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भूखी महिला से खुली केजरीवाल की पोल: मंत्री से राशन माँगने पहुँची तो थमा दिया ‘सेवा भारती’ का नंबर

देश में जारी लॉकडाउन के बीच दिल्ली में चार लाख लोगों को हर रोज भोजन कराने का केजरीवाल सरकार का दावा खोखला साबित हो रहा है। इस बात का खुलासा तब हुआ, जब एक महिला दिल्ली सरकार के मंत्री के पास राशन की माँग को लेकर पहुँची थी। इसके बाद मंत्री ने महिला को ‘सेवा भारती’ से जुड़े एक व्यक्ति का नंबर थमा दिया।

पाञ्चजन्य की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार (8 अप्रैल 2020) को दिल्ली के बाबरपुर विधानसभा क्षेत्र से एक मजदूर महिला अपने विधायक और दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय के दफ्तर राशन की माँग को लेकर पहुँची। जहाँ महिला ने बताया कि उसके पास पिछले कई दिनों से खाने का राशन नहीं है। इस पर मंत्री गोपाल राय ने ‘सेवा भारती’ से जुड़े एक व्यक्ति का मोबाइल नंबर थमा दिया।

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गोपाल राय के दफ्तर से बैरंग लौटी महिला ने मंत्री द्वारा दिए नंबर पर फोन करके राशन की माँग की और उधर से राशन पहुँचाने की बात सुनने के बाद महिला ने अपने घर का पता दे दिया। इस दौरान उक्त व्यक्ति द्वारा महिला से पूछा गया कि आपको नंबर कहाँ से मिला है तो महिला ने तत्काल मंत्री गोपाल राय का नाम लेते हुए सारी बात बता दी। इसके कुछ देर बाद ही मजदूर महिला के घर सेवा भारती से जुड़े कुछ स्वयंसेवक पहुँच गए और महिला को राशन उपलब्ध कराया।

यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा होते ही दिल्ली से बड़ी संख्या में यूपी, बिहार सहित कई राज्यों के रहने वाले गरीब-मजदूर अपने गाँव की ओर पलायन करने के लिए यूपी बार्डर सहित आनंद बिहार बस अड्डे पर जमा हो गए थे। दिल्ली से पलायन कर लोगों के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में रहने वाले 4 लाख लोगों को हर रोज भोजन कराने की घोषणा की थी।

अरविंद केजरीवाल ने कहा था, “दिल्ली में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को परेशानी नहीं होगी। जो लोग लॉकडाउन के चलते काम नहीं कर पा रहे हैं उनको दिल्ली सरकार सुबह-शाम का भोजन उपलब्ध कराएगी।” उस दौरान मुख्यमंत्री द्वारा राजनीति से प्रेरित होकर किए दावों की पोल अब खुलती चली जा रही है, क्योंकि इससे पहले एक आजतक चैनल ने झंडेवालान मंदिर में सेवाभारती के स्वयंसेवकों द्वारा चलाई जा रही रसोई को दिखाते हुए इसे दिल्ली सरकार की रसोई बता दिया था।

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गौरतलब कि ‘सेवा भारती’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संग की प्रेरणा से देशभर में सेवा के कार्य करता है। देश में लागू लॉकडाउन के बीच पिछले दिनों में कई स्थानों से संघ स्वयंसेवकों द्वारा लोगों को भोजन वितरण और कोरोना से बचाव सामग्री वितरित करने की खबरें आई हैं। इतना ही नहीं संघ के स्वयंसेवकों ने दिल्ली के रेडलाइट एरिया में रहने वाले परिवारों को भी खाद्य सामग्री वितरित की थी।

सिखों ने मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल सरकार सौंपने की पेशकश की, कहा- यहाँ करिए कोरोना संक्रमितों का उपचार

कोरोना वायरस से जारी जंग के बीच दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने एक महत्वपूर्ण फैसला किया। उसने सरकार को गुरु हरिकिशन सुपर स्पेशलिटी अस्पताल सौंपने की पेशकश की है। सरकार से कहा है कि उसकी छह मंजिला अस्पताल की इमारत का सरकार जब तक चाहे कोविड-19 पीड़ितों और संदिग्धों के इलाज के इस्तेमाल कर सकती है।

यह अस्पताल गुरुद्वारा बाला साहिब में है। डीएसजीएमसी के प्रमुख मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक ​वीडियो ट्वीट कर कहा है कि कोरोना से निपटने के लिए दिल्ली सरकार को गुरु हरकिशन हॉस्पिटल का इस्तेमाल कर सकती है। इस अस्पताल में 50 बेड हैं। हॉस्पिटल की पूरी इमारत में 500 बेड की व्यवस्था है।

सिरसा ने कहा है, “महामारी के मद्देनजर दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी लोगों की मदद करने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है। चाहे लोगों को खाना पहुँचाना हो या डॉक्टरी मदद। हम उन्हें हर तरह की सुविधा पहुँचाते रहे हैं। हमने गुरु हरकिशन अस्पताल सरकार को देने की पेशकश की है। दिल्ली सरकार कोरोना के उपचार के लिए बैंक्वेट हॉल और होटल का इस्तेमाल करना चाहती है। इसके लिए वहॉं जो संसाधन लगाए जाएँगे उनका बाद में कोई इस्तेमाल नहीं रहेगा। लेकिन यही संसाधन अस्पताल में लगाए गए तो उनका स्थायी इस्तेमाल हो सकता है। सरकार को सोच कर संसाधन लगाने चाहिए ताकि बाद में दिल्ली में इलाज के लिए एक बड़ा अस्पताल तैयार हो सके। गुरु हरिकिशन अस्पताल का सरकार जब तक चाहे इस्तेमाल कर सकती है।”

गौरतलब है कि गुरु हरकिशन अस्पताल का संचालन गुरुद्वारा बाला साहिब द्वारा किया जाता है। 500 बेड वाली जो इमारत देने की पेशकश DSGMC ने की है वह 11 एकड़ में फैला है। इसके फर्निंशिंग का कुछ काम अभी बाकी है।

सिरसा की ओर से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लिखे पत्र में कहा गया है कि अगर सरकार चाहे, तो वह उस जगह पर जाए और उसके इस्तेमाल की संभावना को देखे। होटल और बैंक्वेट हॉल में पैसा खर्च कर संसाधन जुटाने की बजाए इसका सही जगह उपयोग होना चाहिए। इससे संसाधन और उसमें किया गया निवेश बर्बाद नहीं होगा और बाद में भी दिल्ली के लोगों के काम आएगा। दिल्ली सरकार को लिखे गए पत्र में कमेटी ने इस महामारी के समय को मानवता के लिए मुश्किल समय बताया है।

एक प्रोफेसर ऐसा भी: विदेश गए, जमात के आयोजन में शरीक हुए, सच्चाई छिपा छात्रों का जीवन खतरे में डाला

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पॉलिटिकल साइंस विभाग के प्रोफेसर शाहिद अंसारी ने अपनी करतूत से करीब 144 छात्र-छात्राओं और सहकर्मियों के लिए भी कोरोना संक्रमण का खतरा पैदा कर दिया है। दरअसल कुछ महीने पहले विदेश से लौटे इस प्रोफेसर ने तबलीगी जमात के आयोजन में शरीक होने की बात छिपा रखी थी। यह आयोजन निजामुद्दीन के उसी मरकज में हुआ था जो इस वक्त देश में कोरोना संक्रमण का केंद्र बनकर उभरा है।

देश भर में यहॉं से लोगों की तलाश की जा रही है। सरकार ने यहॉं आए लोगों से खुद आगे आकर जॉंच करवाने की अपील भी कर रखी है। लेकिन, इलाहाबाद विवि के प्रोफेसर शाहिद अंसारी पर इसका कोई असर नहीं हुआ। अब मामला सामने आने के बाद प्रोफेसर साहब पूरे परिवार के साथ क्वारंटाइन हो गए हैं। सच्चाई छिपाने को लेकर उन पर मुकदमा भी दर्ज किया गया है।

प्रोफेसर शाहिद अंसारी के जमात के आयोजन में शामिल होने का खुलासा बुधवार की रात हुआ। इंटेलीजेंस की सूचना पर गोविंदपुर मेहदौरी कॉलोनी स्थित उनके घर पुलिस पहुॅंची। स्वास्थ्य विभाग की टीम की सहायता से प्रोफेसर, उनकी पत्नी और गोद लिए हुए एक बच्चे को करेली के महबूबा गेस्ट हाउस में क्वारंटाइन कराया गया। एसपी सिटी ने बताया कि तथ्य छिपाने के आरोप में प्रोफेसर पर महामारी अधिनियम के तहत शिवकुटी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

दैनिक हिंदुस्तान में प्रकाशित संबंधित खबर

इसकी जानकारी मिलते ही आस-पड़ोस में रहने वाले लोगों के साथ ही विश्वविद्यालय में पढ़ने वालों छात्र-छात्राओं के बीच हड़कंप मच गया है। इसके पीछे की वजह ये कि जमात के आयोजन में हिस्सा लेने के बाद प्रोफेसर ने विश्वविद्यालय के करीब 150 छात्र-छात्राओं को पढ़ाया था। विश्वविद्यालय में चल रही परीक्षाओं में उनकी कक्ष नियंत्रण के तौर पर तैनाती थी। विश्वविद्यालय के अन्य प्रोफेसरों सहित शहर के कई प्रमुख लोगों से मुलाकात भी की। अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम इन लोगों की तलाश में जुट गई है।

प्रोफेसर शाहिद अंसारी इसी साल इथोपिया गए थे। वहाँ से मार्च में लौटने के बाद दिल्ली में जमात के आयोजन में हिस्सा लिया। इसके बाद 10 मार्च को वह गरीब रथ से प्रयागराज वापस आ गए। चौंकाने वाली बात यह कि इससे पहले पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में प्रोफेसर ने जमात के किसी भी कार्यक्रम में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था।

नर्सों के फोटो लेना, वीडियो बना वायरल करने की धमकी देना: जमातियों ने सहरसा में पार कर दी सारी हदें

तबलीगी जमातियों की नर्सों के साथ बद्तमीजी और अभद्र व्यवहार का ताजा मामला बिहार के सहरसा से आया है। मिली जानकारी के अनुसार सहरसा के सदर अस्पताल में तबलीगी जमात के तीन लोगों को कोरोना वायरस से संक्रमित होने के संदेह में आइसोलेशन सेंटर में रखा गया था। आरोपों के मुताबिक आइसोलेशन सेंटर में भर्ती इन जमातियों ने नर्स के साथ बदतमीजी की, उसकी फोटो खींच वायरल करने की धमकी दी।

जानकारी के अनुसार नर्सों ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि जब भी वे आइसोलेशन केंद्र में काम करने जातीं हैं तो उनका वीडियो बनाया जाता है। इसके साथ-साथ अस्पताल प्रशासन ने तबलीगी जमात के इन जमातियों पर गंदगी फैलाने का आरोप भी लगाया है। पीड़ित नर्स ने अपनी शिकायत में कहा है कि ड्यूटी के दौरान ये संदिग्ध मरीज उन पर अश्लील फब्तियाँ भी कसते हैं। इसके अलावे खाने में मनपसंद भोजन की डिमांड करते हैं। जब ये लोग नर्सों का वीडियो बनाने लगे तो वो सभी केंद्र से बाहर निकल गए।

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जमातियों का ये खेल लगभग एक घंटे तक चलता रहा। जिसके बाद नर्सों की शिकायत पर एक्शन लेते हुए अस्पताल प्रबंधन ने इस वाकये की जानकारी जिला प्रशासन व पुलिस को दी। जिस पर तुरंत कार्यवाही करते हुए जिला एसपी ने एसडीओ के साथ एक पुलिस टीम आइसोलेशन केंद्र भेजी, जहाँ पुलिस को देखते ही जमातियों ने नमाज पढ़ने का नाटक शुरू कर दिया।

मामले की जाँच करने के बाद पुलिस ने आइसोलेशन वार्ड में भर्ती तबलीगी जमात के आरोपितों के मोबाइल जब्त कर लिए तथा दोबारा ऐसा करने पर घर न भेज जेल में डालने की धमकी दी। अस्पताल प्रबंधक अमित कुमार चंचल ने बताया कि आरोपितों की कोरोना संक्रमण की जाँच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद बुधवार को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

याद रहे कि जमातियों के उत्पात और मेडिकल स्टाफ खासकर नर्सों के साथ अश्लील हरकतें करने की ये खबरें केवल बिहार के सहरसा से ही नहीं आ रहीं हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसके पहले गाजियाबाद में भी नर्सों ने आरोप लगाया था कि जमाती उनके सामने कपड़े उतार कर घूमते हैं। वहीं इन पर असभ्य जाहिल और वहशी होने का आरोप कानपुर मेडिकल कॉलेज ने भी लगाया था, जहाँ भर्ती जमातियों पर आरोप था कि वे हाथों में थूक लेकर आइसोलेशन केंद्र की दीवारों, रेलिंग आदि पर चिपका रहे हैं। अभी हाल में ही दिल्ली के आइसोलेशन केंद्र में भर्ती इन जमातियों पर जहालत के आरोप लगे हैं, जिनके अनुसार वो बोतल में पेशाब भरकर उसे बाहर फेंक रहे हैं।

एक तरफ देश कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है, दूसरी तरफ हमारे मेडिकल स्टाफ और पुलिस को इन उत्पाती तबलीगी जमातियों से भी निपटना पड़ रहा है। पहले तो पुलिस को इनका पता लगाने में, समाज के लिए दुश्मन बन गए इन लोगों को खोज-खोज जाँच करवाने और क्वारंटीन करने में मशक्क्त करनी पड़ी, अब अस्पतालों और क्वारंटीन सेंटर्स पर जारी इनके उपद्रव और बदसलूकी को भी नियंत्रित करने में पसीना बहाना पड़ रहा है।

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कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच समुदाय विशेष की बदसलूकियॉं भी बढ़ती जा रही है पुलिसकर्मियों पर थूकना, पत्थरबाजी और हमले आम हो गए हैं। ताजा घटना राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले की है। यहॉं के शिवाड़ कस्बे के पास कँवरपुरा चेकपोस्ट पर 2 युवकों को लॉकडाउन उल्लंघन करते देख पुलिस ने रोका। दोनों युवक पुलिसकर्मियों पर थूककर और धमकी देकर भाग गए। इससे पहले की पुलिस एक्शन लेती मौके पर 30 से 40 लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई और पत्थर बरसाने लगे।

यह सब कुछ ऐसे वक्त में हो रहा जब राजस्थान में आज (गुरुवार, 9 अप्रैल 2020) को दोपहर 2 बजे तक कोरोना संक्रमण के 43 नए मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि इसके साथ ही राज्य में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 430 हो गई है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पत्थरबाजी की सूचना मिलने पर शिवाड़, बरवाड़ी, सवाई माधोपुर सहित कई इलाकों से जवान और प्रशासनिक अधिकारी मौक़े पर पहुँचे। इलाके में तलाशी अभियान चलाया गया। 3 लोगों को गिरफ्तार किया। बाकी बस्ती खाली हो गई थी। हालात देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया है।

सवाई माधोपुर के जिला पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, कँवरपुरा रेलवे फाटक के पास चेक पोस्ट पर पुलिसकर्मियों पर पथराव की घटना के बाद 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन पर एफआईआर दर्ज की गई है। शेष आरोपितों की तलाश की जा रही है।

मीडिया खबर के अनुसार, पुलिस प्रशासन तथा मौके पर मौजूद ग्रामीणों के अनुसार बुधवार सुबह 9 बजे दो युवक मोटरसाइकिल से कँवरपुरा स्थित चेकपोस्ट से गुजरने लगे। वहाँ मौजूद पुलिस तथा होमगार्ड के जवानों ने उन्हें रोका। लेकिन वे विवाद करने लगे। बात बढ़ने पर युवकों ने पुलिस से बदतमीजी की, उन पर थूका और उन्हें धमकाया। बाद में मौका देखकर मोटरसाइकिल छोड़कर वहाँ से फरार हो गए और पास स्थित हसनपुरा ढाणी में पहुँच गए।

इसके बाद, करीब 15 मिनट में 30-40 लोग वहाँ पहुँचे और पथराव शुरू कर दिया। अचानक हुए पथराव से बचने के लिए पुलिसकर्मियों ने मौके पर लोहे के बैरियर की आड़ में छिपकर बचाव किया। फिर पुलिस के जवानों ने कंट्रोल रूम को सूचना दी। शिवाड़, ईसरदा, बरवाड़ा तथा कोबरा की टीम मौके पर पहुँची, लेकिन तब तक बस्ती से लोग भाग गए। बाद में तीन लोगों काे गिरफ्तार किया गया।

जानकारी के मुताबिक, भीड़ ने पथराव के लिए पास ही स्थित रेलवे ट्रैक से पत्थर उठाए। पथराव के दाैराेन मौके पर तैनात 2 कर्मचारियों को चोट लगी है। घटना का वीडियो भी सामने आया है। इसमें लाेग रेलवे ट्रैक से गिट्टियाँ उठाते हुए दिख रहे हैं। पुलिसकर्मी पथराव से बचने के लिए बेरिकेड्स के पीछे छिपते दिख रहे हैं।

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बता दें, घटना के बाद कलेक्टर नन्नूमल पहाड़िया तथा एसपी सुधीर कुमार ने घटनास्थल का जायजा लिया। कलेक्टर-एसपी ने पुलिस अधिकारियों से आपसी सांमजस्य के साथ कार्य करने तथा दोषियों की पहचान कर उन पर कार्रवाई के आदेश दिए। उन्होंने टोंक-सवाई माधोपुर सीमा का जायजा भी लिया।

बरवाड़ी थाना पुलिस के मुताबिक कि पथराव मामले में आरोपित हमीद राजूद्दीन व कालू को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने तीनों आरोपितों को राजकार्य में बाधा व लॉकडाउन की पालना नहीं करने पर धारा 332, 353, 188 राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की धारा 51 के तहत गिरफ्तार किया है। मामले में अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

हस्तमैथुन, समलैंगिकता, सबके सामने शौच-पेशाब: ‘इस्लाम ऑन द मूव’ किताब में तबलीगियों की पूरी ट्रेनिंग की कहानी

तबलीगी जमात के चर्चा में आने के बाद उनसे संबंधित नई-नई बातों का खुलासा हो रहा है। मलेशिया के लेखक फारिश अ नूर ने अपनी किताब, ‘इस्लाम ऑन द मूव’ में इसी से संबधित चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने अपनी किताब में बताया है कि जो जमाती मरकज़ में रहते हैं, वे एक-दूसरे के सामने खुलेआम शौच करने व पेशाब करने में शर्म नहीं करते। क्योंकि उनके भीतर अपने शरीर को लेकर शर्म खत्म हो चुकी होती है। 

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एकत्रित जमाती

इतना ही नहीं, वहाँ टॉयलेट का डिजाइन इस तरह से बनाया जाता है कि तबलगियों को शौच करते हुए सब देख सकें। ताकि अन्य तबलीगी अपने भाइयों को आँकें और उनके पेशाब करने की मुद्रा को सुन्नत के अनुरूप सुधार सकें। किताब में इस बात का उल्लेख है कि मुस्लिमों को बैठकर पेशाब करना चाहिए, खड़े होकर नहीं।

मलेशिया लेखक की किताब का अंश

इसके अलावा इन खुले शौचालयों का एक उद्देश्य ये भी होता है कि इस बात को सुनिश्चित किया जा सके कि तबलीगी जमात का कोई भी जमाती मरकज़ के भीतर समलैंगिक संबंध और हस्तमैथुन जैसी क्रियाएँ न करें। क्योंकि ये दोनों चीजें इस्लाम में हराम है। 

एक ही थाली में 6-7 लोग खाते थे, सेक्स करना भी सिखाते थे: मरकज में 21 दिन रहे शख्स का खुलासा

तबलीगी जमात के ख़िलाफ़ मत बोलो, टीवी पर आ रही सब न्यूज फेक है: रेडियो मिर्ची RJ सायमा ने किया मरकज के ‘मानव बम’…

अब अगर, मलेशिया के लेखक का अवलोकन उचित है और ये सारी बातें सच हैं तो हमें इस समय जमातियों से संबंधित खबरों पर हैरान नहीं होना चाहिए। क्योंकि इनकी शर्म तो उस मरकज़ में ही खत्म कर दी जाती है, जहाँ दीन की बातें सिखाने का दावा होता है। लेकिन उसके बदले मजहब का हवाला देकर ये सब सिखाया जाता है।

स्तंभकार और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विश्लेषक दिव्या कुमार सोती ने भी इस जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा किया है। उन्होंने अपने ट्विटर पर इसके संबंध में लिखा, “आज हर कोई आइसोलेशन में रखे गए तबलीगियों को देखकर हैरान है कि वे इतना क्यों थूक रहे हैं। तो बता दें कि उनका धर्मशास्त्र उन्हें ऐसा करने की शिक्षा देता है कि नमाज पढ़ते समय या मजहबी कार्य करते समय शैतान की दखलअंदाजी खत्म करने के लिए वो ये करें।”

तबलीग़ी जमात की ग़लती के लिए सारे ...
फोटो: PTI

गौरतलब है कि इन सभी बातों के अलावा हमें मरकज़ के मुखिया मौलाना साद की वो वायरल ऑडियो भी ध्यान में रखने की आवश्यकता है, जिसमें वह सभी जमातियों को यह शिक्षा देने की कोशिश कर रहा था कि कोरोना वायरस एक साजिश है, जिसे मुस्लिमों को मारने के लिए रचा जा रहा है। साथ ही सरकार को एक शैतान के रूप में प्रदर्शित किया था क्योंकि उन्होंने कोरोना वायरस के मद्देनजर किसी भी धार्मिक स्थल पर भीड़ इकट्ठा करने को मना किया था।

इसी शिक्षा का असर है कि अब स्वास्थ्यकर्मियों को जमातियों के बेहूदे रवैये का सामना करना पड़ा रहा है। और खबरें आ रही हैं कि वे सरकार व प्रशासन की बात नहीं मान रहे हैं, वॉर्डों में थूक रहे हैं, नर्सों से बदतमीजी कर रहे हैं, फब्तियाँ कस रहे हैं। आस-पास गंदगी मचा रहे हैं और खुलेआम कॉरिडोर में शौच कर रहे हैं।

देश में पहले कोरोना पॉजिटिव डॉक्टर की मौत: इंदौर की सभी सीमाओं को किया गया सील, बढ़ाई गई मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा

देश में लगातार बढ़ते कोरोना के मरीजों की संख्या के बीच इंदौर के कोरोना पीड़ित एक डॉक्टर ने दम तोड़ दिया। यह देश में कोरोना से पीड़ित पहले डॉक्टर की मौत है। इसके बाद पूरे मध्य प्रदेश के साथ देश के डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सरकार तरह-तरह के इंतजाम कर रही है। वहीं इंदौर में बिगड़ते हालातों को देखते हुए शहर को पूरी तरह से सील कर दिया है।

एनबीटी की खबर के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ डॉक्टर प्रवीण जड़िया ने बताया कि डॉ शत्रुधन पंजवानी पिछले दिनों कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे और उनका उपचार पहले गोकुलदास में चल रहा था। इसके बाद सीएचएल और फिर उन्हें अरविंदों अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। इसके बाद भी उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था और स्थिति गंभीर बनी हुई थी। इसी बीच आज (गुरुवार 9 अप्रैल) सुबह को उनकी मौत हो गई।

जानकारी के मुताबिक इंदौर के रुपराम नगर में रहने वाले डॉक्टर पंचवानी प्राइवेट प्रैक्टिस करते थे। जो कि शहर के विनय नगर और दूसरा त्रिवेणी कॉलोनी में अपना क्लीनिक संचालित करते थे। आशंका जताई जा रही है कि इस दौरान हो सकता है कि किसी कोरोना पॉजीटिव के संपर्क में आए हों, हालाँकि, वह कोरोना से संक्रमिल लोगों का इलाज नहीं कर रहे थे। लेकिन इन दिनों इंदौर में कोरोना संक्रमण तेजी से फैलता ही जा रहा है।

अब सरकार के लिए यह एक चिंता का विषय हो गया है, क्योंकि देश में पहले कोरोना पीड़ित डाक्टर ने दम तोड़ा है। लिहाजा प्रदेश सरकार ने इंदौर शहर को पूरी तरह से सील कर दिया है। इतना ही नहीं प्रदेश सरकार ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण से जूझ रहे 14 जिलों में सख्ती से लॉकडाउन का पालन कराने के आदेश दिए हैं। वहीं डॉक्टर की मौत के बाद इंदौर में कोरोना पीड़ितों के इलाज में लगे डॉक्टर और नर्सिंग स्टॉफों का प्रशासन विशेष ध्यान रख रहा है।

वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि यदि कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमण को छुपाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले शिवराज सिंह ने तबलीगी जमात से जुड़े लोगों को चेतावनी देते हुए कहा था कि निजामुद्दीन के मरकज में शामिल होकर सूबे में जो लोग पहुँचे हैं वे 24 घंटे के अंदर स्टेट अथॉरिटी के समक्ष रिपोर्ट करें नहीं तो ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आपको बता दें कि अब तक मध्य प्रदेश में 404 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए है, जबकि प्रदेश में 30 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं अगर बात करें इंदौर की तो यहाँ अकेले इंदौर शहर में 213 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं, जिनमें से 21 लोगों की मौत हो चुकी है।

निज़ामुद्दीन मरकज में हर रोज देश-विदेश से जुटते थे 5000 जमाती: दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की पूछताछ में कई नए खुलासे

दिल्ली निजामुद्दीन से निकले तबलीगी जमातियों के बाद से देश में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती चली जा रही है। वहीं मरकज मामले में जैसे-जैसे दिल्ली पुलिस की जाँच आगे बढ़ती चली जा रही है ऐसे ही मरकज से जुड़े एक के बाद एक नए खुलासे हो रहे हैं। दिल्ली पुलिस को मरकज से जुड़े लोगों से पूछताछ में जानकारी मिली है कि दिल्ली मरकज में हर रोज देश-विदेश से करीब पाँच हजार लोग आते थे। फिलहाल दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा द्वारा जमातियों से पूछताछ जारी है।

मामले की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को मरकज से जुड़े लोगों से पूछताछ में पता लगा है कि निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज में हर रोज देश और विदेश से 4 से 5 हजार लोग इकट्ठा होते थे। यहाँ आने वाले लोगों से उनके देश और उनके उद्देश्य के बारे में पूछा जाता था। इसके बाद जो लोग जमात के लिए आते थे उन लोगों को मरकज में रोका जाता था और जो लोग किसी दूसरे मकसद से मरकज में आते थे उन लोगों को यहाँ से वापस कर दिया जाता था।

इसलिए दिल्ली स्थित मरकज में हर दिन जमातियों के आने-जाने का सिलसिला लगा रहता था। लगातार एक के बाद एक मिल रही नई जानकारियों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा द्वारा यह पूछताछ जारी है। हालाँकि, कोरोना संक्रमण के खतरे से बचने के लिए अधिकारियों द्वारा यह पूछताछ अभी मोबाइल फोन पर ही चल रही है। इतना ही नहीं खुद दिल्ली पुलिस के अधिकारी मरकज से जुड़े लोगों को सामने बैठाकर पूछताछ करने से बच रही है।

वहीं दिल्ली पुलिस द्वारा मरकज के मौलाना साद, मोहम्मद अशरफ, मुफ्ती शहजाद, डॉ. जीशान, मुरसालीन सैफी, मो. सलमान और यूनुफ को दूसरा नोटिस जारी कर फिर से कुछ सवालों के जवाब माँगे हैं। साथ ही पुलिस ने दूसरे नोटिस का जल्द ही जवाब देने की बात कही है। इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा तबलीगी मरकज की जाँच रिपोर्ट हर रोज गृह मंत्रालय को भेज रही है। जानकारी के मुताबिक गृह मंत्रालय इस रिपोर्ट को सभी राज्यों से साझा करता है।

गौरतरलब है कि दिल्ली पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा खाली कराए गए दिल्ली स्थित मरकज के बाद से मरकज का मौलाना साद फरार है। पुलिस उसकी तलाश में दिल्ली सहित कई राज्यों में लगातार छापेमारी कर रही है।

क्या है हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) का मामला: दो देशों के बीच खींचातानी और भारतीय दवाई उद्योग

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन पर बयानबाजी के बाद इंडियन फार्मा इंडस्ट्री ‘हॉट टॉपिक’ बन चुकी है। लोग अपने-अपने हिसाब से अंदाजा लगा रहे हैं कि भारत ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए या फिर भारत दवाइयों का शहंशाह है और पहले अपनी माँग और आपूर्ति का ध्यान रखेगा और उसके बाद ही किसी अन्य देश को सप्लाई करेगा। इस चर्चा ने एक मौका दिया है कि फार्मा इंडस्ट्री की वस्तुस्तिथि और अन्य संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जा सके।

चूँकि यह अभी चर्चा का विषय बन चुका है, तो हमने अधिक जानकारी के लिए फार्मा (दवाई) उद्योग से जुड़े एक व्यक्ति से बात करने की कोशिश की। निजी कारणों से उन्होंने अपनी पहचान जाहिर करने से मना किया है। उनकी बातों से हमें इस उद्योग के कुछ ऐसे पहलुओं पर चर्चा करने का मौका मिला जो आम लोगों के लिए अज्ञात है।

उम्मीद के मुताबिक़ ही अधिकतर आम जन किसी भी देश में फार्मा कंपनियों की मौजूदगी, उनके द्वारा बनाई जाने वाली दवाईयों और मार्केटिंग के आधार पर पर विभिन्न देशों के बीच शक्तियों की तुलना कर रहे हैं। हालाँकि, इसमें कई पहलू हैं जिसमें हेल्थ एजेंसियों के बीच खींचतान, जेनेरिक बनाम इनोवेटर दवाइयाँ, एक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट (API), कंपनियों की रिसर्च एंड डेवलपमेंट यूनिट, प्रोडक्शन यूनिट और कॉर्पोरेट ऑफिस कुछ महत्वपूर्ण फैक्टर हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि विश्व में अनेकों देशों की अपनी स्वास्थ्य संस्थाएँ हैं जो दवाइयों के निर्माण, वितरण, संबंधित बीमारियों में प्रयोग और अन्य उपयोगों से संबंधित निर्देश जारी करती हैं। इनमें अमेरिकी संस्था फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (US FDA) और यूरोप की यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी (EMA) अग्रणी हैं। फार्मा कंपनियों में इन दोनों ही एजेंसियों का प्रभुत्व कायम है और दवाइयों, वैक्सीन अथवा मेडिकल डिवाइसेज के लिए इनके द्वारा दिए गए निर्देशों को मानना और उनकी शंकाओं का निवारण करने के लिए सभी कम्पनियाँ, जो कि इनके देशों में दवाइयाँ बेचती हैं, बाध्य होती हैं।

विशेष रूप से FDA अपने बनाए नियमों को लेकर अत्यधिक सख्त है और ‘अपने लोगों’ के स्वास्थ्य को लेकर दवाइयों में किसी भी तरह की खामियों को स्वीकार नहीं करती है। भारत में दवाइयों पर नियंत्रण रखने का काम CDSCO (Central Drugs Standard Control Organization) और DCGI (Drugs Controller General of India) मिलकर करते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विभागों के प्रभुत्व और खींचतान को समझने के लिए हमें कुछ वर्ष पीछे जाना पड़ेगा।

2005 तक भारत ने दवाईयों के आपूर्तिकर्ता के रूप में तेजी से उभरना शुरू किया और कई भारतीय कंपनियों ने देश-विदेश में अपनी सफलता के झंडे गाड़ने शुरू किए। यदि आप इंटरनेट पर थोड़ी सी खोज करेंगे तो पाएँगे कि 2008 से 2012-13 तक FDA ने कई भारतीय कंपनियों द्वारा एक्सपोर्ट की जाने वाली दवाइयों पर ‘सब-स्टैण्डर्ड क्वालिटी प्रोडक्ट’ अथवा ‘प्रोडक्शन में हुई खामियाँ’ कहकर बैन लगाया और इनकी कमियों को लेकर लाखों डॉलर्स में फाइन लगाया।

हालाँकि, इन कंपनियों ने इस बात को चुनौती भी दी। अपने तर्क में इन कंपनियों का कहना था कि FDA ने सिर्फ जेनेरिक दवाओं (जिनका एक्टिव इनग्रेडिएन्ट पेटेंट से बाहर हो चुका हो और कई कंपनियों द्वारा इसकी दवा के निर्माण की अनुमति हो) पर प्रतिबन्ध लगाया लेकिन उन ब्रांडेड दवाओं पर नहीं जो विशेष रूप से कैंसर, ह्रदय रोग, मल्टीपल स्क्लेरोसिस अथवा रेट्रोवायरल जैसी बीमारियों में लड़ने के लिए अति-आवश्यक थीं और विभिन्न कारणों से जिनका सीमित प्रोडक्शन ही किया जा सकता था।

हालाँकि, FDA द्वारा उठाई गई कमियों को नजरअंदाज करना भी गलत होगा। FDA के दबाव का ही नतीजा है कि कई कम्पनियाँ अमेरिका में भेजी जाने वाली दवाइयों का निर्माण अपनी देख-रेख में, अपने प्लांट में करती हैं लेकिन अन्य देशों को जाने वाली सप्लाई का ऑर्डर कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाली छोटी इकाईयों को देती हैं। इसे इस तरह समझिए कि एक हलवाई मिनिस्टर या VIP के लिए सावधानी से, खुद मिठाई बनाकर खिला रहा हो और आम-लोगों के लिए किसी को भी मिठाई बनाकर बाँट देने को कहे।

अगर हलवाई को मिठाई की क्वालिटी पर भरोसा हो तो वो सभी को एक ही जगह से बनी मिठाई को खिलाने में किसी भी तरह का संकोच नहीं करेगा। मार्केटिंग में सेल को प्रमोट करने के लिए सेल्स-रिप्रेज़ेंटेटिव द्वारा डाक्टरों को लालच देना और दवा लिखने के बदले डॉक्टरों की फॉरन ट्रिप, फिल्म टिकट या कॉन्फरेंस के लिए पैसों की माँग के किस्से मीडिया में आते ही रहते हैं। हालाँकि, सभी ऐसा नहीं करते, ये उल्लेखित करना भी यहाँ अत्यंत जरूरी है।

अब बात हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन विवाद की। इसमें कोई दोराय नहीं कि इतने वर्षों में भारतीय फार्मा कंपनियों ने अपनी गुणवत्ता में सुधार करके विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई है और जेनेरिक दवाइयों का सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है। लेकिन यह ध्यान रखने योग्य बात है कि आज भी चीन APIs का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है और यही दवाइयों के निर्माण और सप्लाई (फ़ाइनल फॉर्मुलेशन) का आधार है। सिर्फ ट्रम्प ने एक दवा का नाम लिया इसलिए अचानक से वह महत्वपूर्ण नहीं हो जाती।

अमेरिकी न्यूज़ गलियारों में ट्रम्प और एक फार्मा कम्पनी से उनके कनेक्शन पर भी शायद आम जनता निगाह डालना चाहेगी। दूसरी ध्यान देने योग्य बात कि COVID-19 के इलाज के लिए ही एनाल्जेसिक/एन्टिपाइरेटिक कैटेगरी की एक अन्य दवाई के निर्यात पर भारत ने पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया हुआ है। इसलिए भ्रान्ति फैलाने वाले मीडिया और आरोप-प्रत्यारोप करने वाले अज्ञानियों से दूर रहने में ही आम-जनमानस की भलाई है।

फार्मा सेक्टर दवाइयों और वैक्सीन से दुनिया की सेवा कर रहा है लेकिन यह भी उतना ही बड़ा सच है कि कॉर्पोरेट सिर्फ और सिर्फ पैसा देखता है। COVID-19 दुनिया के समक्ष आज सबसे बड़ी चुनौती है लेकिन यही चुनौती फार्मा जगत के लिए सबसे बड़ा मौका भी है। कोरोना वायरस के सामने आते ही फार्मा कम्पनियाँ पहले से ही मौजूद दवाइयों के कोरोना वायरस के इलाज की टेस्टिंग में जुट चुकी थीं।

चूँकि जेनेरिक दवाइयों की उपलब्धता अधिक रहती है और इन पर सीमित अधिकार नहीं होते, इसलिए चर्चा में भी यही अधिक आती हैं। लेकिन फार्मा कम्पनियाँ पहले से ही मौजूद इनोवेटिव दवाइयों जिनमें इम्युनोमोड्यूलेटर, एंटीवायरल इत्यादि दवा और वैक्सीन हैं, का COVID-19 के इलाज में ट्रायल/विश्लेषण शुरू कर चुकी हैं। इसकी सफलता से मानव जीवन को तो कोरोना वायरस से छुटकारा मिलेगा ही, साथ ही दशकों तक दवाइयों की खोज में पानी की तरह पैसा बहाने वाली फार्मा कंपनियों में भी नए उत्साह का संचार होगा।

इसलिए इस विवाद में मत पड़िए कि ‘ट्रम्प ने धमकाया तो मोदी डर गया’। सोचिए कि एक कंपनी जिसका ‘रिसर्च एंड डेवलपमेंट’ यूनिट यूरोप या अमेरिका में हो, प्रोडक्शन यूनिट भारत में हो, API चीन से आता हो और सदियों तक जिसने रिसर्च और ड्रग सेफ्टी में पैसा लगाया हो, सिर्फ ट्रम्प के फैसले पर निर्भर होगी क्या? ऐसी कंपनियों के कॉर्पोरेट ‘डॉक्यूमेंट ऑफ़ म्यूचुअल एग्रीमेंट, नॉलेज शेयरिंग’ एवम आपसी तालमेल पर हस्ताक्षर करते हैं और विपदा में एक-दूसरे का साथ निभाने को बाध्य होते हैं। वजह चाहे मानवीय हो या वित्तीय। इसलिए दूसरे देशों की मदद करना भारत का कर्तव्य है और भारत की मदद करना अन्य देशों का। बस इतनी सी बात है।

हाँ! इस पर चर्चा होनी चाहिए कि भारत के लिए ये हेल्थ सेक्टर में अग्रणी बनने का अच्छा मौका है और अभी तक फार्मा इंडस्ट्री ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया भी है। भारतीय फार्मा इंडस्ट्री सरकार के सामने अपनी माँगें रख सकती है। प्रोडक्शन यूनिट से लेकर सप्लाई चेन, रॉ-मटीरियल और फिनिश्ड गुड के क्वालिटी अस्योरेंश से लेकर क्वालिटी चेक तक, पैकिंग यूनिट से लेकर मार्केटिंग, प्लांट में दी जाने वाली कम सैलरी से लेकर कॉर्पोरेट ऑफिस की चकाचौंध तक, हर खामी और जरूरत का ब्यौरा सरकार और कम्पनी के मालिकों के सामने रखा जा सकता है।

साथ ही CDSCO और DCGI के पास भी मौका है कि वे विश्लेषण करें कि EMA और FDA की तुलना में विश्व स्वास्थ्य में उनका स्थान और योगदान क्या है? सिर्फ इनका अनुसरण करने की जगह ये भारतीय संस्थाएँ अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार स्टाफ की भर्ती करें, भारत भर में अपने नए ऑफिस खोलें और दवाओं की आपूर्ति और वितरण पर नियंत्रण बढाएँ।

सबसे जरूरी है कि दवाइयों के ‘नुकसान (साइड इफेक्ट) और लाभ’ के तुलनात्मक विश्लेषण पर अधिक जोर दें। इसमें कोई दोराय नहीं कि कड़े और विश्वसनीय नियमों के साथ भारत FDA और EMA की तुलना में कहीं आगे निकल सकता है। COVID-19 हमारे लिए चाहे बुरा सपना बनकर आया है, लेकिन इसने हमें हर बार चीन जैसे मुल्कों की ओर ताकने की जगह आत्मनिर्भर बनने का कड़ा सन्देश दिया ही है। हम जरूर उठेंगे और विश्व स्वास्थ्य के क्षेत्र में अग्रणी बनेंगे।

चीन में फिर कोरोना ने पकड़ी रफ्तार: दूसरे फेज़ में 1104 संक्रमित, एक दिन में 63 नए मामले, 2 की मौत

कुछ दिन पहले खबर आई थी कि चीन ने कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ जंग को जीत लिया है और अब वहाँ कोई भी कोरोना पॉजिटिव केस नहीं है। इसलिए पूरे विश्व को उससे सीखने की जरूरत है। मगर, यदि वर्तमान की बात करें तो कोरोना ने अपना शिकंजा दोबारा से चीन में कसना शुरू कर दिया है। जी हाँ, बुधवार को खबर आई है कि वहाँ से कोरोना के करीब 63 नए मामले सामने आए। जबकि 2 की मौत हो गई है। इसके साथ यहाँ कोरोना के दूसरे फेज में अब तक संक्रमितों की संख्या 1000 के पार चली गई है।

चीनी स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, बुधवार को जो 63 नए मामले रिपोर्ट हुए हैं उनमें से 61 बाहर से आए हुए हैं। ऐसे में खतरा है कि कोरोना वायरस की लहर दोबारा चल सकती है। ये केस उस दिन सामने आए हैं, जब वुहान से काफी वक्त के बाद कर्फ्यू हटाया गया और हजारों की संख्या में लोग अचानक बाहर निकले।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार को सामने आए नए 63 केस के अलावा चीन में दो मौत भी हुई हैं, जिसके साथ ही कोरोना वायरस से मरने वालों का आँकड़ा 3335 हो गया है। जबकि कुल केस की संख्या 81 हजार के पार चली गई है। दूसरे फेज़ में चीन में कोरोना वायरस के केस की संख्या 1104 हो गई है।

गौरतलब है कि तीन महीने की मशक्कत के बाद चीन कोरोना वायरस को हराने में कामयाब हुआ था, वुहान से भी करीब 73 दिनों का लॉकडाउन हटाया गया था। लेकिन फिर अचानक पिछले एक हफ्ते में दोबारा कुछ नए मामले सामने आने लगे। चीनी स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि लॉकडाउन हटने के बाद लोग बड़ी संख्या में इधर-उधर आ जा रहे हैं।

बता दें, इससे पहले, चीन में कोरोना लौटने की खबर आई थी। बताया गया था कि कोरोना को लाने वाला एक 16 वर्षीय छात्र है। जिसका नाम झोहू है। दरअसल, झोहू ने वुहान से बीजिंग और दुबई होते हुए यूके के न्यूकैसल तक सफर किया था। वुहान हेल्थ कमीशन के अनुसार, झोहू यूके में रहकर पढ़ता था। उसने न्यूकैसल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 21 मार्च को दुबई होते हुए बीजिंग के लिए उड़ान भरी थी। इसके बाद शुरुआत में एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग हुई। उसे मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया। फिर उसे हाई स्पीड ट्रेन से उसके घर वुहान भिजवा दिया गया। साथ ही क्वारंटाइन होने के आदेश दिए थे।

वहीं, हांगकांग विश्वविद्यालय के शोधकर्ता गैब्रिएल का मानना था कि चीन में अभी भी तमाम लोग कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं। इन लोगों में बाद में कोरोना का संक्रमण प्रभावी रूप से सामने आ सकता है। सरकार के मुताबिक कोरोना के कहर के दौरान चीन में करीब 81,589 लोग इससे संक्रमित हुए और 3,318 लोग मारे गए। स्था​नीय लोगों ने इस डाटा को खारिज करते हुए कहा है करीब 42 हजार लोग मारे गए हैं।