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दिल्ली दंगों को लेकर पिंजड़ा तोड़ की देवांगना कलिता पर भी UAPA के तहत मामला दर्ज

दिल्ली पुलिस ने उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों के मामले की जाँच को आगे बढ़ाते हुए देवांगना कलिता के खिलाफ गैर कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया है। वह पिंजड़ा तोड़ की दूसरी ऐसी सदस्य है जिसके खिलाफ UAPA के तहत कार्रवाई की गई है।

जेएनयू की छात्रा और फार-लेफ्ट ग्रुप पिंजरा तोड़ की कार्यकर्ता पर दिल्ली के कुछ हिस्सों में दंगे भड़काने की सोची-समझी साजिश और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के लिए आतंकवाद विरोधी आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

उसके वकील ने बताया कि उस पर देशद्रोह, हत्या के प्रयास, हत्या, आपराधिक साजिश और धर्म, नस्ल, जन्मस्थान आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इससे पहले पिंजड़ा तोड़ की नताशा नरवाल के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने UAPA के तहत मामला दर्ज किया था। फरवरी में हुई हिंसा के मामले में नताशा नरवाल ओर देवांगना कलिता को 23 मई को गिरफ्तार किया था। 24 मई को दोनों को कोर्ट में पेश किया गया था। लेकिन दोनों को जमानत मिल गई थी। इसके फौरन बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों को हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा और आपराधिक साजिश के आरोप में गिरफ्तार कर पूछताछ के लिए दो दिन का रिमांड ले लिया था। 

देवांगना इस समय न्यायिक हिरासत में है। यह चौथा मामला है जिसके तहत कालिता को यूएपीए मामले में कुछ सप्ताह की अवधि में गिरफ्तार किया गया है। दो अन्य मामले उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगों से संबंधित हैं, जबकि एक मामला पिछले साल दिसंबर की शुरुआत में हुए हिंसा से जुड़ा है।

पहले हुई गिरफ्तारी में उसे अदालत ने जमानत दे दी थी, लेकिन दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उसे दंगों से संबंधित एक हत्या के मामले में फिर से गिरफ्तार कर लिया था। बाद में फिर 30 मई को उसे पिछले साल दिसंबर में पुरानी दिल्ली के दरियागंज में दंगे भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मगर इस मामले में भी उसे जमानत दे दी गई थी।

नताशा नरवाल और देवांगना कलीता जेएनयू की छात्राएँ हैं। कलीता सेंटर फॉर वीमेन स्टडीज में एमफिल, जबकि नरवाल सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज की पीएचडी की छात्रा है। दोनों पिंजरा तोड़ संगठन की संस्थापक सदस्य हैं, जिसे 2015 में स्थापित किया गया था। 

पिंजरा तोड़ के सदस्यों ने 22 फरवरी की शाम को नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के लिए स्थानीय निवासियों को भड़काया और उन्हें जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर इकट्ठा होने के लिए कहा। पूछताछ में खुलासा हुआ था कि नताशा और देवांगना ने लोगों को भड़काने के लिए पूरी रणनीति तैयार की थी। 

नताशा और देवांगना ने साजिश रच के 66 फूटा सड़क को ठप्प करवाया था। दोनों का काम जाफराबाद तक ही सीमित नहीं था। इन्होंने कई अन्य इलाकों में घूम-घूम कर लोगों को भड़काया और दंगों में भाग लेने को उकसाया।

दिल्ली दंगों को लेकर अब तक सात लोगों पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज हुआ है। इनमें आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन, मीरान हैदर, सफूरा जरगर, आसिफ इकबाल तन्हा शामिल हैं।

PAK के पूर्व गृहमंत्री रहमान मलिक ने मेरे साथ रेप किया, पूर्व PM गिलानी ने की बदसलूकी: अमेरिकी फिल्मकार सिंथिया

अमेरिकी फिल्मकार और ब्लॉगर सिंथिया रिची (Cynthia D Ritchie) ने पाकिस्तानी नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री रहमान मलिक (Rahman Malik) ने 2011 में अपने आवास पर उनके साथ रेप किया था।

सिंथिया लंबे समय से पाकिस्तान में रह रही हैं। उन्होंने पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मखदूम शहाबुद्दीन पर भी इस्लामाबाद स्थित राष्ट्रपति भवन में बदसलूकी के आरोप लगाए हैं। उस वक्त आसिफ अली जरदारी पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे।

फेसबुक पर लाइव वीडियो सेशन के दौरान सिंथिया रिची ने कहा कि 2011 में रहमान ने उनके साथ बलात्कार और यौन उत्पीड़न किया था। उस समय पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) सत्ता में थी। पीपीपी के दो अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी उनका शोषण किया था। इस मामले में अब रिची ने जाँच की माँग की है। रिची का कहना है कि उनके पास इसको लेकर कई सबूत हैं और वह जरूरत पड़ने पर उसे जरूर पेश करेंगी।

रिची के मुताबिक, घटना 2011 में उस वक्त की है जब वो राष्ट्रपति भवन में रहती थीं। खास बात ये है रिची अब प्रधानमंत्री इमरान खान की सोशल मीडिया टीम में हैं। इस घटना के दौरान बेनजीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) सत्ता में थी। फिलहाल, पार्टी की कमान बेनजीर के बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी के हाथ में है।

सिंथिया डॉन रिची, जिनके कई वर्तमान पाकिस्तानी सत्तारूढ़ संस्था से करीबी संबंध हैं, ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अन्य वरिष्ठ नेताओं द्वारा उनके साथ मारपीट की गई थी। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके ई-मेल खातों को हैक कर लिया गया और लोगों ने उसकी जासूसी की।

सिंथिया ने कहा, “सीनेटर रहमान मलिक द्वारा मेरा यौन उत्पीड़न 2011 में आंतरिक मंत्री के आवास पर हुआ था। मैंने सोचा कि यह मेरे वीजा के बारे में आयोजित एक बैठक थी, लेकिन मुझे फूल/ एक नशीला पेय दिया गया था। मैं चुप रही।”

सिंथिया ने यह भी कहा कि उन्होंने घटना के बारे में 2011 में पाकिस्तान में मौजूद अमेरिकी दूतावास को सूचित किया था, लेकिन, वहाँ से सही जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि उस दौरान अमेरिका और पाकिस्तान के बीच अच्छे रिश्ते नहीं थे। रिची ने पीपीपी पर गंदी राजनीति का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मैं चाहती हूँ कि दुनिया मेरी बात सुने।”

रिची ने फेसबुक पर बताया, “मैं कई सालों तक खामोश रही। इसकी वजह यह थी कि पीपीपी के नेता मुझे धमकी देते रहे। इस वजह से मैं कुछ बोल नहीं पाई। अब वक्त आ गया कि सारी दुनिया को इसका पता चले। इसी वजह से मैंने सबके सामने यह सच रखा।”

सिंथिया डी रिची ने शनिवार (जून 06, 2020) सुबह कुछ ट्वीट किए। जिनमें लिखा है, “पीपीपी नेता मेरे खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। रेप कल्चर बंद होना चाहिए। महिलाएँ एकजुट हों और बच्चों को इस घृणित काम के बारे में जानकारी दें। वैसे यह सिर्फ पीपीपी का मामला नहीं है। कई सियासी पार्टियों ने मेरा शोषण किया। मैंने कभी परिवार को भी इन घटनाओं के बारे में नहीं बताया। मैंने हमेशा पाकिस्तान की एक सॉफ्ट इमेज बनाने के लिए मेहनत की। हालाँकि मेरे अधिकांश मामलों में, जिनमें से दो का उल्लेख नहीं किया गया है, वे या तो PK लॉबिस्ट थे या 2 टियर पीपीपी।”

अमेरिकी ब्लॉगर सिंथिया रिची कथित तौर पर सोशल मीडिया पर पीपीपी नेताओं की निंदनीय तस्वीरें भी साझा कर रही हैं। सिंथिया, जो एक फिल्म निर्माता, पत्रकार और ब्लॉगर हैं, ने हाल ही में पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो को निशाना बनाकर विवाद खड़ा कर दिया था, जिसके लिए पीपीपी ने उनके खिलाफ एक FIR दर्ज की थी।


इस बीच, पाकिस्तान में विपक्षी दलों ने दावा किया है कि देश में एक पर्यटक, पत्रकार और बेली डांसर के रूप में आई सिंथिया पूर्व पीएम के खिलाफ इस तरह की भद्दी टिप्पणी कर आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रही थी।

5 बच्चों के बाप अब्दुल ने 20 साल छोटी प्रिया को प्रेम जाल में फँसाया, निकाह के 7 महीने बाद फॉंसी से लटकी मिली

हरियाणा के पानीपत में 19 साल की प्रिया की मौत के मामले में पुलिस ने चार लोगों पर मामला दर्ज किया है। बुधवार (3 मई 2020) को प्रिया फाँसी के फंदे से लटकी मिली थी। 7 महीने पहले ही उसने खुद से करीब 20 साल बड़े अब्दुल उर्फ सलमान से भागकर निकाह किया था।

प्रिया की माँ गीता देवी के अनुसार अब्दुल ने उसे लव जिहाद का शिकार बनाया था। उन्होंने अब्दुल, उसकी पत्नी बेगम, पूजा और बेबी पर अपनी बेटी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज कराया है।

प्रिया की माँ ने शिकायत में बताया कि अब्दुल ने उनकी बेटी को बहला फुसलाकर प्यार में फँसाया। बाद में उसे घर वालों की मर्जी के खिलाफ भगा कर ले गया और निकाह कर ली। गीता देवी के अनुसार प्रिया को शादी के बाद पता चला कि अब्दुल पहले से ही 5 बच्चों का बाप है। यहाँ तक कि प्रिया से शादी के बाद भी उसका किसी और महिला के साथ अवैध संबंध था। इसका विरोध करने पर वह प्रिया को मारता-पीटता था। कई बार तो उसको जान से मारने की धमकी भी दी थी।

प्रिया की माँ ने बताया कि 2 जून को उनकी बेटी ने फ़ोन कर अब्दुल और उसके अफेयर के बारे में बताया था। मगर भागकर शादी करने की वजह से वो उससे नाराज थी और उस वक्त उन्होंने अपनी बेटी की बातों को अनसुना कर दिया। फिर बुधवार को उन्हें प्रिया के मौत की खबर मिली।

उन्होंने बताया कि जब वह बेटी के घर पहुँची तो पाया कि कमरे के दरवाजे को किसी चीज़ से काटा गया था। साथ ही कमरे की हालत देखकर ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ करनी की कोशिश की हो।

गीता देवी का यह आरोप भी है प्रिया ने आत्महत्या नहीं की है। अब्दुल और उसकी प्रेमिका ने मिल कर उसकी हत्या की और इसे आत्महत्या का रूप दे दिया। उन्होंने पुलिस पर भी मामले की दबाने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि मामला दर्ज करने के बाद से उन्हें भी धमकी दी जा रही है।

मॉडल टाउन थाना प्रभारी सुनील कुमार के अनुसार आरोपियों के खिलाफ आइपीसी की धारा 306 /506/34 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आगे जाँच जारी है। फरार आरोपियों के खिलाफ कुछ अहम सुराग हाथ लगे हैं। उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

गौरतलब है कि कथित तौर पर लव जिहाद में हत्या का एक मामला हाल ही में मेरठ से भी सामने आया है। लुधियाना की एकता देशवाल को शाकिब ने अमन बनकर प्रेम जाल में फॅंसाया और उसके घर से भगाकर ले गया। जब एकता को उसके मुस्लिम होने की बात पता चली तो शाकिब ने घर वालों के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी। हत्या कितनी निर्ममता से की गई थी इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एकता की लाश का सिर और हाथ गायब थे।

दरभंगा में धमाके की जगह से मिले सुतली लपेटे बम, केन बम की प्लेट; नजीर के बच्चों के बयान भी बेमेल: रिपोर्ट्स

बिहार के दरभंगा जिले में शुक्रवार (जून 5, 2020) को हुए धमाके को लेकर स्थिति पूरी तरह अब भी स्पष्ट नहीं है। पुलिस जिसे प्रथम दृष्टया पटाखा बनाने के दौरान हुआ विस्फोट बता रही है, उसको लेकर आज के अखबारों में प्रकाशित रिपोर्ट में कई तरह के दावे किए जा रहे हैं।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट बताती है कि घटनास्थल के आसपास से सुतली लपेटे कई बम और केन बम में इस्तेमाल की जाने वाली प्लेटें भी मिली है। इसमें बताया गया है कि इसके अंदर से बारूद की गंध वाला धुआँ निकल रहा था। नगर एसपी ने बताया कि नजीर के घर से पटाखा बनाने के कई सामान मिले हैं। वह बिना लाइसेंस के दिवाली और छठ में पटाखे बेचता था।

साभार: दैनिक जागरण

हिन्दुस्तान ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि नजीर के घर में वर्षों से अवैध रूप से पटाखे बनाने का काम चलता था। स्थानीय लोगों के हवाले से बताया है कि वर्षों से मुहल्ला बारूद की ढेर पर बैठा था। विस्फोट इतना तेज था कि लोगों को समझ में ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है? कुछ ने जलजला आने की बात कही तो कुछ ने धरती फटने की।

हिन्दुस्तान में प्रकाशित रिपोर्ट

हिन्दुस्तान के अनुसार लोगों ने पुलिस के कामकाज पर भी सवाल उठाए। लोगों का कहना था कि अगर पुलिस सही तरीके से छानबीन करे तो शहर में कई अन्य जगहों पर अवैध रूप से पटाखे बनाने के कारोबार की बात सामने आ सकती है।

साथ ही बताया जा रहा है कि घटना में घायल नजीर के बच्चों का बयान घटना से मेल नहीं खा रहा है। बच्चे को जख्मी हालत में अस्पताल ले जाया गया तो उसने सिलिंडर फटने से जख्मी होने की बात पुलिस को बताई। वहीं बाद में इलाज के लिए पहुँचाई गई युवती ने पुलिस को बताया कि वह फ्रिज में विस्फोट होने की वजह से घायल हो गई। 

फ्रिज फटने से जख्मी होने की बात दैनिक भास्कर में भी रिपोर्ट की गई है।

साभार: दैनिक भास्कर

प्रभात खबर ने भी अपनी रिपोर्ट स्थानीय लोगों के हवाले से बताया कि नजीर की गतिविधि पहले से ही संदिग्ध थी।

प्रभात खबर में प्रकाशित खबर

ऑपइंडिया को भी कुछ चश्मदीदों ने बताया था कि मोहम्मद नजीर काफी समय से पटाखा बनाने का कारोबार घर में ही कर रहा था। यदि पटाखे की ही बात सही है कि तो इस बात का जवाब मिलना चाहिए कि घनी आबादी वाले इलाके में यह धंधा कैसे चल रहा था? क्या प्रशासन को इसकी खबर नहीं थी और अगर थी तो फिर उन्होंने इसे बंद करवाने की दिशा में कोई कदम क्यों नहीं उठाया?

दूसरा सवाल मीडिया रिपोर्टों से खड़ा होता है। वह यह है कि क्या पटाखे की आड़ में मोहम्मद नजीर घर में बम बना रहा था? फिलहाल पुलिस इस बात की जाँच में जुटी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि दरभंगा पुलिस इन सवालों के जवाब जल्द ही तलाश लेगी। मामले में पुलिस ने नजीर, उसकी पत्नी हसीना बेगम और दो बेटों गुलाब नदाफ एवं फूल बाबू को गिरफ्तार किया है।

दिल्ली दंगों में गिरफ्तार मुस्लिम हीरो, प्रधानमंत्री कागजी शेर: द विनोद दुआ शो फैला रहा फर्जी खबरें, FIR

पत्रकार विनोद दुआ पर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज किया है। बीजेपी प्रवक्ता नवीन कुमार की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है। दुआ पर फर्जी न्यूज़ फैलाने और समाज में गड़बड़ी पैदा करने वाले बयान देने के आरोप हैं।

नवीन कुमार ने अपनी शिकायत में ‘द विनोद दुआ शो’ के माध्यम से फर्जी खबर फैलाने, अनर्गल बातों व फालतू के तर्कों को वीडियो के माध्यम से लाकर समाज में जहर फैलाने का आरोप लगाया है। यह भी कहा है कि दुआ ने प्रधानमंत्री को ‘कागजी शेर’ बताया था। उन्होंने एफआईआर को लेकर एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है।

उन्होंने कहा है कि दुआ ने दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन को गलत तरीके से पेश किया। प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और भाजपा नेता कपिल मिश्रा को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए झूठा आरोप लगाया।

नवीन ने आगे कहा कि दुआ ने दिल्ली दंगों को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इशारे पर दिल्ली पुलिस द्वारा किया गया कृत्य करार दिया था, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत सरकार और दिल्ली पुलिस की छवि को खराब करता है। साथ ही दुआ ने बीजेपी नेताओं पर दिल्ली दंगों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए दंगे की साजिश रचने के मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपित मुस्लिम नेता को हीरो बताया था।

अपने ऊपर दर्ज किए गए एफआईआर की जानकारी दुआ ने फेसबुक के जरिए दी है। उन्होंने कहा है कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उनके खिलाफ केस दर्ज किया है।

क्राइम ब्रांच के अनुसार विनोद दुआ पर आईपीसी की धारा 290 (अन्यथा दिए गए मामलों में सार्वजनिक उपद्रव के लिए सजा) और 505 (सार्वजनिक शरारत के लिए अनुकूल बयान) और 505 (2) (विभिन्न समुदायों के बीच झूठे बयान, दुश्मनी, नफरत पैदा करने या बढ़ावा देन) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जोधपुर में पुलिस कार्रवाई को ‘भारत का जॉर्ज फ्लॉयड मोमेंट’ बता खतरनाक एजेंडे को हवा दे रही मीडिया

अमेरिका के मिनियापोलिस में अफ्रीकी-अमेरिकी व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या ने हड़कंप मचा रखा है। अमेरिका के कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने नस्लीय भेदभाव के विरोध में सड़कों पर उतर प्रदर्शन किया।

अश्वेत अमेरिकी नागरिक फ्लॉयड की मौत के वीडियो ने दुनिया भर में कई हिंसक विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया। हालाँकि, आरोपित पुलिसउस अधिकारी, डेरेक चाउविन को थर्ड-डिग्री हत्या और दूसरी डिग्री की हत्या के आरोप में निकाल दिया गया है।

फ्लॉयड की दुर्भाग्यपूर्ण मौत ने न केवल अमेरिका में, बल्कि दुनिया भर में विरोध प्रदर्शनों को अंजाम दिया, जहाँ प्रदर्शनकारी या तो अमेरिका में नस्लीय भेदभाव के शिकार लोगों के साथ एकजुटता के साथ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं, या फिर अपने देशों में कथित असमानताओं का विरोध कर रहे हैं।

जॉर्ज फ़्लॉयड की मृत्यु की खबर से दुनियाभर में दहशत का माहौल है तो वहीं, भारतीय मीडिया राजस्थान की एक ऐसी घटना, जिसमें एक आरोपित ने पुलिसकर्मियों से मारपीट की, और अफ्रीकी-अमेरिकी की हत्या के बीच एक खतरनाक और बेहद अव्यवहारिक समानता को धरातल देने का काम कर रहा है।

पुलिसकर्मी की बर्बरता जॉर्ज फ्लॉयड की मौत की वजह बताई जा रही है

दरअसल एक उपद्रवी और पुलिस अधिकारियों के बीच हाथापाई का वीडियो, जिसमें पुलिसकर्मी ने इस आदमी को जमीन पर ऐंठ रखा है, इंटरनेट पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। भारत के कई मीडिया संस्थानों ने इस घटना को अमेरिका की घटना के साथ तुलना कर पेश किया, जहाँ अफ्रीकी-अमेरिकी जॉर्ज फ्लॉयड को मिनियापोलिस के अधिकारियों द्वारा उनकी गर्दन सड़क पर घुटनों से दबाकर रखी, जिससे उनकी मौत हो गई।

‘टाइम्स नाउ’ चैनल ने इस घटना को ‘भारत के जॉर्ज फ्लॉयड क्षण’ के रूप में दिखाया, जिसमें दावा किया गया कि पुलिस ने एक व्यक्ति की गर्दन पर प्रहार करते हुए हमला किया।

टाइम्स नाउ से लिया गया स्क्रीनशॉट

ABP न्यूज चैनल ने भी पुलिस और इस व्यक्ति के बीच झड़प को भारत में ‘जॉर्ज फ्लॉयड जैसी घटना’ के रूप में दिखाकर पेश किया है।

ABP न्यूज़ ने इसे भारत का ‘जॉर्ज फ्लॉयड मोमेंट’ नाम दिया है

कई अन्य संगठनों ने भी झड़प के इस वीडियो, जो कि जोधपुर में पुलिस अधिकारियों और एक गुंडे के साथ हुई, की तुलना जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या वाले वीडियो से करने की कोशिश की है। यहाँ इस घटना का पूरा वीडियो है;

क्या है जोधपुर में पुलिस से झड़प वाले वीडियो की वास्तविकता

पुलिस के साथ झड़प की घटना का यह वीडियो राजस्थान के जोधपुर से संबंधित है। पुलिस के जवानों ने सोमाकरण नाम के व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान पर बिना मास्क के पाया था। सार्वजनिक स्थानों पर मास्क न पहनने के कारण उसे गिरफ्तार कर लिया। मास्क पहनने के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए उसका चालान करने की कोशिश की।

लेकिन, इस आदमी ने पुलिस की बात मानने से इनकार करते हुए उनसे उलझ पड़ा, जैसा कि वायरल वीडियो में देखा जा सकता है। इस उपद्रवी तत्व द्वारा हमला किए जाने के बाद, पुलिस अधिकारियों ने सोमाकरण नाम के इस शख्स को नीचे गिरा दिया और उसे नियंत्रण में लाने के लिए उसकी गर्दन पर घुटने लगा दिए।

जॉर्ज फ्लॉयड और जोधपुर, ये दोनों घटनाएँ एकदम विपरीत हैं

भारतीय मीडिया द्वारा सनसनी बनाई जा रही यह घटना संयुक्त राज्य अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के एकदम विपरीत है। फ्लॉयड ने पुलिस अधिकारियों को मारने के लिए हिंसक तरीके नहीं अपनाए। इसके बजाए, एक कानून का पालन करने वाले नागरिक की तरह ही फ्लॉयड ने पुलिस के निर्देशों का अनुपालन किया और फिर भी उनके साथ पुलिस ने दुर्व्यवहार किया, संभवतः जिस कारण उनकी मृत्यु हो गई।

अमेरिका में अश्वेतों के खिलाफ किए गए नस्लीय अपराधों का एक बड़ा इतिहास है। जॉर्ज फ्लॉयड अमेरिकी पुलिस द्वारा संस्थागत अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय के खिलाफ संस्थागत नस्लीय अत्याचार का शिकार था, जिसका अफ्रीकी अमेरिकी मूल के लोगों के खिलाफ बर्बरता बरतने का एक लंबा इतिहास रहा है।

इसके विपरीत, जोधपुर की घटना में पुलिस अधिकारियों द्वारा एक गलत काम करने वाले को रोकने की कोशिश करने का सन्दर्भ था, जिसने कोरोना वायरस महामारी के बीच न केवल लॉकडाउन संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया, बल्कि मानदंडों की अवहेलना के लिए दोषी ठहराए जाने पर उनके साथ मारपीट भी की।

यहाँ पर अंतर स्पष्ट है कि पुलिस ने जानबूझकर इस उपद्रवी के खिलाफ हमला नहीं बोला। उनके साथ मारपीट करने के बाद ही उन्हें इस व्यक्ति के खिलाफ कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर किया गया। इसके अलावा, अमेरिका में फ्लॉयड की मृत्यु ने एक बार फिर नस्लीय भेदभाव को सामने ला दिया, जो अमेरिकी समाज का कलंक रहा है।

जॉर्ज फ्लॉयड की मौत और जोधपुर की इस घटना के बीच समानता साबित करने का कुत्सित प्रयास सिर्फ और सिर्फ भारतीय मीडिया के प्रोपेगेंडा का हिस्सा है। राष्ट्र विरोधी लॉबी पीएम मोदी से गहरी नफरत के कारण निरंतर ऐसे मुद्दों को भड़काने के लिए तत्पर देखी गई है।

गर्भवती हथिनी की हत्या: बीजेपी सांसद मेनका गाँधी के खिलाफ FIR, कहा था- केरल में हर तीसरे दिन हाथी मारा जाता है

केरल के पलक्कड़ में गर्भवती हथिनी की मौत के मामले में भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गाँधी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ यह मामला गर्भवती हथिनी की मौत के मामले में कथित रूप से भड़काऊ टिप्पणी करने को लेकर दर्ज किया गया है। मेनका गाँधी के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 के तहत FIR दर्ज की गई है। मलप्पुरम जिले के पुलिस प्रमुख अब्दुल करीम ने इसकी पुष्टि की।

बता दें कि बीजेपी सांसद के खिलाफ एक ही कारण से सात शिकायतें की गई थी, जिसके बाद उन सभी को लेकर एक FIR दर्ज की गई है। शिकायत करने वालों में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML), यूथ कॉन्ग्रेस, डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया, सॉलिडैरिटी यूथ मूवमेंट और सुप्रीम कोर्ट के वकील केआर सुभाष चंद्रन शामिल हैं।

सुभाष चंद्रन ने गुरुवार को जिले के पुलिस अधीक्षक के पास शिकायत दर्ज कराई और मेनका गाँधी एवं अन्य के खिलाफ FIR दर्ज करने की माँग की। उन्होंने अपनी शिकायत में बीजेपी सांसद एवं अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 153ए और 12बी के तहत FIR दर्ज करने का अनुरोध किया था।

शिकायत में कहा गया कि मल्लपुरम पर मेनका गाँधी की टिप्पणी अपमानजनक है और जिले के निवासियों की छवि को खराब करने के लिए दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हथिनी की दुर्भाग्यपूर्ण मौत पलक्कड़ जिले के मन्नारकाड इलाके में हुई, जबकि सोशल मीडिया पर एक समूह ने इसे सांप्रदायिक रंग देने के लिए मुस्लिम बहुल मल्लपुरम जिला के लोगों के खिलाफ नफरत फैलाया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मेनका गाँधी ने दंगा भड़काने की मंशा से मलप्पुरम के लोगों के खिलाफ आधारहीन आरोप लगाए हैं।

हथिनी की मौत को लेकर मेनका गाँधी ने कहा था, “ये हत्या है। मल्लपुरम ऐसी घटनाओं के लिए कुख्यात है। यह देश का सबसे हिंसक राज्य है। यहाँ लोग सड़कों पर जहर फेंक देते हैं, जिससे 300 से 400 पक्षी और कुत्ते एक साथ मर जाएँ। केरल में हर तीसरे दिन एक हाथी को मार दिया जाता है। केरल सरकार ने मल्लपुरम मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। ऐसा लगता है, वो डरे हुए हैं।”

इसके साथ ही शुक्रवार (जून 5, 2020) को खुद को केरल साइबर वॉरियर्स कहने वाले एक समूह ने मेनका गाँधी की संस्था बेबसाइट पीपुल फॉर एनिमल्स, इंडिया की वेबसाइट को हैक कर लिया। इसके बाद कथित साइबर वॉरियर्स ने हैक किए गए पेज पर एक लंबा पोस्ट किया, जिसमें गर्भवती हथिनी की मौत पलक्कड़ में होने को लेकर Google मैप दिखाया गया।

जानकारी के मुताबिक गर्भवती हथिनी की मौत के बाद पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि उसके मुँह के अंदर गहरे घाव हो गए थे, जो संभवत: पटाखों के विस्फोट की वजह से थे और इस कारण वह लगभग दो सप्ताह तक कुछ खा नहीं सकी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार ऐसी आशंका है कि मुँह में पटाखे फटने से उसे गहरे घाव हो गए और उस जगह पर सेप्सिस हो गया।

इससे इससे दर्द बढ़ गया और हथिनी लगभग दो सप्ताह तक कुछ खा-पी नहीं सकी। गंभीर दुर्बलता के कारण वह पानी में गिर गई और डूब गई। हथिनी की मौत के एक दिन बाद 28 मई को तैयार शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया कि डूबने के बाद शरीर में पानी भरने के चलते फेफड़ों का काम नहीं करना हथिनी की मौत का कारण था।

उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते एक गर्भवती हथिनी को किसी ने पटाखों से भरा अनानास खिला दिया। पगल के अधिकारियों ने उसे बचाने की भरपूर कोशिश की। कथित तौर पर कुछ स्थानीय लोगों ने 25 मई को इस हथिनी को गाँव में आते हुए देखा था और 27 मई को पूरे दिन पानी में खड़े रहने के बाद उसकी मौत हो गई।

मामले में पी विल्सन नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अब्दुल करीम और उसके बेटे की तलाश की जा रही है।

केरल: गर्भवती हथिनी की हत्या में अब्दुल करीम और उसका बेटा रियाजुद्दीन फरार

केरल में गर्भवती हथिनी की मौत के मामले की जाँच तेज हो गई है। पुलिस ने जानकारी दी है कि मामले के दो आरोपी अभी भी फरार हैं। पलक्कड़ के पुलिस अधीक्षक जी शिवा विक्रम ने फरार होने वाले लोगों के नाम अब्दुल करीम और उसका बेटा रियासुद्दीन बताया है। दोनों ही अंबालाप्पारा के निवासी हैं।

दरअसल दोनों के उस संपत्ति के मालिक होने का संदेह है, जहाँ से आरोपित पी विल्सन को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में दो प्राथमिकी दर्ज की गई है। एक पुलिस ने जबकि दूसरी प्राथमिकी वन विभाग द्वारा दर्ज कराई गई है।

पलक्कड़ में मन्नारक्कड़ पुलिस ने 3 जून को अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। प्राथमिकी के आधार पर धारा 9 बी (1) (बी)(विस्फोटक अधिनियम, 1884) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इस अधिनियम के तहत विस्फोटक रखने, उसका उपयोग करने, बिक्री या एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने पर कारावास की सजा का प्रावधान है।

एक मामला पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम 1960 के सेक्शन की धारा 11(1) के तहत दर्ज किया गया है, जिसमें उपधारा (1) (ए) के तहत पशुओं को पीटना, उनको प्रताड़ित करना, वाहन में ओवरलोड करना, यातनाएँ देना आदि शामिल है।

केरल पुलिस ने इस मामले पी विल्सन नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। खबरों के मुताबिक केरल के वन मंत्री के राजू ने कहा कि पी विल्सन को शुक्रवार (05, 2020) को गिरफ्तार किया गया, जो कि नकदी फसलों और मसालों की खेती करने वाली एक फर्म का कर्मचारी है।

कथित तौर पर आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने जंगली सूअर को डराने के लिए पटाखों से भरे फलों का एक जाल बिछाया था, क्योंकि जंगली सूअर आए दिन उनकी खेती को नष्ट कर देते हैं।

दरअसल अन्नास में रखे पटाखों को खाने से गंभीर रूप से घायल हुई 15 वर्षीय हथिनी की मौत पलक्कड़ में हो गई थी। यह घटना 27 मई को तब सामने आई थी कि जब वन विभाग के अधिकारी मोहन कृष्णन ने हथिनी की मौत के बारे में एक फेसबुक पोस्ट लिखा था।

पटाखा से भरे फल खाने के बाद हथिनी पास के वेल्लियार नदी में जा गिरी। जंगल के अधिकारियों ने भी इसे बचाने की भरपूर कोशिश की। कथित तौर पर कुछ स्थानीय लोगों ने 25 मई को इस हथिनी को गाँव में आते हुए देखा था और 27 मई को पूरे दिन पानी में खड़े रहने के बाद उसकी मौत हो गई।

मृत हथिनी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला है कि अन्नास में पटाखे रखकर उसे खिलाया गया था, जिसके फटने से उसका मुँह गंभीर रूप से घायल हो गया था। मुँह में गहरे घाव के चलते वह दो दिन तक कुछ नहीं खा सकी, जिसके कारण वह कमजोर होकर पानी में ही गिर गई।

उदयपुर: मछली पकड़ने के विवाद में दलित युवक की चाकू मारकर हत्या, जफर, सईद समेत 6 गिरफ्तार

उदयपुर जिले के सराड़ा थाना क्षेत्र में 1 जून को केजड़ तालाब पर मछली पकड़ने के विवाद में एक हिंदू दलित युवक मुकेश मीणा की देर रात चाकू मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना में मुकेश का दोस्त राजू मीणा भी बुरी तरह घायल हो गया। उसका इलाज स्थानीय अस्पातल में चल रहा है।

इस मामले के संबंध में पुलिस ने 6 युवकों को गिरफ्तार किया है। इनका पहचान जफर, सईद, मक्का, अहमदनूर, अकील, फिरोज के रूप में हुई है। इनके ख़िलाफ़ पुलिस ने हत्या, हत्या के प्रयास और SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुकेश की हत्या की सूचना मिलने के बाद उसके घरवालों के समर्थन में अगली सुबह 700 से 1000 दलित लोग एकत्रित हुए। शव का दाह संस्कार करने से इनकार कर दिया। बाद में प्रशासन की ओर से आश्वासन मिलने पर उन्होंने मुकेश के शव का अंतिम संस्कार किया।

मामला दो समुदायों से जुड़ा होने के कारण और इलाके में इकट्ठा भीड़ को देखते हुए पुलिस ने इलाके को हाई अलर्ट पर रखा। मामले को संवेदनशील देखते हुए पुलिस ने आसपास के 12 थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलवाया। इसके साथ ही इंटरनेट सेवा भी सराड़ा में और उसके आसपास के इलाकों में 24 घंटे के लिए बाधित की गई।

पूरा मामला

1 जून को रात 9:30 बजे मुकेश और घायल राजू अपने दोस्तों के साथ केजड़ तालाब में मछली पकड़ने के लिए गए। मगर, वहाँ उन्होंने देखा कि तालाब के पास तीन अन्य युवक पहले से बैठे हुए थे। जिन्होंने बाद में मछली पकड़ने के विवाद पर अपने तीन अन्य साथियों को तालाब के पास बुलाया लिया। वे सभी वहाँ हथियार लेकर आए।

इसके बाद युवकों ने मुकेश और राजू पर वार किया। मुकेश की मौके पर मौत हो गई। वहीं राजू को एमबी हॉस्पिटल रेफर किया। इसके बाद परिजनों को सूचना दी गई। रातभर में सूचना आसपास के गाँव में फैल गई।

समुदाय की माँग

यहाँ बता दें कि इस घटना के तूल पकड़ने के बाद समुदाय के बुजुर्गों ने प्रशासन को पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने 14 बिंदु के साथ कुछ अनुरोध किए। इनमें से कुछ निम्नलिखित हैं-

  • आरोपितों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए
  • मामले में अच्छे से फॉरेंसिक जाँच हो
  • आरोपितों के ख़िलाफ़ सर्च वारंट जारी हो
  • म़तक के परिवार को 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए
  • पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी मिले
  • मुस्लिम समुदाय के लोगों को चावंड, महुवाड़ा और सारदा से हटाकर किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।

जानकारी के मुताबिक, मंगलवार शाम तक पुलिस इस मामले में ग्रामीणों को शांत कराने में असफल थी। मगर, बाद में एसएसपी बिश्नोई और जिलाधिकारी आनंदी ने मामले में संज्ञान लिया, जिसके बाद उन्होंने समुदाय के लोगों को उनकी माँग को लेकर आश्वस्त किया और मुकेश का दाह संस्कार संपन्न हो पाया।

घर में ही ‘बारूद’ का धंधा करता था नजीर? पत्नी और दो बेटों के साथ गिरफ्तार, धमाके से दहल गया था दरभंगा

बिहार का दरभंगा शुक्रवार (5 जून 2020) की दोपहर भीषण धमाके से दहल गया था। विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के आजमनगर दुर्गा मंदिर के पास स्थित मोहम्मद नजीर के घर धमाका हुआ था। धमाके की आवाज करीब एक किलोमीटर तक सुनी गई।

धमाके से नजीर का पूरा मकान जमींदोज हो गया। आसपास के करीब एक दर्जन अन्य घरों को भी नुकसान पहुॅंचा है। नजीर के कुछ परिजन जख्मी भी हैं जिनका डीएमसीएच में इलाज चल रहा है। इनमें तीन बच्चे हैं।

दरभंगा के डीएसपी अनोज कुमार ने ऑपइंडिया से बातचीत में तीन बच्चों के गंभीर रूप से जख्मी होने के पुष्टि की है। पुलिस ने नजीर, उसकी पत्नी और दो बेटों को गिरफ्तार किया है।

एक चश्मदीद ने बताया कि धमाका इतना जोरदार था कि उनका पूरा घर हिल गया। जब उन्होंने बाहर आकर देखा तो नजीर का घर गिरा हुआ था और आसपास काफी भीड़ लगी थी। नजीर के पड़ोस में रहने वाले इस चश्मदीद का दावा है कि वह काफी समय से पटाखे बनाने का काम कर रहा था।

एक अन्य चश्मदीद भरत ने भी बताया कि नजीर पटाखे बनाने का काम करता था। उसके घर में हुए विस्फोट से काफी नुकसान हुआ है। कई घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। गाय को भी चोट आई है। इसके अलावा नजीर के खुद के घर के लोगों को भी चोट पहुँची है। जिन्हें अस्पताल भेजा गया है।

इसी प्रकार, घटना वाली जगह से थोड़ी दूर पर फर्नीचर की दुकान करने वाले सोनू कुमार शर्मा ने बताया कि धमाका इतना जोरदार था कि उन्हें लगा मानो दो-तीन छत उनके ऊपर गिर गए हो। उन्होंने बताया कि धमाके के कारण बगल के घरों में वेंटिलेशन से ईंट-पत्थर के टुकड़े अंदर आ गए थे।

सोनू ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले ही इस जगह दुकान खोली है। इसलिए उन्हें ये नहीं मालूम कि उस घर में क्या होता था? लेकिन जो भी था, इतना खतरनाक था कि उन लोगों को लगा जैसे कोई बम या सिलेंडर फटा हो।

पुलिस के अनुसार पहली नजर में पटाखे के कारण हुआ विस्फोट लग रहा है। मीडिया रिपोर्टों में सिटी एसपी के हवाले से बताया गया है कि इस मामले की हर एंगल से जाँच की जा रही है। बम स्क्वायड और FSL की टीम भी बुलाई गई है। जाँच के बाद खुलासा हो पाएगा कि आखिर ये किस प्रकार का ब्लास्ट था। प्रथम दृष्टया जाँच के मुताबिक लगता है कि ये सूतली बम बनाने के दौरान हुआ ब्लास्ट है।

ऑपइंडिया ने जब इस संबंध में स्थानीय विधायक संजय सारगवी से बात की तो उन्होंने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही वह इलाके में गए थे। उन्होंने कहा, “ब्लास्ट काफी जोरदार था। कई किलोमीटर दूर तक इसकी आवाज सुनाई पड़ी थी। मौके पर FSL टीम को बुलाया गया है। वहाँ कई मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। हमने इस मामले में विस्तृत जाँच की माँग की है।”

जब हमने नजीर के घर में चल रहे पटाखों के कारोबार के बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि इस बारे में अभी कोई सूचना नहीं है। जब स्थानीय लोगों के बयानों का हवाला दिया, तो उन्होंने कहा कि पहले वहाँ ऐसा होता था। लेकिन वर्तमान में विस्फोट का क्या कारण था, इस पर कुछ भी जाँच के बाद ही बोला जा सकेगा।

उनके मुताबिक, इस मामले में घटना की सूचना पाते ही कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँचे थे। अब आगे अगर जरूरत पड़ी तो उच्च स्तरीय जाँच भी करवाई जाएगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटना की गंभीरता को देखते हुए दरभंगा के जिलाधिकारी ने इसपर संज्ञान लिया है। उन्होंने अपर समाहर्ता के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जाँच कमिटी गठित की है। जाँच कमिटी में सदर एसडीपीओ एवं सदर एसडीओ को शामिल किया गया है।