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पालघर साधु लिंचिंग: महाराष्ट्र CID ने 18 आरोपितों को किया अरेस्‍ट, अब तक 134 लोग गिरफ्तार

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते देश भर में लागू लॉकडॉउन के दौरान महाराष्‍ट्र के पालघर में दो साधुओं समेत तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में महाराष्ट्र पुलिस के अपराध जाँच विभाग (CID) ने 18 और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इस हालिया गिरफ्तारी से अब तक इस मामले में गिरफ्तार होने वाले लोगों की संख्या 134 तक पहुँच चुकी है।

CID के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस मामले की जाँच जबसे विभाग को सौंपी गई है तब से विभाग ने 24 लोगों को गिरफ्तार किया है। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपित ‘हिंसा और लिंचिंग की घटना में सक्रिय रूप से शामिल थे।’ इससे पहले पालघर पुलिस ने 110 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिसमें से नौ नाबालिग भी हैं। 

गौरतलब है कि 16 अप्रैल 2020 को जूना अखाड़े से जुड़े दो साधु 70 वर्षीय कल्पवृक्ष गिरि महाराज और 35 वर्षीय सुशील गिरि महाराज अपने ड्राइवर 30 वर्षीय नीलेश तेलगेडे के साथ एक अन्य साधु के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मुंबई से गुजरात जा रहे थे। इसी बीच पालघर जिले के गढ़चिंचले गाँव के 200 से अधिक लोगों की भीड़ ने इकठ्ठा होकर साधुओं पर हमला किर दिया था। इस दौरान भीड़ ने दोनों साधुओं के साथ उनके एक ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

इससे पहले एक अधिकारी ने बताया कि कुछ आरोपित गाँव से घने जंगल में भाग गए थे। पुलिस ने इन्हें पकड़ने के लिए ड्रोन का सहारा लिया। इस मामले में गिरफ्तार एक व्यक्ति इस महीने की शुरुआत में कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया था, जिसे अस्पताल में भर्ती किया गया है। साथ ही संपर्क में आए 23 पुलिसकर्मियों और 43 अन्य लोगों को तत्काल क्वारंटाइन कर दिया गया।

बता दें कि साधु समेत तीन लोगों की पीट-पीट कर हत्या करने की पूरी घटना वहाँ मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों के सामने हुई। मामले में अब तक 35 पुलिसकर्मियों का तबादला हो चुका है।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “2 साधुओं की हत्या। क्या यह होना चहिए? क्या कानून-व्यवस्था किसी को हाथ में लेना चाहिए था? ऐसे में पुलिस की भूमिका क्या होनी चाहिए थी? ये सभी चीजें ऐसी हैं जिन पर सोचा जाना चाहिए।” 

वहीं अखिल भारतीय संत समिति केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस मामले की सीबीआई जाँच की माँग कर चुकी है। पत्र में उन्होंने हत्या के पीछे बड़ी साजिश की आशंका जताते हुए कहा कि उन्हें महाराष्ट्र के गृह मंत्री पर भरोसा नहीं है।

143 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक हैं CM उद्धव ठाकरे, लेकिन नहीं है एक भी कार

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सोमवार (मई 11, 2020) को विधान परिषद सदस्य के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान उन्होंने अपने हलफनामे में खुलासा किया कि उनके और उनके परिवार के पास 143.26 करोड़ की संपत्ति है। इसमें चल और अचल संपत्ति शामिल है।

शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे परिवार में दूसरे शख्स हैं जो किसी चुनावी मैदान में किस्मत आजमाने उतरे हैं। इससे पहले उनके बेटे आदित्य ठाकरे ने पिछले साल वर्ली सीट से महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव लड़ा और जीता था।

भारत निर्वाचन आयोग को सोमवार को दिए चुनाव हलफनामे में ठाकरे ने अपनी संपत्ति और आय के स्रोतों के बारे में बताया है। इस हलफनामे के मुताबिक उन्होंने अपनी और अपने परिवार की 143.26 करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित की है। जिसमें चल संपत्ति 61.8 करोड़ रुपए है, जबकि अचल संपत्ति 81.3 करोड़ है।

इसके अलावा, महाराष्ट्र के सीएम ने अपनी आय के स्रोत के रूप में अपने वेतन, ब्याज, लाभांश और पूँजीगत लाभ का भी खुलासा किया। चुनाव आयोग के समक्ष पेश किए गए अपने पहले हलफनामे में उन्होंने 4.06 करोड़ रुपए की ऋण राशि सहित लगभग 15.50 करोड़ रुपए की देनदारियों का भी उल्लेख किया है।

शिवसेना सुप्रीमो द्वारा प्रस्तुत हलफनामे में उनके परिवार के सदस्यों की आय के स्रोतों के बारे में भी जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक हलफनामे के मुताबिक, उद्धव ठाकरे के पास 76.59 करोड़ रुपए की संपत्ति है जिसमें से 52.44 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति और 24.14 करोड़ रुपए की चल संपत्ति है।

उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे शिवसेना पार्टी के मुखपत्र सामना की संपादक भी हैं। शपथ पत्र के अनुसार, विभिन्न कारोबार से भी उन्हें आय होती है। उनकी पत्नी के पास 65.09 करोड़ रुपए की संपत्ति है जिसमें से 28.92 करोड़ रुपए की अचल और 36.16 करोड़ रुपए की चल संपत्ति है। हालाँकि, घोषणा पत्र में दिलचस्प बात यह है कि उनके पास कोई कार नहीं है

पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस द्वारा घोषित संपत्ति

अगर महाराष्ट्र के वर्तमान सीएम उद्धव ठाकरे के पहले चुनावी घोषणापत्र की तुलना पिछले मुख्यमंत्री द्वारा 2019 में दायर किए गए हलफनामे से करें तो इसमें जमीन-आसमान का फर्क है।

महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस द्वारा अक्टूबर 2019 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते समय दिए गए हलफनामे के अनुसार, उनके पास 3.86 करोड़ की संपत्ति थी, जिसमें से 3.78 करोड़ अचल संपत्ति थी। इसके अलावा उनके पास 17 हजार पाँच सौ रुपए नकद थे। साथ ही उन्होंने बैंक अकॉउंट में 8 लाख 29 हजार 665 रुपए जमा होने की जानकारी दी थी।

शपथ पत्र के अनुसार फडणवीस की पत्नी अमृता ने 2 करोड़ 33 लाख रुपए शेयर में निवेश किया था। इसके अलावा अमृता फडणवीस के पास 99.3 लाख रुपए की अचल संपत्ति है और बैंक में 3,37,025 का डिपॉजिट था।

चीनी मेजर की नाक पर जड़ा घूँसा, बाप-दादा भी पहले कर चुके हैं ये कारनामा, जिनके नाम पर रखा गया अरुणाचल के ‘टॉप’ का नाम

“यह (सिक्किम) तुम्हारी भूमि नहीं है, यह भारतीय क्षेत्र नहीं है … इसलिए वापस जाओ।” ये कहते हुए चीनी जवान अपनी सेना की ओर बढ़ रहा था।

तभी एक दुबला-पतला, तकरीबन एक साल पहले ही सेना में भर्ती हुए लेफ्टिनेंट ने कहा – “क्या सिक्किम हमारे क्षेत्र में नहीं है? क्या बकवास है!” इतना चिल्लाते हुए भारतीय जवान उसकी ओर बढ़ा और चीनी मेजर की नाक पर जोरदार मुक्का जड़ दिया।

उत्तरी सिक्किम में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर भारतीय सेना के जवानों और चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जवानों की झड़प के बाद लद्दाख सीमा पर चीनी चॉपर्स देखे जाने का मामला सामने आया है और लगातार गरमा-गर्मी बरकरार है।

इसी बीच यह एक ऐसा किस्सा सामने आया है, जिसमें भारतीय सैनिक के जोश और जज्बे के उदाहरण की तारीफ हो रही है।

स्वराज्य की रिपोर्ट के अनुसार, सिक्किम के मुगुथांग में भारतीय सेना के एक लेफ्टिनेंट ने चीनी सेना के मेजर की नाक पर मुक्का मारकर उसकी नाक से खून निकाल दिया था।

दरअसल, पिछले सप्ताह सिक्किम में चीन की PLA सेना अतिक्रमण करने के ख्वाब में थी, जिसे भारतीय सैनिकों ने अपनी जाँबाजी से रोक दिया था।

इसी दौरान एक चाइनीज सैनिक ने भारतीय सैनिकों से कहा था कि सिक्किम तुम्हारी जमीन नहीं है, यह भारत का हिस्सा नहीं है और भारतीय सैनिकों को वहाँ से चले जाने की धमकी दी।

चीन के इस मेजर की बात सुनकर एक युवा भारतीय लेफ्टिनेंट को गुस्सा आ गया और उसने कहा – “क्या, सिक्किम हमारा हिस्सा नहीं है? क्या बकवास है?”

युवा लेफ्टिनेंट की बात सुनकर चीनी मेजर उसकी ओर बढ़ने लगा। ये देखकर लेफ्टिनेंट ने उस पर झपटकर उसकी नाक पर जोरदार मुक्का मार दिया।

ये घूँसा इतना जोरदार था कि चीनी सेना का मेजर वहीं गिर गया और उसकी नेमप्लेट भी जमीन पर गिर गई। ये भारतीय लेफ्टिनेंट इसे अपने साथ लाना चाहते थे लेकिन तभी उनके साथी उन्हें खींचकर पीछे की ओर ले आए।

इस घटना से एक ओर जहाँ लेफ्टिनेंट को वाहवाही मिल रही है वहीं, उन्हें अधिकारियों से डाँट भी मिली है। क्योंकि यह कारनामा बड़ा विवाद भी पैदा कर सकता था।

कोलकाता के फोर्ट विलियम में सेना के पूर्वी कमान मुख्यालय में एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि यह घटना चीनी मेजर के उकसाए जाने का नतीजा थी। युवा लेफ्टिनेंट चीनी जवान पर एक-दो और घूँसे मारने वाला था कि उसके साथियों ने उसे पीछे खींच लिया।

युवा लेफ्टिनेंट के पिता भी निकाल चुके हैं चीनी जवानों की नाक से खून

इस घटना के बाद एक यह तथ्य भी सामने आया है कि युवा लेफ्टिनेंट ने वही कारनामा दोहराया है जो उनके पिता वर्ष 1986 में पश्चिमी अरुणाचल प्रदेश के सुमदोरोंग चू में कर चुके थे।

युवा लेफ्टिनेंट के पिता, कर्नल (सेवानिवृत्त) आशीष दास ने उस वर्ष की शुरुआत में सर्दियों में चीनियों की नाक से खून निकाला था। कर्नल उस समय युवा कैप्टन थे। उन्होंने चीनियों के ख़िलाफ़ एक भयंकर हमले का नेतृत्व किया था।

चीनी सैनिकों ने उस समय भारतीय क्षेत्र में घुसकर अरुणाचल प्रदेश में ज़ीमथांग में अपने स्थाई निर्माण तैयार करने शुरू कर दिए थे।

यह ऑपरेशन तत्कालीन आर्मी चीफ जनरल कृष्णस्वामी सुंदरजी द्वारा संचालित ‘ऑपरेशन फाल्कन’ का हिस्सा था। दास की बहादुरी, जिन्हें उस समय असम रेजिमेंट में कमीशन किया गया था, ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ‘रिज-टॉप’ को वापस लेने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद में उनके नाम पर ही ‘आशीष टॉप’ नाम दिया गया था।

चीनी मेजर के नाक से खून निकालने वाले युवा लेफ्टिनेंट के दादा, यानी, आशीष दास के पिता, मास्टर वारंट ऑफिसर (MWO) बीबी दास ने रॉयल एयर फोर्स और फिर भारतीय वायु सेना में सेवा की थी।

वे प्रथम विश्व युद्ध के दौरान लाहौर में तैनात थे और उन्होंने 1971 के बांग्लादेश युद्ध के भी गवाह बने। बाद में वह बैरकपुर में एक सिग्नल इकाई से सेवानिवृत्त हुए।

ज्ञात हो कि कर्नल दास की बेटी भी एक आर्मी ऑफिसर हैं जो कि एडवोकेट जनरल ब्रांच में जज हैं। यह आर्मी की कानूनी शाखा है।

‘ट्वीट डिलीट किया तो तू दो बाप का’: ट्विटर यूजर ने रणदीप सूरजेवाला का कर दिया फैक्टचेक

कॉन्ग्रेस पार्टी कोरोना वायरस की महामारी का लाभ अपनी खोई हुई राजनीति की जमीन को वापस लाने के लिए कर रही है लेकिन हर परिस्थितियाँ उनके लिए घातक ही साबित हो रही हैं।

कॉन्ग्रेस पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला एक बेहद भावुक और करुणामय तस्वीर ट्विटर पर पोस्ट करते हुए आखिर क्या साबित करना चाह रहे थे यह बड़ा प्रश्न बन चुका है। क्योंकि जिस तस्वीर को पोस्ट कर के सुरजेवाला, PM मोदी से सवाल कर रहे हैं, वो उनकी ही पार्टी यानी, कॉन्ग्रेस शासित राज्य छत्तीसगढ़ की तस्वीर है।

रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया है, “मोदी जी, इन्हीं को जहाज़ में बिठाने का सपना बेचा था ना!”

इस तस्वीर में एक व्यक्ति एक बच्चे को ट्रक की छत पर चढ़ाते हुए देखा जा रहा है। शायद सुरजेवाला यह संदेश देना चाह रहे थे कि राज्यों में प्रवासियों को अपने घर जाने में किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

लेकिन इस तस्वीर की सच्चाई सामने आने के बाद लोगों ने रणदीप सुरजेवाला से इसे डिलीट ना करने की बात कही है।

@IntrepidSaffron नाम के ट्विटर एकाउंट ने सुरजेवाला की इस तस्वीर को ट्वीट किया है, जो कि एक समाचार पत्र में प्रकाशित हुई है। इसमें बताया गया है कि तस्वीर छत्तीसगढ़ की है।

@IntrepidSaffron ने इस ट्वीट में लिखा है – “फोटो छत्तीसगढ़ का है, जहाँ कॉन्ग्रेस सरकार है। अब अगर ट्वीट डिलीट किया तो तू दो बाप का।

अखबार की इस कटिंग में लिखा गया है – “छत्तीसगढ़ में रविवार को प्रवासियों की घर लौटने की जिद और संघर्ष की बानगी देखने की मिली। टाटीबंध चौक पर व्यक्ति एक हाथ में मासूम को लिया था और दूसरे हाथ से रस्सी पकड़कर ट्रक में सवार हो रहा था। ऐसी तस्वीर छत्तीसगढ़ में रोज दिख रही है।”

इसके बाद एक अन्य ट्वीट में रणदीप सुरजेवाला ने लिखा है, “मोदी जी, इन चप्पल वाले भारतीय श्रमिक भाईयों के लिए ‘बंदे भारत’ क्यों नहीं? आपकी संवेदनहीनता से करोड़ों श्रमिक असहाय महसूस कर रहे हैं! आज 8 बजे तो इनके बारे बताइए।”

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस लगातार अपने सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसी ही फर्जी तस्वीरों के जरिए यह साबित करने का प्रयास कर रही है कि कोरोना वायरस के कारण जारी बंद की वजह से अन्य राज्यों में फँसे हुए प्रवासी मजदूरों को अपने घर लौटने में बहुत समस्या हो रही है। यही नहीं, कॉन्ग्रेस नेता लोगों को भ्रमित करने के लिए बांग्लादेशी रोहिंग्या मुस्लिमों की तस्वीरों तक का सहारा ले रहे हैं।

ऐसी भावुक करने वाली तस्वीरों को शेयर करने से पहले रणदीप सुरजेवाला यह भूल गए कि छत्तीसगढ़ राज्य में उन्हीं की कॉन्ग्रेस की सरकार है और वह ऐसा कर के अपनी ही सरकार के कामकाज का फैक्ट चेक कर उनकी पोल खोल रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में जलाए जा रहे हैं हिन्दुओं के घर: कैलाश विजयवर्गीय ने शेयर किया वीडियो

पश्चिम बंगाल में हिंदुओं का घर जलाए जाने की ख़बर आ रही है। भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने आरोप लगाया है कि हुगली में मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं का घर जलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि समुदाय विशेष के लोगों द्वारा हुबली जिले के टेलनीपारा के ताँतीपारा, महात्मा गाँधी स्कूल के पास शगुनबागान और फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ स्कूल के पास लगातार आगजनी और लूटपाट की जा रही है। वहाँ का प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से पूछा कि पश्चिम बंगाल में इस तरह की घटनाएँ आखिर कब तक होती रहेंगी? उन्होंने वीडियो भी शेयर किया, जिसमें लोगों का घर जलते हुए देखा जा सकता है। पूरे इलाके में कई घरों को जलते हुए देखा जा सकता है। चारों ओर धुआँ फैला हुआ है। कैलाह विजयवर्गीय ने लिखा:

“ऐसी भयानक तस्वीरें आ रही हैं मानो लगता है पूरा हुगली जिला जल रहा है। मेरा एक बार फिर तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार से आग्रह है कि वो वोट बैंक की राजनीति छोड़ लोगों की रक्षा करें। अगर बंगाल में हिंदुओं की रक्षा के लिए पुलिस और सरकार नहीं है तो हम अपने लोगों की रक्षा के लिए खून का आखिरी कतरा तक बहा देंगे।”

हुगली की सांसद लॉकेट चटर्जी ने कहा कि हिंदुओं के घरों को जलाया जा रहा है और कमिश्नर उनका फोन भी नहीं उठा रहे हैं। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल का पुलिस और प्रशासन भी इस मामले में हिंदुओं के ख़िलाफ़ है और कोई भी पीड़ितों की बात नहीं सुन रहा है। सोशल मीडिया पर भी कई तस्वीरें वायरल हुईं, जिनमें टूटे-फूटे घरों को देखा जा सकता है।

इससे पहले ममता को भेजे गए एक पत्र में विजयवर्गीय ने लिखा था कि जहाँ एक तरह पश्चिम बंगाल की जनता कोरोना नामक आपदा को झेल रही है, ममता बनर्जी गन्दी राजनीति खेलने में व्यस्त हैं। उन्होंने सलाह दी थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यपाल जगदीप धनखड़ से झगड़ने की बजाए वो राज्य पर ध्यान दें। उन्होंने लिखा था कि ये भाजपा नेताओं से बदला लेने का समय नहीं है। ये समय है अपनी प्रशासनिक क्षमता दिखाने का है।

विश्व की 15% जनसंख्या का समाप्त होना निश्चित: विनाश से सृजन का बीज है चीनी कोरोना वायरस

जबसे चीनी कोरोना वायरस का भारत में एक वैश्विक महामारी के रूप में प्रदार्पण हुआ है, तब से जीवन थम गया है। इस महामारी ने पूरे मानव समाज को जकड़ लिया है। आज, हमारे दैनिक जीवन का केंद्र बिंदु भारत के विभिन्न अंचलों में कारोना वायरस के प्रसार, उससे संक्रमित लोगों की संख्या व परिणामस्वरूप हो रही लोगों की मृत्यु की संख्या है।

आज हम सब, सामान्य जीवन यापन की उत्कंठा लिए हुए एक सांख्यिकी बन चुके हैं। यद्यपि यह वैश्विक महामारी जिसे कोविड-19 भी कहा जाता है, मानव जीवनकाल में आई पहली वैश्विक महामारी नहीं है लेकिन 21वीं सदी में आई यह वैश्विक महामारी, अब तक की आई सभी महामारियों से ज्यादा विश्व की जनसंख्या के साथ, उसकी मूलभूत समाजिक, राजनैतिक व आर्थिक संरचना में परिवर्तन लाने वाली है।

मैं जब लॉकडाउन के एकांत में कोरोना वायरस से होने वाले परिवर्तनों को लेकर आत्मचिंतन कर रहा हूँ तो उन वैश्विक महामारियों का भी स्मरण हो जा रहा है, जिनके बारे में मैंने अपने युवाकाल में पढ़ा था। उसमें सबसे कुख्यात यूरोप का ब्लैक प्लेग था, जो 14वीं शताब्दी में फैला था।

अपने संक्रमण के प्रथम दौर में इससे हुई मृत्यु ने नगरों की दो-तिहाई से तीन-चौथाई तक की आबादी साफ कर दी थी। इतिहासकारों का मत है कि इस चक्र में यूरोप में 2.5 करोड़ (अर्थात कुल आबादी का चौथाई) लोगों की मृत्यु हुई थी। इससे भारत मे सन् 1898 से 1918 के बीच 1 करोड़ लोगों की मृत्यु हुई थी।

इसके बाद ही 1918 में 20वीं शताब्दी की सबसे भयावह वैश्विक महामारी स्पैनिश फ्लू फैला, जिससे विश्व की एक-तिहाई जनता संक्रमित हुई थी और बहुत कम अंतराल में लगभग 2.5 करोड़ लोग मृत्यु को प्राप्त हुए थे। विशेषज्ञों का आकलन है कि इस महामारी में 4 से 5 करोड़ लोग मरे थे। इससे अकेले भारत मे 1.75 करोड़ लोग मरे थे, जो उस वक्त भारत की 6% जनसंख्या थी।

इसके बाद भारत में 1940 के दशक में हैजा फैला था, जिसकी भयावहता आज भी ग्रामीणांचल की स्मृतियों में है। इसके बारे में तो स्वयं अपने बुजर्गों से सुना है कि जब यह फैला था तो हर तरफ मृत्यु का नाद ही सुनाई देता था। भारत उस वक्त ब्रिटिश साम्राज्य से स्वतंत्रता का संघर्ष कर रहा था और ब्रिटेन द्वितीय विश्वयुद्ध में फँसा था। ऐसे में पूरा का पूरा परिवार और कहीं-कहीं गाँव के गाँव साफ हो गए थे।

इसके बाद जिस वैश्विक महामारी ने विश्व को प्रभावित किया वह एड्स/एचआईवी है, जिसका सबसे पहला प्रभाव हमारी पीढ़ी पर पड़ा था। हालाँकि इसका उदय 1970 के मध्य में हो गया था लेकिन भारत में इसके बारे में 1980 के दशक में पता चला था। मुझे आज भी याद है कि इसके बारे में मैंने सबसे पहले इंडिया टुडे के एक अंक में पढ़ा था। यह लेख न्यूयॉर्क में उनके गेस्ट कॉरेस्पोंडेंट ने लिखा था।

इस लेख में उस वक्त अमेरिका में उसको लेकर वहाँ के नागरिकों की चिंता व वहाँ के समाज का एड्स पीड़ित को लेकर पूर्वग्रहों को, चित्रण किया गया था। इस महामारी ने विश्व भर में समलैंगिकता को न सिर्फ सामाजिक स्वीकार्यता प्रदान कराई बल्कि कंडोम के प्रयोग को यौन-जीवन की अनिवार्यता भी बना दी।

एड्स के उपचार को ढूँढने में विश्व अब तक अरबों डॉलर खर्च कर चुका है लेकिन अभी तक विज्ञान इसकी कोई भी रामबाण औषधि या उपचार सामने लाने में समर्थ नहीं हो पाया है। इससे पीड़ित व्यक्ति का उपचार तो किया जाता है लेकिन इसका समूल निवारण अभी तक संभव नहीं हुआ है। भारत में एड्स की महामारी ने समाज के ढाँचे को प्रभावित नहीं किया। शायद यही कारण है कि हमें इसका संज्ञान ही नहीं है कि पिछले 4 दशकों में करीब 4 करोड़ व्यक्ति इससे मर चुके हैं।

इन सब वैश्विक महामारी को देखते हुए मैं समझता हूँ कि चीनी कोरोना वायरस द्वारा फैली वैश्विक महामारी इन सबसे अलग है। यह पहली महामारी है, जिसके प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने पर ही संदेह है। इस महामारी की भयानकता ने मनुष्य व उसके राजनैतिक नेतृत्व को इतना किंकर्तव्यविमूढ़ कर दिया है कि उसे मानुषिक सहज व्यवहार की शरण लेते हुए, इस महामारी से छुपने के लिए स्वयं को ही बंदी बनाना श्रेयस्कर लगा है।

वैसे तो विश्व भर के वैज्ञानिक कोरोना वायरस के रोकथाम के लिए वैक्सीन बनाने की होड़ में लगे हैं लेकिन मेरा आकलन है कि निकट भविष्य में इसके आने की संभावना नहीं है। यदि आ भी गई तो पूरे विश्व के वैक्सिनकरण में दशक लग जाएँगे।

मैं समझता हूँ कि कारोना महामारी को रोकने के लिए हर राष्ट्र ने अपनी तरफ से सद्प्रयास ही किए हैं। किसी भी राष्ट्र के पास इस तरह की महामारी को रोकने का न पूर्व अनुभव था और न ही इतिहास में उनके पास कोई उदाहरण था। ऐसे में हर्ड इम्युनिटी से लेकर लॉकडाउन तक सभी प्रयास, आलोचना के पात्र नहीं हो सकते हैं।

जिन लोगों ने यह सब निर्णय लिए हैं, उन सबने यह कटु सत्य स्वीकार कर लिया था कि चीनी कोरोना वायरस का कोई तोड़ नहीं है और इसी के साथ अब जीना है। जिन राष्ट्रों की स्वास्थ्य सेवाएँ विकसित हैं, उन्होंने इस वायरस से अपनी जनता की 3% से 5% की मृत्यु होना कठोर हृदय से स्वीकारा हुआ है।

भारत ऐसे राष्ट्र जहाँ की स्वास्थ्य सेवाएँ अविकसित हैं और उसकी जनता भी स्वयं में अनुशासित नहीं है, उसके लिए लॉकडाउन ही उपाय था। पीएम मोदी द्वारा यह लॉकडाउन का निर्णय, लोगों को मृत्यु से बचाने के लिए नहीं बल्कि इस वैश्विक महामारी के प्रसार की गति को धीमी करने के लिए और उस मिले हुए कम समय में अधिकतम रूप से इससे बचने के साधनों व उपचार की व्यवस्था के निर्माण करने के लिए लिया गया।

आज भारत की जनता को अपनी तन्द्रा से उठ कर इस कटु सत्य को स्वीकार करना होगा कि हमें इस कोरोना वायरस के साथ ही जीना है। हमारे लिए यह वायरस नहीं बदलेगा बल्कि हमको बदलना होगा और यह बदलाव व्यक्तिगत जीवन से लेकर सामाजिक व आर्थिक क्षेत्र में होगी। जो बदलेगा, वही जीवित रहेगा और जीवन दे पाएगा।

यदि आज भी जो यह सोच कर कोई चलेगा कि भविष्य के समीकरण, भूतकाल के पहिए पर चलेंगे, वह अंधकूप की तरफ जाएगा। यह इसलिए क्योंकि कोरोना तो अब रहेगा ही और उसके साथ ही पूर्व की सामाजिक से लेकर वाणिज्य व्यवस्था में इतना ज्यादा परिवर्तन आने वाला है कि यदि इस पर कल्पना के घोड़े भी दौड़ाए जाएँ तब भी मनीषियों के लिए, सही-सही 2020/30 के दशक का आकलन कर पाना संभव नहीं है।

इस दशक में हमारी-आपकी ज़िंदगी में आने वाले बदलाव, अब तक आए बदलावों से ज्यादा व्युत्क्रमण होंगे। इस बदलाव में, इन सब के साथ हमारे आगे बढ़ने के सभी प्रयोग सही ही होंगे, यह भी संभव नहीं है। मैं देख रहा हूँ कि अगले 10 वर्षों में कोरोना वायरस एवं उसके म्युटेंट्स से जनित विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के कारण व इसको लेकर राष्ट्रों के बीच टकराव एवं उससे उत्पन्न आर्थिक विभीषका के परिणामस्वरूप, विश्व की 15% जनसंख्या का समाप्त होना निश्चित है। भारत मे यह संख्या 20% तक पहुँच जाए, तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।

आज के हम भारतीय, युग मंथन दशक के यात्री हैं। मुझको यह बराबर आभास हो रहा है कि आज जो मेरे प्रिय, मित्र और साथी यहाँ पर या व्यक्तिगत जीवन में हैं, उनमें से एक-तिहाई लोग 2031 नही देख पाएँगे। मैं इस कटु सत्य को स्वीकार करके ही आगे की संभावना टटोल रहा हूँ। मेरे लिए जीवन का मूलमंत्र यही है कि हमे स्वयं ही सुरक्षित रहना है। हमें इस आपदा से निकलने का स्वयं ही प्रयास करना है क्योंकि किसी भी वैचारिक विलासिता के पास इसका कोई समाधान नहीं है।

मेरा दृढ़ विश्वास है कि कारोना वायरस का वैश्विक महामारी रूप में आना संपूर्ण विश्व के स्वरूप व व्याप्त व्यवस्थाओं, मर्यादाओं और मान्यताओं में मूलभूत परिवर्तन का प्रारंभ है। यह वायरस नहीं बल्कि विनाश से सृजन का बीज है।

समावेशी विकास ‘नरेंद्र मोदी फोबिया क्लब’ हजम नहीं कर पा रहा, ‘इस्लामोफोबिया’ का आरोप देश को बदनाम करने का प्रयास: नकवी

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कथित ‘इस्लामोफोबिया’ (इस्लाम के खिलाफ नफरत की भावना) को भारत को बदनाम करने का प्रयास करार देते हुए मंगलवार (मई 12, 2020) को कहा कि देश में अल्पसंख्यक फल-फूल रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में अल्पसंख्यक वर्ग के लोग सम्मान और सशक्तीकरण में बराबर के भागीदार हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार में हो रहे समावेशी विकास को ‘नरेंद्र मोदी फोबिया क्लब’ हजम नहीं कर पा रहा है और इसी का नतीजा है कि वह देश में ‘असहिष्णुता, सांप्रदायिकता और अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव’ के आरोपों के जरिए दुष्प्रचार में लगा है।

बता दें देश में फैले कोरोना वायरस के बाद से देश में कथित इस्लामोफोबिया का माहौल होने के लेकर अरब देशों में भारत के खिलाफ के आलोचनात्मक टिप्पणियाँ की गई। नकवी ने इस प्रकार की सभी टिप्पणियों को खारिज किया है। 

उन्होंने ‘इस्लामोफोबिया -बोगस बैशिंग ब्रिगेड की बोगी’ शीर्षक से एक लेख अपने ब्लॉग पर लिखा है। इसमें उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय के लिए चलाई जा रही योजनाओं का जिक्र किया साथ ही उन लोगों को कड़ा जवाब दिया है जो भारत पर इस्लामोफोबिया का आरोप लगा रहे हैं। 

अल्पसंख्यक मंत्री ने आरोप लगाया कि एक तरफ हर भारतवासी प्रभावशाली नेतृत्व पर गौरवान्वित है तो वहीं बौखलाया-बदहवास पेशेवर ‘नरेंद्र मोदी फोबिया क्लब’ ने ‘इस्लामोफोबिया’ कार्ड के जरिए झूठे, मनगढंत तर्कों, तथ्यों से कोसों दूर दुष्प्रचारों से भारत के शानदार समावेशी संस्कृति, संस्कार और संकल्प पर पलीता लगाने की फिर से साजिशी सूत्र का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया है।

केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया, “साजिशी सियासी सनक से सराबोर लोग भारत को बदनाम करने और हिंदुस्तान की ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया’ के संकल्प पर चोट पहुँचाने की घटिया साजिश में लग गए हैं। यह वो लोग हैं जो नरेंद्र मोदी के कामकाज, परिश्रम एवं देश की समावेशी प्रगति को हजम नहीं कर पा रहे हैं।”

नकवी का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में प्रमुख इस्लामी देशों के साथ के आजादी के बाद से अब तक के सबसे ज्यादा दोस्ताना और करीबी रिश्ते बने। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अफगानिस्तान और कई अन्य देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सबसे बड़े नागरिक सम्मान से नवाजा।

उन्होंने कहा, “जब कोरोना का कहर दुनिया में शुरू हुआ था तब मोदी सरकार वुहान, ईरान, ईराक, सऊदी अरब आदि से बड़ी संख्या में भारतीयों को वापस देश लाए। इनमें अधिकतर मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल थे। ‘वन्दे भारत मिशन’ के तहत भी मालदीव, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ईरान, क़तर सहित कई देशों से भारतीयों को वापस लाया जा रहा है, जिनमे बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समाज के लोग हैं।”

अल्पसंख्यक मंत्री ने दावा किया, “दिल्ली में हाल ही में हुए दंगे से पहले शाहीन बाग धरने के समय एक मैसेज तेजी से वायरल किया गया था कि ‘मोदी कहते हैं उनके दौरे हुकूमत में एक भी दंगा-फसाद नहीं हुआ, हमें इस गुरुर को चकनाचूर करना है’। उसके बाद दिल्ली में जो कुछ हुआ उसने इंसानियत के सभी अंगों को लहूलुहान कर दिया।”

मंत्री ने आरोप लगाया, “शाहीन बाग में धरने पर बैठी महिलाओं को राष्ट्रद्रोही नहीं कहा जा सकता, पर यह भी सच है कि उन्हें गुमराह गैंग ने अपने मकसद के लिए गुमराह किया और ऐसे रास्ते पर धकेल दिया जहाँ एंट्री गेट तो था पर एग्जिट गेट नहीं था।”

FactCheck: पुलिस पर की थी पत्थरबाजी, लँगड़ाते हुए बाहर आए थाने से: भोपाल पुलिस ने तोड़े हाथ-पाँव

मध्य प्रदेश भोपाल में पुलिस थाने से बाहर आ रहे कुछ लोगों का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। वीडियो में देखा जा रहा है कि सलमान, आसिफ और दानिश, ये तीन युवक लँगड़ाते हुए थाने से बाहर निकल रहे हैं।

इसे शेयर करते हुए कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं या आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि शायद पुलिस की पिटाई के कारण ये लोग लँगड़ाते हुए चल रहे हैं।

क्या है मामला

नीसीत शरन ने ये वीडियो ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा है – “भोपाल में पुलिस पर हमला करने वाले सलमान, आसिफ और दानिश की गिरफ्तारी के पश्चात पहली तस्वीरें।”


इस ट्वीट में इन तीनों को लँगड़ाते हुए चलता देख कर ‘वोक श्री सनीचर’ नाम के ट्विटर यूजर ने हैरानी व्यक्त करते हुए पुछा है कि ये लोग लँगड़ाते हुए क्यों चल रहे हैं?

वहीं कुछ लोगों ने इसके पीछे पुलिस की भूमिका की आशंका जानकार यह सवाल भी किया है कि मानवाधिकार वाले लोग कहाँ हैं?

क्या है वास्तविकता

इस वीडियो को देखकर पहली नजर में हर कोई पुलिस को शंका की नजर से देख रहे हैं जबकि वास्तिविकता यह है कि आसिफ, सलमान और दानिश, ये तीनों आरोपित कुछ दिन पहले किए गए एक उपद्रव में बुरी तरह जख्मी हो गए थे।

दरअसल, गत बृहस्पतिवार (मई 07, 2020) को भोपाल, रॉयल मार्केट के पास साजिदा नगर निवासी सलमान, दानिश और आसिफ उर्फ मोटा एक पेट्रोल पंप पर लूट का प्रयास कर वहाँ से तोड़-फोड़ करने के बाद भाग निकले थे

रविवार (मई 10, 2020) रात एक मुखबिर से पुलिस को सूचना मिली कि यही तीनों आरोपित अपने साथियों के साथ कर्बला फिल्टर प्लांट के पास के पार्क में किसी दूसरी योजना को अंजाम देने के लिए छुपे हुए हैं।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस सूचना के आधार पर पुलिस ने तीन दल बनाकर इनकी घेराबंदी कर पार्क में दबिश दी, तो वहाँ मौजूद युवक चाकू और रॉड लहराते हुए भागने लगे।

इस दौरान सलमान और दानिश लगभग 14 फीट ऊँचाई पर चढ़ गए और पुलिस से भागने के चक्कर में उस दिवार से छलांग लगा दी। इसी छलांग लगाने के कारनामे में उनके हाथ-पैर में चोटें आईं थीं।

वास्तव में ये लोग कोहेफिजा इलाके में पेट्रोल पंप पर लूट का प्रयास कर पुलिसकर्मियों से उलझने वालों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। आरोपित इस वारदात के बाद से पुलिस से बचने के लिए अग्रिम जमानत के लिए रकम का इंतजाम करने पार्क में डकैती की साजिश रच रहे थे।

यही वो जगह थी, जहाँ पुलिस को आता देख दो आरोपितों ने बिना देखे 14 फीट ऊँची दिवार से छलांग लगा दी, जिस कारण उनके हाथ-पैर टूट गए। जबकि अन्य दो लोगों को वहाँ से भागते हुए गिरने से चोटें आईं थीं।

हलाल नहीं… झटका मीट ऑनलाइन ऑर्डर कर मँगवा सकते हैं अब आप: वराह फाउंडेशन की नई शुरुआत

देश में ऐसी कंपनी, वेबसाइट या रेस्टॉरेंट की कमी नहीं है, जो सिर्फ हलाल मीट ही बेचती है। लेकिन देश में एक भी ऐसा प्लेटफॉर्म अब तक नहीं था, जहाँ झटका मीट बेचा जाता हो। जिसकी वजह से हिंदुओं और सिखों के सामने हलाल मीट के अलावा और कोई विकल्प ही नहीं रह जाता है, या फिर यूँ कहें कि उन पर हलाल मीट थोपा जाता है।

ऐसे में ‘वराह फाउंडेशन’ नाम की एक संस्था ने हिंदुओं और सिखों की दुविधा और परेशानियों को समझते हुए एक प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है। जहाँ पर सिर्फ झटका मीट और झटका मीट से बने प्रोडक्ट ही बेचे जाएँगे। इस वेबसाइट के माध्यम से हिंदू और सिख समुदाय के लोग बेहिचक होकर झटका मीट मँगवा सकते हैं।

ऑपइंडिया ने इस बाबत वराह फाउंडेशन के सदस्य से बात की। जब हमने उनसे पूछा कि इस प्लेटफॉर्म को शुरू करने के पीछे उनका क्या मकसद था? उन्हें ऐसा क्यों लगा कि भारत में इसे खोलने की जरूरत है? तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा, “इंडिया में ऐसा कोई ऐप नहीं था, जिस पर झटका मीट मिलता हो। हमने हिंदुओं और सिखों के लिए इसे खोला है।”

उन्होंने आगे कहा, “हिंदू और सिख सिर्फ झटका मीट खाते हैं और अगर उन्हें घर बैठे मीट खाने का मन करेगा, तो वो कहाँ जाएँगे। इसलिए हमने इसकी शुरुआत की। इस पर सभी झटका करने वाले बूचर्स के नाम, एड्रेस, फोन नंबर होंगे। कस्टमर चाहें तो यहाँ ऑर्डर करें या फिर सीधा बूचर के पास जाकर ले आ सकते हैं।”

जब हमने उनसे पूछा कि ये काम किस तरह से करेगी तो उन्होंने कहा कि इसके लिए होम डिलीवरी और पिक-अप सब कुछ उपलब्ध है। फाउंडेशन की ओर से बताया गया कि अभी लॉकडाउन की वजह से काफी जगहों पर होम डिलीवरी नहीं हो पा रही है, क्योंकि कई जगहों पर डिलीवरी ब्वॉय को जाने की अनुमति नहीं है, इस वजह से थोड़ी दिक्कत हो रही है।

इसके माध्यम से लोग देश के भीतर कहीं भी झटका मीट ऑर्डर कर सकते हैं। फिलहाल गुड़गाँव, नोएडा में होम डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा दिल्ली और पुणे में कुछ एरिया में होम डिलीवरी की जा रही है, क्योंकि बाकी एरिया को सील कर दिया गया है। लॉकडाउन हटते ही इसे पूरे देश भर में इस सुविधा को लॉन्च किया जाएगा। इसके वेबसाइट का नाम है – झटैक.कॉम (jhattack.com)

वराह फाउंडेशन ने इसकी शुरुआत के पीछे की एक और वजह खटिक समुदाय को रोजगार उपलब्ध करवाना बताया। उन्होंने बताया कि झटका मीट की डिमांड कम होने की वजह से काफी लोगों का रोजगार छिन गया। फाउंडेशन की ओर से बताया गया कि उन्होंने खटिक समुदाय के 30 लोगों से बात की है।

उनके मुताबिक 30 में से 27 लोगों ने अब झटका मीट का कारोबार करना बंद कर दिया और इनमें से एक व्यक्ति के दो चचेरे भाइयों ने इस्लाम अपना लिया, ताकि वो हलाल मांस बेच सकें। और हलाल मांस का काम सिर्फ समुदाय के लोग ही कर सकते हैं, इसमें दूसरे मजहब वालों को रोजगार नहीं दिया जाता है।

इस्लाम कबूल करने वाले खटिक समुदाय के लोगों ने बताया कि पहले समुदाय विशेष के लोग उनसे मांस नहीं खरीदते थे, जिसकी वजह से उन्होंने अपना घर चलाने के लिए इस्लाम कबूल कर हलाल मांस का कारोबार करना शुरू कर दिया।

फाउंडेशन का कहना है कि झटका मांस की डिमांड कम होने की वजह उसके बारे में जानकारी का अभाव है। आजकल सभी लोग ऑनलाइन खरीददारी करते हैं और कोई भी ऑनलाइन पोर्टल झटका मीट की डिलीवरी नहीं करता है। इस वजह से खटिक समुदाय के लोगों का मीट नहीं बिक पाता है। मगर अब खटिक समुदाय के बूचर इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपना नाम रजिस्टर करवा कर रोजगार कर सकेंगे।

झटका सर्टिफिकेशन अथाॅरिटी के चेयरमैन रवि रंजन सिंह बताते हैं कि ‘झटका‘ हिन्दुओं, सिखों आदि भारतीय, धार्मिक परम्पराओं में ‘बलि/बलिदान’ देने की पारम्परिक पद्धति है। इसमें जानवर की गर्दन पर एक झटके में वार कर रीढ़ की नस और दिमाग का सम्पर्क काट दिया जाता है, जिससे जानवर को मरते समय दर्द न्यूनतम होता है। इसके उलट हलाल में जानवर की गले की नस में चीरा लगाकर छोड़ दिया जाता है, और जानवर खून बहने से तड़प-तड़प कर मरता है।

इसके अलावा मारे जाते समय जानवर को मजहब के पवित्र स्थल मक्का की तरफ़ ही चेहरा करना होगा। लेकिन सबसे आपत्तिजनक शर्तों में से एक है कि हलाल मांस के काम में ‘काफ़िरों’ (‘बुतपरस्त’, जैसे हिन्दू) को रोज़गार नहीं मिलेगा। यानी कि यह काम सिर्फ समुदाय का आदमी ही कर सकता है।

इसमें जानवर/पक्षी को काटने से लेकर, पैकेजिंग तक में सिर्फ और सिर्फ समुदाय के लोग ही शामिल हो सकते हैं। मतलब, इस पूरी प्रक्रिया में, पूरी इंडस्ट्री में एक भी नौकरी दूसरे धर्म वालों के लिए नहीं है। यह पूरा कॉन्सेप्ट ही हर नागरिक को रोजगार के समान अवसर देने की अवधारणा के खिलाफ है। बता दें कि आज McDonald’s और Licious जैसी कंपनियाँ सिर्फ हलाल मांस बेचती है।

हिंदू बनिया औकात से बाहर निकल गया है: पाकिस्तानी न्यूज एंकर ने की हिंदू विरोधी टिप्पणी, देखें वीडियो

इमरान खान के ‘नया पाकिस्तान’ में एक बार फिर से हिंदू समुदाय के खिलाफ सांप्रदायिक घृणा का उदाहरण देखने को मिला। जहाँ पाकिस्तानी चैनल न्यूज वन के एक शो में एंकर को 1 मई को दक्षिणी बलूचिस्तान में हुए बारुदी सुरंग के विस्फोट के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश करते हुए हिंदू विरोधी टिप्पणी करते हुए सुना जा सकता है। बता दें कि इस विस्फोट में 6 पाकिस्तानी सैनिक और एक मेजर की मौत हो गई।

भारत पर निशाना साधने की नाकाम कोशिश करते हुए एंकर कहता है, “हिंदू बनिया अब औकात से बाहर निकलने लग गया है।” यह प्रोग्राम 9 मई 2020 को पाकिस्तान में प्रसारित किया गया था। जो कि अब वायरल हो गया है।

वीडियो की शुरुआत से लेकर 3:51 तक सुना जा सकता है कि एंकर ने भारत को पाकिस्तान में अस्थिरता के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पाकिस्तानी सेना के संयम को उसकी कमजोरी नहीं माना जाना चाहिए। वो आगे कहता है, “हम कब तक खामोश रहेंगे, क्योंकि हिंदू बनिया अब औकात से बाहर निकलने लग गया है।”

इसके अलावा वीडियो में, पाकिस्तानी शिक्षाविद क़मर चीमा, जो भारतीय समाचार चैनलों पर बहस करते हुए भी दिखाई देते हैं, पाकिस्तान में प्रोपेगेंडा मैकेनिज्म की कमी पर विलाप करते हुए कहा, “हमारे पाकिस्तान में अंग्रेजी मीडिया नहीं है। भारत का अंग्रेजी मीडिया प्रोपेगेंडा करता है, हम पाकिस्तान में क्या कर रहे हैं?”

चीमा आगे कहते हैं, “मुश्किल से 2-3 (अंग्रेजी) अखबार हैं, दुनिया को कैसे पता चलेगा? दुनिया उर्दू नहीं जानती। हम अंग्रेजी में वैसे भी कमजोर हैं, हमारे पास अंग्रेजी चैनल नहीं हैं और अब अगर भारत तालिबान के साथ बातचीत करता है तो…”

प्रधानमंत्री इमरान खान के ट्विटर अकाउंट को संभालने के तरीके की प्रशंसा करते हुए क़मर चीमा ने आगे कहा, “मेरा मानना है कि इमरान खान के ट्विटर हैंडल ने जो चमत्कार किया है, वह किसी से पीछे नहीं है। पाकिस्तान के किसी अन्य प्रधानमंत्री ने कभी भी पाकिस्तान में भारत की आक्रामकता पर ट्वीट नहीं किया, जिस तरह से इमरान खान करते हैं। खान साहब के ट्वीट अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियाँ बनते हैं। लेकिन हमें नए रास्ते तलाशने होंगे।”

बता दें कि यह न्यूज शो बलूचिस्तान में हाल ही में हुए हमले पर आधारित था, जिसे बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने अंजाम दिया था। बता दें कि बलूचिस्तान, पाकिस्तान राज्य से आजादी की लड़ाई लड़ रहा है।

सशस्त्र समूह के एक प्रवक्ता ने बताया कि मिलिट्री बलूचिस्तान में तिगरान और तुर्बत के अन्य क्षेत्रों में ऑपरेशन कर रहा है और मुख्य रूप से महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाया गया है। बारूदी सुरंग हमला नागरिकों के साथ हुए उत्पीड़न का बदला लेने की योजना का एक हिस्सा था।

हालाँकि, BLA ने इस हमले की जिम्मेदारी ले ली है, इसके बावजूद पाकिस्तानी चैनल इसमें जबरन भारत की भूमिका बताने के लिए उतालवा दिख रहा है। पाकिस्तानी चैनल ने भारत के न्यूज चैनल रिपब्लिक टीवी पर रिटायर्ड मेजर गौरव आर्या के बयान का हवाला देते हुए यह साबित करने की कोशिश कर रहा था कि यह हमला भारत ने करवाया है।

यह पहली बार नहीं है जब मीडिया या राजनीति में किसी के द्वारा इतना बड़ा हिंदू विरोधी बयान दिया गया हो। इससे पहले पाकिस्तान में ‘कश्मीर एकजुटता दिवस’ पर पाकिस्तानी नेता और अलगाववादियों द्वारा एक पोस्टर के माध्यम से हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते हुए देखा गया था। इसमें लिखा था, “हिंदू बात से नहीं, लात से मानते हैं।”

इससे पहले मार्च में, एक पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा मीडिया आउटलेट ने फर्जी खबर फैलाई थी कि दिल्ली के जाफराबाद में एक मुस्लिम लड़की के साथ हिंदुओं ने बलात्कार किया।