Home Blog Page 4748

शाहरुख ने बीच बाजार नैना कौर को 10 बार चाकू मारा, 5 दिन बाद होनी थी शादी

गाजियाबाद के तुलसी निकेतन में शेर खान (Sheru Khan) उर्फ शाहरुख ने बीच बाजार 19 वर्षीय नैना कौर की चाकुओं से गोदकर की हत्या कर दी। वह नैना की शादी कहीं और तय होने से नाराज था और कई बार उनके घर आकर धमकी भी दे गया था।

बुधवार (जून 17, 2020) को ग़ाज़ियाबाद के टीला मोड़ थाना क्षेत्र में नैना कौर जब अपने घर लौट रही थी, तभी उन्हें करीब 10 बार चाकू मारने के बाद शाहरुख उर्फ़ शेर खान (Sheru Khan) अपने दोनों दोस्तों के साथ चाकू लहराता हुआ पैदल ही दिल्ली-वजीराबाद रोड की तरफ भाग गया। उसे दिल्ली के एक अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसने बृहस्पतिवार (जून 18, 2020) सुबह दम तोड़ दिया।

पुलिस ने कहा कि मृतक नैना कौर, अपने माता-पिता बलदेव सिंह (62) और नीलम कौर (58) के साथ तुलसी निकेतन के विवेक विहार कॉलोनी में रहती थी। उसकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। पिछले साल राजधानी के एक स्कूल से इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद नैना दिल्ली में नर्सिंग का कोर्स कर रही थी। नैना की शादी आने वाले 22 जून को इंदौर में होने वाली थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतक नैना कौर के पिता बलदेव सिंह ने कहा, “मैं केवल 50 मीटर दूर ही गया था, जब तीन लोग बाइक पर आए। उनमें से एक ने अपने चेहरे को नकाब में ढक रखा था, उसने नैना के हाथ खींच लिए और उसे खींच लिया।”

नैना के पिता का कहना है कि नैना पर अचानक हुए इस हमले को समझते ही उसकी माँ ने इसका विरोध किया तो आरोपित ने उन्हें धक्का देकर नीचे गिर दिया।

बलदेव सिंह ने कहा, “उन लोगों में से एक ने मुझे अपनी पत्नी और बेटी तक पहुँचने नहीं दिया। जब नैना ने अपनी माँ को सड़क पर पड़ा देखा, तो वह उठ गई और उसने आरोपित को कई थप्पड़ मारे। अचानक, उसने चाकू से नैना पर हमला कर दिया। पहले गर्दन, पेट और फिर शरीर के अन्य हिस्सों पर। इसके बाद वह बाइक पर दो अन्य लोगों के साथ भाग गया।”

पुलिस के अनुसार, हाथापाई के दौरान नैना की माँ ने इस हत्या के मुख्य आरोपित का नकाब फाड़ दिया और उसकी पहचान दिल्ली के सुंदर नगरी निवासी शेर खान उर्फ शाहरुख (22) के रूप में की। नैना के परिवार वालों का कहना है कि वह नैना को करीब दो वर्ष से जानता था।

दोनों दिल्ली के दुर्गापुरी में एक साथ कंप्यूटर की पढ़ाई कर चुके हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी की हत्या का आरोपित शेर खान अक्सर उनकी बेटी को परेशान करता था और उससे शादी करना चाहता था। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह पूर्व भी वह युवक उनके घर आकर नैना को धमका चुका था।

मृतक नैना कौर के पिता ने कहा कि बाजार में उस समय मौजूद लोग यह सब देखते रहे और कोई भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। आरोपित शेर खान टिकटॉक पर वीडियो भी बनाता है, जहाँ उसने अपने कई सारे वीडियो भी बनाकर पोस्ट किए हैं।

पुलिस का कहना है कि शेर खान का पकड़ा जाना अभी बाकी है, जबकि उसके दो साथियों, आसिफ (22) और आमिर चौधरी (20) को गिरफ्तार कर लिया गया था। आमिर भी सुंदर नगरी में रहता है जबकि आसिफ साहिबाबाद का रहने वाला है।

मृतक नैना कौर के पिता बलदेव की एक शिकायत के आधार पर इन तीनों लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या की सजा) के तहत मामला दर्ज किया गया है। मृतक नैना कौर की पोस्टमॉर्टम रिपोर्टआनी अभी बाकी है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार नैना को जिस जगह चाकू से गोदा गया वह तुलसी निकेतन पुलिस चौकी से महज दो सौ मीटर दूर है। शाहरुख पर पुलिस ने 20 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। उसे पकड़ने के लिए दो टीमें लगाई गई है।

‘स्क्रॉल’ पत्रकार सुप्र‌िया शर्मा के खिलाफ वाराणसी में FIR, ‘भुखमरी’ को लेकर प्रकाशित की थी फ़ेक न्यूज़

फ़ेक न्यूज़ प्रकाशित करने के लिए वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘स्‍क्रॉल’ की संपादक ( Executive editor) सुप्र‌िया शर्मा के ‌खिलाफ उत्तर प्रदेश में FIR दर्ज कराई गई है। सुप्रिया के ख़िलाफ़ अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC / ST act) के तहत FIR दर्ज की गई है। वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट स्क्रॉल की संपादक सुप्रिया शर्मा ने कोरोना वायरस के दौरान जारी लॉकडाउन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के एक गाँव की एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

सुप्रिया शर्मा के खिलाफ यह एफ़आईआर वाराणसी के रामनगर पुलिस स्टेशन में 13 जून को दर्ज की गई है। एफ़आईआर के मुताबिक़, पुलिस ने सुप्रिया के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 501 (मानहानिकारक मामलों का प्रकाशन) और 269 (बिमारी से संक्रमण फैलने की आशंका में बरती गई लापरवाही) के तहत भी मुक़दमा दर्ज किया है।

रामनगर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराने वाली माला देवी ने आरोप लगाया है कि पत्रकार सुप्र‌िया शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में उनके बयान को गलत तरीके से प्र‌‌काशित किया है और झूठे दावे किए हैं।

स्क्रॉल की संपादक द्वारा PM मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कोरोना वायरस को लेकर जारी लॉकडाउन के प्रभावों पर आधार‌ित एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई, जिसका शीर्षक था- “प्रधानमंत्री के गोद ल‌िए गाँव में लॉकडाउन के दौरान भूखे रह रहे लोग”

‘स्क्रॉल’ की संपादक सुप्रिया शर्मा ने डोमरी गाँव, जो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया है, में एक इंटरव्यू के दौरान वहाँ की रहने वाली माला के बारे में बताया था कि वह घरों में काम करती हैं और लॉकडाउन के दौरान उन्हें भोजन की किल्लत हो रही है और उनके पास राशन कार्ड भी नहीं है।

जबकि माला देवी द्वारा दायर की गई FIR में उन्होंने कहा है कि वह किसी के घर में काम नहीं करती हैं, और ‘स्क्रॉल’ की पत्रकार ने उनकी टिप्पणियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है।

शिकायतकर्ता माला देवी ने FIR में कहा है कि वह वाराणसी की नगरपालिका में ठेके पर सफाई कर्मी हैं, और उन्होंने लॉकडाउन के दौरान किसी भी संकट का सामना नहीं किया और उनके पास पर्याप्त भोजन भी उपलब्‍ध था।

माला ने कहा, “सुप्रिया शर्मा ने मुझसे लॉकडाउन के बारे में पूछा, मैंने उन्हें बताया कि न तो मुझे और न ही मेरे परिवार में किसी को कोई समस्या है।”

एफ़आईआर में माला देवी ने कहा है कि उन्हें और उनके बच्चों को भूखा बताकर सुप्रिया शर्मा ने उनकी गरीबी और जाति का मजाक उड़ाया है। साथ ही, उन्होंने समाज में उनकी भावनाओं और प्रतिष्ठा को भी चोट पहुँचाई है।

हालाँकि, इस FIR के बारे में ‘स्क्रॉल’ ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है कि यह FIR सिर्फ उन पर लॉकडाउन की खबरों को प्रकाशित करने की कीमत है और वह अभी भी इस रिपोर्ट के समर्थन में हैं।

J&K: पांपोर की मस्जिद में छिपे आतंकियों को सेना ने किया ढेर, 24 घंटे में जैश और हिजबुल के 8 आतंकी मारे गए

सुरक्षा बलों ने मस्जिद में छुपे 2 आतंकियों के साथ-साथ कुल 8 आतंकियों को ढेर कर दिया हैं। इन सभी का एनकाउंटर कश्मीर के अवंतीपोरा और शोपियाँ जिले में शुक्रवार (19 जून, 2020) को किया गया। जिसमें जवानों ने शोपियाँ में पाँच और पांपोर में तीन आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। ये सभी आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से थे।

गौरतलब है कि कश्मीरी में कई दिनों से सुरक्षा बलों के द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा हैं। उसी कड़ी में पुलिस को आतंकियों के छिपे होने के इनपुट मिलने के बाद, आर्मी की 44 आरआर और सीआरपीएफ ने द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया। जिसके बाद आतंकियों ने सुरक्षा बलों को देखते ही उनपर फायरिंग शुरू कर दी थी। इस पर जवानों ने उनका मुँहतोड़ जवाब देते हुए एक आंतकी को मार गिराया था।

वहीं दो आतंकियों ने अपने आप को बचाने के लिए मिज गाँव में स्थित जामा मस्जिद के अंदर छुप गए। धर्म स्थल का सम्मान करते हुए सुरक्षाबलों ने आतंकियों से सरेंडर करने को कहा, लेकिन वह नहीं माने। जिसके बाद मस्जिद को कोई नुकसान न पहुँचे इस बात का ध्यान रखते हुए सुरक्षाबलों ने फायरिंग या आईईडी का इस्तेमाल नहीं किया। बल्कि आँसू गैस के गोलों के जरिए शुक्रवार की सुबह स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के कमांडो मस्जिद के अंदर घुस गए हैं और दोनों आतंकियों को मार गिराया। और उनकी लाश को कब्जे में ले लिया।

मीडिया के पुलिस सूत्रों के अनुसार गुरुवार को हुई मुठभेड़ में भी एक आतंकी मारा गया था। जिसके बाद भी ऑपरेशन जारी था। सुरक्षाबलों का मानना है कि इस जगह पर कुछ और आतंकी छिपे हो सकते हैं। पूरे इलाके को घेर लिया गया है और सर्च ऑपरेशन अभी भी चलाया जा रहा है। शोपियाँ में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का एक्शन जारी है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने आतंकियों के मारे जाने की जानकारी दी थी। उन्होंने यह भी बताया कि इस ऑपरेशन में सुरक्षा कर्मियों को किसी भी प्रकार की क्षति नहीं पहुँची हैं। बाकी छुपे आतंकियों की तलाश की जा रही है। शोपियाँ के मुनंद में एक आतंकवादी मारा गया इसके साथ और आतंकवादियों के मारे जाने की उम्मीद है। इलाके में तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए अवंतीपोरा और शोपियाँ में इंटरनेट सेवा फिलहाल बंद रखी गई है। इस माह के दौरान शोपियाँ में यह पाँचवीं मुठभेड़ है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में कश्मीर के अनंतनाग में सुरक्षाबलों ने 13 जून को दो आंतवादियों को मार गिराया था। मारे गए दोनों आतंकवादी हिजबुल मुजाहिदीन के थे। उनके पास से गोला-बारूद, 2 पिस्तौल और 3 ग्रेनेड भी बरामद हुए थे। कश्मीर जोन के पुलिस ने यह बताया था कि कुलगाम के निपोरा में आतंकवादी छिपे हुए हैं। इसके बाद भारतीय सेना के जवानों ने स्थानीय पुलिसकर्मियों की मदद से इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान आतंकवादियों की ओर से गोली चलाई गई तो जवानों ने भी जवाबी फायरिंग की।

वहीं बुधवार (जून 10, 2020) को कश्मीर के शोपियाँ में सुरक्षाबलों ने 5 आतंकियों को मार गिराया था। पुलिस ने बताया था कि मारे गए आतंकी हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे।

इससे पहले 8 जून को शोपियाँ के पिंजूरा इलाके में हुई मुठभेड़ में 4 आतंकी मारे गए थे। उससे एक दिन पहले रेबेन इलाके में 5 आतंकियों को सुरक्षाबल ने ढेर किया था। कुल मिलाकर 24 घंटों में सुरक्षाबलों ने 9 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया था।

गौरतलब है कि सुरक्षाबलों के लिए शोपियाँ और पंपोर मुठभेड़ बड़ी कामयाबी है। पिछले दो हफ्ते के अंदर सुरक्षाबलों ने करीब दो दर्जन आतंकियों को ढेर कर दिया है। अगर पूरे साल की बात की जाए तो अब तक 100 से अधिक आतंकी मारे गए हैं। कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लागू के समय में भी सुरक्षाबलों का आतंकियों पर कड़ा प्रहार जारी है।

हमारी सरकार में इतनी क्षमता है कि आँखें निकालकर हाथ में दे दे: चीन पर PM मोदी की सर्वदलीय बैठक में शिवसेना

लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों और चीनी फौजियों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद सीमा पर तनाव का माहौल है। ऐसे में शुक्रवार (जून 19, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक की। बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई।

भारत-चीन मुद्दे पर हुई इस बैठक में सबसे पहले LAC पर वीरगति को प्राप्त होने वाले जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी दलों के नेताओं को लद्दाख में सेना की तैनाती और अन्य जानकारी दी। रक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया कि सेना मुस्तैदी के साथ गलवान में खड़ी है।

किस विपक्षी नेता ने क्या कहा?

ममता बनर्जी: इस बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पारदर्शिता की माँग की। उन्होंने कहा कि सीमा के हालात के बार में सरकार विपक्ष को समय-समय पर जानकारी दे। देश की अखंडता के लिए हम सरकार के साथ हैं। ममत बनर्जी ने सर्वदलीय बैठक को एकता के प्रदर्शन के लिहाज से अच्छा संदेश बताया और कहा कि यह दर्शाता है कि अपने जवानों के लिए हम सब एक हैं। टीएमसी सरकार के साथ खड़ी है।

NCP प्रमुख शरद पवार: एनसीपी नेता शरद पवार ने कहा, सैनिकों ने हथियार उठाए या नहीं इसका फैसला अंतरराष्ट्रीय समझौतों से होता है। हमें ऐसे संवेदनशील मामलों का सम्मान करने की जरूरत है।

उद्धव ठाकरे, शिवसेना: सर्वदलीय बैठक में शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी अपना मत रखा। उन्होंने कहा, “भारत शांति चाहता है। लेकिन इसका अभिप्राय ये बिलकुल नहीं है कि भारत कमजोर हैं। भारत मजबूत है, न कि मजबूर। हमारी सरकार में इतनी क्षमता है कि आँखें निकालकर हाथ में दे दे।”

उद्धव ठाकरे ने कहा, “हम सब एक हैं। ये हमारी भावना है। हम आपके साथ हैं प्रधानमंत्री। हम अपनी सेना और उनके परिवारों के साथ हैं।”

डीएमके नेता एमके स्टालिन: डीएमके नेता ने भी एकता के साथ खड़े होने का आश्वासन पीएम को दिया। उन्होंने कहा, “जब बात राष्ट्रवाद की हो, हम सब एक हैं।” स्टालिन ने इस बीच चीन पर दिए पीएम के बयान की तारीफ भी की।

कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी: कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कहा कि ये ऑल पार्टी मीटिंग पहले हो जानी चाहिए थी। आज इस अंतिम स्थिति में हम अंधकार में हैं। कॉन्ग्रेस के कुछ अलग से सवाल है। कॉन्ग्रेस ने पूछा, “चीनी सैनिकों ने किस तारीख को घुसपैठ की? सरकार ने अपराधों के बारे में कब पता लगाया? क्या सरकार को सैटेलाइट तस्वीरें नहीं मिली? क्या इंटेलीजेंस ने असामान्य गतिविधि के बारे में रिपोर्ट नहीं की थी।”

समाजवादी पार्टी नेता राम गोपाल यादव: सपा नेता ने कहा, “राष्ट्र एक है। पाकिस्तान और चीन की नीयत ठीक नहीं है। भारत, चीन का डंपिंग ग्राउंड नहीं हैं। चीनी सामानों पर 300% शुल्क लगाएँ।”

जेडीयू नेता नीतीश कुमार: बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा भारतीय बाजारों में चीन के सामानों की बाढ़ बड़ी समस्या है। उनकी प्लास्टिक भारी है। यह पर्यावरण के अनुकूल नहीं हैं और जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुँचाते हैं। इनसे जुड़ा इलेक्ट्रॉनिक कचरा भी अधिक होता है। चीनी उत्पाद लंबे समय तक नहीं चलते हैं। यह हमारा कर्तव्य है कि हम एक हों और केंद्र का समर्थन करें।

नीतीश कुमार ने कहा, “भारत चीन मामले पर पार्टियों को एकता का अभाव नहीं दिखाना चाहिए। जिसका दूसरे राष्ट्र को इंतजार हो। भारत पर चीन रुख ज्ञात हैं। भारत चीन को सम्मान देना चाहता था। लेकिन चीन ने 1962 में क्या किया। उन्होंने कहा कि देश में चीन के ख़िलाफ़ गुस्सा है। हमारे बीच कोई मतभेद नहीं होने चाहिए। हम एक साथ हैं।”

बीजेडी के पिनाकी मिश्रा: भारत-चीन सीमा मुद्दों पर पीएम के साथ सभी पार्टी की बैठक में बीजू जनता दल के पिनाकी मिश्रा ने अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि हम पूरी तरह से और बिना शर्त सरकार के साथ खड़े हैं।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सोनिया गाँधी, मायावती, ममता बनर्जी समेत 20 दलों के नेता शामिल हुए। AAP, AIMIM और RJD ने बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किए जाने की बात कही है। AIMIM ने इसपर अपनी नाराजगी जाहिर की और आरजेडी के कुछ नेताओं ने संसद में गाँधी स्टैच्यू के सामने अपना प्रदर्शन किया। इसके अलावा चिट्ठी लिखकर भी अपनी नाराजगी दिखाई।

इस बैठक में शामिल होने वाले नेताओं में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, शिवसेना नेता, महाराष्ट्र मुख्‍यमंत्री उद्धव ठाकरे, पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी, एमके स्टालिन, बिहार के सीएम नीतीश कुमार, मायावती, सीपीएम नेता सीताराम येचुरी प्रमुख हैं। बैठक से पहले विपक्षी पार्टी ने केंद्र सरकार से सीमा मामले पर हालातों को स्पष्ट बताने की माँग की थी। साथ ही यह सवाल भी पूछा था कि सरकार इस मामले को कैसे हैंडल कर रही है।

यहाँ बता दें कि चीन के साथ भारतीय सैनिकों की झड़प में भारत के 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे। चीन के भी 43 सैनिक इस झड़प में मारे जाने की खबर थी। ये सब उस समय हुआ जब सोमवार की रात वहाँ  डि-एस्केलेशन की प्रक्रिया जारी थी।

नेपाली सेना की वर्दी में पिथौरागढ़ सीमा पर दिखा चीनी दल, संदिग्ध दल को देखकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क

भारत चीन के हिंसक झड़प के बाद गर्बाधार से चीन सीमा लिपुलेख तक सड़क निर्माण के बाद नेपाल ने भी दार्चुला-टिंकर सड़क पर काम तेज कर दिया है। नेपाल ने दार्चुला-टिंकर सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इस निर्माण कार्य में नेपाल के नहीं बल्कि 30 चीनी इंजिनियर लगे हुए हैं। जिन्हें नेपाल ने नेपाली सैनिकों की वर्दी में सैनिक हेलीकॉप्टर के जरिए वहाँ पहुँचाया है और उसी से निर्माण कार्य में लगने वाले समान को भी मुहैया कराया जा रहा हैं।

भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प ने दोनों के संबंधों पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया हैं। वहीं चीन के बहकावे में आने के बाद भारत-नेपाल संबंधों में भी पिछले महीने से कड़वाहट आ गई हैं। भारत के लिम्पियाधुरा-लिपुलेख-कालापानी क्षेत्र को नेपाल द्वारा अपने नक्शे में दिखना कहीं न कहीं दो पड़ोसी देशों के आपसी संबंधों को खराब कर रहा हैं।

वहीं भारत ने जबसे पिथोरागढ़ से लिपुलेख तक सड़क का निर्माण किया है तबसे नेपाल और चीन दोनों परेशान हैं और उसके बाद नेपाल ने भी दार्चुला-टिंकर सड़क पर काम शुरू कर दिया था। पहाड़ काट कर लगभग 134 किमी लंबी सड़क को तैयार किया जाना है।

खबरों के अनुसार दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए नेपाल निर्माण निगम के विशेषज्ञों ने सड़क निर्माण करने को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए थे। वहीं चीन ने अपनी चाल चलते हुए इसपर एक बड़ा दाव खेला हैं।

दरअसल, बिगड़ते हालातों के देखते हुए अब वन बेल्ट व रोड परियोजना को लेकर चीनी कंपनी के विशेषज्ञों ने उत्तराखंड की पिथौरागढ़ सीमा से सटे क्षेत्र में नेपाली सेना का ड्रेस पहनकर यहाँ निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।

कोरोना महामारी की वजह से चीन नेपाल में भैरहवा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पोखरा एयरपोर्ट और काठमांडू के पशुपति इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विस्तार के साथ ही चार जल विद्युत परियोजनाओं पर चल रहा काम बंद हो गया था। जिसके बाद चीनी विशेषज्ञों ने अपने लोगों को भारत से लगते सीमावर्ती क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए लगा दिया।

बता दें गर्बाधार-लिपुलेख सड़क निर्माण के बाद नेपाल ने विरोध दर्ज कराकर दार्चुला-टिंकर सड़क मार्ग पर काम शुरू कर दिया था। इस निर्माण कार्य के चलते भारतीय क्षेत्र में अक्सर पालपा, लामारी, बूंदी और गब्र्यांग के स्थानीय लोगों का आना जाना लगा रहता है। वहाँ रहने वाले स्थानीय लोगों को सैनिकों के हावभाव- बोलचाल, उनके शारीरिक बनावट चीनी नागरिकों जैसी लगीं। जिसके बाद यह खबर आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में चीनी दल की उपस्थिति को गंभीरता से लिया हैं और वहाँ अतिरिक्त सेना बलों की तैनाती कर दी हैं।

नेपालियों को भारत के सामने खड़ा कर चीन उनकी आड़ में भारत से जुड़े सारे मुद्दों में दखल दे रहा हैं। जहाँ एक तरफ रेलवे लाइन का काम शुरू करवा दिया वहीं दूसरी और भारत से सटे प्रमुख मधेशी क्षेत्रों में सर्वे भी करा रहा हैं। जिसमें उसने भारतीय धारचूला-तवाघाट-गर्बाधार-लिपुलेख सड़क के समानान्तर नेपाल ने सदरमुकाम दार्चुला-सुनेसरा-घाटीबगड़- छांगरु-टिंकर चीन सीमा भज्यांग तक सड़क निर्माण की योजना तैयार किया है।

आपको बता दे इससे पहले भारत के बूंदी गाँव के बुदियालों की जमीन पर नेपाली सेना चार किमी तक बंद पैदल मार्ग खोलने में जुटी थी। भारत के बूंदी गाँव के सामने काली नदी पार नेपाल में पड़ता है। नक्शे में भारत के कालापानी क्षेत्र को अपना बताने वाले और सड़क और हुए तकरार के बाद नेपाल ने वहाँ पर नजर रखने के लिए छांगरू में सशस्त्र बल की तैनाती शुरू कर दी है। जिसके चलते अब सशस्त्र बल के साथ ही नेपाली सेना द्वारा पूरे क्षेत्र पर नजर रखा जाएगा।

गौरतलब है कि नेपाली सेना के प्रमुख जनरल पूर्ण चंद्र थापा ने खुद बुधवार को विवादित कालापानी क्षेत्र का दौरा किया था। मई में भारत के साथ सीमा विवाद के बाद पश्चिम प्रदेश क्षेत्र में उनकी यह पहली यात्रा थी। भारत द्वारा 8 मई को दार्चुला-लिपुलेख लिंक सड़क का उद्घाटन करने के बाद नेपाल ने पिछले महीने नेपाल सशस्त्र पुलिस बल द्वारा यहाँ पर एक चौकी स्थापित की है।

नेपाल सुरक्षा बलों ने की थी भारतीय नागरिक पर फायरिंग

उल्लेखनीय हैं कि नक्शे को लेकर हुए विवाद के कुछ दिन बाद ही बिहार के सीतामढ़ी जिले से सटे नेपाल सीमा पर नेपाली सुरक्षा बलों ने 15 राउंड फायरिंग की। जिसमें गाँव में खेत में काम कर रहे कुछ मजदूरों को गोली लगी थी। इसमें नागेश्वर राय के 25 वर्षीय पुत्र डिकेश कुमार की मौत हो गई थी। वहीं तीन लोग ज़ख्मी हो गए थे।

नक्शे पर विवाद

बता दें कि हाल ही में नेपाल ने 18 मई को नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था। इसमें कालापानी, लिपुलेख और लिमिपियाधुरा को अपने क्षेत्र के रूप में दिखाया था। नेपाल ने अपने नक़्शे में कुल 335 वर्ग किलोमीटर के इलाके को शामिल किया था। नेपाल सरकार द्वारा लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को अपने नए राजनीतिक नक़्शे में दिखाने पर भारत सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि देश के किसी क्षेत्र पर इस तरह के दावे को भारत द्वारा नहीं स्वीकार किया जाएगा। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि नेपाल सरकार ने जो आधिकारिक नक़्शा जारी किया है उसमें भारतीय क्षेत्र को नेपाल में दिखाया गया है, ये एकतरफ़ा हरकत ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित नहीं है। इसका भारत विरोध करता है।

चीन नहीं भाजपा है देश का असली दुश्मन: 20 बलिदान के बाद भी पूर्व एमनेस्टी इंडिया चीफ आकार पटेल का बयान

आकार पटेल ने चीन के बजाए भाजपा को देश का दुश्मन बताते हुए कहा है कि उन्हें भारत माता की परवाह नहीं है। चीन की सेना के साथ लद्दाख सीमा क्षेत्र में हुई हिंसक झड़प के बाद आकार पटेल की तरह ही कई भारतीय ‘बुद्धिजीवियों’ ने अब चीनी सेना द्वारा बरती जाने वाली बर्बरता पर आंखें मूँद लेने का फैसला ले लिया है। साथ ही, वह अब सत्तारूढ़ भाजपा को देश का सबसे बड़ा दुश्मन बताने में व्यस्त हैं।

भारत और चीन के बीच चल रहे गतिरोध के बीच एमनेस्टी इंडिया के पूर्व प्रमुख आकार पटेल ने ट्विटर पर कहा कि देश का दुश्मन भाजपा है, ना कि चीन। आकार पटेल ने दावा किया है कि उन्हें जनसंघ या भाजपा के मूल दस्तावेज में चीन का कोई संदर्भ नहीं मिला। हालाँकि, उन्होंने कहा कि उन्हें इसमें भारत में रह रहे समुदाय विशेष के देश का दुश्मन होने के कई संदर्भ मिले हैं।

विवादास्पद एक्टिविस्ट ने सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ गंभीर दावे किए हैं और आरोप लगाया है कि भाजपा देश के समुदाय विशेष से घृणा करती है।

आकार पटेल ने ट्वीट में लिखा है – “भाजपा के लिए चीन कभी भी दुश्मन नहीं था, ना ही है। जब तक वो उन भारतीयों को ‘ठीक’ कर सकते हैं, जिनसे कि वो नफरत करते हैं, तब तक उन्हें इसकी परवाह नहीं कि भारत माता के साथ क्या हो रहा है।”

पटेल ने कहा कि चीन सिर्फ एक प्रतिद्वंद्वी है, जिसके रणनीतिक उद्देश्य हैं। आकर पटेल के अनुसार, चीन हमें आंतरिक रूप से नष्ट करने की कोशिश नहीं कर रहा है, लेकिन भाजपा कर रही है।

ऐसे समय में, जब पूरा देश चीन के खिलाफ एकजुट है, आकार पटेल जैसे व्यक्ति, जिन्होंने अक्सर भारत के हितों के खिलाफ काम किया है, अपने स्वयं के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने में व्यस्त हैं।

विवादों को लेकर चर्चा में हैं आकार पटेल

हाल ही में आकार पटेल के खिलाफ में बेंगलुरु के जेसी नगर पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर नागराजा डीआर द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसमें पटेल पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने पूरे भारत में अमेरिका की तरह के विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को भड़काने और उकसाने की कोशिश की।

दरअसल, 31 मई को आकार पटेल ने कोलोराडो टाइम्स रिकॉर्डर के एक ट्वीट के हवाले से एक ट्वीट किया था, जिसमें अमेरिका में विरोध-प्रदर्शन कर रहे लोगों का एक वीडियो शेयर किया गया था। इस वीडियो के साथ ट्वीट में आकार पटेल ने लिखा था कि भारत के समुदाय विशेष, दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और गरीबों को भी इनकी तरह विरोध-प्रदर्शन करने की आवश्यकता है। इसे दुनिया देखेगी। प्रदर्शन करना भी एक कला है।

नागराजा द्वारा पुलिस में की गई शिकायत में कहा गया कि पटेल ने अल्पसंख्यकों, पिछड़ों, गरीबों और महिलाओं से आह्वान किया कि वे वीडियो में देखे गए लोगों की तरह विरोध-प्रदर्शन करें। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने पटेल के ट्वीट पर आपत्ति भी जताई थी।

गलवान घाटी में चीन के साथ खूनी हिंसक झड़प में 76 सैनिक भी हुए थे घायल, सभी की हालत में सुधार: रिपोर्ट

भारत और चीन के सैनिकों के बीच लद्दाख सीमा पर हुए खूनी हिंसक झड़प में भारत के करीब 76 सैनिकों के घायल होने की भी खबर आई हैं। सोमवार (15 जून, 2020) गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में डंडे और नुकीली चीजों से लैस चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया था। अचानक हुए इस खूनी हमले से भारतीय सैनिक अनजान थे। जिसकी वजह से भारतीय सेना के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

ANI के मुताबिक, “सभी घायल सैनिक खतरे से बाहर हैं, किसी की भी हालत गंभीर नहीं हैं। 18 सैनिक लेह के अस्पताल में एडमिट हैं। वे 15 दिन में ड्यूटी के बाद वापस लौटने की हालत में होंगे। वहीं, 58 सैनिक अन्य अस्पतालों में भर्ती हैं। उन्हें हल्की चोट है और वे एक हफ्ते के अंदर ड्यूटी पर वापस लौटेंगे। खबरों के अनुसार 4 सैनिक गंभीर रूप से घायल थे। उनपर से भी खतरा टल चुका हैं। उनके स्वास्थ्य में काफी सुधार हैं।”

भारतीय सेना ने जानकारी देते हुए बताया कि इस हिंसक झड़प के बाद कोई भी भारतीय जवान लापता नहीं है। जितने भी जवान गलवान घाटी के पास थे, सभी की जानकारी उनके पास है।

वहीं इस खूनी झड़प पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि इस घटना से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इसे स्थानीय स्तर पर अचानक पैदा हुई परिस्थिति नहीं मानता है, बल्कि इसके पीछे चीन की सोची-समझी साजिश साफ झलक रही है। इस घटना पर चीन को सुधारात्‍मक कदम उठाने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत के बलिदानी सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। PM मोदी ने कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में लद्दाख में चल रहे विवाद पर कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन करारा जवाब देने की क्षमता रखता है। पीएम मोदी ने इस विषय पर आज शुक्रवार (19 जून, 2020) को एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है।

उल्लेखनीय हैं कि लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात भारत और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई और संघर्ष हुआ, जिसमें भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए जबकि चीन के 43 से अधिक जवानों के हताहत होने की सूचना सामने आई हैं। चीन अभी तक अपने सैनिकों की मौत का आँकड़ा छुपा रहा है और सीमा पर संघर्ष के लिए भारत को ही दोषी ठहरा रहा है। लद्दाख में हुई हिंसक झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।

बता दें चीनी सेना ने पहले से ही अपने पास लाठी-डंडे, रॉड, हॉकी स्टिक, बेसबॉल क्लब, ड्रैगन पंच, पाईप, पत्थर, कीलें, बूट की नोक जमा कर लिया था। और उसी का इस्तेमाल वे हिंसा के दौरान कर रहे थे। वहीं पहाड़ी पॉइंट 14 पर पहले से मौजूद चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों को निशाना बनाते हुए उनके ऊपर बड़े-बड़े पत्थरों को फेक कर भी हमला किया। बिना किसी हथियार के भारतीयों सैनिकों ने उनका डट कर मुकाबला किया। हालाँकि, इस झड़प में कई भारतीय सैनिकों को तो संभलने तक का मौका नहीं मिला था।

नोएडा में 20,000 MSME कम्पनियों का सामूहिक फैसला: नहीं करेंगे चीनी उत्पादों का इस्तेमाल, देश में विरोध तेज

नोएडा में करीब 20 हजार MSME क्षेत्र की कंपनियाँ मौजूद हैं, जिन्होंने निर्माण प्रक्रिया में चीनी उत्पादों और उपकरणों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय सामूहिक रूप से गौतम बुद्ध नगर में MSME क्षेत्र के संघ द्वारा लिया गया है। गौतम बौद्ध नगर में MSME एसोसिएशन के अध्यक्ष ने सभी कारखानों को पत्र लिखकर चीनी उत्पादों के बहिष्कार का अनुरोध किया है।

चीन के साथ हुई भारतीय सैनिकों की झड़प के बाद, नोएडा में MSME क्षेत्र द्वारा एक सूची तैयार की गई है, जिसमें कहा गया है कि वर्तमान में अकेले MSME क्षेत्र ही नोएडा में विनिर्माण क्षेत्र (मेन्युफेक्चरिंग सेक्टर) के लिए कुल मिलकर 500 से अधिक उत्पादों का उपभोग कर रहा है, जिसमें एलईडी लाइट्स, बोल्ट, पीपीई किट, मास्क और कई अन्य निर्माण सामग्री शामिल हैं।

गौतम बौद्ध नगर में एमएसएमई एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा ने सभी कारखानों को पत्र लिखकर चीनी उत्पादों के बहिष्कार का अनुरोध किया है, साथ ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी एक पत्र लिखकर चीनी उपकरणों के बहिष्कार के निर्णय के बारे में जानकारी दी है।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन के बीच सरकार द्वारा MSME क्षेत्र और निर्माण के लिए बहुत सी राहत और उपाय किए गए हैं, क्योंकि इस दौरान MSME सेक्टर सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ और आखिरकार अब यह सेक्टर सामान्य स्थिति में लौट रहा है।

लेकिन इसके बावजूद भी यह सेक्टर देश के हित में खड़े रहकर कठोर फैसला लेते हुए सस्ते चीनी उपकरणों और विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का त्याग करने के लिए तैयार है।

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने भी बृहस्पतिवार (जून 18, 2020) को लोगों से चीन के उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील की और अपने मंत्रालय के अधिकारियों को दिन के कार्यालय उपयोग के लिए किसी भी चीनी उत्पाद की खरीद नहीं करने का निर्देश दिया है।

वहीं, पूरे देशभर में देखे जा रहे चीनी सामान के विरोध के बीच व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने एक खुले पत्र में सिनेमा और खेल की बड़ी हस्तियों, विशेष रूप से आमिर खान, दीपिका पादुकोण, कैटरीना कैफ, विराट कोहली और अन्य लोगों से अपील की है कि वे चीनी उत्पादों के विज्ञापन को करना बंद करें।

ज्ञात हो कि इनमें से कई हास्तियाँ चाइनीज मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रोनिक उपकरणों के विज्ञापन करते आए हैं। कैट ने इन सभी से और अन्य सभी प्रसिद्द व्यक्ति, जो किसी भी प्रकार के चीनी उत्पाद का विज्ञापन कर रहे हैं, से अपील की है की उनके द्वारा चीनी ब्रांडों का विज्ञापन करना तुरंत बंद किया जाए।

चीनी सामान के बहिष्कार का मामला ऐसे समय में सामने आया है जब लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक संघर्ष के बाद देश में चीनी उत्‍पादों के बहिष्‍कार की माँग जोर पकड़ती जा रही है।

गौरतलब है कि दोनों देशों के सैनिकों के बीच लद्दाख क्षेत्र में हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिकों को जान गँवानी पड़ी है, जबकि चीन के भी करीब 43 सैनिकों की इस संघर्ष में मौत हुई है।

कल ही सरकार ने सरकारी टेलिकॉम कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल के अलावा निजी कंपनियों को भी आदेश दिया है कि वे चीनी उपकरणों का इस्तेमाल करना बंद कर दें। सरकार ने सिक्योरिटी के खतरे का हवाला देते हुए कहा कि 4G के अपग्रेडेशन में चीनी उपकरणों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

पता है तू किसका बिस्तर गर्म करती है… रं* सेक्स कर मजा ले: भीम आर्मी के रावण की गंदी जुबान

भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर उर्फ रावण के कुछ पुराने ट्वीट सामने आए हैं। इनमें से हरेक में एक बात कॉमन है। वह महिलाओं को भद्दी गालियॉं दे रहा है। रावण की गंदी जुबान की शिकार हुईं ये सभी महिलाएँ पत्रकार और वीडियो ब्लॉगर हैं।

खुद को दलितों का स्वयंभू मसीहा बताने वाला रावण केवल उन्हीं मामलों पर अपनी जुबान खोलता है जब आरोपित सर्वण होते हैं। जब दलितों की बस्ती पर हमला करने वाले समुदाय विशेष के होते हैं तो वह जय भीम-जय मीम की खोल में छिप जाता है।

ऐसे रावण की महिलाओं के प्रति भाषा को दर्शाते कुछ ट्वीट के स्क्रीनशॉट एक यूजर ने शेयर किए हैं और लिखा है, “भीम आर्मी प्रमुख और उनकी शुद्ध भाषा।”

भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर रावण द्वारा किए गए ये सभी ट्वीट वर्ष 2018 के हैं। वीडियो ब्लॉगर काजल हिंदुस्तानी के खिलाफ भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर रावण ने बेहद ही आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए लिखा है – “तू सेक्स कर के मजा ले, चु*यापन मत कर रं*।”

काजल ने चंद्रशेखर के इन ट्वीट को आज शेयर करते हुए लिखा है, “तथाकथित दलित ठेकेदार भीम आर्मी चीफ की असलियत, खुद को महिलाओं का हितैषी बताने वाला ये दलितों का ठेकेदार बना फिर रहा है, आज इसके घटियापन का सबूत दे रही हूँ। अगर आपको अपनी बहन-बेटियों की इज़्ज़त की थोड़ी सी भी परवाह है तो इन ‘जय भीम जय मीम’ के दलालों को फ़ॉलो करना बंद कर दीजिए।”

काजल द्वारा भीम आर्मी प्रमुख के ट्वीट शेयर करने के बाद चंद्रशेखर ने अपने ये ट्वीट डिलीट तो कर दिए लेकिन उनके ये स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया में खूब घूम रहे हैं। चन्द्रशेखर द्वारा इन ट्वीट में इस्तेमाल की गई भाषा बेहद असभ्य और निम्नस्तरीय हैं, जिन्हें कि आप इन स्क्रीनशॉट्स में देख सकते हैं –

संजीव नेवार ने भी काजल के ट्वीट को शेयर करते हुए लिखा है, “यह भीम आर्मी चीफ की असलियत है। यदि यह दूर की महिलाओं के लिए उनकी मानसिकता हो, तो अपने आसपास के लोगों की स्थिति की कल्पना करें। यदि ऐसे लोग किसी समूह या व्यक्ति द्वारा समर्थित हैं, तो यह स्पष्ट है कि ये लोग कौन हैं।”

रावण की हरकत के बाद काजल सिंगला ने यूपी पुलिस और यूपी के पुलिस महानिदेशक ( DGP) को टैग करते हुए लिखा, “आप सभी से निवेदन है की ऐसे असामाजिक तत्वों के ख़िलाफ़ अविलम्ब कारवाई करे।”

इन ट्वीट के चर्चा में आने के बाद फिलहाल सराहनपुर पुलिस ने साइबर सेल को चंद्रशेखर के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दे दिए हैं।

अश्लील गाना बजाने से रोका तो दलित बस्ती पर लाठी-डंडे और धारदार हथियारों से मुस्लिमों ने किया हमला

हाल ही में उत्तर प्रदेश के जौनपुर और आजमगढ़ में दलितों को मुस्लिमों ने निशाना बनाया था। अब ऐसी ही घटना प्रदेश के गाजीपुर और सीतापुर जिले से सामने आई है।

गाजीपुर के गहमर थाना क्षेत्र के गोड़सरा गॉंव में बुधवार को दलितों की बस्ती पर हमला किया गया। हमला अश्लील गाना बजाने से मना किए जाने पर किया गया।

हमले में 18 लोग घायल हो गए, जिनमें से तीन की हालत गंभीर है। तनाव को देखते हुए गाँव में पीएसी तैनात कर दी गई है। वहीं मामले का संज्ञान लेते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक गोड़सरा में बुधवार (17 जून, 2020) को एक ट्रैक्टर चालक तेज आवाज में दलित बस्ती से गुजरते समय अश्लील गाना बजा रहा था। इसका जब वहाँ से गुजरे रहे मनरेगा के मजदूरों ने विरोध किया तो यह बात ट्रैक्टर चालक को नागवार गुजरी।

इसके कुछ देर बाद ही ट्रैक्टर मालिक के बेटे हैदर ने अपने साथी तनवीर, मुहम्मद अली सहित करीब 50 लोगों के साथ दलित बस्ती पर हमला बोल दिया। हमलावर लाठी-डंडे और धारदार हथियारों से लैस थे।

घंटों तक हमलावरों ने बस्ती में ईंट-पत्थर बरसाए और बुजर्ग, बच्चे व महिलाओं के साथ भी मारपीट की। दो समुदायों के बीच झगड़े की सूचना मिलते ही तत्काल जिलाधिकारी ओमप्रकाश आर्य पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश सिंह आदि अधिकारी व भारी संख्या में पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुँच गए, लेकिन इससे पहले ही सभी आरोपित मौके से फरार हो गए।

अमर उजाला की खबर के मुताबिक घटना में 18 और दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक घटना में 13 लोगों के घाटल होने के खबर है। वहीं तीन भाइयों जालिम राम (45), बलिस्टर (35) और सुग्रीव (40) के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। सभी घायलों के पुलिस ने जिला अस्पताल भेजकर इलाज कराया है।

वहीं थानाध्यक्ष विमल कुमार मिश्र के मुताबिक पीडि़त पक्ष की ओर से दी गई तहरीर पर मुख्य आरोपित हैदर, तनवीर, मुहम्मद अली सहित 21 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।

पाँच लोगों को हिरासत में लेकर जा पूछताछ की जा रही है। एसपी डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि जल्द ही सभी आरोपित पुलिस की गिरफ्त में होंगे। वहीं सीतापुर में समुदाय विशेष के दबंगों ने दलित का सिर मूँडवा दिया। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

आपको बता दें कि इससे पहले भी जौनपुर सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के भदेठी में मंगलवार (9 जून, 2020) को बच्चों के विवाद में मुस्लिमों ने दलित बस्ती पर हमला बोल दिया था। इस मामले में पुलिस ने 57 लोगों को नामजद और 100 लोगों को अज्ञात करते हुए विभिन्न धाराओ में मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद सीएम योगी ने मामले का संज्ञान लेते हुए सभी आरोपितों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।