Home Blog Page 5142

तिरंगे वाले हिजाब में हरे को ऊपर रखने के पीछे की मंशा क्या है?

शाहीन बाग पर चल रहे मुस्लिम महिलाओं के प्रदर्शन को वामपंथियों, कट्टरपंथियों और तथाकथित बुद्धिजीवियों का पूरा समर्थन है। शायद इसलिए अब वहाँ पोस्टर्स के नाम पर आए दिन कुछ न कुछ विवादस्पद सृजनात्मकता का प्रदर्शन होता रहता है। अभी बीते दिनों वहाँ हिजाब में बिंदी वाली महिलाओं के पोस्टर लगे देखे गए थे। जिसके बाद लोगों ने कट्टरपंथियों द्वारा हिंदुओं महिलाओं को इस्लामिक वेशभूषा में देखकर उनकी मंशा पर सवाल उठाए थे और दावा किया था कि ऐसा करके ये लोग देश को इस्लामिक राष्ट्र बनाना चाहते हैं। अब इसी क्रम में सोशल मीडिया पर एक नया पोस्टर आया है।

इस नए पोस्टर में एक औरत है, जिसके माथे पर बिंदी की जगह अशोक चक्र है और जिसने हिजाब की जगह तिरंगा पहना है। अब इस तस्वीर में आपत्तिजनक ये है कि यहाँ इस तिरंगे को तिरंगे की तरह नहीं दर्शाया गया। बल्कि इसमें विशेष रूप से हरे रंग को उभारा गया। कुछ लोगों को लगेगा इसमें क्या आपत्ति हो सकती है? तिरंगा तो तिरंगा होता है। लेकिन नहीं। ऐसा सोचने वाले लोग वहीं लोग होंगे जो बढ़-चढ़कर हिंदू विरोधी नारे लगा रहे हैं, केंद्र सरकार द्वारा लाए कानून पर सवाल उठा रहे हैं। मुस्लिमों द्वारा निराधार आंदोलन को वाजिब ठहरा रहे हैं।

न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज की छवि की मानक है। जिसे नर्सरी में पढ़ने वाला कोई भी बच्चा चित्रित कर कर सकता है।

हम अच्छे से जानते हैं कि राष्ट्रीय ध्वज में सबसे पहला रंग केसरिया होता है और आखिर हरा। तो फिर इस तस्वीर में हरे को ऊपर दिखाने के पीछे का क्या उद्देश्य है? ऐसे समय में जब लगातार मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं की सभ्यता को तार-तार करने की कोशिश की जा रही हो, जब बिना किसी डर के हिंदू महिलाओं को इस्लामिक हिजाब में दिखाया जा रहा है, जब शैक्षिक संस्थानों की दीवारों पर ख़िलाफ़त 2.0 नजर जा रहा है। तेरा-मेरा रिश्ता क्या….ला इलाहा इल्लइल्लाह पूछा जा रहा है…उस समय ऐसी तस्वीरें लाने का क्या मतलब?? क्या उद्देश्य है हिंदुओं में पूजी जाने वाली काली माता को हिजाब में बाँधकर दर्शाने का? क्या कारण है हिन्दुओं के पवित्र प्रतीक स्वास्तिक को निस्तेनाबूद करने का?

हम सब जानते हैं तिरंगे के तीनों रंगों के अलग-अलग मायने हैं। केसरिया बलिदान का प्रतीक है, तो हरा खुशहाली का है। लेकिन हम ये भी जानते है कि इस्लाम में हरे रंग का बहुत महत्तव है और हिंदुओं में केसरिया का। इस लिहाज से अगर इस पोस्टर को देखा जाए तो पता चलेगा कि ये कोई गलती नहीं है या हरे के जरिए देश में खुशहाली लाने की बात नहीं हो रही। बल्कि इस देश को पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफ्गानिस्तान की तरह इस्लामिक राष्ट्र बनाने की पहल है। जिसके लिए पहले से चेतावनी दी जा रही है।

तिरंगे में समाहित रंगों की आड़ में संदेश दिया जा रहा है कि शाहीन बाग कोई आम प्रदर्शन नहीं है। ये वो प्रदर्शन हैं, जहाँ वेदना के नाम पर अपने मनसूबों को इस्लामिक ताकतों ने खुलेआम प्रदर्शित करना शुरू कर दिया है। यहाँ हरे रंग के जरिए, हिजाब के जरिए, जालीदार टोपियों के जरिए बताना शुरू कर हो चुका है कि उनके लिए महत्तवपूर्ण क्या है? औचित्य की लड़ाई को अब स्पष्ट तौर पर मजहबी लड़ाई बना दिया गया है… लेकिन फिर भी हम जैसे लोग ये कहने में लगे हुए हैं कि इतने लोगों की भीड़ गलत थोड़ी होगी… वाकई मोदी सरकार इनपर अत्याचार कर रही है।

सोशल मीडिया पर इस पोस्टर को लेकर कहा जा रहा है कि 1979 में पर्सिया में भी यही हुआ था। जहाँ पहले महिलाओं ने बहुत विरोध किया था लेकिन अंततः उन्हें हिजाब पहनना ही पड़ा। आज वो देश ईरान बन चुका है।

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ हुए विरोध प्रदर्शनों में बहुत से मुखौटे उतरे। भाईचारे की बात करते-करते हिंदुओं की सभ्यता को, उनकी परंपरा को, उनके धार्मिक चिह्नों को अपमानित किया गया। सोशल मीडिया पर इस बीच व्यापक स्तर पर मुहीम चली जहाँ हिंदुओं ने हिंदुओं को हिंदुओं के ख़िलाफ़ भड़काया।

इस बीच कई हिंदू घृणा से लबरेज पोस्टर दिखे (नीचे वीडियो में देखें), जिसके जरिए समुदाय विशेष के अधिकार और उनके मजहब को बाकियों से बड़ा और बेहतर बनाने की पूरी कोशिश हुई। प्रदर्शन में शामिल होने वाले विशेष समुदाय के पुरूष इस्लामिक टोपियों में नजर आए, जबकि अधिकांश मुस्लिम महिलाओं को बुर्के और हिजाब में देखा गया। जाहिर है, ये सब एक निश्चित समुदाय को उनके मजहब को उभारने के लिहाज से हुआ। ताकि एक बहुसंख्यक लेकिन धर्मनिरपेक्ष देश में इनका डर कायम हो सके।

इस्लाम में हरे रंग की महत्ता?
इस्लाम धर्म में प्रचलित मान्यताओं के अनुसार हरा रंग जन्नत का प्रतीक है क्योंकि वहां रहने वाले लोग हरे रंग के वस्त्र पहनते हैं। इसलिए इस्लाम धर्म में हरा रंग पवित्र माना जाता है। इसलिए मस्जिद की दीवारें, कुरान को रखने वाला कपड़ा आदि हरा रंग का होता है।

तेलंगाना: कॉन्ग्रेस उम्मीदवार इलियास ने TRS के इमरान की काटी नाक, भड़का आक्रोश

तेलंगाना के निजामाबाद जिले के बोधन शहर के नगरपालिका चुनाव के दौरान एक विचित्र घटना घटी। जानकारी के मुताबिक मतदान के दौरान कॉन्ग्रेस उम्मीदवार इलियास ने टीआरएस उम्मीदवार इमरान की नाक काट दी। यह घटना उस समय हुई जब नेता शहर के 32 वार्डों में दोहरे मतदान को लेकर भिड़ गए थे।

बताया जा रहा है कि टीआरएस उम्मीदवार इमरान ने कॉन्ग्रेस समर्थकों द्वारा दोहरे वोटों की कथित कास्टिंग पर आपत्ति जताई थी। जिसके बाद इमरान और कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार इलियास के बीच गर्म बहस छिड़ गई। गुस्से में इलियास ने इमरान पर हमला किया और उसकी नाक काट दी। 

इमरान को तुरंत बोधन के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। दोनों पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। निजामाबाद पुलिस की हस्तक्षेप के बाद मतदान केंद्र के परिसर में हो रहा विवाद शांत हुआ। वहीं पुलिस ने कॉन्ग्रेस उम्मीदवार को गिरफ्तार किया और साथ ही उसके खिलाफ मामला भी दर्ज कर लिया है। इस विचित्र घटना को लेकर बोधन गाँव और उसके आस-पास के इलाकों में काफी आक्रोश है। 

उल्लेखनीय है कि बुधवार (जनवरी 22, 2019) को तेलंगाना में शहरी स्थानीय निकायों का चुनाव था। सुबह 7 बजे शुरू हुए मतदान के दौरान 53 लाख से अधिक मतदाताओं के साथ 120 नगरपालिका और 9 निगमों में मतदान हुआ।

कॉन्ग्रेस के एक प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि टीआरएस नेता अपने उम्मीदवारों को पैसे की पावर दिखा कर फुसलाने की कोशिश कर रहे थे। 

इस चुनाव में भाजपा आदिलाबाद, करीमनगर और निजामाबाद जिले पर फोकस कर रही है। बीजेपी ने लोकसभा में इन सीटों पर जीत हासिल की थी। मतगणना 25 जनवरी को की जाएगी। हालाँकि, करीमनगर नगर निगम 25 जनवरी को चुनाव और 27 जनवरी को परिणाम घोषित करेगा।

भारत की श्रेष्ठता इसकी भौगोलिक, सामाजिक विविधता में ही है: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री ‘ऐट होम’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार-2020 से सम्मानित बच्चों और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने वाले आदिवासी कलाकारों, राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के कैडेट्स और राष्ट्रीय सेवा योजना (NCC) के वोलियंटर और झाँकी में शिरकत करने वाले कलाकारों से शुक्रवार (जनवरी 24, 2020) को मुलाकात किए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत एक राष्ट्र के साथ-साथ एक जीवंत परंपरा, एक विचार और एक संस्कार है।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने सबका स्वागत करते हुए कहा, “जितने भी साथी एकत्र हुए हैं, आप एक प्रकार से Mini India- New India (मिनी इंडिया-न्यू इंडिया) को दर्शाने वाले लोग हैं। भारत असल में क्या है, ये हमारा देश और पूरी दुनिया आपके माध्यम से समझती है।” इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि NCC और NSS के माध्यम से अनुशासन और सेवा की एक समृद्ध परंपरा जब राजपथ पर दिखती है, तो देश के करोड़ों युवा प्रेरित और प्रोत्साहित होते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- “यहाँ जितने भी युवा साथी आए हैं, मेरा आपसे आग्रह रहेगा कि राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की ज्यादा से ज्यादा चर्चा करें। चर्चा ही नहीं, बल्कि खुद अमल करके, उदाहरण पेश करें। हमारे ऐसे ही प्रयास न्यू इंडिया का निर्माण करेंगे।”

PM मोदी ने कहा- “हम जिस न्यू इंडिया की तरफ आगे बढ़ रहे हैं, वहाँ यही आकांक्षाएँ, यही सपने हमें पूरे करने हैं। भारत का कोई भी व्यक्ति, कोई भी क्षेत्र पीछे ना रह जाए, ये हमें सुनिश्चित करना है। गणतंत्र दिवस की परेड के पीछे भी यही ध्येय है।”

प्रधानमंत्री मोदी गणतंत्र दिवस से पहले गणतंत्र दिवस के परेड में शामिल होने वाले करीब 1730 आदिवासी कलाकारों, NCC कैडेटों, NSS वोलियंटर और झाँकी में शामिल होने वाले कलाकारों से ‘ऐट होम’ कार्यक्रम में मुलाकात कर रहे हैं।

‘Corona Virus’ को लेकर हम गंभीर, इलाज के लिए पर्याप्त इंतजाम: एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया

चीन में फैले कोरोना वायरस को लेकर भारत पहले ही सभी एयरपोर्ट्स को अलर्ट कर चुका है। इस अलर्ट के बाद चीन से आने वाले सभी यात्रियों की गहनता से जाँच की जा रही है। अब इसे लेकर दिल्ली एम्स के निदेशक का बयान आया है।

दिल्‍ली स्‍थित एम्‍स अस्‍पताल ने भी चीन से बाकी देशों में फैल रहे कोरोना वायरस से निपटने को लेकर तमाम इंतजाम उपलब्‍ध होने की बात कही है। अस्‍पताल के निदेशक डॉक्‍टर रणदीप गुलेरिया ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि ‘कोरोना वायरस’ के मरीजों के इलाज के लिए हमारे पास तमाम तरह की सुविधाएं हैं। इतना ही नहीं एम्‍स में हमने इसके लिए एक अलग से वार्ड भी तैयार किया है। वहीं इससे सुरक्षित रहने के लिए स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों को मास्क, हैंड सैनिटाइजर जैसी तमाम तरह की सुविधाएं भी उपलब्‍ध कराई गई हैं।

वहीं कोरोना वायरस को लेकर एहतियात बरतने के लिए चीन से वापस लौटे दो लोगों की मुंबई में जाँच की जा रही है। इतना ही नहीं 19 जनवरी को सभी एयरपोर्ट्स पर जारी किए गए अलर्ट के बाद से तमाम यात्रियों की जाँच की जा रही है। दरअसल जाँच के लिए यात्रियों का थर्मल स्‍क्रीनिंग किया जाता है।

आपको बता दें कि चीन में कोरोना वायरस का कहर अभी जारी है। चीन के साथ दूसरे देशों में पहुँचा घातक कोरोना वायरस अब तक अकेले चीन में 25 लोगों की जान ले चुका है। इतना ही नहीं इस वायरस की चपेट में अब तक करीब 800 से अधिक लोग आ चुके हैं। वहीं कोरोना वायरस की भयावहता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चीन में इमरजेंसी की घोषणा कर दी है।

गौर करने वाली बात यह है कि इसको लेकर अभी तक कई सारी जानकारियाँ सामने नहीं आ सकी हैं। यही कारण है कि वायरस तेजी से लोगों में फैल रहा है। इससे भी गंभीर बात यह कि अभी तक सीधे तौर पर कोरोना वायरस पर अटैक करने वाली कोई वैक्सीन मार्केट में नहीं आई है। भारत सरकार के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की तरफ से कोरोना वायरस से बचने के उपाय जारी किए गए हैं। जब तक कोरोना वायरस का प्रकोप शांत नहीं हो जाता, जितना हो सके सी-फूड से दूर रहें, कहीं भी बाहर से आने या कुछ भी खाने से पहले अपने हाथ अच्छी तरह साफ करें।

सिर्फ पानी से नहीं बल्कि साबुन या हैंडवॉश से धोएँ, अपने साथ हैंड सेनिटाइजर हमेशा रखें। जहाँ पानी से हाथ धोने की व्यवस्था ना हो, वहाँ इसका इस्तेमाल करें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का यूज करने के बाद हाथ साफ किए बिना उन्हें अपने चेहरे और मुँह पर ना लगाएँ, बीमार लोगों की देखभाल के दौरान अपनी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें। अपनी नाक और मुँह को कवर करके रखें। उनके इस्तेमाल किए हुए बर्तन और कपड़ों का उपयोग करने से बचें।

आपको बता दें कि इसका सबसे पहला मामला चीन के वुहान शहर में सामने आया था, जिसके चलते वर्ष 2002 और 2003 में चीन और हांगकांग में करीब 650 लोगों की मौत हो गई थी।


CAA-विरोधी को नहीं पसंद आई CAA-समर्थक ड्राइवर की FoE, Ola से की शिकायत

सत्ता-विरोधी दलों ने मानो CAA-विरोधी माहौल के बहाने अपनी मानसिकता के जहर को भुनाने की कसम खा ली है। इसका ही एक ताजा उदाहरण कैब सर्विस ओला (Ola) के एक ड्राइवर के साथ देखने को मिला है, जिसे एक CAA विरोधी ने सिर्फ इस वजह से Ola से नौकरी से निकलवा दिया क्योंकि वह CAA और NRC के मुद्दे पर सरकार के समर्थन में था। पिछले कुछ समय से देशभर से ऐसी घटनाएँ देखने को मिल रही हैं, जिनमें CAA और NRC के विषय पर सरकार का समर्थन करना लोगों को महँगा पड़ गया।

Ola कैब सर्विस ने अपने एक ड्राइवर को एक CAA-विरोधी की शिकायत पर निकाल दिया है। ट्विटर पर कनव शर्मा नाम के एक व्यक्ति ने, जो कि ‘A.T. Kearney’ नाम की एक कम्पनी में मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर काम करते हैं (उनके ट्विटर द्वारा प्राप्त जानकारी) ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए एक ओला कैब ड्राइवर के प्रति अपनी नफरत को जाहिर किया है।

कनव शर्मा ने अपने ट्वीट्स में लिखा है कि ओला कैब ड्राइवर ने उन्हें फोन पर बात करते हुए सुना, जिसमें कि वो भारत की आर्थिक स्थिति की आलोचना कर रहे थे। इस पर कैब ड्राइवर ने अपना विचार रखते हुए कनव शर्मा से कहा कि मोदी सरकार को तो अभी सिर्फ 6 साल हुए हैं और कॉन्ग्रेस द्वारा सत्तर सालों तक किए गए नुकसान के लिए मोदी को जिम्मेदार ठहरना गलत होगा। इस पर कनव शर्मा ने ड्राइवर से पूछा कि कॉन्ग्रेस ने क्या नुकसान किया?

कनव शर्मा के अनुसार, ड्राइवर ने उनसे कहा कि कॉन्ग्रेस ने JNU जैसी संस्थाएँ बनाई जो कि आज टुकड़े-टुकड़े गैंग के लिए वैश्यावृत्ति की जगह बन चुका है। कनव शर्मा ने लिखा है कि ड्राइवर ने उनसे कहा- “आपको पता है कि नेहरू कौन था? वो इंडिया के पहले प्रधानमंत्री थे लेकिन उनके दादा मुस्लिम थे जो कि हिन्दुओं को बेवकूफ बनाने के लिए कन्वर्ट होकर हिन्दू बन गए थे।”

इसके बाद कनव शर्मा ने लिखा कि उन्होंने ड्राइवर को तथ्यों को जाँचने की सलाह दी और कहा कि यह तथ्य उनकी आर्थिक स्थिति की समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। इसके बाद कनव शर्मा ने लिखा है कि ड्राइवर ने उन्हें जवाब देते हुए कहा- “आप उन देशद्रोही लोगों में से एक हैं, जिन्हें सरकार की हर बात में बुराई नजर आती है। आप जरूर CAA और NRC के भी विरोध में होंगे।”

इस पर कनव शर्मा ने ट्वीट में लिखा है कि उन्होंने जवाब दिया कि हाँ वो CAA और NRC, दोनों के विरोध में हैं। इसके बाद कनव शर्मा ने कहा कि ओला ड्राइवर ने कहा- “आपने तब विरोध किया जब कश्मीरी पंडितों का बलात्कार और उनकी हत्या की जा रही थी?” इसके बाद कनव ने ड्राइवर को जवाब दिया कि उनके साथ गलत हुआ लेकिन वो जम्मू-कश्मीर से हैं और सभी धर्म के लोगों के साथ बड़े हुए हैं इसलिए वो उन सबकी इज्जत करते हैं।”

कनव शर्मा ने लिखा है कि इसके बाद ड्राइवर ने उनसे कहा- “तुम्हारा परिवार 1990 की घटना में बच गया, तुम लोग भी उनके साथ शामिल रहे होंगे।” कनव इस पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखते हैं कि उसे यह पता नहीं रहा होगा कि वो एक कश्मीरी पंडित नहीं हैं, जिनके साथ ना 1990 की घटना हुई और ना ही कश्मीर से संबंध रखते हैं।”

कनव शर्मा ने ड्राइवर पर आरोप लगाया कि उसने उन्हें पाकिस्तान जाने की सलाह देते हुए यह भी कहा कि उनकी जैसी मानसिकता वाले लोगों के बिना यह देश ज्यादा साफ़ होता।” इसके बाद कनव शर्मा ने लिखा है कि वो अपनी जगह पर पहुँच चुके थे और उन्होंने Ola कैब सर्विस को टैग करते हुए ड्राइवर की शिकायत की। कनव ने Ola को टैग करते हुए लिखा कि बेहतर होता कि उनके ड्राइवर्स बजाए लोगों को देशद्रोही बताने के अपनी ड्राइविंग पर ज्यादा ध्यान दें।

इसके बाद कैब सर्विस Ola ने कनव शर्मा को आश्वस्त करते हुए ट्वीट का जवाब देकर लिखा है कि वो उनसे असुविधा के लिए क्षमा चाहते हैं। Ola ने लिखा कि उन्होंने अपने ड्राइवर पार्टनर से इस बारे में सम्पर्क किया है और वो उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

इसके बाद कुछ ट्विटर यूजर्स ने शिकायतकर्ता की बिना सुबूत के आरोप लगाने पर सवाल उठाए हैं और Ola से वापस सवाल किए हैं कि उनके पास क्या सबूत हैं कि कनव शर्मा द्वारा लगाए गए आरोप सच हैं? साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि यदि ड्राइवर ने यह कहा भी है तो यह उसकी अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता है, जो कि उससे नहीं छीनी जा सकती है।

एक नजर कैब ड्राइवर के समर्थन में किए जा रहे ट्वीट्स पर-

तेरा-मेरा रिश्ता क्या… रवीश ने कही, इमरान ने मानी: टीवी देखना, अख़बार पढ़ना सब बंद

रवीश कुमार अक्सर अपने ‘प्राइम टाइम’ में लोगों से अपील करते हैं कि वो टीवी न देखें और अख़बार न पढ़ें। ये काफ़ी अजीब है क्योंकि जिस मीडिया इंडस्ट्री में काम करके रवीश कमाते हैं, वो उसी इंडस्ट्री के ग्राहकों को उससे दूर रहने की सलाह देते हैं। रवीश कुमार लगभग अपने हर शो में ‘टीवी मत देखिए’ ज़रूर बोलते हैं। एनडीटीवी की टीआरपी धड़ल्ले से गिर रही है, इसीलिए कहीं उनके कहने का मतलब ये तो नहीं होता कि तुमलोग मुझे नहीं देख रहे हो तो किसी को नहीं देखो। खैर, रवीश की इस कुंठा का कारण सबको पता है।

अब रवीश को ऐसी जगह से एक प्रशंसक मिला है, जहाँ से उनको उम्मीद भी नहीं होगी। अरे हाँ, ये बात ग़लत है क्योंकि वहाँ भी उनके प्रशंसक ख़ासे संख्या में हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि उन्होंने टीवी देखना छोड़ दिया है और अख़बार पढ़ना बंद कर दिया है। रवीश कुमार जान कर बहुत ख़ुश होंगे क्योंकि एक मुल्क़ का प्रधानमंत्री उनकी बात मान रहा है। इतना ही नहीं, इमरान ने बताया है कि वो शाम को होने वाले डिबेट शो भी नहीं देखते और न्यूज़ नहीं देखते।

जैसे अकबर ने दीन-ए-इलाही मजहब की स्थापना की थी और 3-4 लोग उससे जुड़े भी थे, इसी तरह रवीश कुमार की ‘टीवी नहीं देखो और अख़बार नहीं पढ़ो’ वाले गैंग में इमरान ख़ान शामिल हो गए हैं। दावोस में आयोजित ‘वर्ल्ड इकनोमिक फोरम 2020’ में इमरान ने ये बातें कही। इमरान ख़ान ने कहा कि वो 40 साल से सार्वजनिक जीवन में हैं और आलोचना के आदि रहे हैं लेकिन फिर भी पिछले 1.5 वर्षों से मीडिया कुछ ज्यादा ही उनके पीछे पड़ी हुई है। ठीक वैसे ही, जैसे रवीश कहते हैं कि मोदी उनके पीछे पड़े हुए हैं।

बस अंतर इतना है कि इमरान ख़ान एक राजनेता होने के नाते जनता से कभी ये नहीं कहेंगे कि तुम वोट मत दो, मेरा भाषण नहीं सुनो या सरकार की बातों को गंभीरता से मत लो। रवीश तो इतने साहसी हैं कि टीवी से कमाई कर के जनता को बोलते हैं कि टीवी मत देखो। रवीश कुमार जिस अख़बार को गाली देते हैं, वो उन्ही अख़बारों की ख़बरों को आधार बना कर लेख भी लिखते हैं। वो लिखते हैं कि फलाँ अख़बार में फलाँ ख़बर आई है और फिर मोदी या भाजपा की आलोचना करते हुए अपने सभी विरोधियों को व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी का छात्र घोषित करते हैं।

लेकिन यही रवीश छोटे पत्रकारों को निशाना भी बनाते हैं। ‘हिंदुस्तान’ में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया था कि अयोध्या के दीपोत्सव में कैसे राम, सीता और लक्ष्मण के रूपों को हेलिकॉप्टर से उतारा गया और वहाँ कौन-कौन थे। साथ ही, रिपोर्टर ने लिखा था कि यह दृश्य ऐसा था जिसे महसूस किया जा सकता है, बयाँ करना मुश्किल है। रवीश की सुलग गई और उन्होंने उस रिपोर्टर को भला-बुरा बोलते हुए फेसबुक पर एक लेख लिख डाला। अयोध्या में लाखों दीपकों के बीच उस रिपोर्टर की अनूठी रिपोर्टिंग से घबराए रवीश ने उसे भला-बुरा कहा। और हाँ, ऐसे ही रिपोर्टरों को ख़बरों की कतरन का इस्तेमाल वो मोदी को गाली देने के लिए भी करते हैं।

वैसे एनडीटीवी पहले भी पाकिस्तान के काम आते रहा है। रवीश ने एक बार कहा था कि भारतीय मीडिया पाकिस्तान को ज़्यादा तूल देती है। बरखा दत्त ने एनडीटीवी में रहते कारगिल युद्ध की रिपोर्टिंग में भारतीय हितों की अनदेखी की थी। पठानकोट ओर एनडीटीवी ने संवेदनशील सूचनाएँ सार्वजनिक कर दी थी, जिसके लिए बाद में चैनल को माफ़ी माँगनी पड़ी थी। पुलवामा हमले का महिमामंडन किया गया था। कश्मीरी पुलिस की ‘बगावत’ को लेकर झूठे दावे किए गए थे। कश्मीर पर पाकिस्तानी रुख के समर्थन से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को बदनाम करने की कोशिश तक, फेरहिस्त लम्बी है।

ऐसे में लोग ये सवाल पूछने को स्वतंत्र हैं कि क्या रवीश कुमार की बात भारत में कोई नहीं मान रहा तो उनका दिल रखने के लिए इमरान ने उनकी सलाह मान ली है। जब एनडीटीवी पाकिस्तान को ख़ुश रखा करता है तो हो सकता है इमरान ने भी अपना फ़र्ज़ निभाया हो।

शेयरचैट पर दोस्ती कर 9वीं की छात्रा का वाहिद ने किया यौन शोषण: 46 लड़कियों के साथ की थी बातचीत, गिरफ्तार

केरल के कोलाथुरा में 9वीं कक्षा की एक छात्रा के साथ यौन शोषण के आरोप में एवी वाहिद नाम के युवक को गिरफ्तार किया गया है। 22 वर्षीय वाहिद पेशे से मैकेनिक है। यह घटना 20 जनवरी को हुई थी।

जानकारी के मुताबिक, घटना वाले दिन पीड़िता अपनी बस का इंतजार कर रही थी, तभी वाहिद ने उसे स्कूल छोड़ने की पेशकश की। चूँकि, पीड़िता उससे पहले शेयरचैट पर बात कर चुकी थी तो उसने उसकी पेशकश को स्वीकार कर लिया और उसके साथ स्कूल जाने के लिए तैयार हो गई। फिर वाहिद उसे एक सुनसान जगह पर ले गया और उसका यौन शोषण किया। बता दें कि वाहिद ने जब पीड़िता के साथ शेयरचैट पर बात की थी तो उसने अपना नाम हुसैन करिबम बताया था।

पीड़िता के माता-पिता ने वाहिद के खिलाफ यौन शोषण की शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद थलीपरम्बु पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। आरोपित वाहिद कोइम पेरुन्थेलरी का रहने वाला है। वह कानून प्रवर्तन अधिकारियों से भाग रहा था और थेरेली कदवु के पास अपने रिश्तेदार की दुकान में छिपा हुआ था, जिसे उसके रिश्तेदारों ने काफी पहले छोड़ दिया था।

वाहिद को वाडकारा में एक लड़की के साथ बातें करते हुए पाया गया था। जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और अब अदालत ने वाहिद को 2 हफ्ते की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

वाहिद ShareChat के माध्यम से हाई स्कूल की लड़कियों का फँसाता था। वह अलग-अलग नामों से तीन फोन का इस्तेमाल करता था और एक समय में 4 लड़कियों के साथ चैट कर रहा था। कुल मिलाकर अभी तक उसने 46 लड़कियों के साथ बातचीत की थी। स्थानीय मोबाइल रिचार्ज की एक दुकान से लड़कियों का नंबर इकट्ठा करना उसके मुख्य काम में शामिल था। इसके बाद लड़की को अपना शिकार बनाने से पहले वो उसके परिवार के बारे में जानकारी हासिल करता था।

पुलिस अब उसके दोस्तों के ठिकाने की तलाश कर रही है जिसे इस अपराध में भागीदार बताया जा रहा है। मामले की जाँच सीआई केएन सत्यनाथन के नेतृत्व में की जा रही है।

राजनीतिक विज्ञान के पाठ्यक्रम में जोड़ा जाएगा CAA का चैप्टर: HOD शशि शुक्ला ने दी जानकारी

देशभर में नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर विरोध-प्रदर्शन की आड़ में हिंसक दंगे हो रहे हैं। इस दौरान, न सिर्फ़ आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा बल्कि जान लेने पर उतारू दंगाइयों ने पुलिस और मीडियोकर्मियों को भी अपना निशाना बनाया। कई जगहोंं से ऐसी हिंसक ख़बरें आई जहाँ पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाज़ी, आगज़नी और तेज़ाब से भरी बोतलें उनके ऊपर फेंकी गई।

इस बीच, लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा लिया गया एक फ़ैसला सुर्ख़ियों में छाया हुआ है। दरअसल, राजनीतिक विज्ञान के पाठ्यक्रम में CAA को जोड़ने का फ़ैसला लिया गया है। राजनीति विज्ञान की एचओडी शशि शुक्ला ने बताया कि राजनीति विज्ञान विषय के कोर्स में हम CAA के बारे में भी पढ़ाएँगे। यह इस समय का सबसे महत्वपूर्ण विषय है और इसलिए इसका अध्ययन किया जाना चाहिए। इसमें पढ़ाया जाएगा कि क्या, क्यों, कैसे नागरिकता संसोधन क़ानून में संशोधन किया गया।

लखनऊ विश्वविद्यालय के इस फ़ैसले से अब एक नई बहस शुरू हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मामला कोर्ट में है तो इसे कोर्स में शामिल क्यों किया जा रहा है?

उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, “सीएए पर बहस आदि तो ठीक है लेकिन कोर्ट में इस पर सुनवाई जारी रहने के बावजूद लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा इस अतिविवादित व विभाजनकारी नागरिकता कानून को पाठ्यक्रम में शामिल करना पूरी तरह से गलत और अनुचित है। बीएसपी इसका सख्त विरोध करती है और यूपी में सत्ता में आने पर इसे अवश्य वापस ले लेगी।”

इससे पहले, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध कर रही विपक्षी पार्टियों को स्पष्ट सन्देश दे दिया था कि सरकार इस पर पीछे नहीं हटेगी। शाह ने कहा कि चाहे कॉन्ग्रेस व अन्य CAA विरोधी पार्टियाँ कितना भी विरोध प्रदर्शन कर लें, पाकिस्तान से आए एक-एक शरणार्थी को नागरिकता दिए बिना भाजपा सरकार चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा था कि भारत पर यहाँ के लोगों का उतना ही हक़ है, जितना पाकिस्तान से प्रताड़ना झेल कर आए शरणार्थियों का।

ग़ौरतलब है कि मोदी सरकार ने पिछले साल दिसंबर में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के तीन पड़ोसी देशों से छ: ग़ैर-मुस्लिम धर्म से संबंधित उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करने के लिए नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) संसद में पारित किया था।

‘कान खोल कर सुने कॉन्ग्रेस, Pak से आए एक-एक शरणार्थी को नागरिकता मिलेगी, जितना विरोध करना है करो’

CAA लाओ, मुस्लिमों को नागरिकता मत दो: 2003 में कॉन्ग्रेस नेताओं ने की पैरवी, आज फैला रहे अफवाह

‘सोनिया खुद इटली से आकर नागरिकता ले लीं, लेकिन सताए गए हिंदू-सिख भाइयों पर सवाल उठा रहीं’

CAA-NRC का सर्वे करने वाली समझकर आशा कार्यकर्ता को सईनुद्दीन के परिवार ने बेरहमी से पीटा, मामला दर्ज

केरल में कोल्लम ज़िले के इरुकुजुई में एक वरिष्ठ मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) कार्यकर्ता को सीएए-एनआरसी अधिकारी समझकर एक मुस्लिम परिवार ने बेरहमी से पीट दिया। आशा कार्यकर्ता की पहचान महेश्वरी अम्मा के रूप में की गई, जो कि एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी हैं।

ख़बर के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता महेश्वरी अम्मा, गुरुवार (23 जनवरी) को सैनुद्दीन के घर का दौरा कर रही थीं, वहाँ उनकी पिटाई कर दी गई जिसके बाद उन्हें कदक्कल के ज़िला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

आशा कार्यकर्ता महेश्वरी अम्मा, जिनकी उम्र 50 वर्ष के क़रीब हैं, वो 19 जनवरी को आयोजित राज्यव्यापी अभियान में पोलियो वैक्सीन का संचालन करने वाली अन्य आशा कार्यकर्ताओं के एक समूह के साथ थीं। वहाँ मुस्लिम परिवार ने उन्हें आशा कार्यकर्ता न समझकर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के लिए डेटा इकट्ठा करने वाली समझ लिया। 

दरअसल, महेश्वरी अम्मा सईनुद्दीन के घर उन बच्चों की पहचान करने के लिए गई थीं, जिन्हें पोलियो का टीका नहीं लगा था। पूछताछ के बाद, सईनुद्दीन परिवार ने आशा कार्यकर्ताओं को सूचित किया कि उनके यहाँ पाँच वर्ष से कम आयु का कोई बच्चा नहीं है।

इसके बाद महेश्वरी अम्मा जैसे ही उस घर को चिन्हित करने के लिए आगे बढ़ीं, इससे नाराज़ होकर मुस्लिम परिवार ने उनकी पोलियो वैक्सीन की बोतलों को नष्ट कर दिया और उनके साथ मारपीट की। इस मामले में केरल पुलिस ने सईनुद्दीन और उनके परिवार के सदस्यों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया है।

इससे पहले, राजस्थान और पश्चिम बंगाल से भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। यहाँ दो महिलाओं को CAA-NRC से संबंधित आँकड़े जुटाने वाली समझकर मुस्लिम भीड़ ने उनके ऊपर हमला कर दिया था। राजस्थान के कोटा में, राष्ट्रीय आर्थिक जनगणना विभाग में काम करने वाली नज़ीरान बानो पर मुस्लिम भीड़ ने उस समय हमला किया गया था, जब वह बृजधाम क्षेत्र में राष्ट्रीय अर्थशास्त्र जनगणना 2019-2020 के लिए डेटा इकट्ठा कर रही थीं। जब उन्होंने भीड़ को यकीन दिलाया कि वह उनकी तरह मुस्लिम हैं, तब कही जाकर उन्हें छोड़ा गया।

दूसरे मामले में, पश्चिम बंगाल के बीरभूम में, गूगल इंडिया और टाटा ट्रस्ट के लिए काम करने वाली 20 साल की चुमकी खातून पर गाँव वालों ने हमला कर दिया। गाँव वालों को लगा कि वह NRC के लिए डेटा इकट्ठा कर रही हैं। गौरबाजार गाँव में स्थित खातून के घर को लोगों ने आग के हवाले कर दिया और उनके परिवार को मजबूरी में स्थानीय पुलिस थाने में शरण लेनी पड़ी थी।

CAA पर रोक से SC का इनकार, केंद्र से 144 याचिकाओं पर 4 हफ्ते में माँगा जवाब


मद्रास हाई कोर्ट ने खारिज की रजनीकांत के खिलाफ दायर याचिका, पेरियार को लेकर की थी टिप्पणी

फ़िल्म स्टार रजनीकांत द्वारा पेरियार पर की गई टिप्पणी पर दायर एक याचिका को मद्रास हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इससे पहले यह याचिका मजिस्ट्रेट कोर्ट में क्यों दायर नहीं की गई।

अभिनेता से नेता बने रजनीकांत ने बीते दिनों पेरियार को लेकर एक टिप्पणी की थी। जिस पर आपत्ति जताते हुए द्रविड़ संगठन द्वारा रजनीकांत के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई। शुक्रवार (24 जनवरी) को हाईकार्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे खारिज कर दिया। साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट में याचिका क्यों दायर नहीं की गई?

द्रविड़ संगठन द्रविदार विधुतलाई कझगम (डीवीके) ने आरोप लगाया था कि अभिनेता सरासर झूठ बोल रहे हैं। साथ ही संगठन ने रजनीकांत से बिना शर्त माफी माँगने की भी माँग की थी। इस पर रजनीकांत ने अपने बयान पर माफी माँगने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि वे इस मामले में माफी बिलकुल नहीं माँगेंगे। उन्होंने कहा था कि उन्होंने पेरियार को लेकर जो कुछ भी कहा वो उस समय मीडिया में भी प्रकाशित हुआ था। जिसके सबूत उनके पास अब भी है। इसलिए वे माफी नहीं माँगेंगे।

बता दें, बीते शुक्रवार को कोयंबटूर पुलिस आयुक्‍त को रजनीकांत के खिलाफ मामले में शिकायत मिली। डीवीके के कोयंबटूर प्रमुख नेहरूदास ने उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 (a) (धर्म के आधार पर समाज में शत्रुता फैलाना) और 505 (लोगों को भ्रमित करने और उकसाने वाला बयान देना) के तहत कार्रवाई किए जाने की माँग की और उनसे माफी माँगने को कहा।

ग़ौरतलब है कि 14 जनवरी को तुगलक मैगजीन की 50वीं वर्षगाँठ पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान पेरियार ईवी रामासामी को लेकर रजनीकांत ने कहा था कि पेरियार हिंदू देवी-देवताओं के कट्टर आलोचक थे और उन्‍होंने 1971 में सलेम में अंधविश्वास उन्मूलन सम्मेलन के दौरान भगवान राम और सीता की आपत्तिजनक तस्वीरें भी दिखाई थीं। लेकिन इसके बाद भी किसी ने पेरियार की आलोचना नहीं की। केवल चो (तुगलक मैग्जीन के संस्थापक) ने इस मामले को उजागर किया था।

रजनीकांत ने इस कार्यक्रम में अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा था कि तुगलक ही अकेली मैगजीन थी, जिसने उस कार्यक्रम को कवर किया और हिंदू देवी-देवताओं के अपमान की बात उजागर की। लेकिन ये बात सत्‍तारूढ़ डीएमके को पसंद नहीं आई। मैगजीन के उस संस्‍करण को तमिलनाडु सरकार ने जब्‍त कर लिया। मगर, चो ने इसे दोबारा छापा।

पेरियार ने दिखाई राम-सीता की आपत्तिजनक तस्वीरें, साबित कर सकता हूँ, माफी नहीं मागूँगा: रजनीकांत