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दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे: प्रेगनेंट सफूरा जरगर को ‘मानवता के आधार पर’ मिली जमानत

दिल्‍ली हाईकोर्ट ने जामिया मिलिया इस्‍लामिया विश्‍वविद्यालय की छात्रा और जामिया समन्वय समिति की सदस्य सफूरा जरगर को मंगलवार (जून 23, 2020) को ‘मानवता के आधार पर’ जमानत दे दी। साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट ने सफूरा से किसी ऐसी गतिविधि में शामिल नहीं होने को कहा है, जिससे जाँच पर असर हो। उन्हें दिल्ली नहीं छोड़कर जाने को भी कहा।

बता दें कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों की आरोपित और जामिया मिलिया इस्लामिया की छात्रा सफूरा जरगर के वकील ने चौथी बार उनकी जमानत के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले तीन बार सफूरा की बेल याचिका खारिज की जा चुकी थी।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने 22 जून 2020 को हाई कोर्ट में सफूरा जरगर और उसके दिल्ली दंगों में संलिप्तता संबंधित रिपोर्ट पेश किया। पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार की गई छात्र सफूरा जरगर ने अशांति पैदा की और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला था।

अपनी स्टेटस रिपोर्ट में, दिल्ली पुलिस ने कहा था कि अभियुक्त सफूरा जरगर न केवल घृणा पैदा करने के लिए षड्यंत्रकारी डिजाइन का हिस्सा थी, बल्कि उसका षड्यंत्र किसी भी तरह के उपयोग से लोगों की मृत्यु और घायल होने का कारण बनता।

गौरतलब है कि जामिया की छात्रा सफूरा जरगर के खिलाफ दिल्ली विरोधी दंगों के मद्देनजर यूएपीए के तहत मामला चल रहा है। उसे 10 अप्रैल को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि उसने जाफराबाद-सीलमपुर में 50 दिनों के हंगामा की साजिश रची थी और वहाँ महिलाओं-बच्चों को बिठाने के लिए पूरा जोर लगाया था।

इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने सफूरा के मामले पर सुनवाई के दौरान कोर्ट को यह भी बताया था कि सफूरा जरगर ने भीड़ को उकसाने के लिए कथित तौर पर एक भड़काऊ भाषण दिया था, जिसके बाद फरवरी में दंगे हुए थे। इतना ही नहीं, सफूरा जरगर की एक वीडियो भी सामने आई थी। जिसमें उन्हें कहते सुना गया था, ‘दिल्ली तेरे खून से इंकलाब आएगा।’

सफूरा जरगर की गिरफ्तारी के बाद से ही उसके गर्भवती होने को लेकर मीडिया गिरोह लगातार विक्टिम कार्ड खेल रहा था। कभी उसके हालातों को गौर करवाते हुए भावनात्मक पोस्ट लिखे जा रहे थे। कभी गर्भवती हथिनी के समान रखते हुए भारत में मातृत्व के प्रति सम्मान पर सवाल उठाए जा रहे थे।

जानिए क्या है पतंजलि की दिव्य कोरोनिल टैबलेट जो कर रही है कोरोना खत्म करने का दावा

पतंजलि आयुर्वेद ने मंगलवार (जून 23, 2020) को ‘कोरोनिल और श्वासारी’ (Coronil and Swasari) को लॉन्च किया, जिसके बारे में कंपनी का दावा है कि यह नोवेल कोरोना वायरस या SARS-CoV-2 वायरस के कारण होने वाली साँस की बीमारी यानी, COVID -19 के इलाज का पहला आयुर्वेदिक इलाज है।

पतंजलि योगपीठ बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कोरोना वायरस से जंग को ‘दिव्य कोरोनिल टैबलेट’ समेत तीन दवाइयाँ लॉन्च की हैं। इस ‘कोरोना किट’ में कोरोनिल के अलावा श्वासारी वटी और अणु तेल भी हैं। रामदेव का कहना है कि तीनों को साथ इस्तेमाल करने से कोरोना का संक्रमण खत्म हो सकता है और महामारी से बचाव भी संभव है।

पतंजली कंपनी के अनुसार, कोरोना किट, जो 30 दिनों के लिए है, केवल ₹545 में उपलब्ध कराया जाएगा। रामदेव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस दवा ने 3-7 दिनों के भीतर ‘100 फीसदी रिकवरी रेट’ दिखाया है।

बाबा रामदेव ने कहा कि पूरा देश और दुनिया जिस क्षण की प्रतीक्षा कर रहा था वह आज आ गया है, कोरोना की पहली आयुर्वेदिक दवा तैयार हो गई है। बाबा रामदेव ने कहा कि मेडिसिन के ट्रायल के दौरान तीन दिन के अंदर 69% संक्रमित इससे ठीक हो गए। इसके अलावा, मेडिसन के ट्रायल के दौरान सात दिन में 100% कोरोना मरीज नेगेटिव हो गए।

रामदेव ने प्रेस वार्ता में कहा कि पतंजलि द्वारा तैयार की गई ‘कोरोनिल’ में गिलोय, तुलसी और अश्वगंधा हैं जो कि शरीर की इम्युनिटी बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि यह कोरोना के साथ ही अन्य गंभीर बीमारियों से भी बचाव करती है।

इसे पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (निम्स) यूनिवर्सिटी, जयपुर ने मिलकर तैयार किया है। रामदेव ने निदेशक, राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान, NIMS विश्वविद्यालय, जयपुर, डॉ बलबीर सिंह तोमर और अन्य सभी डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को दवा विकसित करने में मदद के लिए धन्यवाद दिया।

ED ने दिल्ली दंगो में मुख्य आरोपित AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के 6 ठिकानों पर मारे छापे

दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में मुख्य आरोपित आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन (Tahir Hussain) के दिल्ली और नोएडा स्थित घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने 6 ठिकानों पर छापेमारी की है। ताहिर हुसैन के खिलाफ खिलाफ इसको लेकर चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।

तकरीबन डेढ़ माह पहले ही प्रवर्तन निदेशालय ने ताहिर हुसैन पर मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत केस रजिस्टर किया था। ताहिर हुसैन पर आरोप था कि फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल कर करीब 1 करोड़ 16 लाख रुपए नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शनों (CAA Protest) और दिल्ली में दंगों के लिए कैश में फाइनेंस किया गया था।

प्रवर्तन निदेशालय ने ताहिर हुसैन के दिल्ली के कुछ ठिकानों पर इसी छानबीन को लेकर छापा मारा है, जिसमें से नार्थ ईस्ट दिल्ली में 4 लोकेशन्स पर रेड चल रही है। ED के मुताबिक दिल्ली के अलावा नोएडा के ठिकानों पर भी छापेमारी की कार्रवाई चल रही है।

उल्लेखनीय है कि ताहिर हुसैन फिलहाल आईबी स्टाफ अंकित शर्मा की हत्या और दिल्ली हिंसा में संलिप्तता के चलते गिरफ्तार है। आईबी में कार्यरत अंकित शर्मा की हत्या करने के बाद उनकी लाश को नाले में फेंक दिया गया था। मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपित सलमान ने बताया था कि दंगाइयों ने अंकित का मजहब जानने के लिए उनके कपड़े उतारे थे। धर्म पुख्ता कर उन्हें चाकुओं से गोद डाला। सलमान ने बताया कि उसने खुद अंकित पर 14 बार चाकू से वार किए। अंकित के चेहरे पर काला कपड़ा डाल उन्हें आप के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के घर में ले जाया गया था। अंकित का शव 26 फरवरी को चॉंदबाग के नाले से मिला था।

उल्लेखनीय है कि सीएए, एनआरसी विरोध के नाम पर 23-24 फरवरी को दिल्ली में शुरू हुई हिंदू विरोधी हिंसा में 53 लोगों ने अपनी जान गँवा दी थी। 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस दौरान दंगाइयों ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, घोंडा, चाँदबाग, शिव विहार, भजनपुरा, यमुना विहार इलाकों में सरकारी और निजी संपत्ति को काफी नुकसान पहुँचाया था।

मोपला में हजारों हिंदुओं के नरसंहार का जिम्मेदार हाजी बना मलयाली हीरो, उसे ‘राष्ट्रवादी’ दिखाने के लिए फिल्म की घोषणा

साल 1921 में केरल में हुए हिंदुओं के नरसंहार के लिए जिम्मेदार वरियमकुन्नथु कुंजाहम्मद हाजी (Variyam Kunnathu Kunjahammed Haji ) की जिंदगी पर आधारित फिल्म बनने वाली है। इस फिल्म को बनाने वाले का नाम आशिक अबु है। हाजी का किरदार निभाने वाले एक्टर पृथ्वीराज सुकुमारन हैं। और, फिल्म का टाइटल वरियमकुन्नन (Vaariyamkunnan) हैं। ये सब सूचना स्वयं अभिनेता पृथ्वीराज सुकुमारन ने अपने फेसबुक पर दी है।

उन्होंने अपनी नई फिल्म का ऐलान करते हुए हाजी को ब्रिटिशों के ख़िलाफ़ लड़ने वाली शख्सियत बताया है। साथ ही हाजी को न केवल एक नेता के तौर पर दर्शाया, बल्कि उसे एक फौजी और राष्ट्रवादी भी कहा।

इसके अलावा मालाबार में हुए हिंदुओं के नरसंहार के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को पृथ्वीराज ने मालाबार क्रांति का पहला चेहरा लिखा और जानकारी दी कि इसकी फिल्मिंग हाजी की 100वीं बरसी पर शुरू करेंगे।

यहाँ बता दें, इस जानकारी के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा हो गया। लोग पूछने लगे कि आखिर हिंदुओं के नरसंहार के लिए जिम्मेदार व्यक्ति हीरो कैसे हो सकता है? या ये समझें कि ये फिल्म फिर से समुदाय विशेष के कुकर्मों को धोने का एक प्रयास है, जिसके जरिए सच्चाई को छिपाते हुए नया इतिहास समझाने की कोशिश हो रही है।

क्यों है विवाद? दरअसल, साल 2021 में रिलीज होने वाली यह फिल्म मोपला समुदाय के उस मजहबी नेता की जिंदगी पर आधारित है, जिसे साल 1921 में मालाबार में हजारों हिंदुओं के नरसंहार का जिम्मेदार बताया जाता है।

कौन था वरियम कुन्नथु हाजी कुंजाहम्मद हाजी?

वरियमकुन्नथु या चक्कीपरांबन वरियामकुन्नथु कुंजाहम्मद हाजी (Variyam Kunnathu Kunjahammed Haji), वही शख्स है जो खुद को ‘अरनद का सुल्तान’ कहता था। उसी क्षेत्र का सुल्तान जहाँ सैंकड़ों मोपला हिंदुओं का नरसंहार हुआ। जहाँ इस्लामिक ताकतों ने मिलकर लूटपाट की और अंग्रेजों के ख़िलाफ़ विद्रोह की आड़ में हिंदुओं का रक्तपात किया। मगर, फिर भी, उन आतताइयों के उस चेहरे को छिपाने के लिए इतिहास के पन्नों में उन्हें मोपला के विद्रोहियों का नाम दिया गया।

बता दें, मोपला में हिंदुओं का नरसंहार वही घटना है, जब हिंदुओं पर मजहबी भीड़ ने न केवल हमला बोला। बल्कि आगे चलकर पॉलिटिकल नैरेटिव गढ़ने के लिए उस बर्बरता को इतिहास के पन्नों से ही गुम कर दिया या फिर काट-छाँटकर इसपर जानकारी दी गई।

केरल के मालाबार में हिंदुओं पर अत्याचार के उन 4 महीनों ने सैंकड़ों हिंदुओं की जिंदगी तबाह की। बताया जाता है कि मालाबार में ये सब स्वतंत्रता संग्राम के तौर पर शुरू हुआ। लेकिन जब खत्म होने को आया तो उसका उद्देश्य साफ पता चला कि वरियमकुन्नथु जैसे लोग केवल उत्तरी केरल से हिंदुओं की जनसंख्या कम करना चाहते थे।

खिलाफत आंदोलन का सक्रिय समर्थक वरियमकुन्नथु ने अपने दोस्त अली मुसलीयर के साथ मिलकर मोपला दंगों का नेतृत्व किया। जिसमें 10,000 हिंदुओं का केरल से सफाया हुआ। जबकि माना जाता है कि इसके बाद करीब 1 लाख हिंदुओं को केरल छोड़ने पर मजबूर किया गया।

इस दौरान हिंदू मंदिरों को ध्वस्त किया गया। जबरन धर्मांतरण हुए और कई प्रकार के ऐसे अत्याचार हिंदुओं पर किए गए, जिन्हें शब्दों में बयान कर पाना लगभग नामुमकिन है।

बाबा साहेब अंबेडकर अपनी किताब में इस नरसंहार का जिक्र करते हैं। वे पाकिस्तान ऑर पार्टिशन ऑफ इंडिया नाम की अपनी किताब में लिखते हैं कि हिन्दुओं के खिलाफ मालाबार में मोपलाओं द्वारा किए गए खून-खराबे के अत्याचार अवर्णनीय थे। दक्षिणी भारत में हर जगह हिंदुओं के ख़िलाफ़ लहर थी। जिसे खिलाफत नेताओं ने भड़काया था।

इसके अलावा एनी बेसेंट ने इस घटना का जिक्र अपनी किताब में करते हुए बताया कि कैसे धर्म न त्यागने पर हिंदुओं पर अत्याचार हुए। उन्हें मारा-पीटा गया । उनके घरों में लूटपाट हुई। एनी बेंसेंट ने अपनी किताब में बताया कि करीब लाख से ज्यादा हिंदू लोगों को उस दौरान अपने घरों को तन पर बाकी एक जोड़ी कपड़े के साथ छोड़ना पड़ा था। उन्होंने लिखा, “मालाबार ने हमें सिखाया है कि इस्लामिक शासन का क्या मतलब है, और हम भारत में खिलाफत राज का एक और नमूना नहीं देखना चाहते हैं।”

आज मलयालम फिल्म को प्रोड्यूस करने वाले अधिकतर लोग मालाबार के समुदाय विशेष के लोग हैं। जिन्हें लगता है शायद इस तरह के प्रयासों से वह हिंदुओं पर हुई बर्बरता को लोगों की नजरों में धुँधला कर देंगे और अपनी कोशिशों से एक नया इतिहास नई पीढ़ी के सामने पेश करेंगे।

लेकिन, आपको बता दें, ये पहली बार नहीं है जब हाजी के आतताई चेहरे को नायक में तब्दील करने की कोशिश हुई। इससे पहले भी जामिया प्रदर्शन के समय सुर्खियों में आई बरखा दत्त की शीरो लदीदा ने हाजी का महिमामंडन किया था।

लदीदा ने स्पष्ट तौर पर इस्लामिक कट्टरपंथी विचारधारा उजागर करते हुए लिखा था, “हम हर जगह, हर पल मालकम एक्स, अली मुस्लीयर और वरियंकुन्नथ के बेटे-बेटियों और पोते-पोतियों के रूप में उपस्थित रहेंगे। वो सभी नारे हमारी आत्मा हैं और हमने अपने पूर्वजों से ही सीखा है कि राजनीति कैसे की जाती है? तुम लोगों के लिए भले ही वो नारे बस नारे ही हो लेकिन हमारे लिए वो हमारी पहचान हैं, जो हमें औरों से अलग करती है। हम पर ऐसा कोई दबाव नहीं है कि हमें तुम्हारे सेक्युलर नारों का ही इस्तेमाल करना है। मैं स्पष्ट कर दूँ कि हम तुमसे बिलकुल अलग हैं, हमारे तौर-तरीके अलग हैं और हमारा आधार अलग है। इसीलिए, हमें सिखाने की कोशिश मत करो। हमारे बाप मत बनो।”“

‘मैं एक महान दिवंगत आत्मा की माँ हूँ’: जब अब्दुल्ला के मित्र नेहरू ने बलिदानी मुखर्जी की माँ की माँग ठुकराई

जब किसी की मौत होती है तो पुलिस जाँच करती है। किसी की मौत के साथ जब जनभावनाएँ जुड़ी हों या जाँच से कोई संतोषजनक निष्कर्ष न निकला हो तो स्वतंत्र एजेंसियों से जाँच की भी व्यवस्था है। लेकिन, जनसंघ के संस्थापक डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जाँच नहीं हो सकी।

मंगलवार (जून 23, 2020) को जब उनकी मौत को 67 साल होने आए हैं, देश सवाल तो पूछेगा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत की स्वंतंत्र जाँच क्यों नहीं कराई?

जून 2019 में भाजपा अध्यक्ष (तब कार्यकारी) जेपी नड्डा ने कहा था कि वो जवाहरलाल नेहरू ही थे, जिन्होंने डॉ मुखर्जी की मृत्यु की जाँच कराने से इनकार कर दिया था। बकौल नड्डा, इतिहास साक्षी है कि नेहरू ने पूरे देश की माँग को ठुकरा दिया था। बता दें कि हिन्दू राष्ट्रवाद के पुरोधाओं में से एक डॉ मुखर्जी ने ही 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी, जो बाद में भाजपा रूप में परिवर्तित हुआ।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की माता श्रीमती जोगमाया ने भी पंडित नेहरू को एक भावपूर्ण पत्र लिखकर अपने पुत्र की मृत्यु की निष्पक्ष जाँच की माँग की थी। लेकिन, एक माँ की माँग को भी नहीं माना गया। उनकी माँ जोगमाया ने नेहरू को भेजे पत्र में लिखा था कि वो एक महान दिवंगत आत्मा की माता हैं और ये माँग करती हैं कि स्वतंत्र व सक्षम व्यक्तियों द्वारा अविलम्ब एक पूर्णरूपेण निष्पक्ष और खुली जाँच होनी चाहिए।

उन्होंने आगे नेहरू को चेताते हुए कहा था कि यह एक महान दुःखान्त घटना है, जो स्वतंत्र भारत में घटी है और भारत की जनता ज़रूर निर्णय करेगी कि इसका कारण क्या था और इस बारे में आपकी सरकार ने क्या भूमिका निभाई? उन्होंने लिखा था कि किसी भी बड़े से बड़े व्यक्ति ने ही ये कृत्य क्यों न किया हो, क़ानून उसे सज़ा दे। साथ ही जनता सावधान हो जाए ताकि किसी और माँ को स्वतंत्र भारत में इस तरह से आँसू न बहाना पड़े।

डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 50 के दशक की शुरुआत में ‘एक विधान, एक प्रधान, एक निशान’ आंदोलन शुरू किया था। जम्मू कश्मीर में तब ‘प्रधानमंत्री’ का पद होता था। संविधान, झंडा और दूसरे राज्यों के लोगों के वहाँ न बसने का नियम तो हालिया अनुच्छेद 370 के प्रावधान निरस्त होने तक मौजूद थे। डॉ मुखर्जी इसी भेदभाव को ख़त्म करने के पक्ष्धर थे, जो तब असंभव सा लगता था। मई 11, 1953 को जम्मू कश्मीर में घुसने पर उन्हें गिरफ़्तार किया गया था।

श्रीनगर के जेल में ही उनकी मृत्यु हुई, जिसकी वजह हार्ट अटैक को बताया गया। तब शेख अब्दुल्ला कश्मीर के प्रधानमंत्री थे, जो उनके शव पर माल्यार्पण करने भी आए थे। अब जब पश्चिम बंगाल में भाजपा मजबूत बन कर उभर रही है और वहाँ अगले साल विधानसभा चुनाव में वामपंथी दलों के प्रभाव के बावजूद पहली बार कड़ी टक्कर होने जा रही है, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी आज एक बार फिर से भारतीय राजनीति में प्रासंगिक हो उठे हैं।

तृणमूल कॉन्ग्रेस और वामपंथी कैडरों में इसकी छटपटाहट देखी जा सकती है क्योंकि मार्च 2018 में जिस तरह से कोलकाता में जाधवपुर यूनिवर्सिटी के माओवादी समर्थक छात्रों ने डॉ मुखर्जी की प्रतिमा को तोड़ डाला, उससे वामपंथी दलों की बेचैनी प्रदर्शित होती है। उससे कुछ दिनों पहले ही त्रिपुरा में भाजपा की सरकार बनने के बाद जनता द्वारा लेनिन की प्रतिमा गिराई गई थी। लेकिन, बंगाल में बंगाल के ही सपूत की प्रतिमा को भी वामपंथियों ने नहीं बख़्शा।

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जवाहरलाल नेहरू ने पहले अंतरिम केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया था क्योंकि कॉन्ग्रेस और हिन्दू महासभा के अधिवेशन साथ-साथ होते थे और महात्मा गाँधी की भी यही सलाह थी। उनके बारे में एक बार दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बड़ी अच्छी बात कही थी। उनकी पार्टी छोटी थी लेकिन वो बिना बनाए ही विरोधी दल के नेता बन गए थे। किसी ने डॉक्टर मुखर्जी से कहा कि आपको तो नेता बनाया नहीं गया है, चुना नहीं गया है फिर भी आप विरोधी दल के मान्य नेता कैसे?

उस समय युवा अटल बिहारी वाजपेयी ने इस प्रश्न का जवाब देते हुए कहा- “जंगल में शेर को आज तक किसी ने राजमुकुट पहनाया है? वह तो स्वयं राजा है। डॉक्टर मुखर्जी जहाँ होंगे, वो वहीं अपनी आभा बिखेरेंगे। वो जहाँ होंगे, वहाँ विद्वता की बात करते हुए राष्ट्रप्रेम पर बल देंगे।” जब डॉ मुखर्जी गिरफ़्तार हुए थे तब वाजपेयी उनके साथ ही थे। उन्होंने वाजपेयी को वापस भेज दिया था।

उन्होंने कहा था कि अटल जाओ और दुनिया को बताओ कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने परमिट सिस्टम को तोड़ दिया है। तभी तो उनके बलिदान के कुछ ही दिनों बाद नेहरू को कश्मीर में परमिट सिस्टम हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा। तब क्षुब्ध अटल बिहारी वाजपेयी ने एक कविता लिख कर अपना दर्द प्रकट किया था। ‘जम्मू की पुकार‘ शीर्षक की इस कविता की कुछ पंक्तियाँ आज भी झकझोड़ती है:

अत्याचारी ने आज पुन: ललकारा, अन्यायी का चलता है दमन दुधारा।
आँखों के आगे सत्य मिटा जाता है, भारत माता का शीश कटा जाता है।
क्या पुन: देश टुकड़ों में बँट जाएगा? क्या सबका शोणित पानी बन जाएगा?
कब तक जम्मू को यों ही जलने देंगे? कब तक जुल्मों की मदिरा ढलने देंगे?
चुपचाप सहेंगे कब तक लाठी गोली? कब तक खेलेंगे दुश्मन खून से होली?
प्रह्लाद-परीक्षा की बेला अब आई, होलिका बनी देखो अब्दुल्लाशाही।
माँ-बहनों का अपमान सहेंगे कब तक? भोले पाण्डव चुपचाप रहेंगे कब तक?
आओ खण्डित भारत के वासी आओ, कश्मीर बुलाता, त्याग उदासी आओ?

जब डॉक्टर मुखर्जी ने अपना बलिदान दिया, तब अटल बिहारी वाजपेयी उनके राजनीतिक सचिव थे। वो तब तक सांसद भी नहीं बने थे और पत्रकारिता में अनवरत व्यस्त रहा करते थे। डॉक्टर मुखर्जी के बलिदान के बाद वीर सावरकर ने कहा था कि एक महान देशभक्त और महान सांसद शिष्ट नष्ट हो गया है। कहते हैं, उनके बलिदान के 8-9 महीनों बाद शेख अब्दुल्ला की गिरफ़्तारी से देश चकित हो गया था।

नेहरू और अब्दुल्ला अनन्य मित्र थे, ऐसे में लोग ये सवाल ज़रूर पूछ रहे थे कि क्या अगर डॉक्टर मुखर्जी का बलिदान नहीं हुआ होता तो शेख अब्दुल्ला की गिरफ़्तारी संभव होती? डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पाँच सूत्री माँगों में एक ये भी था कि पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर आए हिन्दुओं और सिखों के रहन-सहन की व्यवस्था की जाए। आज दशकों बाद सीएए के रूप में उनका ये स्वप्न पूरा हुआ।

सरदार पटेल ने भी इस बात की भविष्यवाणी की थी कि जवाहरलाल नेहरू अब शेख अब्दुल्ला की मैत्री के मोहजाल में फँसे हुए हैं लेकिन समय आते ही उन्हें अब्दुल्ला का असली रंग दिख जाएगा। महाराजा हरि सिंह भी अब्दुल्ला के इस चाल-चरित्र से वाकिफ थे, तभी उन्होंने उसे जेल में बंद किया था। लेकिन, नेहरू भारत में सत्ता हस्तांतरण के दौर के बीच भी महाराजा का विरोध करने कश्मीर दौड़ पड़े – अपने मित्र अब्दुल्ला के लिए!

आज समय ने सिद्ध कर दिया है कि नेहरू गलत थे और श्यामा प्रसाद मुखर्जी व सरदार पटेल जैसे लोग दूरद्रष्टा थे। जब ‘स्टेचू ऑफ यूनिटी’ सरदार सरोवर बाँध के पास भारत का गर्व बन कर खड़ा है, अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के निरस्त होने और सीएए के अस्तित्व में आने से पता चलता है कि डॉक्टर मुखर्जी की नीतियाँ भविष्य के भले के लिए थीं। अफ़सोस ये कि उनकी मृत्यु की निष्पक्ष जाँच नहीं हो सकी।

शी जिनपिंग के करीबी जनरल झाओ ने दिए थे भारतीय सेना पर हमले के आदेश: US खुफिया एजेंसी का खुलासा

गलवान घाटी पर भारत-चीन सेना के बीच हुई आपसी झड़प के बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने एक बड़ा खुलासा किया है। इस खुलासे में मालूम चला है कि भारतीय सैनिकों पर हमला करने के लिए चीन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें आदेश दिए थे। यानी ये हमला पहले से सुनियोजित था।

यूएस न्यूज के अनुसार, चीन के सबसे ताकतवर जनरल झाओ जोंगकी ने ही इस पूरे ऑपरेशन के लिए सेना को आदेश दिएl जोंगकी वेस्टर्न थिएटर का प्रमुख है। वह इससे पहले भारत के साथ कई तनातनी (डोकलाम जैसी) वाली घटनाओं को अंजाम दे चुका है। उसका उद्देश्य इस बार भी कुछ ऐसा ही था।

वियतनाम, डोकलाम, गलवान...चीन की शर्मिंदगी के सबब बने जनरल झाओ जोंगकी

रिपोर्ट की मानें तो जोंगकी सोचता था कि चीन को USA और उससे जुड़े देशों के सामने कमजोर नहीं दिखाई पड़ना चाहिए। इसलिए वह इस हमले के जरिए भारत को सबक सिखाना चाहता था। लेकिन उसकी चाल उसपर उलटी पड़ गई और पूरे हमले में चीन के 40 से ज्यादा सैनिक मारे गए। इसके अलावा हमले के बाद भारतीयों ने काफी तादाद में चीनी सामान और चीनी तकनीक का बहिष्कार भी शुरू कर दिया।

रिपोर्ट कहती है कि इस कार्रवाई के जरिए चीन भारत पर दबाव बनाना चाहता था। उसे लग रहा था कि ऐसी कोशिशें करके वार्ता के दौरान भारतीय पक्ष को दबाया जा सकेगा। मगर, उसके प्लान के मुताबिक कुछ नहीं हुआ। अमेरिका की इंटेलीजेंस रिपोर्ट में दावा किया गया कि चीन की योजना इसलिए भी फेल रही क्योंकि भारत अमेरिका के पाले में आता दिखा।

क्या शी जिनपिंग को थी जानकारी?

यहाँ बता दें कि यूएस खुफिया एजेंसी की इस रिपोर्ट में इस बात को साफ नहीं किया गया है कि पूरी साजिश में राष्ट्रपति शी जिनपिंग किस सीमा तक शामिल थे। लेकिन चीनी सेना के विशेषज्ञों का यह मानना है कि उन्हें निश्चित रूप से इस हमले के आदेशों के बारे में सूचना रही होगी। क्योंकि आदेश देने वाले जनरल झाओ, शी जिनपिंग के बेहद करीबी माने जाते हैं।

दिलचस्प बात ये है कि अमेरिकी अनुमान के मुताबिक इससे पहले वर्ष 1979 में वियतनाम युद्ध के दौरान जनरल झाओ पीएलए में थे और माना जाता है कि उनके कुप्रबंधन की वजह से ही विवाद काफी बढ़ गया था। वर्ष 2017 में डोकलाम विवाद के दौरान भी जनरल झाओ शामिल थे। इस दौरान भी भारतीय सैनिकों ने सफलतापूर्वक चीनी सैनिकों को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया था।

याद दिला दें कि आपसी झड़प की खबर मीडिया में आने के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान दिया था कि भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों पर पहले हमला किया। लेकिन अब यूएस खुफिया एजेंसी की यह रिपोर्ट उन दावों से बिलकुल उलट है।

इस मामले पर अमेरिका का ये भी कहना है कि जनरल झाओ ने इस हमले में मारे गए चीनी सैनिकों की याद में एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया था। मगर, इस बारे में चीनी मीडिया में कुछ भी जानकारी जानबूझकर नहीं दी गई। यही नहीं चीन के सोशल मीडिया वेबसाइटों पर भी इस हार के बारे में काफी आलोचना की गई जिसे बाद में सेंसर कर दिया गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत-चीन मामले पर क्या कहा?

14-15 जून की रात हुई इस झड़प को लेकर अमेरिका राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा, “ये बहुत मुश्किल स्थिति है। हम भारत से बात कर रहे हैं। चीन से बात कर रहे हैं। उनके यहाँ बहुत समस्या है। वे लोग मारपीट पर उतर आए हैं। हम देखते हैं, आगे क्या होगा। हम उनकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों गलवान घाटी में भारत चीन सैनिकों के बीच जो कुछ भी हुआ। उसमें दोनों देशों के जवान हताहत हुए। इसी के मद्देनजर भारत सरकार ने चीन का रवैया देखते हुए आर्मी को अपने मुताबिक कार्रवाई करनी की छूट भी दी। साथ ही बातचीत का रास्ता भी खुला रखा।

इसके बाद LAC पर जारी खींचतान के बीच सोमवार को लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत हुई। एलएसी के दूसरी ओर चीन के हिस्से में मोल्डो इलाके में दोनों सेनाओं के अधिकारियों के बीच बैठक हुई। यह बैठक करीब 12 घंटे के बाद खत्म हुई। हालाँकि, इस बैठक के बाद कोई प्रभावी नतीजे नहीं निकलकर आए।

राहत की बात ये है कि चीन की नापाक इरादों को भाँपते हुए सीमा पर भारतीय सेना पहले से पूरी तरह से मुस्तैद हो गई है। वहीं, सैटेलाइट इमेज से पता चल रहा है कि चीन अपनी सीमा की ओर से कई तरह की हरकतें कर रहा है। जिसे देखते हुए भारतीय एयरफोर्स ने भी अपने फाइटर प्लेनों को तैनात कर दिया है।

झारखंड में धर्म परिवर्तन को लेकर बवाल, धनबाद में गुस्साए स्थानीय लोगों ने चर्च में की तोड़फोड़

झारखंड में कोरोना संकट के बीच जमकर धर्मांतरण का खेल चल रहा है। राज्य में ताजा मामला धनबाद झरिया का है, जहाँ लोगों के पुनर्वास के नाम पर दो दर्जन परिवारों का धर्म परिवर्तन कर उन्हें ईसाई बना दिया गया। ये मामला सामने आने के बाद हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों ने इसका जमकर विरोध किया और प्रशासन को शिकायत दर्ज कराई है। 

जानकारी के मुताबिक राज्य में कोरोना की आड़ में मिशनरीज धर्मांतरण करा रहे हैं। सोमवार (जून 22, 2020) को भी एक मामला सामने आया है। झरिया के विस्थापितों के लिए झरिया विहार के नाम से बसाए गए बेलगड़िया टाउनशिप में धर्म परिवर्तन को लेकर सोमवार को जमकर बवाल हुआ। स्थानीय लोगों ने यहाँ नवनिर्मित चर्च को घेर घंटों हंगामा किया। चर्च के ऊपर लगे धार्मिक चिन्ह (क्रॉस) को भी लोगों ने तोड़ दिया।

लोगों का आरोप है कि यहाँ पर धर्मांतरण का खेल काफी पहले से चल रहा है, मगर राज्य सरकार की तरफ से किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। और तो और, लोगों का कहना है कि चर्च बनाने के लिए जमीन भी धोखे से खरीदी गई है।

मामले की जानकारी मिलते ही सिंदरी विधायक इंद्रजीत महतो, विहिप के जिला मंत्री रमेश पांडेय, भाजपा नेता मुकेश पांडेय समेत कई लोग वहाँ पहुँचे। देखते-देखते वहाँ एक हजार से अधिक लोगों की भीड़ जमा हो गई।

स्थानीय लोगों ने बताया कि ईसाई मिशनरी से जुड़े कुछ लोग बेलगड़िया टाउनशिप के गरीब-गुरबा लोगों को बरगलाकर व पैसे का प्रलोभन दे कर धर्म परिवर्तन करा रहे हैं। सभी लोग धर्मांतरण के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे थे।

हंगामे के दौरान ही ईसाई मिशनरी के दो युवा धर्म प्रशिक्षक काइना पंसल और सुशांत प्रधान पहुँचे। बताया जा रहा है कि काइना पंसल अरुणाचल प्रदेश के जबकि सुशांत प्रधान ओडिशा के रहने वाले हैं। फिलहाल पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

सिंदरी विधायक ने धर्मांतरण पर आक्रोश जताते हुए कहा, “हेमंत सरकार बनते ही मिशनरी गतिविधियों में तेजी आई है। लग रहा है कि यह झामुमो नहीं, मिशनरियों की सरकार है। राज्य में धर्मांतरण पर रोक है। बावजूद दो दर्जन से अधिक परिवारों का धर्मांतरण कराया गया। इसके कारण समाज में अशांति फैल गई। पुलिस धर्मांतरण में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे अन्यथा भाजपा सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी।” 

संवेदनशील माहौल को देखते हुए मौके पर पुलिस की भारी तैनाती कर दी गई है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। एसएसपी अखिलेश बी वारियर का कहना है कि जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सिंदरी डीएसपी की अगुवाई में पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। पता लगाया जा रहा है कि आखिर ऐसी परिस्थिति कैसे बनी। 

गौरतलब है कि झारखंड में धर्मांतरण की गतिविधियों को लेकर पहले भी विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा था कि झारखंड में बीजेपी सरकार के रहते आदिवासियों का जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए सख्त कानून लाया गया था। लेकिन, राज्य में झामुमो, कॉन्ग्रेस और राजद गठबंधन के सत्तासीन होते ही धर्मांतरण ने जोर पकड़ लिया है। 

TOI ने जिस दंपती को बताया मृत, वो निकला सकुशल; पत्नी ने कहा- पत्रकारिता का स्तर काफी नीचे गिरा

देश के सबसे बड़े मीडिया नेटवर्क्स में से एक ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (TOI) ने अपनी वेबसाइट और अख़बार के पहले ही पन्ने पर एक सामूहिक हत्याकांड की ख़बर में ऐसे लोगों की तस्वीरें लगा कर चला दी, जो ज़िंदा हैं और सकुशल हैं। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने ख़बर प्रकाशित किया कि कोलकाता के एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और सास की हत्या कर के ख़ुद को भी गोली मार ली। लेकिन, TOI ने इसमें शिल्पी अग्रवाल नामक फूड ब्लॉगर और उनके पति अमित अग्रवाल की तस्वीर लगा दी। नाम भी उनका ही डाल दिया। जबकि दोनों सकुशल हैं।

शिल्पी अग्रवाल फेसबुक पर ‘Food And Flavors’ नामक पेज चलाती हैं, जिसके माध्यम से वो लोगों को तरह-तरह के व्यंजन बनाने की रेसिपी से अवगत कराती हैं। वो तमाम तरह के वीडियो बना कर कई डिश बनाने की विधि लोगों को समझाती हैं। अचानक से जब ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (TOI) ने उनकी और उनके पति की तस्वीर इस हत्याकांड वाली ख़बर में लगा दी तो उनके पास कई मैसेज आने लगे, जिसके बाद उन्हें सफाई देनी पड़ी कि वो ठीक हैं।

TOI ने पहले पन्ने पर छाप दी ग़लत फोटो के साथ तस्वीर

इसके बाद शिल्पी ने TOI की उस ख़बर को अपने लैपटॉप पर खोल कर उसका वीडियो बनाया और फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा कि देखिए भारत में पत्रकारिता का स्तर कितना नीचे गिर गया है। उन्होंने कहा कि TOI या भारतीय मीडिया में उनका जो भी थोड़ा-बहुत विश्वास बचा था, वो इस ख़बर के साथ ही उड़न-छू हो गया है। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि वो और उनके पति अमित अग्रवाल पूरी तरह ठीक हैं और इस ख़बर से उनका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।

TOI की ख़बर के बाद शिल्पी अग्रवाल ने जारी किया बयान

मंगलवार (जून 23, 2020) को उन्होंने अपने पेज ‘Food And Flavors’ पर लिखा कि इस ख़बर के सामने आने के बाद सुबह से ही उनके और उनके परिवार के जीवन में हलचल मची हुई है क्योंकि लोगों के फोन कॉल्स आ रहे हैं और सभी बेचैन हैं। उन्होंने TOI से तुरंत अपनी ग़लती सुधारने और आधिकारिक रूप से माफ़ी माँगने को कहा। उन्होंने अपने जानने वालों से कहा कि वो और अमित ठीक हैं और साथ में ख़ुश हैं, पहले से भी ज्यादा।

TOI ने जिस ख़बर को प्रकाशित किया था, उसमें लिखा था कि अमित कोलकाता से अपनी पत्नी के पास बेंगलुरु गए और फिर उनकी हत्या कर दी। इसमें पुलिस के बयान से घर का पता तक दिया हुआ था। जॉइंट कमिश्नर का बयान भी था कि उन्हें घर से सुसाइड नोट मिला है। शिल्पी का मृत शरीर अपार्टमेंट से मिलने की बात कही गई। हालाँकि, TOI ने तस्वीर तो हटा दी है। साथ ही स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उन्होंने अनजाने में ग़लत फोटो अपलोड कर दी थी, जिसका उन्हें खेद है।

TOI ने बाद में फोटो बदल कर माँगी माफ़ी

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (TOI) की इस ख़बर में भी पत्नी को गोली मार कर आत्महत्या करने वाले आरोपित का नाम अमित अग्रवाल ही है और साथ ही उसकी पत्नी का नाम शिल्पी अग्रवाल है, जो फूड ब्लॉगर शिल्पी अग्रवाल और उनके पति अमित के नाम के समान ही है। लेकिन, उसने एक ज़िंदा कपल की फोटो एक आपराधिक हत्याकांड वाली ख़बर में चला दी, जिससे न सिर्फ़ कपल बल्कि उनके पूरे परिवार को प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा चल पड़े: देखें रथयात्रा की मनमोहक तस्वीरें

सुप्रीम कोर्ट द्वारा हरी झंडी मिलने के साथ ही जगन्नाथ पुरी में रथयात्रा शुरू हो गई है और इसकी तस्वीरें सामने आने लगी हैं। पहले सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के पुरी में होने वाली जगन्नाथ रथयात्रा पर रोक लगा दी थी लेकिन बाद में केंद्र सरकार के प्रयासों के बाद इसके आयोजन का मार्ग प्रशस्त किया जा सका। यहाँ हम आपको आज मंगलवार (जून 23, 2020) को आयोजित हो रही जगन्नाथ पुरी रथयात्रा की भव्य तस्वीरें दिखा रहे हैं।

सबसे पहले जगन्नाथ पुरी की इस तस्वीरों को देखिए, जिसमें रथयात्रा के पहले की तैयारियों के बारे में पता चलता है। इन तस्वीरों में रथ की सजावट से लेकर रस्सियों और रथ को खींचने तक की व्यवस्था कैसे की गई है, इस बारे में दिखाया गया है।

इन्हीं रथों से जाएँगे जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा
रथयात्रा में मजबूत और लम्बे रस्सियों की होती है ज़रूरत
रथों की सजावट देखते ही बन रही
रथ के ऊपर की संरचना
जगन्नाथ पुरी में मौसम भी रथयात्रा के अनुकूल बन कर भगवान जगन्नाथ को प्रणाम कर रहा
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के लिए तैयारी पुख्ता
मंदिर के भीतर जाकर अनुष्ठान की तैयारियों का जायजा लेते ब्राह्मण
रथ में जुते घोड़े

बता दें कि इस बार कोरोना संक्रमण आपदा के कारण पुरी शहर को टोटल लॉकडाउन किया गया है और इसके बाद रथयात्रा को मंदिर के 1172 सेवकों द्वारा गुंडिचा मंदिर तक ले जाया जा रहा है। हालाँकि, आम लोगों को इस रथयात्रा में हिस्सा नहीं लेने दिया जाएगा और वो टीवी पर ही भगवान के दर्शन कर सकते हैं। लेकिन, अनुष्ठान और बाकी शास्त्र सम्मत प्रक्रिया वैसे ही होगी। देखें जगन्नाथ पुरी रथयात्रा की अन्य तस्वीरें:

इस बार कोरोना वायरस को देखते हुए पूरी सजगता भी बरती गई है। सभी सेवायतों का कोरोना टेस्ट कराया गया है, जिसके बाद ही रथयात्रा की प्रक्रिया शुरू हुई है। रथयात्रा की कुछ अन्य भव्य तस्वीरें देखें यहाँ:

रथयात्रा से जुड़े लोगों ने कहा था कि जगन्नाथ भगवान की पूजा स्कन्द पुराण और अन्य पवित्र पुस्तकों में वर्णित रीति-रिवाजों के अनुसार होती रही है। 1960 में ओडिशा सरकार ने जगन्नाथ पुरी का प्रबंधन अपने हाथों में लिया था। 1964 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि मंदिर के सारे धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन किया जाए। हाईकोर्ट में भी ओडिशा सरकार ने कह दिया कि वो इस साल जगन्नाथ पुरी रथयात्रा के प्रबंधन में सक्षम नहीं है। अंत में रथयात्रा को सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दे दी। 

डॉ राहुल बन कॉल करता था अब्दुल करीम, ब्लड/प्लाज्मा डोनेशन का लालच दे चला रहा था पूरा गैंग

दिल्ली पुलिस ने ब्लड/प्लाज्मा डोनेशन स्कैम के आरोपित को धर-दबोचा है। इस मामले में पुलिस को दिल्ली विधानसभा के स्पीकर रामनिवास गोयल से शिकायत मिली थी, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई। गोयल के पास एक कॉल आया था, जिसमें उस तरफ से प्लाज्मा डोनेशन की बात कही गई और साथ ही रुपए की भी माँग रखी गई।

उक्त कॉलर ने फोन पर कहा था कि वो ब्लड/प्लाज्मा डोनेशन करेगा और बदले में उसने पेटीएम से पेमेंट की माँग की थी। पुलिस ने आरोपित शख्स को पकड़ लिया है, उसकी पहचान अब्दुल करीम राणा के रूप में हुई है।

कॉलर ने दिल्ली विधान सभाध्यक्ष रामनिवास गोयल को बताया कि वो दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में बतौर डॉक्टर कार्यरत है। गोयल ने उस कॉल की पूरी डिटेल्स और उक्त व्यक्ति का नंबर पुलिस को दे दिया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने अब्दुल करीम राणा की पहचान की और फिर उसे गिरफ़्तार कर लिया।

इस पूरे मामले में जो सबसे ज्यादा चौंकाने वाला एंगल है, वह है आरोपित का छद्म हिन्दू नाम का इस्तेमाल करना। आरोपित राहुल ठाकुर के छद्म हिन्दू नाम से लोगों को कॉल किया करता था।

आरोपित अब्दुल करीम राणा उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का रहने वाला है, जो ब्लड/प्लाज्मा डोनेशन स्कैम में लिप्त है। उसके गैंग में कई अन्य साथ भी हो सकते हैं, जिसकी पहचान के लिए उससे पूछताछ जारी है।

पुलिस ने अन्य आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए तलाशी अभियान प्रारम्भ भी कर दिया है। आरोपित अब्दुल करीम राणा ने अपना गुनाह स्वीकार करते हुए कई निर्दोष लोगों को ठगे जाने की बात बताई है। उसने कइयों को चुना लगाया है।

वो सबसे पहले पता लगाता था कि किस व्यक्ति को ब्लड/प्लाज्मा डोनेशन की ज़रूरत है। इसके बाद वो ख़ुद ब्लड/प्लाज्मा डोनर बन कर उसे कॉल किया करता था और फिर बदले में रुपए की माँग करता था।

अब्दुल करीम राणा इतने शातिराना ढंग से लोगों से बातचीत करता था कि लोग उसके झाँसे में आ जाते थे। इससे पहले किडनी डोनेशन के नाम पर इस तरह के फर्जीवाड़े सामने आते थे। ब्लड/प्लाज्मा डोनेशन स्कैम को लेकर ये अपनेआप में अनोखा मामला है।

पता चला है कि आरोपित अब्दुल करीम राणा ने गोयल से कैब के किराए के नाम पर 950 रुपए भी ठग लिए थे। दरअसल, गोयल के भतीजे पुनीत अग्रवाल को अपने ससुर के लिए ब्लड/प्लाज्मा डोनेशन की जरूरत थी, जिसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर इस बारे में पोस्ट किया था। वहीं से अब्दुल ने उन्हें राहुल बन कर कॉल किया।

हालाँकि, पुनीत ने कहीं और से ब्लड/प्लाज्मा का इंतजाम कर लिया था लेकिन बाद में चाचा गोयल के किसी जानकर को जरूरत पड़ी तो उन्होंने आरोपित का ही नंबर दे दिया। गोयल ने अब्दुल को कॉल कर के मेदांता अस्पताल पहुँचने की बात की, लेकिन उससे पहले उसने कहा कि उसके गूगल पे खाते में कैब के 450 रुपए डाले जाएँ। इसके बाद उसने फिर 500 रुपए मँगाए।

पैसे ट्रांसफर होने के बावजूद आरोपित न तो अस्पताल पहुँचा और न ही उसने कॉल उठाया। पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस का सहारा लेते हुए हुए उसे धर-दबोचा। उसने दर्जनों को इसी तरह ठगने की बात स्वीकार की है।