तमिलनाडु मुख्यमंत्री एक तरफ केंद्र सरकार पर आरोप लगा रही है कि वो राज्य पर हिंदी थोपने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खुद तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन से कहा है कि राज्य में तमिल भाषा में इंजीनियरिंग और मेडिकल शिक्षा शुरू होनी चाहिए।
अमित शाह ने 7 मार्च 2025 को रानीपेट जिले के थक्कोलम में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के 56वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान यह बात कही।
Like the CMs of other states, the CM of Tamil Nadu should also start medical and engineering courses in the Tamil language as soon as possible. This will benefit students studying in the Tamil medium.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने बदलाव किए हैं, जिससे अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की परीक्षाएँ क्षेत्रीय भाषाओं में भी आयोजित की जा सकती हैं, जिसमें तमिल भी शामिल है।
शाह ने कहा, “मैं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से छात्रों के लाभ के लिए राज्य में तमिल में इंजीनियरिंग और मेडिकल शिक्षा शुरू करने की अपील करता हूँ।” उन्होंने यह भी कहा कि कई अन्य राज्यों ने पहले ही अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में चिकित्सा और इंजीनियरिंग शिक्षा प्रदान करना शुरू कर दिया है। तमिल भाषा में भी इसकी शुरुआत होनी चाहिए।
बता दें कि गृहमंत्री अमित शाह का ये बयान लोगों में चर्चा का कारण बना हुआ है। इसे सुन कई नेटिजन्स मोदी सरकार की तारीफ भी कर रहे हैं। तमिल यूजर्स का भी कहना है कि केंद्र उनकी भाषा को सम्मान दे रही है, उसमें मेडिकल-इंजीनियरिंग पढ़ाने की बात कर रही है। वरना पिछले दिनों तो तमिलनाडु की राज्य सरकार ने नई शिक्षा नीति पर सवाल खड़ा करते हुए केंद्र पर खूब हमला किया था।
उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार हिंदी को थोपने की कोशिश कर रही है जबकि केंद्र का कहना था कि भाषाई स्तर पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। भाषा लोगों को संस्कृति से जोड़ती है।बावजूद इसके डीएमके इस बात पर अड़ी थी कि वे केवल दो-भाषा नीति का पालन करेंगे, जिसमें तमिल और अंग्रेजी शामिल हैं।
एक अज्ञात शख्स ने शुक्रवार (7 मार्च) को फोन करके अयोध्या से दिल्ली जा रही अयोध्या एक्सप्रेस को बम से उड़ाने की धमकी दी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियाँ हरकत में आ गईं और उन्होंने ट्रेन को रोककर गहन तलाशी ली। बम निरोधक दस्ते ने ट्रेन का एक-एक कोना छान मारा। हालाँकि, तलाशी में कुछ मिला नहीं है। इसके बाद ट्रेन को आगे की ओर रवाना कर दिया गया।
अधिकारियों का कहना है कि 14205 संख्या वाली अप ट्रेन अयोध्या से दिल्ली जा रही रही थी। इसके बाद रेलवे पुलिस को किसी ने फोन करके कहा कि अयोध्या एक्सप्रेस में बम रखी हुई है। फोन कॉल करने वाले व्यक्ति ने कहा कि ट्रेन को लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन से पहले बम से उड़ा दिया जाएगा। इसके बाद रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हो गईं।
पुलिस के अनुसार, बाराबंकी से लेकर लखनऊ तक ‘हाई अलर्ट’ जारी कर दिया गया। खुफिया एजेंसियाँ भी सक्रिय हो गईं। हर रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा बढ़ा दी गई। इसके बाद ट्रेन को बाराबांकी स्टेशन पर रोक कर रखा गया और तलाशी अभियान चलाया गया। एक-एक डिब्बे की सघन तलाशी ली गई। पुलिस ने बताया कि ट्रेन के एस-8 बोगी के शौचालय में एक संदेश लिखा हुआ मिला।
उसमें बम को उड़ाने की बात लिखी हुई थी। उसमें लिखा हुआ था, ‘इस ट्रेन को लखनऊ चारबाग स्टेशन पर बम से उड़ा दिया जाएगा। प्लीज इसे फेक नहीं समझें और इसकी जानकारी पुलिस को दें या 139 पर फोन करें। वरना हजारों लोगों की जान चली जाएगी। यकीन कर दोस्त, मदद कर। बम को S-4/S-5 बैग में रखा गया है। अब्दुल अंसारी (आतंकवादी), मुरादाबाद।’
ट्रेन में लिखा हुआ मैसेज (साभार: आजतक)
इस संदेश में ‘बम मिनी RDX 8/7 UC 100 मिमी टाइमर’ का भी विवरण दिया गया था। इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे दी गई। अधिकारियों ने इस धमकी को गंभीरता से लेते हुए सघन जाँच का आदेश दिया। यह तलाशी अभियान लगभग ढाई घंटे तक चली। इसमें रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP), स्थानीय पुलिस और बम निरोधक दस्ता शामिल हुईं।
बाराबंकी के SP दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि इस अभियान के लिए सेना के बम निरोधक दस्ते को भी बुलाया गया था। तलाशी के बाद ट्रेन में कुछ नहीं मिला और फिर उसे आगे की ओर रवाना कर दिया गया। SP दिनेश सिंह ने कहा कि फोन पर धमकी देने वाले व्यक्ति का भी पता लगाया जा रहा है। साथ ही मामले की जाँच की जा रही है।
सीलमपुर का ब्रह्मपुरी इलाके की गली नंबर 13 में स्थित अल-मतीन मस्जिद को लेकर हिंदुओं में डर और गुस्सा है। लोग कहते हैं कि मुस्लिम पहले चुपचाप आते हैं, फ्लैट खरीदते हैं, फिर घर लेते हैं, मस्जिद बनाते हैं और धीरे-धीरे पूरे इलाके पर कब्जा कर लेते हैं। फिर एक दिन मौका मिलते ही पूरी कौम एकजुट होकर हिंदुओं पर हमला कर देती है।
साल 2020 के हिंदू-विरोधी दंगों में ब्रह्मपुरी और सीलमपुर जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में यही हुआ था। अल-मतीन मस्जिद से गोलियाँ चली थीं, भीड़ जमा हुई और हिंदुओं का जीना मुश्किल हो गया। अब इसे बड़ा करने की कोशिश हो रही है, जिससे हिंदुओं को लगता है कि मस्जिद और बड़ी हुई तो उनका जीना हराम हो जाएगा। 2018 में भी गली नंबर-8 की मस्जिद को लेकर तनाव हुआ था, जिसके बाद 2020 में मुस्लिमों ने हिंदुओं पर गुस्सा उतारा। आइए, इसकी पूरी कहानी समझते हैं।
फ्लैट से मस्जिद और फिर बदलने लगता है माहौल
ब्रह्मपुरी में अल-मतीन मस्जिद की कहानी साल 2013 से शुरू होती है। लोकल आदमी पंडित लाल शंकर गौतम बताते हैं, “2013 में मुस्लिमों ने गली नंबर-13 में एक फ्लैट खरीदा। वहाँ नमाज शुरू हुई। कोई कुछ नहीं बोला। लेकिन धीरे-धीरे उस फ्लैट को चार मंजिल की मस्जिद बना दिया।” गौतम कहते हैं कि ये सब सोचा-समझा था। पहले छोटी जगह ली, फिर उसे बढ़ाते गए।
उनका मानना है कि मुस्लिम इस तरह इलाके में घुसते हैं। पहले एक फ्लैट, फिर आसपास के घर खरीदते हैं और मस्जिद बना लेते हैं। शुरू में सब ठीक लगता है, लेकिन बाद में माहौल बदल जाता है। हिंदुओं को लगता है कि ये सब उनकी जिंदगी पर कब्जा करने की तैयारी है।
साल 2018 में भी हुआ था तनाव, मस्जिद थी वजह
ब्रह्मपुरी में मुस्लिमों की ये कारगुजारी कोई नई बात नहीं है। साल 2018 में गली नंबर-8 में भी एक मस्जिद को लेकर हिंदुओं और मुस्लिमों में ठन गई थी। उस वक्त हिंदुओं ने इसका विरोध किया।
शीशपाल तिवारी कहते हैं, “वहाँ मस्जिद बन रही थी। हमने कहा कि ये गलत है। तब पुलिस ने दोनों तरफ से बात कराई। एक समझौता हुआ कि मस्जिद में सिर्फ गली के लोग नमाज पढ़ेंगे। बाहर से कोई नहीं आएगा।” लेकिन तिवारी का कहना है कि मुस्लिमों ने इस वादे को तोड़ा। अब्दुल रफीक नाम का शख्स बाहर से लोगों को बुलाने लगा। गली में भीड़ बढ़ने लगी। हिंदुओं को लगने लगा कि ये सब उन्हें परेशान करने के लिए हो रहा है। ये तनाव 2018 में शुरू हुआ और आगे चलकर 2020 में बड़ा बवाल बन गया।
एक बुजुर्ग कहते हैं, “हमें बाहर निकलने में डर लगता है। मस्जिद बड़ी हुई तो ये रोज का हाल होगा।” 2018 के समझौते को तोड़ने का भी गुस्सा है। वो कहते हैं, “अब्दुल रफीक बाहर से लोगों को बुलाता है। गली में शांति नहीं रहती।” हिंदुओं को लगता है कि मस्जिद के बहाने मुस्लिम उनकी जिंदगी पर कब्जा करना चाहते हैं। यहाँ हिंदू डरकर ही रहने को मजबूर हैं। दंगों के बाद से कुछ ज्यादा ही खौफ है।
साल 2020 में दिख चुकी है मुस्लिमों की एकजुटता
साल 2020 के फरवरी महीने में ब्रह्मपुरी और सीलमपुर में जो हुआ, वो हिंदुओं के लिए खौफनाक था। दंगे भड़के और अल-मतीन मस्जिद उसका बड़ा केंद्र बना। गौतम बताते हैं, “25 फरवरी को मस्जिद से गोलियाँ चलीं। अचानक हजारों की भीड़ जमा हो गई। कहा गया कि मस्जिद में आग लगाई गई, जो झूठ था। फिर गली नंबर-13 में गोलीबारी हुई। तीन हिंदू लड़के घायल हुए।”
हिंदुओं का कहना है कि ये सब सोचा-समझा था। मुस्लिम पूरी कौम एकजुट होकर हिंदुओं पर टूट पड़े। 53 लोग मारे गए, जिसमें ज्यादातर मुस्लिम थे, लेकिन हिंदुओं को भी निशाना बनाया गया। गौतम कहते हैं, “उस दिन हमें समझ आ गया कि मस्जिद सिर्फ नमाज के लिए नहीं है। ये उनकी ताकत दिखाने की जगह है।” दंगों के बाद हिंदुओं का भरोसा टूट गया।
मस्जिद का विस्तार हिंदुओं के लिए बढ़ते खतरे की घंटी
2020 के बाद मस्जिद को बड़ा करने की कोशिश शुरू हुई। 2023 में मस्जिद वालों ने गली नंबर-12 में बगल का एक घर खरीदा। वो घर हिंदू का था। शंकर लाल गौतम कहते हैं, “पहले घर खरीदा, फिर तोड़ दिया। अब वहाँ मस्जिद का हिस्सा बन रहा है।” प्लान ये था कि मस्जिद का नया गेट गली नंबर-12 में खोला जाए, जो ठीक सामने 1984 से बने शिव मंदिर के पास पड़ता है। हिंदुओं को ये बिल्कुल मंजूर नहीं। गली नंबर-12 में 60 हिंदू परिवार रहते हैं। उनमें से अधिकतर घरों के सामने ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर दिख जाएँगे।
ब्रह्मपुरी की गली नंबर-12 में लगे ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर
एक युवक ने कहा, “मंदिर बहुत पुराना है। हर सोमवार को पूजा होती है। मस्जिद का गेट सामने खुला तो हमारा जीना मुश्किल हो जाएगा।” हिंदुओं को डर है कि मस्जिद बड़ी हुई तो भीड़ बढ़ेगी और 2020 जैसा हमला फिर हो सकता है।
शंकर लाल गौतम कहते हैं, “अगर मस्जिद दो गुनी बड़ी हो गई तो सोचो, कितने लोग यहाँ जमा होंगे। फिर हमें कौन बचाएगा? 2020 में जो हुआ, वो दोबारा होगा।” हिंदुओं का मानना है कि मुस्लिम पहले इलाके में फैलते हैं, फिर मस्जिद बनाते हैं और मौका मिलते ही एकजुट होकर हमला करते हैं। ब्रह्मपुरी में यही पैटर्न दिख रहा है।
हिंदुओं के घरों के बाहर फेंकी जाती हैं जानवरों की हड्डियाँ और खून
हिंदुओं का कहना है कि मस्जिद के आसपास उनका जीना मुश्किल हो गया है। सुरेश कुमार अग्रवाल ने साल 2023 में न्यू उस्मानपुर थाने में शिकायत की थी। उन्होंने शिकायत में लिखा था, “साल 2017 से मुस्लिम समाज के लोग आए दिन मुझे भगाने के लिए मेरे घर पर कभी खून डाल देते हैं, कभी कुछ। इसी कड़ी में 10 अप्रैल 2023 को किसी जानवर के कटे हुए पैर मेरे घर के सामने डाल दिया गया।”
साल 2023 समेत कई बार हिंदुओं के घरों के सामने फेंके गए जानवरों के अवशेष, शिकायत की कॉपी
वो शिकायत में आगे लिखते हैं, “यह लोग (मुस्लिम) चाहते हैं कि हम हिंदू समाज के लोग अपना घर बेचकर यहाँ से चले जाएँ। जिसके कारण मेरे ही नहीं, कई हिंदू परिवारों के घरों पर, छतों पर जानवरों की हड्डियाँ और खून फेंका जाता है। इसकी सूचना कई बार पुलिस को दी भी जा चुकी है।” स्थानीय लोग इन आरोपों की पुष्टि करते हैं। उनका कहना है कि मुस्लिम जानबूझकर ऐसा करते हैं, ताकि हिंदू परेशान हों। इस बात की शिकायत गृहमंत्री अमित शाह तक की गई थी।
मुस्लिम पक्ष को मामले के ठंडा पड़ते ही निर्माण कार्य शुरू होने का इंतजार
मस्जिद का विस्तार 2023 में शुरू हुआ। हिंदुओं ने शिकायत की तो पुलिस ने काम रुकवा दिया। फिर 23 नवंबर, 2024 को मस्जिद वालों ने MCD से इजाजत ली और फरवरी 2025 में काम दोबारा शुरू किया। लेकिन 13 फरवरी, 2025 को फिर शिकायत हुई। पुलिस ने जाँच की तो नक्शा गलत निकला। MCD ने काम रोक दिया। मस्जिद का संचालन करने वाली अल-मतीन वेलफेयर सोसायटी और इसका नक्शा पास करने वाले आर्किटेक्ट मोहम्मद दाऊद खान को शो कॉज नोटिस भी भेजा गया है। अब एक महीने से निर्माण बंद है।
मस्जिद कमेटी और भवन निर्माण का नक्शा पास करने वाले आर्किटेक्ट को एमसीडी ने भेजा नोटिस
हालाँकि गौतम कहते हैं, “MCD बोर्ड लगाकर दिखावा कर रही है। असल में कुछ नहीं हो रहा।” हिंदुओं को लगता है कि पुलिस और MCD सिर्फ ऊपरी कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि मुस्लिम मौके की तलाश में हैं।
मस्जिद के नायब ईमाम सद्दाम हुसैन कहते हैं, “हमारी आबादी बढ़ रही है। मस्जिद छोटी पड़ गई। इसे बड़ा करना गलत कैसे है?” उनका कहना है कि हिंदुओं का डर बेकार है। वो कहते हैं, “हम शांति चाहते हैं।”
लेकिन हिंदुओं को ये बातें खोखली लगती हैं। अजय नाम के युवक ने कहा, “2020 में भी शांति की बात थी, फिर गोलियाँ चलीं। अब मस्जिद बड़ी हुई तो क्या होगा?” हिंदुओं को शक है कि मुस्लिम पहले फैलते हैं, फिर मौका देखकर हमला करते हैं।
साल 2020 के दंगों में हिंदुओं ने देखा कि मुस्लिम कैसे एकजुट हो जाते हैं। शंकर लाल गौतम कहते हैं, “मस्जिद से भीड़ निकली और हम पर टूट पड़ी। एक-एक घर को निशाना बनाया।” ब्रह्मपुरी और सीलमपुर जैसे इलाकों में मुस्लिम बहुल होने की वजह से उनकी ताकत बढ़ गई थी।
हिंदुओं का कहना है कि मस्जिदें इन हमलों का केंद्र बनती हैं। अगर अल-मतीन मस्जिद बड़ी हुई तो ये ताकत और बढ़ेगी। एक बुजुर्ग ने कहा, “हमें हर दिन डर में जीना पड़ेगा। मस्जिद जितनी बड़ी होगी, हमारा डर उतना बढ़ेगा।” यही वजह है कि लोगों ने अब पलायन को ही अपना भविष्य मान लिया है।
मकान पर लगे पोस्टर
हिंदू समुदाय मस्जिद निर्माण को एक ‘मोडस ऑपरेंडी’ मानता है। उनका कहना है कि पहले मस्जिद बनती है, फिर माहौल बदलता है, और हिंदू पलायन को मजबूर हो जाते हैं। 2020 के बाद से ब्रह्मपुरी में यह ट्रेंड देखने को मिला है। विनोद नाम की स्थानीय महिला ने कहा, “पहले भी दिक्कतें होती थी, लेकिन बात इतनी नहीं बढ़ती थी। लेकिन दंगों के बाद सब बदल गया। अब मस्जिद का विस्तार देखकर लगता है कि हमें यहाँ से पूरी तरह से भगाने की तैयारी है।”
ब्रह्मपुरी में हिंदुओं को लगता है कि मुस्लिम पहले फ्लैट खरीदते हैं, फिर घर लेते हैं, मस्जिद बनाते हैं और इलाके पर कब्जा कर लेते हैं। 2018 का तनाव और 2020 का हमला इसके सबूत हैं। अब मस्जिद के विस्तार से डर और बढ़ गया है। पुलिस अभी शांति बनाए है, लेकिन हिंदुओं को भरोसा नहीं। अजय कहता है, “मस्जिद बड़ी हुई तो हमारा जीना हराम हो जाएगा।” ये कहानी सिर्फ मस्जिद की नहीं, बल्कि हिंदुओं के डर और मुस्लिमों की बढ़ती ताकत की है। आगे क्या होगा, ये वक्त बताएगा।
बिहार के बक्सर में एक पादरी ने हिन्दू विधवा की जमीन कब्जाने की कोशिश की। उसकी जमीन पर वह ईसाई धर्म के लिए प्रार्थना करवाता था। पादरी धर्मांतरण का बड़ा रैकेट चला रहा था। लोगों से हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा बंद करके यीशु मसीह की प्रार्थना करने को कहता था।
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के सीवान के एक गाँव में एक पादरी सुनील कुमार 2014 से धर्मांतरण का रैकेट चला रहा था। पादरी एक मकान में किराए का कमरा लेकर रविवार को प्रार्थनाएँ करवाता था। इस प्रार्थना में 100-100 लोग शामिल होते थे।
इस प्रार्थना में ज्यादातर महिलाएँ होती थीं। जब उसे उस मकान से भगाया गया जहाँ वह प्रार्थना करवाता था तो उसने एक झोपड़ी डाल कर यही काम करने लगा। इसके बाद उसने यहीं की एक गरीब हिन्दू महिला का फायदा उठाया। उसने महिला की आवश्यकता के दौरान ₹2 लाख लिए और उसका घर अपने धर्मांतरण रैकेट के लिए इस्तेमाल करने लगा।
पादरी ने हिन्दू महिला पर लगातार दबाव बनाया कि वह प्रार्थना में शामिल हो। जब हिन्दू महिला उससे प्रार्थना करवाने का विरोध करती तो वह अपने पैसे वापस माँगता था। महिला ने आरोप लगाया है कि पादरी सुनील उनके घर पर कब्जा करके इसे धर्मांतरण का केंद्र बनाना चाहता था।
यहाँ आने वाली महिलाएँ हिन्दू महिला से धर्मांतरित होने को कहती थीं। यहाँ तक कि वह और लोगों को ईसाई प्रार्थना में शामिल करने का दबाव बनाता था। दैनिक भास्कर से एक व्यक्ति ने बताया कि सुनील गाँव की महिलाओं को निशाना बनाता था और उनसे कहता था कि वह देवी-देवता पूजा करना बंद दें।
पादरी सुनील कुमार उनको ऑफर देता था कि वह यीशु की प्रार्थना करेंगे तो उनको नौकरी और कॉलेज आदि में एडमिशन देंगे। रिपोर्ट में बताया गया है कि सुनील कुमार ने यहाँ कई हरिजन महिलाओं का धर्मांतरण भी करवा दिया है। यहाँ महिलाओं ने कागजों पर अपना धर्म नहीं बदला लेकिन वह अब हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा नहीं करती।
यही पादरी सुनील कुमार धर्मांतरण के साथ ही हिन्दू महिलाओं को ठगता भी है। हिन्दू महिलाओं को वह नौकरी और पैसे का लालच देकर उन्हें ठगता भी है। पादरी सुनील कुमार पहले क्रिश्चियन स्कूल में भी पढ़ा चुका है। वह लोगों के रोग ठीक करने का भी दावा करता है। कुछ महिलाओं का उसने ब्रेनवॉश भी कर दिया है।
वह कहता है कि हिन्दुओं की समस्याएँ दुर्गा-शिव नहीं खत्म करेंगे बल्कि यह यीशु की आराधना से खत्म होंगी। उसका हाल ही में बजरंग दल वालों ने विरोध किया था। तब से वह गायब है। अभी तक उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है लेकिन ग्रामीण उससे गुस्सा हैं।
दिल्ली के ब्रह्मपुरी इलाके में अल-मतीन मस्जिद को लेकर फिर से हंगामा मचा हुआ है। ये मस्जिद पहले से ही गली नंबर-13 में थी, लेकिन अब इसे गली नंबर-12 में बढ़ाने की कोशिश हो रही है। खास बात ये है कि नया गेट ठीक सामने बने शिव मंदिर के पास खोलने की बात है। लोग कह रहे हैं कि ये मस्जिद धोखे से बनी थी और अब इसे और बड़ा करने की जिद साजिश का हिस्सा है। MCD ने निर्माण पर रोक लगा दी है, लेकिन उसका बोर्ड लगाकर मामले को दबाने की कोशिश भी दिख रही है। हिंदू डरे हुए हैं, क्योंकि 2020 के दंगों में इसी मस्जिद से गोलियाँ चली थीं। दूसरी तरफ, मुस्लिम कह रहे हैं कि शांति होने पर वो मस्जिद बना लेंगे। तो आखिर पूरा मामला क्या है? चलिए, इसे आसान भाषा में समझते हैं।
मस्जिद की शुरुआत: फ्लैट से मस्जिद तक का सफर
ब्रह्मपुरी की अल-मतीन मस्जिद की कहानी 2013 से शुरू होती है। यहाँ रहने वाले पंडित लाल शंकर गौतम बताते हैं, “2013 में कुछ मुस्लिम लोगों ने गली नंबर-13 में एक फ्लैट खरीदा था। पहले वहाँ नमाज पढ़ने लगे, किसी को दिक्कत नहीं हुई। लेकिन धीरे-धीरे उस फ्लैट को मस्जिद में बदल दिया गया।” गौतम कहते हैं कि पहले ये सिर्फ एक आम घर था, लेकिन बाद में इसे चार मंजिल की मस्जिद बना दिया गया। उनका मानना है कि ये सब सोच-समझकर किया गया, ताकि इलाके में मुस्लिमों की पकड़ मजबूत हो। शुरू में किसी को शक नहीं हुआ, लेकिन 2020 के दंगों के बाद लोगों की आँखें खुल गईं।
मस्जिद का विस्तार: साजिश या जरूरत?
साल 2020 के बाद मस्जिद को बड़ा करने की कोशिश शुरू हुई। 2023 में मस्जिद वालों ने गली नंबर-12 में इसके बगल का एक प्लॉट खरीदा। ये प्लॉट पहले एक हिंदू परिवार का था। गौतम कहते हैं, “पहले उस घर को खरीदा, फिर तोड़ दिया और वहाँ मस्जिद का हिस्सा बनाने लगे। ये सब बहुत सोच-समझकर हुआ।”
ब्रह्मपुली अल मतीन मस्जिद और विस्तार कार्य की मौजूदा स्थिति
योजना थी कि मस्जिद का नया गेट गली नंबर-12 में खोला जाए, जो ठीक सामने 1984 से बने शिव मंदिर के पास पड़ता है। हिंदुओं को ये बात बिल्कुल पसंद नहीं आई। गली नंबर-12 में करीब 60 हिंदू परिवार रहते हैं। इनमें से 25-30 परिवारों ने अपने घरों पर ‘मकान बिकाऊ’ के पोस्टर लगा दिए। उसी गली में रहने वाले एक युवक सोनू (नाम बदला हुआ) ने कहा, “मंदिर यहाँ बहुत पुराना है। हर सोमवार को पूजा होती है, होली पर होलिका दहन होता है। अगर मस्जिद का गेट सामने खुला तो रोज झगड़ा होगा। हम 2020 जैसा कुछ नहीं चाहते।”
हिंदुओं को डर है कि मस्जिद बड़ी हुई तो भीड़ बढ़ेगी और उनके लिए खतरा और ज्यादा हो जाएगा। गौतम का कहना है, “2020 में जो हुआ, वो हम भूल नहीं सकते। अगर मस्जिद दो गुनी बड़ी हो गई तो सोचो, कितने लोग यहाँ जमा होंगे। ये हमारे लिए खतरे की घंटी है।” दूसरी तरफ, मस्जिद के नायब ईमाम सद्दाम हुसैन कहते हैं, “हमारी आबादी बढ़ रही है। मस्जिद छोटी पड़ गई थी। इसमें गलत क्या है? हम शांति से रहना चाहते हैं।”
हिंदू विरोधी दंगा डर की बड़ी वजह
साल 2020 में फरवरी के महीने में दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में जो दंगे हुए, वो ब्रह्मपुरी के लोगों के लिए आज भी एक डरावना सपना हैं। उस वक्त सीलमपुर, जाफराबाद और ब्रह्मपुरी में खूब हिंसा हुई। 53 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। इस दौरान अल-मतीन मस्जिद का नाम खास तौर पर सामने आया।
शंकर लाल गौतम बताते हैं, “25 फरवरी को मस्जिद से गोलियाँ चली थीं। वहाँ हजारों लोग अचानक जमा हो गए। कहा गया कि मस्जिद में आग लगाई गई, जो झूठ था। इसके बाद गली नंबर-13 में गोलीबारी हुई, जिसमें तीन हिंदू लड़के घायल हुए।” उस घटना के बाद से हिंदुओं में डर बैठ गया। लोगों को लगने लगा कि मस्जिद यहाँ सिर्फ इबादत के लिए नहीं, बल्कि कुछ और मकसद से बनाई गई है। दंगों के बाद कई हिंदू परिवार यहाँ से चले गए और अपने घर बेच दिए।
मस्जिद का काम कई बार रुका, अब MCD पर लग रहे आरोप
इस मस्जिद के विस्तार का मामला 2023 से चल रहा है। पहले जब काम शुरू हुआ तो लोगों ने पुलिस में शिकायत की और निर्माण रुक गया। फिर मस्जिद वालों ने 23 नवंबर, 2024 को MCD से परमिशन ली। इसके बाद फरवरी 2025 में काम दोबारा शुरू हुआ। लेकिन 13 फरवरी, 2025 को उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस को फिर शिकायत मिली। पुलिस ने जाँच की तो पता चला कि मस्जिद का नक्शा गलत तरीके से पास कराया गया था। MCD ने फौरन काम रोक दिया और मस्जिद वालों को नोटिस भेजा। अभी तक निर्माण करीब एक महीने से बंद है। 3 मार्च को इलाके में पथराव की खबर भी आई, लेकिन पुलिस को कोई सबूत नहीं मिला।
निर्माण कार्य से संबंधित बोर्ड मौके पर लगाए गए हैं-ये हिस्सा गली नंबर 12 में है, जहाँ गेट खोलने की तैयारी
हालाँकि, हिंदुओं को लगता है कि MCD मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। शंकर लाल गौतम कहते हैं, “अभी बोर्ड लगा है कि एमसीडी की अनुमति से निर्माण कार्य चल रहा है, जबकि उस पर रोक है। इसके बावजूद बोर्ड को हटाया नहीं गया। पहले तो गलत नक्शा पास किया, अब दिखावा कर रहे हैं।” उनका मानना है कि ये सब ऊपरी दबाव में हो रहा है।
मुस्लिमों को भरोसा, आगे जरूर पूरा होगा निर्माण कार्य
मस्जिद के लोग कहते हैं कि वो हार नहीं मानेंगे। नायब ईमाम सद्दाम हुसैन बताते हैं, “हमें भरोसा है कि मामला ठंडा होने के बाद ये निर्माण कार्य जरूर पूरा होगा। अभी पुलिस और MCD का दबाव है, लेकिन ये ज्यादा दिन नहीं चलेगा।” कुछ लोकल मुस्लिमों का कहना है कि वो इंतजार कर रहे हैं कि कब माहौल शांत हो। एक दुकानदार कहता है, “अभी सब चुप हैं, लेकिन मौका मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। हमें अपनी मस्जिद चाहिए।” लेकिन हिंदुओं को ये बात और डरा रही है। उन्हें लगता है कि ये शांति सिर्फ ऊपरी है और बाद में कुछ बड़ा हो सकता है।
कम्युनिटी सेंटर का बहाना: सच या झूठ?
अब मस्जिद वाले कह रहे हैं कि वो गली नंबर-12 में मस्जिद नहीं, बल्कि कम्युनिटी सेंटर बना रहे थे। सद्दाम हुसैन का दावा है, “हम बच्चों की पढ़ाई के लिए जगह बनाना चाहते थे। स्वास्थ्य के लिए डॉक्टर भी बुलाने की सोच थी। ये कोई साजिश नहीं है।” लेकिन हिंदुओं को ये बात हजम नहीं हो रही। गौतम कहते हैं, “ये सब बहाना है। पहले मस्जिद बनाने की बात थी, अब जब विरोध हुआ तो कहानी बदल दी।” कुछ लोकल मुस्लिम भी मानते हैं कि असल में मस्जिद ही बन रही थी। एक शख्स कहता है, “कम्युनिटी सेंटर की बात बस लोगों को चुप कराने के लिए है।”
दिल्ली विधानसभा चुनाव तक सबकुछ ठप, कोई खास प्लान?
इस मामले में एक सवाल ये भी उठता है कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव की वोटिंग तक सब खामोश क्यों थे। कुछ लोगों को लगता है कि मस्जिद वालों को उम्मीद थी कि अरविंद केजरीवाल की सरकार फिर आएगी और उनके हक में फैसला होगा। शंकर लाल गौतम कहते हैं, “विधानसभा चुनाव की वोटिंग से पहले कोई हलचल नहीं थी। शायद उन्हें लगता था कि केजरीवाल की सरकार हमें दबा देगी। अब जब सत्ता बदली है, तो दबाव बढ़ गया।” हिंदुओं को शक है कि कम्युनिटी सेंटर की बात भी इसी दबाव की वजह से निकाली गई, ताकि विवाद थोड़ा ठंडा पड़े।
बता दें कि 2020 के दंगों के बाद से ब्रह्मपुरी में हिंदुओं का पलायन बढ़ गया है। गली नंबर-12 और 13 में पहले दोनों समुदाय साथ रहते थे, लेकिन अब ज्यादातर घर मुस्लिम खरीद रहे हैं। एक बुजुर्ग कहते हैं, “पहले यहाँ सब ठीक था। दंगों के बाद डर लगने लगा। अब मस्जिद का विस्तार देखकर लगता है कि हमें भगाने की तैयारी है।” लोग मानते हैं कि पहले मस्जिद बनती है, फिर माहौल बदलता है और हिंदू मजबूरी में चले जाते हैं। मुस्लिम कहते हैं, “हम अच्छे पैसे दे रहे हैं, इसलिए लोग बेच रहे हैं।” लेकिन हिंदुओं का कहना है कि ये डर की वजह से हो रहा है।
ब्रह्मपुरी का ये विवाद सिर्फ मस्जिद के बारे में नहीं है। ये डर, अविश्वास और पुराने जख्मों की कहानी है। हिंदुओं को लगता है कि मस्जिद के बहाने उन्हें भगाया जा रहा है। मुस्लिम कहते हैं कि उन्हें जगह चाहिए। MCD और पुलिस ने अभी शांति बनाई है, लेकिन लोग डरे हुए हैं कि ये कब तक चलेगा। क्या सचमुच कम्युनिटी सेंटर बन रहा था, या ये मस्जिद को बचाने का बहाना है? जवाब अभी साफ नहीं है, लेकिन ब्रह्मपुरी के लोग डर और उम्मीद के बीच जी रहे हैं।
मुरादाबाद में दलित बालिका का अपहरण कर 2 महीने तक रेप करने वाले मुस्लिमों को इसके लिए पैसा मिलता था। यह पैसा इस्लामिक जिहाद के नाम पर मिलता था। दलित नाबालिग का अपहरण करने वाला मुख्य आरोपित सलमान उससे दावा करता था कि वह ना जाने कितनी लड़कियों को मुस्लिम बना चुका है।
यह सारे आरोप 14 वर्षीय दलित बच्ची ने FIR में लगाए हैं। पीड़िता का सलमान, आरिफ, राशिद और जुबैर ने 2 माह पहले अपहरण किया था। इसके बाद उसे एक कमरे में लगातार बेहोशी की हालत में रखते थे। यहाँ उसके साथ 2 माह तक रेप हुआ। पीड़िता ने बताया है कि होश में आने पर उसे गाय-भैंस का मांस खिलाया जाता था।
पीड़िता का आरोप है कि उसके हाथ पर बना ॐ का टैटू तेज़ाब डाल कर मिटा दिया गया। उसके चेहरे पर भी तेज़ाब डालने की धमकी दी गई। पीड़िता को धमकी दी गई अगर उसने किसी को इस प्रताड़ना के विषय में बताया तो उसके परिवार की हत्या कर दी जाएगी। सलमान ने पीड़िता से कहा कि धर्मांतरण करवाने से उसे जन्नत मिलेगी।
‘मुस्लिम गैंग’ ने कहा कि अगर वह अपने घर में बताएगी तो उसके चाचा-चाची और भाई की हत्या कर दी जाएगी। ऑपइंडिया के पास इस मामले में दर्ज करवाई गई FIR की कॉपी मौजूद है। पीड़िता किसी तरह 2 मार्च, 2025 को अपने घर वापस मुस्लिम लड़कों के चंगुल से छूट कर पहुँची थी। तब वह ढंग से चल फिर भी नहीं पा रही थी।
पीड़िता के परिजनों ने यह भयावह कहानी सुनने के बाद पुलिस में FIR दर्ज करवाई है। सलमान, जुबैर, आरिफ और राशिद को आरोपित बनाया गया है। यह चारों मुरादाबाद के एक गाँव के ही रहने वाले हैं। उनके खिलाफ रेप के साथ ही SC-ST और POCSO एक्ट में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपित सलमान समेत 3 आरोपित गिरफ्तार कर लिए हैं।
2/2 मुकदमा उपरोक्त में अन्य वैधानिक कार्यवाही प्रचलित है, उक्त संबंध में पुलिस अधीक्षक ग्रामीण @moradabadpolice की बाईटः-
मामला सामने आने के बाद मुरादाबाद के हिन्दू संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। आजाद समाज पार्टी मुखिया और MP चन्द्र शेखर ने भी इस मामले में कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने योगी सरकार से कहा है कि सभी दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर कठोरतम सज़ा दी जाए। उन्होंने पीड़िता के लिए ₹50 लाख के मुआवजे की माँग भी की है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार (7 मार्च) को विधानसभा में अपना 16वाँ बजट पेश किया। जुमे के दिन पेश इस बजट में कॉन्ग्रेस सरकार ने मुस्लिमों का विशेष ध्यान रखा। उनके लिए मदरसे, कब्रिस्तान, हज भवन, मौलवियों को तनख्वाह से लेकर स्टार्टअप और ITI बनाने तक कई तरह के प्रावधान किए गए हैं। भाजपा ने इस बजट की तीखी आलोचना की है और इसे मुस्लिम लीग बजट कहा है।
कॉन्ग्रेस सरकार के बजट में वक्फ संपत्तियों की मरम्मत तथा मुस्लिम कब्रिस्तानों के लिए 150 करोड़ रुपए आवंटित की गई है। इसके अलावा, अल्पसंख्यक परिवारों को निकाह के लिए 50,000 रुपए की सहायता देने की भी घोषणा की है। सबसे गंभीर बात है कि तुष्टिकरण की हद पार करते हुए कॉन्ग्रेस सरकार ने राज्य के सरकारी टेंडरों में मुस्लिमों को 4% आरक्षण देने की घोषणा की है।
Karnataka State Budget | For repair and renovation of Waqf properties and for providing infrastructure and protection of Muslim burial grounds an amount of Rs. 150 crore has been provided.
कॉन्ग्रेस सरकार ने मस्जिदों के पेश-इमामों का मानदेय बढ़ाकर 6,000 रुपए प्रति माह कर दिया है। यह बढ़ोतरी जैन पुजारियों और सिख ग्रंथियों पर भी लागू होगी। इस बजट में 250 करोड़ रुपए ईसाई समुदाय के विकास के लिए प्रावधान किया गया है। हज यात्रियों और उनके रिश्तेदारों के लिए बेंगलुरु में हज भवन का एक अतिरिक्त भवन का निर्माण किया जाएगा।
राज्य सरकार ने विदेश पढ़ने जाने वाले अल्पसंख्यक विद्यार्थियों की सहायता राशि बढ़ाकर 20 लाख रुपए से 30 लाख रुपए कर दिया। माइनॉरिटी बहुल इलाकों में सरकार ने ITI खोलने की घोषणा की है। बजट में यह भी कहा गया है कि कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (केईए) के माध्यम से व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाने वाले अल्पसंख्यक छात्रों के लिए 50% फीस वापस लौटाया जाएगा।
कर्नाटक सरकार के बजट में उर्दू माध्यम के स्कूलों की सहायता के लिए 100 करोड़ रुपए दिए गए हैं। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) के माध्यम से सीनियर सेकेंड्री परीक्षा के लिए छात्रों को तैयार करने के लिए मदरसों में औपचारिक शिक्षा और सुविधाओं का प्रावधान करने की घोषणा की है।
वहीं, 169 माइनॉरिटी हॉस्टल में रहने वाले 25,000 विद्यार्थियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने की भी बात कही गई है। बजट में अल्पसंख्यक छात्रों को स्टार्टअप के लिए प्रोत्साहित करने का भी प्रावधान है।सीएम सिद्धारमैया ने घोषणा की है कि कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम के माध्यम से स्टार्टअप शुरू करने के लिए अल्पसंख्यक युवाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।
कॉन्ग्रेस सरकार ने ‘मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक कॉलोनी विकास कार्यक्रम’ के लिए 1,000 करोड़ रुपए का आवंटित किए हैं। वहीं, राज्य के हर तालुक में अल्पसंख्यकों के लिए बहुउद्देशीय हॉल बनाया जाएगा। हर हॉल की अनुमानित लागत लगभग 50 लाख रुपए होगी। इस तरह भाजपा ने राज्य सरकार के बजट की तीखी आलोचना करते हुए इसे ‘मुस्लिम लीग बजट’ कहा है।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली का ब्रह्मपुरी इलाका इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है। यहाँ की अल-मतीन मस्जिद के विस्तार को लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। मस्जिद के सामने हर साल होलिका दहन होता है, लेकिन इस बार होली का त्योहार जुमे की नमाज और रमजान के महीने के साथ टकरा रहा है। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच डर और आशंका का माहौल है।
हिंदू समुदाय का एक बड़ा हिस्सा इसे 2020 के दिल्ली दंगों से जोड़कर देख रहा है, जब इसी मस्जिद से गोलियाँ चलने और हजारों की भीड़ जुटने की बात सामने आई थी। क्या ब्रह्मपुरी सचमुच एक इस्लामी एपिसेंटर में तब्दील हो रही है, या यह सिर्फ़ एक बनाया गया विवाद है? इसकी जड़ में जाने के लिए हमने स्थानीय लोगों से बात की और बैकग्राउंड को खंगाला।
मस्जिद विस्तार और ‘मकान बिकाऊ’ के नोटिस
अल-मतीन मस्जिद पहले से ही गली नंबर-13 में एक चार मंजिला मकान में चल रही थी। लेकिन हाल ही में इसके विस्तार की योजना बनी। अब इस मस्जिद को बगल के प्लॉट तक फैलाया जा रहा है। एक बेहद बारीक योजना बनाकर पहले तो मस्जिद के बगल की जमीन हिंदू परिवार से खरीदी गई और फिर उस एक मंजिला घर को तोड़कर वहाँ नई बिल्डिंग बनाई जा रही है, जो मूल-रूप से गली नंबर 13 की मस्जिद को विस्तार देने के लिए है।
इस पूरे वाकये को बहुत प्लानिंग के साथ अंजाम दिया गया। स्थानीय लोगों को डर है कि जैसे 25 फरवरी 2020 को हिंदुओं पर हमला बोला गया, इस अल-मतीन मस्जिद से निकली इस्लामी भीड़ द्वारा, अगर मस्जिद 2 गुनी बड़ी हो गई, तो सोचिए कि और कितने हमलावर एक साथ उनके ही दरवाजे पर जमा हो जाएगी। यही वजह है कि ब्रह्मपुरी की गली नंबर-12 के करीब 60 मकान हिंदू परिवारों में से 25-30 मकानों पर ‘मकान बिकाऊ है’ के नोटिस लग चुके हैं।
इस अल-मतीन मस्जिद के विस्तार का विरोध करने वाले शिकायतकर्ता पंडित शंकर लाल गौतम कहते हैं, “यह निर्माण अवैध है। MCD को गुमराह करके नक्शा पास कराया गया। मस्जिद के ठीक बगल में शिवालय है। अगर यहाँ मस्जिद का गेट खुला तो दोनों समुदाय आमने-सामने होंगे, और तनाव बढ़ेगा। हम 2020 जैसा कुछ नहीं चाहते।” शंकर लाल का आरोप है कि यह सिर्फ मस्जिद का विस्तार नहीं, बल्कि इलाके की डेमोग्राफी बदलने की साजिश है। उनके मुताबिक, दंगों के बाद से ज्यादातर मकान हिंदुओं ने बेचे और खरीदने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग हैं।
2020 का हिंदू विरोधी दंगा: एक जख्म जो अभी भरा नहीं
2020 के फरवरी महीने में दिल्ली के उत्तर-पूर्वी हिस्से में हुए दंगे आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। सीलमपुर, जाफराबाद और ब्रह्मपुरी जैसे इलाकों में हिंसा ने 53 लोगों की जान ले ली थी और सैकड़ों घायल हुए थे। इस दौरान अल-मतीन मस्जिद का नाम भी चर्चा में आया था। स्थानीय लोगों का दावा है कि मस्जिद से गोलियाँ चली थीं और अचानक हजारों की भीड़ वहाँ जमा हो गई थी। ऑपइंडिया के पास मौजूद वीडियो और तस्वीरें उस वक्त की भयावह स्थिति को बयान करती हैं – जलते हुए घर, सड़कों पर बिखरा मलबा और डरे हुए लोग। वीडियो फुटेज, जो अभी हार्ड ड्राइव में सुरक्षित हैं और पुलिस-कोर्ट के रिकॉर्ड में भी मौजूद हैं, इस बात की तस्दीक करते हैं कि हिंसा के दौरान यह इलाका एक युद्धक्षेत्र में बदल गया था।
आपको 2020 के हिंदू विरोधी दंगे याद हैं? पूर्वी दिल्ली में हिंदुओं को निशाना बनाकर हमले किए गए। हमलावर एक ही स्टाइल में मस्जिदों से निकल कर हिंदुओं की बस्तियों की ओर बढ़े। आज ब्रह्मपुरी की जिस अल-मतीन मस्जिद का विस्तार हो रहा है, वहां से हजारों मुस्लिमों की भीड़ ने धावा बोला था। pic.twitter.com/aF5Ltz2KPV
उस वक्त के बाद से ब्रह्मपुरी में डेमोग्राफी तेजी से बदली है। हिंदू समुदाय के कई परिवारों ने अपने मकान बेच दिए और इलाका छोड़ दिया। स्थानीय निवासी दिनेश शर्मा (बदला हुआ नाम) बताते हैं, “2020 के बाद यहाँ का माहौल बदल गया। दंगों में हमने अपने लोगों को खोया, घर जले और डर ऐसा बैठा कि कई लोग यहाँ से चले गए। अब मस्जिद का विस्तार देखकर लगता है कि फिर वही सब होगा।” रमेश की बात में एक गहरा डर झलकता है, जो सिर्फ उनके नहीं, बल्कि गली नंबर-12 के कई हिंदू परिवारों का है।
मुस्लिम पक्ष का आरोप – “विवाद जबरदस्ती पैदा किया जा रहा”
मस्जिद के सामने खड़े मिले अल-मतीन के नायब ईमाम सद्दाम हुसैन से हमारी बातचीत हुई। उनका कहना है, “हमारी आबादी बढ़ रही है, मौजूदा मस्जिद छोटी पड़ गई थी। दान में मिले प्लॉट पर विस्तार शुरू किया, इसमें गलत क्या है? कुछ लोग आपस में लड़वाना चाहते हैं, इसलिए इसे मुद्दा बना रहे।” सद्दाम हुसैन का दावा है कि मकान बेचना लोगों की अपनी मर्जी है। “यहाँ अच्छी कीमत मिल रही है, इसलिए लोग बेच रहे हैं। कोई जबरदस्ती नहीं कर रहा। हम शांति चाहते हैं।”
सद्दाम हुसैन ने कहा कि गली नंबर 12 में मस्जिद का नहीं, बल्कि कम्युनिटी सेंटर के लिए जमीन ली गई है। हालाँकि स्थानीय मुस्लिमों का दावा है कि वहाँ मस्जिद ही बन रही है। मुस्लिम समुदाय के लोग यह भी कहते हैं कि वे बड़े दिल वाले हैं। हर साल मस्जिद के सामने होलिका दहन होता है, और उन्हें कोई आपत्ति नहीं। लेकिन हिंदू पक्ष इसे छिपी सच्चाई मानता है। एक महिला, जो अपना नाम नहीं बताना चाहतीं, कहती हैं, “ये लोग बाहर से शांति की बात करते हैं, लेकिन 2020 में क्या हुआ, सबको पता है। अब होली और रमजान साथ आए हैं, जुमे की नमाज होगी, और हमें डर है कि कोई बड़ा खेल न हो जाए।”
ब्रह्मपुरी की गली नंबर – 13 में स्थित मस्जिद चौक, यहीं पर होता है होलिका दहन
होली और रमजान का टकराव
इस बार होली का त्योहार 24 मार्च को है, जो जुमे की नमाज और रमजान के महीने के साथ पड़ रहा है। मस्जिद के सामने हर साल होलिका दहन होता है, लेकिन इस बार तनाव की वजह से लोग डरे हुए हैं। गली नंबर-12 के निवासी अजय कुमार कहते हैं, “पुलिस अभी शांति बनाए हुए है, लेकिन सिपाही चले गए तो क्या होगा? 2020 में भी पहले सब ठीक था, फिर अचानक हमला हुआ। हम अपने बच्चों को नहीं गँवाना चाहते।” अजय की बात में 2020 का डर साफ झलकता है, जब हिंसा ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया था।
खास बात ये है कि अल-मतीन मस्जिद एक निजी घर में चल रही थी। बात में इस जगह को मस्जिद में तब्दील कर दिया गया और सोसायटी के नाम पर ‘जकात’ यानी दान दे दिया गया। गली नंबर 13 में स्थित मस्जिद 10 से 12 साल पुरानी है, जो धीरे-धीरे खड़ी की गई। अब ये 4 मंजिला है। जबकि इस जगह पर होलिका दहन बहुत पहले से होता रहा है।
दरअसल, गली नंबर 13 में स्थित अल-मतीन मस्जिद के बगल वाली जमीन ही गली नंबर 12 की तरफ है। यहीं पर गली नंबर 12 और 13 को जोड़ने वाला एक छोटा कट भी है। जहाँ मस्जिद का गेट बन सकता था, लेकिन गली नंबर 12 में जहाँ मस्जिद का गेट खोलने की कोशिश की गई थी, उसी के सामने शिव मंदिर है। इसी बात का विरोध हिंदू कर रहे हैं। क्योंकि शिव मंदिर 1984 का बना हुआ है। ये आज का नहीं है, जबकि मस्जिद अभी पिछले दशक ही बनी है। लोग होलिका दहन के दिन भी मंदिर में पूजा करते हैं। सिर्फ होलिका ही नहीं, महाशिवरात्रि से लेकर हर सोमवार को लोग पूजा करते हैं। ये रिपोर्ट पढ़ने के बाद अपने आप चीजें साफ हो जाती हैं कि असलियत क्या है। कौन पहले से है और कौन बाद में आया।
1984 में निर्मित मंदिर, मंदिर के सामने ही मस्जिद का गेट बनाने की कोशिश (दाईं तरफ- मंदिर निर्माण की जानकारी देता शिलापट)
पुलिस और MCD की कार्रवाई
विवाद बढ़ता देख दिल्ली पुलिस ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है। मौके पर सिपाही तैनात हैं और MCD ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी। अल-मतीन सोसाइटी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिसमें आरोप है कि गलत जानकारी देकर नक्शा पास कराया गया। पुलिस का कहना है कि दोनों समुदाय शांति की बात कर रहे हैं, और अभी कोई बड़ी घटना नहीं हुई। लेकिन स्थानीय बीजेपी निगम पार्षद का कहना है, “यह माहौल बिगाड़ने की कोशिश है। हम हिंदुओं को पलायन नहीं करने देंगे।”
डेमोग्राफी बदलाव का आरोप
हिंदू समुदाय मस्जिद निर्माण को एक ‘मोडस ऑपरेंडी’ मानता है। उनका कहना है कि पहले मस्जिद बनती है, फिर माहौल बदलता है, और हिंदू पलायन को मजबूर हो जाते हैं। 2020 के बाद से ब्रह्मपुरी में यह ट्रेंड देखने को मिला है। एक बुजुर्ग निवासी कहते हैं, “पहले यहाँ हिंदू-मुस्लिम साथ रहते थे। दंगों के बाद सब बदल गया। अब मस्जिद का विस्तार देखकर लगता है कि हमें यहाँ से भगाने की तैयारी है।”
बता दें कि ब्रह्मपुरी की विवादित गली नंबर 12-13 मौजपुर-वार्ड नंबर 228 में आती है। यहाँ साल 2020 में 25 फरवरी 2025 को हिंदुओं पर हमले के बाद फायरिंग में 3 हिंदू युवक घायल हो गए थे। इसी गली नंबर 13 में अल-मतीन मस्जिद है, जिसका विस्तार किया जा रहा है।
साल 2020 के दंगों के बाद से हिंदुओं पर जबरदस्त दबाव है। वो अपने घर बेच रहे हैं। मुस्लिमों का कहना है कि वो अच्छे पैसे दे रहे हैं, इसलिए लोग घर बेच रहे हैं, जबकि हकीकत ये है कि लोगों का जीना मुहाल हो चुका है। वो डर के साए में जी रहे हैं, इसलिए पलायन को मजबूर हो रहे हैं। उनके दिलों में 2020 की खौफनाक यादें अब भी ताजा हैं।
ऐसे में ब्रह्मपुरी का यह विवाद सिर्फ मस्जिद निर्माण तक सीमित नहीं है। यह 2020 के दंगों का जख्म, डेमोग्राफी बदलाव का डर और धार्मिक त्योहारों के टकराव का नतीजा है। पुलिस और MCD की कार्रवाई से अभी शांति है, लेकिन लोगों के मन में आशंका बनी हुई है। हिंदू और मुस्लिम दोनों दिल्ली पुलिस की तारीफ कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह शांति टिकाऊ होगी? या फिर होली और रमजान का यह संयोग एक बार फिर ब्रह्मपुरी को 2020 की आग में झोंक देगा? जवाब समय के पास है, लेकिन फिलहाल यहाँ के लोग डर और उम्मीद के बीच जी रहे हैं।
प्रयागराज में आयोजित हुए 2025 के महाकुंभ ने देश के युवा को धर्म की तरफ मोड़ा है। वह सोशल मीडिया पर गाने-फिल्म की जगह अब वेद-पुराण ढूंढ रहे हैं। सनातन की महिमा के बारे में इन्टरनेट से जानकारी जुटा रहे हैं। महाकुंभ में आने वाले अधिकांश लोग युवा ही थे। महाकुंभ ने तकनीक और धर्म का अद्भुत मिश्रण दिखाया है।
गूगल ट्रेंड्स के अनुसार, दिसम्बर 2024 के बाद से ‘महाकुंभ’ तक लगातार दुनिया में बहुत ज्यादा सर्च किया वाला शब्द रहा है। जनवरी, 2025 आते-आते इन सर्च की संख्या करोड़ों में पहुँच गई। सर्च सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि नेपाल, पाकिस्तान और यहाँ तक कि अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया में भी किए गए।
अमर उजाला की एक रिपोर्ट बताती है कि महाकुंभ के दौरान देश में वेद और पुराणों के विषय में किए जाने वाले सर्च में 300 गुना की बढ़ोतरी हुई। यहाँ तक कि महाकुंभ की आधिकारिक वेबसाइट भी इस दौरान विजिटर्स से गुलजार रही है। महाकुंभ की वेबसाइट पर 33 लाख से ज्यादा लोगों ने 4 जनवरी, 2025 तक ही आ गए थे। इसके बाद और भी बढ़ोतरी हुई।
आँकड़े यह भी बताते हैं कि महाकुंभ में आने वाले 66 करोड़ श्रद्धालुओं में से लगभग 50% लोग युवा ही थे। यानी यह लोग 25-50 वर्ष के आयुवर्ग में थे। इन युवाओं में वह लोग भी शामिल थे जो अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं। यानी महाकुंभ 2025 में डॉक्टर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर समेत तमाम प्रोफेशन के लोग शामिल हुए।
इससे वामपंथियों का वह नैरेटिव भी ध्वस्त हुआ, जिसमें धर्म को कम-पढ़े लोगों का विषय बताया जाता है। सोशल मीडिया भी लगातार महाकुंभ पोस्ट से गुलजार रहा। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इन्टरनेट पर महाकुंभ से जुड़े हुए 33 करोड़ से अधिक फोटो-वीडियो अपलोड किए गए।
महाकुंभ में युवाओं के बड़ी संख्या में आने के पीछे एक कारण इसका इन्टरनेट पर प्रसार और इसके विषय में जानकारियाँ सुलभ होना भी रहा है। युवाओं ने महाकुंभ के लिए इन्टरनेट का इस्तेमाल महाकुंभ में हर चरण में किया। महाकुंभ पहुँचने के लिए बस-ट्रेन बुक करने से लेकर रास्ते ढूँढने तक उनकी मदद इन्टरनेट ने की।
धर्म के साथ तकनीक का यह मिश्रण पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में देश में दिखा है। महाकुंभ के दौरान तिलक, त्रिपुंड और पारंपरिक कपड़े जैसे प्रतीक भी खूब पॉपुलर रहे। इन सबमें बड़ा रोल योगी सरकार के इंतजाम का रहा है।
योगी सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि महाकुंभ 2025 को वह ‘डिजिटल महाकुंभ‘ के तौर पर आयोजित करेंगे। योगी सरकार ने महाकुंभ 2025 के लिए अलग से सोशल मीडिया हैंडल बनाए थे। वेबसाइट से सारी जानकारी मिल रही थी। इसके अलावा कई बड़े इन्फ़्लुएन्सर ने भी इस काम में मदद की।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में कश्यप समाज की शादी में पटाखे फोड़ने और आतिशबाजी करने पर मुस्लिमों के एक समूह ने बारातियों पर हमला कर दिया है। इस हमले में कई लोग घायल हो गए हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना को लेकर गाँव में भारी तनाव है। तनाव को देखते हुए गाँव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
मामला मुजफ्फरनगर जिले के तिवाती थाना क्षेत्र के सैदपुर गाँव का है। यहाँ उसी चरथावल थाना क्षेत्र के नंगला राई से कश्यप समाज के विकास की बारात आई थी। बाराती खुशी में पटाखे जला रहे थे और आतिशबाजी कर रहे थे। इसी दौरान एक चिंगारी सरताज नाम के एक मुस्लिम व्यक्ति के लकड़ी के ढेर में गिर गई और वहाँ आग लग गई। हालाँकि, मौके पर मौजूद लोगों ने आग को तुरंत बुझा दिया।
इस बात को लेकर सरताज के लड़कों ने बारातियों के साथ झगड़ा करना शुरू कर दिया। पहले गाली-गलौज हुई और फिर बात हाथापाई तक पहुँच गई। देखते ही देखते मुस्लिम समाज के 8-10 लड़के वहाँ आ गए और बारातियों पर हमला कर दिया। उन्होंने लाठी-डंडों से बारातियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। एक बाराती अमित को हमलावरों में घर में खींच लिया और उसे बुरी तरह पीटा।
इस हमले में कई लोग घायल हो गए हैं। इधर, सूचना मिलते ही तीन थानों की पुलिस बल आ पहुँची। पुलिस ने माहौल को किसी तरह सँभाला और घायलों को उपचार के लिए तुरंत अस्पताल भेजा। इस घटना में लगभग 12 बाराती घायल बताए जा रहे हैं। पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर अपनी मौजूदगी में शादी की रस्म पूरी कराई और शादी संपन्न कराकर बारातियों को वापस भेजा।
हालाँकि, गाँव में तनाव की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है। गाँव वालों का कहना है कि हमला करने वालों में 30-40 लोग शामिल थे। पुलिस ने इस घटना को लेकर मुकदमा दर्ज कर लिया है। FIR में सरताज सहित 14 नामजद और 50 अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया है। पुलिस ने आरोपित हमलावरों की पहचान करके उनकी तलाश शुरू कर दी। सभी आरोपित फरार हैं।
उन्हें पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही है। वहीं, एसपी देहात आदित्य बंसल ने भी घटनास्थल का दौरा किया और कहा, “हमले में कई बारातियों को चोट लगी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी को नहीं बख्शा जाएगा।” एसपी आदित्य बंसल ने गाँव के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और लोगों को आश्वस्त किया है कि हमलावरों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।