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संयोग नहीं, सोचा-समझा प्रयोग है शाहीन बाग़: PM मोदी ने केजरीवाल सरकार को घेरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के चुनावी अभियान को धार देते हुए दिल्ली स्थित कड़कड़डूमा में विशाल जनसभा को संबोधित किया। पार्टी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पहले ही प्रचार अभियान में लगा चुकी है। अमित शाह घर-घर जाकर पर्चे बाँट रहे हैं और कार्यकर्ताओं के घर भोजन कर रहे हैं। अब पीएम मोदी की रैली से भाजपा कैडर के भीतर नए जोश का संचार हुआ है। पीएम ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में सातों सीटें देकर दिल्ली के लोगों ने बता दिया है कि वो किस दिशा में सोच रहे हैं।

पीएम मोदी ने शाहीन बाग़ में चल रहे प्रदर्शन के बारे में कहा कि यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि सोचा-समझा प्रयोग है। उन्होंने कहा कि ये राष्ट्र की सौहार्दता को खंडित करने का एक कुत्सित प्रयास है। उन्होंने कहा कि संविधान और तिरंगे को सामने रखते हुए ज्ञान बॉंटा जा रहा है और असली साजिश से ध्यान हटाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये चुनाव दिल्ली के इसी गौरव को 21वीं सदी की पहचान और शान देने के संकल्प का है। ये चुनाव एक ऐसे दशक का पहला चुनाव है, जो 21वीं सदी के भारत का और 21वीं सदी में भारत की राजधानी का भविष्य तय करने वाला है। उन्होंने लोगों को विश्वास दिलाया कि भाजपा नेगेटिविटी में नहीं बल्कि पॉजिटिविटी में भरोसा रखती है। कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने के केंद्र सरकार के फ़ैसले का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि दिल्ली के 40 लाख से अधिक लोगों, जिसमें बड़ी संख्या में पूर्वी और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के लोग हैं, उन्हें उनके जीवन की सबसे बड़ी चिंता से भाजपा सरकार ने मुक्त किया है।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के घोषणा-पत्र की भी बात की। बकौल पीएम मोदी, पक्की की गई कॉलोनियों के तेज विकास के लिए डेवलपमेंट बोर्ड बनाया जाएगा। जहाँ झुग्गी है वहाँ पक्का घर भी बनेगा। झुग्गी में रहने वाले परिवारों को पक्का घर देने के लिए तेज़ी से काम किया जाएगा। केजरीवाल सरकार को घेरते हुए मोदी ने कहा कि पिछले 5 साल में इतना सारा काम देश में हुआ, गरीबों को रहने के लिए घर मिले, लेकिन दिल्ली की सरकार यहाँ के गरीबों को रहने के लिए घर नहीं देना चाहती। उन्होंने आगे कहा:

“पिछले 5 वर्षों में 2 करोड़ घर केंद्र सरकार ने गरीबों के लिए देशभर में बनाए। इनमें से एक भी घर दिल्ली सरकार की वजह से यहाँ नहीं बन पाया। जब तक ये लोग बैठे रहेंगे, तब तक ये दिल्ली के लोगों की भलाई के कामों में रोड़े अटकाते ही रहेंगे। ये लोग रुकावट डालते रहेंगे। आम आदमी पार्टी के लोग सिवाय राजनीति के कुछ जानते ही नहीं हैं। पहली बार, देश को लोकपाल भी मिला। देश के लोगों को तो लोकपाल मिल गया, लेकिन दिल्ली के लोग आज भी इंतजार कर रहे हैं। इतना बड़ा आंदोलन और इतनी बड़ी-बड़ी बातें की गई थी, उन सबका क्या हुआ?”

पीएम मोदी ने सवाल दागा कि सीएए से हिंदुओं, सिखों और ईसाइयों को नागरिकता का अधिकार कितने साल बाद मिला? उन्होंने आगे पूछा कि शहीद जवानों के लिए देश में नेशनल वॉर मेमोरियल कितने साल बाद बना? 1984 के सिख नरसंहार में दोषियों को सज़ा कितने साल बाद मिली? वायुसेना को नेक्स्ट जनरेशन लड़ाकू विमान कितने साल बाद मिला? बेनामी संपत्ति कानून कितने साल बाद लागू हुआ? इन्हीं सवालों के जवाब देते हुए पीएम मोदी ने बताया कि इन कार्यों में क्रमशः 70, 60, 50, 34, 35 और 28 साल का लंबा समय लगा।

केंद्र सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं की सफलता के आँकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पहली बार 50 करोड़ गरीबों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिली। पहली बार 10 करोड़ गरीब परिवारों तक टॉयलेट की सुविधा पहुँची। उन्होंने आगे बताया कि पहली बार 8 करोड़ गरीब महिलाओं की रसोई में गैस का मुफ्त कनेक्शन पहुँचा। 5 लाख रुपए तक की वार्षिक आय पर इनकम टैक्स जीरो किए जाने वाले फ़ैसले की भी पीएम मोदी ने चर्चा की। उन्होंने याद दिलाया कि सामान्य वर्ग के ग़रीबों को आरक्षण देने का काम इसी सरकार ने किया है। उन्होंने जानकारी दी कि साढ़े 3 लाख संदिग्ध कंपनियों की पहचान कर उन पर ताला जड़ दिया गया है।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के दौरान निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए ताज़ा बजट की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि इस बजट में इसका भी ध्यान रखा गया है कि मध्यम वर्ग के करदाताओं के हाथ में ज्यादा पैसे बचे। उन्होंने व्यापारियों के लिए किए गए कार्यों को गिनाते हुए कहा कि अब हरियाणा या यूपी सामान भेजना हो या वहाँ से मँगवाना हो तो दिल्ली के व्यापारियों की दिक्कतें कम हुई हैं, क्योंकि जीएसटी से सारे चुंगी और चेकपोस्ट ख़त्म हो गए हैं।

पीएम मोदी ने इस दौरान नीतीश कुमार की दिल्ली में हुई रैली की भी चर्चा की। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश ने दिल्ली में रैली करते हुए कहा था कि केजरीवाल सरकार ने बिहार से दिल्ली तक बसें चलाने की अनुमति नहीं दी, जिस कारण यात्रियों को गाजियाबाद उतरना पड़ता है। पीएम मोदी ने बताया कि वो ‘नीतीश बाबू’ को सुन रहे थे और इससे पता चलता है कि दिल्ली सरकार यूपी-बिहार के लोगों के प्रति हीन भावना रखती है।

कभी नहीं कहा कि हम एक नहीं हो सकते: BJP से हाथ मिलाने पर महाराष्ट्र के CM उद्धव ठाकरे

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे ने भविष्य में भाजपा संग गठबंधन की संभावनाओं पर प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश में एनसीपी और कॉन्ग्रेस संग गठबंधन सरकार चला रहे ठाकरे ने कहा कि भविष्य में भाजपा के साथ साझेदारी हो सकती है।

शिवसेना के मुखपत्र सामना को दिए इंटरव्यू में महाराष्ट्र के सीएम ने कहा, “मैं ऐसा नहीं कह रहा हूँ कि हम भविष्य में उनके (भाजपा) साथ गठबंधन नहीं करेंगे।” उन्होंने विरोधी विचारधारा की पार्टी एनसीपी और कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन करने के फैसले का भी बचाव किया। कहा की पिता बाला साहेब से किए वादे को पूरा करने के लिए उन्होंने किसी भी हद तक जाने का फैसला किया था। उद्धव का कहना है उन्होंने पिता से किसी शिवसैनिक को राज्य का सीएम बनाने का वादा किया था। ठाकरे ने कहा, “जब मुझे महसूस हुआ कि भाजपा के साथ रहकर अपने पिता से किया गया वादा पूरा नहीं किया जा सकता, तो मेरे पास इसे स्वीकार करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था।”

बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर अपना वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगाया था। तब शिवसेना ने दावा किया था कि चुनाव से पूर्व हुए गठबंधन में तय था कि दोनों पार्टियाँ 50-50 फॉर्मूले के तहत सरकार में रहेंगी। हालाँकि चुनाव परिणाम के बाद भाजपा ने शिवसेना के साथ इस तरह के किसी समझौते को ख़ारिज कर दिया था। इसके बाद शिवसेना ने एनसीपी और कॉन्ग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई।

उद्धव ठाकरे ने इंटरव्यू में कहा, “अगर उन्होंने अपना वादा निभाया होता और मुझसे झूठ नहीं बोला होता तो मैं कभी मुख्यमंत्री नहीं बनता। मैंने उससे ज्यादा कभी नहीं माँगा। मैंने उनसे बस उसका सम्मान करने के लिए कहा था जो चुनाव से पूर्व दोनों दलों के बीच तय हुआ था।” ठाकरे ने कहा कि वो पीएम मोदी और महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस के बीच ‘सैंडविच’ थे, दोनों ने उन्हें छोटे भाई के रूप में बताया था।

साथ ही उद्धव ने साफ किया कि शिवसेना ने हिंदुत्व की अपनी विचारधारा को ना तो छोड़ा है और ना ही उससे कोई समझौता किया है। सामना के संपादक संजय राउत को दिए इंटरव्यू में ठाकरे ने कहा, “हमने हिंदुत्व नहीं छोड़ा है, गठबंधन किया है इसका मतलब ये नहीं कि हमने धर्म बदल लिया है।”

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यह मकान बिकाऊ है: SC/ST एक्ट के फर्जी मुकदमों के कारण यूपी के एक गाँव के लोग पलायन को मजबूर

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के गोथुआ गाँव के कई लोगों के घर के बाहर ‘यह मकान बिकाऊ है‘ लिखा हुआ देखकर सनसनी फैल गई। जानकारी करने पर पता चला कि यहाँ के लोग फर्जी मुकदमों के कारण पलायन को मजबूर हो गए हैं। गाँव के लोगों का कहना है कि एससी/एसटी एक्ट के फर्जी मुकदमों से तंग आकर अन्य जातियों के लोग गाँव छोड़कर जा रहे हैं। ग्रामीणों ने अपने मकानों की बिक्री के लिए बोर्ड लगा दिए है। साथ ही जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।

जानकारी के अनुसार, गोथुआ में 27 जनवरी को बच्चों के बीच हुए झगड़े ने तूल पकड़ा था और दो पक्षों में इसे लेकर मारपीट भी हुई। इसके बाद एक पक्ष ने गाँव के ही कई लोगों पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने और अन्य अनर्गल आरोप लगाकर उनके खिलाफ थाने में तहरीर दे दी।

ग्रामीणों के अनुसार, गाँव में रहने वाले अनुसूचित जाति के लोग पहले भी एससी-एसटी के फर्जी मुकदमे लिखवाकर गाँव के 14 लोगों को जेल भिजवा चुके हैं। आरोप है कि एक बार फिर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जो बच्चे नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, उन्हीं को निशाना बनाकर उनके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट का मुकदमा लिखवा कर उन्हें जेल भिजवा दिया जा रहा है। इससे युवाओं का भविष्य खराब हो रहा है। अब, ऐसी स्थिति से निबटने के लिए परेशान ग्रामीणों ने घर छोड़ने का मन बना लिया है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन और पुलिस द्वारा उनकी सुनवाई नहीं की जाती तो वे गाँव से पलायन को मजबूर हो जाएँगे।

पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, गोथुआ में 2 जाति ठाकुर और जाटव समाज के लोगों के बीच काफी समय से विवाद चला आ रहा है। आए दिन दोनों पक्षों के बीच मारपीट की घटनाएँ होती हैं। इसे लेकर ही ठाकुर समाज के लोगों ने दीवारों पर लिखकर मकान और खेत बेचने की बात अंकित की है।

हालाँकि, वहाँ के सीओ ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि किसी भी मामले में कानूनी कार्रवाई जातिवाद देखकर नहीं की जाएगी। उन पर फर्जी एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमे पंजीकृत नहीं कराया जाएगा। इसलिए वह लोग दीवारों पर लिखे गए मकान और खेत बेचने की बात को मिटा दें। मगर, ग्रामीणें ने इससे इनकार कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी राजनीति व्यक्ति के दखल के बाद ही वह इसे मिटाएँगे।

शाहीन बाग़ पर पूछे सवाल तो अमानतुल्लाह ने अँधेरे में CM केजरीवाल को पीटा: अटकलों का बाजार गर्म

आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह ख़ान पर अक्सर मारपीट के आरोप लगते रहे हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव ने भी आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रात में बैठक के बहाने बुलाकर उन्हें अमानतुल्लाह से पिटवाया था। इस मामले में अमानतुल्लाह को गिरफ़्तार भी किया गया था। उन्होंने दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी के साथ भी मारपीट की थी। शाहीन बाग़ विरोध-प्रदर्शन में आगे बढ़ कर हिस्सा लेने वाले और हिंसक भीड़ का नेतृत्व करते देखे गए अमानतुल्लाह यौन हिंसा के आरोप भी झेल रहे हैं। वैसे, दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप ने जो 70 उम्मीदवार उतारे हैं उनमें 51% दागी हैं।

अब एक ट्विटर यूजर ने दावा किया है कि अमानतुल्लाह ख़ान ने इस बार किसी और को नहीं बल्कि अपनी ही पार्टी के मुखिया केजरीवाल को निशाना बनाया है। ट्वीट की मानें तो केजरीवाल इस बात से नाराज़ चल रहे थे कि करोड़ों रुपए फूँकने के बाद भी आम आदमी पार्टी को शाहीन बाग़ प्रदर्शन का कोई फायदा नहीं मिल रहा है। ‘पोकर शाह’ नामक ट्विटर अकाउंट के अनुसार, दिल्ली के सीएम इस बात से नाराज़ थे कि उन्हें शाहीन बाग़ प्रदर्शन का कोई फ़ायदा क्यों नहीं हो रहा है?

‘पोकर शाह’ ने अटकलों का बाजार गर्म करते हुए लिखा कि रविवार (फरवरी 2, 2020) की रात आक्रोशित केजरीवाल ने अमानतुल्लाह से इस बारे में पूछा और नाराज़गी जताई। इस ट्वीट की मानें तो अमानतुल्लाह इसके बाद मारपीट पर उतर आए और उन्होंने केजरीवाल के साथ जोर-जबरदस्ती की। ‘पोकर शाह’ ने कहा कि प्रार्थना कीजिए कि ये ख़बर सत्य नहीं हो।

हालाँकि, ऑपइंडिया इस ख़बर की कोई पुष्टि नहीं करता है कि अमानतुल्लाह ने केजरीवाल को पीटा, क्योंकि इसका न तो कोई वीडियो वायरल हुआ है और न ही दोनों तरफ से कोई बयान ही आया है। अमानतुल्लाह और केजरीवाल के बीच झड़प की ख़बर उपर्युक्त ट्विटर हैंडल के हवाले से ही चल रही है। सोशल मीडिया पर अटकलों का बाजार गर्म है।

‘AAP विधायक अमानतुल्लाह ने सोशल मीडिया के जरिए CAA पर भड़काई हिंसा’, FIR

जामिया दंगों में जो मिन्हाजुद्दीन हुआ घायल, उसे AAP विधायक अमानतुल्लाह ने दिया ₹5 लाख और सरकारी नौकरी

पुलिस ने लगाई बसों में आग: अमानतुल्लाह का बचाव करने के लिए सिसोदिया ने फैलाया झूठ

मैं सिंधिया का चमचा, हमारी सरकार ने उद्योग के लिए कुछ नहीं किया: कमलनाथ के मंत्री ने खोली पोल

मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के एक मंत्री ने बीते दिन अपनी ही सरकार के दावों की पोल खोल दी। एक कार्यक्रम में पहुँचे कमलनाथ सरकार के श्रम मंत्री सिसोदिया ने कहा कि मैंने एक साल मे उद्योगों के लिए कुछ नहीं किया। इतना ही नहीं मंत्री ने कुछ काम न करने के लिए लोगों के सामने खेद भी व्यक्त किया।

अपने अटपटे बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले कमलनाथ सरकार के श्रम मंत्री महेन्द्र सिंह सिसोदिया ने विकास कार्यों को लेकर अपनी ही सरकार पर सवाल खड़े कर दिए। सोमवार को गुना ज़िले के एक कार्यक्रम में पहुँचे श्रम मंत्री महेन्द्र सिंह सिसोदिया ने मौजूद लोगों को संबाोधित करते हुए कहा,

“मैं अभी एक साल से मंत्री हूँ, लेकिन हम औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कुछ नहीं कर सकते, मैं खेद व्यक्त करता हूँ। आपने आज मुझे यहाँ बुलाया और मुझे आपके साथ बोलने का अवसर मिला, हम गुना के लिए जो भी कर सकते हैं, हम मध्य प्रदेश सरकार के रूप में करेंगे।”

यह बयान कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, इसके बाद यूजर्स ने विकास कार्यों को लेकर कमलनाथ सरकार को जमकर निशाने पर लिए। हालाँकि, अभी तक सिसोदिया के बयान को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी की ओर से कोई बयान नहीं आया है। बतादें कि सिसोदिया अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं।

उन्होंने इससे पहले खुद को कॉन्ग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का चमचा बताते हुए कहा था कि, मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मैं इतने बड़े कद के व्यक्ति का चमचा हूँ।’ उन्होंने आगे यह भी कहा था कि मैं राजनीति छोड़ दूँगा, मगर ज्योतिरादित्य सिंधिया को नहीं छोड़ूँगा।

मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए आतंकी, ताबड़तोड़ बरसाई गोलियाँ, 20 की मौत

अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में आतंकी हमले में 20 लोगों की मौत हो गई। आतंकियों ने एक गॉंव में घंटों कहर बरपाया। हमले के बाद दहशत में लोग गॉंव छोड़कर भाग खड़े हुए। हमला शनिवार (02 फरवरी 2020) को उत्तरी बुर्किना फासो के लाम्दामोल गाँव में किया गया। मोटरसाइकिलों पर आए सशस्त्र आतंकियों ने गाँव में घुसते ही लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाते हुए निकल गए।

डोरी शहर में एक स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि मारे गए लोगों में प्रमुख नर्स भी शामिल है जो लाम्दामोल गाँव की रहने वाली थी। अधिकारी ने बताया कि गाँव और आस-पास के इलाके के लोग घबराए हुए हैं और इलाका छोड़कर जा रहे हैं। कर्नल साल्फो काबोरे ने रविवार को कहा, “सुरक्षा बल नर्स के शव को घटनास्थल से लेकर आए ताकि उसे उसके परिवार को सौंपा जा सके।” उन्होंने बताया कि इलाके की सुरक्षा के प्रबंध किए गए हैं ताकि सभी का अंतिम संस्कार किया जा सके।

एक अन्य सुरक्षाकर्मी ने बताया कि आतंकियों ने स्थानीय लोगों से कुछ दिन पहले इलाका खाली करने को कहा था। इसके बाद हमलावरों ने घटना को अंजाम दिया। बता दें कि देश के उत्तर में एक सप्ताह पहले भी इसी प्रकार के हमले हुए थे। इससे पहले सोम प्रांत में 25 जनवरी को हुए हमले में 39 लोग मारे गए थे। बुर्किना फासो की सीमा माली और नाइजर से लगती है। दोनों देश लंबे समय से इस्लामी कट्टरपंथ से प्रभावित हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ 2019 में ही माली, नाइजर और बुर्किना फासो में हुए जिहादी हमलों में 4000 लोगों की जान गई थी और कम से कम 6 लाख लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा था।

सैन्य शिविर पर हमले में 25 लोगों की मौत, 63 आतंकवादी भी मार गिराए गए: रक्षा मंत्रालय

5 साल का सबसे बड़ा हमला: अरबिंदा में 35 की मौत, जवानों ने 80 आतंकी भी मार गिराए

UP: 4 दिनों में PFI के 108 सदस्य गिरफ्तार, CAA की आड़ ले प्रदेश के कई शहरों में भड़काई थी हिंसा

उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हिंसा भड़काने के आरोप में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के 108 सदस्य पिछले 4 दिन में गिरफ्तार किए गए हैं। राज्य के अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी और कार्यकारी डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी।

अवनीश अवस्थी ने बताया कि पिछले चार दिनों में यूपी पुलिस ने पीएफआई के 108 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि तह तक पहुँच कर पता लगाया जायेगा कि आखिर इन लोगों को किससे मदद मिलती है। इस दिशा में जॉंच की जा रही है। राज्य की मशीनरी केंद्रीय एजेंसियों के संपर्क में भी है।

डीजीपी हितेशचंद्र अवस्थी ने बताया, “2001 में सिमी पर प्रतिबंध के बाद साल 2006 में केरल में PFI बना था। PFI का संगठन पूरे यूपी में है। शामली, बहराइच, पीलीभीत में विशेष तौर पर सक्रिय है।”

उन्होंने कहा, बीते साल 19 और 20 दिसंबर को हिंसा के बाद पीएफआई के 25 सदस्यों की गिरफ्तारी की गई थी। इनमें प्रदेश अध्यक्ष वसीम अहमद, कोषाध्यक्ष नदीम अहमद, डिवीजन इंचार्ज बहराइच/बाराबंकी मौलाना अशफाक, डिवीजन इंचार्ज वाराणसी रहीस अहमद एडवोकेट, कमेटी मेंबर नसरुद्दीन सहित अन्य कई महत्वपूर्ण पदाधिकारियों की गिरफ्तारी हुई थी। 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि 4 दिन में जिन 108 पीएफआई सदस्यों की गिरफ्तारी हुई है उनमें से लखनऊ से 14, बहराइच से 16, सीतापुर से 3, मेरठ से 21, गाजियाबाद से 9, मुजफ्फरनगर से 6, शामली से 7, बिजनौर से 4, वाराणसी से 20, कानपुर से 5, गोंडा, हापुड़ और जौनपुर से एक-एक को गिरफ्तार किया गया है।

अवनीश अवस्थी ने कहा, “किसी भी रूप में देशविरोधी गतिविधियों के खिलाफ हमारा अभियान जारी रहेगा।” एडीजी पीवी रमाशास्त्री ने कहा, “साक्ष्य संकलन एक निरंतर प्रक्रिया है। अपने साथी संस्थाओं के साझा प्रयास से हम साक्ष्य इकट्ठा कर रहे हैं। ईडी जैसी अन्य एजेंसियाँ इस जाँच में शामिल हैं।”

गौरतलब है कि इससे पहले, मेरठ पुलिस ने शनिवार को PFI सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया था। देर रात तक जिले भर में 6 गिरफ्तारियाँ हुईं थीं। इसमें परतापुर से कारी इरफान निवासी सैलाना, सरूरपुर से मुस्तकीम निवासी खिवाई, इंचौली से कारी ओसामा निवासी लावड़ और लिसाड़ी गेट से अय्यूब निवासी श्यामनगर, महताब निवासी अहमदनगर व शोएब निवासी इस्लामनगर को गिरफ्तार किया गया था।

शाहीन बाग में ₹120 करोड़ का खेल: इस्लामी कट्टरपंथी PFI का पैसा, सिब्बल और इंदिरा जयसिंह का योगदान – ED

UP पुलिस पर गोलीबारी करने वाला PFI का खलीफा गिरफ़्तार, CAA विरोध में जुमे के दिन हुई थी हिंसा

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8 साल के उच्चतम स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग ऐक्टिविटी, अर्थव्यवस्था में जल्द तेजी आने के संकेत

नए साल के पहले महीने में देश की आर्थिक सुस्ती दूर होने के संकेत मिले हैं। जानकारी के मुताबिक भारत की मैन्‍युफैक्‍चरिंग एक्टिविटी जनवरी में लगभग 8 वर्षों में सबसे तेज गति से आगे बढ़ी है। दरअसल नए ऑर्डर्स मिलने और आउटपुट में मजबूत वृद्धि की वजह से यह उछाल आया है। एक प्राइवेट सर्वे में सोमवार (फरवरी 3, 2020) को यह बात सामने आई। सर्वे में बताया गया है कि अर्थव्यवस्था फिर से मजबूत हो रही है। बिक्री में वृद्धि के बाद कारखानों ने बहुत तेजी से नए वर्कर्स को काम पर रखा है। यह पिछले सात साल में वर्कर्स को काम पर रखने की सबसे तेज गति है।

बताया जा रहा है कि अगर मौजूदा स्थिति बरकरार रहती है तो आने वाले कुछ महीनों में अर्थव्यवस्था में धीरे-धीरे सुधार दिखने लगेगा। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने पिछले महीने अपने पोल में इस बात की जानकारी दी थी कि अगर लगातार ऐसी स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है। बता दें कि जुलाई-सितंबर की तिमाही में वृद्धि छह साल के निचले स्तर पर आ गई थी।  

IHS मार्किट की ओर से कंपाइल्ड निक्केई मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स जनवरी में 55.3 अंक रहा है।  यह 2012 से 2020 की अवधि में इसका सबसे ऊँचा स्तर है। इससे पहले दिसंबर में यह 52.7 अंक था। साल भर पहले जनवरी 2019 में यह आँकड़ा 53.9 अंक था। यह लगातार 30वाँ महीना है जब मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 50 अंक से ऊपर रहा है।

IHS मार्केट की प्रमुख अर्थशास्त्री पॉलियेना डि लीमा ने कहा, “जनवरी में भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ में मजबूती लगातार बनी हुई है। पिछले 8 सालों में उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।” उन्होंने कहा कि जनवरी में विनिर्माण पीएमआई के उच्च स्तर पर रहने की अहम वजह माँग में सुधार होना है। इसकी वजह से नए ऑर्डर मिलने, उत्पादन, निर्यात और विनिर्माण के लिए खरीदारी और रोजगार में बढ़त देखी गई है।

बँटवारे के समय Pak न जाने वालों ने भारत पर एहसान नहीं किया: BBC के प्रपंच पर CM योगी का तमाचा

दिल्ली में विधानसभा चुनाव को बस 5 दिन बचे हैं और प्रचार अभियान पूरे जोर-शोर से चल रहा है। सभी पार्टियाँ अपना पूरा दम-खम लगा कर मैदान में उतरी हुई हैं। ऐसे में, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपनी पार्टी भाजपा के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इस दौरान उनके बयान ख़ूब सुर्खियाँ बटोर रहे हैं और साथ ही लोग भी उनकी बातों पर ताली पीट रहे हैं। योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान बीबीसी को इंटरव्यू दिया। जैसा कि अपेक्षित था, बीबीसी ने उनसे सीएए और एनआरसी को लेकर रटे-रटाए सवाल पूछे और उनके मुँह में जवाब डाल कर निकलवाने की कोशिश की, ताकि दुष्प्रचार किया जा सके।

बीबीसी ने इंटरव्यू में यूपी के सीएम से पूछा कि क्या शाहीन बाग़ में विरोध-प्रदर्शन कर रहे मुस्लिम वो लोग नहीं हैं, जिन्होंने 1947 में मजहब के आधार पर हुए देश के बँटवारे के बाद पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया था और भारत को अपनाया था? बीबीसी का कहना था कि इन मुस्लिमों के पूर्वजों ने पाकिस्तान को ठुकराया था और भारत को अपनाया था। इसके जवाब में भाजपा ने फायरब्रांड नेता योगी ने कहा कि उन लोगों ने पाकिस्तान न जाकर भारत पर कोई एहसान नहीं किया है। उन्होंने कहा:

“इन्होंने कोई उपकार नहीं किया। इन्होंने भारत पर किसी प्रकार का उपकार नहीं किया था। देश के विभाजन का विरोध किया जाना चाहिए था। जो बातें भारत के हित में हैं, आपको उनका समर्थन करना चाहिए। लेकिन जो भारत के विरोध में हैं, उसका जोर-शोर से विरोध किया जाना चाहिए। हमारी राष्ट्रभक्ति की यही पुकार है। यही भारत के हर नागरिक का दायित्व भी है। योगी या मोदी के कहने पर नहीं, अगर भारत के हित में है तो आप समर्थन कीजिए और अगर भारत के विरोध में है तो आप विरोध कीजिए।

बीबीसी ने अपना एजेंडा चलाने के लिए सीएम योगी से पूछे उलूल-जुलूल सवाल

बता दें कि शाहीन बाग़ विरोध-प्रदर्शन के मुख्य साज़िशकर्ता शरजील इमाम ने भी भारत-पाक बँटवारे को लेकर अपनी राय दी थी। उसने कहा था कि मुस्लिमों ने सेक्युरलिज्म या भारत से प्रेम होने की वजह से पाकिस्तान नहीं ठुकराया, बल्कि वो मजबूरीवश वहाँ नहीं गए। शरजील ने कहा था कि संपत्ति व अन्य कारणों से मुस्लिम पाकिस्तान नहीं गए, वरना वो पूरा हैदराबाद उठा कर ले जा सकते थे। देश के ‘टुकड़े-टुकड़े’ करने की बात करने वाला शरजील इमाम फ़िलहाल देशद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किया जा चुका है।

बीबीसी ने योगी आदित्यनाथ से जिस तरह के सवाल पूछे, वो दिखाता है कि वह अपने पुराने पक्षपाती एजेंडे पर ही चल रहा है। बीबीसी 1990 के दशक से ही जम्मू-कश्मीर को लेकर प्रोपेगेंडा चला रहा है और इस मसले पर भारत को बदनाम करने की कोशिश करता रहा है। यहाँ तक कि बीबीसी ने फेक न्यूज़ के बढ़ते प्रसार के लिए भी राष्ट्रवादी विचारधारा को ही जिम्मेदार ठहराया था।

मुख्यमंत्री योगी ने बयान दिया था कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से आतंकवादियों को बिरयानी नहीं, गोली खिलाई जाती है। बीबीसी ने जब इस बयान पर सवाल पूछा तो सीएम योगी ने कहा कि हम न तो बिरयानी खाते हैं और न ही खिलाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सब काम कॉन्ग्रेस और केजरीवाल किया करते थे, इसलिए इस सरकार में आतंकियों के प्रति रहमी नहीं दिखाई जाती है। उन्होंने अपने उस बयान का भी बचाव किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रदर्शनकारी पुरुष ख़ुद घर में रजाई में सो रहे हैं और उन्होंने अपने घरों की महिलाओं को सड़क-चौराहे पर बिठा रखा है।

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दाऊद इब्राहिम से थे अनिल कपूर के संबंध: सोनम कपूर ने कबूला, कहा- यह ‘क्रिकेट’ का रिश्ता

बॉलीवुड कलाकर अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर ने सोशल मीडिया पर अपने पिता की फजीहत करवा दी। वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव के सवालों का आवेश में आकर जवाब देते हुए उन्होंने स्वीकार कर लिया कि उनके पिता के संबंध गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम से थे। दरअसल, अक्सर हिंदुओं से संबंधित मुद्दों पर चुप्पी साधने वाली और मोदी सरकार की नीतियों का विरोध करने वाली सोनम कपूर ने शाहीन बाग में चली गोली पर अफसोस जताते हुए एक ट्वीट किया था।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा भारत में होगा। ये बँटवारे की खतरनाक राजनीति बंद करो। इससे आग भड़क रही है। अगर तुम खुद को हिंदू समझते हो, तो ये भी समझो कि ये धर्म, सिर्फ़ कर्म और धर्म का है और ये सब इन दोनों में से कुछ नहीं है।” इसी ट्वीट पर दूरदर्शन के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने उनसे एक सवाल कर दिया।

वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने सोनम कपूर के ट्वीट का रिप्लाई देते हुए उनसे कहा कि वह बहुत प्रखरता से अपनी आवाज़ उठाती हैं। लेकिन क्या वो कृपा कर देश को बताएँगी कि आतंकी दाऊद के साथ उनके पिता की तस्वीर का संबंध उनके कर्म से है या उनके धर्म से?

इस सवाल के बाद ट्विटर पर सक्रिय रहने वाले किसी भी यूजर को लग सकता था कि सोनम इसके बदले कोई ‘सेकुलर’ जवाब देंगी। लेकिन सोनम कपूर का यहाँ हैरान करने वाला रिप्लाई आया। ट्वीट में उन्होंने माना कि दाऊद और उनके पिता के बीच धर्म या कर्म का नहीं, बल्कि क्रिकेट का रिश्ता था।

सोनम ने जवाब देते हुए लिखा, “वे (अनिल कपूर) राज कपूर और कृष्णा कपूर के साथ मैच देखने गए थे। और एक बॉक्स में थे। मुझे लगता है आपको किसी पर ऊँगली उठाना बंद कर देना चाहिए। क्योंकि ऐसे में अन्य तीन ऊँगलियाँ आप पर होती हैं। भगवान राम आपको दुष्टता और हिंसा फैलाने के लिए माफ करें।”

सोनम के इस जवाब के बाद अशोक श्रीवास्तव ने फिर उन पर तंज कसा और लिखा, “बात सही है कि जब आप दूसरों की तरफ एक ऊँगली उठाते हैं तो 3 ऊँगली आप की तरफ उठती है। आपने ट्विटर पर एक ऊँगली का इस्तेमाल किया इसलिए ही तीन ऊँगलियाँ आपकी तरफ उठ रही हैं। पर ‘दुर्भाग्य’ से मैं इतना काबिल नहीं कि दाऊद और पाकिस्तानी सेना के प्रिय अनिल मसर्रत के साथ तस्वीर खिंचा सकूँ।”

गौरतलब है कि सोनम कपूर अपने पिता अनिल कपूर के साथ जिस दाऊद इब्राहिम की तस्वीर को जस्टिफाई करने की कोशिश कर रही हैं, वह 1993 के मुंबई धमाकों का जिम्मेदार है। इन धमाकों में बड़ी संख्या में आम जनों ने जान गंवाई थी। अनिल कपूर के साथ दाऊद की इस तस्वीर को लेकर बताया जाता है कि यह तब की है जब दोनों पाकिस्तान और भारत के बीच क्रिकेट का मुकाबला देख रहे थे।

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