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केरल नन रेप केस: बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर अदालत ने आरोप तय, सुनवाई के दौरान पादरी ने खुद को बताया निर्दोष

केरल में आज (अगस्त 13, 2020) कोट्टायम अदालत ने नन के बलात्कार मामले में जालंधर डायोसिज के बिशप फ्रैंको मुलक्कल (Bishop Franco Mulakkal) के विरुद्ध आरोप तय कर दिए।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई करते हुए मुलक्कल के विरुद्ध आईपीसी के तहत तय किए गए आरोपों को पढ़ कर सुनाया। इस बीच मुलक्कल अपने ऊपर लगे आरोपों से इंकार करते रहे। लेकिन कोर्ट ने अगली तारीख देते हुए कहा कि इस संबंध में 16 सितंबर को पीड़िता से पूछताछ की जाएगी।

जानकारी के मुताबिक, मुलक्कल के खिलाफ़ आईपीसी की धारा 342, 376 (c)(a), 376 और 506 के तहत मामला दर्ज हुआ है। सुनवाई में बिशप ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से मना किया। उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह न्यायपालिका में विश्वास रखते हैं और अदालत जो भी कहेगी वह उसका पालन करेंगे।

इससे पहले बिशप फ्रैंको मुलक्कल को कड़ी शर्तों पर अदालत से जमानत दी गई थी और आज के दिन यानी सुनवाई के दिन अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे।

5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने नन से बलात्कार मामले में बिशप फ्रैंको मुलक्कल की आरोप मुक्त करने की याचिका को खारिज किया था। इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें मुकदमे का सामना करने का निर्देश दिया था।

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने बिशप के वकील से कहा था कि न्यायालय इस मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा लेकिन आरोप मुक्त करने के मुद्दे पर ही याचिका खारिज की जा रही है।

गौरतलब है कि बिशप के खिलाफ कोट्टायम जिले में पुलिस ने रेप का मामला दर्ज किया था। हाई कोर्ट में दायर याचिका में पादरी ने कहा था कि जब उन्होंने पीड़िता नन से वित्तीय लेन-देन को लेकर सवाल किया तो उसने उन्हें फँसा दिया।

इस मामले की प्रमुख गवाहों में से एक सिस्टर लिसी ने पिछले दिनों आरोप लगाया था कि उनके वरिष्ठ लोग लगातार उन पर फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ दिए गए बयान को बदलने के लिए दबाव डाल रहे हैं। वहीं आरोपित बिशप को नोटिस जारी करने के बाद केरल पुलिस के एक अधिकारी का तत्काल तबादला कर दिया गया था।

करिश्मा भोंसले को मिला इंसाफ: BMC पोल से हटाया गया मस्जिद का अवैध लाउडस्पीकर

मुंबई के मानखुर्द इलाके में स्थित मस्जिद से आज अवैध लाउडस्पीकर हटा दिया गया। इसकी जानकारी भाजपा सांसद किरीट सौमैया ने अपने ट्विटर हैंडल से दी। उन्होंने लिखा, “मानखुर्द की करिश्मा भोंसले को न्याय मिल गया। आज बीएमसी के खंबे से अवैध लाउडस्पीकर हटा दिया गया।”

बता दें, कुछ समय पहले करिश्मा भोंसले चर्चा में आई थीं। उन्होंने मानखुर्द में एक मस्जिद के लाउडस्पीकर की आवाज कम करने को कहा था। लेकिन संप्रदाय विशेष के लोगों ने उनकी बात सुनने की जगह उनसे बहस शुरू कर दी। बात बढ़ने पर वहाँ आपसी झड़प भी हुई। संप्रदाय विशेष के लोगों ने करिश्मा को धमकाया भी।

इस घटना के बाद करिश्मा ने जब स्थानीय विधायक से इस सम्बन्ध में मदद माँगी तो उन्होंने सलाह दी कि यदि उन्हें लाउडस्पीकर की आवज से परेशानी है तो उन्हें अपना घर बदल लेना चाहिए।

अजान-मुम्बई
लाउडस्पीकर की आवाज कम करने को कहा तो करिश्मा और उसकी मॉं से बदसलूकी

फिर, करिश्मा भोंसले ने इस घटना का वीडियो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया। साथ ही लिखा, “मुंबई के मानखुर्द में रहती हूँ। बहुत कम उम्मीद थी कि मेरी बात सुनी जाएगी, फिर भी मैं पास की मस्जिद में सम्बन्धित लोगों से अनुरोध करने के लिए गई कि वो उस लाउडस्पीकर (अज़ान) की आवाज कम कर दें, जो कि मेरी खिड़की के ठीक सामने लगा है। लेकिन यह प्रयास व्यर्थ रहा।”

ट्वीट की एक शृंखला में करिश्मा ने कुछ वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा था कि जब वो सम्बन्धित लोगों से बात करने वहाँ पहुँची तो कुछ ही देर में वहाँ काफी लोग इकट्ठे हो गए और बहस शुरू हो गई।

करिश्मा को यह भी बोला गया कि तुम्हारे मंदिर में भी तो घंटा बजता है और क्या हम स्पीकर किसी के घर में लगा रहे हैं? जिसपर युवती ने जवाब दिया कि अगर मंदिर में घंटी बजती है तो उन्हें वहाँ जाकर अपनी बात रखनी चाहिए।

करिश्मा ने वो स्क्रीनशॉट भी शेयर किए थे जिसमें स्थानीय विधायक अबू आसिम आजमी ने उनसे कहा था कि यदि अजान की आवाज से समस्या है तो उन्हें वह जगह छोड़ देनी चाहिए।

करिश्मा के इन ट्विट्स के बाद ही यह मामला सबके संज्ञान में आया था और आज 2 महीने के भीतर इस मामले पर सुनवाई हो गई। लोगों ने लाउडस्पीकर हटने की खबर सुनने के बाद करिश्मा को उनकी हिम्मत के लिए बधाई भी दी।

आदित्य ठाकरे का कनेक्शन अभिनेत्रियों के साथ हो सकता है, मगर सुशांत की मौत से उसका कोई लेना-देना नहीं: सुब्रमण्यम स्वामी

बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी अपने तेज तर्रार अंदाज के लिए जाने जाते हैं। बेबाकी से बोलना उनकी फितरत है। सुशांत सुसाइड केस में भी स्वामी एक सक्रिय भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। 2 अगस्त को “विराट हिंदुस्तान संगम” के साथ एक लाइव प्रश्न और उत्तर सत्र में बात करते हुए, उन्होंने आरोप लगाया कि जो सबूत उन्होंने एकत्र किए हैं, उससे यह स्पष्ट होता है कि कोई सीएम (उद्धव ठाकरे) को डराने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने कहा, “कोई उनके बेटे (आदित्य ठाकरे) के नाम को इस मामले में खींचने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मेरे पास मौजूद सबूतों के आधार पर मैं आपको बता सकता हूँ कि उसका बेटा अभिनेत्रियों के साथ हो सकता है, मगर उसका सुशांत की मौत से कोई लेना-देना नहीं है।”

उन्होंने इंटरव्यू में आईपीएल सहित विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। जैसे कि बॉलीवुड में “माफिया” और सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु।

स्वामी ने आरोप लगाया कि जो व्यक्ति इस मामले में शामिल है वह संभवत: किसी और का बेटा है, जिसका नाम लेने की स्थिति में वे नहीं है क्योंकि उनके पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसे शख्स के बेटे के खिलाफ सबूत है जोकि बहुत पावरफुल है। जिसका नाम बाहर आने पर वह सिस्टम को काफी प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने कहा, “हमारे पास एक ऐसी स्थिति है जहाँ राजनेता, गैंगस्टर और सिनेमा के सितारे जिनको लोग सम्मान देते हैं, उन लोगों ने एक कार्टेल बनाया है जो यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सबसे खराब इंसान हमारे अभिनेता और अभिनेत्री बनें।

वहीं कोई और शख्श जो अपने साथ कुछ शालीनता, कुछ शैक्षिक पृष्ठभूमि, और कुछ नैतिकता लेकर आता है उन्हें हटा दिया जाता है। उन्हें (फिल्मों में) रोल नहीं दिया जाता है। इसके अलावा उनकी हत्या कर दी जाती है। यह एक ऐसी चीज है जिसे हम अपने लोकतांत्रिक देश में स्वीकार नहीं कर सकते।

स्वामी ने कहा कि वह सुशांत सिंह को न्याय दिलाने के मामले में लोगों द्वारा उठाई जा रही आवाज को देख कर खुश है। खासकर जब उन्होंने घोषणा की कि वह भी इस मामले में पूरा सहयोग देंगे। भाजपा सांसद ने कहा कि, उन्होंने ईशान सिंह को अदालत में सहायता के लिए नामित किया था। इसके साथ ही कानून के तहत जाँच में भी सहयोग की बात कही।

उन्होंने कहा कि सरकार को न केवल केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) से मामले की जाँच के लिए कहना चाहिए बल्कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को भी शामिल करना चाहिए क्योंकि इस मामले में दाऊद का एक आतंकवादी एंगल भी है।

सीबीआई द्वारा मामले की जाँच के निर्देश के पहले यह प्रश्न और उत्तर सत्र हुआ था। वहीं जब 5 अगस्त को अटॉर्नी जनरल ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि भारत सरकार पहले ही सीबीआई को इस मामले को उठाने का निर्देश दे चुकी है, तो स्वामी ने ट्वीट किया और कहा, “केंद्र ने SC को सूचित किया है कि सुशांत मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया है। क्या मैंने अपनी प्रतिबद्धता पूरी कर ली है और मैं स्वतंत्र हूँ? “

सुशांत सिंह राजपूत केस

गौरतलब है कि 14 जून को सुशांत अपने मुंबई स्थित फ्लैट में मृत मिले थे। इस मामले में मुंबई पुलिस की जाँच से असंतुष्‍ट सुशांत के पिता ने पटना में एफआइआर दर्ज कराई। इसमें उन्‍होंने बेटे की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती व उनके परिवार पर धन उगाही, ब्‍लैकमेल, सुसाइड के लिए उकसाने आदि के कई गंभीर आरोप लगाए। इस मामले की जाँच के लिए जब बिहार पुलिस मुंबई पहुँची तो वहाँ उसे असहयोग का सामना करना पड़ा।

फिर, बिहार सरकार की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने यह जाँच सीबीआइ को सौंप दी। वहीं अब सोशल मीडिया पर स्टन गन थ्योरी सामने आई है, जिसे एक यूजर ने सोशल मीडिया पर डाला। वहीं इस थ्योरी को मद्देनजर रखते हुए बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सुशांत सिंह राजपूत मृत्यु मामले की एनआईए जाँच की माँग की है। वहीं शेखर सुमन ने रिया के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए उसकी गिरफ्तारी की माँग की थी।

‘बादशाह’ फेक व्यूज केस: मुंबई पुलिस ने पत्रकार फ़ाय डिसूज़ा के पति से की पूछताछ, ‘पागल है’ गाने के लिए 75 लाख का भुगतान

सोशल मीडिया पर फर्जी फॉलोवर रैकेट मामले की जाँच कर रही मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गुरुवार (13 अगस्त, 2020) को क्यूकी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य संचालन अधिकारी सागर गोखले का बयान दर्ज किया। इस कंपनी का नाम रैपर बादशाह के वीडियो के लिए फेक फॉलोवर्स बढ़ाने में सामने आया है। सागर गोखले पत्रकार फ़ाय डिसूज़ा के पति हैं।

पिछले हफ्ते, रैपर आदित्य प्रतीक सिंह सिसोदिया उर्फ ​​बादशाह से फर्जी व्यूज और लाइक के घोटाले के संबंध में पूछताछ की गई थी। इस दौरान उन्होंने स्वीकार किया था कि उन्होंने YouTube पर अपने गाने ‘पागल है’ के लिए फर्जी व्यूज खरीदने के लिए कंपनी क्यूकी को 75 लाख रुपए का भुगतान किया था।

उन्होंने 24 घंटे में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए यूट्यूब व्यूज को खरीदा था। रैपर ने दावा किया कि था कि ‘पागल है’ के म्यूजिक वीडियो को रिलीज़ होने के पहले दिन में अन्य पिछले रिकॉर्ड को पछाड़ते हुए 75 मिलियन बार देखा गया था।

रैपर द्वारा किए गए खुलासे के बाद, पुलिस ने कंपनी के सीईओ सागर गोखले से पूछताछ की थी। लेकिन पूछताछ के दौरान, सागर ने मामले के बारे में अनभिज्ञता व्यक्त की, और इस मामले में अपने मृत सहकर्मी को दोषी ठहराया।

उन्होंने कहा कि उन्हें कंपनी के मामलों के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। कंपनी के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक समीर बंगारा कंपनी के कामकाज के बारे में अधिक जानते थे। गौरतलब हो कि इसी साल जून में एक बाइक दुर्घटना में बंगारा की मौत हो गई थी।

गोखले ने यह भी कहा कि कंपनी के सीएफओ और वीडियो नेटवर्क मैनेजर को बादशाह के वीडियो से संबंधित मामले के बारे में अधिक जानकारी होगी। उनके बयान के बाद, पुलिस ने उनके लिए समन जारी किया है।

मुंबई पुलिस ने बादशाह से एक इनवॉइस बरामद किया था। जिसमें क्यूकी कंपनी को 75 लाख रुपए का भुगतान किया गया था। इनवॉइस के अनुसार यह भुगतान विज्ञापन के लिए किया गया था। वहीं पुलिस के मुताबिक यह भुगतान व्यूज बढ़वाने के लिए किया गया था। न कि विज्ञापन के लिए।

क्यूकी कंपनी के डाटा के अनुसार, सागर गोखले कंपनी के तीन डायरेक्टर्स में से एक हैं। वह पाँच अन्य कंपनियों में भी डायरेक्टर है। उन कंपनियों में से एक फ्रीमेडिया इंटरएक्टिव प्राइवेट लिमिटेड में वे और उनकी पत्नी फ़ाय डिसूज़ा डायरेक्टर हैं।

उल्लेखनीय है कि दो मशहूर हस्तियों द्वारा सोशल मीडिया पर उनके नाम से फर्जी अकाउंट बनाए जाने की शिकायत के बाद फर्जी व्यूज और लाइक के मामले का भंडाफोड़ किया गया था। सिंगर भूमि त्रिवेदी और एक्टर कोएना मित्रा द्वारा इस संबंध में शिकायत दर्ज की गई थी।

दर्ज शिकायत की जाँच के दौरान पुलिस ने पाया कि कुछ कंपनियों द्वारा फर्जी फॉलोअर, लाइक, कमेंट और अन्य सोशल मीडिया संबंधी सेवाएँ प्रदान करने के लिए अकाउंट बनाए गए थे। बाद में मुंबई पुलिस ने 50 से अधिक कंपनियों का पता लगाया था जो सोशल मीडिया फॉलोवर्स, लाइक और टिप्पणियों को बेचने में शामिल थीं।

5 कारण जो ‘#TirupatiVirus’ को झूठा साबित करते हैं: खोलते हैं लिबरलों और वामपंथियों के प्रोपेगेंडा की पोल

मार्च 2020 के फ्लैशबैक में जाएँ तो याद आएगा कि उस समय देश भर में 30% से अधिक कोरोना वायरस संक्रमण फैलाने (प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से) वाले तबलीगी जमात के कारनामे को कैसे वामपंथियों और कट्टरपंथियों ने अपने तर्कों से धोने-पोछने का काम किया था। 

वामपंथियों ने कहा था कि यह समारोह उस समय आयोजित हुआ जब दिल्ली पुलिस ने किसी प्रकार की कोई सूचना नहीं दी थी। (हालाँकि, उस समय यह तर्क तब झूठा साबित हो गया। जब पुलिस अधिकारी की एक वीडियो सामने आई जिसमें वह जमात प्रशासन से समारोह को रोकने की अपील कर रहा था।)

अब अगस्त 2020 को देखिए। यही वामपंथियों और कट्टरपंथियों ने एक नया ट्रेंड चलाया है- “Tirupativirus” इसमें दावा किया जा रहा है कि 75% कोरोना वायरस भारत में मंदिरों से फैला। अब इस इंफोग्राफिक के जरिए जो आँकड़े दर्शाए जा रहे हैं उसका दावा है कि यह इंडिया टुडे का ‘अनऑफिशियल इंफोग्राफिक’ है।

दिलचस्प बात यह है कि ये वामपंथी वही हैं जिन्होंने जमात की निंदा पर लोगों को इस्लामोफोबिया से ग्रसित करार दे दिया था। लेकिन जब बात तिरुपति की आई तो महामारी चरम तक पहुँचने के बाद वह इसे तिरुपति वायरस कह रहे हैं और इसके लिए हिंदुओं को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

वामपंथियों के पाखंड और दोहरे रवैये का अंदाजा इस बात से भी लग सकता है कि उन्हें यह तिरुपति वायरस का ट्रेंड चलाने में इतनी उत्सुकता है कि वह वास्तविक जानकारी भी नहीं जानना चाहते। इनके द्वारा चलाए जा रहे प्रोपगेंडा में इतनी कमियाँ हैं कि यह एक बार फिर हिंदुओं को बदनाम करने के अपने प्रयास में असफल हो रहे हैं।

लेफ्ट-लिबरल्स की इस हार के पीछे 5 महत्तवपूर्ण कारण हैं:

1.कोई प्रमाणिक स्रोत नहीं है दावा साबित करने के लिए

इस आर्टिकल को लिखने के समय तक, इस बात के कोई सबूत कहीं भी नहीं थे कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण बढ़ने का कारण मंदिर है। इस इंफोग्राफिक में भी इस बात का कहीं उल्लेख नहीं है कि जो आँकड़े उन्होंने बताए वो कहाँ से लिए।

2.सरकारी प्रशासन से तिरुपति श्रद्धालुओं ने खुद को छिपाया नहीं

तबलीगी जमातियों की तरह तिरुपति श्रद्धालुओं ने खुद को प्रशासन से छिपाने के लिए या जाँच प्रक्रिया से बचाने के लिए मंदिरों में नहीं छिपाया हुआ था। उन्होंने खुद का टेस्ट खुद ही करवाया और खुद को क्वारंटाइन भी किया।

3. तिरुपति श्रद्धालु ऐसा नहीं मानते हैं कि कोरोना वायरस हिंदू धर्म को न मानने वालों के लिए दंड है

मरकज के दौरान तबलीगी जमात के मौलाना साद ने यह दावा किया था कोरोना वायरस उन लोगों के लिए अल्लाह की ओर सजा है जो उसको नहीं मानते। इसलिए संप्रदाय विशेष के लोगों को इस संक्रमण से डरने की आवश्यकता नहीं है। जबकि तिरुपति श्रद्धालुओं को न ऐसा कुछ बताया गया और न ही उन्होंने ऐसा कुछ सोचा। उन्होंने अधिकारियों और डॉक्टरों के साथ सहयोग भी किया।

4. तिरुपति श्रद्धालु कभी भी स्वास्थ्यकर्मियों के साथ बदसलूकी नहीं की

तिरुपति श्रद्धालुओं ने कभी भी स्वास्थ्यकर्मियों से अपना इलाज करवाने से मना नहीं किया और न ही उनको इलाज के दौरान प्रताड़ित किया। वहीं तबलीगियों के रवैये को याद करें तो उन्होंने कानपुर अस्पताल में नर्सों के साथ दुर्व्य्वहार किया और उनके साथ हिंसा भी की थी।

5. कोई विदेशी श्रद्धालु तिरुपति मंदिर में जुलूस के समय शामिल नहीं हुआ

तबलीगी जमातियों का मामला उजागर होने के बाद पूरे देश में कोरोना के मामलों में औचक बढ़ौतरी देखने को मिली। क्योंकि वहाँ बिना दिशा निर्देश का पालन करने वाले बाहरी लोगों को काफी संख्या थी। लेकिन, तिरुपति मंदिर में केवल यहीं के श्रद्धालु आए थे। कोई बाहरी श्रद्धालु नहीं था।

इसलिए, इन दोनों घटनाओं की तुलना बेहद हास्यास्पद है। वामपंथियों ने बस जमातियों की तुलना तिरुपति श्रद्धालुओं से करके और कोरोना के लिए मंदिरों को जिम्मेदार बताकर, एक बार दोबारा अपने पाखंडी रवैये को उजागर किया है।

बेंगलुरु दंगों में सामने आया कॉन्ग्रेस पार्षद के पति कलीम पाशा का नाम: रह चुका है पूर्व कॉन्ग्रेसी मंत्री का करीबी

मंगलवार की रात (11 अगस्त 2020) बेंगलुरु में हुई हिंसा से जुड़ी बड़ी ख़बर सामने आ रही है। बेंगलुरु में हुए दंगों के मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। इसमें जिन लोगों को आरोपित बनाया गया है उसमें 7वां नाम कॉन्ग्रेस पार्षद इरशाद बेगम के पति कलीम पाशा का है। पुलिस के मुताबिक़ दंगों की साज़िश रचने वाले मुख्य आरोपितों में एक नाम कलीम पाशा का भी है।    

इरशाद बेगम बेंगलुरु नगरपालिका के नगवाड़ा वार्ड से कॉन्ग्रेस पार्षद हैं। लेकिन क्षेत्र के ज़्यादातर काम उसका पति कलीम पाशा ही देखता है। टाइम्स नाउ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ जब पुलिस कलीम को गिरफ्तार करने गई तब वह अपने घर पर नहीं था। पुलिस को अभी तक कलीम की कोई जानकारी नहीं मिली है।   

कलीम पाशा (लाल घेरे में)
साभार टाइम्स नाउ

इसके अलावा कलीम पाशा के कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मंत्री केजे जॉर्ज से भी काफी अच्छे संबंध हैं। पिछले साल सितंबर में कर्नाटक राष्ट्र समिति ने केजे जॉर्ज पर प्रवर्तन निदेशालय को संज्ञान में लेते हुए मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कराया था। केजे जॉर्ज पर आरोप लगा था कि उनके पास विदेशों में करोड़ों की संपत्ति मौजूद है।

पूर्व कॉन्ग्रेस मंत्री केजे जॉर्ज

दंगों से संबंधित एफ़आईआर में और भी कई हैरान कर देने वाली बातें सामने आई हैं। एफ़आईआर में लिखा है कि 5 लोगों ने लगभग 200 से 300 लोगों की भीड़ का नेतृत्व किया। उनके पास मशाल से लेकर पेट्रोल बम जैसे ख़तरनाक हथियार मौजूद थे। साथ ही उन्हें इस बात के आदेश मिले हुए थे कि रास्ते में आने वाले हर पुलिसकर्मी को जान से मार देना है। बीते दिन पुलिस ने SDPI के 2 नेताओं को दंगों के मामले में गिरफ्तार किया था। वहीं SDPI के ज़िला सचिव का कहना था कि उनकी पार्टी के सदस्यों का दंगों से कोई लेना देना नहीं है। उनकी पार्टी से जुड़े लोगों पर झूठे आरोप लगा जा रहे हैं।  

बेंगलुरु में हुई दंगे की घटनाओं में लगभग 200 से 250 वाहन मौके पर ही जला दिए गए थे। कुछ ही समय पहले इस घटना का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। इस वीडियो में डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के कर्मचारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों से आत्मरक्षा के लिए गोली चलाने की इजाज़त माँग रहे थे। वीडियो में साफ़ सुना जा सकता है कि इस्लामी भीड़ पुलिस वालों पर टूट पड़ी। हालात इतने भयावह हो जाने के बाद पुलिस कर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से आत्मरक्षा में गोली चलाने की अनुमति माँगी थी।  

जिस पर अधिकारियों ने साफ़ तौर पर कहा कि वह भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जो ज़रूरी समझें, वह करें। वीडियो में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा, “आपको जो सही लगे वह करिए! इस समय आपको कोई और नहीं बचा सकता है। आपको अपनी सुरक्षा खुद से ही करनी होगी।” टीवी 9 कर्नाटक द्वारा प्रसारित इस वीडियो में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे संप्रदाय विशेष की उग्र भीड़ ने पूरे बेंगलुरु शहर को आग में झोंक दिया। राज्य सरकार ने इस मामले में न्यायिक जाँच के आदेश जारी कर दिए हैं।

न्यायिक जाँच का फैसला कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदुराप्पा, गृहमंत्री बसवराज बोम्मई और पुलिस अधिकारियों की बैठक में लिया गया था। इस जाँच की अगुवाई मजिस्ट्रेट करेंगे। बेंगलुरु के पूर्वी और उत्तर पूर्वी इलाक़ों में हुए इन दंगों में 3 लोगों की जान जा चुकी है। साथ ही कई लोग घायल भी हुए हैं। 

कर्नाटक के गृहमंत्री बोम्मई ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, “बेंगलुरु में हुई दंगों की न्यायिक जाँच होगी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के तमाम नीति-निर्देशों को मद्देनज़र रखते हुए पूरे घटनाक्रम की जाँच मजिस्ट्रेट की निगरानी में होगी। इस जाँच के बाद षड्यंत्र रचने वाले असल आरोपित सामने आएँगे।”  

मंगलवार की शाम कॉन्ग्रेस विधायक अखंडा श्रीनिवास मूर्थी के आवास पर संप्रदाय विशेष की हज़ारों की भीड़ इकट्ठा हुई। कुछ ही देर में भीड़ ने पूरे घर को तबाह कर दिया। इसके बाद डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थाने पर भी जम कर तोड़ फोड़ की। पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में कुल 3 लोगों की जान गई थी और 6 लोग घायल हुए थे। दंगे की घटनाओं में 60 पुलिसकर्मी घायल हुए थे जिसमें से 15 नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती हैं।  

नेहरू समेत सभी पूर्ववर्ती PM से आगे निकले मोदी, गैर-कॉन्ग्रेसी PM मामले में नंबर-1: अगस्त में बनाए 4 रिकॉर्ड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार (अगस्त 13, 2020) को अपने दूसरे कार्यकाल में एक और मील का पत्थर छू लिया है। दरअसल, पीएम नरेंद्र सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले पहले भारतीय पीएम (गैर-कॉन्ग्रेसी) बन गए हैं।

67 साल के पीएम नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के ही दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी के 2,268 दिनों तक भारत के प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। जबकि, सबसे लंबे समय तक भारत के प्रधानमंत्री का रिकॉर्ड पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम है।

जवाहरलाल नेहरू 16 वर्ष 286 दिनों तक प्रधानमंत्री रहे। इस मामले में दूसरा स्थान उनकी बेटी इंदिरा गाँधी का है, जो कि 15 वर्ष 350 दिनों तक देश की प्रधानमंत्री रहीं। जबकि, तीसरे नंबर पर मनमोहन सिंह हैं, जो कि 10 वर्ष 4 दिनों तक देश के प्रधानमंत्री रहे।

इस तरह से आज के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले चौथे प्रधानमंत्री बन गए हैं। इसे पहले, अटल बिहारी वाजपेयी 3 बार भारत के प्रधानमंत्री बने। पहली बार वह वर्ष 1996 में प्रधानमंत्री बने, लेकिन बहुमत साबित नहीं कर पाए। दूसरी बार वह 1998 और 1999 में प्रधानमंत्री बने और 2004 तक सत्ता में रहे थे।

इससे पहले, 5 अगस्त को अयोध्या श्रीराम मंदिर भूमिपूजन के दिन पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में 3 रिकॉर्ड बनाए, क्योंकि वह श्रीराम जन्मभूमि का दौरा करने वाले पहले प्रधानमंत्री बने थे। यह पहला मौका भी था, जब किसी प्रधानमंत्री ने हनुमान गढ़ी का दौरा किया। इसके अलावा, वह देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रतीक किसी मन्दिर के ‘भूमिपूजन’ कार्यक्रम में भाग लेने वाले पहले प्रधानमंत्री बने।

पीएम नरेंद्र मोदी ने भारतीय पीएम के रूप में छह साल पूरे कर लिए हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी ने 303 सीटों के बहुमत के साथ 2019 के आम चुनावों में अपना दूसरा चुनाव जीता और भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 353 सीटें जीतीं थीं।

सुशांत के परिवार का अल्टीमेटम मिलते ही बदले संजय राउत के सुर, कहा- ‘अभी सबको शांत रहना चाहिए’

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में शिवसेना नेता संजय राउत ने कुछ समय पहले तक सुशांत के परिवार पर बेबुनियाद इल्जाम लगाए। पर, अब जब सुशांत के परिवार ने उन्हें लीगल नोटिस भेजकर 48 घंटों में माफी माँगने का अल्टीमेटम दिया। तो, उनके सुर बदल गए और वह सबसे शांत बैठने की अपील करने लगे।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट बताती है कि संजय राउत अब राजनेताओं से लेकर सुशांत के परिवार तक से चुप रहने की बात कर रहे हैं। श‍िवसेना नेता संजय राउत का कहना है कि यह जाँच अब खत्‍म होने ही वाली है। ऐसे में जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती, सभी को शांत बैठना चाहिए। संजय राउत ने कहा कि सुशांत की फैमिली हो या कोई राजनीतिक दल सभी को शांत बैठना चाहिए।

यहाँ बता दें कि शिवसेना सांसद संजय राउत ने बीते दिनों पार्टी के मुखपत्र सामना में एक लेख लिखा था, जिसमें उन्‍होंने सुशांत के परिवार पर टिप्‍पणी की थी। इसमें उन्‍होंने कहा था कि सुशांत के पिता ने दो शाद‍ियाँ की हैं और दूसरी शादी के बाद से सुशांत और उनके पिता के रिश्‍ते ठीक नहीं थे।

हालाँकि, राउत के इस बयान के बाद सुशांत के परिजनों ने इस बयान का खंडन किया और इसे बिलकुल झूठा बताया। इसके साथ ही उन्होंने ऐसी हरकत पर राउत को लीगल नोटिस भेजकर उनसे माफी माँगने को कहा। लेकिन संजय राउत ने मीडिया से बात करते हुए शांत बैठने की अपील तो कर ली, पर माफी अभी भी नहीं माँगी। उन्होंने केवल यही कहा कि उन्होंने अपना बयान उन्हें मिली जानकारी के आधार पर दिया था।

उन्होंने कहा, “अगर हमारी ओर से किसी तरह की चूक हुई है, तो हम इसके बारे में सोचेंगे। लेकिन मुझे इस पर गौर करना होगा। मैंने अब तक जो कुछ कहा है, वह मेरे पास मौजूद जानकारी के आधार पर है, सुशांत का परिवार उनके पास मौजूद जानकारी के आधार पर बोल रहा है।”

मीडिया से बातचीत में संजय राउत ने सुशांत का मामला सीबीआई को सौंपे जाने पर कहा कि यह बिहार सरकार की सिफारिश का नतीजा है। उन्होंने यह भी कहा, “मुझे लगता है कि अभी सभी को शांत बैठना चाहिए। जब तक कि मुंबई पुलिस की जाँच पूरी नहीं हो जाती, सभी को शांत बैठना चाहिए, फिर चाहे वह सुशांत का परिवार हो, कोई राजनीति दल हो या हमारे विरोधी। मुझे लगता है क‍ि मुंबई पुलिस की जाँच भी अब खत्‍म होने वाली है।”

बता दें कि इससे पहले भाजपा विधायक नीरज कुमार सिंह के वकील अनीश झा ने इस बात का खुलासा किया था कि सुशांत के परिवार ने राउत से 48 घंटों में माफी की अपील की है। उन्होंने कहा कि सुशांत के मामले में जाँच चल रही है। लेकिन लोग सच को बाहर नहीं आने देना चाहते। अगर कोई राजनीतिक दबाव या किसी कारणवश उन्होंने यह विवादित बयान दिया है, तो उन्हें 48 घंटे के भीतर माफी माँगनी चाहिए। हर कोई गलती करता है। इसलिए हमने उन्हें पहले नोटिस भेजा है।”

‘कैप्टन अमरिंदर सिंह खो चुके हैं मानसिक संतुलन’ – कॉन्ग्रेसी सांसद ने कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री पर लगाया आरोप

कॉन्ग्रेस पार्टी की दिक्कतें ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। राजस्थान में लंबा नाटक चलने के बाद अब पंजाब से विवाद की ख़बरें आ रही हैं। कॉन्ग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के तौर तरीक़ों पर सवाल खड़े किए हैं। कॉन्ग्रेस सांसद का कहना है कि क्या अमरिंदर सिंह को वाकई लोकतंत्र में विश्वास है? अगर ऐसा तो वह महाराजा की तरह बर्ताव क्यों कर रहे हैं?

दरअसल सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने चंडीगढ़ के डीजीपी को एक पत्र लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा था अगर उनकी सुरक्षा को किसी भी तरह का नुकसान पहुँचता है, तो इसके लिए मुख्यमंत्री और डीजीपी ज़िम्मेदार होंगे। इसके जवाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी जवाब दिया था।

कैप्टन अमरिंदर सिंह के जवाब पर सांसद प्रताप सिंह बाजवा का कहना है, “जिस तरह का जवाब उन्होंने (अमरिंदर सिंह) ने दिया है, उससे ऐसा लगता है कि वह अभी तक अपने सपनों में पटियाला के महाराजा बने हुए हैं। उनकी बातें सुन कर ऐसा लगता है, जैसे उन्हें लोगों की ज़रूरत ही नहीं है। न ही वह किसी को जवाब देना ज़रूरी समझते हैं।”

इसके अलावा कॉन्ग्रेस सांसद ने यह भी कहा, “जब से हमने ज़हरीली शराब पीने के बाद हुई 121 मौतों पर सवाल उठाया है, तब से ऐसा लगता है जैसे मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। जैसे उन्हें इस बात का दुःख है कि उनकी पार्टी के सांसद ने ही उनसे सवाल कर लिया।”  

कॉन्ग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने इस मुद्दे पर कुछ और अहम बातें कही। उनका कहना है:

“2 साल पहले अमृतसर में रेलवे दुर्घटना हुई थी। इस दुर्घटना में 60 लोगों की मौत हुई थी। मुख्यमंत्री ने जाँच के लिए एसआईटी के गठन का आदेश भी दिया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। इसके बाद बाटला की पटाखे फ़ैक्टरी में धमाके हुए थे। इसकी जाँच के लिए भी एसआईटी का गठन हुआ था लेकिन इस मामले में भी कुछ नहीं हुआ था। इसलिए कच्ची शराब से हुई मौतों को लेकर मेरे कुछ सवाल हैं। क्या जालंधर के मंडलायुक्त इस मामले की जाँच कर सकते हैं?”  

आबकारी विभाग अमरिंदर सिंह के पास है। गृह मंत्रालय की तरह पंजाब की पुलिस भी अमरिंदर सिंह सरकार के दायरे में आती है। इसके बाद बाजवा ने कहा आबकारी विभाग की वजह से हुए नुकसानों की जानकारी के लिए उन्होंने राज्यपाल से भी संपर्क किया। इसके बाद सासंद बाजवा के अनुसार, “हमने माँग उठाई कि कच्ची शराब की वजह से हुई मौतों के मामले की जाँच सीबीआई या सीआईडी करे। लेकिन इस बात की वजह से अमरिंदर सिंह का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और उन्होंने मेरी सुरक्षा तक छीन ली।”    

प्रताप सिंह बाजवा ने डीजीपी को लिखे पत्र में कई बातों का ज़िक्र किया था। उन्होंने कहा, “मैंने पिछले कुछ समय में राजनीति-ड्रग्स-पुलिस के गठजोड़ का खुलासा किया है। कैसे इन सभी की मिलीभगत से राज्य में इतने बड़े पैमाने पर नशे का कारोबार हो रहा है। यह बेहद स्वाभाविक है कि पंजाब में ड्रग माफिया बहुत बड़े पैमाने पर अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। इसमें उसे पुलिस की तरफ से पूरा सहयोग और बराबर राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है।” इन बातों को आधार बनाते हुए कॉन्ग्रेस सांसद ने सुरक्षा की माँग की थी।   

कैमरा के आगे पेपर रख हुक्का पीने लगे सीनियर वकील धवन: राजस्थान HC में BSP MLA मामले की चल रही थी वर्चुअल सुनवाई, देखें वीडियो

राजस्थान उच्च न्यायालय की एक वर्चुअल सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील राजीव धवन को हुक्का पीते हुए देखे गए जिसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो गया है। कथित तौर पर यह घटना बृहस्पतिवार (अगस्त 12, 2020) को हुई जब राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ ने कॉन्ग्रेस के साथ बसपा के छह विधायकों के विलय को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई फिर से शुरू की।

दरअसल, हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल जब बहस कर रहे थे उसी समय सीनियर एडवोकेट राजीव धवन कैमरे के सामने पेपर रखकर स्मोकिंग करते नजर आए।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीडियो क्लिप में वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने वकील कपिल सिब्बल की दलील के रूप में अपने चेहरे के सामने कागज का एक सेट पकड़कर दिखाया। हालाँकि, वरिष्ठ अधिवक्ता धवन इन दस्तावेजों के पीछे अपने चेहरे को छिपाते हुए देखे जा सकते हैं, फिर भी, वायरल वीडियो क्लिप में धुएँ के छल्ले आराम से नजर आ रहे हैं।

इसके बाद अधिवक्ता दस्तावेजों को अलग रख देते हैं। लेकिन जैसे ही वह दस्तावेजों को किनारे रखते हैं, राजीव धवन सुनवाई के दौरान हुक्का पीते हुए दिखाई पड़ते हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि इस वर्चुअल सुनवाई के दौरान अधिवक्ता धवन द्वारा हुक्का पीने की इस घटना को राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा नोटिस किया गया था या नहीं।

शुक्रवार (अगस्त 13, 2020) को सुनवाई फिर से शुरू होने पर, वरिष्ठ वकील राजीव धवन का वीडियो अचानक गायब हो गया। इसके लिए राजस्थान HC ने उनसे पूछा कि क्या उनके द्वारा वीडियो को बंद कर दिया गया था?

बसपा के टिकट पर चुनाव जीत विधानसभा पहुँचने के बाद कॉन्ग्रेस में विलय करने वाले 6 विधायकों को सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित करने का अनुरोध करते हुए भाजपा विधायक मदन दिलावर ने राजस्थान उच्च न्यायालय में अर्जी दी है।

इस अर्जी में उन्होंने कहा है कि इन विधायकों ने अपनी पार्टी के व्हिप का उल्लंघन किया है। अभी यह याचिका उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। जिसकी सुनवाई के दौरान अधिवक्ता राजीव धवन हुक्का पीते और धुएँ के छल्ले बनाते देखे गए।