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UP में 200 जमाती अचानक गायब, 500+ लोगों के मोबाइल ऑफ: पता बताने पर 5000 रुपए का इनाम

देश में लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या के बीच दिल्ली मरकज से निकल कर हर जगह फैले जमाती सभी राज्य सरकारों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में लगातार पुलिस ने जमातियों को खोजने के लिए सर्च अभियान चलाया हुआ है। इस दौरान यूपी के लखनऊ से अचानक ग़ायब हुए 200 जमातियों ने यूपी सरकार को नई टेंशन दे दी है, साथ ही प्रदेश की जनता को संकट में डाल दिया है।

हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर के मुताबिक अब तक लखनऊ शहर में रह रहे 200 से अधिक जमाती पिछले 1-2 दिनों के अंदर अचानक से गायब हो गए हैं। इस बात का खुलासा तब हुआ, जब उत्तर प्रदेश में यूपी पुलिस की क्राइम ब्रांच कोरोना के संकट से उभरने के लिए प्रदेश में जमातियों की तलाश में सर्च अभियान चलाए हुए है। क्राइम ब्रांच ने लखनऊ में रहने वाले जमातियों का पता लगाने के लिए 700 से अधिक मोबाईल नंबरों को सर्विलांस पर लगा रखा था।

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अब इनमें से 200 से अधिक जमातियों के नंबर अचानक से बंद जा रहे हैं। इतना ही नहीं, इन जमातियों के सम्पर्क में रहे करीब 300 लोगों ने भी अपने मोबाइल बंद कर लिए हैं। वहीं पुलिस को आशंका है कि इन जमातियों ने शायद नए नंबर लेकर उनका इस्तेमाल शुरू कर दिया है। यह भी सामने आ रहा है कि कुछ लोगों ने पुराने लखनऊ में परिचितों की दुकान से नए मोबाइल ले लिए हैं। पुलिस इसकी भी पड़ताल कर रही है।

हिन्दुस्तान अखबार के लखनऊ संस्करण में प्रकाशित खबर की कटिंग

वहीं क्राइम ब्रांच की टीम ने खुलासा किया कि जब कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस ने जमाती और उनके परिवारजनों से पूछताछ शुरू की तो कई जमातियों ने लोकेशन को लेकर झूठ भी बोला था। इतना ही नहीं, कई जमातियों ने तो पुलिस के सवालों के सही जवाब भी नहीं दिए। इसके बाद पुलिस ने जब पूछताछ बढ़ा दी तो क्वारंटीन किए जाने के डर से ये लोग अपने नंबरों को बंद करने लगे।

लखनऊ के कैसरबाग, सदर, वजीरगंज, मड़ियांव, सआदतगंज, गोमती नगर समेत कई इलाकों में रहने वाले जमातियों में से अधिकांश ने दिल्ली की जमात में हिस्सा लिया था। अब क्राइम ब्रांच के साथ एसटीएफ की टीम कुछ नए नम्बरों को सर्विलांस पर लेकर गायब हुए जमातियों के बारे में पता लगाने में जुटी हुई है।

पुलिस कमिश्नर सुजीत पाण्डेय ने बताया कि जमातियों का पूरा ब्योरा आ गया है। कुछ ब्योरा और मिलना बाकी है। दिल्ली में हुई जमात में शामिल होने गए लखनऊ के 18 लोग अभी वहीं क्वारंटीन है। पुलिस टीम परिवारजनों के सम्पर्क में है। यह मॉनिटरिंग लगातार हो रही है कि दिल्ली से कोई जमाती यहाँ आ तो नहीं गया है।

दरअसल दिल्ली मरकज में बड़ी संख्या में पाए गए जमातियों के बाद उत्तर प्रदेश में की गई छापेमारी के दौरान लखनऊ के काकोरी, गोमतीनगर और कैसरबाग स्थित मस्जिदों से 24 विदेशी नागरिकों को निकाला गया था। ये सभी विदेशी जमाती तभी दिल्ली की जमात में शामिल होकर लखनऊ वापस लौटे थे। इसके बाद लगातार की गई छापेमारी में पाए गए सभी जमातियों को पुलिस ने क्वारंटाइन कराया था, जिनमें से कई जमाती कोरोना पॉजीटिव भी मिले थे।

हकीकत तो यह है कि किसी भी हाल में प्रदेश सरकार जमातियों को खोजकर कोरोना से निपटने के लिए इन्हें क्वारंटाइन कर देना चाहती है। यही कारण है कि आजमगढ़ की पुलिस ने जमातियों का पता बताने पर 5000 रुपए का इनाम घोषित कर दिया है। आपको बता दें कि गुरुवार को यूपी पुलिस ने प्रदेश के विभिन्न जिलों से 48 जमातियों को घरों से खोज निकाला था।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अब तक कोरोना से 4 लोगों की मौत और इससे संक्रमित लोगों की संख्या 431 हो गई है। वहीं इनमें से 246 तबलीगी जमात से जुड़े हुए जमाती हैं।

चाँद मोहम्मद ने भूख से मरने का नाटक कर मँगवाया खाना, घर में था खूब राशन, फ्रिज में चिकन: होगी कार्रवाई

किचन में महीने भर का राशन, फ्रिज में चिकन। घर में मोटरसाइकल, गैस कनेक्शन, फ्रिज, कूलर सभी चीजें उपलब्ध, फिर भी भूख से मरने का नाटक कर सरकारी कर्मचारियों से खाना मँगवाया। ये मामला है राजस्थान के खानपुरा क्षेत्र का। यहाँ के चाँद मोहम्मद नाम के शख्स ने प्रशासन से फोन करके भूख से मरने की बात कही। फिर उसने दोबारा फोन करके कहा कि वो भूख से मर रहा है। प्रशासन खाना लेकर उसके मरने के बाद पहुँचेगी क्या?

अतिरिक्त जिला कलक्टर हीरालाल मीणा ने बताया कि प्रशासन ने उसकी बातों को गंभीरता से लिया और आनन-फानन में अधिकारी सूखी राशन सामग्री एवं तैयार भोजन के पैकेट लेकर गए। मगर वहाँ का नजारा देखकर अधिकारी सन्न रह गए। चाँद मोहम्मद के घर में ना सिर्फ पर्याप्त मात्रा में आटा-चावल और अन्य सामग्रियाँ भरी हुई थी, बल्कि उसका फ्रिज भी चिकन से भरा हुआ था। इसके बावजूद उसने भूख से मरने का झूठ बोला। इसके बाद जिला प्रशासन ने चाँद के खिलाफ कानूनी कर्रवाई की बात करते हुए उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।

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उल्लेखनीय है कि पूरा देश इस वक्त कोरोना संकट से जूझ रहा है। दिन प्रतिदिन इसके मामले बढ़ते जा रहे हैं। सरकार और प्रशासन इसको लेकर काफी मुस्तैदी से काम कर रही है। पूरे देश में लॉकडाउन जारी है, मगर किसी को भी कोई परेशानी न हो, कोई भी भूख से न मरे इसका भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है। पुलिस और सरकारी कर्मचारी इस बात को लेकर काफी सक्रिय हैं कि कोई भी शख्स खाने के लिए न तरसे। इसलिए इस तरह की किसी भी सूचना के मिलने पर वह तैयार खाना और राशन लेकर उनके पास दौड़कर पहुँचते हैं।

मगर चाँद मोहम्मद जैसे कुछ लोग मौके की नजाकत को बिल्कुल ही नहीं समझते हैं और इसका गलत फायदा उठाते हैं। इनकी वजह से जरुरतमंद लोग खाने से महरुम रह जाते हैं और 24 घंटे काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों को भी काफी परेशानियाँ झेलनी पड़ती हैं। इनके जैसे लोगों की वजह से उन जरुरतमंदों तक राहत सामग्री नहीं पहुँच पाती है, जिन्हें वाकई में इनकी जरुरत है। इन जैसे लोगों को शर्म आनी चाहिए, जो गरीबों से मुँह से निवाला छीनने का काम करते हैं। ये समय एक-दूसरे की मदद करने का है, परेशान करने का या फिर किसी का हक छीनने का नहीं।

पश्चिम बंगाल की वो मस्जिद जहाँ सैकड़ों लोगों ने अदा की जुमे की नमाज, फिर पुलिस के सामने ‘शान’ से निकले

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज में भीड़ जुटने की घटना को लेकर मचा बवाल अभी थमा भी नहीं है कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में ऐसी ही दूसरी घटना सामने आ गई है। शुक्रवार (अप्रैल 10, 2020) को मुर्शिदाबाद में सैकड़ों की संख्या में लोग मस्जिद में एकजुट हुए और नमाज अदा की। इस दौरान लोगों ने न मास्क पहन रखा था और न ही हाथ में ग्लव्स पहना था। 

इतना ही नहीं, वीडियो में आप देख सकते हैं कि मुर्शिदाबाद में जुमे की नमाज अदा करने के लिए इकट्ठा हुए लोग ना सिर्फ लॉकडाउन का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की भी जमकर धज्जियाँ उड़ा रहे हैं।

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बता दें कि पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद अल्पसंख्यक बहुल जिला है। यहाँ की गोपीपुर मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने के लिए शुक्रवार को अल्पसंख्यक समुदाय के लोग काफी संख्या में जमा हुए। जब इसकी जानकारी पुलिस को मिली, तो वो फौरन मौके पर पहुँचे। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मस्जिदों से बाहर निकलते दिखे। इसके बाद पुलिस ने मौलाना को बुलाया और लोगों से घरों में रह कर ही नमाज पढ़ने की अपील करने के लिए कहा।

अब यहाँ पर सवाल यह उठता है कि शुक्रवार को लॉकडाउन के 17 दिन हो गए, 4 दिन शेष रह गए, तो फिर अब तक प्रशासन की तरफ से यह अपील क्यों नहीं की गई? और अपील अगर की गई तो भीड़ जुटने वाली मस्जिदों के पास प्रशासन ने ज्यादा सख्ती क्यों नहीं बरती?

पूरे देश में संपूर्ण लॉकडाउन है, लोगों के घरों से निकलने पर बैन है। देश के सारे धर्मस्थल बंद हैं। लेकिन कुछ लोग मजहब के नाम पर सरेआम लॉकडाउन की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। तो क्या मजहब लॉकडाउन तोड़ने का लाइसेंस देता है? क्या कोई मजहब किसी की जान से खिलवाड़ करने का लाइसेंस देता है? क्योंकि ऐसा करने ये लोग ना सिर्फ अपनी बल्कि दूसरों की जान को भी खतरे में डाल रहे हैं। आखिर पश्चिम बंगाल में लॉकडाउन के नियमों से खिलवाड़ क्यों?

मुस्लिम समुदाय का सबसे बड़ा तीर्थ स्थान मक्का-मदीना है। कोरोना के संकट काल में मक्का-मदीना तक बंद है, लेकिन भारत में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग ये मानने को तैयार नहीं हैं कि कोरोना से उन्हें कोई खतरा है। इससे पहले दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज के जलसे में काफी संख्या में लोगों के जुटने और उनके कोरोना पॉजिटिव पाए जाने की घटना ने हड़कंप मचा दिया था।

मस्जिद-मदरसा, नेपाल, पाकिस्तान: जालिम मुखिया का भारत में ‘कोरोना जिहाद’ का प्लान

भारत में कोरोना फैलाने की एक साजिश नेपाल में रची जाने का खुलासा हुआ है। पाकिस्तान की शह पर ऐसा किया जा रहा है। इसका पूरा प्लान जालिम मुखिया ने तैयार किया है। जालिम हथियारों का तस्कर है। नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी की राजनीति में भी सक्रिय है।

जालिम की योजना भारत में नेपाल की सीमा से कोरोना पॉजिटिव लोगों की एंट्री कराने की है। इसके लिए मजहब विशेष के करीब तीन सौ लोग नेपाल के चंदनबसरा तथा खैरवा की मस्जिद और मदरसे में जमा हैं। इनमें कुछ भारतीय हैं। कुछ पाकिस्तानी। जो भारतीय मस्जिद में जमा हैं वे अलग-अलग इस्लामी मुल्कों में काम करते हैं।

सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की एक रिपोर्ट यह पूरी साजिश सामने आई है। एसएसबी ने बेतिया प्रशासन को इसकी जानकारी देते हुए अलर्ट कर दिया है। इस खुलासे के बाद पूरा तंत्र हरकत में आ गया है और भारत-नेपाल सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है।

एसएसबी की 47वीं वाहिनी के कमाण्डेन्ट ने 3 अप्रैल को पश्चिम चंपारण, बेतिया के डीएम और एसपी को पत्र लिखकर अलर्ट किया कि जालिम मुखिया भारत में कोरोना (COVID-19) महामारी फैलाने की योजना बना रहा है। जालिम नेपाल के परसा जिले के सेरवा थाने के जानकी टोला पोस्ट ऑफिस के तहत जगनाथपुर गॉंव का रहने वाला है। बताया जाता है कि वह परसा जिले के जगन्नाथपुर का मेयर भी है।

रामगढ़वा में तैनात एसएसबी के कमाण्डेन्ट ने डीएम और एसपी को लिखे अपने पत्र में आगाह करते हुए कहा है विभिन्न इस्लामी मुल्कों काम करने वाले करीब 200 भारतीय और 5-6 पाकिस्तानी काठमांडू के जरिए नेपाल पहुँच चुके हैं। नेपाल के चंदनबसरा तथा खैरवा की मस्जिद और मदरसे में रुके हुए हैं। 3 अप्रैल को लिखे गए इस पत्र में उस दिन भी 40-50 और समुदाय विशेष के भारतीयों के यहाँ पहुँचने की बात कही गई है।

पत्र में कहा गया है कि भारत में घुसने की फिराक में बैठे ये संदिग्ध पेरासिटामोल खा रहे हैं जिससे कोरोना जाँच के दौरान खुद को छुपा सकें। इस पत्र के बाद पश्चिमी चम्पारण के डीएम ने जिले के एसपी को 7 अप्रैल को एक पत्र लिखा। इसमें एसएसबी के कमाण्डेन्ट द्वारा दी गई सूचना का हवाला देते हुए भारत-नेपाल सीमा पर यथोचित सतर्कता बरतने के आदेश दिए गए। डीएम ने एसपी को लिखे अपने पत्र में भारत के दूसरे मजहब के 40-50 संदिग्ध लोगों के भारतीय सीमा में प्रवेश करने की सूचना मिलने की भी बात कही है।

इन दोनों पत्रों में जिस नेपाल निवासी जालिम मुखिया का जिक्र है, वह पहले भी भारत-नेपाल सीमा से हथियारों की अवैध सप्लाई और FICN तस्करी में शामिल रहा है।

इस पूरे मामले पर बिहार के अपर मुख्य सचिव आमिर सुहबानी का स्टेटमेंट आ चुका है जिसमें उन्होंने कहा है कि एसएसबी ने सिर्फ घुसपैठ को लेकर आशंका जताई है। अभी कोई घुसपैठ हुई नहीं है। अपर सचिव ने आगे कहा है कि इस बाबत हमने पुलिस को अलर्ट कर दिया है और इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय को जानकारी दे दी गई है। हम किसी को सीमा पार नहीं करने देंगे।

इससे पहले आज शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने तबलीगी जमात पर एक गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इन जमातियों का उद्देश्य पूरे देश में 1 लाख से ज्यादा लोगों को मारने का था। उनका आरोप है कि जमात इस समय मलेशिया में छिपे भगोड़े जाकिर नाइक की बी टीम की तरह काम कर रही है। जमातियों की मदद से उसने भारत में आत्मघाती हमले की साजिश रची है। गुरुवार को दिए इस बयान को शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने किस आधार पर बोला, ये निश्चित ही पड़ताल के बाद मालूम होगा। लेकिन अभी उनके इस खुलासे ने हलचल मचा दी है।

उन्होंने कहा कि मुमकिन है कि इस साजिश में मलेशिया में रह रहे जाकिर नाइक भी शामिल हो। उन्होंने कहा कि जिस तरह से मलेशिया के जमाती मिल रहे हैं, उससे जाकिर नाइक की साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि तबलीगी जमात जाकिर नाइक की बी टीम की तरह काम कर रहा है।

याद रहे कि देश में कोरोना संक्रमित मामलों में से एक तिहाई से ज्यादा मामले तबलीगी जमात के लोगों से संबंधित हैं। तबलीगी जमात का दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज देश में कोरोना वायरस संक्रमण का हॉटस्पॉट बनकर उभरा है। यहॉं मजहबी आयोजन में शरीक होने के बाद जमात के सदस्य देश के अलग-अलग हिस्सों में गए। देश के कई राज्यों में जमात से जुड़े मौलवी मस्जिदों में छिपे मिले हैं।

सीमा पार आतंकियों के लॉन्च पैड और गोला-बारूद के ठिकाने तबाह: भारतीय सेना के पराक्रम का Video

कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में पाकिस्तान के संघर्ष विराम उल्लंघन का भारतीय सेना ने मुॅंहतोड़ जवाब दिया है। बेहद सटीकता से नियंत्रण रेखा के उस पार बने आतंकियों के लॉन्च पैड और गोला-बारूद के ठिकाने को निशाना बनाया। श्रीनगर स्थित डिफेन्स के प्रवक्ता ने बताया कि इस हमले में इसने दुश्मन को भारी नुकसान पहुँचा है।

न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने ड्रोन द्वारा शूट किया वीडियो भी ट्वीट किया है। इसमें साफ़ नजर आ रहा है कि भारतीय सेना ने किस सटीकता से पाकिस्तान स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

पत्रकार आदित्य राज कौल ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा कि कोरोना महामारी के समय पाकिस्तान द्वारा लगातार किए जा रहे संघर्ष विराम के उल्लंघन के बाद आज भारतीय सेना ने पाकिस्तान स्थित सैन्य ठिकानों और आतंकी लॉन्च पैड्स पर बेहद सटीक हमले किए। पाकिस्तान से बड़ी संख्या में जान-माल के नुकसान की सूचना आ रही है।

बताया जा रहा है कि शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे पाकिस्तान ने केरन सेक्टर पर सीज फायर का उल्लंघन किया। शाम करीब 6 बजे तक दोनों तरफ से फायरिंग होती रही। भारतीय सेना ने आतंकियों के लॉन्च पैड और गोला-बारूद रखने की जगह को तबाह कर दिया।

याद रहे कि कोरोना संकट के समय भी पाकिस्तान और उसके हिमायती अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे। दो दिन पहले बुधवार को सुरक्षाबलों ने आतंकियों के साथ मुठभेड़ के बाद एक स्थानीय आतंकी सज्जाद डार को मार गिराया था। सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि बारामुला जिले के सोपोर इलाके में जैश के तीन से चार आतंकी छिपे हैं। इस पर सेना की 22 राष्ट्रीय राइफल्स, 179 बटालियन सीआरपीएफ और एसओजी के जवानों ने सोपोर, आरमपुरा के गुलबड़ इलाके की घेराबंदी कर संयुक्त तलाशी अभियान चलाया था। करीब 14 घंटे तक इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान के बाद आतंकियों के साथ शुरू हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने आतंकी सज्जाद डार को मार गिराया था।

वासु यादव ने देवी-देवताओं की अश्लील तस्वीरें शेयर की, खोज रही उन्नाव पुलिस

सोशल मीडिया पर अक्सर हिन्दू-देवी देवताओं का भद्दा चित्रण कर हिंदुओं की आस्था पर प्रहार किया जाता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें वासु यादव नाम के एक फेसबुक अकाउंट से हिन्दू देवी-देवताओं के अश्लील चित्र बनाकर बेहूदा सन्देशों के साथ पब्लिश किया गया था।

ट्विटर पर इन तस्वीरों को अभय पंडित नाम के शख्स ने ट्वीट करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ ही उन्नाव पुलिस को भी टैग किया। उन्नाव पुलिस ने फौरन संज्ञान लेते हुए लिखा, “उक्त आईडी/अकाउंट के विरुद्ध साइबर सेल द्वारा आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है।”

वासु यादव नाम के शख्स ने फेसबुक अकाउंट में अपनी लोकेशन कराची, पाकिस्तान बताई है। उसने इस अकाउंट पर हिंदुओं की आस्था पर चोट करते हुए काली, दुर्गा और भगवान शिव की तस्वीरों को अश्लीलता से पेश किया है।

यह पहली बार नहीं है जब सोशल मीडिया पर हिन्दू देवी-देवताओं का उपहास बनाया गया हो या फिर उन्हें अपमानित किया गया हो। पहले भी ऐसे कई प्रयास वामपंथी मीडिया या फिर वामपंथी उदारवादियों के ‘कलाकारों’ द्वारा कई बार किए गए हैं। इसके उलट अन्य किसी मजहब का महज जिक्र कर देने पर भी इस्लामोफोबिया जैसे विशेषण आरोपित कर दिए जाते हैं।

असहिष्णुता के इस दौर में देखा जा सकता है कि मात्र तबलीगी जमात के कारनामों पर रिपोर्ट करने वालों को भी इस्लाम-विरोधी साबित करने के कई प्रयास किए जा रहे हैं।

तमिलनाडु में तबलीगी जमात के मदरसे पर छापा, 5 देशों के मौलवी बरामद

तमिलनाडु के मइलादुथुराई के पास निदुर में तबलीगी जमात से जुड़े एक मदरसे पर पुलिस ने छापा मारा। 12 मौलीवी यहॉं छिपे मिले। इनमें 5 फ्रांस, 3 कैमरून, 1 कांगो, 1 बेल्जियम और 1 बांग्लादेश का नागरिक है। इन सभी के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए हैं।

देश में कोरोना वायरस के संक्रमण का सबसे बड़ा स्रोत बन चुके यह तबलीगी जमात सबके आश्चर्य का विषय बन गया है। ट्विटर यूजर्स ने इस पर हैरानी जताते हुए लिखा है कि यह चैंकाने वाली बात है कि यदि कोरोना वायरस नहीं आता तो शायद इनके बारे में कभी किसी को कोई खबर भी नहीं होती।

आज ही मध्यप्रदेश में पुलिस ने भी कार्रवाई करते हुए तबलीगी जमात के 64 विदेशी सदस्यों को गिरफ्तार किया है। मध्य प्रदेश पुलिस ने तबलीगी जमात के 64 विदेशी सदस्यों, संगठन से जुड़े 10 भारतीयों, और 13 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है जिन्होंने भोपाल में इनकी मदद की है।

यदि तमिलनाडु की ही बात करें तो आज वहाँ कोरोना वायरस से 70 वर्षीय महिला की मौत हो गई, जिससे राज्य में इस महामारी से मरने वालों की संख्या नौ हो गई। साथ ही, 77 लोग इस बीमारी से संक्रमित पाए गए हैं जिससे संक्रमण की कुल संख्या 911 हो गई है।

तमिलनाडु में कल 24 घंटे में 96 नए केस सामने आए, जिसमें से 84 मामले सिर्फ दिल्ली के निजामुद्दीन में आयोजित तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) के कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों से जुड़े हुए लोगों के हैं।

तबलीगी जमात का दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज देश में देश में कोरोना वायरस संक्रमण का हॉटस्पॉट बनकर उभरा है। यहॉं मजहबी आयोजन में शरीक होने के बाद जमात के सदस्य देश के अलग-अलग हिस्सों में गए। देश के कई राज्यों में जमात से जुड़े मौलवी मस्जिदों में छिपे मिले हैं। पुलिस के साथ ही अब हाईकोर्ट भी इनसे सख्ती से निपटने के निर्देश दे रहा है।

उर्वशी रौतेला ने अनजाने में बता दी उद्धव ठाकरे की पुलिस की एक ही ट्वीट वाली स्कीम? लगता तो यही है!

कोरोना महामारी से अब तक देश में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र है। संक्रमण और मौतें दोनों सबसे ज्यादा रही है। इस हालात के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को प्रशासनिक कार्यों का अनुभव न होना भी बताया जाता है। इन आरोपों के बीच एक मार्केटिंग कैम्पेन लॉन्च किया गया है जो यह बताता कि किस प्रकार उद्धव बेस्ट सीएम हैं और कोरोना महामारी से बेहद कारगर तरीके से निपट रहे हैं। इस तरह के पीआर कैम्पेन के विषय में अभी जहाँ हवा ही चलना शुरू हुई थी, फिल्म एक्ट्रेस और मॉडल उर्वशी रौतेला के एक ट्वीट ने इन अफवाहों में घी डालने का काम किया है।

हिन्दुस्तान टाइम्स ने हाल ही के एक आर्टिकल में लिखा था कि जब ट्विटर पर कुछ भी ट्वीट करने की बात होती है तो किस प्रकार उर्वशी रौतेला एक आदतन ‘प्लेगिअरिस्ट’ हैं। आर्टिकल कहता है कि उर्वशी अमूमन सिद्धार्थ मल्होत्रा के ट्वीट “चुरा” लेती हैं।

आर्टिकल लिखता है: एक्टर उर्वशी रौतेला ने निश्चित ही कोई सबक नहीं सीखा है। एक यूएस लेखक के द्वारा ‘पैरासाइट’ नामक मूवी पर अपने ट्वीट को उर्वशी रौतेला द्वारा चुरा लिए जाने का आरोप लगाने के बाद, एक्टर पर फिर किसी के ट्वीट को चोरी करने का आरोप लगा है। इस बार उर्वशी ने एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा के उस ट्वीट को चुराया है जिसमें उन्होंने कोरोना वायरस लॉकडाउन को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किए जाने पर मुम्बई पुलिस की तारीफ़ की थी। सिद्धार्थ ने ट्वीट किया था,“यह समय है जब हमें हृदय से मुम्बई पुलिस को धन्यवाद कहना चाहिए, जो अपने घर परिवार से दूर रह हमारी और हमारे समाज की रक्षा के लिए अनथक प्रयास में जी जान से जुटे हैं.. आप लोग सच्चे हीरो हैं #ThankYouMumbaiPolice”

सिद्धार्थ मल्होत्रा का ट्वीट जो मुम्बई पुलिस के पीआर कैम्पेन का हिस्सा भी हो सकता है

जिन ट्वीट्स का हिन्दुस्तान के आर्टिकल में जिक्र किया गया है वो अभी एक हैशटैग #ThankYouMumbaiPolice के साथ ट्ववीट किए गए हैं, जिसके अंतर्गत कई बॉलीवुड सेलेब्रिटीज ने ट्वीट किए।

उर्वशी ने जो ट्वीट “कॉपी किया” वह बिलकुल सिद्धार्थ के ट्वीट के समान था, समान हैशटैग #ThankYouMumbaiPolice के साथ। उर्वशी ने ट्वीट किया था, “यह समय है जब हमें हृदय से मुम्बई पुलिस को धन्यवाद कहना चाहिए, जो अपने घर परिवार से दूर रह हमारी और हमारे समाज की रक्षा के लिए अनथक प्रयास में जी जान से जुटे हैं ।”

उर्वशी ने जो ट्ववीट किया वह मुम्बई पुलिस के पीआर कैम्पेन का हिस्सा भी हो सकता है

हिंदुस्तान टाइम्स ने रिपोर्ट किया कि उर्वशी ने सिद्धार्थ के ट्वीट से सिर्फ एक लाइन हटा कर, बाकी सब कॉपी कर ली है। यह उर्वशी रौतेला को अच्छी नहीं लगी और उसने अपना बचाव करते हुए शायद महाराष्ट्र सरकार के पीआर कैम्पेन की पोलपट्टी खोल के रख दी। उर्वशी ने हिन्दुस्तान टाइम्स को टैग करते हुए लिखा कि यह महत्वपूर्ण समय है और बेहतर है कि तुम लोग अच्छे कंटेंट पर फोकस करो न कि मुझ पर। दूसरी बात यह ट्वीट मुझे और सिद्धार्थ दोनों को मुम्बई पुलिस ने ही उपलब्ध करवाया है जिसे हमें पोस्ट करना था, यहाँ किसी ने किसी का पोस्ट कॉपी नहीं किया।

ट्वीट जिसने मुम्बई पुलिस के पीआर कैम्पेन को उजागर कर दिया

इस ट्वीट से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि मुम्बई पुलिस सरकार की साख बचाने के लिए एक पीआर कैम्पेन चला रही है। इससे पहले भी बॉलीवुड सेलेब्रिटीज पर उद्धव ठाकरे के पक्ष में पेड ट्वीट करने के आरोप लगे थे, हालाँकि opindia इन आरोपों की पुष्टि नहीं करता। उर्वशी का ताजा ट्वीट जहाँ इस बात की पुष्टि करता है कि यह एक कोऑर्डिनेटेड प्रयास है, पर इसके प्रमाण नहीं मिलते कि ये ‘पेड’ हैं या नहीं।

वहाँ कई लोगों ने इस कोऑर्डिनेटेड कैम्पेन पर सवाल खड़े हुए कहा कि कोरोना महामारी के समय खुद के पक्ष में पीआर कैम्पेन चलाने की जगह मुम्बई पुलिस को इस वक्त अपने सारे संसाधन इस महामारी से लड़ने में लगाने चाहिए थे।

उत्तम पटेल नामक एक और यूजर ने ट्वीट किया कि इस प्रकार के पीआर ट्वीट्स केवल सिद्धार्थ मल्होत्रा और उर्वशी रौतेला को ही नहीं, बल्कि कई सारे बॉलीवुड सेलेब्रिटीज को मुहैय्या कराए गए हैं।

कोरोना वायरस महामारी ने सभी को भीषण रूप से प्रभावित किया है। महामारी ने हमारे शासन प्रशासन की कमियों और खूबियों को भी उघाड़ के रख दिया है। 130 करोड़ की आबादी वाले देश में कोरोना जैसी महामारी से निपट पाना एक दुःस्वप्न के जैसा है।

इस कोलाहल के बीच केंद्र सरकार ने अदम्य क्षमता का परिचय दिया तो वहीं डॉक्टर्स समेत हमारा मेडिकल स्टॉफ और पुलिस फ़ोर्स जिसकी हम अक्सर आलोचना करते हैं इस कठिन मौके पर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे खड़े नजर आते हैं। सच तो यह है कि तबलीगी जमात द्वारा कोरोना संक्रमण के इस विस्फोट के पहले तक तो ऐसा लग रहा था कि हम काफी आसानी से इस समस्या से निपट लेंगे। हालाँकि तबलीगी जमात के वाकये के बाद भी जिस निर्णायक तरीके से केंद्र तथा राज्य सरकारों ने ट्रैकिंग, क्वारंटाइन और टेस्टिंग की है, यह हर किसी को एक आशावादिता से भर देती है।

हालाँकि इस कठिन समय में जहाँ राष्ट्र की क्षमता की सामूहिक परीक्षा होती है वहीं उसके नेतृत्व की काबिलियत सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण हो जाती है।

कुछ समय पहले एक पीआर कैम्पेन लॉन्च हुआ था जो यह दर्शाता था कि उद्धव ठाकरे कितने बेहतर तरीके से कोरोना महामारी से निपट रहे। इसके बावजूद कि महाराष्ट्र कोरोना महामारी से देश में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है, क्योंकि उसने इस महामारी से निपटने के दौरान कई गलत कदम उठाए हैं।

ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी दम घुटने के कारण तड़पते हुए गिर पड़े, देखें मॉक ड्रिल का Video

Note: कल चली खबर के उलट ताजा जानकारी के अनुसार यह वीडियो सच्ची घटना से संबंधित न होकर एक मॉक ड्रिल का है।

देशभर में बढ़ते कोरोना संक्रमण मामलों के बीच कुछ ऐसे भी केस सामने आए हैं, जिनमें अस्पताल में संक्रमितों की सेवा में तैनात डॉक्टर्स से लेकर कुछ पुलिसकर्मी भी इसके चपेट में पाए गए हैं। ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इसमें एक पुलिसकर्मी को अचानक ही साँस लेने में तकलीफ हुई और वो देखते ही देखते जमीन पर गिर गए।

यह वीडियो बिहार के बेतिया मंडल कारा का है, जहाँ ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी को साँस लेने में समस्या हुई। जब उनका दम घुटने लगा तो वहाँ अफरा-तफरी मच गई। पुलिसकर्मी तड़पते हुए जमीन पर गिर पड़े और उन्होंने कोरोना संक्रमण से सुरक्षा के लिए पहना हुआ मास्क भी हटा दिया।

मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने फ़ौरन एम्बुलेंस बुलाया और उन्हें अस्पताल ले गए। उल्लेखनीय है कि इक्कीस दिनों के लॉकडाउन के कारण पुलिस निरंतर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और आम लोगों को किसी भी तरह की परेशानी से मुक्त रखने के लिए ड्यूटी पर तैनात हैं। संक्रमण से लड़ाई में पहली पंक्ति के ये योद्धा खुद के आपातस्थिति में कैसे निपटें, इसके लिए प्रशासन की ओर से यह मॉक ड्रिल किया गया।

साँस लेने में तकलीफ होना कोरोना पीड़ितों का प्रमुख लक्षण है। इसी कारण यह वीडियो लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

आज ही एक अन्य घटना में राजस्थान में एक पुलिसकर्मी कोरोना की चपेट में आने की खबर सामने आई है। यह पुलिसकर्मी जयपुर के कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित रामगंज क्षेत्र में डयूटी पर तैनात थे और घर-घर जा कर स्क्रीनिंग करने वाली टीम में शामिल थे। संक्रमित पाए गए पुलिसकर्मी को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है।

मध्य प्रदेश: 2 दिन के भीतर कोरोना पीड़ित दूसरे डॉक्टर ने इंदौर में तोड़ा दम

देश में लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या के बीच मध्य प्रदेश के हालात ने पूरे सरकारी तंत्र को चिंता में डाल दिया है। मध्य प्रदेश के इंदौर में शुक्रवार को कोरोना संक्रमित एक डॉक्टर ने दम तोड़ दिया। इसके साथ देश में कोरोना संक्रमण से दम तोड़ने वाले डॉक्टरों की संख्या दो हो गई। गौर करने वाली बात यह कि दोनों डॉक्टरों की मौत दो दिन के भीतर और इंदौर में ही हुई है।

जानकारी के मुताबिक इंदौर शहर में क्लीनिक चलाने वाले कोरोना संक्रमित डॉक्टर ओमप्रकाश चौहान ने शुक्रवार सुबह दम तोड़ दिया। इसकी जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। डॉक्टर चौहान की 3 दिन पहले ही हुई जाँच के बाद उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। बताया यह भी जा रहा है कि डॉक्टर पहले से ही शुगर और बीपी के मरीज थे।

डॉक्टर चौहान इंदौर शहर के मरीमाता इलाके में क्लीनिक चलाते थे। लॉकडाउन के दौरान भी क्लीनिक पर मरीजों को देख रहे थे। पिछले दिनों अचानक जब उनकी तबीयत खराब हुई तो उन्हें तत्काल शहर के सुयश अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उन्हें अरबिंदो में भर्ती कराया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ।

इतना ही नहीं इंदौर में एक ही दिन (शुक्रवार) में एक साथ चार लोगों की मौत की खबर है। चश्मदीदों के मुताबिक इंदौर के कब्रिस्तान में लगातार शवों के जाने का सिलसिला जारी है। दूसरी ओर ग्वालियर में गजरा राजा मेडिकल कॉलेज के 50 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स ने इस्तीफा दे दिया है। करीब हफ्तेभर पहले ही जीआरएमसी में 92 रेजिडेंट जूनियर डॉक्टर ने जॉइन किया था, एक हफ्ते के अंदर इनमें से 50 डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है।

आपको बता दें कि इससे पहले गुरुवार को इंदाैर में रूपराम नगर निवासी 62 वर्षीय डाॅ. शत्रुघ्न पंजवानी ने कोरोना के चलते दम तोड़ दिया था। वे जनरल फिजिशियन थे और प्राइवेट प्रैक्टिस भी करते थे। यह देश में पहले कोरोना पीड़ित डाक्टर की मौत थी, लेकिन इसके अगले ही दिन इंदौर में ही दूसरे डॉक्टर की मौत ने हर किसी को परेशानी में डाल दिया है।

गौरतलब है कि देश के अन्य हिस्सों की तुलना में इंदौर में कोरोना की महामारी तेजी से फैल रही है। वहीं पहले डॉक्टर की मौत के बाद इंदौर शहर को सरकार ने पूरी तरह से सील करने के आदेश दे दिए थे। इसके बाद से ही शहर की सभी गलियों को सैनेटाइज किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 16, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 259 हो गई है।