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हाँ, आंध्र प्रदेश में बड़े स्तर पर हो रहा धर्मांतरण, मिशनरीज पैसे के दम पर कर रही कन्वर्जन तो हम क्या करें: YSRCP मंत्री

आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य में बड़े स्तर पर हो रहे धर्मांतरण को सामान्य मान लिया है। इसका खुलासा कल टाइम्स नाऊ की एक डिबेट में हुआ। इस डिबेट में जगन मोहन रेड्डी सरकार के मंत्री खुलेआम ऑन एयर शो पर ये बोलते नजर आए कि यदि मिशनरी के लोग धर्मांतरण करवा रहे हैं, तो उसमें वो क्या कर सकतें हैं।

जी हाँ, टाइम्स नाऊ पर डिबेट के दौरान YSRCP के सांसद रघु कृष्णा राजू ने इस बात को ऑन एयर शो में माना कि आंध्र प्रदेश में धर्मांतरण की प्रक्रिया तेजी से चालू है। लेकिन वह ये भी कहते नजर आए कि इसमें सरकार का कोई हाथ नहीं है।

ऐसे बयान पर जब एंकर ने सांसद से कहा कि वो इस संबंध में बहुत बड़ी बात बोल रहे हैं कि वो मानते हैं कि आंध्र प्रदेश में धर्मांतरण बहुत बड़े स्तर पर हो रहा है। तो वो अपनी सफाई में ये कहते सुनाई दिए कि वो ये नहीं कह रहे कि ये कन्वर्जन की प्रक्रिया राज्य में चल रही है, बल्कि वो तो ये कह रहे हैं कि ये पूरे देश में हो रहा है।

इसके बाद इस ड़िबेट में अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मंत्री ने ये भी कहा कि ये सब मिशनरी के पास मनी पॉवर के कारण हो रहा है। जिसका इस्तेमाल वे इन सब चीजों के लिए कर रहे हैं। हालाँकि, इस बिंदु पर एंकर ने उन्हें फिर टोका, कि वो ये कह रहे हैं कि ईसाई मिशनरी पैसे जुटाकर बड़े स्तर पर धर्मांतरण के काम को अंजाम दे रहे हैं। जो कि पूर्ण रूप से अवैध है, तो आखिर ऐसे में वो खुद क्या कर रहे हैं? जिसपर रघु बार-बार यही कहते रहे कि इसमें हम क्या कर सकते हैं। ये सब पूरे देश में हो रहा है।

रघु इस दौरान धर्मांतरण को उचित ठहराने के लिए भारत के सेकुलर होने का हवाला देते नजर आए। मगर, जब पद्मजा जोशी उन्हें बताती हैं कि सेकुलर देश में धर्म परिवर्तन के लिए पैसों का इस्तेमाल पूर्ण रूप से अवैध और गैर कानूनी है, तो वो कहते हैं कि इन सबमें नहीं पड़ना चाहते। जब एंकर ने उनके इस रवैये पर हैरानी जताई तो उन्होंने दूसरे पैनेलिस्ट मोहनदास पई से पूछा कि क्या ये सब पूरे देश में नहीं होता? जिसपर मोहनदास ने उन्हें जवाब दिया कि वो मानते हैं कि पूरे देश में ये सब बड़े स्तर पर हो रहा है, पर जिस तरह आंध्र प्रदेश में खुलेआम हो रहा है। वैसे ये सब कही नहीं होता।

सर्व इंडिया मिनिस्ट्री NGO का खुलासा

यहाँ गौर करने की बात है कि YSRCP नेता का ये बयान उस समय आया है। जब अभी हाल ही में तमिननाडु के कोयंबटूर के एक ईसाई एनजीओ सर्व इंडिया मिनिस्ट्री पर अवैध धर्मांतरण, हिंदुओं के ख़िलाफ़ हेट स्पीच और FCRA फ्रॉड जैसे आरोप लगे हैं। जिसका खुलासा लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर किया है।

LRPF ने अपनी शिकायत में एनजीओ प्रमुख इबेनेजर सैम्यूल के ख़िलाफ़ शिकायत की है। साथ ही एनजीओ पर साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाया है। इसके अलावा इस एनजीओ पर बड़े स्तर पर धर्मांतरण, जादू टोने, प्रलोबन आदि उपाय करने का इल्जाम भी लगाया गया है।

LRPF की जाँच से पता चलता है कि इबेनेजर के NGO को पिछले 10 वर्षों में एफसीआरए फंड के रूप में 48.92 करोड़ रुपए मिले हैं और ये फंड्स ज्यादातर यूएसए से नफरत फैलाने, दैवीय इलाज की कहानियों को बताने पर प्राप्त किए गए हैं, जो कि भारत में अवैध हैं।

ऑर्गनाइजर की रिपोर्ट के अनुसार, लीगल फोरम ने अपनी शिकायत में ये भी कहा कि इस संगठन द्वारा भारत में दिए टैक्स और अमेरिका में दिए टैक्स अलग अलग हैं। अपने पत्र में उन्होंने इस मामले संबंधी सभी जानकारियों का उल्लेख किया और टैक्स से जुड़े जरूरी कागजात भी लगाए।

इसके अलावा साल 2019 की एक वीडियो में हम इबेनेजर को यूएसए में बोलते हुए देख सकते हैं कि वो वहाँ के लोगों को बता रहे हैं कि वे हिंदुओं, मुस्लिमों, बौद्धों और विभिन्न अन्य धार्मिक समूहों के बीच चर्चों को शामिल करने में शामिल हैं।

यहाँ बता दें, कि बात सिर्फ़ धार्मिक स्थलों के बीच अपना धार्मिक स्थल स्थापित करने संबंधी नहीं है। इस एनजीओ के प्रमुख लगातार अपनी स्पीचों में कई बार इस बात का उल्लेख कर चुके हैं कि वो कैसे हिंदुओं को ईसाई बनाने के काम में अग्रसर हैं।

जानकारी के मुताबिक, सैम्यूल जैसे लोग जो इस प्रकार के एनजीओ से जुड़े हैं, वो उन हिंदुओं को मुख्यतः अपना निशाना बनाते हैं, जो गरीब हैं और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रहे हैं। ऐसे लोग इबेनेजर के चंगुल में फँस जाते हैं, क्यूँकि उन्हें झाँसा दिया जाता है कि अगर वह धर्म परिवर्तन करते हैं तो उनका ख्याल मिशनरी द्वारा रखा जाएगा।

इसके अलावा सर्व इंडिया मिनिस्ट्री द्वारा स्वयं ऐसे अभियान चलाए जाते हैं जिनके तहत बच्चों को ईसाई धर्म के प्रति आकर्षित किया जाता है। इन अभियानों के अंतर्गत शिक्षा, साफ-सफाई, प्रार्थना और कहानियों तक के जरिए ये लोग अपने मकसद को अंजाम देते हैं।

याद दिला दें, आंध्र प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर पिछले साल खबर आई थी कि प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी सरकार का जन-कल्याणकारी योजनाओं को रफ़्तार देने पर फोकस नहीं दिख रहा। बल्कि वह लोगों को मुफ़्त में चीजें देने की नीति पर ज़्यादा फोकस कर रहे हैं। जिससे न सिर्फ़ सार्वजनिक संपत्ति को भारी क्षति पहुँच रही है, बल्कि राज्य में धर्मांतरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

दरअसल, उस समय भी रेड्डी सरकार पर आरोप लग रहे थे कि उनकी सरकार ने लोगों को धर्मान्तरण के लिए प्रोत्साहित किया है। वहीं कई विशेषज्ञों का मानना था कि आंध्र प्रदेश में ईसाई धर्मान्तरण ने जोर पकड़ लिया है और जल्द ही इस दिशा में कार्रवाई नहीं की गई तो यह हिंसक भी हो सकता है।

36 दिनों के सत्ता-संघर्ष में जो पवार नहीं गए थे मातोश्री, अब वहाँ ठाकरे संग की 1.5 घंटे मीटिंग: महाराष्ट्र में नई हलचल

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ी हलचल देखने को.मिल रही है। विधानसभा चुनाव बाद जब सरकार गठन के लिए प्रयास चल रहा था, तब सुप्रीमो शरद पवार एक बार भी मातोश्री नहीं गए थे। अब उन्होंने राजभवन जाकर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और फिर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मातोश्री जाकर मुलाक़ात की। हाल ही में भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने भी राज्यपाल से मिल कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग की थी।

सीएम उद्धव ठाकरे के घर पर हुई ‘गुप्त बैठक’ की चर्चा महाराष्ट्र का राजनीतिक गलियारों में जोरों पर है। दो तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। जहाँ एक तरफ कुछ लोग महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी सरकार के खतरे में होने की बात कर रहे, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग केंद्र सरकार द्वारा कोई कड़ा फैसला लिए जाने की अटकलें लगा रहे हैं। राज्य में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 53,000 के पार हो गई है। स्थिति नियंत्रण के बाहर है।

शरद पवार और उद्धव ठाकरे की बैठक में शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के संपादक संजय राउत भी मौजूद थे। लम्बे समय के बाद शरद पवार के मातोश्री पहुँचने के पीछे तमाम अटकलें इसीलिए लगाई जा रही हैं क्योंकि 36 दिनों तक चले सत्ता-संघर्ष के दौरान वो एक बार भी वहाँ नहीं गए थे। इससे पहले वो राज्यपाल से मिले थे। दरअसल, राज्यपाल कोश्यारी ने ही एनसीपी के संथापक-अध्यक्ष पवार को बुलावा भेजा था।

इस बैठक में प्रफुल्ल पटेल भी मौजूद थे। हालाँकि, पटेल ने बैठक के बाद दावा किया कि वो राज्यपाल के बुलावे पर आए थे और वहाँ किसी भी तरह की कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई। अब ये बात लोगों के गले उतर ही नहीं रही कि पवार और पटेल राज्यपाल से बिना किसी राजनीतिक कारण मिलने चले गए हों। प्रफुल्ल पटेल अपने गुजराती कनेक्शन के लिए भी जाने जाते हैं। उनका ससुराल गुजरात के एक बड़े व्यापारिक खानदान में है। ऐसे में सियासी अटकलें स्वाभाविक हैं।

आज से क़रीब 20 दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह के बीच एक मंत्रणा हुई थी। मीडिया सूत्रों का कहना है कि उसके बाद से ही भाजपा उद्धव ठाकरे को लेकर आक्रामक हो गई है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी हाल ही में उद्धव पर हमला बोला था। सरकार और राजभवन के बीच लगभग हर मुद्दे पर टकराव हो रहा है, जो अच्छे संकेत नहीं हैं।

सोशल मीडिया पर कई विश्लेषक भाजपा की सत्ता में वापसी की बातें भी कर रहे हैं। जिस तरह से मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार को अपदस्थ कर के शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने, अगर महाराष्ट्र में फिर से देवेंद्र फडणवीस की वापसी हो जाए तो इसमें आश्चर्य नहीं। शिवसेना बार-बार सफाई दे रही है कि सरकार मजबूत है। संजय राउत ने सफाई दी है कि जिस तरह कोरोना की वैक्सीन नहीं आई है, उसी तरह उद्धव सरकार को गिराने का तोड़ भी विपक्ष के पास नहीं है।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को अस्थिर करने का प्रयास सफल नहीं होगा और विरोधियों को खुद ही क्वारंटाइन हो जाना चाहिए। यहाँ ये सवाल उठता है कि आखिर कौन महाराष्ट्र सरकार को अस्थिर करना चाह रहा है? राउत ने ये भी कहा कि अस्थिरता को लेकर झूठी ख़बर फैलाई जा रही है, फिर उन्होंने ही कहा कि अस्थिर करने के प्रयास कामयाब नहीं होंगे। उद्धव और पवार की बैठक क़रीब डेढ़ घंटे तक चली।

हाल ही में शरद पवार ने आरोप लगाया था कि राज्यपाल कोश्यारी सरकार के कामकाज में कुछ ज्यादा ही दखल दे रहे हैं। वहीं फडणवीस ने माँग की थी कि उद्धव ठाकरे की सरकार कोरोना से लड़ने में कदम विफल रही है, इसीलिए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। फ़िलहाल कोई भी नेता इस पर कुछ बोलने को तैयार नहीं है कि पवार-उद्धव और पवार-कोश्यारी की बैठक के दौरान किन मुद्दों पर चर्चा हुई।

नहीं बिकेंगी तिरुपति मंदिर की 50 सम्पत्तियाँ: श्रद्धालुओं के दबाव के आगे झुकी आंध्र प्रदेश सरकार, जारी किया आदेश

हिन्दुओं के भारी विरोध के बाद आंध्र प्रदेश की सरकार ने तिरुपति तिरुमाला मंदिर की संपत्ति को नीलाम करने के फैसले पर रोक लगा दी है। सरकार ने एक आदेश जारी कर इस बात की सूचना दी।

जगन मोहन रेड्डी की सरकार ने हालाँकि इसका पूरा दोष पिछली सरकार पर डालने की कोशिश की है। सरकार ने कहा है कि जिस ट्रस्ट के बोर्ड ने मंदिर की 50 संपत्तियों को नीलम करने का फैसला लिया था, उसका गठन चंद्रबाबू नायडू की पूर्ववर्ती सरकार ने किया था।

आंध्र प्रदेश की सरकार ने कहा है कि श्रद्धालुओं की भावनाओं को समझते हुए उसने तिरुपति तिरुमाला देवस्थानम (TTD) से कहा है कि वो इस मुद्दे पर पुनर्विचार करे। वरिष्ठ साधु-संतों, समाज के प्रबुद्ध लोगों और श्रद्धालुओं से बातचीत कर ये सुनिश्चित किया जाए कि इन चीजों का उपयोग मंदिरों का निर्माण करने, धर्म का प्रचार करने या फिर अन्य धार्मिक कार्यों के लिए किस तरह से किया जा सकता है। सरकार ने इस पर योजना बनाने को कहा है।

जगन मोहन रेड्डी की सरकार ने कहा है कि जब तक इस मामले पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक संपत्ति को नीलाम करने के फैसले पर रोक लगी रहेगी। साथ ही TTD के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर को कहा गया है कि वो इस सम्बन्ध में जल्द ही एक्शन लें और जितनी जल्दी हो सके, सरकार को एक रिपोर्ट के माध्यम से अवगत कराएँ।

मुख्य सचिव प्रवीण प्रकाश ने आंध्र प्रदेश सरकार की तरफ से पत्र भेज कर ये आदेश जारी किया। सरकार ने सोमवार (मई 24, 2020) की रात को ये आदेश जारी किया। इससे पहले इस फैसले को लेकर हिन्दुओं में रोष व्याप्त था और सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक विरोध प्रदर्शन चालू हो गए थे।

अधिवक्ता जे साईं दीपक और भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी सहित कई प्रबुद्ध जनों ने इस फैसले के खिलाफ रोष जताया था। लोग इसे मंदिर की संपत्ति को बेच कर श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ के रूप में देख रहे थे।

दरअसल, जिन संपत्तियों को बेचने का निर्णय लिया गया था, उसे श्रद्धालुओं ने ही मंदिर को दान किया था। तिरुपति तिरुमाला मंदिर ट्रस्ट ने इसे ‘नन-यूजेबल’ करार देते हुए इसे बेचने का फ़ैसला ले लिया था। ये संपत्ति आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और ऋषिकेश में स्थित है।

ट्रस्ट का कहना था कि ये सब मंदिर से दूर हैं, इसीलिए इसका प्रबंधन करने और देखभाल करने में खासी मुश्किलें आ रही हैं। इनमें से कुछ को अतिक्रमण का शिकार होने की बात भी कही गई है।

आंध्र प्रदेश सरकार का आदेश: संपत्ति की नीलामी पर रोक

हालाँकि, ये पहली बार नहीं है जब तिरुपति तिरुमाला मंदिर की संपत्तियों को बेच रहा है। 1974 से लेकर 2016 तक 129 ऐसी सम्पत्तियाँ थीं, जिन्हें नीलामी के जारी बेच डाला गया। हालिया फैसले के खिलाफ भाजपा और टीडीपी, दोनों ने ही वाइआरएस कॉन्ग्रेस सरकार का विरोध किया था। इनमें से कई कृषि के लिए प्रयोग की जाने वाली जमीन है और कई घर भी हैं, जो मंदिर से दूर हैं। मंदिर प्रबंधन उसकी देखभाल में खुद को अक्षम बता रहा है।

भाजपा के राज्यसभा सांसद प्रोफेसर राकेश सिन्हा ने भी तिरुपति तिरुमाला देवस्थानम बोर्ड को पत्र लिख कर आपत्ति जताई थी। उन्होंने बताया कि 2016 में चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने ये निर्णय लिया था। उन्होंने ट्रस्ट के अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में लिखा कि जो संपत्ति मंदिर से दूर हैं, उनके प्रबंधन के लिए श्रद्धालुओं की मदद ली जाए। उन्होंने बताया कि मंदिर की इन संपत्तियों से श्रद्धालुओं की भावनाएँ जुड़ी हुई हैं।

बता दें कि आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने अपने मामा वाई वी सुब्बा रेड्डी को तिरुपति तिरुमला देवस्थानम ट्रस्ट बोर्ड (TTD) के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया था, जिसका खूब विरोध हुआ था। तिरुपति स्थित गोविंदराजा स्वामी मंदिर से तीन स्वर्ण मुकुट के चोरी होने की ख़बर भी आई थी। सभी मुकुट में हीरे जड़े हुए थे। इन मुकुटों का वजन 1.3 किलो बताया गया था।

38 लाख फॉलोवर वाले आमिर सिद्दीकी का TikTok अकॉउंट सस्पेंड, दे रहा था कास्टिंग डायरेक्टर को धमकी

यूट्यूब बनाम टिकटोक विवाद के बाद Tik Tok पर भारत में जो गाज गिरी है, उससे सब वाकिफ हैं। इस बीच खबर आई है कि कैरिमिनाटी के कारण चर्चा में आने वाले आमिर सिद्दीकी का टिकटोक अकॉउंट सस्पेंड कर दिया गया है। इससे पहले महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप में आमिर के भाई फैजल का अकॉउंट सस्पेंड किया गया था।

रविवार की रात जब आमिर सिद्दीकी का अकॉउंट सस्पेंड हुआ, उस समय तक उसके 3.8 मिलियन फॉलोवर्स थे। जानकारी के मुताबिक, आमिर पर ये कार्रवाई एक कास्टिंग डायरेक्टर नूर सिद्दीकी को धमकी भरे मैसेज भेजने के कारण हुई है।

नूर सिद्दीकी के वकील कासिफ खान ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है कि उनके क्लाइंट द्वारा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के किए जाने के बाद आमिर का टिकटोक अकाउंट सस्पेंड किया गया।

उन्होंने आगे कहा कि नूर सिद्दीकी ने व्यक्तिग रूप से भी इसके बारे में TikTok से शिकायत की थी कि आमिर के व्यवहार की वजह से टिकटॉक को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, यहाँ तक कि उसकी रेटिंग भी 4.8 से 1.2 तक गिर गई है।

गौरतलब है कि कुछ समय पहले आमिर सिद्दीकी ने यूट्यूबर्स के ख़िलाफ़ एक वीडियो बनाया था। इस वीडियो के रिएक्शन में मशहूर यूट्यूबर कैरिमिनाटी का वीडियो आया था। जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने टिकटॉकर्स और टिकटॉक का मजाक बनाना शुरू कर दिया।

बाद में आमिर सिद्दीकी को कई लोगों ने समझाया कि वो खुद फुटेज खाने के चक्कर में सभी टिकटॉकर्स को क्यों बदनाम करवाने में लगे हुए हैं? इसी क्रम में नूर सिद्दीकी ने भी आमिर के लिए एक वीडियो बनाई।

वीडियो में नूर ने आमिर को नकली सिद्दीकी बताया और उनके बालों के रंग और स्टाइल पर भी कमेंट किया। नूर ने वीडियो मे बताया कि वे यूट्यूबर्स को न समझाएँ कि कंटेंट क्या होता है?उन्होंने कहा कि कई टिकटॉकर्स ऐसे हैं, जो मेहनत करके वीडियो बनाते हैं, मगर आमिर जैसों के कारण उनको भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

इस वीडियो के अंत तक नूर सिद्दीकी सिर्फ़ आमिर को यही समझाते रहे कि वे अपने भीतर के घमंड को निकाल दें और फुटेज पाने के लिए ऐसी हरकतें न करें।

मगर, इस वीडियो पर सफाई देने के बजाए या फिर नूर से इस संबंध में बात करने के बजाए, आमिर सिद्दीकी ने नूर को कमेंट में धमकाया और लोगों को ये बताने की कोशिश की कि नूर लड़कियों से गलत काम करवाते हैं, जिसके सभी प्रूव व शिकायत उसके पास आ गए हैं।

स्पॉटब्वॉय की 15 मई की खबर के अनुसार, आमिर ने पहले नूर की वीडियो पर बेहद अपमानजनक टिप्पणी पोस्ट की और बाद में उन्हें व्हॉट्सऐप पर भी धमकी से भरे वॉयस नोट भेजे। इसके बाद नूर सिद्दीकी ने आमिर के ख़िलाफ़ फौरन अपने वकील अली काशिफ खान की मदद से शिकायत दर्ज करवाई।

आमिर के ख़िलाफ़ नूर ने वर्सोवा थाने में शिकायत दर्ज करवाई। यहाँ उसके ख़िलाफ़ धार 504, 506, 507 के तहत मामला दर्ज हुआ और बाद में नूर ने आमिर को मानहानि का नोटिस भी भेजा। साथ ही आमिर को माफी माँगने और क्षतिपूर्ति करने के लिए 14 दिन का समय दिया गया और ये स्पष्ट बताया गया कि अगर वह ऐसा करने में विफल हुए तो मजिस्ट्रेट अदालत में आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।

यहाँ बता दें कि अपने ऊपर इन सभी कार्रवाई के मामलों को आमिर सिद्दीकी ने खारिज किया है। सोमवार को मीडिया से बात में बताया, “मुझे सुबह पता चला कि मेरा अकॉउंट सस्पेंड हो चुका है। मैं अपने मैनेजमेंट टीम और प्लेटफॉर्म के साथ संपर्क में हूँ ताकि इसका कारण समझ सकूँ। हम अकॉउंट को पुनः प्राप्त करने के लिए कानूनी रास्ता अपनाएँगे।”

नूर द्वारा भेजे गए नोटिस पर आमिर ने कहा, “मुझे मेरी मैनेजमेंट ने नोटिस के बारे में बताया है। हम कोर्ट में लड़ेंगे। सारे आरोप झूठे हैं।”

याद दिला दें कि कुछ समय पहले कैरिमिनाटी की रोस्ट वीडियो सामने आने के बाद से आमिर सिद्दीकी लगातार चर्चाओं में रहा। कई यूट्यूबर्स ने सिद्दीकी के ख़िलाफ़ अपनी राय रखी। हिंदुस्तानी भाऊ ने भी अपनी वीडियो में आमिर को हड़काते हुए, कैरिमिनाटी का समर्थन किया था।

भाऊ ने अपनी वीडियो में आमिर की एक वायरल ऑडियो चलाई। जिसमें वो खुद को गाली देने में पीएचडी बता रहा था और धमकाने वाली टोन में भद्दी गालियाँ देते हुए कह रहा था कि रमजान के कारण अब तक चुप था, मगर अब वो जरूर जवाब देगा। इस ऑडियो को सुनते हुए हिंदुस्तानी भाऊ ने उसे उसकी भाषा में ही जवाब दिया था और खुलकर यूट्यूब का समर्थन किया था।

महिलाओं को उकसाया, दंगे के लिए भड़काया: ‘पिंजरा तोड़’ की नताशा, देवांगना से पूछताछ में कई खुलासे

खुद को महिलावादी संगठन बताने वाले ‘पिंजरा तोड़’ का देश-विरोधी चेहरा अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है। दिल्ली पुलिस ने इस संगठन की नताशा नरवाल और देवांगना कलिता को दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगों में भूमिका होने के कारण गिरफ्तार किया था। हालाँकि, दोनों किसी तरह जमानत लेकर रिहा होने में कामयाब रही थीं। इसके तुरंत बाद दोनों को क्राइम ब्रांच ने धर-दबोचा था। पूछताछ में अब कुछ और भी बातें पता चली हैं।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद में जब हिंसा भड़की थी, तब महिलाओं को उकसा कर उनसे चक्का जाम कराया गया था। इसमें ‘पिंजरा तोड़’ की नताशा और देवांगना का अहम रोल था। ये दोनों वहाँ महिलाओं को उकसा कर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का काम कर रही थीं। नताशा और देवांगना ने लोगों को भड़काने के लिए पूरी रणनीति तैयार की थी। दोनों को रविवार (मई 24, 2020) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जारी स्थानीय अदालत के समक्ष पेश किया गया था।

‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, नताशा और देवांगना से पूछताछ के दौरान ‘पिंजरा तोड़’ के सदस्यों की सच्चाई सामने आई है। अदालत ने इन दोनों को 2 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था, जहाँ क्राइम ब्रांच ने इनसे पूछताछ की। इसके बाद 22 फ़रवरी को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे महिलाओं को एकत्रित करने में इन दोनों की भूमिका सामने आई। नताशा और देवांगना ने साजिश रच के 66 फीट की सड़क को ठप्प करवाया था।

‘दैनिक जागरण’ के दिल्ली संस्करण में प्रकाशित ख़बर

‘दैनिक जागरण’ में प्रकाशित लोकेश चौहान की रिपोर्ट के अनुसार, क्राइम ब्रांच ने ‘पिंजरा तोड़’ की नताशा और देवांगना से पूछताछ के दौरान कई तकनीकी सबूत भी इकट्ठे किए हैं। इन दोनों का काम जाफराबाद तक ही सीमित नहीं था बल्कि इन्होंने कई अन्य इलाकों में घूम-घूम कर लोगों को भड़काया और दंगों में भाग लेने को उकसाया।

दरअसल, ‘पिंजरा तोड़’ के बैनर तले नताशा और देवांगना ने सहयोगियों संग मिल CAA और NRC के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन की आड़ में ये कुचक्र रचा था। जहाँ नताशा नरवाल हरियाणा के रोहतक की निवासी हैं, देवांगना कलिता असम के डिब्रूगढ़ की रहने वाली हैं। असम के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के वयोवृद्ध नेता तरुण गोगोई ने इन दोनों की गिरफ्तारी का विरोध किया है। दिल्ली में दोनों ने जीटीबी नगर को अपना ठिकाना बनाया हुआ था।

देवांगना कलिता विवाहित हैं, वहीं नताशा की अभी शादी नहीं हुई है। रविवार को मजिस्ट्रेट अजीत नारायण ने ये कहते हुए इन दोनों को जमानत दे दी थी कि आरोपितों की समाज में अच्छी पकड़ है और वे काफी पढ़ी-लिखी भी हैं। वे पुलिस के साथ जाँच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं। नताशा नरवाल ने वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ के लिए तीन लेख लिखे थे। उसने ‘न्यूज़लौंड्री’ के लिए भी लेख लिखा था।

राफिका से प्यार, उसकी बेटी को पाने की चाहत और एक हत्या को छिपाने के लिए 9 मर्डर: संजय ने यूँ रची साजिश

तेलंगाना के वारंगल जिले में पिछले हफ्ते कुएँ से निकली 9 लाशों की गुत्थी को पुलिस ने अब सुलझा लिया है। ताजा जानकारी के अनुसार, पुलिस ने इस मामले के संबंध में 26 वर्षीय संजय यादव को गिरफ्तार किया है।

संजय पर आरोप है कि उसने अपनी प्रेमिका की हत्या को छिपाने के लिए इन 9 लोगों को जान से मारा। इनमें से 6 एक ही परिवार के थे।

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पुलिस कमिश्नर डॉ रवींद्र ने बताया, “21 और 22 मई को शव कुएँ से बरामद किए गए थे। जाँच में यह सामने आया है कि आरोपित संजय ने राफिका (कातिल की प्रेमिका) की हत्या को छिपाने के लिए इन सभी की हत्या कर दी। “

पुलिस आयुक्त ने आगे बताया कि संजय यादव की मकसूद नामक शख्स और उसकी भाभी राफिका से जान-पहचान थी। धीरे-धीरे वह राफिका के काफी करीब आ गया था और वह राफिका के तीन बच्चों समेत उनके साथ रहने लगा था।

इस दौरान यादव ने राफिका की 15 वर्षीय बेटी के साथ दुर्व्यवहार करने की कोशिश की। राफिका को यह पसंद नहीं आया और उसने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करने की धमकी दी।

राफिका का रवैया देखकर संजय यादव ने उसकी बेटी को पाने के लिए राफिका को मारने की योजना बनाई और इसी क्रम में उससे शादी का वादा किया।

इसके बाद, संजय अपने परिवार से बात करने का झूठा बहाना बनाकर राफिका को लेकर 7 मार्च को बंगाल के लिए निकल गया। वहाँ उसने पहले रास्ते में फूड पैकेट में नींद की गोलियाँ मिलाईं, उसे बेहोश किया और फिर बाद में उसका गला दबाकर उसे ट्रेन से बाहर फेंक दिया।

पुलिस के मुताबिक, इसके बाद संजय वापस वारंगल आ गया। मगर मकसूद की पत्नी निशा ने उससे राफिका के बारे में पूछताछ करनी बंद नहीं की। जब निशा को ज्यादा शक हुआ तो निशा ने उसके ख़िलाफ़ पुलिस शिकायत दर्ज करवाने की धमकी दी। जिसे सुनने के बाद संजय के सिर पर सिलसिलेवार हत्याओं का भूत सवार हुआ और सबसे पहले उसने 16 मई से 20 मई तक मकसूद के घर जाने का फैसला किया, जोकि एक बोरे की फैक्ट्री में रहते थे।

यादव ने यहाँ मकसूद के घर आने से पहले नींद की दवाई खरीदी और मकसूद के बड़े बेटे के जन्मदिवस पर उसे पूरे घर के खाने में मिला दिया। इसके बाद उसने मकसूद के करीबी दोस्त शकील के खाने में भी ये दवाइयाँ मिलाई और फिर फैक्ट्री की पहली मंजिल पर गया, वहाँ भी दो मजदूरों के खाने में नींद की दवाई मिलाई।

दरअसल, उसे संदेह था कि यदि इनमें से कोई भी जग गया, तो वो पकड़ा जाएगा। इसलिए, उसने इन सबको एक साथ नींद की दवा देकर हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया।

पुलिस के अनुसार, संजय ने केवल रफीका की हत्या को छिपाने के लिए उन नौ लोगों को नींद की दवाई दी। इसके बाद वो रात के करीब 12:30 बजे जगा, सभी लोगों को खुद बोरे में भरा और खींचता हुए कुएँ के पास ले गया। यहाँ उसने एक-एक करके सिलसिलेवार ढंग से 9 लोगों को मौत के घाट उतारा।

पुलिस की मानें तो, इस पूरी गुत्थी को सुलझाने में उनकी पूरी 6 टीमें जाँच में जुटी हुई थी। अब संजय के ख़िलाफ़ सबूत इकट्ठा हो चुके हैं और पुलिस ने उसे अपनी हिरासत में भी ले लिया है।

पुलिस का कहना है कि वे आरोपित के खिलाफ़ अधिक से अधिक सबूत इकट्ठा करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उसे उसके अपराध के लिए बड़ी सजा दिलवा सकें।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ये 9 शव वारंगल जिले के गीसुकोंडा मंडल के गोर्रेकुंटा गॉंव में कोल्डस्टोरेज के पीछे बने कुएँ में मिले थे। सभी मृतक प्रवासी मजदूर थे। जो बंगाल और बिहार के रहने वाले थे और कोल्डस्टोरेज में काम करते थे।

यह घटना उस वक्त उजागर हुई जब जूट मिल के मालिक एस भास्कर गुरुवार को गोदाम पहुँचे। उन्होंने देखा कि एक परिवार के सभी सदस्य लापता हैं। उनके मोबाइल नंबर भी स्विच ऑफ थे। लिहाजा उन्होंने तुरंत पुलिस को फोन किया। इसके बाद शाम के वक्त खोजबीन के दौरान इन लोगों की लाश कुएँ से मिली।

अलका लांबा के खिलाफ लखनऊ में FIR दर्ज, PM मोदी और CM योगी पर की थी विवादित टिप्पणी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में अलका लांबा के ख़िलाफ़ लखनऊ के हजरंतगंज कोतवाली में मामला दर्ज हो गया है। यह FIR उत्तर प्रदेश राज्य के बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य प्रीति वर्मा ने दर्ज करवाई है।

प्रीति वर्मा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि अलका लांबा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर 25 मई की रात 12 बजकर 7 मिनट पर एक वीडियो अपलोड कर PM मोदी और CM योगी के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। साथ ही उन्होंने अपने एक दूसरे ट्वीट में भ्रामक आरोपों के साथ हाई कोर्ट के न्यायाधीश पर भी सवाल खड़े किए, जो कोर्ट की अवमानना के अंतर्गत आता है।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, अलका लांबा के खिलाफ 25 मई को शाम 7:07 मिनट पर FIR दर्ज की गई। जिसमें अलका लांबा के खिलाफ आईपीसी की धारा 504, धारा 505 (1)(बी), 505 (2) और सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम 2008 की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले कुलदीप सिंह सेंगर की बेटी ऐश्वर्या ने भी अलका लांबा के ख़िलाफ़ उन्नाव पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। ऐश्वर्या का भी यही आरोप था कि अलका लांबा ने भ्रामक ट्वीट करके झूठी जानकारी फैलाई।

अलका लांबा का विवादित पोस्ट

अलका लाम्बा के जिस पोस्ट में ये कार्रवाई हुई, उसमे उन्होंने लिखा था कि बलात्कारियों को कोई भी अदालत ज्यादा दिन तक सलाखों के पीछे नहीं रख सकती, अगर उन पर भाजपा नेताओं का हाथ हो। इसके बाद उन्होंने न्यायपालिका को भला-बुरा कहते हुए लिखा था कि हाईकोर्ट के जज ने ये फ़ैसला देकर बस अपनी जान बचाई है।

साथ ही अलका लाम्बा ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को ‘बलात्कारी नेता की रिहाई की मुबारकबाद’ दी। अलका लाम्बा ने जिसकी ट्वीट को आधार बना कर ये बातें कहीं, उसने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया।

लेकिन, अलका लाम्बा ने न तो ट्वीट डिलीट किया और न ही इस पर किसी प्रकार की माफ़ी माँगी। कुलदीप सेंगर को हाईकोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने की ख़बर फर्जी थी, जिसे अलका लाम्बा ने आगे बढ़ाया।

सेंगर की बेटी ने भी की अलका लांबा के ख़िलाफ़ शिकायत

ऐश्वर्या ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि हाईकोर्ट में उनके पिता की अपील पर 1 जून को सुनवाई होगी लेकिन उससे पहले ही जानबूझ कर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा कर के मीडिया और अदालत पर दबाव बनाया जा रहा है। जमानत याचिका डाली ही नहीं गई है।

इस ट्वीट को आईटी एक्ट का उल्लंघन करने के साथ-साथ सेंगर परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप भी ऐश्वर्या ने लगाया। ऐश्वर्या ने इसे मानहानि और आपराधिक कृत्य करार दिया। उन्होंने एसपी विक्रांतवीर को शिकायत पत्र सौंपा था, जिसके आधार पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की। अलका लाम्बा के अलावा कॉन्ग्रेस नेता धरणा पटेल ने भी कुछ इसी तरह का ट्वीट कर के भ्रम फैलाया।

लांबा ने अमित शाह और पीएम मोदी पर भी फैलाया झूठ

उल्लेखनीय है कि इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता अलका लाम्बा ने गृहमंत्री और पीएम के लिए कहा था कि अगर कॉन्ग्रेस ने 2002 में ही ‘दोनों को नाप दिया होता’ तो आज भारत को ये दिन नहीं देखने पड़ते। लोगों ने कहा था कि वो पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बात कर रही हैं। बता दें कि 2002 की बात कर वे गुजरात दंगों का जिक्र कर रही थीं।

मेरठ: ईद की नमाज को लेकर दो पक्षों के बीच पथराव और चाकूबाजी, कई महिलाओं समेत 1 दर्जन घायल

मेरठ के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र लकखीपुरा में सोमवार (25 मई, 2020) को ईद की नमाज पढ़ने को लेकर दो पक्षों में जम कर पथराव और चाकूबाजी हुई। जिसमें महिलाओं समेत 1 दर्जन लोग घायल हो गए। घटना की सूचना पर मौके पर पहुँची पुलिस ने दोनों पक्षों के पाँच लोगों को हिरासत में ले लिया है।

जानकारी के अनुसार लक्‍खीपुरा निवासी निजाम मलिक का आरोप है कि उसका पडो़सी रियाज मलिक अपने मकान में ईद की नमाज पढा़ रहा था। उसने रियाज से कहा कि उसके बेटे हाफिज अनस को भी नमाज पढा़ दे। लेकिन ऐसा करने से रियाज ने मना कर दिया।

इस बात को लेकर दोनों के बीच बहस हो गई और देखते ही देखते बात गाली- गलौज से हाथापाई पर उतर आई। जिसके चलते दोनों तरफ से लोग जमा हो गए और एक दूसरे को पत्थर से मारने और लाठी-डंडे चलने लगे।

कुछ ही देर में, उनमें से कुछ लोग घर से धारदार चाकू उठा लाएँ और एक दूसरे पर हमला बोल दिया। जिसमें वहाँ मौजूद महिलाओं सहित कई लोग घायल हो गए। साथ ही इस मारपीट में दोनों पक्षों के बीच एक दूसरे पर तेजाब की बोतलें फेंकने की भी खबर हैं।

घटना की जानकारी मिलते ही आलाधिकारियों की गाड़ियाँ घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ी और और मौके पर पहुँचने के बावजूद दोनों पक्ष पुलिसवालों के सामने ही मारपीट करने लगें। जिस पर सख्त कार्यवाही करते हुए पुलिस ने स्थिति को काबू में किया। वहीं घायलों को मेडिकल जाँच के लिए अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना की जानकारी देते हुए एसओ प्रशांत कपिल ने बताया कि पुलिस ने दोनों पक्षों के पाँच लोगों को हिरासत में ले लिया है। विवाद नमाज पढ़ने को लेकर हुआ था। अब मामला शांत है। फिलहाल पुलिस घटना की जाँच पड़ताल में जुटी है। इन सभी पर लॉकडाउन के उल्लंघन पर भी मामला दर्ज किया जा रहा है।

14.75 लाख प्रवासी कामगारों की होगी स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग, मजदूरों के लिए योगी सरकार ने उठाए कई कदम

कोरोना वायरस काल में मजदूरों की भयावह स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार घर लौट रहे प्रवासी कामगारों को स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग दे रही है, ताकि आने वाले दिनों में इन्हें काम की तलाश में बाहर न जाना पड़े।

सरकार ने प्रवासियों के हुनर का लाभ लेकर यूपी के अर्थतंत्र को मजबूत करने की दिशा में काम शुरू करा दिया है। उनकी विशेषज्ञता के आधार पर उत्पादों को बढ़ावा देने का काम किया जाएगा।

कामगारों को उनके गृह जनपद में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार बड़ी तेजी से डेटाबेस बनाने में जुटी हुई है। इसी क्रम में करीब 14.75 लाख कामगारों की स्किल मैपिंग का काम पूरा करवा लिया गया है। अब इनकी ट्रेनिंग करवाकर इन्हें रोजगार दिया जाएगा। ट्रेनिंग के दौरान इन्हें ट्रेनिंग भत्ता भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टीम 11 के साथ हुई बैठक के बाद अफसरों ने इसकी जानकारी दी।

सोमवार (25 मई, 2020) को टीम-11 के साथ बैठक में मुख्यमंत्री निर्देश दिए कि जो मैन पॉवर तैयार किए जा रहे हैं, उन्हें अन्य राज्यों को सोशल सिक्योरिटी की गारंटी पर ही मुहैया कराया जाएगा। अब कोई भी राज्य सरकार बिना अनुमति के उत्तर प्रदेश के श्रमिकों /कामगारों का उपयोग नहीं कर पाएगी। इसके अलावा प्रदेश के एक जनपद के कामगार व श्रमिक को दूसरे जनपद में रोजगार मिलने पर सरकार आवासीय व्यवस्था भी मुहैया कराएगी।

14.75 लाख की स्किल मैपिंग की लिस्ट

●स्किल मैपिंग में सबसे बड़ी 1,51, 492 तादाद रीयल स्टेट डेवलपर / वर्करों की
●फर्नीचर एवं फीटिंग के 26989 टेक्निशियन
●बिल्डिंग डेकोरेटर 26041
●होम केयरटेकरों की संख्या 12633
●ड्राइवर 10,000
●आईटी एवं इलेक्ट्रानिक्स के 4680 टेक्कनिशियन
●होम एप्लांयस 5884 टेक्न्नीशियन
●आटोमोबाइल टेक्निशियन की संख्या 1558
●पैरामेडिकल एवं फार्माक्यूटिकल 596
●ड्रेस मेकर 12103
●ब्यूटिशियन 1274
●हैंडिक्राफ्ट एंड कारपेट्स मेकर 1294
●सिक्योरिटी गार्डस – 3364
●शेष – अन्य

बता दें प्रदेश में अन्य प्रदेशों से अब तक लगभग 25 लाख कामगार और श्रमिक आ चुके हैं। सभी का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें उपयुक्त रूप से क्वारंटाइन करने, खाद्यान्न किट देने के साथ राशन कार्ड बनवाने और ₹1,000 भरण-पोषण राशि भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

इसके साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “प्रवासी कामगारों को राज्य स्तर पर बीमा का लाभ देने की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, ऐसी कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है, जिससे इन लोगों की जॉब सिक्योरिटी प्रदेश में ही सुनिश्चित की जा सके और इन्हें मजबूर हो कर अपने घर-परिवार से दूर नौकरी की तलाश में पलायन न करना पड़े।”

सीएम योगी को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले कामरान ने कबूला जुर्म, कहा- एक करोड़ के लिए दी धमकी

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले कामरान ने पुलिस की पूछताछ में अपना जुर्म कबूल लिया है। आरोपित कामरान ने कहा कि उसने एक करोड़ रुपए मिलने के वायदे के बदले में सीएम योगी को बम से उड़ाने की धमकी दी थी।

25 वर्षीय आरोपित कामरान से पूछताछ कर रही उत्तर प्रदेश पुलिस की एसटीएफ के सामने कामरान ने अपने जुर्म को कबूल कर लिया। हालाँकि, उसने यह नहीं बताया कि उसे पैसों का ऑफर किसने दिया था और वह व्यक्ति कौन है।

दरअसल रविवार (24 मई, 2020) को मुंबई से गिरफ्तार किए गए आरोपित कामरान को एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया था, जिसके बाद उसे ट्रांजिट रिमांड में भेजते हुए यूपी एसटीएफ के हवाले कर दिया गया था।

जानकारी के मुताबिक मुंबई में रहने वाला आरोपित कामरान पहले एक सिक्योरिटी गॉर्ड का काम करता था, लेकिन 2017 में टीबी का ऑपरेशन होने के बाद उसने नौकरी छोड़ दी और वह फिलहाल कुछ नहीं कर रहा है। टैक्सी ड्राइवर पिता का पहले ही निधन हो चुका है।

पाँचवी पास कामरान नशे का आदी है। महाराष्ट्र एटीएस ने मुंबई के चूनाभट्टी इलाके के निवासी कामरान खान को एटीएस की कालाचौकी इकाई ने गिरफ्तार किया था। इतना ही नहीं कामरान की गिरफ्तारी के बाद भी लखनऊ पुलिस को एक धमकी भरी कॉल आई है, जिसमें कहा गया है, “जिसे गिरफ्तार किया है, उसे छोड़ दो वरना अंजाम भुगतना पड़ेगा।”

धमकी मिलते ही महाराष्ट्र एटीएस हरकत में आ गई और तत्काल कार्रवाई करते हुए एटीएस की नासिक यूनिट ने 20 साल के एक युवक को नासिक के भद्रकाली इलाके से गिरफ्तार कर लिया। कामरान से उसके संबंध के बारे में पुलिस जाँच कर रही है।

बता दें कि 21 मई, 2020 की शाम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। यह धमकी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश- 112 के व्हाटसएप नम्बर पर दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि उन पर बम से हमला किया जाएगा।

इसके बाद गोमती नगर थाने में इस सम्बन्ध में धारा 505 (1) बी, 506 और 507 के तहत FIR दर्ज कराई गई थी। वहीं तत्काल हरकत में आई पुलिस ने धमकी देने वाले नम्बर की जाँच शुरू कर दी थी।