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व्यस्त CM नहीं सुन रहे मुआवजे की बात, रास्ते में है मस्जिद तो बदली गई नीरज के अंतिम संस्कार की जगह

झारखण्ड के लोहरदगा में सीएए के समर्थन में निकली रैली पर मुस्लिम भीड़ ने लोहे की रॉड से हमले किए, गोली चलाई और पेट्रोल बम फेंके। मुस्लिम महिलाओं ने गर्म पानी और मिर्ची पाउडर से हमला किया। इस वारदात में ‘रघुनन्दन लेन’ के रहने वाले नीरज प्रजापति की मौत हो गई। नीरज का पार्थिव शरीर फ़िलहाल राँची के रिम्स में ही रखा हुआ है। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है लेकिन अभी तक राज्य सरकार का कोई भी नेता वहाँ पर नहीं आया है। किसी भी मंत्री ने पीड़ित परिजनों की सुध लेने की कोशिश नहीं की।

ऑपइंडिया ने इसी बीच नीरज की पत्नी और कुछ परिजनों से बातचीत की, जिसके बाद राज्य सरकार के नेताओं की पोल खुलती हुई नज़र आई। पीड़ित के परिजनों ने बताया कि राज्य सरकार मुआवजे को लेकर अभी तक कोई आश्वासन नहीं दे रही है। राँची में बैठे अधिकारियों का कहना है कि इस सम्बन्ध में लोहरदगा का प्रशासन ही कुछ कर सकता है। परिजन फ़िलहाल राँची में ही हैं। भाजपा विधायक सीपी सिंह पीड़ित परिजनों से मिलने पहुँचे और उन्होंने सरकार पर निशाना साधा।

मृतक की पत्नी की माँग है कि उन्हें सरकारी नौकरी दी जाए। उनकी एक बेटी और एक बेटा है। दोनों ही छोटे हैं। पत्नी व परिजनों ने बतौर मुआवजा 50 लाख रुपए की भी माँग की है। हालाँकि, राँची प्रशासन बार-बार कह रहा है कि मुख्यमंत्री काफ़ी व्यस्त हैं और उनके पास समय नहीं है। परिजनों ने अधिकारियों को एक चिट्ठी सौंपी है, जिसे मुख्यमंत्री तक पहुँचाए जाने का आश्वासन दिया गया है। जब हमने छानबीन की तो पता चला कि झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल विस्तार में व्यस्त हैं।

जब हमें झारखण्ड की ख़बरों को खंगाला तो पता चला कि मुख्यमंत्री सोरेन सचमुच मंत्रिमंडल विस्तार में व्यस्त हैं और उन्हें पीड़ित परिजनों की चिट्ठी पढ़ने तक का समय नहीं है। हेमंत कैबिनेट में पहली बार विस्तार हुआ है और 7 नए मंत्रियों को शामिल किया गया है। इनमें दो विधायक कॉन्ग्रेस के भी शामिल हैं, जिन्हें मंत्री बनाया गया है। हमने जब बजरंग दल के राज्य संयोजक दीपक ठाकुर से पूछा कि मुआवजा देने में प्रशासन इतनी आनाकानी क्यों कर रहा है तो उन्होंने पूरा दोष सीएम को दिया।

दीपक ठाकुर ने कहा कि सारा खेल ख़ुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इशारे पर हो रहा है। अगर वो मुआवजा का आश्वासन भी देते हैं तो वो बस एक वादा ही होगा, उसके लिए परिवार चक्कर काटते रह जाएगा लेकिन मुआवजा नहीं मिलेगा। हिंदूवादी संगठनों ने माँग की है कि उन्हें लिखित में भरोसा चाहिए। ठाकुर ने ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए कहा कि जिस तरह से मृतक नीरज के मोहल्ले को पुलिस द्वारा घेर लिया गया है, इससे लगता है कि सरकार इस मामले को दबाने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि लोहरदगा के हिन्दुओं का गुस्सा उफान पर है क्योंकि यहाँ आपातकाल जैसे हालात हैं।

नीरज की मृत्यु के बाद सभी लोग न्याय की उम्मीद में हैं, लेकिन अधिकारी नहीं सुन रहे

एक और मुद्दा है अंतिम संस्कार का। राँची रिम्स में कई हिंदूवादी नेता जमा हैं और वो नीरज राम प्रजापति के पार्थिव शरीर के साथ लोहरदगा जाना चाहते हैं। उनकी माँग है कि अंतिम यात्रा में वो सभी शामिल होंगे जबकि प्रशासन का कहना है कि इससे माहौल बिगड़ जाएगा, इसीलिए वो परिजनों के अलावा किसी को भी अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में शामिल नहीं होने देंगे। रिम्स में जमा हिंदूवादी नेताओं ने प्रशासन के इस फ़ैसले को लेकर आक्रोश जताया। ‘हिन्दू जागरण मंच’ ने कहा कि जल्द ही प्रदेश के हिन्दू हेमंत सरकार को जवाब देंगे।

ख़बर है कि प्रशासन ने सिर्फ 35 लोग को शव यात्रा में जाने की अनुमति दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बुरहान वाणी जैसे आतंकी के जनाजे में लाखों लोग शामिल होते हैं लेकिन एक निर्दोष व्यक्ति के अंतिम संस्कार में लोगों को शामिल होने से रोका जा रहा है। एक पड़ोसी ने बताया कि अंतिम संस्कार के लिए जो पारम्परिक शमशान है, जहाँ वर्षों से इस इलाके के लोग अपने मृत परिजनों का अंतिम संस्कार करते आ रहे थे, उसे भी बदला जा रहा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि पारंपरिक शमशान की शवयात्रा का मार्ग बड़ी मस्जिद, शिव मंदिर, अमला टोली, छोटी मस्जिद, कॉन्ग्रेस कार्यालय और देवी मंदिर होकर जाती है। जहाँ पर CAA समर्थकों की रैली पर हमला किया गया, वो हमला अमला टोली और कॉन्ग्रेस कार्यलय से ही किया गया था। इस बात को लेकर स्थानीय लोग काफी नाराज हैं, और यही वजह है कि पारंपरिक शमशान की जगह को बदला जा रहा है।

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’11 फरवरी के बाद अपनी लोकसभा में एक भी अवैध मस्जिद नहीं रहने दूँगा, सारी हटा दूँगा’

भारतीय जनता पार्टी के सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कर बनाई गई मस्जिदों को हटाने को लेकर हमेशा से मुखर रहे हैं। अब उन्होंने एक बार फिर से इन अवैध मस्जिदों को हटाने की बात कही है। प्रवेश वर्मा ने सोमवार (27 जनवरी, 2020) को कहा, “जब दिल्ली में मेरी सरकार बनेगी तो 11 फरवरी के बाद एक महीने में मेरी लोकसभा में जितनी भी मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी हैं, उनमें से एक मस्जिद भी नहीं छोड़ूँगा। सारी मस्जिद हटा दूँगा।”

दिल्ली विधानसभा चुनाव में शाहीन बाग बड़ा मुद्दा भी गरमाता जा रहा है। बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने कहा है कि अगर दिल्ली में सत्ता में आए तो एक घंटे में शाहीन बाग खाली करा लेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि कौन लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। इनका मकसद सीएए को समझना नहीं है। उन्होंने एक ट्वीट के जरिए दिल्ली के सीएम पर निशाना साधते हुए कहा, “केजरीवाल जी जब आए तो लोगों ने सोचा हमारे लिए कुछ अच्छा काम करेगा, हमारे ऊपर लटक रही बुलडोजर की तलवार को हटाएगा, हमारी कॉलोनियों को पक्का करवाएगा, लेकिन केजरीवाल ने 5 साल में ऐसा कुछ भी नहीं किया।”

गौरतलब है कि ये पहली बार नहीं है जब प्रवेश वर्मा ने ‘अवैध’ मस्जिदों से जुड़े मुद्दे को सार्वजनिक तौर पर उठाया। मस्जिदों के टूटने को लेकर प्रवेश वर्मा पहले भी बयान दे चुके हैं। 18 जनवरी को एक ट्वीट करते हुए उन्होंने कहा था, “दिल्ली में भाजपा की सरकार बनते ही उन सरकारी जमीनों को खाली कराया जाएगा, जिन पर धार्मिक स्थलों का निर्माण किया गया है। दिल्ली में 54 से ज्यादा मस्जिद, मदरसे सरकारी जमीन पर बने होने की शिकायत अभी तक आई है। सूची दिल्ली के उपराज्यपाल को पहले ही दी जा चुकी है।”

बता दें कि साल 2019 के जून महीने में आधिकारिक रूप से ये मामला उठाने के बाद प्रवेश वर्मा को धमकियाँ तक मिलीं। जिसके मद्देनजर उन्हें जून 20, 2019 को पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक को चिट्ठी लिखकर जानकारी देनी पड़ी कि उन्हें फोन पर एसएमएस भेजकर और सोशल मीडिया के जरिए जान से मारने की धमकियाँ दी गई। उन्होंने उस समय इस मामले की जाँच कर आरोपितों का पता लगाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की माँग की थी। साथ ही सरकारी जमीनों पर लगातार हो रहे अतिक्रमण को लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल से जुलाई में मुलाकात की थी।

बेहोश करके किया 19 साल की लड़की का रेप: प्राइवेट पार्ट में घुसा दी लोहे की रॉड, आरोपित गिरफ्तार

साल 2012 में निर्भया का बलात्कार करने के लिए बर्बरता की हर पराकाष्ठा पार करने वाले दोषियों को अभी तक सजा भी नहीं मिली कि महाराष्ट्र के नागपुर से एक और दिल दहला देने वाली वैसी ही खबर आ गई। नागपुर में पिछले हफ्ते 19 साल की एक लड़की के साथ उसके 52 वर्षीय रूममेट ने पहले बलात्कार किया और फिर बाद में उसके प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डाल दी। पुलिस के अनुसार, बीते सोमवार (जनवरी 27, 2020) को आरोपित युवक की गिरफ्तारी हुई।

पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, आरोपित युवक का नाम योगीलाल रहांगदले है। जो स्पिनिंग मिल में बतौर सुपरवाइजर काम करता था और जिसने अपनी रूममेट एवं अपने कंपनी में काम करने वाली लड़की को कमरे में अकेला देखकर उसके साथ रेप करने की पहले कोशिश की। लेकिन, जब लड़की ने ऐसा करने से मना किया तो आरोपित ने उसके मुँह में कपड़ा ठूँस दिया, जिसके बाद वो बेहोश हो गई। योगीलाल ने लड़की के साथ बेहोशी की हालत में बलात्कार किया और फिर उसके गुप्तांग में लोहे की रॉड डाल दी। इस खबर की पुष्टि खुद एक पुलिस अधिकारी ने पीड़िता की शिकायत का हवाला देते हुए की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता अपने भाई, योगीलाल और एक अन्य महिला के साथ कमरे में रहती थी। लेकिन 21 जनवरी को उसका भाई और दूसरी महिला किसी काम से अपने गाँव गए हुए थे। तभी उसके साथ ये बर्बरता की गई। लड़की ने अपने साथ हुई इस बर्बरता के बारे में अपने भाई को 4 दिन बाद यानी शुक्रवार को बताया। जिसके बाद इस मामले में शिकायत दर्ज हुई।

गौरतलब है कि निर्भया केस के बाद ये पहला मामला नहीं है जब इस तरह लड़की के गुप्तांग में रॉड डालकर बलात्कारी ने अपनी हैवानियत का सबूत दिया हो। इससे पहले पश्चिम बंगाल में भी 22 अक्टूबर 2018 को इसी तरह की घटना सामने आई थी। जब एक आदिवासी महिला का रेप करके उसके गुप्तांग में रॉड डाला गया था।इसके अलावा पटना के नौबतपुर में भी बलात्कार के आरोपितों ने महिला का रेप न कर पाने के गुस्से मे उसके प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डाल दी थी।

‘हिम्मत कैसे हुई तवायफ के बच्चे की’ – शोएब ने पैनेलिस्ट को कहा, गोस्वामी ने दिखाया बाहर का रास्ता

रिपब्लिक टीवी पर अर्नब गोस्वामी के साथ डिबेट के दौरान इंडिया मुस्लिम फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन के मीडिया कॉर्डिनेटर शोएब जमई ने एक पैनेलिस्ट को ‘तवायफ का बच्चा’ कह डाला। हालाँकि, शोएब जमई ने ये किस पैनेलिस्ट को कहा, ये मालूम नहीं चल पाया। क्योंकि जिस समय जमई ने डिबेट में आपत्तिजनक टिप्पणी की, उस वक्त 6 अन्य पैनेलिस्ट भी वहाँ मौजूद थे।

अर्नब के शो में सोमवार (जनवरी 27, 2020) को PFI द्वारा सीएए के ख़िलाफ़ हुए दंगों को फंड दिए जाने के खुलासे पर डिबेट चल रहा था। इसी डिबेट के वीडियो में करीब 33 मिनट 50 सेकेंड के स्लॉट में शोएब को नेशनल टेलीवीजन पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते सुना जा सकता है। गौर करने वाली बात है कि शोएब ने डिबेट से जुड़ने के बाद ही इधर-उधर की बातें करनी शुरू कर दी थी। जिसके कारण अर्नब ने कई बार उन्हें डिबेट से हटाने की बात की। लेकिन लगातार हस्तक्षेप के कारण जब उन्हें बोलने दिया गया तो वह किसी पैनेलिस्ट की बात पर नाराज हो गए। शोएब को डिबेट में कहते सुना जा सकता है, “तवायफ के बच्चे की हिम्मत कैसे हुई औरतों और बच्चों के बारे में बोलने की।”

डिबेट से लिया गया स्क्रीनशॉट

वीडियो में देखा जा सकता है कि इन शब्दों को सुनने के बाद अर्नब गोस्वामी काफी नाराज हो गए। उन्होंने तुरंत जमई को डिबेट से हटाने की माँग की और फिर जमई के जाने के बाद गोस्वामी ने तीन बार इसके लिए सबको शुक्रिया कहा।

शोएब जमई का ट्विटर अकॉउंट

उल्लेखनीय है कि शोएब जमई के ट्विटर अकॉउंट के मुताबिक वो खुद को शाहीन बाग में हो रहे प्रदर्शन का मीडिया कॉर्डिनेटर बताते हैं और चूँकि कई चैनल के प्राइम टाइम में वो अपनी राय रखने जाते हैं, तो वो खुद को प्राइम टाइम पेनालिस्ट और साइंटिस्ट भी बताते हैं।

जमई के ट्विटर वॉल पर शाहीन बाद प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो डले हुए हैं। अभी हाल ही में उन्होंने एक वीडियो डाली है, जिसमें वे योगेंद्र यादव के कानों में कुछ फुसफुसा रहे हैं। और ट्वीट में दावा कर रह हें योगेंद्र यादव के प्रदर्शन में पहुँचने से उनके आंदोलन को ताकत मिली है।

अभी हाल ही में रिपब्लिक टीवी के एक डिबेट में उन्होंने खुद को शाहीन बाग के प्रदर्शन का आधिकारिक मीडिया कॉर्डिनेटर कहा था। जिसके बाद अशोक पंडित ने उनके पूछा था कि क्या वो कोई जनसंपर्क एजेंसी भी चलाते हैं।

गाय काटना हमारा फर्ज; हम जहाँ खड़े वही मस्जिद, वहीं पढ़ेंगे नमाज: शाहीन बाग का मास्टरमाइंड शरजील

शरजील इमाम को ‘देशद्रोही’ कहने पर चुनाव विश्लेषक के साथ शाहीन बाग़ मीडिया संयोजक ने की बदसलूकी

शरजील इमाम को ‘देशद्रोही’ कहने पर चुनाव विश्लेषक के साथ शाहीन बाग़ मीडिया संयोजक ने की बदसलूकी

चुनाव विश्लेषक और ‘जन की बात’ के CEO प्रदीप भंडारी को असम को भारत से काटने की बात करने वाले शरजील इमाम को देशद्रोही कहना भारी पड़ गया। दरअसल प्रदीप भंडारी रिपब्लिक टीवी के शो ‘ललकार’ को होस्ट कर रहे थे। इस दौरान जैसे ही उन्होंने इमाम को देशद्रोही और देश के लिए खतरा बताया, एक पैनलिस्ट पहले तो जोर-जोर से चिल्लाने लगा और फिर उनके साथ बदसलूकी भी की।

शो के दौरान प्रदीप भंडारी पैनलिस्ट से सवाल पूछते हैं कि जो शरजील इमाम को सपोर्ट करते हैं? जिसकी आतंकवादी सोच है। शर्म आनी चाहिए ऐसे लोगों को। शरजील इमाम के लिए देशद्रोही शब्द सुनते ही गुस्से से भरे पैनलिस्ट ने प्रदीप भंडारी की कॉलर पकड़ ली और बदसलूकी करने लगा, गालियाँ देने लगा।

घटना के बारे में ट्वीट करते हुए प्रदीप भंडारी ने कहा, “कॉलर पकड़ना और गालियाँ सुनना वह कीमत है जो मुझे शरजील इमाम को देशद्रोही कहने के लिए चुकानी पड़ी। लेकिन शरजील इमाम के सभी मूक समर्थकों सुन लो। मुझे यह कहने से कोई नहीं रोक सकता कि शरजील इमाम और उनके जैसे लोग हमारे देश के लिए देशद्रोही और खतरा हैं।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों शरजील इमाम का विवादित वीडियो सामने आया था। जिसमें वो नॉर्थ ईस्ट को भारत से काटने की बात करता है। शरजील ने वीडियो में कहा था, “असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है। असम और इंडिया कटकर अलग हो जाए, तभी ये हमारी बात सुनेंगे। असम में मु###नों का क्या हाल है, आपको पता है क्या? CAA-NRC लागू हो चुका है वहाँ। डिटेंशन कैंप में लोग डाले जा रहे हैं और वहाँ तो खैर कत्ले-आम चल रहा है। 6-8 महीनों में पता चलेगा कि सारे बंगालियों को मार दिया गया वहाँ, हिंदु हो या मु###न। अगर हमें असम की मदद करनी है तो हमें असम का रास्ता बंद करना होगा फौज के लिए और जो भी जितना भी सप्लाई जा रहा है बंद करो उसे। बंद कर सकते हैं हम उसे, क्योंकि चिकन नेक जो इलाका है, वह मुस्लिम बहुल इलाका है।”

डॉक्टर ने मुझे ऐसा टीका लगाया कि नर्सें दिखने लगीं हूर: पाक PM इमरान खान, Video वायरल

पाकिस्तान के पीएम और क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान का जवाब नहीं। देश की आर्थिक स्थिति उनसे सँभल नहीं रही मगर एक इंजेक्शन में उन्हें नर्सें हूर जरूर नजर आने लगीं। इमरान खान ने एक इंजेक्शन को हूर दिखने का कारण बता डाला। दरअसल पूरा मामला इमरान खान के एक वायरल वीडियो को लेकर है। इमरान खान व इनके मंत्री हमेशा ही अपनी बेतुकी और विवादित बयान को लेकर सोशल मीडिया पर ट्रोल होते रहते हैं। इसी क्रम में इमरान खान एक ऐसी ही बयानबाजी कर गए जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

पाकिस्तानी पत्रकार नायला इनायत ने वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में इमरान खान कहते हुए सुने जा रहे हैं कि एक ही इंजेक्शन में सभी नर्से उन्हें हूर नजर आने लगी थी। इमरान का यह वीडियो कराची स्थित शौकत खानम हॉस्पिटल का बताया जा है। इमरान ने बताया कि 2013 में चुनाव प्रचार के दौरान वह अचानक गिर गए। जिस कारण उनकी पीठ में चोट आई थी। दर्द ज्यादा होने के कारण इमरान को हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ उन्हें दर्द कम करने के लिए एक इंजेक्शन दिया गया।

उस घटना को याद करते हुए इमरान ने कहा, “डॉक्टर ने मुझे ऐसा टीका लगाया कि मैं अपने दर्द को एक दम ही भूल गया। लगा कि मुझे तो कोई प्रॉब्लम ही नहीं है, दुनिया बदल गई। यहाँ तक कि वहाँ मौजूद सभी नर्सों में मुझे हूरें नजर आने लगी। मैंने डॉक्टर को दोबारा वही टीका लगाने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने मुझे दूसरा पेनकिलर नहीं दिया। यहाँ के डॉक्टर वाकई तारीफ के काबिल हैं।”

इस वीडियो के सामने आने के बाद अब इमरान का जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है। ट्विटर पर एक से बढ़कर एक व्यंग्यात्मक मीम्स और कमेंट्स की बाढ़ आ गई। ट्विटर यूजर्स ने पाक पीएम की खिंचाई में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

गाय काटना हमारा फर्ज; हम जहाँ खड़े वही मस्जिद, वहीं पढ़ेंगे नमाज: शाहीन बाग का मास्टरमाइंड शरजील

शाहीन बाग़ के मुख्य साज़िशकर्ता शरजील इमाम का एएमयू का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उसने महात्मा गाँधी को बीसवीं सदी का सबसे फासिस्ट नेता बताया था क्योंकि वो ‘राम राज्य’ की बातें करते थे। शरजील ने पूरे उत्तर-पूर्व को शेष भारत से अलग कर के ‘टुकड़े-टुकड़े’ की मंशा जाहिर की थी। शरजील ने वामपंथी संगठनों को लताड़ते हुए सीपीएम को एक हिंसक पार्टी करार दिया था। असम को लेकर दिए गए उसके भड़काऊ बयान के कारण उसके ख़िलाफ़ कई केस दर्ज हुए। जहानाबाद स्थित उसके पैतृक निवास पर केंद्रीय एजेंसियों ने छापेमारी की, जिसके बाद पता चला कि वो फरार हो गया है।

शरजील ने एएमयू में बोलते हुए कहा था कि मुस्लिमों ने मुस्लिम लीग के अभ्युदय से पहले कभी भी कॉन्ग्रेस ने वोट नहीं किया। उसने कई इस्लामी दलों के नाम गिनाते हुए कहा कि आज़ादी से पहले भी मुस्लिम कॉन्ग्रेस को वोट नहीं देते थे। शरजील ने आरोप लगाया कि मुस्लिमों के कत्लेआम आज़ादी से पहले ही चालू हो गए थे। उसने कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाया कि जो उलेमा पार्टी के ख़िलाफ़ थे, उन्हें बदनाम किया गया और अंग्रेजों का एजेंट ठहरा दिया गया।

शरजील इमाम ने इस दौरान गोरक्षा पर भी बात की। उसने दावा किया कि गोरक्षा का मुद्दा 1890 से काफ़ी हिंसक तरीके से चल रहा है। शरजील का मानना है कि आजमगढ़ क्षेत्र में गोरक्षा के नाम पर पहला हमला किया गया और बाद में पंजाब के शहरी इलाक़ों से होते हुए ये ट्रेंड कई ग्रामीण क्षेत्रों में फैला। शरजील के आँकड़ों की मानें तो भारत में अधिकतर मुस्लिम शहरी क्षेत्रों में रहते हैं और अकेले यूपी में 30% से अधिक मुस्लिम अर्बन इलाक़ों में रहते हैं।

शरजील ने कहा कि जिन ग्रामीण क्षेत्रों में मुस्लिमों की जनसंख्या ज़्यादा है, वहाँ गोरक्षा जैसी चीजें आसानी से नहीं चल पातीं। उसने दावा किया कि जहाँ आमने-सामने की लड़ाई हो, वहाँ गोरक्षा वाले हमला नहीं कर पाते हैं। शरजील ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा:

“आज़ादी से पहले हमले उन्हीं इलाक़ों में हुए, जहाँ मुस्लिमों की जनसंख्या कम थी। जहाँ ज्यादा आबादी थी, वहाँ हमले नहीं हुए। गोरक्षा का असली खतरनाक चेहरा ईस्टर्न यूपी के देहातों में नज़र आया है, क्योंकि यहाँ मुस्लिमों की आबादी कम है। बिहार में भी ऐसा ही हुआ। गोरक्षा की एंट्री भारत में खिलाफत से है, जब मौलानाओं ने कहा कि तुम खिलाफत में हमारी मदद करो, हम गोरक्षा में करेंगे। मुशरिक के दबाव में बोला जा रहा है कि वो गोकशी न करें। अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी ने ऐसा ही कहा था।”

शरजील इमाम का इशारा मुशरिक से हिन्दुओं की तरफ था, जो एक अल्लाह की पूजा नहीं करते। गोरक्षा को लेकर शरजील ने कहा कि इस पर किसी भी प्रकार के समझौते की ज़रूरत नहीं है। उसने कहा कि मौलाना आज़ाद जैसे लोगों ने गोरक्षा का समर्थन किया, जो आज हमारे लिए ज़हर बन गया है। उसने मौलाना अहमद रज़ा ख़ान के हवाले से कहा कि मुस्लिम एक खाना ज्यादा दिन तक नहीं खा सकता और कई दिनों तक लगातार खिलाया जाए तो वो उस भोजन से नफरत करने लगता है। उसने आगे कहा कि गाय का गोश्त ही एक ऐसा है, जिसे मुस्लिम कितना भी खाए, बोर नहीं होता।

शरजील इमाम ने गोकशी को ठहराया जायज: देखें 25:00 के बाद से

शरजील कहता है कि हिन्दू लोग मुस्लिमों के घरों में और डाइनिंग रूम में घुस चुके हैं। वो इसके लिए भी महात्मा गाँधी को जिम्मेदार ठहरता है और उन मौलानाओं को भी, जिन्होंने गाँधी जी का समर्थन किया। शरजील इतिहास को फिर से लिखने की बात करता है, ताकि मुस्लिमों का अपना इतिहास हो। उसने बताया कि इतिहास की किताबों से उसका भरोसा कब का उठ चुका है। शरजील ने आरोप लगाया कि जामिया में सड़क पर नमाज पढ़ने से मुस्लिमों को रोका गया। साथ ही उसने पूछा कि क्या एक मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नमाज़ भी नहीं पढ़ सकते?

उसने साथ ही पंडितों को भी निशाना बनाया। शरजील का कहना था कि नमाज़ मुस्लिमों के लिए आवाम का मामला है जबकि हिन्दुओं में किसी पंडित को बैठा कर पूजा करा दिया जाता है। शरजील ने कहा, “हिन्दुओं में तो होगा कोई पंडित जो बैठ कर उनके लिए पूजा कर रहा होता है।” उसे पूछा कि किस हिन्दू को दिन में 5 बार पूजा करनी होती है? उसने नामज़ को डेली रूटीन बताते हुए कहा कि मस्जिद दूर हो तो मुस्लमान कहीं भी खड़े होकर नमाज पढ़ेगा।

बिहार के जहानाबाद से पकड़ा गया शाहीन बाग़ का सरगना शरजील इमाम, चलेगा देशद्रोह का मुक़दमा

‘हम असम को हिंदुस्तान से परमानेंटली काट देंगे’ – शाहीन बाग के ‘मास्टरमाइंड’ की खुलेआम धमकी, वीडियो Viral

नेपाल भागने की फिराक में शरजील इमाम: पटना में मिली लास्ट लोकेशन, भाई को पुलिस ने लिया हिरासत में

आज शरजील है, तब मुहम्मद शफी था: उस समय भी हिंदू भेंट चढ़े थे, आज भी निशाना वही हैं

4 धमाकों से दहला असम, शरजील इमाम ने दी थी राज्य को भारत से अलग करने की धमकी

पुराना Pak परस्त है संविधान और ‘भारत’ से घृणा करने वाला शरजील इमाम, हिन्दुओं को निकालना चाहता है

बिहार के जहानाबाद से पकड़ा गया शाहीन बाग़ का सरगना शरजील इमाम, चलेगा देशद्रोह का मुक़दमा

जेएनयू के छात्र शरजील इमाम को गिरफ़्तार कर लिया गया है। पिछले कई दिनों से पुलिस को उसकी तलाश थी। उसकी तलाश में उसके जहानाबाद स्थित पैतृक आवास पर छापेमारी भी की गई थी, लेकिन वो नहीं मिला था। शरजील के ख़िलाफ़ असम पुलिस से लेकर ईटानगर क्राइम ब्रांच और अलीगढ पुलिस भी पड़ी हुई थी। उसने असम को भारत से अलग करने की धमकी थी। शरजील ने लोगों को सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकेन्स नेक) को ब्लॉक कर के पूरे उत्तर-पूर्व को शेष भारत से अलग-थलग करने के लिए भड़काया था और अपनी ‘टुकड़े-टुकड़े’ वाली मानसिकता का परिचय दिया था।

शरजील इमाम को बिहार के जहानाबाद से गिरफ़्तार किया गया। उस पर देशद्रोह के आरोप के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। उसके बारे में पता चला था कि वो नेपाल भागना चाहता था लेकिन उससे पहले ही उसे धर दबोचा गया। इस सम्बन्ध में अभी और भी सूचनाएँ आनी बाकी हैं।

शाहीन बाग़ के मुख्य साज़िशकर्ता ने विवादित बयान देते हुए कहा था कि राष्ट्रवाद की बात करने वाले मुस्लिमों को ‘बूत की पूजा’ करने को मजबूर करते हैं। उसने आरोप लगाया था कि न्यायपालिका आज़ादी से पहले कम पक्षपाती थी, जो दिखाता है कि मुस्लिमों को आज़ादी नहीं मिली बल्कि एक दुश्मन क़ौम उन पर हावी हो गई। साथ ही उसने ये भी कहा था कि अँग्रेज मुस्लिमों के कम दुश्मन थे, लेकिन न्यायपालिका 1950 के बाद से मुस्लिओं की ज़्यादा बड़ी दुश्मन है।

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CAA समर्थन पर जान गँवानी पड़ी, सर फूटे, नौकरी छूटी, खुद को अल्पसंख्यक बताना पड़ा: 20 घटनाएँ

संसद में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के पास होने के साथ ही वामपंथियों, कट्टरपंथियों और उपद्रवियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विरोध प्रदर्शन के नाम पर देश भर में हिंसा और गुंडागर्दी की गई और कुछ जगहों पर अभी भी की जा रही है। दिल्ली, यूपी, असम, बिहार से लेकर हर जगह हिंसा और आगजनी की घटना देखी गई। कई जगहों पर हिंसक प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर जानलेवा हमला किया गया।

काफी दिनों तक इनके हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद जब देश की जनता बड़ी संख्या में CAA के समर्थन में सड़कों पर उतरने लगी तो ये प्रदर्शनकारी गुंडे और भी ज्यादा बिलबिला गए, क्योंकि उनके झूठ का पर्दाफाश होने लगा। CAA का समर्थन करने पर किसी को अपनी जान गँवानी पड़ी तो किसी की नौकरी चली गई। किसी को जान से मारने की धमकी मिली तो किसी के घरों को जला दिया गया, किसी के घर का पानी का सप्लाई बंद कर दिया गया। इन प्रदर्शनकारियों ने किसी का सिर फोड़ दिया तो किसी को अपनी जान बचाने के लिए खुद को समुदाय विशेष का साबित करना पड़ा, तब जाकर जान बची।

ऐसी बहुत सी घटनाएँ घटी हैं महज कुछ ही दिनों के भीतर। नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करना किसी को कितना महँगा पड़ सकता है, इसके कई सारे उदाहरण सामने आए। हम यहाँ पर आपको ऐसी ही कुछ घटनाओं के बारे में बता रहे हैं:-

1. इसका ताजा उदाहरण है झारखंड के लोहरदगा में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में निकाले गए जुलूस पर हुई हिंसा में घायल नीरज राम प्रजापति की मौत। लोहरदगा में 23 जनवरी को CAA के समर्थन में हुई रैली में 15 से 20 हज़ार लोग शामिल थे, फिर भी मुस्लिम मोहल्ले में जुलूस के पहुँचते ही इतनी तेज़ पत्थरबाजी हुई कि लोगों में भगदड़ मच गई। CAA के समर्थन में निकली रैली पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने ईंट-पत्थर से हमला किया। पेट्रोल बम फेंके। हिंदुओ के घरों और वाहनों के साथ महिलाओं तक को निशाना बनाया गया। नीरज इसी दौरान घायल हो गए थे।

2. हाल ही में केरल के ही एक डॉक्टर को सिर्फ इस वजह से नौकरी से निकाल दिया गया क्योंकि वह CAA के समर्थन में सरकार और कानून के साथ खड़ा था। ट्विटर पर @vedvyazz नाम से ट्विटर अकाउंट चलाने वाले एक डॉक्टर ने अपनी कहानी लिखते हुए बताया था कि किस तरह से उनकी पूरी पहचान और उनके कार्यस्थल से लेकर उसके घर तक की गोपनीय जानकारी को कुछ CAA विरोधियों द्वारा सार्वजनिक कर दिया गया और आखिर में उन्हें नौकरी से निकाले जाने के बाद डर के कारण अपने ही पैतृक शहर से भागने को मजबूर कर दिया गया।

3. इससे पहले केरल के तिरुवनंतपुरम के डॉक्टर रंजीत विजयाहरि ने दावा किया था कि नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करने के कारण उन्हें इस्लामी कट्टरपंथी निशाना बना रहे हैं। वे गैस्ट्रो सर्जन हैं और अपनी पत्नी के साथ हॉस्पिटल चलाते हैं। उन्होंने बताया था कि CAA का समर्थन करने के लिए ‘जिहादी तत्व’ उन्हें परेशान कर रहे हैं।

4. शाहीन बाग में पिछले कई दिनों से हो रहे विरोध प्रदर्शन की वजह से एक इंजीनियर को नौकरी छोड़नी पड़ी। विरोध प्रदर्शन के कारण कालिंदी कुंज-नोएडा रोड बंद है और इस वजह से सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रशांत को ऑफिस पहुँचने में काफी परेशानी होने लगी। रोज-रोज लेट पहुँचने की वजह से उनकी हाफ डे की अटेंडेंस लग रही थी। सैलरी आधी हो गई और सफर का खर्च दोगुना। 6-7 घंटे रोड पर बीतने लगा, उसके बाद 9 घंटे की नौकरी। इतनी मेहनत के बाद भी सैलरी आधी मिल रही थी। ऐसे में जॉब कर पाना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा था, तो उन्हें तंग आकर नौकरी से इस्तीफा देना पड़ा।

5. सत्ता-विरोधी दलों ने मानो CAA-विरोधी माहौल के बहाने अपनी मानसिकता के जहर को भुनाने की कसम खा ली है। इसका ही एक ताजा उदाहरण कैब सर्विस ओला (Ola) के एक ड्राइवर के साथ देखने को मिला है, जिसे एक CAA विरोधी ने सिर्फ इस वजह से Ola से नौकरी से निकलवा दिया क्योंकि वह CAA और NRC के मुद्दे पर सरकार के समर्थन में था।

6. शाहीन बाग में चल रहे CAA-विरोधी प्रदर्शन में न्यूज़ नेशन के वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया के साथ वहाँ प्रदर्शन कर रहे गुंडों ने बदसलूकी की। यही नहीं, उनके साथ हाथापाई करने के बाद उनका कैमरा भी तोड़ दिया गया। इस दौरान सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो में धक्का-मुक्की कर रही भीड़ को अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते भी सुना गया।

7. दिल्ली के शाहीन बाग में न्यूज नेशन के वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया पर हमले के बाद मुंबई में भी न्यूज नेशन की टीम पर हमला किया गया। मुंबई के नागपाड़ा इलाके में सीएए के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन की कवरेज करने गए वीडियो जर्नलिस्ट ओमप्रकाश केवट के साथ मारपीट की गई। उनका कैमरा भी तोड़ दिया गया।

8. केरल के मलप्पुरम जिले के कुट्टिपुरम में एक कॉलोनी के हिंदू निवासियों को CAA का समर्थन करने पर पीने का पानी देने से वंचित कर दिया गया और साथ ही उन्हें मुस्लिम समूहों द्वारा बहिष्कार का भी सामना करना पड़ा। कॉलोनी के पास रहने वाला एक व्यक्ति हिंदू बहुल कॉलोनी के लोगों के लिए पीने के पानी की आपूर्ति करता था। मगर CAA का समर्थन करने के बाद कॉलोनी के हिंदुओं को पानी की आपूर्ति नहीं की गई।

9. इसी तरह केरल में CAA का समर्थन करने पर राज्य भाजपा के सचिव एके नजीर की बेरहमी से पिटाई की गई। नजीर पर तब क्रूरतापूर्वक हमला किया गया, जब वह इडुक्की जिले के थूकुप्पलम क्षेत्र की एक मस्जिद में नमाज़ अदा कर रहे थे। हमले में वह बुरी तरह घायल हो गए थे। हमलावर चरमपंथी संगठन SDPI कार्यकर्ताओं ने कहा था कि जो लोग नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करते हैं, उन्हें जिंदा नहीं बख्शा जाएगा।

10. केरल में ही एक सामाजिक कार्यकर्ता को बुरी तरह से पीट दिया गया। केरल में कोल्लम ज़िले के इरुकुजुई में एक वरिष्ठ मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) को सीएए-एनआरसी अधिकारी समझकर एक मुस्लिम परिवार ने बेरहमी से पीट दिया। आशा कार्यकर्ता की पहचान महेश्वरी अम्मा के रूप में की गई, जो कि एक आँगनवाड़ी कार्यकर्ता भी हैं।

11. इसी तरह राजस्थान और पश्चिम बंगाल में दो महिलाओं को CAA और NRC से संबंधित आँकड़े जुटाने वाली समझकर भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। राजस्थान के कोटा में, राष्ट्रीय आर्थिक जनगणना विभाग में काम करने वाली नज़ीरान बानो पर मुस्लिम भीड़ ने उस समय हमला किया, जब वह बृजधाम क्षेत्र में राष्ट्रीय अर्थशास्त्र जनगणना 2019-2020 के लिए डेटा इकट्ठा कर रही थीं। जब उन्होंने भीड़ को यकीन दिलाया कि वह उनकी तरह मुस्लिम हैं, तब कही जाकर उन्हें छोड़ा गया।

12. पटना कॉलेज में एक छात्र को सिर्फ़ इसीलिए पीटा गया, क्योंकि उसने फेसबुक पर नागरिकता संशोधन क़ानून का समर्थन किया था। उसे इतना पीटा गया कि उसका सिर फट गया। पीड़ित छात्र ने इक़बाल हॉस्टल के छात्रों पर मारपीट का आरोप लगाया उसने बताया कि जब वो परीक्षा देकर लौट रहा था, तब उसपर हमला किया गया। उसका गुनाह सिर्फ़ इतना था कि उसने सीएए के समर्थन में एक फेसबुक पोस्ट लिखा था।

13. मध्य प्रदेश के शाजापुर में CAA के समर्थन में निकाली गई तिरंगा यात्रा के दौरान कुरैशी मोहल्ला के लोगों ने पथराव किया। तिरंगा यात्रा में शामिल लोगों का कहना है कि ये यात्रा जैसे ही कुरैशी मोहल्ले में पहुँची, वहाँ मौजूद लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसके बाद वहाँ हिंसा भड़क गई। पत्थरबाजी होते देख कर आसपास के दूकानदार भी सहम गए और वो अपनी-अपनी दुकानें बंद कर के वहाँ से भाग खड़े हुए। रैली पर हमले होते ही वहाँ भगदड़ मच गई।

14. मध्य प्रदेश में CAA के समर्थन में निकाली गई शांतिपूर्ण रैली में रायगढ़ की डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा पहुँची और प्रदर्शनकारियों को पीटना शुरू कर दिया। प्रिया वर्मा ने प्रदर्शनकारियों को वहाँ से हटने के लिए कहा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर एक-दो थप्पड़ भी रसीद दिए।

15. AIADMK राज्यसभा सांसद ए मोहम्मद जॉन को संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन करने पर ऑल जमात फेडरेशन से निष्कासित कर दिया गया। फेडरेशन में मोहम्मद जॉन ‘संरक्षक’ के पद पर साल 2010 से आसिन थे। लेकिन 16 दिसंबर 2019 को उन्हें इस पद से यह कहकर हटा दिया गया कि कैब का समर्थन करके उन्होंने मुस्लिमों का अपमान किया है।

16. CAA एवं NRC के विरोध में आयोजित राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के बिहार बंद के नाम पर शनिवार (दिसंबर 21, 2019) को ‘हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया।’ राज्‍य में कई जगहों भारी हिंसा हुई। सबसे बड़ी घटना पटना के फुलवारीशरीफ में हुई, जहाँ मुस्लिम भीड़ ने हनुमान मंदिर में घुसकर तोड़-फोड़ की।

17. CAA के खिलाफ दक्षिणी दिल्ली के शाहीन बाग में जारी प्रदर्शन में 19 जनवरी कुछ कश्मीरी पंडित भी पहुँचे और कश्मीरी पंडितों को न्याय दिलाने के नारे लगाने लगे। कश्मीरी पंडितों की इस नारेबाजी से नाराज होकर CAA-विरोधी प्रदर्शनकारियों ने उनके साथ झड़प शुरू कर दी जो कि कुछ ही देर में हाथा-पाई में बदल गई।

18. चेन्नई में एक स्टेशनरी के दुकानदार को इसलिए जान से मारने की धमकी मिली, क्योंकि वहाँ पर CAA-NRC के समर्थन का लेबल वाला पेन बिक रहा था। दुकान पर मुस्लिमों की भीड़ जुट गई और CAA के खिलाफ नारेबाजी करने लगी। इसके बाद उसे कई जगहों से धमकी भरे कॉल आने लगे।

19. बंगलुरु में वरुण नाम के एक व्यक्ति को सीएए के समर्थन का खामियाजा तब भुगतना पड़ा, जब कुछ उपद्रवियों ने उन पर हमला कर दिया। 31 वर्षीय वरुण पर सीएए के विरोधियों ने धारदार हथियार से हमला किया था। बेंगलुरु साउथ के सांसद व युवा भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया कि वरुण जब CAA समर्थक रैली में भाग लेकर लौट रहे थे, तब उन पर चाकू और कुल्हाड़ी से हमला किया गया।

20. CAA का समर्थन करने की वजह से उबर इंडिया ने पाकिस्तानी हिंदू को मजनू का टीला शरणार्थी कैम्प तक छोड़ने से इनकार कर दिया। ड्राइवर नसीम की इस करतूत के बारे में भाजपा प्रवक्ता तेजिंदर सिंह बग्गा ने ट्विटर पर जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि नसीम को जैसे ही पता चला कि उसे अपने कैब में एक पाकिस्तानी हिन्दू को लेकर जाना है, वह वहाँ से चला गया। पाकिस्तानी हिन्दुओं ने बताया कि उबर इंडिया के ड्राइवर नसीम ने उन्हें नीचे उतरने को कहा। जैसे ही वो नीचे उतरे, वो गाड़ी लेकर फरार हो गया।

जहाँ एक तरफ CAA के विरोधी अभिव्यक्ति की आज़ादी का रोना रोते हैं और लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन को सही ठहराते हैं, वहीं दूसरी तरफ वो ख़ुद विरोधी विचार रखने वाले लोगों के साथ मारपीट करते हैं। ये उनकी असहिष्णुता नहीं है तो क्या है?

कौन ख़रीदेगा उसकी गढ़ी हुई माँ शारदा की मूर्तियाँ, CAA का समर्थन करने पर नीरज को मिली मौत

झारखण्ड में लोहरदगा में सीएए के समर्थन में निकली रैली जैसे ही मुस्लिमों के मोहल्ले तक पहुँची, मस्जिद से ताबड़तोड़ पत्थर चले। कॉन्ग्रेस दफ्तर से भी निर्दोष लोगों पर पत्थरबाजी की गई। स्थिति ये हो गई कि रैली में शामिल 15,000 लोगों में भगदड़ मच गई। मुस्लिम महिलाएँ छत से मिर्ची पाउडर और गर्म पानी डाल रही थी, जिसकी जद में आकर कई लोग घायल हुए। नीरज प्रजापति भी रैली में शामिल थे, जिनके सिर पर पीछे से लोहे की रॉड से वार किया गया। क़रीब 5 दिन तक चले इलाज के बाद राँची के रिम्स में उनकी मृत्यु हो गई।

नीरज के माता-पिता वृद्ध हैं और बीमार रहते हैं। उनके पिता रिटायर्ड शिक्षक हैं और कई दिनों से बिस्तर पर हैं। उनके पेंशन के अलावा इन लोगों की पेंटिंग व मूर्तिकारी की दुकान से जो रुपए आते थे, उससे घर का गुजरा चलता था। अभी सरस्वती पूजा आने वाली है। नीरज ने कई मूर्तियाँ अपने हाथों से गढ़ी थी। सरस्वती पूजा के कारण उम्मीद थी कि कमाई अच्छी होगी लेकिन उससे पहले परिवार पर ये कहर टूट पड़ा। नीरज के बड़े भाई भी हैं, जो उसके कामकाज में उसका सहयोग करते थे। लेकिन घर की कमाई का पूरा जिम्मा नीरज ने ही उठाया हुआ था।

नीरज के एक पड़ोसी ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि वो उस परिवार की ‘रीढ़ की हड्डी’ की तरह थे। किसी को भी पुलिस फ़िलहाल परिजनों से मिलने नहीं दे रही है। पड़ोसी ने बताया कि नीरज के बड़े भाई की दिमागी हालत ऐसी नहीं है कि वो इतने बड़े दुःख का पहाड़ झेल सकें। नीरज की पत्नी भी हैं, जिन पर पुलिस बयान बदलने का दबाव बना रही है। वो अपने पीछे दो बच्चों को छोड़ गए हैं। एक 9 साल की बेटी है और एक 3 सक का बेटा भी है। पड़ोसियों ने ऑपइंडिया ने बताया कि नीरज ने कई मूर्तियाँ बनाई थीं, जो अब कैसे बिकेगा, ये सबसे बड़ा प्रश्न है।

जहाँ तक लोहरदगा की बात है, वहाँ कर्फ्यू में सोमवार (जनवरी 27, 2020) को दो घंटे की ढील दी गई थी लेकिन नीरज की मौत के बाद फिर से कर्फ्यू में सख्ती लाइ गई। परिजनों पर पुलिस दबाव बना रही है कि नीरज का अंतिम संस्कार राँची में ही किया जाए और उनके पार्थिव शरीर को लोहरदगा न ले जाया जाए। सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने और परिजनों को न्याय दिलाने की बजाय प्रशासन ‘हालात बिगड़ने’ की बात कह के नीरज के अंतिम संस्कार को लेकर अपनी मनमानी चलना चाह रहा है।

नीरज की भाभी को ब्रेस्ट कैंसर है। ऐसे में एक रिश्तेदार ने ऑपइंडिया ने बताया कि उनकी मौत के बाद रिश्तेदार लोग ही पूरा जिम्मा संभाल रहे हैं क्योंकि परिवार में कोई भी ऐसा नहीं है जो स्थिति ने निपट सके। रिश्तेदार लोग असमंजस में हैं कि दाह संस्कार कैसे और कहाँ होगा। नीरज को मौत के बाद उनके साले संतोष को फोन किया गया, जो राँची पहुँचे और उन्होंने अपना बयान दर्ज कराया। अपने बयान में उन्होंने पुलिस व प्रशासन पर अफवाह फैलाने और झूठ बोलने का आरोप लगाया।

झारखण्ड बजरंग दल ने ऑपइंडिया को बयान देते हुए कहा कि नीरज की मौत की जाँच सही तरीके से नहीं की गई तो आंदोलन किया जाएगा। नीरज का घर लोहरदगा के ‘रघुनन्दन लेन’ में स्थित है, जहाँ ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। बजरंग दल के पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि ऐसा क्या है जिसे पुलिस व प्रशासन छिपा रहा है?