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BJP नेता ने ‘मथुरा मुक्ति’ का किया समर्थन तो भड़का इकबाल अंसारी, कहा- ये हिंदुस्तान की तरक्की रोक रहे

अयोध्या में राम मंदिर का भूमिपूजन होने के बाद मथुरा कोर्ट में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए दायर हुई याचिका को लेकर सियासत गरमा रही है। भारतीय जनता पार्टी के नेता विनय कटियार और अयोध्या मामले में बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसार ने इसे लेकर अपनी-अपनी बात रखी है। पूर्व सांसद विनय कटियार ने ‘श्रीकृष्ण विराजमान’ की तरफ से दायर की गई याचिका का स्वागत किया है।

विनय कटियार ने ये भी कहा कि इस विषय में क़ानूनी रास्ता अख्तियार करना है या फिर आंदोलन चला कर मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुक्त कराना है, इस पर निर्णय लेने की आवश्यकता है। वहीं इक़बाल अंसारी ने इस याचिका से निराशा जताते हुए कहा कि अगर हिंदुस्तान को विकास करना है तो मंदिर-मस्जिद की राजनीति से ऊपर उठना पड़ेगा।

‘बजरंग दल’ के संस्थापक विनय कटियार ने स्पष्ट किया कि जहाँ भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, मथुरा में उसी जगह पर आज मस्जिद खड़ी है। उन्होंने कहा कि उस मस्जिद का रास्ता श्रीकृष्ण जन्मभूमि से होकर जाता है। उन्होंने दावा किया कि इस पर दूसरे संप्रदाय के लोगों ने बलपूर्वक कब्ज़ा कर रखा है। उन्होंने कहा कि बिना किसी बड़े आंदोलन के प्रशासन की नींद नहीं खुलेगी, इसीलिए इसकी रूपरेखा बनानी पड़ेगी।

‘न्यूज़ 18’ की खबर के अनुसार, विनय कटियार ने कहा कि इस कार्य के लिए व्यापक जनांदोलन खड़ा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल होने के नाते भाजपा भी इस आंदोलन में अपना काम करेगी और बाकी संगठन भी अपना काम करेंगे। उन्होंने कहा कि अयोध्या, काशी और मथुरा को मुक्त कराने का भाजपा का वादा काफी पुराना है, जिसमें से अयोध्या में विजय प्राप्त हो चुकी है और अब काशी व मथुरा में से पहले किसके लिए आंदोलन चलाया जाए, इसके लिए विचार-विमर्श होगा।

बौखलाए इकबाल अंसारी ने कहा कि हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति करने वाले इस मामले को तूल दे रहे हैं। उसने कहा कि चंद लोग मंदिर-मस्जिद विवाद को अपनी रोजी-रोटी के लिए चलते रहने देना चाहते हैं। उसने कहा कि हिन्दू-मुस्लिम न किया जाए तो हिंदुस्तान दुनिया में शिखर पर होगा। इसके लिए उसने बाबरी मस्जिद मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि ये कोर्ट में 50 वर्ष चला। उसने मथुरा की मुक्ति की बात करने वालों को हिंदुस्तान की तरक्की रोकने वाला करार दिया।

बता दें कि अब यूपी के मथुरा की अदालत में 13.37 एकड़ की श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर सिविल सूट याचिका दायर की गई है। इसमें शाही ईदगाह मस्जिद को हटा कर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मथुरा में स्थित पूरी भूमि को खाली कराने की माँग की गई है। इस याचिका को ‘श्रीकृष्ण विराजमान’ की तरफ से विनीत जैन ने दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि कटरा केशव देव की पूरी भूमि के प्रति हिन्दुओं की आस्था है।

स्वस्थ हुए अभिनेता अनुपम श्याम ओझा, CM योगी को पत्र लिख कहा- आपका सहयोग सेवाभाव का प्रतीक

अभिनेता अनुपम श्याम ओझा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संकट की घड़ी में आर्थिक मदद के लिए धन्यवाद देते हुए पत्र लिखा है। योगी आदित्यनाथ ने भारतेन्दु नाट्य अकादमी के अभिनेता अनुपम श्याम ओझा के इलाज के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष से 20 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान की थी। इलाज के बाद अब वे ठीक हो गए हैं। स्वस्थ होने के बाद वरिष्ठ अभिनेता ने यूपी सीएम को पत्र लिख कर आभार जताया है।

अनुपम श्याम ओझा ने उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी की स्थापना की घोषणा का भी स्वागत किया और कहा कि एक अभिनेता होने के नाते वे इसके लिए आत्मीय साधुवाद ज्ञापित करते हैं और धन्यवाद अर्पण करते हैं। उन्होंने ‘नई चेतना के संचार’ के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। इस पत्र के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की जमकर तारीफ की। इस पत्र में अभिनेता ने लिखा है:

“मैं हृदयतल से झंकृत उद्धगार भरे शब्दों से आपका परस्पर आभार व्यक्त करता हूँ। मेरी अस्वस्थता के दौरान आपके द्वारा दिया गया आर्थिक सहयोग दयालुता और जनमानस के प्रति जागरूक सेवाभाव को इंगित करता है। मैं आपके सहयोग से उस अवांछित संकट की घड़ी में संघर्ष कर अब सामान्य दैनिक जीवन क्रिया को करने में सक्षम होने के लिए कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ। मैं फ़िलहाल डायलिसिस की प्रक्रिया से गुजर रहा हूँ और पूर्णरूपेण स्वस्थ होते ही आपका दर्शन लाभ कर सकूँ, ऐसी कामना करता हूँ।”

अभिनेता अनुपम श्याम ओझा ने सीएम योगी को पत्र लिख जताया आभार

‘मन की आवाज़- प्रतिज्ञा’ जैसे लोकप्रिय टीवी सीरियल और ‘रक्तचरित्र’ जैसे फिल्म में काम कर चुके अनुपम श्याम ओझा किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों ने उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी। तंगी से जूझ रहे अनुपम श्याम के परिवार ने उनके इलाज के लिए आर्थिक मदद की अपील की थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार आगे आई और उनके इलाज के लिए आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई।

ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश के नोएडा में फिल्म सिटी के निर्माण के लिए कवायद तेज हो गई है और इसके लिए ख़ुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहल कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने अपने लखनऊ स्थित सरकारी आवास से ही भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों से बातचीत की थी, जिनमें कई फिल्म निर्देशक, अभिनेता-अभिनेत्री और संगीतकार शामिल थे। सीएम योगी ने इस दौरान फिल्म सिटी को लेकर सभी की राय जानी और सभी को काफी ध्यान से सुना। अनुपम श्याम ओझा ने इसके लिए भी सीएम को धन्यवाद दिया है।

अलकायदा का 10वां आतंकी शमीम अंसारी पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से गिरफ्तार, पाकिस्तान से था लगातार संपर्क में

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) और पश्चिम बंगाल की स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने शनिवार (26 सितंबर 2020) को अलकायदा के आतंकवादी शमीम अंसारी को गिरफ्तार किया। शमीम अंसारी को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से गिरफ्तार किया गया। ख़बरों में यह बात सामने आई है कि वह पाकिस्तान से लगातार संपर्क में था और राजधानी समेत कई अन्य इलाकों को निशाना बनाने की योजना बना रहा था। 

शमीम मुर्शिदाबाद स्थित जलंगी पुलिस थाने के अंतर्गत नंदपारा कालीगंज का रहने वाला है। गिरफ्तारी के बाद उसे मुर्शिदाबाद सीजेएम के सामने पेश किया गया और उसके बाद ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया गया है। ख़बरों की मानें तो इसके बाद उसे दिल्ली की एनआईए अदालत में पेश किया जाएगा, जहाँ उससे आतंकी गतिविधों से संबंधित अन्य मामलों पर विस्तार से पूछताछ की जाएगी। 

अभी तक हुई पूछताछ में यह जानकारी सामने आई है कि शमीम अंसारी अलकायदा मोड्यूल का दसवां आतंकवादी है। इसके पहले एनआईए ने केरल के एर्नाकुलम जिले और पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से 19 सितंबर को कुल 9 आतंकवादी गिरफ्तार किए थे।

ख़बरों की मानें तो यह सारे आतंकवादी पाकिस्तान से लगातार संपर्क में थे। इसके अलावा गिरफ्तार किए गए आतंकवादी नई दिल्ली समेत देश के कई सरकारी संस्थानों को निशाना बनाने की तैयारी कर रहे थे। 

एजेंसी के अधिकारियों के मुताबिक़ आतंकवादियों पास भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए हैं। इसमें विस्फोटक बनाने की सामग्री, स्वदेशी आग्नेयास्त्र, शरीर कवच, जिहादी साहित्य और हथियार शामिल हैं। इस घटना पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एसटीएफ) विनीत गोयल ने भी जानकारी दी।

उन्होंने कहा, “एनआईए और एसटीएफ की टीम कई दिन से इस अभियान में लगी हुई थी। दोनों ने मिल कर शमीम अंसारी (25) को गिरफ्तार किया है। एनआईए की टीम इस पूरे मामले में शमीम से आगे की पूछताछ करेगी। शमीम अलकायदा के आतंकवादी इआई मैमून से लगातार संपर्क में था। उसे हाल ही में गिरफ्तार किया गया था।”

ख़बरों के मुताबिक़ शमीम ने केरल में दो साल बतौर निर्माण मजदूर भी काम किया था। एक साल पहले वह अपने गाँव लौट कर चला आया था। गाँव में उसकी पत्नी और उसका परिवार भी साथ रहता था।         

पंचतंत्र और कताकालक्षेवम् का देश है भारत, कहानी कहने-सुनने के लिए समय निकालें: ‘मन की बात’ में PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (सितम्बर 27, 2020) को ‘मन की बात’ के जरिए देशवासियों को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जहाँ दुनिया अभी परिवर्तन के दौर से गुजर रही है, वहीं संकट काल में लोग परिवार के साथ मिल कर काम भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जो विधाएँ बनाई थीं, वो आज कितनी महत्वपूर्ण हैं – ये अब पता चल रहा है। इस विधा के अंतर्गत उन्होंने ‘कहानी सुनाने की कला (Story Telling)’ का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि हर परिवार में कोई-न-कोई बुजुर्ग, बड़े व्यक्ति परिवार के, कहानियाँ सुनाया करते थे और घर में नई प्रेरणा, नई ऊर्जा भर देते थे। हमें ज़रूर एहसास हुआ होगा कि हमारे पूर्वजों ने जो विधायें बनाई थी, वो आज भी कितनी महत्वपूर्ण हैं और जब नहीं होती हैं तो कितनी कमी महसूस होती है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसी ही एक विधा है, कहानी सुनाने की कला, अर्थात स्टोरी टेलिंग। पीएम मोदी ने कहा कि कहानियों का इतिहास उतना ही पुराना है, जितनी मानव सभ्यता।

‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने बताया कि कहानियाँ, लोगों के रचनात्मक और संवेदनशील पक्ष को सामने लाती हैं, उसे प्रकट करती हैं। कहानी की ताकत को महसूस करना हो तो जब कोई माँ अपने छोटे बच्चे को सुलाने के लिए या फिर उसे खाना खिलाने के लिए कहानी सुना रही होती है, तब देखें। उन्होंने बताया कि उनके जीवन में बहुत लम्बे अरसे तक एक परिव्राजक (घुमन्तु) के रूप में रहे। घुमंत ही उनकी जिंदगी थी। हर दिन नया गाँव, नए लोग, नए परिवार, लेकिन, जब मैं परिवारों में जाता था, तो वो बच्चों से ज़रूर बात किया करते थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वो कभी-कभी बच्चों को कहते थे कि चलो भाई, मुझे कोई कहानी सुनाओ। वो तब हैरान हो जाते थे, जब बच्चे उनसे कहते थे कि नहीं अंकल, कहानी नहीं, हम चुटकुला सुनाएँगे और उन्हें भी, वो यही कहते थे कि अंकल आप हमें चुटकुला सुनाओ। बकौल पीएम मोदी, उन बच्चों का कहानी से कोई परिचय ही नहीं था। उनमें से ज्यादातर, उनकी जिंदगी चुटकुलों में समाहित हो गई थी।

पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में कहा कि भारत में कहानी कहने की, या कहें किस्सा-गोई की, एक समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने इसे गर्व की बात बताते हुए कहा कि हम उस देश के वासी है, जहाँ, हितोपदेश और पंचतंत्र की परंपरा रही है, जहाँ, कहानियों में पशु-पक्षियों और परियों की काल्पनिक दुनिया गढ़ी गई, ताकि विवेक और बुद्धिमता की बातों को आसानी से समझाया जा सके। हमारे यहाँ कथा की परंपरा रही है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि ये धार्मिक कहानियाँ कहने की प्राचीन पद्धति है। इसमें ‘कताकालक्षेवम्’ भी शामिल रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि हमारे यहाँ तरह-तरह की लोक-कथाएँ प्रचलित हैं। तमिलनाडु और केरल में कहानी सुनाने की बहुत ही रोचक पद्धति है, जिसे ‘विल्लू पाट्’ कहा जाता है। इसमें कहानी और संगीत का बहुत ही आकर्षक सामंजस्य होता है। पीएम मोदी ने भारत में कठपुतली की जीवन्त परम्परा की भी चर्चा की। इन दिनों विज्ञान और ‘साइंस फिक्शन’ से जुड़ी कहानियाँ एवं कहानी कहने की विधा लोकप्रिय हो रही है। 

पीएम मोदी ने बताया कि उन्हें ‘gaathastory.in‘ जैसी वेबसाइट के बारे में जानकारी मिली, जिसे, अमर व्यास, बाकी लोगों के साथ मिलकर चलाते हैं। अमर व्यास, IIM अहमदाबाद से MBA करने के बाद विदेश चले गए, फिर वापस आए। इस समय बेंगलुरु में रहते हैं और समय निकालकर कहानियों से जुड़ा, इस प्रकार का, रोचक कार्य कर रहे है। प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि कई ऐसे प्रयास भी हैं, जो ग्रामीण भारत की कहानियों को खूब प्रचलित कर रहे हैं। वैशाली व्यवहारे देशपांडे जैसे कई लोग हैं, जो इसे मराठी में भी लोकप्रिय बना रहे हैं।

उन्होंने इस दौरान ‘स्टोरी टेलिंग सोसाइटी’ की अपर्णा ऐतरेय और शैलजा पंत के साथ फोन कॉल पर भी बातचीत की। इस दौरान अपर्णा ने एक कहानी भी सुनाई, जो तेनालीरामन से सम्बंधित थी। पीएम ने लोगो से अपील की कि सभी परिवार में, हर सप्ताह, कहानियों के लिए कुछ समय निकालिए, और ये भी कर सकते हैं कि परिवार के हर सदस्य को, हर सप्ताह के लिए, एक विषय तय करें, जैसे, करुणा है, संवेदनशीलता है, पराक्रम है, त्याग है, शौर्य है – कोई एक भाव और परिवार के सभी सदस्य, उस सप्ताह, एक ही विषय पर, सब के सब लोग कहानी ढूँढेंगे और परिवार के सब मिल करके एक-एक कहानी कहेंगे। पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में कहा:

“एक-सौ-एक साल पुरानी बात है। 1919 का साल था। अंग्रेजी हुकूमत ने जलियाँवाला बाग़ में निर्दोष लोगों का कत्लेआम किया था। इस नरसंहार के बाद एक बारह साल का लड़का उस घटनास्थल पर गया। वह खुशमिज़ाज और चंचल बालक, लेकिन, उसने जलिययाँवाला बाग में जो देखा, वह उसकी सोच के परे था। वह स्तब्ध था, यह सोचकर कि कोई भी इतना निर्दयी कैसे हो सकता है। वह मासूम गुस्से की आग में जलने लगा था। उसी जलियाँवाला बाग़ में उसने अंग्रेजी शासन के खिलाफ़ लड़ने की कसम खाई। क्या आपको पता चला कि मैं किसकी बात कर रहा हूँ? हाँ! मैं, शहीद वीर भगत सिंह की बात कर रहा हूँ। कल, 28 सितम्बर को हम शहीद वीर भगत सिंह की जयन्ती मनाएँगे। मैं, समस्त देशवासियों के साथ साहस और वीरता की प्रतिमूर्ति शहीद वीर भगत सिंह को नमन करता हूँ। क्या आप कल्पना कर सकते हैं, एक हुकूमत, जिसका दुनिया के इतने बड़े हिस्से पर शासन था, इसके बारे में कहा जाता था कि उनके शासन में सूर्य कभी अस्त नहीं होता। इतनी ताकतवर हुकूमत, एक 23 साल के युवक से भयभीत हो गई थी। शहीद भगत सिंह पराक्रमी होने के साथ-साथ विद्वान भी थे, चिन्तक थे। अपने जीवन की चिंता किए बगैर भगत सिंह और उनके क्रांतिवीर साथियों ने ऐसे साहसिक कार्यों को अंजाम दिया, जिनका देश की आज़ादी में बहुत बड़ा योगदान रहा। शहीद वीर भगत सिंह के जीवन का एक और खूबसूरत पहलू यह है कि वे टीम वर्क के महत्व को बख़ूबी समझते थे। लाला लाजपत राय के प्रति उनका समर्पण हो या फिर चंद्रशेखर आज़ाद, सुखदेव, राजगुरु समेत क्रांतिकारियों के साथ उनका जुड़ाव, उनके लिए, कभी व्यक्तिगत गौरव, महत्वपूर्ण नहीं रहा।”

पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में भारत रत्न नानाजी देशमुख को भी याद किया, जिनकी जयंती भी, 11 तारीख को ही है। उन्होंने बताया कि नानाजी देशमुख, जय प्रकाश नारायण जी के बहुत निकट साथी थे। जब जेपी भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जंग लड़ रहे थे, तो, पटना में उन पर प्राणघातक हमला किया गया था। तब, नानाजी देशमुख ने वो वार अपने ऊपर ले लिया था। इस हमले में नानाजी को काफ़ी चोट आई थी, लेकिन, वो जेपी का जीवन बचाने में कामयाब रहे थे।

पीएम मोदी ने कहा कि इस 12 अक्टूबर को राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी की भी जयंती है, उन्होंने, अपना पूरा जीवन, लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया। उन्होंने बताया कि वो एक राज परिवार से थीं, उनके पास संपत्ति, शक्ति, और दूसरे संसाधनों की कोई कमी नहीं थी। लेकिन, फिर भी उन्होंने अपना जीवन, एक माँ की तरह, वात्सल्य भाव से, जन-सेवा के लिए खपा दिया। उन्होंने कहा कि राजमाता का ह्रदय बहुत उदार था। इससे पहले ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में डिजिटल गेम्स बनाने पर जोर दिया था।

चुनाव से पहले संकट में बिहार कॉन्ग्रेस: अध्यक्ष समेत 107 नेताओं पर FIR, तेजस्वी यादव को अलग गठबंधन में जाने की धमकी

बिहार विधानसभा चुनाव के तारीखों के ऐलान के बाद आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का पहला मामला भी आ गया है। ये मामला पटना के एयरपोर्ट थाने में दर्ज किया गया। इसमें कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा समेत 7 नामजद और 100 अज्ञात कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उधर कॉन्ग्रेस पार्टी ने राजद को भी सीट शेयरिंग का मसला जल्द तय कर के बिहार चुनाव में उतरने के लिए अल्टीमेटम दिया है।

पटना में कॉन्ग्रेस के नेताओं व कार्यकर्ताओं के खिलाफ एयरपोर्ट के बाहरी परिसर में 100 से अधिक लोगों की भीड़ जुटाने, जुलूस निकालने, नारेबाजी करने, धारा-144 का उल्लंघन और कोरोना के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है। मदन मोहन झा के अलावा कांग्रेस स्क्रीनिंग कमिटी के अध्यक्ष अविनाश पांडेय, बिहार प्रभारी अजय कपूर, सचिव देवेंद्र यादव, मो. निजामुद्दीन, अखिलेश सिंह और दीपक नेगी नामजद आरोपित हैं।

‘हिंदुस्तान’ की खबर के अनुसार, इन सभी आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 188, 269, 270 तथा महामारी एक्ट 1897 के अलावा आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत कार्रवाई की जा रही है। एयरपोर्ट थानाधिकारी अरुण कुमार ने जानकारी दी है कि शनिवार (सितम्बर 26, 2020) को सुबह 11 बजे प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष एयरपोर्ट पर उतरे, जहाँ जमा भीड़ फूल-मालाओं से उनका स्वागत करने के बाद जुलूस की शक्ल में आगे बढ़ी।

मामला प्रकाश में आने के बाद डीएम खुद दल-बल के साथ एयरपोर्ट पहुँचे। उन्होंने एयरपोर्ट पर सुरक्षा-व्यवस्था का जायजा भी लिया। डीएम ने एयरपोर्ट अधिकारियों के साथ बैठक कर कोरोना का दिशा-निर्देश पालन कराने के लिए कहा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कहीं से भी आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। साथ ही धारा-144 का भी उल्लंघन नहीं होना चाहिए। इसके बाद वहाँ सुरक्षा भी चुस्त कर दी गई है।

इधर कॉन्ग्रेस पार्टी ने राजद के तेजस्वी यादव का नेतृत्व तो स्वीकार कर लिया है लेकिन पार्टी का कहना है कि सीट शेयरिंग के मामले में अब सालों से चले आ रहे फॉर्मूले को हटा कर उसे कुछ फायदा मिलना चाहिए। कॉन्ग्रेस ने राजद को 75 सीटों की सूची भी सौंप दी है और उन सभी पर अपने उम्मीदवार उतारने की वकालत की है। मुद्दा संख्या नहीं है बल्कि कुछ ऐसी खास सीटें हैं, जिन पर कॉन्ग्रेस दावा ठोक रही है।

राजद को लगता है कि कॉन्ग्रेस द्वारा माँगी गई कुछ ऐसी सीटें भी हैं, जहाँ राजद काफी मजबूत है और वहाँ जीत भी सकता है। वहीं कॉन्ग्रेस का मानना है कि अगर उसे राजद की मजबूती से फायदा नहीं मिलता है तो फिर गठबंधन का क्या फायदा? कॉन्ग्रेस ने माँगें न मानी जाने पर अलग गठबंधन में जाने की धमकी दी है। सीट शेयरिंग फॉर्मूले को लेकिन अंतिम नतीजे पर पहुँचने के लिए सितम्बर के अंत तक का समय तय किया गया है।

उधर कॉन्ग्रेस पार्टी ने रालोसपा, मुकेश साहनी की वीआईपी, यशवंत सिन्हा और एनसीपी के साथ बातचीत शुरू कर दी है। एक और ध्यान देने वाले बात ये भी है कि अभी तक कॉन्ग्रेस-राजद का कोई साझा बयान भी जारी नहीं किया है। अब देखना ये है कि राजद ही उन सीटों को छोड़ता है या कॉन्ग्रेस समझौता करेगी। राजद को ये भी डर है कि कॉन्ग्रेस को ज्यादा सीटें देने पर महागठबंधन के बाकी दल भी ऐसी माँगें कर सकते हैं।

उधर अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने इशारा कर दिया कि वो महागठबंधन से अलग होंगे। वहीं राजग से भाव न मिलने के बाद वो कह रहे हैं कि अगर राजद में नेतृत्व परिवर्तन होता है तो वो पुनर्विचार करने के लिए तैयार हो सकते हैं। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने यहाँ तक कह डाला कि राजग में जिन लोगों को दुत्कारा गया, उन्हें राजद ने सम्मान दिया, आज वही लोग तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे।

UP पुलिस ने अपने ही सिपाही सेराज को किया अरेस्ट, मुख्तार अंसारी के करीबी अपने भाई मेराज को दिलवाया था शस्त्र

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बाहुबलियों पर लगातार कार्रवाई कर रही है। ताज़ा मामले में योगी सरकार ने मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी के नज़दीकियों पर कार्रवाई की है। उत्तर प्रदेश पुलिस थाने की फर्जी मुहर तैयार करके शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण करने के आरोपित मेराज अहमद को खोज रही है। उसकी तलाश में पुलिस ने शनिवार (26 सितंबर 2020) को उसके भाई सेराज अहमद को गिरफ्तार किया। 

सेराज अहमद प्रयागराज के सरायनाइक थाने में बतौर सिपाही तैनात है। पुलिस ने 5 सितंबर 2020 की रात जैतपुरा थाने (वाराणसी) में मेराज के विरुद्ध शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण में फर्जीवाड़ा का मामला दर्ज किया था। इसके बाद से ही मुख्तार अंसारी का सहयोगी और हिस्ट्रीशीटर मेराज फरार चल रहा है। इस मुद्दे पर जैतपुरा थाने के इंस्पेक्टर शशिभूषण राय ने मीडिया वालों से बात करते हुए विस्तार से जानकारी दी। 

उन्होंने कहा, “अदालत की तरफ से आदेश जारी होने के बाद मेराज के दो घरों पर कुर्की का नोटिस चस्पा कर दिया गया है। पहला घर वाराणसी के अशोक विहार कॉलोनी फेज़ वन में स्थित है और दूसरा गाजीपुर के करीमुद्दीन थाना अंतर्गत महेन गाँव में स्थित है।” इसके बाद उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस मेराज को गिरफ्तार करने के लिए लखनऊ, प्रयागराज, मिर्जापुर, जौनपुर सहित अन्य इलाकों में दबिश दे रही है। 

वहीं गिरफ्तार किए गए सिपाही सेराज पर आरोप था कि उसने फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण मामले में मेराज अहमद का सहयोग किया था। जिसके बाद पुलिस ने अशोक विहार फेज़ 1 स्थित घर पर दबिश दी और वहाँ से सेराज को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस को सूचना मिली थी कि सेराज वहीं पर मौजूद था, जिसके बाद पुलिस ने वहाँ की घेराबंदी की। पुलिस ने इस गिरफ्तारी की सूचना प्रयागराज पुलिस को दे दी है, जहाँ वह बतौर सिपाही तैनात था। फिलहाल पुलिस मेराज अहमद की तलाश में लगी हुई है।     

बेहोश कर पति शादाब के गुप्तांग पर डालती थी Harpic, वसीम के साथ मनाती थी रंगरेलियाँ: आरोपित चाँदनी हिरासत में

उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित टीपे नगर थाना क्षेत्र से एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है। यहाँ प्रेमी के चक्कर में एक महिला ने अपने पति के ही गुप्तांग पर टॉयलेट क्लीनर डाल कर जला डाला। वहीं क्षेत्रवासियों ने उस महिला को एक अन्य व्यक्ति के साथ आपत्तिजनक अवस्था में धर लिया। महिला ने अपने प्रेमी के साथ रंगरेलियाँ मनाने के लिए अपने पति और तीनों बच्चों को बेहोश कर के एक कमरे में डाल दिया था।

महिला ने अपने पूरे परिवार को ही नशीली गोलियाँ दे डाली थी। अस्पताल में होश में आने के बाद पति ने आरोप लगाया कि वो आए दिन उन लोगों को नशीली गोलियाँ देकर अपने प्रेमी के साथ मिलती थी। पति ने कहा कि उसके गुप्तांग पर हार्पिक डाल कर उसे जला दिया, जिससे वो ‘बर्बाद’ हो गया है। पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है। मलियाना निवासी पीड़ित का नाम शादाब है और आरोपित पत्नी का नाम चाँदनी है।

‘नवभारत टाइम्स’ में प्रकाशित सुधाकर सिंह की खबर के अनुसार, शादाब ने बताया कि डॉक्टर वसीम उसका परिचित है, जो आए दिन उसके घर आता-जाता रहता है। उसने बताया कि सरधना निवासी वसीम जब भी आता था तो साथ में अपने साथ बिरयानी और मिठाई लाता था। इसे खाने के बाद शादाब और उसकी तीनों बेटियाँ बेसुध होकर सो जाया करते थे। उसने आरोप लगाया कि इसके बाद चाँदनी और डॉक्टर वसीम घर में बेफिक्र होकर रंगरेलियाँ मनाते थे।

शुक्रवार (सितम्बर 25, 2020) की शाम भी डॉक्टर वसीम खाने-पीने की चीजें लेकर शादाब के घर पहुँचा था। इसमें बेहोशी की दवा मिला दी गई थी, जिससे परिवार के सभी लोग बेसुध होकर सो गए। फिर वो रात को वापस शादाब के घर में घुस रहा था, तभी ग्रामीणों ने उसे देख कर चोर समझा और शोर मचाया, जिसके बाद आसपास के लोगों की इसकी जानकारी दी गई। जैसे ही लोग चोर-चोर का शोर मचाते हुए शादाब के घर में घुसे, चाँदनी ने डॉक्टर वसीम को टॉयलेट में बंद कर दिया।

इधर चांदनी चाकू लेकर अपने हाथ की नस काट डालने की धमकी देने लगी। जब लोगों ने उसे पकड़ा लिया, तो डॉक्टर वसीम भाग खड़ा हुआ। ग्रामीणों की तलाशी के बाद दूसरे कमरे में चाँदनी के पति व बच्चियों को बेसुध पाया गया। शादाब ने बताया कि उसे पहले से शक था कि चाँदनी परिवार को नशे की गोलियाँ देकर अपने प्रेमी से मिलती है। हालाँकि, गुप्तांग वाली साजिश का उसे अंदाज़ा नहीं था।

दरअसल, अपने पति शादाब को बेहोश करने के बाद उसकी पत्नी चाँदनी उसके गुप्तांग पर हार्पिक जैसी कोई चीज डाला करती थी। जिससे उसके गुप्तांग पर बड़े-बड़े जख्म हो गए थे। वह इसका त्वचा रोग समझ कर इलाज करा रहा था। उसने पूरे मामले का खुलासा होने के बाद थाने में अपनी बीवी के खिलाफ तहरीर दी है। आरोपित महिला को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। प्रेमी के साथ मिल कर पति का गुप्तांग जलाने के मामले में महिला से पूछताछ जारी है।

छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेसी सरकार: भ्रष्टाचार पर लिखेंगे तो सड़क पर भी मार खाएँगे और थाने में भी, देखती रहेगी पुलिस

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में एक पत्रकार के साथ सार्वजनिक तौर पर मारपीट हुई। पत्रकार कमल शुक्ला के साथ यह घटना बीते दिन (26 सितंबर 2020) हुई। इस दौरान उन्हें सड़क पर घसीटा गया और अपशब्द भी कहे गए, ऐसे में सवाल उठता है कि इतना कुछ किया किसने? आरोपों के अनुसार पूरी घटना को अंजाम दिया कॉन्ग्रेस पार्षद, विधायक प्रतिनिधि और अन्य कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने। 

हैरानी की बात है कि राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार है और मुख्यमंत्री हैं भूपेश बघेल। यानी उनके शासन में पत्रकारों के साथ हिंसा और सरेआम अत्याचार हो रहा है। कमल शुक्ला के साथ हुई इस मारपीट का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। इसमें साफ़ देखा जा सकता है कि कैसे कॉन्ग्रेस के उपद्रवी नेता उन्हें घसीटते हैं और उनके साथ मारपीट करते हैं। कमल शुक्ला को काफी चोटें भी आई हैं। हालाँकि पुलिस ने फ़िलहाल इस मामले में कुल 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना 26 सितंबर दोपहर के आस-पास की है, जब सतीश यादव नाम के पत्रकार के साथ मारपीट शुरू हुई। सतीश यादव स्थानीय नगपालिका में फैली अव्यवस्था पर ख़बरें लिख रहे थे और यह बात सत्ता में मौजूद कॉन्ग्रेस के स्थानीय नेताओं को रास नहीं आई। नतीजतन उन्होंने सतीश के साथ मारपीट की और इसके बाद थाने लेकर गए। ख़बरों की मानें तो थाने के भीतर भी उनके साथ मारपीट जारी थी। इस घटना की जानकारी मिलते ही कमल शुक्ला कांकेर स्थित आदर्श पुलिस थाना पहुँचे। 

उनकी फेसबुक वॉल पर देखा जा सकता है कि पहले थाने से लाइव किया और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने सतीश यादव का वीडियो भी साझा किया, जिसमें सतीश ने नगरपालिका अध्यक्ष समेत अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं का नाम लिया, जिन्होंने उनके साथ इतनी बुरी तरह मारपीट की।

इतना कुछ हो रहा था। लेकिन कॉन्ग्रेसी नेताओं के लिए यह शायद कम था! उन्होंने पत्रकार कमल शुक्ला के साथ भी इसके बाद मारपीट करनी शुरू कर दी, उन्हें अपशब्द कहे। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि कैसे सत्ता के नशे में चूर कॉन्ग्रेस के नेता उन्हें पीटते हुए कपड़े फाड़ देते हैं और उसके बाद धमकी भी देते हैं। 

कमल शुक्ला ने यहाँ तक आरोप लगाया है कि वहाँ पर मौजूद कॉन्ग्रेस के लोगों ने बन्दूक तक लहराई। कमल शुक्ला अपने क्षेत्र के मशहूर पत्रकार हैं और भूमकाल समाचार के संपादक हैं। वह काफ़ी समय से पत्रकार सुरक्षा और आदिवासियों से जुड़े मुद्दों पर लिखते रहे हैं। इसके पहले भी उन पर कई मामले दर्ज हो चुके हैं।

इस घटना के संबंध में उन्होंने बात करते हुए कहा: 

“सबसे पहले मैं यह बताना चाहता हूँ कि मैं डरा नहीं हूँ। हमारे एक पत्रकार साथी को मारते हुए ले आए, यहाँ की नगरपालिका एक पुराना गुंडा है। बस्ती के सभी लोग जानते हैं लेकिन पता नहीं ऐसे गुंडे को कैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठाते हैं। वह अपने गुंडे पार्षदों के साथ हमारे पत्रकार साथी को थाने तक पीटते हुए ले आए, इसकी वजह थी कि वह नगरपालिका के विरुद्ध सूचना का अधिकार लगा रहा था। इसकी जानकारी मिलते ही मैं थाने पहुँचा, मेरे साथ कई अन्य पत्रकार भी पहुँचे। फिर नगर के कई असामाजिक तत्व भी वहीं पर इकट्ठा हो गए। मैंने पुलिस अधीक्षक को फोन लगाया, कलेक्टर को फोन लगाया लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। अंत में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने फोन उठाया और उन्होंने मामले का संज्ञान लिया। विधायक शिशुपाल सोरी के प्रतिनिधि ने थाने में पिस्तौल भी लहराई।” 

कमल शुक्ला का कहना है कि कांकेर की स्थानीय पुलिस ने इस मामले में निष्पक्षता से काम नहीं किया। उनके मुताबिक़ पुलिस ऐसा चाह रही थी कि पत्रकारों के साथ मारपीट हो, इसलिए पुलिस ने थाने के भीतर भारी संख्या में असामाजिक तत्वों को घुसने दिया।

उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को संबोधित करते हुए लिखा, “भूपेश बघेल के संरक्षण में कांकेर नगर पालिका के सारे कॉन्ग्रेसी पार्षदों ने आज खुलकर की गुंडागर्दी और एक पत्रकार के साथ की पिटाई।”

पुलिस अभी तक इस मामले में 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है और घटना की जाँच जारी है। राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार है, भूपेश बघेल मुख्यमंत्री हैं और पत्रकारों के साथ इस तरह का बर्ताव हो रहा है। ऐसे में सरकार से लेकर पूरे प्रदेश के तंत्र पर कई सवाल खड़े होते हैं। क्या राज्य में पत्रकार वाकई सुरक्षित हैं? 

राजद ने नकारा, नीतीश ने दुत्कारा: कुशवाहा के चावल, यादवों के दूध से जो बनाते थे ‘खीर’ और करते थे खून बहाने की बात

बिहार में अब सभी राजनीतिक दलों ने रालोसपा सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा को ‘अछूत’ बना दिया है। महागठबंधन में सीटें न मिलने के बाद अब वो राजग की ओर देख रहे हैं लेकिन कभी नीतीश कुमार को अलविदा कहने वाले उपेंद्र कुशवाहा के लिए बिहार के मुख्यमंत्री ने सारे रास्ते बंद कर दिए हैं। तेजस्वी और नीतीश, किसी से भी भाव न मिलने के कारण उनकी हालत उस ‘धोबी के कुत्ते’ की तरह हो गई है, जो न घर का रहता है और न ही घाट का।

अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने इशारा कर दिया कि वो महागठबंधन से अलग होंगे। वहीं राजग से भाव न मिलने के बाद वो कह रहे हैं कि अगर राजद में नेतृत्व परिवर्तन होता है तो वो पुनर्विचार करने के लिए तैयार हो सकते हैं। लेकिन, असल बात ये है कि बिहार में 40 सीटों की माँग कर रहे रालोसपा संस्थापक उपेंद्र कुशवाहा को राजद 12 से ज्यादा सीटें देने के मूड में था ही नहीं।

हालाँकि, भाजपा तो उपेंद्र कुशवाहा को राजग में शामिल करने को लेकर थोड़ी-बहुत नरमी दिखा भी रही थी लेकिन नीतीश कुमार से जब रालोसपा के उनके साथ आने के विषय में सवाल किया गया तो उन्होंने कह दिया कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। हाँ, जीतन राम माँझी को लेकर ज़रूर बिहार के मुखिया गर्मजोशी दिखा रहे हैं। न सिर्फ उनकी सुरक्षा बढ़ाई गई है, बल्कि उन्हें राजग में हाथोंहाथ लिया जा रहा है।

तेजस्वी यादव के लिए उपेंद्र कुशवाहा ने कड़े शब्दों का प्रयोग किया था, जिसके बाद राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने यहाँ तक कह डाला कि राजग में जिन लोगों को दुत्कारा गया, उन्हें राजद ने सम्मान दिया, आज वही लोग तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी के पास ना संगठन है, ना पर्याप्त प्रत्याशी है, वो भी अगर अलग जाना चाहती है तो उनका स्वागत है।

मृत्युंजय तिवारी ने कह दिया कि ये लोकतंत्र है, कोई कहीं भी आ-जा सकता है। उपेंद्र कुशवाहा ने रालोसपा के कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा था कि बिहार में नेतृत्व ऐसा होना चाहिए, जो नीतीश कुमार के सामने खड़े होने की काबिलियत रखता हो। लालू यादव के जेल में होने और तेजप्रताप यादव के नेतृत्व में रूचि न दिखाने के अलावा तेजस्वी यादव का पूर्ण समर्थन करने के बाद राजद में नेतृत्व-परिवर्तन होने से तो रहा।

हालाँकि, बिहार में एक तीसरे मोर्चे के गठन की भी कवायद चल रही है, जिसका नेतृत्व जन अधिकार पार्टी के संस्थापक-अध्यक्ष पप्पू यादव करने वाले हैं। रालोसपा के वहाँ जाने के भी चांस दिख रहे हैं। कभी बिहार का मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रखने वाले उपेंद्र कुशवहा की राजनीतिक स्थिति पहले ठीक थी क्योंकि मोदी मंत्रिमंडल में भी उन्हें जगह दी गई थी। लेकिन, बार-बार भाजपा को कोसने के कारण वहाँ उन्हें दरवाजा दिखा दिया गया।

पिछले चुनावों में उनकी पार्टी की परफॉरमेंस और उनके बार-बार पाला बदलने की राजनीति को देखते हुए अब कोई भी उन पर विश्वास नहीं कर रहा है। उपेंद्र कुशवाहा को पहली बार फुटेज भी नीतीश कुमार की मदद से ही मिला था, जिन्होंने उन्हें पहली बार विधायक बनने के बावजूद 2004 में बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बना दिया था। कोइरी जाति के लिए सामाजिक न्याय की माँग करते-करते उन्हें 2007 में जदयू से निकाल बाहर किया गया।

नवम्बर 2009 में फिर से जदयू में उनकी वापसी हुई। उन्हें राज्यसभा सांसद भी बनाया गया। लेकिन, उन्होंने नीतीश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करते हुए फिर जदयू को अलविदा कह दिया। फिर 2013 में उन्होंने राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का गठन किया और लालू यादव के गठबंधन में शामिल हो गए। 2014 लोकसभा चुनाव में वो राजग में आ गए और उनकी पार्टी को दी गई लोकसभा सीटों पर जीत मिली।

जब नीतीश वापस राजग में आए तो उपेंद्र कुशवाहा ने फिर पाला बदला और लालू के साथ हो लिए। उनके विधायकों और सांसदों ने भी उनका साथ छोड़ दिया। उनके लिए चुनावों में एक सीट भी जीतनी आफत हो गई लेकिन उनकी महत्वाकांक्षा नहीं गई। उन्होंने कुशवाहा के चावल और यादवों के दूध को लेकर बिहार में ‘खीर’ थ्योरी की बात की, जिसमें दोनों जातियों की एकता की बात की गई, लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला।

मई 2019 में लोकसभा चनावों के परिणाम के दौरान तब बिहार महागठबंधन में रहे उपेंद्र कुशवाहा ने मतदान परिणाम मनमुताबिक न होने पर सड़कों पर खून बहा देने की धमकी दी थी। साथ ही इस संभावित हिंसा का ठीकरा एक ही साँस में बिहार की नीतीश और केंद्र की मोदी सरकार के सर फोड़ दिया था। उन्होंने अपने समर्थकों से हथियार उठाने के लिए तैयार रहने को भी कहा था। साथ ही भाजपा पर ‘रिजल्ट लूटने’ का आरोप लगाया था।

बॉलीवुड ‘सुपरस्टार’ के सामने ‘अपराधी’ शब्द बौना, ड्रग्स से लेकर हत्या/आत्महत्या और दंगों तक… कहाँ खड़ा होता है बॉलीवुड?

बॉलीवुड से जुड़े कई बड़े सितारों का नाम ड्रग्स मामले में सामने आ चुका है। कई से पूछताछ हो रही है और कई से पूछताछ होने वाली है। हर नए दिन कोई न कोई हैरान कर देने वाला खुलासा हो रहा है। जिन अभिनेताओं और अभिनेत्रियों को चाहने वालों की संख्या लाखों-करोड़ों में है, उन पर जाँच की तलवार लटक रही है।

इस मुद्दे पर पूरा बॉलीवुड दो खेमों में बँट गया है, पहला जो चाहता है कि जाँच निष्पक्ष तरीके से हो और सच सामने आए। दूसरा जो लगातार बचाव कर रहा है। बॉलीवुड का यह दूसरा हिस्सा तमाम बेबुनियाद दलीलों के ज़रिए यह साबित करने पर तुला हुआ है – ‘सब चंगा सी’ 

इस बात की नज़ीर पेश हुई सितंबर 26, 2020) को ट्विटर पर। एक हैशटैग ट्रेंड हुआ #StandWithDeepika यानी हम दीपिका के साथ खड़े हैं। भले दीपिका ‘K’ से पूछ रही हों, “माल है क्या?” और ड्रग्स पर चैट करने वाले व्हाट्सएप ग्रुप की एडमिन हों… लेकिन हैशटैग ट्रेंड हुआ!

दीपिका के समर्थन में ट्विटर ट्रेंड (साभार – ट्विटर )

यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है, जब बॉलीवुड ‘बॉलीवुड’ से जुड़े लोगों के कृत्यों का बचाव कर रहा है। बॉलीवुड का इतिहास ऐसे दृष्टान्तों से लदा हुआ है, जब बॉलीवुड के लोगों ने हर गलत बात को सिरे से खारिज करते हुए बचाव धर्म का निर्वहन किया। 

इससे पहले दीपिका पादुकोण ने जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में हुई हिंसा को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। इसके बाद दीपिका ने कहा था कि उन्हें इस बात पर गर्व होता है कि आज लोग बिना डरे अपनी आवाज़ रख रहे हैं। इस बात पर बाद में खूब विवाद भी हुआ था क्योंकि दीपिका जिन लोगों के समर्थन में खड़ी थीं, उसमें 19 छात्रों के खिलाफ खुद जेएनयू प्रशासन ने मामला दर्ज किया था।

हालाँकि देश में हो रहे किसी भी विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनना गलत नहीं कहा जा सकता, लेकिन सवाल यहाँ उठता है कि शामिल होने वाले की मंशा क्या है। संयोग की बात है कि उस दौरान ही दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘छपाक’ रिलीज़ होने वाली थी।

चूँकि मुद्दा महिलाओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए महिलाओं के नज़रिए से ही शुरुआत करते हैं। साल 2018 के दौरान एक मुद्दे ने रातों रात पूरे देश को चर्चा की एक वजह दी, वह मुद्दा था- #Metoo, लेकिन इस मुद्दे पर कुछ लोगों के बयान ऐसे थे कि ज़िम्मेदार नागरिक की समझदारी दम तोड़ दे। तब बॉलीवुड की मशहूर कोरियोग्राफ़र सरोज खान ने खूब ‘नाम’ कमाया था। उन्होंने ‘मीटू’ और कास्टिंग काउच जैसे संवेदनशील मसले पर बेहद बेतुका बयान दिया था

सरोज खान ने कहा था, “यह कोई नई बात नहीं है, इस तरह की चीज़ें बाबा आदम के ज़माने से हो रही हैं। हर लड़की के ऊपर कोई न कोई हाथ साफ़ करने की कोशिश करता है। सरकार के लोग भी ऐसा करते हैं, तुम फिल्म इंडस्ट्री के पीछे क्यों पड़े हो? इंडस्ट्री कम से कम रोटी तो देती है। रेप करके छोड़ तो नहीं देती है।” बयान से स्पष्ट है कि सरोज खान के मुताबिक़ इंडस्ट्री में होने वाली शोषण और बलात्कार की घटनाएँ जायज़ हैं।

हाल ही में पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री और समाजवादी पार्टी से सांसद जया बच्चन ने भी ड्रग्स के मुद्दे चौंकाने वाली बात कही। दरअसल बॉलीवुड अभिनेता और भाजपा सांसद रवि किशन ने लोकसभा में बॉलीवुड और ड्रग्स नेटवर्क को लेकर आवाज़ उठाई थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जया बच्चन ने आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया में फिल्म इंडस्ट्री को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल मुट्ठी भर लोगों के कारण आप पूरे बॉलीवुड को ड्रग्स एडिक्टेड नहीं बता सकते, उनकी छवि नहीं खराब कर सकते। 

जया बच्चन ने रवि किशन पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं, उसी थाली में छेद भी करते हैं। जया बच्चन ने रवि किशन पर निशाना साधते हुए कहा कि वो इस बात से शर्मिंदा हैं कि एक दिन पहले उसी सांसद ने बॉलीवुड में ड्रग्स की बात करते हुए पूरी इंडस्ट्री को भला-बुरा कहा, जो इसी का एक हिस्सा हैं।

ये तो हुई अभी की बात। लेकिन पहले सब दूध से धुला था, ऐसा नहीं है। आज से लगभग 26 साल पहले संजय दत्त के मामले में भी आज जैसी ही तस्वीर तैयार हुई थी और तस्वीर बनाने वाले कोई और नहीं बल्कि बॉलीवुड के लोग ही थे। 12 मार्च साल 1993 के दौरान मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इस मामले में बॉलीवुड से जुड़े कई लोगों का नाम सामने आया था।

इसमें सबसे ज़्यादा चर्चित रहा संजय दत्त का नाम, जिन्हें अबू सलेम और रियाज़ सिद्दीकी से अवैध हथियार लेकर रखने और नष्ट करने का आरोपित पाया गया था। आखिरकार मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में शामिल होने के आरोप में 4 जुलाई साल 1994 को उन्हें न्यायिक हिरासत में लिया गया था। संजय दत्त को आतंकवाद और विघटनकारी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (TADA Act) के तहत आरोपित पाया गया था। 

संजय दत्त के समर्थन में तथाकथित पूरा ‘बॉलीवुड परिवार’ (साभार – desimartini.com)

अगले दिन पूरा बॉलीवुड तख्तियाँ लेकर मुंबई की सड़कों पर नज़र आया। रातों रात ‘Sanju, we’re with u’ के हज़ारों पोस्टर छपवाए गए। तथाकथित पूरा ‘बॉलीवुड परिवार’ जिसमें दिलीप कुमार से लेकर यश चोपड़ा तक और सायरा बानो से लेकर अमरीश पुरी तक मौजूद थे।

इसके अलावा शाहरुख खान, सलमान खान, सैफ अली खान, अनुपम खेर, महेश भट्ट, करिश्मा कपूर, अजय देवगन, अक्षय कुमार, रवीना टंडन, जैकी श्रॉफ और उस ज़माने की मशहूर अदाकारा आशा पारेख भी मौजूद थीं। यह सभी कलाकार संजय दत्त के समर्थन में हाथ में तख्तियाँ और पोस्टर लेकर खड़े थे। सुनील दत्त कॉन्ग्रेस पार्टी से सांसद थे, इसके बावजूद उन्होंने खुद इस मामले में 1995 के दौरान शिवसेना मुखिया बाल ठाकरे से मदद माँगी थी

यह तो कुछ बचाव करने वाले लोग हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो इस बात का बेहतर उदाहरण हैं कि पहले बॉलीवुड कितना नॉन पॉलिटिकल (गैर राजनीतिक) था, मतलब उन्हें सिर्फ अपनी इंडस्ट्री से मतलब था, राजनीति कम घुसाते थे। अब राजनीति पहले घुसती है और इंडस्ट्री के खेमे अपने-अपने तंत्र के साथ खड़े होते हैं। ऐसे लोगों की सूची में सबसे पहला नाम है अनुराग कश्यप का, जो उपद्रवियों का बचाव करते करते गृह मंत्री के लिए अपशब्द तक कह देते हैं।

एक बार इसी तरह के घृणा भरे उन्माद में अनुराग कश्यप ने अमित शाह को ‘जानवर’ तक कह दिया था। जिस पर कई लोगों ने उन्हें साफ़ शब्दों में समझाया था कि विरोध की एक भाषा और शैली होती है, लेकिन वो जैसा कर रहे हैं, उसकी परिभाषा कुछ और ही है। 

ठीक ऐसे ही एक बार अनुराग कश्यप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए भी अभद्र रवैया अपनाया। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था, “CAA/CAB कहीं नहीं जाने वाला है। इनके लिए कुछ भी वापस लेना नामुमकिन है, क्योंकि वो उनके लिए हार होगी। यह सरकार हर चीज़ को हार-जीत में ही देखती है। इनका ego ऐसा है कि सब जल जाएगा, राख हो जाएगा लेकिन मोदी कभी ग़लत नहीं हो सकता। क्यों? क्योंकि अनपढ़ लोग ऐसे ही होते हैं।”

ऐसा ही एक और नाम है वरुण ग्रोवर, जिन्होंने ‘कागज़ नहीं दिखाएँगे’ नाम की कविता लिख कर सुर्खियाँ बटोरी थी। यह कविता उन्होंने नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के विरोध में लिखी थी और इसके ज़रिए खूब वाहवाही लूटने का प्रयास किया था। कविता का रंग-ढंग ऐसा था कि पूरा वामी और लिबरल गिरोह इस पर भावुक हो गया था, कई दिनों तक क्रांतिकारी महफ़िलों में यह कविता हवा भरती रही। गिरोह के हर सदस्य ने बराबर प्रयास किया कि कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो और आम जनता पर भी इसका बराबर प्रभाव पड़े। 

इसके बाद एक बेहद दिलचस्प घटना हुई। साल 2020 के जनवरी महीने में ट्विटर पर वरुण ग्रोवर ने ट्वीट करते हुए जानकारी दी थी कि वो मई-जून 2020 में स्टैंडअप कॉमेडी के लिए मशहूर ‘ऐसी-तैसी डेमोक्रेसी’ के साथ मिलकर अमेरिका में एक टूर करने जा रहे हैं। वरुण ने ट्वीट में लिखा है कि टिकट बुकिंग की जानकारी वो बाद में देंगे लेकिन अभी यह पोस्टर शेयर किया जाना ज्यादा जरूरी था। वरुण ग्रोवर के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनसे सवाल किया है कि वो अमेरिका में कागज दिखाएँगे या नहीं?    

रिया चक्रवर्ती के मामले में भी बचाव करने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं आई। अनुराग कश्यप, विद्या बालन, फरहान अख्तर, सोनम कपूर, दिया मिर्ज़ा समेत बॉलीवुड के कई बड़े नामों ने रिया का समर्थन किया। रिया का समर्थन करने वालों को ड्रग्स नहीं नज़र आई और न ही ड्रग्स का सेवन, लेकिन तथाकथित ‘फेमिनिज्म’ ज़रूर नज़र आ गया। समर्थन करने वालों के लिए यह महिला सशक्तिकरण पर हमला और पैट्रीआर्की को बढ़ावा देता दिखा। उनके लिए इतने गंभीर आरोप अहम नहीं थे लेकिन रिया बेहद अहम थीं।       

यह तो कुछ ऐसी घटनाएँ हैं, जिनमें बॉलीवुड के लोगों की सच्चाई सामाजिक सतह पर नज़र आई। इसके अलावा भी ऐसे अनेक किस्से हैं, जिसमें बॉलीवुड ने ठीक वही काम किया, जिसका न तो कोई तर्क था और न ही उसे सही कहा जा सकता था।

चाहे बॉलीवुड का ड्रग्स मामला हो या सुपरस्टार्स के गलत कामों को सुधारने की कोशिश, गलत का विकल्प कैसे हो सकता है? फिर भी बॉलीवुड ‘बॉलीवुड’ का बचाव करने से पीछे नहीं हटता है, ऐसा करने के दौरान उनके लिए बचाव सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होती है। ऐसे मामलों में ‘अपराध’ शब्द का कद ‘सुपरस्टार’ शब्द के सामने बौना साबित हो जाता है।