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श्रीनाथ जी के निज सेवकों ने दिए ₹1.51 लाख: कोरोना आपदा के बीच आगे आए देशभर के मंदिर

जहाँ एक तरफ मस्जिदों में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कराने में पुलिस के पसीने छूटते रहे हैं, देश भर के मंदिरों ने आगे आकर अपने-अपने स्तर से कोरोना वायरस की आपदा के बीच लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। अब श्रीनाथ जी मंदिर के सभी ‘निज सेवकों’ ने 1.51 लाख रुपए का दान कोरोना लड़ने के लिए मंदिर प्रशासन को दिया है। इस राशि को विभिन्न माध्यमों से अलग-अलग सहायता कोष में भेजा जाएगा।

इससे पहले कई मंदिर कर चुके हैं मदद

इससे पहले भी कई मंदिर सरकार की सहायता कर चुके हैं और लोगों की मदद में लगे हुए हैं। गोरखपुर के सिद्धार्थनगर काली मंदिर की दानपेटी पिछले 6 दशक से नहीं खुली थी। मंदिर ने अपनी पूरी दानपेटी ही दान कर दी। दान पात्र से निकले रुपयों को कोरोना वायरस से बचाव में खर्च किया जाएगा। ये मंदिर डुमरियागंज क्षेत्र में स्थित है। मंदिर की ओर से प्रशासन को पत्र लिख कर दानपेटी दान करने की घोषणा की गई।

श्री शिरडी साईंबाबा सनातन ट्रस्ट ने भी मंदिर की ओर से 51 करोड़ रुपए कोरोना वायरस से लड़ाई में सहायतार्थ दान किए हैं। मंदिर ने महाराष्ट्र मुख्यमंत्री राहत कोष में ये धनराशि दान की। महाराष्ट्र में कोरोना के कारण स्थिति सबसे ज्यादा बदतर है। ऐसे में शिरडी मंदिर का आगे आना ये दिखाता है कि मंदिर-मठ इत्यादि देश के लिए सजग हैं। इससे पहले पटना स्थित महावीर मंदिर ने बिहार के मुख्यमंत्री राहत कोष में 1 करोड़ रुपए दान किए थे।

महावीर मंदिर के न्यास किशोर कुणाल ने कहा कि ये कोई पहला मौका नहीं है कि मंदिर ने ऐसा किया हो, इससे पहले विभिन्न आपदाओं के दौरान मंदिर ऐसा कर चुका है। मुजफ्फरपुर में जब चमकी बुखार का प्रकोप आया था, तब भी महावीर मंदिर ने 12 लाख रुपए की सहायता की थी। कुणाल ने कहा कि महावीर मंदिर को इन आपदाओं के दौरान राहत-कार्य करने का पुराना अनुभव है।

देवरिया के कसया रोड स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर ने भी कोरोना वायरस से उपजी आपदा के बीच जनसेवा करने का निर्णय लिया। मंदिर द्वारा रोज 200 लोगों को सुबह-शाम भोजन कराया जा रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए ग़रीबों को सुबह-शाम पूरी-सब्जी का पैकेट्स दिए जा रहे हैं। भगवान के प्रसाद के रूप में लोगों को भोजन ग्रहण करने को कहा जाता है। इसके अलावा आटा, चावल और दाल के पैकेट्स भी बाँटे जा रहे हैं।

बिहार का बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति भी इस मामले में पीछे नहीं है। मंदिर ने कोरोना पीड़ितों की मदद के लिए 1 करोड़ रुपए दानस्वरूप दिए। ये राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराई गई। मंदिर समाजसेवा भी कर रहा है। गुजरात में सोमनाथ मंदिर और अम्बाजी मंदिर ने भी इतनी ही रकम, यानी एक-एक करोड़ रुपए की धनराशि कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई में दिए। अम्बाजी मंदिर पिछले एक महीने से लोगों को खाना भी खिला रहा है।

उत्तर प्रदेश के गोरखनाथ मंदिर द्वारा भी रोजाना कम से कम 200 लोगों की मदद की जा रही है। नाथ पीठ ने गुरु श्रीगोरक्षनाथ अस्पताल के 300 बेड, 10 वेंटीलेटर और बलरामपुर स्थित माँ पाटेश्वरी देवी शक्तिपीठ के अस्पताल के 50 बेड जिला प्रशासन को उपलब्ध कराए हैं, ताकि मरीजों के इलाज में संसाधन की कोई कमी न रहे। गोरखपुर में एक कोरोना अस्पताल बनाया जाएगा, ऐसा स्वास्थ्य विभाग ने निर्णय लिया है। इस अस्पताल में गुरु गोरक्षनाथ अस्पताल के 154 बेड्स और 4 वेंटिलेटर का इस्तेमाल किया जाएगा। 

मदद को आगे आए अन्य मंदिरों की सूची

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने भी कोरोना वायरस से संक्रमण से उपजी आपदा के बीच पीएम केयर्स फंड में दान दिया है। श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने कहा है कि अभी राम मंदिर बनने में कितने रुपए लगेंगे इसका कोई अंदाज़ा नहीं है, लेकिन मंदिर ने निर्माण से पहले ही देश के लिए 11 लाख रुपए दान देकर सनातन का महत्व दिखाया है। कुछ अन्य मंदिर, मठ व धार्मिक ट्रस्ट जिन्होंने इस आपदा की घड़ी में मदद की:

  • बाबा रामदेव और पतंजलि ट्रस्ट: योग गुरु बाबा रामदेव ने घोषणा की है कि वे प्रधानमंत्री राहत कोष में 25 करोड़ का सहयोग करेंगे। इसके साथ ही साथ पतंजलि और रूचि सोया के सभी एम्प्लॉई अपने एक दिन का वेतन भी प्रधानमंत्री कोष में दान करेंगे जो कुल मिलाकर 1.5 करोड़ बैठता है। इसके अतिरिक्त योग गुरु ने अपने हरिद्वार स्थित दोनों संस्थानों और कोलकाता, मोदी नगर-यूपी, सोलन-हिमाचल प्रदेश स्थित आश्रमों को कोरोना रोगियों के इलाज के लिए देने की घोषणा की। इन सभी स्थानों में 1500 रोगियों को आइसोलेशन में रखा जा सकता है। यहाँ जिन्हें भर्ती किया जाएगा उनके लिए भोजन की व्यवस्था भी पतंजलि करेगा।
  • स्वामीनारायण मंदिर: गुजरात भर में फैले 7 स्वामीनारायण मंदिरों ने कुल मिलाकर 1.88 करोड़ रुपए का सहयोग किया। इसके अलावा कोरोना संक्रमित मरीजों को आइसोलेशन में रखने के लिए तकरीबन 500 बेड का भी इंतजाम स्वामीनारायण ट्रस्ट ने किया है।
  • माता वैष्णो देवी मंदिर: जम्मू-कश्मीर स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर के गैर राजपत्रित स्टाफ ने जहाँ राज्य के राहत कोष में एक दिन की सैलरी देने का निर्णय लिया, वहीं ट्रस्ट के राजपत्रित स्टाफ ने अपनी दो दिनों की सैलरी राज्य के राहत कोष में दान की। इसके अतिरिक्त बोर्ड के वाइस चेयरमैन के निर्देश पर कटरा बस्ती में जरूरतमंदों के बीच राशन किटों का भी वितरण किया गया। इसके अलावा श्राइन बोर्ड ने अपने आशीर्वाद कॉम्प्लेक्स को जिला प्रशासन के लिए सौंप दिया है, जो 600 बेडों के अस्पताल के लिए काम आ सकता है।
  • महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन: महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट ने कुल 5 लाख रुपए, 2.5 लाख प्रधानमंत्री राहत कोष और 2.5 लाख मुख्यमंत्री राहत कोष में दान किए।
  • माँ महामाया मंदिर ट्रस्ट, विलासपुर, छत्तीसगढ़: मंदिर ने मुख्यमंत्री सहायता कोष में 5 लाख 11 रुपए दान किए और रेडक्रॉस सोसायटी को कोरोना के खिलाफ अभियान में 1 लाख 11 हजार दान किए।
  • श्री नित्य चिंताहरण गणपति मंदिर ट्रस्ट: रतलाम मध्य प्रदेश के गणपति मंदिर ट्रस्ट ने भूखों को खाना खिलाने के लिए 1 लाख 11 हजार का दान किया।
  • इसके अलावा सिद्ध विनायक मंदिर रक्त संकलन करने में अपना योगदान देगा।

इस तरह आप देख सकते हैं कि कैसे मंदिरों, मठों, धार्मिक ट्रस्टों ने कोरोना वायरस संक्रमण की इस आपदा में सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए न सिर्फ़ राहत-कार्य में अपना सबकुछ झोंक दिया, बल्कि वित्तीय मदद भी की। चाहे वो शिरडी साईं मंदिर हो या फिर देवरिया का बालाजी मंदिर। सभी छोटे-बड़े मंदिरों ने अपने-अपने स्तर से मदद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

बिहार: होमगार्ड को उठक-बैठक कराने वाले कृषि अधिकारी को प्रमोशन, हेडक्वार्टर में बुलाए गए

पिछले सप्ताह बिहार में होमगार्ड जवान को उठक-बैठक की सजा देने वाले अधिकारी पर राज्य सरकार मेहरबान दिख रही है। अररिया के जिला कृषि पदाधिकारी मनोज कुमार पर कार्रवाई करने की जगह प्रमोशन कर उनका तबादला कर दिया गया है। उन्हें कृषि विभाग में उप निदेशक बनाया गया है।

इस मामले में मनोज कुमार का साथ देने वाले एएसआई गोविंद सिंह को सस्पेंड कर दिया गया था। इसके बाद से ही मनोज कुमार पर भी कार्रवाई की मॉंग की जा रही थी।

कृषि विभाग ने 25 अप्रैल को मनोज कुमार के तबादले का आदेश जारी किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सरकार ने उन्हें प्रमोशन देने की बात को खारिज किया है। कृषि विभाग का कहना है कि उप निदेशक (ट्रेनिंग) के पद पर तैनात किया गया है। यह पद जिला कृषि पदाधिकारी के समकक्ष ही होता है।

मनोज कुमार को दिया गया प्रमोशन!

आज तक ने बिहार के कृषि मंत्री प्रेम कुमार के हवाले से बताया है कि मनोज कुमार के खिलाफ विभागीय जॉंच जल रही है। उनके खिलाफ अररिया में एफआईआर दर्ज करवाई गई है। जॉंच प्रभावित न हो, इसी वजह से उन्हें मुख्यालय बुला लिया गया है।

गौरतलब है कि मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अररिया के जिलाधिकारी से रिपोर्ट माँगी थी। इसके साथ ही बिहार के डीजीपी ने घटना पर नाराजगी जताई और होमगार्ड जवान से फोन पर बात कर संवेदना जताई थी।

पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडे ने होमगार्ड को अपमानित करने के आरोप में अतिरिक्त पुलिस उपनिरीक्षक गोविंद सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। बिहार मानवाधिकार आयोग ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए अररिया के जिलाधिकारी और एसपी को नोटिस जारी करते हुए 6 मई तक विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा था।

गौरतलब है कि बीते सोमवार को अररिया के बैरगाछी चौक इलाके में तैनात होमगार्ड जवान गणेश तात्मा ने लॉकडाउन के दौरान मनोज कुमार की गाड़ी को चेकिंग के लिए रोक लिया था। इससे मनोज कुमार आगबबूला हो गए। उन्होंने होमगार्ड को 50 बार उठक-बैठक करने की सजा दी थी।

इतना ही नहीं मनोज कुमार ने कहा था कि मैं अभी जल्दी में हूँ अन्यथा तुमको जेल भिजवा देता। वहीं पास में खड़े एएसआई गोविंद सिंह ने भी कृषि अधिकारी का साथ देते हुए होमगार्ड से माँफी माँगने को कहा था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था और लोगों ने बिहार सरकार से कार्रवाई की माँग की थी।

बंदूकें, बम, पत्थर-गुलेल… और भीड़: JNU वाले उमर खालिद ने ऐसे भड़काए थे दंगे, FIR कॉपी से खुलासा

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के मामले में JNU के छात्र नेता रहे उमर ख़ालिद के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई है। खालिद और उसके सहयोगी दानिश के ख़िलाफ़ दिल्ली क्राइम ब्रांच में मामला दर्ज किया गया। क्राइम ब्रांच में तैनात अरविन्द कुमार ने ये मामला दर्ज कराया। पुलिस के मुखबिर के हवाले से एफआईआर कॉपी में जानकारी दी गई है कि दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगे अचानक से नहीं हुए थे, उसके पीछे एक सोचा-समझा षड्यंत्र था, एक गहरी साज़िश थी

एफआईआर में कहा गया है कि इस सुनियोजित दंगा-फसाद की साज़िश उमर खालिद और उसके दो सहयोगियों ने मिल कर रची थी, जो दो अलग-सलग संगठनों से जुड़े हुए हैं। इन्होंने मिल कर लोगों को भड़काया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की यात्रा के दौरान लोग सड़कों पर उतरें और सड़कें अवरुद्ध करें। बता दें कि ट्रम्प 24-25 फरवरी को भारत प्रवास पर थे, जहाँ उनका अहमदाबाद से लेकर आगरा और दिल्ली तक कई कार्यक्रम तय थे।

उमर खालिद के ख़िलाफ़ FIR में क्या?

एफआईआर कॉपी के अनुसार, ये सारा षड्यंत्र इसलिए रचा गया ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसा प्रतीत हो कि भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है और वो यहाँ ख़ुश नहीं हैं। बता दें कि ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान विदेशी मीडिया के कई पत्रकार भारत आए थे और उन सभी का ध्यान खींचने के लिए कई इस्लामी नेताओं ने लोगों को भड़का कर दंगा करने की साज़िश रची थी। एफआईआर कॉपी में उमर खालिद को लेकर आगे लिखा है:

“साज़िश के तहत दिल्ली के मौजपुर, कर्दमपुरी, जाफराबाद, चाँदबाग़, गोकुलपुरी और शिव विहार जैसे इलाक़ों में जगह-जगह घरों में बंदूकें, पेट्रोल बम, एसिड बोतल और पत्थर बड़ी संख्या में जुटाए गए। इन्हें फेंकने के लिए गुलेल सहित अन्य घातक सामानों की व्यवस्था की गई। दंगों में भीड़ जुटाने के लिए उमर खालिद और दानिश ने अलग-अलग इलाक़ों से लोगों को लाने में अहम भूमिका निभाई। जाफराबाद मेट्रो स्टेशन को इसी साज़िश के तहत जाम किया गया और आसपास के लोगों को परेशान करने के लिए वहाँ महिलाओं व बच्चों को जुटा कर रास्ते अवरुद्ध किए गए।”

बता दें कि जाफराबाद में मुस्लिम महिलाओं व बच्चों को भड़का कर 23 फरवरी को उत्पात मचाया गया था। एफआईआर से ये भी खुलासा हुआ है कि दंगों वाले इलाक़ों में मुस्लिम समुदाय के बच्चों को पहले ही निकाल लिया गया था, ताकि उन्हें कोई परेशानी न हो। ऑपइंडिया ने भी अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान इस तथ्य से लोगों को अवगत कराया था। स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान ये बातें पता चली थीं। अब इसकी आधिकारिक रूप से पुष्टि हो गई है।

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में उमर खालिद का बड़ा रोल

दिल्ली दंगे: खुल सकते हैं कई और राज

पुलिस का कहना है कि अगर इस षड्यंत्र की जाँच कर ली जाए तो दिल्ली दंगों की कई परतें खुल जाएँगी। मुक़दमा रजिस्टर करने के लिए इन जानकारियों का इस्तेमाल किया गया। इस एफआईआर कॉपी से समझा जा सकता है कि जब उमर खालिद जैसे कथित एक्टिविस्ट्स और पूर्व छात्र नेताओं ने इस तरह बड़े लेवल की प्लानिंग की तो ताहिर हुसैन जैसों की इन दंगों में कितनी बड़ी भूमिका रही होगी। दंगों को लेकर प्रपंच फ़ैलाने वाले मीडिया के लिए भी ये एक सबक है।

इन सभी आरोपितों पर छात्रों पर राष्ट्रद्रोह, हत्या, हत्या का प्रयास, धार्मिक आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी फैलाने और दंगे करने का भी मामला दर्ज किया गया है। ये मामले यूएपीए के तहत चलाए जाएँगे।

अंकित शर्मा के परिवार को नहीं मिला ₹1 करोड़, कपिल मिश्रा ने भेजे 3 लाख रुपए: CM केजरीवाल पर उठे सवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने हिन्दू-विरोधी दंगों में मारे गए अंकित शर्मा के परिवार के लिए घोषित किया गया 1 करोड़ रुपए का मुआवजा अब तक उन्हें नहीं दिया है। पीड़ित परिवार मुआवजे के इंतजार में है। दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने अंकित शर्मा के पिता से बातचीत की, जिसके बाद उन्होंने जानकारी दी कि अब तक दिल्ली सरकार द्वारा घोषित मुआवजे की राशि नहीं दी गई है। इसके बाद कपिल मिश्रा ने दिवंगत अंकित के परिवार को 3 लाख रुपए की सहायता भेजी।

अंकित शर्मा की बेरहमी से हुई थी हत्या

बता दें कि आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद (अब निलंबित) ताहिर हुसैन ने अपने गुंडों के साथ मिल कर जम कर दंगे किए थे। इसी दौरान उसके गुंडों ने अंकित शर्मा को पकड़ कर ले जाकर निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। उनके शरीर पर घाव के कई निशान मिले थे। उनकी हत्या एकदम वीभत्स तरीके से की गई थी। वो दोनों पक्षों को समझाने गए थे, लेकिन उलटा उनकी ही हत्या कर दी गई थी। ये घटना चाँदबाग़ में हुई थी। उनकी लाश को नाले में फेंक दिया गया था।

मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपए बतौर सहायता देने की घोषणा की थी। अंकित शर्मा की हत्या फरवरी 23, 2020 को हुई थी, जबकि सीएम केजरीवाल ने मार्च 2, 2020 को मुआवजे की घोषणा की थी। अंकित शर्मा आईबी में कार्यरत थे। जिस दिन ये घटना हुई, उस दिन भी वो ड्यूटी से ही लौटे थे। ताहिर हुसैन पर फ़िलहाल यूएपीए के तहत कार्रवाई की जा रही है। उसकी गिरफ़्तारी के बाद उससे पूछताछ भी हो चुकी है।

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे: साज़िशकर्ताओं पर नकेल कस रही पुलिस

जहाँ तक दिल्ली दंगों की बात है, अब तक पुलिस ने 72 एफआईआर दर्ज किए हैं। कॉन्ग्रेस नेता इशरत जहाँ और उनके समर्थक खालिद सैफी को भी गिरफ़्तार कर लिया है। जामिया के मीरान हैदर और सफूरा ज़रगर को भी गिरफ्तार किया गया है। ये दोनों नॉर्थ-ईस्ट हिन्दू-विरोधी दंगों की साज़िश रचने में शामिल थे। जेएनयू के छात्र रहे उमर खालिद व दो अन्य के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया गया है।

अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या की बाद जनाक्रोश को थामने के लिए मुआवजे की घोषणा करने वाले अरविन्द केजरीवाल से अब सवाल पूछे जा रहे हैं। अभी तक दिल्ली सरकार ने पीड़ित परिवार को मुआवजा न मिलने का कोई कारण स्पष्ट नहीं दिया है।

बता दें कि अंकित शर्मा को मारने से पहले उनके ऊपर काला कपड़ा डाला गया था। इसके बाद उन्हें खींचकर आम आदमी पार्टी नेता तरीक हुसैन के घर की ओर ले जाया गया था। यही नहीं, उनकी हत्या करने से पहले उनके कपड़े भी निकाल लिए गए थे। अंकित पर काला कपड़ा डाल कर उन्हें ताहिर हुसैन के घर की तरफ ले जाया गया था और फिर कपड़े उतारकर चाकू से बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।

यहाँ-वहाँ थूकना बंद करें, रमजान पर करें सरकारी निर्देशों का पालन: PM मोदी ने की ‘मन की बात’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि कोरोना वायरस आपदा की रोकथाम के लिए हुए लॉकडाउन के बीच उन्हें सामान्य दिनों की अपेक्षा इस बार ‘मन की बात’ के लिए काफ़ी ज्यादा फोन कॉल्स, मैसेज और पत्र आए हैं। उन्होंने कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई को ‘पीपल ड्रिवेन लड़ाई’ नाम दिया, क्योंकि लोग जनसेवा से लेकर अन्य माध्यमों से अपना-अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने ताली व थाली बजाने और दिया जलाने की भी बात की। प्रधानमंत्री ने इसे ‘महायज्ञ’ करार दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के किसान भी आज खेतों में मेहनत कर रहे हैं और ध्यान रख रहे हैं कि कोई भी भूखा नहीं सोए। उन्होंने इस दौरान सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘कोविड वॉरियर्स डॉट जीओवी डॉट इन’ की बात की, जिससे अब तक कई सामाजिक संगठन जुड़ चुके हैं। उन्होंने लोगों की तारीफ करते हुए कहा कि कोई अपनी पेंशन राशि पीएम केयर्स में दान दे रहा है तो कोई पुरस्कार में मिली राशि दान कर रहा है। कोई खेतों की सब्जियाँ दान कर दे रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मुश्किल परिस्थिति में देशवासियों ने जो ‘संकल्प शक्ति’ दिखाई है, उससे देश को नई ऊर्जा मिली है। उन्होंने व्यापार से लेकर दफ्तरों और अस्पतालों द्वारा अपनाई जा रही नई तकनीकों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि देश का हर इनोवेटर इस परिस्थिति से निपटने के लिए कुछ न कुछ नया निर्माण कर रहा है। ‘प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण पैकेज’ के तहत ग़रीबों के खाते में डायरेक्ट ट्रांसफर हो रहा है। नरेंद्र मोदी ने कहा:

“गरीबों को 3 महीने मुफ्त सिलिंडर और राशन जैसी सुविधाएँ दी जा रही हैं। इसके लिए सरकार के अलग-अलग विभागों के लोग, बैंकिंग सेक्टर के लोग दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। मैं देश के राज्य सरकारों की भी तारीफ़ करना चाहूँगा। स्थानीय प्रशासन इस महामारी से निपटने में जो भूमिका निभा रहा है, वो सराहनीय है। एक अध्यादेश लाया गया है, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं में लगे लोगों का उत्पीड़न और हिंसा के मामलों में कड़ी सज़ा का प्रावधान किया गया है। जो लोग देश को कोरोना-मुक्त बनाने में जुटे हैं, उनकी रक्षा के लिए ये ज़रूरी था।”

दुनिया की मदद के लिए आगे आया भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया भर में कई देशों को दवाओं की ज़रूरत है और भारत अगर उनकी मदद नहीं करता तो भी कोई हमें दोषी नहीं ठहरता, लेकिन तब भी देश ने दूसरे देशों की मदद करने का फ़ैसला लिया। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी संस्कृति के अनुरूप ही फ़ैसला लिया। उन्होंने कहा कि भारत ने आज विश्व के हर ज़रूरतमंद तक दवाएँ पहुँचाने का बीड़ा उठाया है और सभी देशों के राष्ट्राध्यक्ष भारत का धन्यवाद कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि हम अपनी ही समृद्ध परंपरा को भूल जाते हैं और जब दूसरा देश कोई रिसर्च कर के हमें हमारी ही परंपरा सिखाता है तो हम हाथोंहाथ लेते हैं। ये सैकड़ों वर्ष की गुलामी का कालखंड का प्रभाव है कि हमें अपनी ही शक्ति पर विश्वास नहीं होता। प्रधानमंत्री ने इसे आत्मविश्वास की कमी करार दिया। उन्होंने आशा जताई कि जिस तरह दुनिया ने योग को स्वीकार किया है, उसी तरह वो आयुर्वेद को स्वीकार करेगी। उन्होंने युवाओं को अपने पारम्परिक सिद्धांतों को हीन न समझने को कहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’

पीएम मोदी ने कहा कि समाज में एक और जागरूकता ये आई है कि लोग ये समझ रहे हैं कि सार्वजनिक जगहों पर थूकने से क्या नुकसान हो सकता है। यहाँ-वहाँ थूक देना लोगों की ग़लत आदतों का हिस्सा बना हुआ था। पीएम ने कहा कि अब समय आ गया है जब इस बुरी आदत को हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया जाए। उन्होंने समझाया कि भले ही देर हो गई लेकिन अब यहाँ-वहाँ थूकने की आदत छोड़ देनी चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मास्क भी अब लोगों के जीवन का हिस्सा बन गया है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि जो मास्क लगाते हैं, वो सभी बीमार हैं। उन्होंने कहा कि एक ज़माना था जब कोई फल ख़रीदता था तो लोगों को लगता था कि उसके घर में कोई बीमार है और ये धारणा बन गई थी कि बीमारी में ही फल खाते हैं। पीएम मोदी ने भगवान बसवेश्वर की जयंती पर उनके अनुयायियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उन्हें उनसे काफ़ी कुछ सीखने को मिला है।

रमजान पर करें सरकारी निर्देशों का पालन

उन्होंने मुसलमानों से कहा कि वो रमजान को संयम, सद्भावना, संवेदनशीलता और सेवा-भाव का जरिया बनाएँ। उन्होंने ये दुआ करने को कहा कि ईद आते ही दुनिया कोरोना-मुक्त हो जाए, ताकि हर्ष-उल्लास के साथ त्यौहार मनाया जा सके। उन्होंने विश्वास जताया कि रमजान के दौरान प्रशासन के निर्देशों का पालन किया जाएगा। उन्होंने उन कम्युनिटी लीडर्स को भी धन्यवाद दिया, जो लोगों को जागरूक करने में लगे हुए हैं।

पीएम मोदी ने लोगों को अति आत्म-विश्वास में न फँसने की सलाह दी और ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ का सन्देश दिया। उन्होंने लोगों से ग़लती न पालने को भी कहा। पीएम मोदी ने कहा कि ये विचार न पालन कि हमारे गली या दफ्तर तक कोरोना नहीं पहुँचा है तो आगे भी कभी नहीं पहुँच सकता है।

लातेहार में तीन युवतियों से गैंगरेप: जेबिउल्लाह, जहूर, सलाउद्दीन, सद्दाम और आजाद गिरफ्तार

लॉकडाउन के बीच झारखंड से शर्मसार कर देने वाली खबर सामने आई है। लातेहार के चंदवा थाना क्षेत्र अंतर्गत एक गाँव में शुक्रवार (अप्रैल 24, 2020) की शाम तीन युवतियों के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया। पुलिस ने ग्रामीणों के सहयोग से पाँचों आरोपितों को गिरफ्तार कर शनिवार (अप्रैल 25, 2020) को जेल भेज दिया

गैंगरेप की घिनौनी वारदात को अंजाम देने वाले आरोपितों के नाम जेबिउल्लाह खान (पिता नेसार खान), जहूर खान (पिता: जबरुद्दीन खान), सलाउद्दीन खान (पिता: अफजल खान), सद्दाम हुसैन (पिता: मुबारक हुसैन) और आजाद खान (पिता: सादरूद्दीन खान) हैं।

पाँचों आरोपितों को शुक्रवार को थाना क्षेत्र के लाधुप पंचायत के ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस को सौंपा था। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार की शाम चंदवा थाना क्षेत्र के एक सुदूरवर्ती गाँव में लोहरदगा जिले के सुंदरू गाँव से आए पाँच युवकों द्वारा तीन युवतियों के साथ बदसलूकी की जा रही थी। कुछ ग्रामीणों ने जब युवकों की ऐसी हरकत देखी तो उन्होंने शोर मचाना शुरू किया और आरोपितों को धर दबोचा।

ग्रामीणों ने पाँचों को पुलिस के हवाले कर दिया। शुरुआत में मामला छेड़खानी का लग रहा था। लेकिन पुलिस ने जब मामले की छानबीन करते हुए पीड़ित युवतियों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि पाँचों युवकों ने उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया है। इसके बाद सभी आरोपितों के खिलाफ चंदवा थाने में पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया। इसके अलावा आईपीसी की धारा 376 (डी) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

दरअसल तीनों युवतियाँ 24 अप्रैल को पासबुक चेक कराने के लिए सेन्हा प्रज्ञा केन्द्र जा रही थी। रास्ते में जेबीउल्लाह ने तीनों युवतियों को जबरन बाइक पर बिठा कर कान्ती झरना जंगल में ले गया। पीछे से उसके साथी भी आ गए। जंगल में इन्होंने बारी-बारी से दुष्कर्म किया। जब वे युवतियों को वापस सड़क पर छोड़ने के लिए आ रहे थे, तभी ग्रामीणों ने उन्हें छेड़खानी करते देख लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने तीनों पीड़िताओं को मेडिकल टेस्ट के लिए अस्पताल भेजा है।

गौरतलब है कि इससे पहले 18 अप्रैल को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लॉकडाउन के दौरान एक नाबालिग से रेप का मामला सामने आया था। अस्पताल जा रही 17 साल की पीड़िता को शफीक खान और आबिद खान ने कार में खींच लिया और फिर करीब आठ किलोमीटर दूर सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया

वहीं पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक 4 साल की बच्ची के साथ रामपुर निवासी इरफान (पुत्र तय्यूब) ने दुष्कर्म किया था। वहीं दिल्ली में शाह कंवर अली नाम के युवक ने मैट्रिमोनियल साइट से युवती को फँसाकर मिलने के लिए बुलाया और फिर उसके साथ रेप किया

लाउडस्पीकर पर अजान, सायरन… सब कुछ: रमजान में उत्तराखंड की मस्जिदों को मिली छूट, लेनी होगी अनुमति

रमजान का महीना शुरू हो गया है। उत्तराखंड पुलिस ने कहा है कि राज्य में रमजान के अवसर पर मस्जिदों को कम आवाज़ में लाउडस्पीकर पर अजान पढ़ने की अनुमति दी जाएगी। हालाँकि, इस विषय में स्थानीय जिला प्रशासन निर्णय लेगा कि किसी भी मस्जिद में माइक पर अजान के लिए अनुमति देनी है या नहीं। उत्तराखंड पुलिस ने शुक्रवार (अप्रैल 24, 2020) को इस सम्बन्ध में जानकारी दी। रमजान का महीना गुरुवार से शुरू हुआ है।

पूरे देश की तरह उत्तराखंड में भी किसी भी प्रकार की भीड़ जमा होने पर प्रतिबन्ध है। धार्मिक व मजहबी आयोजन भी नहीं हो सकते। ऐसे में मस्जिदों में भी लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर पाबन्दी लगा दी गई थी। कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए फ़िलहाल लॉकडाउन चल रहा है, इसीलिए ये नियम-क़ानून तय किए गए थे। रमजान के दौरान मुस्लिम नेताओं ने सरकार से लाउडस्पीकर की अनुमति देने की माँग की थी

मुस्लिम समुदाय के नेताओं और मौलवियों ने माँग की थी कि मस्जिदों में रमजान के दौरान माइक पर अजान पढ़ने की इजाजत दी जाए। इसके बाद राज्य सरकार ने जिला प्रशासन की अनुमति की शर्त रखते हुए ये आदेश जारी किया। इसके लिए डीएम और एसपी से अनुमति लेनी पड़ेगी। लेकिन, नमाज के लिए जुटने पर पूर्ववत पाबंधी रहेगी। साथ ही शाम को होने वाली इफ्तार पार्टियाँ भी प्रतिबंधित रहेंगी।

ये निर्णय मुस्लिम समुदाय और अधिकारियों के बीच हुई एक बड़े स्तर की बैठक के बाद लिया गया। इस दौरान मस्जिद में इमाम के अलावा किसी और को नहीं जाने दिया जाएगा और सिर्फ़ वही अकेले अजान पढ़ेंगे। साथ ही सुबह और शाम की अजान के समय बजने वाले सायरन को भी अनुमति दे दी गई है। ये भी कम आवाज़ में बजेगा। पहले भी ऐसे सायरन का इस्तेमाल मस्जिदों से किया जाता रहा है।

उत्तराखंड की मस्जिदों में अजान: कॉन्ग्रेस ने पूछा- अनुमति क्यों लें?

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकार के इस फ़ैसले की प्रशंसा की लेकिन साथ ही कहा कि जिलाधिकारी की अनुमति वाली शर्त ग़लत है क्योंकि जिलाधिकारी जहाँ चाहेंगे, वहाँ लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर पाबन्दी लगा देंगे। रावत का कहना है कि पूरे राज्य में एक समान नियम लागू किया जाना चाहिए।

उत्तराखंड से सटे उत्तर प्रदेश स्थित बहराइच के बोंडी थाना क्षेत्र में लॉकडाउन के दौरान रमजान और मस्जिद में नमाज को लेकर भी एक खबर है। यहाँ लॉकडाउन के बावजूद नमाज के लिए मस्जिद में जुटे नमाजियों ने पुलिस पर ही हमला कर दिया था। इसके बाद 31 नमाजियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया था। कोरोना के मामलों को देखते हुए यूपी सरकार ने लॉकडाउन में रमजान के दौरान किसी भी प्रकार की राहत नहीं देने का फैसला किया है। वहाँ 30 जून तक किसी भी तरह की भीड़ जुटने पर प्रतिबन्ध है।

‘दाढ़ी-टोपी वालों के फल बेचने पर पाबंदी कब?’- जमशेदपुर ‘हिंदू फल दुकान’ मामले में BJP के साथ विपक्षी MLA

झारखण्ड स्थित जमशेदपुर के कदमा में 6 फल विक्रेताओं पर सिर्फ़ इसलिए केस दर्ज कर दिया गया क्योंकि वो अपनी दुकानों में ‘विश्व हिन्दू परिषद्’ का बैनर लगा कर और ‘हिन्दू’ लिख कर फल बेच रहे थे। पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास और हालिया चुनाव में उनके क्षेत्र से उन्हें परास्त करने वाले विधायक सरयू राय इस मामले में एक मत में हैं। राज्य के दोनों ही बड़े नेताओं ने झारखण्ड सरकार की इस कार्रवाई का विरोध किया है। रघुबर ने आंदोलन की बात कही है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि फल विक्रेताओं के साथ किया गया पुलिस का व्यवहार निंदनीय है। राज्य सरकार तुष्टिकरण की राजनीति के कारण आजीविका चला रहे छोटे-छोटे व्यापारियों को तंग करना बंद करे। उन्होंने कहा कि अगर व्यापारियों पर किया गया केस तत्काल वापस नहीं लिया गया तो भाजपा बड़ा आंदोलन करेगी। फल-विक्रेताओं के ख़िलाफ़ कदमा थाने में शांति भंग करने का आरोप लगा है। कुल 8 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है।

एक यूजर ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ट्वीट कर के इसकी जानकारी दी थी, जिसके बाद कार्रवाई हुई। लोग पूछ रहे हैं कि क्या अख़बार ‘द हिन्दू’ को भी झारखण्ड में प्रतिबंधित कर दिया जाएगा? साथ ही लोग कई इस्लामी नाम वाले दुकानों की तस्वीरें ट्वीट कर पूछ रहे हैं कि अगर हिन्दू ऐसा नहीं कर सकते तो दूसरों को छूट क्यों है? पूर्वी सिंहभूम के एएसपी अनूप बिरथरे का कहना है कि वर्तमान माहौल में ऐसा कोई काम नहीं होना चाहिए, जिससे किसी को ठेस पहुँचे।

हालाँकि, फल विक्रेताओं ने किसे ठेस पहुँचाया है, इस सम्बन्ध में उन्होंने कुछ नहीं कहा। इधर विहिप ने भी कमर कस ली है। रविवार (अप्रैल 26, 2020) को संगठन ने स्थानीय थाने के सामने विरोध प्रदर्शन किया। थाना प्रभारी ने कहा कि भगवान की तस्वीर हटाने की बात ग़लत है, केवल बैनर हटाया गया है। विहिप के प्रवक्ता विनोद बंसल ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि संगठन इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाएगा। उन्होंने कहा:

“यदि भारत में अपने संस्थान पर हिन्दू लिखना, भगवा फहराना या विश्व हिंदू परिषद या बजरंग दल से जुड़ा होना अपराध है तो बंद करो उन सभी दुकान, होटलों व अन्य संस्थानों को भी, जिनसे जिहादी होने की बू आती है। क्या हिन्दू पर आक्रमण ही सेक्यूलरिज्म है? बिहार और झारखंड क्या पाकिस्तान में हैं? क्या बिहार व झारखंड सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी विक्रेता के सिर पर गोल टोपी, लम्बी दाढ़ी व ओछा पजामा नहीं होगा?? कोई भी व्यवसायी इस्लाम ,मोहम्मद व खान इत्यादि सांप्रदायिक शब्दों का प्रयोग नहीं करेगा?

विहिप के प्रवक्ता ने एक के बाद एक ट्वीट कर अपनी बात रखी। उन्होंने पूछा कि क्या भारत मे हिंदू होना अपराध है? या विहिप बजरंग दल व भगवा से जुड़ना अपराध है? उन्होंने आगे पूछा कि क्या जिन मीट की दुकानों, बूचड़खानों या पैकेटों पर हलाल शब्द लिखे होंगे, उन सभी साम्प्रदायिक व धार्मिक विद्वेष फैलाने वाली शब्दावली को भी ये सरकारें बंद करेंगीं? यह बड़ा मामला है क्योंकि सिर्फ़ बैनर नहीं हटाया गया है बल्कि भगवान श्रीराम व भगवान शिव की तस्वीर भी हटाई गई है।

जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने कहा कि सोशल मीडिया की हकीकत जाने बिना महज एक ट्वीट के आधार पर कार्रवाई दुर्भाग्यपूर्ण है और उन्हें प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि इस मामले में कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा। राय ने बताया कि उन्होंने बड़े स्तर पर इस मामले को उठाया है।

इंस्टाग्राम पर हिन्दू घृणा: माँ सीता को भद्दी गालियाँ, मुस्लिम के पास जाने की बात और अश्लील फोटो

इंस्टाग्राम को धीरे-धीरे हिन्दू विरोध और हिन्दू घृणा का हब बनाया जा रहा है। इसी क्रम में एक व्यक्ति ने एक ऐसा पेज बनाया है, जहाँ हिन्दू देवी-देवताओं को भद्दी-भद्दी गालियाँ दी जाती हैं। इस पेज पर इस्लामिक हस्तियों को हिन्दू देवी-देवताओं से ज्यादा श्रेष्ठ बता कर दिखाया जाता है। इस पेज का नाम ही माँ सीता को अश्लील गाली देते हुए रखा गया है। साथ ही यूजरनेम में हिन्दुओं को ‘हिजड़ा’ बताया गया है। इसके बाद हिंदुत्व को अश्लील गालियाँ दी गई हैं।

इंस्टाग्राम पर ऐसे फैल रहा हिन्दू घृणा

इस इंस्टाग्राम पेज के डिस्क्रिप्शन में लिखा है कि यहाँ ‘राम और सीता की सेक्स स्टोरीज’ उपलब्ध हैं। इसकी जो पहली ही पोस्ट है, उसमें रावण और एक महिला की तस्वीर दिख रही है (किसी सीरियल से) और डिस्क्रिप्शन में उस महिला को माँ सीता बताया गया है। साथ ही लिखा गया है; “सीता ने राम से कहा कि मुझे तेरे जैसा कोई नामर्द नहीं चाहिए। कोई ऐसा चाहिए जो…!” इसके बाद कुछ अश्लील बातें लिखी हुई हैं।

माँ सीता के बारे में लिखी अश्लील बातें

साथ ही एक अन्य पोस्ट में आपत्तिजनक अवस्था में दो लोगों की तस्वीर है, जिन्हें माँ सीता और भगवान श्रीकृष्ण बताया गया है। लिखा है कि ये दोनों ‘लेस्बियन’ कर रहे हैं। इसके बाद दोनों को माँ की गाली दी गई है। तीसरे पोस्ट में एक महिला को किसी टोपी पहने दढ़ियल के साथ दिखाया गया है। लिखा है- “एक ही तो ख्वाब है बस। सीता का गीता पर बैठ के…!” इस चित्र में उक्त दढ़ियल शख्स को एक महिला के साथ दिखाया गया है।

सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में आक्रोशित लोगों ने इस पेज को रिपोर्ट करने की अपील की। इस तरह के इंस्टाग्राम पेज बना कर हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाई जा रही है, जिससे लोग नाराज़ हैं। एक पोस्ट में तो हद ही कर दी गई। इसमें एक नंगी महिला को शिवलिंग के साथ दिखाया गया है। साथ ही ‘सीता की जवानी है सेक्सी‘ लिखी हुई है। फोटो को एडिट कर के उसमें अश्लील बातें लिखी हुई हैं और समुदाय विशेष के लोगों को श्रेष्ठ बताते हुए अश्लीलता फैलाई गई है।

लोग आक्रोशित, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं

एक अन्य इंस्टाग्राम पोस्ट में इसी पेज पर बताया गया है कि ‘राम ने सीता से कहा कि मैं नामर्द हूँ और तू किसी मुस्लिम के पास जाकर...’। इस पोस्ट में भी अश्लील बातें लिखी हुई हैं। लगभग इस पेज के हर पोस्ट पर हिन्दुओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और काफी रिपोर्टिंग भी की गई है लेकिन अब तक इंस्टाग्राम ने इस पेज को हटाया नहीं है। इससे लोग गुस्से में हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या ये सोशल साइट्स हिन्दू-घृणा को प्रमोट करते हैं?

माँ सीता के मुस्लिम के पास जाने की बातें लिखी हुई हैं

एक इंस्टाग्राम पोस्ट में एक तरफ किसी महिला और एक तरफ किसी इस्लामी आक्रांता की फोटो है। दोनों को ‘मैच’ बताते हुए इसमें भी माँ सीता को लेकर अश्लील बातें लिखी हुई हैं। इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण को गाली देते हुए भी एक इस्टाग्राम पेज है, जिसे रिपोर्टिंग के बाद डिलीट कर दिया गया है। इंस्टाग्राम पर ऐसे कई पेज चल रहे हैं लेकिन न तो पुलिस और न ही सोशल साइट ने कोई कार्रवाई की है।

हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाना आम

हाल ही में भगवान राम और सीता पर आपत्तिजनक कमेंट करने के कारण फारूकी मुनव्वर पर FIR दायर की गई थी। बॉलीवुड के एक गाने का जिक्र करते हुए फारूकी कह रहा था, “मेरा पिया घर आया ओ राम जी। राम जी डोंट गिव अ फ़*** अबाउट पिया। यह सुन राम जी कहते हैं मैं खुद चौदह साल से घर नहीं गया। अगर सीता ने सुन लिया, वो तो शक करेगी। सीता को तो माधुरी पे पहले से ही शक है। वो गाना है तेरा करूँ गिन-गिन इंतजार। उसे लग रहा है वनवास गिन रही है 14 पर आकर रुक गई।”

एक मामला सामने आया था, जिसमें वासु यादव नाम के एक फेसबुक अकाउंट से हिन्दू देवी-देवताओं के अश्लील चित्र बनाकर बेहूदा सन्देशों के साथ पब्लिश किया गया था। ट्विटर पर इन तस्वीरों को अभय पंडित नाम के शख्स ने ट्वीट करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ ही उन्नाव पुलिस को भी टैग किया था। उन्नाव पुलिस ने फौरन संज्ञान लेते हुए लिखा था, “उक्त आईडी/अकाउंट के विरुद्ध साइबर सेल द्वारा आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है।”

यूपी: रमजान में लॉकडाउन में नहीं मिलेगी किसी तरह की छूट, हरियाणा से लाए गए 2224 लोगों को किया गया क्वारंटाइन

यूपी सरकार का दूसरे राज्यों में फँसे छात्रों, मजदूरों और गरीबों को वापस लाने का फैसला एक सराहनीय कदम है। योगी सरकार के अनुसार पहली खेप में हरियाणा से 82 बसों में सवार होकर 2224 लोग यूपी आ गए हैं। इन्हें इनके गृह जनपद में क्वारंटाइन किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर कोरोना के मामलों को देखते हुए यूपी सरकार ने लॉकडाउन में किसी की राहत नहीं देने का फैसला किया है।

राजस्थान के कोटा में फँसे प्रदेश के हजारों छात्र-छात्राओं के बाद अब दूसरे प्रदेशों में फँसे लोगों को सरकार अपने प्रदेश ला रही है। उत्तर प्रदेश सरकार इस महामारी के दौर में प्रदेश के हर निवासी को लेकर चिंतित है। और उन्हें जल्द से जल्द लाने की कोशिश में जुटी हुई है। विपक्ष भी उनके इस फैसले की तारीफ कर रहा है।

हरियाणा से उत्तर प्रदेश लाए गए 2224 लोग

अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने बताया कि सीएम के निर्देश पर हरियाणा से 82 बसों के जरिए 2224 लोग यूपी लाए गए हैं। ये सभी अपने-अपने गृह जनपद में क्‍वारंटाइन किए जाएँगे। ये मजदूर प्रदेश के 16 जिलों के हैं। प्रदेश में प्रवेश से पहले इनकी स्कैनिंग की गई है जबकि इन सभी के गृह जनपद में एक बार फिर स्कैनिंग की जा रही है। साथ ही क्वारंटाइन सेंटर में यह लोग एक हजार रुपए व राशन किट के साथ भेजे जाएँगे। वहाँ पर उनको 14 दिन तक क्वारंटाइन किया जाएगा। इसी तरह अन्य राज्यों से भी लोगों को लाया जा रहा है।

लॉकडाउन में नहीं मिलेगी कोई छूट

अवनीश अवस्थी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामले देखते हुए यूपी सरकार ने तय किया है कि लॉकडाउन की स्थिति यथावत रहेगी। रमजान को देखते हुए प्रदेश सरकार किसी भी जिले में लॉकडाउन में छूट नहीं देगी। प्रदेश में फिलहाल तीन मई तक किसी तरह से बड़ी दुकानें खोलने की अनुमति नहीं होगी। बैठक के दौरान कोर टीम के कुछ अफसरों ने कहा कि अभी प्रदेश की स्थिति काफी अच्छी नहीं है। ऐसे में अगर थोड़ी भी छूट दी गई तो प्रदेश में कोरोना को लेकर हालात और तेजी से बिगड़ जाएँगे फिर इसको संभालना मुश्किल होगा। अफसरों का तर्क था कि राज्य सरकार लॉकडाउन को लेकर गंभीर है। प्रशासन भी सख्त कदम उठा रहा है।

लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालो पर सख्त कार्रवाई

साथ ही यह भी बताया कि सीएम ने मेडिकल इंफेक्शन रोकने के लिए भी प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मेडिकल इंफेक्शन रोकने के लिए जल्द ही टीम का गठन होगा। आयुष डॉक्टरों की टीम को भी प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं।

लॉकडाउन को लेकर अवनीश अवस्थी ने बताया कि उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। अब तक 30163 एफआईआर दर्ज कर 31 हजार वाहन सीज किए गए हैं। अब तक 390 स्थानों को हॉट स्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया। वहीं 44 विदेशियों के खिलाफ एफआईआर के साथ 269 के पासपोर्ट जब्त किए गए।