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IRCTC ने कहा- महाकाल एक्सप्रेस में भगवान शिव के लिए सीट रिजर्व नहीं: ओवैसी ने उठाए थे सवाल

काशी महाकाल एक्सप्रेस में भगवान शिव के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं है। यह बात आईआरसीटीसी ने कही है। मीडिया रिपोर्टों में एक सीट महाकाल के लिए रिजर्व होने पर और उस पर मंदिर स्थापित होने की बात कही गई थी। यह खबर सामने आने के बाद विवाद भी शुरू हो गया था। AIMIM के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ट्रेन में मंदिर बनाए जाने का विरोध किया था।

आईआरसीटीसी ने कहा है कि ट्रेन में कोई भी सीट श्री महाकाल के लिए आरक्षित नहीं होने जा रही है। IRCTC ने कहा है कि काशी महाकाल एक्सप्रेस ट्रेन के स्टाफ ने पूजा और भगवान के आशीर्वाद के लिए ट्रेन की एक सीट पर श्री महाकाल की तस्वीरें रख दी थीं। यह सिर्फ ट्रेन के उद्घाटन के समय के लिए ही था।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (फरवरी 16, 2020) को वाराणसी से ‘काशी महाकाल एक्सप्रेस’ को हरी झंडी दिखाई। यह एक्सप्रेस वाराणसी से इंदौर तक जाएगी। ट्रेन दो राज्यों के तीन ज्योतिर्लिंगों की यात्रा कराएगी। खबरें आईं थी कि इसमें एक सीट भगवान शिव के लिए भी रिजर्व की गई है। इस सीट पर भोलेनाथ का एक छोटा मंदिर स्थापित किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक्सप्रेस ट्रेन के बी5 कोच की सीट नंबर 64 पर इस मंदिर को स्थापित किया गया है। इस ट्रेन की शुरुआत 20 फरवरी से होनी है।

इसको लेकर विवाद भी शुरू हो गया था। ओवैसी ने मंदिर बनाए जाने का विरोध किया। उन्होंने PMO को टैग करते हुए संविधान की प्रस्तावना को ट्वीट किया। हालाँकि इसके बाद ओवैसी पर भी सवाल उठने लगे और कुछ यूजर्स ने तो रेलवे स्टेशन पर बने मस्जिदों की तस्वीर अपलोड कर उन्हें बताया कि अब एकतरफा सेकुलरिज्म काम नहीं करेगा।

बता दें कि ट्रेन के सभी एसी-थ्री कोच सुविधाजनक होने के साथ-साथ खूबसूरत भी बनाए गए हैं। सुरक्षा का ध्यान रखते हुए हर कोच में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। इसके अलावा कोच अटेंडेंट की सीट के ऊपर एलसीडी डिस्प्ले भी लगाए गए हैं, जिससे वो सभी गतिविधियों की निगरानी कर सकेगा। वहीं, यात्रियों को अगले स्टेशन के बारे पता लगाने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा, अगला स्टेशन बताने के लिए गेट के ऊपर डिस्प्ले लगे हैं। 

बताया जा रहा है कि उज्जैन-ओंकारेश्वर जाने वालों को 2 रात तीन दिन के ₹9420 के पैकेज में महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग मंदिर, कालभैरव मंदिर, राममंदिर घाट, हरसिद्धि मंदिर और ओंकारेश्वर ज्योर्तिलिंग के दर्शन करवाए जाएँगे। वहीं, ₹12,450 के 3 रात व 4 दिनों के पैकेज में उज्जैन-ओंकारेश्वर-महेश्वर-इंदौर का भ्रमण करवाया जाएगा। इसमें इंदौर, महेश्वर में होल्कर किला, नर्मदा घाट व शिव मंदिर को भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा ₹14,950 में भोपाल, सांची, भीमवेट, उज्जैन का भ्रमण करवाया जाएगा। यह पैकेज तीन रातों व चार दिनों का होगा।

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कन्हैया कुमार पर 9वीं बार हमला, इस बार चप्पल फेंक कर मारा: पहले झेल चुके हैं अंडा, मोबिल, पत्थर

नागरिकता कानून के विरोध में बिहार में ‘जन-गण-मन यात्रा’ पर निकले CPI नेता और जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को बिहार में एक बार फिर भारी विरोध का सामना लखीसराय में करना पड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार लखीसराय जिला मुख्यालय स्थित गाँधी मैदान में सभा करने पहुँचे कन्हैया कुमार को नारंगी शर्ट पहने एक युवक ने चप्पल फेंक कर मारा। चप्पल फेंक कर मारने वाले युवक का नाम चंदन कुमार है। पुलिस ने आरोपित युवक को कन्हैया समर्थकों की मार से बचाते हुए हिरासत में ले लिया।

कन्हैया कुमार की ओर चप्पल उछालने वाले आरोपित युवक चंदन कुमार का कहना है कि कन्हैया देश का गद्दार है। वह देश में दंगा भड़काना चाहता है। जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई नेता हो चुके कन्हैया कुमार पर इससे पहले चप्पल से हमला करने के मामले में शिवसेना के प्रदेश सचिव सहित दो शिव सैनिकों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें प्रदेश सचिव विक्रमादित्य सिंह और व्यावसायिक प्रमुख संजय प्रसाद शामिल हैं।

इससे पहले उनके काफ़िले पर आरा जिले में भी हमला किया गया था। दरअसल कन्हैया कुमार जब बिहार में आरा के रमना मैदान जा रहे थे, उसी दौरान स्थानीय लोगों ने कन्हैया कुमार के काफिले पर हमला कर दिया। इस हमले में काफिले में शामिल कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे।

कन्हैया कुमार इन दिनों नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के खिलाफ ‘जन-गण-मन यात्रा’ पर निकले हुए हैं लेकिन उन्हें लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बिहार के जिस भी जिले में वह अब तक पहुँचे हैं, उनमें से अधिकतर जगहों पर कन्हैया कुमार के काफिले पर हमला बोला गया है।

बिहार के आरा में जब उनके काफिले पर हमला हुआ था तो इसमें ईंट-पत्थर इस्तेमाल किया गया जिससे उनकी गाड़ियाँ भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इससे पहले कन्हैया कुमार पर जमुई से नवादा जाते वक़्त भी उनके काफिले को निशाना बनाया गया था, जिस पर अंडे और मोबिल ऑयल फेंके गए थे। कन्हैया कुमार के समर्थकों और स्थानीय लोगों में इस बात पर झड़प भी हुई थी। हालाँकि, कन्हैया कुमार को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ था।

कन्हैया कुमार ने 30 जनवरी को यह ‘जन-गण-मन यात्रा’ शुरू की थी। एक महीने तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान कन्हैया कुमार बिहार के लगभग सभी प्रमुख शहरों में पहुँच रहे हैं। अब तक उनकी यह यात्रा 11 के लगभग शहरों में पहुँची है, जिनमें से 9 में वो अपने काफिले समेत कूटे जा चुके हैं।

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विरोध का अधिकार, सड़क बंद करने का नहीं… बातचीत से हल नहीं तो एक्शन की खुली छूट: शाहीन बाग पर SC

सवाल यह नहीं है कि लोग विरोध कर रहे हैं। हर कोई विरोध करने लगेगा तो क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी सोमवार को दिल्ली के शाहीन बाग में दो महीने से ज्यादा समय से चल रहे विरोध-प्रदर्शन को लेकर की। अदालत ने वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन को मध्यस्थ नियुक्त करते हुए प्रदर्शनकारियों से बात करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इस मसले पर अगली सुनवाई 24 फरवरी को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा जनजीवन को ठप करने की समस्या से जुड़ा है। विरोध के नाम पर सब सड़क पर उतरने लगे तो क्या होगा? कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र लोगों की अभिव्यक्ति से ही चलता है, लेकिन इसकी एक सीमा है। अगर सभी सड़क बंद करने लगे तो परेशानी खड़ी हो जाएगी। यातायात बंद नहीं होना चाहिए। विरोध-प्रदर्शन का तरीका होता है। सभी के पास विरोध करने का अधिकार है, लेकिन सड़क बंद करने का नहीं।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “पिछले 64 दिन से प्रदर्शन जारी है, लेकिन आप उन्हें हटा नहीं पाए। अब बातचीत से हल नहीं निकलता है तो हम अथॉरिटी को एक्शन के लिए खुली छूट देंगे।” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह सड़क को बंद करके प्रदर्शन करने से दूसरे लोगों को भी आइडिया आएगा और वो भी ऐसा ही करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में चंद्रशेखर आजाद की ओर से पेश वकील ने कहा कि देश में इस तरह के 5000 प्रदर्शन होंगे। इस पर अदालत ने कहा, “हमें 5000 प्रदर्शनों से दिक्कत नहीं हैं, लेकिन रास्ता बंद नहीं होना चाहिए। हमें बस सड़क के जाम होने से चिंता है।”

बता दें कि यह सुनवाई उस याचिका पर चल रही थी जिसमें याचिकाकर्ता ने 2 महीने से बंद सार्वजनिक रास्ते को खोलने का आदेश देने की अपील शीर्ष अदालत से की थी। याचिका में कहा गया था कि सार्वजनिक रास्तों को रोकने संबंधी गाइडलाइन जारी किया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि शाहीन बाग में CAA और NRC खिलाफ धरना-प्रदर्शन चल रहा है। इसकी वजह से रोड 13ए बंद है। यह रोड दिल्ली और नोएडा को जोड़ती है। सड़क बंद होने की वजह से नोएडा और दिल्ली के बीच सफर करने वालों को कई घंटे फालतू लग रहे हैं। उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी सार्वजनिक जगह पर अनंतकाल तक प्रदर्शन नहीं किया जा सकता है। हालाँकि सड़क खाली करवाने का कोई आदेश नहीं दिया गया था।

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मोदी-शाह को लाठी मार-मार के जलाया जाएगा, हम जल्द ही 60 करोड़ होंगे: मौलाना की खुली धमकी

भारत में इस्लामी कट्टरवादी लगातार ‘गजवा-ए-हिन्द’ का सपना देखते हैं। वो चाहते हैं कि पूरी दुनिया में उनके मजहब का राज हो और उनका खलीफा गद्दी पर बैठे। कट्टरपंथी मौलवियों, हिन्दू-विरोधी नेताओं और कथित विचारकों की तरफ से गाहे-बगाहे ऐसे बयान आते रहते हैं, जिससे पता चलता है कि भारत के मुस्लिमों को भड़का कर उन्हें हिन्दू-विरोधी बनाया जा रहा है। उन्हें याद दिलाया जा रहा है कि तुमने ‘700 साल राज किया है’ और ताजमहल, लाल किला व चारमीनार जैसे ऐतिहासिक ढाँचे ‘उनके’ हैं, देश के नहीं। इसी क्रम में एक और मौलवी का बयान वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर लेखक तारिक फतह, मेजर सुरेंद्र पुनिया और भाजपा प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी ने उक्त मौलवी का वीडियो शेयर करते हुए उसकी आलोचना की है और तुरंत गिरफ़्तारी की माँग उठाई है। वायरल वीडियो में मौलवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मरने की बात कही है और धमकी भी दी है। मौलवी ने पीएम मोदी को लेकर पूछा कि वो कब तक कुर्सी से चिपके रहेंगे?

मौलवी ने पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पर भी बड़ा आरोप लगाया। मौलवी ने कहा कि सुषमा स्वराज ‘जैसी औरत’ ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया था, इसीलिए उनकी मृत्यु हो गई और वो ‘अपने अंजाम तक पहुँच गईं।’ मौलवी ने आपत्तिजनक व भड़काऊ बयानों की बौछार करते हुए आगे कहा:

“शीला दीक्षित हाल ही में मरीं और अरुण जेटली की भी मृत्यु हो गई। दोनों अपने अंजाम तक पहुँचे। जब गाँधी, नेहरू, राजीव गाँधी, चंद्रशेखर, नरसिम्हा राव और वाजपेयी नहीं रहा तो फिर मोदी-शाह रह जाएगा क्या? ये दोनों भी नहीं रहेगा। तू क्यों घबराता है? क्यों फिक्रमंद होता है? दो-चार साल सब्र रख, इन्तजार कर। दूसरों का जो भी अंजाम हुआ है, उससे बुरा अंजाम मोदी-शाह का होगा।”

मौलाना सीएए और एनआरसी से भी ख़ासा ख़फ़ा है। उसने उपस्थित लोगों को भड़काते हुए पीएम मोदी व पूर्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की ‘मृत्यु’ की दुआ की। उसने कहा कि जो सीएए और एनआरसी लेकर ‘मुस्लिमों को मिटाने’ का सपना देख रहा है, उसे श्मसान में लाठी से मार-मार कर जलाया जाएगा। मौलाना ने दावा किया कि आज से कुछ सालों बाद 30 करोड़ मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ कर 60 करोड़ हो जाएगी और इस्लाम-मुक्त भारत का सपना देखने वालों के बाल-बच्चे जिन्दा रहे तो वो देखेंगे कि भारत में हर तरफ इस्लामी हुकूमत का ही झंडा लहराएगा।

मौलाना जब ऐसी आपत्तिजनक बातें कर रहा था और अपने कौम के लोगों को भड़का रहा था, तब वहाँ उपस्थित लोग उसकी बातों पर तालियाँ पीट रहे थे। कथित अल्पसंख्यकों ने ‘नारा-ए-तकबीर’ और ‘अल्लाहु अकबर’ जैसे मजहबी नारों के साथ मौलाना के बयान का स्वागत किया।

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कट्टरपंथियों ने सिर्फ हाथ काटा, चर्च ने तो जिंदगी तबाह कर दी, पत्नी ने कर ली आत्महत्या: एक प्रोफेसर की आपबीती

टीजे जोसेफ केरल के इदुकी जिले के एक कॉलेज में मलयालम पढ़ाते थे। 4 जुलाई 2010 को ईशनिंदा के आरोप में मुस्लिम कट्टरपंथियों ने उनका दाहिना हाथ काट दिया। कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन के 7 युवकों ने ​उन पर तब हमला किया जब वे अपने परिवार के साथ चर्च से प्रार्थना कर लौट रहे थे। कट्टरपंथियों का आरोप था कि जोसेफ ने परीक्षा के लिए जो प्रश्न तैयार किए थे उसमें ईशनिंदा वाले सवाल पूछे गए थे।

इस हमले के बाद जोसेफ का जीवन सामान्य नहीं रह गया था। हाल ही में जोसेफ की ऑटोबायोग्राफी रिलीज हुई है। इसके बाद एक फिर से धार्मिक असहिष्णुता कि मुद्दा गर्म हो गया। इसका कारण उन्हें निशाना बनाने वाले इस्लामिक कट्टरपंथी नहीं हैं। बल्कि, जोसेफ के खुद के ईसाई समुदाय ने उनकी जिंदगी तबाह कर दी। बकौल जोसेफ, उन्होंने अपना हाथ अपनी समुदाय की वजह से खोया है।

जोसेफ ने अपनी पुस्तक के विमोचन के बाद एक साक्षात्कार में हफपोस्ट इंडिया से बात करते हुए कहा, “इस्लामिक कट्टरपंथियों ने तो मुझ पर एक बार हमला किया। मगर जिस ईसाई संप्रदाय से मेरा संबंध है, उसने मुझे बहिष्कृत करके मेरा जीवन बर्बाद कर दिया। बिना किसी उचित कारण के मुझे नौकरी से निकाल दिया। मेरी नौकरी छूटने के कारण हुए सामाजिक अलगाव और आर्थिक संकट से तंग आकर मेरी पत्नी ने आत्महत्या कर ली।”

खुद को ‘ईसाई कट्टरता का जीवित शहीद’ बताते हुए 63 वर्षीय जोसेफ ने चर्च पर आरोप लगाया कि उसने मुस्लिम समूहों के साथ सीधे टकराव से बचने के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाया। बता दें कि जोसेफ द्वारा सेट किए गए पेपर पर विवाद बढ़ने के बाद वो गिरफ्तारी के डर से अंडरग्राउंड हो गए थे। पुलिस ने उनके खिलाफ सांप्रदायिक घृणा फैलाने का मामला दर्ज कर लिया था। बचने के लिए जोसेफ एक शहर से दूसरे शहर भाग रहे थे। आखिरकार उन्हें पलक्कड़ जिले में एक मुस्लिम के लॉज में आसरा मिला। 1 अप्रैल 2010 को उन्हें यहाँ से गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ समय बाद ही जोसेफ जमानत पर रिहा हो गए थे, लेकिन उनके पास नौकरी नहीं थी। उसी साल मार्च में उन्हें जॉब से सस्पेंड कर दिया गया। जोसेफ बताते हैं कि वो तीन बार हमले से बच गए, लेकिन चौथी बार हमलावरों ने उनका हाथ काट दिया।

जोसेफ कहते हैं, “शुरुआत में जब प्रश्न को लेकर विवाद हुआ तो साइरो मालाबार चर्च और इसके तहत आने वाले कॉलेज मैनेजमेंट ने मेरा पूर्ण समर्थन दिया था। हालाँकि मार्च 2010 में ही केरल में चर्च के अधिकारियों की एक दूसरी हाई-लेवल मीटिंग हुई थी। इसके बाद हर किसी ने अपना स्टैंड बदल लिया। इस बैठक में PFI और अन्य कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों का विरोध नहीं करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद मैं बिल्कुल अकेला रह गया।” उन्होंने आगे कहा, “चर्च ने इस्लामी कट्टरवाद और मेरे साथ हुए हमले का समर्थन किया, जिसकी वजह से PFI ने मुझ पर हमला किया और मुझे अपने हाथ गँवाने पड़े।”

हमले में अपना दाहिना हाथ खोने के बाद उन्होंने बाएँ हाथ से पुस्तक लिखी। जोसेफ ने बताया कि चर्च ने शुरुआत में समर्थन करने के बाद उन्हें बहिष्कृत कर दिया। इसका साफ मतलब था कि चर्च ने आधिकारिक तौर पर यह घोषित कर दिया कि वो अब इसके सदस्य नहीं रहे। उनके साथ-साथ उनकी पत्नी, दो बच्चे और बुजुर्ग माँ को भी बहिष्कृत कर हाशिए पर खड़ा कर दिया।

जोसेफ कहते हैं, “चर्च के अधिकारियों ने मुझे इस्लामोफोबिया के साथ एक आतंकवादी के रूप में दिखाने का प्रयास किया। उन्होंने मुझे बहिष्कृत किया और पादरियों और धर्मात्माओं को मेरे पास आने और किसी भी प्रकार की मदद करने से रोका। यहीं से तकलीफें शुरू हुईं, जो अभी भी मेरे जीवन को प्रभावित कर रहा है।” वो कहते हैं, “चर्च के फैसले की वजह से मेरे बच्चों ने अपनी माँ को खो दिया। अब वो कभी वापस नहीं आएगी।”

उन्होंने आगे कहा, “मुस्लिम संगठन ने मेरे ऊपर हमला किया, लेकिन मेरे अपने लोगों ने मुझे जॉब से निकाल दिया, मेरे परिवार को बहिष्कृत कर दिया। चर्च और कॉलेज ने जो मेरे साथ किया वो कट्टरपंथियो के किए से भी भयानक सजा है।”

एकेडमिक और लेखक शाजी जैकब का कहना है कि जोसेफ के हाथ काट दिए जाने और फिर उनकी पत्नी द्वारा आत्महत्या कर लिए जाने के बाद से ही केरल में मजहबी कट्टरवाद अत्यंत चिंता का विषय बनकर उभरा। उन्होंने कहा, “अब उनकी (टीजे जोसेफ की) आत्मकथा साबित करती है कि कोई भी धार्मिक समूह असहिष्णुता और रुढिवादिता से मुक्त नहीं है। कैथोलिक चर्च ने अदालतों द्वारा उन्हें ईशनिंदा के आरोप से मुक्त करने के बाद भी उनके साथ बुरा व्यवहार किया है।”

पैगंबर मो. पर सवाल पूछने वाले प्रोफेसर का नजीब ने काटा था हाथ, NIA ने दोबारा किया गिरफ्तार

डॉक्टर बनना चाहती थी केरल की निमिषा, लव जिहादियों ने पहले फातिमा बनाया फिर फिदायीन बम

बढ़ रहा लव जिहाद, धर्मांतरण करवा ईसाई लड़कियों का हो रहा निकाह: केरल का चर्च

पुलिस ने मेरी दोनों टाँगें तोड़ डाली, ₹2Cr मुआवजा दो: HC पहुँचा जामिया का छात्र शय्यान मुजीब

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के एक छात्र ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उसकी याचिका पर हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार तथा दिल्ली पुलिस को को नोटिस जारी किया है। छात्र शय्यान मुजीब का दावा है कि उसकी चोट के लिए सरकार जिम्मेदार है और उसे 2 करोड़ रुपए बतौर मुआवजा दिया जाना चाहिए। उसने दावा किया है कि जामिया में भड़की हिंसा के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई में वो घायल हो गया था और उसे चोटें आई थीं। बता दें कि 15 दिसंबर 2019 को जामिया नगर में सीएए विरोधी उपद्रवियों ने कई वाहनों को फूँक डाला था।

दंगा और आगजनी की इस घटना के बाद पुलिस ने जामिया कैम्पस में घुस कर उपद्रवियों को खदेड़ा था। मुजीब ने दावा किया है कि वो लाइब्रेरी में बैठ कर पढ़ाई कर रहा था, तभी पुलिस ने उसकी पिटाई की। बता दें कि रविवार (फरवरी 16, 2020) को जामिया के छात्रों ने एक वीडियो जारी कर पुलिस पर लाइब्रेरी में घुस कर छात्रों को पीटने का आरोप लगाया था। हालाँकि, बाद में रिलीज हुए वीडियो से पता चला कि नकाबपोश पत्थरबाज लाइब्रेरी में भाग कर आ गए थे और पढ़ने का ड्रामा कर रहे थे। पुलिस ने चिह्नित कर उन पर एक्शन लिया था।

शय्यान मुजीब ने कोर्ट को बताया है कि उसकी दोनों टाँगें टूट चुकी हैं, जिन्हें ठीक करवाने में उसे 2.5 लाख रुपए की चपत लग गई। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। गत 15 दिसंबर को हुए दंगे को शांत करने के लिए पुलिस को आँसू गैस का सहारा लेना पड़ा था और लाठीचार्ज भी की गई थी। इसके बाद मीडिया व लिबरलों के एक वर्ग ने दिल्ली पुलिस पर ‘छात्रों के साथ ज्यादती’ करने का आरोप मढ़ा था।

दिल्ली पुलिस स्पष्ट कह चुकी है कि उसके किसी भी जवान ने किसी निर्दोष छात्र पर हाथ नहीं उठाया है। रविवार को वीडियो जारी होने के बाद पुलिस ने कहा कि इसकी जाँच की जाएगी और फिर कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि जामिया प्रशासन व वहाँ के छात्रों ने पुलिस की जाँच में सहयोग भी नहीं किया था। जब पुलिस सीसीटीवी फुटेज लेने पहुँची थी, तब छात्रों ने जाँच कार्य में बाधा डालते हुए हंगामा खड़ा कर दिया था।

हाथ में पत्थर लेकर जामिया की लाइब्रेरी में कौन सी पढ़ाई करने जा रहे ‘छात्र’: नए Video से पलटी पूरी तस्वीर

जामिया के लाइब्रेरी में पहले घुसे नकाबपोश, पीछे से आई पुलिस: नए वीडियो से बेनकाब हुआ प्रपंच

हाथों में पत्थर लिए जामिया PhD छात्र ने कटाए बाल, दाढ़ी, डिलीट किए अकाउंट: सोशल मीडिया पर वायरल

वैलेण्टाइन से पहले और बाद के नेता: ‘प्यार’ में खाया धोखा, गली-गली भटक रहा मतदाता

दिल्ली का चुनाव संपन्न हुआ। लोकतंत्र के इस महान यज्ञ के तमाम पुरोहित ‘स्वाहा’ के उच्चारण के साथ शांति काल में उतर गए। जनसेवक नेतागण अपने-अपने बाथरूमों में आगामी पाँच वर्षों के लिए पुनर्स्थापित हुए। ‘अभी पहुँचता हूँ’ का दुखदाई समय बीता और ‘साहब बाथरूम में हैं’ का मनोहारी युग पुन: लौट आया है।

अख़बारों में रंगीन पूर्ण पृष्ठ राजनैतिक विज्ञापन फिर लौटे और विजयी नेताजी के पूरे पेज के शपथग्रहण के निमंत्रण को देख कर जनमानस हर्षित हो आया। बुतों को फेंकने-उठाने के बाद फ़ैज़ साहब ने कॉन्ग्रेस के शून्य से शून्य के सफ़र को देख कर फ़रमाया कि फिर से इक बार हरेक चीज़ वही थी, जो है। विराट हिंदू और क़ौम के सिपाही लाठियाँ घर में रख कर फ़िक्स्ड कुश्तियों के अखाड़ों की ओर लौट गए हैं। पत्रकार वर्ग की कुर्सियों के नीचे लगे कंटक हट गए हैं, और आगामी कुछ महीने शांतिपूर्वक बैठे-बैठे वे गोबर की खाद से गमलों में गोभी उगा कर पूर्व वित्तमंत्री के समान करोड़पति बनने की विधि जनता को बता सकेंगे।

अंबेडकर, गाँधी, बिस्मिल और अश्फ़ाक के चित्र वापस संदूकों में लौटेंगे और संविधान के रक्षक विधायकों के होर्डिंग धन्यवाद ज्ञापन के साथ ट्रैफ़िक सिग्नलों पर लटकेंगे। पप्पू और मुन्ना, शकील और वकील भी नेताओं के नाम पर बधाई के चित्र टाँगेंगे ताकि ख़ास-ओ-आम को सनद रहे कि ‘चचा विधायक हैं हमारे’ और हम ही सत्ता और जनता के मध्य प्रॉपर चैनल हैं। ज़मीन-जायदाद, नौकरी, सिफ़ारिश आदि की जो समस्याएँ तांत्रिक बाबू बंगाली नहीं सुलझा सकते हैं, उनके लिए विधायक चचा के यह नवांकुरित भतीजे आशा का संदेश लाते हैं। इन्हीं का स्वर उस बाथरूम के भीतर पहुँचता है जहाँ के जब-जब वोट की हानि होती है, चुनाव समय में पार्टी की रक्षा करने हेतु नेता प्रकट होते हैं।

ऐसे समय पर, जब वसंत निकल रहा है, वैलेण्टाइन बाबा का सालाना उर्स आया है। घाघ मतदाता जहाँ अपना मुफ़्त पानी, बिजली प्राप्त करके मगन है, नए मतदाता इस तेज़ी से बदलते परिदृश्य से चकित हैं। घाघ मतदाता पर्यावरण या संविधान रक्षा के ठीक चुनाव के पूर्व उठे बवाल को समझता है और उहापोह के माहौल में पार्टियों के मैनिफ़ेस्टो में धीरे से मुफ़्त कलर टीवी से लेकर मुफ़्त मैनिक्योर तक घुसा देता है। नया मतदाता भावुक होता है और यह सोचता है कि भारत इस चुनाव के बाद हिंदू या मुस्लिम राष्ट्र बन जाएगा। नया मतदाता भावुक प्रेमी की भाँति उस प्रत्याशी की स्मृति में आँसू बहाता है जो अभी पिछले सप्ताह संविधान, समाज और संस्कृति की रक्षा करने का वायदा कर के लुप्त हो गया है। भावुक मतदाता कहता है कि हे संत वेलेण्टाइन, अभी तो मेरा प्रिय श्वेत धवल वस्त्रों में व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की बात करता था, हा रे वेलेण्टाइन, कहाँ गया वह मेरा छलिया। कहाँ छुप गया है वह निर्मोही, क्या वह अब मेरा न रहा?

प्रेम में धोखा खाई किशोरी प्रेमिका सरीखे नए मतदाता को घाघ मतदाता पुरानी विवाहिता की भाँति उसे समझाता है- सब एक से होते हैं, और एक समय के बाद वो पहले जैसे भी नहीं रहते। अत: इस प्रेम दिवस पर, हे नव-मतदाता, तुम अपना टेंट-टपरा समेटो और उस कार्य में लगो जिसके लिए विधाता ने तुम्हें बनाया है। नौकरी ढूँढो, लटकती हुई नंगी बिजली के तारों से बचकर, बसों में लटक कर, जीविका की तलाश में निकलो और सामाजिक सरोकारों से एक वोकसुलभ तटस्थता बनाए रखो। यही वोकत्व जो जानता कम है और महसूस अधिक करता है, तुम्हें आदर्श मतदाता बनाता है। तुम्हें इसकी रक्षा करनी है ताकि अगले चुनाव में भी तुम संविधान, धर्म और पर्यावरण की रक्षा जैसे महान विषयों की आड़ में अपना मूल्य प्रत्याशियों की दृष्टि में बनाए रख सकते हो।

जिस प्रकार टेडी बियर, गुलाबों की चकाचौंध के पीछे प्रियतमा के द्वारा पकाया हुआ आलू का पराठा, और जानूँ के द्वारा कराया गया मुफ़्त फ़ोन रिचार्ज ही वो शक्ति है जो प्रेमसंबंधो में माधुर्य बनाए रखता है, बड़े-बड़े नारों के पीछे मुफ़्त संसाधनों का वचन और अपने वालों को जात-धर्म के झंडे के नीचे बाँधकर भीड़ जमा करने का माद्दा ही नेता और मतदाता के मध्य प्रेम को बनाए रखता है। फ़ूलों एवं प्रेम-पत्रों का प्रेम में वही स्थान है जो भारतीय राजनीति में आदर्शों एवं विचारधारा का है। जो नेता यह समझ गया वही पार लगता है अन्यथा चुनाव के वक्त मतदाता भी चतुर सुंदरी की भाँति नेता को -‘मैंने तो तुम्हें इस दृष्टि से कभी देखा ही नहीं’ या ‘आई लाईक यू एज़ ए फ़्रेंड’ – जैसा कुछ कहकर निकल लेता है, और नेताजी उसी प्रकार आजीवन पोस्टर चिपकाने वाले प्रत्याशी बने रह जाते हैं, जैसे आदर्शवादी प्रेमी अंकलजी के स्कूटर बनवाता रह जाता है और बाद में प्रेमिका के विवाह में बारात पर इत्र छिड़कता देखा जाता है। इस वैलेण्टाइन संदेश को हृदय में रखते हुए आइए हम सब एक आदर्श मतदाता बनने का प्रण लें, ताकि चुनाव दर चुनाव हम अपने नेतृत्व के लिए आदर्श नेता प्राप्त कर सकें।

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फारूक अब्दुल्ला और गुलाम नबी आजाद की छत्रछाया में जम्मू में लैंड जिहाद: 3 से 100 हो गए मस्जिद

जम्मू शहर और उसके कई जिलों में डेमोग्राफिक चेंज हाल फिलहाल में बड़ी चिंता के तौर पर उभरा है। इस संबंध में ‘एकजुट जम्मू’ नामक एक संगठन ने जो खुलासे किए हैं वे बेहद चौंकाने वाले हैं। संगठन के अध्यक्ष वकील अंकुर शर्मा ने बीते दिनों एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन तथ्यों को सामने रखा।

इस संबंध में संगठन ने जो रिपोर्ट तैयार की है उससे पता चलता है कि जम्मू में सुनियोजित तरीके से लैंड जिहाद को अंजाम दिया गया। जम्मू-कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूक अब्दुल्ला और गुलाम नबी आजाद की छत्रछाया में इसे अंजाम दिया गया। दोनों नेताओं ने हिंदू बहुसंख्यक इलाकों में मुस्लिम आबादी को स्टेट स्पांसर्ड तरीके से लाकर बसाया। देखते ही देखते अपने ही इलाकों में हिंदू अल्पसंख्यक हो गए। जम्मू-कश्मीर की सभी तथाकथित ‘सेकुलर’ मुस्लिम पार्टियों चाहे वह पीडीपी हो या नेशनल कॉन्फ्रेंस उसने लैंड जिहाद को आगे बढ़ाने का काम किया। कॉन्ग्रेस का एक धड़ा भी इसमें शामिल है।

‘एकजुट जम्मू’ की जॉंच टीम ने इस संबंध में पर्याप्त आँकड़े जुटाए हैं। इसके आधार पर संगठन के अध्यक्ष ने बताया कि फारूक अब्दुल्ला और गुलाम नबी आजाद ने भटिंडी के जंगलों की जमीन पर पहले खुद कब्जा किया। वहाँ पर अपने घर बनाए। बाद में मजहबी लोगों को वहॉं आकर बसने के लिए प्रोत्साहित किया। इस दौरान राज्य में इन्हीं नेताओं की पार्टियॉं सत्ता में रही।

रिपोर्ट के अनुसार जम्मू में 1990 के बाद 1,00,000 घरों का निर्माण हुआ। 50 लाख कनाल सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हुआ। एक कनाल 505.857 वर्गमीटर के बराबर होता है। 1994 में जम्मू शहर में केवल 3 मस्जिद। लेकिन देखते ही देखते वहाँ 100 से ज्यादा मस्जिद बना दिए गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, एक समय तक हिंदू बहुसंख्यक आबादी वाले जम्मू में मुस्लिमों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसमें भटिंडी, नरवाल, सुंजवाम, कालुचक, पीर बाबा मोहल्ला, पूँछी मोहल्ला, छन्नी रामा, छन्नी हिम्मत, रायका, सिधरा, रंगूरा, खानपुर, नगरोटा, गुज्जर मोहल्ला, कासिम नगर शामिल हैं। केवल छन्नी हिम्मत और कासिम नगर में ही हिंदू- मुस्लिमों का अनुपात 50-50 का है। अन्य इलाको में अब 80 प्रतिशत से ज्यादा आबादी मुस्लिम है।

स्थिति इतनी भयावह होती जा रही है कि वक्फ ने हिंदू बहुल जिलों जैसे सांबा, कठुआ और हिंदू बहुल नगर जैसे पूँछ, रंभन में जमीनों पर अपना दावा कर दिया है। संगठन की रिपोर्ट कहती है कि नगरोटा के पास तवी नदी के पास मुस्लिम इलाकों का निर्माण नगरोटा के सैन्य छावनी की घेराबंदी की साजिश का हिस्सा है।

इसके अलावा जम्मू में रेलवे पटरियों के आसपास के क्षेत्र भी जनसांख्यिकीय अतिक्रमण के निशाने पर रहा है। जम्मू-श्रीनगर हाईवे और जम्मू-पूँछ हाईवे पर ढाबा, रेस्तरां, सब्जी की दुकान, हैंडक्राफ्ट शॉप, होटल के व्यवसायों से भी डेमोग्राफिक तौर पर बड़ा बदलाव आया है।


प्रेस से बात करते एकजुट जम्मू के अध्यक्ष अंकुर शर्मा व अन्य

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महाकाल एक्सप्रेस में महादेव को देख ओवैसी की सुलगी, लोगों ने कहा- एकतरफा सेकुलरिज्म नहीं चलेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (फरवरी 16, 2020) को काशी महाकाल एक्सप्रेस की शुरुआत करके भगवान शिव के भक्तगणों को नायाब तोहफा दिया। इस ट्रेन की शुरुआत के साथ ही भगवान शिव के तीन ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर, महाकालेश्वर और काशी विश्वनाथ एक साथ जुड़ गए। अब भक्तगण इस ट्रेन के जरिए आसानी से तीनों जगह दर्शन करने पहुँच पाएँगे।

जानकारी के अनुसार, इस ट्रेन की शुरुआत 20 फरवरी से होनी है। लेकिन इस ट्रेन की खासियतों के बारे में अभी से पता लगना शुरू हो चुका है। इस ट्रेन की सबसे अहम बात है कि इसमें एक सीट भगवान महाकाल के लिए आरक्षित है, जिस पर शिव मंदिर बनाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक्सप्रेस ट्रेन के बी5 कोच की सीट नंबर 64 पर इस मंदिर को स्थापित किया गया है।

हालाँकि ये खबर शिवभक्तों के लिए खुशखबरी की तरह है। लेकिन AIMIM के अध्यक्ष सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर सवाल खड़े किए हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए संविधान की प्रस्तावना की फोटो ट्वीट की है। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रिया आ रही हैं। कोई प्रधानमंत्री को इस कदम के लिए धन्यवाद दे रहा है। कोई ओवैसी की तरह उन पर सवाल उठा रहा है। कुछ यूजर ऐसे भी हैं जो रेलवे स्टेशन पर बने मस्जिदों की तस्वीर अपलोड कर ओवैसी बता रहे रहे हैं कि अब एकतरफा सेकुलरिज्म काम नहीं करेगा।

गौरतलब है कि इस ट्रेन में शिव का मंदिर होने के अलावा और भी कई खूबियाँ हैं जैसे काशी महाकाल एक्सप्रेस देश की पहली ऐसी ट्रेन है जिसका हर कोच सीसीटीवी कैमरे से लैस है। इसके हर केबिन में 6-6 चार्जिंग प्वॉइंट हैं। यात्रियों को 10 लाख रुपए का बीमा दिया जाएगा।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, आईआरसीटीसी के चीफ रीजनल मैनेजर अश्विनी श्रीवास्तव ने बताया है कि काशी महाकाल एक्सप्रेस के हर कोच में छह-छह सीसीटीवी कैमरों के जरिए सुरक्षा की निगरानी की जाएगी। इसके लिए हर कोच में एक कंट्रोल बनाया गया है। आईआरसीटीसी के पास एक महीने से अधिक समय तक वीडियो फुटेज मौजूद रहेंगे।

इसके अलावा इस ट्रेन में यात्रा करने वाले लोगों को 10 लाख रुपए का बीमा मिलेगा, इसका कोई भी प्रीमियम यात्रियों से नहीं लिया जाएगा। चीफ रीजनल मैनेजर के अनुसार टिकट बुकिंग की सुविधा के लिए स्टॉपेज वाले स्टेशनों पर आरक्षण काउंटर भी खोले जाएँगे, जबकि ट्रेन की साइड लोअर बर्थों के दो हिस्सों को एक साइड सपोर्ट से जोड़ा जाएगा। इससे यात्रियों को सफर के दौरान पीठ दर्द की शिकायत नहीं होगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह ट्रेन यात्रियों को उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, इंदौर व भोपाल तक घूमने का मौका देगी। इसके लिए आईआरसीटीसी ने कई पैकेज भी बनाए हैं। इनमें उज्जैन व इंदौर से आने वालों को वाराणसी, काशी, अयोध्या व प्रयागराज घूमने का मौका मिलेगा। जबकि लखनऊ, प्रयागराज व वाराणसी से उज्जैन जाने वालों के लिए दूसरे पैकेज बनाए गए हैं।

खबर के मुताबिक उज्जैन-ओंकारेश्वर जाने वालों को 2 रात तीन दिन के ₹9420 के पैकेज में महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग मंदिर, कालभैरव मंदिर, राममंदिर घाट, हरसिद्धि मंदिर और ओंकारेश्वर ज्योर्तिलिंग के दर्शन करवाए जाएँगे। वहीं, ₹12,450 के 3 रात व 4 दिनों के पैकेज में उज्जैन-ओंकारेश्वर-महेश्वर-इंदौर का भ्रमण करवाया जाएगा। इसमें इंदौर, महेश्वर में होल्कर किला, नर्मदा घाट व शिव मंदिर को भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा ₹14,950 में भोपाल, सांची, भीमवेट, उज्जैन का भ्रमण करवाया जाएगा। यह पैकेज तीन रातों व चार दिनों का होगा।

उज्जैन या इंदौर से आने वाले यात्रियों को ₹6,010 के 1 रात व 2 दिन के पैकेज में वाराणसी के घाट, काशी विश्वनाथ मंदिर, संकटमोचन मंदिर और दशाश्वमेघ घाट पर गंगा आरती के दर्शन करवाए जाएँगे। मगर, ₹10,050 प्रति यात्री के हिसाब से 2 रात, 3 दिनों के पैकेज में वाराणसी के घाट, काशी विश्वनाथ मंदिर, संकट मोचन मंदिर और दशाश्वमेघ घाट पर गंगा आरती, सारनाथ, प्रयाग में संगम व हनुमान जी के दर्शन करवाए जाएँगे। इनके अलावा उज्जैन व इंदौर से आने वालों को ₹14,770 में 3 रात, 4 दिन के पैकेज में वाराणसी के घाट, काशी विश्वनाथ मंदिर, संकट मोचन मंदिर और दशाश्वमेघ घाट पर गंगा आरती, सारनाथ, अयोध्या में श्रीराम मंदिर, हनुमानगढ़ी, शृंगवेरपुर के साथ ही प्रयाग में संगम व हनुमान जी के दर्शन करवाए जाएँगे।

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सेना में पुरुषों की तरह महिलाओं के लिए भी स्‍थायी कमीशन: SC ने 3 महीने में गठन का आदेश दिया

सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सोमवार (फरवरी 17, 2020) को मुहर लगा दी। साथ ही कोर्ट ने इसके लिए समय भी निश्‍चित कर दिया है। कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि तीन माह के भीतर महिलाओं के लिए सेना में स्‍थायी कमीशन का गठन किया जाए। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के बाद महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देना चाहिए था। महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं कर सकते।

बता दें कि केन्द्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के मार्च 2010 के उस फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी, जिसमें सेना को सभी महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया गया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत सेना में आने वाली महिलाओं को सेवा में 14 साल पूरे करने पर पुरुषों की तरह स्थायी कमीशन दिया जाए। रक्षा मंत्रालय ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि सामाजिक और मानसिक कारण बताकर महिला अधिकारियों के इस अवसर से वंचित करना न सिर्फ भेदभावपूर्ण है, बल्कि यह अस्वीकार्य भी है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “महिलाओं को लेकर मानसिकता बदलनी चाहिए और सेना में सच्‍ची समानता लानी होगी। पुरुषों के साथ महिलाएँ कंधे से कंधा मिलाकर काम करती हैं।”

केंद्र का तर्क था कि सेना में ‘कमांड पोस्ट’ की जिम्‍मेवारी महिलाओं को नहीं दी जा सकती, क्‍योंकि उनकी शारीरिक क्षमता इसके लायक नहीं और उनपर घरेलू जिम्‍मेदारियाँ भी होती हैं। इन कारणों के साथ केंद्र ने कहा था कि इस पद की चुनौतियों का सामना महिलाएँ नहीं कर सकेंगी। इस पर कोर्ट ने कहा कि कमांड पोस्‍ट पर महिलाओं को आने से रोकना समानता के विरुद्ध है।

कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कैप्टन तान्या शेरगिल, कैप्टन मधुमिता और अन्य महिला सैन्य अधिकारियों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि महिला अधिकारी भी स्थायी कमीशन की अधिकारी हैं। महिला सेना अधिकारियों ने देश का गौरव बढ़ाया है। भारतीय सेना की लेफ्टिनेंट कर्नल सीमा सिंह ने खुशी जताते हुए कहा, “यह एक प्रगतिशील और ऐतिहासिक फैसला है। महिलाओं को समान अवसर दिए जाने चाहिए।”