Home Blog Page 4865

तैमूर के वंशजों ने भारत को पनीर खाना सिखाया: कट्टरपंथियों का झूठ, ऋग्वेद में है सच्चाई

आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता। हाँ, बिरयानी और ताजमहल के बाद अब पनीर भी मजहबी हो गया है। ट्विटर पर राना सफ़वी ने अनस तनवीर को जन्मदिन की बधाई देते हुए दावा किया कि तैमूरी राजवंश ने भारत को पनीर से अवगत कराया। ये हास्यास्पद इसीलिए है क्योंकि वैदिक काल से लेकर सदियों तक भारत में गायों का महत्व रहा है और यहाँ दूध, दही, घी, मक्खन व छेना खाया जाता रहा है। गाय के उत्पादों से ही पंचामृत बनाने का प्रावधान भी रहा है।

‘फ़ूड फ़ूड’ टीवी चैनल के संस्थापक और भारत के लोकप्रिय शेफ संजीव कपूर पनीर की रेसिपी के बारे में बताते हैं कि ये हमेशा से भारतीय खानपान का हिस्सा रहा है। वो कहते हैं कि पनीर, कॉटेज चीज, चमन, छेना, सफ़ेद चीज- भारत की प्राचीन पुस्तकों में इन सबका वर्णन है। यहाँ तक कि शुरुआती वैदिक साहित्य में पनीर बनाने का वर्णन भी मिलता है। संजीव कपूर ने अपनी वेबसाइट पर बताया है कि कुछ इतिहासकारों की मानें तो पुर्तगाल ने पनीर बनाने की विधि को लोकप्रिय बनाया।

कपूर ने ये भी बताया है कि काफी लोग पनीर को पर्सियनों की देन बताते हैं लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि दक्षिण भारत में प्राचीन काल से ही बीन कर्ड और टोफू लोकप्रिय रहा है, जो एक तरह से पनीर का ही प्रकार है। भारत में कई सालों तक विदेशियों के प्रभाव के कारण हम कुछ चीजों को ज़रूर बाहरी नाम से जानते हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वो चीज भी बाहरी है और उसके बारे में हमारे पूर्वज एकदम अनभिज्ञ थे।

प्राचीन काल में जब भारतखण्ड की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार ही गाय और दुधारू जानवर थे, ऐसे में उन्हें दूध से बनने वाले उत्पादों और उसके प्रयोग की विधि न पता हो, ऐसा कैसे हो सकता है? भारत में दही से मक्खन अलग करने की प्रक्रिया काफ़ी पुरानी रही है। अगर कथित माइथोलॉजी की भी बात करें तो भगवान श्रीकृष्ण के बारे में पुराणों में वर्णित है कि वो बचपन में मक्खन चुरा कर खाया करते थे और मक्खन के घड़े तक पहुँचने के लिए तरह-तरह के यत्न किया करते थे। ऋग्वेद के इस श्लोक को देखिए:

दृते॑रिव तेऽवृ॒कम॑स्तु स॒ख्यम् । अच्छि॑द्रस्य दध॒न्वत॒: सुपू॑र्णस्य दध॒न्वत॑: ॥ (ऋग्वेद, 6.48.18)

इसमें दूध से बनने वाली चीज का जिक्र किया गया है, जिसे इतिहासकार पनीर ही मानते हैं। आज भले ही इसका नाम बदल गया हो लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि किसी चीज का नाम उर्दू या अंग्रेजी में लोकप्रिय हो जाए तो भारत के लोग इससे एकदम अनभिज्ञ रहे होंगे। वेदों का भी समय-समय पर गड़बड़ अनुवाद और इससे छेड़छाड़ की कोशिश की गई है लेकिन हमारे विद्वानों ने इसका असली मतलब अभी तक संभाल कर रखा है। पहले वेद मौखिक रूप से ही एक से दूसरे जनरेशन तक पास किए जाते थे।

चरक संहिता के आधार पर बीएन माथुर ने लिखा है कि भारत में ‘हीट एसिड कागुलेटेड मिल्क’ के बारे में ईसा से 300 वर्ष पूर्व का प्रमाण भी मिलता है। कुषाण और सतवाहन काल में इसका जिक्र मिलता रहा है। इसे ही आज पनीर के रूप में जानते हैं। कई लोग तो ये भी मानते हैं कि भारत में बंगाल में पहली बार पुतर्गालियों ने दूध फाड़ना सिखाया था जबकि कई इसे ईरान की देन बताते हैं। भारतीय इतिहास को दूसरों का ऋणी बनाने के लिए ये सब किया जाता है।

पश्चिमी भारत में आज भी पनीर को छेना ही कहा जाता है, जिसका रसगुल्ला से लेकर तरह-तरह की मिठाइयाँ बनाने में उपयोग किया जाता है। कल्याणी चलकर राजा सोमेश्वर-III द्वारा रचित पुस्तक ‘मानसोल्लास’ में बताया गया है कि सबसे पहले दूध को उबाल लें और इसमें कोई खट्टी चीज डाल दें। इसके बाद इसके ठोस भाग को किसी कपड़े से छान कर अलग करने की बात कही गई है। इसके बाद इसमें मसाला मिला कर तैयार करने की विधि बताई गई है।

ये तब की बात है, जब तैमूर का जन्म ही नहीं हुआ था तो तैमूरी डायनेस्टी को तो छोड़ ही दीजिए। पर्शिया से आए जिन लोगों को पनीर को लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है, वो तो अधिकतर बकरी और भेड़ के दूध का प्रयोग कर के ये सब बनाया करते थे। असल में भारत को अगर इस्लामी इतिहासकारों ने कुछ दिया है तो वो है हिंसा, बलात्कार और नरसंहार। उन्होंने यहाँ की संपत्ति को लूटा और लोगों को मारा।

‘मानसोल्लास’ में पनीर का वर्णन

असल में जिस तरह से आजकल इस्लामी कट्टरवादी प्रचार कर रहे हैं, कल को वो ये भी कह सकते हैं कि तमिल और संस्कृत की जननी उर्दू ही है। महाभारत सीरियल के संवाद के लिए राही मासूम रजा को भ्राताश्री और पिताश्री जैसे शब्दों को उर्दू के अब्बाजान और भाईजान के आधार पर गढ़ने की बात कही गई। जबकि पंडित नरेंद्र शर्मा को भुला दिया गया, जिन्होंने राही मासूम रजा के साथ मिल कर महाभारत के सिर्फ़ संवाद ही नहीं लिखे थे बल्कि क़दम-क़दम पर उनका मार्गदर्शन भी किया था।

CM योगी को गोली मारने की बात कहने वाला ASI तनवीर खान गिरफ्तार, कई धाराओं में मामला दर्ज

सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोली मारने की बात कहने वाले ASI तनवीर खान को यूपी पुलिस ने सोमवार (मई 4, 2020) को गिरफ्तार कर लिया है। उत्तर प्रदेश के सीएम के लिए अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में बिहार के इस पुलिसकर्मी को नालंदा जिले के दीपनगर थाना इलाके से यूपी की गाजीपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस ने सोशल मीडिया में अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में उस पर कई धाराएँ लगाई गईं और फिलहाल उसको जेल भेज दिया है।

गाजीपुर एसपी डॉ ओमप्रकाश सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया है कि तनवीर खान गाजीपुर के दिलदारनगर क्षेत्र का रहने वाला है और बिहार के नालंदा में पुलिस विभाग में बतौर आरक्षी तैनात था। उस पर आरोप है कि उसने 24 अप्रैल को अपने फेसबुक पेज पर यूपी सीएम के खिलाफ रमजान में अजान के मामले को लेकर अभद्र टिप्पणी की थी।

वहीं, नालंदा जिले के दीपनगर थाने के इंचार्ज धर्मेंद्र कुमार के मुताबिक आरोपित पुलिसकर्मी तनवीर की तैनाती राजगीर के फॉरेस्ट हाउस के पास थी। सोमवार को यूपी के दिलदारनगर थाने की पुलिस टीम दर्ज एफआईआर की कॉपी के साथ नालंदा पहुँची और वहाँ तनवीर खान को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में यूपी पुलिस की टीम बिहार पुलिस के आरोपित को अपने साथ ले गई।

NBT
UP पुलिस की एफआईआर

क्या लिखा था ASI ने?

24 अप्रैल को एक फेसबुक पोस्ट सामने आया। इस पोस्ट में अजान न होने पर योगी आदित्यनाथ को गोली मारने की बात थी। जिस पर दिलदारनगर निवासी धनन्जय और विशाल ने स्थानीय पोस्ट में अपनी शिकायत दर्ज कराई। मामला संज्ञान में आने के बाद पहले इस पोस्ट को देखकर अंदाजा लगाया गया कि ये किसी सिरफिरे का कारनामा है। मगर, बाद में जब इस मामले को गंभीरता से लिया गया तो मालूम चला कि सीएम योगी के लिए इतनी लापरवाही भरा पोस्ट लिखने वाले बिहार पुलिस का जवान है।

बता दें कि तनवीर खान ने अपने फेसबुक एकाउंट से पोस्ट किया था, “दिलदार नगर और पूरे कामसरोवर (कामसर) में अजान नहीं हो रही है। योगी को गोली मार दो **को।”  मगर, 30 अप्रैल तक पोस्ट वायरल होने के बाद तनवीर खान ने अपना एकाउंट डिएक्टिवेट कर लिया। लेकिन कुछ लोगों ने ट्विटर पर उसके पोस्ट के स्क्रीनशॉट लेते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस से इस पर संज्ञान लेने की अपील की।

सोशल मीडिया पर विवेक भारद्वाज ने ऐसी मानसिकता के लोगों का पुलिस विभाग में होना दुर्भाग्य बताते हुए लिखा है, “इंदिरा गाँधी के साथ क्या हुआ था, यह जानने के बावजूद इस प्रकार की मानसिकता के लोगों का पुलिस और भारतीय सेना में होना आश्चर्यजनक है। ऐसे लोग सलाखों के भीतर होने चाहिए, ना कि वर्दी में।”

जामिया इस्लामिया ने जारी किया फरमान, छात्रों से कहा- हॉस्टल खाली करो और घर जाओ

जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने तत्काल प्रभाव से छात्रों को हॉस्टल (गर्ल्स और ब्यॉयज) खाली करने का आदेश दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से छात्रों को निर्देश देते हुए कहा गया है कि सरकार द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइंस का पालन करते हुए छात्र अपने घर जा सकते हैं। बता दें कि विश्वविद्यालय ने यह आदेश शुक्रवार (मई 1, 2020) को जारी किया।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्रों के लिए सरकार की नई गाइडलाइंस में ट्रांसपोर्ट और ट्रैवल प्रोटोकॉल है। गौरतलब है कि लॉकडाउन घोषित किए जाने के कारण कई छात्र अपने घर नहीं जा सके थे और हॉस्टल में ही रुके हुए हैं। 

लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में फँसे लोगों को घरों तक पहुँचाने के लिए राज्य सरकारों की अपील के बाद भारतीय रेलवे स्पेशल ट्रेनें भी चला रही हैं। वहीं कई राज्य सरकारों ने विशेष बसों के माध्यम से अपने राज्यों के छात्रों की वापसी सुनिश्चित करवाई है। 

आधिकारिक पत्र

जामिया के विद्यार्थियों को हॉस्टल खाली करने का फरमान

इन व्यवस्थाओं के शुरू होने के बाद जामिया विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों से हॉस्टल खाली करने को कहा है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ए.पी. सिद्धकी ने शुक्रवार देर रात एक पत्र जारी करते हुए कहा, “जो विद्यार्थी हॉस्टल में रह गए थे, उन्हें अब हॉस्टल खाली करने का निर्देश दिया जाता है। विश्वविद्यालय के आसपास का क्षेत्र पहले ही हॉटस्पॉट घोषित किया जा चुका है। ऐसे में विश्वविद्यालय द्वारा आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना कठिन होगा।”

विश्वविद्यालय प्रशासन ने हॉस्टल में मौजूद छात्रों से कहा, “आप सभी को मालूम है कि कोरोना वायरस के कारण विश्वविद्यालय बंद है। यहाँ लाइब्रेरी समेत सभी शैक्षणिक गतिविधियाँ पूरी तरह से बंद हैं। विश्वविद्यालय जुलाई में परीक्षाएँ लेगा और इसी के साथ नया सत्र सितंबर 2020 से शुरू होगा।”

गृह मंत्रालय ने श्रमिकों के लिए जारी किया ट्रेन

गृह मंत्रालय ने राज्यों को अपने निवासियों को बसों में वापस लाने की अनुमति दे दी है। इसके बाद केंद्र सरकार ने फँसे हुए प्रवासियों को घर पहुँचाने के लिए ‘श्रमिक स्पेशल ट्रेन’ की शुरुआत की है। इन ट्रेनों में प्रवासी मजदूरों के अलावा विभिन्न राज्यों में फंसे स्टूडेंट्स, शरणार्थी, टूरिस्ट को भी घर भेजा जा रहा है।

यात्रा से पहले सभी यात्रियों की स्कीनिंग की जा रही है और केवल उन्हीं लोगों को भेजा जा रहा है, जिनमें कोरोना वायरस के कोई लक्षण नहीं दिखाई नहीं दे रहे। इसके साथ ही मास्क पहनना अनिवार्य है। साथ ही यात्रियों को ट्रेन में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इंडियन रेलवे ने साफ कर दिया है कि टिकट खरीदने के लिए कोई भी पैसेंजर रेलवे स्टेशन नहीं जाएगा। पैसेंजर ट्रेन का परिचालन अभी शुरू नहीं किया गया है।

इन ट्रेनों में केवल राज्य सरकार द्वारा चिन्हित किए गए और ​रजिस्टर किए गए लोगों को ही ट्रैवल करने का मौका मिलेगा। गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस के मुताबिक, राज्यों द्वारा ही इन यात्रियों को टिकटों की व्यवस्था की जाएगी। व्यक्तिगत तौर पर किसी को भी रेलवे टिकट नहीं जारी करेगा।

पत्रकार रिजवाना तबस्सुम को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में सपा नेता शमीम नोमानी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के वाराणसी की स्वतंत्र पत्रकार रिजवाना तबस्सुम आत्महत्या मामले में वाराणसी पुलिस ने आरोपित सपा नेता शमीम नोमानी को गिरफ्तार कर लिया है। 28 वर्षीय स्वतंत्र पत्रकार का शव सोमवार (मई 4, 2020) को घर के अंदर पंखे के लटका हुआ मिला था। उनके कमरे से मिले एक सुसाइड नोट में युवा समाजवादी पार्टी (सपा) नेता शमीम नोमानी को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।

घटना के बाद रिजवाना के पिता अजीजुल हकीम ने लोहटा थाने में सुसाइड नोट के आधार पर शमीम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद पुलिस ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए घटना के कुछ घंटों ही बाद सपा नेता शमीम नोमानी को गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि नोमानी समाजवादी पार्टी की जिला कार्यकारिणी के सदस्य हैं।

आगामी विधानसभा चुनाव में वो सपा से टिकट के दावेदार थे, हालाँकि अभी तक पत्रकार की आत्महत्या मामले में सपा नेता की भूमिका को लेकर स्थिति साफ नहीं हो सकी है और वाराणसी पुलिस भी इस घटना में सपा नेता की भूमिका पर कुछ भी कहने से बच रही है। पुलि‍स प्रथम दृष्टया मामला को प्रेम प्रसंग का मान कर चल रही है।

सपा नेता को गिरफ्तार करने के बाद से ही पुलिस आरोपित से पूछताछ में जुट गई है। साथ ही लोहता पुलिस रिजवाना के मोबाइल की कॉल डिटेल के आधार पर भी मामले की जाँच कर रही है। लोहता थानाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह के मुताबिक शमीम नोमानी को गिरफ्तार किया तो उसने खुद को सपा का जिला उपाध्यक्ष बताते हुए कहा कि वह साजिश का शिकार हुआ है।

वहीं समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुजीत यादव लक्कड़ ने कहा कि आरोपित शमीम नोमानी का हमारी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। रिजवाना के परिजनों का आरोप है कि शमीम नोमानी फोन करके अक्सर उन्हें परेशान करता था। इसे लेकर रिजवाना बताती थी कि शमीम परेशान करना बंद नहीं करेगा तो वह जान दे देगी।

गौरतलब है कि फ्रीलान्स जर्नलिस्ट रिजवाना तबस्सुम बीबीसी हि‍न्‍दी, द वायर, द प्रिंट, खबर लहरि‍या सहि‍त कई पत्र-पत्रिकाओं के लिए लिखा करती थीं। उनके कई आर्टिकल विभिन्न मीडिया पोर्टलों और प्रिंट में प्रकाशित हो चुके हैं। रिजवाना ने मिर्जापुर में स्थित बरकछा खुर्द स्थित बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के राजीव गाँधी कैम्पस से मास कम्युनिकेशन की डिग्री ली थी।

सिर्फ केरल, महाराष्ट्र और राजस्थान की सरकार ने प्रवासी मजदूरों से वसूले ट्रेन का किराया: रिपोर्ट्स

देश में इन दिनों प्रवासी मजदूरों से ट्रेन का किराया वलूसने के मुद्दे पर राजनीति गर्माई हुई है। प्रवासी मजदूरों से किराया वसूलने के मुद्दे पर चल रही राजनीति के बीच रेलवे ने साफ किया है कि उसने प्रवासी मजदूरों से कोई किराया नहीं वसूला है। इस संबंध में राज्य व केंद्र सरकार, रेल मंत्रालय के साथ मिलकर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी थी कि किराया भी प्रदेश सरकार वहन करेगी।

कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अधिकांश राज्यों से राज्य सरकारों ने सरकारी फंड से प्रवासी मजदूरों के किराए का भुगतान किया है, जबकि महाराष्ट्र, केरल और राजस्थान की सरकार ने प्रवासी मजदूरों को उनके पैतृक राज्य पहुँचाने के लिए उनसे किराया वसूला है।

पीटीआई ने बताया कि महाराष्ट्र के राज्य मंत्री नितिन राउत ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर राज्य से जाने वाले प्रवासियों की यात्रा लागत वहन करने का आग्रह किया है। उन्होंने रविवार (मई 3, 2020) को रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि प्रवासियों के परिवहन का खर्च रेलवे वहन करे।

इसके अलावा, टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि महाराष्ट्र के साथ ही केरल और राजस्थान ने भी प्रवासियों को रेलवे टिकट के लिए भुगतान करने के लिए कहा है।

यहाँ पर उल्लेखनीय है कि इन तीनों राज्यों- महाराष्ट्र, राजस्थान और केरल में से दो राज्यों में कॉन्ग्रेस सरकार में है। राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार है, जबकि महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी की सरकार है, जिसमें कॉन्ग्रेस सहयोगी पार्टी है। बता दें कि इससे पहले, यह कॉन्ग्रेस पार्टी ही थ, जिसने प्रवासी श्रमिकों के रेलवे टिकटों की लागत वहन करने का वादा किया था, जबकि इसकी अपनी राज्य सरकारें ही प्रवासियों से रेलवे किराए वसूल रही हैं।

गौरतलब है कि सोमवार (मई 4, 2020) को कई विपक्षी दलों, खासकर कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा इस अफवाह को हवा दी गई कि रेलवे प्रवासी मजदूरों से किराया वसूल रहा है। इतना ही नहीं, कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष ने तो यहाँ तक कह दिया कि उनकी पार्टी श्रमिकों का रेलवे किराया वहन करेगी। वो किराया, जो पहले से ही मुफ्त है। वहीं महाराष्ट्र के मुंबई में तो उद्धव सरकार प्रवासी मजदूरों से मेडिकल सर्टिफिकेट के 200 रुपए वसूल रही है

बता दें कि रेलवे द्वारा जारी गाइडलाइन्स के अनुसार, जिस स्टेशन से ट्रेन चलेगी, वहाँ की राज्य सरकार की तरफ से यात्रियों को खाने के पैकेट और पानी मुहैया कराया जाएगा। यदि यात्रा 12 घंटे से अधिक के लिए होगी तो एक समय का खाना रेलवे की ओर से दिया जाएगा। साथ ही राज्य सरकारों के द्वारा यात्रियों को आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। प्रत्येक ट्रेन लगभग 1,200 यात्रियों को ले जा सकती है।

सरकार द्वारा श्रमिकों के लिए ट्रेनें चलाने की घोषणा के बाद पत्रकार रोहिणी सिंह और वामपंथी नेता सीताराम येचुरी सहित रवीश कुमार जैसों ने किराया वसूले जाने की अफवाह फैलाई थी, जिसका आधार ‘द हिन्दू’ की एक ख़बर को बनाया गया था, जो भ्रामक और झूठी थी। शुरुआत में ज़रूर कुछ संशय था लेकिन जब शिवराज सिंह चौहान सहित अन्य मुख्यमंत्रियों ने इस पर स्पष्टीकरण दिया कि राज्य सरकारें ख़र्च वहन करेंगी, तो भी इनका प्रोपेगेंडा चलता रहा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तो पूछ दिया कि मजदूरों का किराया राज्यों पर क्यों थोपा जा रहा है? कॉन्ग्रेस का इस पर क्या कहना है?

पश्चिम बंगाल में 37 राशन डीलर गिरफ्तार, 42 के लाइसेंस रद्द, PDS का राशन बेचने का लगा था आरोप

पश्चिम बंगाल में प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए कम से कम 37 राशन डीलरों को गिरफ्तार किया। वहीं, पुलिस ने 42 अन्य लोगों के लाइसेंस रद्द कर दिए। इन लोगों पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) वस्तुओं के दुरुपयोग में कथित रूप से शामिल होने का आरोप है

पुलिस की तरफ से कहा गया है कि राशन के मुद्दे पर फर्जी खबर बनाने और प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस मामले में एक ट्वीट कर कहा, “अप्रैल महीने में 21,200 राशन की दुकानों से 9 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन दिया गया।”

दरअसल, राज्य भर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली आउटलेट्स के बाहर झड़प की शिकायत मिल रही थी। स्थानीय लोगों का कहना था कि पीडीएस आउटलेट्स पर राशन का सही से वितरण नहीं हो रहा है।

उल्लेखनीय है कि बीजेपी सांसद बाबुल सुप्रियो ने राज्य की ममता सरकार पर केन्द्र से गरीबों के लिए मिलने वाले राशन को राइस मिलों को बेचने का आरोप लगाया था। इसे साबित करने के लिए सुप्रियो ने इसका एक वीडियो भी शेयर किया था। वीडियो में देखा जा सकता है कि ट्रक पर सैकड़ों बोरे में भरकर चावल राइस मील के अंदर लाया गया है। सुप्रियो ने ट्वीट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से पूछा था कि आखिर मुख्यमंत्री यह बताएँ कि बंगाल में गरीबों के लिए केंद्र सरकार जो राशन भेज रही है, उसे राशन मील को क्यों बेच रही है? उन्होंने दावा किया है कि सत्तारूढ़ पार्टी के नेता इस राशन बिक्री में शामिल हैं और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इसके लिए अनुमति मिली हुई है।

इससे पहले मुर्शिदाबाद में ख़राब राशन मिलने के बाद लोगों ने हंगामा किया था और साथ ही सरकार के ख़िलाफ़ नारेबाजी भी की थी। वायरल हुए वीडियो में लोग मारामारी करते हुए और कुर्सी उठा-पटक करते दिख रहे थे। लोगों का कहना है कि पीडीएस प्रणाली के तहत उन्हें काफ़ी ख़राब गुणवत्ता वाला राशन दिया जा रहा है।

लोगों का ये भी कहना था कि ममता के पश्चिम बंगाल में न सिर्फ़ घटिया राशन दिया जाता है बल्कि काफ़ी कम मात्रा में भी दिया जाता है। लोगों ने पुलिस के सामने ही तोड़फोड़ मचाई। बाद में पुलिस ने किसी तरह मामले को काबू किया भीड़ ने राशन डीलर हलीम शेख के घर की कई चीजें तोड़ डालीं। भीड़ ने राशन डीलर हलीम शेख के घर की कई चीजें तोड़ डालीं। राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी हाल ही में राज्य में पीडीएस पर चिंता व्यक्त की थी। राज्यपाल ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि निशुल्क राशन गरीबों के लिए हैं, तिजोरियों में बंद करने के लिए नहीं है। धोखाधड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

पाकिस्तान अब भी कर रहा आतंकी एजेंडे पर काम, सीजफायर तोड़ने और आतंक फैलाने पर देंगे करारा जवाब: सेना प्रमुख

जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों का सामना करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए देश के पाँचों जवानों को सेना प्रमुख ने नमन करते हुए पाकिस्तान पर निशाना साधा है। सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने कहा कि पाकिस्तान की दिलचस्पी देश में कोरोनो के फैलते संक्रमण को रोकने में नहीं बल्कि वह अब भी भारत के खिलाफ आतंकी एजेंडे पर काम कर रहा है।

थल सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने कहा कि भारत को अपने उन पाँच सुरक्षाकर्मियों पर गर्व है, जिन्होंने आम नागरिकों की जान बचाते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जब तक राज्य द्वारा प्रायोजित आतंकवाद की अपनी नीति नहीं छोड़ता, हम उचित और सटीक जवाब देना जारी रखेंगे।

सेना प्रमुख ने कहा कि पाक की ओर से लगातार भारत में घुसपैठ की कोशिश दर्शाती है कि पाकिस्तान की दिलचस्पी देश में लगातार फैलते कोरोना संक्रमण को समाप्त करने में नहीं है। पाकिस्तान अब भी भारत में आतंकवादियों को धकेलने के अपने अदूरदर्शी और तुच्छ आतंकी एजेंडे पर काम कर रहा है।

थलसेना प्रमुख ने कहा कि कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा ने आगे बढ़कर नेतृत्व किया और सुनिश्चित किया कि ऑपरेशन के दौरान सहायकों का नुकसान नहीं हो। मैं अपनी सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के बहादुर जवानों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना और आभार व्यक्त करता हूँ।

संघर्ष विराम उल्लंघन और आतंकवादी गतिविधियों पर सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कहा कि भारतीय सेना संघर्ष विराम का उल्लंघन और आतंकवाद का समर्थन करने वाले सभी कृत्यों का करारा जवाब देगी, क्योंकि क्षेत्र में शांति बहाल करने की जिम्मेदारी पाकिस्तान पर है। उन्होंने कहा कि पाक समर्थित आतंकवादी कश्मीर में निर्दोष नागरिकों को निशाना बना रहे हैं ताकि वे उनकी आजादी की प्रोपगेंडा को फैला सके।

बता दें कि कल 3 मई को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में स्थित हंदवाड़ा में आतंकियों के साथ एनकाउंटर के दौरान एक मेजर और एक कर्नल समेत 5 भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। इन सभी वीर सपूतों ने एक इमारत में छिपे आतंकियों से लोहा लेने के लिए बाहर से हमला करने के बजाय अंदर जाकर कार्रवाई करना मुनासिब समझा था, ताकि नागरिकों की जानमाल की क्षति न हो। इस एनकाउंटर में दो आतंकी मारे गए थे।

वहीं पाँच जवानों के वीरगति को प्राप्त होने पर रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया था, “हंदवाड़ा में शहीद हुए हमारे साहसी सैनिकों और सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि। उनकी वीरता और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। उन्होंने राष्ट्र के लिए अत्यंत समर्पण के साथ काम किया और हमारे नागरिकों की रक्षा के लिए अथक परिश्रम किया। उनके परिवारों और दोस्तों के प्रति संवेदना।”

शराब के लिए हंगामा: सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियाँ तो दिल्ली सरकार ने दुकानों को बंद कराने के दिए आदेश

महीनों से बंद शराब की दुकानों को जब आज (4 मई, 2020) खोला गया तो नजारा परेशान करने वाला था। दिल्ली में सुबह से ही शराब की दुकानों के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई और लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियाँ उड़ाई। इस दौरान पुलिस को नियमों का पालन कराने के लिए कई स्थानों पर लाठी चार्ज तक करना पड़ा। इससे परेशान होकर दिल्ली सरकार ने तत्काल प्रभाव से फिलहाल अगले आदेश तक सभी शराब की दुकानों को बंद कराने का आदेश दिया है।

दिल्ली सरकार द्वारा दिए गए आदेश के बाद दिल्ली में सभी शराब की दुकानों को बंद करना पड़ा। वहीं शराब की दुकानों के बाहर घंटों से लाइनों में खड़े लोग मायूस होकर वापस लौट गए। कुछ स्थानों पर तो हालात ऐसे रहे कि दुकानों के बाहर लाइनों में खड़े लोगों को दिल्ली पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर वहाँ से खदेड़ा। इसके बाद पुलिस के जवानों को शराब की दुकानों के बाहर तैनात कर दिया गयाा।

दरअसल, देश के अन्य राज्यों की तरह ही दिल्ली में भी सोमवार से शराब की दुकानें खोली गईं, लेकिन जगह-जगह अफरातफरी का माहौल देखा गया। इसके बाद भी लगातार दुकानों के बाहर बढ़ती भीड़ को देख दिल्ली पुलिस ने फिलहाल शराब की सभी दुकानों को बंद करने के आदेश दिए हैं।

दिल्ली आबकारी विभाग और अन्य विभागों की तरफ़ से शराब की दुकानों को खोलने उनकी समय सीमा की कोई पुख्ता जानकारी न मिलने के चलते दिल्ली पुलिस के डीसीपी ईस्ट जसमीत सिंह ने एहतियात के तौर पर पहले ही अपने जिले के सभी एसएचओ को वायरलेस सेट पर मैसेज भेजकर ऑर्डर दिए थे कि ईस्ट जिले में कोई शराब की दुकान नहीं खुलनी चाहिए।

बता दें कि दिल्ली के सभी जिले रेड जोन में होने के बाद भी आबकारी विभाग ने दिल्ली में शराब की दुकानें खोलने का आदेश रविवार को ही जारी कर दिया था। इस आदेश के बाद दिल्ली में शराब की 150 दुकानों को खोलने की अनुमति मिली है। ये दुकानें सुबह 10 बजे से देर शाम 7 बजे तक खुलेंगी।

गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने शराब, पान, गुटका, तंबाकू आदि बेचने की दुकानों को संचालित करने की अनुमति देने केे साथ अपने आदेश में इसके लिए कुछ शर्तें भी तय की हैं। इसमें दुकानदार के साथ उपभोक्ताओं को शारीरिक दूरी के साथ वे सारे नियम मानने होंगे, जिससे कोराना वायरस संक्रमण से बचाव हो सके। इन नियमों को सबके लिए मानना अनिवार्य होगा।

दिल्ली सरकार के इस फैसले पर दिल्ली प्रदेश भाजपा ने अपना विरोध जताया। विधानसभा नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने पत्र लिख कर माँग की थी कि इस समय में राशन के सही वितरण और गरीबों को भोजन उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए, न कि शराब की दुकानें खोलने पर जोर दिया जाना चाहिए, क्योंकि दिल्ली सरकार के इस फैसले से कोरोना महामारी और तेजी से फैलेगी। साथ ही यह तर्क भी दिया कि शराब की दुकानें खुलने से दिल्ली में अपराध में वृद्धि होगी।

अर्नब गोस्वामी पर पुलिस को ‘धौंस’ दिखाने का आरोप: महाराष्ट्र सरकार ने SC में दाखिल की याचिका

महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार (मई 4, 2020) को मुंबई के डिप्टी कमिश्नर (जोन III) की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर किया। जिसमें आरोप लगाया गया कि रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी ने पुलिस को ‘धौंस’ दिखाया।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 24 अप्रैल को अपनी सुनवाई में अर्नब गोस्वामी को 3 सप्ताह की अंतरिम संरक्षण दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इस 3 सप्ताह में अर्नब अग्रिम जमानत ले सकते हैं। महाराष्ट्र सरकार ने इसी अंतरिम संरक्षण के खिलाफ अदालत का रुख किया है। इसमें अर्नब को घमंडी भी कहा गया है।

बता दें कि एक शो के दौरान अर्नब गोस्वामी की टिप्पणी से बौखलाए कॉन्ग्रेसियों ने अर्नब के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। अर्नब गोस्वामी के खिलाफ पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान और झारखंड के अलग-अलग थानों में एक दर्जन से अधिक FIR कॉन्ग्रेस नेताओं के द्वारा दर्ज कराई गईं थी। नागपुर में दंगे भड़काने के आरोप में अर्नब के खिलाफ आईपीसी की धारा 153, 153A, 153B, 295A, 208, 500, 504, 505(2), 506, 120B और 117 में केस दर्ज किया गया।

कॉन्ग्रेसियों ने अर्नब गाेस्वामी पर आराेप लगाया था कि महाराष्ट्र के पालघर जिले में दाे साधुओं समेत तीन की लिचिंग मामले में उन्होंने अपने टीवी चैनल के कार्यक्रम में देश के लोगों को गुमराह किया। धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, निवास भाषा के आधार पर नफरत फैलाने की काेशिश की है।

सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद मुंबई पुलिस ने मंगलवार (अप्रैल 27, 2020) को अर्नब गोस्वामी से क़रीब 12:30 घंटों तक लगातार पूछताछ की। अर्नब गोस्वामी ने कहा कि उनसे जो भी सवाल किए गए, उन सबका जवाब उन्होंने दिया और साथ ही अपने बयानों की सत्यता साबित करने के लिए सारे सबूत भी पेश किए। 

अर्नब गोस्वामी से पूछताछ के बाद शनिवार (मई 2, 2020) को रिपब्लिक टीवी के मुख्य वित्तीय अधिकारी एस सुंदरम को पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

22-23 अप्रैल की रात एडिट कॉल निपटा कर लौटते हुए अर्नब गोस्वामी और उनकी पत्नी पर कॉन्ग्रेस के दो मोटरसाइकिल सवार गुंडों ने हमला किया था। रिपब्लिक टीवी एंकर अर्नब गोस्वामी ने खुद इस हमले की जानकारी देते हुए बताया था कि उनकी कार के आगे अपनी मोटरसाइकिल खड़ी कर दी और फिर हमला किया।

मॉब लिंचिंग पर सोनिया गॉंधी की चुप्पी को लेकर अर्नब ने कहा था, “सोनिया गाँधी तो खुश हैं। वो इटली में रिपोर्ट भेजेंगी कि देखो, जहाँ पर मैंने सरकार बनाई है, वहाँ पर हिन्दू संतों को मरवा रही हूँ। वहाँ से उन्हें वाहवाही मिलेगी। लोग कहेंगे कि वाह, सोनिया गाँधी ने अच्छा किया। इन लोगों को शर्म आनी चाहिए। क्या उन्हें लगता है कि हिन्दू चुप रहेंगे? आज प्रमोद कृष्णन को बता दिया जाना चाहिए कि क्या हिन्दू चुप रहेंगे? पूरा भारत भी यही पूछ रहा है। बोलने का समय आ गया है।”

साथ पढ़े, बलिदान भी साथ-साथ: कर्नल आशुतोष, मेजर अनुज सूद की दोस्ती के हर तरफ चर्चे

उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में स्थित हंदवाड़ा में आतंकियों के साथ एनकाउंटर के दौरान 5 भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। आज पूरा देश शहीदों को नम आखों से नमन कर रहा है, लेकिन इनमें शामिल कर्नल आशुतोष और मेजर अनुज सूद की दोस्ती के चर्चे हर भारतीय की जुबान पर हैं, क्योंकि दोनों साथ पढ़े और साथ-साथ ही वीरगति को प्राप्त हो गए। इतना ही नहीं दोनों की जुगलबंदी इतनी गहरी थी कि घाटी में आतंकवादियों की रूह काँपती थी।

हम बात कर रहे हैं बीते दिन (3 मई, 2020) कुपवाड़ा के हंदवाड़ा में आतंकियों से हुई मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए कर्नल आशुतोष और मेरज अनुज सूद के बीच गहरी दोस्ती की। जानकारी के मुताबिक 2011 में बटालियन की जम्मू-कश्मीर के लिए ट्रिप जानी थी। कर्नल आशुतोष जो उन दिनों मेजर थे और वे इसके इंचार्ज थे। उस समय से ही दोनों के बीच बेहतर जुगलबंदी थी। सौभाग्य से मेजर अनुज भी उसी बटालियन में कमीशंड हुए।

कर्नल आशुतोष शर्मा हमेशा अपनी यूनिट के जवानों का हौसला बढ़ाते रहते थे। उन्होंने पिछले महीने जवानों का हौसला बढ़ाते हुए कहा था कि यह यूनिट मेरा घर है और मेरे सभी साथी जवान घर के सदस्य हैं। दरअसल कर्नल ने ये बातें 3 अप्रैल को टीम अरपनी टीम से उस समय कहीं थीं कि जब हंदवाड़ा और सोपोर में अलग-अलग ऑपरेशन में चार आतंकी और उनके पाँच मददगार गिरफ्तार किए गए थे। इनके कब्जे से सेना ने भारी मात्रा में गोला बारूद बरामद हुआ था।

45 साल के कर्नल आशुतोष शर्मा की बहादुरी का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि एनकाउंटर स्पॉट पर वह आगे से आगे जाने को तैयार रहते थे। इसके लिए वह गाँव-गाँव दौरा करते थे, इस बीच अपने सैनिकों की सलामती को वह हमेशा प्राथमिकता देते थे।

वहीं 21 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग अधिकारी कर्नल आशुतोष शर्मा (45) को दो बार वीरता के लिए सेना मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया, कुछ सैनिकों के मुताबिक, वह लगभग 30 आतंकियों को धूल चटा चुके थे। शनिवार को भी मुठभेड़ के दौरान कर्नल आशुतोष शर्मा के नेतृत्व में टीम ने आतंकियों द्वारा घर में बंधक बनाए गए लोगों को अपनी जान की परवाह किए बगैर सकुशल बाहर निकाला था।

बात करें मेजर अनुज सूद की तो उनकी चार महीने पहले ही हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा की रहने वाली आकृति के साथ शादी हुई थी। मेजर सूद की पत्नी पुणे में एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं। मेजर अनुज के पिता ब्रिगेडियर सीके सूद अमरावती एन्क्लेव में रहते हैं। पिता रिटायर्ड ब्रिगेडियर चंद्रकांत सूद के मुताबिक उनके बेटे ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है।

“यह उसकी ड्यूटी और जो उसे प्रशिक्षण दिया गया था उसका हिस्सा था। मैं केवल उसकी पत्नी को लेकर दुखी हूं क्योंकि तीन-चार महीने पहले ही शादी हुई है,” उन्होंने कहा, “अनुज लोगों के जीवन की रक्षा के लिए ही बना था।”

आपको बता दें कि कल 3 मई को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में स्थित हंदवाड़ा में आतंकियों के साथ एनकाउंटर के दौरान एक मेजर और एक कर्नल समेत 5 भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। इन सभी वीर सपूतों ने एक इमारत में छिपे आतंकियों से लोहा लेने के लिए बाहर से हमला करने के बजाय अंदर जाकर कार्यवाई करना मुनासिब समझा था, ताकि नागरिकों की जान की क्षति न हो।

जवानों की शहादत को नमन करते हुए पीएम मोदी ने ट्विटर पर लिखा था कि हंदवाड़ा में शहीद हुए हमारे साहसी सैनिकों और सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि। उनकी वीरता और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। उन्होंने राष्ट्र के लिए अत्यंत समर्पण के साथ काम किया और हमारे नागरिकों की रक्षा के लिए अथक परिश्रम किया। उनके परिवारों और दोस्तों के प्रति संवेदना।