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विकास दुबे ने अपने स्कूल के प्रिंसिपल को मारा, मंत्री की हत्या की: 60 से अधिक मामले लेकिन ख़ौफ इतना कि किसी ने गवाही नहीं दी

कानपुर एनकाउंटर में 8 पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या करने वाला विकास दुबे को उज्जैन में गिरफ्तार कर लिया गया है। 2 जुलाई को की गई वारदात कोई पहली वारदात नहीं है। इससे पहले भी विकास दुबे ने कई ऐसे खूँखार वारदातों को अंजाम दिया है। जिसको याद करके आज भी कानपुर के लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते है। ऐसा ही एक ख़ौफनाक वारदात विकास दुबे ने स्कूली दौर में किया था। जहाँ उसने अपने प्रिंसिपल को ही मौत के घाट उतार दिया था।

कानपुर के लोग विकास दुबे को गुनाह और दरिंदगी का दूसरा चेहरा मानते हैं। आजतक के रिपोर्ट के अनुसार विकास दुबे ने स्कूल में पढ़ते समय ही वहाँ के प्रिंसिपल की बर्बरतापूर्ण हत्या कर दी थी। स्कूल केे प्रिंसिपल सिद्धेश्वर पांडेय काफी बुजुर्ग थे। प्रिंसिपल ने विकास के आगे बहुत हाथ पाँव जोड़े। जान बख्शने के लिए विकास से काफ़ी मिन्नतें भी की। मगर विकास का दिल बिल्कुल नहीं पसीजा। और उन्हें तड़पा-तड़पा कर मार दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सन् 2000 में ताराचंद इंटर कॉलेज की जमीन को विकास कब्जा करना चाहता था। जहाँ उसे उस जमीन पर मार्किट बनाना था। लेकिन प्रिंसिपल सिद्धेश्वर पांडे इस काम में उसके लिए काँटा बने हुए थे। और इसी वजह से विकास ने उन्हें रास्ते से हटा दिया। प्रिंसिपल के बेटे राजेंद्र पांडे ने उस घटना को याद करते हुए बताया कि इस वारदात के 4 गवाह थे। मगर विकास ने अपने पैसे और ख़ौफ के दम पर सभी को चुप करा दिया था। विकास दुबे को हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा हुई थी। लेकिन बाद में उसे आसानी से जमानत मिल गई। बता दें प्रिंसिपल की बेरहमी से हत्या करने के बाद विकास ने उनके खून को अपने हाथों में भी मला था।

वहीं एक बार विकास दुबे ने कानपुर थाने के अंदर 5 सब इंस्पेक्टर और 25 सिपाही के सामने एक दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री को गोलियों से भून दिया था। चश्मदीद गवाह होने के बावजूद डर के कारण किसी भी पुलिसवाले ने तब उसके खिलाफ अदालत में गवाही नहीं दी थी।

विकास की ऐसी हरकतों से उसकी दरिंदगी का साफ अंदाजा लगाया जा सकता है। बीते 30 वर्षों से ज्यादा समय से कानपुर और पास के जिलों में विकास दुबे का खौफ है। और कितने ही रसूखदार लोगों की हत्या के पीछे विकास दुबे का नाम भी है। हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे पर विभिन्न मामलों सहित करीब 60 आपराधिक मामले दर्ज है।

जिसके चलते विकास दुबे कई बार जेल जा चुका था। लेकिन उसका खौफ लोगों में ऐसा था कि कोई सबूत मजबूती से उसके सामने खड़ा ही नहीं हो पाया। न प्रशासन के लोग, न जनता और न ही किसी और ने डर के मारे विकास दुबे के बारे में कुछ बोला या कभी मुँह खोला।

पुलिस की हत्या करने का जघन्य अपराध करने के बाद भी डर के कारण विकास दुबे के खिलाफ़ कोई भी गाँव वाला बोलने के लिए सामने नहीं आया। यहाँ तक कि जब पुलिस उसके घर पर बुलडोजर चला रहीं थी, तब भी कोई गाँव वाला घर से बाहर यह देखने भी नहीं निकला कि आख़िर हो क्या रहा है।

गौरतलब है कि 155 घंटे से फ़रार चल रहा कानपुर एनकाउंटर का मुख्य आरोपित विकास दुबे को उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार कर लिया गया है। ख़बरों के मुताबिक़ वह उज्जैन के महाकाल मंदिर में दर्शन करने के लिए भीतर दाख़िल हो रहा था तभी उसे मंदिर के एक सुरक्षाकर्मी ने पहचाना। जिसके बाद उसने इस मामले की सूचना पुलिस को दी।

गिरफ्तारी के ठीक बाद उसने खुद ही अपनी पहचान बताई। इस घटना का एक वीडियो है, जिसमें पुलिस उसे पकड़ कर ले जा रही है। तभी वह चिल्ला कर कहता है, “मैं विकास दुबे हूँ, कानपुर वाला।” ऐसा कहने के ठीक बाद पीछे खड़े पुलिसकर्मी ने उसे एक थप्पड़ भी मारा और शांत रहने के लिए कहा।

इससे पहले विकास दुबे के दो साथी आज एनकाउंटर में ढेर हो गए। प्रभात मिश्रा पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश कर रहा था, जिसके बाद एनकाउंटर में उसे ढेर कर दिया गया। प्रभात मिश्रा को बुधवार को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा विकास दुबे गैंग का एक और मोस्ट वांटेड क्रिमिनल बउअन शुक्ला भी इटावा में ढेर हो गया।

रिक्शा दुकान की छत से हुआ था कारतूस का इस्तेमाल: कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्या में दायर चार्जशीट से खुलासा

इस्लामिक भीड़ के उन्माद के कारण 24 से 26 फरवरी 2020 तक दिल्ली का एक हिस्सा साम्प्रदायिक दंगों की आग में बुरी तरह झुलसा। हर साम्प्रदायिक दंगों की तरह इसमें भी हिंदू और मुस्लिम, दोनों समुदाय के लोग हताहत हुए।

लेकिन, इन दंगों के बाद दायर चार्जशीट ने यह साफ कर दिया है कि ये इस्लामिक भीड़ द्वारा सुनियोजित थे। मुख्यत: हिंदुओं को निशाना बनाया गया था। इन्हीं हिंदू विरोधी दंगों में सबसे पहले कॉन्स्टेबल रतन लाल की निर्मम हत्या को अंजाम दिया गया, जिसने पूरे राष्ट्र को झकझोर दिया।

रतन लाल की हत्या मामले में दायर चार्जशीट भयावह योजना की ओर इशारा करती है। अभी हाल में हमने आपको अपनी रिपोर्ट में बताया था कि डीएस बिंद्रा, जिसे मीडिया ने इंसानियत का मसीहा बताकर दिखाया, उसे चार्जशीट में वो षड्यंत्रकारी बताया गया है जिसने उन दंगो को उकसाया जिसमें रतन लाल की हत्या हुई।

ये चार्जशीट दिल्ली पुलिस की स्पेशल जाँच टीम ने रतन लाल की हत्या मामले में और आईपीएस अमित शर्मा व आईपीएस अनुज शर्मा पर हमले के संबंध में दायर की है। इस चार्जशीट में कुल 17 लोगों को आरोपित बनाया गया है।

पूरे मामले में लगभग 4 से 5 प्रमुख षड्यंत्रकारी हैं। इनमें सलीम खान, सलीम मुन्ना और शादाब का नाम शामिल है। पुलिस का कहना है कि दिल्ली में हुए दंगे देश की छवि को खराब करने की एक बड़ी साजिश थे।

हमने हाल में इसी चार्जशीट के कुछ भागों को एक्सेस किया। अपनी पड़ताल में हमें कुछ बेहद परेशान करने वाले बिंदु मिले जिनका उल्लेख चार्जशीट में है। दरअसल चार्जशीट में जाँच टीम ने कुछ नमूनों और सबूतों का जिक्र किया है, जो रतन लाल की हत्या मामले में जुटाया गए।

इनकी सूची इस प्रकार है-

  1. 40 ईंट और पत्थर
  2. पेट्रोल और केमिकल से भरी हुई 3 बोतलें
  3. 1 जिंदा कारतूस
  4. 5 पेट्रोल बम
  5. 2 इस्तेमाल की गई कारतूस
  6. कारतूस की गोलियाँ

यहाँ गौर करने वाली बात है कि उक्त सभी चीजें उस घटनास्थल से बरामद हुई हैं, जहाँ रतन लाल की हत्या को अंजाम दिया गया। इनमें से कुछ चीजें एक ऑटोरिक्शा दुकान की छत से भी मिली हैं।

चार्जशीट के अनुसार, केमिकल से भरी बोतलें, जिंदा कारतूस, पेट्रोल बम स्काईराइड ई-शॉप की छत से मिले। दिलचस्प यह है कि इसी छत से 2 इस्तेमाल हुई कारतूस भी मिली। जो यह सबूत हैं कि रतन लाल को मारने वाली भीड़ न केवल पूरी तरह हिंसा के लिए तैयार थी, बल्कि उन्होंने छत से कारतूसों का इस्तेमाल भी किया था।

गौरतलब हो कि दिल्ली दंगों में कुछ और ऐसे मामले हैं जहाँ छतों से हिंदुओं पर हमला हुआ। शिव विहार के राजधानी स्कूल, जिसका मालिक मुस्लिम है, उसे भी हिंदुओं पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा चांद बाग में ताहिर हुसैन की घर की छत से भी कई हथियार बरामद हुए थे। इस बिल्डिंग का इस्तेमाल भी हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए किया गया और इसी में मौजूद भीड़ ने आईबी के अंकित शर्मा की निर्मम हत्या को अंजाम दिया।

मगर, फिर भी ये बात ज्ञात रहे कि रतनलाल की हत्या मामले में दायर चार्जशीट में कहीं भी अनिश्चित शब्दों में भी ये उल्लेख नहीं किया है कि पूरा दंगा पूर्व नियोजित था। चार्जशीट में तो लिखा है, “आरोपितों ने संयुक्त रूप से खुलासा किया है कि डीएस बिंद्रा, डॉ. रिजवान, अतहर, उपासना, तबस्सुम, रवीश और अन्य चांद बाग दंगों के पीछे साजिश में शामिल थे।”

बाद में गिरफ्तार शहनवाज और इब्राहिम ने भी यह खुलासा किया कि ये दंगे उसी साजिश का हिस्सा थे, जिसका आयोजन डीएस बिंद्रा, डॉ. रिजवान, सुलेमान, सलीम खान, सलीम मुन्ना और दूसरों की मदद से किया गया था।

सबसे महत्वपूर्ण बात, इस चार्जशीट में यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया है कि साजिशकर्ता इस बात को अच्छे से जानते थे कि दंगे हो सकते हैं। इसलिए उन्होंने प्रदर्शनकारियों को हथियारबद्ध रहने का निर्देश दिया था।

इस प्रकार यह साफ होता है कि दिल्ली में हुई व्यापक हिंसा एक साजिश थी जिसमें इस्लामिक भीड़ ने रतन लाल को मौत के घाट उतारा। मगर वामपंथियों ने ऐसा नैरेटिव बनाया कि ऐसा लगे पूरे दंगे बहुत स्वभाविक थे और मुस्लिम समुदाय के विरोध का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

राजस्थान: 10वीं की किताब में महाराणा प्रताप के इतिहास से छेड़छाड़, CM गहलोत से मुलाकात कर जताया रोष

राजस्थान में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं की किताब में महाराणा प्रताप के इतिहास से छेड़छाड़ के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनेताओं, इतिहासकारों और आमजनों में एक बार फिर आक्रोश फैल गया है।

इसी मामले के मद्देनजर राज्य मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बुधवार को राजपूत संगठनों ने मुलाकात की। इस दौरान सीएम ने आश्वासन दिया कि अगर किताब में कोई गलत तथ्य है तो उसे ठीक किया जाएगा

दरअसल, साल 2017 में किताबों में कुछ तथ्यों को शामिल किया गया था। लेकिन पिछले वर्ष उन तथ्यों को बिना किसी जानकारी के बदल दिया गया और लेख को उसी लेखक के नाम से प्रकाशित कर दिया गया।

ई बुक में तो महाराणा प्रताप को युद्ध के दौरान प्रतिकूल परिस्थितियों में धैर्य, संयम और योजना के प्रति कमजोर तक बताया दिया गया था। साथ ही एक जगह ये कहा गया था कि हल्दीघाटी की लड़ाई बेनतीजा थी और महाराणा प्रताप उस लड़ाई को हार गए थे।

अब इसी मामले पर उस अध्याय के लेखक चंद्रशेखर बेहद आक्रोशित हैं। दूसरी ओर बुधवार को मेवाड़ के प्रतिनिधिमंडल ने सीएम अशोक गहलोत से मिलकर इसपर आपत्ति जताई।

अशोक गहलोत से जौहर स्मृति संस्थान और क्षत्रिय महासभा के प्रतिनिधियों ने प्रताप को लेकर सिलेबस में जो छेड़छाड़ की गई थी उस पर अपना विरोध दर्ज करवाया।

इसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि महाराणा प्रताप को लेकर अगर कोई पाठ्यक्रम में छेड़छाड़ हुई है तो उसे तुरंत दुरुस्त किया जाएगा। गहलोत ने पूरे मामले की देखरेख की जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा और परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास को दी है।

उन्होंने कहा, “महाराणा प्रताप किसी जाति धर्म के नहीं बल्कि हमारे शौर्य के प्रतीक हैं। इनकी वीरगाथा मेवाड़ में नहीं बल्कि पूरे देश में गाई जाती है। प्रताप सभी लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।”

गौरतलब है कि मेवाड़ राजघराने ने और राजपूत संगठनों ने आरोप लगाया है कि पाठ्यक्रम में महाराणा प्रताप की शौर्य गाथाओं को कम कर दिया गया है। हालाँकि राजस्थान के शिक्षा मंत्री का कहना है कि संघ से जुड़े लोगों ने अफवाह उड़ाई है। हमने पहले की तुलना में राणा प्रताप पर सामग्री ज्यादा बढ़ाई है।

वहीं, लेखक चंद्रशेखर का गुस्सा इसलिए है क्योंकि 10वीं की सामाजिक विज्ञान की किताब में उन्होंने महाराणा प्रताप के इतिहास को उल्लेखित किया था। लेकिन अध्याय एक और दो में संशोधन समिति ने परिवर्तन कर महाराणा प्रताप के इतिहास को कम कर दिया। इसके अलावा हल्दीघाटी युद्ध के परिणाम की समीक्षा को भी हटा दिया गया। साथ ही चेतक घोड़े से जुड़े इतिहास को भी कम कर दिया गया।

न्यूज़लॉन्ड्री का स्तम्भकार और दिल्ली दंगों में आरोपित शरजील उस्मानी ‘गायब’, वाम-इस्लामिकों ने कहा- पुलिस ने उठा लिया

मजहबी विचारधारा के समर्थकों और वाम-उदारवादियों ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘न्यूज़लॉन्ड्री’ के स्तंभकार शरजील उस्मानी, जिसने दिल्ली के दंगों के शूटर शाहरुख को ‘मुजाहिद’ कहा था, को यूपी पुलिस ने ‘उठा लिया’ है।

वामपंथियों के साथ ही कुछ मीडिया संस्थानों ने भी दावा किया है कि पुलिस साधारण कपड़ों में आकर उसे उठा ले गई, और पुलिस ने शरजील उस्मानी का ‘अपहरण’ कर लिया।

ट्विटर पर शरजील उस्मानी कि कथित अवैध गिरफ्तारी पर ट्वीट करते हुए अबू आला सुभानी ने लिखा है – “अभी कुछ समय पहले ही आजमगढ़, यूपी क्राइम ब्रांच से होने का दावा करने वाले 5 अज्ञात लोगों ने शरजील उस्मानी को अवैध रूप से हिरासत में लिया है। कोई वारंट, कोई रिसीविंग नहीं, कोई गिरफ्तारी ज्ञापन और परिवार को कोई जानकारी नहीं थी। उसका लैपटॉप, मोबाइल और किताबें भी ले गए।”

इसी तरह से ट्विटर पर कई ख़ास मजहबी नाम वाले लोगों ने शरजील उस्मानी कि गिरफ्तारी कि बात कही है और अपना रोष व्यक्त किया है। एक ट्विटर यूजर ने तो यहाँ तक लिखा है कि सरकार समुदाय विशेष के युवाओं से डरती है।

यहाँ पर यह ध्यान देना आवश्यक है कि इस बात की कोई पुष्टि नहीं है कि क्या यह वास्तव में पुलिस ही थी, जिसने कथित तौर पर शरजील उस्मानी को उठाया था।

बरखा दत्त की ‘शेरो’ आयशा रेना ने भी यह दावा किया है कि राज्य समुदाय विशेष के युवा नेताओं को परेशान कर रहा है और शरजील उस्मानी को तत्काल बिना किसी शर्त के रिहा कर दिया जाना चाहिए।

आएशा रेना की मित्र लदीदा फरजाना ने यहाँ तक कहा है कि शरजील उस्मानी को गिरफ्तार किया गया है।

शरजील उस्मानी कि गिरफ्तारी या फिर उसे घर से ‘उठाने’ जैसी किसी बात की अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है। जब ऑपइंडिया ने आज़मगढ़ पुलिस स्टेशन से संपर्क किया, तो पुलिस ने कहा कि वो ऐसे किसी भी ‘बंदी’ के बारे में नहीं जानते।

दिलचस्प बात यह है कि ‘अमर उजाला’ का दावा है कि उन्होंने अलीगढ़ के एसपी क्राइम ब्रांच अरविंद कुमार से सम्पर्क किया, जिन्होंने ‘गिरफ्तारी’ की पुष्टि की थी। सोशल मीडिया पर लोगों ने दावा किया है कि यह आजमगढ़ क्राइम ब्रांच ही थी, जिसने उस्मानी को हिरासत में लिया था।

आजमगढ़ और अलीगढ़ 700 किलोमीटर दूर स्थित हैं। अमर उजाला ने शरजील इमाम की तस्वीर के साथ शरजील उस्मानी की खबर छापी है। इसमें उसे ‘द वायर’ का स्तंभकार बताया गया है और कहा गया है कि उसे राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दो अलग ‘शरजील’ किसी शरजील उस्मानी को उठा लेने या बंदी बनाए जाने की बात पर संदेह पैदा करता है।

अमर उजाला कि रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

हालाँकि, एजेंडा के तहत ही ‘द वायर’ ने भी एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें दावा किया गया कि शरजील उस्मानी को दिसंबर, 2019 को CAA के विरोध-प्रदर्शनों के सम्बन्ध में गिरफ्तार किया गया था।

द वायर ने इसके लिए अमर उजाला की रिपोर्ट का हवाला दिया। इसलिए, या तो यह रिपोर्ट प्रकाशित करने से पहले ‘द वायर’ ने खुद पुलिस से संपर्क नहीं किया या फिर द वायर ने इस बात का उल्लेख नहीं किया कि पुलिस विवरण देने में असमर्थ थी क्योंकि अमर उजाला की रिपोर्ट उनके एजेंडे में फिट बैठती थी।

अफवाहें यह भी सामने आई हैं कि 2019 के हिंसक सीएए विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने की आशंका के कारण, शरजील उस्मानी भूमिगत होकर किसी ‘सुरक्षित स्थान’ पर चला गया हो।

लेकिन जब तक सच्चाई सामने आती है तब तक वामपंथी और इस्लामी समर्थक यह साबित करने का प्रयास कर रहे हैं कि राज्य कथित अल्पसंख्यकों का दमन कर रही है।

कौन है शरजील उस्मानी?

इस साल ही जून माह में, न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकार शरजील उस्मानी ने फरवरी 2020 के हिंदू विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली पुलिस पर पिस्टल तानने वाले शाहरुख पठान का महिमामंडन किया था।

उस्मानी ने आरोपित दंगाइयों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उसे शाहरुख पर गर्व है, जिसने अपने समुदाय के लिए लड़ाई लड़ी, जब पूरा राज्य, मशीनरी और ‘हिंदुत्व सेना’ स्पष्ट रूप से उन्हें मार रही थी और लूटपाट मचा रही थी।

इससे पहले, इसी शरजील उस्मानी ने भारतीय हितों को कमजोर करने के लिए लोगों को देश के पाँचवें स्तंभ के रूप में उपयोग करने के अपने इरादे की घोषणा की थी।

राजद्रोह के आरोपित शरजील इमाम के भड़काऊ भाषण सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शरजील उस्मानी उसका बचाव करने के लिए भी कूदा था। उसने लोगों से जेएनयू स्कॉलर से खुद को अलग न करने का आग्रह किया था और घोषणा की थी कि वह कट्टरपंथी के साथ है।

शरजील उस्मानी पर पुलिस ने लालकृष्ण आडवाणी पर आपत्तिजनक पोस्ट के लिए भी केस दर्ज किया था। इस पोस्ट में कथित रूप से कैप्टन पुनीश के साथ बीजेपी नेता की तस्वीर थी, जो बाबरी विध्वंस के दोषी थे।

बांग्लादेश: 200 साल पुराने शिव मंदिर की जमीन हड़पने के लिए मुस्लिमों ने की तोड़फोड़, Video वायरल

बांग्लादेश में एक बार फिर हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ का मामला सामने आया है। इस बार घटना बांग्लादेश के पिरोजपुर जिले के बारिसल विभाग के दिघिरजन (Dighirjan) गाँव की है।

बांग्लादेश दर्पण के अनुसार, वहाँ कुछ मुस्लिम युवकों ने सोमवार को 200 साल पुराने शिव मंदिर के बाहर जमकर तोड़फोड़ की। ये मंदिर निजी स्वामित्व वाली भूमि पर बना था और इसके चारों ओर बाँस की बाड़ से घेराव हो रखा था।

घटना का एक वीडियो भी इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में नीले रंग के कपड़ों में एक आदमी मंदिर के चारों ओर लगे बाँस के बाड़ को डंडों से तोड़ता दिख रहा है।

वीडियो में हिंदू युवक की आवाज भी सुनाई दे रही है। जो कहता है, “दर्शकों देखो कैसे हिंदुओं का यहाँ शोषण होता है। हम यहाँ सदियों से रह रहे हैं। लेकिन अब ये हमारे बाड़ को तोड़ रहे हैं। अवामी लीग सरकार के तहत देश में कानून और व्यवस्था की स्थिति को देखो।”

वहीं एक दूसरा युवक वीडियो में कहता सुना जा सकता है कि ये तोड़फोड़ लूट करने की कोशिश है और ये हरकत उनकी भावनाओं को आहत करने का एक कुत्सित प्रयास है।

वीडियो में हम देख सकते हैं कि तोड़फोड़ करने वाले युवक को लगातार देखने के बाद मौके पर खड़ा एक लाल टीशर्ट में युवक भी तोड़फोड़ करने लगता है। वह बाँस के बाड़ को उखाड़ता है और फिर दूसरी दिशा में उसे गिरा देता है।

रिपोर्ट के मुताबिक इलाके में जमीन हड़पने वालों की नजर काफी समय से हिंदुओं की संपत्ति पर थी। इसी कारण तहसीलदार मोहम्मद शाहजहाँ शेख, मोहम्मद हिदायत शेख और मोहम्मद कामरुल शेख वहाँ आए और बाँस के बाड़ को तोड़कर अवैध रूप से जमीन हड़पने की कोशिश की।

ये जमीन द्रिपन मजूमदार की है। वह शहीद जनानी कॉलेज में बतौर प्रिंसिपल काम करते हैं। वह हिंदू-बुद्धि-ईसाई एकता काउंसिल के उपाध्यक्ष भी हैं। मजूमदार का आरोप है कि इस मामले में उनके हस्तक्षेप के बाद भी उपद्रवी बाँस के बाड़ को तोड़ते रहे और उन लोगों ने उनके व उनके परिवार की महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार भी किया।

रिपोर्ट्स की मानें तो इस घटना के बाद स्थानीय लोगों का कहना है कि पैसा और रुतबा होने के बाद भी बांग्लादेश में हिंदुओं का शोषण जारी है। आखिर ये सब कब तक चलेगा? अन्याय के ख़िलाफ़ खड़ा होना पड़ेगा। अभी भी समय है, सब ठीक किया जा सकता है।

गौरतलब हो कि बांग्लादेश में हिंदुओं का उत्पीड़न लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले दिनों मई माह में ही हिंदुओं को प्रताड़ित करने वाली कई घटनाएँ सामने आई थीं।

वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन बांग्लादेश चैप्टर (world hindu federation bangladesh chapter) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार मई 2020 में ही हिंदुओं के 10 मंदिरों को तोड़ दिया गया था और देवी-देवताओं की मूर्तियों को क्षत-विक्षत कर दिया गया था।

भय बिनु होय न प्रीत: ड्रैगन को सामरिक और आर्थिक तरीकों से एक साथ घेरना ही उचित रास्ता

हाल ही में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गलवान घाटी में अतिक्रमण को लेकर भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक भिड़ंत हुई। भारतीय सेना ने इस सशस्त्र झड़प में बिहार रेजीमेंट के 20 सैनिकों के शहीद होने की पुष्टि की है। वहीं, दूसरी ओर चीनी पक्ष के भी 43 सैनिकों के हताहत होने की सूचना है। इससे जाहिर होता है कि चीन ऐसे समय में भी आक्रामक तेवर अपना रहा है, जबकि सारी दुनिया उसी के द्वारा फैलाई गई कोरोना नामक महामारी जैसे एक बड़े संकट का सामना कर रही है।

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों द्वारा की गई बर्बरता भारत और चीन के बीच 1993, 1996, 2003 और 2005 के द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन है। इन समझौतों में सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखने की बात कही गई है। यही बात 2018 में हुए वुहान और 2019 में हुए चेन्नई शिखर सम्मेलन में भी दुहराई गई है।

1962 में भी पंचशील समझौते का उल्लंघन करके चीन ने अपनी बदनीयती का परिचय दिया था। अब यह बात एक बार फिर सिद्ध हो गई है कि चीन एक अविश्वसनीय और अवसरवादी पड़ोसी है और उसके लिए आपसी समझौते, शांति और सौहार्द कोई मायने नहीं रखते हैं।

जिस प्रकार 1962 में भारतीय सैनिकों पर एलएसी का अतिक्रमण करने के चीन के आरोपों को खारिज करते हुए भारत ने साफ कर दिया है कि तनाव कम करने के लिए वह बातचीत को तो राजी है, मगर चीन की ऐसी हरकतों का माकूल जवाब देने में भी सक्षम है। स्पष्ट है कि भारत सीमा विवाद सुलझाने के लिए चीन के सैन्य दबाव के सामने झुकने को कतई तैयार नहीं है और विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष रूप से तैयार है।

यह एक स्थापित और सर्वज्ञात सत्य है कि सीमा विवाद और तदजन्य संघर्ष चीनी विस्तारवाद की रणनीति है। वह अंधाधुंध पूंजीनिवेश और अपार सैन्यबल के बलबूते अपनी विस्तारवादी भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करना चाहता है।

चीन की इस परोक्ष आक्रमण की नीति के प्रति आगाह करते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने 19 अक्टूबर, 1960 के “पांचजन्य” में लिखा था-

“आज हमारे पड़ोसी चीन ने हमारी प्रभुता को चुनौती दी है। यह सत्य है कि उसने यह चुनौती स्पष्ट युद्ध की घोषणा करके नहीं दी है तथा हमारे उसके साथ सभी तरह के दौत्य संबंध पूर्ववत बने हुए हैं। किंतु इससे कोई इंकार नहीं कर सकता कि चीन ने आक्रमण किया है।”

आज एक बार फिर वैसी ही स्थिति बन गई है। इसलिए चीन की आर्थिक और सामरिक शक्ति से डरने की नहीं बल्कि उसकी आँख में आँख डालकर बात करने की आवश्यकता है। भारत की वर्तमान सरकार ने भी यही रुख अख्तियार किया है।

आज चीन दूसरी विश्वशक्ति है। उसके विस्तारवाद और दबाव का सफल प्रतिरोध विश्व बिरादरी में भारत की छवि को मजबूत करते हुए उसकी अंतरराष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को मजबूत आधार प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने गतिरोध के बीच स्वयं लद्दाख जाकर भारत के मजबूत इरादों का खुलासा कर दिया है।


वैसे तो चीन का भारत के साथ सीमा-विवाद कोई नई और अनोखी बात नहीं है। डोकलाम प्रकरण भी पुरानी बात नहीं है। मगर पिछले कुछ वर्षों में भारत द्वारा अपने सीमाई क्षेत्रों में सड़क, पुल, मोबाइल टॉवर और हवाई पट्टी आदि के निर्माण में विशेष तेजी दिखाई गई है।

ऐसी ढाँचागत परियोजनाओं को लेकर जो सक्रियता और सजगता दिखाई गई है, उससे पड़ोसी देश चीन बौखला गया है। इसलिए अभी उसका उद्देश्य भारत के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण गलवान घाटी में भारत की सड़क विकास परियोजना को पूरा होने से रोकना है ताकि वह भारत पर अपनी सामरिक बढ़त बनाए रख सके।

चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया है कि विवादित क्षेत्र में भारत द्वारा किए जा रहे रक्षा निर्माण कार्यों के विरुद्ध सीमा नियंत्रण की कार्रवाई की गई है। दरअसल, भारत चीन सीमा-विवाद की असल वजह क्षेत्र विशेष में बनाई जा रही सड़क मात्र नहीं, बल्कि भारत का एशियाई एवं वैश्विक राजनीति में तेजी से बढ़ता कद है।

भारत की यह उपलब्धि चीन के लिए असहनीय है क्योंकि वह एशिया महाद्वीप की एकमात्र महाशक्ति बना रहकर अपने वर्चस्व का स्थायित्व चाहता है। इस बात की पुष्टि प्रभावशाली अमेरिकी थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट की हालिया रिपोर्ट करती है जिसमें दावा किया गया है कि दक्षिण एशिया में चीन का तात्कालिक लक्ष्य विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की हर प्रकार की चुनौती को सीमित करना और अमेरिका के साथ उसकी तेजी से मजबूत होती साझेदारी को बाधित करना है।


चीन का असीम आर्थिक विकास उसके भू-राजनीतिक विस्तारवाद का प्रमुख अस्त्र है। आर्थिक सुधारों के बाद से चीन सबसे ज्यादा तेजी से आर्थिक वृद्धि कर रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि इस रफ्तार से बढ़ते हुए वह जल्दी ही दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति अमेरिका से भी आगे निकल जाएगा।

आर्थिक स्तर पर अपने पड़ोसी देशों से जुड़ाव के चलते चीन पूर्वी एशिया के आर्थिक विकास का इंजन जैसा बना हुआ है और इस कारण क्षेत्रीय मामलों में उसका प्रभाव बहुत बढ़ गया है। इस चिंता को ध्यान में रखते हुए अमेरिका ने भारत, आस्ट्रेलिया एवं जापान के साथ मिलकर एक चतुष्कोणीय गठबंधन तैयार किया है।


1949 में माओ के नेतृत्व में हुई साम्यवादी क्रांति के बाद चीन ने अर्थव्यवस्था के साम्यवादी माॅडल को अपनाया। इस माॅडल में चीन ने औद्योगिक अर्थव्यवस्था का आधार खड़ा किया। विदेशी मुद्रा की कमी के कारण चीन ने आयातित सामानों को धीरे-धीरे घरेलू स्तर पर ही तैयार करवाना शुरू किया। चीनी नेतृत्व ने 1970 के दशक में कुछ बड़े निर्णय लिए। 1973 में चीनी प्रधानमंत्री चाऊ एनलाई ने कृषि, उद्योग, सेना और विज्ञान प्रौद्योगिकी के चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे।

1978 में चीन के तत्कालीन नेता देंग श्याओपेंग ने चीन में आर्थिक सुधारों की शुरुआत करते हुए “खुले द्वार की नीति” की घोषणा की। चीन ने ‘शाॅक थेरेपी’ के बजाय अपनी अर्थव्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से निवेश के लिए खोला। नई आर्थिक नीतियों के कारण उद्योग और कृषि दोनों ही क्षेत्रों में चीन की वृद्धि दर काफी तेज रही है।

व्यापार के नए उदारवादी कानूनों तथा विशेष आर्थिक क्षेत्रों के विकास के परिणामस्वरूप चीन पूरे विश्व में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए सबसे आकर्षक देश बनकर उभरा है। उल्लेखनीय आर्थिक वृद्धि करने वाले चीन के पास विदेशी मुद्रा का अपरिमित कोष है और इसी के बल पर वह दूसरे छोटे-बड़े देशों में व्यापक स्तर पर आर्थिक, राजनीतिक और सामरिक निवेश में जुटा हुआ है।

चीन 2001 में विश्व व्यापार संगठन में शामिल हो गया और इस संगठन के कमजोर कानूनों, सस्ते श्रम और कुशल एवं सक्षम प्रशासनिक व्यवस्था के कारण उसने विश्वभर के बाजारों को चीनी सामानों से पाट दिया है।

अब चीन की योजना विश्व अर्थव्यवस्था से अपने जुड़ाव को और सशक्त और प्रभावशाली बनाने की है ताकि भविष्य में वह विश्व-व्यवस्था को मनचाहा स्वरूप दे सके। इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाते हुए चीन अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना “वन बेल्ट, वन रोड” को धरातल पर उतारने की कोशिश में लगा है।

इस परियोजना के माध्यम से चीन दुनिया की लगभग साठ फीसद आबादी को अपने साथ जोड़ने की जुगत में है, जिससे स्वयं द्वारा नियंत्रित एक सशक्त ग्लोबल सप्लाई चेन तैयार की जा सके और संबंधित देशों की निर्भरता सुनिश्चित की जा सके। इस संदर्भ में चीन द्वारा अप्रैल, 2017 में एक शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें 29 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, 70 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख, दुनिया भर के 100 मंत्रिस्तरीय अधिकारी और विभिन्न देशों के 1200 प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए थे।

अमेरिका और पाकिस्तान भी इसमें शामिल हुए परन्तु भारत ने इस पर अपनी आपत्ति दर्ज की थी। दरअसल, चीन द्वारा निर्मित किया जा रहा ‘चाइना पाकिस्तान इकोनोमिक काॅरिडोर’ पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजर रहा है जोकि भारत का अभिन्न अंग है। इसलिए भारत का स्पष्ट मत है कि चीन का यह कदम भारत की संप्रभुता एवं अखंडता का उल्लघंन कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि यदि चीन “वन बेल्ट, वन रोड” रूपी अपनी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अमलीजामा पहनाने में सफल होता है तो दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन बिगड़ जाएगा और यह भारत के लिए हानिकारक सिद्ध होगा।

दबाव और लालच की राजनीति करते हुए चीन भारत के पड़ोसी देशों में भारी निवेश कर रहा है। इसका ताजा उदाहरण – नेपाल द्वारा भारतीय विरोध के बावजूद तीन भारतीय क्षेत्रों- लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियुधरा को संवैधानिक संशोधन के माध्यम से अपने देश के नक्शे में शामिल किया जाना है। चीन म्यांमार और श्रीलंका में बंदरगाह बनाने में भी भारी निवेश कर रहा है। इसी प्रकार वह भारत के एक और पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी अपनी पैठ बनाने के लिए प्रयासरत है।

चीन द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा का लगातार उल्लघंन किया जा रहा है। चीन ने विश्व के अधिकांश देशों के साथ सीमा विवाद सुलझा लिया है जबकि भारत के साथ यह विवाद अभी भी बना हुआ है। चीन विश्व के समक्ष यह प्रदर्शित करना चाहता है कि सीमा विवाद का समाधान न हो सकने का मूल कारण भारत है।

भारत चाहता है कि सीमा का समाधान सेक्टर के अनुसार होगा, वहीं चीन पैकेज डीलिंग पर बल दे रहा है। चीन अरुणाचल प्रदेश सहित 90,000 वर्ग किमी भारतीय क्षेत्रफल पर अपना दावा प्रस्तुत कर रहा है। इससे स्पष्ट है कि चीन जानबूझकर सीमा विवाद को सुलझाना नहीं चाहता ताकि वह भारत पर निरंतर सामरिक दबाव बनाए रख सके।

चीन का लंबे समय से आसियान देशों जिनमें वियतनाम, ब्रूनेई, फिलीपींस और मलेशिया आदि हैं, के साथ दक्षिण चीन सागर में स्थित स्पार्टले और पारासेल द्वीप को लेकर विवाद चल रहा है। चीन ने इन एशियाई देशों के अनन्य आर्थिक क्षेत्र में अतिक्रमण कर वहां अपनी संप्रभुता के दावों के लिए 9 स्थानों पर डैश लगाकर विवाद बढ़ा दिया है।

दरअसल, चीन दक्षिण चीन सागर में पाए जाने वाले प्राकृतिक संसाधनों, प्राकृतिक तेल, गैस, मत्स्य संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है। इन द्वीपों पर नियंत्रण कर चीन अपने आर्थिक प्रभाव और क्षेत्र का विस्तार करना चाहता है।

इस विवाद के कारण अनन्य आर्थिक क्षेत्र का निर्धारण नहीं हो पा रहा है। चीन के द्वारा दक्षिण चीन सागर में स्थित द्वीपों में सैनिक अड्डे के निर्माण का भी प्रयत्न किया जा रहा है और चीन ने इन द्वीपों पर एक हवाई पट्टी भी बनाई है।

हाल ही में दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के साथ मिलकर अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की है कि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय द्वारा दक्षिण चीन सागर के विवाद पर फिलीपींस के पक्ष में दिए गए निर्णय का त्वरित क्रियान्वयन होना चाहिए। इस मामले में न्यायालय के निर्णय की अवहेलना करके चीन हठधर्मिता के साथ दावा कर रहा है कि यह समुद्री क्षेत्र का विवाद नहीं है, बल्कि चीन की भौगोलिक संप्रभुता का मुद्दा है, जिस पर न्यायाधिकरण निर्णय नहीं दे सकता है।

चीन ने नवंबर, 2013 में पूर्वी चीन सागर में अपना पहला एयर डिफेंस आइडेंटिटी जोन बनाकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक बार फिर अपना दबदबा दिखाने की कोशिश की है। उसने इस जोन में न सिर्फ विवादों से घिरे सेंकाकू द्वीप समूह के साथ जापान, दक्षिण कोरिया तथा फिलीपींस के वायु निषेध क्षेत्रों को शामिल किया है, बल्कि विदेशी विमानों के लिए प्रवेश के कड़े नियम कानून भी जारी किए हैं। यह चीन की मनमानी है। दरअसल, धौंसपट्टी और भू-क्षेत्रों को हड़पने की चीन विस्तारवादी नीति से उसके लगभग दर्जन भर पड़ोसी देश उत्पीड़ित हैं।

पाकिस्तान द्वारा चीन को सर्वाधिक वरीयता वाले राज्य का दर्जा दिया गया है। चीन के द्वारा पाकिस्तान में बड़ा निवेश किया जा रहा है। चीन, पाकिस्तान का बचाव अपनी वीटो पावर के बल पर सुरक्षा परिषद में भी करता है। चीन द्वारा गिलगिट, बाल्टीस्तान क्षेत्र में सेना की तैनाती भारतीय सुरक्षा के लिए एक नवीन चुनौती है। कराकोरम राजमार्ग के माध्यम से चीन अपनी सामरिक स्थिति को और सुदृढ़ कर रहा है।

भारत को घेरने के लिए चीन के द्वारा पाकिस्तान के ग्वादर पत्तन का विकास किया गया है ताकि ग्वादर पत्तन से पाकिस्तान को चीन से जोड़ा जा सके। वर्तमान में चीन द्वारा दक्षिण एशिया में भारत को घेरने के लिए पड़ोसी कार्ड की नीति अमल में लाई जा रही है जो भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ एवं ‘नेबरहुड फर्स्ट’ की नीति के लिए संकट का कारण बन सकती है।

वर्तमान में अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक और सामरिक संबंधों का तेजी से विकास हो रहा है और वह भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक और सामरिक सहयोगी बन रहा है। अमेरिका द्वारा चीन को हथियारों का निर्यात नहीं किया जाता। इसीलिए चीन और अमेरिका के बीच सामरिक संबंध नगण्य हैं। अमेरिका की भारत के साथ बढ़ती निकटता से पैदा हुई बौखलाहट के कारण चीन द्वारा सीमा विवाद के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया जा रहा है और वह भारत पर दबाव बनाना चाहता है।

अमेरिका द्वारा भारत को साथ लेकर चीन को प्रतिसंतुलित करने की नीति अपनाई जा रही है। भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों के साथ समानांतर संबंध विकसित करना चाह रहा है परंतु इस स्थिति में भारत को अवसर का लाभ उठाते हुए अमेरिका के साथ संबंधों को मजबूत बनाकर चीन के साथ बराबरी के स्तर पर संवाद करना चाहिए ताकि चीन को यह अहसास कराया जा सके कि भारत देशकाल के अनुरूप अपनी परंपरागत सॉफ्ट डिप्लोमेसी को एग्रेसिव डिप्लोमेसी में भी बदलना जानता है।

भारत और चीन दोनों की अर्थव्यवस्थाएं प्रतिस्पर्धी हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोनों काफी हद तक समान वस्तुओं का निर्माण और निर्यात करते हैं। परंतु चीन से आयातित सस्ती वस्तुओं से भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है। चीन वर्तमान में भारतीय उत्पादों का तीसरा बड़ा निर्यात बाजार है। वहीं, चीन वस्तुओं का भारत सबसे ज्यादा आयात करता है और भारत चीन के लिए एक सर्वाधिक संभावनाशील बाजार है। यहाँ सस्ते चीनी उत्पादों के उपभोक्ताओं की बड़ी भारी संख्या है।

चीन से भारत मुख्यतः इलेक्ट्रिक उपकरण, मेकेनिकल सामान, कार्बनिक रसायनों आदि का आयात करता है। वहीं, भारत से चीन को मुख्य रूप से खनिज ईंधन और कपास आदि का निर्यात किया जाता है। भारत में चीनी टेलीकॉम कंपनियाँ और चीनी मोबाइल का मार्केट बहुत बड़ा है। यहाँ तक कि चीन की कंपनी शंघाई अर्बन ग्रुप काॅर्पोरेशन दिल्ली मेट्रो का भी काम कर रही है।

भारत का थर्मल पावर एवं सोलर मार्केट चीनी उत्पादों पर निर्भर है। दवाओं के लिए कच्चे माल की प्राप्ति के लिए भारत पूरी तरह से चीन पर निर्भर है जिसका दुखद परिणाम कोरोनाकाल में लाॅकडाउन के कारण चीन से कच्चे माल की आपूर्ति न हो सकने के कारण दवाओं के उत्पादन एवं आपूर्ति में कमी और यकायक हुई मूल्य वृद्धि के रूप में देखा गया। इस समस्या से शीघ्र छुटकारा प्राप्त किए जाने की आवश्यकता है। वरना भविष्य में भारत को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।

भारत चीन द्विपक्षीय व्यापार के संदर्भ में वर्ष 2019 में भारत ने चीन से 75 अरब डॉलर की वस्तुओं का आयात किया था जबकि इस दौरान भारत ने चीन को सिर्फ 18 अरब डॉलर की वस्तुओं का निर्यात किया। स्पष्ट है कि भारत को 57 अरब डाॅलर के व्यापार घाटे का सामना करना पड़ा। इससे बचने के लिए भारत को चीन पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करनी होगी। इसके लिए घरेलू स्तर पर कच्चे माल की उपलब्धता के साथ उत्पादक गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है।

भारत को तत्काल नई औद्योगिक इकाइयाँ लगाने और व्यापार करने के नियमों को सरल बनाने की आवश्यकता है। नौकरशाही और लालफीताशाही जनित लेटलतीफी और अव्यवस्था को भी दूर किया जाना चाहिए। यह एक चिंतनीय प्रश्न है कि भारत में श्रम सस्ता होने के बावजूद उत्पादन लागत चीन के मुकाबले इतनी अधिक क्यों है ?

यह सर्वविदित है कि डब्लूटीओ के अधीन भारत चीनी या अन्य किसी देश की वस्तुओं के आयात पर प्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंध नहीं लगा सकता है, परन्तु परोक्ष रूप से आयात शुल्कों में वृद्धि करके या सुरक्षा मानकों के आधार पर ऐसी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

गौरतलब है कि दिसंबर, 2010 में भारत द्वारा चीन से आयातित दूध और दूध से निर्मित अन्य वस्तुओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, क्योंकि चीनी दूध में मोलामिन नामक पदार्थ से कई चीनी बच्चों की मृत्यु हो गई थी। चीनी वस्तुओं के आयात और उपयोग के सामरिक प्रभावों के विषय में भारतवासियों में जागरूकता पैदा किया जाना अति आवश्यक है।

स्वदेशी उत्पादों का अधिकाधिक उपयोग चीन के सामरिक सामर्थ्य को क्रमशः कमजोर करेगा। स्वदेशी, स्वावलंबन और संकल्प चीन के आर्थिक वर्चस्व और क्रमिक विस्तारवाद का सबसे कारगर इलाज है।

सरकार को इस दिशा में व्यापक विचार-विमर्श करके ठोस पहल करनी चाहिए ताकि वर्षों पुरानी इस समस्या का समाधान करके भारत की आत्मनिर्भरता के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा को दूर किया जा सके। वस्तुतः आर्थिक आत्मनिर्भरता ही चीन की सामरिक हेकड़ी का सही और समीचीन जवाब है।

चीन जैसे खलों के बारे में ही गोस्वामी तुलसीदास ने ‘रामचरित मानस’ में लिखा है:

“विनय न मानत जलधि जड़, गए तीनि दिन बीत। बोले राम सकोप तब, भय बिनु होय न प्रीत।”

अपनी सामर्थ्य के तीव्र विकास, अन्य पड़ोसी देशों के साथ विश्वसनीय मैत्री-संबंध और चीन के विस्तारवाद से त्रस्त देशों के साथ गठजोड़ बनाकर ही भारत चीन की चुनौती से निपट सकता है।

गुंडे विकास दुबे और गैंग के पकड़े जाने पर खुश होने के बजाय कॉन्ग्रेस खेल रही ‘ब्राह्मण राजनीति’

कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाला मोस्टवॉन्टेड गैंगस्टर विकास दुबे को आखिरकार मध्य प्रदेश के उज्जैन में गिरफ्तार कर लिया गया है। आज बृहस्पतिवार (जुलाई 09, 2020) सुबह ही विकास दुबे महाकालेश्वर मंदिर पहुँचा, जहाँ उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस समय मध्य प्रदेश पुलिस गैंगस्टर विकास दुबे से अज्ञात जगह पर पूछताछ कर रही है। अदालत से रिमांड मिलने के बाद उसे उत्तर प्रदेश पुलिस को सौंप दिया जाएगा।

कॉन्ग्रेस कर रही गैंगस्टर की गिरफ्तारी का राजनीतिकरण

कॉन्ग्रेस के साथ कुछ अन्य राजनीतिक दल भी गैंगस्टर विकास दुबे की गिरफ्तारी को जातिवादी रंग में ढालकर आठ पुलिसकर्मियों की मौत पर भी राजनीतिक लाभ लेने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस नेता जितिन प्रसाद ने इस पर ट्वीट में लिखा है कि जिस तरह से योगी सरकार विकास दुबे के प्रकरण को लेकर चल रही है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार असली कहानी उजागर नहीं करना चाहती।

जितिन प्रसाद ने एनकाउंटर में मारे गए अमर दुबे के परिजनों की गिरफ्तारी का राजनीतिकरण करते हुए लिखा है कि दुबे गैंग के सदस्य के असहाय माता-पिता एवं 9 दिन पहले शादी हुई खुशी दुबे (अमर की विधवा) के उत्पीड़न से क्या होने वाला है?

जितिन प्रसाद ने ट्वीट किया है – “प्रभाकर मिश्रा जो हिरासत में था, उसकी मुठभेड़ दिखाकर एनकाउन्टर करना इस बात को दर्शाता है सरकार असली कहानी को छिपाने में लगी है ताकि बड़े चेहरे बेनकाब न हो जाए।” गौरतलब है कि विकास दुबे का सहयोगी अमर दुबे कल ही एनकाउंटर में मारा गया था और उसकी नौ दिन पहले ही शादी हुई थी।

इतना ही नहीं, जैसे ही विकास दुबे को पकड़ने के लिए UP पुलिस अभियान में जुटी, कॉन्ग्रेस के वॉट्सऐप ग्रुपों में योगी सरकार को ब्राह्मण-विरोधी बताने के लिए इसे आधार बनाया जा रहा था। जितिन प्रसाद ने तो यहाँ तक कह डाला था कि योगी सरकार के रहते हुए ब्राह्मणों पर अत्याचार बढ़े हैं।

इसी बीच विकास दुबे की गिरफ्तारी को लेकर मीडिया कई तरह के संदेह जता रही है। कुछ लोगों का मानना है कि विकास दुबे को पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया बल्कि विकास दुबे ने आत्मसमर्पण किया है। ऐसे में गैंगस्टर विकास दुबे की माँ का बयान आया है कि सरकार को जो उचित लगे उन्हें वही करना चाहिए।

एक वीडियो में गैंगस्टर विकास दुबे की माँ कहते सुनाई दे रही हैं – “इस टाइम तो वो सपा में है, भाजपा में है नहीं… सरकार को जो उचित लगे कार्रवाई करे।”

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गैंगस्टर विकास दुबे की गिरफ्तारी पर कहा, “मैं एमपी पुलिस को विकास दुबे की गिरफ्तारी के लिए बधाई देता हूँ। मैं लगातार उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के संपर्क में हूँ और यूपी के सीएम आदित्यनाथ से भी बात की है। आगे की जाँच के लिए, उसे यूपी पुलिस को सौंप दिया जाएगा। दोनों राज्यों की पुलिस समन्वय में काम करेंगी।”

वहीं, विकास दुबे के परिवार के करीबियों का कहना है कि गैंगस्टर विकास दुबे नास्तिक था और वह मंदिर में सिर्फ सिर्फ इस कारण से छुपा था ताकि पुलिस मंदिर में गोली ना चलाए और वह ज़िंदा बच सके।

महाकाल मंदिर के पुजारी आशीष का भी कहना है कि पुलिस द्वारा एनकाउंटर में मारे जाने के डर से विकास दुबे आत्मसमर्पण करना चाहता था। पुजारी के अनुसार मंदिर परिसर पहुँचने के बाद विकास दुबे अपने बारे में बताने लगा था।

विकास दुबे की गिरफ्तारी को लेकर मीडिया के एक वर्ग का अभी तक मानना है कि पुलिस की कार्रवाई उनकी समझ से परे है। मीडिया का यह वर्ग यकीन ही नहीं कर पा रहा है कि विकास दुबे पकड़ लिया गया है। मीडिया का यह वर्ग अभी तक यह समझने की कोशिश कर रहा है कि आखिर विकास दुबे की गिरफ्तारी में वो कौन सा कोण अपने लायक तलाश सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के कानपुर में पकड़ने गई टीम के 8 पुलिसवालों की हत्या के मामले में वांछित अपराधी विकास दुबे की गिरफ्तारी से पहले उसका बिकरु गाँव स्थित मकान ढहा दिया गया था। इसके साथ ही विकास के मकान में खड़े ट्रैक्टर सहित 60 लाख की कीमत वाली दो एसयूवी गाड़ियाँ भी तोड़ दी थीं।

प्रेम के प्रतीक हैं अर्धनारीश्वर शिव! श्रावण मास में जानिए वेदों के रुद्र से लोक के भोलेनाथ तक की त्र्यम्बक यात्रा

समाज के त्यक्त, तिरस्कृत और भयोत्पादक तत्त्वों को स्नेहपूर्वक अंगीकार करने वाले देवता हैं शिव। जिस साँप बिच्छू को देखकर समाज डर जाता है, मार देना चाहता है, उसे शिव आभूषण बना लेते हैं। जिस हालाहल विष को समस्त देव-दानव त्याग देते हैं उसे शिव सहर्ष पीते हैं।

समाज गाय से दूध लेता है, युवा बैल से कृषि-कार्य करवाता है लेकिन बूढ़े बैल की उपेक्षा करता है। शिव उस बूढ़े बैल को अपनी सम्पत्ति बनाते हैं। जिस श्मशान में कोई व्यक्ति नहीं जाना चाहता, शिव उसी श्मशान की राख से अपना शृंगार करते हैं। अपने विवाह में, वरयात्रा में जब हर व्यक्ति सूट-बूट पहन, सजा-सँवरा बाराती लेकर जाता है तब शिव मंगल-अवसरों पर तिरस्कृत नंग-धड़ंग, भूत-पिशाच, कुरूप-कुलक्षण बारातियों के साथ अनहद नाद के आनन्द में दूल्हा बनकर निकलते हैं।

आशुतोष हैं शिव! शिव सभी देवताओं की तुलना में शीघ्र प्रसन्न होते हैं, यथेष्ट प्रदान करते हैं। कोई वस्तु व्यक्ति तभी दे सकता है जब उसे खुद कुछ न चाहिए हो। और शिव इसमें बेजोड़ हैं। इसीलिए देवाधिदेव महादेव हैं, औघड़ हैं, दानी हैं बिना किसी भेद-भाव के। राम को तो कोई भी वरदान दे सकता है, रावण को भी यथेच्छित वर देने वाले देव हैं शिव! धनी भक्तों के लिए तो सब देव हैं, किन्तु गरीबों के लिए केवल शिव हैं। बस जलधारा से मुदित हो जाते हैं। पार्थिव शिव और जलाभिषेक! मिट्टी और पानी से अधिक जगत के अधिपति को पूजन के लिए कुछ नहीं चाहिए।

लोक में सर्वाधिक सहजतया स्वीकार्य हैं शिव! भाँग-गाँजा का सेवन और मदिरापान करने वाला हमारे समाज की दृष्टि में निन्दनीय व्यक्ति भी खुद को शिवभक्त समझकर गौरवान्वित हो उठता है। वह जो जहर पीता है उसे शिव का प्रसाद बताकर अपना निर्णय सही ठहराता है। शिव सृष्टि के हर उस वंचित शोषित प्राणी के प्रतिनिधि हैं, जो कुल, गोत्र, जाति, धन आदि लोक में आवश्यक समझे जाने वाले तत्त्वों से हीन है।

भारत में प्रेम का प्रतीक हैं अर्धनारीश्वर शिव! शिव स्त्री-पुरुष की समानता और सहधर्मिता के प्रतीक हैं। शिव एक पुरुष हैं जो स्त्री को अपनी शक्ति मानते हैं। उस शक्ति के अभाव में स्वयं को शव मानते हुए समग्र चेतना को सन्देश देते हैं कि स्त्री-शक्ति के बिना पुरुष कुछ भी कर सकने में असमर्थ है। उन्हें ससुराल में न बुलाए जाने या अपने अपमान की तनिक भी चिन्ता नहीं है।

हर परिस्थिति में दृढ़ हैं, अडिग हैं। किन्तु जब सती के मृत्यु की सूचना मिलती है, तो ताण्डव करते हैं। महाप्रलय करने पर उतर आते हैं। विलाप करते हैं, उन्मत्त हो उठते हैं। जिस पवित्रतम यज्ञ की रक्षा करना देवताओं का दायित्व है, उस यज्ञ के विध्वंसक बन जाते हैं। इसीलिए संहारक हैं शिव! शिव वो प्रेयस हैं जो अपनी प्रेयसी का अपमान नहीं सहन कर सकते।

सभी देवताओं में सबसे निर्धन हैं शिव! त्र्यम्बक (तीन आँखों वाले) हैं, सुन्दर रूप नहीं है, दिगम्बर हैं, साँप बिच्छू उनके आभूषण हैं। कुल मिलाकर एकदम विपन्न! एक तरफ विष्णु भी हैं- सर्वांग-सुन्दर, पीताम्बर, सुन्दर आभूषणों से सजे सँवरे, क्षीरसागर में शेष-शय्या पर लेटे हुए, सभी सुख सुविधाओं से सम्पन्न! फिर भी भारत की कोमल-हृदय स्त्रियों को पति शिव जैसा हो, ऐसी ही अभिलाषा में सोमवार का व्रत रखती हैं।

भारत की स्त्रियाँ अपने लिए ‘रीच और हैण्डसम’ पति की चिन्ता न करके ‘औघड़’ की कामना में तपस्या करती जाती हैं। भारतीय स्त्री को विष्णु के चरणों के पास लक्ष्मी बन कर बैठना प्रिय नहीं है। उन्हें शिव का वह सान्निध्य प्रिय है जो अर्धांगिनी बना ले, हर विषय पर शिव-पार्वती संवाद करें, अपमान होने पर ताण्डव कर दें, संहारक बन जाएँ।

लोक और शास्त्र की अनगिनत कहानियों का विषय हैं शिव! वेदों के रुद्र से लोक के भोलेनाथ तक की यात्रा जब एक संस्कृत का विद्यार्थी सोचता है तो ‘शिव’ का लेखन कैलाश और हिमालय जैसा विशाल विषय बन जाता है। यह बातें संस्कृत के कुछ पद्यों का अनुवाद भर हैं। शिव का दर्शन है, शिव के पुराण हैं, शिव के महाकाव्य हैं, शिव की स्तुतियाँ हैं और लोककथाओं का तो आनन्त्य है।

भारतीय पञ्चाङ्ग का सम्पूर्ण श्रावण मास शिवभक्तों के लिए उल्लास का पर्व है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों के साथ-साथ हर नगर हर गाँव का शिवमन्दिर पूरे महीने एक उत्सव के रंग में रंगा रहता है। प्रत्येक घर में पार्थिव-शिव का पूजन भगवान शंकर की व्यापकता को द्योतित करने के लिए पर्याप्त है।

चीन-जनित महामारी के इस दौर में भक्तों की बाह्य उत्सव-धर्मिता कुछ फीकी है लेकिन अन्तर्मन में जो उल्लास क्षण-प्रतिक्षण विकसित होता रहता है, वही शिवत्व है। हमारे लोक-मन में सावन प्रकृति की हरियाली से लेकर चूड़ियों और साड़ी की हरियाली तक रंगा बसा है। यह अच्छा अवसर है सावन में घर बैठकर अपने अन्दर के शिवत्व को पहचानने का, खुद को जानने का। आइए इस पवित्र मास में हम शिव को पढ़ें, शिव को समझें, और ‘हम ही शिव हैं’ इसका अनुभव करें। हर हर महादेव!

कनपुरिया विकास दुबे को उज्जैन में पड़ा कंटाप: देखिए पूरा वीडियो, मजेदार है ऑडियो

155 घंटे से फ़रार चल रहा कानपुर एनकाउंटर का मुख्य आरोपित विकास दुबे उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार कर लिया गया। ख़बरों के मुताबिक़ वह उज्जैन के महाकाल मंदिर में दर्शन करने के लिए भीतर दाख़िल हो रहा था तभी उसे मंदिर के एक सुरक्षाकर्मी ने पहचाना। जिसके बाद उसने इस मामले की सूचना पुलिस को दी। 

गिरफ्तारी के दौरान पूरे घटनाक्रम के तमाम वीडियो सामने आए। एएनआई द्वारा साझा किए गए इस वीडियो में कुछ बातें मोटे तौर पर समझ आती हैं। गिरफ्तारी के ठीक बाद उसने अपनी पहचान बताई। इस घटना का एक वीडियो है, जिसमें पुलिस उसे पकड़ कर ले जा रही है। तभी वह चिल्ला कर कहता है, “मैं विकास दुबे हूँ, कानपुर वाला।” ऐसा कहने के ठीक बाद पीछे खड़े पुलिसकर्मी ने उसे एक थप्पड़ भी मारा और शांत रहने के लिए कहा। 

पत्रकार बृजेश मिश्रा के वीडियो में इस गिरफ्तारी के घटनाक्रम का शुरुआती हिस्सा नज़र आता है। जिसमें महाकाल मंदिर के कई सुरक्षाकर्मी और पुलिस वाले विकास दुबे को पकड़ कर बाहर ले आ रहे हैं। इस वीडियो में विकास दुबे स्पष्ट तौर पर अकड़ कर चलता हुआ नज़र आ रहा है। इस वीडियो में पुलिसकर्मी उससे कुछ दूरी पर मौजूद हैं।  

घटनाक्रम के और भी कई वीडियो फेसबुक से लेकर ट्वीटर जैसे तमाम सोशल मीडिया मंच पर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो के माध्यम से एक बात साफ़ होती है और कई सवाल उठते हैं।

हालाँकि एक बात साफ़ है कि जिस तरह का अपराध उसने किया है, उसे लेकर उसके ज़हन में कोई मलाल नहीं है। दूसरा क्या यह आत्मसमर्पण था? एक दिन पहले तक विकास दुबे की असल लोकेशन फ़रीदाबाद थी, ख़बर राजस्थान जाने की भी थी? पुलिस हाई एलर्ट पर थी, ऐसे में विकास दुबे मध्य प्रदेश के उज्जैन तक कैसे पहुँचा?

सवाल तमाम हैं लेकिन घटनाक्रम की इकलौती सकारात्मक बात यह है कि विकास दुबे फिलहाल पुलिस की गिरफ़्त में है। उसके कई साथियों का भी पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है। विकास दुबे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई इसलिए भी ज़रूरी है कि आने वाले समय में इस मानसिकता और तौर-तरीक़े से मिलता-जुलता दूसरा चेहरा सामने न आए।

विकास दुबे गैंग के पाँच टॉप गैंगेस्टर, जिनका यूपी पुलिस की टीम ने विभिन्न एनकाउंटर में किया काम तमाम

कानपुर के चौबेपुर के बिकरू गाँव में नक्सलियों की तरह 8 पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या करने वाला मोस्टवांटेड हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे एमपी के उज्जैन में पकड़ा जा चुका है। विकास दुबे की गिरफ्तारी को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान न उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की। साथ ही एमपी पुलिस उसे अब यूपी पुलिस को सौंप देगी।

एएनआइ की रिपोर्ट के अनुसार विकास दुबे ने उज्जैन के महाकाल मंदिर के गार्ड से चिल्ला- चिल्लाकर कहा कि जानते हो मैं विकास दुबे हूँ। इसके बाद महाकाल के सुरक्षा गार्डों ने तत्परता दिखाते हुए उसे पकड़कर मध्यप्रदेश पुलिस के हवाले कर दिया।

बता दें यूपी पुलिस और एसटीएफ की टीम ने कुख्यात अपराधी विकास दुबे के गैंग के सभी गुर्गों पर भी अपनी नज़र बनाए हुए है। इसी क्रम में पुलिस ने अब तक विकास दुबे के पाँच साथियों को अलग-अलग मुठभेड़ में मार गिराया है। जिन्होंने गत शुक्रवार को कानपुर के चौबेपुर में विकास दुबे के साथ मिलकर पुलिसवालों पर हमला किया था। जिसमें प्रदेश के डिप्टी SP देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों ने अपनी जान गँवा दी थी।

कौन हैं ये 5 अपराधी, कैसे पुलिस ने किया इनका एनकाउंटर

◆ अमर दुबे, हमीरपुर में पुलिस ने किया एनकाउंटर

अमर दुबे विकास के सबसे बड़े सहयोगी में से था। जिसे पुलिस ने 8 जुलाई की सुबह को एनकाउंटर में मार गिराया था। अमर दुबे यूपी एसटीएफ और हमीरपुर पुलिस के एक संयुक्त ऑपरेशन के दौरान मारा गया था। अमर दुबे मध्य प्रदेश की सीमा में घुस कर फरार होने की कोशिश में लगा था। पुलिस ने उसे सरेंडर करने का भी मौका दिया था। इसके बावजूद उसने पुलिस पर फायरिंग कर दी थी। जिसमें 2 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

◆ प्रभात मिश्रा, कानपुर में एनकाउंटर

विकास गैंग के बदमाश प्रभात मिश्रा को पुलिस ने फरीदाबाद के ओयो होटल से पकड़ा था। जहाँ विकास दुबे की भी छुपे होने की खबर थी। फरीदाबाद के कोर्ट में पेश करने के बाद यूपी पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर कानपुर ला रही थी। प्रभात को लाते वक़्त कानपुर हाइवे पर भौंती के पास पुलिस की गाड़ी पंचर हो गई थी। जिसका फ़ायदा प्रभात ने उठाने की कोशिश की। उसने गाड़ी में बैठे एसटीएफ के पुलिस इंस्पेक्टर से पिस्तौल छीनी और पुलिस कस्टडी से भागने की कोशिश की। जिस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उसे मार गिराया। इस मुठभेड़ में कुछ सिपाही भी घायल हुए।

◆ रणवीर शुक्ला उर्फ बऊआ, इटावा में पुलिस ने किया ढेर

विकास दुबे गैंग का मोस्ट वांटेड क्रिमिनल रणवीर उर्फ बउअन उर्फ बऊआ इटावा में मार गिराया गया। उस पर 50,000 इनाम भी था। रणवीर शुक्ला ने आधी रात महेवा के पास हाईवे से एक स्विफ्ट डिजायर कार को लूटा था। जिसके चलते पुलिस ने उसे काचुरा रोड पर घेर लिया। सरेंडर करने की जगह उसने पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। जिसपर जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उसे ढेर कर दिया।

◆ प्रेम प्रकाश (विकास का मामा), कानपुर में पुलिस ने मार गिराया

कानपुर में 2 जुलाई को हुए वारदात के अगले दिन सुबह विकास दुबे का मामा प्रेमप्रकाश अपने साथियों के साथ जंगल के रास्ते से होते हुए भागने का प्रयास कर रहा था। इसी दौरान पुलिस द्वारा चलाए गए सर्च ऑपरेशन में पुलिस टीम ने उसे घेर लिया। अपने आपको फँसता हुआ देख प्रेम प्रकाश ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। और उस मुड़भेड़ में वो मारा गया। एनकाउंटर के बाद उसके परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया था। जिसके बाद पुलिस ने ही उसका अंतिम संस्कार किया।

◆ अतुल दुबे, कानपुर मुड़भेड़ में एनकाउंटर

अतुल दुबे भी प्रेम प्रकाश के साथ ही मुठभेड़ में मारा गया था। वह विकास दुबे के खास लोगों में शामिल था। इसके साथ ही वह विकास का चचेरा भाई था। और उसी बिकरू गाँव में ही रहता था जहाँ पुलिस विकास को पकड़ने गई थी। पुलिस पर हमला करने की प्लानिंग में इसकी मुख्य भूमिका भी बताई गई थी। अतुल दुबे और विकास के मामा के साथ हुए मुठभेड़ में पुलिस ने इनके पास से लूटी गई पिस्टल बरामद की थी। जो पुलिसकर्मियों की थी। सूत्रों के अनुसार अतुल के बेटे भी हमले में शामिल थे।