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बंगाल: कोरोना संक्रमित बुजुर्ग का अस्पताल ने गुपचुप कर दिया अंतिम संस्कार, 4 दिन बाद परिजनों को लगी खबर

पश्चिम बंगाल का एमआर बांगुर अस्पताल फिर से सुर्खियों में हैं। यहॉं कोरोना संक्रमण से 70 साल के हरिनाथ सेन की मौत हो गई। उनके परिजनों ने दावा किया है कि अस्पताल के कर्मचारियों ने उन्हें इसकी जानकारी दिए बिना ही सेन का अंतिम संस्कार कर दिया।

परिजनों को दावा है कि उन्हें इसकी खबर सेन की मौत के चार दिन बाद लगी। ब्रेन स्ट्रोक के कारण सेन के शरीर का दायॉं हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था। एनआरएस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 29 अप्रैल को उनके कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हुई। इसके बाद उन्हें एमआर बांगुर अस्पताल में रेफर कर दिया गया।

1 मई को परिजनों को सेन की तबीयत बिगड़ने के बारे में सूचित किया गया। कथित तौर इसके बाद परिजनों को उनके बारे में कोई खबर नहीं दी गई। इस दौरान क्वारंटाइन में होने के कारण परिजन खुद भी उनके स्वास्थ्य को लेकर जानकारी हासिल करने में सक्षम नहीं थे।

परिवार ने 5 मई को उनके स्वास्थ्य के बारे में जानने के लिए अस्पताल से संपर्क किया, तो कोई भी जानकारी होने से इनकार कर दिया गया। 6 मई को जब परिवार अस्पताल पहुँचा, तो उन्हें सूचित किया गया कि सेन की 2 मई को मृत्यु हो गई थी और उनका अंतिम संस्कार किया जा चुका है।

हरिनाथ के बेटे, अरिजीत सेन के अनुसार अस्पताल ने 1 मई के बाद उनसे संपर्क नहीं किया। उन्होंने खुलासा किया कि अस्पताल ने न तो उनके पिता की मृत्यु के बारे में सूचित किया और न ही दाह संस्कार की खबर दी। अरिजीत ने कहा, “यहाँ तक ​​कि स्वास्थ्य विभाग को भी मेरे पिता के मामले के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, जब हमने उन्हें फोन किया।”

कथित तौर पर, हरिनाथ को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद इलाज के लिए एमआर बांगुर अस्पताल में भर्ती किया गया। साथ ही परिवार को राज्य सरकार द्वारा क्वारंटाइन सेंटर में अलग-थलग रखा गया था। अरिजीत ने बताया, “जब हमने जानकारी प्राप्त करने के लिए से वार्ड मास्टर को फोन किया, तो एक महिला ने कॉल उठाया और बेरुखी से बताया कि शव को कोलकाता निगम वाले ले गए है।”

अरिजीत ने बताया कि, परिवार को न तो मृत्यु प्रमाण-पत्र सौंपा गया है और न ही मृतक के मेडिकल दस्तावेज। इसके बजाय उन्हें टोप्सिया श्मशान से संपर्क करने के लिए कहा गया है।

अस्पताल ने सभी आरोपों को खारिज किया

हालाँकि, एमआर बांगुर (MR Bangur) अस्पताल ने सभी आरोपों का खंडन किया है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. शिशिर नस्कर के अनुसार, सहायक अधीक्षक ने मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार परिवार से संपर्क किया था। उन्होंने कहा कि उन मामलों में पुलिस को सूचित किया जाता है जहाँ परिवार नहीं पहुँच सकता। हरिनाथ के मामले में डॉ. शिशिर से पुलिस को सूचित करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।

अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि कोरोनो वायरस रोगी की मौत के बारे में परिवार को जानकारी देने के बाद, एक रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेजी जाती है और अंतिम संस्कार कोलकाता नगर निगम द्वारा किया जाता है।

इससे पहले भी पश्चिम बंगाल में पुलिस और पैरामेडिक्स की विशेष टीमों द्वारा कोरोना संक्रमितों के चोरी-छिपे अंतिम संस्कार करने की ख़बरें आई थी।

लश्कर ए तैयबा के टॉप आतंकी जहूर वानी समेत 5 गिरफ्तार, गुफा में छुपाए गोला-बारूद का खुलासा

जम्मू-कश्मीर के बडगाम के अरिजल खानसाहिब में सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तैयबा के टॉप ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) जहूर वानी (Zahoor Wani) समेत 5 आतंकियों को गिरफ्तार किया है। ये लोग भी आतंकियों की मदद किया करते थे। इनकी पहचान युनूस मीर, असलम शेख, परवेज़ शेख और रहमान लोन बताई जा रही है। इससे पहले बडगाम पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा के टॉप आतंकी सहयोगी ज़हूर वानी को गिरफ्तार किया था।

पुलिस ने शुक्रवार (मई 15, 2020) शाम अरिज़ल खानसाहिब इलाके में एक गुफानुमा आतंकी ठिकाने पर छापेमारी की। जहाँ से इस आतंकी की गिरफ्तारी की गई। इस आतंकी ठिकाने से पुलिस ने हथियार और कारतूस भी बरामद किए थे। यह आतंकी ठिकाना जहूर के घर से महज 200-300 मीटर की दूरी पर था, वो भी उसकी अपनी जमीन पर।

गुफानुमा आतंकी ठिकाने की तस्वीरें 

ज़हूर से पूछताछ के बाद ही अन्य 4 आतंकी सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने गंभीर धाराओं में ज़हूर वानी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। बताया जा रहा है कि जहूर बडगाम में लश्कर के आतंकियों के लिए हथियार सप्लाई, कम्यूनिकेशन और ट्रांसपोर्टेशन का काम देखता था।

जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षाबल जहूर की काफी दिनों से तलाश कर रहे थे। कुछ दिन पहले जिला बारामुला से गिरफ्तार किए गए दो ओवरग्राउंड वर्करों से मिले दस्तावेजों में जहूर के कुछ फोटो भी मिले थे। तभी से पुलिस और सेना इसकी तलाश कर रही थी।

पुलिस को उम्मीद है कि ज़हूर से पूछताछ के दौरान बड़गाम में लश्कर के मॉड्यूल को खत्म करने में मदद मिलेगी। पुलिस के मुताबिक जल्द ही इस मामले में कई और गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं।

सुरक्षाबलों ने कश्मीर में सक्रिय ऐसे टॉप-10 आतंकियों की लिस्ट तैयार की है, जिसमें हिजबुल मुजाहिदीन के नए चीफ कमांडर गाजी हैदर का नाम सबसे शीर्ष पर है। 

मेरे बेटे पर पानी छिड़का था, ₹4 लाख का दिया प्रलोभन: रो​हित जायसवाल की मॉं

अपडेट: बिहार के डीजीपी की जॉंच के बाद हम सूचनाओं को अपडेट कर रहे हैं। पीड़ित पिता इस दौरान कई बार अपने बयान से मुकरे हैं। लिहाजा उनकी ओर से किए गए सांप्रदायिक दावों को हम हटा रहे हैं। हमारा मकसद किसी संप्रदाय की भावनाओं का आहत करना नहीं था। केवल पीड़ित पक्ष की बातें सामने रखना था। इस क्रम में किसी की भावनाओं को ठेस पहुॅंची हो तो हमे खेद है।

गोपालगंज के रोहित जायसवाल की कथित हत्या को लेकर अलग-अलग मीडिया संस्थानों द्वारा अलग-अलग बातें कही जा रही है। अब रोहित की माँ का बयान आया है। उन्होंने अपने बेटे के ऊपर पानी छिड़के जाने की बात कही है। साथ ही कहा है कि उनके परिवार की गाँव में किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी।

रोहित की माँ ने ये बातें ‘द बिहार मेल’ से बातचीत के दौरान कही। उन्होंने कहा कि रोहित को बुलाकर ले जाने वाले लड़कों ने ही इस बात को कबूल किया है कि उन सबने रोहित को मारकर गाँव से 3-4 किलोमीटर दूर एक नदी में फेंक दिया है। उन लड़कों को गाँव के ही लोगों ने पकड़ा और उनके सामने ही आरोपितों ने हत्या की बात स्वीकार की।

रोहित जायसवाल की मॉं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि उनके बेटे का पोस्टमार्टम तक ठीक से नहीं किया गया। उन्होंने आगे बताया कि थानाध्यक्ष अश्विनी तिवारी ने आरोप वापस लेने के एवज में रोहित के पिता राजेश जायसवाल को 4 लाख रुपए दिलाने का प्रलोभन दिया था।

उन्होंने बताया कि थानाध्यक्ष बार-बार ‘कम्परमाइज करने’ की बातें कर रहे थे और कह रहे थे कि तुम कितनी भी कोशिश कर लो, कुछ नहीं कर पाओगे। रोहित की माँ ने आरोप लगाया कि उनके बेटे की लाश की जाँच किए बिना डूब कर मरने की बात कह दी गई और कोई छानबीन नहीं की गई। उन्होंने बताया कि उनके पति के साथ गाली-गलौज कर उन्हें भगा दिया।

रोहित जायसवाल की माँ का बयान (साभार: द बिहार मेल)

उन्होंने बताया कि इसके बाद वो भी अपने पति के साथ थानाध्यक्ष के पास शिकायत लेकर गईं लेकिन फिर भी उन्होंने गाली-गलौज किया। रोहित जायसवाल की माँ ने कहा कि उन्होंने ही अपने पति को मोबाइल का रिकॉर्डर ऑन रखने को कहा था, ताकि उनके पास थानाध्यक्ष के अत्याचार के सबूत रहे। रोहित का परिवार कटेया थाना क्षेत्र के बेलहीडीह गाँव का निवासी है।

इस मामले में पुलिस ने पहले कहा था कि 5 आरोपितों को जेल भेज कर त्वरित कार्रवाई की जा चुकी है। पिता राजेश जायसवाल ने भी कहा था कि उनलोगों की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। हमने राजेश से बातचीत की रिकॉर्डिंग भी जारी की थी।

मोदी सरकार के खिलाफ फेक न्यूज फैलाने की सलाह देने पर केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने लगाई शेखर ‘कूप्ता’ को लताड़, कहा- बिका हुआ

शुक्रवार (मई 15, 2020) को ‘द प्रिंट’ ने सारी बेशर्मी को पार करते हुए अपनी वेबसाइट पर एक लेख प्रकाशित किया। जिसका लब्बोलुबाब यह था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने के लिए विपक्ष फेक न्यूज फैलाए।

इस लेख में मुख्यत: इस बात पर जोर दिया गया कि लिबरलों को/विपक्षियों को नरेंद्र मोदी के खिलाफ़ छिड़ी जंग में किस प्रकार फेक न्यूज को बढ़ावा देना चाहिए। इस लेख में अपनी बातों को सही ठहराने के लिए द प्रिंट ने अमेरिकी थिंक-टैंक रैंड कॉर्पोरेशन के लिए लिखे गए क्रिस्टोफर पॉल और मिरियम मैथ्यूज के एक लेख का हवाला दिया है।

प्रिंट के लेख में तर्क दिया गया कि पूरे विश्व में आज झूठ को तेजी से फैलाना प्रोपेगेंडा फैलाने का सबसे शक्तिशाली उपकरण बनता जा रहा है। इसलिए जो लोग इस प्रोपेगेंडा को हराना चाहते हैं, उन्हें अपने झूठ को आग की तरह फैलाना होगा। 

सत्तारुढ़ भाजपा के खिलाफ कॉन्ग्रेस के इकोसिस्टम द्वारा फेक न्यूज फैलाए जाने के प्रपंच को सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह ने आड़े हाथों लिया। उन्होंने मोदी सरकार के खिलाफ फर्जी न्यूज फैलाने को बढ़ावा दिए जाने को लेकर प्रकाशित लेख पर एडिटर्स गिल्ट ऑफ इंडिया के प्रमुख शेखर गुप्ता को लताड़ लगाई

शेखर गुप्ता के ट्वीट पर वीके सिंह की प्रतिक्रिया

रिटायर्ड जनरल वीके सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा कि जब आप किसी ऐसे आर्टिकल को शेयर करते हैं, जिसमें सरकार पर सवाल उठाया गया हो, तो ये आपका लोकतांत्रिक अधिकार है। इसी तरह अगर आप दुनिया में घटित होने वाले किसी अन्य घटनाओं को रिट्वीट करते हो तो ये भी आपका लोकतांत्रिक अधिकार है।

वीके सिंह का ट्वीट

शेखर गुप्ता पर हमला करते हुए सिंह ने कहा कि जब कोई शख्स एडिटर्स गिल्ड के अध्यक्ष के रुप में किसी आर्टिकल को रिट्वीट करता है, जिसमें न केवल सरकार पर सवाल उठाया गया हो, बल्कि लिबरलों को/विपक्षियों को नरेंद्र मोदी के खिलाफ़ छिड़ी जंग में फेक न्यूज को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया हो, तो यह उनकी बिरादरी को भी अपमानित करता है।

दरअसल, शेखर गुप्ता ने खुद भी उस विवादित आर्टिकल को रिट्वीट किया था, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री की यह तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। वीके सिंह ने शेखर गुप्ता पर कटाक्ष करते हुए उन्हें ‘कूप्ता’ भी कहा।

वीके सिंह ने शेखर गुप्ता के लिए ‘कूप्ता’ शब्द का इस्तेमाल किया

बता दें कि सोशल मीडिया पर शेखर गुप्ता के लिए कूप्ता शब्द का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है, क्योंकि उन्होंने जनरल वीके सिंह के सेना में रहने के दौरान शेखर गुप्ता ने फर्जी तख्तापलट की कहानी प्रकाशित की थी। शेखर गुप्ता उस समय इंडियन एक्सप्रेस में कार्यरत थे। वीके सिंह ने उनसे कहा कि भले ही वे अपने पेशे के प्रति ईमानदार नहीं हो सकते, लेकिन अपने संपादक पद के प्रति ईमानदार रहें।

जनरल वीके सिंह ने शेखर गुप्ता के लिए ‘बिके हुए’ पत्रकार शब्द का इस्तेमाल करते हुए फर्जी खबरों को फैलाने, अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध लगाने व राजनैतिक विरोधियों पर कार्रवाई करने के आह्वान के साथ ही तख्तापलट की झूठी खबर को प्रकाशित करने को लेकर मजाक उड़ाया।

शेखर गुप्ता के खिलाफ हमला ऐसे समय में हुआ है, जब हाल के दिनों में ‘द प्रिंट’ एक कुख्यात फर्जी खबर फैलाने वाले वेबसाइट के रुप में उभरा है। मुख्यधारा मीडिया जो पिछले काफी समय से फर्जी की खबरें फैला रहे हैं, वे केवल राजनीति के एक धड़े को फायदा फहुँचाने के लिए है।

जाहिर है वो धड़ा भाजपा का नहीं है। इस काम में पिछले कुछ समय में शेखर गुप्ता का द प्रिंट सबसे आगे रहा है और अब तो इसके पीछे की वजह भी साफ हो गई है।

द प्रिंट तमाम झूठ फैलाने के बाद अपनी नैतिक श्रेष्ठता पर इतना आश्वस्त है कि लेख से ऐसी बातें बताने की कोशिश कर रहा है कि विपक्ष के पास राजनैतिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए फेक न्यूज फैलाने की आज़ादी है और वे इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

रॉंची: लॉकडाउन के बावजूद अनवर खान के घर इफ्तार, रोकने पहुँची पुलिस पर पथराव

लॉकडाउन के बावजूद झारखंड के रॉंची में इफ्तार का आयोजन किया गया। पुलिस मौके पर पहुॅंची तो लोगों ने हमला कर दिया। पथराव में पुलिस वैन क्षतिग्रस्त हो गया।

दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक रॉंची के परहेपाठ में शुक्रवार (15 मई 2020) को अनवर खान के घर इफ्तार का आयोजन किया गया। इसमें सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियाँ उड़ाई गईं। इसकी जानकारी जैसे ही रातू पुलिस को हुई उसकी पीसीआर वैन-29 मौके पर पहुँच गई।

पुलिस को देख इफ्तार में शामिल लोगों ने पत्थरबाजी की। हमले की जानकारी पर रातू थाने से बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स गाँव में पहुँची। लेकिन इससे पहले ही हमले के आरोपित मौके से फरार हो गए।

प्रशिक्ष़ु एसपी के विजय शंकर ने बताया कि पहरेपाठ में कुछ लोगों ने पुलिस वैन पर हमला किया था। सूचना पर जब पुलिस गाँव में पहुँची, तो वहाँ कोई नहीं था। इस मामले में पुलिस आरोपितों के खिलाफ आगे की कार्रवाई करेगी।

आपको बता दें कि इससे पहले गुरुवार (13 मई 2020) को भी प्रखंड मुख्यालय में बिना प्रशासनिक अनुमति के इफ्तार का आयोजन किया गया था। इस मामले में रातू बीडीओ और सीओ की ओर से इफ्तार पार्टी में शामिल होने वाले 12 लोगों के खिलाफ लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

इससे पहले शुक्रवार (1 मई 2020) की शाम को उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में मोहल्ला चौथइया पट्टी में स्थित जामा मस्जिद के सामने पप्पू नाम के एक युवक ने रमजान माह में इफ्तार का आयोजन किया था। लॉकडाउन के नियमों की अनदेखी करते हुए इफ्तार में काफी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए थे।

जेवर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मौके से इफ्तार पार्टी के आयोजक पप्पू और मौसम नाम के व्यक्ति को करीब शाम 7 बजे गिरफ्तार कर लिया था। साथ ही पुलिस ने पूछताछ के बाद इफ्तार पार्टी में शामिल होने वाले 19 लोगों के खिलाफ में लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था।

सेना के प्रस्ताव को लेकर डेक्कन क्रॉनिकल ने मोदी समर्थकों पर कसा तंज, फिर चुपचाप हेडलाइन से ‘भक्त’ हटाया

डेक्कन क्रॉनिकल ने गुरुवार (मई 14, 2020) को एक लेख प्रकाशित किया था। इसमें बताया गया था कि आम नागरिकों को तीन साल के लिए सेना में सेवा देने का मौका देने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। लेकिन, इस रिपोर्ट की हेडलाइन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थकों पर तंज कसा गया। कहा गया था कि अब ‘भक्तों’ के लिए सेना में शामिल होने का समय आ गया है।

‘भक्त’ और ‘अंधभक्त’ शब्द का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधी और मीडिया का एक धड़ा पीएम मोदी के समर्थकों के लिए करता है।

इसके बाद कॉन्ग्रेस समर्थकों ने डेक्कन क्रॉनिकल की ‘शानदार’ हेडलाइन के लिए प्रशंसा की। साथ ही यह आशंका भी जताई कि ‘संघी’ अब सेना में घुसपैठ कर सकते हैं।

कुछ लोगों ने इसे प्रिंट मीडिया के ‘विश्वसनीयता’ रूप में भी देखा।

इस बीच, पीएम मोदी के समर्थकों ने इस बात को अपनी प्रशंसा में लेते हुए इसे ताने के रूप में इस्तेमाल किया और कहा कि वास्तव में केवल ‘भक्त’ ही देश की सेवा कर सकते हैं और मातृभूमि के लिए मरने को भी तैयार रहते हैं।

हालांकि, कॉन्ग्रेस समर्थकों की सराहना के बावजूद ‘डेक्कन क्रॉनिकल’ ने एक दिन बाद बिना कुछ कहे ही ‘अंध भक्त’ को अपने हेडलाइन से हटा दिया। नए हेडलाइन में लिखा- सेना ने आम नागरिकों के लिए तीन साल के टूर फ़ॉर ड्यूटी का दिया प्रस्ताव।

मीडिया में हेडलाइन का ‘खेल’

आजतक ने हाल ही में एक मुस्लिम घर में हिंसा पर एक रिपोर्ट में करवा चौथ को खींचकर हिंदूफोबिया प्रदर्शित की थी। हेडलाइन में कहा गया था कि एक पति ने करवा चौथ के दिन अपनी पत्नी की जीभ काट दी थी, जबकि अपराधी और पीड़ित, दोनों गैर-हिंदू थे। इसी तरह एनडीटीवी को भी ट्विटर पर पकड़े जाने के बाद अपने गुमराह करने वाले हेडलाइन को बदलना पड़ा था।

दिल्ली: MCD सफाईकर्मी धरमपाल को शाहरूख ने भयावह क्रूरता से पीटा, परिवार कर रहा इंसाफ की माँग

दिल्ली MCD सफाईकर्मी धरमपाल पर नारियल बेचने वाले शाहरुख ने धारदार हथियार से घायल कर दिया। पीड़ित धरमपाल पर शाहरुख ने जातिगत टिप्पणियाँ कर उसे अपने काम से मतलब रखने के लिए कहा और उस पर लाठी-दराती से हमला कर दिया।

यह मामला 13 मई, 2020 का है। मंगोलपुरी दिल्ली निवासी धरमपाल वाल्मीकि दिल्ली MCD में सफाईकर्मी हैं। ऑपइंडिया ने जब पीड़ित परिवार से संपर्क किया तो पीड़ित धरमपाल के बड़े बेटे राजेश ने पूरी घटना को विस्तार से बताया।

MCD सफाईकर्मी धरमपाल पर शाहरूख ने किया हमला

राजेश ने कहा कि रोजाना की तरह ही बीते बुधवार को भी जब वो सड़क पर सफाई कर रहे थे। उसी समय वहाँ मस्जिद के पास नारियल बेचने वाले शाहरुख से उन्होंने कूड़े को सड़क पर ना फेंकने की अपील की। धरमपाल के बेटे राजेश ने फ़ोन कॉल पर बताया कि उनके पिता उन्हें बस ये सलाह दे रहे थे कि उन्हें अपनी दुकान का कूड़ा सड़क पर नहीं फेंकना चाहिए, क्योंकि यह गंदगी करने के साथ ही दुपहिया चालकों की जान के लिए भी खतरा हो सकता है।

MCD कर्मचारी धरमपाल के ये कहते ही शाहरुख ने उनकी जाति को लेकर टिप्पणी शुर कर दीं और उन्हें भद्दी गालियाँ भी दी।

देखते ही देखते वहाँ पर बहस होने लगी और शाहरुख ने पास में ही रखी लाठी उठाकर धरमपाल के कंधे और पेट पर मारी। इसके बाद शाहरुख ने नारियल काटने वाला हथियार उठाया और धरमपाल के शरीर पर कई वार किए।

धरमपाल पर किए गए हमले में चोट के निशान उनके शरीर पर देखे जा सकते हैं। धारदार हथियार को हाथ से रोकने की कोशिश में उनके हाथ में भी चोटें आई हैं

अस्पताल से लौटने के बाद पीड़ित धरमपाल

पीड़ित धरमपाल के बेटे राजेश ने बताया कि आरोपित शाहरुख, पुत्र इजाजवाली खान, द्वारा किए गए धारदार हथियार के हमले से उनके पिता वहीं सड़क पर गिरकर बेहोश हो गए थे। यह देखकर आसपास के लोग वहाँ पर इकट्ठे हो गए।

धारदार हथियार को हाथ से रोकने की कोशिश में उनके हाथ में भी चोटें आई हैं

राजेश पीड़ित धरमपाल के सबसे बड़े बेटे हैं। ऑपइंडिया को इस घटना की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा –

“हमारे पिता MCD में सरकारी सफाईकर्मी हैं। वो बस अपनी ड्यूटी कर रहे थे। वो चाहते थे कि शाहरुख अपनी ठेली का कूड़ा सड़क पर ना फेंके। नारियल पानी की दुकान का कूड़ा सड़क पर चलने वाले लोगों के लिए भी असुविधा पैदा करता है। इतना कहने पर वो पिता जी को गाली देने लगा। हम वाल्मीकि समाज से आते हैं। शाहरुख ने उन्हें ** कहकर जातिगत टिप्पणी करते हुए गालियाँ दीं। और फिर उसने पिता जी पर हमला कर दिया। जिस हथियार से वो नारियल काटता था उसके वार से पिता जी को कई जख्म आए और वो वहीं सड़क पर गिर गए।”

पुलिस नहीं करना चाहती है जाँच और कार्रवाई

पीड़ित धरमपाल का कहना है कि जब वो संजय गाँधी अस्पताल से घर लौटे तो उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। उन्होंने कहा कि मंगोलपुरी थाने में मौजूद सब इंस्पेक्टर ने अस्पताल की कॉपी की फोटो लेकर अपने पास रख ली लेकिन इस मामले में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।

ऑपइंडिया ने भी जब मंगोलपुरी थाना सब इंस्पेक्टर से फ़ोन पर सम्पर्क कर के धरमपाल के मामले में जानकारी माँगी तो उन्होंने कॉल डिस्कनेक्ट कर दी।

धरमपाल की मेडिकल रिपोर्ट

पीड़ित धरमपाल के परिवार का कहना है कि जब कोरोना वायरस की महामारी के समय पूरा देश, शासन-प्रशासन कोरोना वॉरियर्स को सम्मानित कर रहे हैं, तब उनके पिता के साथ ऐसा घिनौना व्यवहार किया गया है।

उन्होंने कहा कि उनके पिता को न्याय मिलने के बजाए लोग उनसे मिलकर सिर्फ अपनी व्यक्तिगत राजनीति को साधने का प्रयास कर रहे हैं।

धरमपाल के परिवार का बयान इस यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं –

श्रमिक एक्सप्रेस में सवार होने से पहले ‘कर्मभूमि गुजरात’ को नमन करते प्रवासी मजदूर, कहा- हम जल्द वापस आएँगे

कोरोना लॉकडाउन के चलते उत्तरप्रदेश से अहमदाबाद आए प्रवासी मजदूरों को श्रमिक एक्सप्रेस से उनके घर भेजने का इंतजाम किया जा रहा है। वहीं शुक्रवार (15.5 20) को एक प्रवासी मजदूर कृष्णावती की एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। जिसमें वो श्रमिक एक्सप्रेस पर सवार होने से पहले गुजरात की भूमि को नमन कर रही थी।

गाड़ियों की सुविधा के साथ अपने घर वापस जाने पर कृष्णावती ने देशगुजरात चैनल से बातचीत में कहा, “मैं अहमदाबाद में लॉकडाउन के कारण फँस गई थी। मैं उत्तर प्रदेश के रायबरेली का रहने वाली हूँ। पीएम मोदी को धन्यवाद! आज उन्हीं की वजह से हम अपने घरों में वापस जा पा रहे हैं। हमें सरकार से सभी सुविधाएँ मिली हैं। इसके साथ हम एक विशेष बस के माध्यम से स्टेशन पहुँचे हैं और अब ट्रेन से यात्रा कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “गुजरात ने हमें सब कुछ दिया है, हम लौटेंगे।” वीडियो में 2:25 पर, कृष्णावती और एक अन्य प्रवासी श्रमिक को गुजरात की भूमि पर झुककर नमन करते हुए देखा जा सकता है जो उनकी आजीविका का स्रोत रहा है।

उल्लेखनीय है कि, भारतीय रेलवे ने गुरुवार को पूरे देश में 145 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया। रेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने खुलासा किया था कि प्रवासियों को उनके मूल स्थानों पर वापस भेजने के इस मिशन में, भारतीय रेलवे ने गुरुवार को करीब 2.10 लाख प्रवासी मजदूरों को उनके घरों में वापस जाने में मदद की थी।

AIMIM विधायक अब्दुल्ला बलाला ने दिखाई दबंगई, लॉकडाउन के कारण बंद फ्लाईओवर जबरन खुलवाया

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के विधायक अहमद बिन अब्दुल्ला बलाला ने एक बार फिर दबंगई दिखाई है। लॉकडाउन की वजह से बंद हैदराबाद के दबीरपुरा फ्लाईओवर को जबरन खुलवाने के आरोप उन पर लग रहे हैं।

भाजपा विधायक राजा सिंह ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि बलाला के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। बीजेपी विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि AIMIM विधायक और उनकी पार्टी के अन्य लोग हैदराबाद के पुराने शहर में लॉकडाउन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। वहीं, दबीरपुरा पुलिस के अनुसार बालाला ने बैरिकेड हटाने से पहले मीर चौक के एसीपी से अनुमति ली थी।

राजा सिंह ने कहा, “आज, पूरा देश कोरोना से लड़ रहा है। एक तरफ देश लड़ रहा है, जबकि दूसरी तरफ अहमद बलाला और AIMIM के अन्य नेता हैं, जो लॉकडाउन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। वे किसी की नहीं सुनते हैं और पुलिस और डॉक्टर को धमकी दे रहे हैं।”

भाजपा विधायक ने कहा, “मैं AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी से पूछना चाहता हूँ कि क्या वो इन कृत्यों के पीछे हैं। एक तरफ वह (ओवैसी) बहुत अच्छी छवि दिखाते हैं, लेकिन दूसरी तरफ वह अपने विधायकों और नगरसेवकों को लॉकडाउन का उल्लंघन करने और कोरोना वायरस फैलाने की अनुमति देने का आदेश देते हैं।”

राजा सिंह ने कहा, “मैं उनसे कहना चाहता हूँ कि लोग आपके कामों का जवाब देंगे। मैं तेलंगाना के मुख्यमंत्री से कहना चाहता हूँ कि जो कोई भी विधायक या नगरसेवक उल्लंघन करता है, मुख्यमंत्री उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करें।”

बता दें कि अब्दुल्ला को एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी का भरोसेमंद माना जाता है। अब्दुल्ला का वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि AIMIM विधायक फ्लाईओवर पर तैनात पुलिस कांस्टेबल को बैरिकेड हटाने के लिए मजबूर करते हैं।

गौरतलब है कि बलाला इसके पहले भी कई हॉटस्पॉट इलाकों को जबर्दस्ती खुलवा चुके हैं। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को मलाकपेट में बैरिकेड हटाने के लिए मजबूर किया था, जो कि रेड जोन में था।

औरैया हादसा: 24 मजदूरों की मौत पर CM योगी सख्त, 2 SHO सस्पेंड, पीड़ितों को मुआवजे का ऐलान

उत्तर प्रदेश के औरैया में हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद योगी सरकार ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त रुख अख्तियार किया है। सीएम योगी ने इसको लेकर एक मीटिंग की। इसके बाद फतेहपुर सीकरी (आगरा) और कोसी कलान (मथुरा) के SHO को निलंबित कर दिया गया। 

मुख्यमंत्री ने मथुरा और आगरा जोन के SSP, ADG और IG से इस मामले में स्पष्टीकरण भी माँगा है। योगी ने हादसे में जान गँवाने वाले मजदूरों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए की मुआवजा राशि देने का भी ऐलान किया है।

इसके अलावा सीएम ने अधिकारियों से दोनों ड्राइवरों के खिलाफ आईपीसी की उचित धाराओं के तहत मामला दर्ज करने और दोनों वाहनों को जब्त करने का आदेश दिया है।

गौरतलब है कि औरैया में चूने की बोरियों से लदे ट्रक की एक अन्य ट्रक की टक्कर में 24 मजदूरों की मौत हो गई। ताजा जानकारी के मुताबिक 19 लोग घायल हैं, जिनका औरैया जिला अस्पताल और सैफई में इलाज हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने इस घटना पर दुख जाहिर करते कहा, “उत्तर प्रदेश के औरैया में सड़क दुर्घटना बेहद ही दुखद है। सरकार राहत कार्य में तत्परता से जुटी है। हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करता हूँ। साथ ही घायलों के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।”

इससे पहले सीएम योगी ने सभी घायलों को तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराए जाने का निर्देश देते हुए कमिश्नर और कानपुर के आईजी मोहित अग्रवाल को घटनास्थल का दौरा कर दुर्घटना के कारणों की तत्काल रिपोर्ट देने को कहा था। उन्होंने कहा कि जो लोग भी इसके जिम्मेदार पाए जाएँगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।