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‘बुलडोजर’ से कुचल दिया माफिया-गुंडों का राज, देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना UP, मिथकों को किया ध्वस्त: CM योगी ने 8 साल में ही ‘बीमारू’ से बना दिया ‘बेजोड़’

योगी आदित्यनाथ 19 मार्च 2017 को जब राजधानी लखनऊ के कांशीराम स्मृति उपवन स्थल में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि वे उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाएँगे। यह वो दौर था जब इस देश के पॉलिटिकल पंडित कहते थे की योगी आदित्यनाथ के पास कोई प्रशासनिक अनुभव पहले से नहीं है।

इन सब अटकलों के बावजूद सीएम योगी ने 5 साल का अपना कार्यकाल पूरा किया और साल 2022 के विधानसभा चुनावों में एक बार फिर से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनवाने में मदद की। इसके बाद वे एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश में सरकार बनी और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने।

आज योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में सफलतापूर्वक अपने मुख्यमंत्रित्व काल के 8 वर्ष पूरे कर लिए, जो उत्तर प्रदेश जैसे विशाल प्रदेश के लिए एक रिकॉर्ड है। 25 करोड़ जनता के साथ देश को सर्वाधिक प्रधानमंत्री देने वाले उत्तर प्रदेश में सन 1952 से लेकर अब तक सबसे लंबे कार्यकाल तक मुख्यमंत्री रहने वाले योगी आदित्यनाथ ने रिकॉर्ड ऐसे ही नहीं बनाया है।

इसका कारण उत्तर प्रदेश की जनता के प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का समर्पण, त्याग, कठिन परिश्रम और निष्ठा है, जिसका परिणाम जनता उनके ऊपर विश्वास जताकर देती रहती है। चाहे कानून व्यवस्था हो, अर्थव्यवस्था हो, सुरक्षा हो या फिर धर्म एवं आस्था का विषय… योगी आदित्यनाथ ने हर दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ाने का काम किया।

किसी भी प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए वहाँ पर कानून व्यवस्था का सुचारू रूप से होना अत्यंत आवश्यक होता है, क्योंकि तभी व्यापारी सुकून महसूस करते हैं, अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और लोगों को रोजगार मिलता है। इसके लिए उन्होंने पहले की सरकारों के दौरान चल रहे जिलों में संगठित अपराधों पर लगाम लगाई। तमाम आलोचनाओं के बावजूद भी अपराधियों पर बुलडोजर चलता रहा।

आज उत्तर प्रदेश में किसी भी जिले में कोई बड़ा अपराधी नहीं है। ये अपराधी या तो जेल में हैं या फिर यमलोक में। उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार के अनुसार, प्रदेश में करीब 222 दुर्दांत अपराधियों का एनकाउंटर किया गया है। 8118 अपराधी घायल हुए हैं और 20,221 इनामी अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, 79,984 के पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई हुई है।

इसके अलावा, 930 अपराधियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत करवाई की गई। 142 अरब से अधिक अपराधियों की संपत्ति जब्त की गई है। ये सब इसलिए किया गया, ताकि उत्तर प्रदेश की जनता सुकून की साँस ले सके, व्यापारी सुरक्षित महसूस कर सके, अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके और बहन बेटियाँ सुरक्षित महसूस कर सकें।

आजादी से लेकर साल 2017 तक उत्तर प्रदेश पुलिस में जितनी महिलाओं की भर्ती हुई है, उसका तीन गुना भर्ती केवल योगी आदित्यनाथ ने पिछले 8 वर्षों में की है। इतना ही नहीं, साल 2017 से दिसंबर 2024 तक अदालतों में प्रभावी पैरवी करके 31 माफिया और 74 अपराधियों को आजीवन कारावास और दो अपराधियों को फाँसी की सजा दिलवाई गई है।

इससे पहले की सरकारों की स्थिति यह थी कि इन माफियाओं के खिलाफ गवाही देने वाले गवाह या तो मुकर जाते थे या वे मार दिए जाते थे। अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। आज विश्वास नहीं होता कि ये वही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं, जिन्हें सांसद रहने के दौरान सदन में कहा जाता था कि ‘संत हो मंदिर में जाकर घंटा बजाओ… राजनीति तुम्हारे बस की बात नहीं है’।

आज उत्तर प्रदेश 20 एयरपोर्ट के साथ पूरे देश भर में नंबर एक स्थान पर है। यहाँ पाँच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं। जेवर एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन चुका है। जब योगी आदित्यनाथ साल 2017 में मुख्यमंत्री बने तब ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में उत्तर प्रदेश 14वें नंबर पर था। यह योगी आदित्यनाथ के कठिन परिश्रम की बदौलत दुनिया में दूसरे नंबर पर पहुँच चुका है।

साल 2017 में जिस उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था 3.4 लाख करोड़ रुपए की थी, वह बढ़कर आज करीब 8 लाख करोड़ रुपए की हो चुकी है। अर्थव्यवस्था को लेकर योगी आदित्यनाथ की सरकार कितनी प्रतिबद्ध है, वो इससे पता चलता है कि जो प्रदेश पहले ‘वन जिला वन माफिया’ के नाम से जाना जाता था, वह ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ के नाम से जाना जाता है।

आज उत्तर प्रदेश के हर जिले का अपना एक विशेष उत्पाद है, जो उसकी पहचान बनकर उभरी है। इतना ही नहीं, ये योगी आदित्यनाथ की उस आकांक्षा को भी पूरा करने में सहयोगी है, जो उन्होंने यूपी के। लिए सोचा है। योगी आदित्यनाथ ने 2027-28 तक उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डालर की इकनॉमी बनाने का लक्ष्य रखा है। इसकी तरफ वह और उनकी सरकार लगातार प्रयासरत हैं।

साल 2017 में उत्तर प्रदेश छठी-सातवीं अर्थव्यवस्था के रूप में योगी आदित्यनाथ को विरासत के रुप में मिला था। आज वह देश भर में दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के बन चुकी है। यहाँ तक पहुँचने के लिए योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार ने कई प्रयास किए हैं। व्यापार एवं आवाजाही को बढ़ाने प्रदेश में 13 एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया गया है, जो कुल 55 जिलों को जोड़ते हैं।

आज उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों में 77 से अधिक मेडिकल कॉलेज हैं। एक समय था, जब उत्तर प्रदेश का कोई मुख्यमंत्री नोएडा केवल इसलिए नहीं जाता था क्योंकि उसकी कुर्सी ना चली जाए। योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री के रूप में नोएडा का बार-बार दौरा करके इस अंधविश्वास एवं मिथक को तोड़ा और खुद उपस्थित होकर कई परियोजनाओं का शुभारंभ किया।

ना केवल विकास, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था, बल्कि आस्था के मामले पर भी भगवाधारी संत योगी आदित्यनाथ ने खूब काम किया। विश्वास ही नहीं होता कि सिर्फ 45 दिन के महाकुंभ में आस्था की नगरी प्रयागराज में 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान किया। ये अपने आपमें एक रिकॉर्ड है। कल्पना कीजिए कि यदि महाकुंभ मेला एक देश होता तो विश्व का तीसरा सबसे बड़ा देश होता।

सृष्टि की शुरुआत से अभी तक शायद आस्था का इस तरह का जनसैलाब कभी भी किसी देश या शहर ने नहीं देखा होगा। पूरी दिव्यता एवं आध्यात्मिकता के साथ महाकुंभ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सामाजिक समरसता के दृष्टिकोण से भी ये महाकुंभ शानदार रहा, जहाँ लोग जाति और धर्म के बंधन को तोड़कर सिर्फ आस्था के नाम पर एकत्रित हुए और एक-दूसरे की मदद भी की।

यह केवल योगी आदित्यनाथ जैसे भगवाधारी संत के कार्यकाल में ही संभव था, जिन्होंने पूरे प्रदेश एवं देश को अपना परिवार माना है। लोगों ने पर उन पर विश्वास जताया। श्रद्धालुओं के चेहरे पर आस्था की चमक और होठों पर माँ गंगा के जयकारे थे। इस महाकुंभ में ना केवल उत्तर प्रदेश और देश, बल्कि विदेश के भी लाखों लोगों ने अपने-अपने हिस्से का पुण्य कमाया।

प्रयागराज में 45 दिन तक चले धार्मिक संगम में सभी को एक दूसरी सभ्यता और संस्कृति को जानने एवं समझने का मौका मिला। धर्म और आस्था का मजाक उड़ाने वाले लोगों को योगी आदित्यनाथ ने तब जवाब दिया, जब पता चला कि महाकुंभ के आयोजन में शासन द्वारा ₹7,500 करोड़ खर्च करने के बदले में लगभग ₹3 लाख करोड़ तक की आर्थिक गतिविधि उत्पन्न होने का अनुमान है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति, समर्पण, त्याग एवं कुछ कर गुजरने की चेष्टा हो तो इस धरती पर कुछ भी असंभव नहीं है। ऐसा लगता है कि रामराज्य की परिकल्पना में इससे बेहतर शासन शैली नहीं हो सकती, जहाँ मुख्यमंत्री लगातार यह कहते हों कि प्रदेश की 25 करोड़ जनता ही ‘मेरा परिवार’ है।

विश्वास नहीं होता कि यह वही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं, जिसके बारे में मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही मीडिया के एक वर्ग के द्वारा लगातार भ्रामक खबरें चलाई जाती हैं। ऐसी खबरें चलाई जाती रहती हैं कि योगी अब गए कि तब गए। इन्हीं अटकलों के बीच योगी आदित्यनाथ ने देश के सबसे बड़े सूबे में सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड बना दिया।

नागपुर के दंगाइयों का मजहब तो आपको पता होगा ही, हम 51 का नाम लेकर भी आए हैं: पीड़ित हिंदू बोले- कब तक निभाएँगे ‘भाईचारा’, आज दुकान तोड़ी है… कल घर में घुसेंगे

नागपुर के दंगे में हिन्दू दुकानों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया। उनके पास ही मुस्लिमों की दुकानें भी थीं, उन्हें छोड़ दिया गया। मुस्लिम भीड़ के दंगे के दौरान प्रभावित हिन्दुओं ने पूछा है कि आखिर वह इस तरह से कैसे एकतरफा भाईचारे को निभा पाएँगे। इस बीच पुलिस लगातार नागपुर के दंगाइयों पर कार्रवाई कर रही है।

मीडिया से बात करते हुए एक पीड़ित हिन्दू ने कहा, “भाईचारे से रह रहे थे तो फिर इनको दुकान तोड़ने-गाड़ियाँ जलाने की क्या जरूरत थी? यहीं पर बुरहानपुर (मुस्लिम इलाका) है जहाँ एक भी दुकान नहीं तोड़ी गई। हम हिन्दू लोग हैं, हमारे ऊपर ही सब चीजें हो रही हैं। कब तक हम भाईचारे से रहेंगे।”

उन्होंने आगे पूछा, “क्या हमने एक भी दुकान उनकी तोड़ी, ना हमने कुछ किया। हम तो पैसे कमाने के लिए हैं… ये बात पैसे की नहीं है, बात की इज्जत नहीं है। आज इन्होंने हमारी दुकान पर हमला किया है। कल को यह घर में घुसेंगे। तो फिर क्या होगा।” पीड़ित को आप इस वीडियो में 1 मिनट 28 सेकंड के बाद सुन सकते हैं।

पीड़ित हिन्दू ने पूछा कि अभी तो रोज बवाल के बाद लोग अपने घर वापस चले जाते हैं लेकिन ऐसे कब तक चलेगा। एक और पीड़ित ने बताया, “रात को 4-5 लोग पहले आए। उनके बाद 100 से ज्यादा लोग पेट्रोल बम, तलवार और लाठी-डंडे लेकर आ गए।”

पीड़ित ने बताया कि उसकी गाड़ी को निशाना बनाकर आग लगाई गई। पीड़ित को मुस्लिमों को फेंके पत्थर भी लगे, जिसमें वह घायल हो गए। एक हिन्दू महिला ने बताया कि दंगाई भीड़ ने घरों में घुसने का प्रयास भी किया। दंगे के बाद पुलिस अब FIR दर्ज कर रही है।

ऐसी ही एक FIR में मुस्लिम दंगाइयों को नामजद किया गया है। इसमें यासिर, फयाज, अल्ताफ, इकबाल, अक्सार और वसीम समेत 51 लोग आरोपित बनाए गए हैं। पुलिस ने 500-600 अज्ञात आरोपितों के खिलाफ भी FIR लिखी है। इस बीच यह भी सामने आया है कि दंगे के दौरान भीड़ ने एक महिला पुलिस अधिकारी को घेर लिया था।

उसकी वर्दी फाड़ी गई थी और अश्लील इशारे भी किए गए थे। इस मामले में FIR भी दर्ज की गई है। गौरतलब है कि सोमवार (17 मार्च, 2025) इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने कुरान जलाने की अफवाह के नाम पर नागपुर में काफी उत्पात मचाया था। उन्होंने पुलिस पर पथराव किया था और पार्किंग में खड़ी गाड़ियाँ भी जला दी थीं।

नागपुर में महिला पुलिस अधिकारी के कपड़े फाड़ने का हुआ प्रयास, रिपोर्ट में बताया- छेड़छाड और अश्लील इशारे भी किए: बोले DCP- गली से अचानक निकले दंगाई, हथियार-पेट्रोल-लाठियों से थे लैस

महाराष्ट्र के नागपुर में इस्लामी भीड़ की हिंसा के बीच एक महिला पुलिस अधिकारी निशाना बनी। उसके साथ छेड़छाड़ की गई। महिला पुलिस अधिकारी के कपड़े फाड़ने का प्रयास भी भीड़ ने किया। वह किसी तरह बच कर वहाँ से निकली। वहीं इस हिंसा में घायल हुए DCP निकेतन कदम ने बताया कि भीड़ में सैकड़ों लोग शामिल थे जिनके पास हथियार थे।

महाराष्ट्र टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार (17 मार्च, 2025) को इस्लामी हिंसा की भीड़ को रोकने के लिए एक पुलिस टीम पहुँची थी। इसमें एक महिला पुलिस अधिकारी भी शामिल थीं। दंगाई भीड़ इसी बीच एक महिला अधिकारी को दबोच लिया। उन्होंने महिला अधिकारी के साथ छेड़छाड़ चालू कर दी।

भीड़ में शामिल लोगों ने उनको तरफ अश्लील इशारे किए, इसके बाद उनके कपड़े भी फाड़ने का प्रयास किया गया। भीड़ के चंगुल से किसी तरह वह बच कर निकलीं। उन्होंने अब इस विषय में यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करवाई है। यह मामला गणेश पेठ थाने में दर्ज किया गया है। छेड़छाड़ करने वाले दंगाइयों की अब तलाश चल रही है।

पुलिस इस मामले में CCTV फुटेज खंगाल रही है। इस बीच इस दंगे में घायल हुए पुलिस अधिकारी निकेतन कदम का भी बयान सामने आया है। उन्होंने बताया है कि दंगाई भीड़ में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे जिनके पास हथियार थे।

उन्होंने बताया कि एक गली से अचानक 100 लोगों की भीड़ आई थी और वह सभी हथियारबंद थे। DCP निकेतन कदम ने बताया कि उन्होंने भीड़ को रोकने का प्रयास किया तो कुछ लोग पीछे हटे लेकिन एक व्यक्ति ने उन पर हमला कर दिया। उसने कुल्हाड़ी निकेतन कदम के हाथ पर मार दी। इसमें वह घायल हो गए।

DCP कदम ने कह़ा है कि पुलिस ने हमला करने वालों की पहचान चालू कर दी है। जल्द ही उन आरोपितों की गिरफ्तारी की जाएगी। DCP कदम से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने भी बातचीत की है और उनका हाल जाना है।

गौरतलब है कि सोमवार को इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने कुरान जलाने की अफवाह के नाम पर नागपुर में काफी उत्पात मचाया था। उन्होंने पुलिस पर पथराव किया था और पार्किंग में खड़ी गाड़ियाँ भी जला दी थीं। इस मामले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने भी जानकारी दी थी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि हिंसा में 33 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें तीन डीसीपी शामिल हैं। पाँच आम नागरिक भी घायल हुए, जिनमें से तीन को अस्पताल से छुट्टी मिल गई, लेकिन एक अभी भी आईसीयू में है। उन्होंने खुलासा किया कि हिंसा वाली जगह से पत्थरों से भरी एक ट्रॉली मिली और तेज धार वाले हथियारों का इस्तेमाल हुआ। कुछ खास (हिंदुओं) घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया, जिससे साफ है कि यह सब पहले से प्लान था।

मंदिर उत्सव में सत्ताधारी CPM के झंडे, संगीत कार्यक्रम में ‘वामपंथ’ का गुणगान: केरल हाई कोर्ट ने देवस्वोम बोर्ड को लताड़ा, कहा- क्या ये कोई कॉलेज फेस्ट है?

केरल हाई कोर्ट ने 10 मार्च को कोलम के कडक्कल देवी मंदिर उत्सव के दौरान राजनीतिक प्रतीकों और संगीत के प्रदर्शन पर नाराजगी व्यक्त की है। केरल हाई कोर्ट ने मंगलवार (18 मार्च 2025) को मंदिर परिसर के अंदर ऐसी गतिविधियों की अनुमति देने के लिए त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड को फटकार लगाई। उत्सव के दौरान सत्ताधारी पार्टी CPI(M) और उसके छात्र विंग के झंडे लगाए गए थे।

इसको लेकर एडवोकेट विष्णु सुनील ने केरल हाई कोर्ट ने याचिका दाखिल की। याचिका में सुनील ने कहा कि कडक्कल देवी मंदिर उत्सव के दौरान CPI(M) और उसकी युवा शाखा डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के राजनीतिक झंडे लगाए। इसके साथ ही वामपंथी राजनीतिक समूहों से जुड़े क्रांतिकारी गीत भी बजाए गए। इसके अलावा, कई तरह श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाया गया।

याचिकाकर्ता ने आगे कहा कि मंदिर उत्सव के दौरान गायक अलोशी एडम को संगीत प्रदर्शन के बुलाया गया था, जो बेहद गैरकानूनी था। इससे भक्तों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँची है। उन्होंने तर्क दिया यह प्रदर्शन कभी भी मंदिर उत्सव का हिस्सा नहीं रहा। एडवोकेट ने कहा कि यह प्रदर्शन धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, जो संविधान के मूल ढाँचे का हिस्सा है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका में आरोप लगाया गया है कि मंदिर का प्रबंधन करने वाला त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड यह सुनिश्चित करने में विफल रहा कि मंदिर परिसर का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए न किया जाए। इसके बाद न्यायमूर्ति अनिल के नरेन्द्रन और न्यायमूर्ति मुरली कृष्णा की खंडपीठ ने मंदिर परिसर के अंदर राजनीतिक प्रदर्शन के आयोजन की आलोचना की।

संगीत समारोह को लेकर कोर्ट ने मंदिर बोर्ड से माँगा जवाब

कोलम के कडक्कल देवी मंदिर का प्रबंधन करने वाले बोर्ड को फटकार लगाते हुए केरल हाई कोर्ट ने म्यूजिक परफॉर्मेंस के लिए उससे जवाब माँगा है। अदालत ने कहा, “आपने मंच पर किस तरह की सजावट की है? क्या यह कोई कॉलेज उत्सव है? आपने ऐसा करने के लिए भक्तों से पैसे लिए हैं! यह मंदिर का उत्सव है। क्या इसमें फिल्मी गानों के बजाय भक्ति गीतों की प्रस्तुति नहीं होनी चाहिए?”

एडवोकेट विष्णु सुनील की याचिका को स्वीकार कर लिया और कडक्कल देवी मंदिर सलाहकार समिति एवं अन्य प्रतिवादियों से इस पर जवाब माँगा। उत्सव के वीडियो देखने के बाद अदालत ने एक अंतरिम आदेश पारित किया है। इस आदेश में कहा गया है, “वीडियो क्लिप देखने के बाद हम पाते हैं कि 10 मार्च को वार्षिक उत्सव में होने वाली गतिविधियाँ मंदिर में स्वीकार नहीं की जा सकतीं।”

म्यूजिक परफॉर्मेंस मंदिर फंड का दुरुपयोग: हाई कोर्ट

इस मामले में केरल हाई कोर्ट ने मंदिर बोर्ड को चेतावनी देते हुए कहा कि उनके द्वारा प्रबंधित किसी भी मंदिर में ऐसी घटनाएँ नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने निर्देश में आगे कहा, “त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि उसके प्रबंधन के तहत किसी भी मंदिर के उत्सव में ऐसी गतिविधि न हो।” वहीं, मंदिर बोर्ड ने कहा कि मंदिर सलाहकार समिति ने उसे सूचित किए बिना ही संगीत कार्यक्रम आयोजित किया था।

हालाँकि, कोर्ट मंदिर बोर्ड यानी त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के इस दलील से सहमत नहीं हुआ। हाई कोर्ट ने कहा, “हम बोर्ड द्वारा अपनाए गए रुख से प्रथम दृष्टया प्रभावित नहीं हैं। जैसा कि वीडियो में देखा जा सकता है कि LED स्क्रीन और फ्लैश लाइट से सुसज्जित मंच पर विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए बड़ी रकम खर्च की गई है।” कोर्ट ने कहा कि मंदिर के धन के इस तरह के दुरुपयोग को रोका जा सकता था।

न्यायालय ने कहा, “किसी भी संगठन या भक्तों के समूह को मंदिर उत्सवों के आयोजन के लिए भक्तों या जनता से धन एकत्र करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। किसी भी तरह के धन संग्रह का काम बोर्ड की अनुमति से ही होना चाहिए, जैसा कि आमतौर पर निर्माण गतिविधियों के मामले में किया जाता है। इसके साथ ही एकत्र किए गए सभी धन का सरकार द्वारा ऑडिट किया जाएगा।”

सुनवाई के दौरान त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि मुख्य सतर्कता और सुरक्षा अधिकारी (पुलिस उपनिरीक्षक) को घटना की जाँच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। साथ ही मंदिर सलाहकार समिति को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कोर्ट ने कहा कि पिछले निर्णयों में उसने मंदिर समितियों द्वारा एकत्रित मंदिर फंड की सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

रमजान के बाद अवैध मस्जिद और नमाज पढ़ने वाला हॉल ढाह दो: बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा – ‘कानून का उल्लंघन करती भीड़ का विरोध बर्दाश्त नहीं’

महाराष्ट्र की बॉम्बे हाईकोर्ट ने निर्देश के बाद भी एक अवैध मस्जिद को नहीं गिराने पर ठाणे नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि यह जरूरी है कि वे नागरिकों के मन में यह बात बैठा दें कि कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दरअसल, इस मस्जिद को बनाने के लिए नगरपालिका से अनुमति नहीं ली गई थी। कोर्ट ने 27 जनवरी को इसे गिराने का आदेश दिया, लेकिन इसकी पूरी तरह तामील नहीं की गई।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एएस गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खता की पीठ ने की। पीठ ने मस्जिद को गिराने में देरी के लिए निगम के बहाने को खारिज कर दिया और कहा कि कानून को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में किसी भी व्यक्ति या संगठन को यह कहने की भी अनुमति नहीं दी जा सकती कि वह देश के कानून का पालन नहीं करेगा और इसका विरोध करेगा।

अदालत पीठ ने साफ शब्दों में कहा, “ऐसी परिस्थितियों में कानून लागू करने वालों का कर्तव्य है कि वे ऐसे व्यक्ति/संगठन को देश के कानून का पालन करने के लिए बाध्य करें। कानून लागू करने वालों के लिए यह भी आवश्यक है कि वे नागरिकों के मन में यह बात बैठा दें कि सरकार द्वारा कानून का उल्लंघन या कानून को लागू करने का विरोध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

दरअसल, कासरवडावली के बोरिवडे गाँव में न्यू श्री स्वामी समर्थ बोरिवडे हाउसिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की 18,000 वर्ग मीटर से अधिक की जमीन है। उस जमीन पर अवैध रूप से एक मस्जिद बना दी गई। इसके बाद कंपनी ने ठाणे नगर निगम से इस अवैध ढाँचे को ध्वस्त करने के लिए कहा। हालाँकि, नगर निगम ने इसमें कार्रवाई नहीं तो कंपनी हाई कोर्ट पहुँच गई।

कंपनी ने कोर्ट से नगर निगम को ढाँचा हटाने के लिए निर्देश देने की माँग की। याचिका के अनुसार, गाजी सलाउद्दीन रहमतुल्ला हूले उर्फ ​​परदेशी बाबा ट्रस्ट ने साल 2013 से उसकी 18,122 वर्ग मीटर भूमि पर अतिक्रमण कर लिया है। इस पर अवैध ढाँचे का निर्माण कर दिया गया है, जिसमें एक मस्जिद और नमाज पढ़ने के लिए एक बड़ा हॉल शामिल है।

ठाणे नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि 1 जनवरी 2025 को साइट का निरीक्षण किया गया था। वहाँ 3,600 वर्ग फुट पर एक मंजिल का ढाँचा बना है। उसमें नमाज के लिए एक हॉल भी है। नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि 19 फरवरी को निगम के 10 अधिकारी 65 श्रमिकों तथा कुछ पुलिसकर्मियों के साथ ढाँचा गिराने पहुँचे, लेकिन वहाँ जमा हुई भारी भीड़ के विरोध के कारण यह काम पूरा नहीं हो सका।

हालाँकि, कोर्ट ने इसे बहाना बताते हुए नगर निगम के दावे को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब इतनी बड़ी संरचना का निर्माण किया जा रहा था तो इसे नगर निगम के अधिकारियों ने रोकने के लिए क्या किया, इसको लेकर याचिकाकर्ताओं ने बार-बार पत्राचार किया था। कोर्ट ने कहा कि नगर निगम कानून को सख्ती से लागू करने में असमर्थ रहा है।

कोर्ट ने कहा कि इसकी तस्वीरें देखने से पता चलता है कि ढाँचे का अधिकांश भाग गिरा दिया गया है। वहीं, रमजान के महीने के खत्म होते ही तुरंत गिराने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि ढाँचे गिराने के बाद इसे दोबारा बनाने की कोशिश होनी चाहिए। न्यायालय ने कहा है कि उसके आदेश के पूरी तरह लागू करने के लिए नगर निगम के अधिकारी जवाबदेह हैं।

जिस गड्ढे में लगना था आक्रांता सालार मसूद के ‘नेजा मेले’ का झंडा, वहाँ UP पुलिस ने भर दी सीमेंट: ASP श्रीश चंद्र बोले- गलत परंपरा के साथ आगे बढ़ना ठीक नहीं

संभल के नेजा मेला को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इस्लामी आक्रांता सालार मसूद की याद में कोई मेले का आयोजन नहीं होगा। मेला आयोजन स्थल पर भारी पुलिसबल तैनात किया गया है। उसकी मजार के आसपास ड्रोन से सर्वे हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार (18 मार्च, 2025) को पुलिस ने उस गड्ढे में सीमेंट भरवा दी, जहाँ इस मेले के लिए झंडा लगाया जाना था। यह झंडा सालार मसूद की याद में लगता है और यह मेले का केंद्र बिंदु होता है। इसे ही नेजा कहते हैं। यहीं से इसका नाम नेजा मेला पड़ा है।

संभल में इस जगह पर पुलिसबल तैनात कर दिया गया है। मेला कमिटी के अध्यक्ष के घर के बाहर भी जवान तैनात हैं। पूरे इलाके में पुलिस ने गश्त करना चालू कर दिया है और ड्रोन से भी निगरानी की जा रही है। संभल के ASP श्रीश चन्द्र दीक्षित ने स्पष्ट कर दिया है कि नेजा मेला की अनुमति इस बार नहीं दी जाएगी।

उन्होंने कहा है कि नेजा मेला एक गलत परंपरा थी और इनके साथ आगे बढना उचित नहीं है। ASP श्रीश चन्द्र से बताया है कि अनुमति ना दिए जाने के विषय में आयोजकों को सूचित कर दिया गया है। मसूद की मजार पर भी पुलिस तैनात है।

ASP ने कहा है कि जो भी व्यक्ति नेजा मेला को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाह फैलेगा उस पर भी कार्रवाई होगी। संभल के हिन्दू भी लगातार इस मेले के विरोध में हैं। हिन्दुओं ने कहा है कि किसी आक्रांता के नाम पर मेले का आयोजन ठीक नहीं है।

वहीं मुस्लिम अब कोर्ट जाने की बात भी कर रहे हैं। इससे पहले ASP श्रीश चंद्र का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, इसमें वह आयोजकों से सालार मसूद के विषय में बात करते हुए दिखाई पड़े थे। ASP दीक्षित का एक वीडियो भी वायरल हुआ था।

इसमें ASP दीक्षित कहते हैं, “इतिहास गवाह है कि वह महमूद गजनवी का सेनापति था, उसने सोमनाथ को लूटा था, पूरा देश यह जानता था। किसी लुटेरे की याद में यहाँ कोई मेले का आयोजन नहीं होगा। अगर किसी ने यह करने का प्रयास किया तो कठोर कार्रवाई होगी निश्चिंत रहिएगा।”

ASP आगे कहते हैं, “किसी भी लुटेरे के प्रति आप कहेंगे, कि यह बहुत अच्छा है तो यह बिलकुल नहीं माना जाएगा। अगर आप लोग अभी तक कर रहे थे तो यह कुरीति थी और आप अज्ञानता में यह कर रहे थे। अगर जानबूझ कर रहे थे तो आप देशद्रोही थे।”

मुस्लिम इस बीच दावा करते रहे कि यह मेला लगातार चलता आया है। इसके बाद ASP ने स्पष्ट कर दिया कि सारे ऐतिहासिक तथ्य सालार मसूद की क्रूरता साबित करते हैं। उन्होंने मुस्लिमों से पूछा कि सोमनाथ को लूटा था या नहीं और गजनवी का सेनापति था या नहीं।

ASP ने कहा, “उसने सोमनाथ को लूटा था और इस देश के प्रति अपराध किया था। इस देश के प्रति अपराध करने वाले को कहीं बख्शा नहीं जाएगा… लुटेरे की याद में कोई नेजा (झंडा-निशान) नहीं गड़ेगा। अगर ये झंडा गड़ गया तो आप देशद्रोही हैं।”

गजराज पर सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के आदेश पर लगाई रोक, कहा- मंदिर में हाथियों का उपयोग हमारी संस्कृति: जानिए क्या है मामला

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के एक फैसले पर रोक लगाई है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केरल के मंदिरों के भीतर हाथी जुलूस और उनके धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग में रोक को लेकर था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाथियों का मंदिरों में उपयोग हमारी संस्कृति का हिस्सा है और हाई कोर्ट का आदेश इसे रोकने की क्षमता रखता है।

हाथी संस्कृति का हिस्सा: सुप्रीम कोर्ट

सोमवार (17 मार्च, 2025) को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने यह रोक लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश गज सेवा समिति नाम के एक NGO की याचिका पर दिया है। केरल हाई कोर्ट ने मंदिरों में हाथियों के उपयोग को लेकर यह आदेश जनवरी, 2025 में दिया था।

यह याचिका लगाने वाले गज सेवा समिति ने आरोप लगाया है कि हाथियों पर रोक लगाने की माँग करने वाले कथित एक्टिविस्ट हिन्दुओं की 2 हजार साल से अधिक पुरानी परमपराएं बंद करवाना चाहते हैं। गज सेवा समिति ने आरोप लगाया कि यह एक्टिविस्ट विदेशी फंड के सहारे काम करते हैं और यह हिन्दुओं की परंपराओं को रोक रहे हैं।

गज सेवा समिति ने कहा कि हाथियों को केरल के भीतर पवित्र माना जाता है और उन्हें शक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। गज सेवा समिति ने आरोप लगाया कि कथित पशु अधिकार वाले पूरी तरह से मंदिरों में उनका इस्तेमाल रोकना चाहते हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी कर दिए हैं। गौरतलब है कि जनवरी, 2025 में दिए गए आदेश में केरल हाई कोर्ट ने मंदिर के उत्सवों में हाथियों के उपयोग को लेकर कई बातें कहीं थीं। हाई कोर्ट ने कहा था कि 31 मई, 2022 से पहले रजिस्टर नहीं हुए मंदिर और देवासम हाथियों का जुलूस नहीं करवा सकेंगे।

हाई कोर्ट ने लगाई थी बंदिशें

केरल हाई कोर्ट ने इसे पहले नवम्बर, 2024 में ‘पशु अधिकार’ कार्यकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाथियों के मंदिर में इस्तेमाल पर कई बंदिशें लगा दी थीं। हाई कोर्ट ने कहा था कि मंदिरों में इस्तेमाल किए जाने वाली हाथी किसी ‘नाजी कैम्प’ जैसी जिन्दगी गुजारते हैं।

केरल हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि किसी भी उत्सव में हाथियों को 30 किलोमीटर से अधिक नहीं चलवाया जाएगा। इसके अलावा उन्हें एक दिन में 125 किलोमीटर से अधिक दूर नहीं ले जाया जाएगा। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि उन्हें 6 घंटे से अधिक किसी वाहन में नहीं रखा जाएगा।

केरल हाई कोर्ट ने दिन में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच भी सार्वजनिक रोड पर हाथियों के जुलूस भी करने पर रोक लगा दी थी, उनको रात में भी इस्तेमाल करने पर बंदिशें थीं। जुलूस के दौरान भी हाथियों के बीच 3 मीटर की दूरी रखी जानी थी। हाई कोर्ट ने यहाँ तक कहा था कि कोई ऐसी धार्मिक परंपरा नहीं है, जिसमे हाथियों का उपयोग अनिवार्य हो।

इस आदेश के बाद केरल के बड़े मंदिरों ने कहा था कि अब हाथियों का उपयोग लगभग असंभव हो जाएगा। कई मंदिरों ने इस आदेश के बाद रोबोट वाले हाथी मँगाए थे। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने दिसम्बर, 2024 में रोक दिया था। हालाँकि, इसके बाद भी जनवरी, 2025 में हाई कोर्ट ने नया ऐसा ही आदेश दिया। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अब रोक लगाई है।

ठाणे की अवैध मस्जिद गिराने में देरी से उखड़ा हाई कोर्ट, श्री स्वामी समर्थ हाउसिंग की जमीन पर खड़ा कर रखा है ढाँचा: पुणे इमामबाड़ा का वक्फ दर्जा रद्द

बॉम्बे हाई कोर्ट ने ठाणे नगर निगम को जमकर लताड़ लगाई है। एक अवैध मस्जिद को तोड़ने में देरी पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई। बॉम्बे हाई कोर्ट में जस्टिस एएस गडकरी और कमल खाता की बेंच ने कहा कि कानून का पालन करवाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहले भी इस मामले में साफ निर्देश दिए थे, फिर भी कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने साफ कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। कुछ मुस्लिम समूह लगातार इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट ने दो टूक कहा कि विरोध के नाम पर कानून तोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

इस केस में न्यू श्री स्वामी समर्थ बोरिवडे हाउसिंग कंपनी ने कोर्ट से गुहार लगाई थी। कंपनी के पास कासरवडवली के बोरिवडे गाँव में 18,000 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन है। कंपनी ने ठाणे नगर निगम (टीएमसी) से कहा कि उनकी जमीन पर बनी एक अवैध इमारत को तोड़ा जाए। ठाणे नगर निगम ने 1 जनवरी 2025 को जाँच की, तो पता चला कि ये 3,600 वर्ग फुट की ग्राउंड-प्लस-वन मस्जिद है, जिसमें नमाज हॉल भी है। इसका संचालन परदेसी बाबा ट्रस्ट करता है।

मस्जिद के पक्ष वालों का कहना था कि ये तब बनी थी, जब इलाका ग्राम पंचायत के अधीन था, लेकिन ठाणे नगर निगम के रिकॉर्ड में इसके लिए कोई ऑर्डर नहीं मिला। इस मामले में नोटिस और सुनवाई के बाद 27 जनवरी को थाणे नगर निगम ने इसे अवैध ठहराया और तोड़ने का ऑर्डर दिया। हालाँकि दूसरा पक्ष कोर्ट पहुँच गया और अब हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ठाणे नगर निगम को जल्द से जल्द ये मस्जिद ढहाना चाहिए।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “लोकतंत्र में कोई व्यक्ति, समूह या संगठन यह नहीं कह सकता कि वह कानून नहीं मानेगा। अगर कोई ऐसा करता है, तो प्रशासन को सख्ती से उसे कानून का पालन करवाना चाहिए। यह भी जरूरी है कि लोगों के मन में यह बात बैठे कि कानून तोड़ने या उसका विरोध करने की इजाजत नहीं मिलेगी।”

पुणे इमामबाड़ा का वक्फ दर्जा रद्द, बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक और बड़ा फैसला सुनाते हुए पुणे के हाजी मोहम्मद जवाद इस्पाहानी इमामबाड़ा ट्रस्ट का वक्फ दर्जा रद्द कर दिया। महाराष्ट्र स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल ने 2023 में इसे वक्फ संगठन माना था, लेकिन अब हाई कोर्ट ने उस फैसले को पलट दिया। जस्टिस संदीप वी. मार्ने ने कहा कि वक्फ बोर्ड ने 2016 में गलत तरीके से इसे वक्फ एक्ट 1995 की धारा 43 के तहत दर्ज किया था। कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट 1950 के तहत रजिस्ट्रेशन से कोई ट्रस्ट अपने आप वक्फ नहीं बन जाता।

पुणे का ये इमामबाड़ा 1953 से मुस्लिम पब्लिक ट्रस्ट के तौर पर रजिस्टर्ड था। ट्रस्ट में गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद वक्फ बोर्ड से इसे वक्फ बनाने की माँग उठी। 2016 में वक्फ बोर्ड ने इसे मंजूरी दी, लेकिन ट्रस्ट के ट्रस्टी इसके खिलाफ वक्फ ट्रिब्यूनल गए। ट्रिब्यूनल ने 2023 में उनकी याचिका खारिज कर दी, तो मामला हाई कोर्ट पहुँचा। अब कोर्ट ने ट्रिब्यूनल को नए सिरे से मामले की सुनवाई करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि ट्रिब्यूनल अपना फैसला खुद ले, बिना हाई कोर्ट के प्रभाव के।

पत्थरों से भरी ट्रॉली, तेज धार हथियार, खास (हिंदुओं के) घर-दुकान निशाना: CM फडणवीस ने नागपुर हिंसा को बताया ‘साजिश’, कहा- पहले से थी तैयारी, DCP पर कुल्हाड़ी से हुआ हमला

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में हुई हिंसा को एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। महाराष्ट्र की विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि नागुपर की हिंसा सुनियोजित थी और इसे अंजाम देने के लिए पहले से तैयारी की गई थी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि हिंसा में 33 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें तीन डीसीपी शामिल हैं। एक डीसीपी पर तो कुल्हाड़ी से हमला किया गया, जो इसकी गंभीरता दिखाता है। पाँच आम नागरिक भी घायल हुए, जिनमें से तीन को अस्पताल से छुट्टी मिल गई, लेकिन एक अभी भी आईसीयू में है। उन्होंने खुलासा किया कि हिंसा वाली जगह से पत्थरों से भरी एक ट्रॉली मिली और तेज धार वाले हथियारों का इस्तेमाल हुआ। कुछ खास (हिंदुओं) घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया, जिससे साफ है कि यह सब पहले से प्लान था।

सीएम फडणवीस ने सख्त लहजे में कहा कि पुलिस पर हमला बर्दाश्त नहीं होगा और दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा। अब तक पाँच एफआईआर दर्ज की गई हैं और 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है। नागपुर के 11 पुलिस थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। उन्होंने हिंसा की वजह औरंगजेब की कब्र को लेकर फैली अफवाह को बताया, जिसमें कहा गया कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने धार्मिक चीजें जलाईं। सीएम ने कहा, “छावा फिल्म ने औरंगजेब के खिलाफ गुस्सा भड़काया, लेकिन शांति बनाए रखना जरूरी है।” उन्होंने लोगों से अपील की कि कानून हाथ में न लें और पुलिस का साथ दें। जाँच जारी है ताकि इस साजिश का पूरा पर्दाफाश हो सके।

इस मामले में बीजेपी विधायक प्रवीण डटके ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि नागपुर में हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए यह हिंसा प्लान की गई थी। डटके ने हंसापुरी इलाके का जिक्र करते हुए बताया कि वहाँ की एक पार्किंग में हमेशा हिंदू और मुस्लिम अपनी गाड़ियाँ खड़ी करते थे, लेकिन 17 मार्च 2025 को एक भी मुस्लिम की गाड़ी नहीं थी। फिर उस पार्किंग में आग लगा दी गई। उन्होंने कहा, “जिन गाड़ियों, दुकानों और घरों को जलाया गया, वे सभी हिंदुओं के थे। मुस्लिमों का कोई नुकसान नहीं हुआ।” डटके ने इसे सुनियोजित साजिश बताया और कहा कि बाहरी लोग आए थे, जिन्होंने सीसीटीवी तोड़े ताकि सबूत मिट जाएँ। उनका दावा है कि यह हिंदुओं के खिलाफ टारगेटेड हमला था।

बता दें कि सोमवार (17 मार्च 2025) को नागपुर के कुछ इलाकों में मुस्लिमों ने हिंदुओं को निशाना बनाकर हमले किए। हिंदुओं के घरों पर पत्थरबाजी हुई। तलवार से हमले हुए, पेट्रोल बम की सहायता से गाड़ियाँ फूँकी गई और गाड़ियों में तोड़फोड़ भी की गई। इस दौरान पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाया गया, जिसके बाद प्रशासन ने पूरे इलाके में कर्फ्यू लागू कर दिया। कुछ समय तक इलाके में इंटरनेट सेवाओं को भी बंद कर दिया गया था, हालाँकि कुछ ही घंटों में इंटरनेट सेवाएँ बहाल कर दी गईँ।

आखिरकार अंतरिक्ष से पृथ्वी के लिए रवाना हुईं सुनीता विलियम्स, PM मोदी ने पत्र लिख भारत आने का दिया न्योता: कहा- आप भले मीलों दूर हैं, लेकिन हमारे दिल के पास हैं

अंतरिक्ष वैज्ञानिक सुनीता विलियम्स 9 महीने के बाद धरती पर वापस होने के लिए रवाना हो चुकी हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक पत्र सामने आया है। यह पत्र उन्होंने विलियम्स को 1 मार्च, 2025 को लिखा था। इस पत्र में पीएम मोदी ने सुनीता विलियम्स को भारत की शानदार बेटियों में से एक बताया। यह पत्र PMO में मंत्री जितेन्द्र सिंह ने साझा किया है।

पीएम मोदी ने अपने पत्र में लिखा, “मैं आपको भारत के लोगों की ओर से शुभकामनाएँ देता हूँ। आज एक कार्यक्रम में मेरी मुलाकात प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री श्री माइक मैसिमिनो से हुई। हमारी बातचीत के दौरान आपका नाम आया और हमने चर्चा की कि हमें आप पर और आपके काम पर कितना गर्व है। इस बातचीत के बाद, मैं खुद को आपको पत्र लिखने से नहीं रोक पाया।”

पीएम मोदी ने कहा, “140 करोड़ भारतीयों को हमेशा आप पर गर्व रहा है। हाल की घटनाओं ने एक बार फिर आपकी दृढ़ता को दर्शाया है। भले ही आप हजारों मील दूर हैं, लेकिन आप हमारे दिल के करीब हैं। भारत के लोग आपके कुशल स्वास्थ्य और आपके मिशन में सफलता के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।”

सुनीता विलियम्स के साथ मुलाक़ात का जिक्र भी पीएम मोदी ने किया। पीएम मोदी ने उनके पिता के साथ 2016 में हुई मुलाक़ात के विषय भी बात की और विलियम्स को भारत की सबसे शानदार बेटियों में से एक बताया। पीएम मोदी ने इच्छा जताई कि वह उनकी धरती पर वापसी के बाद उनसे मिलना चाहेंगे।

गौरलतब है कि सुनीता विलियम्स पिछले 9 महीने से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में फंस गई थीं। सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट द्वारा अंतरराष्ट्रीय 5 जून 2024 को भेजा गया था। उनका मिशन केवल आठ दिनों का था, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण वे वहाँ नौ महीने से अधिक समय तक फँसे रहे।

अब NASA ने क्रू-10 मिशन को लॉन्च किया है। यह मिशन स्पेसएक्स के एक स्पेसक्राफ्ट से गया है। मंगलवार (18 मार्च, 2025) को सुनीता विलियम्स इसमें सवार भी हो गई हैं। जल्द ही वह धरती पर पहुँच जाएँगी। उनके बुधवार शाम तक (फ्लोरिडा समय) के धरती पर आने की संभावना है। उनके साथ 2 और अंतरिक्षयात्री वापस धरती पर आ रहे हैं।