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मुस्लिम बन या भभूड़ में मूत, मेरे पिता को तड़पा-तड़पाकर मार डाला: मेवात के मुकेश का दावा, पुलिस ने बताया- झूठा

पिछले दिनों पूर्व जस्टिस पवन कुमार की अगुवाई वाली 4 सदस्यीय समिति की एक रिपोर्ट आई थी। इसमें बताया गया था कि हरियाणा का मेवात ‘मिनी पाकिस्तान’ बन चुका है। जिले के करीब 500 गाँवों में से 103 हिंदूविहीन हो चुके हैं। 84 गाँव ऐसे हैं जहाँ अब केवल 4 या 5 हिंदू परिवार ही शेष हैं।

इस रिपोर्ट के बाद से मेवात में हिंदू प्रताड़ना के कई पुराने मामले चर्चे में आए हैं। इनमें से ही एक मामला रामजीलाल की हत्या का है। कथित तौर पर रामजीलाल की हत्या बीते साल अप्रैल में समुदाय विशेष के लोगों ने कर दी थी और उसके बाद से उनका परिवार गॉंव छोड़कर न्याय की तलाश में भटक रहा है।

रामजीलाल के बेटे मुकेश का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। इसमें वो अपने पिता की हत्या और उसके बाद गॉंव छोड़ने की मजबूरी के बारे में बता रहे हैं। साथ ही इसमें वे दावा कर रहे हैं कि उनके पिता को तड़पा-तड़पाकर मारा गया। उनसे कहा कि मुस्लिम बन या भभूड़ में मूत। मुकेश कहते हैं कि आँच को भभूड़ कहते हैं। हिंदू आँच पर पेशाब नहीं करेगा, क्योंकि मौत के बाद उन्हें आग में ही जलना होता है।

मुकेश ने ऑपइंडिया को बताया कि वह हरियाणा के बिछोर गाँव का निवासी है। पिछले साल 7 अप्रैल को उसके पिता रामजीलाल (60) गाँव से करीब दो किलोमीटर दूर अपने खेतों पर एक मुस्लिम युवक की ट्यूबवेल से पानी लगा रहे थे।

उसने बताया, “मैं पिता जी को खाना देकर उनके कहने पर देर शाम को घर वापस आ गया। सब कुछ ठीक था और अगली सुबह जब मैं चाय लेकर पहुँचा तो पिता का शव जगह-जगह से जला हुआ खेत में पड़ा हुआ था। शव को देख मैं जोर-जोर से बिलखने लगा। शव के पास फर्सा, आग में जले कुछ कपडे और कपास बिखरे पड़े थे, जिसकी मदद से आग लगाई गई थी।”

मुकेश के अनुसार इस दौरान उसने पुलिस और सरपंच के पिता इक़बाल को आते देखा। उसने बताया तब तक उसने पुलिस को घटना की सूचना नहीं दी थी। पुलिस ने मेरी नहीं सुनी और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पुलिस उल्टा आरोपितों के घर में बैठकर और वापस चली गई।

मुकेश ने बताया कि इसके बाद वह शिकायत लेकर पुलिस थाने गया तो उसे भगा दिया गया। उसने एसपी ऑफिस में भी शिकायत दी, लेकिन आरोपितों के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है और न ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट उसे दी गई है।

घटना के बाद मुकेश द्वारा पुलिस को लिखित में दी गई शिकायत के मुताबिक हत्या के सबूतों को मिटाने के लिए रामजीलाल को जिंदा जलाया गया। शिकायत में उसने साहून पुत्र अख्तर, अकील पुत्र लियाकत, सहूद पुत्र निज्जा, लियाकत पुत्र रसूल खां निवासी बिछोरा, अतरू पुत्र सूका व खल्ली पुत्र अख्तर निवासी झारोकड़ी पर अपने पिता की हत्या करने का शक जताया है। मोहम्मद और इकबाल इनाम खां को साजिशकर्ता बताया है।

आईजी को दी गई मुकेश की शिकायत

इस सम्बन्ध में बिछोर थाना इंचार्ज भगवती प्रसाद ने बताया कि रामजीलाल की मौत आकाशीय बिजली गिरने से हुई थी। उनका बेटा मुकेश झूठी बातें करके माहौल को खराब करना चाहता है। गाँव में पुलिस पर कभी पथराव नहीं हुआ। पुलिस पर लगाए गए आरोप गलत हैं।

लेकिन मुकेश ने बताया कि इकबाल की लड़की अंजुम सरपंच है, लेकिन सरपंच का काम इकबाल ही करता है। पिता ने घटना से 24 घंटे पहले ही उसे और उसकी माँ को बताया था कि इकबाल उनके साथ कुछ भी कर सकता है। मुकेश के मुताबिक इकबाल ने 5-6 लोगों ने साथ मिलकर उसके पिता की हत्या कराई है।

मुकेश का यह भी कहना है कि उसके पिता ने अयोध्या आंदोलन में हिस्सा लिया था। वे विश्व हिंदू परिषद से जुड़े थे। इसके कारण वे मुस्लिम कट्टरपंथियों के निशाने पर रहते थे।

मुकेश ने बताया कि हत्या के बाद भी मुस्लिमों ने उन्हें बहुत प्रताड़ित किया। आए दिन घर पर ईंट-पत्थर फेंके जाते थे। इसके कारन पिता की तेरहवीं के बाद उनके पूरे परिवार ने गाँव छोड़ दिया।

मुकेश ने बताया कि गाँव में उसके पिता के नाम की करीब तीन किला खेत है। बुवाई के लिए वे चारों भाई साथ जाते हैं लेकिन हर बार मुस्लिम जबरन उनकी फसल को काट ले जाते हैं। अब वे होडल में रेहड़ी लगाकर परिवार का भरण-पोषण करने को मजबूर हैं।

मुकेश के मुताबिक गाँव में 90% आबादी मुस्लिम की है। ये लोग आए दिन हिंदुओं के घरों को निशाना बनाते रहते हैं। इसके कारण गाँव से अधिकांश हिंदू परिवार पलायन कर चुके हैं। इतना ही नहीं गाँव का कोई भी हिंदू परवार अपनी लड़की को समुदाय विशेष के डर से बाहर पढ़ने के लिए नहीं भेजता।

भटका हुआ नौजवान: यूट्यूब पर दंगे देख कर भटक गया था, गोली चलाने लगा- शाहरुख माँग रहा माफी

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के दौरान एक पुलिस वाले पर पिस्तौल तानने वाले शाहरुख पठान को अब अपनी गलती का अहसास हो रहा है। पुलिस को दिए अपने बयान में उसने बताया कि दिल्ली के मौजपुर चौक पर सीएए-विरोध प्रदर्शन के एक वीडियो को यूट्यूब पर देखने के बाद वो उत्तेजित हो गया था।

शाहरुख पठान ने दिल्ली पुलिस को बताया कि इसके बाद वह भी सीएए-विरोध में शामिल हो गया। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार यूट्यूब वीडियो को देखने के बाद उसने उत्तेजना में आकर पुलिस वालों पर पथराव किया और फायरिंग की।

शाहरुख पठान ने पुलिस को बताया:

“मैंने बीए की पढ़ाई दूसरे साल ही छोड़ दी थी। मैं और मेरा भाई मोजे बनाने का काम करते थे। 23 फरवरी को मैंने यूट्यूब पर मौजपुर चौक पर सीएए-विरोध प्रदर्शन वाला वीडियो देखा और उत्तेजित हो गया। 24 फरवरी को लगभग 11 बजे, मैं मौजपुर चौक पहुँच गया। वहाँ सीएए-समर्थक और सीएए-विरोधी एक-दूसरे पर पथराव कर रहे थे। मैंने भी पथराव शुरू कर दिया। मेरे पास एक पिस्तौल भी थी। उसे मैंने पुलिस वाले की ओर इशारा कर निकाल लिया। उस दिन के वीडियो फुटेज से मैं अन्य आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी में मदद कर सकता हूँ। मैंने गलती की, कृपया मुझे क्षमा करें।”

आपको बता दें कि दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगो के दौरान सरेआम पुलिसकर्मी पर पिस्तौल तानने वाले शाहरुख पठान को ज़मानत देने से दिल्ली हाई कोर्ट ने इंकार कर दिया था। शाहरुख पठान ने इस अर्जी में अपने पिता के ऑपरेशन का हवाला देकर जमानत माँगी थी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले शाहरुख पठान ने कोरोना का हवाला देकर जमानत माँगी थी। लेकिन उसकी जमानत अर्जी को कड़कड़डूमा कोर्ट ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने साफ कहा था कि अभी आरोपित शाहरुख पठान को जमानत नहीं दी जा सकती है।

याद दिला दें कि फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी (NRC) के विरोध में 23 और 24 फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे से ठीक पहले उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिंसा हुई थी। इस दौरान जाफराबाद-मौजपुर इलाके में लोगों को भड़काने और हलवदार पर पिस्तौल तानने के आरोपित शाहरुख को यूपी के शामली से 3 मार्च को गिरफ्तार किया गया था।

हिंसा के दौरान शाहरुख ने जाफराबाद इलाके में 8 राउंड फायरिंग की थी। उसके पास से एक पिस्तौल तथा दो कारतूस जब्त किए गए थे। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दिल्ली में शाहरुख के घर से पिस्टल और तीन कारतूस बरामद किए थे।

गेट तोड़ा-घर घेरा, लेकिन डरे नहीं दंपति, 300 दंगाइयों के सामने हैंडगन और रायफल लेकर खड़े रहे: Video

अमेरिका के सेंट लुइस में जब ‘शांतिप्रिय’ प्रदर्शनकारियों ने एक हवेली को घेर लिया तो हैंडगन और रायफल लेकर घर वाले बाहर ही खड़े मिले। इसका एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। इसमें दंपति अपने घर को बचाने के लिए रायफल और हैंडगन ताने हुए दिखाई दे रहे हैं।

डेली मेल के मुताबिक वीडियो में जो दंपति दिख रहे हैं, पेशे से दोनों वकील हैं। पति का नाम मार्क और पत्नी का नाम पेट्रीसिया मैकक्लोस्की बताया जा रहा है। यह घटना रविवार (जून 28, 2020) शाम करीब 6 बजे की है। जब ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ दंगाइयों ने हवेली को घेर लिया। दंपती ने भी अपने घर को बचाने के लिए कमर कस ली और उन्हें बंदूक के निशाने पर लिया।

मार्क और पेट्रीसिया प्रदर्शनकारियों को उनकी हवेली से बाहर निकलने के लिए कह रहे थे और हथियारों की मदद से वो उन्हें दूर रखने की कोशिश कर रहे थे। वीडियो में मार्क को दंगाइयों को चेतावनी देते हुए देखा जा सकता है। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को “Let’s go” और “Keep moving” बोलते हुए सुना जा सकता है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ दंगाई सेंट लुइस के मेयर लिडा क्रूसन के घर की ओर उनसे इस्तीफा माँगने के लिए जा रहे रहे थे। इसी दौरान वो लोग इस दंपति के घर में घुस गए, जिसके बाद इस तरह की स्थिति उत्पन्न हो गई। उन लोगों ने एक गेट को तोड़ दिया। इस दौरान दंपति ने लगभग 300 प्रदर्शनकारियों के समूह का सामना किया।

अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद वहाँ ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ नाम का प्रोटेस्ट शुरू हुआ, जिसके कारण वहाँ भीषण दंगे हुए। इन दंगों की आग यूरोप में भी कई देशों तक पहुँची। इस दौरान कई जगह आगजनी, हिंसा और लूटपाट की घटनाएँ भी सामने आई। बुधवार (4 मई, 2020) को प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका के वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास के सामने लगी गाँधी जी की प्रतिमा को नुकसान पहुँचाया था। वहीं ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ के प्रदर्शनकारियों ने लंदन के वेम्ब्ले के ईलिंग रोड में स्थित मीरा नाम की एक भारतीय महिला के रेस्टॉरेंट पर हमला बोल दिया था। 

‘क से कृष्ण, क से कोरोना’: कॉन्ग्रेस नेता ने कोरोना वायरस के लिए भगवान श्रीकृष्ण को ठहराया जिम्मेदार

कॉन्ग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने कहा है कि कोरोना वायरस भगवान श्रीकृष्ण की देन है। वे उत्तराखंड प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के उपाध्यक्ष हैं।

धस्माना ने कहा कि कहा कि ‘क’ से कृष्ण और ‘क’ से कोरोना वायरस होता है, इसीलिए कोरोना वायरस भगवान श्रीकृष्ण के कारण ही आया है। मीडिया के साथ बातचीत में उन्होंने ये बेतुका बयान दिया।

वो चार धाम यात्रा शुरू होने के सम्बन्ध में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि चूँकि कोरोना वायरस संक्रमण तेज़ी से बढ़ रहा है, इसीलिए इस यात्रा को शुरू करने का कोई तुक नहीं है। उन्होंने दावा किया कि चार धाम यात्रा शुरू होने से उत्तराखंड में श्रद्धालुओं की तादाद बढ़ जाएगी और उनके भारी संख्या में यहाँ आने से कोरोना वायरस संक्रमण की आपदा और ज्यादा बढ़ जाएगी।

‘दैनिक जागरण’ की ख़बर के अनुसार, उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कोरोना दिया है। अपने बयान के बचाव के लिए उन्होंने भगवद्गीता को उद्धृत किया। बकौल सूर्यकांत धस्माना, गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि वे ही सृष्टि के निर्माता, पालनकर्ता और संहारकर्ता हैं। साथ ही वो प्रदेश सरकार पर भी बरसे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार कोरोना वायरस संक्रमण आपदा से निपटने में पूरी तरह से विफल रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार रुपए लेकर कोरोना टेस्टिंग की अनुमति दे रही है। वहीं उत्तराखंड में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने हल्द्वानी में अंतर्राज्यीय बस अड्डे को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने याद दिलाया कि वर्चुअल रैली में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हल्द्वानी में अंतर्राज्यीय बस अड्डे और रिंग रोड का निर्माण अतिशीघ्र करने का आश्वासन दिया था लेकिन अब तक इस पर काम शुरू नहीं हुआ है। 

इससे पहले पाकिस्तान के एक मौलवी ने कबूतर के शरीर के एक विशेष स्थान को पका कर खाने को कोरोना वायरस से संक्रमण का इलाज बताया था। उसके बाद एक दूसरे मौलवी ने अल्लाह से दुआ की थी कि कोरोना वायरस ‘को काफिर मुल्कों’ की तरफ भेज दिया जाए। उक्त मौलवी ने कहा कि था अल्लाह ने अगर मदद नहीं की तो कोरोना सब कुछ ख़त्म कर देगा। अब कॉन्ग्रेस नेता भी इसी तरह के बयान देकर सुर्खियाँ बटोर रहे हैं।

मेरा हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से अब कोई लेना-देना नहीं: 90 वर्षीय गिलानी का अलगाववादी फोरम से इस्तीफा, Pak का था दबाव

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के 90 वर्षीय नेता सैयद अली शाह गिलानी ने अलगाववादी संगठनों के फोरम हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को अलविदा कह दिया है। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के साथ ही हाउस अरेस्ट किए गए गिलानी ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा दे दिया है। हालाँकि, गिलानी ने इस्तीफे के कारणों का जिक्र नहीं किया गया और कहा है कि कुछ ऐसे मुद्दे थे, जिनके कारण उन्हें इस्तीफा देने के लिए बाध्य होना पड़ा।

सैयद अली शाह गिलानी पिछले 30 साल से जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद का सबसे बड़ा चेहरा बने हुए थे। उन्होंने एक ऑडियो मैसेज में कहा है कि ताज़ा परिस्थितियों के कारण उन्होंने इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि उनका अब इस अम्ब्रेला संगठन से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने इस फोरम के सभी संगठनों को पत्र लिख कर अपने फ़ैसले से अवगत करा दिया है।

एनडीटीवी के सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान में कई लोग गिलानी से नाराज़ थे, क्योंकि वो मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने और उसे केंद्र शासित प्रदेश में बदलने वाले निर्णय के खिलाफ आवाज़ नहीं उठा सके और न ही अपने लोगों को गोलबंद कर के सरकार पर दबाव बना सके। सैयद अली शाह गिलानी पिछले कुछ दिनों में चुप ही रहे हैं और उन्होंने कोई ख़ास बयान नहीं दिया है।

सैयद अली शाह गिलानी के बारे में कहा जा रहा है कि ढलती उम्र के साथ उनका स्वास्थ्य भी बिगड़ रहा है, जिससे वो जम्मू-कश्मीर मामलों में सक्रियता नहीं दिखा पा रहे थे और अलगावादियों का एक बड़ा धड़ा उनसे नाराज़ चल रहा था। उनके फ़िलहाल मेडिकेशन पर होने की बात भी कही जा रही है। वो कई महीनों से इलाजरत हैं। जम्मू-कश्मीर के कई अलगाववादी नेता फ़िलहाल अलग-अलग जेलों में क़ैद हैं।

पिछले साल अप्रैल में सैयद अली शाह गिलानी पर आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली की संपत्ति को सीज कर दिया था। आयकर विभाग के अधिकारियों ने दिल्ली के मालवीय नगर के खिड़की एक्सटेंशन स्थित प्रॉपर्टी को सीज कर दिया था। विभाग के कर वसूली अधिकारी (टीआरओ) ने 1996-97 से लेकर 2001-02 के बीच गिलानी द्वारा ₹3.62 करोड़ आयकर का भुगतान करने में विफल रहने पर इस घर को सील किया था।

एक बार ‘इंडिया टुडे कन्क्लेव’ में सैयद आली शाह गिलानी को पत्रकार आदित्य राज कौल ने करारा जवाब दिया था। उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर कश्मीरी पंडितों का भी उतना ही है, जितना कश्मीर के समुदाय विशेष वालों का। आदित्य राज कौल ने उनके सामने ही कहा था कि उनके जैसे अलगाववादी ये भूल जाते हैं कि कश्मीरी पंडितों के साथ क्या हुआ था। आदित्य ने कहा था कि गिलानी जैसे पाकिस्तानी एजेंट्स को घाटी के भविष्य के बारे मे निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है।

शहनाई की जगह मातम क्यों? छोटी बेटी से अनीश खान और उसके साथियों ने किया रेप, पिता पेड़ से लटके मिले

राजस्थान के अलवर जिले के रामगढ़ कस्बे के बालोत नगर में 29 जून को एक घर में शादी की शहनाई गूँजनी थी। लेकिन परिस्थितियाँ ऐसी बनीं कि आज की तारीख में उस घर में मातम पसरा है।

जिस पिता को आज अपनी बेटी ब्याह कर विदा करनी थी, वह 5 दिन पहले एक पेड़ की डाल पर फंदे से लटके मिले थे।

पुलिस इसे आत्महत्या का मामला बता रही। लेकिन पीड़ित परिवार के सदस्यों ने इसे हत्या बताया और इसके पीछे सुमराद्दीन, महमूद, अंजुम, तौफीक और अन्य लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करवाया है।

मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि मंगलवार (जून 23, 2020) देर रात आरोपित लड़की के पिता को घर से बाहर बुलाकर ले गए थे और उनकी हत्या कर पेड़ से लटका दिया। उनका शव घर से महज 500 मीटर दूर पेड़ से लटका हुआ मिला था।

क्या है मामला?

राजस्थान के अलवर के रामगढ़ निवासी इस पिता की गलती बस इतनी थी कि वह अपनी छोटी बेटी के रेप के आरोप में मुस्लिम समुदाय के युवकों के ख़िलाफ़ अदालत में केस लड़ रहा था। सुनवाई से ठीक पहले उनका शव घर से थोड़ी दूर पर लगे एक पेड़ से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही पूरे परिवार में कोहराम मच गया।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि छोटी बेटी से बलात्कार के आरोपित लगातार पीड़ित के पिता पर अपनी राजनीतिक पहुँच और पुलिस संरक्षण के चलते दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे। ये दबाव इतना ज्यादा था कि पिता से बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने फाँसी के फंदे पर लटककर आत्महत्या कर ली।

पिता के इस कदम से पहले रेप पीड़िता ने भी परिजनों की परेशानी देखते हुए 18 जून को कुएँ में कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी। लेकिन ग्रामीणों की नजर पड़ने के कारण उसे समय रहते बचा लिया गया।

इसके बाद, आरोपित पक्ष के लोगों ने पिता पर बड़ी बेटी की शादी में रुकावट की धमकियाँ देकर दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसके कारण लड़की के पिता तनाव में रहने लगे।

पिता बड़ी मशक्कत करके शादी समारोह को बिना किसी अड़चन के संपन्न करवाना चाहते थे। मगर, उन्हें इसके आसार नहीं नजर आ रहे थे। नतीजतन उन्होंने शादी से ठीक पाँच दिन पहले यह बड़ा कदम उठाया या ये कहें कि उनसे ऐसा करवाया गया।

बता दें इस मामले के संबंध में रेप पीड़िता ने रामगढ़ थाने में अनीश, तौफिक और अंजुम के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। लेकिन पुलिस ने आरोपितों पर मामला दर्ज करने से मना कर दिया और इस मामले में सिर्फ 3 युवकों को शांतिभंग के आरोप में पकड़ लिया।

बाद में पीड़ित परिवार के अनुसार थानाप्रभारी की शिकायत पुलिस अधीक्षक तक पहुँचने के कारण पुलिस ने एक आरोपी अनीश को पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तार किया।

पॉक्सो एक्ट में एक की गिरफ्तारी के बाद अन्य नामजद तौफीक और अंजुम को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। रेप पीड़िता के पिता की मौत के बाद अब परिजनों ने आधा दर्जन से अधिक लोगों पर हत्या का आरोप लगाया है।

अल्लाह से कहिए वो हमारा इम्तिहान न ले: J&K डोमिसाइल नियम पर फारूक अब्दुल्ला ने कहा- ये अवैध, हमें कबूल नहीं

जम्मू कश्मीर में राज्य (अब UT) के बाहर से लोगों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट मिलने से पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भड़क गए हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष ने कहा कि नया डोमिसाइल नियम अवैध और असंवैधानिक है, इसीलिए जम्मू कश्मीर के लोगों को ये स्वीकार्य नहीं है। श्रीनगर के सांसद फारूक अब्दुल्ला ने नए डोमिसाइल नियम को मानने से इनकार करने की बात कही। वो अनंतनाग में मीडिया से बात कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि जब वो बार-बार कहते आ रहे हैं कि वो लोग ऐसा कुछ भी स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, जो अवैध और असंवैधानिक हो, ऐसे में वो ऐसे किसी भी नियम-क़ानून को कैसे स्वीकार कैसे कर सकते हैं, जिसके वो विरुद्ध हों। हाल ही में वहाँ 26 सालों से सेवा दे रहे नवीन चौधरी को डोमिसाइल सर्टिफिकेट इशू किया गया था, जिससे अब्दुल्ला पिता-पुत्र खासे नाराज चल रहे हैं।

बता दें कि सरकार ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है कि कोई भी व्यक्ति नागरिकता के लिए अप्लाई कर देगा और वो जम्मू-कश्मीर का नागरिक बन जाएगा। ऐसा इसीलिए, क्योंकि जिन्हें नागरिकता मिली है, वो पहले से ही राज्य में रह रहे हैं। नियमानुसार, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में 15 वर्ष गुजारे हैं अथवा जो 7 साल अध्ययनरत हैं, उन्हें ही नागरिकता देने का प्रावधान है। वहाँ रजिस्टर हो चुके प्रवासी या ऐसे सरकारी अधिकारियों के बच्चों, जिन्होंने कम से कम 10 साल तक वहाँ सेवा दे चुके हैं, वो ही नागरिकता के योग्य हैं। 

साथ ही फारूक अब्दुल्ला ने भारत सरकार को पाकिस्तान और चीन से बातचीत कर मुद्दों को सुलझाने की माँग की। श्रीनगर के सांसद अब्दुल्ला कुछ ही हफ़्तों पहले 8 महीने की हिरासत काट कर लौटे हैं। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के साथ ही अब्दुल्ला पिता-पुत्र को हिरासत में रखा गया था। उन्होंने दावा किया कि जम्मू कश्मीर में बनी हालिया स्थिति तो ट्रायल भर है और इस घड़ी में लोगों को एकता बनाए रखने की ज़रूरत है।

जम्मू कश्मीर में नए डोमिसाइल नियम पर फारूक अब्दुल्ला का बयान

उन्होंने कहा कि ये इम्तिहान की घड़ी है, अल्लाह से कहिए कि वो हमारा इतना ज्यादा इम्तिहान न ले। साथ ही उन्होंने लोगों से ये भी कहा कि वो इम्तिहान से घबराएँ नहीं। बकौल फारूक अब्दुल्ला, अल्लाह ने ज़रूर कुछ न कुछ और अच्छा सोच रखा है, इसीलिए ये सब हो रहा है। अब्दुल्ला ने कहा कि ‘वो भी’ एक हैं और सिर्फ़ चुनाव के लिए ही नहीं बल्कि एक उद्देश्य को लेकर एक हैं।

बकौल अब्दुल्ला, पाकिस्तान हो या चीन, भारत के लिए युद्ध समाधान नहीं है और भारत को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। बता दें कि उनके बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी डोमिसाइल नियमों में बदलाव पर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि केंद्र शासित प्रदेश की डेमोग्राफी को बदलने के लिए ये सब एक साजिश के तहत किया जा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसके खिलाफ विरोध दर्ज कराया। 

हिजबुल का बलात्कारी कमांडर मसूद ढेर, त्राल के बाद डोडा भी ‘आतंकी मुक्त’

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल को हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकियों से पूर्ण रूप से मुक्त कराने के बाद अब सुरक्षाबलों ने श्रीनगर के डोडा इलाके को भी आतंकी मुक्त करवा लिया है। यह जानकारी स्वयं जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने दी है।

डीजीपी ने बताया है कि सोमवार को हुई मुठभेड़ में हिजबुल कमांडर मसूद के मारे जाने के बाद इलाका पूरी तरह से आतंकी मुक्त हो गया। वह बलात्कार के मामले में भी वंछित था।

डीजीपी दिलबाग सिंह ने इस संबंध में बताया, “अनंतनाग के खुल चोहार इलाके में पुलिस और राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट ने मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों को ढेर कर दिया। इनमें से एक लश्कर का जिला कमांडर था। मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर मसूद को भी ढेर कर दिया गया । इसके साथ ही जम्मू जोन का डोडा जिला आतंकियों से पूरी तरह मुक्त हो गया है।”

गौरतलब है कि अनंतनाग जिले में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच सोमवार को हुई मुठभेड़ में कुल तीन आतंकवादी मारे गए। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने दक्षिणी कश्मीर जिले के खुल चोहार में घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया था।

अधिकारी ने बताया कि आतंकवादियों के सुरक्षा बलों पर गोलियाँ चलाने के बाद अभियान मुठभेड़ में तब्दील हो गया। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ में तीन आतंकवादी मारे गए। इनमें लश्कर के दो आतंकियों के साथ ही हिजबुल कमांडर मसूद भी शामिल है। मौके से एक एके-47 राइफल और 2 पिस्टल भी बरामद हुई है।

यहाँ बता दें, इससे पहले अभी बीते शुक्रवार को जम्मू कश्मीर पुलिस ने त्राल को हिजबुल आतंकियों से मुक्त कराने का ऐलान किया था। कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) विजय कुमार ने इस बारे में सूचित करते हुए शुक्रवार को कहा था, ‘‘आज के सफल अभियान के बाद, त्राल क्षेत्र में अब हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों की मौजूदगी नहीं है। यह 1989 के बाद पहली बार हुआ है।’’

उन्होंने कहा था, “त्राल जिसे कभी आतंकवाद का हॉट बेड माना जाता था, वहाँ अब आधा दर्जन से अधिक स्थानीय आतंकवादी सक्रिय हैं, लेकिन हिजबुल मुजाहिदीन आतंकवादी संगठन से कोई नहीं बचा है।”

असम में 2000 गाँव जलमग्न, 23 जिलों के 9.26 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित: अमित शाह ने की स्थिति की समीक्षा

असम में बाढ़ से हालात बिगड़ने के बाद ख़ुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्थिति सुधारने के लिए बागडोर संभाली है। धीमाजी और उदालगिरी जिलों में रविवार (जून 28, 2020) को भूस्खलन में एक कॉलेज छात्र के ज़िंदा ज़मीन में दफ़न होने के बाद बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या राज्य में 43 तक पहुँच गई है।

अमित शाह ने असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनवाल को फोन कॉल कर बाढ़ से बिगड़ी स्थिति की समीक्षा की। अमित शाह को सोनवाल ने बताया कि असम में बाढ़ से निपटने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की गई हैं और आगे क्या क़दम उठाए जाने वाले हैं।

अमित शाह ने उनसे पूछा कि बाढ़ राहत कैम्पों में कोरोना वायरस से संक्रमण से बचाव के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार को इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए पूर्ण सहायता देने का आश्वासन दिया। असम के 33 में से 23 जिलों में 9.26 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

अब तक लगभग 2000 गाँवों में बाढ़ का प्रभाव काफी बढ़ जाने की बात सामने आई है। ब्रह्मपुत्र नदी के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण फ़िलहाल स्थिति में सुधार आने की सम्भावना कम ही है।

असम में 133 राहत कैम्प स्थापित किए गए हैं और साथ ही उनमें 27,000 ऐसे लोगों को रखा गया है जो बाढ़ के कारण बेघर हो गए हैं। मई 22 से लेकर अब तक 21 लोगों की बाढ़ से मौत होने की सूचना है।

एक तीन साल के बच्चे की बाढ़ में बहने के कारण मौत हो गई। बारपेटा जिले में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर पड़ा है। अकेले 1.35 लाख बाढ़ प्रभावित इसी जिले में हैं। इस जिले के 395 गाँव बाढ़ में डूब चुके हैं। असम के 8 जिलों में एनडीआरएफ की टीमों को राहत कार्य के लिए तैनात किया गया है। अकेले रविवार को 8 जिलों में 9000 लोगों को बचाया गया। केंद्र सरकार योजना बना रही है कि आगे किस तरह असम सरकार की मदद की जाए।

किसानों पर बाढ़ से सबसे ज्यादा मार पड़ी है। कुल 68,000 हेक्टेयर की फसल बर्बाद हो चुकी है। अमित शाह ने राज्य के मंत्री हेमंत विश्व शर्मा से भी बातचीत की, जो बाढ़ से निपटने की तैयारियों में लगातार लगे हुए हैं। राज्य में कोरोना वायरस की समस्या भी बढ़ती जा रही है, ऐसे में सरकार के पास सोशल डिस्टनिंग को मेंटेन करने की भी चुनौती है। राज्य में फिलहाल कोरोना के 2400 सक्रिय मामले हैं।

हिंदू नेताओं पर मंडरा रहा खतरा, खालिस्तानी आतंकियों के खुलासे के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा

आतंकी संगठन खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट (KLF) के 3 आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद कई खुलासे हुए हैं। इनसे पूछताछ में पता चला है कि इनके निशाने पर हिंदूवादी नेताओं समेत अमृतसर के शिवसेना नेता और डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी थे।

अब इसी जानकारी के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने प्रदेश के हिंदू नेताओं की सुरक्षा कड़ी कर दी है। साथ ही हिंदू नेताओं की सुरक्षा में जुटे पंजाब पुलिस के जवानों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ दिन पहले हिंदू नेता सुधीर सूरी जेल से जमानत पर बाहर आए हैं। उन्हें आतंकी संगठनों की तरफ से लगातार मिल रही धमकियों के मद्देनजर सरकार ने उन्हें 12 सुरक्षाकर्मी दे रखे हैं।

वहीं, ब्राह्मण कल्याण मंच के संस्थापक नरेश धामी और हिंदू धर्म सत्कार कमेटी के प्रमुख भी सुरक्षा घेरे में हैं। उक्त नेताओं के क्षेत्र से संबंधित प्रत्येक थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज को अलर्ट किया गया है।

अभी तक प्राप्त सूचना के अनुसार, दिल्ली से गिरफ्तार तीनों आतंकी पाकिस्तान में मारे गए KLF के आतंकवादी हैप्पी पीएचडी के भी संपर्क में रह चुके हैं। इन तीनों की पहचान आतंकी मोहिंदर पाल सिंह, गुरतेज सिंह और लवप्रीत सिंह के तौर पर हुई है।

इन्हें लेकर यह भी कहा जा रहा है कि ये तीनों अमृतसर के जंडियाला गुरु क्षेत्र में खालिस्तानी मूवमेंट से जुड़े आतंकी गुरमीत सिंह और विक्रमजीत सिंह से भी संबंध रखते थे।

पूछताछ में तीनों ने खुलासा किया कि ये सभी भारत से बाहर बैठे खालिस्तानी आतंकियों के लगातार संपर्क में थे और आईएसआई की पनाह में बैठे खालिस्तानी आतंकियों के इशारे पर हिंदू संगठनों के नेताओं की टारगेट किलिंग का प्लान बना रहे थे। इसके अलावा हथियारों के प्रशिक्षण के लिए पाक जाने का प्रयास कर रहे थे।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार, दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट (केएलएफ) के आतंकी गुरतेज सिंह का संबंध आतंकी जगतार सिंह हवारा से है। हवारा वही शख्स है, जो पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में दोषी है। बताया जाता है कि हवारा द्वारा बनाई गई आतंकियों की 21 सदस्यों वाली कमेटी का वह सक्रिय सदस्य है।