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बड़े मियाँ हो या छोटे मियाँ, सब घर पर रहो: पंजाब पुलिस ने सोशल मीडिया पर जारी किया लॉकडाउन का पालन करने लिए कई मजेदार पोस्टर

कोरोना वायरस से बचने के लिए पूरे भारत में लॉकडाउन का फैसला लिया गया है, लेकिन इसके बावजूद कई जगहों पर अभी भी लोग इस लॉकडाउन और कर्फ्यू को हलके में ले रहे हैं। प्रशासन की सख्ती के बाद भी लोग घरों से बाहर आ रहे हैं। पुलिस की ओर से भी लगातार ये कोशिश की जा रही है कि कैसे भी लोगों को घरों में रहने के लिए कहा जाए। इन सबके बीच पंजाब पुलिस ने लोगों को घरों में रहने के लिए एक खास अपील की है।

पंजाब पुलिस ने कोरोना वायरस से निपटने को लेकर लगाए गए कर्फ्यू को सही ढंग से लागू करवाने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया है। पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से कई ऐसे फोटो मैसेज तैयार किए हैं, जिससे लोगों को यह बताया जा सके कि अगर लोगों ने कर्फ्यू के नियमों को तोड़ा तो घर के बाहर पंजाब पुलिस उनका इंतजार कर रही है।

इन मैसेजों के जरिए हल्के-फुल्के अंदाज में पुलिस सख़्ती का संदेश दे रही है। पंजाब पुलिस के ये संदेश सोशल मीडिया पर खूब वायरल भी हो रहे हैं। दिलचस्प ये है कि ये सारे संदेश खुद पुलिस ने ही तैयार किए हैं। ये कोई फोटोशॉप तस्वीरें नहीं हैं। पुलिस ने इन संदेशों को अपने सोशल मीडिया के अकांउट पर भी पोस्ट कर रखा है।

लोगों को पुलिस का ये अंदाज काफी रास आ रहा है। दरअसल पुलिस विभाग नहीं चाहता कि लोगों को सख्ती से कर्फ्यू को लागू करने के लिए कहा जाए। लेकिन इसके बाद भी कुछ लोग बिना काम के घर से बाहर घूमने-टहलने निकल जा रहे हैं। ऐसे लोगों को सख्त चेतावनी देने के लिए पुलिस ने इन दिलचस्प संदेशों को तैयार किया है। 

हर जिले की पुलिस ने कोई न कोई स्लोगन पोस्ट किया गया है। इसमें जिला पुलिस ने अपने इलाके के लोगों को कर्फ्यू नहीं तोड़ने को लेकर स्लोगन लिखा हुआ है। इनका उद्देश्य है कि स्लोगनों को पढ़ने के बाद लोग जागरूक हों और कर्फ्यू का पालन करें।

मजेदार बात यह है कि पुलिस इन इमेज मैसेज में से कुछ मैसेज को फिल्मी गानों पर बनाया गया है। इनमें से उन पुलिस वालों की फोटो भी लगाई गई है जिन्होंने इनको बनाया है। एक संदेश में लिखा है, “उँची है बिल्डिंग, लिफ्ट तेरी बंद है। नीचे ना आना, पुलिस बंदोबस्त है।”

इसी तरह एक अन्य संदेश में लिखा है, “किसी डिस्को में जाएँ, किसी होटल में खाएँ। पुलिस देख लेगी हमें वहाँ, चले घर पर ही रह लें हम।”

एक में लिखा है, “गोरे-गोरे ओ बाँके छोरे, अब कुछ दिन घर पे बिताया करो।”

एक अन्य संदेश में लिखा है, “थोड़ा है, थोड़े की जरूरत है। बाहर इमरजेंसी या फिर दवा लेने ही है जाना।” 

पंजाब पुलिस ने एक संदेश में लिखा है, “घर से निकलते ही, कुछ दूर चलते ही रास्ते में मिल गई पंजाब पुलिस, तो मैं वापस घर चला आया।”

एक में लिखा है, “मटरगश्ती खुली सड़क में, तगड़ी तड़क भड़क में। देख लेगी पंजाब पुलिस, उससे अच्छा है रह ले कुछ दिन घर में।”

इसी तरह से पंजाब पुलिस ने एक अन्य संदेश में लिखा है, “अंदर से कोई बाहर ना जा सके, बाहर से कोई अंदर ना आ सके, पुलिस अगर देख ले तो क्या हो, बैहतर है कि घर पे दिन बिता लो।”

एक संदेश में लिखा है, “मैं निकला ओ गड्डी लेकर, रास्ते पर सड़क पर ओ सड़क में इक पंजाब पुलिस का अफसर आया मैं उत्थे हीरोगिरी छोड़ आया।” इस संदेश को शेयर करते हुए पुलिस ने लिखा कि गड्डी लेकर निकलोगे तो गदर हो जाएगा।

पुलिस ने कुछ लोगों को कर्फ्यू तोड़ने पर पकड़ा तो उनके जवाब सुन पुलिस भी हैरान रह गई। इनमें से कुछ लोग पिज्जा खाने, बाल कटवाने जा रहे थे तो कुछ ने कहा कि घर में मन नहीं लगता क्या करें। पकड़े गए कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कहा, “साहब कुत्ते को गाड़ी में घूमने का शौक है। कुत्ते को कैसे समझाएँ।”

रवीन्द्र जडेजा ने शेयर किया तलवारबाजी स्किल का वीडियो: लिबरल्स ने राजपूतों के खिलाफ नफरत भरे ट्वीट्स की झड़ी लगा दी

क्रिकेटर रवीन्द्र सिंह जडेजा ने रविवार को ट्विटर पर अपनी तलवार बाजी स्किल्स का प्रदर्शन किया।

हालाँकि, जैसे ही जडेजा ने यह वीडियो शेयर किया, लिबरल्स और इस्लामिस्ट्स ने न केवल उनकी तलवारबाजी स्किल का मजाक बनाना शुरू कर दिया बल्कि राजपूत समुदाय को गाली देना भी शुरू कर दिया।

जेएनयूएसयू के पदाधिकारी जैसे इस्लामिस्ट्स को भी राजपूतों के खिलाफ इस घृणा में शामिल होते देर नहीं लगी।

शेखर गुप्ता के द प्रिंट में कॉलम लिखने वाले ने भी राजपूत समुदाय का मजाक उड़ाने वाली कतार में शामिल होने में देर नहीं की।

स्वघोषित लिबरल्स ने भी memes शेयर कर यह दर्शाने की कोशिश की कि राजपूतों ने इतिहास में कभी कोई महत्त्वपूर्ण लड़ाई नहीं जीती।

इस तरह के शर्मसार कर देने वाले ट्वीट्स और लोगों ने भी किए।

हालाँकि, इस सारी नफरत के बीच कुछ स्वस्थ मजाक भी हुआ, क्रिकेट खिलाड़ी जडेजा की हौसला अफजाई करते दिखे।

मोदी सरकार ने PM CARES में जमा राशि को PMNRF में ट्रांसफर करने की सोनिया गाँधी की माँग को ठुकराया

केंद्र सरकार ने कॉन्ग्रेस की वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गाँधी की PM केयर्स के अंतर्गत अब तक जमा हुई संपूर्ण धनराशि को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) में ट्रांसफर करने की माँग को ठुकरा दिया है। बता दें कि पिछले दिनों सोनिया गाँधी ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर कोरोना महामारी से लड़ने के लिए बनाए गए PM CARES यानी ‘प्राइम मिनिस्टर सिटीजन्स असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशन’ कोष में जमा राशि को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में ट्रांसफर करने की माँग की थी। 

इसकी माँग करते हुए सोनिया गाँधी का कहना था कि बेहतर पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए यह कदम उठाया जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कोरोना वायरस से निपटने के लिए अलग से बनाए गए फंड को संसाधनों की बर्बादी करार दिया था।

इकॉनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस की महामारी से निपटने के लिए बनाए गए इस फंड को विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) से मुक्त करने के बाद अब विदेशों से दान के लिए खोला गया है। अब विदेशों से दान करने वाले लोग सीधे पीएम केयर्स पोर्टल से दान की रसीदें डाउनलोड कर सकते हैं। ईटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि केंद्र द्वारा सोनिया गाँधी की माँग को ठुकरा दिया गया है।

इसके साथ ही सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री सहित ट्रस्टियों द्वारा नियुक्त किए जाने वाले एक या उससे अधिक योग्य ऑडिटरों द्वारा पीएम केयर्स फंड का ऑडिट किया जाएगा।

इसके अलावा PM-CARES फंड को FCRA अधिनियम के सभी प्रावधानों के संचालन से भी छूट प्राप्त होगी और अब वे विदेशी क्रेडिट/ डेबिट कार्ड और वायर ट्रांसफर / SWIFT के माध्यम से विदेशों में व्यक्तियों और संगठनों से दान स्वीकार कर सकते हैं। इसके लिए एक अलग बैंक खाता खोला गया है। साथ ही दान कर्ता सीधे पोर्टल से ही रसीदें डाउनलोड कर सकेंगे।

कॉन्ग्रेस के साथ ही अन्य लेफ्ट पार्टियों ने इस बात का दावा करते हुए अपना रोना राया था कि पीएम केयर्स फंड में दान की गई राशि की रसीदें नहीं मिलती है। कॉन्ग्रेस नेताओं ने यह भी पूछा था कि पीएम केयर्स फंड की तरह सीएम रिलीफ फंड कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉनसिबिलटी (CSR) के अंतर्गत आने वाली वाली कंपनियों से फंड लेने के लिए सक्षम क्यों नहीं है।

मजेदार बात यह है कि CSR दान के संबंध में अधिकांश कॉन्ग्रेस सीएम द्वारा उठाए गए मुद्दे जुलाई 2013 में यूपीए सरकार द्वारा पारित एक कानून (कंपनी अधिनियम) का परिणाम है। जिसके तहत राज्य सरकार द्वारा स्थापित धनराशि को ‘ग्रहण करने योग्य फंड’ (eligible funds) की सूची से हटा दिया गया था जो CSR दान प्राप्त कर सकते थे।

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि सीएम राहत राशि के बारे में विवाद सीएसआर के लिए योग्य नहीं है, लिहाजा यह कानून और उससे संबंधित तथ्यों के अधूरे ज्ञान का नतीजा है। वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, 2013 में पारित कानून ने अधिसूचित किया कि सीएसआर के लिए ‘ग्रहण करने योग्य फंड’ में केवल प्रधान मंत्री राहत कोष (PMRF) और केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित कोई अन्य फंड शामिल है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के लिए धन का योगदान सीएसआर व्यय के रूप में गिना जाएगा और इसलिए कंपनियाँ आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मार्ग के माध्यम से महामारी से लड़ने के लिए किसी भी राज्य सरकार को CSR योगदान दे सकती हैं।

आगे उन्होंने कहा कि 23 मार्च को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कोरोना वायरस स्वास्थ्य सेवा, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और स्वच्छता और आपदा प्रबंधन से संबंधित गतिविधियों को सीएसआर व्यय के रूप में गिना जाएगा।

बता दें कि सोनिया गाँधी पीएम केयर्स में जमा राशि को PMNRF में ट्रांसफर करने की माँग इसलिए कर रही थीं, क्योंकि PMNRF हमेशा एक प्रबंधन समिति की देखरेख में संचालित होता है, जो जमा हुई धनराशि का नियोजन प्रधानमंत्री के विवेकानुसार सुनिश्चित करती है। बता दें कि पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा PMNRF की स्थापना के समय से लेकर आज तक इसकी प्रबंध समिति में कॉन्ग्रेस पार्टी का अध्यक्ष भी हमेशा शामिल रहता है, जो कि वर्तमान में सोनिया गाँधी हैं। PMNRF सीधे प्रधानमंत्री के नियंत्रण में है और शायद सोनिया गाँधी को उम्मीद है कि भविष्य में एक दिन देश का पीएम गाँधी परिवार से ही होगा। इस तरह यह धनराशि पीएम के नियंत्रण में होगी।

PM CARES, PMNRF की तुलना में कहीं ज्यादा पारदर्शी और सक्षम है। हालाँकि, PMNRF भी समय-समय पर नागरिकों की मदद के लिए आगे आता रहा है। यहाँ यह भी बताते चलें कि PM CARES में 13 विशेषज्ञों को भी शामिल करने का प्रावधान है जो अपनी सेवाएँ देश के लिए निःशुल्क प्रदान करेंगे। इसमें सलाहकारी बोर्ड के तौर पर भी 10 व्यक्तियों को शामिल करने की व्यवस्था है, जिन्हें ट्रस्टीज द्वारा डॉक्टरों, स्वास्थ्य सेवा प्रोफेशनलों, अकादमिक जगत के लोगों, अर्थशास्त्रियों और वकीलों में से चुना जाएगा।

अल्लाह ने काफिरों की तबाही के लिए भेजा कोरोना, हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा: मजहबी महिलाओं का दावा

जैसे भारत में मौलाना साद ने कहा कि कोरोना वायरस अल्लाह की परीक्षा है और इस्लाम को मानने वाले इससे बच जाएँगे, वैसे ही शाहीन बाग़ की महिलाओं ने इसे कुरआन से निकला वायरस करार दिया। इसी तरह अब आईएसआईएस की कुछ महिलाओं का वीडियो आया है, जो एक रिफ्यूजी कैम्प का है। इस वीडियो में वो कोरोना वायरस को लेकर अजोबोग़रीब दावे करते दिख रही हैं। ऐसी ही एक महिला ने बताया कि वायरस उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता क्योंकि मुस्लमान अपने मजहब में आस्था रखते हैं, रोजा रखते हैं और 5 बार नमाज़ पढ़ते हैं।

ये वीडियो इराकी कुर्दिस्तान के ‘रुडाव टीवी’ का है, जिसे ‘मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च फाउंडेशन’ ने ट्वीट किया है। इस वीडियो में मीडिया से बात करते हुए आईएसआईएस की महिलाएँ कहती हैं कि वो केवल और केवल अल्ल्ह से ही डरती हैं और वो अबू बकर अल-बगदादी की राह पर चलते हुए सच्चे इस्लाम का अनुसरण करती हैं। बता दें कि खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन आईएसआईएस का सबसे बड़ा सरगना बगदादी ही था, जिसे अक्टूबर 2019 में अमेरिका ने मार गिराया था।

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जब उन महिलाओं से ये पूछा गया कि अगर मजहब विशेष का कोरोना वायरस कुछ नहीं बिगाड़ सकता तो इससे कौन लोग संक्रमित होंगे? इस पर उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से सिर्फ़ काफिर ही संक्रमित होंगे, ये वायरस काफिरों के लिए है। उन्होंने दावा किया कि काफिर समुदाय विशेष पर अत्याचार करते हैं, इसीलिए वो इस वायरस के कारण तबाह हो जाएँगे। महिलाओं ने दावा किया कि इससे उनका तो कुछ नहीं बिगड़ेगा लेकिन काफिरों की तबाही आ जाएगी, इसका उन्हें पूरा विश्वास है। महिलाओं ने एक क़दम और आगे बढ़ कर ये झूठा दावा कर दिया कि इस संक्रमण से आज तक किसी मजहब के व्यक्ति के मरने की ख़बर आई ही नहीं।

बता दें कि जिन देशों में इस वायरस का सबसे ज्यादा कहर रहा, उनमें से एक ईरान भी है। शिया समुदाय मजहबी तीर्थयात्रा के लिए ईरान जाते हैं। ईरान में इस वायरस ने 72,000 लोगों को अपने संक्रमण का शिकार बनाया, जिनमें से 4500 मारे गए। जब मीडिया रिपोर्टर ने महिलाओं को ये बताया कि कई लोग कोरोना के कारण संक्रमित हो चुके हैं तो उन्होंने कहा कि सभी मुस्लिम सच्चे नहीं होते और जो मारे गए हैं, वो अत्याचारी थे। इन महिलाओं का दावा है कि मजहब विशेष के बीच कई दमनकर्ता भी शामिल थे, जो मारे गए। एक अन्य महिला ने तो यहाँ तक दावा कर दिया कि कोरोना वायरस अल्लाह का एक सिपाही है, जिसे धरती पर भेजा गया है।

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के 18.6 लाख मामले आए हैं, जबकि 1.15 लाख लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। इराक में भी इस वायरस ने 1500 लोगों को अपने संक्रमण का शिकार बनाया है, जिनमें से 76 की मौत हुई है। वहाँ टेस्टिंग की सुविधा काफ़ी कम है, इसीलिए आँकड़े और ज्यादा हो सकते हैं। जिन महिलाओं ने ऐसे अजीबोगरीब बयान दिए, वो उत्तरी सीरिया में स्थित अल-हौल रिफ्यूजी कायम में रह रही हैं। इस्लामिक स्टेट के कब्जे वाले क्षेत्र से लोगों को स्थानांतरित कर यहाँ रखा जाता है।

पॉलिथीन में थूक कर घरों में फेंक रही महिलाएँ, CCTV फुटेज से पुलिस तलाश में जुटी: पूरे एरिया को किया सैनेटाइज

भारत में कोरोना के फैलते संक्रमण के बीच राजस्थान के कोटा से थूकने की एक शर्मसार करने वाली घटना सामने आई। मामला कोटा के वल्लभबाड़ी इलाके का है। जहाँ से 4-5 संदिग्ध महिलाओं का सीसीटीवी फुटेज वायरल हुआ है, जिसमें ये महिलाएँ पॉलिथीन में थूककर उसे लोगों के घरों में फेंकती नजर आ रही हैं। अब हालाँकि, इनकी जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने इनकी जाँच शुरू कर दी हैं। लेकिन फिलहाल इन्हें ढूँढा नहीं जा सका है।

घटना गुमानपुरा थाना क्षेत्र की है। बताया जा रहा है कि यहाँ हड़कंप उस समय मचा जब कुछ महिलाएँ CCTV में कैद हुईं और मालूम हुआ कि ये तो प्लास्टिक की थैलियों (थूक से भरी) को घरों में फेंक रही थी। मगर जैसे ही घर के लोग बाहर आए, ये सभी वहाँ से भाग गईं।

घटना के संज्ञान में आते ही क्षेत्रवासियों ने गुमानपुरा थाना पुलिस को सूचना दी, जिस पर पुलिस की टीम ने काफी देर तक महिलाओं की तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। अब इन महिलाओं के पकड़ में आने के बाद ही मालूम चलेगा कि आखिर ऐसी हरकत करने के पीछे उनकी क्या मंशा थी।

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मीडिया खबरों के अनुसार, गुमानपुरा थानाधिकारी मनोज सिकरवार ने बताया कि मामले के बाद नगर निगम की टीम को बुलाकर पूरे क्षेत्र को सैनेटाइज कराया गया है। साथ ही CCTV तस्वीरों के आधार पर इन महिलाओं की तलाश की जा रही है।

मामले की सूचना देने वाले क्षेत्रवासी सिद्धार्थ का कहना है कि ये महिलाएँ थैलियों में थूक लगा कर घरों में फेंक रहीं थी। जिसकी खबर होते ही पुलिस को इसकी सूचना दी गई। फिलहाल लोगों में इससे दहशत बनी हुई है।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के बीच देश के अलग-अलग राज्यों से थूकने की शर्मनाक घटनाएँ सामने आईं। जिसके मद्देनजर देश के कई राज्यों में सार्वजनिक स्थानों पर थूकने को अपराध घोषित कर दिया गया है। इन राज्यों में एक राज्य राजस्थान भी है। जहाँ सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। मगर बावजूद इसके यहाँँ लोग थूकने से बाज नहीं आ रहे।

ताजा जानकारी के अनुसार राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमितों की संख्या सोमवार सुबह तक बढ़कर 815 हो गई है। राज्य में 11 नए मामले सामने आए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) रोहित कुमार सिंह ने बताया कि भरतपुर में दस और बांसवाड़ा में एक नया मामला सामने आया है।

वामपंथी लम्पटों ने फिर बच्चों को आगे कर के फैलाया प्रपंच: भूख के कारण 5 बच्चों को गंगा में नहीं बहाया माँ ने

पूरा देश कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहा है और इससे निजात पाने की कोशिश में है। मगर इस बीच भी प्रोपेगेंडा फैलाने वालों का एक समूह लगातार इस कोशिश में जुटा है कि किस तरह से सरकार के प्रयास को विफल घोषित किया जाए। इसके लिए ये लोग जमकर फेक न्यूज फैला रहे हैं। रविवार (अप्रैल 12, 2020) की सुबह एक खबर आई कि उत्तर प्रदेश के भदोही में एक महिला मंजू देवी ने अपने पाँच बच्चों को नदी में डुबाकर मौत के घाट उतार दिया।

इसके बाद प्रोपेगेंडा फैलाने वालों का समूह सक्रिय हो गया और उन्होंने इसे लॉकडाउन की विफलता घोषित कर दिया। बिना सच्चाई को जाने सरकार का अंध विरोध करना तो इनका जैसे रोज का काम है। इसी कड़ी में इन्होंने एक बार फिर से इस घटना पर ‘दुख’ व्यक्त किया, साथ ही महिला को गरीब बताते हुए उनके प्रति अपनी ‘सहानुभूति’ दिखाई।  

सीरियल फर्जी न्यूज पेडलर, आम आदमी पार्टी के पूर्व सदस्य और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने आउटलुक की एक खबर शेयर करते हुए दावा किया कि महिला ने उत्तर प्रदेश की गंगा में अपने पाँच बच्चों को इसलिए डुबा दिया क्योंकि लॉकडाउन की वजह से उसका काम छीन गया था और इस कारण वे अपने बच्चों को खाना नहीं खिला पा रही थी। इसलिए तंग आकर उसने इस वारदात को अंजाम दिया।

इसी तरह का दावा वामपंथी कविता कृष्णन द्वारा भी किया गया।

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पुण्य प्रसून वाजपेयी ने भी इस पर ‘दुख’ व्यक्त करते हुए कहा, “ये वो देश तो नहीं, दिहाड़ी मजदूर…ना काम, ना रोटी। क्या करें माँ…बच्चों को गंगा में बहा दिया।”

इस प्रोपेगेंडा को फैलाने में सबा नकवी भी शामिल हो गई।

कॉन्ग्रेस के आधिकारिक नेता भी इस खबर को फैलाने में अपना योगदान दिया।

Shweta Sengar, IndiaTimes fake news peddler-in-chief

इसी खबर को इंडियाटाइम्स के सीरियल फर्जी न्यूज पेडलर श्वेता सेंगर ने भी भुनाया।

इस खबर को वामपंथी और कॉन्ग्रेस समर्थकों द्वारा भी खूब फैलाया गया।

पति से झगड़ा के बाद महिला ने बच्चों को नदी में डुबाया

सच क्या है

हालाँकि, सच इनके प्रोपेगेंडा से कोसों दूर है। महिला ने अब खुद इस वारदात को अंजाम देने के पीछे की वजह बताते हुए लिबरलों की बोलती बंद कर दी है। महिला से जब पूछा गया कि उसने ऐसा कदम क्यों उठाया तो उसने कहा कि उसका पति से किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था। आए दिन वे मारते पीटते थे। जिसके चलते उसने ऐसा निर्णय लिया। इससे पहले पुलिस अधीक्षक राम बदन सिंह ने भी कहा था कि मंजू ने उन्हें बताया कि उसने अपने पाँचों बच्चों को इसलिए गंगा में डुबोकर मार डाला, क्योंकि उसका पति कई साल से उससे हर रोज झगड़ा करता था। 

भदोही पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मंजू देवी अपने पति के विवाद एवं मानसिक तनाव के कारण अपने पाँचों बच्चों को गंगा नदी में डुबो दिया।

इसके अलावा भदोही पुलिस ने भी इस बारे में महिला के बयान का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, “मंजू देवी ने अपने 5 बच्चों को भूखमरी के कारण गंगा नदी में नहीं डुबाया है। अन्य कारण द्वारा घटना को अंजाम दिया गया है। मंजू देवी के बयान से स्पष्ट है कि भूखमरी के कारण बच्चों को नदी में नहीं डुबाया गया है।”

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इससे पहले भदोही पुलिस ने मंजू के घर में बने खाने का फोटो पोस्ट करते हुए लिखा था कि मंजू के घर में खाना बना है। फोटो से स्पष्ट है कि भूखमरी के कारण बच्चों को नदी में नहीं डुबाया गया है।

‘एक्टर 1 नंबर के हो लेकिन आदमी दो कौड़ी के’ – RSS का समर्थन करने पर कट्टरपंथियों ने दी मनोज जोशी को गाली

सोशल मीडिया पर RSS का नाम सुनते ही भड़क जाने वालों का जमावड़ा है। शायद इसलिए ऐसे लोग जहाँ भी राष्ट्र स्वयंसेवी संघ की तारीफ या उनके पक्ष में कोई बात सुनते हैं, वे तुरंत आक्रमक हो जाते हैं और समर्थकों को कोसने लगते हैं। इस बार कट्टरपंथियों व सेकुलरों ने अपना निशाना बॉलीवुड कलाकार मनोजी जोशी को बनाया। मगर, जब कलाकार ने इसकी शिकायत की और कहा आरएसएस का नाम लेते ही उनके साथ तबलीगियों जैसा व्यवहार होता है तो ये लोग वहाँ भी आ गए और दोनों में फर्क बताते हुए उन्हें अपशब्द बोलने लगे।

दरअसल, बॉलीवुड कलाकार मनोश जोशी अक्सर आरएसएस की तारीफ में ट्वीट करते रहते हैं। मगर, कट्टरपंथी उनके ट्वीट पर हमेशा कुँठा निकालते हैं।

जैसे उदाहरण के लिए उन्होंने कल एक ट्वीट किया। जिसमें उन्होंने लॉकडाउन के दिनों में आरएसएस के काम को समझने के लिए उनके ट्विटर अकॉउंट को फॉलो करने की सलाह दी। मगर, साजिद मलिक नाम का यूजर उन्हें लिखता है, “बेरोजगारी का इफेक्ट है, चाट दबा के।”

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वहीं जिया नाम के यूजर ने मनोज जोशी के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया और लिखा कि आरएसएस सिर्फ अंग्रेजों की गुलामी कर सकता है, और कुछ नही झंडू। नागपुर के शाखा से निकले हुए 2 कौड़ी के कीड़े । इसके बाद इसी पोस्ट पर उन्हें संघी कुत्ता तक बोला गया।

यही सब पढ़ते हुए उन्होंने कल रात ट्वीट किया, ”मैं जब भी RSS का नाम लेता हूँ, कुछ लोग मेरी टाइमलाइन पे तबलिग़ीयों जैसा व्यवहार करने लगते हैं। ऐसा क्यूँ भाई?” जिसके बाद कुछ लोग फिर उन पर हमलावर होते दिखे और आरएसएस को बुरा बताने के लिए तबलीगी की तारीफ में झूठ बोलने से भी नहीं हिचके।

एक मोहम्मद शाहिद नाम के यूजर ने इस ट्वीट पर लिखा कि अगर तबलीगी लोगों को जान गए तो उन्हें भगवान की तरह पूजोगे। जिस पर किसी ने पूछा कि तुमने इबादत शुरू कर दी क्या? तो शाहीन ने कहा, “तुम अंधभक्तों की बात कर रहे हो, किसी को भी भगवान बना देते हो।”

सोहेल सैफी लिखता है कि तबलीगियों ने अंग्रेजों को धूल चटाई थी और RSS के मुखबिरों ने अंग्रेजों के पैर की धूल चाटी थी।

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इसी तरह इब्राहिम मनोज जोशी के लिए लिखता है, “क्योंकि तुम गोरों की हड्डी पर पलने वाले के गुफा की पैदाइश हो ना, इस लिए समझ गए न दलाल जी।”

बता दें कि आरएसएस और तबलीगी जमात का नाम एक साथ लेने पर ये केवल कुछ ट्वीट हैं, जिसमें आरएसएस के प्रति और आरएसएस के समर्थकों के प्रति नफरत साफ झलकती है। मनोज जोशी के कहे अनुसार वाकई उनके कई ट्वीटस ऐसे हैं, जहाँ पर कट्टरपंथी जाकर अपना जहर उगलते हैं। कभी उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाते हैं, तो कभी पूछते हैं कि उनका क्या लेना-देना आरएसएस से। इसके अलावा आरएसएस का समर्थन करने पर ये भी कहा जाता है कि आप एक्टर एक नंबर के हैं लेकिन आदमी दो कौड़ी के हो।

SC से कमलनाथ को झटका, कोर्ट ने राज्यपाल के फ्लोर टेस्ट आदेश को बताया सही

मध्य प्रदेश में पिछले दिनों हुए सियासी घटनाक्रम और सरकार गठन के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (अप्रैल 13, 2020) को अहम फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि राज्यपाल के फ्लोर टेस्ट का फैसला सही था और यह जरूरी भी था क्योंकि सरकार बहुमत खो चुकी थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हालात के मुताबिक राज्यपाल की ओर से फ्लोर टेस्ट का फैसला लिया जाना बिल्कुल सही कदम था और राज्यपाल के पास ये संवैधानिक अधिकार है कि वो चलते हुए सत्र में फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दे सकते हैं। 

पीठ ने कहा कि राज्यपाल खुद कोई फैसला नहीं ले रहे थे बल्कि केवल फ्लोर टेस्ट करने को कह रहे थे। अदालत ने कॉन्ग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी के इस तर्क को खारिज कर दिया कि अगर सदन चल रहा हो तो राज्यपाल आदेश पारित नहीं कर सकते। पीठ ने कहा कि एक विधानसभा में दो तौर-तरीके होते हैं- अविश्वास प्रस्ताव या फ्लोर टेस्ट। इसमें राज्यपाल ने अनुच्छेद 356 के तहत शक्ति का प्रयोग किया है। अदालत ने इस दौरान राज्यपाल के अधिकारों को लेकर एक विस्तृत आदेश भी जारी किया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान कहा कि राज्यपाल को फ्लोर टेस्ट जैसी माँग करने का पूरा हक है और वे ये कभी भी करवा सकते हैं। इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि राज्यपाल ऐसा विधानसभा के सत्र के दौरान भी आदेश दे सकते हैं और फ्लोर टेस्ट करने के लिए सरकार को बाध्य कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में 68 पेज के फैसले में अब अदालत ने स्थितियों को और साफ कर दिया है।

कमलनाथ ने 90 देशों में IIFA टेलिकास्ट के लिए रखे थे ₹700 करोड़, अब कोरोना से लड़ने पर खर्च होंगे

चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान, ऐसा करने वाले पहले व्यक्ति, अकेले ही ली शपथ

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में कहा गया था कि राज्यपाल ज्यादा से ज्‍यादा विधानसभा के सत्र को बुला सकते हैं, लेकिन वह फ्लोर टेस्ट का आदेश नहीं दे सकते हैं। बता दें कि कमलनाथ सरकार के अल्‍पमत में आने के बाद राज्‍यपाल लालजी टंडन ने फ्लोर टेस्‍ट कराने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ यह भी स्‍पष्‍ट हो गया कि राज्‍यपाल भी फ्लोर टेस्‍ट कराने का आदेश दे सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि ये याचिका शिवराज सिंह चौहान पिछली कमलनाथ सरकार के समय फ्लोर टेस्ट, विधायकों की खरीद-फरोख्त को लेकर दायर की थी। दरअसल, मार्च के महीने में जब मध्य प्रदेश की सियासत में भूचाल आया हुआ था और पूर्व की कमलनाथ की कॉन्ग्रेस सरकार पर संकट मंडरा रहा था, तब भारतीय जनता पार्टी के नेता शिवराज सिंह चौहान की ओर से तुरंत फ्लोर टेस्ट करवाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। सुप्रीम कोर्ट ने तब फ्लोर टेस्ट तुरंत करवाने का आदेश दिया था, जिसके बाद कमलनाथ सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था।

‘कोरोना जिहाद’ का मास्टरमाइंड जालिम मुखिया गिरफ्तार, नेपाल के रास्ते संक्रमण फैलाने का था प्लान

भारत में कोरोना फैलाने की साजिश रचने वाला व हथियारों का तस्कर जालिम मुखिया को पुलिस ने रविवार (अप्रैल 11, 2020) को गिरफ्तार कर लिया। मुखिया पर आरोप है कि उसने न केवल सीमा पार करके भागे 24 जमातियों को छिपाने का काम किया बल्कि भारत में कोरोना फैलाने की साजिश भी रची और इसके लिए उसने करीब 300 लोगों को मस्जिद में इकट्ठा किया था।

नेपाली मीडिया के अनुसार 1 अप्रैल को रक्सौल बॉर्डर पर भारतीय सुरक्षा कर्मियों ने जमातियों को रोकने का प्रयास किया था, मगर सभी जमाती जबरन नेपाल की सीमा में प्रवेश कर गए थे। यह सभी जमाती पाकिस्तान, इण्डानेशिया व भारत के थे। जिन्हें सीमा पार के बाद जालिम मुखिया ने शरण दी और  उन्हें 10 बाइकों की व्यवस्था करके ले गया।

जानकारी के मुताबिक, सीमा पार करने के बाद जालिम मुखिया ने भारतीय व विदेशी सहित 24 तबलीगी जमातियों को छपकैया वार्ड नंबर 2 की मस्जिद व यतीमखाना की मस्जिद में रखा था। जिनकी सूचना मिलते ही नेपाली पुलिस ने इनकी जाँच की। बाद में वहाँ 3 कोरोना संक्रमित पाए गए। संक्रमितों को नारायणी अस्पताल वीरगंज के आइसोलेशन में रखा गया। जहाँ जमातियों ने अस्पताल में कर्मचारियों व पुलिस से दुर्व्यवहार भी किया। वहीं 21 लोगों को स्थानीय सिद्धार्थ स्कूल में क्वारंटाइन किया गया।

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नेपाल के प्रदेश नंबर 2 आंतरिक मामलों के मंत्रालय के अनुसार नेपाली जिला रौतहट, सप्तरी व सिराहा सहित कुल 349 जमाती थे। नेपाल के सुरक्षाकर्मी इन लोगों को खोज रहे हैं। नेपाली सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार नेपाली जिला सुनसरी व मोरंग में गए हैं। 

बता दें कि जालीम मुखिया एक हथियार तस्कर है। वह नेपाल बॉर्डर के रास्ते हथियारों की स्मगलिंग करता है। वह नेपाल के जिला पारसा के सेरवा थाना अंतर्गत जग्रनाथपुर गाँव का रहने वाला है। वह परसा जिले के जगन्नाथपुर का मेयर भी है। साथ ही जालिम मुखिया नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी का सक्रिय सदस्य है। इसके अलावा वह माओवादी ग्रुप का भी सदस्य रह चुका है।

गौरतलब है कि जालिम मुखिया की भूमिका के संबंध में एसएसबी की 47वीं वाहिनी के कमाण्डेन्ट ने 3 अप्रैल को पश्चिम चंपारण, बेतिया के डीएम और एसपी को पत्र लिखकर अलर्ट किया था कि जालिम मुखिया भारत में कोरोना महामारी फैलाने की योजना बना रहा है।

रामगढ़वा में तैनात एसएसबी के कमाण्डेन्ट ने डीएम और एसपी को लिखे अपने पत्र में आगाह करते हुए कहा था कि विभिन्न इस्लामी मुल्कों काम करने वाले करीब 200 भारतीय और 5-6 पाकिस्तानी काठमांडू के जरिए नेपाल पहुँच चुके हैं। जोकि नेपाल के चंदनबसरा तथा खैरवा की मस्जिद और मदरसे में रुके हुए हैं। 3 अप्रैल को लिखे गए इस पत्र में उस दिन भी समुदाय विशेष के 40-50 और भारतीयों के यहाँ पहुँचने की बात कही गई थी।

‘मुस्लिम बच्चों, औरतों, मर्दों को घर से भगाया’ – TheWire का फैलाया झूठ वायरल, पुलिस ने बताई सच्चाई

झूठ गढ़ने की फैक्ट्री बन चुके वामपंथी मीडिया पोर्टल ‘द लायर’ ने कोरोना के बीच समाज में अराजकता फैलाने के लिए पिछले हफ्ते नया कारनामा किया। ‘द लायर’ ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया कि पंजाब और हिमाचल की बॉर्डर रेखा के पास मुस्लिम समुदाय के कुछ बच्चे, औरतें, पुरुष नदी ताल पर बिना खाना-पीना के रहने को मजबूर हो गए हैं, क्योंकि उन्हें गाली देकर, मारकर उनके घरों से खदेड़ दिया गया है। इसके बाद पोर्टल के मालिक और हाल ही में झूठ फैलाने के लिए कोर्ट का नोटिस पा चुके एस वर्धराजन ने इसे ट्वीट किया। साथ ही राणा अयूब एवं सबा नकवी जैसी कट्टरपंथी पत्रकारों ने इस झूठ को फैलाने पर तेजी से काम किया। नतीजतन, होशियारपुर पुलिस को खुद इस पर संज्ञान लेना पड़ा और सबूत पेश करके साबित करना पड़ा कि द वायर झूठ फैलाने का काम कर रहा है और ऐसा कुछ भी नहीं हैं।

पहले तो बता दें कि द वायर की खुद की रिपोर्ट में भी इस बात का उल्लेख है कि होशियारपुर की पुलिस ने इस तरह की किसी भी शिकायत आने को खारिज़ किया। बावजूद इसके द वायर ने अपनी खबर को अपने एंगल के हिसाब से चलाया। पुलिस ने इसके संबंध में एस वर्धराजन के ट्वीट पर रिप्लाई किया। होशियारपुर पुलिस ने रिपोर्ट को खारिज किया और लिखा, “यह झूठ है। कृपया ऐसे लेख पोस्ट न करें जो इस संकट के समय में लोगों में दहशत पैदा करें। हमें एकत्रित होकर लड़ने की जरूरत है और इस महामारी से अवगत लोगों को मदद करनी चाहिए… घबराने की जरूरत नहीं है।”

इसके अलावा, होशियारपुर पुलिस ने अपने ट्विटर से एक विडियो भी ट्वीट की। वीडियो में सराज दीन नाम का युवक पुलिस से बातचीत करता नजर आया और पुलिस को बताया कि उन्हें यहाँ पर कोई भी दिक्कत नहीं है। वे यहाँ आराम से हैं। उन्हें दो टाइम का खाना दिया जा रहा है। उन्हें राशन मिल रहा है। इसी तरह एक अन्य आदमी ने भी वीडियो में यही बातें बताई। जिसे शेयर करते हुए पुलिस ने लिखा कि कृपया झूठी न्यूज न फैलाएँ, वे लोग ठीक हैं।

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यहाँ बता दें कि सराज दीन नाम का ये युवक जो वीडियो में नजर आ रहा है, इसी युवक के नाम पर द वायर ने अपनी रिपोर्ट में प्रोपेगेंडा तैयार किया और लिखा कि उनके गाँव में उन्हें मारा पीटा गया गया और गाली देकर भगाया गया। जिसके कारण ये नदीतल पर भूखे प्यासे रहने को मजबूर हैं।

गौरतलब है कि ये खबर अब भी सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर की जा रही है। जाहिर है पुलिस के स्पष्ट करने के बाद भी लोग इसे हकीकत मान रहे हैं। लेकिन द वायर फिर भी अपनी हरकतों से बाज आने का नाम नहीं ले रहा। उसने न खबर को डिलीट किया है और न इस गलती पर माफी माँगी है। लेकिन, दूसरी ओर होशियारपुर पुलिस लगातार इस बात को लेकर आश्वास्त कर रही है कि नदीतल में रह रहा गुज्जर (मुस्लिम) समुदाय सुरक्षित है और उन्हें बराबर खाना, पीना, राशन पहुँचाया जा रहा है।

कल होशियारपुर पुलिस ने ट्वीट करके जानकारी दी है कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों पर इंस्पेक्टर भूषण ने गुज्जर समुदाय के लोगों को खाने-पीने की चीजें पहुँचाई और उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि संकट के इस समय में जरूरतमंद व्यक्तियों को आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँगे।