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भारत की वैश्विक छवि के बदलाव में ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ की भूमिका

भारत की वैश्विक छवि ‘विविधता में एकता’ की धारणा पर आधारित है। यही संस्कृतियों एवं सभ्यताओं की व्यापकता को भी दर्शाती है, जिसका प्रभाव दुनिया भर के लोगों पर है। मूलतः संस्कृति को ‘सॉफ्ट पॉवर’ कूटनीति के विस्तार के रूप में मान्यता दी गई है। इसे पूरी दुनिया में लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने में भारत की विदेश नीति के महत्वपूर्ण साधन के रूप में माना गया है। सभ्यताओं के बीच एक संवाद विकसित करने के लिए संस्कृति के महत्व को पहचानते हुए भारत ने स्वतंत्रता के बाद से ही ’सांस्कृतिक कूटनीति’ के महत्व को दुनिया से जुड़ने के लिए एक उपकरण के रूप में स्थापित किया है।

सदियों से भारतीय कला, शिल्प, संस्कृति, परंपरा, योग, आयुर्वेद, संस्कृत, भारतीय संगीत, नृत्य और धर्म दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करता रहा है। साथ ही साथ वर्तमान भारतीय संगीत, व्यंजन, सिनेमा और बॉलीवुड ने भी लोगों को आकर्षित किया है। भारतीय संस्कृति एवं परंपरा को ध्यान में रखते हुए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी विदेश नीति के पाँच स्तंभों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने एवं भारत की वैश्विक छवि को बदलने के लिए एक सफल प्रयास किया है। ये पाँच स्तंभ – सम्मान, संवाद, समृद्धि, सुरक्षा एवं संस्कृति और सभ्यता हैं। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विद्वान जोसेफ नाइ के सॉफ्ट पॉवर की परिभाषानुसार प्रधानमंत्री मोदी भारत की वैश्विक पहुँच में बदलाव के वाहक बने हैं। जोसेफ नाइ के अनुसार सॉफ्ट पॉवर, इच्छित चीजों को आकर्षण के माध्यम से पाने की क्षमता रखना है ना कि दबाव या भुगतान के माध्यम से।

भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को आगे बढ़ाने में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि पीएम मोदी के आह्वान के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 11 दिसंबर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित करना रहा। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर हर साल मिलने वाली शानदार प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि योग को भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में काफी लोकप्रियता हासिल हुई है। लगभग सभी देशों के लोगों के बीच में योग काफी लोकप्रिय हुआ है। भारत के सॉफ्ट पॉवर प्रोजेक्शन में योग का एक राजनयिक उपकरण के रूप में प्रभावी उपयोग विदेशों में लोगों के मन में भारत की वैश्विक छवि को पुनर्जीवित कर रहा है।

भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने में मोदी सरकार ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने और बढ़ावा देने के लिए अपने संस्थागत तंत्र को पुनर्जीवित किया है। 2014 से मोदी सरकार के अंतर्गत सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आई सी सी आर) का काम यहाँ उल्लेखनीय है। 37 देशों में फैले अपने सांस्कृतिक केंद्रों के माध्यम से आई सी सी आर भारत और विदेशों में सांस्कृतिक समारोहों के आयोजन में लगा हुआ है। साथ ही साथ विदेशों में इंडियन स्टडीज चेयर्स की स्थापना, विदेशी छात्रों/अध्येताओं को भारत में अध्ययन करने के लिए छात्रवृत्ति/ फेलोशिप प्रदान करना और ऐसी अन्य कई सारी गतिविधियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार जारी है। गुणवत्ता सुनिश्चित करने और बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए आई सी सी आर योग शिक्षकों को योग सिखाने के लिए विदेशों में भेजता है ताकि योग का अधिक से अधिक प्रचार प्रसार हो सके। इसी का परिणाम है कि आई सी सी आर के सांस्कृतिक केंद्रों में योग कक्षाओं की माँग लगातार बढ़ रही है। 2015 में औपचारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाए जाने के बाद से, योग को एक नया वैश्विक आयाम मिला है। देखा जाए तो, मानवता की समग्र भलाई के लिए दुनिया को भारत की तरफ से यह एक उपहार ही है।

पीएम मोदी के विजन को ध्यान मे रखते हुए आई सी सी आर के मौजूदा अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने कई उल्लेखनीय काम किए हैं। उन्होंने सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने एवं देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए विभिन्न नए कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया है। वैश्विक पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से इनके कई सारे ऐसे काम हैं जिनका जिक्र यहाँ किया जा सकता है। उदाहरण के लिए योग, संस्कृत एवं अन्य भाषाओं को बढ़ावा देना। इतना ही नहीं, बल्कि इनके निर्देशन में आई सी सी आर एक महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस का आयोजन इसी महीने पुणे में कर रहा है जिसका नाम ‘डेस्टिनेशन इंडिया’ है। इस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य, देश विदेश से आ रहे विदेशी छात्रों के प्रवाह को बेहतर करना और भारत को शिक्षा का पसंदीदा केंद्र बनाना है।

भारतीय संस्कृति को वैश्विक पटल पर ले जाने के लिए आई सी सी आर ने विश्व भर में भारतीय संस्कृति के प्रचार हेतु 2015 में अंतरराष्ट्रीय रामायण महोत्सव भी शुरू किया। पिछले साल आयोजित इस महोत्सव पर साझा सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से दुनिया से जुड़ने के महत्व को समझते हुए, डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने बल देकर कहा कि ‘रामायण एक वैश्विक सांस्कृतिक पूंजी है’ और ‘यह महोत्सव अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ वैश्विक सांस्कृतिक बहुलता को बढ़ावा देने के लिए आई सी सी आर की एक महत्वपूर्ण पहल का हिस्सा है। यह भारतीय संस्कृति के जीवंत अनुभव का एक आदर्श प्रवेश-द्वार है।’

पीएम मोदी ने भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ाने हेतु एक और महत्वपूर्ण कदम 2014 में उठाया। इसके अंतर्गत आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी विभाग को मंत्रालय बना दिया गया जिसको ‘आयुष’ के नाम से जाना जाता था। तब से आयुष मंत्रालय, आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए नीति निर्माण, विकास और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन का कार्य कर रहा है।

संगीत, कला, सिनेमा के साथ-साथ अन्य देशों में अनुकूल जनमत बनाने के लिए सांस्कृतिक कूटनीति के अन्य उपकरणों के रूप में लोकप्रिय संस्कृति के उत्पादों को पहुंचा राष्ट्रीय हित को बढ़ाना मोदी सरकार की प्राथमिकता में रहा है। समृद्ध भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने के लिए वैश्विक समर्थन और बढ़ती रुचि को देखते हुए, इस तथ्य से कोई इनकार नहीं कर सकता कि पीएम मोदी भारतीय संस्कृति के प्रचार के माध्यम से भारत के हित को आगे बढ़ाने में सफल रहे हैं। यह राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर पीएम मोदी के राजनीतिक कौशल को दर्शाता करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह दिखा दिया कि सॉफ्ट पॉवर के बेहतर इस्तेमाल से हार्ड पॉवर के मुकाबले दीर्घकालिक ठोस परिणाम निकल सकते हैं।

अब तक के अपने कार्यकाल में मोदी सरकार ने सॉफ्ट पावर के तौर पर संस्कृति का बेहतरीन इस्तेमाल किया है। यह उस दौर के लौटने की शुरुआत हो सकती है जिस दौर में भारत विश्व गुरु हुआ करता था। भारत की प्राचीन और महान सांस्कृतिक विरासत को पीएम मोदी जिस रफ्तार में लेकर दुनिया के सामने बढ़ रहे हैं, वो अद्भुत है। अब तक पश्चिमी संस्कृति के सामने हमारे सॉफ्ट पॉवर का बेहतर इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था। मोदी सरकार ने इस मिथक को तोड़ा की पश्चिमी संस्कृति के सापेक्ष हम अपनी महान संस्कृति को आगे नहीं बढ़ा सकते। अब आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय संस्कृति की ताकत को सॉफ्ट पॉवर के रूप में कितनी सफलता से इस्तेमाल किया जाएगा। कल्चरल डिप्लोमेसी को जो धार मोदी सरकार में मिली है, उससे भारत की वैश्विक छवि को कितनी मजबूती मिलेगी, इसे देखना भी एक सुखद अनुभव रहेगा।

Note: यह लेख पहले OpIndia के इंग्लिश वेबसाइट पर पब्लिश हो चुकी है, जिसे आप यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

टुटपुँजिया चुटकुलेबाज कुणाल कामरा ने फ्लाइट में अर्नब के साथ की बेहूदगी, ऐसे हो सकता है प्रतिबंधित

लिबरलों का गिरोह विशेष अब उनलोगों के साथ बदसलूकी पर उतर आया है, जो उनके विचारों के साथ सहमति नहीं जताते अथवा जो उनसे अलग विचार रखते हैं। ख़ुद को कॉमेडियन कहने वाले कुणाल कामरा ने कुछ ऐसा ही किया है। उसने एक हवाई यात्रा के दौरान ‘रिपब्लिक न्यूज़’ के पत्रकार अर्नब गोस्वामी के साथ बदतमीजी की।अर्नब अपनी सीट पर बैठे हुए थे और कान में हेडफोन लगाए हुए थे। कुणाल कामरा अर्नब के पास पहुँच गया और उसने उन्हें ‘डरपोक’ बताया। उसने अपने इस घटिया हरकत का वीडियो भी शूट कर लिया।

वीडियो में कुणाल कामरा कहता दिख रहा है कि जब उसने ‘डरपोक’ अर्नब गोस्वामी से उनकी पत्रकारिता को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कामरा को ‘मानसिक रूप से विक्षिप्त’ बताया और बाद में कहा कि वो अपने लैपटॉप पर कुछ देखने में व्यस्त हैं। वीडियो में कथित कॉमेडियन कुणाल कामरा ये कहते दिख रहा है कि अर्नब उसके सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं। इस दौरान कामरा ख़ुद को ‘टुकड़े-टुकड़े’ नैरेटिव का अंग बताता है और कहता है कि अर्नब से दर्शक जानना चाहते हैं कि वो ‘राष्ट्रवादी’ हैं, या फिर ‘डरपोक’?

विमान में किसी यात्री के साथ इस तरह की हरकत करने को लेकर कुणाल कामरा की ख़ूब आलोचना हुई। सिविल एविएशन मंत्रालय ने ऐसे उपद्रवी यात्रियों के लिए ‘नो फ्लाई लिस्ट’ डालने का प्रावधान किया है, जो दूसरे यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। सितम्बर 2017 में उपद्रवी यात्रियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त करते हुए तत्कालीन नागर एवं विमानन मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा था कि केबिन क्रू और यात्रियों की सुरक्षा के लिए ऐसा कानून आवश्यक है। ऐसे यात्रियों को जाँच के बाद ‘नो फ्लाई लिस्ट’ में डाला जा सकता है।

वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि कुणाल कामरा अर्नब गोस्वामी पर लगातार तंज कसते हुए न सिर्फ़ उन्हें परेशान कर रहा है बल्कि बार-बार उन्हें ‘डरपोक’ भी बता रहा है। बाद में उसने ट्विटर पर इस वीडियो को डालते हुए गर्व के साथ लिखा कि वो रोहित वेमुला की माँ के लिए ऐसा कर रहा है। वो वीडियो में स्वीकार करता है कि वो जो कर रहा है, वो नियमानुसार सही नहीं है लेकिन फिर वो कहता है कि वो इसके लिए जेल जाने को भी तैयार है। वो अर्नब को कहता दिख रहा- ‘गेट द फकिंग टाइम और रोहित वेमुला की 10 पेज की सुसाइड नोट को पढ़ो।

सोशल मीडिया पर कुणाल कामरा के इस व्यवहार के कारण कई लोगों ने डर जताया कि ऐसा उनके साथ भी हो सकता है। लोगों ने कहा कि अगर इस तरह के उपद्रवी लोगों पर शिकंजा नहीं कसा गया तो ये आए दिन किसी न किसी यात्री के साथ इस तरह बदतमीजी करते रहेंगे।

‘जूता बनाओ, पानी ढोओ, नाली साफ करो’ – Pak में गैर-मुस्लिमों के लिए नौकरी का विज्ञापन, PM मोदी ने किया जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेशनल कैडेट कॉर्प्स की रैली को संबोधित करते हुए कहा कि आज विश्व में हमारे देश की पहचान, युवा देश के रूप में है। देश के 65 प्रतिशत से ज्यादा लोग 35 वर्ष से कम उम्र के हैं। देश युवा है, इसका हमें गर्व है लेकिन देश की सोच युवा हो, ये हमारा दायित्व होना चाहिए। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का युवा देश बदलना चाहता है, स्थितियाँ बदलना चाहता है और इसलिए उसने तय किया है कि अब टाला नहीं जाएगा, अब टकराया जाएगा, निपटा जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस स्थिति को मेरे आज का युवा भारत, मेरे भारत का युवा, स्वीकारने के लिए तैयार नहीं है। वो छटपटा रहा है कि स्वतंत्रता के इतने साल हो गए, चीजें कब तक ऐसे ही चलती रहेंगी? कब तक हम पुरानी कमजोरियाँ को पकड़कर बैठे रहेंगे।

इस दौरान बिना नाम लिए पाकिस्तान पर हमला करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “कश्मीर भारत की मुकुटमणि है। 70 साल बाद वहाँ से आर्टिकल 370 को हटाया गया। हम जानते हैं कि हमारा पड़ोसी देश हमसे तीन-तीन युद्ध हार चुका है। हमारी सेनाओं को उसे धूल चटाने में हफ्ते-दस दिन से ज्यादा समय नहीं लगता।”

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान में निकले रोजगार के एक विज्ञापन का भी जिक्र किया। जिसमें सफाई के कामों के लिए कर्मचारियों की वैकेंसी निकाली गई थी। इस वैकेंसी में सिर्फ गैर-मुस्लिमों को ही पात्र बताया गया था। पीएम ने कहा कि पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों की ऐसी हालत है। विज्ञापन से स्पष्ट था कि वो नौकरी दलित और अन्य अल्पसंख्यकों के लिए थी।

पाकिस्तान द्वारा जारी की गई जॉब वेकैंसी

हाल में ही लागू हुए सीएए पर कुछ भ्रमित लोगों और विपक्षी दलों के विरोध पर पीएम ने हमलावर होते हुए कहा कि नागरिकता कानून पर वोटबैंक की राजनीति हो रही है। कुछ पार्टियों को अपने वोट बैंक की चिंता है। कुछ लोग दलितों की आवाज बनने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अल्पसंख्यकों पर जुल्म नहीं दिखता है। पाकिस्तान ने विज्ञापन में हिंदुओं का अपमान किया।

उन्होंने कहा, “दशकों पुरानी समस्याओं को सुलझा रही हमारी सरकार के फैसले पर जो लोग सांप्रदायिकता का रंग चढ़ा रहे हैं, उनका असली चेहरा भी देश देख चुका है और देख रहा है। मैं फिर कहूँगा- देश देख रहा है, समझ रहा है। देश चुप जरूर है, लेकिन सब समझ रहा है।”

आगे पीएम ने कहा, “ऐसे लोगों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को रोकने के लिए भारत के पुराने वादे को पूरा करने के लिए आज जब हमारी सरकार CAA लेकर आई है तो कुछ राजनीतिक दल अपने वोटबैंक पर कब्जा करने की स्पर्धा में लगे हैं, आखिर किसके हितों के लिए काम कर रहें ये लोग।”


मस्जिद में छिपा था शाहीन बाग़ का सरगना शरजील इमाम, चाचा ने कहा- दिल्ली चुनाव के कारण फँसाया गया

शाहीन बाग़ उपद्रव के मुख्य साज़िशकर्ता शरजील इमाम को जहानाबाद से गिरफ़्तार किया गया। वहाँ उनके कुछ राजनीतिक कनेक्शन भी सामने आए हैं। उसके पिता अकबर इमाम तो नीतीश कुमार की पार्टी जदयू से चुनाव भी लड़ चुके हैं। उसका भाई पूर्व सांसद अरुण कुमार का क़रीबी है। उसके भाई से पूछताछ के बाद पुलिस को कुछ अहम सुराग मिले, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि देश के ख़िलाफ़ बात करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस मामले में कोर्ट अपना काम करेगा। राजद प्रवक्ता भाई वीरेंदर ने भी कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

एक और चौंकाने वाली बात ये है कि भारत के ‘टुकड़े-टुकड़े’ करने की बात करने वाला शरजील इमाम जहानाबाद के एक मस्जिद में छिपा हुआ था। शरजील ने एएमयू में भाषण देते हुए लोगों को भड़काते हुए कहा था कि वो सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकेन्स नेक) को यूँ ठप्प कर दें कि भारत से असम व अन्य उत्तर-पूर्वी राज्य टूट कर अलग हो जाएँ। शरजील की तलाश 6 राज्यों की पुलिस कर रही थी- बिहार, मणिपुर, असम, अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली और उत्तर प्रदेश। महात्मा गाँधी को सबसे बड़ा फासिस्ट नेता बताने वाले शरजील को फिलहाल जहानाबाद थाने में रखा गया है।

शरजील इमाम की जहानाबाद कोर्ट में पेशी होगी। फिर ट्रांजिट रिमांड के बाद दिल्ली पुलिस उसे ले जाएगी। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने उसे बिहार पुलिस के सहयोग से जहानाबाद के काको से गिरफ़्तार किया, जहाँ उसका पैतृक निवास भी है। नीतीश कुमार ने इस कार्रवाई के लिए पुलिस की तारीफ करते हुए कहा कि किसी में दम नहीं है कि वो भारत के टुकड़े-टुकड़े कर सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश का माहौल इन दिनों ख़राब करने की कोशिश की जा रही है, जिसे सामान्य किया जाना चाहिए।

शरजील इमाम के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मुक़दमा चलाया जाएगा। जेएनयू प्रशासन ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए शरजील को समन जारी किया है। उसे 3 फ़रवरी तक स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। वहीं शरजील के परिवार वालों ने साज़िश का रोना रोया है। उसके चाचा अरशद इमाम ने कहा है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में राजनीतिक फायदा लेने के लिए उनके भतीजे का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं शरजील की अम्मी ने कहा है कि मेरा बेटा निर्दोष है। परिवार ने कहा कि उन्हें संविधान पर पूरा भरोसा है।

व्यस्त CM नहीं सुन रहे मुआवजे की बात, रास्ते में है मस्जिद तो बदली गई नीरज के अंतिम संस्कार की जगह

झारखण्ड के लोहरदगा में सीएए के समर्थन में निकली रैली पर मुस्लिम भीड़ ने लोहे की रॉड से हमले किए, गोली चलाई और पेट्रोल बम फेंके। मुस्लिम महिलाओं ने गर्म पानी और मिर्ची पाउडर से हमला किया। इस वारदात में ‘रघुनन्दन लेन’ के रहने वाले नीरज प्रजापति की मौत हो गई। नीरज का पार्थिव शरीर फ़िलहाल राँची के रिम्स में ही रखा हुआ है। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है लेकिन अभी तक राज्य सरकार का कोई भी नेता वहाँ पर नहीं आया है। किसी भी मंत्री ने पीड़ित परिजनों की सुध लेने की कोशिश नहीं की।

ऑपइंडिया ने इसी बीच नीरज की पत्नी और कुछ परिजनों से बातचीत की, जिसके बाद राज्य सरकार के नेताओं की पोल खुलती हुई नज़र आई। पीड़ित के परिजनों ने बताया कि राज्य सरकार मुआवजे को लेकर अभी तक कोई आश्वासन नहीं दे रही है। राँची में बैठे अधिकारियों का कहना है कि इस सम्बन्ध में लोहरदगा का प्रशासन ही कुछ कर सकता है। परिजन फ़िलहाल राँची में ही हैं। भाजपा विधायक सीपी सिंह पीड़ित परिजनों से मिलने पहुँचे और उन्होंने सरकार पर निशाना साधा।

मृतक की पत्नी की माँग है कि उन्हें सरकारी नौकरी दी जाए। उनकी एक बेटी और एक बेटा है। दोनों ही छोटे हैं। पत्नी व परिजनों ने बतौर मुआवजा 50 लाख रुपए की भी माँग की है। हालाँकि, राँची प्रशासन बार-बार कह रहा है कि मुख्यमंत्री काफ़ी व्यस्त हैं और उनके पास समय नहीं है। परिजनों ने अधिकारियों को एक चिट्ठी सौंपी है, जिसे मुख्यमंत्री तक पहुँचाए जाने का आश्वासन दिया गया है। जब हमने छानबीन की तो पता चला कि झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल विस्तार में व्यस्त हैं।

जब हमें झारखण्ड की ख़बरों को खंगाला तो पता चला कि मुख्यमंत्री सोरेन सचमुच मंत्रिमंडल विस्तार में व्यस्त हैं और उन्हें पीड़ित परिजनों की चिट्ठी पढ़ने तक का समय नहीं है। हेमंत कैबिनेट में पहली बार विस्तार हुआ है और 7 नए मंत्रियों को शामिल किया गया है। इनमें दो विधायक कॉन्ग्रेस के भी शामिल हैं, जिन्हें मंत्री बनाया गया है। हमने जब बजरंग दल के राज्य संयोजक दीपक ठाकुर से पूछा कि मुआवजा देने में प्रशासन इतनी आनाकानी क्यों कर रहा है तो उन्होंने पूरा दोष सीएम को दिया।

दीपक ठाकुर ने कहा कि सारा खेल ख़ुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इशारे पर हो रहा है। अगर वो मुआवजा का आश्वासन भी देते हैं तो वो बस एक वादा ही होगा, उसके लिए परिवार चक्कर काटते रह जाएगा लेकिन मुआवजा नहीं मिलेगा। हिंदूवादी संगठनों ने माँग की है कि उन्हें लिखित में भरोसा चाहिए। ठाकुर ने ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए कहा कि जिस तरह से मृतक नीरज के मोहल्ले को पुलिस द्वारा घेर लिया गया है, इससे लगता है कि सरकार इस मामले को दबाने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि लोहरदगा के हिन्दुओं का गुस्सा उफान पर है क्योंकि यहाँ आपातकाल जैसे हालात हैं।

नीरज की मृत्यु के बाद सभी लोग न्याय की उम्मीद में हैं, लेकिन अधिकारी नहीं सुन रहे

एक और मुद्दा है अंतिम संस्कार का। राँची रिम्स में कई हिंदूवादी नेता जमा हैं और वो नीरज राम प्रजापति के पार्थिव शरीर के साथ लोहरदगा जाना चाहते हैं। उनकी माँग है कि अंतिम यात्रा में वो सभी शामिल होंगे जबकि प्रशासन का कहना है कि इससे माहौल बिगड़ जाएगा, इसीलिए वो परिजनों के अलावा किसी को भी अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में शामिल नहीं होने देंगे। रिम्स में जमा हिंदूवादी नेताओं ने प्रशासन के इस फ़ैसले को लेकर आक्रोश जताया। ‘हिन्दू जागरण मंच’ ने कहा कि जल्द ही प्रदेश के हिन्दू हेमंत सरकार को जवाब देंगे।

ख़बर है कि प्रशासन ने सिर्फ 35 लोग को शव यात्रा में जाने की अनुमति दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बुरहान वाणी जैसे आतंकी के जनाजे में लाखों लोग शामिल होते हैं लेकिन एक निर्दोष व्यक्ति के अंतिम संस्कार में लोगों को शामिल होने से रोका जा रहा है। एक पड़ोसी ने बताया कि अंतिम संस्कार के लिए जो पारम्परिक शमशान है, जहाँ वर्षों से इस इलाके के लोग अपने मृत परिजनों का अंतिम संस्कार करते आ रहे थे, उसे भी बदला जा रहा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि पारंपरिक शमशान की शवयात्रा का मार्ग बड़ी मस्जिद, शिव मंदिर, अमला टोली, छोटी मस्जिद, कॉन्ग्रेस कार्यालय और देवी मंदिर होकर जाती है। जहाँ पर CAA समर्थकों की रैली पर हमला किया गया, वो हमला अमला टोली और कॉन्ग्रेस कार्यलय से ही किया गया था। इस बात को लेकर स्थानीय लोग काफी नाराज हैं, और यही वजह है कि पारंपरिक शमशान की जगह को बदला जा रहा है।

कौन ख़रीदेगा उसकी गढ़ी हुई माँ शारदा की मूर्तियाँ, CAA का समर्थन करने पर नीरज को मिली मौत

मुस्लिमों ने रॉड नहीं मारी, बाथरूम में गिर कर मरे नीरज, बयान बदलो: झारखंड सरकार का पीड़ित परिजनों पर दबाव

नहीं रहे नीरज प्रजापति! CAA समर्थक जुलूस पर ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ चीखते भीड़ के हमले में हुए थे घायल

मस्जिद व कॉन्ग्रेस दफ्तर से चले पत्थर: मुस्लिमों ने की गोलीबारी, ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ चीखते हुए टूट पड़ी भीड़

हिन्दुओं के घरों को फूँका, CAA समर्थक जुलूस पर हमले के लिए छतों पर जमा कर रखे थे ईंट-पत्थर

’11 फरवरी के बाद अपनी लोकसभा में एक भी अवैध मस्जिद नहीं रहने दूँगा, सारी हटा दूँगा’

भारतीय जनता पार्टी के सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कर बनाई गई मस्जिदों को हटाने को लेकर हमेशा से मुखर रहे हैं। अब उन्होंने एक बार फिर से इन अवैध मस्जिदों को हटाने की बात कही है। प्रवेश वर्मा ने सोमवार (27 जनवरी, 2020) को कहा, “जब दिल्ली में मेरी सरकार बनेगी तो 11 फरवरी के बाद एक महीने में मेरी लोकसभा में जितनी भी मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी हैं, उनमें से एक मस्जिद भी नहीं छोड़ूँगा। सारी मस्जिद हटा दूँगा।”

दिल्ली विधानसभा चुनाव में शाहीन बाग बड़ा मुद्दा भी गरमाता जा रहा है। बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने कहा है कि अगर दिल्ली में सत्ता में आए तो एक घंटे में शाहीन बाग खाली करा लेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि कौन लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। इनका मकसद सीएए को समझना नहीं है। उन्होंने एक ट्वीट के जरिए दिल्ली के सीएम पर निशाना साधते हुए कहा, “केजरीवाल जी जब आए तो लोगों ने सोचा हमारे लिए कुछ अच्छा काम करेगा, हमारे ऊपर लटक रही बुलडोजर की तलवार को हटाएगा, हमारी कॉलोनियों को पक्का करवाएगा, लेकिन केजरीवाल ने 5 साल में ऐसा कुछ भी नहीं किया।”

गौरतलब है कि ये पहली बार नहीं है जब प्रवेश वर्मा ने ‘अवैध’ मस्जिदों से जुड़े मुद्दे को सार्वजनिक तौर पर उठाया। मस्जिदों के टूटने को लेकर प्रवेश वर्मा पहले भी बयान दे चुके हैं। 18 जनवरी को एक ट्वीट करते हुए उन्होंने कहा था, “दिल्ली में भाजपा की सरकार बनते ही उन सरकारी जमीनों को खाली कराया जाएगा, जिन पर धार्मिक स्थलों का निर्माण किया गया है। दिल्ली में 54 से ज्यादा मस्जिद, मदरसे सरकारी जमीन पर बने होने की शिकायत अभी तक आई है। सूची दिल्ली के उपराज्यपाल को पहले ही दी जा चुकी है।”

बता दें कि साल 2019 के जून महीने में आधिकारिक रूप से ये मामला उठाने के बाद प्रवेश वर्मा को धमकियाँ तक मिलीं। जिसके मद्देनजर उन्हें जून 20, 2019 को पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक को चिट्ठी लिखकर जानकारी देनी पड़ी कि उन्हें फोन पर एसएमएस भेजकर और सोशल मीडिया के जरिए जान से मारने की धमकियाँ दी गई। उन्होंने उस समय इस मामले की जाँच कर आरोपितों का पता लगाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की माँग की थी। साथ ही सरकारी जमीनों पर लगातार हो रहे अतिक्रमण को लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल से जुलाई में मुलाकात की थी।

बेहोश करके किया 19 साल की लड़की का रेप: प्राइवेट पार्ट में घुसा दी लोहे की रॉड, आरोपित गिरफ्तार

साल 2012 में निर्भया का बलात्कार करने के लिए बर्बरता की हर पराकाष्ठा पार करने वाले दोषियों को अभी तक सजा भी नहीं मिली कि महाराष्ट्र के नागपुर से एक और दिल दहला देने वाली वैसी ही खबर आ गई। नागपुर में पिछले हफ्ते 19 साल की एक लड़की के साथ उसके 52 वर्षीय रूममेट ने पहले बलात्कार किया और फिर बाद में उसके प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डाल दी। पुलिस के अनुसार, बीते सोमवार (जनवरी 27, 2020) को आरोपित युवक की गिरफ्तारी हुई।

पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, आरोपित युवक का नाम योगीलाल रहांगदले है। जो स्पिनिंग मिल में बतौर सुपरवाइजर काम करता था और जिसने अपनी रूममेट एवं अपने कंपनी में काम करने वाली लड़की को कमरे में अकेला देखकर उसके साथ रेप करने की पहले कोशिश की। लेकिन, जब लड़की ने ऐसा करने से मना किया तो आरोपित ने उसके मुँह में कपड़ा ठूँस दिया, जिसके बाद वो बेहोश हो गई। योगीलाल ने लड़की के साथ बेहोशी की हालत में बलात्कार किया और फिर उसके गुप्तांग में लोहे की रॉड डाल दी। इस खबर की पुष्टि खुद एक पुलिस अधिकारी ने पीड़िता की शिकायत का हवाला देते हुए की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता अपने भाई, योगीलाल और एक अन्य महिला के साथ कमरे में रहती थी। लेकिन 21 जनवरी को उसका भाई और दूसरी महिला किसी काम से अपने गाँव गए हुए थे। तभी उसके साथ ये बर्बरता की गई। लड़की ने अपने साथ हुई इस बर्बरता के बारे में अपने भाई को 4 दिन बाद यानी शुक्रवार को बताया। जिसके बाद इस मामले में शिकायत दर्ज हुई।

गौरतलब है कि निर्भया केस के बाद ये पहला मामला नहीं है जब इस तरह लड़की के गुप्तांग में रॉड डालकर बलात्कारी ने अपनी हैवानियत का सबूत दिया हो। इससे पहले पश्चिम बंगाल में भी 22 अक्टूबर 2018 को इसी तरह की घटना सामने आई थी। जब एक आदिवासी महिला का रेप करके उसके गुप्तांग में रॉड डाला गया था।इसके अलावा पटना के नौबतपुर में भी बलात्कार के आरोपितों ने महिला का रेप न कर पाने के गुस्से मे उसके प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डाल दी थी।

‘हिम्मत कैसे हुई तवायफ के बच्चे की’ – शोएब ने पैनेलिस्ट को कहा, गोस्वामी ने दिखाया बाहर का रास्ता

रिपब्लिक टीवी पर अर्नब गोस्वामी के साथ डिबेट के दौरान इंडिया मुस्लिम फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन के मीडिया कॉर्डिनेटर शोएब जमई ने एक पैनेलिस्ट को ‘तवायफ का बच्चा’ कह डाला। हालाँकि, शोएब जमई ने ये किस पैनेलिस्ट को कहा, ये मालूम नहीं चल पाया। क्योंकि जिस समय जमई ने डिबेट में आपत्तिजनक टिप्पणी की, उस वक्त 6 अन्य पैनेलिस्ट भी वहाँ मौजूद थे।

अर्नब के शो में सोमवार (जनवरी 27, 2020) को PFI द्वारा सीएए के ख़िलाफ़ हुए दंगों को फंड दिए जाने के खुलासे पर डिबेट चल रहा था। इसी डिबेट के वीडियो में करीब 33 मिनट 50 सेकेंड के स्लॉट में शोएब को नेशनल टेलीवीजन पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते सुना जा सकता है। गौर करने वाली बात है कि शोएब ने डिबेट से जुड़ने के बाद ही इधर-उधर की बातें करनी शुरू कर दी थी। जिसके कारण अर्नब ने कई बार उन्हें डिबेट से हटाने की बात की। लेकिन लगातार हस्तक्षेप के कारण जब उन्हें बोलने दिया गया तो वह किसी पैनेलिस्ट की बात पर नाराज हो गए। शोएब को डिबेट में कहते सुना जा सकता है, “तवायफ के बच्चे की हिम्मत कैसे हुई औरतों और बच्चों के बारे में बोलने की।”

डिबेट से लिया गया स्क्रीनशॉट

वीडियो में देखा जा सकता है कि इन शब्दों को सुनने के बाद अर्नब गोस्वामी काफी नाराज हो गए। उन्होंने तुरंत जमई को डिबेट से हटाने की माँग की और फिर जमई के जाने के बाद गोस्वामी ने तीन बार इसके लिए सबको शुक्रिया कहा।

शोएब जमई का ट्विटर अकॉउंट

उल्लेखनीय है कि शोएब जमई के ट्विटर अकॉउंट के मुताबिक वो खुद को शाहीन बाग में हो रहे प्रदर्शन का मीडिया कॉर्डिनेटर बताते हैं और चूँकि कई चैनल के प्राइम टाइम में वो अपनी राय रखने जाते हैं, तो वो खुद को प्राइम टाइम पेनालिस्ट और साइंटिस्ट भी बताते हैं।

जमई के ट्विटर वॉल पर शाहीन बाद प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो डले हुए हैं। अभी हाल ही में उन्होंने एक वीडियो डाली है, जिसमें वे योगेंद्र यादव के कानों में कुछ फुसफुसा रहे हैं। और ट्वीट में दावा कर रह हें योगेंद्र यादव के प्रदर्शन में पहुँचने से उनके आंदोलन को ताकत मिली है।

अभी हाल ही में रिपब्लिक टीवी के एक डिबेट में उन्होंने खुद को शाहीन बाग के प्रदर्शन का आधिकारिक मीडिया कॉर्डिनेटर कहा था। जिसके बाद अशोक पंडित ने उनके पूछा था कि क्या वो कोई जनसंपर्क एजेंसी भी चलाते हैं।

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शरजील इमाम को ‘देशद्रोही’ कहने पर चुनाव विश्लेषक के साथ शाहीन बाग़ मीडिया संयोजक ने की बदसलूकी

शरजील इमाम को ‘देशद्रोही’ कहने पर चुनाव विश्लेषक के साथ शाहीन बाग़ मीडिया संयोजक ने की बदसलूकी

चुनाव विश्लेषक और ‘जन की बात’ के CEO प्रदीप भंडारी को असम को भारत से काटने की बात करने वाले शरजील इमाम को देशद्रोही कहना भारी पड़ गया। दरअसल प्रदीप भंडारी रिपब्लिक टीवी के शो ‘ललकार’ को होस्ट कर रहे थे। इस दौरान जैसे ही उन्होंने इमाम को देशद्रोही और देश के लिए खतरा बताया, एक पैनलिस्ट पहले तो जोर-जोर से चिल्लाने लगा और फिर उनके साथ बदसलूकी भी की।

शो के दौरान प्रदीप भंडारी पैनलिस्ट से सवाल पूछते हैं कि जो शरजील इमाम को सपोर्ट करते हैं? जिसकी आतंकवादी सोच है। शर्म आनी चाहिए ऐसे लोगों को। शरजील इमाम के लिए देशद्रोही शब्द सुनते ही गुस्से से भरे पैनलिस्ट ने प्रदीप भंडारी की कॉलर पकड़ ली और बदसलूकी करने लगा, गालियाँ देने लगा।

घटना के बारे में ट्वीट करते हुए प्रदीप भंडारी ने कहा, “कॉलर पकड़ना और गालियाँ सुनना वह कीमत है जो मुझे शरजील इमाम को देशद्रोही कहने के लिए चुकानी पड़ी। लेकिन शरजील इमाम के सभी मूक समर्थकों सुन लो। मुझे यह कहने से कोई नहीं रोक सकता कि शरजील इमाम और उनके जैसे लोग हमारे देश के लिए देशद्रोही और खतरा हैं।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों शरजील इमाम का विवादित वीडियो सामने आया था। जिसमें वो नॉर्थ ईस्ट को भारत से काटने की बात करता है। शरजील ने वीडियो में कहा था, “असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है। असम और इंडिया कटकर अलग हो जाए, तभी ये हमारी बात सुनेंगे। असम में मु###नों का क्या हाल है, आपको पता है क्या? CAA-NRC लागू हो चुका है वहाँ। डिटेंशन कैंप में लोग डाले जा रहे हैं और वहाँ तो खैर कत्ले-आम चल रहा है। 6-8 महीनों में पता चलेगा कि सारे बंगालियों को मार दिया गया वहाँ, हिंदु हो या मु###न। अगर हमें असम की मदद करनी है तो हमें असम का रास्ता बंद करना होगा फौज के लिए और जो भी जितना भी सप्लाई जा रहा है बंद करो उसे। बंद कर सकते हैं हम उसे, क्योंकि चिकन नेक जो इलाका है, वह मुस्लिम बहुल इलाका है।”

डॉक्टर ने मुझे ऐसा टीका लगाया कि नर्सें दिखने लगीं हूर: पाक PM इमरान खान, Video वायरल

पाकिस्तान के पीएम और क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान का जवाब नहीं। देश की आर्थिक स्थिति उनसे सँभल नहीं रही मगर एक इंजेक्शन में उन्हें नर्सें हूर जरूर नजर आने लगीं। इमरान खान ने एक इंजेक्शन को हूर दिखने का कारण बता डाला। दरअसल पूरा मामला इमरान खान के एक वायरल वीडियो को लेकर है। इमरान खान व इनके मंत्री हमेशा ही अपनी बेतुकी और विवादित बयान को लेकर सोशल मीडिया पर ट्रोल होते रहते हैं। इसी क्रम में इमरान खान एक ऐसी ही बयानबाजी कर गए जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

पाकिस्तानी पत्रकार नायला इनायत ने वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में इमरान खान कहते हुए सुने जा रहे हैं कि एक ही इंजेक्शन में सभी नर्से उन्हें हूर नजर आने लगी थी। इमरान का यह वीडियो कराची स्थित शौकत खानम हॉस्पिटल का बताया जा है। इमरान ने बताया कि 2013 में चुनाव प्रचार के दौरान वह अचानक गिर गए। जिस कारण उनकी पीठ में चोट आई थी। दर्द ज्यादा होने के कारण इमरान को हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ उन्हें दर्द कम करने के लिए एक इंजेक्शन दिया गया।

उस घटना को याद करते हुए इमरान ने कहा, “डॉक्टर ने मुझे ऐसा टीका लगाया कि मैं अपने दर्द को एक दम ही भूल गया। लगा कि मुझे तो कोई प्रॉब्लम ही नहीं है, दुनिया बदल गई। यहाँ तक कि वहाँ मौजूद सभी नर्सों में मुझे हूरें नजर आने लगी। मैंने डॉक्टर को दोबारा वही टीका लगाने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने मुझे दूसरा पेनकिलर नहीं दिया। यहाँ के डॉक्टर वाकई तारीफ के काबिल हैं।”

इस वीडियो के सामने आने के बाद अब इमरान का जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है। ट्विटर पर एक से बढ़कर एक व्यंग्यात्मक मीम्स और कमेंट्स की बाढ़ आ गई। ट्विटर यूजर्स ने पाक पीएम की खिंचाई में कोई कसर नहीं छोड़ी है।