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हिन्दुओं की हुई जीत: सुप्रीम कोर्ट ने दी जगन्नाथ रथ यात्रा को इजाजत, पहले लगाई थी रोक

सुप्रीम कोर्ट ने पुरी में होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा पर अपने पिछले आदेश में लगाई गई रोक को हटा लिया है। यानी कल (23 जून 2020 को) पुरी में भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक व ऐतिहासिक रथ यात्रा निकलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए मंदिर कमिटी, राज्य व केंद्र सरकार को समन्वय बना कर करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने आज (22 जून, 2020) ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा पर रोक संबंधी आदेश में संशोधन करने के अनुरोध पर सुनवाई की। केंद्र की ओर से मामले का विशेष उल्लेख सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने किया। उन्होंने यहाँ कुछ प्रतिबंधों के साथ रथयात्रा की अनुमित देने का अनुरोध किया।

जगन्नाथ पुरी में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह रथयात्रा सदियों पुरानी है और इसे रोकना ठीक नहीं होगा। उन्होंने कोर्ट के समक्ष इस मामले में कुछ शर्तों और हिदायतों के साथ पूर्व के आदेश में संशोधन का आग्रह किया।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने मामले का उल्लेख करते हुए सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “यह कई करोड़ लोगों की आस्था का मामला है। अगर भगवान जगन्नाथ को कल बाहर नहीं लाया गया तो परंपरा के मुताबिक उन्हें अगले 12 साल तक बाहर नहीं निकाला जा सकता है।” इस पीठ में दोपहर बाद मुख्य न्यायधीश भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ गए।

सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस रथयात्रा में कवल उन लोगों का चयन होगा, जिनका कोरोना टेस्ट नेगेटिव आया हो और वे भगवान जगन्नाथ मंदिर में सेवायत के रूप में काम कर रहे हों। उन्होंने बताया कि भीड़ को रोकने के लिए राज्य सरकार कर्फ्यू लगा सकती है। हालातों को देखते हुए कदम उठाए जा सकते हैं और जन भागीदारी के बिना रथ यात्रा आयोजित हो सकती है।

वहीं, ओडिशा सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने भी केंद्र की दलील का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर याचिकाकर्ता पूरे एहतियात के साथ रथयात्रा आयोजित करते हैं, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। जिसके बाद जस्टिस मिश्रा ने कहा कि वह सभी मामलों की सुनवाई के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श लेकर आदेश में संशोधन के मामले पर विचार करेंगे।

इसके बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया नागपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस मामले पर सुनवाई के लिए जुड़े। 18 जून के आदेश के मामले में संशोधन की माँग वाले मामले की अध्यक्षता इसके बाद CJI ने ही की।

गौरतलब है कि इससे पहले 18 जून को कोरोना वायरस की महामारी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 23 जून को पुरी (ओडिशा) के जगन्नाथ मंदिर में होने वाली वार्षिक रथ यात्रा पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर हमने इस साल रथयात्रा की इजाजत दे दी तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे।

इसके बाद पुरी के राजा गजपति दिब्यसिंह ने शनिवार (जून 20, 2020) को मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को पत्र लिख कर रथ यात्रा को अनुमति देने के लिए अपने आदेश को संशोधित करने के लिए तत्काल सुप्रीम कोर्ट का रूख करने की अपील की थी। वहीं भाजपा ने भी दिब्यसिंह देब के प्रस्ताव के अनुसार कदम उठाने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार को पुरी शंकराचार्य से भी चर्चा करनी चाहिए।

यहाँ बता दें कि भुवनेश्वर के ओडिशा विकास परिषद एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर कर इस मामले को उठाया था। उन्होंने अपनी दायर में कहा ता कि रथयात्रा से कोरोना फैलने का खतरा हो सकता है। इसमें कहा गया था कि अगर लोगों की सेहत को ध्यान में रखकर कोर्ट दीपावली पर पटाखे जलाने पर रोक लगा सकता है तो फिर रथयात्रा पर रोक क्यों नहीं लगाई जा सकती?

बाँधों के मरम्मत कार्य को रोक रहा नेपाल, बिहार के बड़े हिस्से में बाढ़ का खतरा

भारत के साथ सीमा विवाद के बीच नेपाल सरकार बिहार को परेशान कर रही है। नेपाल सरकार ने पूर्वी चम्पारण के ढाका अनुमंडल में लाल बकेया नदी पर बन रहे तटबंध के पुर्निर्माण कार्य को रोक दिया है। बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने बताया कि नेपाल गंडक बांध के लिए मरम्मत कार्य की अनुमति नहीं दे रहा है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा नेपाल ने कई अन्य स्थानों पर मरम्मत का काम रोक दिया है। जल संसाधन मंत्री ने कहा, “पहली बार हम लोग इस तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं। हम मरम्मत कार्य के लिए सामग्री तक नहीं पहुँचा पा रहे हैं। हमारे स्थानीय इंजीनियर और डीएम संबंधित अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहे हैं और अब मैं मौजूदा स्थिति के बारे में विदेश मंत्रालय को पत्र लिखूँगा।”

उन्होंने आगे कहा कि यदि इस मुद्दे को समय पर नहीं देखा गया तो बिहार के बड़े हिस्से में बाढ़ आ जाएगी। संजय झा ने कहा कि अगर हमारे इंजीनियरों के पास बाढ़ से लड़ने वाली सामग्री नहीं पहुँचेगी तो बाँध की मरम्मत का काम प्रभावित होगा। अगर नेपाल में भारी वर्षा के कारण गंडक नदी का जल स्तर बढ़ता है तो यह एक गंभीर समस्या पैदा कर देगा।

संजय कुमार झा ने कहा कि गंडक बैराज के 36 गेट हैं, जिनमें से 18 नेपाल साइड में हैं। उसमें उन्होंने बैरियर लगा रखे हैं जो आजतक कभी नहीं हुआ। आगे बाढ़ का समय है उस तरफ बिहार सरकार ही जाकर बाँध को ठीक करती है। नेपाल सरकार बाँध मरम्मत के लिए सामग्री नहीं ले जाने दे रही है। कल भी बाँध से 1.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। यदि बाढ़ से लड़ने वाली सामग्री और हमारे अधिकारी वहाँ नहीं जा पाते हैं, तो उस स्थिति में गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

इसी तरह नेपाल ने पूर्वी चंपारण जिले के गुवारी गाँव में लालबकेया नदी के दाहिने तटबंध पर चल रहे मरम्मत और कटावरोधी कार्यों पर रोक लगा दी है। ललबकेया नदी ‘नो मैंस लैंड’ का हिस्सा है। यह बाँध 20 सालों से है। बिहार ने नदी के ऊपर तटबंध का निर्माण किया था और मानसून से पहले हर साल किलेबंदी का काम करता था। मंत्री के अनुसार उन्हें कभी नेपाल से ऐसी आपत्तियों का सामना नहीं करना पड़ा।

उन्होंने कहा, “मरम्मत का काम पिछले साल तक बिना किसी समस्या के हुआ करता था। इस बार वे ऐसा नहीं होने दे रहे हैं। मधुबनी के जयनगर में कमला नदी के ऊपर भी वे हमें मरम्मत करने नहीं दे रहे हैं।” मंत्री ने यह भी कहा कि स्थानीय इंजीनियर और जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) इस मुद्दे को सुलझाने के लिए प्रशासन के साथ बातचीत कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वह इस मामले को उच्च अधिकारियों के सामने उठाएँगे। संजय झा ने कहा, “मैं उन्हें इस मुद्दे से अवगत कराने के लिए तुरंत विदेश मंत्रालय को एक पत्र लिखूँगा। अगर जल्द ही इसका हल नहीं किया गया तो बिहार का एक बड़ा हिस्सा बारिश के मौसम में बाढ़ में बह जाएगा।”

कोरोना के कारण इस बार काँवड़ यात्रा नहीं, 3 राज्यों के CM ने आपसी सहमति से लिया फैसला

कोरोना संक्रमण के मद्देनजर काँवड़ यात्रा को इस वर्ष उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने रद्द करने का फैसला किया है। सीएम योगी ने यह फैसला 20 जून को हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर और उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बात करने के बाद लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री के पास यह प्रस्ताव साधु संतों व धार्मिक गुरुओं के जरिए आया था। तीनों मुख्यमंत्री की बैठक के बाद इसे मँजूरी मिल गई।

इस निर्णय के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने सभी जोनल महानिदेशकों और सभी जोनल कमिश्नरों को अपने-अपने क्षेत्रों में प्रोटोकॉल लागू कराने का निर्देश दे दिया है। जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि एक स्थान पर पाँच से अधिक लोग इकट्ठे न हों।

बता दें, सीएम ने इस दौरान स्थानीय धर्मगुरुओं व काँवड़ यूनियन और शांति कमेटी से भी बात की। साथ ही लोगों को इस निर्णय के बारे में सूचित करने व इसका पालन करने के लिए भी कहने को कहा गया। इसके अलावा सीएम ने अगस्त में आने वाली बकरीद को लेकर भी निर्देश दिया कि उस समय भी 5 से ज्यादा लोग इकट्ठा नहीं होंगे।

उल्लेखनीय है कि हर वर्ष सावन के महीने में काँवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। लाखों श्रद्धालु अपने घरों से इस यात्रा के लिए निकलते हैं और शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं। ऐसे में जगह-जगह इन श्रद्धालुओं के रुकने का इंतजाम, खाने-पीने का इंतजाम सरकार को करना पड़ता है।

इस बार आशंका है कि यदि ऐसा कोई आयोजन होता है, तो उससे संक्रमण काबू होने की बजाय और बढ़ेगा। काँवड़ यात्रा में इकट्ठा हुई भीड़ में सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित करवा पाना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए, इस वर्ष धार्मिक गुरुओं की सलाह को देखते हुए इसे स्थगित करने का फैसला किया गया है।

चीन ने धोखे से हड़प लिया नेपाल का गाँव, बॉर्डर पोस्ट हटा दिए, तिब्बत का बना दिया हिस्सा

भारत के साथ कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा जैसे क्षेत्रों के लिए आपसी संबंध बिगाड़ने वाले नेपाल को लेकर खबर है कि उसके एक गाँव पर चीन ने कब्जा जमा लिया है। चीन ने नेपाल के गोरखा जिले के रुई गाँव पर कब्जा किया है। अब ये हिस्सा चीन के स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत के कब्जे में आ चुका है। मगर, नेपाल सरकार इस सच्चाई को बताने से गुरेज कर रही है।

रुई नामक इस गाँव को भले ही नेपाल अब भी अपने मैप में दर्शा रहा है, लेकिन ये पूर्ण रूप से चीन के कब्जे में है। चीन ने वहाँ अपना व्यापार स्थापित करने के लिए सभी सीमाओं को हटा दिया है।

न्यूज 24 की रिपोर्ट के अनुसार, रुई गाँव में केवल 72 घर हैं। लेकिन, नेपाल सरकार की घोर लापरवाही और उच्च अधिकारियों की उदासीनता की वजह से चीनियों ने घुसपैठ करते हुए इस पर कब्‍जा कर लिया। करीब 60 साल तक नेपाल सरकार के अधीन रहने वाले रुई गाँव के गोरखा अब चीन के दमनकारी शासन के अधीन हो गए। नेपाली अखबार अन्‍नपूर्णा पोस्‍ट के मुताबिक रुई गाँव वर्ष 2017 से तिब्‍बत के स्‍वायत्‍त क्षेत्र का हिस्‍सा है। 

भू-राजस्व कार्यालय गोरखा के अनुसार, कार्यालय के पास अभी भी रुई गाँव के निवासियों से एकत्र राजस्व का रिकॉर्ड है। रुई भोट क्षेत्रों के निवासियों द्वारा भुगतान किए गए राजस्व का विवरण भूमि राजस्व कार्यालय में अभी भी फ़ाइल संख्या एक में सुरक्षित है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भूमि राजस्व कार्यालय गोरखा के एक सहायक कर्मचारी ने बताया, “कार्यालय के रिकॉर्ड अनुभाग में अथारा साया खोले से रुई भोट तक के लोगों द्वारा प्रस्तुत राजस्व का रिकॉर्ड है।”

इतिहासकार रमेश धुंगल इस संबंध में कहते हैं कि रुई और तेइगा गाँव गोरखा जिले के उत्तरी भाग में थे। धुंगल के अनुसार, “रुई गाँव नेपाल का हिस्सा है। न तो नेपाल ने इसे युद्ध में खोया और न ही यह तिब्बत से संबंधित किसी विशेष समझौते या अनुबंध के अधीन था। पिलर को ठीक करने के समय में हुई लापरवाही के कारण नेपाल ने रुई और तेघा दोनों गाँव खो दिए।”

इसी प्रकार, चूमुबरी ग्रामीण नगर पालिका वार्ड नंबर 1 के वार्ड अध्यक्ष बीर बहादुर लामा दावे के साथ कहते हैं कि रुई गाँव सहित क्षेत्र गोरखा का हिस्सा था और वहाँ के निवासी नेपाल सरकार को राजस्व जमा करते थे, लेकिन अब वे तिब्बत के निवासी बन गए हैं।

उन्‍होंने कहा कि कुछ भ्रष्ट नेपाली अधिकारियों की सहमति से 35 नंबर पिलर को समदो और रुई गाँव के बीच की सीमा तय कर दिया गया। इससे पूरा गाँव चीनी नियंत्रण में आ गया। साम गाँव, सामडो और रुई की भाषा, संस्कृति और परंपराएँ एक जैसी हैं और प्रार्थना की जगह भी एक ही है।

लामा कहते हैं, “कई लोग तिब्बत में शामिल नहीं होना चाहते थे और इसके बजाय समडो भाग गए। उनके पास ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दस्तावेज थे जो 1000-1200 वर्ष पुराने थे। उन्होंने यहाँ अपने पूजा स्थल बनाए। पवित्र स्थलों में अभी भी मल्ल राजाओं के दो ऐतिहासिक देवताओं आदित्य मल्ल और पुण्य मल्ल के ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद हैं।”

वहीं, नेपाली इतिहासकार धुंगेल इस कब्जे को नेपाल सरकार की बड़ी लापरवाही मानते हैं। वे कहते हैं, “भारत की सीमा में आना-जाना बहुत आसान है। लोग इसके चारों ओर घूमते हैं। इसलिए भारत के साथ सीमा के मुद्दे सभी को दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उत्तरी सीमा में तिब्बत की सीमा से लगे इलाके में नेपाल का हाल बहुत ही खराब है।”

गौरतलब है कि पिछले महीने लिपुलेख से धारचूला तक सड़क का उद्घाटन होने के बाद से नेपाल दावे कर रहा है कि कालापानी क्षेत्र (पिथौरागढ़ जिला) पर नेपाल का ‘निर्विवाद रूप से’ हक है। इसके मद्देनजर उसने नया नक्शा भी पास कर दिया। लेकिन, नेपाल के इस कदम के पीछे भी पिछले दिनों चीन कनेक्शन निकलकर सामने आया था।

दरअसल, खुफिया एजेंसियों को मालूम चला था कि नेपाल में चीन की युवा राजदूत होऊ यांगी ने इसमें अहम भूमिका निभाई और भारत के खिलाफ बड़ा कदम उठाने के लिए प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को तैयार किया। इसी के बाद ओली ने ऐसी रूपरेखा तैयार की और राष्ट्रीय मानचित्र के विस्तार के इस प्रस्ताव पर विपक्षी नेपाली कॉन्ग्रेस भी सरकार के साथ आ गई।

सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या पर सलमान के बाद अरबाज खान का ट्वीट, लिखा – ‘खाली दिमाग, शैतान का घर’

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या को लेकर बॉलीवुड कलाकर सलमान खान द्वारा किए गए ट्वीट के बाद अरबाज खान ने भी एक ट्वीट किया है। इसमें अरबाज खान ने लिखा है, “खाली दिमाग, शैतान का घर।” इस ट्वीट के बाद अरबाज खान सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो रहे हैं।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से ही उनके प्रशंसक सलमान खान और खान फैमिली पर फिल्म इंडस्ट्री में भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देने का आरोप लग रहे हैं।

सोशल मीडिया पर सलमान की हो रही तीखी आलोचना को लेकर उनके अभिनेता भाई अरबाज खान ने एक ट्विट करते हुए लिखा, “खाली दिमाग शैतान का घर है। यह अंग्रेजी कहावत हमने स्कूल में पढ़ी थी। मैं तब इसका गहरा अर्थ समझने के लिए बहुत छोटा था, लेकिन आज हमारे चारों तरफ जो कुछ भी हो रहा है, उसे देखते हुए, अब यह पुरानी कहावत अब पूरी तरह से समझ में आ रही है।”

अरबाज खान द्वारा किया गया ट्वीट

इससे पहले शनिवार (20 जून, 2020) को फिल्म अभिनेता सलमान खान ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर ट्वीट के जरिए अपने प्रशंसकों से अनुरोध किया था कि वे उनके खिलाफ जारी नाराजगी के बीच खुद को शांत रखें।

दरअसल निर्देशक अभिनव कश्यप ने एक पोस्ट के माध्यम से अरबाज खान को निशाना बनाया था। साथ ही अभिनव कश्यप ने आरोप लगाया था कि सलमान खान और उनके परिवार ने उन्हें धमकाया है और फिल्म इंडस्ट्री के दबाव का उपयोग कर उनके करियर के साथ छेड़छाड़ की है। उन्होने आरोप लगाते हुए कहा था कि 2010 की फिल्म दबंग के निर्देशन के बाद सलमान खान और उनके भाइयों ने उनके कई प्रोजेक्ट्स के साथ छेड़छाड़ की थी।

उन्होंने दावा करते हुए कहा था, “दस साल पहले मैं ‘दबंग 2’ बनाने से दूर इसलिए हुआ था क्योंकि अरबाज खान और सोहेल खान अपने परिवार की मिलीभगत से मुझे धमका रहे थे और मेरे करियर को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे थे। अरबाज खान ने श्री अष्टविनायक फिल्म्स के साथ मेरे दूसरे प्रोजेक्ट में भी छेड़छाड़ की थी।”

अभिनव कश्यप ने यह भी आरोप लगाया था कि राज मेहता को फोन करके उनके साथ (अभिनव) फिल्म बनाने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई थी। इतना ही नहीं, इसके बाद अभिनव कश्यप को श्री अष्टविनायक फिल्म को साइनिंग अमाउंट लौटानी पड़ी और ऐसा उनके साथ वायकॉम पिक्चर्स के साथ भी हुआ था।

आपको बता दें कि पिछले रविवार (14 जून, 2020) को बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने मुंबई स्थित अपने आवास पर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद से सुशांत की मौत को लेकर फिल्म इंडस्ट्री के लोग एक दूसरे को उनकी मौत का जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

सरकार के ‘अतुल्य भारत’ में इरा त्रिवेदी: गोमांस को प्रोटीन का सस्ता स्रोत बताने के बाद दूरदर्शन ने कर दी थी छुट्टी

पर्यटन को बढ़ावा देने वाले भारत सरकार के अभियान अतुल्य भारत ने अपने एक वेबिनार में विवादित योग शिक्षिका इरा त्रिवेदी को मंच प्रदान किया। ये वही इरा त्रिवेदी हैं, जिन्होंने पिछले साल हिन्दू धर्म पर विवादित बयान दिया था। इसके बाद दूरदर्शन ने उन्हें शो से निकाल दिया था। 

इरा के विवादित बयान का विरोध ना सिर्फ दर्शकों ने किया था, बल्कि डीडी के पत्रकार तक ने इरा को होस्ट के रूप में चुनने को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए थे। उनका कहना था कि योग सिखाने वाले गुरुओं की कमी नहीं है, फिर भी दूरदर्शन ने योग के कार्यक्रम के लिए इरा त्रिवेदी जैसी विवादित शख्सियत को क्यों चुना, जिन्हें प्रोटीन की कमी दूर करने के लिए गोमांस का भक्षण जरूरी लगता है?

अब एक बार फिर से भारत सरकार के प्लेटफॉर्म पर इरा त्रिवेदी को जगह दिए जाने और प्रमोट किए जाने से लोग काफी आक्रोशित नजर आ रहे हैं। वे उस अधिकारी को भी बर्खास्त करने की माँग कर रहे हैं जिन्होंने इरा के बारे में सब कुछ जानने के बावजूद उनके नाम को मँजूरी।

सरकार ने क्या सोचकर ये कदम उठाया है, ये तो नहीं कहा जा सकता है। लेकिन लोगों के सवाल भी नजरअंदाज नहीं किए जा सकते। लोगों का कहना है कि क्या योग सिखाने वालों की इतनी कमी हो गई है कि हमें हिंदू से घृणा करने वाले को योग शिक्षक के रूप में अपनाना पड़े।

लोगों का कहना है कि इरा त्रिवेदी जैसे हिन्दू विरोधी को सरकार द्वारा प्रमोट करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे पार्टी के समर्थकों को भी गहरा आघात पहुँचा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माँग की है कि संबंधित मंत्रालय के मंत्री एवं उनके अफसरों को तत्काल प्रभाव से पदच्युत किया जाए।

बता दें कि इरा त्रिवेदी ने हिन्दू धर्म की तुलना इस्लाम से करते हुए हिन्दू धर्म को पिछड़ा और इस्लाम के धर्मग्रंथ कुरान को प्रोग्रेसिव बताया था। सीएनएन न्यूज 18 के साथ उनका 2017 का इंटरव्यू सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में, वह गोमांस (बीफ) को प्रोटीन का सबसे सस्ता स्रोत बताती हैं। उनके अनुसार गोमांस कुपोषित लोगों के लिए प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसलिए गोमांस पर प्रतिबंध लगाना अनुचित होगा, विशेष तौर पर मुस्लिम समुदाय के लिए।

वीडियो वायरल होने के बाद, इरा के पिछले ट्वीट्स के कई स्क्रीनशॉट भी काफी तेजी से शेयर होने लगे। इसमें इरा हिन्दू धर्म की तुलना इस्लाम से करते हुए आधुनिक हिन्दू धर्म को पिछड़ा और इस्लाम के मजहबी ग्रंथ कुरान को प्रोग्रेसिव बताती हैं। विवाद बढ़ता देख दूरदर्शन ने उनको शो से निकाल दिया था और उनकी जगह यामिनी मुथाना को इस शो की जिम्मेदारी दी गई।

मामले को बढ़ता देख इरा त्रिवेदी ने फिर एक ट्वीट किया जिसमें वह अपनी बात से पलटती और माफी भी माँगती नज़र आई। उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म उनके दिल में है। बाद में इरा ने अपना ट्विटर अकाउंट भी डिलीट कर लिया।

अब जब सरकार ने एक बार फिर से सरकारी प्लेटफॉर्म से इरा को प्रमोट करना शुरू किया तो लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया और सरकार को घेरने लगे। सवाल उठाया गया कि सरकार कैसे एक बार फिर से ऐसे हिंदू विरोधी मानसिकता वाले लोगों के साथ काम करने के लिए तैयार हुई।

गौरतलब है कि इससे पहले भी सरकार ‘द वायर’ के संस्थापक एस वरदराजन की पत्नी नंदिनी सुंदर को शिक्षा समिति में शामिल करने को लेकर सवालों के घेरे में आ गई थी। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने उन्हें सामाजिक विज्ञान पाठ्य पुस्तक कक्षा IX पाठ्यक्रम के लिए 2020-21 का सदस्य नियुक्त किया है। बता दें कि नंदिनी हत्या की आरोपित हैं। ऐसे में उन्हें शिक्षा समिति में शामिल करना सवाल खड़े करता है। 

चीन मामले में मोदी सरकार में पूरी आस्था, विपक्ष दिखाए परिपक्वता: मनमोहन के बयान के बाद मायावती की दो टूक

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भारत-चीन सीमा तनाव मामले में केंद्र की मोदी सरकार पर पूर्ण आस्था जताई है। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो ने कहा कि अभी हाल ही में 15 जून को लद्दाख में चीनी सेना के साथ हुए संघर्ष में कर्नल सहित 20 सैनिकों की मौत से पूरा देश काफी दुखी, चिन्तित व आक्रोशित है।

उन्होंने इसके निदान हेतु सरकार व विपक्ष दोनों को पूरी परिपक्वता व एकजुटता के साथ काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि काम ऐसा हो जो देश-दुनिया को दिखे व प्रभावी सिद्ध हो।

मायावती द्वारा विपक्ष को परिपक्वता से काम करने की सलाह देने के कई मायने निकाले जा रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि ऐसे कठिन व चुनौती भरे समय में भारत सरकार की अगली कार्रवाई के सम्बन्ध में लोगों व विशषज्ञों की राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन मूल रूप से यह केंद्र सरकार पर ही छोड़ देना बेहतर है कि वह देशहित व सीमा की रक्षा हर हाल में करे, जो कि हर सरकार का दायित्व भी है।

इससे पहले भी मायवती ने गलवान घाटी संघर्ष में वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा था कि देश की आन, बान व शान के लिए चीनी सेना के साथ संघर्ष में अपने प्राण की आहुति देने वाले 20 वीर सैनिकों के घरों में मातम के दृश्य काफी हृदयविदारक हैं।

उन्होंने कहा था कि जवानों ने अपना कर्तव्य ऐसा निभाया है जिस पर परिवार व देश को गर्व है। साथ ही देश को उन जवानों पर गर्व होने की भी बात कही थी। उन्होंने कहा था:

“पीएम का यह कहना कि ’वे मारते-मारते मरे हैं’, उनकी वीरता व शहादत को पूरे देश की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि है लेकिन यह काफी नहीं है। अब केन्द्र व राज्य सरकारों का खास दायित्व बनता है कि वे उनके परिवारों को 3 माह के भीतर ही सभी मदद व परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी जरूर दे। भारत सरकार दोनों देशों के बीच सीमा विवाद व तनाव को कम करने में प्रयासरत है। सरकार को अब अत्यधिक सतर्क व सूझबूझ से देशहित में कदम उठाने की जरूरत है।”

हालाँकि, मायावती ने विश्वास जताया था कि भारत सरकार देश की आन, बान व शान के हिसाब से सही समय पर सही फैसला लेगी व देश का एक इंच जमीन भी किसी को कभी हड़पने नहीं देगी। उन्होंने कहा था कि सरकार की कमियों को भुलाकर ऐसे नाजुक समय में पूरा देश एकजुट है। अब सरकार को जनता की उम्मीद पर खरा उतरना है। मायावती ने इस मामले में बाकी विपक्षी नेताओं से अलग रुख अख्तियार किया है।

बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि भ्रामक प्रचार कभी भी कूटनीति और मजबूत नेतृत्व का विकल्प नहीं बन सकता है। उन्होंने कहा कि आज हम इतिहास के एक ऐसे नाजुक मोड़ पर खड़े हैं, जब हमारी सरकार के फ़ैसलों व उठाए गए कदम ये तय करेंगे कि भविष्य की पीढ़ियाँ हमारे बारे में क्या सोचेंगी। उन्होंने देश के नेतृत्वकर्ताओं को दायित्व निभाने की सलाह दी।

चीन मुद्दे पर डॉक्टर मनमोहन सिंह का बयान

पूर्व पीएम ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में इन कर्तव्यों के निर्वहन का दायित्व देश के प्रधानमंत्री पर है। उन्होंने प्रधानमंत्री को अपने शब्दों और सम्बोधनों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ‘पिछलग्गू सहयोगी’ झूठ प्रचारित कर आडम्बरों से सच्चाई को दबाना चाहते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री के बयान का देश के हित पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

बता दें कि इधर भारत सरकार ने सीमा पर तैनात भारतीय सेना को अपने हिसाब से कार्रवाई करने की खुली छूट दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ हुई बैठक में सरकार ने LAC के नियमों में बदलाव किया और सेना के फील्ड कमांडरों को यह अधिकार दिया कि वह परिस्थितियों में जवानों को हथियार के इस्तेमाल की आजादी दे सकते हैं। सरकार ने हथियार और गोला बारूद खरीदने के लिए सेना के तीनों अंगों को 500 करोड़ रुपए तक की प्रति खरीद परियोजना की आपात वित्तीय शक्तियाँ दी हैं।

तिरंगा झंडा जलाते हुए देश-विरोधी नारे के साथ TikTok वीडियो, समुदाय विशेष का मामला होने के कारण तनाव

लखनऊ के बाजारखाला में कुछ लड़कों द्वारा तिरंगा झंडा जलाते हुए टिक-टॉक (TikTok) वीडियो बनाने का मामला सामने आया है। बताया गया है कि ये चारों रविवार (जून 21, 2020) की देर शाम वीडियो बनाते हुए देश के राष्ट्रीय ध्वज को जला रहे थे और जब लोगों ने इसका विरोध किया तो उन्होंने उलटा लोगों पर ही हमला कर दिया।

चारों आरोपित तिरंगा झंडा जलाने के साथ-साथ देश विरोधी नारेबाजी भी कर रहे थे। वहाँ से गुजर रहे दो सजग नागरिकों ने इस कृत्य का विरोध किया। इस पर चारों उग्र हो गए और उन्होंने विरोध करने वाले दोनों युवकों पर हमला बोल दिया। जब वहाँ से गुजर रहे कुछ अन्य लोगों ने इस घटना को देखा तो उन्होंने बीच-बचाव किया।

इस दौरान लोगों ने एक आरोपित को खदेड़ कर पकड़ लिया। उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। चूँकि आरोपित नाबालिग है, उसे बाल सुधार गृह में भेज दिया गया है। उसके तीन साथी भागने में कामयाब रहे हैं। वो अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश पुलिस कर रही है।

‘हिंदुस्तान’ की ख़बर के अनुसार, बाजारखाला इंस्पेक्टर ने जानकारी देते हुए बताया कि राजाजीपुरम निवासी रविकांत शाम को टिकैत राय तालाब कॉलोनी के अंदर साइकलिंग कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि चार लड़के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे झंडे को जला रहे हैं।

रविकांत ने इन लोगों को ऐसा करने से मना किया तो वे लोग मारपीट पर उतर आए। इसी समय रूपेश गुप्ता नामक सजग नागरिक रविकांत की मदद के लिए आगे आए लेकिन बदमाशों ने उन पर भी हमला बोल दिया।

फिर कुछ और लोगों की मदद से एक आरोपित को पकड़ कर पुलिस के हवाले किया गया। आरोपित की उम्र 15 साल है। सभी बदमाशों का इरादा था कि वो टिक-टॉक पर तिरंगा झंडा जलाते हुए वीडियो बना कर वायरल करें

इस घटना के बाद कई स्थानीय नेता आरोपित को छुड़ाने थाने भी पहुँचे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि आरोपित समाजवादी पार्टी के एक पूर्व नेता का भतीजा है। लेकिन, ऑपइंडिया से बातचीत में पुलिस ने इस बात को नकार दिया। रविकांत की शिकायत के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।

आरोपित के पकड़े जाने के बाद इलाक़े में तनाव भड़क गया था क्योंकि मामला दो समुदायों के बीच का बना दिया गया था। इसको ध्यान में रखते हुए पुलिस ने सांप्रदायिक तनाव रोकने के लिए व्यवस्था की। वहाँ अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी। ‘न्यूज़ 18’ के अनुसार, इंस्पेक्टर बृजेन्द्र सिंह ने बताया कि तीनों फरार आरोपितों के बारे में पुलिस को जानकारी मिल गई है और उनकी तलाश तेज़ कर दी गई है।

पुलिस ने आईपीसी की धारा 124(A), 153(A), 504, 505(1)(B)(2), 352, 325, 506 और राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम 2 के तहत मामला दर्ज किया है। काफ़ी तादाद में थाने पहुँचे समुदाय विशेष के लोगों ने पुलिस पर दबाव बनाया कि वो आरोपित को छोड़ दें। उक्त नाबालिग आरोपित ने ही पूछताछ के दौरान पुलिस को अपने तीन अन्य साथियों के बारे में सूचना दी।

TikTok तिरंगा वीडियो मामले के आरोपित का सपा नेता से कोई रिश्ता नहीं: पुलिस

जब ऑपइंडिया ने पुलिस से बात की तो उन्होंने बताया कि गिरफ़्तार आरोपित का समाजवादी पार्टी के किसी नेता से कोई ताल्लुक नहीं है। पुलिस ने ऑपइंडिया से बात करते हुए उन मीडिया रिपोर्ट्स को नकार दिया, जिसमें आरोपित को समाजवादी पार्टी के नेता का भतीजा या रिश्तेदार बताया जा रहा था। हालाँकि, पुलिस ने अन्य आरोपितों के नामों का भी खुलासा नहीं किया है।

हाल ही में TikTok का इस्तेमाल इस्लामी और देशविरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए किए जाने के कई मामले सामने आए हैं। जिस तरह से यहाँ कामोत्तेजक वीडियो, अश्लील हरकतें, सेक्सिज्म, नारीद्वेष, पोर्न, किसी अन्य के कंटेंट का दुरूपयोग, मजहबी कट्टरता, झूठी सूचनाओं और घरेलू हिंसा को बढ़ावा दिया जाता है, कई लोगों ने इसे बैन करने की भी माँग की है। लोगों ने इसकी रेटिंग भी गिराई थी, जिससे गूगल ने रिस्टोर कर दिया था।

‘तू कौन होता है मास्क पहनाने वाला’: शराब तस्कर के साथ मिल कॉन्ग्रेस नेता के भाइयों ने हवलदार को पीटा

पंजाब के पटियाला के त्रिपड़ी इलाके में लॉकडाउन के दौरान सड़क पर बिना मास्क घूमने वाले युवकों को टोकने पर एक हवलदार से मारपीट का मामला सामने आया है। आरोपितों में से दो की पहचान एक कॉन्ग्रेस नेता के भाई के रूप में हुई है। इनके साथ तीसरा शख्स शराब तस्कर था। पुलिस ने सभी आरोपितों के ख़िलाफ़ केस दर्ज कर लिया है।

हवलदार का कहना है कि जब उन्होंने बिना मास्क के गाड़ी में घूमते हुए युवकों को रोका, तो उन्होंने उनके साथ ही बदसलूकी शुरू कर दी। युवक हवलदार से ही पूछने लगे- तू कौन होता है मास्क पहनाने वाला।

इस घटना के बाद हवलदार शेर सिंह ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि वह पीसीआर विंग के ASI अजीत सिंह व दलीप सिंह के साथ त्रिपड़ी स्थित गुरु नानक नगर चौक पर लोगों को मास्क पहनने के लिए जागरूक कर रहे थे।

इसी दौरान कार में बिना मास्क लगाए तीन युवक वहाँ पहुँचे। हवलदार की नजर उनपर पड़ी तो उन्होंने तीनों युवकों से मास्क न पहनने व लॉकडाउन में बाहर घूमने की वजह पूछी। लेकिन जवाब देने की बजाय वो तीनों भड़क गए और बोले, मास्क पूछने का अधिकार हवलदार को नहीं है।

जब हवलदार शेर सिंह ने इस घटना का वीडियो बनान शुरू किया तो युवकों ने अपने साथी को फोन करके बुला लिया। बाद में युवकों ने हवलदार के साथ गाली-गलौच करके उससे मारपीट की। पर, जैसे ही लोगों ने इलाके में इकट्ठा होना शुरू किया वे सभी कार में भाग गए।

पड़ताल में आरोपितों की पहचान मनी, गिफ्टी, रिक्की व नानू के रूप में हुई। इनमें से रिक्की पर शराब तस्करी का केस दर्ज है। मनी और गिफ्टी पटियाला टू व्यापार मंडल के प्रधान गुरजीत सिंह बंटी के भाई हैं।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार, घायल हवलदार को इस घटना के बाद अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहाँ उनपर समझौते का दबाव बनाया जाने लगा। बाद में वे छुट्टी लेकर अस्पताल से चले गए और अपनी शिकायत दर्ज करवा दी। अभी तक किसी आरोपित के गिरफ्तार होने की सूचना नहीं है।

रिपोर्ट के मुताबिक, थाना त्रिपड़ी के इंचार्ज हरजिंदर सिंह ढिल्लों ने कहा है कि आरोपितों ने ड्यूटी पर तैनात कर्मियों पर हमला किया था। एक आरोपित के खिलाफ शराब तस्करी का मामला त्रिपड़ी थाने में ही दर्ज है, जबकि दो आरोपित कॉन्ग्रेस नेता के भाई हैं।

गौरतलब है कि लॉकडाउन के पहले चरण से ही पुलिस पर हमले की बहुत खबरें आ चुकी हैं। लेकिन अब पटियाला का ये मामला बिलकुल नया है। जिससे पता चलता है कि लंबे समय से स्थिति को जानने समझने के बाद भी कुछ लोगों को अभी समझ नहीं आया कि कोरोना काल में क्या सावधानियाँ बरतनी हैं और कैसे उन लोगों का सम्मान करना है जो हमारी सुरक्षा के लिए कोरोना वॉरियर्स के रूप में तैनात किए गए हैं।

जिस सांसद ने किया ईसाई धर्मान्तरण का खुलासा, उसे अपनी ही पार्टी से मिल रही जान से मारने की धमकी

आंध्र प्रदेश में धर्मान्तरण में लिप्त ईसाई मिशनरियों की पोल खोलने वाले सांसद ने अपनी पार्टी से अपनी जान को ख़तरा बताया है। वहाँ की सत्ताधारी वाईएससीआरपी (YSRCP) के नेता ने कहा कि उन्हें अपनी ही पार्टी से जान का ख़तरा है। रघुराम कृष्णम राजू नर्सापुरम से सांसद हैं। उन्होंने अंदेशा जताया है कि उनकी अपनी ही पार्टी YSRCP के नेता और कार्यकर्ता उन्हें जान से मारना चाहते है। बता दें कि जगन रेड्डी की सरकार पर ईसाई तुष्टिकरण के आरोप लगते रहे हैं।

रघुराम कृष्णम राजू ने लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला को एक याचिका देकर सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा है कि उन्हें केंद्रीय बलों के द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाए क्योंकि उनकी अपनी ही पार्टी के विधायक और समर्थक लगातार जान से मार डालने की धमकी दे रहे हैं। रघुराम कृष्णम राजू पिछले कुछ दिनों से आंध्र प्रदेश में अपनी ही पार्टी की सरकार की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार और स्थानीय पुलिस-प्रशासन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहा है, इसीलिए वो केंद्रीय सुरक्षा के लिए निवेदन कर रहे हैं।

रघुराम कृष्णम राजू उद्योगपति भी हैं, जिन्होंने बाद में राजनीति का रुख कर लिया। हाल ही में जब तिरुपति तिरुमला देवस्थानम बोर्ड ने मंदिर की संपत्ति को नीलाम करने का निर्णय लिया था, तब उन्होंने हिन्दुओं की भावनाओं को देखते हुए इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी। हाउस-साइट डिस्ट्रीब्यूशन और बालू बेचने में हुए भ्रष्टाचार को लेकर भी उन्होंने मंदिर प्रशासन पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद उनकी अपनी ही पार्टी विधायकों के साथ तू-तू-मैं-मैं हुई थी।

उन्होंने आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस ने आरोपितों के ख़िलाफ़ कोई एक्शन नहीं लिया, इसीलिए उन्हें मजबूरन लोकसभाध्यक्ष से गुहार लगानी पड़ी। उनका आरोप है कि एक विधायक ने तो उन्हें गन्दी-गन्दी गालियाँ भी दीं। उन्होंने वाईएसआरसीपी कैडर पर भी उन्हें धमकी देने का आरोप लगाया है। रघुराम कृष्णम राजू का कहना है कि चुनाव भी उन्होंने अपने ही दम पर जीता है, इसमें जगन मोहन रेड्डी के चेहरे का कोई योगदान नहीं है।

बता दें कि रघुराम कृष्णम राजू पहले भाजपा में थे। इसके बाद चुनाव आते ही उन्होंने वाईएसआरसीपी (YSRCP) का दामन थाम लिया था। उससे पहले वो चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी में भी रहे थे। वाईएसआरसीपी पार्टी के टिकट पर ही वो सांसद भी चुने गए थे। उनके आरोपों को लेकर पार्टी ने कोई जवाब नहीं दिया है। लोकसभाध्यक्ष की तरफ से फ़िलहाल किसी प्रकार का एक्शन लिए जाने की सूचना नहीं है।

बता दें कि एक न्यूज़ डिबेट में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी के सांसद खुलेआम ऑन एयर शो पर ये बोलते नजर आए थे कि यदि मिशनरी के लोग धर्मांतरण करवा रहे हैं, तो उसमें वो क्या कर सकते हैं। YSRCP के सांसद रघुराम कृष्णा राजू ने इस बात को ऑन एयर शो में माना था कि आंध्र प्रदेश में धर्मांतरण की प्रक्रिया तेजी से चालू है। लेकिन वह ये भी कहते नजर आए थे कि इसमें सरकार का कोई हाथ नहीं है।

इसके बाद उन्होंने कहा था, “रिकॉर्ड के अनुसार हमारे राज्य में ईसाइयों का प्रतिशत 2.5% से कम है, लेकिन वास्तव में यह 25% से कम नहीं होगा।” YSRCP नेता ने बताया था कि कुछ लोग ऐसे वर्ग से आते हैं, जिन्हें पहले से ही फायदा मिल रहा होता है। ऐसे में यदि वो ईसाई धर्म अपना लेते हैं, तो उन्हें वो फायदा मिलना बंद हो जाता है। यही कारण है कि लोग धर्मांतरण करते हैं, मगर उसका पंजीकरण नहीं करवाते।