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कुणाल कामरा को इंडिगो ने किया सस्पेंड; बाकी एयरलाइन्स भी करे बैन: केंद्रीय मंत्री

इंडिगो एयरलाइन्स ने उपद्रवी यात्री कुणाल कामरा को 6 महीने के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। बता दें कि 6E 5317 फ्लाइट में कुणाल कामरा ने रिपब्लिक न्यूज़ के संस्थापक अर्नब गोस्वामी के साथ बदसलूकी की थी। इंडिगो ने कहा कि कुणाल कामरा का ये व्यवहार अस्वीकार्य है और उन्हें फ्लाइट में उड़ान भरने के लिए 6 महीनों के लिए प्रतिबंधित किया जाता है।

साथ ही इंडिगो ने अपने यात्रियों को सलाह दी है कि दूसरे यात्रियों पर व्यक्तिगत टिप्पणी करने वाली किसी भी गतिविधि में संलिप्त न हों। इंडिगो ने यात्रियों को अपने सहयात्रियों से भी दुर्व्यवहार करने से मना किया है, जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा पहुँचे।

वीडियो में कुणाल कामरा कहता दिख रहा था कि जब उसने ‘डरपोक’ अर्नब गोस्वामी से उनकी पत्रकारिता को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कामरा को ‘मानसिक रूप से विक्षिप्त’ बताया और बाद में कहा कि वो अपने लैपटॉप पर कुछ देखने में व्यस्त हैं। वीडियो में कथित कॉमेडियन कुणाल कामरा ये कहते दिख रहा था कि अर्नब उसके सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं। इस दौरान कामरा ख़ुद को ‘टुकड़े-टुकड़े’ नैरेटिव का अंग बताता है और कहता है कि अर्नब से दर्शक जानना चाहते हैं कि वो ‘राष्ट्रवादी’ हैं, या फिर ‘डरपोक’?

मुस्लिमों को निशाना बना रही मोदी सरकार: शरजील के साथ खड़ा हुआ JNU छात्र संगठन

जेएनयू छात्र संगठन ने शरजील इमाम की गिरफ़्तारी की निंदा की है। जेएनयू छात्र संगठन ने ‘इस्लामोफ़ोबिक’ मोदी सरकार पर मुस्लिमों को निशाना बनाने और विरोधी आवाज़ों को दबाने का आरोप लगाया। जेएनयू छात्र संगठन ने कहा कि वो शरजील इमाम के साथ मजबूती से खड़ा है। बता दें कि महात्मा गाँधी को सबसे बड़ा फासिस्ट नेता बताने वाले शरजील इमाम ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकेन्स नेक) को ठप्प कर के पूरे उत्तर-पूर्वी भारत को शेष भारत से काट देने की बात की थी। उसे जहानाबाद की एक मस्जिद से गिरफ़्तार किया गया। उसके ख़िलाफ़ राजद्रोह का मुक़दमा चलाया जाएगा।

जेएनयू छात्र संगठन ने कहा कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर के ख़िलाफ़ बयान देने के लिए शरजील पर यूएपीए के तहत कार्रवाई की जा रही है। संगठन ने आरोप लगाया कि शरजील पर ‘अँग्रेजों के ज़माने के निष्ठुर क़ानून’ के तहत सज़ा दी जा रही है। संगठन ने आरोप लगाया कि सीएए और एनआरसी के कारण लाखों लोग बेदखल हो जाएँगे और उनके अधिकार छीन लिए जाएँगे। जेएनयू छात्र संगठन ने आरोप लगाया कि मुस्लिमों को सरकार बेशर्मी से निशाना बना रही है।

जेएनयू छात्र संगठन ने लिखा, “शरजील उस अल्पसंख्यक मुस्लिम पहचान का नेतृत्व करते हैं, उसे तो निशाना बनाया ही जा रहा है और इसके लिए विरोधी और दबे हुए तबके की आवाज़ को कुचलने वाले क़ानून का इस्तेमाल किया जा रहा है।” छात्र संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी मशीनरी का इस्तेमाल कर के उन मुस्लिमों को बदनाम कर रही है, जो उसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं। जेएनयूएसयू ने मीडिया के प्रति भी गुस्से का इजहार किया और आरोप लगाया कि मीडिया अलग ट्रायल कर के सरकार का साथ दे रही है।

जेएनयू छात्र संगठन का बयान, शरजील इमाम के समर्थन में

जेएनयू छात्र संगठन शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों की छवि को लेकर भी चिंतित है। उसने अपने बयान में आरोप लगाया कि संबित पात्रा व भाजपा से जुड़े अन्य लोगों ने शरजील इमाम की वीडियो की एडिट की हुई क्लिप्स को ग़लत सन्दर्भ में पेश किया और उसे बदनाम किया।

शरजील इमाम के साथ मजबूती से खड़ा है जेएनयू छात्र संगठन

संगठन ने दावा किया कि कई मीडिया नेटवर्क्स को भी शरजील को बदनाम करने के काम में लगाया गया है। इस बयान पर जेएनयू छात्र संगठन के 145 सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। बता दें कि जेएनयू छात्र संगठन के अधिकतर महत्वपूर्ण पदों पर वामपंथियों का कब्जा है।

‘शाहीन बाग़ में दंगाइयों को अरविन्द केजरीवाल ने बिठाया है, उनकी पीड़ा CAA नहीं, राम मंदिर है’

साउथ दिल्ली के सांसद रमेश विधूड़ी ने अरविन्द केजरीवाल को उनके वादों की याद दिला कर दिल्ली सरकार की धज्जियाँ उड़ा दी। उन्होंने पूछा कि 15 लाख सीसीटीवी कैमरे, 20 स्कूल, 500 कॉलेज, 5000 बसें और कॉलनियों को नियमित करने का वादा- ये सब फेल क्यों हो गया? उन्होंने पूछा कि झुग्गी में रहने वालों को पक्का घर देने के वादे का क्या हुआ? उन्होंने इस दौरान सीएए को लेकर भी बात की और कहा कि इससे किसी की नागरिकता ली नहीं जा रही है, दी जा रही है, फिर भी इस पर हंगामा हो रहा है।

शाहीन बाग़ में हो रहे उपद्रव पर बोलते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि सोते हुए लोगों को तो जगाया जा सकता लेकिन इन्हें कोई नहीं जगा सकता। उन्होंने कहा कि शाहीन बाग़ में बैठे लोगों की पीड़ा सीएए नहीं है, बल्कि अनुच्छेद 370 है, तीन तलाक़ है और राम मंदिर है। विधूड़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने सीएए को लेकर कई बार लोगों को समझाया। उन्होंने पूछा कि पुलिस जामिया में घुस कर दंगाइयों को पकड़ती है तो भी पुलिस की आलोचना होती है और जेएनयू में हिंसा होती है तो भी पुलिस से ही पूछा जाता है कि वो जेएनयू में क्यों नहीं गई?

रमेश विधूड़ी ने आरोप लगाया कि शाहीन बाग़ में धरने पर बैठे लोगों को अरविन्द केजरीवाल ने बैठाया है। उन्होंने कहा कि जो बसें जला रहे हैं, वो दंगाई हैं। निर्दोष बच्चों से पीएम मोदी की हत्या करने की बात कहवाने वाले दंगाई हैं। जो भी उपद्रव कर रहे हैं, वो दंगाई हैं।

रमेश विधूड़ी ने एबीपी न्यूज़ के ‘शिखर सम्मलेन’ में ये बातें कहीं। इस दौरान वहाँ आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय भी उपस्थित थे। विधूड़ी ने दिल्ली के बदहाल स्कूलों की तस्वीर दिखाते हुए आप सरकार पर निशाना साधा।

जिस दिन हम उनसे ज्यादा हो गए, उस दिन हिन्दुओं को पटक-पटक कर मारेंगे: बुर्कानशीं युवती का वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें बुर्कानशीं महिलाएँ हिन्दुओं के ख़िलाफ़ घृणा फैलाते हुए नज़र आ रही हैं। इस वीडियो में महिलाएँ सीएए को लेकर धरना पर बैठी दिख रही हैं और विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। बता दें कि शाहीन बाग़ की तर्ज पर कई इलाक़ों में मुस्लिम महिलाओं को विरोध प्रदर्शनों में आगे कर के सुर्खियाँ बटोरने और अराजकता फ़ैलाने का काम किया जा रहा है। सीएम योगी ने भी कहा था कि कुछ पुरुष ख़ुद रजाई में सो रहे हैं और अपने घर की महिलाओं और बच्चों को सड़क पर बिठा दे रहे हैं।

वायरल वीडियो में महिलाओं की भाषा पर गौर कीजिए। हिजाब और बुर्का पहनी महिला इस वीडियो में कहती है कि आजकल आ रहा हर क़ानून मोदी का है, ऐसा कौन सा क़ानून है जो दूसरे का है? जब बुर्कानशीं युवती को याद दिलाया जाता है कि इस मामले में अभी कोर्ट ने कोई फ़ैसला नहीं दिया है तो वो कहती है कि कोर्ट भी तो ‘उन्हीं’ का है।

महिला आगे कहती है कि वो मर भी जाएँ लेकिन वहाँ से हटेंगी नहीं। वीडियो में वो कहती दिखती है कि चाहे कुछ भी हो जाए, वो विरोध प्रदर्शन स्थल से पीछे नहीं हटेंगी। वो मुस्लिमों की जनसंख्या की बात करते हुए कहती है कि हिन्दू इतनी ज्यादा संख्या में मुस्लिमों को मारेंगे तो मुस्लिम भी हिन्दुओं को मारेंगे। बुर्कानशीं महिला आगे कहती है कि जिस दिन मुस्लिम जनसंख्या में हिन्दुओं से ज्यादा हो गए, उस दिन हिन्दुओं को पटक-पटक कर मारेंगे।

हालाँकि, ये वीडियो कहाँ का है और किस डेट का है, इसके बारे में ऑपइंडिया कुछ पुष्टि नहीं कर सकता। लेकिन, जिस तरह से सीएए और एनआरसी को लेकर इस वीडियो में महिलाएँ मोदी सरकार को आड़े हाथों ले रही हैं और हिन्दुओं के प्रति घृणा का प्रदर्शन कर ही हैं, उससे लगता है कि ये शाहीन बाग़ के बाद शुरू हुए ताज़ा ट्रेंड का ही एक हिस्सा है।

दंगाइयों ने मेरे पति को मार डाला, मेरे दो छोटे बच्चे हैं: नीरज की पत्नी ने CM सोरेन से लगाई गुहार, पढ़ें पत्र

झारखण्ड के लोहरदगा में गुरुवार (जनवरी 23, 2020) को नागरिकता संशोधन क़ानून के समर्थन में आयोजित रैली पर मुस्लिमों ने हमला कर दिया। इस हमले में नीरज प्रजापति नामक व्यक्ति की मृत्यु हो गई। उनके माता-पिता बीमार हैं और दो छोटे-छोटे बच्चे भी हैं। झारखण्ड सरकार किसी भी प्रकार की सहायता देने में आनाकानी कर रही है और प्रशासन दबाव बना रहा है कि पीड़ित परिजन मीडिया के सामने ऐसा बोलें कि नीरज की मौत बाथरूम में गिरने से हुई, सीएए समर्थकों के ख़िलाफ़ हुई हिंसा में नहीं। ऐसे में शोक-संतप्त परिजनों की दयनीय स्थिति हो गई है।

ऑपइंडिया ने उस पत्र को एक्सेस किया, जो मृतक नीरज राम प्रजापति ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेजा है। हम चाहते हैं कि आप भी इस पत्र को पढ़ें और परिवार की दुःखद स्थिति को समझें। पूरी घटना को समझने के लिए मृतक की पत्नी का ये पत्र पढ़ना इसीलिए भी आवश्यक है, ताकि सरकार की नाकामी और अमला टोली के मजहबियों की करतूत को आप भी जानें और समझें। हम आपके लिए पूरा पत्र हूबहू पेश कर रहे हैं। एक-एक शब्द को ध्यान से पढ़ें:

सेवा में,
मुख्यमंत्री, झारखण्ड
प्रतिलिपि: उपयुक्त, लोहरदगा एवं एसपी, लोहरदगा
दिनांक: जनवरी 28, 2020 (मंगलवार)

विषय: नीरज राम प्रजापति की हत्या के मुआवजे के सम्बन्ध में

महाशय,
सविनय निवेदन है कि मैं दिव्या कुमारी स्वर्गीय नीरज राम प्रजापति की पत्नी हूँ। 23 जनवरी को सीएए के समर्थन में लोहरदगा में जो शोभा यात्रा निकाली गई, उसमें मेरे पति भी सम्मिलित हुए थे। शोभा यात्रा शांति से आगे बढ़ रही थी लेकिन बीच में शरारती तत्वों ने पेट्रोल बम और पत्थरों से हमला कर दिया। लोगों में भगदड़ मच गई और मेरे पति भी जान बचा कर किसी तरह वहाँ से भागे।

दंगाइयों ने मेरे पति को दौड़ा कर उनके सिर पर रॉड से वार किया। इसके बाद वो किसी तरह भागते हुए घर पहुँचे। वहाँ पहुँच कर उन्होंने मुझे सारी बातें बताईं। इसके बाद वो अचानक से बेहोश हो गए। मैं उन्हें लेकर आनन-फानन में लोहरदगा सदर अस्पताल पहुँची , जहाँ से उन्हें राँची रेफर कर दिया गया। तत्पश्चात मैंने इन्हें राँची स्थित ऑर्किड अस्पताल में भर्ती कराया। रुपए के अभाव के कारण मैं उन्हें फिर राँची स्थित रिम्स में लेकर आई।

मैं अपने घर में अकेली हूँ और मेरे दो छोटे-छोटे बच्चे (एक बेटी और एक बेटा) हैं। अब मेरे घर में हमारा देख-रेख करने की स्थिति में कोई भी नहीं है। अतः, मेरा आपसे निवेदन है कि मुआवजे के रूप में 50लाख रुपए और परिवार के भरण-पोषण के लिए किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। कृपया मेरी माँगों पर ध्यान देने की कृपा करें।

आपकी विश्वासी
दिव्या कुमारी

मृतक नीरज की पत्नी दिव्या ने पत्र लिख कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से लगाई गुहार

यहाँ सवाल ये है कि आज दिन भर मंत्रिमंडल विस्तार की प्रकिया में व्यस्त रहने वाले क्या दिवंगत नीरज राम प्रजापति की पत्नी दिव्या कुमारी की इस गुहार पर ध्यान देंगे? सीएम सोरेन को समझना चाहिए कि परिजन राँची के रिम्स में अभी भी इस उम्मीद में बैठे हैं कि सरकार की तरफ से कोई नुमाइंदा उनका दुःख बाँटने के लिए वहाँ आएगा और मुआवजे का आश्वासन देगा। चुनाव जीतने के बाद लालू यादव का आशीर्वाद लेने के लिए रिम्स जाने वाले हेमंत सोरेन के पास इतना भी समय नहीं कि दिवंगत नीरज की पीड़ित पत्नी से एक बार मुलाक़ात तक कर सकें?

हिंदू मंदिर में देवी की मूर्ति तोड़ कर चोरी करने वाले 4 आरोपित गिरफ्तार, सभी नाबालिग

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के छाचरो इलाके में हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ करने के मामले में पुलिस ने 4 नाबालिग लड़कों को गिरफ्तार किया है। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने पुलिस अधिकारियों के हवाले से बताया कि 15, 13, 13 और 12 साल की उम्र के चारों लड़कों ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। उन्होंने मंदिर से पैसे चुराने के लिए वारदात को अंजाम दिया था।

गौरतलब है कि कल सिंध प्रांत के छाचरो शहर स्थित माता देवल भिटानी मंदिर में देर रात हमला बोला गया था। यहाँ मंदिर को नुकसान पहुँचाने के साथ आरोपितों ने मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया था। माता की मूर्ति पर काली स्याही पोत दी गई थी। मामला तूल पकड़ने के बाद थार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अब्दुल्ला अहमद के निर्देश पर संदिग्धों के खिलाफ सोमवार को एफआईआर दर्ज की गई थी। लेकिन, सिंध के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री हरि राम किशोरी लाल ने पुलिस से आरोपितों के ख़िलाफ़ ईश निंदा का मामला दर्ज करने को कहा था। साथ ही इनकी गिरफ्तारी की माँग की थी।

बता दें पाकिस्तान कें सिंध प्रांत में हुए हमले की तस्वीरे खुद वहाँ की नामी पत्रकार नायला इनायत ने अपने ट्विटर पर शेयर की थी। उन्होंने तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा था, “सिंध में अब एक और हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की गई। थारपरकर के छाचरो में भीड़ ने माता रानी भातियानी मंदिर में पवित्र मूर्ति और ग्रंथों को नुकसान पहुँचाया।”

नायला ने अपने ट्विटर हैंडल पर घटनास्थल की चार तस्वीरें भी शेयर की हैं। इसमें देखा जा सकता है कि उपद्रवियों ने मातारानी की मूर्ति पर काला रंग पोत दिया है और इसके अलावा तोड़फोड़ भी की गई है। साथ ही मंदिर को भी तोड़ने की कोशिश की गई है।

एक और हिंदू मंदिर पर इस्लामी कट्टरपंथियों का हमला: मूर्तियाँ तोड़ी, कालिख पोती, ग्रंथों को नुकसान पहुँचाया

भारत की वैश्विक छवि के बदलाव में ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ की भूमिका

भारत की वैश्विक छवि ‘विविधता में एकता’ की धारणा पर आधारित है। यही संस्कृतियों एवं सभ्यताओं की व्यापकता को भी दर्शाती है, जिसका प्रभाव दुनिया भर के लोगों पर है। मूलतः संस्कृति को ‘सॉफ्ट पॉवर’ कूटनीति के विस्तार के रूप में मान्यता दी गई है। इसे पूरी दुनिया में लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने में भारत की विदेश नीति के महत्वपूर्ण साधन के रूप में माना गया है। सभ्यताओं के बीच एक संवाद विकसित करने के लिए संस्कृति के महत्व को पहचानते हुए भारत ने स्वतंत्रता के बाद से ही ’सांस्कृतिक कूटनीति’ के महत्व को दुनिया से जुड़ने के लिए एक उपकरण के रूप में स्थापित किया है।

सदियों से भारतीय कला, शिल्प, संस्कृति, परंपरा, योग, आयुर्वेद, संस्कृत, भारतीय संगीत, नृत्य और धर्म दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करता रहा है। साथ ही साथ वर्तमान भारतीय संगीत, व्यंजन, सिनेमा और बॉलीवुड ने भी लोगों को आकर्षित किया है। भारतीय संस्कृति एवं परंपरा को ध्यान में रखते हुए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी विदेश नीति के पाँच स्तंभों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने एवं भारत की वैश्विक छवि को बदलने के लिए एक सफल प्रयास किया है। ये पाँच स्तंभ – सम्मान, संवाद, समृद्धि, सुरक्षा एवं संस्कृति और सभ्यता हैं। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विद्वान जोसेफ नाइ के सॉफ्ट पॉवर की परिभाषानुसार प्रधानमंत्री मोदी भारत की वैश्विक पहुँच में बदलाव के वाहक बने हैं। जोसेफ नाइ के अनुसार सॉफ्ट पॉवर, इच्छित चीजों को आकर्षण के माध्यम से पाने की क्षमता रखना है ना कि दबाव या भुगतान के माध्यम से।

भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को आगे बढ़ाने में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि पीएम मोदी के आह्वान के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 11 दिसंबर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित करना रहा। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर हर साल मिलने वाली शानदार प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि योग को भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में काफी लोकप्रियता हासिल हुई है। लगभग सभी देशों के लोगों के बीच में योग काफी लोकप्रिय हुआ है। भारत के सॉफ्ट पॉवर प्रोजेक्शन में योग का एक राजनयिक उपकरण के रूप में प्रभावी उपयोग विदेशों में लोगों के मन में भारत की वैश्विक छवि को पुनर्जीवित कर रहा है।

भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने में मोदी सरकार ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने और बढ़ावा देने के लिए अपने संस्थागत तंत्र को पुनर्जीवित किया है। 2014 से मोदी सरकार के अंतर्गत सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आई सी सी आर) का काम यहाँ उल्लेखनीय है। 37 देशों में फैले अपने सांस्कृतिक केंद्रों के माध्यम से आई सी सी आर भारत और विदेशों में सांस्कृतिक समारोहों के आयोजन में लगा हुआ है। साथ ही साथ विदेशों में इंडियन स्टडीज चेयर्स की स्थापना, विदेशी छात्रों/अध्येताओं को भारत में अध्ययन करने के लिए छात्रवृत्ति/ फेलोशिप प्रदान करना और ऐसी अन्य कई सारी गतिविधियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार जारी है। गुणवत्ता सुनिश्चित करने और बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए आई सी सी आर योग शिक्षकों को योग सिखाने के लिए विदेशों में भेजता है ताकि योग का अधिक से अधिक प्रचार प्रसार हो सके। इसी का परिणाम है कि आई सी सी आर के सांस्कृतिक केंद्रों में योग कक्षाओं की माँग लगातार बढ़ रही है। 2015 में औपचारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाए जाने के बाद से, योग को एक नया वैश्विक आयाम मिला है। देखा जाए तो, मानवता की समग्र भलाई के लिए दुनिया को भारत की तरफ से यह एक उपहार ही है।

पीएम मोदी के विजन को ध्यान मे रखते हुए आई सी सी आर के मौजूदा अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने कई उल्लेखनीय काम किए हैं। उन्होंने सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने एवं देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए विभिन्न नए कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया है। वैश्विक पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से इनके कई सारे ऐसे काम हैं जिनका जिक्र यहाँ किया जा सकता है। उदाहरण के लिए योग, संस्कृत एवं अन्य भाषाओं को बढ़ावा देना। इतना ही नहीं, बल्कि इनके निर्देशन में आई सी सी आर एक महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस का आयोजन इसी महीने पुणे में कर रहा है जिसका नाम ‘डेस्टिनेशन इंडिया’ है। इस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य, देश विदेश से आ रहे विदेशी छात्रों के प्रवाह को बेहतर करना और भारत को शिक्षा का पसंदीदा केंद्र बनाना है।

भारतीय संस्कृति को वैश्विक पटल पर ले जाने के लिए आई सी सी आर ने विश्व भर में भारतीय संस्कृति के प्रचार हेतु 2015 में अंतरराष्ट्रीय रामायण महोत्सव भी शुरू किया। पिछले साल आयोजित इस महोत्सव पर साझा सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से दुनिया से जुड़ने के महत्व को समझते हुए, डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने बल देकर कहा कि ‘रामायण एक वैश्विक सांस्कृतिक पूंजी है’ और ‘यह महोत्सव अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ वैश्विक सांस्कृतिक बहुलता को बढ़ावा देने के लिए आई सी सी आर की एक महत्वपूर्ण पहल का हिस्सा है। यह भारतीय संस्कृति के जीवंत अनुभव का एक आदर्श प्रवेश-द्वार है।’

पीएम मोदी ने भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ाने हेतु एक और महत्वपूर्ण कदम 2014 में उठाया। इसके अंतर्गत आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी विभाग को मंत्रालय बना दिया गया जिसको ‘आयुष’ के नाम से जाना जाता था। तब से आयुष मंत्रालय, आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए नीति निर्माण, विकास और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन का कार्य कर रहा है।

संगीत, कला, सिनेमा के साथ-साथ अन्य देशों में अनुकूल जनमत बनाने के लिए सांस्कृतिक कूटनीति के अन्य उपकरणों के रूप में लोकप्रिय संस्कृति के उत्पादों को पहुंचा राष्ट्रीय हित को बढ़ाना मोदी सरकार की प्राथमिकता में रहा है। समृद्ध भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने के लिए वैश्विक समर्थन और बढ़ती रुचि को देखते हुए, इस तथ्य से कोई इनकार नहीं कर सकता कि पीएम मोदी भारतीय संस्कृति के प्रचार के माध्यम से भारत के हित को आगे बढ़ाने में सफल रहे हैं। यह राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर पीएम मोदी के राजनीतिक कौशल को दर्शाता करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह दिखा दिया कि सॉफ्ट पॉवर के बेहतर इस्तेमाल से हार्ड पॉवर के मुकाबले दीर्घकालिक ठोस परिणाम निकल सकते हैं।

अब तक के अपने कार्यकाल में मोदी सरकार ने सॉफ्ट पावर के तौर पर संस्कृति का बेहतरीन इस्तेमाल किया है। यह उस दौर के लौटने की शुरुआत हो सकती है जिस दौर में भारत विश्व गुरु हुआ करता था। भारत की प्राचीन और महान सांस्कृतिक विरासत को पीएम मोदी जिस रफ्तार में लेकर दुनिया के सामने बढ़ रहे हैं, वो अद्भुत है। अब तक पश्चिमी संस्कृति के सामने हमारे सॉफ्ट पॉवर का बेहतर इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था। मोदी सरकार ने इस मिथक को तोड़ा की पश्चिमी संस्कृति के सापेक्ष हम अपनी महान संस्कृति को आगे नहीं बढ़ा सकते। अब आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय संस्कृति की ताकत को सॉफ्ट पॉवर के रूप में कितनी सफलता से इस्तेमाल किया जाएगा। कल्चरल डिप्लोमेसी को जो धार मोदी सरकार में मिली है, उससे भारत की वैश्विक छवि को कितनी मजबूती मिलेगी, इसे देखना भी एक सुखद अनुभव रहेगा।

Note: यह लेख पहले OpIndia के इंग्लिश वेबसाइट पर पब्लिश हो चुकी है, जिसे आप यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

टुटपुँजिया चुटकुलेबाज कुणाल कामरा ने फ्लाइट में अर्नब के साथ की बेहूदगी, ऐसे हो सकता है प्रतिबंधित

लिबरलों का गिरोह विशेष अब उनलोगों के साथ बदसलूकी पर उतर आया है, जो उनके विचारों के साथ सहमति नहीं जताते अथवा जो उनसे अलग विचार रखते हैं। ख़ुद को कॉमेडियन कहने वाले कुणाल कामरा ने कुछ ऐसा ही किया है। उसने एक हवाई यात्रा के दौरान ‘रिपब्लिक न्यूज़’ के पत्रकार अर्नब गोस्वामी के साथ बदतमीजी की।अर्नब अपनी सीट पर बैठे हुए थे और कान में हेडफोन लगाए हुए थे। कुणाल कामरा अर्नब के पास पहुँच गया और उसने उन्हें ‘डरपोक’ बताया। उसने अपने इस घटिया हरकत का वीडियो भी शूट कर लिया।

वीडियो में कुणाल कामरा कहता दिख रहा है कि जब उसने ‘डरपोक’ अर्नब गोस्वामी से उनकी पत्रकारिता को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कामरा को ‘मानसिक रूप से विक्षिप्त’ बताया और बाद में कहा कि वो अपने लैपटॉप पर कुछ देखने में व्यस्त हैं। वीडियो में कथित कॉमेडियन कुणाल कामरा ये कहते दिख रहा है कि अर्नब उसके सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं। इस दौरान कामरा ख़ुद को ‘टुकड़े-टुकड़े’ नैरेटिव का अंग बताता है और कहता है कि अर्नब से दर्शक जानना चाहते हैं कि वो ‘राष्ट्रवादी’ हैं, या फिर ‘डरपोक’?

विमान में किसी यात्री के साथ इस तरह की हरकत करने को लेकर कुणाल कामरा की ख़ूब आलोचना हुई। सिविल एविएशन मंत्रालय ने ऐसे उपद्रवी यात्रियों के लिए ‘नो फ्लाई लिस्ट’ डालने का प्रावधान किया है, जो दूसरे यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। सितम्बर 2017 में उपद्रवी यात्रियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त करते हुए तत्कालीन नागर एवं विमानन मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा था कि केबिन क्रू और यात्रियों की सुरक्षा के लिए ऐसा कानून आवश्यक है। ऐसे यात्रियों को जाँच के बाद ‘नो फ्लाई लिस्ट’ में डाला जा सकता है।

वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि कुणाल कामरा अर्नब गोस्वामी पर लगातार तंज कसते हुए न सिर्फ़ उन्हें परेशान कर रहा है बल्कि बार-बार उन्हें ‘डरपोक’ भी बता रहा है। बाद में उसने ट्विटर पर इस वीडियो को डालते हुए गर्व के साथ लिखा कि वो रोहित वेमुला की माँ के लिए ऐसा कर रहा है। वो वीडियो में स्वीकार करता है कि वो जो कर रहा है, वो नियमानुसार सही नहीं है लेकिन फिर वो कहता है कि वो इसके लिए जेल जाने को भी तैयार है। वो अर्नब को कहता दिख रहा- ‘गेट द फकिंग टाइम और रोहित वेमुला की 10 पेज की सुसाइड नोट को पढ़ो।‘

सोशल मीडिया पर कुणाल कामरा के इस व्यवहार के कारण कई लोगों ने डर जताया कि ऐसा उनके साथ भी हो सकता है। लोगों ने कहा कि अगर इस तरह के उपद्रवी लोगों पर शिकंजा नहीं कसा गया तो ये आए दिन किसी न किसी यात्री के साथ इस तरह बदतमीजी करते रहेंगे।

‘जूता बनाओ, पानी ढोओ, नाली साफ करो’ – Pak में गैर-मुस्लिमों के लिए नौकरी का विज्ञापन, PM मोदी ने किया जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेशनल कैडेट कॉर्प्स की रैली को संबोधित करते हुए कहा कि आज विश्व में हमारे देश की पहचान, युवा देश के रूप में है। देश के 65 प्रतिशत से ज्यादा लोग 35 वर्ष से कम उम्र के हैं। देश युवा है, इसका हमें गर्व है लेकिन देश की सोच युवा हो, ये हमारा दायित्व होना चाहिए। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का युवा देश बदलना चाहता है, स्थितियाँ बदलना चाहता है और इसलिए उसने तय किया है कि अब टाला नहीं जाएगा, अब टकराया जाएगा, निपटा जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस स्थिति को मेरे आज का युवा भारत, मेरे भारत का युवा, स्वीकारने के लिए तैयार नहीं है। वो छटपटा रहा है कि स्वतंत्रता के इतने साल हो गए, चीजें कब तक ऐसे ही चलती रहेंगी? कब तक हम पुरानी कमजोरियाँ को पकड़कर बैठे रहेंगे।

इस दौरान बिना नाम लिए पाकिस्तान पर हमला करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “कश्मीर भारत की मुकुटमणि है। 70 साल बाद वहाँ से आर्टिकल 370 को हटाया गया। हम जानते हैं कि हमारा पड़ोसी देश हमसे तीन-तीन युद्ध हार चुका है। हमारी सेनाओं को उसे धूल चटाने में हफ्ते-दस दिन से ज्यादा समय नहीं लगता।”

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान में निकले रोजगार के एक विज्ञापन का भी जिक्र किया। जिसमें सफाई के कामों के लिए कर्मचारियों की वैकेंसी निकाली गई थी। इस वैकेंसी में सिर्फ गैर-मुस्लिमों को ही पात्र बताया गया था। पीएम ने कहा कि पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों की ऐसी हालत है। विज्ञापन से स्पष्ट था कि वो नौकरी दलित और अन्य अल्पसंख्यकों के लिए थी।

पाकिस्तान द्वारा जारी की गई जॉब वेकैंसी

हाल में ही लागू हुए सीएए पर कुछ भ्रमित लोगों और विपक्षी दलों के विरोध पर पीएम ने हमलावर होते हुए कहा कि नागरिकता कानून पर वोटबैंक की राजनीति हो रही है। कुछ पार्टियों को अपने वोट बैंक की चिंता है। कुछ लोग दलितों की आवाज बनने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अल्पसंख्यकों पर जुल्म नहीं दिखता है। पाकिस्तान ने विज्ञापन में हिंदुओं का अपमान किया।

उन्होंने कहा, “दशकों पुरानी समस्याओं को सुलझा रही हमारी सरकार के फैसले पर जो लोग सांप्रदायिकता का रंग चढ़ा रहे हैं, उनका असली चेहरा भी देश देख चुका है और देख रहा है। मैं फिर कहूँगा- देश देख रहा है, समझ रहा है। देश चुप जरूर है, लेकिन सब समझ रहा है।”

आगे पीएम ने कहा, “ऐसे लोगों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को रोकने के लिए भारत के पुराने वादे को पूरा करने के लिए आज जब हमारी सरकार CAA लेकर आई है तो कुछ राजनीतिक दल अपने वोटबैंक पर कब्जा करने की स्पर्धा में लगे हैं, आखिर किसके हितों के लिए काम कर रहें ये लोग।”


मस्जिद में छिपा था शाहीन बाग़ का सरगना शरजील इमाम, चाचा ने कहा- दिल्ली चुनाव के कारण फँसाया गया

शाहीन बाग़ उपद्रव के मुख्य साज़िशकर्ता शरजील इमाम को जहानाबाद से गिरफ़्तार किया गया। वहाँ उनके कुछ राजनीतिक कनेक्शन भी सामने आए हैं। उसके पिता अकबर इमाम तो नीतीश कुमार की पार्टी जदयू से चुनाव भी लड़ चुके हैं। उसका भाई पूर्व सांसद अरुण कुमार का क़रीबी है। उसके भाई से पूछताछ के बाद पुलिस को कुछ अहम सुराग मिले, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि देश के ख़िलाफ़ बात करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस मामले में कोर्ट अपना काम करेगा। राजद प्रवक्ता भाई वीरेंदर ने भी कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

एक और चौंकाने वाली बात ये है कि भारत के ‘टुकड़े-टुकड़े’ करने की बात करने वाला शरजील इमाम जहानाबाद के एक मस्जिद में छिपा हुआ था। शरजील ने एएमयू में भाषण देते हुए लोगों को भड़काते हुए कहा था कि वो सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकेन्स नेक) को यूँ ठप्प कर दें कि भारत से असम व अन्य उत्तर-पूर्वी राज्य टूट कर अलग हो जाएँ। शरजील की तलाश 6 राज्यों की पुलिस कर रही थी- बिहार, मणिपुर, असम, अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली और उत्तर प्रदेश। महात्मा गाँधी को सबसे बड़ा फासिस्ट नेता बताने वाले शरजील को फिलहाल जहानाबाद थाने में रखा गया है।

शरजील इमाम की जहानाबाद कोर्ट में पेशी होगी। फिर ट्रांजिट रिमांड के बाद दिल्ली पुलिस उसे ले जाएगी। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने उसे बिहार पुलिस के सहयोग से जहानाबाद के काको से गिरफ़्तार किया, जहाँ उसका पैतृक निवास भी है। नीतीश कुमार ने इस कार्रवाई के लिए पुलिस की तारीफ करते हुए कहा कि किसी में दम नहीं है कि वो भारत के टुकड़े-टुकड़े कर सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश का माहौल इन दिनों ख़राब करने की कोशिश की जा रही है, जिसे सामान्य किया जाना चाहिए।

शरजील इमाम के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मुक़दमा चलाया जाएगा। जेएनयू प्रशासन ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए शरजील को समन जारी किया है। उसे 3 फ़रवरी तक स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। वहीं शरजील के परिवार वालों ने साज़िश का रोना रोया है। उसके चाचा अरशद इमाम ने कहा है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में राजनीतिक फायदा लेने के लिए उनके भतीजे का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं शरजील की अम्मी ने कहा है कि मेरा बेटा निर्दोष है। परिवार ने कहा कि उन्हें संविधान पर पूरा भरोसा है।