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राम जन्मभूमि के 67 एकड़ परिसर में कोई कब्रिस्तान नहीं: मजहब के 9 लोगों की चिट्ठी पर अयोध्या के DM का जवाब

अयोध्या जिला प्रशासन ने मंगलवार (फरवरी 18, 2020) को कहा कि राम जन्मभूमि की 67 एकड़ भूमि के अंतर्गत कोई कब्रिस्तान नहीं है, जहाँ राम मंदिर का निर्माण किया जाना है। जिला प्रशासन ने यह प्रतिक्रिया उस पत्र के जवाब में दी है, जिसमें कहा गया था कि बाबरी स्थल के आसपास के 1,480 वर्ग मीटर के क्षेत्र में समुदाय विशेष के कब्रिस्तान पर नए राम मंदिर का निर्माण न करें।

बता दें कि अयोध्या जमीन विवाद में मुस्लिम पक्ष के वकील रहे एमआर शमशाद ने 15 फरवरी को अयोध्या के 9 मुस्लिमों की तरफ से नव-नियुक्त श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र को पत्र लिखा था। इसमें कहा गया था कि आज भले ही मौके पर कब्र न दिख रही हो लेकिन वहाँ की 4-5 एकड़ जमीन पर मुस्लिमों की कब्रें थीं, ऐसे में वहाँ मंदिर का कैसे निर्माण किया जा सकता है। इसके साथ ही चिट्ठी में ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा गया कि साल 1855 के दंगों में 75 मुस्लिम मारे गए थे और सभी को यहीं दफन किया गया था।

अयोध्या के डीएम अनुज झा ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “वर्तमान में राम जन्मभूमि के 67 एकड़ के परिसर में कोई कब्रिस्तान नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि अयोध्या मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान इन सभी बातों का जिक्र किया गया था। वकील शमशाद जिस तथ्यों की बात कर रह हैं, वो भी सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान सामने आई थी। 9 दिसंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले में इन सभी तथ्यों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। 

डीएम अनुज झा ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 67 एकड़ जमीन केंद्र को हस्तांतरित की गई थी। राम जन्मभूमि पर कोई कब्रिस्तान मौजूद नहीं है। हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि पिछले साल तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय पीठ ने 9 नवंबर को सदियों पुराने मामले पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। जिसमें उन्होंने अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था। इसके अलावा कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या में ही मस्जिद के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन दी जाने की बात कही थी। पीठ ने केंद्र सरकार से कहा था कि मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट बनाया जाना चाहिए।

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हाथ में कलावा, समीर चौधरी नाम की ID: ‘हिंदू आतंकी’ की तरह मरना था कसाब को – पूर्व कमिश्नर ने खोला राज

पूर्व आईपीएस ऑफिसर और मुंबई पुलिस के कमिश्नर रह चुके राकेश मारिया की आत्मकथा रिलीज़ से पहले ही चर्चा में है। राकेश मारिया ने अपनी आत्मकथा लेट मी से इट नाउ (Let Me Say It Now) में मुंबई में 26/11 को हुए आतंकी हमले में एकमात्र जिंदा गिरफ्तार किए गए आतंकी अजमल कसाब को लेकर बड़े खुलासे किए हैं।

राकेश मारिया ने अपनी किताब में दावा किया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने 26/11 हमले को हिंदू आतंकवाद का जामा पहनाने की भी कोशिश की थी। 10 हमलावरों को हिंदू साबित करने के लिए उनके साथ फर्जी आईकार्ड भेजे गए थे। कसाब के पास भी एक ऐसा ही आईकार्ड मिला था, जिस पर समीर चौधरी लिखा हुआ था।

मारिया ने अपनी किताब में यह भी दावा किया कि मुंबई पुलिस आतंकी कसाब की फोटो जारी नहीं करना चाहती थी। उन्होंने लिखा, “दुश्मन (आतंकी कसाब) को जिंदा रखना मेरी पहली प्राथमिकता थी। कसाब के खिलाफ लोगों का आक्रोश और गुस्सा चरम पर था। इतना ही नहीं, मुंबई पुलिस के ऑफिसर भी आक्रोशित थे। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा आतंकी कसाब को किसी भी हाल में रास्ते से हटाने (मार डालने) की फिराक में थे क्योंकि कसाब मुंबई हमले का सबसे बड़ा और एकलौता सबूत था।”

पूर्व आईपीएस ऑफिसर ने लिखा कि पुलिस ने पूरी कोशिश की थी कि आतंकी की डिटेल मीडिया में लीक न हो। रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी का ये भी दावा है कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के गैंग को कसाब को मारने की सुपारी मिली थी।

बता दें कि 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में 10 आतंकियों ने तीन जगहों पर हमला किया था। इन हमलों में 166 लोग मारे गए और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इन 10 हमलावरों में बस एक अजमल कसाब ही जिंदा पकड़ा जा सका था। कसाब को 21 नवंबर, 2012 को पुणे के यरवडा जेल में फाँसी दे दी गई थी।

वहीं बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मामले में फिर से जाँच की माँग करते हुए कहा है कि 26/11 का मुंबई आतंकी हमला UPA (मनमोहन-सोनिया गाँधी सरकार) और ISI का ज्वाइंट ऑपरेशन था। जिसका मकसद RSS को बैन करना और हिंदुत्व को आतंकवाद से जोड़ना था।

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कन्हैया पर चप्पल फेंकने वाले लड़के को वामपंथियों ने किया लिंच, बेहोश होने तक पीटा

बिहार के लखीसराय में कन्हैया कुमार के भड़काऊ बयानों से तंग आकर उन पर चप्पल उछालने वाले चंदन कुमार गोरे पर भीड़ में मौजूद कन्हैया समर्थकों ने बहुत लात-घूसे-डंडे बरसाए। काफी मशक्कत के बाद पुलिस चंदन को भीड़ से छुड़ाकर अस्पताल पहुँचाने में सफल हुई। बावजूद इसके, इस पूरे मामले में केवल चंदन गोरे पर ही कार्रवाई हुई। उन्हें हिरासत में लिया गया। उस भीड़ के ख़िलाफ़ किसी ने कोई एक्शन नहीं लिया, जिसने प्रशासन और कन्हैया कुमार की उपस्थिति में चंदन गोरे को बुरी तरह पीटा।

इस घटना के सुर्खियों में आने के बाद घटनास्थल के वीडियोज भी आए। इन वीडियोज में देखा गया कि पुलिस के मौजूद होने के बाद भी किस तरह चंदन गोरे को पीटा गया। वीडियो में आवाजें आती रहीं- “मर जाएगा-मर जाएगा”… लेकिन फिर भी कन्हैया कुमार के समर्थकों ने शांत होने का नाम नहीं लिया और युवक को बेहोश करने तक पीटते रहे। अब यहाँ यह सोचने का विषय है कि अगर चंदन ने चप्पल फेंका तो ये बात संविधान या दंड संहिता की किस धारा में है कि उनकी लिंचिंग की जाए? कन्हैया का समूह तो संविधान बचाने निकला है, गाँधी का नाम लेता है, फिर ऐसी हिंसा क्यों?

गौरतलब है कि चंदन की पिटाई के अलावा एक अन्य वीडियो भी सोशल मीडिया पर आई है। इसमें चंदन खुद इस घटना के बारे में बताते नजर आए। चंदन को वीडियो में कहते सुना जा सकता है कि कन्हैया देश का गद्दार है और वह मंच से लोगों को भड़का रहा था। युवक के अनुसार जब कन्हैया जेएनयू में रहकर अपने हक की माँग उठा सकता है, तो फिर स्कूल की सरकारी व्यवस्था चौपट होने पर कुछ क्यों नहीं बोलता। चंदन के मुताबिक कन्हैया अपने आपको नेता बोलता है, लेकिन वो देश का गद्दार है। चंदन कहते हैं कि वे कन्हैया को जब भी देखेंगे, उसे नहीं छोड़ेंगे। इसके बाद कन्हैया कुमार को देश का गद्दार बोलते हुए कहते हैं कि वे उसके (कन्हैया) ऊपर चप्पल क्या… जो भी हाथ में आएगा, वो फेंकेंगे।

गौरतलब है कि अपनी बात रखते हुए चंदन ने खुद को गोडसेवादी भी बताया और कहा कि यहाँ गाँधीवाद बिलकुल नहीं चलेगा। इसके बाद इस बयान ने तूल पकड़ लिया। चंदन ने कहा कि वे घटनास्थल पर अकेले थे, उनके साथ उनका कोई समर्थक नहीं था। उनके मुताबिक जब गाँधी अकेले चले, गोडसे अकेले निकले तो आखिर वह क्यों कन्हैया जैसे गद्दार को खत्म करने के लिए किसी को लेकर चलें।

कन्हैया समर्थकों द्वारा पीटे जाने पर चंदन कहते हैं कि वे देशभक्त हैं, उन्हें किसी चीज का डर नहीं। जब इस देश में सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह को आतंकवादी बोल सकते हैं तो ये लोग कहाँ से देशभक्त हुए? अपनी बात कहते हुए चंदन बार-बार दोहराते हैं कि वो ऐसी (वामपंथी) विचारधारा रखने वाले को कभी नहीं छोड़ेंगे। पढ़ाई के बारे में पूछे जाने पर चंदन कहते हैं कि वो पढ़ाई नहीं करते, समाज में रहते हैं और इस तरह के वामपंथ को खत्म करने की मंशा लेकर चलते हैं।

चंदन मीडिया से बात करते हुए कहते हैं कि कन्हैया भुखमरी से आजादी माँगते हैं, जबकि जेएनयू में नाइक और जॉकी के कपड़े पहनकर बैठते हैं। चंदन की शिकायत है कि जब कन्हैया जेएनयू में बैठे थे, तब एक भी बार उन्होंने यहाँ (राज्य) के गरीबों के लिए बेहतर शिक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए आवाज नहीं उठाई। मगर आज देश को तोड़ना चाहते हैं। इसलिए ऐसी मंशा रखने वाले को वो जब भी और जहाँ भी देखेंगे तो उसे ठोकेंगे, चाहे इसके लिए उनके साथ कुछ भी हो जाए। उनका मानना है कि आज उनके जैसे अगर एक हैं, तो आने वाले समय में ये संख्या 100 होगी और सब मिलकर वामपंथ को खत्म कर देंगे। कैमरे में अपनी जनेऊ दिखाते हुए चंदन, कन्हैया कुमार को चेताते हैं कि वो जिस जनेऊ को खत्म करने की बात करते हैं, वे कन्हैया को इसी जनेऊ में लपेंट देंगे।

गौरतलब है कि चंदन को भीड़ द्वारा पीटे जाने के बाद सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों का जमावड़ा लग गया है। कई सोशल मीडिया ग्रुपों में कहा जा रहा है, “चंदन कुमार गोरे पर यह हमला भीड़ के द्वारा जो किया गया, वह इसलिए किया गया क्योंकि पूरे समाज के लिए वो अकेले उस भीड़ से लड़ गए, वह उस बात को नहीं बर्दाश्त कर पाए, जो वहाँ बैठे नपुंसक अपने समाज के लिए नहीं कर सके। इसके विपरीत लोग कन्हैया को सुनकर ताली बजा रहे थे। जबकि चंदन अपने सनातन संस्कृति के खिलाफ बातें सुनकर बर्दाश्त नहीं कर पाए और अपना विरोध व्यक्त किया। और इसी विरोध के एवज में ‘संविधान बचाने निकली भीड़’ ने उन पर हमला कर दिया। लेकिन चंदन कुमार गोरे एक वीर है, वह अकेले डटा रहा। अभी यह प्रारंभ है और चंदन के द्वारा किया गया आरंभ इन वामपंथी विचारधारा का अंत करके छोड़ेगा।”

यहाँ स्पष्ट कर दें कि ऑपइंडिया किसी भी प्रकार की हिंसा को बढ़ावा नहीं देता। चप्पल मारना भले ही किसी की खीझ की ‌अभिव्यक्ति हो सकती है, वो एक विरोध का तरीका हो सकता है, लेकिन यह तरीका सही नहीं है, भले ही देश विरोधी वामपंथी ही इसका शिकार क्यों न हो रहे हों।

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‘अगर यहाँ के 30 करोड़ मुस्लिम आतंकी बन गए तो क्या हाल होगा, खून की नदियाँ बहेंगी’ – मौलाना पर FIR

मुस्लिम धर्मगुरू मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। मौलाना ने उत्तर प्रदेश के सम्भल जिले में चल रहे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन में भड़काऊ बयान दिया था। मौलाना तौकीर रजा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हिटलर और गृहमंत्री अमित शाह को मुसोलिनी बताया था। मौलाना के खिलाफ सोमवार (फरवरी 17, 2020) को मामला दर्ज किया गया। मौलाना के खिलाफ आईपीसी की धारा 304, 305 और 153-K के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इस दौरान मौलाना ने पीएम मोदी और अमित शाह को आतंकवादी भी बताया था। मौलाना तौकीर रजा ने कहा कि आतंकवादी मुस्लिम नहीं बल्कि आतंकवादी नरेंद्र मोदी और अमित शाह हैं। इसके अलावा रजा ने सीएम योगी आदित्यनाथ पर भी अभद्र टिप्पणी करते हुए उन्हें ढोंगी बताया था।

बता दें कि रजा इससे पहले भी CAA के विरोध में भड़काऊ बयानबाजी कर चुके हैं। उन्होंने एक गाड़ी पर लाउडस्पीकर लगाकर भड़काऊ भाषण दिया था। उन्होंने कहा था कि हिन्दुस्तान की हुकूमत ने नागरिकता संशोधन बिल वापस नहीं लिया तो गलियों में खून बह जाएगा। सबसे पहले वह गोली खाएँगे। दंगे-फसाद हो जाएँगे। इसमें हिंदू, मुस्लिम और दलित भी उनका साथ देंगे।

हालिया भड़काऊ भाषण के दौरान भी उन्होंने गलियों में खून की नदियाँ बहाने वाले बयान का उल्लेख करते हुए कहा, “याद है पिछले दिनों हमने कहा था कि गलियों में खून की नदियाँ बहेंगी। हमने ये नहीं कहा था कि मैं खून बहाऊँगा। लेकिन हम अल्लाह के बंदे हैं, जो कह देते हैं, वो हो जाता है। अगर उन्होंने मेरी बात मान ली होती तो आज देश का ये माहौल नहीं होता। हमने तो उन्हें आगाह किया था।” मौलाना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी के लिए भी आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था।

इसके अलावा तौकीर रजा ने कहा, “देश का माहौल चंद आतंकवादी हमलों से खराब हो जाता है। जरा सोचो अगर यहाँ के 30 करोड़ मुस्लिम आतंकवादी बन गए तो इस देश का क्या हाल होगा।” मौलाना ने पीएम नरेंद्र मोदी के नाम से ‘न’ और अमित शाह के नाम से ‘शा’ शब्द लेकर नशा शब्द गढ़ा और कहा, “कुछ हिंदू भाइयों पर मोदी और अमित शाह का नशा चढ़ा हुआ है, जिनके सिर पर मुल्क की बर्बादी का सेहरा बँधने वाला है। मोदी और अमित शाह का नशा उतरने में अगर देर हो गई तो ये दोनों मिलकर देश को बर्बाद कर देंगे। हमें इनका नशा उतारना है। ऐसा न हो कि कहीं हमारे नौजवान आतंकवाद का रास्ता न अपना लें, उन्हें रोकने के लिए हम यहाँ आए हैं। अगर तुमने ये CAA कानून वापस न लिया तो हमें अंदेशा है कि कहीं हमारे नौजवान गलत रास्ता न अपना लें।”

मौलाना आगे कहते हैं, “हमारी जंग बड़ी जंग है और ये हुकूमत से जंग है और ये जंग हम जीत कर रहेंगे। हमने बाबरी मस्जिद के मामले में बड़ी नाइंसाफी को बर्दाश्त किया। इससे बड़ी बेईमानी नहीं कर सकते तुम कि हमने देश की शांति के लिए उसे बर्दाश्त किया और कोई प्रतिक्रिया नहीं की। कश्मीर में तुमने जो जुल्म किया, हमने उसे बर्दाश्त किया और सब्र किया। तुमने तीन तलाक के मामले में हमारे साथ बेईमानी की, हमने बर्दाश्त किया। आज हमारी बहन बेटियाँ सड़क पर निकाल आई हैं तो वो बिलबिला रहे हैं।”

बता दें कि जब मौलाना तौकीर रजा विवादित बयान दे रहे थे, उस समय मौके पर संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर रहमान बर्क भी मौजूद थे। तौकीर ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था, “अगर हमें रास्ते से हटाया गया तो तुम भी नहीं रहोगे।”

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केरल बाढ़ के नाम पर वामपंथियों ने जनता से पैसा लिया, लेकिन CM राहत कोष में नहीं दिया: RTI से खुलासा

केरल बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में फंड जमा करवाने के नाम पर वामपंथियों का असली चेहरा उजागर हुआ है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कोच्चि म्यूजिक फाउंडेशन ने 1 नवंबर 2019 को बाढ़ पीड़ितों को राहत प्रदान करने हेतु एक कॉन्सर्ट किया था। इसका उद्देश्य पैसा इकट्ठा कर बाढ़ प्रभावित लोगों की आर्थिक मदद करना था। मगर, ताजा जानकारी के अनुसार इस कॉन्सर्ट के तीन महीने बीत जाने के बाद भी सीएमडीआरएफ (मुख्यमंत्री राहत कोष) में कोई पैसा जमा नहीं हुआ। एक आरटीआई के जरिए इस तथ्य का खुलासा हुआ, जिसमें राज्य आर्थिक विभाग ने स्वंय इसकी पुष्टि की।

दरअसल, सोमवार को वामपंथी नेता सीताराम येचुरी ने आरएसएस और भाजपा पर निशाना साधने के लिए ट्वीट किया। अपने ट्वीट में येचुरी ने कहा कि आरएसएस और भाजपा राजनैतिक फायदा पाने के लिए हमारे लोकतंत्र की विश्वसनीयता को खतरनाक कानूनों का प्रयोग करके नष्ट कर कर रहे हैं। फिर चाहे कफील खान पर एनएसए हो या कश्मीरी पॉलिटिकल लीडर्स पर पीएसए।

इस ट्वीट के बाद त्रिपुरा के बिपलब कुमार देब ने उस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने येचुरी के ट्वीट को इंगित करते हुए उन पर तंज कसा और कहा कि अगर ये ट्वीट एक किताब होती, तो ये FICTION AND FANTASY (उपन्यास, कल्पना) की श्रेणी में आती।

अब हालाँकि, इस ट्वीट के बाद बहुत लोगों ने उस पर वामपंथियों की टांग खींची और खिल्ली उड़ाई। मगर, एक यूजर ने त्रिपुरा सीएम के सामने सीपीआईएम समर्थकों का असली चेहरा उजागर किया। उस यूजर ने टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा 6 फरवरी को की गई एक खबर का हवाला देकर लिखा, “बिपलब जी, सीपीआईएम समर्थक एक्टर और डायरेक्टर्स ने केरल बाढ़ पीड़ितों के लिए एक म्यूजिक फेस्टिवल का आयोजन 1 नवंबर को किया था। मगर उससे इकट्ठा हुआ रुपया मुख्यमंत्री राहत कोष में नहीं दिया गया। इसका खुलासा आरटीआई से हुआ।”

गौरतलब है कि इस टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के आर्थिक विभाग ने 6 फरवरी को एक आरटीआई के जवाब में बताया है कि करुणा म्यूजिक कॉन्सर्ट के नाम पर कोच्चि म्यूजिक फाउंडेशन की ओर से किसी तरह की कोई डोनेशन CMDRF को प्राप्त नहीं हुई है।

यहाँ बता दें कि इस कॉन्सर्ट को करवाने वाले मुख्य प्रबंधक मलयायम फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर गायक बिजिबल हैं। ये वही बिजिबल हैं, जो इन दिनों सीपीआईएम के साथ खड़े होकर सीएए के विरोध प्रदर्शन में अपना समर्थन दे रहे हैं। इन्होंने इस तथ्य का खुलासा होने के बाद माना कि उन्होंने इस कॉन्सर्ट के जरिए उम्मीद से ज्यादा पैसे एकत्रित किए थे, लेकिन अभी तक उन्होंने इसे मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा नहीं करवाया है। सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा है कि वह कॉनसर्ट से प्राप्त हुए फंड को इस साल मार्च तक जमा करवाएँगे। खबर के अनुसार, बिजिबल ने बातचीत में टाइम्स को बताया कि उन्हें इस कॉन्सर्ट के टिकट बिक्री से जीएसटी हटाकर 6,30,000 रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था।

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’75 कब्र के ऊपर राम मंदिर, क्या यह सही होगा?’ – अयोध्या मामले में ‘भावनात्मक’ पेंच की साजिश!

सालों बाद अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा सुलझा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन भी कर दिया। मगर राम मंदिर निर्माण का कार्य शुरू होने से पहले अब एक और पेंच फँसता दिखाई दे रहा है या पेंच फँसाने की साजिश के तहत कोशिश की जा रही है। इस के तहत अयोध्या के 9 मुस्लिम निवासियों ने नव-नियुक्त श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र को पत्र लिखा है, जिसमें अपील की गई है कि बाबरी स्थल के आसपास के 1,480 वर्ग मीटर के क्षेत्र में समुदाय विशेष के कब्रिस्तान पर नए राम मंदिर का निर्माण न करें।

पत्र में कहा गया है कि सरकार द्वारा 67 एकड़ की जमीन राम मंदिर के लिए उपयोग करना मुस्लिमों के दावे को ‘पूरी तरह से छीनना’ और कानून के विपरीत है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार चिट्ठी में कहा गया है, “आज भले ही मौके पर कब्र न दिख रही हो लेकिन वहाँ की 4-5 एकड़ जमीन पर मुस्लिमों की कब्रें थीं, ऐसे में वहाँ मंदिर का कैसे निर्माण किया जा सकता है। 1949 में जब वहाँ अंदर भगवान राम की मूर्तियाँ रखी गईं से लेकर 1992 तक जब ढाँचा ढहाया गया, उस जगह का इस्तेमाल अलग तरह से होता रहा है।”

9 मुस्लिम नागरिकों ने अपने वकील के माध्यम से ट्रस्ट को भेजी गई चिट्ठी में कहा, “केंद्र सरकार की ओर से साल 1993 में अयोध्या में अधिग्रहित की गई 67 एकड़ जमीन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण के लिए दी गई है। लेकिन इस जमीन पर मुस्लिमों की कब्रें थीं। केंद्र ने इस पर विचार ही नहीं किया कि मुस्लिमों की कब्र पर भव्य राम मंदिर नहीं बन सकता। यह धर्म के खिलाफ है।”

चिट्ठी में ट्रस्टी से कहा गया है, “आप सभी समाज के जागरूक लोग हैं। आप हिंदू/सनातन धर्म के ज्ञाता हैं। आपको इस पर जरूर विचार करना चाहिए कि क्या राम मंदिर की नींव मुस्लिमों की कब्र पर रखी जा सकती है। इसका फैसला ट्रस्ट के मैनेजमेंट को करना होगा।” इसके साथ ही चिट्ठी में ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा गया है कि साल 1855 के दंगों में 75 मुस्लिम मारे गए थे और सभी को यहीं दफन किया गया था।

बता दें कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट गठन के ऐलान के बाद से ही हलचल तेज है। बजट सत्र 2020 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ऐलान किया था कि अयोध्या में अधिग्रहीत 67 एकड़ जमीन राम मंदिर ट्रस्ट को दी गई है।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र: राम मंदिर ट्रस्ट का ऐलान, PM मोदी की घोषणा और लोकसभा में गूँजे ‘जय श्री राम’ के नारे

सोने का गर्भगृह, 2022 तक निर्माण पूरा: भव्य राम मंदिर के लिए महावीर मंदिर देगा ₹10 करोड़

योगी आदित्यनाथ ने भव्य राम मंदिर के लिए हर परिवार से माँगे ₹11 और एक ईंट

सस्ते डाटा प्लान से गूगल पस्त, साल के अंत तक 400 रेलवे स्टेशनों पर बंद करेगी फ्री Wi-Fi

रेलवे स्टेशनों पर फ्री वाईफाई सुविधा को इस साल के अंत तक बंद करने का गूगल ने ऐलान किया है। 2015 में उसने इसकी शुरुआत की थी। करीब 400 भारतीय रेलवे स्टेशनों पर गूगल यह सुविधा मुहैया कराती है। गूगल के पेमेंट्स एंड नेक्स्ट बिलियन यूजर्स के वाइस प्रेसीडेंट सीजर सेनगुप्ता ने बताया कि बताया कि भारत में मोबाइल इंटरनेट डेटा के दुनिया में सबसे सस्ता होने और इस प्लान के वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर न हो पाने के कारण इस कार्यक्रम को बंद करने का फैसला किया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार सेनगुप्ता ने कहा कि भारत सरकार, कई राज्य सरकारों और लोकल एजेंसियों द्वारा भी सस्ते दाम पर इंटरनेट सुलभ करवाने की योजनाओं ने उन्हें अप्रासंगिक कर दिया था। गूगल ने कहा है कि वह साल के अंत तक अपने साझेदारों के साथ काम करते हुए इस पूरी प्रक्रिया को सहजता पूर्वक निपटा लेगी। गूगल स्टेशन गूगल, भारतीय रेलवे तथा रेलटेल के मध्य साझेदारी के फलस्वरूप लॉन्च हुआ था। इसका मकसद देश के व्यस्ततम 400 रेलवे स्टेशनों पर तेज गति से फ्री पब्लिक वाईफाई सुविधा उपलब्ध करवाना था। इस प्रोजेक्ट को 2020 के मध्य तक पूरा किया जाना था। सेनगुप्ता ने बताया कि जून 2018 में ही यह लक्ष्य पूरा हो गया था।

गूगल के अधिकारी ने बताया कि हम अपनी क्षमतााओं और संसाधनों को और बेहतर तरीके से उपयोग में लाने के लिए लगातार प्रयास करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि हम देश भर में छोटे व्यापारियों और महिलाओं को इंटरनेट प्रयोग करना सीखने में भी मदद कर रहे हैं जिससे उनकी जिंदगी और उनके समुदायों में खुशहाली आ सके। इसके साथ साथ हम अपने उत्पादों जैसे सर्च इंजन, यूट्यूब, मैप्स आदि को भी भारतीयों की यूनिक माँगों के अनुसार ढाल रहे हैं।

धरने पर शहंशाह ने सौम्या से किया निकाह, CAA विरोधी प्रदर्शन के दौरान परवान चढ़ा प्यार

तमिलनाडु के चेन्नई में भी दिल्ली के शाहीन बाग़ की तर्ज पर विरोध प्रदर्शन चल रहा है। वहाँ के ओल्ड वॉशरमैनपेट इलाक़े में स्थित लाला गुंदा क्षेत्र में मुस्लिम महिलाएँ बड़ी संख्या में धरने पर बैठी हुई हैं। कई पुरुष भी महिलाओं का साथ देने और विरोध-प्रदर्शन का बंदोबस्त देखने के लिए वहाँ मौजूद रहते हैं। विगत 5 दिनों से वहाँ का ऐसा ही माहौल है। ये लोग सीएए और एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। हालाँकि, मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने अपील किया है कि मुस्लिम समुदाय को ग़लत प्रोपेगेंडा को नकार देना चाहिए और सामाजिक समरसता कायम रखने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।

सोमवार (फरवरी 17, 2020) को भी लाला गुंडा क्षेत्र का विरोध प्रदर्शन चर्चा में रहा। वहाँ सीएए के विरोध में प्रदर्शन के दौरान ही एक युवक और एक युवती ने निकाह करने का फ़ैसला कर लिया। इतना ही नहीं, दोनों का निकाह भी धरनास्थल पर ही हुआ, जहाँ सभी प्रदर्शनकारी मौजूद रहे। मीडिया में चल रही ख़बरों के अनुसार, दोनों की पहले से ही सगाई हो चुकी थी, लेकिन विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लेते-लेते उनका प्यार और परवान चढ़ा, जिसके बाद उन्होंने फट निकाह करने का फ़ैसला लिया।

मोहम्मद शहंशाह और एस सौम्या ने निकाह के दौरान रस्में निभाने की बजाए सीएए और एनआरसी के विरोध की शपथ ली। शहंशाह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उसे ये निकाह तो कबूल है लेकिन सीएए कबूल नहीं है। प्रदर्शनकारियों की माँग है कि केरल व अन्य राज्यों की तर्ज पर तमिलनाडु विधानसभा में भी सीएए के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पास किया जाए। शुक्रवार को वॉशरमैनपेट में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई थी, जिसके बाद सीएम ने कहा था कि कुछ लोग माहौल बिगाड़ना चाहते हैं।

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की थी, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज की नौबत आन पड़ी थी। शुक्रवार की इस घटना के बाद शहंशाह और सौम्या अपने निकाह को लेकर सशंकित थे। लेकिन दोस्तों और रिश्तेदारों ने उन्हें धरनास्थल पर ही ऐसा करने की सलाह दी।

मध्य प्रदेश: हैंडपप से पानी लेने को लेकर विवाद, वन विभाग के अधिकारी ने दलित को मारी गोली

मध्य प्रदेश के शिवपुरी में वन विभाग के गार्ड्स द्वारा मदन वाल्मीकि नामक दलित की गोली मारकर हत्या करने की ख़बर आई है। बताया गया है कि उसकी हत्या तब की गई, जब वह हैंडपंप से पानी भरने को लेकर हुए अपने परिवार और वन अधिकारियों के बीच के विवाद में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहा था। यह घटना मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से 60 किलोमीटर दूर फतेपुर नामक गाँव में घटित हुई।

वाल्मीकि की पत्नी सरोज ने आरोप लगाया कि जब उसकी बेटी फतेपुर फॉरेस्ट चेक पोस्ट से कुछ ही दूरी पर स्थित हैंडपंप से पानी लेकर बर्तन धो रही थी, तब उसे फारेस्ट रेंजर सुरेश शर्मा ने जातिसूचक गाली देनी शुरू कर दी। इसका विरोध करने पर एक महिला अधिकारी ने उसकी बेटी को बाल पकड़ घसीटना शुरू कर दिया। यह देख करीब 100 मीटर दूरी पर मौजूद उसका पति बीच-बचाव करने दौड़ा आया जिसकी गोली मार हत्या कर दी गई।

वन विभाग ने शुरुआत में अपने अधिकारियों के बचाव की कोशिश करते हुए कहा कि यह हादसा रविवार को तब हुआ जब ग्रामीणों ने अतिक्रमण विरोधी टीम से राइफल छीनने की कोशिश की। रविवार देर शाम करेरा पुलिस स्टेशन के बाहर ग्रामीणों के प्रदर्शन के बाद रेंजर सुरेश शर्मा समेत 15 लोगों के खिलाफ दफा 302 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अभी तक इस संदर्भ में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

इस घटना की जाँच के लिए वन विभाग ने भी एक टीम का गठन कर दिया है। घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने कहा कि दलितों के खिलाफ अपराध कमलनाथ सरकार के दौरान एकदम सामान्य बात हो गई है।

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पुलिस पर हमला बर्दाश्त नहीं, हर बात पर विरोध से कब्रगाह बन जाएगा राज्य: जब रजनी ने मीडिया को डपटा

क्या पुलिसकर्मियों का कोई मानवाधिकार नहीं होता? मीडिया का एक बड़ा वर्ग आजकल पत्थरबाजों, दंगाइयों, उपद्रवियों और प्रदर्शनकारियों को एक श्रेणी में रख कर उन्हें बचाने में लगा हुआ है। जब पुलिस ऐसे उत्पातियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करती है तो उलटा पुलिस को ही दोषी ठहराया जाता है, सरकार को दोष दिया जाता है और दंगाइयों का महिमामंडन किया जाता है। जामिया लाइब्रेरी कांड में भी कुछ ऐसा ही हुआ। कटे-छँटे वीडियो के आधार पर आरोप लगाया गया कि दिल्ली पुलिस पढ़ाई कर रहे छात्रों को पीट रही है। पूरा वीडियो आया तो पता चला कि पुलिस से बचने के लिए दंगाई लाइब्रेरी में घुस गए थे।

आज सुप्रीम कोर्ट ने भी शाहीन बाग़ उपद्रव को लेकर कह दिया कि विरोध प्रदर्शन जायज है, लेकिन इसके लिए सड़क जाम कर के लोगों को परेशानी में नहीं डाला जा सकता। वहीं सुपरस्टार रजनीकांत का भी एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो अपने बेबाक अंदाज़ में पुलिसकर्मियों पर हमला करनेवालों को लताड़ते हुए नज़र आ रहे हैं। रजनीकांत का ये वीडियो मई 2018 का है लेकिन सीएए विरोधी हिंसा मामले में ये आज भी उतना ही प्रासंगिक है, इसीलिए इसे आपको देखना चाहिए।

मीडिया से बात करते हुए रजनीकांत ने कहा था कि समस्याएँ तभी शुरू हुईं, जब असामाजिक तत्वों ने वर्दीधारियों पर हमला किया। अर्थात, पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने से ही समस्या की शुरुआत हुई। सुपरस्टार ने इस सम्बन्ध में बोलते हुए आगे कहा था:

“पुलिसकर्मियों पर हमले किए जाने को कभी सही नहीं ठहराया जा सकता है। वर्दी में ड्यूटी पर लगे पुलिसवालों पर हमले करने के पक्ष में मैं कोई भी तर्क बर्दाश्त नहीं करूँगा। मैं तो कहता हूँ कि इसके बचाव में कोई तर्क हो ही नहीं सकता।”

उस समय जब मीडियाकर्मियों ने इस मसले पर रजनीकांत को घेरना चाहा तो उन्होंने धूर्त पत्रकारों डपटते हुए स्पष्ट कहा कि अगर उनके पास कोई अन्य सवाल है तो पूछें। रजनीकांत ने तभी कहा था कि अगर हर बार पर हर रोज विरोध प्रदर्शन होने लगे तो पूरा तमिलनाडु ही एक कब्रगाह में तब्दील हो जाएगा।

जामिया हिंसा मामले में उनकी बातें प्रासंगिक हैं लेकिन ये भी जानना ज़रूरी है कि उन्होंने मई 2018 में ये बयान क्यों दिया था। मई 22, 2018 को तनिलनाडु के थोट्टुकुंडी में स्टरलाइट फैक्ट्री के विरोध में 20 हज़ार लोग सड़क पर उतरे थे। इसी बीच असामाजिक तत्वों ने पुलिस पर हमला कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने गोली चलाई। हिंसा में 13 लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए। रजनीकांत घायलों का हलचल जानने अस्पताल पहुँचे थे, तब उन्होंने ये बयान दिया था।

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