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राजीव गाँधी फाउंडेशन का काला चिट्ठा: Huwei कनेक्शन, कतर और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने वाले जॉर्ज सोरोस से संबंध

यूपीए शासनकाल के दौरान चीन सरकार से 1 करोड़ रुपए से अधिक का दान लेने के बाद से ही राजीव गाँधी फाउंडेशन (RGF) विवादों में घिर गया है। इस फाउंडेशन के शीर्ष अधिकारियों में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राहुल गाँधी के नाम शामिल हैं। अब ऑपइंडिया आपको बताता है कि कैसे राजीव गाँधी फाउंडेशन और चीन के बीच इस तरह का संदेहपूर्ण संबंध 2018-2019 तक जारी रहा।

वर्ष 2018-19 की राजीव गाँधी फाउंडेशन की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारती फाउंडेशन उन संगठनों में से एक था, जिसने इसे दान किया था। उस समय भारती फाउंडेशन Huawei के साथ भी पार्टनरशिप में था, जिसके चीन के साथ व्यापक संबंध हैं। वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018-19 में राजीव गाँधी फाउंडेशन में अनुदान और दान से कुल 95,91,766 रुपए की आय हुई थी।

इससे पहले 2020 में, अमेरिका में ट्रम्प प्रशासन ने Huawei और उसके आपूर्तिकर्ताओं को अमेरिकी प्रौद्योगिकी और सॉफ्टवेयर तक पहुँचने से रोक दिया था। अमेरिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से व्यापक संबंध होने के कारण Huawei उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। इसी तरह के कारणों के लिए, यूनाइटेड किंगडम भी अपने 5G नेटवर्क से Huawei पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है।

Huawei से उत्पन्न होने वाला खतरा काफी समय से स्पष्ट है। मगर फिर भी कॉन्ग्रेस के शीर्ष पदाधिकारी राजीव गाँधी फाउंडेशन के लिए 2018-2019 के अंत कर एक ऐसे NGO से धन लेते रहे, जिसकी Huawei के साथ पार्टनरशिप थी।

भारती फाउंडेशन द्वारा गृह मंत्रालय को प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि इसे कतर फाउंडेशन एंडोमेंट से वित्त वर्ष 2018-19 में लगभग 14 करोड़ रुपए मिले थे। बता दें कि कतर फाउंडेशन एक प्राइवेट चैरिटी संस्थान है, जो पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी और उनकी पत्नी शेखा मोझा बिंत नासिर द्वारा स्थापित किया गया था।

हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि भारती फाउंडेशन ने राजीव गाँधी फाउंडेशन को कितनी राशि दान की थी। यहाँ पर यह भी याद दिला दें कि इस अवधि के दौरान राजीव गाँधी फाउंडेशन, अमन बिरादरी ट्रस्ट के साथ पर्टनरशिप में था, जिसकी स्थापना हर्ष मंदर के द्वारा की गई थी, जो कि ‘एक्टिविस्ट’ है और उस संगठन का सदस्य है, जो इटालियन सीक्रेट सर्विस के साथ काम करता है।

इतनी ही नहीं, कॉन्ग्रेस का यहूदी अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस के साथ भी काफी नजदीकी संबंध रहा है। बता दें कि जॉर्ज सोरोस का विदेश के आंतरिक मामलों में दखल देने का इतिहास रहा है। उस पर कई देशों द्वारा उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया गया है। भारत में, जॉर्ज सोरोस ने कई भारतीय गैर सरकारी संगठनों के अपने धन के माध्यम से कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ काफी करीबी संबंध स्थापित किए।

साल 2007-08 के लिए राजीव गाँधी फाउंडेशन की वार्षिक रिपोर्ट में Human Rights Law Network (HRLN) को पार्टनर बताया गया। 2014-15 में विदेशी दान केवल Human Rights Law Network के लिए उपलब्ध हैं, इसलिए, हम यह सुनिश्चित नहीं कर सकते हैं कि संगठन को विदेशी धन प्राप्त हो रहा था, हालाँकि यह राजीव गाँधी फाउंडेशन के साथ पार्टनरशिप में था। लेकिन इसकी FCRA सबमिशन बताती है कि इसे जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी संस्थान से बड़ी मात्रा में धनराशि प्राप्त हुई है।

ओपन सोसाइटी इंस्टीट्यूट के अलावा, एचआरएलएन को ईसाई मिशनरी संगठनों और विदेशी सरकारों से भी भारी धनराशि मिली है। HRLN भी नक्सल से जुड़े संगठनों के साथ भारतीय राजद्रोह कानूनों के खिलाफ अभियान चला रहा है और रोहिंग्याओं को भी मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान कर रहा है, जो इस देश में अवैध रूप से रह रहे हैं।

आरजीएफ अपने सिस्टर ऑर्गेनाइजेशन राजीव गाँधी चैरिटेबल ट्रस्ट (RGCT) के माध्यम से क्लिंटन फाउंडेशन से जुड़ा हुआ है। जबकि सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के अलावा कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता भी RGF में शीर्ष अधिकारी हैं। केवल माँ-बेटे की जोड़ी पार्टी के शीर्ष अधिकारियों में आरजीसीटी में न्यासी बोर्ड में दिखाई देती है।

आरजीसीटी की वेबसाइट के अनुसार, एक अन्य सिस्टर ऑर्गेनाइजेशन ने रायबरेली और अमेठी जिलों के भीतर 31 ब्लॉकों में डायरिया के प्रबंधन पर समुदाय के सदस्यों को प्रशिक्षित करने के लिए CHAI के साथ पार्टनरशिप की।

यह स्पष्ट है कि जॉर्ज सोरोस के साथ नेहरू-गाँधी परिवार के व्यापक संबंधों का भारत और भारतीयों के लिए गहरा प्रभाव है। हम अपेक्षाकृत निश्चित हो सकते हैं कि जब तक नेहरू-गाँधी परिवार कॉन्ग्रेस पार्टी पर शासन करना जारी रखेगा, भारतीय राष्ट्रवाद का बचाव करने के लिए उस पर भरोसा नहीं कर सकते। पिछले कुछ वर्षों में, कॉन्ग्रेस के व्यवहार से यह बात सामने आई है कि वह केवल सत्ता की परवाह करती है, उन्हें राष्ट्र की या लोगों की चिंता नहीं है।

उइगर समुदाय की औरतों के गर्भाशय में यंत्र फिट कर देता है चीन: हजारों का जबरन गर्भपात, ड्रग्स देकर रोके पीरियड्स

चीन में करीब 20 लाख उइगर डिटेंशन कैम्प्स में रखे गए हैं। उनके परिवारों पर सरकारी अधिकारी निगरानी रखते हैं। अब पता चला है कि उइगर महिलाओं का जबरदस्ती गर्भपात करा दिया जाता है।

जैसा कि स्पष्ट है, चीन को मसीहा के रूप में देखने वाले जम्मू-कश्मीर के कट्टर इस्लामी इस पर कुछ नहीं बोलेंगे। पाकिस्तान की तो छोड़ ही दीजिए, इमरान खान कहते हैं कि उन्हें उइगर पर हो रहे अत्याचारों के बारे में कुछ पता ही नहीं।

उइगर महिलाओं का नियमित रूप से प्रेग्नेंसी टेस्ट कराया जाता है। साथ ही उनके गर्भाशय में यंत्र फिट कर दिए जाते हैं। हज़ारों महिलाओं का जबरन गर्भपात कराए जाने की भी ख़बर सामने आई है। कहा जा रहा है कि अब तक लाखों महिलाओं के साथ ये सब कुछ किया जा चुका है। जहाँ पूरे चीन में गर्भपात की संख्या घटती जा रही है, शिनजियांग में इसमें जबरदस्त वृद्धि आई है।

उइगर समुदाय में जिन लोगों के ज्यादा बच्चे होते हैं, उन्हें चीन जबरदस्ती प्रताड़ना कैम्पों में ठूँस देता है। जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं, उन माता-पिता के बच्चों को उनसे दूर कर दिया जाता है। उन्हें भारी धनराशि जमा करवाई जाती है। बिलखते माता-पिता अपने बच्चों से दूर उन्हें खोजने में लगे रहते हैं। साथ ही पुलिस ऐसे लोगों के घर पर छापेमारी करती है और बच्चों तक को भी उठा कर ले जाती है।

कजाखस्तानी मूल की एक उइगर समुदाय की महिला गुलनार ओमिरजाख ने जैसे ही अपने तीसरे बच्चे को जन्म दिया, चीन की कम्युनिस्ट सरकार को इसकी भनक लग गई। इसके बाद अधिकारियों और मेडिकल टीम भेज कर उसके गर्भाशय में IUD में गर्भनिरोधक यंत्र डाल दिए गए। इसके 2 साल बाद जनवरी 2018 में चीनी अधिकारी उसके पास फिर पहुँचे और तीन बच्चे पैदा करने के लिए 2 लाख रुपए की धनराशि दंडस्वरूप देने को कहा। इसके लिए उन्हें मात्र 3 दिनों का समय दिया गया।

ऐसा नहीं करने पर महिला को धमकी दी गई कि उसे और उसके पति को लाखों दूसरे उइगर समुदाय की तरह प्रताड़ना कैम्पों में डाल दिया जाएगा। शिनजियांग में डर का आलम ये है कि मात्र 1 साल में बच्चों के जन्म की दर 24% घट गई है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर ये औसत काफ़ी कम, मात्र 4.2% ही है।

‘द एसोसिएट प्रेस’ के अनुसार, शिजियांग सबसे ज्यादा जन्म दर वाला क्षेत्र हुआ करता था, लेकिन सरकार द्वारा करोड़ों डॉलर फूँकने के बाद यहाँ जन्म दर काफ़ी तेज़ी से घट रहा है।

चीन में अल्पसंख्यक क्षेत्रों का अध्ययन करने वाले जेंग ने कहा कि इस तरह की गिरावट शायद ही कहीं देखी जाती है। ये एक बड़े ‘बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम’ का हिस्सा है, जिसे चीन कि कम्युनिस्ट सरकार द्वारा चलाया जा रहा है। इसमें स्वेच्छा के लिए कोई जगह नहीं है और अत्याचार पर ही सारी प्रक्रिया आधारित है। 2014 मे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शिनजियांग दौरे के साथ ही वहाँ ‘बर्थ कंट्रोल’ वाला प्रोग्राम तय कर लिया गया था।

चीन सरकार समर्थक विशेषज्ञों का कहना है कि बम ब्लास्ट, चाकूबाजी और अन्य प्रकार के हमलों के अलावा आतंकी हमलों के लिए भी शिनजियांग के उइगर ही दोषी हैं।

शिनजियांग अकादमी ऑफ सोशल साइन्सेज का कहना है कि चीन मे गरीबी और कट्टरता के लिए यही उइगर जिम्मेदार हैं, इसीलिए इनके बच्चे पैदा करने कि दर को कम करना जरूरी है। अन्य विशेषज्ञ इसे उइगर समुदाय को उनकी पहचान से दूर करने और उनकी जनसंख्या कम करने के इरादे को कारण बताते हैं।

यूके के न्यूकासल यूनिवर्सिटी के जाऊन स्मिथ फिनली का कहना है कि ये एक ऐसा नरसंहार है, जिसकी प्रक्रिया को एकदम धीमा रखा गया है। उन्होंने कहा कि उइगरों कि जनेटिक जनसंख्या कम करने के लिए ये सब किया जा रहा है। पुलिस-प्रशासन के अधिकारी गर्भवती महिलाओं और बच्चों को खोजने के लिए उइगरों के घर-घर जाकर चेक करते हैं। चीन सरकार ने स्पेशल कमरे बनाए हैं, जहां अल्ट्रासाउन्ड स्कैनर्स लगे गए हैं।

साथ ही उइगर महिलाओं का जबरन गायनोकोलॉजी टेस्ट कराया जाता है। ट्रैक्टर ड्राइवर अबदुशुकुर उमर को 7 साल कि सजा दी गई, क्योंकि उनके 7 बच्चे थे। साथ ही चीन हान समुदाय और उइगरों के बीच अन्तर्जातीय विवाह पर भी जोर दे रहा है, ताकि वहाँ कि डेमोग्राफी बदली जाए। महिलाओं को जबरन ऐसे लेक्चरों मे हिस्सा लेने कहा जाता है, जहाँ बच्चे न पैदा करने की सलाह दी जाती है।

7 ऐसी ही पीड़ित उइगर महिलाओं ने खुलासा किया है कि उन्हें बर्थ कंट्रोल पिल खिलाए गए और इंजेक्शन दिए गए। महिलाओं को इन दवाओं के कारण आलस, थकान और बेहोशी जैसी हालत हो गई। इसके बाद उन महिलाओं के पीरियड्स आने ही बंद हो गए। जब हिरासत और प्रताड़ना कैंपों से निकल कर ये महिलाएँ किसी तरह चीन से बाहर निकलने में कामयाब हुई और उन्होंने मेडिकल टेस्ट कराया तो पाया कि उन्हें ड्रग्स देकर बाँझ बना दिया गया है।

हालाँकि, जम्मू-कश्मीर में डेमोग्राफी और अत्याचार का रोना रोने वाले वहाँ कि जनता के झूठे ठेकेदारों के पास चीन के खिलाफ बोलने के लिए हिम्मत नहीं है, क्योंकि उन्हें अपना उल्लू सीधा करना है। इन इस्लामी कट्टरपंथियों ने आज तक लाखों उइगरों पर हो रहे अत्याचार पर एक शब्द नहीं कहा। जबकि जम्मू-कश्मीर में सारी चीजें लोकतान्त्रिक प्रक्रिया के तहत होती है। वहाँ लोगों को शेष भारत से ज्यादा ही सुविधाएँ और अधिकार मिलते रहे हैं।

इससे पहले ख़बर आई थी कि चीनी उइगरों की पत्नियों के साथ उसी बिस्तर पर सोते हैं। उइगर परिवारों के लिए नियम बनाया गया है कि वो नियमित रूप से चीनी अधिकारियों को अपने घर पर आमंत्रित करें और अपने मजहबी और राजनीतिक विचारों से उन्हें अवगत कराएँ। ये चीनी सम्बन्धी उइगरों के परिवारों को चीन की क्षेत्रीय नीति और चीनी भाषा की शिक्षा देते हैं। वो अपने साथ शराब और सूअर का माँस लाते हैं, और उइगर समुदाय को जबरन खिलाते हैं। 

मुस्लिम बन या भभूड़ में मूत, मेरे पिता को तड़पा-तड़पाकर मार डाला: मेवात के मुकेश का दावा, पुलिस ने बताया- झूठा

पिछले दिनों पूर्व जस्टिस पवन कुमार की अगुवाई वाली 4 सदस्यीय समिति की एक रिपोर्ट आई थी। इसमें बताया गया था कि हरियाणा का मेवात ‘मिनी पाकिस्तान’ बन चुका है। जिले के करीब 500 गाँवों में से 103 हिंदूविहीन हो चुके हैं। 84 गाँव ऐसे हैं जहाँ अब केवल 4 या 5 हिंदू परिवार ही शेष हैं।

इस रिपोर्ट के बाद से मेवात में हिंदू प्रताड़ना के कई पुराने मामले चर्चे में आए हैं। इनमें से ही एक मामला रामजीलाल की हत्या का है। कथित तौर पर रामजीलाल की हत्या बीते साल अप्रैल में समुदाय विशेष के लोगों ने कर दी थी और उसके बाद से उनका परिवार गॉंव छोड़कर न्याय की तलाश में भटक रहा है।

रामजीलाल के बेटे मुकेश का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। इसमें वो अपने पिता की हत्या और उसके बाद गॉंव छोड़ने की मजबूरी के बारे में बता रहे हैं। साथ ही इसमें वे दावा कर रहे हैं कि उनके पिता को तड़पा-तड़पाकर मारा गया। उनसे कहा कि मुस्लिम बन या भभूड़ में मूत। मुकेश कहते हैं कि आँच को भभूड़ कहते हैं। हिंदू आँच पर पेशाब नहीं करेगा, क्योंकि मौत के बाद उन्हें आग में ही जलना होता है।

मुकेश ने ऑपइंडिया को बताया कि वह हरियाणा के बिछोर गाँव का निवासी है। पिछले साल 7 अप्रैल को उसके पिता रामजीलाल (60) गाँव से करीब दो किलोमीटर दूर अपने खेतों पर एक मुस्लिम युवक की ट्यूबवेल से पानी लगा रहे थे।

उसने बताया, “मैं पिता जी को खाना देकर उनके कहने पर देर शाम को घर वापस आ गया। सब कुछ ठीक था और अगली सुबह जब मैं चाय लेकर पहुँचा तो पिता का शव जगह-जगह से जला हुआ खेत में पड़ा हुआ था। शव को देख मैं जोर-जोर से बिलखने लगा। शव के पास फर्सा, आग में जले कुछ कपडे और कपास बिखरे पड़े थे, जिसकी मदद से आग लगाई गई थी।”

मुकेश के अनुसार इस दौरान उसने पुलिस और सरपंच के पिता इक़बाल को आते देखा। उसने बताया तब तक उसने पुलिस को घटना की सूचना नहीं दी थी। पुलिस ने मेरी नहीं सुनी और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पुलिस उल्टा आरोपितों के घर में बैठकर और वापस चली गई।

मुकेश ने बताया कि इसके बाद वह शिकायत लेकर पुलिस थाने गया तो उसे भगा दिया गया। उसने एसपी ऑफिस में भी शिकायत दी, लेकिन आरोपितों के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है और न ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट उसे दी गई है।

घटना के बाद मुकेश द्वारा पुलिस को लिखित में दी गई शिकायत के मुताबिक हत्या के सबूतों को मिटाने के लिए रामजीलाल को जिंदा जलाया गया। शिकायत में उसने साहून पुत्र अख्तर, अकील पुत्र लियाकत, सहूद पुत्र निज्जा, लियाकत पुत्र रसूल खां निवासी बिछोरा, अतरू पुत्र सूका व खल्ली पुत्र अख्तर निवासी झारोकड़ी पर अपने पिता की हत्या करने का शक जताया है। मोहम्मद और इकबाल इनाम खां को साजिशकर्ता बताया है।

आईजी को दी गई मुकेश की शिकायत

इस सम्बन्ध में बिछोर थाना इंचार्ज भगवती प्रसाद ने बताया कि रामजीलाल की मौत आकाशीय बिजली गिरने से हुई थी। उनका बेटा मुकेश झूठी बातें करके माहौल को खराब करना चाहता है। गाँव में पुलिस पर कभी पथराव नहीं हुआ। पुलिस पर लगाए गए आरोप गलत हैं।

लेकिन मुकेश ने बताया कि इकबाल की लड़की अंजुम सरपंच है, लेकिन सरपंच का काम इकबाल ही करता है। पिता ने घटना से 24 घंटे पहले ही उसे और उसकी माँ को बताया था कि इकबाल उनके साथ कुछ भी कर सकता है। मुकेश के मुताबिक इकबाल ने 5-6 लोगों ने साथ मिलकर उसके पिता की हत्या कराई है।

मुकेश का यह भी कहना है कि उसके पिता ने अयोध्या आंदोलन में हिस्सा लिया था। वे विश्व हिंदू परिषद से जुड़े थे। इसके कारण वे मुस्लिम कट्टरपंथियों के निशाने पर रहते थे।

मुकेश ने बताया कि हत्या के बाद भी मुस्लिमों ने उन्हें बहुत प्रताड़ित किया। आए दिन घर पर ईंट-पत्थर फेंके जाते थे। इसके कारन पिता की तेरहवीं के बाद उनके पूरे परिवार ने गाँव छोड़ दिया।

मुकेश ने बताया कि गाँव में उसके पिता के नाम की करीब तीन किला खेत है। बुवाई के लिए वे चारों भाई साथ जाते हैं लेकिन हर बार मुस्लिम जबरन उनकी फसल को काट ले जाते हैं। अब वे होडल में रेहड़ी लगाकर परिवार का भरण-पोषण करने को मजबूर हैं।

मुकेश के मुताबिक गाँव में 90% आबादी मुस्लिम की है। ये लोग आए दिन हिंदुओं के घरों को निशाना बनाते रहते हैं। इसके कारण गाँव से अधिकांश हिंदू परिवार पलायन कर चुके हैं। इतना ही नहीं गाँव का कोई भी हिंदू परवार अपनी लड़की को समुदाय विशेष के डर से बाहर पढ़ने के लिए नहीं भेजता।

भटका हुआ नौजवान: यूट्यूब पर दंगे देख कर भटक गया था, गोली चलाने लगा- शाहरुख माँग रहा माफी

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के दौरान एक पुलिस वाले पर पिस्तौल तानने वाले शाहरुख पठान को अब अपनी गलती का अहसास हो रहा है। पुलिस को दिए अपने बयान में उसने बताया कि दिल्ली के मौजपुर चौक पर सीएए-विरोध प्रदर्शन के एक वीडियो को यूट्यूब पर देखने के बाद वो उत्तेजित हो गया था।

शाहरुख पठान ने दिल्ली पुलिस को बताया कि इसके बाद वह भी सीएए-विरोध में शामिल हो गया। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार यूट्यूब वीडियो को देखने के बाद उसने उत्तेजना में आकर पुलिस वालों पर पथराव किया और फायरिंग की।

शाहरुख पठान ने पुलिस को बताया:

“मैंने बीए की पढ़ाई दूसरे साल ही छोड़ दी थी। मैं और मेरा भाई मोजे बनाने का काम करते थे। 23 फरवरी को मैंने यूट्यूब पर मौजपुर चौक पर सीएए-विरोध प्रदर्शन वाला वीडियो देखा और उत्तेजित हो गया। 24 फरवरी को लगभग 11 बजे, मैं मौजपुर चौक पहुँच गया। वहाँ सीएए-समर्थक और सीएए-विरोधी एक-दूसरे पर पथराव कर रहे थे। मैंने भी पथराव शुरू कर दिया। मेरे पास एक पिस्तौल भी थी। उसे मैंने पुलिस वाले की ओर इशारा कर निकाल लिया। उस दिन के वीडियो फुटेज से मैं अन्य आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी में मदद कर सकता हूँ। मैंने गलती की, कृपया मुझे क्षमा करें।”

आपको बता दें कि दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगो के दौरान सरेआम पुलिसकर्मी पर पिस्तौल तानने वाले शाहरुख पठान को ज़मानत देने से दिल्ली हाई कोर्ट ने इंकार कर दिया था। शाहरुख पठान ने इस अर्जी में अपने पिता के ऑपरेशन का हवाला देकर जमानत माँगी थी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले शाहरुख पठान ने कोरोना का हवाला देकर जमानत माँगी थी। लेकिन उसकी जमानत अर्जी को कड़कड़डूमा कोर्ट ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने साफ कहा था कि अभी आरोपित शाहरुख पठान को जमानत नहीं दी जा सकती है।

याद दिला दें कि फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी (NRC) के विरोध में 23 और 24 फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे से ठीक पहले उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिंसा हुई थी। इस दौरान जाफराबाद-मौजपुर इलाके में लोगों को भड़काने और हलवदार पर पिस्तौल तानने के आरोपित शाहरुख को यूपी के शामली से 3 मार्च को गिरफ्तार किया गया था।

हिंसा के दौरान शाहरुख ने जाफराबाद इलाके में 8 राउंड फायरिंग की थी। उसके पास से एक पिस्तौल तथा दो कारतूस जब्त किए गए थे। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दिल्ली में शाहरुख के घर से पिस्टल और तीन कारतूस बरामद किए थे।

गेट तोड़ा-घर घेरा, लेकिन डरे नहीं दंपति, 300 दंगाइयों के सामने हैंडगन और रायफल लेकर खड़े रहे: Video

अमेरिका के सेंट लुइस में जब ‘शांतिप्रिय’ प्रदर्शनकारियों ने एक हवेली को घेर लिया तो हैंडगन और रायफल लेकर घर वाले बाहर ही खड़े मिले। इसका एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। इसमें दंपति अपने घर को बचाने के लिए रायफल और हैंडगन ताने हुए दिखाई दे रहे हैं।

डेली मेल के मुताबिक वीडियो में जो दंपति दिख रहे हैं, पेशे से दोनों वकील हैं। पति का नाम मार्क और पत्नी का नाम पेट्रीसिया मैकक्लोस्की बताया जा रहा है। यह घटना रविवार (जून 28, 2020) शाम करीब 6 बजे की है। जब ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ दंगाइयों ने हवेली को घेर लिया। दंपती ने भी अपने घर को बचाने के लिए कमर कस ली और उन्हें बंदूक के निशाने पर लिया।

मार्क और पेट्रीसिया प्रदर्शनकारियों को उनकी हवेली से बाहर निकलने के लिए कह रहे थे और हथियारों की मदद से वो उन्हें दूर रखने की कोशिश कर रहे थे। वीडियो में मार्क को दंगाइयों को चेतावनी देते हुए देखा जा सकता है। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को “Let’s go” और “Keep moving” बोलते हुए सुना जा सकता है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ दंगाई सेंट लुइस के मेयर लिडा क्रूसन के घर की ओर उनसे इस्तीफा माँगने के लिए जा रहे रहे थे। इसी दौरान वो लोग इस दंपति के घर में घुस गए, जिसके बाद इस तरह की स्थिति उत्पन्न हो गई। उन लोगों ने एक गेट को तोड़ दिया। इस दौरान दंपति ने लगभग 300 प्रदर्शनकारियों के समूह का सामना किया।

अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद वहाँ ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ नाम का प्रोटेस्ट शुरू हुआ, जिसके कारण वहाँ भीषण दंगे हुए। इन दंगों की आग यूरोप में भी कई देशों तक पहुँची। इस दौरान कई जगह आगजनी, हिंसा और लूटपाट की घटनाएँ भी सामने आई। बुधवार (4 मई, 2020) को प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका के वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास के सामने लगी गाँधी जी की प्रतिमा को नुकसान पहुँचाया था। वहीं ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ के प्रदर्शनकारियों ने लंदन के वेम्ब्ले के ईलिंग रोड में स्थित मीरा नाम की एक भारतीय महिला के रेस्टॉरेंट पर हमला बोल दिया था। 

‘क से कृष्ण, क से कोरोना’: कॉन्ग्रेस नेता ने कोरोना वायरस के लिए भगवान श्रीकृष्ण को ठहराया जिम्मेदार

कॉन्ग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने कहा है कि कोरोना वायरस भगवान श्रीकृष्ण की देन है। वे उत्तराखंड प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के उपाध्यक्ष हैं।

धस्माना ने कहा कि कहा कि ‘क’ से कृष्ण और ‘क’ से कोरोना वायरस होता है, इसीलिए कोरोना वायरस भगवान श्रीकृष्ण के कारण ही आया है। मीडिया के साथ बातचीत में उन्होंने ये बेतुका बयान दिया।

वो चार धाम यात्रा शुरू होने के सम्बन्ध में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि चूँकि कोरोना वायरस संक्रमण तेज़ी से बढ़ रहा है, इसीलिए इस यात्रा को शुरू करने का कोई तुक नहीं है। उन्होंने दावा किया कि चार धाम यात्रा शुरू होने से उत्तराखंड में श्रद्धालुओं की तादाद बढ़ जाएगी और उनके भारी संख्या में यहाँ आने से कोरोना वायरस संक्रमण की आपदा और ज्यादा बढ़ जाएगी।

‘दैनिक जागरण’ की ख़बर के अनुसार, उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कोरोना दिया है। अपने बयान के बचाव के लिए उन्होंने भगवद्गीता को उद्धृत किया। बकौल सूर्यकांत धस्माना, गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि वे ही सृष्टि के निर्माता, पालनकर्ता और संहारकर्ता हैं। साथ ही वो प्रदेश सरकार पर भी बरसे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार कोरोना वायरस संक्रमण आपदा से निपटने में पूरी तरह से विफल रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार रुपए लेकर कोरोना टेस्टिंग की अनुमति दे रही है। वहीं उत्तराखंड में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने हल्द्वानी में अंतर्राज्यीय बस अड्डे को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने याद दिलाया कि वर्चुअल रैली में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हल्द्वानी में अंतर्राज्यीय बस अड्डे और रिंग रोड का निर्माण अतिशीघ्र करने का आश्वासन दिया था लेकिन अब तक इस पर काम शुरू नहीं हुआ है। 

इससे पहले पाकिस्तान के एक मौलवी ने कबूतर के शरीर के एक विशेष स्थान को पका कर खाने को कोरोना वायरस से संक्रमण का इलाज बताया था। उसके बाद एक दूसरे मौलवी ने अल्लाह से दुआ की थी कि कोरोना वायरस ‘को काफिर मुल्कों’ की तरफ भेज दिया जाए। उक्त मौलवी ने कहा कि था अल्लाह ने अगर मदद नहीं की तो कोरोना सब कुछ ख़त्म कर देगा। अब कॉन्ग्रेस नेता भी इसी तरह के बयान देकर सुर्खियाँ बटोर रहे हैं।

मेरा हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से अब कोई लेना-देना नहीं: 90 वर्षीय गिलानी का अलगाववादी फोरम से इस्तीफा, Pak का था दबाव

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के 90 वर्षीय नेता सैयद अली शाह गिलानी ने अलगाववादी संगठनों के फोरम हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को अलविदा कह दिया है। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के साथ ही हाउस अरेस्ट किए गए गिलानी ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा दे दिया है। हालाँकि, गिलानी ने इस्तीफे के कारणों का जिक्र नहीं किया गया और कहा है कि कुछ ऐसे मुद्दे थे, जिनके कारण उन्हें इस्तीफा देने के लिए बाध्य होना पड़ा

सैयद अली शाह गिलानी पिछले 30 साल से जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद का सबसे बड़ा चेहरा बने हुए थे। उन्होंने एक ऑडियो मैसेज में कहा है कि ताज़ा परिस्थितियों के कारण उन्होंने इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि उनका अब इस अम्ब्रेला संगठन से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने इस फोरम के सभी संगठनों को पत्र लिख कर अपने फ़ैसले से अवगत करा दिया है।

एनडीटीवी के सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान में कई लोग गिलानी से नाराज़ थे, क्योंकि वो मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने और उसे केंद्र शासित प्रदेश में बदलने वाले निर्णय के खिलाफ आवाज़ नहीं उठा सके और न ही अपने लोगों को गोलबंद कर के सरकार पर दबाव बना सके। सैयद अली शाह गिलानी पिछले कुछ दिनों में चुप ही रहे हैं और उन्होंने कोई ख़ास बयान नहीं दिया है।

सैयद अली शाह गिलानी के बारे में कहा जा रहा है कि ढलती उम्र के साथ उनका स्वास्थ्य भी बिगड़ रहा है, जिससे वो जम्मू-कश्मीर मामलों में सक्रियता नहीं दिखा पा रहे थे और अलगावादियों का एक बड़ा धड़ा उनसे नाराज़ चल रहा था। उनके फ़िलहाल मेडिकेशन पर होने की बात भी कही जा रही है। वो कई महीनों से इलाजरत हैं। जम्मू-कश्मीर के कई अलगाववादी नेता फ़िलहाल अलग-अलग जेलों में क़ैद हैं।

पिछले साल अप्रैल में सैयद अली शाह गिलानी पर आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली की संपत्ति को सीज कर दिया था। आयकर विभाग के अधिकारियों ने दिल्ली के मालवीय नगर के खिड़की एक्सटेंशन स्थित प्रॉपर्टी को सीज कर दिया था। विभाग के कर वसूली अधिकारी (टीआरओ) ने 1996-97 से लेकर 2001-02 के बीच गिलानी द्वारा ₹3.62 करोड़ आयकर का भुगतान करने में विफल रहने पर इस घर को सील किया था।

एक बार ‘इंडिया टुडे कन्क्लेव’ में सैयद आली शाह गिलानी को पत्रकार आदित्य राज कौल ने करारा जवाब दिया था। उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर कश्मीरी पंडितों का भी उतना ही है, जितना कश्मीर के समुदाय विशेष वालों का। आदित्य राज कौल ने उनके सामने ही कहा था कि उनके जैसे अलगाववादी ये भूल जाते हैं कि कश्मीरी पंडितों के साथ क्या हुआ था। आदित्य ने कहा था कि गिलानी जैसे पाकिस्तानी एजेंट्स को घाटी के भविष्य के बारे मे निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है।

शहनाई की जगह मातम क्यों? छोटी बेटी से अनीश खान और उसके साथियों ने किया रेप, पिता पेड़ से लटके मिले

राजस्थान के अलवर जिले के रामगढ़ कस्बे के बालोत नगर में 29 जून को एक घर में शादी की शहनाई गूँजनी थी। लेकिन परिस्थितियाँ ऐसी बनीं कि आज की तारीख में उस घर में मातम पसरा है।

जिस पिता को आज अपनी बेटी ब्याह कर विदा करनी थी, वह 5 दिन पहले एक पेड़ की डाल पर फंदे से लटके मिले थे।

पुलिस इसे आत्महत्या का मामला बता रही। लेकिन पीड़ित परिवार के सदस्यों ने इसे हत्या बताया और इसके पीछे सुमराद्दीन, महमूद, अंजुम, तौफीक और अन्य लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करवाया है।

मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि मंगलवार (जून 23, 2020) देर रात आरोपित लड़की के पिता को घर से बाहर बुलाकर ले गए थे और उनकी हत्या कर पेड़ से लटका दिया। उनका शव घर से महज 500 मीटर दूर पेड़ से लटका हुआ मिला था।

क्या है मामला?

राजस्थान के अलवर के रामगढ़ निवासी इस पिता की गलती बस इतनी थी कि वह अपनी छोटी बेटी के रेप के आरोप में मुस्लिम समुदाय के युवकों के ख़िलाफ़ अदालत में केस लड़ रहा था। सुनवाई से ठीक पहले उनका शव घर से थोड़ी दूर पर लगे एक पेड़ से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही पूरे परिवार में कोहराम मच गया

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि छोटी बेटी से बलात्कार के आरोपित लगातार पीड़ित के पिता पर अपनी राजनीतिक पहुँच और पुलिस संरक्षण के चलते दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे। ये दबाव इतना ज्यादा था कि पिता से बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने फाँसी के फंदे पर लटककर आत्महत्या कर ली।

पिता के इस कदम से पहले रेप पीड़िता ने भी परिजनों की परेशानी देखते हुए 18 जून को कुएँ में कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी। लेकिन ग्रामीणों की नजर पड़ने के कारण उसे समय रहते बचा लिया गया।

इसके बाद, आरोपित पक्ष के लोगों ने पिता पर बड़ी बेटी की शादी में रुकावट की धमकियाँ देकर दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसके कारण लड़की के पिता तनाव में रहने लगे।

पिता बड़ी मशक्कत करके शादी समारोह को बिना किसी अड़चन के संपन्न करवाना चाहते थे। मगर, उन्हें इसके आसार नहीं नजर आ रहे थे। नतीजतन उन्होंने शादी से ठीक पाँच दिन पहले यह बड़ा कदम उठाया या ये कहें कि उनसे ऐसा करवाया गया।

बता दें इस मामले के संबंध में रेप पीड़िता ने रामगढ़ थाने में अनीश, तौफिक और अंजुम के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। लेकिन पुलिस ने आरोपितों पर मामला दर्ज करने से मना कर दिया और इस मामले में सिर्फ 3 युवकों को शांतिभंग के आरोप में पकड़ लिया।

बाद में पीड़ित परिवार के अनुसार थानाप्रभारी की शिकायत पुलिस अधीक्षक तक पहुँचने के कारण पुलिस ने एक आरोपी अनीश को पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तार किया।

पॉक्सो एक्ट में एक की गिरफ्तारी के बाद अन्य नामजद तौफीक और अंजुम को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। रेप पीड़िता के पिता की मौत के बाद अब परिजनों ने आधा दर्जन से अधिक लोगों पर हत्या का आरोप लगाया है।

अल्लाह से कहिए वो हमारा इम्तिहान न ले: J&K डोमिसाइल नियम पर फारूक अब्दुल्ला ने कहा- ये अवैध, हमें कबूल नहीं

जम्मू कश्मीर में राज्य (अब UT) के बाहर से लोगों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट मिलने से पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भड़क गए हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष ने कहा कि नया डोमिसाइल नियम अवैध और असंवैधानिक है, इसीलिए जम्मू कश्मीर के लोगों को ये स्वीकार्य नहीं है। श्रीनगर के सांसद फारूक अब्दुल्ला ने नए डोमिसाइल नियम को मानने से इनकार करने की बात कही। वो अनंतनाग में मीडिया से बात कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि जब वो बार-बार कहते आ रहे हैं कि वो लोग ऐसा कुछ भी स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, जो अवैध और असंवैधानिक हो, ऐसे में वो ऐसे किसी भी नियम-क़ानून को कैसे स्वीकार कैसे कर सकते हैं, जिसके वो विरुद्ध हों। हाल ही में वहाँ 26 सालों से सेवा दे रहे नवीन चौधरी को डोमिसाइल सर्टिफिकेट इशू किया गया था, जिससे अब्दुल्ला पिता-पुत्र खासे नाराज चल रहे हैं।

बता दें कि सरकार ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है कि कोई भी व्यक्ति नागरिकता के लिए अप्लाई कर देगा और वो जम्मू-कश्मीर का नागरिक बन जाएगा। ऐसा इसीलिए, क्योंकि जिन्हें नागरिकता मिली है, वो पहले से ही राज्य में रह रहे हैं। नियमानुसार, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में 15 वर्ष गुजारे हैं अथवा जो 7 साल अध्ययनरत हैं, उन्हें ही नागरिकता देने का प्रावधान है। वहाँ रजिस्टर हो चुके प्रवासी या ऐसे सरकारी अधिकारियों के बच्चों, जिन्होंने कम से कम 10 साल तक वहाँ सेवा दे चुके हैं, वो ही नागरिकता के योग्य हैं। 

साथ ही फारूक अब्दुल्ला ने भारत सरकार को पाकिस्तान और चीन से बातचीत कर मुद्दों को सुलझाने की माँग की। श्रीनगर के सांसद अब्दुल्ला कुछ ही हफ़्तों पहले 8 महीने की हिरासत काट कर लौटे हैं। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के साथ ही अब्दुल्ला पिता-पुत्र को हिरासत में रखा गया था। उन्होंने दावा किया कि जम्मू कश्मीर में बनी हालिया स्थिति तो ट्रायल भर है और इस घड़ी में लोगों को एकता बनाए रखने की ज़रूरत है।

जम्मू कश्मीर में नए डोमिसाइल नियम पर फारूक अब्दुल्ला का बयान

उन्होंने कहा कि ये इम्तिहान की घड़ी है, अल्लाह से कहिए कि वो हमारा इतना ज्यादा इम्तिहान न ले। साथ ही उन्होंने लोगों से ये भी कहा कि वो इम्तिहान से घबराएँ नहीं। बकौल फारूक अब्दुल्ला, अल्लाह ने ज़रूर कुछ न कुछ और अच्छा सोच रखा है, इसीलिए ये सब हो रहा है। अब्दुल्ला ने कहा कि ‘वो भी’ एक हैं और सिर्फ़ चुनाव के लिए ही नहीं बल्कि एक उद्देश्य को लेकर एक हैं।

बकौल अब्दुल्ला, पाकिस्तान हो या चीन, भारत के लिए युद्ध समाधान नहीं है और भारत को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। बता दें कि उनके बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी डोमिसाइल नियमों में बदलाव पर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि केंद्र शासित प्रदेश की डेमोग्राफी को बदलने के लिए ये सब एक साजिश के तहत किया जा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसके खिलाफ विरोध दर्ज कराया। 

हिजबुल का बलात्कारी कमांडर मसूद ढेर, त्राल के बाद डोडा भी ‘आतंकी मुक्त’

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल को हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकियों से पूर्ण रूप से मुक्त कराने के बाद अब सुरक्षाबलों ने श्रीनगर के डोडा इलाके को भी आतंकी मुक्त करवा लिया है। यह जानकारी स्वयं जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने दी है।

डीजीपी ने बताया है कि सोमवार को हुई मुठभेड़ में हिजबुल कमांडर मसूद के मारे जाने के बाद इलाका पूरी तरह से आतंकी मुक्त हो गया। वह बलात्कार के मामले में भी वंछित था।

डीजीपी दिलबाग सिंह ने इस संबंध में बताया, “अनंतनाग के खुल चोहार इलाके में पुलिस और राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट ने मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों को ढेर कर दिया। इनमें से एक लश्कर का जिला कमांडर था। मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर मसूद को भी ढेर कर दिया गया । इसके साथ ही जम्मू जोन का डोडा जिला आतंकियों से पूरी तरह मुक्त हो गया है।”

गौरतलब है कि अनंतनाग जिले में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच सोमवार को हुई मुठभेड़ में कुल तीन आतंकवादी मारे गए। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने दक्षिणी कश्मीर जिले के खुल चोहार में घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया था।

अधिकारी ने बताया कि आतंकवादियों के सुरक्षा बलों पर गोलियाँ चलाने के बाद अभियान मुठभेड़ में तब्दील हो गया। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ में तीन आतंकवादी मारे गए। इनमें लश्कर के दो आतंकियों के साथ ही हिजबुल कमांडर मसूद भी शामिल है। मौके से एक एके-47 राइफल और 2 पिस्टल भी बरामद हुई है।

यहाँ बता दें, इससे पहले अभी बीते शुक्रवार को जम्मू कश्मीर पुलिस ने त्राल को हिजबुल आतंकियों से मुक्त कराने का ऐलान किया था। कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) विजय कुमार ने इस बारे में सूचित करते हुए शुक्रवार को कहा था, ‘‘आज के सफल अभियान के बाद, त्राल क्षेत्र में अब हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों की मौजूदगी नहीं है। यह 1989 के बाद पहली बार हुआ है।’’

उन्होंने कहा था, “त्राल जिसे कभी आतंकवाद का हॉट बेड माना जाता था, वहाँ अब आधा दर्जन से अधिक स्थानीय आतंकवादी सक्रिय हैं, लेकिन हिजबुल मुजाहिदीन आतंकवादी संगठन से कोई नहीं बचा है।”