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मरकज में थे 526 विदेशी, मलेशिया में भी हुआ था जलसा: तबलीगी जमात के खिलाफ 59 चार्जशीट

कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार, सरकारी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन और पुलिस तथा डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार को लेकर तबलीगी जमात से जुड़े लोगों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने 59 चार्जशीट दायर की है।

36 देशों के उन जमातियों को भी आरोपित बनाया गया है, जिन्होंने वीजा नियमों की धज्जियाँ उड़ाई। निजामुद्दीन मरकज़ द्वारा जाँच एजेंसियों से सच्चाई छिपाने की बात भी पुलिस ने बताई है।

खुलासा हुआ है कि दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज की तरह मलेशिया में भी कार्यक्रम हुआ था और वहाँ भी कोरोना के कई मरीज मिले थे। इंडोनेशिया में भी ऐसा ही कार्यक्रम प्रस्तावित था जो रद्द हो गया।

पुलिस ने कहा है कि इनमें से कई विदेशी जमातियों ने ख़तरनाक कोरोना वायरस का संक्रमण चारों ओर फैलाया। दिल्ली पुलिस ने मरकज के हाजी यूनुस को पहले ही वहाँ 20 से ज्यादा जमातियों का जुटान न करने का निर्देश दिया था, जिसका खुलेआम उल्लंघन किया गया।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की ख़बर के अनुसार, चार्जशीट में खुलासा किया गया है कि मलेशिया में हुई मरकज 27 फरवरी से 1 मार्च के बीच आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम के बाद मलेशिया में कोरोना के 500 संक्रमित मरीज मिले थे। इंडोनेशिया में भी 18 मार्च को मरकज का कार्यक्रम आयोजित होने वाला था, जिसे बाद में कोरोना संक्रमण फैलने के भय से रद्द कर दिया गया था। कई देशों के जमातियों ने फिर भारत आकर संक्रमण फैलाया।

ऐसा नहीं है कि दिल्ली पुलिस आँख बंद किए हुए थी और उसने निजामुद्दीन मरकज में हो रही मनमानी के विषय में कुछ नहीं किया या प्रबंधकों को आगाह नहीं किया। दरअसल, दिल्ली के दक्षिण-पूर्वी जिले के शीर्ष अधिकारियों ने कई बार मरकज को चेताया था। मरकज प्रबंधन से एक-दो बार नहीं बल्कि कई बार संपर्क कर सोशल डिस्टेंसिंग का प्लान करने की चेतावनी दी गई थी। 19 मार्च को उन्हें प्रशासन ने लॉकडाउन के दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा था।

मार्च 21, 2020 को पुलिस-प्रशासन के अधिकारी फिर से मरकज के मुफ़्ती शहजाद से मिले और सारे विदेशी जमातियों को उनके देश वापस भेजने की सलाह दी, जिसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया। इसके 3 दिन बाद दिल्ली पुलिस ने लॉकडाउन सम्बन्धी प्रतिबंधों की सार्वजनिक घोषणा की, लेकिन मरकज़ का प्रबंधन आँख मूँदे रहा। 25 मार्च को मरकज़ में एक बांग्लादेशी नागरिक में कोरोना के लक्षण दिखे थे।

इसके बाद इसकी जाँच के लिए वहाँ मेडिकल टीम पहुँची थी। मेडिकल टीम ने भी पाया था कि वहाँ सोशल डिस्टेंसिंग या ऐसे किसी भी दिशा-निर्देश का पालन नहीं किया जा रहा है। इसके ठीक पहले पुलिस ने मरकज़ में जाकर छानबीन की थी। तब दिल्ली पुलिस ने पाया था कि वहाँ की इमारत में 1709 लोग रह रहे हैं। इनमें से 1183 भारतीय नागरिक थे और विदेशी नागरिकों की संख्या 526 थी। तब भी पुलिस ने कार्रवाई की थी।

चार्जशीट में बताया गया है कि जिस समय मरकज में मौजूद एक इंडोनेशियाई जमाती कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया था, तब भी मौलाना साद के करीबी लगातार दावा कर रहे थे कि मरकज में किसी भी शख्स में कोरोना के लक्षण नहीं हैं और सभी के स्वस्थ होने के झूठे दावे किए जा रहे थे। 28 मार्च को हजरत निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन के एसएचओ ने डीसीपी क्राइम ब्रांच को मरकज और मौलाना साद की हरकतों के बारे में लिखित में अवगत कराया था।

हालाँकि, मरकज के वकील मुजीद रहमान का कहना है कि पुलिस-प्रशासन द्वारा उस वक़्त सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की सलाह देने का क्या तुक था, जब मरकज में सारे जमाती पहले से ही सेल्फ-आइसोलेशन में थे। वकील ने हैरतअंगेज बयान देते हुए कहा कि प्रशासन को हवाई अड्डे बंद करने चाहिए थे, लोगों की स्क्रीनिंग के साथ-साथ कांटेक्ट ट्रेसिंग पर जोर देना चाहिए था।

चार्जशीट में ये भी बताया गया है कि कुछ विदेशी जमाती तो अपना पासपोर्ट तक दिखाने में अक्षम रहे। साथ ही अंदर कोई भी मास्क या सैनिटाइजर वगैरह का प्रयोग नहीं कर रहा था। कइयों ने पर्यटन वीजा पर आकर मजहबी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। कोर्ट अब इन चार्जशीट के आधार पर निर्णय लेगी कि हत्या के प्रयास का मामला चलाया जाए या नहीं।

थाने में पिटाई से किडनी क्षतिग्रस्त, खून की उल्टियाँ कर अस्पताल में मौत: तमिलनाडु में 2 पुलिसवालों पर केस दर्ज

तमिलनाडु में पुलिस हिरासत में यातना देने का एक और मामला सामने आया है। राज्य में पुलिस हिरासत के दौरान एक युवक की बेरहमी से पिटाई किया जाने का आरोप लगा है। पिटाई से बुरी तरह जख्मी युवक ने शनिवार (जून 27, 2020) देर रात अस्पताल में दम तोड़ दिया, जिसके बाद यहाँ हंगामा खड़ा हो गया है।

मृतक युवक का नाम एन कुमारसेन बताया जा रहा है। एन कुमारसेन के रिश्तेदारों ने सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया है और कुमारसेन के लिए न्याय की माँग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक सब-इंस्पेक्टर चंद्रशेखर और एक कॉन्स्टेबल कुमार पर मुकदमा भी दर्ज किया गया है। इन दोनों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 174 (3) के तहत केस दर्ज किया गया है।

घटना के बारे में मिली विस्तृत जानकारी के मुताबिक कुमारसेन पेशे से ऑटो ड्राइवर थे। कुछ दिनों पहले जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में एन कुमारसेन को थाने में बुलाया गया था। इसी दौरान उसकी पिटाई करने का आरोप लगा था। बताया जा रहा है कि थाने में कुमारसेन को पूरे दिन रखा गया था। एक दिन बाद घर लौटने के बाद कुमारसेन ने किसी से बातचीत नहीं की थी।

कुछ ही देर बाद कुमारसेन को खून की उल्टियाँ होने लगीं। उनकी बिगड़ती हालत को देखे हुए उन्हें सुरंदई में स्थित एक अस्पताल में ले जाया गया। इसके बाद उन्हें थिरुनेलवेली सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जाँच के दौरान डॉक्टरों को पता चला की कुमारसेन के Kidney और Spleen बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए थे।

कुमारसेन ने बताया कि जमीन विवाद के सिलसिले में पूछताछ के लिए थाने में बुलाने के दौरान उनकी जमकर पिटाई की गई थी। कुमारसेन ने यह भी बताया था कि पुलिस वालों ने पिटाई के बाद उन्हें धमकी दी थी कि थाने से निकलने के बाद वो अपना मुँह बंद रखें। कुमारसेन के मुताबिक पुलिस वालों ने उन्हें धमकी दी थी कि अगर उन्होंने इसकी शिकायत किसी से की तो वो उनके पिता को भी नुकसान पहुँचाएँगे।

गौरतलब है कि इससे पहले तमिलनाडु के तूतीकोरिन में पुलिस हिरासत में एक पिता और बेटे की मौत की वजह से राज्य में आक्रोश पैदा हो गया था। पुलिस ने तूतीकोरिन में पी जयराज (59) और उनके बेटे जे बेनिक्स (Benicks, कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार फ़ेनिक्स- Fenix भी, उम्र – 31 साल) को निर्धारित समय के बाद भी मोबाइल की दुकान खोले रखने पर 19 जून को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद उनकी हिरासत में ही मृत्यु हो गई। आरोप है कि उन्हें हिरासत में यातना दी गई, जिससे उनकी मौत हो गई।

सोशल मीडिया पर लोगों ने दावा किया था कि पुलिसकर्मियों ने पिता और पुत्र के मलद्वार में लाठियाँ डालकर घुमाया और उन्हें यातनाएँ दीं। यह भी दावा किया गया कि पुलिस हिरासत में उनकी बेरहमी से पिटाई की गई जिससे पिता-पुत्र के जननांग भी क्षतिग्रस्त हो गए थे।

‘इस्लामी देश में पैदा होना एक अभिशाप’ – अपहरण कर ली गई 14 वर्षीय हिंदू लड़की की माँ ने रोते-रोते कहा

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार और हिंदू लड़कियों के अपहरण और धर्म परिवर्तन की घटनाएँ लगातार जारी हैं। वहाँ एक और 14 वर्षीय हिंदू लड़की का अपहरण कर लिया गया है। पाकिस्तान में काम कर रहे एक्टिविस्ट राहत ऑस्टिन के अनुसार यह अपहरण ( 27 जून, 2020 ) को सैदाबाद, हला मितारी, सिंध प्रांत पाकिस्तान में हुआ।

एक्टिविस्ट राहत ने ट्विटर के जरिए एक वीडियो शेयर कर यह जानकारी दी है। इस वीडियो में पीड़ित लड़की की माँ का रो-रो कर बुरा हाल हो गया है। वह रोते-बिलखते बार-बार यही कह रही हैं, “इस्लामी देश में पैदा होना एक अभिशाप है।”

राहत ऑस्टिन के मुताबिक अपहरणकर्ता ने 14 वर्षीय नाबालिग हिंदू लड़की नसीबन का अपहरण यौन शोषण और जबरन धर्म परिवर्तन के मकसद से किया है।

जबरन धर्मांतरण और यौन शोषण के लिए अपहरण

गौरतलब है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय और विशेष रूप से हिन्दू लड़कियों के खिलाफ अत्याचार, जबरन इस्लाम कबूल करवाना, यौन शोषण के मकसद से शादी करने का सिलसिला थम नहीं रहा है। और यही पाकिस्तान का इतिहास भी रहा है। अपहरणकर्ता ज्यादातर अपना निशाना नाबालिग लड़कियों को ही बनाते हैं।

कुछ दिनों पहले ही पाकिस्तान के जकोबाबाद से 18 जून को एक नाबालिग हिंदू लड़की का वजीर हुसैन नाम के एक शख्स ने अपहरण कर और जबरन धर्मपरिवर्तन करवाकर उससे निकाह भी कर लिया था। वहीं इससे पहले मई में हिन्दू और ईसाई धर्म की 2 नाबालिग लड़कियों (जोकि बोल और सुन नहीं पाती थी) उनका अपहरण कर लिया गया था।

इस घटना के एक महीने पहले अप्रैल में, सिंध प्रांत से दो हिंदू लड़कियों का अपहरण किया गया था। वहीं जनवरी में एक सिख लड़की का अपहरण कर लिया गया था, जिसके बाद ननकाना साहिब गुरुद्वारा पर हमला भी हुआ था।

उल्लेखनीय है कि भले ही इमरान सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का बड़े-बड़े दावे करती है। मगर, वास्तविकता यही है कि वहाँ पर अल्पसंख्यकों का दमन धड़ल्ले से जारी है। आलम ये है कि अब पाकिस्तान के हालातों से पूरा विश्व वाकिफ हो गया है कि पाकिस्तान वो देश है, जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता में किसी को जबरन धर्मांतरण का अधिकार भी निहित है।

पाकिस्तान की मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट बताती है कि सालाना पाकिस्तान में कम से कम 1000 लड़कियाँ इस्लाम कबूलती हैं। इनमें से अधिकांश सिंध में रहने वाली हिंदू समुदाय की होती हैं।

सैकड़ों अपहरण और जबरन धर्मपरिवर्तन के मामले आने के बाद भी पाकिस्तान सरकार का इन मामलों पर कोई एक्शन नहीं है। साल 2016 और 2019 में एक विधेयक लाने की बात जरूर सामने आई थी। जिसमें अपने मन से धर्म-परिवर्तन के लिए किसी भी धर्म के व्यक्ति-विशेष की आयु सीमा 18 साल तक करने की बात थी। साथ ही उसमें यह भी प्रावधान था कि अगर कोई इसके बाद भी दोषी पाया जाता है तो उसे जेल भेजा जाएगा और पीड़ित को 21 दिन का समय दिया जाएगा कि वह स्वतंत्र होकर अपना फैसला ले।

मगर, साल 2016 में इस बिल को खारिज करते हुए सिंध के गवर्नर सईदुज्जमां सिद्दीकी ने तर्क दिया कि जब हज़रत अली (सुन्नी संप्रदाय में चौथा ख़लीफ़ा और शिया के लिए पहला इमाम) कम उम्र में परिवर्तित हो सकते हैं (9 वर्ष) तो हिंदू लड़कियाँ क्यों नहीं कर सकती हैं?”

सैनिटाइजर डाल हाथ रगड़िए, मास्क पहन संसद के अखाड़े में आइए: चीन विवाद पर शाह का राहुल पर पलटवार

भारत-चीन विवाद पर लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत निशानेबाजी कर रहे राहुल गाँधी को अमित शाह ने करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत सरकार चीन सीमा विवाद पर हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है और संसद में इस पर बृहद बहस के लिए भी रेडी है। अमित शाह ने राहुल गाँधी से कहा कि वो भी हाथों पर सैनिटाइजर रगड़ कर और मास्क व फेस शील्ड पहन संसदीय अखाड़े में उतरें।

अमित शाह ने कहा कि जल्द ही संसद सत्र आयोजित होने वाला है, राहुल गाँधी वहाँ आकर ‘दो-दो हाथ’ कर लें, 1962 से लेकर अब तक चीन के विषय पर चर्चा हो जाएगी। उन्होंने कहा कि चर्चा से कोई नहीं डरता है, चर्चा करनी है तो राहुल गाँधी का स्वागत है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जब सीमा पर सेना बलिदान दे रही हो और सरकार ठोस क़दम उठा रही हो, उस समय पाकिस्तान और चीन को ख़ुश करने वाले बयान देने का क्या तुक है?

बता दें कि हाल ही में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘सरेंडर मोदी’ कह कर चीन का एजेंडा आगे बढ़ाया था, जिसके बाद सोशल पर भी लोगों ने उनसे नाराज़गी जताई थी। इसी बयान को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल पूछा गया था, जिसके जवाब में उन्होंने उक्त बातें कहीं। उन्होंने राहुल गाँधी को आत्ममंथन की सलाह देते हुए कहा कि उनके बयान चीन और पाकिस्तान के रुख को बढ़ावा दे रहे हैं

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार भारत-विरोधी प्रोपेगेंडा से निपटने में पूरी तरह सक्षम है लेकिन जब देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी का पूर्व मुखिया इस तरह की ओछी राजनीति करता है तो इससे दुःख होता है। उन्होंने ANI की संपादक स्मिता प्रकाश को दिए इंटरव्यू में पूछा कि कॉन्ग्रेस पार्टी का अध्यक्ष गाँधी परिवार से बाहर का क्यों नहीं होता? साथ ही उन्होंने कॉन्ग्रेस के आंतरिक लोकतंत्र पर सवाल खड़े किए।

हाल ही में कॉन्ग्रेस की साथी पार्टी एनसीपी के मुखिया शरद पवार ने भी भारत-चीन मुद्दे पर राहुल गाँधी को राजनीति न करने की सलाह दी थी। शरद पवार ने राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए शनिवार (जून 27, 2020) को कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। 1962 के युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी पर आरोप लगाते समय यह भी देखना चाहिए कि अतीत में क्या हुआ था।

लद्दाख में भारत भूमि पर आँख उठा कर देखने वालों को मिला करारा जवाब: ‘मन की बात’ में गरजे PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (जून 28, 2020) को अपने लोकप्रिय रेडियो प्रोग्राम ‘मन की बात’ में भारत-चीन तनाव पर अहम बयान दिया और कोरोना वायरस अनलॉक प्रक्रिया पर लोगों को अहम सलाह दी। उन्होंने कहा कि लद्दाख में भारत की भूमि पर आँख उठाकर देखने वालों को करारा जवाब मिला है, भारत मित्रता निभाना जानता है तो आँख में आँख डालकर देखना और उचित जवाब देना भी जानता है

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे वीर सैनिकों ने दिखा दिया है कि वो कभी भी माँ भारती के गौरव पर आँच नहीं आने देंगे। हमारे जो वीर जवान शहीद हुए हैं, उनके शौर्य को पूरा देश नमन कर रहा है। उन्होंने आगे सलाह दी कि भारत माता की रक्षा के जिस संकल्प से हमारे जवानों ने बलिदान दिया है, उसी संकल्प को हमें भी जीवन का ध्येय बनाना है, यही हमारे शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि भी होगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज रक्षा क्षेत्र में, तकनीक के क्षेत्र में, भारत आगे बढ़ने का निरंतर प्रयास कर रहा है, भारत आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ा रहा है। साथ ही उन्होंने कोरोना वायरस पर बोलते हुए कहा कि लॉकडाउन से ज्यादा सतर्कता हमें अनलॉक के दौरान बरतनी है, आपकी सतर्कता ही आपको कोरोना से बचाएगी। मानसून पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के एक बड़े हिस्से में अब मानसून पहुँच चुका है, इस बार बारिश को लेकर मौसम विज्ञानी भी बहुत उत्साहित हैं, बहुत उम्मीद जता रहा है, बारिश अच्छी होगी तो हमारे किसानों की फसलें अच्छी होंगी।

दिवंगत प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पीएम मोदी ने सलाह दी कि नरसिम्हा राव जी के जन्म शताब्दी वर्ष में आप सभी लोग उनके जीवन और विचारों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि जब, हम, पीवी नरसिम्हा राव जी के बारे में बात करते हैं, तो, स्वाभाविक रूप से राजनेता के रूप में उनकी छवि हमारे सामने उभरती है, लेकिन, यह भी सच्चाई है कि वे अनेक भाषाओँ को जानते थे। उन्होंने आगे कहा:

“पीवी नरसिम्हा राव भारतीय एवं विदेशी भाषाएँ बोल लेते थे। वो एक ओर भारतीय मूल्यों में रचे-बसे थे, तो दूसरी ओर, उन्हें पाश्चात्य साहित्य और विज्ञान का भी ज्ञान था। वे भारत के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक थे लेकिन उनके जीवन का एक और पहलू भी है, और वो उल्लेखनीय है, हमें जानना भी चाहिए। नरसिम्हा राव अपनी किशोरावस्था में ही स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए थे। जब हैदराबाद के निजाम ने वन्दे मातरम् गाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, तब, उनके ख़िलाफ़ आंदोलन में उन्होंने भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था, उस समय, उनकी उम्र सिर्फ 17 साल थी।”

पीएम मोदी ने कहा कि जैसे कपूर आग में तपने पर भी अपनी सुगंध नहीं छोड़ता, वैसे ही अच्छे लोग आपदा में भी अपने गुण, अपना स्वभाव नहीं छोड़ते। आज हमारे देश की जो श्रमशक्ति है, जो श्रमिक साथी हैं, वो भी इसका जीता जागता उदाहरण हैं। उन्होंने ध्यान दिलाया कि इन दिनों हमारे प्रवासी श्रमिकों की ऐसी कितनी ही कहानियाँ आ रही हैं जो पूरे देश को प्रेरणा दे रही हैं। उन्होंने ऐसे कुछ लोगों की कहानियाँ भी सुनाई।

वायर बना जग्गा जासूस: कहा- PMO ने काट दिया मोदी का वीडियो, लोगों ने किया- हा हा!

प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ के पास ज़रूर उस दिन ख़बरों की ख़ासी कमी रही होगी, जब उसने एक ख़बर प्रकाशित की कि प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक यूट्यूब हैंडल ने पीएम नरेंद्र मोदी के उस भाषण को सेंसर कर दिया है, जो उन्होंने भारत-चीन तनाव पर हुई सर्वदलीय बैठक के बाद दिया था। गुरुवार (जून 25, 2020) को ‘द वायर’ ने अपने लेख में लिखा कि पीएम मोदी ने सजगता से बयान नहीं दिया था, इसीलिए PMO ने उस वीडियो को ही सेंसर कर दिया।

प्रोपेगेंडा पोर्टल के अनुसार, पीएम मोदी ने कहा था कि किसी ने भी भारतीय ज़मीन में घुसपैठ नहीं किया है और इसीलिए PMO ने उस वीडियो को सेंसर कर दिया। हालाँकि, ‘द वायर’ के जासूसों को ये समझना चाहिए कि जब पीएम मोदी ये सम्बोधन दे रहे थे, तब सिर्फ़ उनके यूट्यूब चैनल पर ही नहीं, बल्कि टीवी पर सभी न्यूज़ चैनलों ने इसे लाइव प्रसारित किया था। ऐसे में, उनके यूट्यूब चैनल द्वारा इसे सेंसर करने की बात करना बेतुका है

हालाँकि, ‘द वायर’ ने तो यहाँ तक कह दिया कि पीएम मोदी के उस वीडियो को काट-छाँट कर छोटा कर दिया गया है और जहाँ उन्होंने ये बयान दिया था, वहाँ बीच वाक्य से ही उनकी बात शुरू होती है। जून 19 को हुए इस सम्बोधन के बाद कॉन्ग्रेस ने भी इन अजीबोगरीब दावों को मुद्दा बना दिया था। आप ख़ुद पीएम मोदी के आधिकारिक हैंडल पर मौजूद इस वीडियो को पूरा का पूरा यहाँ देख सकते हैं:

भारत-चीन तनाव पर सर्वदलीय बैठक के बाद पीएम मोदी का बयान

अब आप प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा अपलोड किए गए वीडियो को देखिए, जिसे नीचे अपलोड किया गया है। दोनों ही वीडियो में टेलीकास्ट एक वाक्य के बीच में शुरू होता है, जिससे पता चलता है कि ये किसी तकनीकी दिक्कत के कारण हुआ था न कि PMO ने इसे काट-छाँट दिया। बावजूद इसके ‘द वायर’ के ‘जग्गा जासूस’ को लगता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने वीडियो को बाद में काटा। ये हास्यास्पद है।

PMO के यूट्यूब हैंडल पर पीएम मोदी का सम्बोधन

सोचने वाली बात ये है कि जब ये वीडियो सैकड़ों चैनलों पर और वेबसाइट्स पर मौजूद है, तब उसे सेंसर क्यों किया जाएगा? ऑपइंडिया ने जब प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों से इस सम्बन्ध में बातचीत की और प्रोपेगेंडा पोर्टल के दावों पर सवाल पूछे तो उन्होंने हँसते हुए कहा कि ‘द वायर’ से पत्रकारिता की उम्मीद करना ही बेकार है। उन्होंने कहा कि ये आरोप प्रतिक्रिया के लायक हैं ही नहीं और हास्यास्पद है सो अलग।

बता दें कि पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा था कि ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कण्ट्रोल (LAC)’ के साथ छेड़छाड़ करने की किसी भी प्रकार की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बकौल पीएम मोदी, पहले इस तरह की छेड़छाड़ पर सरकारें इसे नज़रअंदाज़ कर देती थीं लेकिन अब सेना के जवान ऐसा करने वालों को रोकते-टोकते हैं। सभी पार्टियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से सूचित किया गया है कि इस बार चीन सीमा पर एक बड़े सैन्य बल के साथ अपने इरादों को अंजाम देने आया था लेकिन भारतीय सेना ने उसके अनुरूप ही उचित जवाब दिया। 

पीएम मोदी ने कहा था कि जिन्होंने भारतीय सरजमीं में घुसने की कोशिश की, उन्हें भारत माता के वीर सपूतों ने करारा जवाब दिया। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि हमारे जवान हमारी सीमाओं की रक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। पीएमओ ने कहा है कि भारतीय क्षेत्र की क्या परिभाषा है, ये आधिकारिक नक़्शे से तय होता है। पिछले 60 साल में किस तरह से देश की 43,000 वर्ग किलोमीटर जमीन चीन के कब्जे में चली गई, इस बारे में भी सभी दलों को बताया गया।

जामुन तोड़ने की बात पर जयप्रकाश की पीट-पीट कर हत्या: सांप्रदायिक तनाव के बीच देवरिया से 7 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सलेमपुर थाना क्षेत्र के इटहुआ चंदौली गाँव में जामुन तोड़ने को लेकर जयप्रकाश कुशवाहा (55 वर्षीय) नाम के एक शख्स की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। इस घटना में कुछ महिलाएँ सहित अन्य लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। यह घटना शनिवार (27 जून, 2020) की शाम को घटित हुई है। पुलिस ने इस मामले में दूसरे पक्ष के 7 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

क्या था मामला

चंदौली गाँव के रहने वाले जयप्रकाश कुशवाहा ने गाँव के बाहर जामुन के पेड़ के नीचे अपनी भैसों को बाँध रखा था। वहीं शाम को पड़ोस में रहने वाले कुछ बच्चे जामुन को तोड़ने के लिए पेड़ पर पत्थर मार रहे थे। इस दौरान पत्थर बार-बार भैसों को लग रहा था। इसको देखते हुए कुशवाहा ने बच्चों को पत्थर फेंकने से मना किया। बच्चों को जामुन तोड़ने से मना करने पर दूसरे पक्ष के लोगों ने कुशवाहा के साथ मारपीट चालू कर दी।

वहीं कुशवाहा के परिजन जब उन्हें बचाने आए तो उन लोगों ने उनके साथ भी मारपीट की। इस कारण कुशवाहा के साथ उनके घर के 4-5 लोगों को भी गंभीर चोटें आईं। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची। सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सलेमपुर ले जाया गया। गंभीर रूप से घायल 55 वर्षीय जयप्रकाश कुशवाहा को चिकित्सकों ने जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया। अस्पताल ले जाते वक़्त रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

वहीं पुलिस ने परिजनों की तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर लिया है। देवरिया पुलिस अधीक्षक ने ट्वीट कर जानकारी दी, “इस घटना में दूसरे पक्ष के सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जिसकी जाँच अनुसार कार्रवाई करवाई जा रही है।”

बता दें कि जयप्रकाश कुशवाहा की हत्या से गाँव में तनाव का माहौल बन गया है। स्थिति को सामान्य करने के लिए एसपी ने आधा दर्जन थानों की फोर्स और दो प्लाटून पीएसी को गाँव में तैनात कर दिया है।

हिन्दू नाबालिग से गैंगरेप: झारखण्ड में पीड़ित परिवार के घर गोलीबारी, केस वापस लेने की धमकी, सेताब शेख गिरफ्तार

आपको साहिबगंज रेप का मामला याद होगा, जो क़रीब एक महीना पुराना है। हिन्दू नाबालिग छात्रा से रेप के मामले में अब परिवार को धमकियाँ मिल रही हैं। पीड़ित परिवार को केस वापस लेने के लिए लगातार धमकी दी जा रही है, ताकि दोषियों को बचाया जा सके। कहा जा रहा है कि सारे आरोपित इलाक़े में प्रभाव रखते हैं और इसीलिए पीड़ित परिवार डरा हुआ है। फिलहाल पुलिस पर भी इस मामले में शिथिलता बरतने के आरोप हैं।

राजमहल थाना क्षेत्र के नौगच्छी नवाबढोरी गाँव में बीते एक माह पूर्व हुए नाबालिग से दुष्कर्म मामले को लेकर शुक्रवार (जून 26, 2020) की आधी रात को बदमाशों ने दहशत फैलाने के उद्देश्य से पीड़ित परिवार के घर पर गोलीबारी की, जिससे क्षेत्र में डर का माहौल बन गया और तनाव पैदा हो गया। स्थानीय विधायक अनंत कुमार ओझा ने इस घटना को लेकर घटनास्थल पर पीड़ित परिवार से मुलाकात किया।

ओझा ने ऑपइंडिया को बताया कि इस दौरान उन्होंने पीड़िता के माता-पिता व अन्य परिजनों को आश्वस्त किया कि वह हमेशा उन लोगों के साथ हैं और उन्हें किसी नकारात्मक तत्वों से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने जानकारी दी है कि वो इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिल कर पीड़ित परिवार को दस लाख रुपए का मुआवजा एवं पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की माँग करेंगे। उन्होंने माँग रखी है कि लगातार मिल रही धमकियों के मद्देनज़र पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान किया जाए।

साथ ही उन्होंने चेताया कि अगर पीड़ित परिवार को पहले से ही सुरक्षा मुहैया कराई गई होती तो शायद गोलीकांड की घटना नहीं घटती। विधायक ओझा ने बताया कि उन्होंने घटनास्थल पर उपस्थित स्थानीय पुलिस पदाधिकारियों से इस मामले में जल्द से जल्द स्पीडी ट्राईल कर पीड़िता को न्याय दिलाने को कहा है। साथ ही उन्होंने पुलिस से गोलीबारी की घटना में शामिल सभी अपराधियों को अविलंब गिरफ्तार करने को कहा ।

बता दें कि ये घटना मई 25, 2020 की है। साहिबगंज जिले के राजमहल थाना क्षेत्र के नवाबडेरी में 3 मुस्लिम युवकों ने सोमवार (मई 25, 2020) रात एक नाबालिग हिन्दू बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार किया था, जिसके बाद इलाक़े में कई दिनों तक माहौल तनावपूर्ण बना हुआ था। इससे पहले भी पुलिस ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया था कि तीन में से एक आरोपित एकरामुल उर्फ सोनू को गिरफ्तार कर लिया है। एक फरार आरोपित बाद में गिरफ्तार हुआ।

नाबालिग पीड़िता के पिता ने बयान में कहा था, “शाम चार बजे जब उनकी बेटी बगीचे में आम चुनने गई थी, उसी समय आरोपितों में से एक ने उसके मुँह पर कपड़ा लपेटकर उसे बाँस की एक झाड़ी में लेकर गए और वहाँ उसके साथ तीनों आरोपितों ने सामूहिक बलात्कार किया।” पीड़िता ने अपने बयान में बताया था कि सोमवार शाम लगभग 4:00 बजे जब हल्की आँधी आई थी उस समय वह अपने घर के पीछे बागीचे में आम चुनने के लिए चली गई।

वहीं आम के बागीचे में पीछे से एकरामुल ने उन्हें पकड़ लिया और शोर करने पर चाकू से गला काट देने की धमकी दी। पीड़िता ने बयान देते हुए बताया था कि जब एकरामुल शेख ने उस के साथ बलात्कार किया, तब बाकी 2 ने उसे पकड़कर रखा था। उसके बाद बारी-बारी से उन्होंने भी उसके साथ बलात्कार किया। एकरामुल (पिता इस्लाम शेख) के अलावा वहाँ अन्य 2 आरोपित – ईदगर शेख (पिता स्व नईम खान) और शाहनवाज ( शेख पिता ताहिर मियाँ) भी मौजूद थे।

साहिबगंज मामले में घटनास्थल पर विधायक

वहीं, अब इस घटना में दोषियों को बचाने के लिए पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है। इस सम्बन्ध में आसपाल के लोग भी डरे-सहमे हैं। पीड़िता के पिता ने गोलीबारी की घटना पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा:

“रात के क़रीब 12:15 बजे सात से आठ की संख्या में बदमाश आ धमके और उन्होंने दरवाजे पर दो बार फायरिंग की। दोनों गोलियाँ दरवाजे के अंदर आकर घर के भीतर रखे हुए टिन के बक्शे में लगी। इसके बाद सारे अपराधी दरवाजे को धक्का देते हुए घर के अंदर घुस गए और गला दबा कर मेरे साथ मारपीट की। साथ ही उन्होंने धमकाया कि केस वापस ले लो नहीं तो जान से मार देंगे। धमकी देकर जाते हुए बदमाशों ने रास्ते में गोपाल मंडल के दरवाजे पर भी गोलीबारी की। गोलीकांड के बाद अपराधी बाइक से फरार हो गए।”

हालाँकि, इस घटना के बाद पुलिस ने भी तत्परता दिखाई। ‘दैनिक भास्कर’ की ख़बर के अनुसार, एसडीपीओ अरविंद कुमार सिंह और राजमहल थाना प्रभारी रंजीत प्रसाद ने सशस्त्र बल के जवानों के साथ घटनास्थल का दौरा किया और साथ ही पीड़ित परिवार से मुलाक़ात कर उनकी बात सुनी। एसपी अनुरंजन किस्पोट्टा ने ऑपइंडिया से बताया कि उन्होंने ख़ुद रात में ही वहाँ पहुँच कर मामले की छानबीन की है।

एसडीपीओ ने गोलीबारी की घटना की पुष्टि पाँच लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने की बात कही है। एसपी ने बताया कि एक आरोपित सेताब शेख को तो गिरफ़्तार कर के जेल भी भेज दिया गया है। पुलिस ने कहा कि इस घटना के बाद राजमहल थाना प्रभारी चिरणजीत प्रसाद, तालझारी थाना प्रभारी अमर प्रसाद यादव, एसआई अमन कुमार और एएसआई कविंद्र मिश्रा सहित कई अधिकारी और जवानों ने घटनास्थल पर अभी भी कैम्प कर रखा है।

हालाँकि, विधायक अनंत कुमार ओझा पुलिस के अब तक के रवैये से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन से पहले ही माँग की गई थी कि पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान किया जाए लेकिन प्रशासन द्वारा ऐसा नहीं किया गया। वहीं स्थानीय वकील पीयूष मिश्रा भी इस मामले में पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं और उनका कहना है कि पॉस्को एक्ट के तहत दर्ज इस मामले में पुलिस को कड़ा रुख अख्तियार करना चाहिए था।

ज्ञात हो कि इस मामले में सबसे पहले एकरामुल की गिरफ्तारी हुई थी। उसके बाद 27 मई को इदगार पकड़ा गया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद साहिबगंज के एसपी अनुरंजन ने ऑपइंडिया से बातचीत में शाहनवाज के सेना से जुड़े होने की पुष्टि की थी। उन्होंने बताया था कि वह सेना की मेडिकल कोर टीम का हिस्सा है और उसकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। उसे रेपकांड के 5 दिन बाद धरा गया था।

घटना के बाद शहनवाज भाग कर सिलीगुड़ी पहुँच गया था और अपनी यूनिट ज्वाइन कर ली थी। सेना द्वारा शाहनवाज को नियमानुसार सिलीगुड़ी में क्वारंटाइन कर रखा गया था। पुलिस को मोबाइल लोकेशन के आधार पर उसके वहाँ होने की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस कोर्ट से वारंट लेकर पहुँची और सेना के अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद आरोपित को पुलिस को सौंप दिया गया। 

अरुण को मारा फिर पेड़ से लटकाया: मुस्लिम युवती से प्रेम करने की ‘सजा’ – फिरोज, अली, मोहसिन गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। हाल ही में रामराज थाना क्षेत्र के हाशिमपुर गाँव में एक युवक का शव पेड़ से लटका मिला। शुरुआती जाँच में इसे आत्महत्या बताया गया लेकिन अब ये हत्या के मामले के रूप में सामने आया है। मृतक के परिजनों ने पहले ही हत्या का आरोप लगाते हुए तीन लोगों के ख़िलाफ़ थाने में तहरीर दी थी। 

मृतक अरुण के बारे में बताया गया है कि वो गाँव के ही रहने वाले योगेश के पुत्र राहुल के यहाँ नौकरी करता था। वहीं उसे नौकरी देने वाला राहुल पिछले एक दशक से उत्तराखंड के देहरादून में रहता है और गाँव में उसके खेतों की देखरेख का काम अरुण के ही जिम्मे था। राहुल के घर की जिम्मेवारी भी अरुण के ही पास थी। बता दें कि घटना के दिन बुधवार (जून 24, 2020) को भी अरुण रात का भोजन करने के बाद राहुल के घर में ही सोने गए थे। 

अब ख़बर सामने आई है कि अरुण की हत्या प्रेम प्रसंग में की गई थी। कहा गया है कि मुस्लिम समाज की युवती से प्रेम करने के कारण उसकी हत्या कर के उसके शव को लटका दिया गया। ‘अमर उजाला’ की ख़बर के अनुसार, पुलिस ने शनिवार (जून 27, 2020) को इस हत्याकांड का खुलासा करते हुए 4 लोगों को गिरफ़्तार किया है।

अरुण का शव राहुल कम्बोज के घर में ही पेड़ में लटका मिला था। हालाँकि, शव की अवस्था देख कर पहले भी हत्या की आशंका जताई गई थी। भोपा के सीओ राजेश कुमार द्विवेदी ने ‘अमर उजाला’ को बताया:

“पुलिस की जाँच में सामने आया है कि अरुण का गाँव की ही दूसरे वर्ग की युवती के साथ प्रेम संबंध थे। उक्त युवती के पड़ोसी फिरोज उर्फ छोटे पुत्र नसीम को यह पसंद नहीं था। इसी कारण वह कई बार अरुण को युवती से दूर रहने की धमकी भी दे चुका था। हत्या के चार दिन पहले भी आरोपित ने अरुण को युवती से दूर रहने की धमकी देते हुए जान से मार डालने की बात कही थी। इस प्रेम सम्बन्ध के कारण ही फिरोज ने अपने दोस्तों साहन अली पुत्र अली हसन, मोहसिन उर्फ काला उर्फ चिलम पुत्र इस्लाम और शाहरुख़ उर्फ भूरा पुत्र डॉ कय्यूम ने मिल कर अरुण की हत्या की साजिश रची।”

सभी हत्या आरोपित हाशिमपुर गाँव के ही निवासी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने बताया है कि उक्त चारों आरोपित पहले ही जाकर राहुल कम्बोज के घर में छिप गए थे, जहाँ अरुण सोने जाने वाला था। जैसे ही अरुण देर रात खाना खा कर वहाँ सोने के लिए पहुँचा, चारों ने चारपाई पर ही उसे धर कर दबोच लिया और गमछे से गला दबा कर हत्या कर दी। शव को पेड़ से लटकाने का मकसद ही यही था कि हत्या को आत्महत्या दिखाया जा सके। 

हालाँकि, पुलिस ने इस मामले को सुलझा लिया है। चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर के जेल भेजा जा चुका है। साथ ही उनके कब्जे से इस हत्याकांड में प्रयोग किए गए गमछे को भी जब्त कर लिया गया है। एसआई सत्येंद्र नागर ने चारों को जेल भेजे जाने की पुष्टि की है। बता दें कि इससे पहले पेड़ से शव मिलने के बाद भी परिजनों ने तीन लोगों से अरुण के 23 जून को झगड़ा होने की बात बताई थी।

मुजफ्फरनगर पुलिस ने भी आरोपितों की गरफ्तारी और गमछे की जब्ती की पुष्टि अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल के माध्यम से की है। पुलिस ने अपनी ट्वीट में लिखा कि थाना रामराज क्षेत्र में हुई हत्या की घटना का सफल अनावरण हुआ है और 4 अभियुक्तगण कपड़े के गमछे सहित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। बकौल पुलिस, गिरफ्तार अभियुक्त की बहन के साथ मृतक के प्रेम प्रसंग थे, इसीलिए बहन से दूर रहने की बात न मानने पर अभियुक्त ने अपने 3 साथियों के साथ मिलकर हत्या की वारदात को अंजाम दिया। 

परिजनों ने आरोपितों के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई थी। उनके विरोध के कारण उन्हें काफी समझा-बुझा कर पुलिस ने पेड़ से शव को उतारने में सफलता पाई थी। बता दें कि हाल ही में वारंट लेकर पहुँचे एसआई सत्येंद्र नागर और एक सिपाही के साथ मारपीट की गई थी। उनकी वर्दी पर लगे नेमप्लेट को उखाड़ दिया गया था और फाड़ दी गई थी। सत्येंद्र और सिपाही विनय कुमार के साथ हुई मारपीट की इस घटना में महिलाएँ भी शामिल थीं। 

साथ ही बदमाशों ने वारंट की कॉपी भी छीन कर फाड़ दी थी। विरोध करने पर आरोपितों ने दरोगा व सिपाही पर फायरिंग भी कर दी थी, जिसमें दोनों बाल-बाल बच गए। स्थिति को हाथ से निकलते देख दोनों ने किसी तरह वहाँ से भाग कर जान अपनी बचाई थी। इसके बाद इंस्पेक्टर हमलवारों की तलाश में पहुँचे थे लेकिन सारे फरार हो चुके थे। समुदाय विशेष के लोगों और अन्य पक्ष में हुई मारपीट के बाद आरोपितों ने ऐसा किया था। 

इस मामले में इस्लाम, अहसान व इरफान पुत्रगण रमजान, फुरकान, नवाजिश व तनवीर पुत्रगण इरफान, ताहिरा पत्नी अहसान, शाइस्ता पत्नी नईम, शौकीन पुत्र इस्लाम सभी निवासीगण मोहल्ला कमिलयान और सनव्वर पुत्र शब्बीर सहित कई अज्ञात लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। समुदाय विशेष के युवक को शिकंजे में लेने के बावजूद पुलिस उसे नहीं पकड़ पाई थी। 

J&K: 50 से अधिक दलित-गोरखा बने स्थायी निवासी, बिहारी IAS को ​डोमिसाइल पर भड़की महबूबा-अब्दुल्ला की पार्टी

50 से अधिक दलित और गोरखा जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासी बन गए हैं। इन्हें शनिवार को डोमिसाइल सर्टिफिकेट दिया गया। दूसरी ओर, बिहार से आने वाले वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी नवीन चौधरी को स्थायी निवास का प्रमाण-पत्र मिलने पर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों ने एतराज जताया है।

चौधरी केंद्र शासित प्रदेश का स्थायी निवासी होने का प्रमाण-पत्र हासिल करने वाले गैर राज्य के पहले शख्स हैं। असल में पहले गैर राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर का डोमिसाइल सर्टिफिकेट हासिल नहीं कर सकते थे। लेकिन, आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद जो नया डोमिसाइल कानून लागू किया गया है, उसने दूसरे राज्य के लोगों के लिए भी यहॉं के स्थायी निवासी बनने के दरवाजे खोल दिए हैं। हालॉंकि इसके लिए कुछ शर्ते निर्धारित की गई हैं। इन्हें पूरा करने वाले को ही डोमिसाइल सर्टिफिकेट मिल सकता है।

चौधरी स​हित अन्य लोगों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट दिए जाने के विरोध में शुक्रवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और अलगाववादी अमलगाम हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इन्होंने इसे मुस्लिम बहुल केंद्र शासित प्रदेश की जनसांख्यिकी में बदलाव की साजिश करार दिया। साथ ही कहा कि आरएसएस के इशारे पर सरकार ऐसा कर रही है।

PDP पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और NC अब्दुल्ला परिवार की पार्टी है। दूसरी ओर, वाल्मीकि और गोरखा समुदाय के जिन लोगों को शनिवार को डोमिसाइल सर्टिफिकेट दिया गया वे पश्चिमी पाकिस्तान से आए हैं। इनमें से कुछ 1947 में देश के विभाजन के बाद यहॉं आए थे तो कुछ 1957 में पंजाब से सफाई के कार्य के लिए लाए गए थे। इन्हें डोमिसाइल सर्टिफिकेट जम्मू के डिविजनल कमिश्नर ने सौंपा।

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 31, 2019 से जम्मू और कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में गठित किया गया है- जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख। पिछले माह ही केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर ने डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी करने के लिए प्रक्रिया की अधिसूचना जारी की थी। 30 हजार से ज्यादा लोग ऑनलाइन जम्मू-कश्मीर का निवास प्रमाण-पत्र ले चुके है।

नए नियमों के मुताबिक जो लोग 15 साल से जम्मू-कश्मीर में रह रहे हैं या 7 साल तक यहॉं पढ़ाई की है, वे स्थायी निवासी बन सकते हैं। केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारी, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारी और बैंक कर्मचारी जिन्होंने 10 साल तक जम्मू-कश्मीर में काम किया है वो भी स्थायी निवासी बन सकते हैं।