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ब्रा, पैंटी, योनि, सेक्स, लिंग, वीर्य से करियर बनाने वाले संपादक के पत्रकारिता वाले कुछ लल्लनटॉप प्रयोग

ब्रा, पैंटी, लिंग, लिपस्टिक.. इन जैसे ही कुछ मिलते-जुलते विषयों में अगर आप रूचि रखते हैं तो आपकी पहली मंजिल दिल्ली पालिका बाजार या सरोजिनी मार्किट नहीं बल्कि दी लल्लनटॉप होना चाहिए।

लेकिन आप दी लल्लनटॉप की क्षमताओं को आँकने की जल्दबाजी भी नहीं कर सकते क्योंकि आज के दौर में जब सड़क, मोहल्लों में बसे हुए हाशमी दवाखाने विलुप्त होने के कगार पर हैं, ऐसे में पत्रकारिता का हाशमी दवाखाना बनकर दी लल्लनटॉप ही विलुप्त होती इस दुर्लभ सभ्यता का खेवनहार बना था।

सवाल ये है कि आखिर टाइम मशीन में जाकर जर्मन तानाशाह हिटलर के लिंग की नाप ढूँढकर ‘पत्रकारिता की गरिमा’ बचाने का दावा करने वाली जमात-ए-लल्लनटॉप आखिर एकबार फिर चर्चा का विषय क्यों बने हैं?

इसका उत्तर यह है कि ‘दी लल्लनटॉप’ के सम्पादक सौरभ द्विवेदी ने जिस द्वेष भावना को पत्रकारिता के मानकों के ऊपर रखकर पत्रकारिता सिखाने का दावा ऑपइंडिया की एक रिपोर्ट के एक कथित फैक्ट चेक, में ‘हाथों ही हाथों’ की कला से किया है, उसने ‘द लल्लनटॉप’ को सस्ती लोकप्रियता दिलाने का काम किया है।

शोषित और गरीब वर्ग की वास्तविकता को ‘प्रोपेगेंडा’ का नाम देने वाले सौरभ द्विवेदी अपने फैक्ट चेक में इस बात का जिक्र तो करते हैं कि वह पत्रकारिता के नियम, कायदे-कानून जानते हैं, लेकिन वह कैमरा के सामने हाव-भावों पर ज्यादा ध्यान देने के चक्कर में यही ज्ञान देते हुए इस बात को खुद पर लागू करना भूल गए।

कुछ दिनों से सोशल मीडिया से लेकर जमात-ए-पत्रकारिता गैंग के बीच एक खबर ने जमकर अपने लिए जगह बनाई, वो ये कि गोपालगंज मामले में ऑपइंडिया पर FIR दर्ज हुई है।

लेकिन इस गिरोह ने बेहद शातिराना तरीके से यह बात सामने नहीं रखी कि यह FIR किसी तथ्य के कारण नहीं बल्कि एक विचार और वास्तविकता के विरोध के फलस्वरूप की गई थी। वास्तविकता यह कि जिस बच्चे को मार दिया गया था, उसके परिवार के पक्ष को, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और ‘एक महीने पुरानी खबर’ जैसे तथ्यों को बीच से गायब कर दिया गया।

ऑपइंडिया के रिपोर्टर ने जब इस पहलू की ओर मीडिया का ध्यान दिलवाने की कोशिश की तो वर्षों से कुंठित मीडिया के लिबरल-गिरोह के विरोध का वो सैलाब उमड़ पड़ा, जो बस ऐसे ही एक अवसर की तलाश में था।

फैक्ट चेकर्स ने दावा किया कि ऑपइंडिया ने साम्प्रदायिक रंग देने का प्रयास किया है। लेकिन आज ही रोहित जायसवाल की माँ ने पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

हिटलर का लिंग नापने वाली वेबसाइट ‘द लल्लनटॉप’ के सम्पादक और फैक्ट चेकर सौरभ द्विवेदी अपने इस तथाकथित फैक्ट चेक में कई दावे करते देखे गए। इनमें से एक यह भी था कि ऑपइंडिया एक प्रोपेगेंडा वेबसाइट है। लेकिन असल संघर्ष सौरभ द्विवेदी का यहाँ से शुरू होता है।

प्रोपेगेंडा का असल मकसद विरोधी विचार को कुचल देना होता है। ऐसी हर आवाज, जो आकार लेती नजर आ रही हो, उसे येन-केन-प्रकारेण झूठा साबित करना वामपंथी गर्भ से सीखकर नहीं आते, बल्कि उस इकोसिस्टम का हिस्सा बनकर सीखते हैं, जिसकी वाहवाही के लिए वो एक मृतक बेटे की माँ के बयान को प्रोपेगेंडा का हिस्सा बताते हैं।

वास्तविकता को प्रोपेगेंडा नाम देने वाली कुत्सित मानसिकता

ऑपइंडिया पर पिछले कुछ दिनों में इसी खबर को लेकर खूब आरोप लगाए गए। लेकिन पत्रकारिता के मापदन्डों को लेकर त्राहिमाम करने वाले ये लोग क्या यह दावा उसी आत्मविश्वास के साथ मृतक रोहित जायसवाल की माँ के सामने जा कर सकते हैं कि उनकी कही गई बातें प्रोपेगेंडा का हिस्सा हैं और वो अपने बेटे की हत्या में हुई जाँच पर सवाल उठाकर समाज में सांप्रदायिकसाम्रदायिक सौहार्द बिगाड़ रही हैं?

ऑपइंडिया की रिपोर्ट का फैक्ट चेक करने का दावा करके अपनी छाती ठोकने वालों को क्या अब ऑपइंडिया की तरह ही रोहित जायसवाल की माँ पर भी एक FIR नहीं करनी चाहिए कि आखिर उन्होंने ऑपइंडिया की पहल के बाद अपने बेटे के लिए न्याय माँगने का साहस क्यों कर दिखाया, जबकि कैमरा के सामने खड़े ‘दी लल्लनटॉप’ के सम्पादक के हाथों में पास उनके बेटे की कथित हत्या की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट है?

क्या यह सिर्फ एक संयोग नहीं है कि इनके अपने प्रोपेगेंडा और व्यक्तिगत नैरेटिव से हटकर आने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक को नकार देने वाला यह मीडिया गिरोह कुछ दिनों से बस एक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट हाथों में लेकर दुहाई देता फिर रहा है? द लल्लनटॉप को कम से कम रवीश कुमार के शब्दों को तो ध्यान से सुनना चाहिए कि मीडिया पर FIR मीडिया की स्वतन्त्रता को खत्म करता है।

हालाँकि, ऑपइंडिया ने इस स्वतन्त्रता का प्रयोग कभी भी रवीश कुमार, दी वायर, दी क्विंट या फिर दी लल्लनटॉप आदि की तरह सिर्फ संस्थाओं को बदनाम करने और कॉन्सपिरेसी थ्योरी गढ़ने के लिए नहीं किया।

सौरभ द्विवेदी से सीखें पत्रकारिता, आओ कर के देखें –

ऑपइंडिया की रिपोर्ट का कथित फैक्ट चेक करने का दावा करने वाले सौरभ द्विवेदी ने अपने वीडियो में एक और दावा किया कि वो सच के साथ खड़े हैं और वो सिर्फ सच की ही बात करते हैं। आखिरी बार जब सौरभ द्विवेदी सच के साथ खड़े थे, तब उन्होंने पाया था की हिटलर के लिंग का आकार और नाप वो नहीं थी, जिसके बारे में ‘वोक-लिबरल’ बात करते हैं, बल्कि उसकी बात कुछ और ही थी।

इसके बाद जब दी लल्लनटॉप सच के साथ खड़ा था, तब वो हास्य-व्यंग्य पोर्टल द्वारा बनाई गई एक रिपोर्ट का फैक्ट चेक कर रहा था। इसके बाद पत्रकारिता के इस आखिरी मसीहा ने एक बार सारी जनता के सामने केंद्र सरकार की NPR-NRC नीतियों पर अपने पत्रकारिता के गुरु राजदीप सरदेसाई के साथ बैठकर खुलेआम झूठे आँकड़े पेश किए थे और पकड़े जाने पर बेहद बेशर्मी से यूट्यूब से वीडियो को ना हटाकर चुपके से इसके विवरण में इस ‘भूल’ के बारे में लिख दिया।

MEME और फेकिंग न्यूज़ का फैक्ट चेक करना तो दी लल्लनटॉप के मूल्यों का पहला सबक है ही। एक बार तो लल्लनटॉप पाद के महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर भी साहित्य लिखकर पत्रकारिता के स्वर्णिम कीर्तिमान रचे थे –

दी लल्लनटॉप की ‘सेक्यूलरियत’ का सच से सबसे नजदीकी सामना तब हुआ था जब उन्होंने शूटिंग कर रहे कुछ कलाकारों को मुस्लिम पर हो रहा अत्याचार बताकर दी लल्लनटॉप और उनकी टीम ने जमकर सेक्युलर साहित्य लिखा था।

सौरभ द्विवेदी और उनके दी लल्लनटॉप गिरोह की पत्रकारिता के मूल्य इतने ऊँचे हैं कि कई बार उन्हें खुद उन तक पहुँचने में समस्याओं का सामना करना पड़ा है। मसलन, एक साल पुरानी खबर, जिसे पुलिस की जाँच में महीनों पहले फर्जी बता दिया गया था, को ठीक होली के ही दिन दोबारा इसलिए प्रकाशित किया गया ताकि होली को वीर्य का त्योहार साबित कर कुछ सस्ती लोकप्रियता का जुगाड़ किया जा सके।

ये पत्रकारिता के वही प्रतिमान हैं जो मजाक-मजाक में अपने पिताजी को ही कंडोम पहनने की सलाह दे बैठे थे। हालाँकि, इसके बाद उन्होंने एक सभ्य नागरिक और आदर्श बेटे की तरह इसे भी भूल ही बताया था।

खैर, यहाँ पर अभी भी विंग कमांडर अभिनन्दन की निजी जानकारी पाकिस्तानियों को उपलब्ध करवाने वाली जैश-ए-पत्रकारिता का जिक्र करना बिलकुल ठीक नहीं होगा।

यही नहीं, द लल्लनटॉप के दल में मौजूद हस्तियों ने तो मानो पीएचडी ही ऐसे विषयों में की है जो एकदम मारक मजा देते हैं और जो विषय फितरत से एकदम लल्लनटॉप हैं। नीचे दी गई एक रिपोर्ट की झलक इसका सबसे पुख्ता उदाहरण है –

ब्रा, पैंटी और पेटीकोट.. एकदम लल्लनटॉप

आज तक जो जमात-ए-लिबरल-गिरोह पितृसत्ता, लिपस्टिक नारीवाद, ब्रा, पैंटी और पेटीकोट से बाहर नहीं आ सकी है (मुद्दों से), वह आखिर अपने बालों में धार उतारने के लिए शीशा रोज सुबह किस आत्मविश्वास के साथ देख पाता होगा?

ऐसे कई उदाहरण हैं, जब लिबरल गिरोह को पत्रकारिता के वास्तविक मूल्यों का पालन करते हुए, अपना आत्मविश्लेषण करने की जरूरत थी, लेकिन दी लल्लनटॉप के सौरभ द्विवेदी ने ऐसा नहीं किया।

ऐसे भी कुछ उदाहरण हैं, जब सच के साथ खड़े रहने का दावा करने वाले सौरभ द्विवेदी और उनकी ‘टीम लल्लनटॉप’ महज ‘जय श्री राम’ और ‘जय बजरंगबली’ के नारे के प्रयोग को पढ़कर बिदक गई थी, लेकिन उन पर बात कभी बाद में और सही अवसर पर की जाएगी।

फिलहाल रोहित जायसवाल की माँ कुछ कहना चाह रही हैं, दी लल्लनटॉप और उसके सम्पादक को उन्हीं पत्रकारिता के मूल्यों का वास्ता है, जिनका जिक्र उन्होंने ऑपइंडिया की रिपोर्ट का कथित तौर पर फैक्ट चेक करते हुए किया था, कि वो उनकी बात सुनकर अपने चिरपरिचित अंदाज में उस पर भी अपने विचार रखें।

गोपालगंज रोहित जायसवाल मामला: बिहार DGP ने की बड़ी कार्रवाई, थानाध्यक्ष को किया सस्पेंड

अपडेट: बिहार के डीजीपी की जॉंच के बाद हम सूचनाओं को अपडेट कर रहे हैं। पीड़ित पिता इस दौरान कई बार अपने बयान से मुकरे हैं। लिहाजा उनकी ओर से किए गए सांप्रदायिक दावों को हम हटा रहे हैं। हमारा मकसद किसी संप्रदाय की भावनाओं का आहत करना नहीं था। केवल पीड़ित पक्ष की बातें सामने रखना था। इस क्रम में किसी की भावनाओं को ठेस पहुॅंची हो तो हमे खेद है।

गोपालगंज के रोहित जायसवाल मामले ने नया मोड़ ले लिया है। कटेया थानाध्यक्ष अश्विनी तिवारी को सस्पेंड किए जाने की खबरें आ रही है। उन पर मृतक रोहित के माता-पिता के साथ अभद्रता के आरोप थे।

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने ये कार्रवाई की है। वे दो दिनों से इलाक़े के दौरे पर थे और ख़ुद सारी स्थिति का जायजा लेते हुए जाँच कर रहे थे। उन्होंने थानाध्यक्ष तिवारी को त्वरित प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया है। उन्होंने गोपालगंज का दौरा कर इस पूरे मामले का संज्ञान लिया।

इसी थाना क्षेत्र के बेलाडीह गाँव में रोहित के परिवार की पकौड़े की दुकान थी। रोहित के पिता राजेश जायसवाल ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे की हत्या कर नदी में लाश फेंक दी गई थी। उन्होंने थानाध्यक्ष अश्विनी तिवारी पर गाली-गलौज करने और अश्लील इशारे करने के आरोप लगाए थे। वो लगातार थानाध्यक्ष के निलंबन की माँग कर रहे थे। ऑपइंडिया के सूत्रों के अनुसार, आज दोपहर में तिवारी को सस्पेंड करने का निर्णय लिया गया।

थानाध्यक्ष अश्विनी तिवारी पर राजेश और उनकी पत्नी ने दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था। राजेश ने ऑपइंडिया से कहा था, “थानाध्यक्ष ने मुझे गाली दी, मेरी पत्नी को गाली दी और मारपीट की। ऐसा व्यवहार किया जाता है क्या? उन्होंने अपनी पैंट खोल कर अश्लील इशारे किए।” 

इस मामले में पुलिस ने पहले कहा था कि 5 आरोपितों को जेल भेज कर कार्रवाई की जा चुकी है। राजेश जायसवाल ने भी कहा था कि उनलोगों की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। हमने राजेश से बातचीत की रिकॉर्डिंग भी जारी की थी।

चीन से कारोबार समेट कर भारत आने को तैयार है Lava, ₹800 करोड़ के निवेश की घोषणा

मोबाइल कंपनी लावा इंटरनेशनल (Lava) ने चीन को झटका देते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। फैसले के तहत मोबाईल कंपनी लावा (Lava) चीन से अपने कारोबार को समेटकर भारत में लाएगा और पाँच साल के अंदर 800 करोड़ रुपए का निवेश करेगा। माना जा रहा है कि भारत में हाल ही में किए गए नीतिगत बदलावों के बाद कंपनी ने यह कदम उठाने का फैसला किया है।

लावा कंपनी (Lava) अपने फैसले के मुताबिक मोबाइल शोध एवं विकास, डिज़ाइन और विनिर्माण को अगले छह महीने के भीतर चीन से भारत में स्थानांतरित करेगा। शनिवार (16 मई, 2020) को कंपनी ने अपने बयान में कहा, “भारतीय मोबाइल फोन निर्माताओं ने गत माह सरकार द्वारा घोषित प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (पीएलआई) में चीन से अधिक लागत लाभ मिलने के बाद यह कदम उठाया है।”

लावा के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक हरिओम राय ने कहा, “हम बेसब्री से अपने पूरे मोबाइल शोध एवं विकास, डिजाइन और विनिर्माण को चीन से भारत में स्थानांतरित करने का इंतजार कर रहे हैं।” राय ने आगे कहा, “उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन के साथ दुनियाभर के बाज़ार के लिए हमारी विनिर्माण क्षमता काफी हद तक पूरी हो जाएगी, इसलिए हम इस बदलाव की योजना बना रहे हैं।”

दरअसल लावा अपने मोबाइल फोनों का 33 प्रतिशत से अधिक निर्यात मैक्सिको, अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और पश्चिम एशिया जैसे बाज़ारों में करता है। लावा ने पिछले सप्ताह नोएडा में अपनी विनिर्माण सुविधा में 20 प्रतिशत से अधिक उत्पादन क्षमता के साथ काम शुरू किया था। कंपनी के राज्य अधिकारियों से सिफारिश मिलने के बाद इसके 3,000 में से करीब 600 कर्मचारी कारखाने में वापस आ गए हैं।

आपको बता दें कि पीएलआई योजना भारत में निर्मित सामानों की तेज़ी से बिकवाली पर चार से छह प्रतिशत तक का प्रोत्साहन देती है। वहीं लावा के इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस बयान से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें पिछले दिनों उन्होंने ‘लोकर के लिए वोकल’ बनने की बात कही थी।

गौरतलब है कि अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया था। इसके साथ ही PM मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत‘ के लिए तैयारियाँ करने की बात कही थी। इसके बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस वार्ता के जरिए इसकी विस्तृत जानकारी दी थी।

औरैया हादसा: दो थानाध्यक्ष निलंबित, योगी का निर्देश- मजदूरों को सुरक्षित घर पहुँचाया जाए, भोजन की भी हो व्यवस्था

लॉकडाउन के बीच वापस घर लौट रहे मजदूर लगातार सड़क हादसे और दुर्घटना के शिकार हो रहें हैं। आज (मई 16, 2020) औरेया सड़क हादसे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त करते हुए घटना की जाँच के आदेश दिए हैं।

बता दें हादसे में 24 मजदूरों की मौत हो चुकी हैं। 22 लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 15 घायलों की हालत गंभीर हैं। हादसे के शिकार मजदूर लॉकडाउन के बीच एक ट्रक पर सवार होकर घर लौट रहे थे। औरैया के पास उनकी ट्रक की टक्कर एक अन्य ट्रक से हो गई।

सीएम ने ट्वीट कर कहा है कि ट्रकों व गैर यात्री वाहनों से श्रमिकों को ढोने वाले वाहन स्वामियों व चालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए। साथ ही ऐसे वाहनों को तत्काल सीज किया जाए। श्रमिकों व कामगारों को भोजन-पानी देकर बसों से उनके गृह नगर भेजने की व्यवस्था हो।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना को लेकर आगरा और मथुरा बॉर्डर के संबंधित थानाध्यक्षों को निलंबित करने का आदेश दिया है। साथ ही मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक के अलावा आगरा जोन के आईजी और एडीजी से भी इस मामले में स्पष्टीकरण देने को कहा है।

सीएम योगी ने टीम इलेवन के साथ बैठक कर जारी किए दिशानिर्देश -:

  • कोई भी कामगार व श्रमिक पैदल अथवा अवैध व असुरक्षित वाहन से यात्रा ना करे।
  • श्रमिकों की सुरक्षित व सम्मानजनक जल्द से जल्द उनके घर पहुँचाया जाएँ।
  • आ रहे मजदूरों के लिए भोजन व पानी की उचित व्यवस्था सीमा पर कराई जाएँ।
  • बॉर्डर पर 200 बसों की तैनाती की जाएँ।
  • परिवहन निगम की बसें उपलब्ध न होने पर निजी और स्कूल बसों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
  • सुनिश्चित करें कि कोई भी कामगार व श्रमिक पैदल अथवा बाइक से या ट्रक से ना आने पाएँ।
  • वापस लौट रहें श्रमिकों के लिए क्वॉरेंटाइन सेंटर और कम्युनिटी किचन की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखा जाए।
  • सख्त निर्देश दिया की क्वारंटाइन सेंटर में किसी भी दशा में मांस या मादक द्रव्यों का इस्तेमाल न हो।
  • बॉर्डर पर भी रहने खाने की उचित व्यवस्था की जाएँ।
  • हर गाँव में एक अल्ट्रा रेड थर्मामीटर की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए।
  • टेस्टिंग क्षमता को बढ़ाकर प्रतिदिन 10000 टेस्ट करने के निर्देश।
  • प्रदेश के हर चिकित्सालय में वेंटिलेटर और उसके सुचार संचालन के लिए स्टाफ की उपलब्धता होनी चाहिए।
  • प्रदेश में ही प्रवासी कामगारों और श्रमिकों को रोजगार के लिए ज्यादा से ज्यादा वैकल्पिक अवसर उपलब्ध कराएँ जाए।।
  • वन विभाग तथा नर्सरी में गोबर के कंपोस्ट बनाकर उसका उपयोग आर्थिक मजबूती की दृष्टि से कराया जाए।
  • प्रधानमंत्री मोदी द्वारा घोषित विशेष आर्थिक पैकेज का प्रदेश को शत-प्रतिशत लाभ दिलाने में कार योजना तैयार की करें।
  • किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

साथ ही सीएम योगी ने हादसे में जान गँवाने वाले मजदूरों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए की मुआवजा राशि देने का भी ऐलान किया है।

रमजान में नहीं हो रहा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, किरीट सोमैया ने वीडियो जारी कर सशस्त्र बलों की तैनाती की रखी माँग

रमजान ईद के नजदीक आने के साथ ही सरकार के सामने कोरोना प्रभावित इलाकों में लॉकडाउन उपाय व सोशल डिस्टेंसिंग के दिशानिर्देशो का पालन सुनिश्चित कराना एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

भाजपा नेता किरीट सोमैया ने शुक्रवार (15.5.20) को ट्विटर पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में हम देख सकते हैं शिवाजी नगर गोवंडी रोड नंबर-2, जो एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है, वहाँ भारी भीड़ जमा हुई है।

भीड़ जमा होने के कारण उन्होंने मुंबई पुलिस की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाया। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, सोमैया ने कहा, “शिवाजी नगर से ही 1000 से अधिक कोरोनोवायरस पॉजिटिव लोगों की सूचना मिली है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा जिन 20 सीएपीएफ कंपनियों को बुलाया है, वे वहाँ तैनात क्यों नहीं हैं। उन्होंने शिवाजी नगर जैसे क्षेत्रों में सशस्त्र बलों की तत्काल तैनाती की माँग की है।”

महाराष्ट्र में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल

रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा कि शिवाजी नगर क्षेत्र में पिछले 15 दिनों में हजारों संक्रमण के मामले सामने आए हैं, इसके बावजूद इतनी भीड़ इकट्ठा हो रही है। महाराष्ट्र सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र बलों की 20 सुरक्षा एजेंसियों को बुलाया है, लेकिन क्या कारण है कि वे इन ताकतों का उपयोग लॉकडाउन को सख्ती से लागू करने के लिए नहीं कर रहे हैं। मैं शिवाजी नगर जैसे क्षेत्रों में तत्काल सैन्य तैनाती की माँग करता हूँ।

इससे पहले अप्रैल में, शिवाजी नगर के दो युवकों फहद और सलीम को मुंबई पुलिस ने टिकटोक पर एक वीडियो पोस्ट करने पर गिरफ्तार किया था। जिसमें वे बोल रहें थे कि वे टिकटोक स्टार हैं और लॉकडाउन प्रतिबंध उन पर लागू नहीं होता है।

महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित महाराष्ट्र

कोरोनोवायरस महामारी से इस वक़्त भारत में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र हैं। जहाँ आए दिन संक्रमण के हजारों मामले सामने आ रहे हैं। जबकि लोगों के सही होने के मामले सबसे कम है।

आँकड़ो की बात करें तो, महाराष्ट्र में पिछले 24 घण्टे में कुल 1576 नए मामलें सामने आए है। इसके साथ ही अब एक्टिव केस की कुल संख्या 29100 हो चुकी हैं, और जबकि 1068 लोगों की अबतक इस महामारी के कारण मृत्यु हो चुकी हैं।

राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस के IT सेल वर्कर ने ही करवाई भारी बेइज्जती, स्मृति ईरानी की हाजिरजवाबी से पस्त

केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री स्मृति ईरानी की हाजिरजवाबी लाजवाब है। शनिवार (16 मई 2020) को एक बार फिर सब उनके इस हुनर के कायल हो गए। कॉन्ग्रेस आईटी सेल के कार्यकर्ता गौरव पांधी ने स्मृति को नीचा दिखाने की कोशिश में अपने पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी का मजाक बनवा दिया।

दरअसल, कॉन्ग्रेस का राष्ट्रीय समन्वयक होने का दावा करने वाले पांधी ने ट्विटर पर स्मृति ईरानी का मजाक उड़ाने की कोशिश करते हुए उन्हें भारत के इतिहास का सबसे ‘मूर्ख’ और ‘बेवकूफ’ सांसद बताया था।

स्मृति ईरानी पर गौरव पांधी का ट्वीट

पांधी के अपमानजनक ट्वीट का एक दिन बाद केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बेहद विनम्र अंदाज में जवाब देकर सोशल मीडिया यूजर्स का दिल जीत लिया।

गौरव पांधी को स्मृति ईरानी का जवाब

उन्होंने इस ट्वीट का जवाब देते हुए पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए लिखा कि वो इस बात सहमत हैं। साथ ही उन्होंने लिखा कि कल्पना कीजिए कि उनके जैसे मूर्ख ने सुपर इंटेलीजेंट राहुल गाँधी को हरा दिया।

बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गाँधी को अमेठी में स्मृति ईरानी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। गाँधी परिवार के पारंपरिक गढ़ अमेठी में राहुल गाँधी को स्मृति ईरानी ने 55,000 वोटों से हराया था।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ उत्तर प्रदेश के अपने गढ़ अमेठी में हार का सामना करने वाले तत्कालीन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी 2019 के लोकसभा चुनाव में दो सीटों से लड़े थे। राहुल गाँधी ने अमेठी के अलावा केरल के मुस्लिम बहुल वायनाड निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था, क्योंकि इसे कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए एक सुरक्षित सीट माना जाता था।

स्मृति ईरानी के हाथों हार का स्वाद चखने वाले राहुल गाँधी वर्तमान में वायनाड निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले लोकसभा सदस्य हैं।

कोयला क्षेत्र में खत्म होगा सरकार का एकाधिकार, रक्षा उत्पादों में आत्मनिर्भर बनेगा भारत: निर्मला सीतारमण

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार (मई 16, 2020) को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में रोडमैप की घोषणा के तहत लगातार चौथे दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि सभी सेक्टरों में कामकाज को पारदर्शी और स्पष्ट बनाना होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ का मतलब ये नहीं है कि भारत सबसे अलग हो जाएगा या सिर्फ़ अपने अंदर देखेगा, बल्कि इसका मतलब है कि भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी चुनौतियों को स्वीकार करेगा।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ को कड़ी प्रतिस्पर्द्धा के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि यूपीआई और जीएसटी से लेकर हर घर बिजली तक, पीएम मोदी को योजनाओं को लागू करने के लिए जाना जाता है। प्रत्येक विभाग में निवेश के लिए केंद्र बनेगा। जिससे पता चलेगा कौन सा राज्य निवेश को आकर्षित करने के लिए कितना प्रयास कर रहा है।

आज उन सेक्टरों पर जोर दिया गया, जो निवेश के नए मौके को जन्म दे रहे हैं और रोजगार भी पैदा कर रहे हैं। अनुराग ठाकुर ने बताया कि कोयला उत्पादन के क्षेत्र में भी भारत आत्मनिर्भर बनेगा। दुनिया में कोयला के खानों के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष देशों में आता है लेकिन फिर भी देश ने अपनी क्षमता का दोहन नहीं किया है। ओपन मार्किट में सेल से लेकर ज्यादा खनन तक, हर वो कार्य किया जाएगा जिससे इस फील्ड में ज्यादा लोग आएँ। आने वाले समय में खनन के लिए 50 नए ब्लॉक्स उपलब्ध कराए जाएँगे। अन्य खदानों का भी और खनन किया जाएगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जानकारी दी कि अब तक 5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 3376 इंडस्ट्रियल पार्क्स चिह्नित किए गए हैं। इनकी रैंकिंग जीआइएस टेक्नोलॉजी के जरिए होगी। 500 मिनरल्स माइनिंग ब्लॉक्स की नीलामी की जाएगी। कोयला खनन में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को बल दिया जाएगा। इसका लब्बोलुआब ये है कि कोयला क्षेत्र में सरकार का एकाधिकार ख़त्म होगा। सबसे बड़ी बात कि इसमें भाग लेने वाले प्राइवेट प्लेयरों के लिए पात्रता की कोई बड़ी परिभाषा नहीं रहेगी। माइनिंग इंफ़्रास्ट्रक्चर पर 50,000 करोड़ रुपए ख़र्च होंगे।

निर्मला सीतारमण ने इस दौरान प्राइवेटाइजेशन और कॉर्पोरेटाइजेशन के बीच का अंतर भी समझाया। आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड का निगमीकरण होगा, निजीकरण नहीं। रक्षा उत्पाद में भी ‘मेक इन इंडिया’के तहत आत्मनिर्भरता को बल दिया जाएगा। हथियारों की सूची बना कर उनके इम्पोर्ट पर बैन लगाया जाएगा और विदेशी निर्भरता में कमी लाई जाएगी। इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इससे भारत में सेना के लिए साजोसामान बनाने वाली कम्पनियों को लाभ मिलेगा। जिससे आत्मनिर्भर भारत बनेगा।

सिविल एविएशन सेक्टर में भी बड़े क़दम उठाए जाएँगे। नागरिक विमानों के आवागमन में कम समय लगे, इसके लिए विमानन क्षेत्र में बदलाव किया जाएगा। इससे पर्यावरण को भी फायदा होगा। हवाई अड्डों पर और अच्छी सुविधाएँ देने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के माध्यम से हवाई अड्डों को विश्व स्तर का बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि बिजली के क्षेत्र में उपभोक्ताओं के अधिकार पर बल दिया जाएगा।

लोड शेडिंग करने वालों को दंड देने का प्रावधान किया जाएगा। विद्युत् उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कम्पनियों में प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाया जाएगा। इसमें भी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रान्सफर के माध्यम से उपभोक्ताओं को सब्सिडी दी जाएगी। केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली वितरण का निजीकरण किया जाएगा।

सामान्य बुनियादी सुविधाओं और कनेक्टिविटी के औद्योगिक क्लस्टर को बढ़ावा देने के लिए चैलेंज मोड के माध्यम से राज्यों में योजना लागू की जाएगी। फास्ट-ट्रैक निवेश के लिए सरकार नीतियों में सुधार लाएगी, निवेशकों और केंद्र/राज्य सरकारों के साथ समन्वय कर निवेश योग्य परियोजनाओं के लिए प्रत्येक मंत्रालय में परियोजना विकास सैल तैयार किया जाएगा।

अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी बड़े सुधार किए जाएँगे। वित्त मंत्री ने कहा कि इसरो ने भारत का माथा गर्व से ऊँचा किया ही है, साथ ही कुछ प्राइवेट प्लेयर भी इस मामले में अच्छा काम कर रहे हैं। सैटेलाईट लॉन्च से लेकर अंतरिक्ष सेवाएँ तक, प्राइवेट प्लेयरों की भागीदारी के बाद इसमें और उत्कृष्ट काम होगा, ऐसा वित्त मंत्री ने कहा। एटॉमिक एनर्जी के क्षेत्र में भी पीपीपी मॉडल की भागीदारी होगी, जिससे कैंसर मरीजों का इलाज और सही से हो पाएगा।

रोहित जायसवाल मामला में ऑपइंडिया के खिलाफ FIR, जानिए क्या है पूरा मामला

अपडेट: बिहार के डीजीपी की जॉंच के बाद हम सूचनाओं को अपडेट कर रहे हैं। पीड़ित पिता इस दौरान कई बार अपने बयान से मुकरे हैं। लिहाजा उनकी ओर से किए गए सांप्रदायिक दावों को हम हटा रहे हैं। हमारा मकसद किसी संप्रदाय की भावनाओं का आहत करना नहीं था। केवल पीड़ित पक्ष की बातें सामने रखना था। इस क्रम में किसी की भावनाओं को ठेस पहुॅंची हो तो हमे खेद है।

बिहार के गोपालगंज जिले में 15 वर्षीय रोहित जायसवाल की कथित हत्या के मामले में ऑपइंडिया पर एफआईआर (FIR) की गई है। हमने इस मामले में पीड़ितों के बयान को जब प्रकाशित किया, तब रोहित की मौत के करीब एक महीने हो गए थे।

पीड़ितों के साथ-साथ पुलिस का बयान भी हमने प्रकाशित किया। हमारे पास पीड़ित से लेकर पुलिस तक से बातचीत के सारे रिकॉर्डिंग हैं। थानाध्यक्ष ने रोहित के पिता राजेश जायसवाल के साथ दुर्व्यवहार किया था उसका वीडियो भी है। कई लोगों ने इस मामले में ऑपइंडिया का पक्ष जाने बिना उस पर तरह-तरह के आरोप लगा दिए।

एक मुस्लिम जब झूठ बोलता है तो वह इंटरनेशनल न्यूज़ बन जाता है। लेकिन जब उसका बयान झूठा साबित हो जाता है तो उसे प्रकाशित करने वाले मीडिया संस्थान माफ़ी भी नहीं माँगते। उन पर केस भी नहीं दर्ज होता। प्रोपेगेंडा फैलाने सिद्धार्थ वरदराजन से लेकर रवीश कुमार तक शामिल हैं, जिनकी रीच मिलियंस में हैं।

आतंकियों के हिमायती अगर कुछ झूठ लिख दें तो उनकी आलोचना तक नहीं होती। उन पर एफ़आईआर (FIR) हो भी जाए तो वो सब के सब खड़े होकर मीडिया की स्वतंत्रता का रोना रोने लगते हैं। कुछ उदाहरण देखिए, जिससे पता चलता है कि यदि किसी मुस्लिम ने कुछ कहा, चाहे वह झूठ ही क्यों न हो उसे ​कैसे अकाट्य बना दिया जाता है।

तबरेज अंसारी के मामले में दावा किया गया कि उसे ‘जय श्री राम’ बोलने को मजबूर किया गया और भीड़ द्वारा मार डाला गया। ऐसी कई ख़बरें लगातार चलती रहीं।

ऐसी ही एक ख़बर गुरुग्राम से आई थी, जहाँ एक मुस्लिम व्यक्ति ने दावा किया कि उसकी टोपी फेंक दी गई और उसे ‘जय श्री राम’ बोलने को मजबूर करते हुए मारा-पीटा गया। ‘द हिन्दू’ और ‘द वायर’ जैसे मीडिया संस्थानों ने इस ख़बर को अपनी वेबसाइट पर जगह दी। बाद में पता चला कि उसने किसी के सिखाने पर ऐसी बातें कहीं और सीसीटीवी फुटेज से भी साबित हुआ कि उसके आरोप झूठे थे। किसी ने माफ़ी तक नहीं माँगी।

करीमनगर में एक मुस्लिम व्यक्ति ने हिन्दुओं द्वारा मारपीट का आरोप लगाया, जो बाद में सांप्रदायिक नहीं निकला। उन्नाव में क्रिकेट को लेकर बच्चों में हुए झगड़े को ‘जय श्री राम’ से जोड़ा गया। बागपत में एक मौलवी ने ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए दाढ़ी नोचे जाने का आरोप लगाया, जो झूठी निकली। एक व्यक्ति की महाराष्ट्र में हिन्दू परिवार ने ही मदद की और बाद में उसने ग़लत आरोप लगा दिए। क्या ये हिन्दूफोबिया नहीं है?

चंदौली में एक मुस्लिम लड़के को ‘जय श्री राम’ न बोले जाने पर आग लगा देने की ख़बर आई लेकिन पुलिस ने पाया कि ये आरोप सही नहीं है।

ऑपइंडिया पर एफआईआर: जानिए इस मामले का पूरा सच

लल्लनटॉप ने भी इस घटना का फैक्ट-चेक किया था। उसने अपने फैक्ट-चेक में सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात कही। कानपुर में एक ऑटो ड्राइवर ने आपसी विवाद को ‘जय श्री राम’ से जोड़ दिया। ऐसी कई घटनाएँ हैं। इन प्रोपेगेंडा पोर्टलों ने ऐसी ख़बरों को सांप्रदायिक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। क्या इन सभी में से किसी पर एफआईआर हुई?

रोहित जायसवाल मामले में हमने पीड़ित पिता के बयान को प्रकाशित किया, ग्रामीणों से बात की, पुलिस का बयान जनता तक पहुँचाया और ख़ुद से रिपोर्ट को कोई एंगल नहीं दिया। लेकिन फिर भी एफआईआर दर्ज की गई।

ऑपइंडिया ने अपनी तरफ से कुछ भी क्लेम नहीं किया। सारी खबरें पीड़ित पिता के बयानों के आधार पर बनाई गई।

इस मामले में पुलिस ने पहले कहा था कि 5 आरोपितों को जेल भेज कर त्वरित कार्रवाई की जा चुकी है। पिता राजेश जायसवाल ने भी कहा था कि उनलोगों की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। हमने राजेश से बातचीत की रिकॉर्डिंग भी जारी की थी।

देश के युवाओं को तीन साल सेना में ट्रेनिंग देने की पहल का आनंद महिंद्रा ने किया समर्थन, कहा- फिर हम देंगे नौकरी

भारतीय सेना द्वारा ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ प्लान को लेकर चल रही तैयारियों पर उद्योगपति आनंद महिन्द्रा ने अपना समर्थन दिया है। साथ ही इसे लेकर महिंद्रा ने सेना से बात भी की है। उन्होंने कहा कि उन्हें सेना में तीन साल की सेवा पूरी कर चुके युवाओं को अपने यहाँ नौकरी देने में खुशी होगी।

महिन्द्रा ने सेना को भेजे एक मेल में कहा कि मुझे हाल ही में भारतीय सेना के ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ नाम के उस प्रस्ताव के बारे में मालूम हुआ जिसमें शारीरिक रूप से फिट युवा नागरिकों को सेना में 3 साल की सेवा देना आवश्यक होगा। मुझे लगता है ये बेहद अच्छा कदम होगा। ऐसे में इसके बाद महिंद्रा ग्रुप उन्हें नौकरी देने पर विचार करेगा।

दरअसल, हिंदुस्तान की खबर के मुताबिक भारतीय सेना पिछले कई वर्षों से अधिकारियों की कमी का सामना कर रही है और जल्द से जल्द इसे दूर करना चाहती है। लघु सेवा आयोग ने पहले पाँच साल की न्यूनतम सेवा अवधि के साथ शुरू किया था, लेकिन फिर इसे और अधिक आकर्षक बनाने के लिए इसे 10 साल तक बढ़ा दिया गया था।

आपको बता दे टीओडी योजना, अधिकारियों के लिए लगभग 100 रिक्तियों और जवानों के लिए 1000 के साथ शुरू की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम भारतीय सशस्त्र बलों के लिए प्रशिक्षण, वेतन और भत्ते के रूप में बड़ी लागत बचा सकता है। नए मॉडल के तहत शामिल होने वाले लोगों पर 80-85 लाख रुपए खर्च होंगे, जबकि शार्ट सर्विस कमीशन के एक अधिकारी पर 6 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो जाते हैं जो 14 वर्ष तक सेवा प्रदान करते हैं।

गौरतलब है कि भारतीय सेना ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ नामक प्रोग्राम लॉन्च करने की तैयारी में है। इसका मकसद आम लोगों को सेना में सेवा करने का मौका देना है। यदि इस प्रस्ताव पर मुहर लगती है तो आम लोग भी 3 साल तक सेना में काम कर सकेंगे।

बुधवार (13 मई 2020) को सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवाने ने कहा कि आम नागरिकों को सेना भर्ती करने का विचार तब आया जब उन्होंने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का दौरा करने पर पाया कि युवा सेना के जीवन का अनुभव करने के लिए हमेशा उत्सुक रहते है। उन्होंने कहा, “जब हमारे अधिकारियों ने कॉलेजों में युवाओं को संबोधित किया, तो यह महसूस किया कि विद्यार्थी सेना के जीवन का अनुभव करना चाहते हैं, लेकिन कैरियर के रूप में नहीं।”

सेना प्रमुख ने कहा कि इससे हमारे दिमाग में यह विचार आया कि क्यों न युवाओं को दो-तीन साल तक अपने देश की सेवा करने का अवसर दिया जाए। देश के बेस्ट टैलेंट को अपनी कुनबे में शामिल करने से भारत को अत्यधिक लाभ होगा। साथ ही यह समाज को भी अनुशासित और लाभान्वित करेगा।

‘केवल हलाल मांस’ बेचने को लेकर कड़ा विरोध झेलने के बाद Big Basket ने झटका मांस बेचने का लिया फैसला

ऑनलाइन ग्रॉसरी स्टोर बिग बास्केट (Big Basket) ने पिछले दिनों ग्राहकों से कहा था कि उनके यहाँ ‘सिर्फ हलाल मीट’ ही बेचा जाता है। बिग बास्केट के इस खुलासे के बाद विवाद खड़ा हो गया था। जिसके बाद अब बिग बास्केट ने ग्राहकों के लिए अपने प्लेटफॉर्म पर ‘झटका मीट’ उपलब्ध कराया है।

दरअसल, पिछले हफ्ते बिग बास्केट के ये कबूलने के बाद कि वो सिर्फ हलाल मीट ही बेचते हैं, सोशल मीडिया यूजर्स ने ऑनलाइन ग्रॉसरी स्टोर की गैर-समावेशी दृष्टिकोण की तरफ ध्यान दिलाया था।

बिग बास्केट की सिर्फ हलाल बेचने की प्रतिक्रिया को सोशल मीडिया यूजर्स ने भेदभावपूर्ण बताया। उनका कहना था कि ऑनलाइन ग्रॉसरी स्टोर बिग बास्केट का यह रवैया उन लोगों के प्रति भेदभावपूर्ण है, जिन्हें उनकी धार्मिक मान्यताएँ हलाल मीट खाने की इजाजत नहीं देती है।

ग्राहकों को जबरन हलाल मीट खरीदने के लिए मजबूर करने को लेकर लोगों ने सोशल मीडिया ट्विटर पर काफी तीखी आलोचनाएँ की। लोगों का कहना था कि क्या वो सिर्फ खास मजहब की डिमांड पूरी करते हैं? और यदि ऐसा नहीं है तो फिर आप अन्य धर्मों को हलाल खाने के लिए मजबूर क्यों करते हैं? या भारत में शरिया कानून लागू हो गया है?

सोशल मीडिया यूजर्स और ग्राहकों के कड़े विरोध के बाद ऑनलाइन ग्रॉसरी स्टोर- बिग बास्केट ने अब अपने मेनू में ‘झटका मांस’ को शामिल करने का फैसला किया है।

Big Basket now offers jhatka meat

शायद स्वदेशी विश्वास का अनुसरण करने वाले लोगों के एकजुट प्रयासों ने इन बड़ी कंपनियों पर दबाव डाला, जिनकी वजह से उन्हें ये फैसला लेना पड़ा, वरना ये अपने ग्राहकों को ‘हलाल’ उत्पादों जैसे गैर-मानक सामान स्वीकार करने के लिए मजबूर करते हैं।

उल्लेखनीय है कि झटका सर्टिफिकेशन अथाॅरिटी के चेयरमैन रवि रंजन सिंह बताते हैं कि ‘झटका‘ हिन्दुओं, सिखों आदि भारतीय, धार्मिक परम्पराओं में ‘बलि/बलिदान’ देने की पारम्परिक पद्धति है। इसमें जानवर की गर्दन पर एक झटके में वार कर रीढ़ की नस और दिमाग का सम्पर्क काट दिया जाता है, जिससे जानवर को मरते समय दर्द न्यूनतम होता है। इसके उलट हलाल में जानवर की गले की नस में चीरा लगाकर छोड़ दिया जाता है, और जानवर खून बहने से तड़प-तड़प कर मरता है।

इसके अलावा मारे जाते समय जानवर को खास समुदाय के पवित्र स्थल मक्का की तरफ़ ही चेहरा करना होगा। लेकिन सबसे आपत्तिजनक शर्तों में से एक है कि हलाल मांस के काम में ‘काफ़िरों’ (‘बुतपरस्त’, जैसे हिन्दू) को रोज़गार नहीं मिलेगा। यानी कि यह काम सिर्फ खास समुदाय वाला ही कर सकता है।

इसमें जानवर/पक्षी को काटने से लेकर, पैकेजिंग तक में सिर्फ और सिर्फ खास समुदाय वाला ही शामिल हो सकते हैं। मतलब, इस पूरी प्रक्रिया में, पूरी इंडस्ट्री में एक भी नौकरी अन्य धर्मों के लिए नहीं है। यह पूरा कॉन्सेप्ट ही हर नागरिक को रोजगार के समान अवसर देने की अवधारणा के खिलाफ है। बता दें कि आज McDonald’s और Licious जैसी कंपनियाँ सिर्फ हलाल मांस बेचती है।

नोट: बिग बास्केट ने दावा किया है कि वो हलाल की तरह ही अब झटका मांस भी बेच रहे हैं लेकिन उन्होंने झटका सर्टिफिकेट लिया है या नहीं या झटका मांस के पहचान का क्या प्रॉसेस है यह क्लियर नहीं किया है। अतः ग्राहकों से अनुरोध है कि वे स्वतः बिग बास्केट से झटका सर्टिफिकेशन और पहचान आदि पर खरीदने से पहले कन्फर्म कर लें। ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है, यह रिपोर्ट उनके साइट पर दिए गए सूचना के आधार पर है।