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अजित डोभाल के बिछाए चक्रव्यूह में फँसा आतंकी सरगना रियाज नाइकू, ऑपरेशन जैकबूट 2 के तहत मारा गया

बुधवार (6, मई 2020) को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने 8 साल से फरार हिजबुल मुजाहिद्दीन के टॉप कमांडर रियाज नाइकू को मार गिराया। इसी के साथ भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का ऑपरेशन जैकबूट पूरा हो गया। जिसे उन्होंने घाटी में आतंकवाद को खत्म करने के पिछले साल अक्टूबर माह में शुरू किया गया था। बताया जाता है कि इस ऑपरेशन में आखिरी आतंकी रियाज नाइकू ही था। उसकी मौत के बाद अजित डोभाल का ऑपरेशन जैकबूट 2 पूरा हो गया।

जानकारी के मुताबिक, एनएसए अजित डोभाल ने घाटी में आतंक फैलाने वाले बड़े आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन जैकबूट शुरू किया था। इसे उस समय लॉन्च किया था, जब जम्‍मू और कश्‍मीर के पुलवामा, कुलगाम, अनंतनाग और शोपियाँ में आतंकियों की ओर से ‘आजाद इलाका’ घोषित किया जाने लगा था। इसमें बुरहान वानी के ग्रुप में कई कश्मीरी आतंकी शामिल थे। इन सभी ने मिलकर कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को तेज करने की साजिश रचनी शुरू कर दी थी।

अजित के सीक्रेट एसेट्स से मिली ये जीत

बता दें इस ऑपरेशन की सफलता के पीछे अजित डोभाल के वो ‘डोभाल ऐसेट्स’ काम आए। जिनके बारे में कहा जाता है कि उनकी जानकारी सेना के जवानों तक को नहीं होती है। वह डोभाल को खुफिया जानकारी मुहैया कराते हैं। अजीत ने जैकबूट-1 और जैकबूट-2 में शामिल अधिकारियों को खुद चिह्नित किया था। सेना में यह बात चलन में है कि ऐसे लोगों को डोभाल के ऑख और कान कहा जाता है। इन्हीं की मदद से डोभाल ने ऑपरेशन को पूरा किया है।

ऑपरेशन जैकबूट 2 में मारे गए मोस्टवांटेड आतंकी

11 जनवरी 2020 ऑपरेशन जैकबूट-2 के तहत श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर डीएसपी देवेंद्र सिंह के साथ हिजबुल के मोस्टवांटेड आतंकी नवीद बाबू को गिरफ्तार किया गया। उसी महीने 25 जनवरी को पुलवामा का मुख्य साजिशकर्ता जैश कमांडर कारी यासिर त्राल में अपने दो अन्य साथियों संग मारा गया था।

जैकबुट की शुरुआत

पुलवामा हमले के बाद ऑपरेशन जैकबूट लाया गया। इसमें खास कमांडरों को टारगेट करने का लक्ष्य रखा गया। जैकबूट के पहले चरण में करीब 104 आतंकियों को मार गिराया गया था। जैकबूट-1 के दौरान 2014-16 या इससे पहले सक्रिय हुए सभी मोस्ट वांटेड आतंकी कमांडर मारे गए थे। और कुछ पाकिस्तान भाग गए थे।

वहीं रियाज नाइकू एंड कंपनी अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद दूसरे राज्य के श्रमिकों, ट्रक चालकों और सेब व्यापारियों को अपना निशाना बनाते थे। आतंकवादियों ने दक्षिण कश्मीर के चार जिले पुलवामा, कुलगाम, अनंतनाग और शोपियां को आजाद घोषित कर दिया था। जिसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने उन जगहों का दौरा कर ऑपरेशन जैकबूट की नींव डाली।

जैकबूट-2 में दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को दो वर्गों में रखा गया। पहले वर्ग में उन लोगों को रखा जो पूरे दक्षिण कश्मीर में सोशल मीडिया के जरिए आतंकी गतिविधियाँ चला रहे थे। दूसरे वर्ग में वो लोग शामिल थे जो कमांडरों के आदेश पर वारदात अंजाम दे रहे थे और अपने-अपने इलाके में पोस्टर ब्वाय बन रहे थे। और इसी के तहत त्राल में हमादखान, बुरहान कोका, आसिफ और लतीफ दास जैसे आतंकियों को मार गिराया गया था।

जैकबूट 2 का अहम निशाना था रियाज नाइकू

बुरहान वानी गैंग के सफाए के बाद रियाज नायकू मोस्ट वांटेड बन चुका था। उसे पकड़ने के लिए काफी कोशिशें की गई। पहले उसके ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क को नेस्तनाबूद करते हुए उसके 30 खबरियों को पकड़ा गया। साथ ही उसके सभी प्रमुख ठिकानों को भी नष्ट किया गया। ताकि वह छुपने की अलग जगह ढूँढे। और फिर ठिकाने नष्ट होने के बाद वह अपने गाँव अपने परिवार से मिलने गया और यहीं वह जाल में फँस गया।

रिश्तेदार की घर के छत को बनाया था ठिकाना

आमतौर पर कश्मीरी अपने घर का बेकार समान छत पर ही रखते हैं। इसीलिए लोगों को शक न हो, नाइकू ने छुपने के लिए रिश्तेदार की छत के नीचे अपना ठिकाना बनाया था। जहाँ से वो आस-पास के घरों और गलियों पर आसानी से निगाह रख सके।

आइजीपी कश्मीर विजय कुमार ने कहा कि हम छह माह से रियाज नाइकू के पीछे पड़े हुए थे।

MP-UP ने 3 साल के लिए किए लगभग सभी श्रम कानून खत्म: इन्वेस्टर्स खुश, कॉन्ग्रेस दुखी

कोरोना वायरस महामारी के कारण जारी देशव्यापी लॉकडाउन के बीच भारत में लेबर रिफॉर्म (श्रम कानून) की शुरुआत होती नजर आ रही है। इस दिशा में उतर प्रदेश (UP) और मध्य प्रदेश (MP) की राज्य सरकारों द्वारा प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।

मध्य प्रदेश (MP) की शिवराज सिंह चौहान और उत्तर प्रदेश (UP) की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अर्थव्यवस्था में आई शिथिलता को दूर करने के लिए श्रम कानून (Labour Law) में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।

मध्य प्रदेश सरकार ने कॉटेज इंडस्ट्री यानी कुटीर उद्योग और छोटे कारोबारों को रोजगार, रजिस्ट्रेशन और जाँच से जुड़े विभिन्न जटिल लेबर नियमों से छुटकारा देने की पहल की है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश सरकार ने कंपनियों और ऑफिस में काम के घंटे बढ़ाने की छूट जैसे अहम ​फैसले भी लिए हैं।

वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में मौजूद सभी कारखानों और मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को वर्तमान में लागू श्रम अधिनियमों में सशर्त अस्थायी छूट प्रदान करने का फैसला किया है। हालाँकि श्रम कानूनों में बच्चों और महिलाओं से संबंधित प्रावधान जारी रहेंगे।

सोशल मीडिया पर निवेशकों द्वारा सरकार द्वारा उठाए गए इन कदमों की जमकर सराहना हो रही है।

कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी के दौरान लिए गए यह फैसले अर्थव्यवस्था और व्यापार के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नए लेबर रिफॉर्म में संबंधित अधिकारी को कंपनियों, दुकानों, ठेकेदारों और बड़े निर्माताओं के लिए पंजीकरण या लाइसेंस की प्रक्रिया को केवल 1 दिन में पूरा करना होगा।

और यदि वह ऐसा नहीं करता है तो सम्बन्धित अधिकारी पर जुर्माना लगेगा और यह ट्रेडर को मुआवजे के तौर पर दे दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में यह प्रक्रिया 30 दिन में पूरी होती है।

‘उत्तर प्रदेश टेंपररी एग्जेम्प्शन फ्रॉम सर्टेन लेबर लॉज ऑर्डिनेंस 2020’

उत्तर प्रदेश सरकार ने बृहस्पतिवार (मई 07, 2020) को राज्य में अधिकांश श्रम कानूनों को निलंबित करने के लिए एक अध्यादेश पारित किया, ताकि मौजूदा कोरोना वायरस संकट के बीच राज्य में निवेश करने के लिए नई कंपनियों को आकर्षित किया जा सके।

कुल 38 श्रम कानूनों को निलंबित कर दिया गया है और केवल 4 कानून लागू होंगे जो कि भुगतान अधिनियम, 1936 के भुगतान की धारा 5, वर्कमैन मुआवजा अधिनियम, 1932, बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 और भवन और अन्य निर्माण श्रमिक अधिनियम, 1996 हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि व्यवसायों को लगभग सभी श्रम कानूनों के दायरे से छूट देने का निर्णय लिया गया क्योंकि राज्य में आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियाँ कोरोना वायरस संक्रमण से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

इस बयान में कहा गया है कि मौजूदा व्यवसायों को बढ़ावा देने और राज्य के लिए नई औद्योगिक गतिविधि को आकर्षित करने के लिए, कुछ आवश्यक छूट को अस्थायी आधार पर देनी ही होंगी।

इसीलिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 7 मई को अगले 3 साल के लिए कारोबारों को लगभग सभी लेबर लॉ के दायरे से बाहर रखने के लिए ‘उत्तर प्रदेश टेंपररी एग्जेम्प्शन फ्रॉम सर्टेन लेबर लॉज ऑर्डिनेंस 2020’ अध्यादेश को मंजूरी दे दी है।

इसके बाद अन्य श्रम कानून निष्प्रभावी हो जाएँगे। इनमें औद्योगिक विवादों को निपटाने, व्यावसायिक सुरक्षा, श्रमिकों की स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति और ट्रेड यूनियनों, अनुबंध श्रमिकों और प्रवासी मजदूरों से संबंधित कानून शामिल हैं।

यह मौजूदा व्यवसायों और राज्य में स्थापित होने वाले नए कारखानों दोनों पर लागू होगा। जबकि श्रम कानूनों के बच्चों और महिलाओं से संबंधित प्रावधान भी जारी रहेंगे।

उत्तर प्रदेश पिछले कुछ दिनों में श्रम कानूनों में छूट देने वाला दूसरा भाजपा शासित राज्य है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बृहस्पतिवार (मई 07, 2020) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर घोषणा की कि कारखानों और कार्यालयों में काम कराने की अवधि 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे की गई है।

उन्होंने कहा कि सप्ताह में 72 घंटे तक कार्य कराए जाने की अनुमति होगी। लेकिन इसके लिए श्रमिकों को ओवर टाइम देना होगा।

MP सरकार ने भी लिए बड़े फैसले

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कारखानों में 61 रजिस्टर और 13 रिटर्न भरने के पुरानी जरूरतों को खत्म कर दिया जाएगा। इसकी जगह पर केवल एक रजिस्टर और रिटर्न भरना होगा।

सबसे बड़ी बात यह है कि रिटर्न फाइल करने के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन काफी होगा। इस कदम से कारोबारी सुगमता को बढ़ावा मिलेगा।

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा श्रम सुधार की दिशा में उठाए गए कुछ अन्य कदम इस तरह हैं –

  1. स्टार्टअप को अपने उद्योगों का केवल एक बार ही रजिस्ट्रेशन करना होगा।
  2. कारखाना लाइसेंस रिन्युअल अब हर साल के बजाय हर 10 साल में होगा।
  3. कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट के तहत कैलेंडर वर्ष की जगह अब लाइसेंस पूरी ठेका अवधि के लिए मिलेगा।
  4. नए कारखानों के रजिस्ट्रेशन अब पूरी तरह ऑनलाइन होंगे।
  5. दुकानों के लिए स्थापना अधिनियम में संशोधन किया गया है। यानी, अब प्रदेश में दुकानें सुबह 6 से रात 12 बजे तक खुली रह सकेंगी।
  6. 100 से कम श्रमिक के साथ काम करने वाले उद्योगों को औद्योगिक नियोजन अधिनियम के प्रावधान से मुक्ति। MSME अपनी जरूरत के हिसाब से श्रमिक रख सकेंगे।
  7. ट्रेड यूनियन व कारखाना प्रबंधन के बीच विवाद का निपटारा सुविधानुसार अपने स्तर पर ही किया जा सकेगा। इसके लिए लेबर कोर्ट जाने की जरूरत नहीं होगी।
  8. 50 वर्कर्स से कम वाली फर्म्स में कोई इंस्पेक्शन नहीं होगा।
  9. MSME फर्म्स में इंस्पेक्शन केवल लेबर कमिश्नर की मंजूरी या शिकायत दर्ज किए जाने के मामले में ही होगा।

कॉन्ग्रेस ने बताया काला कानून

कॉन्ग्रेस ने श्रम कानूनों को शिथिल करने के लिए यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार की आलोचना की करते हुए पार्टी के राज्य इकाई प्रमुख अजय कुमार लल्लू ने कहा कि सरकार केवल बड़े व्यवसायों की परवाह करती है न कि मजदूरों के अधिकारों के बारे में।

कॉन्ग्रेस ने इस फैसले को काला कानून बताते हुए कहा – “यूपी सरकार ने राज्य में मजदूरों के लिए एक काला कानून लाया है और उन्होंने अब तीन साल के लिए मौजूदा श्रम कानूनों को निलंबित कर दिया है।”

अजय कुमार लल्लू ने कहा – “ये कानून श्रमिक अधिकारों के रक्षक थे, लेकिन अब सरकार ने अगले तीन वर्षों के लिए श्रम कानूनों को निलंबित कर दिया है, वास्तव में मजदूरों के अधिकारों को छीन लिया गया है।”

महाराष्ट्र से औरंगाबाद लौट रहे ट्रैक पर सोए 17 प्रवासी मजदूरों पर चढ़ी मालगाड़ी, मौके पर ही मौत

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रेल पटरी पर सोए 17 प्रवासी मजदूरों पर से ट्रेन गुजरने के कारण उनकी मौत हो गई। यह हादसा औरंगाबाद जालना रेलवे लाइन (Jalna aurangabad railway line) पर शुक्रवार (मई 08, 2020) सुबह 6.30 बजे हुआ।

इस दर्दनाक हादसे में फ्लाईओवर के पास पटरियों पर सो रहे 17 प्रवासी मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि प्रवासी मजदूर रेल की पटरियों पर सोए थे और अचानक उनके ऊपर से मालगाड़ी गुजर गई। नींद में होने की वजह से किसी को भी संभलने का मौका नहीं मिला।

ये सभी प्रवासी मजदूर अपने घर छत्तीसगढ़ पैदल निकले थे। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और रेलवे के अधिकारी मौके पर पहुँचे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दक्षिण सेंट्रल रेलवे की चीफ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर का कहना है कि औरंगाबाद में करमाड के पास इस दुर्घटना में मालगाड़ी का एक खाली डब्बा कुछ लोगों के ऊपर चढ़ गया था।

इस घटना के शिकार सभी मजदूर एक स्टील फैक्ट्री में काम करते थे। हादसा बदनापुर और करमाड के बीच हुआ। सभी मजदूर औरंगाबाद से गाँव जाने वाली ट्रेन पकड़ने के लिए जालना से औरंगाबाद पैदल जा रहे थे।

इन मजदूरों ने रात अधिक होने के चलते सभी ने सटाना शिवार इलाके में पटरी पर ही अपना बिस्तर लगा लिया। सुबह इसी पटरी से एक माल गाड़ी गुजरी और ये सभी मजदूर उसकी चपेट में आ गए।

कोरोना वायरस के कारण जारी देशव्यापी बन्द के कारण कई लोग अपने घरों से दूर फंस गए थे। इसके बाद दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, कई राज्यों से इन प्रवासी मजदूरों ने पैदल ही घर की ओर चलना शुरू कर दिया था।

श्रमिकों को उनके घर पहुँचाने के लिए केंद्र सरकार ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन की भी व्यवस्था की है। राज्य सरकारों की ओर से जो लिस्ट दी जाती हैं, उन्हें ही ट्रेन में सफर करने की इजाजत दी जा रही हैं।

आप न्यूज एंकर की तरह बात नहीं कर रहे… जब इंटरव्यू के दौरान आपा खो बैठे लालू के लाल तेजस्वी यादव: देखें Video

बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव गुरुवार (7 मई, 2020) को एबीपी न्यूज़ पर एंकर सुमित अवस्थी के साथ लाइव बातचीत कर रहे थे। इस दौरान एक सवाल के जवाब में तेजस्वी अपना आपा खो बैठे।

तेजस्वी ने एबीपी के पत्रकार से कहा, “आप न्यूज़ एंकर की तरह नहीं, बल्कि एक सत्ताधारी पार्टी के प्रवक्ता के की तरह बात कर रहे हैं।” हालाँकि न्यूज एंकर ने तेजस्वी की इस बात को नजरअंदाज कर दिया।

साक्षात्कार के दौरान सुमित अवस्थी ने JDU प्रवक्ता अरविंद निषाद के एक ट्वीट के आधार पर राजद नेता से सवाल किया कि आप अभी दिल्ली में हैं या बिहार में, क्योंकि जब भी कोई संकट होता है तो तेजस्वी यादव की राज्य में अनुपस्थिति पर सवाल उठाए जाते हैं। इस सवाल ने तेजस्वी यादव को परेशान कर दिया। वह भी कुछ इस कदर कि तेजस्वी जवाब के बहाने सुमित अवस्थी से बेहूदगी से पेश आने लगे।

दरअसल तेजस्वी यादव से एबीपी के एंकर ने पूछा, “कृपया मुझे बताइए कि आप इस समय कहाँ हैं। क्या आप दिल्ली में बंद होने के कारण फँस गए हैं?” इसका जवाब देने के बजाय तेजस्वी ने अवस्थी से पूछा कि क्या उन्हें पता था कि देश महामारी की चपेट में आ जाएगा और तालाबंदी घोषित कर दी जाएगी।

इसे लेकर तेजस्वी इतने उत्तेजित हो गए कि वह लगातार एंकर को एक ही बात कई बार दोहराते रहते हैं। चौंकाने वाली बात यह कि एंकर द्वारा कई बार पूछे जाने के बाद भी तेजस्वी यादव ने यह नहीं बताया कि वे दिल्ली में हैं या फिर बिहार में।

हालाँकि एंकर ने RJD नेता से सवाल पूछने का सिलसिला जारी रखता है। इसके आगे सुमित अवस्थी ने राज्य के प्रवासी मजदूरों को वापस लाने के लिए 50 गाड़ियों का किराया देने वाले वादे पर तेजस्वी यादव से सवाल कर दिया। तेजस्वी ने सरकार को 2,000 बसें प्रदान और 50 रेल गाड़ियों का किराया देने की पेशकश की थी।

इसके जवाब में भी तेजस्वी यादव ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और सवाल टालने की कोशिश करते रहे। तेजस्वी ने खुद से पूछे जा रहे सवालों से परेशान होकर एंकर सुमित अवस्थी से कहा कि जो सवाल राज्य सरकार से पूछे जाने चाहिए वह सवाल आप मुझसे क्यों कर रहे हैं।

दरअसल 4 मई को तेजस्वी यादव ने सत्ताधारी नीतीश कुमार सरकार पर निशाना साधते हुए हिंदी में एक ट्वीट किया करते हुए लिखा था कि “15 साल पुरानी डबल इंजन की सरकार प्रवासी बिहारी मजदूरों को नहीं लाने के लिए बहाने बना रही है, 5 दिनों के अंदर लगभग 3,500 लोग तीन ट्रेनों के माध्यम से आए हैं। यह किराए, संसाधनों और नियमों को लेकर बहाने बनाते हैं। उन्होंने लिखा कि नीतीश सरकार का इरादा प्रवासियों को वापस लाने का नहीं है।”

रियाज़ नाइकू: आतंकी या गणित शिक्षक? अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Riyaz Naikoo

रियाज़ नाइकू आतंकी था या गणित शिक्षक? आतंकियों को मीडिया गणित शिक्षक क्यों बना देता है? जानिए क्या कहती है रियाज़ की गर्लफ्रेंड।

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रमजान के महीने में जकात का पैसा PM CARES Fund में भी दें मुस्लिम: RSS नेता इंद्रेश कुमार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से मुस्लिमों के बीच कार्य करने वाले मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने कोरोना संकट के बीच देश के मुस्लिमों से एक विशेष अपील की है। संगठन के संरक्षक इंद्रेश कुमार ने अपील करते हुए कहा है कि रमजान के पवित्र महीने में मुस्लिम न सिर्फ जकात के पैसे गरीबों को दान करें, बल्कि पीएम केयर फंड में भी जमा कराएँ।

जानकारी के मुताबिक आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार ने मुस्लिमों से रमजान माह में गरीब, जरूरतमंद लोगों की मदद करने का आह्वान किया है। साथ ही इंद्रेश कुमार ने मेरठ के मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के पदाधिकारियों द्वारा कोरोना संकट के बीच जरूरतमंदों को दी जा रही मदद की भी प्रशंसा की है।

इंद्रेश कुमार ने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कार्यकर्ताओं से आग्रह किया है कि रमजान माह में ज़कात निकालने का वक्त आ गया है। जकात में से कुछ धन निकाल कर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के माध्यम से प्रधानमंत्री केयर फंड में भी जमा कराएँ ताकि देश यशश्वी बने और दुनिया का नेतृत्व करे। कोरोना से पीड़ित दुनिया की नजर भारत की तरफ है। इसलिए भारत को बनाएँगे, विश्व को बचाएँगे।

इंद्रेश कुमार ने कहा कि मुस्लिम मंच के कार्यकर्ता घर-घर में संदेश दें कि कट्टरता नहीं, शालीनता और सज्जनता वक्त की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि, गुड फ्राइडे, डॉक्टर भीमराव आंबेडकर जयंती, बुद्ध पूर्णिमा, शब-ए-बारात, महावीर जयंती, हनुमान और अब रमजान देश के सभी लोग घर में रहकर मना रहे हैं, ऊपरवाले से जल्द से भारत को कोरोना वायरस से मुक्त करने की अपील कर रहे हैं। मुस्लिमों को भी ऐसी ही दुआ करनी चाहिए।

दरअसल इससे पहले कोरोना महामारी को देखते हुए मुस्लिम मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार के आह्वान पर मेरठ के सभी जिलों में रमजान को देखते हुए राशन बाँटा गया था। इसका उद्देश्य गरीब और बेसहारा लोगों की इस संकट की घड़ी में मदद करना था। इंद्रेश कुमार के आह्वान पर मेरठ में शुरू किए गए सेवा कार्य की जिम्मेदारी संयोजक कदीम आलम और सेंट मोमिना स्कूल ग्रुप के चेयरपर्सन सैयद शाह फैसल ने सँभाली थी।

आपको बता दें कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच राष्ट्रवादी मुस्लिमों का एक संगठन है। यह संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा का संगठन है। इसके राष्ट्रीय संयोजक मुहम्मद अफजल हैं और इसके संरक्षक इंद्रेश कुमार हैं। इस संगठन का गठन 2002 में हुआ था।

तपती दोपहर में सड़क पर गेहूँ के दाने समेटती 10 साल की आरती: तस्वीर के पीछे का सच क्या है

दैनिक भास्कर के उज्जैन संस्करण में 10 साल की आरती की एक तस्वीर छपी। तस्वीर में बच्ची जमीन पर गिरे गेहूँ के दानों को समेटती नजर आ रही है। तस्वीर के कैप्शन में दावा किया गया है कि भरी दोपहर में ऐसा उसे उसकी माँ ने करने को कहा, ताकि उसके छोटे भाई-बहन के लिए 1-2 दिन रोटी बन सके।

निस्संदेह अखबार में छपी तस्वीर और उसका कैप्शन बेहद मार्मिक है। लेकिन इस तस्वीर के कारण उक्त मीडिया संस्थान विवादों में आ गया है।

दरअसल, इस तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया में ‘युवा उज्जैन’ नामक एनजीओ का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें बच्ची और बच्ची के माँ के बयान को रिकॉर्ड करके दावा किया जा रहा है कि ये तस्वीर लड़की से फोटोग्राफर ने कहकर ख़िंचवाई थी। लड़की पहले से तपती दोपहरी में सड़क पर बिखरे गेहूँ नहीं बटोर रही थी।

युवा उज्जैन की वीडियो में लड़की की माँ कह रही है कि फोटोग्राफर ने पहले दाने बिखरवाए और फिर न्यूज बनाने के लिए दोबारा से उसे ढुलवाया। वहीं आरती कहती नजर आ रही है कि उसने दानों को समेटकर बकरी को खिला दिया था।

जबकि, कैप्शन में ये लिखा है कि आरती ने फोटोग्राफर को बताया कि एक गाड़ी वाले के कुछ गेहूँ सड़क पर गिर गए थे। ऐसे में जब उसने अपनी माँ को इस बारे में बताया तो उसकी माँ ने उसे कहा कि वे गेहूँ के दानों को थैली में भरकर ले आए, जिससे वे उसे घट्टी में पीसकर एक-दो दिन की रोटी उन्हें दे सकें।

अब जब हमने इस वीडियो के संबंध में और अखबार के दावे के मद्देनजर उज्जैन में दैनिक भास्कर के संपादक कपिल भटनागर से बात की तो उन्होंने अपनी खबर और तस्वीर को सही बताया।

उन्होंने कहा, “मुमकिन है वीडियो में उनसे (लड़ती की माताजी) ऐसा बुलवाया गया हो। हमारे पास उस समय की अलग-अलग एंगल की फोटो हैं। बाकी हम इस मामले में आगे पड़ताल करवा रहे हैं। वहाँ पर सीसीटीवी थे। उनसे देखा जाएगा कि आगे क्या हुआ, क्या नहीं। मैं कोई विदेशी पत्रकार नहीं हूँ, जो ये दिखाने की कोशिश करूँ कि देश में भुखमरी है। हम इतने जिम्मेदार हैं कि कुछ गलत करने से पहले सोचेंगे।”

उन्होंने अपनी रिपोर्ट को लेकर ये भी कहा, “जो फोटोग्राफर को दिखा, हमने उसे दिखाया। उसने जो बताया हमने प्रकाशित किया। अपने मन से न हमने फोटो से छेड़छाड़ की और न कंटेट से।”

बता दें युवा उज्जैन नामक एनजीओ ने अपने वीडियो के माध्यम से दैनिक भास्कर पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जब ब्रांडेड अखबार ने इतनी मार्मिक स्टोरी की और हजारों लाखों रुपए डोनेशन की माँग की, तो इसके फोटोग्राफर ने बच्ची की मदद के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किए?

वीडियो में वे कह रहे हैं कि आज उनकी संस्था के द्वारा आरती के घरवालों को मदद की जा रही है। मगर, जितनी भी संस्थाएँ उज्जैन के अंदर मदद और सेवा का कारवाँ चला रही हैं और प्रयासरत हैं कि उज्जैन में कोई भूखा न सोए, उन सबको इस अखबार की इस न्यूज ने ठेंगा दिखाया है।

कोरोना के उपचार के लिए अश्वगंधा, गुडूची पिप्पली जैसी पारंपरिक दवाओं का क्लीनिकल ट्रायल शुरू

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण की दवा खोजने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में भारत में अश्वगंधा (Ashwagandha), यष्टिमधु (Yashtimadhu), गुडूची पिप्पली (Guduchi Pippali), आयुष-64 जैसे पारंपरिक आयुर्वेदिक दवाओं का क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने गुरुवार (7 मई, 2020) को बताया कि स्वास्थ्यकर्मी और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों पर इनका क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर दिया गया है।

यह अध्ययन आयुष मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और विज्ञान मंत्रालय, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और साथ में आईसीएमआर के तकनीकी समर्थन से पूरा किया जाएगा। साथ ही परीक्षण मौजूदा उपायों के साथ-साथ मानक देखभाल के रूप में किया जाएगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और आयुष मंत्री श्रीपद नाईक ने गुरुवार को संयुक्त रूप से कोविड-19 से संबंधित तीन केंद्रीय आयुष मंत्रालय आधारित अध्ययनों का शुभारंभ किया। स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से आयुष मंत्रालय प्रोफिलैक्सिस के रूप में आयुर्वेद हस्तक्षेपों पर नैदानिक अनुसंधान अध्ययन और कोविड-19 की देखभाल के लिए एक ऐड-ऑन के रूप में लॉन्च किया गया है।

मंत्रालय ने 50 लाख लोगों के लक्ष्य के साथ बड़ी आबादी का डेटा तैयार करने के लिए आयुष संजीवनी मोबाइल ऐप भी विकसित किया है।

उल्लेखनीय है कि चीन कोरोना वायरस के उपचार के लिए पारंपरिक दवाओं से जुड़े उपयोग और अध्ययन को बढ़ावा दे रहा है। जैसा कि चीन से निकले कोरोना वायरस का आधुनिक चिकित्सा में अभी तक कोई इलाज संभव नहीं हो सका है। इस बीच विश्व के कई छोटे-बड़े देश इसकी वैक्सीन विकसित करने के प्रयासों में रात-दिन लगे हुए हैं।

कुछ देशों ने कोरोना वायरस की वैक्सीन पर सकारात्मक परिणाम आने की बात कही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आ सके हैं। भारत में कई आयुर्वेद विशेषज्ञ और चिकित्सक यह कहते रहे हैं कि तुलसी, अश्वगंधा, गुडूची, पिप्पली आदि जैसे पौधे, जो परंपरागत रूप से बुखार, सर्दी और अन्य संक्रमणों के उपचार के लिए उपयोग किए जाते हैं और प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करते हैं, कोरोना वायरस के उपचार में इनके असर का अध्ययन किया जाना चाहिए।

19 साल की गर्भवती भाग्यश्री को पति हामिद ने मार डाला, बीते साल अगस्त में हुआ था निकाह

मैसूर के मदिकेरी नगर में 19 साल की गर्भवती भाग्यश्री को उसके 31 वर्षीय पति साहुल हामिद ने बुधवार (मई 6, 2020) को मार डाला। दोनों का निकाह पिछले साल अगस्त में हुआ था। लेकिन, रजिस्ट्रार दफ्तर में निकाह 29 अप्रैल को पंजीकृत करवाया गया था।

भाग्यश्री ने हामिद के साथ जिंदगी गुजारने के लिए धर्म परिवर्तन कर अपना नाम ‘सुहान’ भी कर लिया था। मगर, मंगलवार को दोनों के बीच हुई एक आपसी बहस उसकी मौत का कारण बन गई।

भाग्यश्री ने मंगलवार को झगड़े के बाद अपनी माँ यशोदा को अगली सुबह 8:30 बजे फोन किया। यशोदा बताती हैं कि उनसे बात करते हुए भाग्यश्री काफी परेशान थी और रो भी रही थी।

बस इसी कारण वे जल्द से जल्द उसके घर पहुँची। लेकिन वहाँ उन्हें उनकी बेटी का शव बिस्तर पर पड़ा मिला और हामिद घर से नदारद था।

बेटी का शव देखने के बाद यशोदा जोर-जोर से रोने लगीं। उन्होंने दामाद हामिद के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। हामिद शहर के ही एक चिकन स्टॉल पर काम करता है।

इसके बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर हामिद को गिरफ्तार कर लिया और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है। साथ ही ऑटोप्सी रिपोर्ट का इंतजार भी।

गौरतलब है कि धर्म परिवर्तन के बावजूद किसी महिला पर उसके शौहर द्वारा अत्याचार का ये पहला मामला नहीं है। इसी साल की शुरुआत में कानपुर से एक ऐसी ही खबर आई थी।

उस समय सीता उर्फ नेहा नाम की एक लड़की ने अपने परिवार के बगावत करने के बाद शाहनवाज नाम के लड़के से शादी कर ली थी। लेकिन निकाह के कुछ दिन बाद दुल्हन के जोड़े में ही उसका शव सड़क पर मिला था। जाँच से पता चला कि शहनवाज ने पहले अपने जीजा के साथ मिलकर उसका रेप किया फिर गला घोंटकर मार डाला।

2018 के सुसाइड केस से अर्नब गोस्वामी को घेरना चाहती है कॉन्ग्रेस, अदालत में नहीं टिक पाए थे आरोप

पालघर में दो साधुओं समेत एक ड्राइवर की लिंचिग के बाद रिपब्लिक टीवी के प्रमुख अर्नब गोस्वामी लगातार कॉन्ग्रेस पर हमलावर रहे। उन्होंने इस घटना पर चुप्पी को लेकर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से तीखे सवाल पूछे थे।

इसके बाद यूथ कॉन्ग्रेस के दो कार्यकर्ताओं ने उन पर हमल किया। देशभर के कई राज्यों में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई। मुंबई पुलिस ने उनसे घंटो पूछताछ की।

लेकिन गुंडों से हमला करवाने से लेकर राज्य की मशीनरी का दुरुपयोग करके भी कॉन्ग्रेस उन्हें चुप नहीं करवा पाई। इसलिए अर्नब को घेरने के लिए एक पुराने मामले का सहारा लिया गया जिसमें कुछ समय पहले उन पर एफआईआर हुई थी।

यह सब तब शुरू हुआ जब अर्नब गोस्वामी ने सोनिया गाँधी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि क्या वह तब भी इसी तरह से चुप रहतीं अगर किसी ईसाई पादरी की हत्या की गई होती।

इस क्रम में उन्होंने ग्राहम स्टेन्स की हत्या के मामले को उठाया, जो कि एक ईसाई मिशनरी था। यूपीए की सरकार ने 2005 में ग्राहम स्टेन्स की पत्नी को पद्मश्री से सम्मानित किया था।

ऐसे में गोस्वामी का सवाल ये था कि अगर सोनिया गाँधी और उनकी सरकार स्टेन्स की पत्नी को पुरस्कृत कर सकती हैं, तो वह ऐसी स्थिति में दो साधुओं की लिंचिंग के खिलाफ क्यों नहीं बोल सकती, जिस राज्य में उन्होंने वैचारिक समझौता करके शिवसेना के साथ गठबंधन किया है।

कॉन्ग्रेस पार्टी ने अर्नब गोस्वामी को घेरने की कोशिश में कई जगहों पर कई एफआईआर दर्ज हुईं और मुंबई पुलिस जो कि अब शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के गठबंधन के अधीन है, ने अर्नब से 12 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की। जब उन्हें इससे भी सुकून नहीं मिला तो पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के ग्रुप सीएफओ से भी सवाल पूछे।

इतना ही नहीं, इन सबसे पहले राज्य मशीनरी ने अर्नब की शिकायत पर यही मानने से इनकार कर दिया था कि रिपब्लिक टीवी स्टूडियो से घर लौटते समय अर्नब और उनकी पत्नी पर कॉन्ग्रेस के गुंडों ने हमला किया था।

अर्नब के लाख कहने पर भी जो मशीनरी फाइल में जिस कॉन्ग्रेस का नाम लिखने से कतराती रही। वही कॉन्ग्रेस अब अर्नब गोस्वामी को निशाना बनाने के लिए दो साल पुराने आत्महत्या के मामले का प्रयोग कर रही है।

इंटीरियर डिजाइनर की आत्महत्या का मामला

दरअसल मई 2018 में अर्नब गोस्वामी के खिलाफ कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। उस दौरान एक इंटीरियर डिजाइनर ने अलीबाग में अपने बंगले में आत्महत्या कर ली थी।

अन्वय नाइक द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने अर्नब गोस्वामी, आईकास्टएक्स/स्काई मीडिया के फिरोज शेख और स्मार्टवर्क्स के नितीश सारदा के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया था।

नाइक की पत्नी ने आरोप लगाया था कि रिपब्लिक टीवी ने उसका बकाया भुगतान नहीं किया था, इसलिए उसके पति ने आत्महत्या की थी।

रिपब्लिक टीवी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि कुछ समूह अपने स्वार्थ के लिए दुर्भावना से काम कर रहे हैं और नाइक के जुड़ी दुखद घटना का फायदा उठाकर रिपब्लिक टीवी के खिलाफ गलत बयानबाजी कर रहे हैं।

रिपब्लिक टीवी ने अपने बयान में कहा था, रिपब्लिक टीवी इस तरह के झूठे प्रोपेगेंडा फैलाने वालों के खिलाफ में सख्त कदम उठाएगा। रिपब्लिक टीवी यह स्पष्ट करना चाहता है कि दिसंबर 2016 में एक समय पर कॉनकॉर्ड डिज़ाइन्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा हुआ है। कॉन्ट्रेक्ट के अन्तर्गत आने वाले सभी बकाया भुगतान और रिपब्लिक टीवी द्वारा कॉनकॉर्ड डिज़ाइन्स को भुगतान किए जा चुके हैं। चेक नंबरों के साथ राशि, भुगतान की तारीख, संबंधित पत्राचार और प्रलेखन सहित भुगतान का विवरण रिपब्लिक टीवी के पास उपलब्ध है। इस तरह के सभी विवरण और साक्ष्य जरूरत पड़ने पर उपयुक्त अधिकारियों को सौंप दिए जाएँगे। हमारी संवेदनाएँ नाइक परिवार के साथ हैं।

सुसाइड नोट में अन्वय नाइक ने दावा किया था कि गोस्वामी और अन्य दो व्यक्तियों- फिरोज शेख और नितीश सारदा पर उसके कुल 5.4 करोड़ रुपए का बकाया है। जिसपर टाइम्स ऑफ इंडिया ने तब रिपोर्ट की थी कि अर्नब गोस्वामी ने एक स्टूडियो के डिजाइन प्रोजेक्ट के लिए कथित तौर पर 83 लाख रुपए का भुगतान नहीं किया था।

इस केस को कॉन्ग्रेस अर्नब के खिलाफ इस्तेमाल कर रही

अब 5 मई को कॉन्ग्रेस पार्टी की महाराष्ट्र इकाई ने अन्वय नाइक की पत्नी अक्षिता नाइक का एक वीडियो ट्वीट किया। वीडियो में दिखाया गया है कि अन्वय नाइक और उसकी माँ की खुदकुशी के दो साल पूरे हो गए हैं। 2.4 मिनट लंबे वीडियो में, जिसमें से अधिकांश मराठी में हैं, वीडियो में अक्षिता ने सभी भारतीयों से न्याय पाने में मदद की अपील की और चेतावनी दी।

उसने कहा कि यदि मेरे और मेरी बेटी के साथ कुछ भी होता है, तो उसके लिए अर्नब गोस्वामी, अनिल पारस्कर और सुरेश वारदा जिम्मेदार होंगे। आपको बता दें कि नाइक की आत्महत्या के समय अनिल पारस्कर रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक, जबकि सुरेश वारदा अलीबाग में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक थे।

अक्षिता ने इस वीडियो में आरोप लगाया है कि वारदा ने प्राथमिकी दर्ज करने के समय उसे चेतावनी दी थी कि इन सबमें कई शक्तिशाली लोग शामिल हैं। इसलिए उन्होंने उसे नसीहत दी कि एफआईआर दर्ज कराने से उसे पहले सोचने-समझने की जरूरत है। उसने दावा किया कि जाँच के लिए दिए गए लैपटॉप या फोन परिवार को अभी तक वापस नहीं मिले हैं। अक्षिता नाइक ने कहा कि काफी मुश्किलों के बाद उन्हें सुसाइड नोट वापस मिल पाया था।

अर्नब गोस्वामी के खिलाफ एफआईआर में क्या हुआ?

कॉन्ग्रेस द्वारा अब सर्कुलेट की जा रही वीडियो के जवाब में, रिपब्लिक टीवी ने बयान जारी करके पूरे मामले की स्थिति के बारे में बताया है। जवाब में रिपब्लिक टीवी ने दावा किया है कि यह वीडियो दुर्भावना से प्रेरित है और महत्वपूर्ण जानकारी से अछूता है। अर्नब पर लगे आरोपों पर जाँच हुई थी और अक्षिता द्वारा आरोपों पर सबूत न दे पाने के बाद अदालत ने पुलिस द्वारा अंतिम रिपोर्ट दाखिल किए जाने के बाद मामले को बंद कर दिया था।

जवाब में यह भी कहा गया है कि 2 साल पहले अन्वय नाइक की कंपनी कॉनकॉर्ड डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड को काम के तय नियमों के मुताबिक एआरजी आउटलियर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 90% राशि का भुगतान किया था। इसमें कहा गया है कि शेष राशि का भुगतान सीडीपीएल को उस काम के पूरा होने के बाद किया जाना था जो कभी नहीं किया गया था।

इसके बावजूद भी एआरजी मीडिया द्वारा बकाया मामले को एक बार नहीं बल्कि कई बार सुलझाने का प्रयास किया गया, लेकिन अभी तक सीडीपीएल के किसी भी शेयर धारक या निदेशक नहीं होने के कारण ये सभी प्रयास निरर्थक रहे।

अर्नब गोस्वामी ने दावा किया है कि उनकी कंपनी द्वारा मृतक की पत्नी अन्वय नाइक तक पहुँचने के लिए कई प्रयास किए गए थे ताकि शेष राशि के भुगतान के मामले को सुलझाया जा सके, लेकिन इसे लेकर कभी कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली।

वह कहते हैं कि शेष राशि को भी सीडीपीएल के खाते में स्थानांतरित कर दिया गया था, हालाँकि खाता निष्क्रिय होने के चलते राशि जुलाई 2019 में वापस कर दी गई थी।

जवाब में कहा गया है कि अन्वय नाइक किसी थर्ड पार्टी के वेंडर को राशि दिलवाना चाहते थे, जो कॉन्ट्रेक्ट के आधार पर मान्य नहीं है। फिर भी एआरजी मीडिया ने उनके वकीलों की उपस्थिति में उनके साथ बैठकर मामले का हल निकालने की पेशकश की थी।

इसके बावजूद उनके 25 जनवरी 2020 साथ ही 25 और 26 फरवरी के ई-मेल का भी अक्षिता की ओर से कोई उत्तर नहीं मिला। एआरजी मीडिया ने यह भी कहा कि उनके पास सभी बातचीत का पूरा रिकॉर्ड है, जो उनके रुख को साफ करता है।

रिपब्लिक टीवी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जो आरोप लगाए जा रहे हैं वे भ्रामक करने वाले हैं। इन तथ्यों से कानूनी करीके से निपटा जाएगा, जिसमें आपराधिक साजिश, मानहानि और आपराधिक धमकियों सहित सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह के प्रावधान शामिल हैं।

यह देखना रोचक है कि अर्नब गोस्वामी द्वारा सोनिया गाँधी के बारे में की गई एक टिप्पणी और उनके द्वारा उठाए गए वैध सवालों ने कॉन्ग्रेस पार्टी को इस तरह झकझोर दिया है कि वे अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ राज्य मशीनरी का दुरुपयोग करने, गुंडों का इस्तेमाल करने और अब दो साल पुराना मामला उठाने से भी नहीं चूक रहे।

हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने अदालत से गुहार लगाई थी कि अर्नब गोस्वामी अपनी बहस के माध्यम से मुंबई पुलिस को “आतंकित” करने का प्रयास कर रहे हैं।

वहीं पार्टी प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बारे में चिल्लाती रहती है, ऐसा लगता है कि वे सिद्धांत केवल उन पत्रकारों तक ही सीमित हैं जो सोनिया गाँधी से पूछना पसंद करते हैं कि क्या उन्होंने अपनी सास के लिए पास्ता बनाया है या नहीं। उनके लिए नहीं जो उनसे सवाल करना चाहते हैं।