Home Blog Page 4720

असम में 2000 गाँव जलमग्न, 23 जिलों के 9.26 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित: अमित शाह ने की स्थिति की समीक्षा

असम में बाढ़ से हालात बिगड़ने के बाद ख़ुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्थिति सुधारने के लिए बागडोर संभाली है। धीमाजी और उदालगिरी जिलों में रविवार (जून 28, 2020) को भूस्खलन में एक कॉलेज छात्र के ज़िंदा ज़मीन में दफ़न होने के बाद बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या राज्य में 43 तक पहुँच गई है।

अमित शाह ने असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनवाल को फोन कॉल कर बाढ़ से बिगड़ी स्थिति की समीक्षा की। अमित शाह को सोनवाल ने बताया कि असम में बाढ़ से निपटने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की गई हैं और आगे क्या क़दम उठाए जाने वाले हैं।

अमित शाह ने उनसे पूछा कि बाढ़ राहत कैम्पों में कोरोना वायरस से संक्रमण से बचाव के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार को इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए पूर्ण सहायता देने का आश्वासन दिया। असम के 33 में से 23 जिलों में 9.26 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

अब तक लगभग 2000 गाँवों में बाढ़ का प्रभाव काफी बढ़ जाने की बात सामने आई है। ब्रह्मपुत्र नदी के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण फ़िलहाल स्थिति में सुधार आने की सम्भावना कम ही है।

असम में 133 राहत कैम्प स्थापित किए गए हैं और साथ ही उनमें 27,000 ऐसे लोगों को रखा गया है जो बाढ़ के कारण बेघर हो गए हैं। मई 22 से लेकर अब तक 21 लोगों की बाढ़ से मौत होने की सूचना है।

एक तीन साल के बच्चे की बाढ़ में बहने के कारण मौत हो गई। बारपेटा जिले में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर पड़ा है। अकेले 1.35 लाख बाढ़ प्रभावित इसी जिले में हैं। इस जिले के 395 गाँव बाढ़ में डूब चुके हैं। असम के 8 जिलों में एनडीआरएफ की टीमों को राहत कार्य के लिए तैनात किया गया है। अकेले रविवार को 8 जिलों में 9000 लोगों को बचाया गया। केंद्र सरकार योजना बना रही है कि आगे किस तरह असम सरकार की मदद की जाए।

किसानों पर बाढ़ से सबसे ज्यादा मार पड़ी है। कुल 68,000 हेक्टेयर की फसल बर्बाद हो चुकी है। अमित शाह ने राज्य के मंत्री हेमंत विश्व शर्मा से भी बातचीत की, जो बाढ़ से निपटने की तैयारियों में लगातार लगे हुए हैं। राज्य में कोरोना वायरस की समस्या भी बढ़ती जा रही है, ऐसे में सरकार के पास सोशल डिस्टनिंग को मेंटेन करने की भी चुनौती है। राज्य में फिलहाल कोरोना के 2400 सक्रिय मामले हैं।

हिंदू नेताओं पर मंडरा रहा खतरा, खालिस्तानी आतंकियों के खुलासे के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा

आतंकी संगठन खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट (KLF) के 3 आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद कई खुलासे हुए हैं। इनसे पूछताछ में पता चला है कि इनके निशाने पर हिंदूवादी नेताओं समेत अमृतसर के शिवसेना नेता और डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी थे।

अब इसी जानकारी के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने प्रदेश के हिंदू नेताओं की सुरक्षा कड़ी कर दी है। साथ ही हिंदू नेताओं की सुरक्षा में जुटे पंजाब पुलिस के जवानों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ दिन पहले हिंदू नेता सुधीर सूरी जेल से जमानत पर बाहर आए हैं। उन्हें आतंकी संगठनों की तरफ से लगातार मिल रही धमकियों के मद्देनजर सरकार ने उन्हें 12 सुरक्षाकर्मी दे रखे हैं।

वहीं, ब्राह्मण कल्याण मंच के संस्थापक नरेश धामी और हिंदू धर्म सत्कार कमेटी के प्रमुख भी सुरक्षा घेरे में हैं। उक्त नेताओं के क्षेत्र से संबंधित प्रत्येक थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज को अलर्ट किया गया है।

अभी तक प्राप्त सूचना के अनुसार, दिल्ली से गिरफ्तार तीनों आतंकी पाकिस्तान में मारे गए KLF के आतंकवादी हैप्पी पीएचडी के भी संपर्क में रह चुके हैं। इन तीनों की पहचान आतंकी मोहिंदर पाल सिंह, गुरतेज सिंह और लवप्रीत सिंह के तौर पर हुई है।

इन्हें लेकर यह भी कहा जा रहा है कि ये तीनों अमृतसर के जंडियाला गुरु क्षेत्र में खालिस्तानी मूवमेंट से जुड़े आतंकी गुरमीत सिंह और विक्रमजीत सिंह से भी संबंध रखते थे।

पूछताछ में तीनों ने खुलासा किया कि ये सभी भारत से बाहर बैठे खालिस्तानी आतंकियों के लगातार संपर्क में थे और आईएसआई की पनाह में बैठे खालिस्तानी आतंकियों के इशारे पर हिंदू संगठनों के नेताओं की टारगेट किलिंग का प्लान बना रहे थे। इसके अलावा हथियारों के प्रशिक्षण के लिए पाक जाने का प्रयास कर रहे थे।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार, दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट (केएलएफ) के आतंकी गुरतेज सिंह का संबंध आतंकी जगतार सिंह हवारा से है। हवारा वही शख्स है, जो पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में दोषी है। बताया जाता है कि हवारा द्वारा बनाई गई आतंकियों की 21 सदस्यों वाली कमेटी का वह सक्रिय सदस्य है।

TikTok स्टार शिवानी की आरिफ ने की हत्या, सैलून में छिपाई लाश: घरवालों ने लगाया एकतरफा प्यार का आरोप

हरियाणा स्थित रोहतक से अब एक TikTok स्टार शिवानी की उनके दोस्त द्वारा ही एकतरफा प्यार में हत्या किए जाने की ख़बर आई है। कुंडली के टीडीआई सिटी में स्थित अपने ही सैलून में शिवानी की लाश मिली। उनके पिता की शिकायत के बाद दोस्त आरिफ के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है।

रविवार (जून 28, 2020) को TikTok स्टार शिवानी के एक अन्य दोस्त ने सैलून खोला तो उसे किसी चीज की बदबू आई। बाद में उसने कमरा खोल कर देखा तो उसमें शिवानी की लाश पड़ी हुई थी। उनकी हत्या हो चुकी थी।

बताया गया है कि शिवानी के गले में निशान थे, उनकी हत्या गला दबा कर दी गई है। साथ ही उनका मोबाइल भी गायब है। पुलिस ने पिता के बयान पर प्याऊ मनियारी के रहने वाला आरिफ के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

पुलिस ने जानकारी दी है कि हत्या दो दिन पहले की गई है। जिस दिन हत्या हुई, उस दिन देर रात तक घर न पहुँचने पर शिवानी की बहन भारती ने उनके व्हाट्सप्प नंबर पर मैसेज कर पूछा तो जवाब आया, “मैं हरिद्वार में हूँ, मंगलवार को आऊँगी।” दरअसल, ये मैसेज हत्या आरोपित आरिफ ने ही किया था। 

शिवानी खोबियान बागपत के पुसार की रहने वाली थीं। उनके सैलून का नाम ‘टच एंड फेयर’ है। वो इसी इलाक़े में किराए पर अपने परिवार के साथ रहती थीं। शिवानी TikTok पर काफी फेमस थीं और उनके डेढ़ लाख से ज्यादा फॉलोअर होने की बात कही जा रही है।

‘दैनिक भास्कर’ की ख़बर के अनुसार, 26 जून को शिवानी का दोस्त आरिफ उनसे मिलने सैलून आया था। अपनी बहन को फोन पर शिवानी ने बताया भी था कि वह आरिफ से बात कर रही है।

शिवानी की सैलून में ही उसकी बहन श्वेता का दोस्त नीरज काम करता था और वो वहीं रहता था। वह दो दिन से कहीं बाहर गया हुआ था। रविवार को लौटने के बाद उसे शिवानी की लाश मिली। मृतिका के पिता विनोद के अनुसार, हत्या आरोपित आरिफ पहले प्याऊ मनियारी में रहता था।

शिवानी और आरिफ एक-दूसरे को अच्छे से जानते थे। उन्होंने बताया कि शिवानी द्वारा उससे बात न करने पर वह शिवानी को परेशान करने लगा। इसको लेकर दोनों के बीच लड़ाई-झगड़ा भी हुआ था। परिजनों ने बताया कि 15 दिन से दोनों में काफी झगड़ा चल रहा था।

‘अमर उजाला’ की ख़बर के अनुसार, आरिफ ने शुक्रवार को ही शिवानी की हत्या कर दी थी। वह उसी दिन से गायब थी। सैलून में उसकी बहन का दोस्त नीरज उसी बेड पर सोया करता था, जिसके नीचे शिवानी का शव पड़ा था। वह दो दिन तक अंदर रखे शव के ऊपर सोता रहा।

परिजनों का आरोप है कि एकतरफा प्यार में उनकी बेटी की हत्या की गई है। शव का पोस्टमॉर्टम हो गया है। फ़िलहाल आरोपित को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।

बता दें कि हाल ही में 16 वर्षीय टिकटॉक स्टार सिया कक्कड़ ने 25 जून, 2020 को फाँसी का फंदा लगा मौत को गले लगा लिया था। दिल्ली के प्रीत बिहार स्थित आवास से मिले शव के साथ पुलिस ने उनके मोबाईल को जब्त किया था। सिया को कुछ लोगों से धमकियाँ मिल रही थीं। इसे लेकर वह बेहद परेशान थीं। दिल्ली पुलिस के मुताबिक मामले की जाँच की जा रही है। आत्महत्या का कारण नहीं पता चल सका।

अपने हिस्से का एक बूँद पानी भी पाकिस्तान नहीं जाने देंगे: शेखावत ने पूछा- आज़ादी के बाद किसने Pak को दिया 66% पानी?

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत पानी के बँटवारे का काम होता आया है लेकिन भारत अब पाकिस्तान को अपने हिस्से का एक बूँद पानी भी देने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि वो अंतरराष्ट्रीय समझौतों की सुचिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन अपने हिस्से व खेतों के हिस्से का एक बूँद पानी भी बह कर पाकिस्तान या किसी दूसरे देश में न जाए, वो इसके लिए संकल्पित हैं।

उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि आज़ादी के समय भारत के हितों की अनदेखी कर भारत-पाकिस्तान के बीच नदियों का बँटवारा हुआ और सिंधु, झेलम और चेनाब जैसी तीन बड़ी नदियाँ पाकिस्तान को दे दी गईं और रावी, व्यास व सतलज जैसी छोटी नदियाँ भारत के हिस्से आईं। शेखावत ने कहा कि जहाँ 66% पानी पाकिस्तान को दे दिया गया, भारत के हिस्से मात्र 33% पानी ही आया।

शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पानी और खून एक साथ न बहने की बात कही थी, उसी को ध्यान में रखते हुए भारत अब अपने हिस्से का एक बूँद पानी भी किसी को नहीं देगा। वो चीन और पाकिस्तान पर पूछे सवाल का जवाब दे रहे थे। इससे पहले उन्होंने कहा था कि भारत अपने हिस्से के पानी का पूरा इस्तेमाल करेगा। इसे किसी और देश में जाने नहीं दिया जाएगा। रावी नदी पर बैराज प्रोजेक्ट के पूरा होने पर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के किसानों को बराबर-बराबर पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

बकौल गजेंद्र सिंह शेखावत, बाँध में क्षमता से अधिक पानी भरने के बाद इसे सीमावर्ती इलाके के 100 गाँवों में भेजा जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार 86% और पंजाब सरकार 14% वित्त उपलब्ध कराएगी। उन्होंने जानकारी दी थी कि रणजीत सागर बाँध से सिंचाई के लिए 726 करोड़ रुपए लागत आने का अनुमान है। केंद्र सरकार ने एक्सेलेरेटेड इरीगेशन बेनिफिट प्रोग्राम (एआईबीपी) के तहत 135 करोड़ रुपए बैराज निर्माण के लिए जारी किए हैं।

शेखावत ने इस दौरान अपने गृह राज्य की भी बात करते हुए कहा कि राजस्थान के अधिकारियों के साथ जल शक्ति मंत्रालय के सचिव ने बैठक की है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने इस वर्ष 21 लाख घरों में पानी का कनेक्शन लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि इन 21 लाख घरों की महिलाओं को पानी के लिए बाहर जाने के अभिशाप से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

इससे पहले पीएम मोदी ने हरियाणा के लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा था कि हिन्दुस्तान और हरियाणा के किसानों के हक का पानी 70 साल तक पाकिस्तान तक जाता रहा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पानी को रोकेगी और लोगों के घर तक लाएगी। इस पानी पर हक हिन्दुस्तान का है, हरियाणा के किसान का है। उन्होंने जानकारी दी थी कि ये पानी हरियाणा के घर-घर और किसानों के खेत तक लाएँगे। जिसके लिए उन्होंने इस दिशा में काम भी शुरू कर दिया है।

‘बाय पापा बाय, वेंटिलेटर हटा दिया… साँस नहीं ले पा रहा’ – मौत से पहले हैदराबाद में कोरोना पीड़ित का वीडियो

हैदराबाद के एक अस्पताल में प्रशासन की लापरवाही ने कोरोना मरीज की जान ले ली। मरीज ने मरने से पहले एक वीडियो भी जारी किया। इस वीडियो में उन्होंने बताया कि साँस की दिक्कत होने के बावजूद उन्हें वेंटीलेटर से हटाया गया और काफी मिन्नतें करने के बाद भी उन्हें ऑक्सीजन सिस्टम पर नहीं रखा गया।

पूरा मामला हैदराबाद के चेस्ट अस्पताल का है। यहाँ कुछ दिनों पहले कोरोना के लक्षणों वाले 35 साल के रवि कुमार को भर्ती करवाया गया था। मगर, शुक्रवार को साँस न ले पाने के कारण उनकी मौत हो गई। उन्होंने मौत से 3 घंटे पहले एक वीडियो बनाई। वीडियो में उन्होंने अपने परिवार वालों को बताया कि अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें वेंटिलेटर से हटा दिया है।

इस वीडियो में रवि ने कहा, “डैडी, मैं साँस नहीं ले पा रहा हूँ। मुझे वेंटिलेटर से हटा दिया गया। ऑक्सीजन भी निकाल दिया है। ऐसा लग रहा है, मेरी साँसें रुक रही हैं। बाय पापा बाय।”

रवि की इसी आखिरी वीडियो को सोशल मीडिया पर अब जमकर शेयर किया जा रहा है। साथ ही परिवार के आरोपों के आधार पर तेलंगाना सरकार से सवाल पूछे जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रवि के पिता कहते हैं, “मेरा बेटा मदद माँगता रहा, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की। मैंने उसकी वीडियो भी पूरा क्रियाक्रम होने के बाद देखी। उसमें वो बाय डैली बोल रहा था। मेरे बेटे के साथ जो भी हुआ, वो किसी के बच्चे के साथ न हो। मेरे लड़के को ऑक्सीजन देने से क्यों मना किया गया? क्या किसी को बहुत ज्यादा जरूरत थी, जो उसके पास से ऑक्सीजन हटाई गई? जब मैंने वीडियो सुनी, मेरा दिल टूट गया।”

रवि के पिता की मानें तो उनके बेटे को इस महीने की 24 तारीख को बुखार आया था। वे उन्हें लेकर 11 अस्पतालों में घूमते रहे पर किसी अस्पताल ने ध्यान नहीं दिया। आखिरकार किसी तरह उन्हें एर्रागड्डा के चेस्ट अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने कहा कि दो दिन बाद 26 जून को उनके बेटे का लगा हुआ वेंटिलेटर हटा दिया गया और इसके बाद ही उनके बेटे की मौत हो गई।

यहाँ बता दें कि रवि का दाह संस्कार उसकी मृत्यु वाले दिन ही किया गया था। ऐसे में उनके घरवालों का आरोप है कि अस्पताल ने उन्हें यह जानकारी नहीं दी कि रवि कोरोना पॉजिटिव थे। उन्हें इस संबंध में अगले दिन पता चला।

रवि के पिता कहते हैं, “हमें जाँच रिपोर्ट देर से मिली। अस्पताल ने बस हमें शव दे दिया। अब हम सब पर कोरोना का खतरा है। लेकिन कोई भी हमारी जाँच नहीं कर रहा। मेरे बेटे के 2 बच्चे हैं। जिन्हें अभी तक ये नहीं पता कि उनके पिता का देहांत हो चुका है। मैं क्या करूँ?”

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ रवि की आखिरी वीडियो के आधार पर उनके परिजन प्रशासन पर लगातार आरोप लगा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अस्पताल ने इन आरोपों का खंडन किया है। अस्पताल का कहना है कि मरीज जब अस्पताल में भर्ती हुआ था, तभी उसकी तबीयत बहुत खराब थी। हमने उसे ऑक्सीजन पर ही रखा था। लेकिन कोरोना वायरस हृदय को प्रभावित करता है। युवक के मामले में भी यही हुआ है।

नेहरू की ऐतिहासिक भूलों और निर्लज्ज कॉन्ग्रेस से फिर मुकाबिल मोदी-शाह: सब याद रखा जाएगा

कॉन्ग्रेस मतलब क्या? जो अपनी गलतियों से नहीं सीखे। जो इतिहास से सबक ना ले। जो हमेशा उस पाले में खड़ी नजर आए जो देश और जनमत के खिलाफ हो।

यदि कॉन्ग्रेस के चरित्र के मूल के में ये सब बातें न होती तो क्या कारण था कि वह साल भर से भी कम समय में दूसरी बार एक जैसी ही गलती करती। आज जिस तरह से वह चीन के प्रोपेगेंडा के साथ खड़ी दिख रही है, ठीक इसी तरह वह पिछले साल पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा के साथ खड़ी नजर आई थी, जब जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया गया था।

दिलचस्प यह है कि कश्मीर भी नेहरू की ऐतिहासिक भूल थी और चीन के साथ सीमा विवाद भी उनकी ही ‘आकांक्षाओं’ की उपज है। 370 हटाए जाने के बाद भी कॉन्ग्रेस ने पार्टी के भीतर की आवाजों को अनसुना कर दिया था और अबकी बार भी वह यही दोहरा रही है।

उस समय भी कॉन्ग्रेस और उसके चाटुकारों के प्रोपेगेंडा तथा नेहरू की ऐतिहासिक भूलों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुकाबिल थे। यही वजह है कि आज दोनों ने एक के बाद एक चीन और उसकी जुबान बोलने वालों को पाठ पढ़ाया

मोदी ने मन की बात में चीनी सुर में बोलने वालों को राष्ट्रधर्म का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि जिन परिवारों ने अपने बेटों को खोया है, वे अब भी अपने बच्चों को सेना में भेज रहे हैं। उनकी भावना और त्याग अतुलनीय है। साथ ही यह भी दोहराया कि भारत अपनी संप्रभुत्ता की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि लद्दाख में भारत की भूमि पर आँख उठाकर देखने वालों को करारा जवाब मिला है, भारत मित्रता निभाना जानता है तो आँख में आँख डालकर देखना और उचित जवाब देना भी जानता है।

इसके कुछ घंटों बाद एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा, “भारत विरोधी प्रोपेगेंडा का जवाब देने में हम पूरी तरह सक्षम हैं। लेकिन तब तकलीफ होती है जब इतने बड़े राजनीतिक दल का अध्यक्ष ऐसे वक्त में ओछी राजनीति करने लगे।”

उन्होंने कहा, “चर्चा करनी है आइए, करेंगे। कोई चर्चा से नहीं डरता है। 1962 से आज तक दो-दो हाथ हो जाए। मगर जब देश के जवान संघर्ष कर रहे हैं, सरकार स्टैंड लेकर ठोस कदम उठा रही है उस वक्त ऐसे बयान नहीं देने चाहिए।”

ऐसा नहीं है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मसलों पर इस तरह के स्टैंड के लिए कॉन्ग्रेस को बीजेपी से ही नसीहतें मिल रही हैं। उसकी खुद की पार्टी और सहयोगी दल के नेता भी इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा ने ट्विटर पर लिखा है कि एकजुट होने के वक्त हो रही राजनीतिक कीचड़बाजी से हम दुनिया में तमाशा बन गए हैं।

देवड़ा ने कहा, “यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब चीन के अतिक्रमण के खिलाफ राष्ट्रीय आवाज एक होनी चाहिए, तब उसकी जगह राजनीतिक कीचड़बाजी हो रही है। हम दुनिया में तमाशा बन गए हैं। चीन के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है।”

इससे पहले  शनिवार (जून 27, 2020) को राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। 1962 के युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी पर आरोप लगाते समय यह भी देखना चाहिए कि अतीत में क्या हुआ था। इसे भूला नहीं जा सकता है। चीन ने हमारी 45 हजार वर्ग किमी क्षेत्र में अतिक्रमण कर लिया था।

लेकिन लगता नहीं कि कॉन्ग्रेस का राष्ट्रीय हितों से कोई सरोकार है। यही कारण है कि चीनी प्रोपेगेंडा के साथ खड़े नहीं होने के कारण उसने संजय झा को प्रवक्ता पद से हटा दिया। संजय झा ने हाल ही में एक लेख के माध्यम से पार्टी की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया था।

कॉन्ग्रेस की कार्यशैली को लेकर ऐसी ही प्रतिक्रियाएँ सोशल मीडिया में भी सामने आ रही हैं। एक हालिया सर्वे में भी चीन के मोर्चे पर कॉन्ग्रेस को लोगों ने नकार दिया है। एबीपी न्यूज़ और सी वोटर की ओर से कराए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई कि चीन के साथ हालिया तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बनी हुई है। सर्वे में करीब 73 फीसदी लोगों ने उनके नेतृत्व में भरोसा जताया। वहीं सर्वे में शामिल करीब 61 फीसदी लोगों का कहना था कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी भरोसे के लायक नहीं हैं।

राहुल गाँधी का व्यवहार इन दिनों भारत में चीनी एजेन्ट जैसा लग रहा है। राहुल गाँधी लगातार सरकार से सवाल कर रहे हैं। वह विपक्ष के नेता हैं सवाल उठाना उनका अधिकार है, लेकिन उनके सवालों से ऐसा क्यों लग रहा है कि वह देश के गौरव से बेवजह खिलवाड़ कर रहे हैं।

राहुल गाँधी के ट्विटर संदेशों के लहजे से साफ पता चलता है कि वह देश की जनता को ये संदेश देना चाहते हैं कि भारतीय सीमाओं में चीनी सेना घुस गई है और देश की सुरक्षा खतरे में है। इस अनर्गल प्रलाप से देश की प्रतिष्ठा को होने वाले नुकसान की चिंता राहुल गाँधी को नहीं है। 

बता दें कि कॉन्ग्रेस का शीर्ष परिवार जब चीन के हित में अपनी ही सरकार के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मसले पर लगातार बोल रही है, चीन के भीतर वहॉं की सरकार के खिलाफ नाराजगी लगातार बढ़ रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि चीनी सरकार मारे गए सैनिकों का आँकड़ा सार्वजनिक नहीं कर रही है और साथ ही दवाब डालकर सैनिक के परिवारों पर चुप कराने में जुटी हुई है।

राहुल गाँधी चीन के समर्थन में अपरोक्ष कैंपेन ऐसे ही नहीं चला रहे हैं। उनके चीन से बड़े मधुर संबंध हैं। इस बात का सबूत साल 2017 में पूरे देश को मिल चुका है। जब भारत और चीन के बीच डोकलाम में विवाद चल रहा था, तब तत्कालीन कॉन्ग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने 8 जुलाई को आधी रात को अंधेरे में तत्कालीन चीनी राजदूत लुओ झाओहुई से मुलाकात की थी। कॉन्ग्रेस ने इस बारे मे जानकारी छुपाने की कोशिश भी की।

2008 को सोनिया गाँधी की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी पार्टी के बीच एक समझौता होने की बात भी सामने आ चुकी है। इसके अलावा ये बातें भी सामने आई है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने समय-समय पर राजीव गाँधी फाउंडेशन में बहुत बड़ी मात्र में ‘वित्तीय सहायता’ दी थी।

वैसे, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय किए जाने के समय भी कॉन्ग्रेस के कुछ नेताओं ने पार्टी को आइना दिखाया था और पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाते हुए जनभावना के साथ खड़े हुए थे। भुवनेश्वर कालिता ने यह कहते हुए, ‘कॉन्ग्रेस आत्महत्या कर रही है और मैं इसमें उसका भागीदार नहीं बनना चाहता’, राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था । जर्नादन द्विवेदी, दीपेंद्र हुड्डा, मिलिंद देवड़ा जैसे गॉंधी परिवार के करीबी रहे नेताओं ने भी पार्टी से इतर राय रखने में वक्त जाया नहीं किया था। 

जर्नादन द्विवेदी ने उस समय कहा था, “मैंने राम मनोहर लोहिया जी के नेतृत्व में राजनीति की शुरूआत की थी। वह हमेशा इस अनुच्छेद के खिलाफ थे। आज इतिहास की एक गलती को सुधार लिया गया है।” इतना कुछ होने के बाद भी पार्टी ने सीख बजाए नेहरू की करतूतों को ढकने के लिए राष्ट्र विरोधी प्रोपेगेंडा के सुर में सुर मिलाया।

अब देखना दिलचस्प होगा कि उपर जिक्र की गई अपनी बीमारियों और ‘शीर्ष परिवार जो कहे वही सही’, वाली मानसिकता से निकलने का कॉन्ग्रेस कोई रास्ता तलाश पाती है या फिर इतिहास के पन्नों में ऐतिहासिक भूल के तौर पर दफन हो जाना ही उसकी नियति है।

बहराइच: ग्राम प्रधान मोहम्मद इब्राहिम ने किशोरी का गला रेता, 6 दिन पहले दर्ज कराई थी छेड़छाड़ की शिकायत

उत्तर प्रदेश के बहराइच में तमंचे के बल पर किशोरी को अगवा कर गला रेत कर हत्या कर देने की खबर सामने आई है। पुलिस ने ग्राम प्रधान मोहम्मद इब्राहिम समेत तीन पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। ग्राम प्रधान इब्राहिम को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की जा रही है।

घटना बहराइच के रिसिया थाना क्षेत्र के विशुनापुर गाँव की है। बताया जाता है कि ग्राम प्रधान ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर शनिवार (जून 27, 2020) की देर रात इस बर्बरतापूर्ण वारदात को अंजाम दिया।

जानकारी के मुताबिक छह दिन पहले किशोरी ने ग्राम प्रधान इब्राहिम के भतीजे छोटकऊ के खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज करवाई थी। उसे जेल भेज दिया गया था। अब मजिस्ट्रेट के समक्ष किशोरी का बयान दर्ज होना था।

ग्राम प्रधान इसी बात को लेकर आक्रोश में था। किशोरी के पिता सुभाष कुमार ने बताया कि बदला लेने के लिए मोहम्मद इब्राहिम ने अपने सहयोगी ओमप्रकाश और दो अन्य लोगों के साथ मिलकर तमंचे के बल पर उनकी बेटी का अपहरण किया। परिवारवालों ने शोर मचाया तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी।

किशोरी के पिता ने आरोप लगाया कि पास के ही एक बाग में ले जाकर धारदार हथियार से गला रेतकर उसकी हत्या कर दी गई। सुबह बेटी का बोरे में भरा गला रेता हुआ शव मिला।

बताया जा रहा है कि किशोरी के कपड़े घर के पास एक घूर के ढेर पर मिले हैं। किशोरी के कपड़ों के पास से एक रस्सी भी मिली है। वहाँ पर कुछ जलाए जाने की भी आशंका जताई जा रही है। पुलिस पूरे मामले की गहनता से जाँच में जुटी है। फोरेंसिक टीम ने भी साक्ष्य एकत्र किए हैं। एसपी विपिन मिश्रा मामले की छानबीन कर रहे हैं।

कोलकाता और बोधगया के होटलों में चीनी नागरिकों की एंट्री बैन, कारोबारियों ने करोड़ों का डील रद्द की

गलवान घाटी में चीनी सेना के धोखे से किए गए वार के बाद से देश में चीन के बहिष्कार की मॉंग तेज हो गई है। इसी कड़ी में कोलकाता और बोधगया के होटलों में चीनी नागरिकों की एंट्री बैन कर दी गई है। जमशेदपुर में होटल कारोबारियों ने चीन संग करोड़ों का डील रद्द कर दिया है।

दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक कोलकाता के पार्क इन होटल के एक अधिकारी ने बताया, “हमारे सैनिकों पर हमला करने वालों को हम अपने होटल में ठहरने की अनुमति कैसे दे सकते हैं? यह संभव नहीं है। हमारे होटल के दरवाजे उनके लिए अब बंद कर दिए गए हैं। इतना ही नहीं इस संदेश को एक सफेद कागज पर लिखकर होटल मालिकों ने अपने-अपने रिसेप्शन पर लगा दिया है।”

इसी तरह बिहार बोधगया के सभी होटलों में चीन लोगों के रुकने पर पाबंदी लगा दी गई है। यह फैसला बोधगया होटल एसोसिएशन और बोधगया रेस्तरां एसोसिएशन की बैठक में लिया गया है।

स्थानीय होटलियर्स एसोसिएशन द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार, चीन से आने वाले किसी भी व्यक्ति को बोधगया के किसी भी होटल में कमरे नहीं दिए जाएँगे। बोधगया होटल एसोसिएशन के महासचिव सुदामा कुमार ने बताया कि गलवान घाटी में चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर हमला कर जो कायराना हरकत की, उसके विरोध में यह फैसला लिया गया है।

दरअसल हर वर्ष 10-15 हजार से अधिक चीनी बौद्ध तीर्थयात्री प्रार्थना करने और बौद्ध धर्म द्वारा प्रचार करने के लिए बोधगया में आते हैं।

वहीं भारत-चीन के बीच टेंशन और चीन की नापाक हरकत को देखते हुए जमशेदपुर के दो उद्यमी हरजीत सिंह रॉकी और हरपिंदर सिंह रॉकी ने अपने पाँच सितारा होटल के लिए चीन की कंपनी से हुए अपने पाँच करोड़ रुपए के करार को रद्द कर दिया है।

हालाँकि उनके द्वारा एस करार को रद्द करने से उनका 70 लाख से अधिक का नुकसान होना तय है, क्योंकि ये राशि उन्होंने करार कके बाद चीन के व्यापारियों को अग्रिम भुगतान के रूप में दी थी।

प्रभात खबर के मुताबिक हरजीत सिंह और हरपिंदर सिंह ने बताया कि नवंबर में वे चीन गए थे। तब उन्होंने होटल के फर्नीचर और फैंसी लाइटों के लिए एक कंपनी के साथ लगभग पाँच करोड़ रुपए की डील कर कांट्रैक्ट साइन किया था और अग्रिम भुगतान के रूप में 70 लाख रुपए से अधिक की राशि भी दी थी।

उन्होंने बताया कि हमने अपने 20 जवानों की शहादत के बाद फैसला किया कि अपने होटल के लिए चीन से माल लेकर नहीं आएँगे चाहे फिर हमें देश हित में नुकसान ही क्यों न सहना पड़े।

आतंकियों के हमले में जवान के साथ हुई थी बच्चे की मौत, सेना पर हत्या का दोष मढ़ रहे इस्लाम और पाक परस्त

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के बिजबेहारा इलाके में आतंकियों ने सीआरपीएफ के गश्ती दल को निशाना बनाकर 26 जून को हमला किया था। हमले में एक जवान वीरगति को प्राप्त हो गया। छह साल के एक बच्चे की भी मौत हो गई। मृत बच्चे की पहचान निहान यवर के रूप में हुई है।

आतंकवादियों की इस करतूत पर पर्दा डालने के लिए कश्मीरी अलगाववादी और पाकिस्तानी हैंडल वाले अकाउंट सोशल मीडिया में कूद पड़े हैं। वे सेना द्वारा बच्चे की हत्या किए जाने का दुष्प्रचार कर रहे हैं।

कश्मीरी अलगाववादियों और पाकिस्तानी ट्विटर हैंडल ने कश्मीरी आतंकवादी के बच्चे की हत्या का इस्तेमाल यह दावा करने के लिए किया कि भारत कश्मीरियों पर अत्याचार कर रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी माँग की कि जिहादियों को कश्मीर पहुँचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ मामले में हस्तक्षेप करें।

न्यूजलॉन्ड्री के स्तंभकार शरजील उस्मानी ने भी इस प्रोपेगेंडा को हवा देने के लिए इस फर्जी खबरों को रीट्वीट करके आगे बढ़ाया।

शरजील उस्मानी का रीट्वीट

हालाँकि, कश्मीर पुलिस ने स्पष्ट किया कि सीआरपीएफ के गश्ती दल पर आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलियाँ चलाई थी, जिसमें बच्चे की मौत हो गई।

गौरतलब है कि इस तरह की फर्जी खबरें कोई नई बात नहीं है, पाकिस्तानी हैंडल कश्मीर में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए इस तरह के दुष्प्रचार में शामिल होने के लिए जाने जाते हैं। स्वघोषित पाकिस्तानी ‘ट्रोल’ फरहान विर्क ने हाल ही में एक डॉक्यूमेंट्री में खुलासा किया था कि किस तरह से पाकिस्तानी राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोपेगेंडा फैलाया जाता है।

विर्क ने यह भी खुलासा किया था कि पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा किए गए बालाकोट हवाई हमले के दौरान नुकसान को कम दिखाने के लिए भी इस तरह का प्रोपेगेंडा फैलाया था। उसने कहा था, “मेरी विचारधारा राष्ट्रीय हित की है। अपने राष्ट्रीय हित की रक्षा के लिए, भले ही आप कुछ ऐसा कहें जो सच नहीं है, लेकिन यह लोगों को सकारात्मक तरीके से प्रभावित करता है, तो फिर मैं इसे प्रोपेगेंडा नहीं मानता।”

आतंक की अम्मी नसीमा बानो: बेटा था हिज्बुल कमांडर, भाई भी आतंकवादी, युवाओं को थमाती थी हथियार

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आज (जून 28, 2020) हिजबुल मुजाहिदीन के मारे गए आतंकी तौसीफ की अम्मी नसीमा बानो को गिरफ्तार किया। उसे युवाओं की भर्ती करने और आतंकवाद संबंधित अन्य गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

बता दें कि तौसीफ हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर था। उसे 2018 में सुरक्षाबलों ने मार गिराया था। पत्रकार आदित्य राज कौल ने बताया कि तौसीफ की अम्मी होने के साथ ही नसीमा बानो सक्रिय आतंकवादी अब्बास शेख की बहन भी है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नसीमा बानो अब्दुल सलाम शेख की बीबी है और रामपोरा काइमोह की रहने वाली है। उसके घर पर 20 जून को छापा मारा गया था, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। दक्षिणी कुलगाम में युवाओं को आतंकवादी बनने के लिए प्रेरित करने के आरोप में नसीमा बानो के खिलाफ यूएपीए की धारा 13 बी, 17, 18, 18 बी, 19 और 39 के तहत FIR दर्ज किया गया है।

नसीमा बानो की गिरफ्तारी के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर आतंक के हमदर्दों और इस्लाममवादियों का दर्द छलकने लगा। उनका कहना है कि बंदूकधारी जिहादी निर्दोष महिला और वह ‘हमारे समर्थन की हकदार’ है।

इस्लामवादियों और आतंकी हमदर्दों ने बानो को अपना समर्थन भी दिया।

कट्टरपंथियों ने ना सिर्फ नसीमा बानो के समर्थन में आवाज बुलंद की, बल्कि उसके आतंकवादी बेटे को भी सलाम किया।

जानकारी के मुताबिक नसीमा बानो की बंदूक के साथ तस्वीर तब ली गई थी, जब वह दक्षिण कश्मीर के एक ठिकाने पर अपने आतंकवादी बेटे तौसीफ से मिलने गई थी। तस्वीर क्लिक करने के कुछ हफ्तों बाद, उसके बेटे को सशस्त्र बलों ने मार गिराया गया था। नौजवानों को लुभाने और उन्हें भर्ती करने के अलावा, नसीमा दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों के लिए हथियार, गोला-बारूद, संचार और रसद की व्यवस्था करने में भी शामिल थी।