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चीन के लिए भारत में बल्लेबाजी करने वाले कौन: अजीत भारती का सवाल | Ajeet Bharti on China backers in India

जब सभी देशवासियों को देश के साथ खड़े होकर सेना का मनोबल बढ़ाने का समय होता है, ऐसे हर वक्त पर कॉन्ग्रेस पार्टी ने सेना पर सवाल उठाए हैं। गलवान घाटी में 20 सैनिकों के बलिदान को लेकर पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने लिखा कि पीएम मोदी चुप क्यों हैं? कहाँ छुपे हुए हैं? वहाँ क्या हुआ है, ये देश को बताते क्यों नहीं? चीन की हिम्मत कैसे हुई हमारे जवानों को मारने की? वो हमारी जमीन कैसे ले सकते हैं?

इस ट्वीट के जरिए राहुल गाँधी ने प्रश्न पूछने का ढोंग रचा है। वो भी ऐसे समय में जब भारतीय सेना प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी दे चुकी है। तो क्या उनकी जानकारी इतनी अविश्वसनीय है कि राहुल गाँधी को पीएम से जवाब चाहिए। चीन ने कितनी जमीन पर, कॉन्ग्रेस के किस और यूपीए के किस प्रधानमंत्री के काल में कब्जा किया है, इसका राहुल गाँधी को तनिक भी ज्ञान नहीं है।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें।

इस्लामी कट्टरपंथियों के बाद ऑल्टन्यूज ‘फैक्टचेक’ के बहाने चीनी प्रोपेगेंडा को क्यों दे रहा है बढ़ावा

यदि आप सोच रहे हैं कि सिर्फ चीन ही अपने मारे गए सैनिकों पर बात नहीं करना चाहता है, तो आप गलत हैं। इस्लामिक विचारधारा की समर्थक वेबसाइट ऑल्टन्यूज़ भी नहीं चाहता है कि भारतीय मीडिया और सेना इन आँकड़ों पर बात करे। इस प्रकार यदि देखा जाए तो ऑल्टन्यूज़ ‘फैक्ट चेक’ नामक विधा के चायनीज संस्करण से अधिक कुछ नहीं है। चीन की ही तरह यह भी नहीं चाहता कि चीनी सैनिकों के घायल होने या उनके मारे जाने की ख़बरों पर बात की जाए।

यह तो स्पष्ट है कि भारत अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर पाकिस्तान के साथ तो संघर्षरत था ही लेकिन पिछले कुछ समय से हम चीन के साथ भी एक किस्म का युद्ध लड़ रहे हैं। लेकिन इससे भी बड़ा वैचारिक युद्ध कुछ लोगों के बीच इस विवाद को लेकर चल रहा है कि उन्हें पाकिस्तान और चीन में से किसे अपना आधिकारिक अन्नदाता स्वीकार करना है।

क्योंकि, जिस तेजी से ऑल्ट न्यूज़ जैसे तथाकथित फैक्ट चेकर्स अपने अन्नदाताओं को संतुष्ट करने के लिए कभी पाकिस्तान तो कभी चीन की सत्ता के हितों में काम करते देखे जाते हैं, यह आश्चर्य होता है कि आखिर एक ही समय में इस्लामिक विचारधारा और कम्युनिस्ट विचारधारा में से किसी एक को चुनना कितना मुश्किल होता होगा। हालाँकि, तब भी ‘भारत विरोध’ कम से कम एकसूत्रीय एजेंडा जरुर है, जो उन्हें उनके वास्तविक मसकद से बाँधे रखता है।

क्या है मामला

ऑल्ट न्यूज़ ने भारत और चीन की सेना के बीच हुए हिंसक संघर्ष में चीनी सत्ता के मुखपत्र के रूप में काम करते हुए भारतीय जवानों के बलिदान और चीनी सैनिकों की मौत की खबरों पर अपने एजंडे को सर्वोपरी रखा है। इस क्रम में ऑल्ट न्यूज़ द्वारा 2 ‘फैक्ट चेक’ किए गए।

पहले फैक्ट चेक में ऑल्ट न्यूज़ ने यह साबित करने का प्रयास किया कि भारतीय सेना नहीं बल्कि चीनी मुख पत्र ग्लोबल टाइम्स और उनके रिपोर्टर्स की बदलती जुबान के आँकड़े ज्यादा स्पष्ट और विश्वसनीय हैं। जबकि दूसरे फैक्ट चेक में ऑल्ट न्यूज़ ने चीन के हताहत या मरे गए सैनिकों की गिनती के लिए भारतीय मीडिया को गलत ठहराया है।

दरअसल, भारतीय सैनिकों की मौत की ख़बरों के बाद चीनी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्टर वांग वेनवेन ने एक ट्वीट में लिखा कि भारत ही नहीं बल्कि चीनी सैनिक भी इस झड़प में मारे गए हैं। उसने लिखा कि इस झड़प के दौरान 5 चीनी सैनिक मारे गए और 11 घायल हुए। इस खबर को कई भारतीय पत्रकारों और मीडिया घरानों ने प्रकाशित किया था।

यह भी ध्यान देने की बात है कि ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्टर द्वारा जारी की गई इस सूचना के आने तक यह पुष्टि हो चुकी थी कि भारत ने इस झड़प में 3 सैनिकों को खो दिया था, जिसमें बटालियन के एक कमांडिंग ऑफिसर भी शामिल थे।

अब, यदि ग्लोबल टाइम्स की मुख्य रिपोर्टर, जो कि एक चीनी शासन का मुखपत्र है, अपने देश के हताहत सैनिकों की संख्या को ट्वीट करती है, तो इस सूचना पर आखिर क्यों नहीं विश्वास किया जाना चाहिए? लेकिन मानो ग्लोबल टाइम्स और कम्युनिस्ट चीनी शासन इस खबर को बाहर नहीं आने देना चाहता था और फ़ौरन बाद ग्लोबल टाइम्स के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक और ट्वीट करते हुए लिखा गया कि हालाँकि, वह पुष्टि नहीं करता है किन्तु इस झड़प में उनके भी ‘कुछ’ सैनिक हताहत हुए हैं।

इसके बाद ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्टर वांग वेनवेन ने तुरंत अपने ट्वीट को हटा दिया और बिना सोचे समझे भारतीय मीडिया को उनकी ‘गलत सूचना’ के लिए दोषी ठहराते हुए दावा किया कि उनका ट्वीट भारतीय मीडिया पर आधारित था।

दिलचस्प बात यह है कि ग्लोबल टाइम्स द्वारा ‘स्पष्टीकरण’ चंद मिनट पहले ही उनकी रिपोर्टर द्वारा ट्वीट में भारत की मीडिया को गैर जिम्मेदाराना बताया गया था।

यह ध्यान में रखना आवश्यक है कि पत्रकार वांग वेनवेन और ग्लोबल टाइम्स – ये दोनों ट्विटर पर चीन सरकार की विशेष स्वीकृति के बाद ही हैं, क्योंकि माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाईट ट्विटर चीन में प्रतिबंधित है। ऐसे में काम शुरू होता था ऑल्ट न्यूज़ का, जिसे कि चीन के कम्युनिस्ट राज्य द्वारा फैलाई जा रही गफलत और अस्पष्टता को भारतीय मीडिया के खिलाफ इस्तेमाल करने की ‘जिम्मेदारी’ मिल गई।

ऑल्टन्यूज़ ने फ़ौरन चीनी मुखपत्र के ट्वीट के आधार पर भारतीय मीडिया को अपने ‘फैक्ट चेक’ के माध्यम से झूठा साबित करने का प्रयास शुरू कर दिया। यह भारत-चीन फेस ऑफ़ के दौरान ऑल्टन्यूज़ का पहला कारनामा था।

ऑल्टन्यूज़ द्वारा प्रकाशित दूसरे लेख (फैक्ट चेक) का शीर्षक था – “भारत-चीन विवाद: 43 चीनी सैनिक मारे गए? मीडिया के आउटलेट और पत्रकार गुमराह कर रहे हैं।”

इस ‘फैक्ट चेक’ में ऑल्टन्यूज़ ने उन समाचारों को झूठा साबित करने का प्रयास किया जिसमें बताया जा रहा था कि चीन ही नहीं बल्कि भारत ने भी चीन के सैनिकों को हताहत किया है, जिसमें 43 चीनी सैनिकों के हताहत होने की खबरें सामने आई हैं। मीडिया ने बताया कि ये उन चीनी सैनिकों की संख्या है जो स्पष्ट तौर पर गायब, घायल, गंभीर रूप से ज़ख्मी और मारे गए हैं।

लेकिन मानों ऑल्टन्यूज़ को चीनी सैनिकों के घायल होने या उनके मारे जाने की खबरें ज्यादा पसंद नहीं आईं और उन्होंने इसका भी फैक्ट चेक करते हुए भारतीय मीडिया को फर्जी साबित करने का प्रयास किया है।

यहाँ पर ध्यान देने की बात यह है कि ये वही ऑल्टन्यूज़ है, जो फलों पर थूक लगा रहे शेरू मियाँ के वीडियो का फैक्ट चेक यह कहते हुए सनसनीखेज तरीके से पेश करता है कि शेरू मियाँ इस फरवरी में नहीं बल्कि 1857 की फरवरी में अंग्रेजों को मारने के लिए फलों पर थूक लगा रहे थे और इस क्रांति के सूत्रधार इस कारण शेरू मियाँ ही थे (इस तथ्य का फैक्ट चेक करने के लिए ऑल्टन्यूज़ स्वतंत्र है।)

इसके अलावा, जिस प्रकार से यह ऑल्टन्यूज़ पत्थर को वॉलेट साबित करने का अनोखा हुनर रखता है, चीन को वास्तव में इसके संस्थापकों की पीठ थपथपानी चाहिए। वैसे भी यह ऑल्टन्यूज़ ‘फैक्ट चेक’ नामक विधा के चायनीज संस्करण से अधिक कुछ नहीं है।

पहला तथ्य तो यहाँ पर यही है कि कोरोना वायरस की महामारी के जनक चीन की सत्ता ने ना तो कोरोना वायरस के कारण हुई मौत के आँकड़े आज तक सामने रखे हैं ना ही वह लद्दाख में हुई झड़प पर आँकड़े सामने रखने का साहस जुटा पा रहा है।

पहले ऑल्टन्यूज़ खुद तय करे कि ग्लोबल टाइम्स विश्वसनीय है या नहीं

ऐसे में चीनी सैनिकों के मरने या हताहत होने की सम्भावना यदि 43 नहीं है तो यह 43 से कम भी नहीं है इसकी सौ प्रतिशत सम्भावना है, क्योंकि यह पचास से सौ और दो सौ के बीच कुछ भी हो सकती है। यह अन्य बात है कि चीन की सरकार ने ऑल्टन्यूज़ को व्यक्तिगत रूप से कुछ आँकड़े थमा दिए हों, जिनके आधार पर वह चीनी सेना के प्रवक्ता के रूप में पेश आ रहा है।

कम से कम यह तो स्पष्ट है कि ऑल्टन्यूज़ की मंशा सत्य को सामने लाने की नहीं बल्कि भारत-विरोध के अपने एकसूत्रीय एजेंडा के द्वारा इस्लामिक विचारधारा के तले चीनी सत्ता की नजरों में आना है या फिर कम से कम उनका काम आसान करना है।

ऑल्टन्यूज़ के लिए कितना बड़ा द्वन्द है कि पहले फैक्ट चेक में अपनी सुविधानुसार जहाँ भारतीय मीडिया के उस दावे को वह झूठा बताने का प्रयास करता है, जिसमें भारतीय मीडिया ने ग्लोबल टाइम्स के ही चीफ रिपोर्टर को आधार स्रोत बनाया है, वही दूसरे फैक्ट चेक में ऑल्टन्यूज़ उसी झूठे ग्लोबल टाइम्स के दावों को सूचना का अंतिम स्रोत साबित करने का प्रयास करता नजर आता है।

ऑल्टन्यूज़ के इस तथाकथित फैक्ट चेक में भारतीय स्रोतों को ‘दावा’ कहकर सामने रखा गया है जबकि चीन के विदेश मंत्रालय के हवाले से लिखा गया है कि उन्होंने भारत पर इस झड़प का दोष लगाया है।

ऑल्टन्यूज़ के ‘फैक्ट चेक’ से लिया गया स्क्रीनशॉट

हो सकता है, लेखन शैली से इसमें कुछ भी गलत नजर ना आए, लेकिन इसे पढ़ते हुए लगता है कि आप चीनी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के प्रोपेगेंडा को पढ़ रहे हों। यह तय है कि पाकिस्तान और चीन में से यदि ऑल्टन्यूज़ को कुछ चुनना होगा, तो वह निश्चित रूप से भारत विरोध को ही चुनेगा।

कांस्टेबल रतनलाल की हत्या के मामले में चार्जशीट में ओवैसी से जुड़े डीएस बिंद्रा का नाम, मीडिया ने किया था महिमामंडन

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध की आड़ में देश की राजधानी दिल्ली को दहलाने की साजिश रची गई थी। उस दौरान उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या कर दी गई थी। साथ ही IPS अमित शर्मा और अनुज कुमार पर जानलेवा हमला किया गया था।

दिल्ली पुलिस की विशेष जाँच टीम ने हाल ही में रतन लाल की हत्या, IPS अमित शर्मा और IPS अनुज कुमार पर दंगाइयों द्वारा किए गए घातक हमलों में 1,100 पन्नों की चार्जशीट दायर की है। चार्जशीट में कम से कम 17 आरोपितों को नामजद किया गया है। इस पूरे मामले में लगभग 4 से 5 मुख्य साजिशकर्ता हैं, जिनमें सलीम खान, सलीम मुन्ना और शादाब शामिल हैं। पुलिस ने कहा कि देश की छवि खराब करने के लिए एक साजिश के तहत दंगे को अंजाम दिया गया।

चार्जशीट से कई अन्य बेहद परेशान करने वाले विवरण सामने आए, जिनमें से एक हिस्सा ऑपइंडिया द्वारा एक्सेस किया गया है। बता दें कि चार्जशीट में एक नाम का बार-बार जिक्र किया गया है। वो नाम है- डीएस बिंद्रा का। वही डीएस बिंद्र जिनके बारे में फरवरी में सोशल मीडिया पर खबरें वायरल हुई कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को लंगर खिलाने के लिए अपना फ्लैट तक बेच दिया। लोगों ने बिंद्रा की ‘उदारता’ के लिए काफी तारीफें की। मीडिया गिरोह ने इसे ‘मजहब-सिख एकता’ की चासनी में डूबो कर बेचा।

इंडिया टुडे ने इसे मानवता की सेवा करार देते हुए खबरें चलाई।

India Today की हेडलाइन

शाहीन बाग के ट्विटर हैंडल ने भी डीएस बिंद्रा का महिमामंडन करते हुए इसे ‘मजहब-सिख एकता’ की मिसाल बताया।

आज तक और लल्लनटॉप ने भी इस खबर को खूब भुनाया और इसे ‘नि:स्वार्थ सेवा’ करार दिया। हालाँकि, ये सब करते हुए उन्होंने दो चीजों का बिल्कुल भी जिक्र नहीं किया।

1. डीएस बिंद्रा AIMIM नेता थे।

2. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बिंद्रा दिल्ली के मुस्तफाबाद और खूँरेजी में सीएए विरोध प्रदर्शनों में भी मुख्य रूप से शामिल रहे।

बिंद्रा एआईएमआईएम के नेता थे और वो मुस्तफाबाद में सीएए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। मीडिया को अलर्ट करना चाहिए था। हालाँकि, मीडिया ने अपना हीरो ढूँढ लिया था, जिसके माध्यम से इस्लामवादियों के कारनामों पर लीपापोती की जा सकती थी।

अब, डीएस बिंद्रा को दिल्ली क्राइम ब्रांच द्वारा दायर चार्जशीट में उन प्रमुख लोगों में नामित किया गया है जिन्होंने दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान कांस्टेबल रतन लाल की हत्या करने वाली भीड़ को उकसाया था।

आरोप पत्र में कहा गया है कि बीट अधिकारियों को नियमित रूप से विरोध के क्षेत्र में तैनात किया गया था, ताकि कानून व्यवस्था सुनिश्चित किया जा सके। रतन लाल की हत्या के बाद, दो बीट अधिकारियों से भी पूछताछ की गई और उनके बयानों से तथ्यों का पता लगाया गया। उन्होंने खुलासा किया कि सलीम खान, सलीम मुन्ना, डीएस बिंद्रा, सुलेमान सिद्दीकी, अयूब, अतहर, शाहदाब, उपासना, रविशंद अन्य लोग विरोध स्थल के आयोजक थे।

प्रोटेस्ट साइट पर, समुदाय विशेष को उकसाने वाले भड़काऊ बयान हर दिन दिए गए थे। चार्जशीट में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि बीट अधिकारियों के अनुसार, इस साइट पर दंगा स्थानीय दंगाइयों के साथ डीएस बिंद्रा, सलमान सिद्दीकी, सलीम खान, सलीम मुन्ना और अतहर आदि का काम था।

चार्जशीट में स्पष्ट रूप से जिक्र किया गया है, “आरोपित व्यक्तियों ने संयुक्त रूप से खुलासा किया कि चाँदबाग दंगो के पीछे की साजिश में उनके साथ डीएस बिंद्रा, डॉ रिज़वान, अतहर, शाहदाब, उपासना, तबस्सुम, रवीश और अन्य लोग शामिल थे।”

इसके अलावा, गिरफ्तार अभियुक्त शाहनवाज़ और इब्राहिम ने यह खुलासा किया कि इस दंगे के आयोजक डीएस बिंद्रा, डॉ रिज़वान, सुलेमान (सलमान), सलीम खान और सलीम मुन्ना थे। यह दंगा इन्हीं लोगों द्वारा अन्य लोगों के साथ मिलकर रची गई साजिश का हिस्सा था।

एक अन्य आरोपित मोहम्मद सलीम खान (चाँद बाग के प्रोटेस्ट का आयोजक) ने खुलासा किया था कि लगभग दो महीने पहले, डीएस बिंद्रा ने सर्विस रोड, वज़ीराबाद रोड, चाँदबाग में सामुदायिक रसोई की शुरुआत की थी। सामुदायिक रसोई की वजह से बड़ी संख्या में वहाँ पर भीड़ इकट्ठा होती थी। सलीम खान, सलमान सिद्दीकी, डॉ रिज़वान, सलीम मुन्ना और अन्य लोगों के साथ सामुदायिक रसोई में जाता था। डीएस बिंद्रा ने CAA/ NRC का जोरदार विरोध करने के लिए उसे और अन्य लोगों को उकसाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को अपना असंतोष दिखाने के लिए सड़क पर आना चाहिए।

इसके अलावा, आरोप पत्र में कहा गया है, “ये वे लोग हैं जिन्होंने विरोध स्थल की नींव रखी है। शुरुआत में वे स्थानीय लोगों से मिले। उनके साथ बैठकें कीं, उन्हें विश्वास दिलाया कि वे एक कठिन परिस्थिति से गुजर रहे हैं और फिर लोगों में विरोध की चिंगारी जलाई। इनमें राजनेता, AISA, JCC आदि संगठनों के सदस्य शामिल थे। डीएस बिंद्रा साजिशकर्ताओं में से एक हैं। यह पता चला है कि उन्होंने पहली बार चांद बाग में एक सामुदायिक रसोईघर “लंगर” बनाया था। जिसमें कुछ स्थानीय निवासी शामिल हो गए, जिन्हें हम स्थानीय आयोजक कह सकते हैं। फिर प्रोटेस्ट साइट की स्थापना से लेकर 24 फरवरी 2020 को हिंसा भड़कने तक वो स्थानीय आयोजकों के साथ लगातार संपर्क में थे।” आरोप पत्र में रतन लाल की हत्या के अलावा दंगें में 49 अन्य पुलिसकर्मी गंभीर रुप से घायल हो गए।

पुलिस ने चार्जशीट में खुलासा किया है कि रतन लाल की हत्या से 2 दिन पहले 22 फ़रवरी को ही 50 लोगों के एक समूह ने बैठक की थी, जहाँ हिंसा की पूरी साज़िश रची गई। दंगाइयों ने अपने घर के बच्चों व बुजुर्गों को पहले ही घर के भीतर रहने को बोल दिया था और ख़ुद हथियार लेकर निकले।

पुलिस ने चार्जशीट में ये भी कहा है कि रतनलाल की हत्या एक गहरी साजिश का हिस्सा थी। 24 फरवरी को मौजपुर क्रॉसिंग के पास हिन्दुओं और कट्टरपंथियों के बीच झड़प से दोपहर 12 बजे के क़रीब हिंसा भड़क उठी थी। 5000 लोग वहाँ जुट गए थे और पत्थरबाजी भी हो रही थी। 1 बजे एक बड़ी भीड़ ने चाँदबाग में डीसीपी और अन्य पुलिस अधिकारियों पर हमला बोल दिया, जिसमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे।

दिल्ली पुलिस की मानें तो चाँदबाग में जिस तरह से सीएए विरोधी प्रदर्शन में लोगों को भड़काया गया और धरने पर बिठाया गया, उसका दंगे फैलाने में अहम रोल था। रतन लाल की हत्या भी इसी साज़िश का हिस्सा थी।

देश सेवा में बलिदान हुए झारखण्ड के कुंदन कुमार ओझा, नहीं देख पाए अपनी 17 दिनों पहले जन्मी बेटी का मुख

भारत चीन सीमा पर सोमवार (15 जून, 2020) को लद्दाख में चीनी सैनिकों से हुई खूनी हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए हैं। वहीं चीन के भी लगभग 45 सैनिकों के मारे जाने की खबर है। इस खूनी हिंसा में वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों में एक झारखंड के साहिबगंज के रहने वाले कुंदन कुमार ओझा भी है। 28 वर्षीय कुंदन ओझा की 17 दिन की दुधमुँही बच्ची हैं। जिसकी शक्ल देखने से पहले ही वो दुनिया को अलविदा कह गए।

डिहारी गाँव में रहने वाले कुंदन कुमार ओझा के बलिदान की खबर परिवार को मंगलवार (16 जून, 2020) की शाम को मिली। जिसे सुनते ही परिवार के सभी जन स्तब्ध रह गए। परिवारवालों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। सबके मुँह से सिर्फ एक बात निकल रही थी कि एक बार बच्ची को बस गोद में खिला लेते।

आपको बता दें बलिदानी कुन्दन इसी साल जनवरी में छुट्टी लेकर अपने गाँव डिहारी आए थे। कुछ दिन रहने के बाद वो 2 फरवरी को वापस अपनी ड्यूटी पर लेह चले गए थे। उन्होंने जाते वक्त अपनी गर्भवती पत्नी से जल्द ही बच्चे के जन्म के बाद वापस आने का वादा किया था।

बच्ची का मुख देखने जल्द ही जाने वाले थे घर

सीमा पर चल रहे तनाव की वजह से मोबाइल नेटवर्क में काफी परेशानी आ रहीं थी। जिसकी वजह से कुंदन ने आखिरी बार अपने परिजनों से सेटेलाइट फोन के जरिए बात की थी। जहाँ बच्ची के जन्म पर खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने बताया था कि, लॉकडाउन व चीन सीमा पर विवाद कुछ थमने के बाद वह बेटी को देखने घर देखने जल्द ही आएँगे। लेकिन, शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

परिजनों ने बताया कि कुंदन की 2 साल पहले ही सुल्तानगंज के मिरहट्टी की रहने वाली नेहा से शादी हुई थी। हाल ही में उसकी पत्नी ने फूल सी सुंदर बच्ची को जन्म दिया था। कुंदन 7 साल से सेना में तैनात देश की सेवा में जुटे थे। बुढ़ापे में उनकी जिंदगी का सहारा उन्हें छोड़ कर चला गया। मगर उन्हें सुकून हैं कि उनके बच्चे ने अपना जीवन देश को समर्पित कर उनका सर गर्व से ऊँचा कर दिया है।

झारखंड सीएम और पूर्व सीएम ने ट्वीट कर जताया दुख

देश के लिए बलिदान हुए कुंदन पर गर्व करते हुए झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन और पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने सैल्यूट किया। सीएम हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर दुख जाहिर करते हुए कहा कि झारखंड सरकार और पूरा राज्य अपने वीर जवान के परिवार के साथ खड़ा है।

दानापुर रेजिमेंट में हुआ था चयन

आपको बता दें कुंदन कुमार ओझा का वर्ष 2011 में 16 बिहार दानापुर रेजिमेंट की बहाली में चयन हुआ था। 2012 में उन्होंने भारतीय थल सेना के रूप में अपना योगदान देने की शुरुआत की थी। कुन्दन ने साहिबगंज कॉलेज से इंटर व बीए की डिग्री प्राप्त की थी। इसी दौरान उन्होंने एनसीसी में भी हिस्सा लिया था। जहाँ बतौर कैडेट उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए बी सर्टिफिकेट मिला था। सेना के चयन के वक़्त एनसीसी के दौरान किए गए मेहनत से उन्हें सेना में भर्ती होने में भी मदद मिली।

करीब तीन साल पहले ही उनकी तैनाती लेह में हुई थी। सभी सहपाठियों, गाँव के लोगों को कुंदन के जाने का दुख तो है ही मगर भारत माता की रक्षा के लिए कुंदन के वीर गति को प्राप्त होने पर गर्व भी हो रहा है।

गाँव पहुँचेगा कुंदन का पार्थिव शरीर

वीरगति को प्राप्त कुंदन कुमार ओझा का पार्थिव शरीर गुरुवार को उनके गाँव आने की उम्मीद है। हालाँकि, मंगलवार देर शाम तक जिला प्रशासन को इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली थी। उपायुक्त वरुण रंजन ने देर शाम बताया कि कुंदन कुमार ओझा के परिजनों को वहाँ के सूबेदार ने कॉल किया था।

कश्मीरी कट्टरपंथियों को चीन की दोस्ती के चक्कर में न पड़ने की चेतावनी के बाद उमर अब्दुल्ला ट्विटर से गायब

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्‍यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपना ट्विटर एकाउंट डिएक्टिवेट कर दिया है और वो ट्विटर छोड़ चुके हैं। इसके पीछे एक प्रमुख कारण उनका वह ट्वीट माना जा रहा है जिसमें उन्होंने उन लोगों को कड़ी फटकार लगाई थी जो भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच झड़प में चीन की तारीफ कर रहे थे।

भारत-चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोग चीनी सेना के समर्थन में नजर आ रहे थे। इस पर उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि चीन की तारीफ करने से पहले चीन में रह रहे उइगर मुस्लिमों की स्थिति के बारे में भी पता लगा लें। उमर अब्दुल्ला के इस ट्‍वीट के बाद उन्हें कुछ लोगों का समर्थन मिला, लेकिन एक बड़े वर्ग की सख्त प्रतिक्रिया भी झेलनी पड़ी।

उमर अब्दुल्ला का अकाउंट अब ट्विटर पर निष्क्रीय नजर आ रहा है –

दरअसल, चीन में उइगर मुस्लिमों पर वहाँ की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा कई प्रकार के अत्याचार किए जाते हैं, जिन्हें कि मीडिया के सामने आने से भी रोक दिया जाता है। यह भी दिलचस्प है कि दुनियाभर के मुस्लिम एक ओर जहाँ मुस्लिमों की छवि और उनके अधिकारों को लेकर चिंतित रहते हैं, वहीं वह चीन में उइगर मुस्लिमों की प्रताड़ना को लेकर उदासीन ही नजर आते हैं।

यह आशंका जताई जा रही है कि उमर अब्दुल्ला इसी उदासीनता का शिकार हुए हैं, जिस कारण उन्हें ट्विटर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। इससे एक संकेत यह भी मिलता है कि चीन के उइगर मुस्लिमों की चिंता एक समुदाय विशेष के लिए चीन की वैश्विक छवि के सामने कुछ नहीं है।

जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला को घाटी से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निष्क्रिय करने के लगभग 8 महीने बाद मार्च के माह हिरासत से रिहा कर दिया गया था। जनसुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत लगाए गए आरोप हटाए जाने के बाद उनकी रिहाई का आदेश जारी किया गया।

उमर अब्दुल्ला की नजरबंदी करीब 7 महीने तक रही थी। उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की 6 महीने की ‘एहतियातन हिरासत’ पूरी होने से महज कुछ घंटे पहले ही उनके खिलाफ जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

यह भी ध्यान देने की बात है कि गत मई माह में ही कॉन्ग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी को भी चीन और भारतीय सेना को लेकर कुछ ट्वीट किए थे जिसके बाद कॉन्ग्रेस ने भी उनके बयानों से किनारा कर लिया था और अधीर चौधरी को अपने ट्वीट डिलीट करने पड़े थे।

दरअसल, अधीर रंजन चौधरी ने लद्दाख और सिक्किम में भारतीय सैनिकों के साथ चीनी सैनिकों की हुई झड़प को लेकर चीन को ‘जहरीला साँप’ बताया था।उन्होंने ट्वीट में लिखा था – “सावधान हो जाओ चीन, भारतीय बलों को पता है कि तुम जैसे जहरीले साँपों का फन कैसे कुचला जाता है। पूरी दुनिया की नजर तुम्हारी विस्तारवाद की कुटिल चाल पर है। मैं सरकार को अब बिना समय गँवाए ताइवान से राजनयिक संबंध स्थापित करने का सुझाव देता हूँ।”

इस पर कॉन्ग्रेस ने बयान दिया कि अधीर चौधरी ने चीन को लेकर जो कुछ भी कहा वो कॉन्ग्रेस की राय नहीं है। इस पर कॉन्ग्रेस पार्टी की नाराजगी को देखते हुए अधीर रंजन चौधरी ने अपने ट्वीट डिलीट करने पड़े थे। 

सांसद साक्षी महाराज को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले मोहम्मद गफ्फार को ATS ने बिजनौर से दबोचा

उत्तर प्रदेश के उन्नाव से भाजपा सांसद सच्चिदानंद हरि साक्षी उर्फ साक्षी महाराज को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले युवक को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित युवक की पहचान मोहम्मद गफ्फार के रुप में हुई है। प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने गफ्फार नामक इस युवक को बिजनौर से पकड़ा। गफ्फार मूलरूप से बिजनौर के मंडावली इलाके का निवासी है।

ATS की पूछताछ के दौरान आरोपित गफ्फार ने कबूल किया कि कुवैत में रहने के दौरान उसने कॉल करके धमकी दी थी। गफ्फार ने यह भी कबूल किया है कि उसने कुवैत से भारतीय जनता पार्टी के कई अन्य नेताओं को फोन कर धमकी दी थी। उसने बताया कि कुवैत में किसी ने उसे कॉल करने और भाजपा नेताओं को धमकी देने के लिए कहा था।

एटीएस सूत्रों ने पुष्टि की है कि साक्षी महाराज के अलावा उसने कई अन्य भाजपा नेताओं को भी फोन किया था। मगर अभियुक्त के कुवैत में होने के कारण उसको ट्रैक करना एक मुश्किल काम था। हाल ही में उन्हें सूचना मिली कि वह भारत लौट आया है और बिजनौर में है। जिसके बाद वहाँ पर टीमें भेजी गई और उसे दबोच लिया गया। यूपी पुलिस फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह अकेले इस काम को अंजाम दे रहा था या फिर भाजपा नेताओं को धमकी देने वाले इस वारदात के पीछे कोई रैकेट है।

गफ्फार के इस कृत्य को आईपीसी एवं आईटी एक्ट की धारा के तहत दंडनीय अपराध मानते हुए एटीएस ने अपने लखनऊ थाने में मुकदमा दर्ज किया है। यह मुकदमा आईपीसी की धारा 504 व 507 तथा आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत दर्ज किया गया है।

एटीएस ने गफ्फार के कब्जे से पासपोर्ट के अलावा एक मोबाइल, एक आधार कार्ड और कुवैत की एक सिविल आईडी बरामद किया है। गफ्फार को न्यायालय में पेश करके आगे की कार्रवाई की जा रही है।

बता दें कि बीते दिनों साक्षी महाराज को मोबाइल फोन पर जान से मारने की धमकी मिली थी। सांसद के निजी सचिव अशोक कटियार ने पुलिस को इस मामले की तहरीर दी थी। जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जाँच पड़ताल शुरू कर दी थी।

2013 में भी इन्‍हें जान से मारने की धमकी दी गई थी। साथ ही 2015 में किसी बात पर टिप्‍पणी को लेकर जान से मारने की धमकी दी गई थी। इसके अलावा इन्‍हें बम से उड़ाने की भी धमकी दी जा चुकी है। इस संबंध में इन्‍होंने कहा था एक बार स्‍पष्‍ट कहा था कि इस राज्‍य में मैं असुरक्षित महसूस कर रहा हूँ। बुधवार (जून 17, 2020) को आरोपित को पकड़ने में सफलता मिली।

‘ताइवान न्यूज़’ पर ‘ड्रैगन’ को मारते हुए भगवान राम का पोस्टर बना है चर्चा का विषय

ताइवान न्यूज‘ (Taiwan News) की वेबसाईट पर एक पोस्टर नजर आया है, जो कि सोशल मीडिया पर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ताइवान न्यूज़ पर प्रकाशित इस पोस्टर में भगवान राम ड्रैगन को मारते हुए नजर आ रहे हैं। ज्ञात हो कि भगवान राम बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक हैं।

अपनी विस्तार और वर्चस्ववादी नीतियों के लिए कुख्यात चीन को दुनिया ड्रैगन का भी नाम देती है। चीन अपनी ‘नाइन डैश पॉलिसी’ और कम्युनिस्ट विचारधारा के कारण अपने आसपास के तमाम क्षेत्र पर बलपूर्वक और कुटिलता से नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास सदियों से करता आया है। चीन की इसी नीति से इसका एक और पड़ोसी मुल्क भी परेशान है जिसका नाम है ताइवान!

ताइवान न्यूज़ (Taiwan News) पर प्रकाशित पोस्टर, जिसमें भगवान राम ड्रैगन को मारते नजर आ रहे हैं –

इस पोस्टर में भारतीय सभ्यता, आस्था और संस्कृति के प्रमुख केंद्र माने जाने वाले भगवान राम चीनी ड्रैगन को तीर से मारते हुए नजर आ रहे हैं। इस पोस्टर का शीर्षक है – ‘फोटो ऑफ़ द डे: भारत के राम चीन के ड्रैगन को ठिकाने लगाते हुए।’ (Photo of the Day: India’s Rama takes on China’s dragon)

हालाँकि, ताइवान न्यूज़ ने भी इस पोस्टर को किसी अन्य स्रोत से लेकर प्रकाशित किया है। ताइवान न्यूज़ के अनुसार, यह पोस्टर हांगकांग सोशल मीडिया साइट LIHKG पर पोस्ट किया गया था।

इस चित्र में भगवान राम एक धनुष से चीनी ड्रैगन को लक्ष्य बनाते हुए उसे मारते नजर आ रहे हैं। इसमें संदेश लिखा गया है, जिसमें भगवान राम ड्रैगन का संहार करने की मुद्रा में हैं और लिखा गया है – ‘हम जीतते हैं” और “हम मार डालते हैं।”

सोशल मीडिया पर यह पोस्टर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

उल्लेखनीय है कि चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है। चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी इसके लिए सेना के इस्तेमाल पर भी जोर देती आई है। ताइवान के पास अपनी खुद की सेना भी है। जिसे अमेरिका का समर्थन भी प्राप्त है।

अंतरराष्ट्रीय सीमा को लेकर विवाद में चीन भारत ही नहीं बल्कि अन्य पड़ोसी देशों के साथ भी संघर्षरत है। इसका एक उदाहरण यह है कि जब चीन के सैनिक भारतीय सीमा में घुसकर भारतीय सैनिकों से झड़प कर रहे थे उसी समय ताइवान ने अपने हवाई क्षेत्र में घुसे एक चीनी फाइटर प्लेन को करारा जवाब देते हुए वापस खदेड़ दिया था। ताइवान ने बताया कि एक सप्ताह के अंदर चीनी विमानों ने तीन बार हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है। चीन और ताइवान के बीच भी विवाद बढ़ने के आसार हैं।

चीन और ताइवान में गर्मागर्मी का कारण

वर्ष 1949 में माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्ट पार्टी ने शियांग काई शेक के नेतृत्व वाले कॉमिंगतांग सरकार का तख्तापलट कर दिया था। जिसके बाद शियांग काई शेक ने ताइवान द्वीप में जाकर अपनी सरकार का गठन किया। उस समय कम्युनिस्ट पार्टी के पास मजबूत नौसेना नहीं थी। इसलिए उन्होंने समुद्र पार कर इस द्वीप पर अधिकार नहीं किया। तब से ताइवान खुद को रिपब्लिक ऑफ चाइना मानता है। लेकिन चीन इस द्वीप को अपना अभिन्न अंग मानता आया है।

गलवान घाटी में वीरगति को प्राप्त हुए 20 जवानों के नामों की सूची जारी, सबसे ज्यादा बिहार रेजिमेंट के

भारत और चीन के सैनिकों के बीच लद्दाख सीमा पर हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए। जबकि चीन के 43 सैनिक गंभीर रूप से हताहत बताए जा रहे हैं। लद्दाख में हुई हिंसक झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसी बीच भारतीय सेना की ओर से चीन के हमले में वीरगति को प्राप्त हुए जवानों की लिस्ट जारी कर दी गई है।

लद्दाख सीमा पर चीन के साथ भारतीय सैनिकों की हिंसक झड़प में शहादत देने वाले कर्नल संतोष बाबू के साथ 19 और जवान शहीद हुए हैं। इसमें नायब सूबेदार सतनाम सिंह और मनदीप सिंह के साथ बिहार की दो अलग-अलग रेजिमेंट के 13, पंजाब रेजिमेंट के तीन, 81 माउंट बिग्रेड सिग्नल कंपनी रेजिमेंट का एक, 81 फील्ड रेजिमेंट का एक और 3 मीडियम रेजिमेंट के 2 जवान शामिल हैं।

16 बिहार रेजिमेंट: 12 शहीद, इन राज्यों से थे 

  • सिपाही कुंदन कुमार – सहरसा, बिहार
  • सिपाही अमन कुमार – समस्तीपुर, बिहार
  • दीपक कुमार – रीवा, मध्यप्रदेश
  • सिपाही चंदन कुमार – भोजपुर, बिहार
  • सिपाही गणेश कुंजाम – सिंहभूम, पश्चिम बंगाल
  • सिपाही गणेश राम – कांकेर, छत्तीसगढ़
  • सिपाही केके ओझा – साहिबगंज, झारखंड
  • सिपाही राजेश ओरांव – बीरभूम, पश्चिम बंगाल
  • सिपाही सीके प्रधान – कंधमाल, ओडिशा
  • नायब सूबेदार नंदूराम – मयूरभंज, ओडिशा
  • हवलदार सुनील कुमार- पटना, बिहार
  • कर्नल बी. संतोष बाबू – हैदराबाद, तेलंगाना

12 बिहार रेजिमेंट: 1 शहीद

  • सिपाही जयकिशोर सिंह – वैशाली, बिहार

3 पंजाब रेजिमेंट: 3 शहीद

  • सिपाही गुरतेज सिंह – मनसा, पंजाब
  • सिपाही अंकुश – हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश
  • सिपाही गुरविंदर सिंह – संगरूर, पंजाब

3 मीडियम रेजिमेंट: 2 शहीद

  • नायब सूबेदार सतनाम सिंह – गुरदासपुर, पंजाब
  • नायब सूबेदार मनदीप सिंह – पटियाला, पंजाब

81 माउंट बिग्रेड सिग्नल कंपनी: 1 शहीद

  • हवलदार बिपुल रॉय  – मेरठ, उत्तरप्रदेश

81 फील्ड रेजिमेंट: 1 शहीद

  • हवलदार के. पालानी – मदुरै, तमिलनाडु

बता दें कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत से अपील की है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा दें। साथ ही भारत को अपने जवानों पर नियंत्रण रखने की सलाह भी दी है। जिसके बाद भारतीय विदेश मंत्री द्वारा चीन को कड़ा संदेश देते हुए कहा गया कि गलवान घाटी में जो हुआ वह चीन द्वारा पूर्व नियोजित और सुनियोजित कार्रवाई थी, जो इसके बाद की अन्य घटनाओं के लिए जिम्मेदार था।

इससे पहले पीएम मोदी ने कहा था कि सैनिकों का यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। भारत की अखंडता और संप्रभुता सर्वोच्च है और इसकी रक्षा करने से हमें कोई रोक नहीं सकता। भारत शांति चाहता है, लेकिन भारत उकसाने पर हर हाल में मुँहतोड़ जवाब देने में सक्षम है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे जवान चीनी सैनिकों को मारते-मारते वीरगति को प्राप्त हुए हैं।

गौरतलब है कि भारतीय सेना के मुताबिक, चीनी सेना के साथ ये झड़प 15-16 जून की रात हुई। भारतीय सैनिकों का दल कमांडिंग अफसर कर्नल संतोष बाबू की अगुआई में चीनी कैंप में गया था। भारतीय दल कोई हथियार लेकर नहीं गया था। तभी चीनी सैनिकों ने हमला किया। बॉल्डर, पत्थर, कंटीले तारों और कील लगे डंडों से हुए हमले में कमांडिग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू और दो जवान मौके पर वीरगति को प्राप्त हो गए। मंगलवार (जून 16, 2020) रात को 20 जवानों के बलिदान की पुष्टि हुई।

AAP की MLA आतिशी कोरोना की चपेट में, घर में हुईं क्वारंटाइन, कहा- स्वास्थ्य विभाग के साथ कर रही थी काम

AAP पार्टी MLA आतिशी मार्लेना कोरोना वायरस की चपेट में आ गई है। बुधवार (जून 17, 2020 ) को उनकी कोरोना वायरस रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। फिलहाल उन्होंने घर में ही खुद को सेल्फ क्वारंटाइन कर लिया है।

आतिशी मार्लेना दिल्ली कालकाजी विधानसभा सीट से विधायक है। कोरोना वायरस रिपोर्ट के पॉजिटिव आने के बाद आतिशी ने बताया कि कुछ दिनों से उन्हें हल्की खाँसी और सर्दी शिकायत थी। आतिशी ने मंगलवार (जून 16, 2020) को COVID-19 जाँच करवाई थी, जिसकी रिपोर्ट आज आई है।

कोरोना वायरस परिक्षण के पॉजिटिव आने के बाद उन्होंने बताया कि वो कुछ दिनों से स्वास्थ्य विभाग के साथ मिल कर काम कर रहीं थीं। जहाँ 11 जून को एक अधिकारी के कोरोना पॉजिटिव होने की वजह से ही उनमें COVID-19 के लक्षण पाए गए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी के पॉजिटिव आने पर उन्होंने 11 जून से ही खुद को घर पर आइसोलेट कर लिया था।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर उनके जल्द स्वस्थ होने के कामना की है। केजरीवाल ने कहा – “कोरोना के खिलाफ लड़ाई में आतिशी जी का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। मुझे उम्मीद है वो जल्द से जल्द स्वस्थ हो कर एक बार फिर लोगों की सेवा में लग जाएँगी।”

केजरीवाल में भी नजर आए थे लक्षण

कुछ दिन पूर्व ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी हल्के बुखार और गले में खराश की शिकायत के बाद खुद को घर में ही आइसोलेट कर लिया था। जिसके बाद उनका कोरोना वायरस टेस्ट कराया गया था। हालाँकि, केजरीवाल कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं पाए गए और उनकी जाँच रिपोर्ट निगेटिव आई थी।

केंद्र ने बढ़ाया मदद के लिए हाथ

दिल्ली में कोरोना का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा हैं। जिसके मद्देनजर हुए हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों के साथ राजधानी के बदतर होते हालात पर चर्चा की थी।

दिल्ली में बढ़ते मरीज और घटते बेड की संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने रेलवे के 500 कोच जिसके अंदर 8000 बेड की सुविधा दी हैं। कंटेनमेंट जोन में कॉन्‍टैक्‍ट ट्रेसिंग, टेस्टिंग बढ़ाने, समाज सेवी संस्थाओं को मदद के लिए आगे आने व ऑक्सीजन सिलेंडर, वेंटिलेटर, पल्स ऑक्सीमीटर व अन्य सभी उपकरणों की कमी को पूरा करने जैसी तमाम मदद करने का भरोसा दिया है।

45 हजार पहुँचने वाले हैं दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले

स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के मुताबिक, दिल्ली में अब तक संक्रमण के कुल 44,688 मालमे सामने आए हैं। इनमें 26,351 एक्टिव केस है। 16,500 लोग इस संक्रमण से ठीक हो कर घर जा चुके हैं। जबकि 1,837 लोगों ने इस महामारी की वजह से अपनी जान गँवा दी है। भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों के लिहाज से महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद देश में दिल्ली तीसरे स्थान पर है।

सलमान, करन जौहर, यशराज के बॉयकॉट के लिए ऑनलाइन पिटीशन, 15 लाख से अधिक लोगों ने किया साइन

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद से ही बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी लोग बॉलीवुड के बड़े फिल्ममेकर और एक्टर्स के विरोध में आ गए हैं। जयश्री शर्मा श्रीकांत नाम के एक फेसबुक यूजर ने भाई-भतीजावाद फैलाने वालों के बहिष्कार के लिए ऑनलाइन पिटीशन शुरू की है। 

जयश्री शर्मा ने यह पिटीशन 16 जून को शाम 6: 47 बजे Change.org पर शुरू की। उन्होंने इसे फेसबुक पर शेयर करते हुए लिखा, प्लीज शेयर करें। हम फिल्म इंडस्ट्री में बदलाव ला सकते हैं और बार-बार ऐसा कुछ होने से रोक सकते हैं। जयश्री ने 10 लाख साइन का लक्ष्य लेकर यह पिटीशन शुरू किया थै, लेकिन खबर लिखने तक इस पर 15 लाख से अधिक लोग साइन कर चुके थे।

जयश्री ने इस पिटीशन में बॉलीवुड के दिग्गज फिल्ममेकर्स करन जौहर, यशराज फिल्म्स और सलमान खान के बहिष्कार की माँग करते हुए लिखा, “बॉलीवुड की नेपोटिज्म गैंग कैसे टैलेंट को मार रही है, जरूर पढ़ें। हम इस पिटीशन के जरिए नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम और हॉटस्टार से अपील करते हैं कि वे ऊपर दिए गए मीडिया हाउस की फिल्मों को प्रमोट न करें। टाँग खिंचाई बंद करें और स्ट्रगलिंग एक्टर्स की मदद करें।”

उन्होंने लिखा कि सुशांत सिंह को लगभग ट्रोल किया गया, रैगिंग की गई और धमकाया गया। वह करण जौहर, आलिया, कपूर परिवार के बच्चों जैसे स्कूल ड्रॉपआउट के विपरीत एक बुद्धिमान, समझदार और अच्छा पढ़ा लिखा आदमी था। सुशांत सिंह एक सकारात्मक इंसान थे। ये बातें उनके इंस्टा पोस्ट से भी झलकता है।

करण जौहर ने सुशांत के साथ नेटफ्लिक्स पर Drive नामक बेकार सी फिल्म बनाई और उनका करियर खत्म कर दिया। उन्हें 2 साल से प्रताड़ित किया जा रहा था, क्योंकि उन्होंने यशराज फिल्म्स की कुछ फिल्मों के ऑफर को ठुकराकर शेखर कपूर की PAANI मूवी में काम करना चुना। ‘सोनचिड़ैया’ मूवी के दौरान उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने पोस्ट में कहा था कि वो उनकी फिल्म जरूर देखें, वरना उन्हें बॉलीवुड से निकाल दिया जाएगा, क्योंकि इंडस्ट्री में उका कोई गॉडफादर नहीं है।

जयश्री ने बताया कि फरवरी में केआरके ने ट्वीट किया था कि साजिद नाडियाडवाला, सलमान खान, बालाजी, करन जौहर, दिनेश विजान, भंसाली, टी-सीरीज सभी ने सुशांत सिंह राजपूत का बहिष्कार किया था। अब वो सिर्फ टीवी या शॉर्ट फिल्में ही कर सकते थे। जिस शख्स को पूरी दुनिया ही छोड़ दे तो उस इंसान के पास सुसाइड के अलावा कौन सा रास्ता रहेगा? कोई नहीं जानता कि एक गैंग इंसान का बहिष्कार भी कर सकती है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में बिहार के मुजफ्फरपुर में एक वकील सुधीर कुमार ओझा ने सलमान खान व करण जौहर सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा दाखिल किया है। इसमें कंगना रनौत और सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह समेत चार लोगों को गवाह बनाया है। यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 306, 109, 504 और 506 के तहत दर्ज कराया गया है। कोर्ट ने इसकी सुनवाई के लिए तीन जुलाई की तारीख तय की है। मुकदमें के अन्य आरोपितों में बॉलीवुड की हस्तियाँ आदित्य चोपड़ा, शाजिद नाडियावाला, संजय लीला भंसाली, एकता कपूर, दिनेश विजया, टी-सीरीज के भूषण कुमार भी शामिल हैं।

एकता कपूर का इंस्टाग्राम पोस्ट

एकता इस बात से बेहद खफा हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए नाराजगी जताई है। एकता कपूर ने लिखा, “सुशी (सुशांत सिंह राजपूत) को कास्ट न करने को लेकर मेरे खिलाफ केस करने के लिए शुक्रिया। वह भी तब जबकि मैंने ही उन्हें लॉन्च किया था। मैं बता नहीं सकती कि ऐसी घुमावदार और पेचीदा थ्योरी को देखकर मैं कितनी दुखी हूँ। प्लीज सुशांत के दोस्तों और परिवारवालों को शांति से उनके जाने का दुख मनाने दो। सच जल्द ही बाहर आ जाएगा। इस पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं होता।”