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बांग्लादेशी अब्दुल हक बुखार से तड़पते हुए कोशियारी नदी पार कर पहुँचा भारत, बोला- मेरा इलाज करवा दो, मुझे कोरोना है

बांग्लादेश में कोरोना के इलाज की पर्याप्त सुविधाएँ न होने के कारण एक बांग्लादेशी व्यक्ति रविवार (अप्रैल 26, 2020) को कुशियारा नदी को पार करके भारत के असम की सीमा में आ गया। व्यक्ति की पहचान अब्दुल हक के रूप में हुई। अब्दुल जिस समय भारत पहुँचा वो तेज बुखार से तड़प रहा था। पूछताछ में उसने बताया कि उसे कोरोना है और वह इलाज कराने के लिहाज से भारत आया है। हालाँकि, बाद में इसकी सूचना बीएसएफ को दी गई और उन्होंने बांग्लादेश की सिक्योरिटी फोर्स को सूचित करके उसे वापस भेज दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करीमगंज जिले के मुबारकपुर इलाके में पहुँचने के बाद 35 वर्षीय अब्दुल पर ग्रामीणों को संदेह हुआ। जब उससे पूछताछ हुई तो उसने ग्रामीणों के सामने खुद के कोरोना संक्रमित होने की बात कही और अपना इलाज कराने को बोला। इसके बाद गाँव के लोगों ने घबराकर उसकी सूचना बीएसएफ को दी। बीएसएफ को पूछताछ में उसने बताया कि वे बांग्लादेश के सुनामगंज जिले का रहने वाला है। जो 4 किमी तक नदी को तैर करके सीमा पार आया।

सिलचर में बीएसएफ के प्रवक्ता और डीआईजी जेसी नायक ने इस संबंध में बताया, ”बांग्लादेशी नागरिक अब्दुल हक कुशियारा नदी तैरकर पार कर गया, जो दोनों देशों की सीमाओं के बीच में है। रविवार सुबह करीब 7 बजे वह भारतीय सीमा में दाखिल हुआ। गाँव वालों ने उसे देखा तो उन्होंने उसे वहीं रोक दिया और हमें सूचना दी।”

नायक ने बताया, ”उसे कोरोना था या नहीं, इसके बारे में जानकारी नहीं है। मगर, उसे तेज बुखार था। वो देखने में अस्वस्थ नजर आ रहा था। ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था। उसका दावा था कि वह कोरोना से संक्रमित है और भारत में इलाज कराने के लिए नदी पार करके आया है।”

बता दें, बीएसएफ ने पहले बांग्लादेशी अब्दुल को हिरासत में लेकर पूछताछ की और फिर उसकी सूचना बांग्लादेशी सेना को दे दी। इसके बाद करीब 10 बजे बांग्लादेशी सेना के अफसर दो बोट से करीमगंज स्थित सीमा के पास पहुँचे। इसके बाद युवक को उनके हवाले कर दिया गया।

डीआईजी नायक ने बताया, ”कुशियारा नदी में मानसून के समय बाढ़ आ जाती है। लेकिन, इस वक्त पानी का स्तर बहुत ही कम है और जो तैरना जानता है, वह आसानी से इसे पार कर सकता है। जिस जगह की यह घटना है, वहाँ अभी तक दोनों देशों के बीच फेंसिंग नहीं हुई है। इसलिए, वह आसानी से सीमा के अंदर घुस गया है। कोरोना के मद्देनजर जवानों को ज्यादा से ज्यादा गश्त करने का आदेश दिया गया है। लोगों को भी जागरूक किया गया है। यही कारण है कि लोगों ने तुरंत हमें इसकी सूचना दे दी।”

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ ये खबर आई है कि कोरोना का शक होने के कारण बांग्लादेशी इतनी लंबी नदी को पार करके भारत आ गया, ताकि यहाँ उसका इलाज हो सकें। वहीं भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण के एक दिन में 1975 मामले आए हैं और 47 लोगों की मौत हुई है। देश के सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र में मरने वालों की संख्या 323 हो गई है। देश में कोरोना वायरस पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या 26,917 हो गई है। इनमें से 20,177 सक्रिय हैं। 5913 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। 826 लोगों की अब तक मौत हुई है।

CRPF जवान को हथकड़ी लगा कर पीटा, नंगा घुमाया, पानी भी नहीं दी: कर्नाटक पुलिस पर आरोप

कर्नाटक में एक सीआरपीएफ (CRPF) जवान पर पुलिस ने कार्रवाई की है। कोविड-19 को लेकर देश भर की पुलिस लॉकडाउन के पालन में जुटी है। इसी दौरान कर्नाटक के बेलागावी से एक सीआपीएफ जवान की तस्वीर वायरल हुई है। जवान को चैन में जकड़ कर पुलिस स्टेशन में फर्श पर बिठाया गया है। ये घटना चिक्कोड़ी तालुका के यकसंबा गाँव की है। ये तस्वीर सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई।

ये घटना गुरुवार (अप्रैल 23, 2020) की है। चैन में जकड़ कर फर्श पर बिठाए गए CRPF जवान का नाम सुनील सावंत है। वो कोबरा कमांडो हैं। दरअसल, वो बेलागावी में अपने घर के बाहर बाइक साफ़ कर रहे थे। पुलिस ने उस पर लॉकडाउन के उल्लंघन का आरोप लगाया क्योंकि उन्होंने मास्क नहीं पहन रखा था और प्रतिबंधों के बावजूद घर के बाहर घूमने का आरोप भी लगाया गया। पुलिस उन्हें थाने लेकर गई।

आरोप है कि वो बार-बार कहते रहे कि वो CRPF में काम करते हैं लेकिन फिर भी पुलिस ने उनकी पिटाई की। सुनील फ़िलहाल छुट्टी पर थे। आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने उन्हें कोई भी चेतावनी दिए बिना ही उनकी पिटाई शुरू कर दी। वीडियो के हवाले से बताया गया है कि पुलिस ने पहले उन्हें पीटना शुरू किया। उनके कपड़े फाड़ डाले गए, उन्हें हथकड़ी पहना दी गई और पैदल ही गलियों में घुमाया गया।

इसके बाद उन्हें जेल में डाल दिया गया। एसएचओ ने बिना कंट्रोलिंग अथॉरिटी को सूचित किए ही उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कर दी। सीआरपीएफ जवान की पत्नी ने आरोप लगाया है कि उनके पति को कई घंटों तक पानी तक पीने को नहीं दिया गया, जबकि वो प्यास से व्याकुल हो रहे थे। कहा जा रहा है कि सीआरपीएफ के जवान काफी अनुशासित होते हैं और ख़ासकर कोबरा कमांडो तो पूरी तरह नियम-क़ानूनों के पालन के मामले में सख्त होते हैं।

ट्विटर यूजर मीथांसू चौधरी ने ये जानकारी शेयर करते हुए कर्नाटक पुलिस पर एक सीआरपीएफ (CRPF) जवान के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया और कहा कि ये पूरे देश के लिए शर्म की बात है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुनील को नंगे पाँव गलियों में घुमाया गया। सोशल मीडिया पर लोग इसे पुलिस की ज्यादती बता रहे हैं। अभी तक कर्नाटक पुलिस या सरकार की तरफ से इस मामले में कोई बयान नहीं आया है।

कमांडो पर शांति भंग करने और ऑन-ड्यूटी सरकारी कर्मचारियों को उनके काम में बाधा पहुँचाने की धाराएँ लगाई गई हैं। पुलिस ने आरोप लगाया कि सीआरपएफ जवान सुनील ने पहले एक पुलिस कमांडो का कॉलर पकड़ा और उसे पीटने शुरू कर दिया। इसीलिए, लाठी का प्रयोग किया गया। कहा जा रहा है कि कोबरा कमांडोज को सालों तक किसी भी हमला का जवाब देने की ट्रेनिंग दी जाती है। ऐसे में, वो हमले बर्दाश्त करने के आदी नहीं होते।

इससे पहले हैदराबाद में पुलिस द्वारा ज्यादती की ख़बर आई थी। हैदराबाद में सब्जी की दुकान पर भगवा झंडा देख एक मुस्लिम ने आपत्ति जताई है। इसको लेकर ट्वीट करते हुए उसने साइबारबाद पुलिस को टैग किया है। उसने पुलिस से कार्रवाई की मॉंग की। इसके बाद पुलिस भी हरकत में आ गई। इससे पहले झारखण्ड में फल-विक्रेताओं पर सिर्फ इसीलिए कार्रवाई की गई, क्योंकि उन्होंने बैनर पर हिन्दू लिखा था और भगवान की फोटो लगाई थी।

इनाम खान ने लड़की को दी एसिड अटैक की धमकी, लगातार कर रहा अश्लील टिप्पणी: लोग कर रहे कार्रवाई की माँग

फेसबुक पर इनाम ख़ान नामक व्यक्ति ने एक लड़की पर एसिड अटैक की धमकी दी है। उसने अपनी प्रोफाइल पिक्चर के रूप में भगवान श्रीराम और माँ सीता की तस्वीर लगाई हुई है। एक लड़की की तस्वीर पोस्ट करते हुए उसने लिखा कि इसके चेहरे पर जो भी तेज़ाब फेंकेगा, उसे 20000 रुपए मिलेंगे। उसने कहा कि ये उसका वादा है। वो लड़की कौन है, ये साफ़ नहीं है। लेकिन, वो उस लड़की की तस्वीर के साथ और भी ऐसी टिप्पणी कर चुका है।

एक अन्य पोस्ट में उसने इसी लड़की की तस्वीर के साथ लिखा- “इस लड़की को याद ही नहीं है कि इसके घर की बगल वाली गली में मैं जब इसका #$@ चाट…” एक लड़की की तस्वीर के साथ इस तरह की भद्दी टिप्पणी करने वाला इनाम ख़ान बिहार के पूर्वी चम्पारण स्थित मोतिहारी का है। उसके फेसबुक प्रोफाइल के अनुसार, उसने शहर के ही ‘इक़रा पब्लिक स्कूल’ से पढ़ाई की है।

वो मुजफ्फरपुर के बाबासाहब भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर चुका है। फ़िलहाल वो यूएई की राजधानी अबूधाबी में है। कुछ लोगों द्वारा उसके दुबई में होने की बात भी कही जा रही है। उसके कारनामों से ये स्पष्ट है कि उसने अपनी प्रोफाइल में राम-सीता की फोटो हिन्दू धर्म और देवी-देवताओं को बदनाम करने के लिए लगा रखी है। सोशल मीडिया पर लोगों ने इनाम ख़ान के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की माँग की है।

इनाम ख़ान फेसबुक पर एक लड़की को कर रहा है बदनाम

इनाम ने फेसबुक पर ख़ुद को शाहरुख़ ख़ान का फैन बताया है। किसी ने जब उसके नंबर पर कॉन्टैक्ट किया तो बताया गया कि इनाम दुबई में है और ये फेसबुक अकाउंट उसका भाई चला रहा है। साथ ही उसने पुलिस में शिकायत करने का भी दावा किया। इस मामले में कुछ ऐसे कॉमेंट्स भी वायरल हुए हैं, जिसमें इनाम ख़ान अपने दोस्तों से कह रहा है कि उस लड़की का कोई सेक्सी वीडियो हो तो वायरल करो।

इससे पहले एक इंस्टाग्राम पेज को लेकर ख़बर आई थी कि कैसे इस सोशल साइट को धीरे-धीरे हिन्दू विरोध और हिन्दू घृणा का हब बनाया जा रहा है। इसी क्रम में एक व्यक्ति ने एक ऐसा पेज बनाया था, जहाँ हिन्दू देवी-देवताओं को भद्दी-भद्दी गालियाँ दी जाती हैं। इस पेज पर इस्लामिक हस्तियों को हिन्दू देवी-देवताओं से ज्यादा श्रेष्ठ बता कर दिखाया जाता है। हाल ही में भगवान राम और सीता पर आपत्तिजनक कमेंट करने के कारण फारूकी मुनव्वर पर FIR दायर की गई थी।

inam khan of motihari bihar threatens girl of acid attack

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सोनिया गाँधी सिर्फ माँ नहीं, सीता माँ हैं: रातों रात पैदा हुए राहुल के लाखों भाई-बहन, त्रेतायुग से है कनेक्शन

यूपीए की वर्तमान अध्यक्ष व पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की दो बार की सरकार को फ्रंट डोर से चलाने वाली मैडम सोनिया गाँधी पर इन दिनों केवल अपने सुपुत्र राहुल गाँधी को ट्रैक पर लाने का जिम्मा नहीं है। इस समय उन पर उनके कई और बेटों के मार्गदर्शन का भार है। सोशल मीडिया पर लंबे समय तक केवल अपने एक बेटे की नादानियों के कारण मीम्स में दिखने वाली सोनिया गाँधी अब भारत माँ और सीता माँ के साथ दिखने लगी हैं।

जाहिर है इसके लिए उन्हें और उनके करीबियों को अर्नब गोस्वामी को थैंक्स कहना चाहिए। मगर, कॉन्ग्रेसियों को एहसान फरामोशी की हद और मातृ ऋण चुकाने के बीच का फर्क़ बहुत महीन रेखा के इधर-उधर दिखता है। इसलिए, जिसकी नजर कमजोर होती है वे इधर-उधर निकल जाते हैं।

यकीन नहीं आता तो प्रमाण देखिए। अर्नब गोस्वामी ने सोनिया गाँधी को लेकर एक दिन तीखे सवाल किए। उससे पहले सोनिया गाँधी या कोई कॉन्ग्रेसी सुर्खियों में बहुत चाहते हुए भी कितनी जगह बटोर पा रहा था? शायद सुपरफास्ट 100 खबरों में 1 खबर के स्लॉट बराबर भी नहीं। 

मगर जैसे ही उन्हें लेकर अर्नब ने टिप्पणी की, वे चारों ओर छा गईं। यहीं से सोनिया गाँधी के अन्य पुत्रों को मातृ ऋण चुकाने का भी अवसर मिला। पहले तो खुद को हनुमान-अंगद समझकर अपनी माँ की रक्षा में दो दूत अर्नब के सामने आ गए, लेकिन जब पकड़े गए तो स्थिति रावण के गुप्तचर शूक जैसी हो गई।

कहना गलत नहीं है कि त्रेतायुग में माता सीता के प्रति हनुमान जी का प्रेम जितना असीम था, उतना ही आज कॉन्ग्रेसियों का सोनिया गाँधी के लिए है। फर्क बस ये है कि पहले के समय में मातृ प्रेम की पराकाष्ठा को भक्ति कहा जाता था। लेकिन, कॉन्ग्रेसियों के संदर्भ में वो चमचागिरी कहलाती है।

जब, अर्नब पर हमला करके कॉन्ग्रेस के दो दूत पकड़े गए तो अगले दिन यूथ कॉन्ग्रेस नामक क्रच ने अपनी माँ के छवि निर्माण के लिए एक उपाय खोजा। उन्होंने तिरंगे के ऊपर सोनिया गाँधी की तस्वीर लगाई और फिर उस पर ‘माँ तुझे सलाम’ लिखा।

हालाँकि, भारत माता से तुलना करने पर कॉन्ग्रेसियों की थू-थू बहुत हुई। लेकिन माँ के नाम पर चढ़े चढ़ावे को चरणामृत मानकर इन्होंने उसके भी दो घूँट मार लिए और विथ कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल से उन्हें सीता माँ के समकक्ष रख दिया। आप कहेंगे कि यूथ कॉन्ग्रेस तो मालूम है। मगर, विथ कॉन्ग्रेस कैसी बला है?

अरे जनाब! विथ कॉन्ग्रेस भी यूथ कॉन्ग्रेस की तरह ही है। फर्क बस इतना है कि यूथ कॉन्ग्रेस क्रच के समान हैं, जहाँ देर-सवेर उन्हें माँ के दर्शन होते हैं। लेकिन विथ कॉन्ग्रेस अनाथालय की तरह है। जो माँ से मरहूम है लेकिन फिर भी उनकी छत्रछाया में काम किए जा रहा है।

इसी विथ कॉन्ग्रेस, जिसने एक पोस्टर शेयर किया है और संदेश दिया है कि जैसे सीता माँ नेपाल की थीं और त्रेतायुग में राक्षसों ने इनके चरित्र पर सावल उठाते हुए अपशब्द कहे थे। वैसे ही सोनिया माँ इटली की हैं और कलयुग में राक्षस (शायद अर्नब या देश की पूरी जनता ही) उन पर सवाल उठा रहे हैं, उनके चरित्र पर सवाल उठाकर अपशब्द कह रहे हैं।

अब इन पोस्टरों से और कोई बात प्रमाणित हुई हो या न हुई हो। लेकिन सोनिया गाँधी के सुर्खियों में आने से ये पता चल गया कि जिस प्रकार सीता माँ की भक्ति में वानरों ने उन्हें माँ का दे दर्जा दिया था, वैसे ही सोनिया गाँधी के चमचों ने चमचागिरी में उन्हें माँ का ओहदा दे दिया है।

इसलिए, हम कह सकते हैं कि अब कॉन्ग्रेस के पास कुर्सी के लिए बहुतेरे विकल्प हैं और राहुल गाँधी के अनेकों भाई-बहन। जिनका न केवल मातृ प्रेम सोनिया गाँधी के प्रति राहुल जितना है, बल्कि बुद्धि में भी वे उनसे कम नहीं हैं। जो समय आने पर अपनी माँ स्वरूप सोनिया गाँधी पर उठे सवाल को नारी शक्ति का अपमान बताते हैं लेकिन जब भी मौक़ा पाते हैं तो स्मति ईरानी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ, निर्मला सीतारमण जैसी अनेकों महिलाओं का मखौल उड़ाते हैं और ऐसा करके अपनी माँ व ‘एकमात्र भाई-बहन’ के दुलारे बने रहते हैं।

CM के साथ PM मोदी की मीटिंग: 9 मुख्यमंत्रियों ने की बात, बाकियों ने लिखित में रखी माँग व समाधान

प्रधानमंत्री नरेंद्र ने सोमवार (अप्रैल 27, 2020) को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। ये बैठक कोरोना वायरस संक्रमण आपदा से जुड़ी स्थिति की समीक्षा के लिए की गई। हालाँकि, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन इस बैठक में शामिल नहीं हुए। उन्होंने बताया कि केरल सरकार की तरफ से लिखित में अपनी बात रख दी गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों को लॉकडाउन का सख्ती से प्लान कराने की हिदायत दी।

कोरोना आपदा के बीच ये प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों की चौथी बैठक थी। इस दौरान 9 मुख्यमंत्रियों ने अपनी बात रखी। मेघालय, मिजोरम, पुडुचेरी, हिमाचल प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, ओडिशा और गुजरात के मुख्यमंत्रियों ने पीएम से बातचीत की, जबकि बाकी ने लिखित में अपनी बात रखी। मेघालय ने कहा कि वहाँ लॉकडाउन 3 मई के बाद भी जारी रहेगा। मेघालय के सीएम ने कहा कि वो केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुरूप काम करते रहेंगे।

पुडुचेरी के सीएम वी नारायणसामी ने केंद्र से पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट्स) व अन्य मेडिकल उपकरणों की माँग की। उन्होंने वित्तीय मदद भी माँगी। उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उद्योग-धंधों को धीरे-धोरे चालू करने की बात कही। उन्होंने बताया कि उनके राज्य में मनरेगा सहित अन्य विकास कार्य शुरू हैं। हिमाचल प्रदेश ने आर्थिक सेवाएँ चालू करने की बात की। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बताया कि कैसे ग़रीबों की मदद की जा रही है।

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कई सलाह दिए और कहा कि नेशनल लॉकडाउन 3 मई के बाद भी जारी रहना चाहिए लेकिन महत्वपूर्ण गतिविधियाँ चालू की जानी चाहिए। उन्होंने धार्मिक व राजनीतिक गैदरिंग के अलावा शिक्षण संस्थानों को बंद रखने की वकालत की। उन्होंने कहा कि आर्थिक गतिविधियों को चालू किया जाना चाहिए। इसी तरह अन्य मुख्यमंत्रियों ने भी अपनी-अपनी बातें रखीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्रियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर विचार-विमर्श करना चाहिए कि किस जगह पर लॉकडाउन को कैसे ख़त्म किया जाएगा। उन्होंने इसके लिए ‘ग्रेडेड एग्जिट’ की योजना बनाने की सलाह दी। बता दें कि देश भर में मार्च 25, 2020 से ही लॉकडाउन चल रहा है, जिसकी अवधि मई 3 को ख़त्म हो रही है। सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि इसके बाद सरकार क्या करती है।

बैठक के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वो व्यक्तिगत रूप से राज्य में कोरोना से निपटने की तैयारी की मॉनिटरिंग कर रही हैं और जब तक वो मौजूद हैं, तब तक राज्य के एक भी नागरिक को निःसहाय महसूस नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के अन्य हिस्सों में फँसे बंगालियों की भी मदद की जा रही है। कोटा से छात्रों को वापस बुलाया जाएगा। ममता ने अधिकारियों को कई ज़रूरी निर्देश दिए।

हिज्बुल आतंकी को ऐक्टिविस्ट किसने कहा? पंजाब की सरकार ने, पंजाब की कॉन्ग्रेसी सरकार ने

पंजाब पुलिस ने रविवार को हिज्बुल मुजाहिदीन के एक आतंकी को गिरफ्तार किया। इसकी खबर देते हुए पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार ने उसे आतंकी की जगह ऐक्टिविस्ट का दर्जा दे दिया। जिसके बाद ट्विटर यूज़र्स ने इस बात को लेकर पंजाब सरकार को खूब खरी खोटी सुनाई। हिज्बुल मुजाहिदीन एक आतंकी संगठन है। खबरों के मुताबिक बुरहान वानी की मौत के बाद गिरफ्तार आतंकी को नया कमांडर बनाया गया था।

गौरतलब है कि जहाँ एक तरफ पंजाब सरकार इसे अपनी एक बड़ी सफलता मान रही है, वहीं हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकी को ऐक्टिविस्ट का दर्जा देकर उसका सम्मान भी कर रही है। हद है तर्क की और ऐसी राजनीति की! मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से किए गए एक ट्वीट की वजह से सोशल मीडिया यूज़र्स का गुस्सा सातवें आसमान पर है। ट्विटर पर हजारों लोगों ने सरकार के इस ट्वीट को लेकर अमरिंदर सिंह की आलोचना की है।

CM अमरिंदर सिंह के खिलाफ ट्वीट कर कई यूजर्स ने कॉन्ग्रेसी नेताओं के पुराने बयान को लेकर पार्टी की नीति पर भी सवाल उठाए हैं। यूजर्स ने दलील दी है कि हिज्बुल के जिस दहशतगर्द को पंजाब में पकड़ा गया है, उसके लिए ऐक्टिविस्ट नहीं टेररिस्ट शब्द का इस्तेमाल होना चाहिए था। हालाँकि जिस ट्वीट पर यह पूरा विवाद शुरू हुआ था, उसको अब पंजाब सरकार ने बदल दिया है।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब किसी कॉन्ग्रेसी नेता ने आतंकी का सम्मान किया हो। इससे पहले भी कॉन्ग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह द्वारा ओसामा बिन लादेन को ओसामा जी कहा गया था। और तो और, रणदीप सुरजेवाला द्वारा अफजल गुरु को अफजल गुरु जी और हाफिज सईद को हाफिज जी कहते हुए भी सुना गया है। सबसे खास बात यह कि कॉन्ग्रेस पहले ऐसे बयान देती है और फिर पीछे हट जाती है। यानी जहाँ संदेश पहुँचाना है, पहुँचा दिया और जिन्हें बरगलाना है उन्हें बरगला भी दिया।

कौन था यह हिज्बुल का यह आतंकी

खबरों के अनुसार पंजाब पुलिस ने कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतीपोरा थाने के नौगाम इलाके का रहने वाला हिलाल अहमद वागे को 25 अप्रैल को अमृतसर के मेट्रो मार्ट के पास से गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान हिलाल को हिज्बुल के चीफ रियाज अहमद नाइकू ने मेट्रो मार्ट के पास एक अज्ञात शख्स से पैसे लेने भेजा था। वहाँ एक शख्स बाइक पर आया और हिलाल को पैसे दे गया। हिलाल के साथ ट्रक में मौजूद दूसरे शख्स की पहचान अनंतनाग के रईस अहमद के रूप में हुई है।

घर में थूकते हैं मुस्लिम, पुलिस ले जाती है मोबाइल: प्रताड़ना से तंग राँची की ऋचा भारती, परिवार ने कहा- ‘गोली मार दो’

“मुझे तो हिंदुस्तान में रहने में ही डर लग रहा है। क्या झारखण्ड पाकिस्तान बन गया है? अगर हमें इस तरह से प्रताड़ित किया जाता रहा तो हम कहाँ जाएँगे?”

ये शब्द हैं ऋचा भारती के पिता के। राँची की वही ऋचा भारती, जिन्हें अदालत ने कुरान बाँटने की अजोबोग़रीब और विवादित सज़ा दी थी। उन्हें व उनके पूरे परिवार को जानबूझ कर प्रताड़ित किया जा रहा है। ये काम झारखण्ड पुलिस कर रही है, वो भी झारखण्ड सरकार के इशारों पर। गुरुवार (अप्रैल 23, 2020) को अचानक से 5-6 पुलिसवाले उनके घर आए और ऋचा भारती का मोबाइल फोन ले गए। मुद्दा क्या था, कारण क्या है, शिकायत किसने की- पुलिस ने ये सब कुछ भी नहीं बताया।

पुलिस से जब ऋचा भारती के पिता प्रकाश पटेल ने कहा कि वो कोई कागज़ दिखाएँ, जिसमें मोबाइल फोन जब्त करने का आदेश हो तो पुलिस कुछ नहीं दिखा पाई। बिना किसी सर्च वॉरंट वगैरह के पुलिस घर में घुस गई और परिवार के सभी सदस्यों का मोबाइल फोन खँगालने लगी। प्राइवेट मैसेजों का भी पड़ताल की है। ऋचा के भाई का फोन लेकर छानबीन की गई। वो लोग बार-बार पूछते रहे कि किसकी शिकायत पर ये हो रहा है, तो कुछ नहीं बताया गया।

पुलिस सिर्फ़ इतना बताती रही कि उन्हें मोबाइल लेना है और चेक करना है। ये पहली बार नहीं हुआ है। कुछ हफ़्तों पहले भी पुलिस आई थी और ऋचा भारती की माँ का मोबाइल फोन लेकर चली गई थी। तब भी कोई कारण नहीं बताया गया। मोबाइल फोन वापस लेने के लिए प्रकाश पटेल बार-बार थाने का चक्कर लगाते रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। थाना में कहा जाता रहा कि जब्ती सूची बना दी गई है। वो रेडमी ए-1 हैंडसेट था।

अप्रैल 23 को साइबर क्राइम की डीएसपी भी आई थीं, जिन्होंने कहा कि वो लिखित में देने को तैयार हैं कि पुलिस मोबाइल फोन लेकर जा रही है। लेकिन, ये नहीं बताया गया कि किसकी शिकायत पर यह सब किया जा रहा है। ऋचा ने ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए आशंका जताई है कि ट्विटर पर कुछ समुदाय विशेष के लोगों ने सरकरी नेताओं और पुलिस को टैग कर के कुछ शिकायत की होगी, जिसके बाद अचानक से पुलिस यूँ कार्रवाई करने लगी।

ऋचा के पिता प्रकाश व्यथा सुनाते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उनके और उनके परिवार के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है कि उन्हें अब हिंदुस्तान में रहने में भी शर्म आ रही है। वो बताते हैं कि जब मोबाइल फोन जब्त कर के ले जाया गया, तो वो भी थाने पहुँचे ताकि पता चल सके कि मामला क्या है। उन्हें थाने में कोई नहीं मिला। फिर उसी दिन शाम को 15-20 की संख्या में पुलिसकर्मी फिर से ऋचा के घर पहुँचे।

बिना कुछ किए पीड़ित परिवार के साथ एकदम अपराधी की तरह व्यवहार किया गया। क़रीब एक घंटे तक साइबर क्राइम वालों ने घर के सारे मोबाइल फोन्स की जाँच की। उन्होंने जो-जो कहा, परिवार ने वो सब कर के जाँच में सहयोग किया। ऋचा की माँ की तबियत काफी खराब है। इन सब के बीच उनकी तबियत और बिगड़ गई। उन्हें डॉक्टर ने बेड रेस्ट की सलाह दी है। उनका कुछ दिनों पहले ट्यूमर का ऑपरेशन हुआ था। इसके अलावा एक और सर्जरी हुई थी।

पुलिस की पूछताछ के दौरान ही उनकी तबियत अचानक से बिगड़ गई। इसके बाद पुलिस के ही सहयोग से ऋचा की माँ को किसी तरह हॉस्पिटल भेजा गया। वहाँ उनका इलाज चला, जिसके बाद उन्हें डिसचार्ज कर दिया गया। ऋचा के द्वारा क़ुरान बाँटने वाले प्रकरण के बाद ऋचा भारती के नाम से कई फेक फेसबुक एकाउंट्स बन गए हैं। उन्होंने थाने में ज्ञापन देकर उन फेक एकाउंट्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की गुहार लगाई लेकिन पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया।

सबसे बड़ी बात तो ये है कि इलाक़े में समुदाय विशेष के बीच ऋचा भारती के परिवार के ख़िलाफ़ चर्चा आम हो गई हैं। एक व्यक्ति ने बताया कि उनके मेडिकल स्टोर पर शहजाद नामक आदमी ऋचा और उनके परिवार को लेकर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहा था। उसने जब पुलिस द्वारा ऋचा के घर छानबीन किए जाने की ख़बर सुनी तो अफवाह उड़ा दी कि उन्हें पुलिस पकड़ के ले गई है। साथ ही वो बातें कर रहा था कि वो सब मिल कर ऋचा के परिवार को मार-पीट कर भगा देंगे।

ऋचा के परिवार के ख़िलाफ़ समुदाय विशेष के कुछ लोग मार-पीट कर भगाने की बात कर रहे थे, ऐसा एक मेडिकल स्टोर वाले ने बताया। इस सम्बन्ध में भी परिवार ने पुलिस को सूचित किया था। कुछ दिनों पहले की ही बात है जब ऋचा का परिवार छत पर बैठा हुआ था और उनकी चचेरी बहन किनारे पर खड़ी थी। तभी दूसरे समुदाय के दो-चार युवक वहाँ से गुजर रहे थे और बातें कर रहे थे कि यही ऋचा का घर है। इसके बाद उन्होंने घर के दरवाज़े पर ही थूक दिया।

उन्होंने क़रीब 4-5 बार घर के दरवाज़े पर थूक फेंका था। जब तक परिवार के लोग वहाँ पहुँचते, वो लोग वहाँ से भाग निकले। परिवार का कहना है कि उन्हें लगातार उकसाया जा रहा है ताकि वो जवाब में कुछ करें तो उसे बात का बतंगड़ बनाया जा सके। परिवार का आरोप है कि उनके साथ स्थानीय पुलिस जरा भी सहयोग नहीं कर रही है। ताज़ा मोबाइल फोन जब्ती वाली घटना के अगले दिन जब ऋचा के पिता थाने में आवदेन देने गए तो उन्हें थाना प्रभारी द्वारा प्रताड़ित किया गया।

थाना प्रभारी ने 3 बार उनसे थाने का चक्कर कटवाया और बाद में आवेदन लेने से भी इनकार कर दिया। आवेदन में पुलिस तरह-तरह की गलतियाँ निकालती रही। बाद में डीएसपी को शिकायत किए जाने के बाद पुलिस ने आवेदन तो लिया लेकिन उसमें काफ़ी कुछ बदलाव कर दिया। बिना शिकायतकर्ता की मर्जी के उस आवेदन के साथ छेड़छाड़ किया गया। ये काँके पिठौरिया थाना क्षेत्र की घटना है। पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हतस्क्षेप की माँग की है, जो इस पर चुप हैं।

भयभीत है परिवार: ऋचा भारती ने पुलिस को दिया आवेदन

ऋचा के पिता प्रकाश पटेल ने बताया कि जब वो पुलिस से शिकायत करते हैं तो पुलिस झिड़क के कहती है कि हम क्या करें, आपके कारण सभी को गोली मार दें? बाद में तंग आकर प्रकाश पटेल ने थाना प्रभारी से कह दिया कि वो दूसरों को क्यों गोली मारेंगे, उनके पूरे परिवार को ही गोली मार दें। हालाँकि, अभी ऋचा का फोन लौटा दिया गया है लेकिन पुलिस द्वारा की जा रही प्रताड़ना के कारण परिवार अब भी सदमे में है।

ऋचा के पिता ने कहा कि जमशेदपुर में फल विक्रेताओं के दुकानों से हिन्दू वाला बैनर हटाने की बात हो या बंगाल में हिन्दुओं के मारे जाने की ख़बर, इन सब को सुन कर और उनके परिवार के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर ऐसा लगता ही नहीं है कि वो किसी धर्मनिपरपेक्ष राष्ट्र में रह रहे हैं। ऐसा लगता है, जैसे कोई इस्लामिक मुल्क़ में रह रहे हों। परिवार का कहना है कि अगर ऋचा के ख़िलाफ़ एक भी बनावटी सबूत मिल जाता तो उन्हें फिर से जेल में ले जाकर डाल दिया जाता।

ऋचा भारती के परिवार ने की सुरक्षा की माँग: थाना को दिया आवेदन

हमने जब ऋचा के पिता से पूछा कि वो किसी भी आरोपित का नाम पुलिस को क्यों नहीं बता रहे हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि जब वो नाम नहीं दे रहे हैं तो उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है तो अगर उन्होंने नाम दे दिया तो उनके ख़िलाफ़ और भी बड़ी साज़िश रची जाएगी। पिठौरिया के थानाध्यक्ष से भी ऑपइंडिया ने संपर्क किया, जिन्होंने आरोपों को नकार दिया। उन्होंने कहा कि ऋचा के परिवार की पुलिस जितनी मदद कर रही है, वो उतना ज्यादा ‘नौटंकी’ कर रहे हैं।

उन्होंने कहा की ऋचा की माँ की तबियत ख़राब होने पर उन्हें पुलिस की गाड़ी से ही इलाज के लिए भेजा गया। परिवार का कहना है कि डीएसपी के सहयोग के कारण ऐसा संभव हुआ, जो महिला ही हैं। थानाध्यक्ष ने कहा कि पुलिस उनके घर के पास से दिन भर में कई बार लॉकडाउन पेट्रोलिंग के दौरान गुजरती है, इसीलिए उनके द्वारा किए जा रहे ‘डर’ के दावों में कोई दम नहीं है। आवेदन में छेड़छाड़ होने की बात से भी उन्होंने इनकार कर दिया।

ऋचा भारती ने एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि समुदाय विशेष के कुछ लोगों के ट्वीट्स के आधार पर बार-बार उनके घर आकर पुलिस उनके मोबाइल फोन्स की छानबीन करती है। ऋचा ने पुलिस से कहा कि वो उन पर कार्रवाई करें, जो इधर-उधर थूक फेंक रहे हैं, जो हमारे जवानों का सम्मान नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखण्ड में सरकार बदलते ही हिन्दुओं के साथ दुर्व्यवहार शुरू हो गया है।

जब परिवार बार-बार कह रहा है कि उनके घर के आसपास संदिग्ध लोगों का आना-जाना बढ़ गया है और समुदाय विशेष के स्थानीय लोग उन्हें मार भगाने की बात कर रहे हैं, फिर पुलिस कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रही या सरकार उन्हें सुरक्षा क्यों नहीं प्रदान कर रही? उलटा किसी के आरोपों को ‘नौटंकी’ बता कर ख़ारिज कर देना कहाँ तक सही है? वो भी तब जब परिवार ख़ुद कई दूसरी परेशानियों से जूझ रहा है।

जुलाई 2019 में एक मामले में राँची की अदालत ने ऋचा को कुरान बाँटने का आदेश दिया था। ऋचा ने इस शर्त को मानने से इनकार कर दिया था और कहा था कि आज अदालत उन्हें कुरान बाँटने को कह रही है, कल को इस्लाम मज़हब अपनाने को भी कहा जा सकता है। ऋचा ने पूछा था कि क्या कभी किसी अदालत ने किसी आरोपित को रामायण या भगवद्गीता बाँटने को कहा है? बाद में विरोध के बाद राँची की अदालत ने अपना आदेश वापस ले लिया था।

कॉन्ग्रेस को बचाने के लिए साज़िशों पर पर्दा डाल रही है मुंबई पुलिस: अर्नब गोस्वामी ने लिखा लेटर

पत्रकार अर्नब गोस्वामी ने आरोप लगाया है कि मुंबई पुलिस उन पर हुए हमलों के मामले में कॉन्ग्रेस की साज़िश को कवर-अप करने में जुट गई है। उन्होंने मुंबई के एनएम जोशी मार्ग पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर को पत्र लिख कर ये आरोप लगाए। मंगलवार (अप्रैल 23, 2020) को अर्नब गोस्वामी ने ख़ुद पर हुए हमले के मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले में दो यूथ कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता धरे गए थे।

क्या लिखा अर्नब गोस्वामी ने मुंबई पुलिस को भेजे पत्र में?

अर्नब ने पत्र में लिखा कि एक राष्ट्रीय पार्टी की इस हमले में भागीदारी है, जिसे पुलिस नज़रअंदाज़ कर रही है। अर्नब ने कहा कि एफआईआर फॉर्म में सिर्फ़ पकड़े गए यूथ कॉन्ग्रेस के दोनों कार्यकर्ताओं का नाम है, जबकि उनके साथ इस साज़िश में शामिल अन्य लोगों के नाम नहीं हैं। अर्नब ने कहा कि शिकायत कॉपी में उन सभी के नाम, डिटेल्स और लिंक्स दिए गए थे। इस पर अर्नब के सिक्योरिटी इंचार्ज ने भी हस्ताक्षर किया था, जो शिकायतकर्ताओं में से एक है।

‘रिपब्लिक टीवी’ ने भी कुछ सबूत पुलिस को उपलब्ध कराए थे, जिसे एफआईआर फॉर्म से गायब कर दिया गया है। अर्नब की गाड़ी पर जो द्रव्य पदार्थ फेंका गया था, उसके एसिड या फिर अन्य ज्वलनशील वस्तु होने की आशंका है लेकिन आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में कोई जाँच की ही नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन पर और उनके परिवार पर जो ख़तरा मँडरा रहा है, उसे देखते हुए उचित धाराएँ नहीं लगाई गई हैं।

अर्नब गोस्वामी और उनकी उनकी पत्नी समयब्रत राय गोस्वामी पर उनके घर से 500 मीटर की दूरी पर हमला हुआ था। उनकी पत्नी ‘रिपब्लिक टीवी’ में एडिटर के पद पर काबिज हैं। ये हमला उनके टोयोटा कार पर बुधवार (अप्रैल 23, 2020) को रात 12:20 में किया गया। अर्नब गोस्वामी ने आरोप लगाया कि दोनों आरोपितों ने स्वीकार किया था कि उन्हें कॉन्ग्रेस के उच्चाधिकारियों ने ‘उन्हें सबक सिखाने’ के लिए भेजा था।

यूथ कॉन्ग्रेस के दोनों कार्यकर्ता ‘मार डालेंगे’ और ‘ख़त्म कर देंगे’ जैसी बातें भी चिल्ला रहे थे। अर्नब गोस्वामी ने आरोप लगाया कि अब ऐसा प्रचारित किया जा रहा है कि दोनों आरोपितों ने अपनी व्यक्तिगत कैपेसिटी में हमला किया था, जो ग़लत है। उन्होंने कहा कि ये कॉन्ग्रेस पार्टी की साज़िश है, उन्हें चुप कराने की, उनकी आवाज़ दबाने की। दोनों ने पकड़े जाते ही अपना कॉन्ग्रेस कनेक्शन जाहिर कर दिया था।

अर्नब गोस्वामी ने पुलिस को लिखे पत्र में कई आरोप लगाए

आरोपित अरुण बोराडे सिओन कोलीवाड़ा यूथ कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष है जबकि उसका साथी प्रतीक मिश्रा सिओन कोलीवाड़ा यूथ कॉन्ग्रेस का जनरल सेक्रेटरी होने का दावा करता है। वो पहले से ही इंतज़ार कर रहे थे कि अर्नब निकले और वो हमला करें। अर्नब का कहना है कि वो ‘ऊपर से आए आदेश’ का अनुसरण कर रहे थे। अर्नब गोस्वामी के सिक्योरिटी इंचार्ज शिवाजी होसमानी ने शिकायत की कॉपी पर हस्ताक्षर किया था।

अर्नब गोस्वामी को भेजे गए 2 नोटिस

इससे पहले मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी को तत्काल पूछताछ के लिए 12 घंटे के भीतर दो नोटिस भेजा था। उन्होंने पालघर मॉब लिंचिंग में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गॉंधी की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए थे। रिपब्लिक टीवी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मुंबई पुलिस ने पिछले 12 घंटे में अर्नब को 2 नोटिस भेजे हैं। कानून का पालन करने वाले नागरिक के रूप में अर्नब आज (27 अप्रैल, 2020) पूछताछ के लिए जाएँगे।

महाराष्ट्र सरकार में कॉन्ग्रेस कोटे से मंत्री नितिन राउत की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर पर यह नोटिस सीआरपीसी 41ए के तहत भेजा गया। राउत ने मामला नागपुर में दर्ज कराया था। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को मुंबई ट्रांसफर करने का आदेश दिया था। अर्नब गोस्वामी को सोमवार सुबह 9 बजे पेश होने को कहा गया है।

97% जनता PM मोदी के लॉकडाउन से सहमत, 66% ने कहा- एक धार्मिक समुदाय के कारण बढ़े आँकड़े: गैलप

कोरोना महामारी से जंग के बीच देश की 91% जनता का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार सही दिशा में काम कर रही है। इससे पहले मार्च माह में 83% लोगों का मानना था कि कोरोना को रोकने के लिए केंद्र सरकार सही कदम उठा रही है। इसी क्रम में अमेरिका की बात करें, तो उनके देशों में मार्च महीने में मात्र 42 प्रतिशत लोगों का ऐसा मानना था कि उनकी सरकार ने कोरोना से लड़ने के लिए उपयुक्त कदम उठाए। वहीं, इंग्लैंड (यूनाइटेड किंग्डम) में ये आँकड़ा मार्च तक 49% था।

इन आँकड़ों का खुलासा एक सर्वे के बाद हुआ। इस सर्वे को स्विट्जरलैंट के पोलिंग संगठन गैलअप इंटरनेशनल एसोसिएशन ने कराया। इस स्नैप पोल को विश्व के 28 देशों में कराया गया। इसके मुताबिक, भारत की 91% जनता का मानना है कि नरेंद्र मोदी सरकार कोरोना महामारी में बहुत अच्छा काम कर रही है। जबकि 7% इससे इंकार करते हैं और 2% इस पर कुछ नहीं कहना चाहते। 

इस सर्वे के अनुसार, मार्च से लेकर अप्रैल तक में नरेंद्र मोदी पर विश्वास जताने वालों में इजाफा दिखा है। ग्राफ में हम देख सकते हैं, पहले मात्र 83% लोग इस कथन पर अपनी सहमति दे रहे थे। लेकिन अप्रैल में मोदी सरकार के प्रयासों को देखकर ये आँकड़ा बढ़ा और 91% तक पहुँच गया। 

सर्वे में लॉकडाउन के प्रश्न पर करीब 97% जनता ने माना कि कोरोना रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन समय की माँग थी और वे सरकार के निर्णय का समर्थन करते हैं। इसके अलावा 75% का मानना है कि वे अब बुरे दौर को पीछे छोड़ चुके हैं। आने वाले समय में चीजें सुधरना शुरू करेंगीं।

इसी प्रकार 69% जनता ने माना कि विदेशी ताकतों के कारण कोरोना का प्रसार हुआ। जबकि 66% लोगों ने कहा कि एक धार्मिक समुदाय के कारण यहाँ कोरोना आँकड़ों में औचक बढ़ोतरी हुई। इसके अतरिक्त मात्र 34 % लोगों ने इस बात को कहा कि उन्हें लॉकडाउन में बुनियादी जरूरतों, खाना और सब्जियों को लेकर दिक्कत हुई।

ऐसे ही कोरोना महामारी के कारण उपजे हालातों में इस पोल में मानवाधिकारों के त्याग पर भी सवाल किया गया। जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए 91% लोगों ने कहा कि अगर उनके मानवाधिकारों के बलिदान होने से देश को कोरोना से लड़ने में मदद मिल सकती है, तो वे इसके लिए तैयार हैं। बता दें कि मार्च में मानवाधिकारों के त्याग की बात पर भी 86% लोगों ने सहमति जताई थी। मगर, अप्रैल के हालातों को देखकर ये आँकड़ा भी बढ़ा दिखा।

इतना ही नहीं, इस सर्वे ने कोरोना महामारी को फैलने से रोकने की दिशा में भारतीयों की प्रतिबद्धता को अन्य देशों के मुकाबले अधिक दिखाया। भारत में लॉकडाउन के दौरान जहाँ 45 % लोगों ने अस्थायी रूप से अपने काम पर रोक लगाई। वहीं वैश्विक स्तर पर ये आँकड़ा 28 प्रतिशत रहा।

गौरतलब है कि गैलप इंटरनेशनल एसोसिएशन स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में पंजीकृत पोल संगठनों का संघ है। जिसने विश्व के 28 देशों में ये सर्वे कराया और जिसमें उसने भारत के अलावा जर्मनी, इटली, रूस, यूएसए को भी शामिल किया। इस सर्वे का उद्देश्य देश के आम लोगों की ये राय जानना था कि वे कोरोना महामारी के बीच अपनी सरकार द्वारा उठाए प्रयासों से कितने सहमत हैं? तीन सर्वेक्षणों की कड़ी में ये से दूसरा सर्वे था। इससे पहले एक सर्वे मार्च में कराया गया था।

बता दें कि कोरोना वायरस के संक्रमण पर काबू पाने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार के प्रयासों की पहली बार तारीफ नहीं हुई है। इससे पहले भी वे इस संकट की घड़ी में अपना लोहा मनवाते हुए प्रिय ग्लोबल लीडर बन चुके हैं।

वरिष्‍ठ कॉन्ग्रेस नेता बदरुद्दीन शेख की कोरोना वायरस से मौत, गुजरात में ली आखिरी साँस

कोरोना संक्रमण के कारण कॉन्ग्रेस के एक वरिष्ठ नेता बदरुद्दीन शेख का निधन हो गया है। रविवार रात उन्होंने अंतिम साँस ली। वे 68 साल के थे। बदरुद्दीन शेख अहमदाबाद महानगर पालिका में विपक्ष के पूर्व नेता थे। साथ ही गुजरात कॉन्ग्रेस के विभिन्न पदों और मनपा में विपक्ष के नेता भी रह चुके थे।

अहमदाबाद मिरर के रेजिडेंट एडिटर के अनुसार रविवार देर रात एसवीपी अस्पताल में बदरुद्दीन शेख ने अंतिम साँस ली। कोरोना वायरस की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। वे पिछले कई दिनों से वेंटिलेटर पर थे।

गुजरात कॉन्ग्रेस के विधायक इमरान खेड़ावाला का टेस्ट पॉजिटिव

इस महीने की शुरुआत में, गुजरात कॉन्ग्रेस के विधायक इमरान खेड़ावाला का भी कोरोनावायरस टेस्ट पॉजिटिव आया था। जिसके बाद उन्हें एसवीपी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कॉन्ग्रेस के दो अन्य नेताओं गयासुद्दीन शेख और शैलेश परमार के साथ खेड़ावाला मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से मिले थे, जिस दिन उनका टेस्ट पॉजिटिव आया था। फिलहाल रूपानी और अन्य लोगों में कोरोनावायरस के अभी तक कोई लक्षण नहीं दिखाए हैं।