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गाय काटना हमारा फर्ज; हम जहाँ खड़े वही मस्जिद, वहीं पढ़ेंगे नमाज: शाहीन बाग का मास्टरमाइंड शरजील

शाहीन बाग़ के मुख्य साज़िशकर्ता शरजील इमाम का एएमयू का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उसने महात्मा गाँधी को बीसवीं सदी का सबसे फासिस्ट नेता बताया था क्योंकि वो ‘राम राज्य’ की बातें करते थे। शरजील ने पूरे उत्तर-पूर्व को शेष भारत से अलग कर के ‘टुकड़े-टुकड़े’ की मंशा जाहिर की थी। शरजील ने वामपंथी संगठनों को लताड़ते हुए सीपीएम को एक हिंसक पार्टी करार दिया था। असम को लेकर दिए गए उसके भड़काऊ बयान के कारण उसके ख़िलाफ़ कई केस दर्ज हुए। जहानाबाद स्थित उसके पैतृक निवास पर केंद्रीय एजेंसियों ने छापेमारी की, जिसके बाद पता चला कि वो फरार हो गया है।

शरजील ने एएमयू में बोलते हुए कहा था कि मुस्लिमों ने मुस्लिम लीग के अभ्युदय से पहले कभी भी कॉन्ग्रेस ने वोट नहीं किया। उसने कई इस्लामी दलों के नाम गिनाते हुए कहा कि आज़ादी से पहले भी मुस्लिम कॉन्ग्रेस को वोट नहीं देते थे। शरजील ने आरोप लगाया कि मुस्लिमों के कत्लेआम आज़ादी से पहले ही चालू हो गए थे। उसने कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाया कि जो उलेमा पार्टी के ख़िलाफ़ थे, उन्हें बदनाम किया गया और अंग्रेजों का एजेंट ठहरा दिया गया।

शरजील इमाम ने इस दौरान गोरक्षा पर भी बात की। उसने दावा किया कि गोरक्षा का मुद्दा 1890 से काफ़ी हिंसक तरीके से चल रहा है। शरजील का मानना है कि आजमगढ़ क्षेत्र में गोरक्षा के नाम पर पहला हमला किया गया और बाद में पंजाब के शहरी इलाक़ों से होते हुए ये ट्रेंड कई ग्रामीण क्षेत्रों में फैला। शरजील के आँकड़ों की मानें तो भारत में अधिकतर मुस्लिम शहरी क्षेत्रों में रहते हैं और अकेले यूपी में 30% से अधिक मुस्लिम अर्बन इलाक़ों में रहते हैं।

शरजील ने कहा कि जिन ग्रामीण क्षेत्रों में मुस्लिमों की जनसंख्या ज़्यादा है, वहाँ गोरक्षा जैसी चीजें आसानी से नहीं चल पातीं। उसने दावा किया कि जहाँ आमने-सामने की लड़ाई हो, वहाँ गोरक्षा वाले हमला नहीं कर पाते हैं। शरजील ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा:

“आज़ादी से पहले हमले उन्हीं इलाक़ों में हुए, जहाँ मुस्लिमों की जनसंख्या कम थी। जहाँ ज्यादा आबादी थी, वहाँ हमले नहीं हुए। गोरक्षा का असली खतरनाक चेहरा ईस्टर्न यूपी के देहातों में नज़र आया है, क्योंकि यहाँ मुस्लिमों की आबादी कम है। बिहार में भी ऐसा ही हुआ। गोरक्षा की एंट्री भारत में खिलाफत से है, जब मौलानाओं ने कहा कि तुम खिलाफत में हमारी मदद करो, हम गोरक्षा में करेंगे। मुशरिक के दबाव में बोला जा रहा है कि वो गोकशी न करें। अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी ने ऐसा ही कहा था।”

शरजील इमाम का इशारा मुशरिक से हिन्दुओं की तरफ था, जो एक अल्लाह की पूजा नहीं करते। गोरक्षा को लेकर शरजील ने कहा कि इस पर किसी भी प्रकार के समझौते की ज़रूरत नहीं है। उसने कहा कि मौलाना आज़ाद जैसे लोगों ने गोरक्षा का समर्थन किया, जो आज हमारे लिए ज़हर बन गया है। उसने मौलाना अहमद रज़ा ख़ान के हवाले से कहा कि मुस्लिम एक खाना ज्यादा दिन तक नहीं खा सकता और कई दिनों तक लगातार खिलाया जाए तो वो उस भोजन से नफरत करने लगता है। उसने आगे कहा कि गाय का गोश्त ही एक ऐसा है, जिसे मुस्लिम कितना भी खाए, बोर नहीं होता।

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शरजील कहता है कि हिन्दू लोग मुस्लिमों के घरों में और डाइनिंग रूम में घुस चुके हैं। वो इसके लिए भी महात्मा गाँधी को जिम्मेदार ठहरता है और उन मौलानाओं को भी, जिन्होंने गाँधी जी का समर्थन किया। शरजील इतिहास को फिर से लिखने की बात करता है, ताकि मुस्लिमों का अपना इतिहास हो। उसने बताया कि इतिहास की किताबों से उसका भरोसा कब का उठ चुका है। शरजील ने आरोप लगाया कि जामिया में सड़क पर नमाज पढ़ने से मुस्लिमों को रोका गया। साथ ही उसने पूछा कि क्या एक मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नमाज़ भी नहीं पढ़ सकते?

उसने साथ ही पंडितों को भी निशाना बनाया। शरजील का कहना था कि नमाज़ मुस्लिमों के लिए आवाम का मामला है जबकि हिन्दुओं में किसी पंडित को बैठा कर पूजा करा दिया जाता है। शरजील ने कहा, “हिन्दुओं में तो होगा कोई पंडित जो बैठ कर उनके लिए पूजा कर रहा होता है।” उसे पूछा कि किस हिन्दू को दिन में 5 बार पूजा करनी होती है? उसने नामज़ को डेली रूटीन बताते हुए कहा कि मस्जिद दूर हो तो मुस्लमान कहीं भी खड़े होकर नमाज पढ़ेगा।

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जेएनयू के छात्र शरजील इमाम को गिरफ़्तार कर लिया गया है। पिछले कई दिनों से पुलिस को उसकी तलाश थी। उसकी तलाश में उसके जहानाबाद स्थित पैतृक आवास पर छापेमारी भी की गई थी, लेकिन वो नहीं मिला था। शरजील के ख़िलाफ़ असम पुलिस से लेकर ईटानगर क्राइम ब्रांच और अलीगढ पुलिस भी पड़ी हुई थी। उसने असम को भारत से अलग करने की धमकी थी। शरजील ने लोगों को सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकेन्स नेक) को ब्लॉक कर के पूरे उत्तर-पूर्व को शेष भारत से अलग-थलग करने के लिए भड़काया था और अपनी ‘टुकड़े-टुकड़े’ वाली मानसिकता का परिचय दिया था।

शरजील इमाम को बिहार के जहानाबाद से गिरफ़्तार किया गया। उस पर देशद्रोह के आरोप के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। उसके बारे में पता चला था कि वो नेपाल भागना चाहता था लेकिन उससे पहले ही उसे धर दबोचा गया। इस सम्बन्ध में अभी और भी सूचनाएँ आनी बाकी हैं।

शाहीन बाग़ के मुख्य साज़िशकर्ता ने विवादित बयान देते हुए कहा था कि राष्ट्रवाद की बात करने वाले मुस्लिमों को ‘बूत की पूजा’ करने को मजबूर करते हैं। उसने आरोप लगाया था कि न्यायपालिका आज़ादी से पहले कम पक्षपाती थी, जो दिखाता है कि मुस्लिमों को आज़ादी नहीं मिली बल्कि एक दुश्मन क़ौम उन पर हावी हो गई। साथ ही उसने ये भी कहा था कि अँग्रेज मुस्लिमों के कम दुश्मन थे, लेकिन न्यायपालिका 1950 के बाद से मुस्लिओं की ज़्यादा बड़ी दुश्मन है।

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CAA समर्थन पर जान गँवानी पड़ी, सर फूटे, नौकरी छूटी, खुद को अल्पसंख्यक बताना पड़ा: 20 घटनाएँ

संसद में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के पास होने के साथ ही वामपंथियों, कट्टरपंथियों और उपद्रवियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विरोध प्रदर्शन के नाम पर देश भर में हिंसा और गुंडागर्दी की गई और कुछ जगहों पर अभी भी की जा रही है। दिल्ली, यूपी, असम, बिहार से लेकर हर जगह हिंसा और आगजनी की घटना देखी गई। कई जगहों पर हिंसक प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर जानलेवा हमला किया गया।

काफी दिनों तक इनके हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद जब देश की जनता बड़ी संख्या में CAA के समर्थन में सड़कों पर उतरने लगी तो ये प्रदर्शनकारी गुंडे और भी ज्यादा बिलबिला गए, क्योंकि उनके झूठ का पर्दाफाश होने लगा। CAA का समर्थन करने पर किसी को अपनी जान गँवानी पड़ी तो किसी की नौकरी चली गई। किसी को जान से मारने की धमकी मिली तो किसी के घरों को जला दिया गया, किसी के घर का पानी का सप्लाई बंद कर दिया गया। इन प्रदर्शनकारियों ने किसी का सिर फोड़ दिया तो किसी को अपनी जान बचाने के लिए खुद को समुदाय विशेष का साबित करना पड़ा, तब जाकर जान बची।

ऐसी बहुत सी घटनाएँ घटी हैं महज कुछ ही दिनों के भीतर। नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करना किसी को कितना महँगा पड़ सकता है, इसके कई सारे उदाहरण सामने आए। हम यहाँ पर आपको ऐसी ही कुछ घटनाओं के बारे में बता रहे हैं:-

1. इसका ताजा उदाहरण है झारखंड के लोहरदगा में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में निकाले गए जुलूस पर हुई हिंसा में घायल नीरज राम प्रजापति की मौत। लोहरदगा में 23 जनवरी को CAA के समर्थन में हुई रैली में 15 से 20 हज़ार लोग शामिल थे, फिर भी मुस्लिम मोहल्ले में जुलूस के पहुँचते ही इतनी तेज़ पत्थरबाजी हुई कि लोगों में भगदड़ मच गई। CAA के समर्थन में निकली रैली पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने ईंट-पत्थर से हमला किया। पेट्रोल बम फेंके। हिंदुओ के घरों और वाहनों के साथ महिलाओं तक को निशाना बनाया गया। नीरज इसी दौरान घायल हो गए थे।

2. हाल ही में केरल के ही एक डॉक्टर को सिर्फ इस वजह से नौकरी से निकाल दिया गया क्योंकि वह CAA के समर्थन में सरकार और कानून के साथ खड़ा था। ट्विटर पर @vedvyazz नाम से ट्विटर अकाउंट चलाने वाले एक डॉक्टर ने अपनी कहानी लिखते हुए बताया था कि किस तरह से उनकी पूरी पहचान और उनके कार्यस्थल से लेकर उसके घर तक की गोपनीय जानकारी को कुछ CAA विरोधियों द्वारा सार्वजनिक कर दिया गया और आखिर में उन्हें नौकरी से निकाले जाने के बाद डर के कारण अपने ही पैतृक शहर से भागने को मजबूर कर दिया गया।

3. इससे पहले केरल के तिरुवनंतपुरम के डॉक्टर रंजीत विजयाहरि ने दावा किया था कि नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करने के कारण उन्हें इस्लामी कट्टरपंथी निशाना बना रहे हैं। वे गैस्ट्रो सर्जन हैं और अपनी पत्नी के साथ हॉस्पिटल चलाते हैं। उन्होंने बताया था कि CAA का समर्थन करने के लिए ‘जिहादी तत्व’ उन्हें परेशान कर रहे हैं।

4. शाहीन बाग में पिछले कई दिनों से हो रहे विरोध प्रदर्शन की वजह से एक इंजीनियर को नौकरी छोड़नी पड़ी। विरोध प्रदर्शन के कारण कालिंदी कुंज-नोएडा रोड बंद है और इस वजह से सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रशांत को ऑफिस पहुँचने में काफी परेशानी होने लगी। रोज-रोज लेट पहुँचने की वजह से उनकी हाफ डे की अटेंडेंस लग रही थी। सैलरी आधी हो गई और सफर का खर्च दोगुना। 6-7 घंटे रोड पर बीतने लगा, उसके बाद 9 घंटे की नौकरी। इतनी मेहनत के बाद भी सैलरी आधी मिल रही थी। ऐसे में जॉब कर पाना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा था, तो उन्हें तंग आकर नौकरी से इस्तीफा देना पड़ा।

5. सत्ता-विरोधी दलों ने मानो CAA-विरोधी माहौल के बहाने अपनी मानसिकता के जहर को भुनाने की कसम खा ली है। इसका ही एक ताजा उदाहरण कैब सर्विस ओला (Ola) के एक ड्राइवर के साथ देखने को मिला है, जिसे एक CAA विरोधी ने सिर्फ इस वजह से Ola से नौकरी से निकलवा दिया क्योंकि वह CAA और NRC के मुद्दे पर सरकार के समर्थन में था।

6. शाहीन बाग में चल रहे CAA-विरोधी प्रदर्शन में न्यूज़ नेशन के वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया के साथ वहाँ प्रदर्शन कर रहे गुंडों ने बदसलूकी की। यही नहीं, उनके साथ हाथापाई करने के बाद उनका कैमरा भी तोड़ दिया गया। इस दौरान सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो में धक्का-मुक्की कर रही भीड़ को अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते भी सुना गया।

7. दिल्ली के शाहीन बाग में न्यूज नेशन के वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया पर हमले के बाद मुंबई में भी न्यूज नेशन की टीम पर हमला किया गया। मुंबई के नागपाड़ा इलाके में सीएए के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन की कवरेज करने गए वीडियो जर्नलिस्ट ओमप्रकाश केवट के साथ मारपीट की गई। उनका कैमरा भी तोड़ दिया गया।

8. केरल के मलप्पुरम जिले के कुट्टिपुरम में एक कॉलोनी के हिंदू निवासियों को CAA का समर्थन करने पर पीने का पानी देने से वंचित कर दिया गया और साथ ही उन्हें मुस्लिम समूहों द्वारा बहिष्कार का भी सामना करना पड़ा। कॉलोनी के पास रहने वाला एक व्यक्ति हिंदू बहुल कॉलोनी के लोगों के लिए पीने के पानी की आपूर्ति करता था। मगर CAA का समर्थन करने के बाद कॉलोनी के हिंदुओं को पानी की आपूर्ति नहीं की गई।

9. इसी तरह केरल में CAA का समर्थन करने पर राज्य भाजपा के सचिव एके नजीर की बेरहमी से पिटाई की गई। नजीर पर तब क्रूरतापूर्वक हमला किया गया, जब वह इडुक्की जिले के थूकुप्पलम क्षेत्र की एक मस्जिद में नमाज़ अदा कर रहे थे। हमले में वह बुरी तरह घायल हो गए थे। हमलावर चरमपंथी संगठन SDPI कार्यकर्ताओं ने कहा था कि जो लोग नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करते हैं, उन्हें जिंदा नहीं बख्शा जाएगा।

10. केरल में ही एक सामाजिक कार्यकर्ता को बुरी तरह से पीट दिया गया। केरल में कोल्लम ज़िले के इरुकुजुई में एक वरिष्ठ मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) को सीएए-एनआरसी अधिकारी समझकर एक मुस्लिम परिवार ने बेरहमी से पीट दिया। आशा कार्यकर्ता की पहचान महेश्वरी अम्मा के रूप में की गई, जो कि एक आँगनवाड़ी कार्यकर्ता भी हैं।

11. इसी तरह राजस्थान और पश्चिम बंगाल में दो महिलाओं को CAA और NRC से संबंधित आँकड़े जुटाने वाली समझकर भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। राजस्थान के कोटा में, राष्ट्रीय आर्थिक जनगणना विभाग में काम करने वाली नज़ीरान बानो पर मुस्लिम भीड़ ने उस समय हमला किया, जब वह बृजधाम क्षेत्र में राष्ट्रीय अर्थशास्त्र जनगणना 2019-2020 के लिए डेटा इकट्ठा कर रही थीं। जब उन्होंने भीड़ को यकीन दिलाया कि वह उनकी तरह मुस्लिम हैं, तब कही जाकर उन्हें छोड़ा गया।

12. पटना कॉलेज में एक छात्र को सिर्फ़ इसीलिए पीटा गया, क्योंकि उसने फेसबुक पर नागरिकता संशोधन क़ानून का समर्थन किया था। उसे इतना पीटा गया कि उसका सिर फट गया। पीड़ित छात्र ने इक़बाल हॉस्टल के छात्रों पर मारपीट का आरोप लगाया उसने बताया कि जब वो परीक्षा देकर लौट रहा था, तब उसपर हमला किया गया। उसका गुनाह सिर्फ़ इतना था कि उसने सीएए के समर्थन में एक फेसबुक पोस्ट लिखा था।

13. मध्य प्रदेश के शाजापुर में CAA के समर्थन में निकाली गई तिरंगा यात्रा के दौरान कुरैशी मोहल्ला के लोगों ने पथराव किया। तिरंगा यात्रा में शामिल लोगों का कहना है कि ये यात्रा जैसे ही कुरैशी मोहल्ले में पहुँची, वहाँ मौजूद लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसके बाद वहाँ हिंसा भड़क गई। पत्थरबाजी होते देख कर आसपास के दूकानदार भी सहम गए और वो अपनी-अपनी दुकानें बंद कर के वहाँ से भाग खड़े हुए। रैली पर हमले होते ही वहाँ भगदड़ मच गई।

14. मध्य प्रदेश में CAA के समर्थन में निकाली गई शांतिपूर्ण रैली में रायगढ़ की डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा पहुँची और प्रदर्शनकारियों को पीटना शुरू कर दिया। प्रिया वर्मा ने प्रदर्शनकारियों को वहाँ से हटने के लिए कहा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर एक-दो थप्पड़ भी रसीद दिए।

15. AIADMK राज्यसभा सांसद ए मोहम्मद जॉन को संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन करने पर ऑल जमात फेडरेशन से निष्कासित कर दिया गया। फेडरेशन में मोहम्मद जॉन ‘संरक्षक’ के पद पर साल 2010 से आसिन थे। लेकिन 16 दिसंबर 2019 को उन्हें इस पद से यह कहकर हटा दिया गया कि कैब का समर्थन करके उन्होंने मुस्लिमों का अपमान किया है।

16. CAA एवं NRC के विरोध में आयोजित राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के बिहार बंद के नाम पर शनिवार (दिसंबर 21, 2019) को ‘हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया।’ राज्‍य में कई जगहों भारी हिंसा हुई। सबसे बड़ी घटना पटना के फुलवारीशरीफ में हुई, जहाँ मुस्लिम भीड़ ने हनुमान मंदिर में घुसकर तोड़-फोड़ की

17. CAA के खिलाफ दक्षिणी दिल्ली के शाहीन बाग में जारी प्रदर्शन में 19 जनवरी कुछ कश्मीरी पंडित भी पहुँचे और कश्मीरी पंडितों को न्याय दिलाने के नारे लगाने लगे। कश्मीरी पंडितों की इस नारेबाजी से नाराज होकर CAA-विरोधी प्रदर्शनकारियों ने उनके साथ झड़प शुरू कर दी जो कि कुछ ही देर में हाथा-पाई में बदल गई

18. चेन्नई में एक स्टेशनरी के दुकानदार को इसलिए जान से मारने की धमकी मिली, क्योंकि वहाँ पर CAA-NRC के समर्थन का लेबल वाला पेन बिक रहा था। दुकान पर मुस्लिमों की भीड़ जुट गई और CAA के खिलाफ नारेबाजी करने लगी। इसके बाद उसे कई जगहों से धमकी भरे कॉल आने लगे।

19. बंगलुरु में वरुण नाम के एक व्यक्ति को सीएए के समर्थन का खामियाजा तब भुगतना पड़ा, जब कुछ उपद्रवियों ने उन पर हमला कर दिया। 31 वर्षीय वरुण पर सीएए के विरोधियों ने धारदार हथियार से हमला किया था। बेंगलुरु साउथ के सांसद व युवा भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया कि वरुण जब CAA समर्थक रैली में भाग लेकर लौट रहे थे, तब उन पर चाकू और कुल्हाड़ी से हमला किया गया।

20. CAA का समर्थन करने की वजह से उबर इंडिया ने पाकिस्तानी हिंदू को मजनू का टीला शरणार्थी कैम्प तक छोड़ने से इनकार कर दिया। ड्राइवर नसीम की इस करतूत के बारे में भाजपा प्रवक्ता तेजिंदर सिंह बग्गा ने ट्विटर पर जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि नसीम को जैसे ही पता चला कि उसे अपने कैब में एक पाकिस्तानी हिन्दू को लेकर जाना है, वह वहाँ से चला गया। पाकिस्तानी हिन्दुओं ने बताया कि उबर इंडिया के ड्राइवर नसीम ने उन्हें नीचे उतरने को कहा। जैसे ही वो नीचे उतरे, वो गाड़ी लेकर फरार हो गया।

जहाँ एक तरफ CAA के विरोधी अभिव्यक्ति की आज़ादी का रोना रोते हैं और लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन को सही ठहराते हैं, वहीं दूसरी तरफ वो ख़ुद विरोधी विचार रखने वाले लोगों के साथ मारपीट करते हैं। ये उनकी असहिष्णुता नहीं है तो क्या है?

कौन ख़रीदेगा उसकी गढ़ी हुई माँ शारदा की मूर्तियाँ, CAA का समर्थन करने पर नीरज को मिली मौत

झारखण्ड में लोहरदगा में सीएए के समर्थन में निकली रैली जैसे ही मुस्लिमों के मोहल्ले तक पहुँची, मस्जिद से ताबड़तोड़ पत्थर चले। कॉन्ग्रेस दफ्तर से भी निर्दोष लोगों पर पत्थरबाजी की गई। स्थिति ये हो गई कि रैली में शामिल 15,000 लोगों में भगदड़ मच गई। मुस्लिम महिलाएँ छत से मिर्ची पाउडर और गर्म पानी डाल रही थी, जिसकी जद में आकर कई लोग घायल हुए। नीरज प्रजापति भी रैली में शामिल थे, जिनके सिर पर पीछे से लोहे की रॉड से वार किया गया। क़रीब 5 दिन तक चले इलाज के बाद राँची के रिम्स में उनकी मृत्यु हो गई।

नीरज के माता-पिता वृद्ध हैं और बीमार रहते हैं। उनके पिता रिटायर्ड शिक्षक हैं और कई दिनों से बिस्तर पर हैं। उनके पेंशन के अलावा इन लोगों की पेंटिंग व मूर्तिकारी की दुकान से जो रुपए आते थे, उससे घर का गुजरा चलता था। अभी सरस्वती पूजा आने वाली है। नीरज ने कई मूर्तियाँ अपने हाथों से गढ़ी थी। सरस्वती पूजा के कारण उम्मीद थी कि कमाई अच्छी होगी लेकिन उससे पहले परिवार पर ये कहर टूट पड़ा। नीरज के बड़े भाई भी हैं, जो उसके कामकाज में उसका सहयोग करते थे। लेकिन घर की कमाई का पूरा जिम्मा नीरज ने ही उठाया हुआ था।

नीरज के एक पड़ोसी ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि वो उस परिवार की ‘रीढ़ की हड्डी’ की तरह थे। किसी को भी पुलिस फ़िलहाल परिजनों से मिलने नहीं दे रही है। पड़ोसी ने बताया कि नीरज के बड़े भाई की दिमागी हालत ऐसी नहीं है कि वो इतने बड़े दुःख का पहाड़ झेल सकें। नीरज की पत्नी भी हैं, जिन पर पुलिस बयान बदलने का दबाव बना रही है। वो अपने पीछे दो बच्चों को छोड़ गए हैं। एक 9 साल की बेटी है और एक 3 सक का बेटा भी है। पड़ोसियों ने ऑपइंडिया ने बताया कि नीरज ने कई मूर्तियाँ बनाई थीं, जो अब कैसे बिकेगा, ये सबसे बड़ा प्रश्न है।

जहाँ तक लोहरदगा की बात है, वहाँ कर्फ्यू में सोमवार (जनवरी 27, 2020) को दो घंटे की ढील दी गई थी लेकिन नीरज की मौत के बाद फिर से कर्फ्यू में सख्ती लाइ गई। परिजनों पर पुलिस दबाव बना रही है कि नीरज का अंतिम संस्कार राँची में ही किया जाए और उनके पार्थिव शरीर को लोहरदगा न ले जाया जाए। सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने और परिजनों को न्याय दिलाने की बजाय प्रशासन ‘हालात बिगड़ने’ की बात कह के नीरज के अंतिम संस्कार को लेकर अपनी मनमानी चलना चाह रहा है।

नीरज की भाभी को ब्रेस्ट कैंसर है। ऐसे में एक रिश्तेदार ने ऑपइंडिया ने बताया कि उनकी मौत के बाद रिश्तेदार लोग ही पूरा जिम्मा संभाल रहे हैं क्योंकि परिवार में कोई भी ऐसा नहीं है जो स्थिति ने निपट सके। रिश्तेदार लोग असमंजस में हैं कि दाह संस्कार कैसे और कहाँ होगा। नीरज को मौत के बाद उनके साले संतोष को फोन किया गया, जो राँची पहुँचे और उन्होंने अपना बयान दर्ज कराया। अपने बयान में उन्होंने पुलिस व प्रशासन पर अफवाह फैलाने और झूठ बोलने का आरोप लगाया।

झारखण्ड बजरंग दल ने ऑपइंडिया को बयान देते हुए कहा कि नीरज की मौत की जाँच सही तरीके से नहीं की गई तो आंदोलन किया जाएगा। नीरज का घर लोहरदगा के ‘रघुनन्दन लेन’ में स्थित है, जहाँ ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। बजरंग दल के पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि ऐसा क्या है जिसे पुलिस व प्रशासन छिपा रहा है?

खुली केजरीवाल के ‘शिक्षा क्रांति’ के दावों की पोल, अमित शाह ने बदला दिल्ली चुनाव का रुख

दिल्ली में 8 फरवरी को मतदान होने वाला है। चुनाव की तारीख सामने आने के साथ ही आम आदमी पार्टी (AAP) के सुप्रीमो और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के भीतर की घबराहट साफ तौर पर दिखाई देने लगी है। केजरीवाल ने 25 जनवरी को दिल्ली सरकार द्वारा किए गए कामों का हवाला देते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ‘चैलेंज’ दिया था कि वो दिल्ली के किसी भी सरकार स्कूल का भ्रमण करके देख सकते हैं कि उसमें कितना ज्यादा सकारात्मक बदलाव हुआ है।

अब केजरीवाल के चैलेंज का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार (जनवरी 28, 2019) को एक वीडियो ट्वीट किया है। इसमें बीजेपी के 8 सांसदों द्वारा स्कूल का दौरा किया गया है। इस वीडियो को ट्वीट करते हुए अमित शाह ने लिखा है, “अरविंद केजरीवाल जी आपने मुझे दिल्ली सरकार द्वारा संचालित स्कूल देखने के लिए बुलाया था। कल दिल्ली भाजपा के आठों सांसद अलग-अलग स्कूल में गए और देखिए इनका क्या हाल है…इनकी बदहाली ने आपकी ‘शिक्षा की क्रांति’ के दावों की पोल खोल दी। अब आपको दिल्ली की जनता को जवाब देना होगा।”

वीडियो में 8 बीजेपी सांसद अलग-अलग स्कूल में जाते हैं और उसकी वास्तविकता को दिखाते हैं। वीडियो में आप देख सकते हैं कि स्कूल की छतें टूटी हुई हैं, छात्र खुले में पढ़ाई कर रहे हैं। टॉयलेट गंदे हैं, पीने के लिए साफ पानी नहीं है। वीडियो में एक जगह सर्वोदय बाल विद्यालय का छात्र यह कहते हुए नजर आता है कि इसमें अच्छे से पढ़ाई नहीं होती है। कभी सर आते हैं, कभी नहीं आते हैं। बीजेपी की मीनाक्षी लेखी ने जिस स्कूल का दौरा किया, उसमें उन्होंने बहुत पानी पीने की जगह दिखाई, जो कि बेहद गंदे थे। पानी पीने की जगह आगे झाड़ू पड़े हुए थे और नीचे गंदा पानी बह रहा था। वीडियो में मीनाक्षी लेखी कहती हैं कि 61% स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं है और 45% स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। यही वजह है कि छात्रों के बोर्ड का रिजल्ट गिरता जा रहा है।

अमित शाह द्वारा केजरीवाल के झूठ का पर्दाफाश करने के साथ ही यह साफ हो गया है कि बीजेपी चुनाव जीतने के लिए लड़ रही है, जबकि कॉन्ग्रेस तो अभी भी अपना अस्तित्व ही ढूँढ रही है। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी दिल्ली में किए गए ‘काम’ को लेकर चुनाव लड़ने की बात कहती है, लेकिन पिछले हफ्ते जब शाह ने दिल्ली में एक रैली में केजरीवाल के काम की पोल खोल तो AAP का सारा खेल ही बिगड़ गया। बीजेपी केंद्र में किए गए काम के उपलब्धियों के आधार पर वोट माँग रही है।

मुस्लिमों ने रॉड नहीं मारी, बाथरूम में गिर कर मरे नीरज, बयान बदलो: झारखंड सरकार का पीड़ित परिजनों पर दबाव

झारखण्ड के लोहरदगा में सीएए के समर्थन में रैली क्या निकली, अमला टोली के मुस्लिमों ने ऐसा कहर बरपाया कि 15,000 लोगों की भीड़ भी असहाय नज़र आई। इलाक़े के कॉन्ग्रेस विधायक व कैबिनेट मंत्री रामेश्वर उराँव भी लीपापोती के उसी मोड में हैं, जो उनका प्रशासन व पुलिस कर रही है। बता दें कि गुरुवार (जनवरी 23, 2020) को हुई इस रैली में लोहरदगा निवासी नीरज राम प्रजापति ने भी हिस्सा लिया था। उनके सिर पर लोहे की रॉड से प्रहार किया गया था, उन पर पत्थर चलाए गए और उन्हें अपनी दुकान में छिप कर जान बचानी पड़ी। इसके बाद वो घर पहुँचे और बेहोश हो गए।

बेहोश होते ही घर में कोहराम मच गया और उन्हें किसी तरह सदर अस्पताल ले जाया गया। स्थिति बिगड़ने के बाद वहाँ से उन्हें राँची के ऑर्किड हॉस्पिटल ले जाया गया। प्रशासनिक अक्षमता का आलम देखिए कि उन्हें ले जाने के लिए एक एम्बुलेंस तक मुहैया कराने से बार-बार इनकार किया जाता रहा। उनके परिजनों को कहा जाता रहा कि स्थिति खराब है और इसीलिए एम्बुलेंस नहीं जा सकती। खैर, परिजन उन्हें ऑर्किड हॉस्पिटल लेकर गए। वहाँ से उन्हें रिम्स रेफेर कर दिया गया क्योंकि ऑर्किड हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे।

परिजनों को उम्मीद थी कि रिम्स के नए ट्रॉमा सेंटर में उनका इलाज हो पाएगा लेकिन ये संभव न हो सका। उनकी मृत्यु हो गई। नीरज की मृत्यु के बाद प्रशासन ने रिम्स के हवाले से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की। इस विज्ञप्ति में बताया गया है कि नीरज की मृत्यु कार्डियक अरेस्ट से हुई है। रिम्स के चिकित्सकों के हवाले से बताया गया कि उनके शरीर पर किसी भी प्रकार के चोट के निशान नहीं हैं। उनकी मौत का कारण ‘सेप्टिक शौक फ्रॉम ब्रेन स्टेम ब्लीड’ को बताया जा रहा है। स्पष्ट कहा गया है प्रशासन द्वारा कि उनकी मौत का कारण सीएए के ख़िलाफ़ हुई हिंसा नहीं है। लेकिन, क्या सरकार की नज़र में स्थानीय लोग और पीड़ित परिजन झूठे हैं?

प्रशासन की प्रेस विज्ञाप्ति: हिंसा के कारण नहीं हुई नीरज की मौत

ऑपइंडिया ने मृतक नीरज के परिजनों से संपर्क साधा। उनकी पत्नी का स्पष्ट कहना है कि वो सीएए के समर्थन में हुई रैली में गए थे, जहाँ पत्थरबाजी का उन्हें सामना करना पड़ा। भागते-भागते वो दुकान में जाकर छिप गए। परिजनों ने बताया कि उन पर पुलिस और प्रशासन लगातार दबाव बना रहा है कि वो मीडिया के सामने बोलें कि नीरज की मृत्यु बाथरूम में गिर जाने के कारण हुई है। नीचे हम नीरज की पत्नी के भाई संतोष कुमार का वीडियो संलग्न कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने बताया है कि सीएए की रैली के ख़िलाफ़ की गई हिंसा में चोट लगने से नीरज के माथे का नस फट गया था, इससे उनकी मौत हो गई। संतोष ने पुलिस के बयान को नकार दिया और कहा कि हार्ट अटैक से मौत होने की बात झूठी है और पुलिस भी झूठ बोल रही है।

संतोष ने आरोप लगाया कि प्रशासन अफवाह फैला रहा है। उन्होंने कहा कि किसके दबाव में ये सब किया जा रहा है, उन्हें नहीं मालूम। वैसे सरकार परिजनों पर अपना बयान बदलने के लिए दबाव क्यों बना रही है, ये समझा जा सकता है। पुलिस को दर्ज कराए गए बयान में परिजनों ने स्पष्ट कहा है कि नीरज के माथे पर पीछे से लोहे की रॉड से वार किया गया। फिर पुलिस बाथरूम में गिर कर मरने की बात कहने को क्यों कह रही है? आख़िर इस हिंसा के साज़िशकर्ताओं को क्यों बचाया जा रहा है? नीचे हम परिजनों के प्रारंभिक बयान को लगा रहे हैं, जो उन्होंने पुलिस के समक्ष दिया:

ऑपइंडिया से बात करते हुए एक अन्य रिश्तेदार ने बताया कि लोहरदगा में मृतक के मोहल्ले में पुलिस बल भारी मात्रा में तैनात कर दिया गया है। मीडिया को परिजनों से बात करने से रोका जा रहा है। जहाँ पर नीरज के साथ ये घटना हुई, उसे ‘अंजुमन मोहल्ला’ के नाम से जाना जाता है। जब उन पर हमला हुआ, तब वो रैली में मुस्लिमों द्वारा की गई हिंसा से भाग कर घर आ रहे थे। परिजनों ने बताया कि जब वो राँची हॉस्पिटल में लाए गए थे, तब उनका बॉडी मूवमेंट भी लगभग ख़त्म हो गया था। हालाँकि, रिम्स लाते समय कुछ मूवमेंट दिखी थी। डॉक्टरों का कहना था कि इंटरनल ब्लीडिंग के कारण उनकी हालत ऐसी हुई थी। अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इन्तजार है।

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मंदिर से लाउडस्पीकर हटाने का आदेश: कमलनाथ को मिली खुली चुनौती – ‘देखते हैं, कोई कैसे जब्त करता है’

मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार द्वारा कोलाहल नियंत्रण कानून का हवाला देकर आष्टा के प्राचीन शिव मंदिर से लाउडस्पीकर हटवाने का आदेश आने के बाद सियासी घमासान शुरू हो गया। भाजपा नेताओं ने कमलनाथ सरकार पर धार्मिक भेदभाव करने का आरोप लगाया। साथ ही प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कॉन्ग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया।

पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपने ट्विटर अकॉउंट पर लिखा, “शर्मनाक तुष्टीकरण! कमलनाथजी, कोलाहल नियंत्रण के नाम पर मंदिर से स्पीकर हटाने का जो आदेश जारी हुआ है, क्या रात्रि 10 से सुबह 6 के बीच स्पीकर का उपयोग करने वाले दूसरे धार्मिक स्थलों पर भी आप यह लागू करवा पाएँगे? प्रदेश के मुखिया की दृष्टि में तो सभी धर्म समान होने चाहिए या नहीं? “

इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने रामचरित मानस की चौपाई का उल्लेख करते हुए कमलनाथ सरकार को चेताया। उन्होंने लिखा, “चलत बिमान कोलाहल होई। जय रघुबीर कहइ सबु कोई। कॉन्ग्रेस सरकार ने मंदिर से लाउडस्पीकर जब्त करने का आदेश दिया है! हम भी देखते हैं उस मंदिर से कोई कैसे लाउडस्पीकर जब्त करता है!”

गौरतलब है कि शिवराज सिंह चौहान से पहले प्रदेश में भाजपा के मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने भी ट्वीट कर कमलनाथ सरकार पर हमला बोला था। उनके बाद ही शिवराज सिंह चौहान की टिप्पणी आई।

लोकेंद्र ने कमलनाथ सरकार के इस फैसले को तुष्टिकरण की हद बताते हुए लिखा था, “सुनो कमलनाथजी! यदि कोलाहल नियंत्रण कानून है तो वह केवल मंदिरों के लिए नहीं हो सकता। आपके जीवन में यदि कोई पारदर्शिता बची है तो रात के 10 से सुबह के 6 बजे तक इसे सभी के ऊपर लागू कराइए, वरना न आष्टा के मंदिर से स्पीकर हटेंगे, न किसी मंदिर से। पराकाष्ठा है तुष्टीकरण की।”

अपने ट्वीट में लोकेंद्र ने सीहोर जिले के आष्टा की हिंदू उत्सव समिति का एक खत भी शेयर किया। इस पत्र में सीएम को संबोधित करते हुए प्राचीन शिव मंदिर से लाउडस्पीकर हटाने के आदेश का जिक्र करते हुए कहा गया कि प्रशासन ने आष्टा के पंडित हेमंत गिरि और समिति को तहसील कार्यालय बुलाकर चेतावनी दी है कि मंदिर में लाउडस्पीकर नहीं बजेगा अन्यथा उसे जब्त कर लिया जाएगा।

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हिंदू उत्सव समिति द्वारा लिखे खत का पहला पन्ना

इस खत में बताया गया स्थानीय प्राचीन शंकर मंदिर रामायण काल से स्थापित है। मंदिर में भोर के समय भस्म आरती होती है। ऐसे में आदेश की वजह से लाउडस्पीकर नहीं बज पाएगा और धार्मिक भावनाएँ आहत हो सकती हैं।

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हिंदू उत्सव समिति द्वारा लिखे खत का दूसरा पन्ना

बता दें कि प्रदेश भाजपा ने शासनादेश की एक कॉपी को शेयर किया है। जिसमें मध्य प्रदेश कोलाहल नियंत्रण एक्ट के तहत ध्वनि प्रसारण यंत्रों को एक निश्चित अवधि के दौरान ही बजाने की बात कही गई है। सभी पुलिस अधीक्षकों को संबोधित इस आदेश में प्रावधानों का पालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। वहीं नियमों के उल्लंघन की सूरत में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

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‘RSS बॉलिवुड फिल्मों की स्क्रिप्ट लिख रहा, भाजपा फिल्म इंडस्ट्री को बहुत चालाकी से इस्तेमाल कर रही’

नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी को संविधान के ख़िलाफ़ बताते हुए बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने द वायर की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी को अपना इंटररव्यू दिया। इस साक्षात्कार के दौरान स्वरा भास्कर ने नए कानून को न केवल अंसवैधानिक बताया बल्कि उसे हिंदू राष्ट्र की नींव डालने वाला बताया।

इंटरव्यू में स्वरा भास्कर ने सीएए/एनआरसी को लेकर खुलेआम झूठ बोला। उन्होंने कहा कि एनआरसी लागू होने के बाद जिन हिंदुओं को उस सूची बाहर किया जाएगा, उन्हें सीएए के सहारे दोबारा भारतीय नागरिकता मिल जाएगी। लेकिन वास्तविकता में देखा जाए तो सीएए का भारतीय नागरिकों से कोई लेना-देना ही नहीं है।

फिल्म इंडस्ट्री और बॉलीवुड कलाकारों पर बात करते हुए स्वरा भास्कर ने उन लोगों को सराहा जो उनके समर्थन में हैं और मोदी सरकार द्वारा लाए कानून के ख़िलाफ़ खड़े हैं। उनका कहना है कि इंडस्ट्री से उन्होंने कभी नहीं सोचा था इतने लोग उनकी तरह खड़े होंगे। 2016 में जेएनयू मामला होने के बाद से वो मान चुकी थीं इन मुद्दों पर बोलने वाली सिर्फ़ वहीं हैं। लेकिन अब अनुराग कश्यप, अनुभव सिन्हा, ऋचा चड्ढा औैर दीपिका पादुकोण जैसे लोगों का पक्ष जानकर उन्हें खुशी है।

शाहीन बाग के प्रदर्शन पर बैठीं महिलाओं का समर्थन करते हुए स्वरा भास्कर ने मोदी सरकार को महिलाओं के नाम पर राजनीति करने वाला बताया। साथ ही बॉलीवुड से जुड़े लोगों की बात करते हुए कहा कि फिल्म इंडस्ट्री कभी कोई आंदोलन नहीं चला सकती। क्योंकि कानून के ख़िलाफ़ बोलने के अलावा यहाँ वो लोग भी हैं, जो इस कानून का समर्थन कर रहे हैं। और सरकार उन्हें जब भी सेल्फी लेने के लिए बुलाएगी, वो वहाँ बिलकुल जाएँगे।

राजनीति से प्रभावित हुईं फिल्मों के मुद्दों पर बोलते हुए स्वरा भास्कर कहती हैं कि वर्तमान सरकार का अजेंडा अब तानाजी जैसी फिल्मों के साथ मिश्रित हो चुका है। तानाजी और छपाक जैसी फिल्मों को एक दूसरे के ख़िलाफ खड़ा किया जा रहा है। ताकि एक निश्चित समुदाय के ख़िलाफ़ माहौल बन सके।

साक्षात्कार के दौरान जब आरफा स्वरा से पूछती हैं कि क्या ये सब पॉलिटिकल अजेंडा बन चुका है। तो स्वरा भास्कर कहती हैं कि बॉलीवुड जाने-अंजाने में खुद हिंदुत्व के प्रोजेक्ट को बढ़ावा दे रहा है। उनके अनुसार, बॉलीवुड इस बात को जानता है या नहीं, लेकिन भाजपा फिल्म इंडस्ट्री को बहुत चालाकी से इस्तेमाल कर रही हैं। वे कहती हैं, “मुझे लगता है आरएसएस का नागपुर हेडक्वार्टर फिल्मों की स्क्रिप्ट लिख रहा है। कुछ बॉलीवुड के लोग उनके हिंदुत्व नैरेटिव को बढ़ाने के लिए भोंपू की तरह काम कर रहे हैं। अगर आप पिछले 5 सालों की ऐतिहासिक फिल्में देखेंगी तो पता चलेगा कि किस प्रकार मुस्लिम शासकों को दर्शाया गया और किस तरह हिंदू राजाओं को गढ़ा गया।”

स्वरा के अनुसार, पिछले 5 सालों में मुस्लिमों को काले रंगों के कपड़ों में और गाढ़ी लाइटिंग के साथ दिखाया गया। जबकि हिंदुओं को रौशनी और रंगीन कपड़ो में। ये बेहद शर्मनाक और खतरनाक हैं। स्वरा आरोप लगाती हैं कि ऐसी फिल्में ऐतिहासिक तथ्यों से दूर-दूर तक सरोकार नहीं रखतीं।

उनके मुताबिक, ये हैरानी की बात है कि मुस्लिमों को विलेन दिखाने की हिंदुत्व की धारणा को बॉलीवुड इतिहास पर आधारित फिल्मों के जरिए बढ़ावा दे रहा है, जो कि वास्तविकता में गलत है। उनके अनुसार हम ऐसी फिल्मों के जरिए अपने बच्चों को जाहिल बना रहे हैं।

गौरतलब है कि द वायर की पत्रकार आरफा खानुम और स्वरा भास्कर की इस बातचीत में भले ही आरफा केवल साक्षात्कर्ता की भूमिका में नजर आईं। लेकिन अगर इस पूरे इंटरव्यू को ध्यान से सुना जाए, तो मालूम चलेगा कि इस बातचीत के जरिए आरफा खानुम ने अपने अजेंडे के मुताबिक बॉलीवुड पर, नरेंद्र मोदी सरकार पर, सीएए कानून पर न केवल निशाना साधा बल्कि बातचीत के जरिए अपनी कुँठा भी निकाली। वहीं स्वरा ने तो जमकर अपने कार्यक्षेत्र को भला-बुरा बोला और अपने सहकर्मियों की आलोचना तक की।

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चोट हलाला, पॉलीगेमी, तलाक पर की जाती है, दर्द इन्हें होता है: मिलिए ‘The Wire’ की आरफा खानम जी से

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उत्तराखंड कॉन्ग्रेस में बगावत शुरू: MLA हरीश धामी ने प्रदेश सचिव के पद से दिया इस्तीफा

उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों में अभी समय शेष है। मगर 70 विधानसभा सीट वाले प्रदेश में केवल 11 विधायकों के साथ हाशिए पर खड़ी पार्टी कॉन्ग्रेस ने इसके लिए अपनी तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। चुनावी रणनीतियों के मद्देनजर पिछले दिनों प्रदेश में नई टीम निर्मित की गई थी। साथ ही इस दौरान राज्य कार्यकारिणी का भी गठन हुआ था। लेकिन ये घोषणा सुनते ही पार्टी में बगावती सुर उठने लगे। नतीजतन कॉन्ग्रेस के धारचूला विधायक हरीश धामी ने सोमवार को नई कार्यकारिणी से इस्तीफा दे दिया।

पार्टी से इस्तीफा देते हुए विधायक ने प्रतिपक्ष पर भी सरकार से साँठ-गाँठ के गम्भीर आरोप लगाए। धामी ने सोमवार को नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि वह विधायकों की बदौलत इस पद पर हैं। हम उनके रहमोकरम पर नहीं हैं। 11 में सात-आठ विधायक उन्हें पद से हटाने के लिए हाईकमान से बात करेंगे। उन्होंने पिछली कॉन्ग्रेस सरकार में उद्योग मंत्री डॉ इंदिरा हृदयेश पर सिडकुल मामले में गड़बड़ी करने और अपने पीआरओ को सिडकुल में अच्छे पद पर नियुक्ति देने का आरोप लगाया। उन्होंने इस प्रकरण की जाँच कराने की माँग की।

हरीश धामी ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेता और विधायक होने के बावजूद उनके साथ पार्टी में सौतेला व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा, “मुझे जलील करने के लिए ये पद दिया गया था। इसकी वजह से प्रदेश सचिव पद से इस्तीफा दिया है।” उनके अनुसार जो वार्ड मेंबर का चुनाव नहीं जीत सकते, उन्हें कार्यकारिणी में जगह दी गई।

जानकारी के मुताबिक, नाराज होने की वजह से ही उन्होंने शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष के फोन को रिसीव नहीं किया। उनके इस्तीफे पर हल्द्वानी में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश की टिप्पणी ने उनका पारा चढ़ा दिया।

गौरतलब है कि सोमवार को प्रदेश कॉन्ग्रेस की नई कार्यकारिणी की घोषणा के साथ ही उपजा विवाद सोमवार को और तूल पकड़ गया। नई कार्यकारिणी में प्रदेश सचिव पद से मिलने से खफा विधायक धामी प्रदेश कॉन्ग्रेस मुख्यालय राजीव भवन पहुँचे और वहाँ प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह की गैर मौजूदगी में उन्होंने उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना को प्रदेश सचिव पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया।

यहाँ, धस्माना ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष को ही इस्तीफा सौंपने का सुझाव दिया। बीते शनिवार को कार्यकारिणी घोषित होने पर प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के खिलाफ तल्ख हरीश धामी के तेवर सोमवार को नरम पड़े।

…वो मॉल जहाँ हर दिन बजती है अजान, आपत्ति जताने पर कहा – ‘दिवाली भी तो मनाते हैं’

चेन्नई के मरीना मॉल में स्पीकर पर अजान बजाए जाने की बात सामने आने के बाद मॉल के एडमिनिस्ट्रेशन ने इस पर अपनी सफाई दी है। मॉल का कहना है कि वे ये पाँच बार अजान बिलकुल उसी तरह बजाते हैं, जैसे वे सालाना क्रिसमस, दिवाली, पोंगल त्योहारों को मनाते हैं। उनके मुताबिक वे यहाँ की धर्मनिरपेक्षता का सम्मान करते हैं। इसलिए ऐसा करते हैं।

फर्स्टपोस्ट के पत्रकार संजय पांडे द्वारा पोस्ट की गई वीडियो पर सोमवार को रिप्लाई देते हुए मरीना मॉल ने जवाब दिया, “हम इस मामले में हस्तक्षेप करके साफ करना चाहते हैं कि जो वीडियो में सुनाई दे रहा है, वो प्रार्थना के लिए दिया गया संकेत है। हम इसे बजाते हैं, जैसे हम क्रिसमस, दिवाली पोंगल मनाते हैं। हम इस खूबसूरत जगह, जिसे हम घर कहते हैं, उसकी धर्मनिरपेक्षता का सम्मान करते हैं और निवेदन करते हैं कि आप भी इसके प्रति सचेत रहें। जय हिंद!”

हालाँकि, गौर करने वाली बात है कि जिन त्योहारों से तुलना करके मरीना मॉल अजान को जस्टिफाई करने की कोशिश कर रहा है, वो त्योहार साल में एक बार आते हैं। लेकिन अजान हर दिन 5 बार बजती है। अगर मरीना मॉल को वाकई दूसरे धर्मों से जोड़कर इसे जस्टिफाई करना है तो कायदे से इसके समकक्ष भजन या फिर श्लोक आदि होने चाहिए।

गौरतलब है कि ये मामला FirstPost (फ़र्स्टपोस्ट) के पत्रकार संजय पांडे, ने रविवार को एक वीडियो शेयर करते हुए उजागर किया था। उनके द्वारा पोस्ट की गई वीडियो के बैकग्राउंड में अजान की आवाज़ सुनाई दे रही थी। इस वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने कहा था कि यह चेन्नई का मरीना मॉल (Marina Mall) है। यहाँ अजान की आवाज़ सुनाई दे रही है जोकि बड़ी विचित्र बात है।

इसके आगे उन्होंने कहा,

“यह पागलपन और हास्यास्पद है। मैंने आज तक कभी ऐसा कुछ नहीं सुना; कम से कम भारत में तो बिल्कुल नहीं। मुझे नहीं पता कि यह किस तरह की मानसिकता है। अगली बार जब आप यहाँ आएँगे तो हो सकता है कि आपको बैकग्राउंड में चर्च की प्रेयर या भगवत गीता सुनाई दे।”


अपने ट्विटर हैंडल से इस वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन लिखा था, “सेक्युलर भारत में आपका स्वागत है। मरीना मॉल के अंदर म्यूजिक सिस्टम के ज़रिए अज़ान बज रही है। मेरी उत्सुकता यह जानने की है कि क्या इसके लिए क़ानूनी रूप से अनुमति ली गई है?” इसके बाद जल्द ही कुछ ने उन्हें भद्दी गालियाँ देते हुए ‘Get the F**k out’ भी कहा।

इस वीडियो को देखने के बाद ऑपइंडिया ने इस बात की स्पष्ट जानकारी जुटाने के लिए पत्रकार पांडे से सम्पर्क किया था। जिसके बाद उन्होंने हमें बताया कि वह एक फिल्म देखने के लिए मरीना मॉल गए थे और शो ख़त्म होने के बाद बाहर आने के बाद यह घटना घटी।

उन्होंने बताया, “मैं एक पत्रकार हूँ और मैंने देश के हर गली-नुक्कड़ में यात्रा की है। मैंने चारों महानगरों में काम किया है। मुझे ऐसा अनुभव कभी नहीं हुआ। यह कुछ नया है। और यह एक संकेत है कि हम शायद ऐसी स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ ऐसी चीजें अब बार-बार होंगी। वे मूल रूप से इसे सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “उन्होंने (मुस्लिमों) मस्जिदों से पाँच बार अज़ान को सामान्य कर दिया है, अब कोई भी इस पर आपत्ति दर्ज नहीं करता। और अगर कोई आपत्ति जताता भी है तो फिर उसे सोनू निगम की तरह सिर मुँड़वाना होगा। साथ ही लोगों से धमकियाँ भी मिलती हैं। मैंने दुबई के अपने दोस्तों से बात की है, ऐसा तो वहाँ भी नहीं होता है।”

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