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रमजान में रोजा रखना ‘अतिवाद’ का चिह्न: मजहबी संकेत देखकर चीन उइगरों को भेज सकता है कॉन्सेंट्रेशन कैंप

चीन के शिनजियांग में उइगरों समेत अन्य अल्पसंख्यक आबादी के लोगों के साथ होने वाला बर्ताव अब किसी से छिपा नहीं है। विश्व उइगर कॉन्ग्रेस के अनुसार रमजान के महीने में वहाँ से खबर है कि चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी ने अपने अत्याचार उन लाचार लोगों पर और बढ़ा दिए हैं।

एक ओर जहाँ अन्य देशों में इस्लाम को मानने वाले इन दिनों रोजा रखकर अपनी इबादत कर रहे थे। वहीं शिनजियांग में उइगरों व अन्य अल्पसंख्यक (कज़ाक और किर्गिज लोगों) को पीड़ा देने के लिए उनकी कुरानें जलाई जाती हैं, हलाल खाने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। साथ ही रोजे के महीने में रेस्टुरेंट आदि को भी खुले रखने के लिए मजबूर किया जाता है।

दरअसल, सुबह से लेकर शाम तक रोजा रखना रमजान की पहचान है। लेकिन एमनेस्टी इंटरनेशलन में पिछले साल प्रकाशित रिपोर्ट बताती है कि शिनजियांग में सीसीपी ने इसे ‘अतिवाद का चिह्न’ बताया है। साथ ही रेडियो फ्री एशिया की रिपोर्ट के अनुसार रमजान के दौरान, चीन के सीसीपी का मानना है कि ‘अतिवाद’ के अन्य चिह्नों में उइगर का रमजान के दौरान ‘सामान्य रूप से व्यवसाय का संचालन करना’ और महिलाओं का मजहबी कपड़े पहनना आदि शामिल है।

रिपोर्ट बताती है कि धार्मिक संबद्धता के ये प्रदर्शन, चाहे खुले हों या निजी, कम्युनिस्ट राष्ट्र द्वारा निषिद्ध हैं। इस तरह के रिवाज को प्रदर्शित करने के लिए उइगरों को चीनी कॉन्सेंट्रेशन कैंपों में काम करने की सजा दी जा सकती है।

गौरतलब है कि चीन में उइगरों को दी जाने वाली प्रताड़नाओं का कोई अंत होता नहीं दिख रहा। वहाँ उक्त प्रांत में चीनीकरण के नाम पर उइगरों को डिटेंशन सेंटर में रखा जाता है। उनपर आम दिनों में भी इस्लामिक रीति-रिवाजों और इस्लामी टोपी लगा कर घूमने पर पाबंदी है। इसके अलावा नमाज भी पुलिस की निगरानी में अनुमति लेकर ही पढ़ी जा सकती है। इतना ही नहीं वहाँ के हालात ये हैं कि अल्पसंख्यकों के घरों की साज-सज्जा भी चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी तय करती है।

कुछ दिन पहले की खबर पढ़ें तो मालूम पड़ेगा कि रेडियो फ्री एशिया ने ही बताया था कि उइगरों पर अपना घर चीनी परंपरा के अनुरूप डेकोरेट करने का दबाव बनाया गया और इसके लिए चीन ने 575 मिलियन डॉलर का फंड केवल उइगरों के आधुनिकीकरण के लिए जारी किया। जिसमें उनके पारंपरिक डिजाइन के घरों को नष्ट करना भी शामिल था।

बता दें कि, 2017 से अब तक एक अनुमान है कि 1 मिलियन से लेकर 3 मिलियन उइगर अल्पसंख्यकों को चीन में कन्संट्रेशन कैंप में भेजा जा चुका है। हालाँकि, चीन हमेशा अपने ऊपर लगे इन इल्जामों को खारिज करता रहा है और कहता रहा है कि वे सब अनार के दानों की तरह संगठित हैं। लेकिन चीन में उइगरों की दशा को दिखाता एक वीडियो भी सामने आया था। जिसे वॉर ऑन फियर नाम के यूट्यूब चैनल पर पिछले महीने अपलोड किया था। इसमें देखा गया था कि कई सौ की तादाद मे लोगों को बंदी बनाकर और उनकी आँखों को मूँदकर ट्रेन से शियानजिंग में स्थांतरित किया जा रहा था।

जम्मू कश्मीर: हंदवाड़ा में 48 घंटे के भीतर दूसरा आतंकी हमला, 1 आतंकी ढेर, 3 जवान वीरगति को प्राप्त

जम्मू कश्मीर के हंदवाड़ा के काजीबाद इलाके के पास सोमवार (मई 4, 2020) को सीआरपीएफ (CRPF) के गश्ती दल पर आतंकियों ने हमला कर दिया। सुरक्षाबलों ने तुरंत हमले का जवाब देते हुए एक आतंकी को ढेर कर दिया। हमले में तीन CRPF जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। 

इसके अलावा एक जवान घायल भी हुआ है। घायल जवान को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जम्मू कश्मीर के हंदवाड़ा में हमले के बाद सीआरपीएफ (CRPF) ने इलाके को सील कर दिया गया है। इलाके में आतंकियों की छानबीन की जा रही है। 

जानकारी के मुताबिक आतंकियों के एक दल ने सोमवार शाम काजियाबाद में पट्रोलिंग ड्यूटी पर जा रहे सीआरपीएफ के एक काफिले पर फायरिंग की थी। घटना शाम करीब 5 बजे हुई, जिसके बाद जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए आतंकियों का पीछा किया। इस घटना की जानकारी के तुरंत बाद इलाके में सेना की राष्ट्रीय राइफल्स और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों को आतंकियों की तलाश के लिए भेजा गया।

गौरतलब है कि हंदवाड़ा में रविवार (मई 3, 2020) को एनकाउंटर में सेना की 21 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा समेत 5 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। मुठभेड़ के दौरान सेना ने दो आतंकियों को मार गिराया था। इसमें से एक लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर हैदर था। आतंकियों के छिपे होने की खबर के बाद उत्तरी कश्मीर के एक घर में सुरक्षाबलों ने हमला बोला था। आतंकियों ने घर के लोगों को बंधक बनाकर रखा था, उन्हीं को बचाने सेना और पुलिस की टीम गई थी। इन लोगों को सुरक्षाबलों ने छुड़वा लिया था।

कोरोना को लेकर बहुत कुछ छिपा रहीं ममता बनर्जी: IMCT ने कहा- पश्चिम बंगाल में संक्रमण से मरने वालों का दर सबसे ज्यादा 12.8%,

कोरोना वायरस को लेकर पश्चिम बंगाल के आँकड़ों पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा भेजी गई टीम ने यहाँ के कोरोना संक्रमित लोगों के आँकड़े पर सवाल खड़ा किया है। इंटर मिनिस्ट्रियल सेंट्रल टीम (IMCT) ने हाल ही में पश्चिम बंगाल का दौरा किया था। अपनी फाइनल रिपोर्ट को टीम ने पश्चिम बंगाल सरकार को सौंप दिया है। टीम की ओर से पश्चिम बंगाल सरकार के उस दावे पर भी सवाल खड़ा किया गया है, जिसमे कहा गया है कि उसने 50 लाख लोगों का सर्वे किया है।

टीम लीडर अपूर्व चंद्र ने बंगाल के मुख्य सचिव को चिट्ठी लिखकर कोरोना संक्रमण के आँकड़ों में पारदर्शिता बरतने और नियमित तौर पर हेल्थ बुलेटिन जारी करने की नसीहत दी है। अपूर्व चंद्रा ने अपनी चिट्ठी में इस बात का खुलासा किया है कि उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव राजीव सिन्हा को सात और राज्य के गृह, स्वास्थ्य, शहरी विकास और नगर पालिका विभाग के सचिवों को 4 चिट्ठियाँ लिखीं लेकिन एक का भी जवाब नहीं मिला।

यहाँ तक कि केंद्रीय टीम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जो प्रेजेंटेशन दिखाए गए उससे संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। अपूर्व ने अपनी चिट्ठी में साफ लिखा है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्रीय टीम के खिलाफ विरोधी रुख अख्तियार किया और टीम को अपने कर्तव्यों के पालन में किसी भी तरह से मदद नहीं की है। उन्होंने यह भी बताया है कि दूसरे राज्य में पहुँची केंद्रीय टीम को पर्याप्त मदद मिली लेकिन बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ सरकार का रुख नकारात्मक था। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव आईएएस अपूर्व चंद्रा ने अपनी चिट्ठी में इस बात का भी खुलासा किया है कि 12.8 फ़ीसदी मृत्यु दर के साथ पश्चिम बंगाल में सबसे तेज गति से कोरोना से लोगों की मौत हो रही है। 

बंगाल सरकार पर गंभीर आरोप

अपनी चिट्ठी में IMCT के अपूर्व चंद्र ने दावा किया है कि 30 अप्रैल तक पश्चिम बंगाल में कोरोना से मरने वालों की कुल संख्या 105 है। जबकि पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या 816 है। यहाँ मृत्यु दर पूरे देश में सबसे ज्यादा है। इसकी वजह के तौर पर अपूर्व ने बताया है कि पश्चिम बंगाल सरकार कम से कम सैंपल की जाँच कर रही हैं और लोगों को ट्रैक नहीं किया जा रहा है। निगरानी व्यवस्था दुरुस्त नहीं है और सरकार संक्रमण के रोकथाम में बहुत अधिक सक्षम नहीं है।

50 लाख के आँकड़े पर सवाल

केंद्र की टीम IMCT का कहना है कि पश्चिम बंगाल सरकार इस बात का दावा करती है कि इसने 50 लाख लोगों का डेटा तैयार किया है, लेकिन केंद्र की टीम को इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं। यही नहीं टीम की ओर से प्रदेश सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले कोरोना से जुड़े मेडिकल बुलेटिन पर भी सवाल खड़ा किया गया है। बंगाल सरकार की तरफ से 30 अप्रैल को जो बुलेटिन जारी किया गया उसमें कहा गया कि कुल संक्रमण के मामले 572 हैं, जबकि 139 लोग स्वस्थ हो चुके हैं, 139 लोगों का निधन हो चुका है, 33 की मौत हो चुकी है। ऐसे में कुल मामला 744 हो गया। लेकिन केंद्र स्वास्थ्य सचिव ने उसी दिन जो आँकड़े जारी किए उसममे कुल संख्या 931 बताई गई, ऐसे में 187 मामलों का अंतर नजर आया

टीम के सदस्य का कहना है कि बीएसएफ के एक ड्राइवर में कोरोना के लक्षण 1 मई को सामने आए, उसका टेस्ट किया गया और 3 मई को रिजल्ट आया। लेकिन सरकार की तरफ से कोई भी कोशिश नहीं की गई है कि इस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों की ट्रेसिंग की जाए।

पारदर्शिता बरतने की नसीहत

उन्होंने यह भी दावा किया है कि कोरोना से मौत का विश्लेषण करने के लिए जो कमिटी गठित की गई थी उसकी क्षमताएँ सीमित कर दी गई है। अब मृत्यु प्रमाण पत्र सीधे अस्पतालों से जारी होंगे जहाँ रोगियों का इलाज किया जाएगा। यह पारदर्शिता बरतने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसमें इस बात का भी जिक्र है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने आँकड़ों में जबरदस्त हेरफेर किया है और पारदर्शिता की कमी रखी है। 

टीम ने सुझाव दिया है कि राज्य सरकार अधिक से अधिक सैंपल जाँचे और नियमित तौर पर हेल्थ बुलेटिन जारी कर उसमें टोटल पॉजिटिव केस और मरने वालों की कुल संख्या का भी जिक्र करें। गौर हो कि पश्चिम बंगाल सरकार पिछले 2 दिनों से जो बुलेटिन जारी कर रही है उसमें ना तो मरने वालों की कुल संख्या रहती है और ना ही पीड़ितों की संख्या का जिक्र रहता है। राज्य सरकार द्वारा आँकड़ों में इस विषमता की वजह से राज्य के लोग डर के साए में जी रहे हैं। गौरतलब है कि इंटर मिनिस्ट्रियल सेंट्रल टीम ने पहले भी पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को लिखित शिकायत देकर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया था

लॉकडाउन में छूट मिलते ही एक दिन में कई देशों में तेजी से बढ़ा कोरोना संक्रमण: अमेरिका में 27 हजार तो भारत 2800 से ज्यादा मामले

कोरोना वायरस के मद्देनजर लागू किए गए लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद बड़ी संख्या में देशों के हालात बिगड़ते दिखाई दिए। रविवार को भारत समेत कई देशों में मात्र एक दिन में संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले सामने आए। चीन के बाद सबसे अधिक जनसंख्या वाले अपने देश भारत में केवल एक दिन में संक्रमण के 2,800 से अधिक मामले आए। जबकि रूस में पहली बार नए मामलों ने 10 हजार की संख्या पार कर दी।

इसी तरह अमेरिका में कल भर में 27348 से अधिक मामले आए। जबकि 1400 के करीब लोगों की जानें गईं। अब इन्हीं हालातों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेताया कि लॉकडाउन में अगर जाँच की संख्या को नहीं बढ़ाया गया तो संक्रमण का दूसरा दौर भी आ सकता है। सबसे चिंताजनक आँकड़े अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से भी मिले हैं, जहाँ बिना किसी पूर्व सूचना के की गई 500 लोगों की जाँच में से एक तिहाई संक्रमित मिले हैं।

यहाँ बता दें, इटली में भी लॉकडाउन में छूट अर्थात पाबंदियों से छूट दिए जाने की पूर्व संध्या पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार शाम खत्म हुए 24 घंटों में 174 और लोगों की मौत की पुष्टि की। यह देश में 10 मार्च को शुरू हुए बंद के बाद दैनिक आधार पर सबसे कम संख्या है। इसलिए यहाँ पार्कों और बाग बगीचों को सोमवार से आम लोगों के लिए खोला जा रहा है। मगर, बता दें कि ब्रिटेन के हालात अब भी ठीक नहीं है। यहाँ कोरोना संक्रमण के कारण मरने वालों की संख्या धीरे-धीरे इटली के बराबर पहुँचती जा रही है।

गौरतलब है कि दुनिया में कई हफ्तों के लॉकडाउन के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका बहुत प्रभाव पड़ा है। इसके कारण कारोबारों को वापस खोलने के लिए खासा दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन ये भी ध्यान रखने वाली बात है कि चीन, जहाँ से कोरोना सबसे पहले शुरु हुआ और जिसे लेकर सबसे पहले दावे किए गए कि उसने कोरोना से छुट्टी पा ली है। वहाँ भी अधिकांश सेवाओं के शुरू होने के बाद कोरोना मामलों में दोबारा से बढ़ोतरी दिखाई दी थी। हालाँकि, कल वहाँ केवल 2 नए मामले आए हैं

बता दें, चीन में 5 दिन के अवकाश के दौरान घरेलू यात्रा पाबंदियों में छूट के बाद फिर से खुले पर्यटक स्थलों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। चीनी मीडिया के मुताबिक अवकाश के शुरुआती दो दिनों में ही करीब 17 लाख लोग बीजिंग के पार्कों में पहुँचे जबकि शंघाई के मुख्य पर्यटन केंद्रों में 10 लाख से ज्यादा लोगों का आगमन हुआ।

केंद्र से ‘फ्री ट्रेन’ का किराया मुफ्त करने की माँग करने वाले उद्धव के मुंबई में मेडिकल के लिए श्रमिकों से वसूले जा रहे 200 रुपए

विभिन्न राज्यों के श्रमिकों के अपने घर पहुँचने का सिलसिला शुरू हो चुका है। सोमवार (मई 4, 2020) को कई श्रमिक स्पेशल ट्रेनें अपने शेड्यूल से चल रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के बाद भारतीय रेलवे ने सभी राज्यों में फँसे श्रमिकों और छात्रों को उनके गृह राज्य में वापस भेजने के लिए स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था की है। लेकिन मुंबई में श्रमिकों मेडिकल सर्टिफिकेट के नाम पर 200 रुपए चार्ज करने की खबर आई है।

इस बीच मुंबई मिरर ने जानकारी दी कि महाराष्ट्र के मुंबई में श्रमिकों से यात्रा किराया वसूलने के साथ ही उनके मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए 200 रुपए चार्ज किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के बोंडा के रहने वाले श्रमिक फकरुद्दीन शेख ने बताया कि 4 घंटे तक टेस्ट का इंतजार करने के बाद उनसे 200 रुपए भुगतान करने के लिए कहा गया। चूँकि उनके पास पैसे नहीं थे, इसलिए उन्हें बिना टेस्ट के ही वापस लौटना पड़ा। फकरुद्दीन शेख 9 महीने पहले रोजगार के सिलसिले में मुंबई आए थे।

हिन्दुस्तान ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया कि मलाड ईस्ट के रहने वाले 35 वर्षीय अजय राम ने कहा कि उन सभी वर्करों से मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए 200 रुपए लिए गए।

एक तरफ जहाँ मुंबई में श्रमिकों से मेडिकल सर्टिफिकेट के पैसे वसूलने का मामला सामने आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने केंद्र से अनुरोध किया है कि वह कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान ट्रेन से अपने गृह स्थान की यात्रा करने वाले प्रवासी कामगारों से किराया न लें। बता दें कि सीएम ठाकरे ने रविवार (मई 3, 2020) देर रात केंद्र को भेजे गए एक पत्र में कहा कि राज्य के विभिन्न केंद्रों में 40 दिनों तक करीब पाँच लाख प्रवासी कामगारों को खाना और रहने की जगह दी गई और अब उन्होंने मौजूदा हालात को देखते हुए अपने घर जाने की इच्छा व्यक्त की है।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा, “इन लोगों के पास बीते कुछ हफ्तों से आय का कोई स्रोत नहीं है। इसलिए मानवीय आधार पर केंद्र को उनसे यात्रा का किराया नहीं लेना चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि श्रमिकों के लिए रेलवे किराया मुफ्त है। उनसे कोई किराया नहीं लिया जा रहा है। रेलवे द्वारा जारी गाइडलाइन्स के अनुसार, जिस स्टेशन से ट्रेन चलेगी, वहाँ की राज्य सरकार की तरफ से यात्रियों को खाने के पैकेट और पानी मुहैया कराया जाएगा। यदि यात्रा 12 घंटे से अधिक के लिए होगी तो एक समय का खाना रेलवे की ओर से दिया जाएगा।

रेलवे द्वारा किए गए ट्वीट में भी स्पष्ट रुप से लिखा है कि किसी को टिकट ख़रीदने के लिए स्टेशन आने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि वही लोग यात्रा कर सकेंगे, जिन्हें राज्य सरकारों ने चुना है। साथ ही उनका पूरा किराया और भोजन-पानी के लिए भी राज्य सरकारें ही ख़र्च कर रही हैं। टिकट बिक्री चालू ही नहीं है तो मजदूरों से किराया वसूले जाने की बात कहाँ से आई? रेलवे ने उन यात्रियों को स्टेशन आने से भी मना किया है, जिन्हें राज्य सरकारें नहीं ला रही हैं। बता दें कि इससे पहले कॉन्ग्रेस ने भी इस पर राजनीति करते हुए कहा था पार्टी उन श्रमिकों का रेलवे किराया वहन करेगी। वो किराया, जो पहले से ही मुफ्त है। 

पत्रकार रिजवाना तबस्सुम ने की आत्महत्या, सपा नेता शमीम को बताया जिम्मेदार: ‘द वायर’ और BBC के लिए लिखती थीं

उत्तर प्रदेश के वाराणसी की स्वतंत्र पत्रकार रिजवाना तबस्सुम ने आत्महत्या कर ली है। 28 वर्षीय पत्रकार की लाश पंखे के फंदे से झूलते हुए मिली। वो लोहता थाना क्षेत्र के हरपालपुर गाँव की निवासी थीं। उनके कमरे से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसके बारे में माना जा रहा है कि उन्होंने मरने से पहले लिखा था। सुसाइड नोट में युवा समाजवादी पार्टी (सपा) नेता शमीम नोमानी को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है

घटना के बाद पुलिस ने सपा नेता शमीम को हिरासत में ले लिया है। उनसे पूछताछ जारी है। आत्महत्या करने वाली फ्रीलान्स जर्नलिस्ट रिजवाना तबस्सुम बीबीसी हि‍न्‍दी, द वायर, द प्रिंट, खबर लहरि‍या सहि‍त कई पत्र-पत्रिकाओं के लिए लिखा करती थीं। उनके कई आर्टिकल विभिन्न मीडिया पोर्टलों और प्रिंट में प्रकाशित हो चुके हैं। रिजवाना ने मिर्जापुर में स्थित बरकछा खुर्द स्थित बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के राजीव गाँधी कैम्पस से मास कम्युनिकेशन की डिग्री ली थी।

कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण हुए लॉकडाउन के बाद रि‍ज़वाना ने वाराणसी के रेड लाइट एरि‍या कहे जाने वाले मंडुआडीह के शि‍वदासपुर पर एक स्टोरी की थी। पुलिस ने बताया कि सोमवार (मई 4, 2020) की सुबह रिजवाना की आत्महत्या की सूचना मिली। वहाँ पहुँच कर पुलिस ने शव को कब्जे में लिया। उसी कमरे में पिन बोर्ड से लगा हुआ सुसाइड नोट भी मिला। इस मामले में मुकदमा दर्ज कर के पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।

जब रिजवाना सुबह 10 बजे तक कमरे से बाहर नहीं निकलीं और लगातार खटखटाने के बावजूद अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, तब परिजनों को संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस को फोन किया। पुलिस ने परिजनों के सामने ही दरवाजा तोड़ा। रिजवाना का सुसाइड नोट एक अख़बार के टुकड़े पर लिखा हुआ था। उनके पिता अजीजुल ने सुसाइड नोट के आधार पर सपा नेता शमीम नोमानी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

गुरुवार (अप्रैल 30, 2020) को रिजवाना की एक स्टोरी ‘जनज्वार’ में छपी थी, जिसमें तेज बारिश और ओलावृष्टि से तरबूज-खरबूज के किसानों की लाखों की फसलें बर्बाद ​होने के बारे में बताया गया था। रिजवाना को जानने वाले कई पत्रकारों का कहना है कि उनकी आत्महत्या के पीछे ज़रूर कोई गड़बड़ी है, जो पुलिस को सुलझाना पड़ेगा।

Fact-check: भारतीय वायुसेना ने लॉकडाउन के बीच पैदल घर जा रहे प्रवासी मजदूरों पर नहीं बरसाए फूल

सोमवार (मई 4, 2020) को फूल बरसाते हुए एक हेलीकॉप्टर की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें दिखाया जा रहा है कि हेलीकॉप्टर से पैदल चल रहे प्रवासी मजदूरों पर फूल बरसाया जा रहा है। भारतीय सेना के तीनों अंगों ने मेडिकल कर्मचारियों, पुलिस, सफाईकर्मियों और नागरिकों को कोरोना वायरस आपदा के बीच देशहित में योगदान देने के लिए रविवार (मई 3, 2020) को अपने अंदाज में धन्यवाद दिया। वायुसेना ने अस्पताल के ऊपर फूल बरसा कर कोरोना वॉरियर्स को शुक्रिया अदा किया।

अहमदाबाद मिरर के संपादक दीपल त्रिवेदी ने इस तस्वीर की तुलना फ्लाईपास्ट से करते हुए प्रवासी मजदूरों की समस्या से जोड़ने की कोशिश की।

इसके बाद इस तस्वीर को कॉन्ग्रेस सांसद मनिकम टैगोर समेत कई लोगों ने रीट्वीट किया। टोटल वरिया, जो कि खुद को पूर्व पत्रकार बताती हैं, ने भी इस तस्वीर को शेयर किया। हालाँकि उनका कहना है कि वो इस तस्वीर की पुष्टि नहीं करती हैं। उन्हें यह तस्वीर व्हाट्सएप के माध्यम से मिली।

इंडियन स्क्रिप्टर राइटर मयूर पुरी ने भी इस असत्यापित तस्वीर को ट्विटर पर यह कहते हुए शेयर किया कि उन्हें यह फेसबुक पर मिला।

इस तस्वीर को प्रसिद्ध फोटोग्राफर अतुल कसबेकर ने भी रीट्वीट किया।

Photographer Atul Kasbekar’s retweet (image courtesy: @saumyadipta on Twitter)

इसके अलावा कई अन्य लोगों द्वारा इस तस्वीर को शेयर किया गया।

हालाँकि यह तस्वीर डिजिटल तकनीक की मदद से एडिट करके बनाई गई है।

प्रवासी मजदूरों पर हेलीकॉप्टर से फूल बरसाते तस्वीर की सच्चाई क्या है

यह तस्वीर मार्च 2020 की है, जब लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूर सड़कों पर चल रहे थे। यानी कि यह तस्वीर फ्लाईपास्ट के एक महीने पहले की है।

इस तस्वीर को AFP फोटोग्राफर मनी शर्मा ने 27 मार्ट 2020 को फरीदाबाद में लिया था।

और ये फूल बरसाते हेलीकॉप्टर की तस्वीर पीआईबी भुवनेश्वर ने 3 मई 2020 को ट्विटर पर शेयर किया था।

गौरतलब है कि 3 मई को पूरे देश में 23 स्थानों पर वायुसेना ने फ्रंटलाइन वॉरियर्स को धन्यवाद देते हुए पुष्पवर्षा की। दिल्ली एनसीआर के अलावा मुंबई, जयपुर, गुवाहाटी, अहमदाबाद, पटना, लखनऊ और श्रीनगर में भी भारतीय वायुसेना ने कोरोना वॉरियर्स को धन्यवाद देने के लिए फ्लाईपास्ट किया। सीडीएस विपिन रावत ने दिल्ली में नेशनल वॉर मेमोरियल पर वीरगति को प्राप्त जवानों को भी श्रद्धांजलि दी।

खलीफा गैंग से खतरे के बाद ऋचा भारती को सुरक्षा का आश्वासन: BJP सांसद और SC अधिवक्ता ने मामले को उठाया

ऋचा भारती को झारखण्ड पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसके लिए ऑपइंडिया ने आवाज़ उठाई थी। अब धीरे-धीरे इस ख़बर का असर भी दिख रहा है। पुलिस ने सुरक्षा का आश्वासन दिया है। बता दें कि ऋचा तब सुर्ख़ियों में आई थीं, जब अदालत ने उन्हें कुरान बाँटने की अजीबोगरीब सज़ा दी थी। राँची के भाजपा सांसद संजय सेठ ने भी परिवार से बात कर के मदद का आश्वसन दिया है।

पीड़ित परिवार ने इस मामले को उठाने के लिए ऑपइंडिया को धन्यवाद दिया। ऋचा के पिता प्रकाश पटेल ने बताया कि सांसद संजय सेठ ने कहा है कि वो लॉकडाउन के ख़त्म होते ही इस मामले को देखेंगे और तब तक डरने की ज़रूरत नहीं है। सांसद ने कहा कि अभी घबराने की ज़रूरत नहीं है, पार्टी इस सम्बन्ध में जल्द ही कुछ करेगी। प्रकाश पटेल ने एसएसपी और डीआईजी को आवेदन देकर फिर से अपनी बात रखी है।

हालाँकि, वो लॉकडाउन का पालन करते हुए थाने नहीं गए लेकिन उन्होंने व्हाट्सप्प के माध्यम से ही अपनी बात रखी। ऋचा भारती की ओर से दिए गए आवेदन में बताया गया है कि उनके नाम से सोशल मीडिया में कई एकाउंट्स बन गए हैं, जिनसे तरह-तरह की बातें लिखी जा रही हैं और उन फेक एकाउंट्स को बंद कराया जाना चाहिए। ऋचा ने बताया कि उन्हीं फेक एकाउंट्स से कुछ टिप्पणियाँ की गई थीं, जिसके बाद उन्हें स्थानीय मुस्लिम समाज की ओर से धमकी मिल रही है।

अपनी शिकायत में ऋचा ने पुलिस को बताया है कि उनके घर के सामने मुस्लिम युवक थूक कर चले जाते हैं और चिल्लाते हुए कहते हैं, “कुरान की बेहूरमती का बदला, ऋचा भारती हम तुमसे लेकर रहेंगे‘। लॉकडाउन के बावजूद उनके घर के बाहर संदिग्ध लोगों की आवाजाही बढ़ी ही रहती है जबकि थाना वहाँ से ज्यादा दूर नहीं है। ऋचा ने आशंका जताई है कि उनके साथ दिवंगत कमलेश तिवारी जैसी कोई घटना घट सकती है। बता दें कि हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी को लखनऊ स्थित उनके दफ्तर में बेरहमी से मार डाला गया था।

ऋचा ने बताया है कि उनके घर के आसपास थूके जाने से इलाक़े में संक्रमण की घटना भी बढ़ सकती है, इसीलिए पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने पुलिस से सुरक्षा मुहैया कराने की माँग की है क्योंकि उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। फर्जी सोशल एकाउंट्स को लेकर ऋचा ने थाने में एक प्रार्थना पत्र पहले ही दे दिया था। परिवार की सुरक्षा की माँग की समीक्षा के लिए डीएसपी नीरज कुमार ऋचा के घर पर पहुँचे थे।

पुलिस ने ऑपइंडिया की ख़बर के बाद सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया है। साथ ही उन्होंने थाना प्रभारी को भी परिवार के सामने ही बुला कर ऋचा के घर के आसपास पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने के लिए कहा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत पटेल उमराव ने भी परिवार की मदद करते हुए उन्हें क़ानूनी रूप से सलाह उपलब्ध करवाई। उन्होंने आगे भी मदद का आश्वासन दिया है। बावजूद इसके परिवार को आशंका है कि कहीं राज्य सरकार में बदले की भावना न आ जाए।

कुरान बाँटने वाले प्रकरण में ऋचा के ख़िलाफ़ स्थानीय अंजुमन कमिटी के मंसूर खलीफा ने मुक़दमा दर्ज करवाया था। वो अब भी परिवार के पीछे पड़ा हुआ है। जिस शहजाद खलीफा ने बीच चौक पर ऋचा और उनके परिवार को मार कर भगाने की बात की थी, वो मंसूर का ही बेटा है। दोनों पिता-पुत्र का कारोबार जमीन से लेकर अन्य चीजों में फैला हुआ है और उन्हें स्थानीय लोग माफिया भी बताते हैं। उनके नेटवर्क को देखते हुए परिवार भयभीत है।

ऋचा भारती ने बताया कि उन्हें स्थानीय हिन्दुओं का भी समर्थन मिला है लेकिन डर की बात ये है कि खलीफा पिता-पुत्र ने अगर आक्रामक रुख अख्तियार किया तो फिर उनके पक्ष में कोई खड़ा होगा या नहीं। ऑपइंडिया से बात करते हुए सांसद संजय सेठ ने बताया कि वो परिवार को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आए देंगे। सांसद सेठ ने बताया कि उन्होंने प्रशासन से बात करके इस मामले को उठाया है और अब कोई परेशानी वाली बात नहीं है।

बता दें कि गुरुवार (अप्रैल 23, 2020) को अचानक से 5-6 पुलिसवाले ऋचा के घर आए और उनका मोबाइल फोन ले गए थे। मुद्दा क्या था, कारण क्या है, शिकायत किसने की- पुलिस ने ये सब कुछ भी नहीं बताया था। बिना किसी सर्च वॉरंट वगैरह के पुलिस घर में घुस गई और परिवार के सभी सदस्यों का मोबाइल फोन खँगालने लगी थी। प्राइवेट मैसेजों की भी पड़ताल की है। ऋचा के भाई का फोन लेकर छानबीन की गई थी। वो लोग बार-बार पूछते रहे कि किसकी शिकायत पर ये हो रहा है, तो कुछ नहीं बताया गया था।

वहीं ऑपइंडिया की ख़बर के बाद ऋचा के साथ प्रशासन ने भी सहयोग किया है। लॉकडाउन के बीच जब ऋचा की माँ की तबियत अचानक से ख़राब हो गई, तब प्रशासन ने ही गाड़ी भेज कर उन्हें अस्पताल पहुँचाया था। ऋचा की माँ सर्जरी के कारण बेड-रेस्ट पर हैं। इससे पहले पुलिस जब उनके घर पहुँची थी, तब भी उनकी तबियत अचानक से बिगड़ गई थी। अब देखना ये है कि परिवार को कब तक सुरक्षा मुहैया कराई जाती है।

GoAir के कर्मचारियों की सैलरी अटकी, Bajaj ने कहा – ‘दिमाग नहीं, दिल से लेंगे फैसला, सभी को देंगे पूरा वेतन’

मार्च में लॉकडाउन घोषित किए जाने से कई एयरलाइंस कंपनियों के विमानों का ऑपरेशन रुका पड़ा हुआ है। ऐसे में लो-कॉस्ट कैरियर गोएयर (GoAir) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक ने अपने सभी कर्मचारियों की सैलरी को सही समय पर दे पाने में असमर्थता जताई है। काम के बंद होने की वजह से पैसों की कमी की जानकारी देते हुए गोएयर के चेयरमैन नुस्ली वाडिया और एमडी जे वाडिया ने कर्मचारियों को एक संयुक्त पत्र लिखकर यह सूचित किया।

एयरलाइन कंपनी गोएयर ने अपने 40 फीसदी (मतलब 2,500) कर्मचारियों की सैलरी दे दी है। बाकी लोगों की सैलरी वर्ग-विशेष आधार पर या समय-समय (टुकड़ों-टुकड़ों में) के आधार पर देने की बात कही।

कंपनी के पत्र में कहा गया, “सरकार या बैंकिंग प्रणाली के तहत हमें कोई समर्थन नहीं मिल रहा है। कैश की किल्लत को देखते हुए मार्च और अप्रैल का वेतन देने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं। इस कारण दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद निर्णय लेने के सिवाय कोई चारा नहीं था।”

बिना बुकिंग के टिकट रद्द करने और टिकटों का रिफंड देने के चलते एयरलाइंस कंपनियों पर काफी दबाव है। लिहाजा एयरलाइंस कंपनियाँ कर्मचारियों के वेतन में कटौती कर रही हैं। कर्मचारियों को बिना वेतन के छुट्टी पर भेज रही हैं। साथ ही कुछ एयरलाइंस कंपनियों ने विदेशी पायलटों को भी जाने को कह दिया है।

वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसी भी कंपनी है, जो दिमाग से नहीं दिल से कम ले रही हैं। देश की बड़ी ऑटोमेकर कंपनी बजाज ऑटो ने अपने कर्मचारियों को तोहफा देते हुए अप्रैल महीने की सैलरी में कटौती नहीं करने का फैसला किया है। यानी लॉकडाउन की वजह से कर्मचारियों की बढ़ी परेशानियों को देखते हुए कंपनी अप्रैल महीने की पूरी सैलरी देगी।

बता दें कि अप्रैल महीने में लॉक डाउन की वजह से ऑटो सेक्टर में किसी भी तरह की खरीदारी नहीं हुई। जिसकी वजह से इसमें भीषण गिरावट देखने को मिली है। साथ ही घरेलू बाजार में किसी भी तरह की कोई सेल नहीं हुई है। महामारी की वजह सारे वाहनों की बिक्री बिल्कुल ठप रही। यही नहीं मैन्युफैक्चरिंग का काम तो मार्च के आखिरी सप्ताह से ही रुका है।

बजाज कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है, “हम इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि यह ऐसा समय है, जहाँ हमें दिमाग की जगह दिल से काम करना चाहिए।” लेटर में लिखा है, “हमारे बिजनस की सफलता शीर्ष से लेकर निचले स्तर तक के हर कर्मचारी पर निर्भर करती है। ऐसे में हम इससे पहले कि समाज के बड़े हिस्से को मदद देने के लिए आगे बढ़ें, हम सबसे पहले अपने खुद के लोगों को सुरक्षित करने के लिए बाध्य हैं। जब तक हम मदद करने की स्थिति में रहेंगे, तब तक हमारे अंतिम पायदान के कॉन्ट्रैक्ट वर्कर का एक भी बच्चा भूखे पेट नहीं सोएगा।”

इस बीच देश में लॉकडाउन का तीसरा चरण शुरू हो गया है। केंद्र सरकार ने ग्रीन जोन में पड़ने वाले मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स और कुछ SEZ में कामकाज शुरू करने की इजाजत दी है।

राही मासूम रजा को याद रखा, पंडित नरेंद्र शर्मा को भूल गए: महाभारत के संवादों पर वामपंथी प्रोपेगेंडा

भारत में हर चीज को मुगलों, और उर्दू की देन बताया जाता है। इसी तरह अब महाभारत के संवादों को भी राही मासूम रजा की देन बताया जाता है। इसी क्रम में उर्दू वेबसाइट रेख़्ता ने तो यहाँ तक लिख दिया कि राही मासूम रजा ने पिताश्री और मामाश्री जैसे शब्द गढ़े, जो उन्होंने उर्दू से अपनाया था। उदाहरण दिया गया कि उर्दू में अब्बाजान और चाचाजान जैसे शब्दों से प्रेरणा लेकर महाभारत के ये संवाद लिखे गए। क्या आप पंडित नरेंद्र शर्मा को जानते हैं?

रेख़्ता का ये वायरल ट्वीट मार्च 15, 2016 का है। ये अब इसीलिए वायरल हो रहा है क्योंकि अब लोगों को उर्दू वेबसाइट का प्रोपेगंडा समझ में आ रहा है और सच्चाई भी धीरे-धीरे बाहर आ रही है। सबसे पहली बात तो ये कि बीआर चोपड़ा की महाभारत से पहले ही रामानंद सागर की रामायण बन चुकी थी और इसका प्रसारण भी पूरा हो चुका था। ऐसे में ये कहना कि राही मासूम रजा ने ये शब्द ईजाद कर दिए, समझ से परे है। महान लेखक प्रेमचंद तक ने इन शब्दों का प्रयोग किया है।

पिछले दिनों ‘दैनिक जागरण’ में लिखे अपने लेख में वरिष्ठ लेखक अनंत विजय ने ध्यान दिलाया था कि ये बात एकदम से दब गई है कि महाभारत के संवादों को लिखने में राही मासूम रजा के साथ-साथ नरेंद्र शर्मा का भी नाम है, जिन्हें आज लोग भूल गए हैं। पंडित नरेंद्र शर्मा ने क़दम-क़दम पर राही मासूम रजा की महाभारत के संवाद लिखने में मदद की थी। चाहे पटकथा हो या संवाद, दोनों ही लेखकों की भूमिका अहम थी।

अगर आप रामायण देखेंगे तो उसमें मेघनाद अपने पिता रावण को ‘पिताश्री’ कह कर सम्बोधित करता है, तो क्या राही मासूम रजा ने इन शब्दों को ईजाद किया, ऐसा उर्दू के पैरोकार कैसे कह सकते हैं? रामानंद सागर ने रामायण के संवाद ख़ुद लिखे थे, ऐसे में इन शब्दों को गढ़ना तो नहीं लेकिन लोकप्रिय बनाने का श्रेय उन्हें क्यों नहीं मिलना चाहिए? पंडित नरेंद्र शर्मा वो व्यक्ति हैं, जिन्होंने ‘द्रोपदी’ नामक काव्य पहले ही लिख रखा था, ऐसे में महाभारत को लेकर उनका ज्ञान भी प्रभावी था।

ख़ुद राही मासूम रजा कहते थे कि वो महाभारत की भूल-भुलैया वाली गलियों में पंडित जी की ऊँगली पकड़ कर आगे बढ़ते थे। राही जो भी लिखा करते थे, उसे नरेंद्र शर्मा की सहमति के बाद ही आगे भेजा जाता था। बीआर चोपड़ा के घनिष्ठ मित्र शर्मा महाभारत के हर पहलू को लेकर अपनी राय देते थे। उनकी लिखीशंखनाद ने कर दिया, समारोह का अंत, अंत यही ले जाएगा, कुरुक्षेत्र पर्यन्त” ही उनकी अंतिम रचना है।

महाभारत के संवादों के अर्धसत्य पर अनंत विजय का लेख (साभार: दैनिक जागरण)

यूँ तो नरेंद्र शर्मा संस्कृतनिष्ठ थे और हिंदी में लिखते थे लेकिन उनकी उर्दू की समझ भी अच्छी थी। दरअसल, हिंदी और उर्दू को मिला कर के उसे हिंदुस्तानी कह कर ‘आज की भाषा’ बताते हुए प्रचारित किया जाता है लेकिन जब-जब शुद्ध हिंदी में संवाद लिखे गए, उन्हें जनता ने पसंद किया है। लेकिन, उर्दू को जबरन थोपने के लिए बॉलीवुड के वामपंथी गैंग ने सारा तिकड़म आजमाया। अनंत विजय इसके बारे में लिखते हैं कि ये सब ‘गंगा जमुनी तहजीब’ के नाम पर किया गया।

नरेंद्र शर्मा की बेटी लावण्या लिखती हैं कि उनके पिता सांस्कृतिक इतिहास और एस्ट्रोलॉजी में भी पारंगत थे। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य से मास्टर्स किया था। वो बताती हैं कि उनके गीतों में न सिर्फ़ देशभक्ति की भावना होती थी बल्कि मानवीय दृष्टिकोण भी होता था। बीते जमाने के गायक मुकेश ने उनकी ही निगरानी में रामचरितमानस गाकर रिकॉर्ड किया था। अनुराधा पौडवाल भी ‘दुर्गा सप्तशती’ गाने के लिए उन्हें श्रेय देती हैं।

अब वो समय है, जब महाभारत के लेखन के लिए राही मासूम रजा ही नहीं बल्कि नरेंद्र शर्मा को भी उनके बराबर का श्रेय मिलना चाहिए। लता मंगेशकर की आवाज़ में राज कपूर द्वारा निर्देशित ‘सत्य शिवम् सुंदरम’ गीत को उन्होंने ही हिंदी में लिखा था और इसे खूब पसंद किया गया, ये आज भी लोकप्रिय है। कृत्यों को नाटकीय और भ्रामक बनाने के लिए ही वामपंथी गैंग ने पंडित नरेंद्र शर्मा के योगदान को भुलाने के लिए जी-तोड़ मेहनत की है।