 के तीन सीधे युद्ध में पाकिस्तान करारी हार झेल चुका है।

1999 में पाकिस्तान ने अपने किराए के आतंकियों और फौजियों को चुपके से कारगिल में भेजा लेकिन यहाँ भी उसे मुंह की खानी पड़ी। इन सब में फेल होने के चलते वह पंजाब और कश्मीर को सुलगाने का प्रयास करती आई है। इस काम में पाक फ़ौज का साथ उसकी खुफिया एजेंसी ISI देती ही।

पाकिस्तान ने सबसे पहले पंजाब में खालिस्तान आंदोलन को सहायता दी। जब भारत ने इसे कुचल दिया तो वह कश्मीर में इस्लामी जिहाद चलाने लगा। अब कश्मीर में भी आतंकी अपनी अंतिम सांसे गिन रहें हैं। पाकिस्तान ने इन सब के बीच SIMI, हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे आतंकी संगठनों को भी सहायता दी।

इन सबमें वह फेल हो गया। पाकिस्तान की फ़ौज केवल निर्दोष लोगों पर ही अपना दमखम दिखा सकती है। चाहे वह बांग्लादेश हो या वर्तमान में बलूचिस्तान। उसका जोर निर्दोष, महिलाओं और बच्चों पर चलता है। परमाणु क्षमता वाला मुल्क सीधी लड़ाई में किसी से नहीं जीत सकता।

उसकी असलियत ना खुल जाए, इसीलिए उसने हर बार पाकिस्तान में लोकतंत्र का विरोध किया है। 1947 में पाकिस्तान बनने से लेकर अब तक आधे समय पाकिस्तान में फ़ौज का शासन रहा है। बाकी समय भी उसी कि कठपुतली की तरह नेता काम करते आए हैं।

पाकिस्तान में फ़ौज जब नवाज शरीफ को चाहती है तो उन्हें प्रधानमंत्री बनाती है। जब नवाज शरीफ ने अपने दम पर काम करने की कोशिश की तो उन्हें चलता किया गया। पकिस्तान में फ़ौज ने इमरान खान को खड़ा किया लेकिन वह भी जब फ़ौज के खिलाफ हो गए तो उनको भी हटा दिया गया। यह क्रम लगातार चलता आया है।

अपनी नाकामी को भारत के पाले में डाल रहा पाकिस्तान

बलूचिस्तान में ट्रेन हाइजैक की इस घटना में अपनी नाकामी छुपाने के लिए पाक फ़ौज और सरकार ने भारत का नाम लिया है। हमले के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत उनके मुल्क में आतंक फ़ैलाने की कोशिश करता आया है और अब भी कर रहा है। पाकिस्तान ने इसके बाद दावा किया कि जाफ़र एक्सप्रेस पर हमला अफगानिस्तान से करवाया गया था।

अपनी जिम्मेदारी से बचने और नाकामी छुपाने की पाकिस्तान की यह पुरानी चाल है। भारत ने स्पष्ट रूप से उसके आरोपों को नकार दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम पाकिस्तान के निराधारआरोपों को खारिज करते हैं। पूरी दुनिया जानती है कि आतंकवाद का केन्द्र कहाँ है।”

भारत ने कहा है कि पाकिस्तान को अपनी आंतरिक समस्याओं और असफलताओं के लिए दूसरों पर उंगली उठाने और दोष मढ़ने के बजाय अपने अंदर झाँकना चाहिए। अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान के इन आरोपों को नकार दिया। असल बात यह है कि भारत और अफगानिस्तान का नाम पाकिस्तान ने खुद को बचाने के लिए ही घसीटा था।

उसकी सच्चाई सबको पता है। भारत पर आतंक का आरोप लगाने वाला पाकिस्तान अब भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आता। एक ताजा रिपोर्ट बताती है कि वर्तमान में जम्मू कश्मीर में 60 विदेशी आतंकी एक्टिव हैं जो पाकिस्तानी हैं। बाकी कश्मीरी युवाओं को भी ट्रेनिंग और हथियार पाकिस्तान ने ही दिए हैं।

पाकिस्तान को अगर सही में आतंक से मुक्त होना है तो उसे अमेरिका की विदेश मंत्री के उस बयान को याद करना पड़ेगा, जिसमें उन्होंने कहा था, “आप अपने घर के पिछवाड़े में सांप पाल कर यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वे केवल आपके पड़ोसियों को ही काटेंगे। अंततः वे साँप आप पर भी हमला करेंगे।”