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खुली केजरीवाल के ‘शिक्षा क्रांति’ के दावों की पोल, अमित शाह ने बदला दिल्ली चुनाव का रुख

दिल्ली में 8 फरवरी को मतदान होने वाला है। चुनाव की तारीख सामने आने के साथ ही आम आदमी पार्टी (AAP) के सुप्रीमो और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के भीतर की घबराहट साफ तौर पर दिखाई देने लगी है। केजरीवाल ने 25 जनवरी को दिल्ली सरकार द्वारा किए गए कामों का हवाला देते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ‘चैलेंज’ दिया था कि वो दिल्ली के किसी भी सरकार स्कूल का भ्रमण करके देख सकते हैं कि उसमें कितना ज्यादा सकारात्मक बदलाव हुआ है।

अब केजरीवाल के चैलेंज का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार (जनवरी 28, 2019) को एक वीडियो ट्वीट किया है। इसमें बीजेपी के 8 सांसदों द्वारा स्कूल का दौरा किया गया है। इस वीडियो को ट्वीट करते हुए अमित शाह ने लिखा है, “अरविंद केजरीवाल जी आपने मुझे दिल्ली सरकार द्वारा संचालित स्कूल देखने के लिए बुलाया था। कल दिल्ली भाजपा के आठों सांसद अलग-अलग स्कूल में गए और देखिए इनका क्या हाल है…इनकी बदहाली ने आपकी ‘शिक्षा की क्रांति’ के दावों की पोल खोल दी। अब आपको दिल्ली की जनता को जवाब देना होगा।”

वीडियो में 8 बीजेपी सांसद अलग-अलग स्कूल में जाते हैं और उसकी वास्तविकता को दिखाते हैं। वीडियो में आप देख सकते हैं कि स्कूल की छतें टूटी हुई हैं, छात्र खुले में पढ़ाई कर रहे हैं। टॉयलेट गंदे हैं, पीने के लिए साफ पानी नहीं है। वीडियो में एक जगह सर्वोदय बाल विद्यालय का छात्र यह कहते हुए नजर आता है कि इसमें अच्छे से पढ़ाई नहीं होती है। कभी सर आते हैं, कभी नहीं आते हैं। बीजेपी की मीनाक्षी लेखी ने जिस स्कूल का दौरा किया, उसमें उन्होंने बहुत पानी पीने की जगह दिखाई, जो कि बेहद गंदे थे। पानी पीने की जगह आगे झाड़ू पड़े हुए थे और नीचे गंदा पानी बह रहा था। वीडियो में मीनाक्षी लेखी कहती हैं कि 61% स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं है और 45% स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। यही वजह है कि छात्रों के बोर्ड का रिजल्ट गिरता जा रहा है।

अमित शाह द्वारा केजरीवाल के झूठ का पर्दाफाश करने के साथ ही यह साफ हो गया है कि बीजेपी चुनाव जीतने के लिए लड़ रही है, जबकि कॉन्ग्रेस तो अभी भी अपना अस्तित्व ही ढूँढ रही है। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी दिल्ली में किए गए ‘काम’ को लेकर चुनाव लड़ने की बात कहती है, लेकिन पिछले हफ्ते जब शाह ने दिल्ली में एक रैली में केजरीवाल के काम की पोल खोल तो AAP का सारा खेल ही बिगड़ गया। बीजेपी केंद्र में किए गए काम के उपलब्धियों के आधार पर वोट माँग रही है।

मुस्लिमों ने रॉड नहीं मारी, बाथरूम में गिर कर मरे नीरज, बयान बदलो: झारखंड सरकार का पीड़ित परिजनों पर दबाव

झारखण्ड के लोहरदगा में सीएए के समर्थन में रैली क्या निकली, अमला टोली के मुस्लिमों ने ऐसा कहर बरपाया कि 15,000 लोगों की भीड़ भी असहाय नज़र आई। इलाक़े के कॉन्ग्रेस विधायक व कैबिनेट मंत्री रामेश्वर उराँव भी लीपापोती के उसी मोड में हैं, जो उनका प्रशासन व पुलिस कर रही है। बता दें कि गुरुवार (जनवरी 23, 2020) को हुई इस रैली में लोहरदगा निवासी नीरज राम प्रजापति ने भी हिस्सा लिया था। उनके सिर पर लोहे की रॉड से प्रहार किया गया था, उन पर पत्थर चलाए गए और उन्हें अपनी दुकान में छिप कर जान बचानी पड़ी। इसके बाद वो घर पहुँचे और बेहोश हो गए।

बेहोश होते ही घर में कोहराम मच गया और उन्हें किसी तरह सदर अस्पताल ले जाया गया। स्थिति बिगड़ने के बाद वहाँ से उन्हें राँची के ऑर्किड हॉस्पिटल ले जाया गया। प्रशासनिक अक्षमता का आलम देखिए कि उन्हें ले जाने के लिए एक एम्बुलेंस तक मुहैया कराने से बार-बार इनकार किया जाता रहा। उनके परिजनों को कहा जाता रहा कि स्थिति खराब है और इसीलिए एम्बुलेंस नहीं जा सकती। खैर, परिजन उन्हें ऑर्किड हॉस्पिटल लेकर गए। वहाँ से उन्हें रिम्स रेफेर कर दिया गया क्योंकि ऑर्किड हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे।

परिजनों को उम्मीद थी कि रिम्स के नए ट्रॉमा सेंटर में उनका इलाज हो पाएगा लेकिन ये संभव न हो सका। उनकी मृत्यु हो गई। नीरज की मृत्यु के बाद प्रशासन ने रिम्स के हवाले से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की। इस विज्ञप्ति में बताया गया है कि नीरज की मृत्यु कार्डियक अरेस्ट से हुई है। रिम्स के चिकित्सकों के हवाले से बताया गया कि उनके शरीर पर किसी भी प्रकार के चोट के निशान नहीं हैं। उनकी मौत का कारण ‘सेप्टिक शौक फ्रॉम ब्रेन स्टेम ब्लीड’ को बताया जा रहा है। स्पष्ट कहा गया है प्रशासन द्वारा कि उनकी मौत का कारण सीएए के ख़िलाफ़ हुई हिंसा नहीं है। लेकिन, क्या सरकार की नज़र में स्थानीय लोग और पीड़ित परिजन झूठे हैं?

प्रशासन की प्रेस विज्ञाप्ति: हिंसा के कारण नहीं हुई नीरज की मौत

ऑपइंडिया ने मृतक नीरज के परिजनों से संपर्क साधा। उनकी पत्नी का स्पष्ट कहना है कि वो सीएए के समर्थन में हुई रैली में गए थे, जहाँ पत्थरबाजी का उन्हें सामना करना पड़ा। भागते-भागते वो दुकान में जाकर छिप गए। परिजनों ने बताया कि उन पर पुलिस और प्रशासन लगातार दबाव बना रहा है कि वो मीडिया के सामने बोलें कि नीरज की मृत्यु बाथरूम में गिर जाने के कारण हुई है। नीचे हम नीरज की पत्नी के भाई संतोष कुमार का वीडियो संलग्न कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने बताया है कि सीएए की रैली के ख़िलाफ़ की गई हिंसा में चोट लगने से नीरज के माथे का नस फट गया था, इससे उनकी मौत हो गई। संतोष ने पुलिस के बयान को नकार दिया और कहा कि हार्ट अटैक से मौत होने की बात झूठी है और पुलिस भी झूठ बोल रही है।

संतोष ने आरोप लगाया कि प्रशासन अफवाह फैला रहा है। उन्होंने कहा कि किसके दबाव में ये सब किया जा रहा है, उन्हें नहीं मालूम। वैसे सरकार परिजनों पर अपना बयान बदलने के लिए दबाव क्यों बना रही है, ये समझा जा सकता है। पुलिस को दर्ज कराए गए बयान में परिजनों ने स्पष्ट कहा है कि नीरज के माथे पर पीछे से लोहे की रॉड से वार किया गया। फिर पुलिस बाथरूम में गिर कर मरने की बात कहने को क्यों कह रही है? आख़िर इस हिंसा के साज़िशकर्ताओं को क्यों बचाया जा रहा है? नीचे हम परिजनों के प्रारंभिक बयान को लगा रहे हैं, जो उन्होंने पुलिस के समक्ष दिया:

ऑपइंडिया से बात करते हुए एक अन्य रिश्तेदार ने बताया कि लोहरदगा में मृतक के मोहल्ले में पुलिस बल भारी मात्रा में तैनात कर दिया गया है। मीडिया को परिजनों से बात करने से रोका जा रहा है। जहाँ पर नीरज के साथ ये घटना हुई, उसे ‘अंजुमन मोहल्ला’ के नाम से जाना जाता है। जब उन पर हमला हुआ, तब वो रैली में मुस्लिमों द्वारा की गई हिंसा से भाग कर घर आ रहे थे। परिजनों ने बताया कि जब वो राँची हॉस्पिटल में लाए गए थे, तब उनका बॉडी मूवमेंट भी लगभग ख़त्म हो गया था। हालाँकि, रिम्स लाते समय कुछ मूवमेंट दिखी थी। डॉक्टरों का कहना था कि इंटरनल ब्लीडिंग के कारण उनकी हालत ऐसी हुई थी। अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इन्तजार है।

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मंदिर से लाउडस्पीकर हटाने का आदेश: कमलनाथ को मिली खुली चुनौती – ‘देखते हैं, कोई कैसे जब्त करता है’

मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार द्वारा कोलाहल नियंत्रण कानून का हवाला देकर आष्टा के प्राचीन शिव मंदिर से लाउडस्पीकर हटवाने का आदेश आने के बाद सियासी घमासान शुरू हो गया। भाजपा नेताओं ने कमलनाथ सरकार पर धार्मिक भेदभाव करने का आरोप लगाया। साथ ही प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कॉन्ग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया।

पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपने ट्विटर अकॉउंट पर लिखा, “शर्मनाक तुष्टीकरण! कमलनाथजी, कोलाहल नियंत्रण के नाम पर मंदिर से स्पीकर हटाने का जो आदेश जारी हुआ है, क्या रात्रि 10 से सुबह 6 के बीच स्पीकर का उपयोग करने वाले दूसरे धार्मिक स्थलों पर भी आप यह लागू करवा पाएँगे? प्रदेश के मुखिया की दृष्टि में तो सभी धर्म समान होने चाहिए या नहीं? “

इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने रामचरित मानस की चौपाई का उल्लेख करते हुए कमलनाथ सरकार को चेताया। उन्होंने लिखा, “चलत बिमान कोलाहल होई। जय रघुबीर कहइ सबु कोई। कॉन्ग्रेस सरकार ने मंदिर से लाउडस्पीकर जब्त करने का आदेश दिया है! हम भी देखते हैं उस मंदिर से कोई कैसे लाउडस्पीकर जब्त करता है!”

गौरतलब है कि शिवराज सिंह चौहान से पहले प्रदेश में भाजपा के मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने भी ट्वीट कर कमलनाथ सरकार पर हमला बोला था। उनके बाद ही शिवराज सिंह चौहान की टिप्पणी आई।

लोकेंद्र ने कमलनाथ सरकार के इस फैसले को तुष्टिकरण की हद बताते हुए लिखा था, “सुनो कमलनाथजी! यदि कोलाहल नियंत्रण कानून है तो वह केवल मंदिरों के लिए नहीं हो सकता। आपके जीवन में यदि कोई पारदर्शिता बची है तो रात के 10 से सुबह के 6 बजे तक इसे सभी के ऊपर लागू कराइए, वरना न आष्टा के मंदिर से स्पीकर हटेंगे, न किसी मंदिर से। पराकाष्ठा है तुष्टीकरण की।”

अपने ट्वीट में लोकेंद्र ने सीहोर जिले के आष्टा की हिंदू उत्सव समिति का एक खत भी शेयर किया। इस पत्र में सीएम को संबोधित करते हुए प्राचीन शिव मंदिर से लाउडस्पीकर हटाने के आदेश का जिक्र करते हुए कहा गया कि प्रशासन ने आष्टा के पंडित हेमंत गिरि और समिति को तहसील कार्यालय बुलाकर चेतावनी दी है कि मंदिर में लाउडस्पीकर नहीं बजेगा अन्यथा उसे जब्त कर लिया जाएगा।

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हिंदू उत्सव समिति द्वारा लिखे खत का पहला पन्ना

इस खत में बताया गया स्थानीय प्राचीन शंकर मंदिर रामायण काल से स्थापित है। मंदिर में भोर के समय भस्म आरती होती है। ऐसे में आदेश की वजह से लाउडस्पीकर नहीं बज पाएगा और धार्मिक भावनाएँ आहत हो सकती हैं।

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हिंदू उत्सव समिति द्वारा लिखे खत का दूसरा पन्ना

बता दें कि प्रदेश भाजपा ने शासनादेश की एक कॉपी को शेयर किया है। जिसमें मध्य प्रदेश कोलाहल नियंत्रण एक्ट के तहत ध्वनि प्रसारण यंत्रों को एक निश्चित अवधि के दौरान ही बजाने की बात कही गई है। सभी पुलिस अधीक्षकों को संबोधित इस आदेश में प्रावधानों का पालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। वहीं नियमों के उल्लंघन की सूरत में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

लाउडस्पीकर पर भजन-कीर्तन से नमाज़ में दिक्कत! मुस्लिम गुंडों ने की पुजारी की पिटाई, उठा ले गए मूर्ति

…वो मॉल जहाँ हर दिन बजती है अजान, आपत्ति जताने पर कहा – ‘दिवाली भी तो मनाते हैं’

मस्जिदों में अजान के लिए लाउडस्पीकर लगाने की इजाजत देने से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार

‘RSS बॉलिवुड फिल्मों की स्क्रिप्ट लिख रहा, भाजपा फिल्म इंडस्ट्री को बहुत चालाकी से इस्तेमाल कर रही’

नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी को संविधान के ख़िलाफ़ बताते हुए बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने द वायर की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी को अपना इंटररव्यू दिया। इस साक्षात्कार के दौरान स्वरा भास्कर ने नए कानून को न केवल अंसवैधानिक बताया बल्कि उसे हिंदू राष्ट्र की नींव डालने वाला बताया।

इंटरव्यू में स्वरा भास्कर ने सीएए/एनआरसी को लेकर खुलेआम झूठ बोला। उन्होंने कहा कि एनआरसी लागू होने के बाद जिन हिंदुओं को उस सूची बाहर किया जाएगा, उन्हें सीएए के सहारे दोबारा भारतीय नागरिकता मिल जाएगी। लेकिन वास्तविकता में देखा जाए तो सीएए का भारतीय नागरिकों से कोई लेना-देना ही नहीं है।

फिल्म इंडस्ट्री और बॉलीवुड कलाकारों पर बात करते हुए स्वरा भास्कर ने उन लोगों को सराहा जो उनके समर्थन में हैं और मोदी सरकार द्वारा लाए कानून के ख़िलाफ़ खड़े हैं। उनका कहना है कि इंडस्ट्री से उन्होंने कभी नहीं सोचा था इतने लोग उनकी तरह खड़े होंगे। 2016 में जेएनयू मामला होने के बाद से वो मान चुकी थीं इन मुद्दों पर बोलने वाली सिर्फ़ वहीं हैं। लेकिन अब अनुराग कश्यप, अनुभव सिन्हा, ऋचा चड्ढा औैर दीपिका पादुकोण जैसे लोगों का पक्ष जानकर उन्हें खुशी है।

शाहीन बाग के प्रदर्शन पर बैठीं महिलाओं का समर्थन करते हुए स्वरा भास्कर ने मोदी सरकार को महिलाओं के नाम पर राजनीति करने वाला बताया। साथ ही बॉलीवुड से जुड़े लोगों की बात करते हुए कहा कि फिल्म इंडस्ट्री कभी कोई आंदोलन नहीं चला सकती। क्योंकि कानून के ख़िलाफ़ बोलने के अलावा यहाँ वो लोग भी हैं, जो इस कानून का समर्थन कर रहे हैं। और सरकार उन्हें जब भी सेल्फी लेने के लिए बुलाएगी, वो वहाँ बिलकुल जाएँगे।

राजनीति से प्रभावित हुईं फिल्मों के मुद्दों पर बोलते हुए स्वरा भास्कर कहती हैं कि वर्तमान सरकार का अजेंडा अब तानाजी जैसी फिल्मों के साथ मिश्रित हो चुका है। तानाजी और छपाक जैसी फिल्मों को एक दूसरे के ख़िलाफ खड़ा किया जा रहा है। ताकि एक निश्चित समुदाय के ख़िलाफ़ माहौल बन सके।

साक्षात्कार के दौरान जब आरफा स्वरा से पूछती हैं कि क्या ये सब पॉलिटिकल अजेंडा बन चुका है। तो स्वरा भास्कर कहती हैं कि बॉलीवुड जाने-अंजाने में खुद हिंदुत्व के प्रोजेक्ट को बढ़ावा दे रहा है। उनके अनुसार, बॉलीवुड इस बात को जानता है या नहीं, लेकिन भाजपा फिल्म इंडस्ट्री को बहुत चालाकी से इस्तेमाल कर रही हैं। वे कहती हैं, “मुझे लगता है आरएसएस का नागपुर हेडक्वार्टर फिल्मों की स्क्रिप्ट लिख रहा है। कुछ बॉलीवुड के लोग उनके हिंदुत्व नैरेटिव को बढ़ाने के लिए भोंपू की तरह काम कर रहे हैं। अगर आप पिछले 5 सालों की ऐतिहासिक फिल्में देखेंगी तो पता चलेगा कि किस प्रकार मुस्लिम शासकों को दर्शाया गया और किस तरह हिंदू राजाओं को गढ़ा गया।”

स्वरा के अनुसार, पिछले 5 सालों में मुस्लिमों को काले रंगों के कपड़ों में और गाढ़ी लाइटिंग के साथ दिखाया गया। जबकि हिंदुओं को रौशनी और रंगीन कपड़ो में। ये बेहद शर्मनाक और खतरनाक हैं। स्वरा आरोप लगाती हैं कि ऐसी फिल्में ऐतिहासिक तथ्यों से दूर-दूर तक सरोकार नहीं रखतीं।

उनके मुताबिक, ये हैरानी की बात है कि मुस्लिमों को विलेन दिखाने की हिंदुत्व की धारणा को बॉलीवुड इतिहास पर आधारित फिल्मों के जरिए बढ़ावा दे रहा है, जो कि वास्तविकता में गलत है। उनके अनुसार हम ऐसी फिल्मों के जरिए अपने बच्चों को जाहिल बना रहे हैं।

गौरतलब है कि द वायर की पत्रकार आरफा खानुम और स्वरा भास्कर की इस बातचीत में भले ही आरफा केवल साक्षात्कर्ता की भूमिका में नजर आईं। लेकिन अगर इस पूरे इंटरव्यू को ध्यान से सुना जाए, तो मालूम चलेगा कि इस बातचीत के जरिए आरफा खानुम ने अपने अजेंडे के मुताबिक बॉलीवुड पर, नरेंद्र मोदी सरकार पर, सीएए कानून पर न केवल निशाना साधा बल्कि बातचीत के जरिए अपनी कुँठा भी निकाली। वहीं स्वरा ने तो जमकर अपने कार्यक्षेत्र को भला-बुरा बोला और अपने सहकर्मियों की आलोचना तक की।

तुम ‘दैनिक भास्कर’ से भी सस्ती बिकती हो: फ़िल्म निर्देशक ने मज़ाक-मज़ाक में स्वरा को जम कर लताड़ा

चोट हलाला, पॉलीगेमी, तलाक पर की जाती है, दर्द इन्हें होता है: मिलिए ‘The Wire’ की आरफा खानम जी से

‘The Wire’ की पत्रकार आरफा खानम को लोगों ने समझाया जर्मनी-भारत का फर्क, कहा- हिटलर के विरोध के बाद…

उत्तराखंड कॉन्ग्रेस में बगावत शुरू: MLA हरीश धामी ने प्रदेश सचिव के पद से दिया इस्तीफा

उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों में अभी समय शेष है। मगर 70 विधानसभा सीट वाले प्रदेश में केवल 11 विधायकों के साथ हाशिए पर खड़ी पार्टी कॉन्ग्रेस ने इसके लिए अपनी तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। चुनावी रणनीतियों के मद्देनजर पिछले दिनों प्रदेश में नई टीम निर्मित की गई थी। साथ ही इस दौरान राज्य कार्यकारिणी का भी गठन हुआ था। लेकिन ये घोषणा सुनते ही पार्टी में बगावती सुर उठने लगे। नतीजतन कॉन्ग्रेस के धारचूला विधायक हरीश धामी ने सोमवार को नई कार्यकारिणी से इस्तीफा दे दिया।

पार्टी से इस्तीफा देते हुए विधायक ने प्रतिपक्ष पर भी सरकार से साँठ-गाँठ के गम्भीर आरोप लगाए। धामी ने सोमवार को नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि वह विधायकों की बदौलत इस पद पर हैं। हम उनके रहमोकरम पर नहीं हैं। 11 में सात-आठ विधायक उन्हें पद से हटाने के लिए हाईकमान से बात करेंगे। उन्होंने पिछली कॉन्ग्रेस सरकार में उद्योग मंत्री डॉ इंदिरा हृदयेश पर सिडकुल मामले में गड़बड़ी करने और अपने पीआरओ को सिडकुल में अच्छे पद पर नियुक्ति देने का आरोप लगाया। उन्होंने इस प्रकरण की जाँच कराने की माँग की।

हरीश धामी ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेता और विधायक होने के बावजूद उनके साथ पार्टी में सौतेला व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा, “मुझे जलील करने के लिए ये पद दिया गया था। इसकी वजह से प्रदेश सचिव पद से इस्तीफा दिया है।” उनके अनुसार जो वार्ड मेंबर का चुनाव नहीं जीत सकते, उन्हें कार्यकारिणी में जगह दी गई।

जानकारी के मुताबिक, नाराज होने की वजह से ही उन्होंने शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष के फोन को रिसीव नहीं किया। उनके इस्तीफे पर हल्द्वानी में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश की टिप्पणी ने उनका पारा चढ़ा दिया।

गौरतलब है कि सोमवार को प्रदेश कॉन्ग्रेस की नई कार्यकारिणी की घोषणा के साथ ही उपजा विवाद सोमवार को और तूल पकड़ गया। नई कार्यकारिणी में प्रदेश सचिव पद से मिलने से खफा विधायक धामी प्रदेश कॉन्ग्रेस मुख्यालय राजीव भवन पहुँचे और वहाँ प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह की गैर मौजूदगी में उन्होंने उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना को प्रदेश सचिव पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया।

यहाँ, धस्माना ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष को ही इस्तीफा सौंपने का सुझाव दिया। बीते शनिवार को कार्यकारिणी घोषित होने पर प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के खिलाफ तल्ख हरीश धामी के तेवर सोमवार को नरम पड़े।

…वो मॉल जहाँ हर दिन बजती है अजान, आपत्ति जताने पर कहा – ‘दिवाली भी तो मनाते हैं’

चेन्नई के मरीना मॉल में स्पीकर पर अजान बजाए जाने की बात सामने आने के बाद मॉल के एडमिनिस्ट्रेशन ने इस पर अपनी सफाई दी है। मॉल का कहना है कि वे ये पाँच बार अजान बिलकुल उसी तरह बजाते हैं, जैसे वे सालाना क्रिसमस, दिवाली, पोंगल त्योहारों को मनाते हैं। उनके मुताबिक वे यहाँ की धर्मनिरपेक्षता का सम्मान करते हैं। इसलिए ऐसा करते हैं।

फर्स्टपोस्ट के पत्रकार संजय पांडे द्वारा पोस्ट की गई वीडियो पर सोमवार को रिप्लाई देते हुए मरीना मॉल ने जवाब दिया, “हम इस मामले में हस्तक्षेप करके साफ करना चाहते हैं कि जो वीडियो में सुनाई दे रहा है, वो प्रार्थना के लिए दिया गया संकेत है। हम इसे बजाते हैं, जैसे हम क्रिसमस, दिवाली पोंगल मनाते हैं। हम इस खूबसूरत जगह, जिसे हम घर कहते हैं, उसकी धर्मनिरपेक्षता का सम्मान करते हैं और निवेदन करते हैं कि आप भी इसके प्रति सचेत रहें। जय हिंद!”

हालाँकि, गौर करने वाली बात है कि जिन त्योहारों से तुलना करके मरीना मॉल अजान को जस्टिफाई करने की कोशिश कर रहा है, वो त्योहार साल में एक बार आते हैं। लेकिन अजान हर दिन 5 बार बजती है। अगर मरीना मॉल को वाकई दूसरे धर्मों से जोड़कर इसे जस्टिफाई करना है तो कायदे से इसके समकक्ष भजन या फिर श्लोक आदि होने चाहिए।

गौरतलब है कि ये मामला FirstPost (फ़र्स्टपोस्ट) के पत्रकार संजय पांडे, ने रविवार को एक वीडियो शेयर करते हुए उजागर किया था। उनके द्वारा पोस्ट की गई वीडियो के बैकग्राउंड में अजान की आवाज़ सुनाई दे रही थी। इस वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने कहा था कि यह चेन्नई का मरीना मॉल (Marina Mall) है। यहाँ अजान की आवाज़ सुनाई दे रही है जोकि बड़ी विचित्र बात है।

इसके आगे उन्होंने कहा,

“यह पागलपन और हास्यास्पद है। मैंने आज तक कभी ऐसा कुछ नहीं सुना; कम से कम भारत में तो बिल्कुल नहीं। मुझे नहीं पता कि यह किस तरह की मानसिकता है। अगली बार जब आप यहाँ आएँगे तो हो सकता है कि आपको बैकग्राउंड में चर्च की प्रेयर या भगवत गीता सुनाई दे।”


अपने ट्विटर हैंडल से इस वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन लिखा था, “सेक्युलर भारत में आपका स्वागत है। मरीना मॉल के अंदर म्यूजिक सिस्टम के ज़रिए अज़ान बज रही है। मेरी उत्सुकता यह जानने की है कि क्या इसके लिए क़ानूनी रूप से अनुमति ली गई है?” इसके बाद जल्द ही कुछ ने उन्हें भद्दी गालियाँ देते हुए ‘Get the F**k out’ भी कहा।

इस वीडियो को देखने के बाद ऑपइंडिया ने इस बात की स्पष्ट जानकारी जुटाने के लिए पत्रकार पांडे से सम्पर्क किया था। जिसके बाद उन्होंने हमें बताया कि वह एक फिल्म देखने के लिए मरीना मॉल गए थे और शो ख़त्म होने के बाद बाहर आने के बाद यह घटना घटी।

उन्होंने बताया, “मैं एक पत्रकार हूँ और मैंने देश के हर गली-नुक्कड़ में यात्रा की है। मैंने चारों महानगरों में काम किया है। मुझे ऐसा अनुभव कभी नहीं हुआ। यह कुछ नया है। और यह एक संकेत है कि हम शायद ऐसी स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ ऐसी चीजें अब बार-बार होंगी। वे मूल रूप से इसे सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “उन्होंने (मुस्लिमों) मस्जिदों से पाँच बार अज़ान को सामान्य कर दिया है, अब कोई भी इस पर आपत्ति दर्ज नहीं करता। और अगर कोई आपत्ति जताता भी है तो फिर उसे सोनू निगम की तरह सिर मुँड़वाना होगा। साथ ही लोगों से धमकियाँ भी मिलती हैं। मैंने दुबई के अपने दोस्तों से बात की है, ऐसा तो वहाँ भी नहीं होता है।”

चेन्नई के मरीना मॉल में अज़ान: आवाज़ उठाने वाले पत्रकार को वामपंथी-इस्लामिस्ट्स ने किया ट्रोल

मस्जिदों में अजान के लिए लाउडस्पीकर लगाने की इजाजत देने से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार

मस्जिद में अजान को लेकर बवाल: मारपीट के बाद में घरों पर की गई पत्थरबाजी

नेपाल भागने की फिराक में शरजील इमाम: पटना में मिली लास्ट लोकेशन, भाई को पुलिस ने लिया हिरासत में

असम को हिंदुस्तान से काटने का विवादित वीडियो सामने आने के बाद जेएनयू छात्र और शाहीन बाग प्रोटेस्ट के को-ऑर्डिनेटर शरजील इमाम को पुलिस सरगर्मी से तलाश रही है। यूपी, बिहार, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में केस दर्ज होने के बाद अब शरजील की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली पुलिस भी छापेमारी कर रही है। इस बीच शरजील के भाई को बिहार पुलिस ने हिरासत में लिया है।

शरजील की लास्ट लोकेशन पटना में मिली है। बिहार पुलिस को शक है कि वो बॉर्डर के रास्ते नेपाल भागने की फिराक में हो सकता है। इस संभावना को देखते हुए बिहार-नेपाल सीमा पर अलर्ट जारी किया गया है। शरजील की माँ अपने बेटे को मीडिया के माध्यम से कह रही है कि वो सरेंडर कर दे हालाँकि उनका मानना है कि उनके बेटे की बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।

बिहार पुलिस ने सोमवार (जनवरी 27, 2019) को शरजील के जहानाबाद स्थित पैतृक घर पर छापा मारकर उसके छोटे भाई को हिरासत में ले लिया है। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है। दरअसल पुलिस ने शरजील इमाम को गिरफ्तार करने के लिए मुबंई, पटना और दिल्ली में छापेमारी की थी। इस दौरान जहानाबाद में उसके घर के सदस्यों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, हालाँकि शरजील वहाँ नहीं मिला।

एक तरफ जहाँ पुलिस दोशद्रोह के आरोपित शरजील इमाम को गिरफ्तार करने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ शरजील इमाम के पक्ष में जेएनयू छात्रों ने सोमवार की शाम पैदल मार्च किया। यह मार्च गंगा ढाबे से शुरू होकर चंद्रभागा हॉस्टल तक किया गया। इस दौरान ‘शरजील इमाम जिंदाबाद’ के नारे लगे। साथ ही नागरिकता संशोधित कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में भी नारेबाजी की गई।

गौरतलब है कि शरजील इमाम ने विवादित वीडियो में कहा था, “असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है। असम और इंडिया कटकर अलग हो जाए, तभी ये हमारी बात सुनेंगे। असम में मुस्लिमों का क्या हाल है, आपको पता है क्या? CAA-NRC लागू हो चुका है वहाँ। डिटेंशन कैंप में लोग डाले जा रहे हैं और वहाँ तो खैर कत्ले-आम चल रहा है। 6-8 महीनों में पता चलेगा कि सारे बंगालियों को मार दिया गया वहाँ, हिंदु हो या मुस्लिम। अगर हमें असम की मदद करनी है तो हमें असम का रास्ता बंद करना होगा फौज के लिए और जो भी जितना भी सप्लाई जा रहा है बंद करो उसे। बंद कर सकते हैं हम उसे, क्योंकि चिकन नेक जो इलाका है, वह मुस्लिम बहुल इलाका है।”

शरजील इमाम के बिहार कनेक्शन पर छापेमारी, उसके अब्बा को नीतीश की पार्टी ने दिया था टिकट

4 धमाकों से दहला असम, शरजील इमाम ने दी थी राज्य को भारत से अलग करने की धमकी

पुराना Pak परस्त है संविधान और ‘भारत’ से घृणा करने वाला शरजील इमाम, हिन्दुओं को निकालना चाहता है

शेजी खान के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में थीं ममता मिश्रा! वृंदावन के होटल से मिली लाश

उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित एक होटल में एक पति-पत्नी (ऐसा उन दोनों ने होटल स्टाफ को बताया था) ठहरे। अगले दिन वो दोनों अपने कमरे में बेहोशी की हालत में मिले। दोनों को पुलिस ने अस्पताल पहुँचाया। जहाँ महिला को मृत घोषित कर दिया गया। वहीं पुरुष को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में रेफर किया गया। सोमवार (27 जनवरी) को वृंदावन कोतवाली क्षेत्र स्थित होटल जगदीश धाम में यह घटना घटी। फिलहाल पुलिस घटना की जाँच पड़ताल में जुट गई है। पुलिस ने दोनों के परिजनों को सूचना दे दी है।

प्रभात खबर के मुताबिक कोतवाली प्रभारी संजीव कुमार दुबे ने सोमवार को बताया कि उनके सामान की तलाशी के दौरान मिले कागजातों (आधार कार्ड) के अनुसार पुरुष का नाम शेजी खान और महिला का नाम ममता मिश्रा है। ममता बिहार की रहने वाली थीं। वहीं शेजी खान के पिता का नाम शौकत खान है। आशंका जताई जा रही है कि ममता मिश्रा, शेजी खान के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में उसके दिल्ली के पश्चिमपुरी स्थित क्वार्टर में रह रही थी।

पुलिस ने इस बारे में बयान देते हुए कहा कि प्राथमिक जाँच में यह आत्महत्या का मामला लग रहा है, मगर इसकी जाँच की जा रही है। संजीव कुमार दुबे ने बताया कि शेजी खान और ममता मिश्रा एक दिन पहले ही उस होटल में आकर रूके थे। जब सुबह बड़ी देर तक उनके कमरे का दरवाजा नहीं खुला तब ताला तोड़कर देखा गया तो दोनों बेहोश मिले।

वहीं डीआईजी शलभ माथुर ने बताया कि होटल के कमरे में जहरीला पदार्थ खाने के सिमटम पाए गए है। माथुर का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद मौत की असली वजह सामने आ पाएगी। उन्होंने बताया कि शेजी खान से थोड़ी पूछताछ की गई, वहीं पूरी तरह होश में आने के बाद घटना की वजह साफ हो पाएगी।

पुलिस उनके वृंदावन आने के कारण की भी खोज कर रही है। फिलहाल यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि महिला को दबाव बनाकर लाया गया था या फिर वह अपनी मर्जी से आई थी। पुलिस की जाँच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। अभी पुलिस पूछताछ के लिए शेजी खान की मेडिकल फिटनेस का इंतजार कर रही है। साथ ही पुलिस दोनों के परिजनों और उनसे जुड़ी अन्य जानकारियों का भी पता लगाने की कोशिश कर रही है।

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राहुल गाँधी की युवा आक्रोश रैली: ‘नहीं होगी पढ़ाई, सभी छात्र-छात्राओं को वहाँ जाना है’ – कॉलेजों में नोटिस

राजस्थान के जयपुर के अलबर्ट हॉल में आज ( जनवरी 28, 2020) राहुल गाँधी की युवा आक्रोश रैली के लिए पूरा इंतजाम हो चुका है। खबर है कि रैली में भीड़ जुटाने के लिए गहलोत सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। राजस्थान के कॉलेजों में नोटिस जारी करके छात्रों को इस रैली में शामिल होने का फरमान सुनाया गया है। इस नोटिस में कहा गया कि रैली के दौरान कक्षाएँ नहीं होंगी।

गौरतलब है कि अभी तक जहाँ राजनेताओं की रैलियों में इकट्ठा होने वाली भीड़ पर तरह-तरह के सवाल उठते रहे हैं, वहीं गहलोत सरकार के इस नए कारनामे का पर्दाफाश होने के बाद विपक्ष में बैठी भाजपा को नया हथियार मिल गया है। सिर्फ भाजपा ही नहीं बल्कि आम जनता भी अपने बच्चों पर इस तरह के राजनीतिक हथकंडे थोपने को लेकर राज्य सरकार के प्रति गुस्से में है।

टाइम्स नाऊ की खबर के अनुसार जयपुर के ज्ञानदीप महाविद्यालय के प्रिंसिपल द्वारा जारी किए गए नोटिस में साफ-साफ लिखा है कि महाविद्यालय के छात्र 9 बजे वहाँ इकट्ठा होंगे और उसके बाद गाड़ी उन्हें अल्बर्ट हॉल तक लेकर जाएगी।

खबर के अनुसार इस तरह के नोटिस राजस्थान के लगभग हर कॉलेज में जारी किए गए हैं। साथ ही कॉलेजों को टारगेट दिया गया है कि हर क्लास से कम से कम 10 बच्चे आने ही चाहिए। ताकि रैली में भारी तादाद में युवाओं की संख्या दिखे।

बता दें राहुल गाँधी को इस प्रकार तीसरी बार लॉन्च किया जा रहा है। यही कारण है कि गहलोत सरकार अपनी तरफ से किसी प्रकार की कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती। राज्य सरकार की पूरी मशीनरी ने राहुल गाँधी को बतौर युवा नेता पेश करने के लिए अपना दम-खम लगा दिया गया है। उनकी छवि निर्माण के लिए आज़ राजस्थान मुख्यमंत्री गहलोत एक सभा भी करने वाले हैं।

खबरों के अनुसार राहुल गाँधी आज अल्बर्ट हॉल में युवाओं को संबोधित करते हुए बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक मंदी को लेकर केंद्र सरकार को घेरने वाले हैं। रैली में उनका फोकस युवाओं पर ही रहेगा। यूथ कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता एनआरयू (नेशनल रजिस्टर ऑफ अनइंप्लॉयमेंट) राहुल के सामने लॉन्च करेंगे। इसके अलावा राहुल सीएए, एनआरसी और एनपीआर के मुद्दे पर भी अपनी बात रख सकते हैं।

नहीं रहे नीरज प्रजापति! CAA समर्थक जुलूस पर ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ चीखते भीड़ के हमले में हुए थे घायल

झारखंड के लोहरदगा में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में निकाले गए जुलसू पर हुई हिंसा में घायल नीरज राम प्रजापति की सोमवार (जनवरी 27, 2019) को राँची के रिम्स में मौत हो गई। रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में उनका इलाज चल रहा था। लोहरदगा में हुई हिंसा में घायल होने के बाद उन्हें राँची के ऑर्किड अस्पताल में भर्ती किया गया था। यहाँ से 2 दिन के इलाज के बाद ब्रेन हेमरेज व स्थिति गंभीर बताकर उसे रिम्स रेफर कर दिया गया था। CAA के समर्थन में निकाले गए तिरंगा यात्रा के दौरान पत्थरबाजी में नीरज घायल हो गए थे।

उल्लेखनीय है कि लोहरदगा में 23 जनवरी को CAA के समर्थन में हुई रैली में 15 से 20 हज़ार लोग शामिल थे, फिर भी मुस्लिम मोहल्ले में जुलूस के पहुँचते ही इतनी तेज़ पत्थरबाजी हुई कि लोगों में भगदड़ मच गई। CAA के समर्थन में निकली रैली पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने ईंट-पत्थर से हमला किया। पेट्रोल बम फेंके। हिंदुओ के घरों और वाहनों के साथ महिलाओं तक को निशाना बनाया गया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सीएए के समर्थन में जुलूस निकाल रहे लोगों पर अमलाटोली चौक के पास पथराव किया गया। उपद्रवियों ने दो दर्जन से अधिक गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। कई दुकानों में आगजनी और तोड़फोड़ भी की। स्थिति जल्द ही बेकाबू हो गई। इसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हवा में कई राउंड गोलियाँ चलाईं। स्थिति तनावपूर्ण होने की खबर पाकर जिले की उपायुक्त आकांक्षा रंजन और पुलिस कप्तान प्रियदर्शी आलोक पूरे दलबल के साथ मौके पर पहुॅंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

इसके बाद शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया। बता दें कि कर्फ्यू लगने के बाद भी शुक्रवार (जनवरी 4, 2020) को कई जगहों पर हिंसक झड़पें हुई। तनावग्रस्त क्षेत्र में जगह-जगह सुरक्षा बल के जवानों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही लोगों को अफ़वाहों से दूर रहने की अपील सोशल मीडिया के ज़रिए की जा रही है। वहीं, शहर में प्रवेश करने वाले तमाम रास्तों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है और संदिग्ध दिखने वाले शख़्स से कड़ाई के पूछताछ करने का दौर भी जारी है।

जानकारी के मुताबिक सोमवार को कर्फ्यू में 2 घंटे की छूट दी गई थी। इस दौरान लोगों की भीड़ आवश्यक सामानों की खरीददारी के लिए दुकान की दौड़ पड़ी। रोजमर्रा के सामान की खरीदारी के लिए उमड़ी भीड़ ने यह बता दिया कि कर्फ्यू से लोग काफी परेशान हैं। वहीं बच्चों के लिए दूध, वृद्धों के लिए आवश्यक दवा, रोजमर्रा के लिए सब्जी, चावल व दाल खरीदने के लिए सैकड़ों लोग विभिन्न दुकानों में जमा हो गए। सबसे अधिक भीड़ दवा दुकान में देखी गई। दो घंटे की ढील के बाद फिर से कर्फ्यू लगा दिया गया है।

मस्जिद व कॉन्ग्रेस दफ्तर से चले पत्थर: मुस्लिमों ने की गोलीबारी, ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ चीखते हुए टूट पड़ी भीड़

CAA समर्थक जुलूस पर पथराव: धू-धू कर जला लोहरदगा, पथराव-आगजनी के बाद कर्फ्यू

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