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गुजरात ने दिखाई आत्मनिर्भर भारत की राह: अजंता घड़ी वाला मोरबी चीनी टॉय मार्केट की लेगा जगह

सेरेमिक टाइल्स गुजरात के मोरबी की पहचान हैं। अब यहॉं की फर्मों ने बाजार में चीनी खिलौनों की जगह छाने का बीड़ा उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत यहॉं के करीब 150 फर्म ने चीनी उत्पादों का विकल्प तैयार करने का निश्चय किया है। चीनी उत्पादों के बहिष्कार की दिशा में यह निर्णायक कदम साबित हो सकता है।

मोरबी के करीब 150 इलेक्ट्रॉनिक आइटम और घड़ी निर्माता उन फर्मों के साथ बातचीत कर रहे हैं, जो भारतीय बाजार के लिए चीन से सामान लेकर उत्पाद बनाते हैं। निर्माताओं का मानना ​​है कि 25000 से अधिक कुशल श्रमशक्ति और आवश्यक बुनियादी ढाँचे के साथ, वे मोरबी में कई ऐसे उत्पादों को बनाने में अच्छी तरह से सक्षम हैं।

दुनिया की सबसे बड़ी दीवार घड़ी बनाने वाली अजंता ओरेवा ग्रुप के एमडी जयसुख पटेल ने कहा कि कोविद-19 के प्रकोप के बाद से माँग में कमी के कारण मोरबी में मुश्किल से 20 फीसदी की क्षमता के साथ काम हो रहा है। तो ऐसे में हमने अपनी क्षमताओं को देखना शुरू किया और निर्णय लिया कि हम चीन को छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए एक आपूर्तिकर्ता के रूप में रिप्लेस करेंगे।

अंजता घड़ियों के एमडी ने कहा कि वे केवल खिलौनों और गिफ्ट आदि का सामान बनाने वालों के लिए प्रोडक्ट्स का उत्पादन नहीं करेंगे। बल्कि हिताची, सैमसंग और एलजी जैसे कंपनियों के लिए भी काम करेंगे। सामान की लागत पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे न केवल चीन की तुलना में बेहतर लागत पर उत्पादों को वितरित करने के मामले में आश्वस्त हैं, बल्कि वे बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों का निर्माण भी कर रहे हैं।

पीएम मोदी को भी लिखा गया है पत्र

पटेल ने इस संबंध में मदद के लिहाज से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा है। इस पत्र के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा गया है जिसमें प्रोडक्ट्स के काम पर सरकार का समर्थन और संरक्षण माँगा गया है।”

5 जुलाई को पीएम को भेजे इस पत्र में लिखा गया, “भारतीय MSME चीनी उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए पर्याप्त सक्षम है, बशर्ते हम चीनी उत्पादों के अनैतिक आयात पर अंकुश लगाएँ। यह MSME क्षेत्र के लिए एक बड़ी सहायता और वरदान होगा, यदि हम इस तरह के अनैतिक आयातों पर अंकुश लगा सकते हैं।”

गौरतलब है कि मोरबी गुजरात का एक जिला है। यहाँ सेरेमिक या चीनी मिट्टी की टाइल्स का बड़े स्तर पर काम होता है। पूरा जिला अपने इस काम के अलावा अजंता प्लांट के लिए जाना जाता है। जहाँ इलेक्ट्रॉनिक आइटम और घड़ियों का निर्माण होता है।

शुरुआत में मोरबी नलिया टाइल्स या मिट्टी की छत की टाइलें बनाता था। लेकिन समय के साथ यहाँ सेरेमिक टाइल्स का निर्माण होने लगा और देखते ही देखते, ये जगह अब सेरेमिक टाइल्स का हब बन चुका है।

उधर चीन भी चीनी मिट्टी के प्रोडक्ट्स का सबसे बड़ा निर्यातक है। लेकिन मोरबी में टाइल्स निर्माताओं के अनुसार, पड़ोसी देश से आपूर्ति बंद हो गई है। इसलिए चीन के प्रभुत्व वाले बाजार अब भारतीय टाइल निर्माताओं की ओर देख रहे हैं।

जिस्म दो, मजदूरी लो: आज तक ने चित्रकूट की खदानों में यौन शोषण की रिपोर्ट के नाम पर किया गुमराह?

सात जुलाई को आज तक ने एक रिपोर्ट दिखाई। यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में बिचौलियोंं और कॉन्ट्रैक्टर्स द्वारा लड़कियों के कथित यौन शोषण से जुड़ी थी। दावा किया गया कि नाबालिग लड़कियॉं खदानों में काम करने और मजदूरी के एवज में अपना जिस्म सौंपने को मजबूर हैं।

आज तक की रिपोर्टर मौसमी सिंह ने लिखा कि 12-14 साल की ये लड़कियॉं गरीब आदिवासी परिवारों से हैं। जिंदा रहने के लिए ये अवैध खदानों में काम करने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि बिचौलिए और कॉन्ट्रैक्टर्स इन्हें आसानी से मजदूरी नहीं देते। दावा किया गया कि मजदूरी पाने के लिए उन्हें अपने जिस्म सौंपना पड़ता है।

आज तक की रिपोर्टर ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया। इसमें एक लड़की दवा कर रही थी कि जिस्म का सौदा करने पर ही कॉन्ट्रैक्टर्स काम देने के लिए राजी होते हैं।

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी ने आज तक की इस रिपोर्ट का इस्तेमाल अपने प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने के लिए किया। मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “अनियोजित लॉकडाउन में भूख से मरता परिवार। इन बच्चियों ने ज़िंदा रहने की ये भयावह क़ीमत चुकाई है। क्या ये ही हमारे सपनों का भारत है?”

इसके बाद बुधवार को भाजपा नेता अमित मालवीय ने इससे जुड़ा एक वीडियो ट्विटर पर शेयर किया। इस वीडियो में लड़कियों ने आज तक द्वारा किए गए सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। संवाददाता ने लड़कियों से पूछा क्या काम करने के दौरान ठेकेदार उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते हैं?

जवाब में एक लड़की ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उसने इस तरह का व्यवहार होने से स्पष्ट तौर पर इनकार किया। यह पूछे जाने पर कि उसने पहले क्यों यह बात स्वीकार की थी, उसने कहा कि उसे समझ ही नहीं आया कि क्या सवाल पूछे जा रहे हैं।

आज तक द्वारा चलाई गई इस भ्रामक खबर पर सोशल मीडिया में खूब शोर होने के बाद एक ट्विटर अकाउंट ने मौसमी सिंह की सच्चाई दर्शाते हुए कई स्क्रीनशॉट साझा किए। इसमें साफ़ तौर पर दिखाया आखिर कैसे आज तक की संवाददाता ने यह रिपोर्ट फर्ज़ी तरीक़े से तैयार की। ‘मोदी भरोसा’ नाम के इस अकाउंट ने कुछ तस्वीरें साझा की जिसमें मौसमी सिंह ग़रीबों को राशन बाँटते हुए नज़र आ रही थीं। 

तस्वीरों के साथ कहा गया है कि कुछ इस तरह मौसमी सिंह ग़रीबों को लालच देकर अपनी रिपोर्ट तैयार करती हैं और निर्दोष लोगों को भ्रामक बातें कहने के लिए मजबूर करती हैं। ट्वीट में मौसमी सिंह के साथ अनाज बाँट रहे व्यक्ति को कॉन्ग्रेस का कार्यकर्ता भी बताया गया है।          

यह पहला मौक़ा नहीं है जब मौसमी सिंह का नाम इस तरह की धोखाधड़ी में सामने आया है। इसके पहले भी उन पर इस तरह के आरोप लग चुके हैं। पिछले साल जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद विपक्षी दल के नेताओं का दौरा कवर करने गई मौसमी सिंह ने श्रीनगर हवाई अड्डे पर खूब शोर मचाया था। मौसमी सिंह का आरोप था कि एक सुरक्षाकर्मी ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और उन्हें रिपोर्टिंग करने से रोका। 

इसके पहले साल 2019 के आम चुनाव के दौरान यह देखा गया था किस तरह मौसमी सिंह कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं को प्रियंका गांधी वाड्रा के आते ही उत्साहित होने के लिए कह रही थीं। इसी तरह एक और घटनाक्रम में वह मणिशंकर अय्यर का बचाव करते हुए नज़र आ रही थीं जबकि मणि शंकर ने खुद दूसरे संवाददाता के साथ अभद्रता की थी।    

गैंगस्टर व‍िकास दुबे की पत्‍नी और बेटे को लखनऊ में एसटीएफ ने किया गिरफ्तार, नौकर को भी दौड़ाकर पकड़ा

पाँच लाख रुपए के इनामी गैंगस्टर विकास दुबे की आज सुबह उज्‍जैन में गिरफ़्तारी के बाद अब शाम को उसकी पत्‍नी और बेटे को भी एसटीएफ ने गिरफ्तार कर ल‍िया है। पत्नी ऋचा और बेटे को उत्तर प्रदेश पुलिस ने लखनऊ केे कृष्णानगर इलाके से गिरफ्तार क‍िया है। 

गौरतलब है कि कानपुर देहात में आठ पुलिस कर्मियों की बर्बर हत्या के आरोपित विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे उर्फ सोना व उनके बेटे अब एसटीएफ की गिरफ्त में हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दोनों कृष्णा नगर के नारायणपुरी मोहल्ले में एक खाली प्लाट के पास से पकड़े गए हैं। इसके साथ ही विकास दुबे के नौकर को भी पुलिस ने पकड़ लिया है।

सुबह विकास दुबे को भी मध्य प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के वक्त विकास के पास से पुलिस ने एक बैग बरामद किया था। जिसमें कुछ कपड़े, एक मोबाइल, उसका चार्जर और कुछ कागजात थे। जिसको देख कर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि विकास हर वक्त पूरी तैयारी में रहता था।

विकास दुबे फरारी के समय मोबाइल का इस्तेमाल बहुत ही कम करता था। और बाकी समय उसे स्विच ऑफ ही रखता था। गत 6 दिनों में उसने कई लोगों से संपर्क किया था। जिसकी पुलिस अब जाँच कर रही है।

खबरों के अनुसार विकास दुबे की पहचान सबसे पहले फूलवालें ने की थी। जब वह टिकट लेने के बाद फूल वाले के पास बिना मास्क के पहुँचा था।

वहीं विकास दुबे के पकड़े जाने के बाद उसकी माँ ने उसे कड़ी सजा देने की माँग की है। उन्होंने कहा, “हमको टीवी देख कर पता चला विकास को पकड़ लिया गया है। हम सरकार से कोई अपील नहीं करेंगे, जिनको अपील करना है, वह लोग खुद अपील करेंगे कि विकास को क्या सजा दी जाए।”

उसकी माँ ने यह भी बताया कि विकास दुबे हर साल उज्जैन के महाकाल मंदिर जाता था। विकास दुबे का उज्जैन में ससुराल भी है।

विकास दुबे की माँ सरला देवी ने यह भी कहा, “सरकार जो उचित समझे वो करे, हमारे कहने से कुछ नहीं होगा। मेरा बेटा बीजेपी में नहीं, सपा में है और महाकाल ने विकास को बचा लिया।”

पश्चिम बंगाल: भ्रष्टाचार पर ममता सरकार की पोल खोलने वाले पत्रकार शफीकुल इस्लाम समेत 3 गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल में ममता सरकार से जुड़े भ्रष्टाचार का खुलासा करने पर पिछले महीने की 29 तारीख को आरामबाग टीवी के मालिक व पत्रकार शेख शफीकुल इस्लाम को गिरफ्तार किया गया था। उनके साथ इस दौरान उनकी पत्नी अलीमा खातून और चैनल में काम करने वाले पत्रकार सूरज अली खान भी गिरफ्तार हुए थे

आरामबाग टीवी राज्य सरकार के निशाने पर पहले से था। दरअसल, चैनल ने ममता बनर्जी सरकार द्वारा कई सभाओं को दिए डोनेशन पर सवाल उठाए थे। चैनल का दावा था कि कोरोना महामारी के बीच सरकार ने जिन विभिन्न क्लबों को पैसा देने का दावा किया है, वो वास्तविकता में अस्तित्व में ही नहीं है। इस खुलासे के बाद शफीकुल के ख़िलाफ़ कई एफआईआर दर्ज हुई थी।

पुलिस ने इस मामले में चैनल के मालिक के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 420, 468, 469, 471, 500, 505, 120b, के तहत मामला दर्ज किया था। हालाँकि शफीकुल ने दो मामलों में कोलकाता हाईकोर्ट से बेल ले ली थी। लेकिन, अब हाल में पुलिस ने उन्हें जबरन वसूली पर रिपोर्ट दिखाने के मामले में गिरफ्तार किया। चैनल के मालिक पर ये कार्रवाई ट्रकों से घूस लेते हुए पुलिस की वीडियो चलाए जाने के बाद हुई।

कथित तौर पर उनपर किसी ने आरोप लगाया कि उन्होंने किसी से 30,000 रुपए की माँग करते हुए उसको धमकी दी थी कि अगर उसने पैसे नहीं दिए तो वह अवैध रूप से पेड़ काटने पर उसके खिलाफ़ रिपोर्ट चला देंगे। व्यक्ति ने दावा किया कि पत्रकार सूरज ने इन पैसों की माँग की थी। वो भी बिना ये जाने की पेड़ पंचायत के निर्देशों पर काटे गए।

इस शिकायत के कुछ घंटे बाद ही शफीकुल, उनकी पत्नी और सूरज को गिरफ्तार कर लिया गया। जहाँ उन्हें बेल लेने का मौका भी नहीं मिला।

इस बात की जानकारी बंगाल गवर्नर जगदीप धनकड़ ने अपने ट्विटर हैंडल पर दी थी। उन्होंने गिरफ्तारी से संबंधित ट्वीट करते हुए कहा था कि शफीकुल को इसलिए गिरफ्तार किया क्योंकि उन्होंने जनता के पैसों के गलत इस्तेमाल पर ममता सरकार का खुलासा किया था।

उन्होंने एडिटर गिल्ड, प्रेस क्लब और नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स को टैग करते हुए इस मामले पर स्टैंड लेने की अपील की थी। उन्होंने आगे लिखा था, “अगर पत्रकार खामोश है, तो लोकतंत्र है।”

हालाँकि, इस खबर पर अब तक राष्ट्रीय मीडिया ने मौन धारण किए रखा। लेकिन समाज के जागरूक नागरिकों ने इन लोगों की रिहाई की माँग शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अशोक के गांगुली, राज्य के पूर्व मुख्य सचिव अर्धेंदु सेन, फिल्म निर्माता बुद्धदेव दासगुप्ता, अपर्णा सेन, तरुण मजूमदार और अन्य ने एक बयान जारी कर तीनों लोगों की रिहाई की माँग की है।

बयान में कहा गया, “इन लोगों के साथ बड़े अपराध जैसे मर्डर, रेप, या डकैती करने पर ऐसा बर्ताव नहीं हुआ। बल्कि केवल सरकार के ख़िलाफ़ न्यूज चलाने पर ऐसा बर्ताव हुआ है। जिस प्रकार पुलिस ने इनके घरों को घेरा। दरवाजों को तोड़ा और इनके छोटे बच्चों के साथ इन्हें थाने लेकर गई। वो सब ये बताता है कि हमारा लोकतंत्र और संविधान बीमार हो गया है।”

गौरतलब है कि 29 जून के बाद से आरामबाग टीवी के यूट्यूब चैनल पर कोई भी नई रिपोर्ट नहीं पोस्ट हुई है। 29 जून को कुछ वीडियो पोस्ट हुई थी। जिसमें दर्शाया जा रहा था कि पुलिस और कुछ लोगों ने शफीकुल के घर को सादे कपड़ों में घेर रखा है।

उनमें से कुछ शफीकुल के घर की ख़िड़कियों को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि एक अन्य वीडियो में देखा गया था कि कुछ लोग उसके घर में छत से घुसने की कोशिश कर रहे थे।

यहाँ बता दें कि इससे पहले शफीकुल ने एक वीडियो में कहा था कि उनके वेब चैनल को बंद कराने की साजिश की जा रही है। लेकिन वह इन सब चीजों के आगे नहीं झुकेंगे और अदालत में डटकर सभी चीजों का सामना करेंगे। शफीकुल इस्लाम ने एक वीडियो में यह भी कहा था कि हो सकता है कल को उनकी जबरन गिरफ्तारी हो जाए, उनकी बेरहमी से पिटाई की जाए। लेकिन उन्हें उम्मीद है कि उनके दर्शक उनका समर्थन करेंगे।

कौन है मनोज यादव, सपा से क्या है रिश्ता: विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद उज्जैन से मिली यूपी नंबर वाली कार

कानपुर शूटआउट के बाद से ही मुख्य आरोपित विकास दुबे के सपा-बसपा नेताओं के साथ संबंध को लेकर तथ्य सामने आते रहे हैं। उसकी पत्नी सपा से पंचायत चुनाव भी लड़ चुकी है। अब उज्जैन में यूपी रजिस्ट्रेशन वाली एक कार मिलने के बाद से फिर से सपा से उसके संबंधों को लेकर सोशल मीडिया में दावे किए जा रहे हैं।

उज्जैन से ही आज (जुलाई 9, 2020) विकास दुबे को गिरफ्तार किया गया है। उसकी गिरफ्तारी के बाद यहॉं एक कार मिली है। यह कार हाई कोर्ट के वकील मनोज यादव के नाम पर रजिस्टर्ड है।

दावा किया जा रहा है कि इसी कार से विकास दुबे उज्जैन पहुॅंचा था। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि मनोज यादव सपा से जुड़ा हुआ है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक पड़ताल में अभी तक मालूम चला है कि यह कार मनोज यादव के नाम पर रजिस्टर्ड है। नंबर प्लेट पर हाईकोर्ट लिखा हुआ है।

सोशल मीडिया पर मनोज यादव को समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता बताया जा रहा है। हालाँकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मनोज यादव ने भी विकास के साथ किसी तरह के संबंधों को नकार दिया है।

दूसरी ओर, विकास दुबे की माँ ने मीडिया को दिए बयान में कहा है कि विकास सपा से जुड़ा हुआ है। अब पुलिस सभी पहलुओं पर गहराई से जाँच कर रही है।

बता दें कि मनोज यादव भी उज्जैन में ही था। दैनिक जागरण ने उसके हवाले से बताया है कि वह अपने साथी अधिवक्ता तेज बहादुर के साथ 2 जुलाई को लखनऊ से निकला था। बुधवार को उज्जैन पहुँचा और यहॉं एक होटल में ठहरा था। यूपी नंबर की गाड़ी देख पुलिस उसे पूछताछ करने के लिए थाने ले गई थी। उसने अपना नाम घसीटने और गाड़ी की तस्वीर वायरल करने वालों पर केस करने बात भी कही है।

लखनऊ में मनोज यादव की पत्नी से पूछताछ किए जाने की बात भी सामने आ रही है। उसकी पत्नी ने विकास दुबे के साथ परिवार के लोगों का संबंध होने से इनकार करते हुए कहा कि उसके पति काम के सिलसिले में बाहर गए हुए हैं।

ताजा अपडेट के अनुसार, विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद से उससे पूछताछ लगातार जारी है। विकास दुबे इसे समय उज्जैन के पुलिस सेंटर में हैं। पूछताछ में उसने पुष्टि की है कि चौबेपुर थाने में कई पुलिस वाले उसकी मदद कर रहे थे।

उसने बताया है कि उन लोगों ने एनकाउंटर के डर से फायरिंग की थी। फायरिंग के बाद उनका इरादा पुलिसकर्मियों के शव को जलाकर सबूत मिटाने का था। विकास दुबे का कहना है कि उन्हें खबर मिली थी कि पुलिस सुबह आएगी। मगर, पुलिस सुबह की जगह रात में ही रेड करने आ गई।

‘तेरी माँ रं*’: कैनी सेबेस्टियन की गालीबाजी पर फूटा गुस्सा, कॉमेडियन ने स्क्रीनशॉट को बताया फेक

तथाकथित स्टैंड-अप कॉमेडियन कैनी सेबेस्टियन (Kenny Sebastian) के खिलाफ शिकायतों पर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने संज्ञान लिया है। महाराष्ट्र के DGP से इस मामले की तत्काल जॉंच की मॉंग करने के लिए कहने को आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा से अपील की गई है।

कैनी सेबेस्टियन पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप है। खासकर महिलाओं को लेकर। इससे जुड़े कुछ स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं।

हाल ही में सोशल मीडिया यूजर्स ने माँग की थी कि वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स को भारतीय कॉमेडियन कैनी सेबेस्टियन के शो पर पुनर्विचार करना चाहिए। कैनी सेबेस्टियन ने कथित तौर पर अपने इंस्टाग्राम पेज पर लोगों को अश्लील गालियाँ दी हैं और उसके नाम से कुछ स्क्रीनशॉट वायरल हो रहे हैं।

इन स्क्रीनशॉट में कैनी सेबेस्टियन ने लोगों को उनकी माँ को सम्बोधित कर बेहद अपमानजनक गालियाँ दी हुई हैं और महिलाओं के लिए रं* जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है।

हालाँकि, इन स्क्रीनशॉट के वायरल होने पर अपने बचाव में, सेबस्टियन ने ट्विटर पर दावा किया कि सोशल मीडिया पर घूम रहे ये स्क्रीनशॉट ’नकली’ हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके अकाउंट से पोस्ट की गई इन गालियों में ‘हेरफेर’ किया गया है, क्योंकि उन्होंने किसी ऐसे व्यक्ति के सोशल मीडिया अकाउंट की रिपोर्ट की थी, जिसको कैनी ने ‘अपने धर्म का दुरुपयोग करने वाला’ बताया था।

हालाँकि, सोशल मीडिया यूजर्स ने अपने फोन की स्क्रीन के वीडियो रिकॉर्डिंग को यह दिखाने के लिए शेयर किया कि कैनी सेबेस्टियन के दावे के अनुसार इनमें हेरफेर या एडिटिंग नहीं की गई है, बल्कि ये सभी गालियाँ खुद उन्होंने अपने ही अकाउंट से दी हैं।

इसके बाद लोगों ने ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग सेवाओं – नेटफ्लिक्स और अमेज़न प्राइम से भी सवाल किए कि जिस गालीबाज के शो को वो दिखाते हैं क्या वे उनके अपमानजनक व्यवहार का समर्थन करते हैं?

कुछ लोगों ने उन्हें यह भी याद दिलाया कि वह कुछ दिन पहले भी ऐसे ही एक अपमानजनक गालियों के किस्से में संलिप्त थे जब लोगों को उनका शो पसंद नहीं आया था।

कैनी सेबेस्टियन का आज ही एक और वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्हें कहते हुए सुना जा सकता है कि संस्कृत दुनिया की सबसे बेकार भाषा है।

ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म बढ़ती लोकप्रियता के साथ विवाद का जरिया भी बनते जा रहे हैं। ऐसे कई मौके आए हैं जब इस प्लेटफार्म से जुड़े लोग कॉमेडी के नाम पर इसका दुरुपयोग करते हुए देखे गए हैं।

खासकर हिन्दुओं के प्रति नफरत या फिर कोई नैरेटिव तैयार करने के लिए इन प्लेटफॉर्म्स का खूब इस्तेमाल होता देखा जा रहा है और कई बार लोग ऐसी घटनाओं पर शिकायत भी दर्ज कर चुके हैं। हाल ही में, नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘कृष्णा एंड हिज़ लीला‘ ने भगवान कृष्ण का अपमान करने वाली अपनी हिंदूफ़ोबिक वेब सिरीज से काफी हलचल मचाई थी।

सीएम की सुपारी लेने वाला श्रीप्रकाश शुक्ला, पुलिसकर्मियों को मारने वाला विकास दुबे: यूपी के क्रिमिनल कैसे-कैसे

उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में माफियाओं और अपराधियों की बंदूकों से चली गोली का मूलतः एक उद्देश्य होता है, जनता में भय स्थापित करना। लोगों को इस बात का आभास कराना कि उनके अपराध की तस्वीर क्या है? लेकिन लोगों के बीच डर पैदा करने की इस प्रक्रिया को एक और आयाम दिया श्रीप्रकाश शुक्ला जैसे अपराधियों ने। उनकी गोलियाँ सिर्फ डर पैदा करने के लिए नहीं चली, बल्कि उन्हीं डरे हुए लोगों की जान लेने के लिए भी चली। इस तरह की मानसिकता का सबसे नया उदाहरण है ‘विकास दुबे’। 

दोनों ही अपराधियों में कई बातें एक जैसी हैं, दोनों के जीवन का शुरूआती जीवन हो या अंत, एनकाउंटर के अलावा ऐसी तमाम बातें हैं जब दोनों एक जैसे ही नज़र आते हैं। दोनों अपराधियों को गिरफ्तार करने की ज़िम्मेदारी एसटीएफ के पास थी क्योंकि नेताओं से लेकर अधिकारियों तक, सभी जानते थे कि इन मामलों में चूक की गुंजाईश नहीं होती। जहाँ प्रशासन की तरफ से छोटी गलती भी होती तो उसका नतीजा बुरे से बुरा होता। 

सोशल मीडिया पर विकास दुबे के साक्षात्कार का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। भारत समाचार द्वारा साझा किए गए वीडियो में उसने साफ़-साफ़ बताया है कि कैसे वह राजनीति में आया, साल 2006 के इस वीडियो में उसने यह भी बताया कि कौन उसे राजनीति में लेकर आया। फिर विकास दुबे ने पूर्व उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय हरिकिशन श्रीवास्तव का नाम लिया और बताया कि राजनीति में लाने का श्रेय उन्हें ही जाता है। इसके ठीक पहले विकास दुबे ने यह भी बताया कि वह अच्छा छात्र था, उसने स्नातक तक पढ़ाई की है।    

ठीक इसी तरह श्रीप्रकाश शुक्ला भी पढ़ाई में बेहद औसत छात्र था। बहन के साथ छेड़ खानी करने वाले लोगों की हत्या करने के ठीक बाद उसे सुरक्षा की ज़रूरत थी। लेकिन सुरक्षा के बदले उसे संरक्षण मिला, उत्तर प्रदेश के दूसरे कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी का संरक्षण। भले श्रीप्रकाश शुक्ला राजनीति का हिस्सा नहीं बना लेकिन शुक्ला के राजनीतिक गुरु उसे राजनीतिक पड़ाव के कुछ कदम पहले तक ज़रूर ले आए। उसके बाद क्या हुआ वह इतिहास है, उत्तर प्रदेश को ऐसा अपराधी मिला जिसने किसी भी अपराध के बाद पीछे मुड़ कर नहीं देखा। 

विकास दुबे पर जितनी हत्याओं के आरोप लगे उसमें सबसे बड़े नाम मंत्रियों के थे। हैरानी कहिए या संयोग श्रीप्रकाश शुक्ला की हत्याओं में भी जितने अहम नाम थे, मंत्रियों के ही थे। दोनों ने दिग्गज नेताओं पर गोलियाँ चलाई। विकास दुबे पर लगाए गए आरोपों के मुताबिक़ साल 2001 में उसने भाजपा नेता संतोष शुक्ला पर कानपुर देहात के शिवली थाने में अंधाधुंध गोलियाँ चलाई। 25 लोग इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी थे, लगभग सारे ही पुलिसकर्मी। किसी ने गवाही नहीं दी और विकास दुबे इस आरोप से बरी हुआ। हालाँकि, इस घटनाक्रम के पीछे कहानियाँ तमाम हैं लेकिन सतह पर नज़र आने वाली सबसे असल कहानी यही है। 

विकास दुबे के नाम का पोस्टर

कुछ दिन पहले का घटनाक्रम जिसमें 8 पुलिसकर्मी शहीद हुए, कितने दर्दनाक तरीक से उनके लिए जाल बिछाया गया। रास्ता रोकने के लिए जेसीबी रास्तों पर जेसीबी लगाई गई, पुलिस वालों के हथियार तक छीन लिए गए। अंत में तस्वीर साफ़ होने पर पता चला कि साथी पुलिस कर्मियों ने कार्रवाई की सूचना विकास दुबे तक पहुँचाई। जिसके चलते विकास दुबे के लिए यह सब करना आसान हो गया, ख़बरों के अनुसार जानकारी मिलते ही उसने कहा, “आने दो सभी को, सभी को कफ़न में वापस भेजूँगा।”           

कहानी के पन्ने शुरू से पलटते ही यह साफ़ हो जाता है कि दोनों अपराधियों ने बंदूक का जिस कदर इस्तेमाल किया उस तरह बड़े से बड़े अपराधी भी नहीं करते। शुक्ला के हिस्से की एक कहानी भी कुछ ऐसी ही है। बात है साल 1997 की, आज से लगभग 21 साल पहले। पुलिस को सूचना मिली कि लखनऊ के जनपथ बाज़ार में श्रीप्रकाश शुक्ला अपने कुछ साथियों के मौजूद है। यह भी पता चला कि उसके पास एके 47 और पिस्टल भी है। एसएसपी सत्येन्द्र वीर सिंह, एक पेशकार दरोगा रवींद्र कुमार सिंह और गनर रणकेंद्र सिंह वहाँ पहुँचे। सामना हुआ, पकड़ने की कोशिश मुठभेड़ में तब्दील हुई। 

श्रीप्रकाश शुक्ला

श्रीप्रकाश शुक्ला ने भागने की कोशिश की, तभी दरोगा आर के सिंह उसके पीछे दौड़े। अगले कुछ पल जनपथ बाज़ार में केवल गोलियों की आवाज़ सुनाई दी। मुठभेड़ के दौरान आर के सिंह के सिर पर 6 गोलियाँ लगीं और सीने पर दो, मालूम चला कि उन्होंने शुक्ला को दबोचा हुआ था जिसके बाद उसके साथियों ने दरोगा पर गोलियाँ चलाई। इसके बाद श्रीप्रकाश भले छूट गया लेकिन आर के सिंह सिर में 6 गोलियाँ लगने के बावजूद 10 मिनट तक डटे रहे। 

पेशकार दरोगा आर के सिंह

लेकिन इस घटना के बाद श्रीप्रकाश शुक्ला के लिए आगे का रास्ता बहुत मुश्किल हो गया। पुलिस महकमे के कुछ अधिकारियों ने खुद जिम्मा उठाया कि मामले पर ठोस नतीजे देकर ही रहेंगे। इस अभियान को उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास का सबसे खतरनाक अभियान भी माना जाता है, सबसे ज़्यादा जोखिम भरी ‘पुलिस चेज़’। तीन पुलिस अधिकारियों (तत्कालीन एसएसपी अरुण कुमार, एसपी सत्येन्द्र वीर सिंह और एएसपी राजेश पाण्डेय) ने अभियान पूरा किया। मौके पर सैकड़ों गोलियाँ चलीं, पुलिस ने शुक्ला को गाज़ियाबाद में चारों तरफ से घेरा और छलनी कर दिया।              

चित्र साभार – सोशल मीडिया

कुल मिला कर ऐसी घटनाएँ और ऐसे किरदार एक स्पष्ट संदेश देते हैं कि अपराधी बनते नहीं है, बनाए जाते हैं। अच्छी भली नक्काशी के बाद तैयार किए जाते हैं, जिसमें अधिकारियों से लेकर राजनेताओं तक सभी का कुछ फ़ीसदी योगदान होता है। विकास दुबे की गिरफ्तार को आत्मसमर्पण कहा जाए या गिरफ्तारी, यह अभी अस्पष्ट है लेकिन हर बड़ी घटना अपने पीछे तमाम सवाल छोड़ती है। कालांतर में इन अपराधियों ने सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था को बड़े पैमाने पर बदला है, फिर आने वाले कल में कैसे तय होगा कि ऐसे अपराधी जन्म नहीं लेंगे? फिर कोई महकमे के भीतर का व्यक्ति इनकी मदद नहीं करेगा और पुलिस वालों की जान नहीं जाएगी?     

यूपी पुलिस पहुँची विकास दुबे को लाने: माँ ने कहा- वह सपा में था, उज्जैन है उसकी ससुराल, खंगाली जाएगी बीते 6 दिनों की उसकी हिस्ट्री

कानपुर शूटआउट का मोस्टवांटेड और 5 लाख का इनामी कुख्यात अपराधी विकास दुबे को मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार कर लिया गया है। एमपी में गिरफ्तारी के बाद अब यूपी पुलिस की एसटीएफ टीम उसे अपनी कस्टडी में लेने के लिए स्पेशल चार्टर्ड प्लेन से इंदौर पहुँच चुकी है। खबरों के अनुसार उसे चार्टर्ड प्लेन से जल्द से जल्द लखनऊ लाने की तैयारी की जा रही है।

विकास दुबे की गिरफ्तारी को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान न उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की थी। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार गैंगेस्टर विकास दुबे के गिरफ्तार होते ही यूपी की एसटीएफ टीम के एक दल को तुरंत एमपी के लिए रवाना कर दिया गया था। विकास दुबे की कानूनी औपचारिकता और कागज़ी कार्यवाही पूरी करने के बाद शाम तक पुलिस उसे लखनऊ लेकर आ जाएगी।

वहीं अब गिरफ्तार विकास दुबे का मेडिकल परीक्षण किया जाएगा। साथ ही कोरोना वायरस को मद्देनजर रखते हुए उसका कोरोना टेस्ट भी किया जाएगा। एमपी पुलिस इस बात की भी हिस्ट्री खंगालेगी कि विकास दुबे बीते 6 दिन में कहाँ- कहाँ गया? क्या-क्या किया? पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह उज्जैन कैसे पहुँचा? किसके संपर्क में आया? किसने शरण दी? पुलिस इन बातों का भी खुलासा करने की तैयारी में है।

यह खबर भी सामने आई है कि विकास महाकाल मंदिर में लखनऊ के रस्जिट्रेशन नम्बर की गाड़ी से आया था। साथ ही गाड़ी को लेकर किसी को शक न हो इसलिए उसके नंबर प्लेट पर हाईकोर्ट भी उसने लिखा हुआ था। जाँच में यह बात भी सामने आई कि विकास जिस गाड़ी से आया था वह गाड़ी असल में मनोज यादव के नाम पर रजिस्टर्ड है।

गिरफ्तारी के वक्त विकास के पास से पुलिस ने एक बैग बरामद किया था। जिसमें कुछ कपड़े, एक मोबाइल, उसका चार्जर और कुछ कागजात थे। जिसको देख कर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि विकास हर वक्त पूरी तैयारी में रहता था। मोबाइल का इस्तेमाल वह बहुत ही कम करता था। और बाकी समय उसे स्विच ऑफ ही रखता था। गत 6 दिनों में उसने कई लोगों से संपर्क किया था। जिसकी पुलिस अब जाँच कर रही है।

खबरों के अनुसार विकास दुबे की पहचान सबसे पहले फूलवालें ने की थी। जब वह टिकट लेने के बाद फूल वाले के पास बिना मास्क के पहुँचा था।

वहीं विकास दुबे के पकड़े जाने के बाद उसकी माँ ने उसे कड़ी सजा देने की माँग की है। उन्होंने कहा, “हमको टीवी देख कर पता चला विकास को पकड़ लिया गया है। हम सरकार से कोई अपील नहीं करेंगे, जिनको अपील करना है, वह लोग खुद अपील करेंगे कि विकास को क्या सजा दी जाए।”

उसकी माँ ने यह भी बताया कि विकास दुबे हर साल उज्जैन के महाकाल मंदिर जाता था। विकास दुबे का उज्जैन में ससुराल भी है।

विकास दुबे की माँ सरला देवी ने यह भी कहा, “सरकार जो उचित समझे वो करे, हमारे कहने से कुछ नहीं होगा। मेरा बेटा बीजेपी में नहीं, सपा में है और महाकाल ने विकास को बचा लिया।”

गौरतलब है पुलिस ने आज (9 जुलाई, 2020) सुबह ही विकास के दो साथियों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। जिसमें से एक प्रभात मिश्रा पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश कर रहा था। जिसके बाद एनकाउंटर में उसे ढेर कर दिया गया। प्रभात मिश्रा को बुधवार को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा विकास दुबे गैंग का एक और मोस्ट वांटेड क्रिमिनल बउअन शुक्ला भी इटावा में ढेर हो गया।

रणवीर शुक्ला ने आधी रात महेवा के पास हाईवे से एक स्विफ्ट डिजायर कार को लूटा था। जिसके चलते पुलिस ने उसे काचुरा रोड पर घेर लिया। सरेंडर करने की जगह उसने पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। जिसपर जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उसे ढेर कर दिया।

उल्लेखनीय है कि गत शुक्रवार को उत्तर प्रदेश पुलिस, कानपुर के चौबेपुर में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने पहुँची थी। जहाँ विकास दुबे ने अपने साथियों के साथ मिलकर पुलिसवालों पर हमला कर दिया था। जिसमें प्रदेश के डिप्टी SP देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों ने अपनी जान गंवा दी थी। हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे पर 60 आपराधिक मामले दर्ज है।

प्रिय राजदीप, पप्पू का नाम सुना है, वो नेपाल भाग गया था, जानते हो उसके साथ क्या हुआ?

उत्तर प्रदेश का हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे मध्य प्रदेश के उज्जैन से पकड़ा गया। उससे पहले मीडिया गैंग ने सूत्रों के हवाले से कॉन्स्पिरेसी थ्योरी की लाइन लगा दी।

मसलन, राजदीप सरदेसाई का दावा था कि विकास दुबे पकड़ा गया नहीं जाएगा। सीधे ठोक दिया जाएगा। उनकी गैंग की मेंबर स्वाति चतुर्वेदी ने खुलासा किया कि विकास दुबे नेपाल पहुॅंच चुका है। एक अन्य सम्मानित सदस्य रोहिणी सिंह का दावा था कि बड़े लोगों की कहानी बाहर नहीं आए, इसलिए उसका एनकाउंटर कर दिया जाएगा।

राजदीप और उनके गैंग के तमाम सदस्यों को गुप्त सूत्रों ने सब कुछ बता दिया। लेकिन जो नहीं बताया और जो इन्होंने पत्रकारिता के कथित व्यापक अनुभव से नहीं सीखा, वह यह है कि यूपी-बिहार के सारे भगोड़े न तो एनकाउंटर में मार गिराए जाते हैं और न ही नेपाल पहुँचने के बाद कानून से बचने की गारंटी होती है।

अब पप्पू को ही ले लीजिए। पप्पू यानी पप्पू देव। कभी बिहार के कोसी के इलाकों में वह खौफ का नाम था। कई चर्चित अपहरण कांडों का सरगना। उसके गॉंव के एक लड़के ने सालों पहले बताया था कि जिस पप्पू देव से सब डरते थे, वह पुलिस से उस समय भी बड़ा खौफ खाता था, जब उसकी तूती बोलती थी। वह हर दिन ठिकाने बदलता रहता था। अपराधियों को लेकर ऐसी कहानियॉं चर्चा में होती हैं, पप्पू देव के बारे में भी थी।

वैसे तो बिहार में अपराधियों के खिलाफ शिंकजा तब कसना शुरू हुआ जब जंगलराज के सफाए के बाद पहली बार जदयू-बीजेपी की सुशासन की सरकार आई। फास्ट ट्रैक कोर्ट में उनके मामले चलाए गए ताकि उन्हें जल्द से जल्द सजा सुनिश्चित हो। लेकिन, पप्पू देव इससे पहले ही नेपाल में पकड़ा जा चुका था।

कौन है पप्पू देव?

पप्पू देव बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल में हत्या, लूट, अपहरण, रंगदारी और डकैती जैसे दर्जनों संगीन मामले के नामजद रहा है। 2002 में नेपाल के एक व्यापारी को अगवा कर 5 करोड़ रुपए फिरौती वसूलने के बाद वह चर्चा में आया था। कुछ रिपोर्टों में यह रकम 11 करोड़ भी बताई जाती है। उस व्यापारी का नाम था तुलसी अग्रवाल।

कथित तौर पर इसके बाद पप्पू देव बिहार में अपहरण उद्योग का सबसे बड़ा खिलाड़ी बन गया था। छोटे-मोटे गैंग लोगों को उठाते, एक रकम लेकर उसे पप्पू देव को सौंप देते थे। आगे का सारा जिम्मा पप्पू देव का होता था। कुछ-कुछ वैसा ही जैसे प्रकाश झा की फिल्म अपहरण में दिखाया गया है।

लेकिन अगले ही साल पप्पू देव 50 लाख से अधिक के जाली नोट और हेरोइन के साथ नेपाल में गिरफ्तार हो गया। उसे वहाँ सजा भी हुई। सजा पूरी होने के बाद वह रिहा कर दिया गया। जनवरी 2014 में यूपी एसटीएफ की मदद से बिहार पुलिस ने नेपाल बॉर्डर से उसे गिरफ्तार किया। बीते साल वह जमानत पर बाहर आया। पप्पू देव ने इसके बाद विरोधियों पर साजिश कर झूठे मुकदमे में फँसाने का आरोप लगाया था।

जिनको यह लगता हो कि पप्पू तो जाली नोट का धंधा करता था। लोगों को अगवा करता था। उसका विकास दुबे की तरह कभी पुलिस से सामना नहीं हुआ, उनको बता दूँ कि नेपाल में पकड़े जाने से पहले एक दिन नवगछिया के मुकंदपुर चौक के पास रात में उसकी पुलिस से भिड़ंत हो गई। पुलिस को देखते ही पप्पू ने गोलियाँ झोंक दी। पुलिस वालों की किस्मत कहिए कि कानपुर जैसी घटना नहीं हुई और पप्पू देव भाग निकला। इसी तरह एक बार खगड़िया में एसटीएफ के हाथ से भी वह बच निकला था।

अब बात पप्पू देव के पॉलिटिकल कनेक्शन की। उससे राजद का सांसद रहा हिस्ट्रीशीटर शहाबुद्दीन जेल में मीटिंग करता था। उसकी पत्नी पूनम देव ने 2005 और 2010 का विधानसभा चुनाव लोजपा के टिकट पर बिहपुर से लड़ा था। वैसे ही जैसे आपने विकास दुबे की पत्नी के सपा के टिकट पर पंचायत चुनाव लड़ने के पोस्टर देखे होंगे। पूनम ने 2015 में बतौर निर्दलीय महिषी विधानसभा से भी चुनाव लड़ा। अब बताया जाता है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में खुद पप्पू देव की नजर बिहपुर सीट पर गड़ी है।

कोरोना वायरस के लिए भारत और अमेरिका मिलकर ढूँढेंगे आयुर्वेद के ज़रिए क्लिनिकल समाधान, 3 चरण का कार्यक्रम तय

आयुर्वेद के संदर्भ में कोरोना वायरस से जुड़ी एक बड़ी ख़बर सामने आ रही है। भारत और अमेरिका के कई आयुर्वेद विशेषज्ञ और शोधकर्ता कोरोना वायरस से लड़ने के लिए साझा क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने की योजना बना रहे हैं। इसकी जानकारी अमेरिका के भारतीय दूत तरणजीत सिंह संधू ने दी। 

8 जुलाई के दिन भारतीय मूल के कई अमेरिकी वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और और चिकित्सकों ने इस मुद्दे पर तरणजीत से वर्चुअल संवाद करके निष्कर्ष निकाला। संधू ने कहा फिलहाल दोनों देशों के वैज्ञानिकों का एक बड़ा समूह कोरोना वायरस से लड़ने के लिए काम शुरू करने वाला है। इसके बाद संधू ने कहा कि तमाम संस्थाओं द्वारा साझा अनुसंधान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के सहारे आयुर्वेद का प्रचार भी किया जाएगा। 

इतना ही नहीं दोनों देशों के कई आयुर्वेद विशेषज्ञ और शोधकर्ता कोरोना वायरस से लड़ने के लिए साझा क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने की योजना बना रहे हैं। साथ ही हमारे वैज्ञानिक इस मामले पर उपयुक्त जानकारी और संसाधन भी साझा कर रहे हैं। जिससे जल्द से जल्द बेहतर नतीजें हासिल हों। इंडो यूएस साइंस टेक्नोलॉजी फोरम (IUSSTF) ने हमेशा ही विज्ञान, तकनीक और नवप्रवर्तन से जुड़े मुद्दों पर ज़ोर दिया है। 

कोरोना वायरस से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए IUSSTF ने साझा शोध कार्यक्रम और स्टार्ट अप से जुड़ी परियोजनाओं को बढ़ावा देने का निवेदन किया था। जिसके बाद इस मुद्दे पर बड़ी संख्या में प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनका फिलहाल दोनों देशों के विशेषज्ञ अवलोकन कर रहे हैं। इसके अलावा संधू ने कहा भारतीय फार्मास्यूटिकल कंपनी किफ़ायती दाम की दवाएँ और वैक्सीन (टीका) उपलब्ध कराने के मामले में वैश्विक स्तर पर अगुवाई करती हैं। ऐसे में कोरोना वायरस जैसी महामारी से जारी इस लड़ाई में इनकी भूमिका अहम साबित होगी। 

इस योजना को सफल बनाने के लिए अमेरिका की संस्थाओं और भारत की फार्मा कंपनीज ने 3 चरण का कार्यक्रम तय किया है। इससे केवल भारत या अमेरिका का ही नहीं बल्कि दुनिया के करोड़ों लोगों का फ़ायदा होगा जो इस महामारी का सामना कर रहे हैं। संधू ने यह भी कहा कि इस अनुसंधान के तहत हासिल होने वाले नतीजों से महामारी का सामना करने में काफी मदद मिलेगी। इसके ज़रिए टेलीमेडिसिन और टेलीहेल्थ समेत कई डिजिटल प्लैटफॉर्म्स में भी बड़े पैमाने पर बदलाव होगा। 

स्वास्थ्य के क्षेत्र में दो देशों की तरफ से उठाए गए इतने बड़े कदम का सबसे पहला उद्देश्य यही है कि बीमारी को बुनियादी और क्लिनिकल स्तर पर समझा जाए। एक दिग्गज कूटनीतिज्ञ के मुताबिक़ भारत में एनआईएच के खर्च पर ऐसे 200 कार्यक्रम चल रहे हैं जो स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े सुधार लेकर आएँगे। इस योजना में एनआईएच से संबंधित 20 संस्थान भी शामिल हैं। 

वैक्सीन एक्शन प्रोग्राम के तहत ROTAVAC वैक्सीन तैयार की गई थी, जो रोटा वायरस को ख़त्म करने में मदद करता है। जिस वायरस की वजह से डायरिया जैसी गंभीर बीमारी होती है। वैक्सीन को तैयार करने वाला समूह भारतीय ही था, ‘भारत बायोटेक’। भारतीय कंपनी द्वारा तैयार किए गए इस वैक्सीन का दाम भी बहुत कम था। वैक्सीन एक्शन प्रोग्राम के तहत टीबी, इन्फ़्लुएन्ज़ा और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों की भी वैक्सीन तैयार की गई है।

इसके बाद संघू ने कहा वैक्सीन एक्शन प्रोग्राम की इस बैठक में दोनों देशों के जानकार शामिल हुए हैं। वह जल्द ही कोरोना वायरस पर भी अच्छे नतीजे हासिल कर लेंगे। अमेरिका और भारत के वैज्ञानिकों-जानकारों के बीच हुई इस बैठक में शामिल हुए लोग अलग मुद्दों के भी जानकार थे। आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम इन्फोर्मेशन साइंस, बायो मेडिकल इंजीनियरिंग, रोबोटिक, मेकैनिकल इंजीनियरिंग, पृथ्वी और समुद्र विज्ञान, भौतिक विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान और स्वास्थ्य विज्ञान।