भगौड़ा इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक इस्लामी देशों को राय देते हुए कह रहा है कि उन्हें लिस्ट बनाकर गैर-मुस्लिम भारतीयों को अपने देश में कार्रवाई करनी चाहिए।
जाकिर नाइक मनी लॉन्ड्रिंग और भड़काऊ भाषण देने का आरोपित है और वर्तमान में मलेशिया में रह रहा है। जाकिर नाइक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उसने गैर-मुस्लिम भारतीयों को सूचीबद्ध करने की बात कही है।
‘खाड़ी देश आने वाले गैर-मुस्लिम भारतीयों को करो अरेस्ट’
इस वीडियो में विवादित इस्लामी उपदेशक ज़ाकिर नाइक को कहते हुए सुना जा सकता है, “मैं ये सुझाव देता हूँ कि सिर्फ मुस्लिम देश ही क्यों, भारत में भी जो गैर-मुस्लिम इस्लाम पर उँगली उठाता है, तो उसका डेटाबेस तैयार किया जाना चाहिए। भारत में इस्लाम पर उँगली उठाने वाले मुख्य रूप से बीजेपी से जुड़े लोग हैं और उनमें से ज्यादातर लोग पैसे वाले हैं।”
Fugitive Jehadi Zakir Naik says non-Muslim Indians who criticize Islam should be noted in a data bank & whenever they visit an Islamic country, should be arrested & tried under blasphemy laws pic.twitter.com/t1V7hhKo3q
इसके आगे जाकिर नाइक कहता है, “मैं बताता हूँ कि ज्यादातर भारतीय नेताओं का पैसा यूएई, खाड़ी देशों में होता है और उनमें से विदेश दौरे पर जाने वाले आधा से ज्यादा लोग मुस्लिम देशों या खाड़ी देशों का दौरा करते हैं।”
“मैं कुवैत के वकील को सलाह देता हूँ कि भारत में उन सभी गैर-मुस्लिमों का डेटाबेस तैयार करके कंप्यूटर में स्टोर कर लें। अगली बार जब भी वो किसी खाड़ी देश में आएँ, उन पर केस कीजिए और उन्हें गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दीजिए।”
जाकिर नाइक का कहना है कि अगर 5 से 10 लोगों के साथ भी ऐसा किया जाए तो ज्यादातर लोग इस्लाम पर उँगली उठाना छोड़ देंगे। कम-से-कम 25% लोग तो डर ही जाएँगे और वो इस्लाम पर टिप्पणी नहीं करेंगे।
जाकिर नाइक के इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए @MJALSHRIKA ने लिखा है –
“आदरणीय डॉ. ज़ाकिर नाइक, हम आपके सुझावों का स्वागत करते हैं। कृपया जान लें कि हम अरब जगत में फासीवादी हिंदुत्व शासन द्वारा आपके साथ हुए अन्याय को नहीं भूले हैं। हम अपराधियों को न्याय दिलाने के लिए अपनी शक्ति के भीतर सब कुछ करेंगे।”
Respected Dr.Zakir Naik, we welcome your suggestions. Please know that we in the Arab world haven’t forgotten the injustices done to you by the fascist Hindutva regime. We’ll do everything within our power to bring the perpetrators to justice.@UNHumanrights@OIC_OIC@hrw@ICJ_orgpic.twitter.com/ou4fJG1iIK
भगौड़ा इस्लामिक उपदेशक ज़ाकिर नाइक वर्ष 2016 से ही भारत छोड़कर भाग चुका है और जाँच एजेसियाँ उसके खिलाफ राजद्रोह और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों की जाँच कर रही हैं।
रमजान के महीने में अफगानिस्तान मंगलवार को अलग-अलग जगह पर हुए दो आतंकी हमलों से दहल गया। इनमें से एक हमला आतंकियों ने वहाँ की राजधानी काबुल में स्थित एक मैटरनिटी अस्पताल पर किया और दूसरा हमला नंगरहार प्रांत में अंतिम संस्कार कार्यक्रम में किया गया।
काबुल में अस्पताल पर किए गए हमले में दो नवजात समेत उनकी माताओं और कई नर्सों को मिलाकर कुल 16 लोगों की मौत हो गई। वहीं नंगरहार प्रांत में अंतिम संस्कार के दौरान हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 24 लोग मारे गए और 60 घायल हो गए।
काबुल वाली घटना में ग्रेनेड और बंदूक से लैस आतंकियों ने पुलिस की वर्दी में घुसकर उस अस्पताल के प्रसूति केंद्र में ये हमला किया, जो मानवीय सहायता के तहत यह केंद्र अंतरराष्ट्रीय संस्था डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स द्वारा संचालित किया जाता है। अस्पताल के एक हिस्से में इंटरनेशल मेडिकल चैरिटी और मेडिसिन सेन्स फ्रंटियर का भी ऑफिस है, जिसमें बड़ी संख्या में विदेशी कर्मी काम करते हैं। माना जा रहा है कि हमलावर के निशाने पर यह लोग थे।
ISIS claims responsibility for mass shooting of a maternity hospital and funeral in Kabul, Afghanistan ??
Babies among the 40 people killed. On #Ramadan no less.
वहीं, दूसरे हमले में एक आत्मघाती हमलावर ने देश के नंगरहार प्रांत में एक अंतिम संस्कार के कार्यक्रम को निशाना बनाया, जिसमें कम से कम 24 लोग मारे गए और 60 घायल हो गए। यहाँ आतंकी ने यह हमला तब किया, जब एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के जनाजे में अनेक लोग शामिल हुए थे।
खबरों के मुताबिक, एक दिन में अफगानिस्तान को दो धमाकों से दहलाने वाले इन हमलों की जिम्मेदारी ISIS ने ली है। हमलों के बाद ISIS ने दावा किया कि इनमें उसका हाथ था।
वहीं, आतंरिक मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक आर्यन ने ISIS द्वारा किए गए इन हमलों की निंदा करते हुए पूरी घटना को मानवता और अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया है।
पहली घटना में जहाँ विदेशियों को निशाना बनाने की बात निकलकर सामने आई है। वहीं दूसरी घटना में मोहम्मद उमर के अनुसार, हमले के जरिए पूर्व परिषद सदस्य लाला खान को निशाना बनाने की बात सामने आई है।
उन्होंने बताया कि लाला खान के अमेरिकी खुफिया विभाग से करीबी संबंध थे और माना जाता था कि उन्होंने अल-कायदा और दाएश के खिलाफ अपने सैन्य अभियानों को कॉर्डिनेट किया था। इस घटना में खान समेत उनके दो भाई मारे गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के लिए 20 लाख करोड़ रूपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया आई है।
ममता बनर्जी का कहना है कि केंद्र द्वारा घोषित किए गए इस पैकेज में राज्यों के लिए कुछ नहीं है और यह एक ‘बड़ा ज़ीरो’ है। इसके साथ ही ममता ने UP-MP की तर्ज पर अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए अपनाई गई नीतियों को लागू करने से भी स्पष्ट मना किया है।
West Bengal will never tweak labour laws like BJP-ruled states did: CM Mamata Banerjee
ममता बनर्जी कोरोना वायरस की महामारी के दौरान लगातार केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करती नजर आ रही हैं। यही वजह है कि कई बार केन्द्रीय गृह मंत्रालय बंगाल राज्य को इस बारे में चेतवानी जारी करनी पड़ी हैं।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में कोरोना वायरस महामारी के कारण जारी देशव्यापी लॉकडाउन के बीच उतर प्रदेश (UP) और मध्य प्रदेश (MP) की राज्य सरकारों ने अर्थव्यवस्था में आई शिथिलता को दूर करने के लिए श्रम कानून (Labour Law) में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।
मध्य प्रदेश सरकार ने कॉटेज इंडस्ट्री यानी कुटीर उद्योग और छोटे कारोबारों को रोजगार, रजिस्ट्रेशन और जाँच से जुड़े विभिन्न जटिल लेबर नियमों से छुटकारा देने की पहल की है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश सरकार ने कंपनियों और ऑफिस में काम के घंटे बढ़ाने की छूट जैसे अहम फैसले भी लिए हैं।
वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में मौजूद सभी कारखानों और मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को वर्तमान में लागू श्रम अधिनियमों में सशर्त अस्थायी छूट प्रदान करने का फैसला किया है। हालाँकि श्रम कानूनों में बच्चों और महिलाओं से संबंधित प्रावधान जारी रहेंगे।
केंद्र सरकार पर पक्षपात का आरोप
ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर पश्चिम बंगाल के साथ पक्षपात करने का भी आरोप लगाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ तमाम मुख्यमंत्रियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक के दौरान भी ममता बनर्जी ने कहा था कि बंगाल के लोग संघवाद का सम्मान करते हैं और दृढ़ता के साथ आपके साथ खड़े हैं।
इसके साथ ही ममता ने यह भी कहा- “लेकिन मेरा विनम्र निवेदन है कि आप संघीय ढाँचे को ना तोड़ें। संकट के इस समय में हमें इससे निपटना जरूरी है, हम लगातार ऐसा करते रहेंगे। लेकिन अगर आप फैसला लेने के बाद बैठक करेंगे तो इस तरह की बैठक का क्या फायदा है।”
कोरोना महामारी के बीच पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार लगातार जारी है। खबर है कि वहाँ एक बार फिर एक हिंदू लड़की का अपहरण करके उसका धर्मांतरण करवाया गया है।
लड़की की पहचान कविता कुमारी के रूप में हुई है और पूरा मामला सिंध प्रांत के घोटकी इलाके के बारझुंडी का है। बताया जा रहा है कि इस घटना के पीछे भी मियाँ मिट्ठू का ही हाथ है।
Kavita Kumari a Hindu girl is abducted & forced converted to Islam by Mian Mithu in Barjhundi,Ghotki, Sindh-Pakistan. Mian Mithu is involved in 1000s of forced conversions. Famous for private Army & HARAMs having dozens of sex slaves to please his guests. Courtesy:Pehanji Akhbar pic.twitter.com/Q4iakxcBtY
पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन के मुताबिक, कविता का पहले मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा अपहरण किया गया और बाद में उसे मियाँ मिट्ठू के पास ले जाया गया। इसके बाद मियाँ मिट्ठू ने जबरन कविता को इस्लाम धर्म कबूल कराया।
ऑस्टिन ने इस मामले के संबंध में अपने ट्विटर पर एक वीडियो भी डाली है। वीडियो में कविता को मियाँ मिट्ठू के साथ बैठकर इस्लाम कबूल करते देखा जा सकता है।
Kavita Kumari, a 13 Years old, Hindu girl abducted, raped, converted. Tell me if you are a human. if you have a sister or daughter of this poor girl’s age & someone forcefully take her like this? If you were helpless like her family is. Will you still be silent or justify this? https://t.co/RiLqsgmAtApic.twitter.com/2I3PNqLblY
गौरतलब है कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत में ये पहला मामला नहीं है, जब सिंध प्रांत में किसी हिंदू लड़की को मियाँ मिट्ठू की ‘आर्मी’ ने जबरन धर्म परिवर्तन करवाया हो। इससे पहले पिछले साल महक केसवानी का भी एक मामला आया था। उस समय महक का धर्म परिवर्तन भी इसी मियाँ मिट्ठू ने करवाया था। और उससे भी पहले की बात करें तो, होली के अवसर पर घोटकी से ही 2 नाबालिग हिंदू बहनों रवीना और रीना को अगवा कर उनका धर्म परिवर्तन कराया गया था।
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्टिन कहते हैं कि मियाँ मिट्ठू के रसूख का अंजादा इस बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान उसे अपना प्रेरणास्रोत बताते हैं। पाकिस्तान में सबसे शक्तिशाली कहे जानी वाली सेना के प्रमुख कमर जावेद बाजवा खुद उससे मिलने जाते हैं और उसे पैसे देते हैं। ऑस्टिन के मुताबिक मियाँ मिट्ठू की अपनी प्राइवेट आर्मी है और उसके ‘हरम’ में बड़ी संख्या में लड़कियाँ ‘सेक्स स्लेव’ के रूप में रहती हैं जो उसके अतिथियों को ‘खुश’ करने का काम करती हैं।
ऑस्टिन की मानें तो पाकिस्तान में धर्म परिवर्तन के इस खेल को बेहद सुनियोजित ढंग से चलाया जा रहा है। पाकिस्तान सरकार कट्टरपंथियों को आर्थिक, कानूनी, और प्रशासनिक मदद देती है और सिंध प्रांत में इस खेल को मौलवी मियाँ मिट्ठू के नाम से पहचाने जाने वाले पीर अब्दुल हक द्वारा चलाया जाचा है।
मियाँ मिट्ठू घोटकी के भारचुंडी दरगाह में रहता है और अगर कोई कट्टरपंथी, किसी लड़की का अपहरण करता है या फिर कोई लड़की धर्म परिवर्तन करना चाहती है, तो फिर उसे इसके पास लाया जाता है और ये फिर उसका इस्लाम में परिवर्तन कराता है।
साल 2016 के आँकड़ों के अनुसार, उसके खिलाफ 117 मामले दर्ज हो चुके हैं। पाकिस्तान में हिंदू लोग मियाँ मिट्ठू के खिलाफ कई बार सड़कों पर भी उतरे हैं। लोगों की माँग है कि उसे गिरफ्तार किया जाए। पाकिस्तान में ये इस्लामी कट्टरता खुलेआम चल रही है, जिसमें मियाँ मिट्ठू नाम के लोग बिना डरे अपराध करते हैं।
मियाँ मिट्ठू की तस्वीर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के साथ भी देखी जा सकती है।
पाक के सिंध प्रांत में धर्म परिवर्तन की फैक्ट्री चलाने वाला मियाँ मिट्ठू
अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया है। इसके साथ ही PM मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत‘ के लिए तैयारियाँ करने की बात कही।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस आर्थिक पैकेज का ब्यौरा दे रही हैं। निर्मला सीतारमण की प्रेस वार्ता दिल्ली स्थित नेशनल मीडिया सेंटर में जारी है।
वित्त मंत्री इस बात की जानकारी दे रही हैं कि आर्थिक पैकेज में किस सेक्टर के लिए क्या और कितना प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारण के साथ गृह राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर भी प्रेस वार्ता में मौजूद हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का मतलब यह नहीं है कि भारत को एक अलगाववादी देश होना चाहिए।
20 लाख करोड़ में किसे क्या: मुख्य बातें
लोकल ब्रांड को प्रोत्साहन देकर ग्लोबल बनाने पर जोर दिया जाएगा।
लैंड, लेबर और लिक्विडिटी के जरिए हमारा लक्ष्य भारत में इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देना है।
कोरोना के कारण जैसे ही लॉकडाउन की घोषणा हुई सरकार 1.7 लाख करोड़ रुपए का पैकेज लेकर आई और हमने यह सुनिश्चित किया कि देश का कोई गरीब, किसान और मजदूर भूखा ना रहे।
जिस MSME का टर्नओवर 100 करोड़ रुपए है, वे 25 करोड़ रुपए तक लोन ले सकते हैं।
एमएसएमई को क्रेडिट फ्री लोन दिया जाएगा।
MSME को 3 लाख करोड़ रुपए का लोन गारंटी फ्री मिलेगा।
45 लाख एमएसएमई को इससे फायदा मिलेगा।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि COVID-19 देश के सामने संकट खड़े किए हैं और पीएम मोदी ने देश के सामने आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि कोरोना में दुनिया के मुकाबले भारत का अच्छा कदम रहा है।
वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा – “मध्यम, सूक्ष्म, लघु उद्योग, कुटीर उद्योग और घरेलू उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इन MSME’s को 3 लाख करोड़ रुपए का कोलेट्रल फ्री ऑटोमैटिक लोन दिया जाएगा। इसमें किसी भी तरह की गारंटी और कोई कोलेट्रल देने की जरूरत नहीं है।”
वित्त मंत्री ने कहा –
MSME की परिभाषा क्या है, हम यह बता दें। हम MSME क्षेत्र की परिभाषा बदल रहे हैं। कई बार MSME आगे बढ़ जाते हैं लेकिन फिर भी वह इसका लाभ लेना चाहते हैं। MSME को पहले सिर्फ निवेश के आधार पर परिभाषित किया जाता था, लेकिन अब यह टर्नओवर के आधार पर होगा। ₹1 करोड़ तक के MSME को भी माइक्रो यूनिट माना जाएगा, जबकि यह पहले ₹25 लाख था। हम टर्नओवर के हिसाब से भी माइक्रो यूनिट की परिभाषा बदल रहे हैं। ₹1 करोड़ निवेश और ₹5 करोड़ का टर्नओवर माइक्रो यूनिट होगा। अब सूक्ष्म उद्योग 1 करोड़ का निवेश और 5 करोड़ का टर्नओवर होगा। स्मॉल इंडस्ट्री 10 करोड़ का निवेश और 50 करोड़ का टर्नओवर माना जाएगा। मीडियम इंडस्ट्री 20 करोड़ का निवेश और 100 करोड़ का टर्नओवर माना जाएगा।
वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, “₹25 लाख से लेकर ₹1 करोड़ रुपए की इन्वेस्टमेंट कर जो ₹5 करोड़ तक का व्यापार करेगा माइक्रो यूनिट कहलाएगा। स्मॉल के लिए ₹10 करोड़ तक का निवेश और ₹50 करोड़ तक का कारोबार और मीडियम में ₹20 करोड़ तक का निवेश और ₹100 करोड़ तक के टर्नओवर का प्रावधान किया गया है।”
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 15000 रुपए से कम सैलरी वालों को सैलरी का 24% सरकार पीएफ में जमा करेगी। जबकि प्राइवेट कंपनियों के लिए ईपीएफ का हिस्सा अगले तीन महीने के लिए घटाकर 10-10% किया गया।
Income Tax 2019-20 भरने की तारीख को 31 जुलाई 2020 से बढ़ाकर 30 नवंबर किया गया।
Due date for Income Tax returns for the year 2019-2020 now being extended from 31st July and 31 Oct to 30 November 2020: FM Sitharaman pic.twitter.com/CtGrhwLScO
तबलीगी जमात के मरकज मामले की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस ने 700 विदेशी जमातियों के डॉक्यूमेंट सीज किए हैं। यह सभी जमाती निजामुद्दीन स्थित मरकज में आए थे। सभी के पासपोर्ट समेत कई दस्तावेज क्राइम ब्रांच ने सीज किया है, ताकि ये देश छोड़कर भाग नहीं सके। इन सभी विदेशी जमातियों से मरकज और मौलाना साद को लेकर पूछताछ होगी।
गौरतलब है कि मरकज में इंडोनेशिया, मलेशिया, थाइलैंड, ईरान, चीन और बांग्लादेश समेत कई देशों से जमाती आए हुए थे। मरकज में शामिल होने के बाद यह लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में गए थे। मरकज का कोरोना कनेक्शन सामने आने के बाद सभी विदेशी जमातियों को क्वारनटाइन किया गया था।
इसमें से कई विदेशियों पर वीजा नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में केस दर्ज किए गए हैं। अब इन 700 विदेशी जमातियों का पासपोर्ट सीज कर दिया गया है।
तबलीगी जमात से जुड़े हजारों लोगों ने हाल ही में अपना कोरोना क्वारंटाइन पूरा किया है। दिल्ली सरकार ने पिछले हफ्ते जिलाधिकारियों को यह निर्देश दिया था कि वे तबलीगी जमात के 4000 सदस्यों को क्वारंटाइन सेंटरों से छोड़ दें, यानी सबको घर जाने की इजाजत मिल गई थी। इसमें भारत के अलग-अलग राज्यों के जमातियों को घर जाने की छूट थी।
उल्लेखनीय है कि तबलीगी जमात का निजामुद्दीन स्थित मरकज कोरोना संक्रमण का हॉटस्पॉट बनकर उभरा था। यहॉं हुए कार्यक्रम में भारत सहित कई देशों के जमाती शामिल हुए थे। मार्च में कई देशों के हजारों तबलीगी जमात के सदस्यों ने यहाँ आयोजित मजहबी कार्यक्रम में भाग लिया था, जिसमें कोरोना वायरस से जुड़े चेतावनियों और सावधानियों का खुलेआम उल्लंघन किया गया था।
इस मामले में जाँच में जुटी क्राइम ब्रांच ने मौलाना साद के बेटे को अपने कार्यालय में बुलाकर करीब 2 घंटे पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उन्होंने साद के बेटे से 20 लोगों की जानकारी माँगी जो दिल्ली के मरकज में न केवल शामिल थे, बल्कि मरकज़ प्रबंधन टीम का हिस्सा थे।
क्राइम ब्रांच को अब तक की पड़ताल में पता चला है कि मरकज के 20 ऐसे कर्मचारी हैं जो यहाँ आने-जाने वाले जमातियों की व्यवस्था से जुड़े थे वे केस दर्ज होने के बाद से गायब हैं। अब चूँकि साद का बीच वाला बेटा मुख्यालय की गतिविधियों में अधिक सक्रिय है और यही प्रबंधन से जुड़े 6 पदाधिकारियों के साथ ज्यादा बैठक भी करता था, इसलिए क्राइम ब्रांच ने उसे बुलाकर पूछताछ की और तबलीगी जमात मुख्यालय की गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों के बारे में भी जानकारी माँगी।
कोरोना संकट के बीच पश्चिम बंगाल के कोलकाता के एक प्राइवेट हॉस्पिटल का एक बेहद ही अमानवीय चेहरा सामने आया है। अस्पताल ने 76 साल के एक बुजुर्ग को एडमिट करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उस रोगी की मृत्यु हो गई। मृतक के परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने इस संदेह पर एडमिट करने से इनकार कर दिया कि वह कोरोना से संक्रमित हैं। बुजुर्ग को बुढापे संबंधी कई बीमारियाँ थीं।
मरीज के दामाद मुख्तार आलम ने PTI को बताया कि दरभंगा के रहने वाले शाहिद अहमद याहिया को उनका इलाज करने वाले डॉक्टर की सिफारिश पर अपोलो ग्लेनिगल्स अस्पताल में भर्ती करने के लिए 9 मई को कोलकाता लाया गया था। याहिया पार्किन्सन रोग से पीड़ित थे, जो कोलकाता के एक डॉक्टर के संपर्क में थे।
कोलकाता के रहने वाले मुख्तार आलम ने बताया कि डॉक्टर ने दरभंगा के एक अस्पताल के आईसीयू में भर्ती याहिया को बेहतर इलाज के लिए यहाँ लाने के लिए कहा।
मुख्तार आगे बताते हैं, ‘‘प्रशासन से आवश्यक पास लेकर हमलोग आईसीयू एम्बुलेंस में दरभंगा से आए और उन्हें सीधे अपोलो ग्लेनिगल्स अस्पताल ले गए। जहाँ डॉक्टरों ने हमें कुछ घंटों तक इंतजार कराया और फिर उनकी कुछ जाँच की गई, जिस दौरान मेरे ससुर अस्पताल के गलियारे में स्ट्रेचर पर लेटे हुए थे।’’
आलम ने बताया कि कुछ देर बाद एक डॉक्टर ने अचानक से आकर कहा कि उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने की आशंका है और उन्हें एमआर बांगुर अस्पताल या किसी अन्य सरकारी अस्पताल में ले जाना चाहिए जो कोरोना वायरस के मामलों का इलाज कर रहा है।
आलम ने कहा, ‘‘मेरे ससुर को संक्रमण का कोई लक्षण नहीं था। मुझे नहीं पता कि अपोलो में डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती करने से इनकार क्यों किया। उन्होंने उन्हें कोरोना वायरस का संदिग्ध बताया और उन्हें कोरोना वायरस रोगियों का इलाज करने वाले एक सरकारी अस्पताल में रेफर कर दिया।’’
याहिया के परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि उनकी हालत बहुत गंभीर थी, लेकिन अपोलो ग्लेनिगल्स अस्पताल के डॉक्टरों ने उस कठिन समय को उनके इलाज के बजाय बहस करने में बर्बाद कर दिया।
हालाँकि, अस्पताल के अधिकारी ने बचाव करते हुए कहा, “अस्पताल में हर मरीज की कोविड-19 जाँच की जा रही है। और अगर कोई व्यक्ति संदिग्ध है, तो प्रवेश से पहले एक पुष्टि परीक्षण किया जाता है। लेकिन कोविड-19 वार्ड में कोई बिस्तर नहीं हैं, तो हम अन्य रोगियों के इस खतरनाक वायरस के संपर्क में आने का जोखिम नहीं ले सकते। इसलिए हम कुछ मरीजों को सरकारी अस्पताल में रेफर करते हैं।”
याहिया को फिर ईएम बाईपास से दूसरे निजी अस्पताल में ले जाया गया। वहाँ भी उन्हें भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद उन्हें सरकारी एमआर बांगुर अस्पताल ले जाया गया।
आलम ने कहा, ‘‘उन्हें 9 मई को एमआर बांगुर अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया था और 11 मई को तड़के करीब 4.15 बजे उनकी मृत्यु हो गई।’’ शाहिद अहमद याहिया को कोविड-19 जाँच में संक्रमित नहीं पाया गया था।
डेथ सर्टिफिकेट में उनकी मौत की वजह कार्डियोरेस्पिरेटरी का फेल होना, स्टेज 3 मधुमेह मेलेटस और क्रोनिक किडनी बीमारी बताया गया था। आलम ने कहा, ‘‘हम न्याय चाहते हैं और डॉक्टरों के खिलाफ कानूनी कदम उठाएँगे जिन्होंने उन्हें भर्ती करने से इनकार कर दिया था।’’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के समर्थन में गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया है कि सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की कैंटीनों पर अब सिर्फ स्वदेशी उत्पादों की ही बिक्री होगी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने ट्विटर एकाउंट से जानकारी देते हुए बताया कि जून 01, 2020 से देशभर की सभी CAPF कैंटीनों पर यह आदेश लागू होगा। इससे लगभग 10 लाख CAPF कर्मियों के 50 लाख परिजन स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करेंगे।
यह घोषणा गृह मंत्री अमित शाह ने पीएम नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के समर्थन में की है।
आत्मनिर्भर भारत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार रात 8 बजे अपने सम्बोधन में देश में कोरोना संकट के दौरान ‘आत्मनिर्भर भारत’ का नारा दिया है। प्रधानमंत्री के इस नारे के पीछे स्वदेशी चीजें अपनाने का मूल मंत्र छिपा है। उन्होंने कहा कि हमें स्थानीय उत्पादन को महत्व देना होगा।
पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना संकट ने हमें मुसीबत में डालने के साथ ही एक अवसर भी दिया है और हमें इस अवसर को भुनाने के लिए पूरी तरह तैयार होना होगा।
अर्थव्यवस्था और बाजार में सुधार के लिए ₹20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि देश के लोगों को भी भारत को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम में आगे आना होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ही आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादन पर जोर देते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए ₹20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है।
PM मोदी ने अपने भाषण में कहा कि आज कोरोना वायरस की महामारी के समय विश्व हमारी ओर आशा की नजरों से देख रहा है। भारत ने वायरस से लड़ने में मददगार दवाइयाँ उपलब्ध करवाई।
आत्मनिर्भर भारत के लिए पैकेज की घोषणा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इन सबके जरिए देश के विभिन्न वर्गों को, आर्थिक व्यवस्था की कड़ियों को, 20 लाख करोड़ रुपए का संबल मिलेगा, सपोर्ट मिलेगा। 20 लाख करोड़ रुपए का ये पैकेज, 2020 में देश की विकास यात्रा को, ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ को एक नई गति देगा।
महाराष्ट्र के मदरसों की लापरवाहियों ने बिहार की चिंता बढ़ा दी है। कुछ समय पहले तक बिहार सुशासन बाबू के विज्ञापन के लिए प्रसिद्ध था। अब कोरोना के फैलते प्रकोप के कारण सुर्खियों में है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार तक वहाँ पर एक ही दिन में 130 मामले सामने आए, जिसके बाद वहाँ कुल मरीजों की संख्या 879 हो गई है। चिंताजनक बात ये है कि मंगलवार को मिलने वाले 130 केसों में से 124 मरीज प्रवासी हैं यानी वे लोग जो राज्य में बाहर के प्रदेशों से हाल में लौटे।
ऐसे में इस बीच महाराष्ट्र के कुछ मदरसों से भी निकलकर कुछ छात्र विशेष ट्रेन से बिहार पहुँचे, जिनमें से कई छात्र रैंडमली जाँच में कोरोना संक्रमित पाए गए।
इन छात्रों का कहना है कि इन्हें महाराष्ट्र में स्क्रीनिंग करके ट्रेन में बैठाया गया। मगर सवाल उठता है कि जब बिहार लौटने के बाद इनमें संदिग्धता दिखने के कारण इन्हें तुरंत क्वारंटाइन कराया गया। तो, फिर महारष्ट्र से इन्हें यहाँ आने की अनुमति कैसे मिल गई।
गौरतलब है कि विशेष ट्रेनों को संचालित करने से पहले ये निर्देश दिए गए थे कि राज्य सरकारें इस बात का ध्यान दें कि यात्रियों की बाकायदा स्क्रीनिंग हो। तभी उन्हें ट्रेन से आने-जाने इजाजत दी जाए।
मगर, बावजूद इसके ऐसे मामले सामने आए जब बिहार के अधिकांश प्रवासी (छात्र व मजदूर) अपने साथ अपने घर कोरोना लेकर पहुँचे। इनमें महाराष्ट्र से लौटे मदरसों के छात्र भी शामिल हैं, जिनकी वजह से सहरसा जैसा ग्रीन जोन इलाका ऑरेंज जोन में बदल गया।
प्रवासियों के कारण ग्रीन जोन से ऑरेंज जोन में पहुँचा सहरसा
1 मई तक बिहार में ग्रीन जोन में शेखपुरा, अररिया, जमुई, कटिहार, खगरिया, किशनगंज, मुजफ्फरपुर, पश्चिम चंपारण, सहरसा, समस्तीपुर, शिवहर, सीतामढ़ी और सुपौल क्षेत्र आते थे। लेकिन वर्तमान में बस जमुई ही एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ कोरोना का 1 मामला पाया गया है। अन्यथा हर इलाके में कोरोना जत्थे में पहुँच चुका है।
सहरसा जैसे इलाको में कोरोना केसों की बढ़ोतरी इसी का एक उदाहरण है। जहाँ 3 दिन में महज 10 कोरोना के केसों को रिकॉर्ड किया गया और अचंभे की बात ये थी कि दसों मामले महाराष्ट्र के नंदूरबार मदरसे से आए थे। जिनमें 5 सहरसा बस्ती के रहने वाले थे, 1 सोनबर्षा के सहमौरा, 1 सिमरी बख्तियारपुर के मदनपुरा का केस था। इसके अलावा अन्य तीन केस भी मदरसे से जुड़े थे।
11 मई को दैनिक भास्कर में प्रकाशित संबंधित खबर
यहाँ बता दें कि महाराष्ट्र के नंदूवार मदरसे से 6 मई को स्पेशल ट्रेन से कुल 994 छात्र बिहार लौटे। इनमें से 180 केवल सहरसा से थे। इन सभी को प्रशासन ने सहरसा में स्क्रीनिंग के बाद होम क्वारंटाइन में उनके अभिभावकों को सौंपा था।
मगर, जिला प्रशासन द्वारा कराए गए रैंडम जाँच में इनमें से 10 केस कोरोना पॉजिटिव निकल आए। जिलाधिकारी के मुताबिक राज्य में 40 रैंडम सैंपलिंग ली गई थी। इनमें से 10 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जबकि 21 की नेगेटिव और 12 की रिपोर्ट्स का अभी इंतजार है।
अभी फिलहाल बता दें कि सहरसा के शहरी इलाके में पूरे 5 मामले आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे सील कर दिया और आसपास के कई इलाकों को कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया।
अक्लकुंआ मदरसे से लौटे छात्रों में 7 कोरोना पॉजिटिव
इसी प्रकार महाराष्ट्र के अक्लकुंआ मदरसे से भी बीते दिनों कई छात्र बिहार लौटे। इनमें से 104 मदेहपुर के विभिन्न प्रखंडों के थे। इन्हें 5 मई को महाराष्ट्र से चलने वाली विशेष ट्रेन 6 नई को मदेहपुर लेकर पहुँची थी। जिसके बाद संदिग्ध लक्षणों को देखते हुए कई छात्रों को क्वारंटाइन कराना पड़ा।
7 मई को जब इनके सैंपल लिए गए, 9 मई को आई रिपोर्ट में 7 छात्र कोरोना पॉजिटिव पाए गए। जिसके बाद इलाके में कोरोना केसों की संख्या 2 से बढ़कर 9 हो गई। इनमें नरदह के 5, कुरसंडी के 1 और घैलाढ़ के 1 छात्र को कोरोना संक्रमित पाया गया।
इसी प्रकार मंगलवार तक पटना में 17, खगडिया, पश्चिम चंपारण एवं जहानाबाद में 16-16, रोहतास में 13, नालंदा में 12, मधुबनी में चार, मुजफ्फरपुर में तीन, गोपालगंज, औरंगाबाद सारण, नवादा, शेखपुरा एवं समस्तीपुर में दो-दो तथा बांका, पूर्णिया, भागलपुर, सिवान, कटिहार, भोजपुर, मुंगेर, जमुई एवं लखीसराय में एक-एक शख्स के संक्रमित होने की पुष्टि हुई ।
बिहार में कोरोना केसों की संख्या
प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में जिलेवार तौर पर कोरोना वायरस संक्रमण के मामले अब तक सबसे अधिक मुंगेर में 116 में सामने आए हैं। इसके बाद पटना में 80, रोहतास में 72, नालंदा में 63, बक्सर में 56, बेगूसराय में 40, सिवान में 34, कैमूर में 32, मधुबनी में 30, पश्चिम चंपारण एवं खगडिया में 27—27, भागलपुर में 26, गोपालगंज में 22, जहानाबाद में 21, भोजपुर में 21, दरभंगा में 18, औरंगाबाद एवं नवादा में 15-15, पूर्वी चंपारण में 14, कटिहार, मुजफ्फरपुर एवं अरवल में 12—12, समस्तीपुर में 11, सहरसा, सारण एवं शेखपुरा में 10-10, मधेपुरा एवं किशनगंज में 9-9, गया में 1, सीतामढी एवं बांका में 7-7, लखीसराय एवं सुपौल में 5-5, अररिया, वैशाली एवं पूर्णिया में 4-4, शिवहर में 3 तथा जमुई में 1 मामला प्रकाश में आया है । बिहार में अब तक कोरोना वायरस के संदिग्ध 37430 नमूनों की जाँच की जा चुकी है और 383 मरीज ठीक हुए हैं।
यहाँ बता दें कि बिहार एक ऐसा राज्य है जहाँ से अधिकांश लोग कभी काम के सिलसिले में तो कभी शिक्षा के कारण प्रवसन करते रहते हैं। ऐसे में कोरोना के समय में जब हर जगह लॉकडाउन की गाज गिरी है और सभी काम ठप्प हो गए हैं, तो मजदूर/छात्र वर्ग बड़ी तादाद में वापस घर वापसी कर रहे हैं। इसलिए अन्य राज्यों के मुकाबले वहाँ अभी भी बड़े तादाद में प्रवासी मजदूरों और छात्रों के आने का सिलसिला जारी है।
ऐसे में प्रशासन की चिंता इन सबकी जाँच को लेकर बनी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक राज्य से निकलकर अन्य राज्यों में काम करने गए 1 लाख 20 हजार से ज्यादा प्रवासी 104 विशेष ट्रेनों से लाए जा चुके हैं। बुधवार को भी वहाँ 24 ट्रेनें करीब 30, 348 लोगों को लेकर राज्य में पहुँचेगें। इनके अलावा राज्य में 160 ट्रेनों को प्रवासियों को राज्य में लाने के लिए शिड्यूल किया गया है। इस प्रकार 284 ट्रेनों से करीब 3,31, 623 लोग बिहार आएँगे।
बीते दिनों जैन बेकर्स एंड कन्फेक्शनरी के एक विज्ञापन के कारण सोशल मीडिया पर काफी बवाल के बाद चेन्नई के टी नगर में बेकरी के मालिक प्रशांत को ‘धार्मिक भेदभाव’ करने के मामले में गिरफ्तार किया गया। उन पर मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगा।
अब ताजा जानकारी के मुताबिक ऐसा लगता है कि बेकरी के मालिक ने स्थाई रूप से अपनी दुकान बंद कर दी है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि जब गूगल पर जैन बेकर्स एंड कन्फेक्शनरी के नाम से सर्च किया जाता है तो रिजल्ट ‘permanently closed’ लिखकर आता है।
Jain Bakers and Confectionaries is ‘Permanently closed’
Google business के मुताबिक जैन बेकर्स एंड कन्फेक्शनरी चेन्नई के टी नगर में है, जिसे नफरत फैलाने को लेकर स्थाई रूप से बंद कर दिया गया है। बताया जाता है कि गूगल पर कोई संस्थान तभी ‘permanently closed’’ दिखाई देता है, जब उस संस्थान का मालिक खुद ऐसा करे। संस्थान का मालिक ही ये तय कर सकता है कि उसके गूगल पेज पर कौन सी जानकारी सार्वजनिक रूप से दिखाई जाएगी और कौन सी नहीं। कोई तीसरा इसमें कोई छेड़-छाड़ नहीं करता है।
ऐसा लगता है कि संस्थान के मालिक और प्रमोटर्स ने सोशल मीडिया पर भद्दी गालियाँ और धमकी मिलने के बाद इसे बंद करने का फैसला कर लिया। बता दें कि लॉकडाउन की वजह से लगभग सारे रेस्टॉरेंट फिलहाल बंद हैं। हालाँकि, जब हम उन्हें गूगल पर सर्च करते हैं, तो उनके बिजनेस प्लेटफॉर्म पर ‘permanently closed’ की जगह ‘closed’ अथवा ‘temporarily closed’ लिखा हुआ दिखाई देता है।
Just Dosa Tiffiny’s in Bengaluru
उदाहरण के लिए बेंगलुरु के डोसा प्वाइंट, जो कि फिलहाल लॉकडाउन के मद्देनजर बंद हैं, को हम गूगल पर सर्च करते हैं, तो उसके बिजनेस प्लेटफॉर्म पर ‘Closed’ लिखा हुआ दिखाई देता है, न कि ‘permanently closed’।
ऑपइंडिया ने इस बाबत कुछ उद्यमियों से बात की, जो अपने बिजनेस को प्रमोट करने के लिए गूगल का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने ने भी यही बताया कि सिर्फ संस्थान ही अपने बिजनेस प्लेटफॉर्म पर बदलाव कर सकता है, कोई तीसरा इसमें कुछ नहीं कर सकता है। इनकी बात से इस बात की पुष्टि हो जाती है कि व्हाट्सएप पर सर्कुलेट किए गए विज्ञापन के बाद मिली धमकियाँ और गालियों की वजह से बेकरी के मालिक ने दुकान हमेशा के लिए बंद कर दी।
हालाँकि, इनमें से एक उद्यमी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि हो सकता है कि बेकरी के कंटेंट के खिलाफ मास रिपोर्टिंग की गई हो, उनके कंटेट को आपत्तिजनक बताया गया हो, तो ऐसे में गूगल भी उनके बिजनेस प्लेटफॉर्म को बंद कर सकता है। ऐसे में संभव है कि बेकरी के मालिक ने बंद न किया हो, गूगल ने कर दिया हो।
ऑपइंडिया ने जैन बेकर्स एंड कन्फेक्शनरी से भी बात करने की कोशिश की, मगर नंबर आउट ऑफ सर्विस होने की वजह से संपर्क नहीं हो पाया। उनसे संपर्क होते ही हम रिपोर्ट को अपडेट कर देंगे।
उल्लेखनीय है कि बेकरी मालिक ने अपने प्रोडक्ट को लेकर एक विज्ञापन छपवाया था। विज्ञापन में अन्य जानकारियों के साथ लिखा था “Made by Jains on orders, no Muslim staffs”। यानी ऑर्डर पर सामान जैनी तैयार करते हैं, यहॉं कोई मुस्लिम काम नहीं करता। व्हाट्सएप पर इस विज्ञापन के वायरल होने के बाद पुलिस ने बेकरी के मालिक प्रशांत को गिरफ्तार किया।
हालाँकि, बाद में पता चला कि जिस तस्वीर पर विवाद बढ़ा, वो तस्वीर फोटोशॉप की गई थी। जिसे रिजवान निजामी, बेकरी की छवि बिगाड़ने के लिहाज से सर्कुलेट कर रहे थे। मगर, अब सच्चाई का खुलासा होते ही रिजवान के ऊपर एफआईआर दर्ज करवा दी गई है।
एडवोकेट चाँदनी शाह ने ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा था, “बेकरी के कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा है कि ये तस्वीर व्हॉट्सअप पर इसलिए भेजी गई थी क्योंकि कुछ लोग लगातार उनसे पूछ रहे थे कि उनकी बेकरी में खाना कहीं स्पेशल कम्यूनिटी वाले तो नहीं बनाते? मगर रिजवान निजामी ने फोटोशॉप तस्वीर को फैलाया ताकि बेकरी को बदनाम कर सके। मैंने इस उद्दंडता पर एफआईआर दर्ज करा दी है।”