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बंजारन मस्जिद, मौलानाओं के ले जाती पुलिस और सैकड़ों की भीड़ का 5 घंटे तक बवाल: डर के साए में हल्‍द्वानी

उत्तराखंड के हल्द्वानी में कोरोना हॉट स्पॉट घोषित वनभूलपूरा क्षेत्र में रविवार (अप्रैल 12, 2020) दोपहर कोरोना की जाँच करने गई स्वास्थ्य विभाग और पुलिसकर्मी की टीम को कड़ा विरोध झेलना पड़ा। विरोध तब शुरू हुआ जब टीम ने वनभूलपुरा के लाइन नंबर आठ में बंजारन मस्जिद के मौलाना को क्‍वारंटाइन करने से पूर्व उसका जाँच सैम्पल लेना चाहा। 

इसके बाद जैसे ही मौलाना को क्‍वारंटाइन करने की सूचना फैली, सैकड़ों की भीड़ सड़क पर उतर आई। पुलिस और मौलाना को एक साथ देखकर लोगों ने हो-हल्ला करना शुरू कर दिया। शोर-गुल सुनकर आस-पास से तकरीबन 200 से अधिक लोगों की भीड़ वहाँ जुट गई। यह भीड़ लगभग 5 घंटे तक सड़कों पर रही। मामला बढ़ता देख पुलिस प्रशासन भी सतर्क हो गया और पूरे क्षेत्र में पुलिसबल तैनात कर दिया गया है।

अल्लाह हो अकबर… चीखते हुए उत्तराखंड की सड़कों पर उतरे सैकड़ों लोग: इमाम के कारण स्थिति तनावपूर्ण

कोरोना हॉटस्पॉट में सर्वे कर रही नर्सों से छेड़खानी, कहा- बाहर नहीं जाने देंगे, यहीं हत्या कर देंगे

जानकारी के मुताबिक रविवार को दोपहर के समय कुछ पुलिसकर्मी मौलानाओं को क्वारंटाइन करने आई हुई थी। इसी बीच बंजारन मस्जिद के पास कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों के साथ मौलानाओं को जाते हुए देखा। मौलाना को ले जाने की सूचना लोगों में इस तरह फैली कि यहाँ पाँच मिनट में दो सौ से अधिक लोगों की भीड़ जुट गई। मोहल्ले के लोग अल्लाह हो अकबर के नारे लगाते हुए टीम से बाहर जाने को कहने लगे। विरोध के बाद पुलिसकर्मियों को लौटना पड़ा, इसके बाद सूचना पर पीएसी समेत सभी थानों का पुलिस बल तैनात किया गया।

बता दें कि यह इलाका संवेदनशील होने के कारण पहले से ही सील किया गया था। इस क्षेत्र के जमात में शामिल सात लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। वहीं, मुरादाबाद में भर्ती पाँच कोरोना संक्रमित मरीज भी इसी क्षेत्र के बताए जा रहे हैं। देहरादून के बाद जिला प्रशासन ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र को पाँच सेक्टरों में बाँटकर हॉटस्पॉट घोषित कर दिया है। अब पूरे इलाके में एक भी दुकान नहीं खुल रही है। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र में पीएसी की दो कंपनी तैनात है।

स्वास्थ्य कर्मी की टीम का विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और उन्हीं में से कुछ लोगों ने इमाम को क्वारंटाइन किए जाने के विषय में कुछ अफवाहें भी चलाईं, जिस कारण मोहल्ले के लोगों ने स्वास्थ्य और पुलिस टीम को बाहर जाने के लिए कहा। इसके बाद आला अधिकारियों और मौलानाओं के मस्जिद से अनाउंस करने के बाद काफी मुश्किल से लोगों का समझाया गया।

PM मोदी के प्लान पर WHO का साथ, आगे के रोडमैप के लिए 3L को ध्यान में रखने की आवश्यकता पर जोर

भारत में कोरोना वायरस तेजी से पैर पसार रहा है। भारत में कोरोना वायरस से अब तक 273 लोगों की मौत हो चुकी है और कोरोना संक्रमण के 8447 मामले सामने आए हैं। देश में कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए 21 दिनों का लॉकडाउन किया गया और यह फिलहाल 14 अप्रैल तक रहेगा, लेकिन इस बीच देश में कोरोना की बढ़ती स्थिति को देखते हुए 30 अप्रैल तक लॉकडाउन का बढ़ाया जा सकता है। कई राज्यों ने तो इसे 30 अप्रैल तक बढ़ाने की घोषणा भी कर दी है। हालाँकि यह राष्ट्रीय स्तर पर होगा या नहीं, इस पर फिलहाल आधिकारिक घोषणा बाकी है।

मगर इस बीच लॉकडाउन को बढ़ाने को लेकर भारत को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का साथ मिला है। WHO का कहना है कि भारत एक बार फिर से लॉकडाउन करने जा रहा है, ऐसे न अगले चरण में न सिर्फ बीमारी को फैलने से रोकने की तरफ ध्यान देना होगा, बल्कि लोगों की आजीविका भी सुनिश्चित करनी होगी, ताकि लोग इससे कम से कम प्रभावित हो सकें।

इंडिया टुडे और आज तक के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल ने कोरोना वायरस पर WHO के विशेष दूत डॉक्टर डेविड नाबरो से बात की। उन्होंने उनसे जानना चाहा कि भारत में लॉकडाउन को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन की क्या राय है और देश को इसमें कैसे आगे बढ़ना चाहिए।

WHO के विशेष दूत डॉक्टर डेविड नाबरो ने इस पर अपनी राय देते हुए कहा, “भारत के लोगों ने जिस तरह से इस पर अमल किया, हम उसका समर्थन करते हैं। हमारे पास इसका विस्तृत आँकड़ा नहीं है, लेकिन हमें लगता है कि आप लॉकडाउन के माध्यम से कोरोना के बहुत बड़े प्रकोप को रोकने में सक्षम हैं। इसके साथ ही हम सभी संबंधित नागरिक समाज, लोगों के संगठनों, स्थानीय और राष्ट्रीय सरकारों द्वारा संकट से प्रभावित लोगों की आजीविका को बचाने के के लिए किए गए प्रयास, विशेष रूप से खाद्य संकट को रोकने के लिए जारी प्रयासों से बहुत खुश हैं।”

जब नाबरो से पूछा गया कि भारत को लॉकडाउन के अगले चरण में किस तरह बढ़ना चाहिए तो उन्होंने कहा कि लॉकडाउन 2.0 को अधिक ध्यान केंद्रित करने और डेटा-संचालित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, “इस दौरान हमें 3L को ध्यान में रखने की आवश्यकता है। वो है- Life (जीवन), livelihood (आजीविका) और living (रहन-सहन)। यानी कि हम किस तरह से अपना जीवन जी रहे हैं, उस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। हम जब तक इस वायरस से निपटने में सक्षम नहीं हो जाते, इस पर ध्यान देने की जरूरत है। हमें इसके साथ सहज होना पड़ेगा। यह हमारे जीने के तरीके को बदल रहा है। हर कोई अपने व्यावहारिक जीवन में सोशल डिस्टेंसिग का पालन नहीं कर सकता, हर कोई इस नई सच्चाई के अनुकूल नहीं हो सकता। इसलिए हमें जीवन के पैटर्न में सरलता के साथ बदलाव लाना होगा।”

आगे नाबरो ने कहा कि लॉकडाउन 2.0 में उन स्थानों की पहचान की जाती है, जहाँ पर अधिक जोखिम होता है। जैसे कि इसने सबसे ज्यादा देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया। इसने देश के कई अन्य हिस्सों को भी प्रभावित किया है। इससे धीरे-धीरे राहत मिलेगी। इस लॉकडाउन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इस पर अधिक ध्यान देने और ज्यादा से ज्यादा आँकड़ा एकत्रित करने की जरूरत है। 

उल्लेखनीय है कि डेबिड नाबरो ने पहले भी लॉकडाउन लागू करने को लेकर भारत की तारीफ की थी। जब मोदी सरकार ने पिछले महीने कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए पूरे देश में 21 दिनों का लॉकडाउन लागू किया, तो सरकार के इस फैसले की विपक्षी दलों ने आलोचना भी की। कहा गया कि सरकार ने बिना किसी तैयारी के लॉकडाउन का ऐलान कर दिया। हालाँकि WHO के विशेष दूत डॉक्टर डेविड नाबरो ने कहा कि भारत में लॉकाडउन को जल्दी लागू करना एक दूर की सोच थी, साथ ही ये सरकार का साहसिक फैसला था। इस फैसले से भारत की जनता को कोरोना वायरस के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ने का मौका मिलेगा।

मोबाइल टावर, 9 दिन का हजारों डेटा… और भारत में अपने तरह का पहला ऑपरेशन: IB ने कोरोना को ऐसे रोका

इंटेलिजेंस ब्यूरो के मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) ने देश को कोरोना से बचाने की दिशा में बड़ी कामयाबी दिलाई है। खबर है कि पिछले महीने दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज़ में इकट्ठा हुए और बाद में देश के विभिन्न हिस्सों में गए कोरोना संदिग्धों की पहचान कर भारत को आने वाले खतरे से मैक ने बचा लिया है। मालूम हुआ है कि इस बड़ी कामयाबी को हासिल करने की कड़ी में आईबी ने उन लोगों पर भी नजर बनाए रखी थी, जो जमात का हिस्सा नहीं थे, मगर उस दौरान मरकज़ के पास थे जब ये संक्रमण उस इलाके में फैल रहा था। आईबी ने इन सभी लोगों की पहचान करने के लिए मोबाइल टावरों के डेटा से मदद ली।

आईबी के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, निजामुद्दीन क्षेत्र में हुए मरकज़ कार्यक्रम के दौरान मानव यातायात को पहचानने के लिए कई मोबाइल टावरों की मदद से 14 मार्च से लेकर 22 मार्च तक का एक बड़ा डेटा निकाला गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान खास बात ये रही कि इसमें बहुत तेजी से निर्णय लिए गए और किसी भी गलती की कोई गुंजाइश नहीं रहने दी गई।

सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने यह भी बताया कि उन्हें मार्च के दूसरे सप्ताह में निजामुद्दीन से शुरू होकर हैदराबाद पहुँचने वाली ट्रेन को लेकर एक खबर मिली। इस खबर से स्थानीय प्रशासन को पता चला कि इन ट्रेनों में सफर कर रहे अधिकांश यात्री जमाती हैं और उनमें से कई कोरोना पॉजिटिव हैं। तब विजयवाड़ा के इंटेलिजेंस ब्यूरो के आईजी ने ऊपर तक ये भयभीत करने वाली जानकारियाँ पहुँचाईं।

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इस बीच, गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस और दक्षिण पूर्व दिल्ली में संबंधित सिविक अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा गया। वहीं ग्राउंड जीरो पर, अधिकारियों को पता चला कि 23 मार्च तक 1500 जामातियों ने मरकज छोड़ दिया, लेकिन उनमें से 1,000 लोग अब भी घनी आबादी वाले निजामुद्दीन इलाके में बनी जमात की छह मंजिला इमारत में रुके हुए थे। तब आधिकारिक रजिस्टरों के माध्यम से, आईबी ने भारत के दक्षिणी राज्यों से तबलिगी जमात में आए लगभग 4,000 सदस्यों के मोबाइल नंबरों और उनके घर/निवास स्थान का पता लगाया, जो 13 मार्च से मरकज की बैठक में शामिल हुए थे।

इसके बाद, निजामुद्दीन क्षेत्र में रहने वाले लोगों का परीक्षण किया गया। तब देश के अन्य हिस्सों में वायरस के प्रसार की संभावना को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के महामारी और संक्रामक रोग विशेषज्ञों ने गृह मंत्रालय को सुझाव दिया कि वे मार्च के दूसरे और तीसरे सप्ताह में इस भीड़ वाले निजामुद्दीन क्षेत्र में आने वाले सभी लोगों की पहचान करें और उनका कोरोना परीक्षण करें।

मीडिया खबरों के मुताबिक, एक डीजी स्तर के आईपीएस अधिकारी ने इस कार्य को लेकर कहा कि यह एक बहुत बड़ा टास्क था, जिसके बारे में वास्तव में विभाग में सुना भी नहीं गया था। पहले सेलुलर फोन की मदद से आईबी के अधिकारियों ने ऑपरेशन शुरू किया। बहुत ही कम समय में बहुत बड़ा डेटा को इकट्ठा करना पड़ा और उसका विश्लेषण करना पड़ा, फिर उन्हें इसे पूरे देश में प्रसारित करना था, ताकि उन लोगों का पता चल सके, जो मरकज के दौरान वहाँ आए थे।

कोरोना को कम्यूनिटी में फैलने से रोकने के लिए इंटेलिजेंस एजेंसी ने उन लोगों की एक जिलेवार सूची दी, जो मरकज़ कार्यक्रम के दौरान निजामुद्दीन में और उसके आसपास के इलाके में स्पॉट किए गए थे। इसके बाद 30 मार्च तक संबंधित जिलों के पुलिस अधिकारियों को हजारों नाम, मोबाइल नंबर और पते वाली सूचियाँ भेजी गईं।

झाझर रेंज, हरियाणा के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) अशोक कुमार ने बताया कि उन्हें दिल्ली के उस क्षेत्र में गए लोगों के फोन नंबर और पते का खुलासा करने वाला एक पत्र मिला और उन्होंने उन लोगों का पता लगाया। साथ ही स्वास्थ्य अधिकारियों को आवश्यक जाँच करने के लिए सूचित किया। उन्होंने आगे कहा कि अधिकांश लोग, निजामुद्दीन के आसपास के क्षेत्रों में, व्यापार से संबंधित कार्यों के लिए वहाँ गए थे। लेकिन, फिर भी उन्होंने उनका टेस्ट किया है।

उत्तर प्रदेश की बरेली रेंज के डीआईजी राजेश कुमार पांडे ने कहा, “हमें भी मरकज के आसपास के क्षेत्र का दौरा करने वाले लोगों के बारे में सटीक जानकारी मिली थी। हमने बाद में इन लोगों का पता लगाया और उनके चिकित्सा परीक्षण किए। इस पूरी प्रक्रिया ने वास्तव में देश को इस भयंकर वायरस के खतरे से निपटने में बहुत मदद की है, वरना इसका असर भयावह हो सकता था।”

यहाँ बता दें कि मैक ने अपनी जाँच पूरी करने के बाद हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना को पत्र भेजा। जिनमें उन लोगों के नाम दिए गए जो निजामुद्दीन इलाके के आस-पास ट्रेस किए गए थे।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकारों के साथ खूफिया जानकारी शेयर करने वाले आईबी के मैक ने बेहद सराहनीय काम कर दिखाया है। इनके द्वारा मुहैया कराए गए आँकड़ों ने भारत में कोरोना रोकने की दिशा में किस तरह काम किया। इसका अंदाजा इससे लगाइए कि इनके कारण उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड पुलिस ने ऐसे कई लोगों का पता लगाया है, जो जमात कार्यक्रम में शामिल होकर लौटे थे। इसके बाद संक्रमण के कुछ कैरियर में, जिनमें से अधिकांश लोग जमाती और उनके परिजन थे, उनको आइसोलेट किया गया और उनके परीक्षण किए गए। ऐसे जमाती जो पकड़ में नहीं आए थे, उन्हें ट्रैक किया गया और फिर क्वारंटाइन किया गया।

जिसने मोदी के लिए माँगी मौत, उसे BookMyShow ने किया प्रमोट, ऐप अनइंस्टॉल कर यूजर्स जता रहे विरोध

प्रधानमंत्री मोदी के लिए मौत की प्रार्थना करने वाली हिन्दूफ़ोबिक चरमपंथी लेफ्टिस्ट ट्रोल को अपने प्लेटफॉर्म पर जगह देने के कारण भारतीय ऑनलाइन टिकट प्लेटफॉर्म ‘बुक माय शो’ के कारण आज एक बड़ा विवाद पैदा हो गया।

रविवार को ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म ने चरमपंथी लेफ्टिस्ट ट्रोल हरनिध कौर के इवेंट को प्रोमोट करते हुए एक ट्वीट शेयर किया। हरनिध कौर वही ट्रोल है, जो @pedestrianpoet नामक ट्विटर हैंडिल का प्रयोग करती है।

बुक माय शो ने इस ट्रोल के शो का प्रमोशन करते हुए ट्वीट किया, “वो स्त्री जो भारत की डिजिटल क्रांति को ड्राइव कर रही है, @PedestrianPoet आज अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए प्रत्येक से अनौपचारिक बातचीत करने आ रही है।”

इससे सोशल मीडिया यूजर्स काफी नाराज हुए क्योंकि कौर अपने हिन्दूफोबिक विचारों के लिए बेहद कुख्यात है। वह प्रधानमंत्री के लिए मौत तक की प्रार्थना कर चुकी है।

कौर ने एक बार नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाने की कोशिश में कहा था कि महात्मा गाँधी और नरेंद्र मोदी में एक ही समानता हो सकती है यदि कोई मोदी की हत्या कर दे। यहाँ यह बताना जरूरी है कि कौर शेखर गुप्ता के ‘द प्रिंट’ के लिए लिखती है।

बुक माय शो द्वारा इस हिन्दूफ़ोबिक ट्रोल का प्रोमोशन करने के बाद, सोशल मीडिया यूजर्स ने इस बात को लेकर कड़ा एतराज जताया। लोगों ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म लगातार हिन्दूफ़ोबिक तत्वों को अपने यहाँ जगह देता जा रहा है। आज की घटना हुसैन हैदरी जैसे कट्टर इस्लामिस्ट को अपना मंच देने के एक दिन बाद घटित हुई है।

सोशल मीडिया यूजर्स ने ‘बुक माय शो’ से Pedestrianpoet को प्रमोट करने के लिए जिम्मेदारी तय करने की माँग की है। यूजर्स ने एंटी हिन्दू मानसिकता को प्रमोट करने के विरोध स्वरूप ‘बुक माय शो’ के app को अपने मोबाइलों से अनइंस्टॉल करना भी शुरू कर दिया है।

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इस ऐप का बहिष्कार करने का एलान करते हुए कहा कि वे अब कभी इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे।

हाल में एक ट्रेंड शुरू हुआ है, जिसमें लिबरल सेक्युलर मीडिया हिन्दूफ़ोबिक तत्वों को प्रमोट करती नजर आती है, ऐसा लगता है जैसे ऑनलाइन कॉमर्शियल प्लेटफॉर्म भी हिन्दुओं के प्रति घृणा से भरी इस होड़ में शामिल हो गए हैं।

दिल्ली पुलिस हवलदार मोहम्मद पंकज खान पर जमातियों को सीमा पार कराने के चलते कारण बताओ नोटिस

दिल्ली पुलिस ने हेड कॉन्स्टेबल मोहम्मद पंकज खान के खिलाफ दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान मदरसा सदस्यों और जमातियों को अवैध रूप से सीमा पार करवाकर मेवात, हरियाणा पहुँचने में मदद करने के सम्बन्ध में जाँच शुरू कर दी है।

मोहम्मद पंकज खान ने फेसबुक पर लोगों को ‘सीमा पार’ करने में मदद करने की पेशकश करते हुए लिखा था कि बॉर्डर पार करने में दिक्कत हो तो संपर्क करें। रिपोर्ट्स के अनुसार पंकज खान ने इस काम के लिए अपने वाहन का इस्तेमाल किया, और राज्य की सीमा पार करने के लिए सीमा चौकी पर अपना पुलिस विभाग का पहचान पत्र दिखाया।

मोहम्मद पंकज के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। बताया जा रहा है कि अगर खान के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप सही पाए जाते हैं तो खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।

हवलदार मोहम्मद पंकज खान ने अपनी इस करतूत के फोटो बाकायदा अपने फेसबुक प्रोफाइल पर भी शेयर किए। अपने फेसबुक अकाउंट पर उसने यहाँ तक लिखा कि यदि किसी जमाती को बॉर्डर पार करना हो तो वह उससे फोन पर भी संपर्क कर सकता है। इसके बाद किसी व्यक्ति ने गत 04 अप्रैल को दिल्ली पुलिस आयुक्त को मेल कर हवलदार की करतूत के बारे में जानकारी दी।

फिलहाल हवलदार को आदेश के बाद क्वारंटाइन कर दिया गया है। जाँच के दौरान पता चला कि यह हवलदार मोहम्मद पंकज खान पहले भी संदिग्ध अपराधिक गतिविधियों में शामिल रह चुका है।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट में तैनात हवलदार मोहम्मद पंकज खान अकेल ऐसे शख्स नहीं हैं जिन्होंने अपनी वर्दी का गलत इस्तेमाल किया हो, इससे पहले भी दिल्ली पुलिस मुख्यालय में तैनात कॉन्स्टेबल इमरान भी जमातियों को सीमा पार करवाने में दोषी पाया गया था। इमरान दिल्ली पुलिस की सिक्योरिटी यूनिट में पदस्थापित था। बृहस्पतिवार (अप्रैल 2, 2020) को उसने अपनी कार में जमातियों को बिठा कर उन्हें यूपी पहुँचाया था। गाजियाबाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया था। रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद इमरान से यूपी पुलिस ने पूछताछ की थी।

निहंगों के हमले में ASI का कटा हाथ PGI चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने साढ़े 7 घंटे में वापस जोड़ा

आज पटियाला में निहंगों के हमले में बुरी तरह घायल हुए पंजाब पुलिस में एएसआई हरजीत सिंह के कटे हाथ को चंडीगढ़ पीजीआई के डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर दोबारा से जोड़ दिया है। पंजाब के डीजीपी दिनकर गुप्ता ने साढ़े सात घंटे तक चले इस ऑपरेशन के दौरान अनथक परिश्रम कर असम्भव को सम्भव कर देने वाले पीजीआई के डॉक्टरों की टीम को सेल्यूट किया है। डीजीपी ने बताया है कि ऑपरेशन पूरी तरह सफल हुआ है।

सफल ऑपरेशन के बाद पटियाला के एसएसपी मनदीप सिंह सिद्धू ने भी पीजीआई के डॉक्टरों का शुक्रिया अदा किया। पटियाला के एसएसपी ने बताया – “आज सुबह पटियाला में पुलिस पर निहंगों ने हमला कर दिया था जिसमें से एक निहंग ने तलवार से हमला कर एएसआई हरजीत सिंह का हाथ काट दिया था। जिसके बाद पीजीआई चंडीगढ़ के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने साढ़े सात घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद हाथ को जोड़ दिया है।”

यह भी पढ़ें: पंजाब में ASI का हाथ काटने का मामला: अब तक 9 गिरफ्तार, गन और पेट्रोल बम भी मिले

जिला एसएसपी ने यह भी जानकारी दी कि घायल एएसआई अभी ठीक स्थिति में है और अगले 5 दिनों में उसकी सेहत का पूरा ब्यौरा मिल सकेगा। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की जानकारी पंजाब के डीजीपी ने पीजीआई चंडीगढ़ को एडवांस में ही दे दी थी अतः वहाँ ट्रामा सेंटर में इमर्जेंसी टीम पहले से सक्रिय हो चुकी थी।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार पीजीआई चंडीगढ़ पहुँचते ही डॉक्टरों की टीम ने पहले हाथ पूरी तरह से निरीक्षण किया उसके बाद उन्होंने प्लास्टिक सर्जरी के मुख्य ऑपरेशन थियेटर में सुबह करीब 10 बजे हाथ को जोड़ने का काम शुरू हुआ। शाम 5 बजे तक चले इस ऑपरेशन में डॉक्टरों की टीम ने हाथ की एक एक नस को सतर्कतापूर्वक बाकी शरीर से जोड़ा। कहने की जरूरत नहीं कि यह कितनी जटिल सर्जरी थी। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने बताया कि जोड़ा गया हाथ पूरा सहयोग कर रहा है और जल्दी ही कुछ दिनों में पहले की तरह काम करने लगेगा।

इस घटना के बारे में पटियाला के एसएसपी मनदीप सिंह सिद्धू ने बताया था कि निहंग सिखों का एक समूह गाड़ी में सवार होकर सब्जी मंडी पहुँचा। जब उनसे कर्फ्यू पास दिखाने के लिए कहा गया तो उन्होंने सब्जी मंडी स्टॉफ के साथ झगड़ा किया। और उसके बाद बैरिकेड तोड़ गाड़ी भगाने की कोशिश की। पुलिस ने उनकी गाड़ी को घेर लिया। इससे गुस्साए निहंगों ने तलवार लेकर पुलिस पर हमला कर दिया।

एसएसपी ने यह भी बताया था कि हमले के बाद ये लोग भाग कर बलबेरा के पास एक गुरुद्वारे में छिप गए। पुलिस ने उनका पीछा किया। गुरुद्वारे से आरोपितों ने कथित तौर पर फायरिंग भी की और पुलिसवालों को वहाँ से चले जाने के लिए कहा गया। इस मामले में अब तक पुलिस ने एक्शन लेते हुए 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

कोरोना से मरने वालों को जलाया जाएगा: मुस्लिमों के दफनाने की माँग को श्री लंका की सरकार ने किया रद्द

श्री लंका ने देश के अल्पसंख्यक मुस्लिमों की नाराजगी को अनदेखा करते हुए रविवार (अप्रैल 12, 2020) को कोरोनो वायरस से होने वाली मौतों का शवदाह करना अनिवार्य कर दिया है। अल्पसंख्यक मुस्लिमों का कहना था कि यह इस्लामी परंपरा के खिलाफ है।

कोरोना वायरस से होने वाली मौतों को लेकर मुस्लिम धर्म की ओर से एक विशेष प्रकार का विरोध देखा जा रहा था, जिसे लेकर श्री लंका की सरकार ने अपना फैसला स्पष्ट कर दिया है। श्री लंका के स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक गजेटियर में कहा गया है कि शव को 45-60 मिनट की अवधि तक 800-1200 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर जलाया जाएगा।

श्री लंका में अब तक कोरोना के संक्रमण से होने वाली सात मौतों में से तीन मुस्लिम लोगों की मौत हुई है। इनके रिश्तेदारों के अपार विरोध के बावजूद शवों का अंतिम संस्कार किया गया है। रविवार को श्री लंका के स्वास्थ्य मंत्री पवित्रा वन्नियाराचची ने कहा, “जिस व्यक्ति की मौत कोरोना वायरस से हुई है या फिर ऐसी आशंका है, उसकी लाश का अंतिम संस्कार किया जाएगा।”

मुस्लिम समुदाय के तमाम विरोध के बावजूद भी स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह शवों के अंतिम संस्कार के आखिरी फैसले को परिवार और मजहब पर छोड़ने की इस माँग को कोरोना वायरस के संक्रमण की असीमित क्षमता को देखते हुए रद्द कर रहे हैं।

दफनाई नहीं, जलाई जाएगी कोरोना के कारण मृत मरीज की लाश: BMC का आदेश हुआ वापस

इसके पीछे श्री लंका सरकार ने यह भी तर्क दिया है कि श्री लंका में पानी का स्तर ऊँचा होने के कारण शव दफनाने के बाद इसके संक्रमण का अधिक खतरा हो सकता है। इस फैसले के साथ श्रीलंका सरकार ने मुस्लिम समुदाय की उन आपत्तियों को खारिज कर दिया है, जिसमें आपत्ति जताई गई थी कि दाह संस्कार इस्लामी पारम्परिक दफनाने के संस्कार का उल्लंघन करता है और इसकी इस्लाम में मनाही है।

इसके साथ ही श्रीलंका मुस्लिम कॉन्ग्रेस (एसएलएमसी) के नेता रूफ हकीम द्वारा ऐसे मुस्लिमों के शवों का अंतिम संस्कार करने, जिनकी मृत्यु कोरोना वायरस के कारण हुई हो, से संबंधित प्रस्ताव को कल ही एक सर्वदलीय बैठक में खारिज कर दिया गया।

यह प्रस्ताव इस कारण भी खारिज कर दिया गया क्योंकि यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा उल्लेखित क्वारंटाइन सम्बन्धी निर्देशों का उल्लंघन करता है। इस फैसले के बाद श्री लंका में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख राजनीतिक पार्टी ने सरकार पर मजहबी अनुष्ठानों और परिवार की इच्छाओं की ‘घोर अवहेलना’ का आरोप लगाया है।

40 अप्रैल तक लॉकडाउन, ममता बनर्जी का ऐलान! AajTak एंकर की फिसली जबान, सोशल मीडिया पर मसाला

आज सोशल मीडिया यूजर्स ने ममता बनर्जी और आजतक के बहाने खूब मजे लिए। हुआ यूँ कि आजतक चैनल ने गलती से अपनी रिपोर्ट में चला दिया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में लॉकडाउन को 40 अप्रैल तक बढ़ा दिया है। इसके बाद ‘नेटीजेंस’ को मनोरंजन के लिए खूब सामग्री मिल गई। इसके बाद जनता ने जमकर मजे लिए।

जर्नलिस्ट चित्रा त्रिपाठी आजतक का शो एंकर कर रही थीं। उन्होंने अपने शो में बोल दिया (जुबान फिसल गई) कि ममता बनर्जी ने राज्य में लॉकडाउन को इस महीने की 40 तारीख तक बढ़ा दिया है। बाद में उन्होंने ट्वीट कर कहा कि उनसे यह गलती अनजाने में इसलिए हो गई क्योंकि कल एक ही दिन में कोरोना के कारण भारत में हुई 40 मौतें लगातार उन्हें परेशान करती रही थीं। जिस वजह से उन्होंने गलती से 30 अप्रैल की जगह 40 अप्रैल कह दिया। हालाँकि चित्रा की इस स्वीकारोक्ति के बाद भी सोशल मीडिया यूजर्स ने ममता बनर्जी के बहाने मजाक करना बंद नहीं किया।

चूँकि ममता बनर्जी अपनी बेवकूफी भरी बातों के जरिए हास्य पैदा करने के लिए मशहूर हैं, इसलिए नेटीजेंस लॉकडाउन को 40 अप्रैल तक बढ़ा देने के लिए, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मजाक बनाने से बाज नहीं आए क्योंकि महीने में 40 दिन न अप्रैल में होते हैं न साल के किसी और महीने में।

लोकप्रिय ट्विटर यूजर में से एक, जो ट्विटर हैंडिल @Being_humor से ट्वीट करते हैं, ने आजतक रिपोर्ट शेयर करते हुए लिखा कि सिर्फ ममता बनर्जी ही ऐसा करने में सक्षम हैं।

लॉकडाउन को 40 अप्रैल तक कथित रूप से बढ़ाने के ममता बनर्जी के इस फैसले के बाद उनको आड़े हाथों लेते हुए, एक दूसरे यूजर ने व्यंग्यात्मक लहजे में 40 अप्रैल तक के लिए वो सभी काम निश्चित कर दिए, जो अन्यथा मुश्किल दिखते हैं जैसे, पाकिस्तान का भारत के खिलाफ वर्ल्ड कप जीतना, कैटरीना कैफ का एक्टिंग के लिए नेशनल अवॉर्ड जीतना और सलमान खान का शादी करना।

एक और यूजर भी ममता बनर्जी द्वारा लॉकडाउन को 40 अप्रैल तक कथित रूप से बढ़ाए जाने की बात पर बिलकुल भी आश्चर्यचकित न होकर, ट्ववीट करता है कि यदि ममता बनर्जी हैं तो कुछ भी पॉसिबल है।

इसके बाद एक अन्य ट्विटर यूजर ने ममता बनर्जी का मजाक बनाते हुए कहा कि अगर बनर्जी ने 40 अप्रैल तक लॉक डाउन बढ़ा दिया है तो चिंता मत करो 42 अप्रैल तक सब कुछ ठीक हो जाएगा।

कल प्रधानमंत्री के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेन्स के बाद ममता बनर्जी ने घोषणा की थी कि देश में पैर जमाते कोरोना संक्रमण के चलते पश्चिम बंगाल में 30 अप्रैल तक लॉकडाउन रहेगा। याद रहे कि ममता बनर्जी लॉकडाउन के दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू न करा पाने के कारण आलोचना के केंद्र में हैं।

अल्लाह हो अकबर… चीखते हुए उत्तराखंड की सड़कों पर उतरे सैकड़ों लोग: इमाम के कारण स्थिति तनावपूर्ण

कोरोना वायरस के कारण देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान पूरे देशभर से ऐसी ख़बरें सामने आ रही हैं, जहाँ एक विशेष वर्ग के लोगों ने डॉक्टर्स से लेकर पुलिसकर्मियों का सहयोग करने के बजाए उन पर हमला और बदसलूकी की है। ऐसा ही एक मामला उत्तराखंड के हल्द्वानी में सामने आया है, जहाँ एक मौलवी को क्वारंटाइन करने गई पुलिस के विरोध में तबलीगी समाज से जुड़े हुए देवबंदी विचारधारा के सैकड़ों लोग विरोध में सड़क पर उतर आए।

अल्लाह हो अकबर के अलावा किसी को मुर्दाबाद (शायद सरकार को) भी कह रही है ये भीड़। वीडियो देखकर आपको उस इलाके में रहने वाले गैर-मुस्लिम निवासियों के अंदर डर का अंदाजा लग सकता है। खासकर तब जबकि सरकारों की कोशिश इमाम हो या कोई आम इंसान, कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने की है। और उसी के लिए वो आपके गली-मुहल्ले में घूम रहे हैं, खुद की जान को जोखिम में डाल कर। लेकिन आप हैं कि सड़क पर अल्लाह हो अकबर चिल्लाते हुए विरोध में निकल गए हैं।

उत्तराखंड के हल्द्वानी में हॉटस्पॉट बनभूलपूरा क्षेत्र की लेन नम्बर आठ में रविवार (अप्रैल 12, 2020) की दोपहर उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब कोरोना संक्रमितों की जाँच और इमाम के साथ ही अन्य 14 लोगों को क्वारंटाइन करने के उद्देश्य से गई स्वास्थ्य विभाग की टीम के विरोध में एक विशेष समुदाय के देवबंदी समुदाय के लोग सड़क पर उतर गए।

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ज्ञात हो कि यह इलाका संवेदनशील होने के कारण पहले से ही सील किया गया था। इस क्षेत्र के जमात में शामिल सात लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। वहीं, मुरादाबाद में भर्ती पाँच कोरोना संक्रमित मरीज भी इसी क्षेत्र के बताए जा रहे हैं।

स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने जब इमाम की जाँच कर क्वारंटाइन करने की बात कही तो लोग उनका विरोध करने लगे। मामला बढ़ता देख पुलिस प्रशासन भी सतर्क हो गया और पूरे क्षेत्र में पुलिसबल तैनात कर दिया गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की टीम दोपहर करीब तीन बजे इस क्षेत्र में सैंपल लेने पहुँची, लेकिन तभी वहाँ लोगों ने टीम का विरोध शुरू कर दिया। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और उन्हीं में से कुछ लोगों ने इमाम को क्वारंटाइन किए जाने के विषय में कुछ अफवाहें भी चलाईं, जिस कारण मोहल्ले के लोगों ने स्वास्थ्य और पुलिस टीम को बाहर जाने के लिए कहा।

जैसे ही टीम और क्षेत्रवासियों में गहमागहमी शुरू हुई मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई। वहाँ अभी भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम लोगों को जाँच के लिए समझाने में जुटी है। देहरादून के बाद जिला प्रशासन ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र को पाँच सेक्टरों में बाँटकर हॉटस्पॉट घोषित कर दिया है। अब पूरे इलाके में एक भी दुकान नहीं खुल रही है। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र में पीएसी की दो कंपनी तैनात है।

ड्रोन से गुटखा और पान मसाला सप्लाई: गुजरात में ‘जुगाड़ वाला व्यापारी’ गिरफ्तार, देखें वायरल वीडियो

गुजरात के मोरबी से एक खबर सामने आ रही है, जो जितनी हैरतअंगेज है उतनी ही मजेदार भी। वाकया गुजरात के मोरबी का है, जहाँ पुलिस ने 2 लोगों को ड्रोन के जरिए पान मसाला पहुँचाने के आरोप में हिरासत में रखा है। ड्रोन के जरिए पान मसाला पहुँचाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने अब इन दोनों व्यक्तियों के खिलाफ ‘महामारी अधिनियम’ के अंतर्गत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। यह मामला सामने तब आया जब एक टिकटॉक यूजर ने इसका वीडियो टिकटॉक पर अपलोड कर दिया।

हालाँकि 21 दिनों के इस देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान यह बहुत बार देखा गया कि कई राज्यों में लोग दारु के चक्कर में लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। कुछ लोग इस मौके का फायदा उठाकर अवैध शराब के धंधे में लिप्त हैं और प्रिंटेड दाम से कहीं ज्यादा में शराब मुहैया करवा रहे हैं। याद रहे कि देशव्यापी यह लॉकडाउन प्रधानमंत्री की 24 मार्च की घोषणा के बाद से ही लागू है।

केरल में कई सारी दुखद घटनाओं की खबरें आईं, जिनमें शराब न मिलने के कारण अवसाद ग्रस्त होकर लोगों ने आत्महत्या कर ली थी। लेकिन पान मसाला के लिए यह बेचैनी अजीबोगरीब है, जिसमें डिमांड इतनी बेकाबू हो रही है कि कुछ लोग ड्रोन के सहारे डिमांड को पूरा करने में लगे हैं।