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मोदी जी के बीस लाख करोड़: फेसबुक-ट्विटर के भविष्यवेत्ताओं और तत्वज्ञानियों के नाम

मोदी जी के बीस लाख करोड़ वाले भाषण का विश्लेषण तो मैं भी लिखूँगा पर सोशल मीडिया पर भविष्यवेत्ताओं और तत्वज्ञानियों की भाषा देख कर एक प्रतिक्रिया लिखने से रह नहीं पाया। करीब 40 मिनट के भाषण में दो मुख्य बातें जो हर जगह दिख रही हैं, वो हैं: आत्मनिर्भर भारत और 20 लाख करोड़ (लगभग 285 अरब डॉलर)।

तत्वज्ञानी वो होते हैं जिन्हें आत्मा, परमात्मा, चराचर, भूत-भविष्य, भौतिक-अदृश्य आदि हर तरह का ज्ञान होता है। वो बस जान जाते हैं कि क्या है, क्या हो रहा है, क्या हो चुका है और क्या होने वाला है। गणितशास्त्रियों की एक बड़ी प्रचलित अवधारणा होती है कि अगर उनके पास हर तरह की सूचना दे दी जाए तो वो भविष्य का सटीक पूर्वानुमान लगा सकते हैं।

फेसबुक-ट्विटर के पोस्टवीरों को उस डेटा की भी जरूरत नहीं, वो बस जानते हैं। वो बस जान जाते हैं कि क्या है, क्या हो सकता है, क्या होगा। भविष्यवेत्ता लोग वो हैं जिन्हें भविष्य का पूरा ज्ञान है। ‘वेत्ता’ प्रत्यय का निहित अर्थ ही होता है ‘संपूर्ण ज्ञान रखने वाला’।

पहला सवाल फेंका गया कि चालीस मिनट क्यों बर्बाद किया? तुम्हें किसने बोला था कि चालीस मिनट सुनो! फेसबुक पढ़ लेते अपने जैसे बकचोन्हर सब का, जो दो सेकेंड में बता देते कि क्या कहा गया है। ऐसे लोगों की समस्या यह है कि जो चीज इनकी समझ से परे है, उसे भी ये अपने सीमित दायरे में ही समेट कर देखना चाहते हैं।

अगर मोदी पाँच मिनट बोलता, तो कहते इसके लिए इतनी प्रतीक्षा कराई, ट्वीट भी तो कर सकते थे। दस मिनट बोलता तो कहते कि ‘इस बात पर तो कुछ बोला ही नहीं, उसे कौन सी ट्रेन पकड़नी थी।’ बीस मिनट में कहते कि उबाऊ था, चालीस मिनट में तो पक ही गए।

देश का प्रधानमंत्री एक आपातस्थिति में देश की जनता को संबोधित कर रहा है। लक्ष्य दिल्ली-मुंबई में बैठे स्टॉक एक्सचेंज के खिलाड़ियों और आर्थिक बीट पर काम करने वाले पत्रकारों तक अपनी बात पहुँचाने का नहीं है, बल्कि उन्हें भी संबल देना है जो खाली पाँव, दहकते कंक्रीट पर, फफोलों के साथ निकल चुके हैं।

उन्हें आप रोक नहीं सकते क्योंकि वो रुकने वाला नहीं है। साथ ही, ऐसे संबोधनों का उद्देश्य और इसकी भाषा शैली समाज के सबसे अशक्त, निरक्षर या जो आप जैसों के लिए मैटर नहीं करते, अस्तित्व में भी नहीं हैं, वैसे लोगों के लिए होती है। इसीलिए एक ही वाक्यांश बार-बार दोहराए जाते हैं।

जब आपको अपने घर के बच्चे के लिए स्कूल की स्पीच लिखनी होती है तो आप उसमें कॉर्पोरेट टैक्स बढ़ाना चाहिए की बात नहीं लिखते, उसमें लिखते हैं कि देश में कोई गरीब न रहे, भूखा न सोए। जनसंख्या में सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को महसूस होना चाहिए कि उसका प्रधानमंत्री बोल रहा है।

दूसरी बात यह थी कि ये कौन सा पैसा है, कहाँ से आएगा? जब मोदी ने कहा कि आने वाले दिनों में इस पर वृहद चर्चा होगी, तो फिर आप ये सवाल क्यों पूछ रहे हैं कि किसके घर का सोना बिकवा देगा मोदी! ये विचार कहाँ से आ रहे हैं आपके मन में कि किस बैंक का ताला खुलेगा? किस आधार पर?

ये पैसा किसे दिया जाएगा? बजट के भी भाषण के बाद, अर्थशास्त्री लगे पड़े होते हैं उसे समझने में। ये एक मिनि-बजट ही है। मोदी ने सिर्फ दो शब्द नहीं बोले थे, देश के पाँच स्तंभ भी गिनाए थे। यह भी कहा था कि ‘क्वांटम जम्प’ की आवश्यकता है। इसका मतलब होता है कि बहुत बड़े बदलाव की उम्मीद कीजिए।

इसी कारण अपनी पूरी जीडीपी का दस प्रतिशत एक पैकेज के रूप में दिया जा रहा है ताकि अर्थव्यवस्था को बचाया जा सके। कल तक यही लोग रो रहे थे कि ये डूब गया, वहाँ वो हो गया, इसके पास पैसे नहीं हैं, उधर मोदी ध्यान नहीं दे रहा

कुछ सुधिजनों ने ऑनलाइन लूडो में ‘मेरे छः क्यों नहीं आते यार’ की जगह आज पूरा मस्तिष्क बीस लाख करोड़ को समझने मे लगा दिया। इनको लगता है कि घर में चीनी, चायपत्ती, टमाटर, दाल और गरम मसाला नहीं है, पापा से दो सौ रुपए ले लो, बाहर से खरीद लेंगे।

चीनी-चायपत्ती लाने के लिए भी बैठ कर जोड़ना पड़ता है कि बाहर कितना पैसा ले कर जाएँ। ये भारत है। जहाँ 28 राज्य और 8 केन्द्रशासित प्रदेश हैं। सबकी अपनी समस्याएँ हैं। किसी के पास मजदूर है, किसी के पास फैक्ट्री। किसी के पास रेलगाड़ी के न चलने से समस्या है, कोई ट्रकों के बंद होने से सामान नहीं भेज पा रहा।

वो जो पूछ रहे हैं कि राज्यों को पैसा क्यों नहीं दिया जा रहा था, वो वही लोग हैं जो दो सप्ताह पहले भी राज्यों को पैसा दिया जाता, तो उसके एक दिन बाद कहते कि ‘बहुत देर कर दी, पहले देना चाहिए था’। इनको ये भी नहीं पता होगा कि राज्य पैसा ले कर करेगा क्या या किस राज्य का कौन सा काम पैसे के न होने के कारण रुक गया है!

इतने बड़े तंत्र के लिए पैसे देने से पहले राज्यों की स्थिति, जनसंख्या, समस्याएँ, आर्थिक क्षमता आदि का लेखा-जोखा लेने के बाद, किस विभाग को कितनी आवश्यकता है, तय करने के बाद पैकेज अनाउंस होता है। ये नहीं कि मंगलवार को मुहूर्त निकाला गया, इसलिए मोदी जो है बारह दिन से लॉन की घास छील रहा था!

तीसरा प्रश्न है कि ‘आत्मनिर्भर’ होने का क्या मतलब है? ऐसा पूछने वाले लोग उपहास वाले अंदाज में लिख रहे हैं। ये यह भी दावा कर रहे हैं कि उनका चालीस मिनट बर्बाद हुआ, और उन्हें ये भी नहीं पता कि आत्मनिर्भर होने का क्या मतलब है!

पूरी बात तो कह दी मोदी ने कि उपभोग (कन्जम्पशन) से ले कर उद्योगतंत्र, ढाँचागत विकास और सप्लाय चेन आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश है। स्वदेशी चीजों का जहाँ तक हो सके प्रयोग की बात कही। खादी उद्योग का उदाहरण दिया। ऐसे ही अगर हर उद्योग पहला कदम लेने लगे, तो स्थिति सुधरनी ही है।

‘कैसे कर देगा आत्मनिर्भर?’ जैसे सवाल विचित्र हैं। ढाँचा तैयार होने में समय लगता है। ऐसी असामान्य स्थिति में आप क्या चाहते हैं सुनना? वो रवीश का कोई भी पोस्ट ले ले जिसमें हर दिन एक ही बात होती है कि टेस्ट बहुत कम हो रहे हैं, अहमदाबाद में सबसे ज्यादा मर रहे हैं, रोजगार जा रहे हैं, मिडिल क्लास मर रहा है’।

ये सुनते ही आप नाचने लगेंगे कि देखो कितनी सही बात बोल दी है? नहीं, आप फिर भी रोएँगे क्योंकि आपको इस बात की चिंता है कि आप पार्क में क्यों नहीं जा पा रहे, आप सिनेमा क्यों नहीं देख सकते, आपको नाक क्यों ढकना पड़ रहा है, आपको सब्जी उबालना क्यों पड़ा रहा है…

आप चाहते हैं कि सब कुछ पहले जैसा हो जाए, और उस हिसाब से इस स्पीच को आँक रहे हैं। जबकि वैसा है नहीं। स्थिति सही नहीं है, इसलिए इस पर सोचना पड़ा होगा, योजना बनाई गई होगी, राज्यों से इनपुट लिए गए होंगे, और आने वाले दिनों में क्रमवार तरीके से, विभागों के हिसाब से राशि कैसे दी जाएगी, यह बताया जाएगा।

आपके विश्लेषण तब सही होंगे, जब आप इन सेक्टरों को दी गई मदद का पूर्ण आकलन करेंगे, संदर्भ का ध्यान रखेंगे कि अभी चल क्या रहा है, फिर अपनी बात रखेंगे कि इधर ज्यादा जरूरत थी, वहाँ कम। लेकिन नहीं, आपको एक्सपर्ट का बाप बनना है कि जो अभी है नहीं, उसकी व्याख्या कर देनी है कि कवि कहना चाहता है…

एक आपात स्थिति में, जब सबसे ज्यादा डरा हुआ वो है जिसके पास बहुत कम है, प्रधानमंत्री उसके लिए ज्यादा बोलता है। उसे ज्यादा बोलना पड़ता है, सरल शब्दों में, सिर्फ पैसों की बात कहनी होती है। उसे मजदूर, फ़ैक्ट्री, सामान, स्वदेशी, आत्मनिर्भर जैसे शब्दों को बार-बार कहना पड़ता है।

ऐसे समय में देश के तत्वज्ञानी और भविष्यवेत्ता को संबोधन नहीं दिया जाता। उनके पास नेटफ्लिक्स और प्राइम वीडियो के दौर में उबे होने के विकल्प हैं। वो मजबूरी में ‘चलो इसे ही देख लेते हैं’ टाइप टीवी ऑन कर देता है, फिर कहता है ‘यार इसमें क्या हुआ? इससे तो अच्छा वो सीरिज देख लेते!’

आप सीरीज़ ही देखिए। आपके जीवन पर इस बीस लाख करोड़ का वैसे भी असर नहीं होने वाला। आपको हर चीज में थ्रिल चाहिए क्योंकि थ्रिल के नाम पर घर में बर्तन धोना और पोछा मारना ही रह गया है आपके हाथ। इसलिए, आपके पास उन बातों को ले कर भी सवाल हैं, जिनके जवाब बोलने वाले ने आने वाले दिनों में आएँगे, ऐसा कहा है।

₹20 लाख करोड़ के पैकेज से कॉन्ग्रेस सहित लिबरल गिरोह बदहवास, अपने ही बयान से पलटी लिबरल जमात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ही आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादन पर जोर देते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए ₹20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है।

लेकिन इस आर्थिक पैकेज की घोषणा के तुरन्त बाद कॉन्ग्रेस की ओर से जो प्रतिक्रियाएँ आई हैं, उन्हें देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि कम से कम कॉन्ग्रेस के लिए यह काफी नहीं हैं।

मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस ने अपने ट्विटर एकाउंट से लिखा है – “केवल 20 लाख करोड़..? मोदी जी, ये महामारी है, सब कुछ चौपट हो चुका है। जीडीपी का केवल 10% नहीं, कम से कम जीडीपी का 50% तो दीजिए।”

लेकिन ऐसा कर के कॉन्ग्रेस एक बार फिर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार दी है और उसने यह साबित किया है कि चाहे कुछ भी हो जाए, उसका उद्देश्य मात्र केंद्र सरकार का विरोध करना है।

यदि ऐसा न होता तो कॉन्ग्रेस अपने ही उस बयान से पलटते हुए आज ₹20 लाख करोड़ के पैकेज को कम न बता रही होती जिसमें उन्होंने कुछ ही दिन पहले कहा था कि सरकार कोरोन वायरस की आपदा से निपटने के लिए देश की कुल GDP का कम से कम 5-6% की घोषणा करनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि PM मोदी ने स्पष्ट किया है कि ₹20 लाख करोड़ का यह पैकेज भारत की GDP का तकरीबन 10% है।

वहीं, देश के लिबरल-गिरोह को भी इस घोषणा से खासा ‘परेशान’ होते देखा जा रहा है, जिन्हें कि सोशल मीडिया यूजर्स जवाब भी देते देखे जा सकते हैं –

आत्मनिर्भर भारत के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा करते हुए PM मोदी ने अपने भाषण में कहा-

“आत्मनिर्भर भारत की ये भव्य इमारत, पाँच पिलर्स पर खड़ी होगी: पहला पिलर इकॉनॉमी होगा, एक ऐसी इकॉनॉमी जो इक्रिमेंटल चेंज नहीं बल्कि क्वांटम जंप लाए। दूसरा पिलर इफ्रास्ट्रकचर, एक ऐसा इफ्रास्ट्रकचर जो आधुनिक भारत की पहचान बने। तीसरा पिलर हमारा सिस्टम, एक ऐसा सिस्टम जो बीती शताब्दी की रीति-नीति नहीं, बल्कि 21वीं सदी के सपनों को साकार करने वाली तकनीक व्यवस्थाओं पर आधारित हो। चौथा पिलर हमारी डेमोग्राफी, दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी में हमारी डेमोग्राफी हमारी ताकत है, आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी ऊर्जा का स्रोत है। पाँचवा पिलर डिमांड, हमारी अर्थव्यवस्था में डिमांड और सप्लाई चेन का जो चक्र है, जो ताकत है, उसे पूरी क्षमता से इस्तेमाल किए जाने की जरूरत है।

सांप्रदायिक हिंसा पर झूठी खबर फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई: तेलिनीपाड़ा की आग के बाद WB गृह विभाग की चेतावनी

पश्चिम बंगाल गृह विभाग ने सोमवार (मई 11, 2020) को सोशल मीडिया पर फर्जी खबर पोस्ट करने और प्रसारित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। बता दें कि यह चेतावनी रविवार (मई 10, 2020) को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तेलिनीपाड़ा में भड़की सांप्रदायिक झड़प को लेकर दी गई।

राज्य के गृह विभाग ने ट्विटर पर लिखा, ”कल शाम को जिन्होंने तेलिनीपाड़ा में शांति भंग करने की कोशिश की, उनके खिलाफ तीव्र और कठोर कार्रवाई की गई है। स्थिति को तुरंत नियंत्रण में लाया गया। तेलिनीपाड़ा अब शांतिपूर्ण है।”

गृह विभाग ने अपने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “पुलिस किसी भी उकसावे की अनुमति नहीं देगी और जो कोई भी गड़बड़ी करने की कोशिश करेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर फर्जी खबर पोस्ट करने और प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

इससे पहले बताया गया था कि रविवार रात पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तेलिनीपाड़ा में दो समूहों के बीच सांप्रदायिक झड़प के बाद 37 लोगों को हिरासत में लिया गया है। शांति सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ी पुलिस टीम को तनावग्रस्त तेलिनीपाड़ा इलाके में तैनात किया गया था। पिछले 24 घंटों में कोई और घटना नहीं हुई है।

बीजेपी पश्चिम बंगाल इकाई ने इस पर ट्वीट करते हुए लिखा था कि हुगली के तेलिनीपाड़ा में एक ‘खास’ समुदाय के लोग हिंसक हो गए थे। पश्चिम बंगाल में, ममता बनर्जी के TMC द्वारा संरक्षित ‘वोट बैंक’ कानून के किसी डर के बिना कोरोना वायरस के दिशा-निर्देशों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं।

भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने आरोप लगाया है कि हुगली में मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं का घर जलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि समुदाय विशेष के लोगों द्वारा हुबली जिले के तेलिनीपाड़ा के ताँतीपारा, महात्मा गाँधी स्कूल के पास शगुनबागान और फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ स्कूल के पास लगातार आगजनी और लूटपाट की जा रही है। वहाँ का प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

जानकारी के मुताबिक इस दौरान बम भी फेंके गए। कथित तौर पर वार्डिबज़ार में कुछ कोरोना वायरस वायरस मामले हैं और कई लोग क्वारंटाइन में हैं। यहाँ से 10 लोग जब तेलिनीपाड़ा गए और वहाँ उन्होंने सार्वजनिक शौचालय का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जिस पर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई और झड़प शुरू हो गई।

चंद्रनगर के पुलिस आयुक्त हुमायूँ कबीर ने बताया कि कुछ लोगों को ‘कोरोना’ बोलने को लेकर बहस शुरू हुई। और फिर जब उन्हें शौचालय में जाने से रोका गया तो यह बहस झड़प में तब्दील हो गई।

हुगली की सांसद लॉकेट चटर्जी ने कहा कि हिंदुओं के घरों को जलाया जा रहा है और कमिश्नर उनका फोन भी नहीं उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये हमला पूर्व नियोजित था।

वहीं बंगाल भाजपा प्रमुख और सांसद ने कहा, “बम और बंदूकों का इस्तेमाल किया गया और झड़प सांप्रदायिक हो गया। बंगाल में कानून और व्यवस्था के टूटने का एक और उदाहरण। कोरोना के खिलाफ लड़ाई एक सांप्रदायिक लड़ाई में बदल गई।”

फेक न्यूज के सहारे अकेले लगा हुआ है रवीश: अजीत भारती का वीडियो | Ravish Kumar spreading ONLY negativity & fake news

रवीश कुमार ने कई मुद्दों पर बात की, लेकिन उनका मुख्य फोकस यही रहा है कि भारत बर्बाद हो चुका है। टेस्टिंग नहीं हो रही है। हम कोविड से नहीं लड़ पा रहे हैं। इस आदमी ने लिखना तो कम किया है, लेकिन जितना लिख रहा है प्रपंच और फ़र्ज़ी बातें ही कर रहा है।

पूरा वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

‘अक्षय पात्र फाउंडेशन’ ने लॉकडाउन के दौरान 4 करोड़ लोगों को परोसा भोजन: संकट के दौर में प्रवासियों के लिए उम्मीद की किरण

17 लाख से भी अधिक बच्चों का पेट भरने वाली संस्था ‘अक्षय पात्र फाउंडेशन’ ने संकट की इस घड़ी में भी लोगों की मदद के लिए आगे आया है। फाउंडेशन ने लॉकडाउन शुरू होने के बाद से अब तक 40 मिलियन यानि कि 4 करोड़ भोजन, प्रवासी श्रमिकों को परोसा है।

इसमें 1,72,33,053 पके हुए भोजन परोसे गए, जबकि 5,57,018 आवश्यक खाद्य सामग्री की किट दी गई। एक किट में तकरीबन 42 से 48 लोगों के लिए भोजन की सामग्री होती है।

अक्षय पात्र फाउंडेशन ने इस दौरान पंजाब, दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, असम, त्रिपुरा, ओडिशा और तेलंगाना के साथ ही आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र में पके हुए भोजन और राशन सामग्री उपलब्ध करवाई।

बता दें अक्षय पात्र बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने वाली दुनिया की सबसे बड़ी गैर लाभकारी योजना है। जो देश के 7 राज्यों में 6500 स्कूलों में लगभग 17 लाख स्कूली छात्रों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराती है। अक्षय पात्र योजना को बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ग्लोबल चैंपियनशिप अवार्ड मिला है। ब्रिस्टल में इस सप्ताह आयोजित हुए बीबीसी फूड एंड फार्मिंग अवार्ड समारोह में ‘अक्षय पात्र’ को यह पुरस्कार दिया गया।

बता दें कि यह पुरस्कार उस संस्था या व्यक्ति को दिया जाता है जो दुनिया में खाद्यान्न उगाने, तैयार करने और बेहतर ढंग से इस्तेमाल में लाने के लिए अच्छा काम करते हैं।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले अक्षय पात्र फाउंडेशन पर ‘द हिंदू’ के एक लेख में कीचड़ उछालने की कोशिश की थी, उस दौरान लेखक, वैज्ञानिक और स्वराज्य पत्रिका के स्तम्भकार आनंद रंगनाथन की अपील पर 510 लोगों ने 11 घंटे में अक्षय पात्र फाउंडेशन को ₹21 लाख का दान दिया था। बताया जाता है कि उस समय कुछ ने तो अपनी पॉकेट मनी तक दान कर दी थी।

मजहब के कोरोना मरीजों को क्वारंटाइन करने से पहले सरकार को मौलवियों से सलाह लेनी चाहिए: महाराष्ट्र में मदरसा सचिव की माँग

पूरे देश में कोरोना का कहर जारी है और इससे सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है- महाराष्ट्र। महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमितों मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस बीच नागपुर के मदरसे जामिया अरेबिया इस्लामिया के सचिव मोहम्मद अब्दुल अजीज खान ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और स्पीकर नाना पटोले को एक पत्र लिखा है।

इस पत्र में समुदाय विशेष के किसी भी व्यक्ति को कोरोना वायरस से संक्रमित होने की आशंका पर क्वारंटाइन करने से पहले मौलवियों से सलाह-मशविरा करने के लिए कहा गया है।

ऐसे में जब नागपुर में बड़ी संख्या में कोरोना संबंधित केस दर्ज किए गए हैं, अजीज खान ने अनुरोध किया है कि समुदाय के लोगों को आइसोलेट करने से पहले मौलवियों से परामर्श लेना चाहिए, विशेषकर सतरंजीपुरा और मोमिनपुरा के अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में।

पत्र में आगे कहा गया है कि पूरे क्षेत्र को बंद करने के बजाय स्व-संगरोध की वकालत की जानी चाहिए। जामिया अरेबिया इस्लामिया के सचिव ने कहा कि सरकार को इस संबंध में कोई कार्रवाई करने से पहले मौलवियों के विचारों पर ध्यान देना चाहिए।

खान ने लिखा कि मजहब के कोरोना वायरस रोगियों को क्वारंटाइन करने से पहले, कुछ मजहबी NGO और धार्मिक नेताओं से परामर्श किया जाना चाहिए। साथ ही उनके विचारों पर ध्यान दिया जाना चाहिए और उनके विश्वास के साथ प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

उन्होंने महाराष्ट्र के सीएम को लिखे पत्र में यह भी कहा कि राज्य सरकार द्वारा रमजान के महीने में उपवास रखने वालों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं किए गए हैं और उन्हें इस मामले पर कदम उठाने के लिए कहा है।

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में COVID-19 से संबंधित मौतों में से 44 प्रतिशत मौतें समुदाय विशेष के बीच दर्ज की गई हैं, जबकि राज्य की कुल जनसंख्या में से केवल 12 फीसदी समुदाय विशेष से हैं। इसके बावजूद मौलवी का इस तरह से अनुरोध करना काफी धृष्टता भरा है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी मुंबई के भिवंडी इलाके में मजहबी धर्मगुरु मुफ्ती हुजैफा कासमी ने महाराष्ट्र पुलिस से अपील की थी कि लॉकडाउन के दौरान अगर कोई इमाम, हाफिज रोड पर जाते हुए मिलता है तो बेवजह उस पर हाथ ना उठाएँ। पहले उसकी पहचान करें, क्योंकि रमजान महीने में अगर किसी मौलवी, हाफिज या इमाम पर पुलिस वाले हाथ उठाते हैं तो माहौल बिगड़ सकता है।

इसके साथ ही महाराष्ट्र पुलिस से यह भी अपील की गई थी कि इमाम, हाफिज जैसे लोगों के लिए जो मस्जिदों में जाकर रमजान के महीने में नमाज पढ़ने का काम करेंगे उनके लिए एक पहचान पत्र पुलिस की तरफ से बनाया जाए, ताकि वह सड़कों पर जा सकें और अगर पुलिस उन्हें रोकती है तो वह अपनी पहचान बता सकें।

ट्विटर पर आया गिलगित-बाल्टिस्तान का ‘ऑफिसियल’ एकाउंट, लोगों में खास चर्चा का विषय

भारतीय मौसम विभाग (IMD) और दूरदर्शन न्यूज़ के गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद का मौसम का हाल बताने के बाद इस क्षेत्र से सम्बंधित घटनाएँ तेजी से जन्म लेती जा रही हैं।

ट्विटर पर गिलगित-बाल्टिस्तान का एक एकाउंट @GB_Ladakh_India चर्चा का विषय है, जिसे गिलगित-बाल्टिस्तान का आधिकारिक ट्विटर एकाउंट बताया जा रहा है। हालाँकि इसकी अभी तक किसी भी प्रकार की कोई आधिकारिक घोषणा जारी नहीं हुई है।

गिलगित-बाल्टिस्तान का ट्विटर एकाउंट, जो चर्चा का विषय बना है

यह एकाउंट मई, 2020 में ही तैयार किया गया है, जिसे काफी तेजी से लोग फॉलो कर रहे हैं। फिलहाल इसे 13 हजार से अधिक फोलोअर्स फॉलो कर चुके हैं। इस एकाउंट के विवरण में ‘गिलगित-बाल्टिस्तान, लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश), भारत का आधिकारिक ट्विटर एकाउंट’ लिखा गया है।

इसकी लोकेशन गिलिगिट-बाल्टिस्तान, लद्दाख (UT) दर्शाई गई है। और इसके साथ भारतीय केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख की आधिकारिक वेबसाइट का लिंक ladakh(डॉट)nic(डॉट)in भी दी गई है। इस एकाउंट से अभी तक मात्र तीन ट्वीट किए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता के बाद से ही गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान ने कबायली उग्रवादियों की मदद से अवैध कब्जा कर लिया था। यह एक बार फिर से हाल ही में तब चर्चा में आया जब पाकिस्तान सरकार ने वहाँ चुनाव करवाने के निर्देश दिए और भारत सरकार ने पाकिस्तान से इस इलाके से पीछे हटने की नसीहत दी।

इस एकाउंट को लेकर सोशल मीडिया में भी खूब चर्चा हो रही हैं –

हाल ही में भारत सरकार ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) और गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर एक बड़ा फैसला लिया और देश में मौसम का पूर्वानुमान बताने वाली संस्था भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने पूर्वानुमान सूची में गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद को शामिल किया है।

इस पर IMD के डायरेक्टर जनरल मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद को भी मौसम बुलेटिन में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि ये भी भारत के हिस्से हैं इसलिए हमने इन्हें मौसम बुलेटिन में शामिल किया है।

इसके बाद से दूरदर्शन न्यूज़ चैनल ने भी अपने मौसम समाचारों में इस क्षेत्र के समाचारों को भी भारतीय क्षेत्र में शामिल कर दिया है।

आत्मनिर्भर भारत के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा, लागू होगा लॉकडाउन-4.0: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक बार फिर राष्‍ट्र को संबोधित कर रहे हैं। PM मोदी के भाषण का मुख्य मुद्दा भारत की आत्मनिर्भरता है। पीएम मोदी ने कहा कि लॉकडाउन-4 नए नियमों के अनुसार होगा और इसकी जानकारी 18 मई से पहले दे दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्यों के सुझाव पर लॉकडाउन-4 होगा।

PM मोदी ने कहा कि आज कोरोना वायरस की महामारी के समय विश्व हमारी ओर आशा की नजरों से देख रहा है। भारत ने वायरस से लड़ने में मददगार दवाइयाँ उपलब्ध करवाई।

आत्मनिर्भर भारत के लिए पैकेज की घोषणा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इन सबके जरिए देश के विभिन्न वर्गों को, आर्थिक व्यवस्था की कड़ियों को, 20 लाख करोड़ रुपए का संबल मिलेगा, सपोर्ट मिलेगा। 20 लाख करोड़ रुपए का ये पैकेज, 2020 में देश की विकास यात्रा को, ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ को एक नई गति देगा।

विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा

आत्म निर्भर भारत अभियान की अहम कड़ी के तैर पर काम करेगा। उन्होंने 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की, जो कि भारत की जीडीपी का करीब दस प्रतिशत है।

इसका उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर बनाना है और आत्मनिर्भर भारत के अभियान को गति देना है। लैंड, लेबर, लिक्विडिटी आदि क्षेत्रों के लिए मददगार होगा।

गुजरात के भूकम्प की याद दिलाते हुए पीएम मोदी ने कहा- “मैंने अपनी आँखों के सामने वो भूकंप देखे हैं, हर तरफ मलबा ही मलबा था। लेकिन इसके बाद भी हम उठ खड़े हुए। मानो मानव मौत की चादर ओढ़कर सो गया है। हम ठान लें तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं और कोई काम असंभव नहीं है।”

भारत की प्रगति में तो हमेशा विश्व की प्रगति समाहित रही है। भारत के लक्ष्यों का प्रभाव, भारत के कार्यों का प्रभाव, विश्व कल्याण पर पड़ता है। जब भारत खुले में शौच से मुक्त होता है तो दुनिया की तस्वीर बदल जाती है। टीबी हो,कुपोषण हो, पोलियो हो, भारत के अभियानों का असर दुनिया पर पड़ता ही पड़ता है।

सुधीर चौधरी को जिहाद पर रिपोर्ट करने पर आई पाक से धमकी, कहा- केरल में FIR होने में भी हमारा हाथ

जी न्यूज के एडिटर इन चीफ सुधीर चौधरी को अपने प्रोग्राम में जिहाद का खुलासा करने के कारण पाकिस्तान से भी धमकियाँ आने लगी हैं। अभी तक ये सिलसिला सिर्फ़ भारत के कट्टरपंथियों और सेकुलरों द्वारा चलाया जा रहा था। मगर, अब व्हॉट्सअप कॉल के जरिए पाकिस्तान भी सुधीर चौधरी को धमकी देने लगा है

इस बात की सूचना जी न्यूज ने खुद अपनी रिपोर्ट के जरिए दी है। रिपोर्ट में बताया गया कि सुधीर चौधरी को अपने शो में जिहाद संबंधी न्यूज दिखाने से रोकने के लिए पाकिस्तान से धमकी मिली। जिसके बाद उन्होंने, इस मामले के संबंध में शिकायत दर्ज करवाई और दिल्ली समेत गौतमबुद्ध नगर में नंबर्स की डिटेल भी भेजी।

इन धमकियों में जी न्यूज के एंकर को कहा गया कि अगर वे जिहाद की खबरें दिखाना बंद नहीं करते तो फिर उन्हें परिणामों को भुगतना पड़ सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, सुधीर चौधरी को ये धमकी व्हॉट्सअप कॉल के जरिए मिली। इस कॉल के बाद कुछ भारत विरोधी तस्वीरें और मैसेज भी उन्हें भेजे गए। बाद में अन्य पाकिस्तानी नंबरों से धमकियाँ आनी भी शुरू हुई। साथ ही तरह-तरह के घृणा भरे मैसेज भी उनके लिए ट्विटर पर पोस्ट किए जाने लगे।

कुछ कॉलर्स ने सुधीर को अभिनंदन जैसे परिणाम भुगतने की धमकी दी। जबकि कुछ ने बलूचिस्तान के मुद्दे पर पत्रकार को धमकाया और कहा कि उन्हें (भारत को) इसका सपना देखना छोड़ देना चाहिए, क्योंकि वे (पाकिस्तान) कश्मीर को भी भारत से छीन लेंगे।

हालाँकि, बातचीत के दौरान जब पत्रकार ने उनसे उनकी पहचान पूछी कि क्या वे पाकिस्तान की खूफिया एजेंसी स्पाई से हैं? तो वे लोग इस सवाल का जवाब देने से कतराने लगे और बस यही बोला कि उनके पास सुधीर चौधरी से संबंधी सब जानकारी है।

धमकियों में कहा गया कि अगर सुधीर चौधरी जिहाद संबंधी खबरे दिखाना नहीं बंद करेंगे तो जैसे केरल में उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज हुई है। वैसे ही अन्य जगहों में भी उनके ख़िलाफ़ दर्ज होगी। धमकी देने वाले ने दावा किया कि सुधीर चौधरी के खिलाफ केरल में जो मामला दर्ज हुआ है, उसे उसकी टीम ने करवाया है।

इसके अलावा उनमें से किसी ने ये भी कहा कि जी न्यूज की रिपोर्टिंग कट्टरपंथियों को नहीं रोक पाएगी, क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका भी अब तालिबान से बात कर रहा है और अफगानिस्तान में युद्ध को समाप्त करने में पाकिस्तान की मदद माँग रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले 7 मई को ज़ी न्यूज़ के एडिटर इन चीफ सुधीर चौधरी के खिलाफ केरल पुलिस ने गैरजमानती धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया था। इस कार्रवाई के पीछे का कारण 11 मार्च को ब्रॉडकॉस्ट हुए DNA प्रोग्राम को बताया गया था। उन पर आरोप लगा था कि अपने शो में उन्होंने इस्लाम को अपमानित किया है। इसलिए उनपर ये एफआईआर दर्ज हुई।

बता दें, 11 मार्च को सुधीर चौधरी के डीएनए प्रोग्राम में एक जिहाद चार्ट दिखाया गया था। जिसमें उन्होंने जिहाद के अलग-अलग रूप बताए थे। उन्होंने इस चार्ट के जरिए समझाने की कोशिश की थी हार्ड जिहाद और सॉफ्ट जिहाद क्या होता है।

उन्होंने बताया था कि हार्ड जिहाद में जनसंख्या जिहाद, लव जिहाद, जमीन जिहाद, शिक्षा जिहाद, विक्टिम जिहाद और सीधा जिहाद आता है। जबकि सॉफ्ट जिहाद में आर्थिक जिहाद, ऐतिहासिक जिहाद, मीडिया जिहाद, फिल्में व गानों का जिहाद और सेकुलर जिहाद आता है।

अतानासियो लोबो को चाहिए था ‘आजाद गोवा’, पुलिस ने कर दिया स्वतंत्रता संघर्ष का अंत

कनाडा में रहकर गोवा को भारत से आजाद कराने की माँग उठाने वाले ‘स्वतंत्रता सेनानी’ के खिलाफ गोवा की क्राइम ब्रांच ने देशद्रोह के आरोप में मामला दर्ज किया है। आरोपित युवक की पहचान अतानासियो लोबो के रूप में हुई है।

अतानासियों पर आरोप है कि वह देश की अखंडता को तोड़ने के लिए ऑनलाइन प्लैटफॉर्म के जरिए ऐसी अर्जी पर हस्ताक्षर ले रहा था जिसमें देश से गोवा को अलग करने की माँग थी और इस अर्जी को उसने संयुक्त राष्ट्र के लिए लिखा था।

जानकारी के मुताबिक, इस याचिका पर 4,200 लोग बतौर हस्ताक्षरकर्ता जुड़ चुके थे। ऐसे में गोवा पुलिस के संज्ञान में ये मामला तब आया जब ‘रेवोल्यूशनरी इंडियंस’ नामक एनजीओ ने लोबो के खिलाफ गोवा के मापुसा थाने में शिकायत दर्ज कराई।

इस शिकायत में उक्त युवक पर आरोप लगाया गया कि उसने इस याचिका के जरिए भारत सरकार द्वारा स्थापित कानून के प्रति विद्रोह की साजिश को भड़काने का प्रयास किया।

बाद में, मामले की जाँच में पुलिस ने भी पाया कि स्वघोषित स्वतंत्रता सेनानी ने अपनी याचिका में ‘भारतीय आक्रमण’ से गोवा को मुक्त कराने की और 1961 के बाद से अवैध कब्जे से गोवा को आजाद करने की माँग की थी। जिसके आधार पर पुलिस ने उसके खिलाफ देशद्रोह का केस दर्ज किया।

गौरतलब है कि इस याचिका में यूनाइटिड नेशन जनरल असेंबली से इस मामले यानी-आजाद गोवा- की माँग पर नए नजरिए से गौर करने की अपील की गई थी और साथ ही इसमें यूएन के वर्तमान सदस्यों को संबोधित करते हुए ये भी लिखा गया था कि विश्व शांति के रखवाले होने के नाते वे इस विषय पर नजर डालें।

इसमें लिखा था, “गोवा को भले ही संप्रभुता हासिल नहीं हुई हो, लेकिन इससे उसके अधिकार समाप्त नहीं होते। ऐसा अधिकार जो दूसरों द्वारा कल्पित नहीं किया जा सकता। वो अधिकार जो लोगों के लिए निहित है। इस मामले में, अधिकार गोवावासियों का है और संयुक्त राष्ट्र चार्टर द्वारा स्थापित ढाँचे के अंतर्गत सचेत और स्वतंत्र रूप से प्रयोग किया जाना है।”

बता दें, लोबो के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जा चुकी है और आखिरी बार उसने अपनी 2 साल पुरानी याचिका को 11 मई 2020 को अपडेट किया था। इस अपडेट में ये बताने की बजाय कि उसपर देशद्रोह का केस लग चुका है, उसने गोवा वासियों पर आरोप लगाया कि वे आजादी को लेकर सचेत नहीं है। इसलिए वे इस याचिका को बंद करने पर विचार कर रहा है।

इस अपडेट के कुछ घंटों बाद उसने इस याचिका को क्लोज कर दिया और इसके पीछे वजह दी कि दो साल से इस याचिका पर 5000 लोग हस्ताक्षर नहीं कर पाए। इसलिए उसने इसे बंद कर दिया है।

गौरतलब है कि गोवा हेराल्ड की खबर के अनुसार, लोबो के खिलाफ़ इस मामले के संबंध में आईपीसी की धारा 124 ए के तहत मामला दर्ज हुआ है। अब क्राइम ब्रांच उन लोगों को भी समन भेजने की तैयारी कर रही है जिन्होंने इस ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर किया।

पुलिस का कहना है कि याचिका पर साइन करने वाले तमाम लोगों में से कुछ ही गोवा के रहने वाले हैं। वरना बाकी सब हस्ताक्षरकर्ता बाहर रहते हैं। इतना ही नहीं, लोबो खुद भी इस समय गोवा में नहीं कनाडा में रहता है, जिसने मामला तूल पकड़ने के बाद अपना ट्विटर अकॉउंट डिलीट कर दिया है और अब पुलिस की नजरों से छिपा है।