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शाहीन बाग में रवीश Vs दीपक चौरसिया: एक से याराना, दूसरे संग मारपीट – Video में प्रदर्शनकारियों का दोहरा चरित्र

दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर विरोध कर रहे ‘प्रदर्शनकारियों’ ने शुक्रवार (जनवरी 24, 2019) को न्यूज नेशन के वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया के साथ बदसलूकी की। उनके साथ धक्का-मुक्की की। इसी भीड़ को अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते भी सुना गया। 15 दिसंबर 2019 से शाहीन बाग में विरोध प्र्दर्शन चल रहा है और प्रदर्शन कर रहे गुंडों द्वारा इससे पहले भी कई पत्रकारों के साथ बदसलूकी की गई है।

मगर जब एनडीटीवी के जाने-माने और ‘निष्पक्ष’ पत्रकार रवीश कुमार वहाँ पर जाते हैं तो वहाँ की स्थिति कुछ और ही होती है। वो वहाँ पर जाते हैं और स्टेज पर जाकर आराम से भाषण देते हैं। वो भाषण देते हुए कहते हैं, “मैं भी देखना चाहता था कि कितनी देर तक और कितने दिनों तक शाहीन बाग की औरतें अपने प्रदर्शन में, अपने धरने में आती हैं। एक दिन नारा लगाने से शरीर थक जाता है। जब आप 22 वें दिन भी प्रदर्शन करने के लिए आती हैं तो इसका मतलब है कि इसका इरादा कुछ और है, जिसे लोग समझ नहीं पा रहे हैं।”

मगर हैरानी की बात है कि जब वहाँ पर दीपक चौरसिया पहुँचे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों के दर्द को समझने की कोशिश की तो उनके साथ बहुत ही बुरा बर्ताव किया गया। वो प्रदर्शनकारियों से CAA और NRC के बारे में जानना चाहते थे और ये भी जानना चाहते थे कि उनका मुद्दा क्या है? वो विरोध प्रदर्शन क्यों कर रही हैं? मगर इसी बीच उनके साथ बदतमीजी की गई और साथ ही न्यूज नेशन के कैमरामैन का कैमरा तोड़ दिया।

दीपक चौरसिया ने वीडियो के जरिए बताया कि शाहीन बाग में प्रदर्शन के नाम पर कुछ असामाजिक तत्व हिंसा फैला रहे हैं। उन्होंने इस बाबत ट्वीट करते हुए लिखा,

NDTV की एक्जीक्यूटिव एडिटर निधि राजदान ने भी दीपक चौरसिया के साथ हुए वाकये को दुखद बताते हुए ‘सहानुभूति’ जताई थी लेकिन साथ में प्रदर्शकारियों को सच्चा बता कर अपने लिखे ‘सहानुभूति’ पर खुद ही प्रश्नचिह्न भी लगा दिया। अब रवीश कुमार के वहाँ पहुँचने वाले वीडियो पर निशाना साधते हुए एक यूजर ने निधि राजदान से पूछा है कि मैम शाहीन बाग के सच्चे प्रदर्शनकारियों ने रवीश कुमार के ऊपर हमला क्यों नहीं किया?

अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते हुए शाहीन बाग के गुंडों ने की पत्रकार दीपक चौरसिया से मारपीट, कैमरा भी तोड़ा

‘हम असम को हिंदुस्तान से परमानेंटली काट देंगे’ – शाहीन बाग के ‘मास्टरमाइंड’ की खुलेआम धमकी, वीडियो Viral

CPI नेता अमीर जैदी ने टीवी डिबेट में दीपक चौरसिया को दी गाली, बताया भ*वा पत्रकार

धारा-144, कर्फ़्यू के बाद भी आगजनी व हिंसक झड़पें: CAA समर्थक जुलूस पर पथराव, लोहरदगा में बिगड़ी स्थिति

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के समर्थन में निकाले गए जुलूस पर पथराव के बाद धू-धू कर जल उठे झारखंड के लोहरदगा में हालात पर नियंत्रण पाने के लिए जहाँ एक तरफ पूरे शहर में धारा-144 लागू की गई, वहीं शुक्रवार (24 जनवरी) को कर्फ़्यू लगने के बाद भी कई जगहों पर हिंसक झड़पें हुई। लोहरदगा शहरी क्षेत्र के बरवा टोली स्थित एक खड़े ट्रक में रात 9:30 बजे उपद्रवियों ने आग लगा दी। पुलिस जब तक वहाँ पहुँची, तब तक ट्रक धू-धू कर जल चुका था। इस घटना के बाद उस इलाके के लोग दहशत में हैं।

लोहरदगा में हुई हिंसक घटना के बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई है। साथ ही लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की गई है। बता दें कि पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की ज़िम्मेदारी अर्धसैनिक बलों के हवाले की गई है। रैपिड एक्शन फ़ोर्स, जैप रांची, रैफ हजारीबाग, जमशेदपुर, एसआईआरबी खूंटी, ज़िला बल खूंटी, ज़िला बल गुमला, पीटीसी पदमा हजारीबाग, बोकारो ज़िला बल और सीआरपीएफ के हवाले सुरक्षा व्यवस्था की कमान सौंप दी गई।

स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल की तैनाती की गई (साभार: दैनिक जागरण)

ख़बर के अनुसार, तनावग्रस्त क्षेत्र में जगह-जगह सुरक्षा बल के जवानों को तैनात किया गया है। डीआईजी एवी होमकर, डीसी आकांक्षा रंजन और एसपी प्रियदर्शी आलोक शहर के अलग-अलग हिस्सों पर नज़र बनाए हुए हैं। इसके साथ ही लोगों को अफ़वाहों से दूर रहने की अपील सोशल मीडिया के ज़रिए की जा रही है। वहीं, शहर में प्रवेश करने वाले तमाम रास्तों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है और संदिग्ध दिखने वाले शख़्स से कड़ाई के पूछताछ करने का दौर भी जारी है। जानकारी के मुताबिक़, राज्य के आला अधिकारी लोहदरगा पर अपनी पैनी नज़र बनाए हुए हैं। इनमें पाँच एसपी, 12 डीएसपी समेत 2000 जवानों को तैनात किया गया है। इस बीच, उपद्रव फैलाने के संदेह में दर्जनभर लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिए जाने की भी ख़बर है।

ख़बर के अनुसार, तनावपूर्ण हालातों के चलते बैंक ऑफ़ इंडिया भंडरा ब्रांच, भारतीय स्टेट बैंक, प्रखंड कार्यालय, अंचल कार्यालय सहित सभी कर्मचारियों के न आने की वजह से बंद रहे। साप्ताहिक तौर पर लगने वाला शुक्र बाज़ार भी नहीं लगा। हालाँकि, कुछ किसान अपनी उपज लेकर आए थे, लेकिन उन्हें वापस लौटना पड़ा।

चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात (तस्वीर साभार: दैनिक जागरण)

ग़ौरतलब है कि विहिप (विश्व हिन्दू परिषद्) ने ट्वीट कर बताया था कि CAA के समर्थन में निकली रैली पर इस्लामिक जिहादियों ने ईंट-पत्थर से हमला किया। पेट्रोल बम फेंके। हिन्दुओ के घरों और वाहनों के साथ महिलाओं को निशाना बनाया गया। विहिप ने पुलिस पर मूकदर्शक बनने का आरोप लगाते हुए कहा था कि राज्य में कॉन्ग्रेस के समर्थन से सरकार बनने के बाद से हिन्दुओं पर हमले हो रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सीएए के समर्थन में जुलूस निकाल रहे लोगों पर अमलाटोली चौक के पास पथराव किया गया। आसपास खड़ी कई मोटरसाइकिलों को आग के हवाले कर उपद्रवियों ने तोड़फोड़ की थी। स्थिति जल्द ही बेकाबू हो गई और इलाके की दुकानों में तोड़फोड़ की गई। इसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हवा में कई राउंड गोलियाँ चलाई। स्थिति तनावपूर्ण होने की खबर पाकर जिले की उपायुक्त आकांक्षा रंजन और पुलिस कप्तान प्रियदर्शी आलोक पूरे दलबल के साथ मौके पर पहुॅंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया।

इससे पहले, 14 जनवरी को राज्य के गिरिडीह में निकाली गई तिरंगा यात्रा पर पथराव किया गया था। उस दौरान भी पत्थर और लाठी-डंडे चले थे जिसमें कई लोग जख्मी हो गए थे।

हिन्दुओं के घरों को फूँका, CAA समर्थक जुलूस पर हमले के लिए छतों पर जमा कर रखे थे ईंट-पत्थर

CAA समर्थक जुलूस पर पथराव: धू-धू कर जला लोहरदगा, पथराव-आगजनी के बाद कर्फ्यू


‘हम असम को हिंदुस्तान से परमानेंटली काट देंगे’ – शाहीन बाग के ‘मास्टरमाइंड’ की खुलेआम धमकी, वीडियो Viral

इन दिनों देश भर में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा, मारपीट और बदसलूकी कर रहे हैं कुछ भ्रमित लोग। साथ ही इस प्रदर्शनों में देश विरोधी, हिंदू विरोधी और आजादी के नारे भी लगाए जा रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स खुलेआम असम को हिंदुस्तान से अलग करने की बात कर रहा है। शख्स का नाम शरजील इमाम बताया जा रहा है और इसे शाहीन बाग में हो रहे विरोध प्रदर्शन का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

वायरल हुए इस वीडियो में शरजील कहता है, “अब वक्त आ गया है कि हम गैर मुस्लिमों से बोलें कि अगर हमारे हमदर्द हो तो हमारी शर्तों पर आकर खड़े हो। अगर वो हमारी शर्तों पर खड़े नहीं होते तो वो हमारे हमदर्द नहीं हैं। एक चीज तो यह है और दूसरी चीज जो मैंने बिहार में देखा। मैं यहाँ पर बिहार का उदाहरण दूँगा। वहाँ पर बहुत सारी रैलियाँ हो चुकी हैं। हर रोज एक-दो बड़ी रैलियाँ होती हैं। कन्हैया वाली रैली देखी थी। 5 लाख लोग थे उस रैली में। अब मसला यहाँ पर यह है कि अगर 5 लाख लोग हमारे पास ऑर्गेनाइज्ड हों तो हम नार्थ ईस्ट और हिंदुस्तान को परमानेंटली काट कर सकते हैं। परमानेंटली नहीं तो कम से कम एक-आध महीने के लिए असम को हिंदुस्तान से काट ही सकते हैं। मतलब इतना मवाद डालो पटरियों पर, रोड पर कि उनको हटाने में एक महीना लगे। जाना हो तो जाएँ एयरफोर्स से।”

आगे इमाम कहता है, “असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है। असम और इंडिया कटकर अलग हो जाए, तभी ये हमारी बात सुनेंगे। असम में मुस्लिमों का क्या हाल है, आपको पता है क्या? CAA-NRC लागू हो चुका है वहाँ। डिटेंशन कैंप में लोग डाले जा रहे हैं और वहाँ तो खैर कत्ले-आम चल रहा है। 6-8 महीनों में पता चलेगा कि सारे बंगालियों को मार दिया गया वहाँ, हिंदु हो या मुस्लिम। अगर हमें असम की मदद करनी है तो हमें असम का रास्ता बंद करना होगा फौज के लिए और जो भी जितना भी सप्लाई जा रहा है बंद करो उसे। बंद कर सकते हैं हम उसे, क्योंकि चिकन नेक जो इलाका है, वह मुस्लिम बहुल इलाका है।”

वीडियो में शरजील ने चिकन नेक को बंद करने की बात कही। बता दें कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर को चिकन नेक कहा जाता है। इस चिकन नेक के माध्यम से ही नॉर्थ इंडिया हिंदुस्तान की मुख्य भूमि से जुड़ा हुआ है। इस गलियारे की लंबाई 21 से 24 किमी है। इससे भूटान, म्यामार, बांग्लादेश और चीन जैसे देशों की सीमा जुड़ती है। यहीं से भारत में घुसपैठ सबसे अधिक होती है।

शरजील यहीं नहीं रूका। उसने आगे कहा, “कन्हैया जैसे लोग क्या करेंगे कि रैलियों में जाकर इनकलाब के नारे लगवाएँगे और फोटो खिंचवाकर चले आएँगे। उससे एक भी प्रोडक्टिव नहीं निकला है। एक चीज याद रखिए कि अगर अवाम गुस्से में है तो उस गुस्से का प्रोडक्टिव यूज करना जिम्मेदारी है सियासतदान की, स्कॉलर की, शहाफी की, जो भी है। एक और चीज समझ में आई कि अभी तक जो सेंसेटाइजेशन का भी मामला है वो हमारे कंट्रोल में नहीं है। वो उनके कंट्रोल में है जो इंडियन नेशन की पूजा करते हैं। वो लेफ्ट हो चाहे कॉन्ग्रेस, सारे उन्हीं के कंट्रोल में है। अब ये हमारे कंट्रोल में इस तरह आएगा कि हमलोग मुस्लिम स्कॉलर्स का ग्रुप बनाएँ और ऐसा ग्रुप बनाएँ, जिसमें आपस में इस बात पर बहस ना हो।” इस दौरान अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते भी लगाए गए।

इस वीडियो के सामने आते ही लोग इसे गिरफ्तार करने की माँग कर रहे हैं। वहीं अमोल रामराव देशमुख नाम के एक यूजर ने इसे शाहीन बाग में हो रहे विरोध प्रदर्शन का मास्टरमाइंड बताते हुए कहा, “शरजील इमाम नाम है इसका। इसी ने जेएनयू में मुस्लिमों को देश के सारे प्रमुख शहरों को जाम करने का आवाहन किया था। इसी का रिपब्लिक न्यूज ने स्टिंग किया था। ये शाहीन बाग नौटंकी का ऑर्गनाइज़र भी है।”

यूजर्स का कहना है कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बयान है। अब देश की जनता को भी चाहिए कि ऐसे लोगों की पहचान कर इन पर ऐसा प्रहार करें कि ये या तो देश छोड़कर भाग जाएँ या फिर दोबारा ऐसी नीच हरकत करने की सोचें भी न।

विदेशी पत्रिका बताएगी लोकतंत्र की स्थिति: अजीत भारती का वीडियो | Ravish’s foreigner love, silent on abusive rioters

वामपंथी पत्रिका The Economist ने कवर पेज बनाया। इस पर रवीश लिख रहे हैं कि पूरी दुनिया में भारत की पहचान का अगर कोई ब्रांड एंबेस्डर है तो वह है देश का लोकतंत्र। ये अपने आप में विचित्र और गलत अवधारण है। रवीश के लिए सही होगा लेकिन भारत कई बातों से जाना जाता है।

भारत अपनी संस्कृति, अपनी क्षमता, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री, सर्विस इंडस्ट्री और ऐसी ही तमाम बातों के लिए जाना जाता है। तो क्या अब वामपंथी पत्रिका तय करेगी कि भारत का लोकतंत्र कैसा है और वह कहाँ जा रहा है? वो मानदंड तय करेगी? और ये वही पत्रिका है, जिसने डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी कैंपेन के दौरान उनके खिलाफ वोट करने के लिए टाइम्स स्क्वायर पर होर्डिंग्स लगाए थे। वो वहाँ के लोगों और वोटरों को खुल्लम-खुल्ला प्रभावित कर रहे हैं।

पूरा वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

154 पूर्व जज और अफसरों ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, कहा- CAA पर हिंसा फैलाने वालों पर हो कड़ी कार्रवाई

देश में सीएए के ख़िलाफ हो रहे प्रदर्शनों और विरोध के नाम पर की जा रही हिंसा से चिंतित देश के 154 पूर्व जजों और अफसरों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिख हिंसा करने वालों के ख़िलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। साथ ही आशंका व्यक्त की कि इन विरोध प्रदर्शनों की आड़ में देश को तोड़ने की साजिश रची जा रही है।

केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण के अध्यक्ष और सिक्किम उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश प्रमोद कोहली के नेतृत्व में दिल्ली पहुँचे एक प्रतिनिधमंडल ने शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने मौजूदा हालातों पर चिंता जताते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक तत्व नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए उकसा रहे हैं। हालाँकि, पत्र में सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन भड़काने को लेकर किसी दल या व्यक्ति का नाम नहीं लिखा गया।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखने वाले 154 दिग्गजों में पूर्व न्यायाधीश, सिविल सेवा से जुड़े अधिकारी और रक्षा अधिकारी समेत अन्य कई विभागों से जुड़े रहे अधिकारी भी शामिल हैं। इन सभी अधिकारियों ने CAA के खिलाफ देश में हो रहे प्रदर्शन के नाम पर हिंसा करने वालों के ख़िलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। साथ ही इन अधिकारियों ने बताया कि इस सभी प्रदर्शनों को राजनीतिक पार्टियाँ संचालित कर रही हैं।

पत्र लिखने वाले पूर्व जज और अधिकारियों ने आशंका व्यक्त की हैं कि विरोध के नाम पर हो रही हिंसा के पीछे देश को तोड़ने की साजिश रची जा रही है। इस मामले पर केंद्र पूरी गंभीरता से गौर करे और देश के लोकतांत्रिक संस्थानों की रक्षा करे। बता दें कि राष्ट्रपति को सौंपे गए इस पत्र में हस्ताक्षर करने वालों में 11 पूर्व न्यायाधीश, तीनों प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारी, पूर्व राजनयिक समेत 72 हस्तियाँ शामिल हैं। इनके अलावा रक्षा क्षेत्र से जुड़े रहे 56 टॉप अधिकारी, एकेडमिक स्कॉलरशिप चिकित्सा क्षेत्र से भी जुड़े लोग शामिल हैं।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों ने सीएए विरोध के नाम पर हिंसा और आगजनी की गई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बड़ी मात्रा में सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया था।

#MeToo: TV-9 भारतवर्ष के कार्यकारी संपादक पर महिला पत्रकारों से यौन उत्पीड़न के आरोप, इस्तीफ़ा

समाचार चैनल ‘TV9 भारतवर्ष’ की दो ट्रेनी पत्रकारों द्वारा एक वरिष्‍ठ संपादक के खिलाफ यौन शोषण की अलग-अलग शिकायतें सामने आई हैं। इसके बाद कार्यस्‍थल पर महिलाओं से यौन अपराध (रोकथाम, प्रतिबंध और निवारण) अधिनियम, 2013 के अंतर्गत, इस मामले को तुरंत ICC (आंतरिक शिकायत समिति) को भेज दिया गया है।

‘TV9 भारतवर्ष’ में ट्रेनी के यौन उत्पीड़न का मामला भी सोशल मीडिया के जरिए सामने आया है। इसके सम्बन्ध में स्वयं इस चैनल के संस्थापक सदस्यों में से एक अजित अंजुम ने भी ट्वीट करते हुए लिखा है कि अपने पद का इस्तेमाल करके ट्रेनी लड़कियों को अपने जाल में फँसाने की कोशिश कर रहे इस शख्स की असलियत सुनकर वो हैरान हैं।

ज्ञात हो कि आरोपित अजय आजाद ‘न्यूज24’ के अलावा ईटीवी, महुआ, जी न्यूज, इंडिया न्यूज चैनल्स में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। मूल रूप से सिवान (बिहार) के रहने वाले अजय आजाद लंबे समय तक राणा यशवंत की महुआ और इंडिया न्यूज टीम का हिस्सा रहे हैं।

TV9 भारतवर्ष ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी इस मामले में जानकारी दी है और बताया कि समाचार चैनल के प्रबंधन ने जाँच पूरी होने तक संपादक को छुट्टी पर भेज दिया है, जिसके बाद दोषी संपादक ने इस्तीफ़ा दे दिया है। चैनल ने लिखा है कि प्रबन्धन ने इस्तीफ़ा तुरन्त प्रभाव से मंज़ूर भी कर लिया।

क्या है पूरा मामला

समाचार चैनल टीवी-9 भारतवर्ष से जुड़ी दो ट्रेनी महिला पत्रकारों ने चैनल प्रबंधन को लिखित शिकायत में बताया था कि चैनल में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर अजय आज़ाद काफी समय से व्हाट्सएप के जरिए उनको अश्लील मैसेज भेजते आ रहे थे। इस बारे में उन्होंने पहली शिकायत जनवरी 18, 2020 और दूसरी शिकायत जनवरी 20, 2020 को की थी।

ट्रेनीज की शिकायत के अनुसार, अजय आज़ाद दोनों पत्रकारों को उनके करियर में मदद करने का लालच देते हुए उनसे सेक्सुअल फेवर की माँग करते थे। इसके बाद सोशल मीडिया में सामने आए इन व्हाट्सएप संदेशों से पता चला है कि अजय आज़ाद इन लड़कियों को अश्लील मैसेज करने के बाद उन्हें डिलीट करने के लिए भी जोर देते थे।

दोनों लड़कियों ने शिकायत में बताया कि अजय आज़ाद उनसे खुदको ‘सर’ कहने से मना करते थे और उन्हें सारी सीमाएँ तोड़ने की नसीहत दिया करते थे।

समाचार चैनल टीवी-9 भारतवर्ष में बतौर सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर कार्यरत रहे अजय आजाद के व्हाट्सएप्प चैट में ट्रेनी पत्रकार द्वारा सार्वजानिक किए गए स्क्रीनशॉट्स के बाद यह प्रकरण सामने आया है। इसके बाद कुछ अन्य लोगों ने भी अजय आजाद पर इस प्रकार की घटनाओं में पहले भी संलिप्त होने के आरोप लगाए हैं।

दो महिला टीवी पत्रकारों ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए अजय आजाद की करतूतों को शेयर किया है। इन महिला पत्रकारों ने ट्वीट कर के अजय आजाद की हरकतों, उनकी बदनाम छवि व शिकायत होने के बावजूद चैनल प्रबंधन द्वारा उसके खिलाफ एक्शन न लेने की बातें भी कही हैं।

ट्विटर पर विनोद कापड़ी और अजीत अंजुम द्वारा टीवी-9 भारतवर्ष में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर रहे अजय आजाद द्वारा दो ट्रेनीज लड़कियों के यौन शोषण की कहानी को उठाया गया तो इसके बाद कई अन्य लड़कियाँ सामने आईं जिन्होंने स्वीकार किया कि टीवी9 भारतवर्ष में कई लोगों ने इसी तरह की हरकतों से पहले भी कई लड़कियों का करियर बर्बाद किया है।

पीड़ित ट्रेनीज़ द्वारा TV9 भारतवर्ष चैनल प्रबंधन से की गई लिखित शिकायत की कॉपी इन तस्वीरों में देख सकते हैं-

‘उनकी किलर स्माइल, मादक चाल… वो जब आते हैं…’ – इमरान खान पर फिदा हुईं यंग महिला मंत्री

पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान की अगुआई में चाहे ‘टिमाटर’ और आटे-चावल के लाले पड़ जाएँ लेकिन फिर भी इमरान खान लगातार चर्चा में बने रहते हैं और आवाम में उनकी दीवानगी कम नहीं होती। इस बार इमरान खान के चर्चा में आने की वजह वो खुद नहीं बल्कि पकिस्तान की जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री जरताज गुल हैं।

पाकिस्तान की रिपोर्टर नायला इनायत ने पाकिस्तान की जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री जरताज गुल का एक वीडियो ट्विटर पर शेयर किया है। इस वीडियो में ज़रताज गुल पकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की खूबसूरती और उनकी ‘किलर स्माइल’ का जिक्र करती हुई देखी जा रही हैं।

इस वीडियो में ज़रताज गुल का इंटरव्यू लिया जा रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तारीफ करते हुए ज़रताज गुल कह रही हैं- “PM इमरान खान की बॉडी लेंगुएज की अगर बात की जाए तो, मुझे लगता है वो दुनिया में सबसे करिश्माई व्यक्तित्व हैं। जिस तरह से वो चलकर आते हैं, जिस तरह की उनकी किलर स्माइल है। सारी दुनिया को पता है… उनकी तो वीडियो बनी हुई हैं… उनके चलने का… इतना रौब और दबदबा….जब वो आते हैं तो अगर हमारे ज़ेहन में कोई संदेह होता है तो सब संदेह दूर हो जाते हैं।”

यह वीडियो ट्विटर पर खूब शेयर किया जा रहा है।

शाहीन बाग केस: पुलिस ने 7-8 लोगों को मंच से उठाया, सभी लंगर संचालक भी हिरासत में

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ देशभर में हिंसक विरोध हो रहे हैं। इन जगहों में दक्षिणी दिल्ली के शाहीन बाग का नाम पिछले लंबे समय से सुर्ख़ियों में छाया हुआ है। ताज़ा मामले में शाहीन बाग में पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके तहत पुलिस ने मंच से सात-आठ लोगों को पूछताछ करने के लिए अपने साथ पुलिस-स्टेशन ले गई है। पुलिस द्वारा इस कार्रवाई से नाराज़ प्रदर्शनकारी थाने पहुँच गए। 

सात-आठ लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद से इलाक़े में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। ख़बर के अनुसार, विरोध-प्रदर्शन करने वाली जगह पर पाँच लंगर चलते हैं। पुलिस ने लंगर संचालकों को भी हिरासत में लिया है। साथ ही पुलिस ने शाहीन बाग में लंगर के तंबू हटाए और सड़कों पर लगी दुकानों को हटाने की चेतावनी भी दी।

पुलिस की इस कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों को लगा कि शायद पुलिस रात के समय में वहाँ की लाइट काट दी जाएगी। इसलिए वो रात में विरोध-प्रदर्शन जारी रखने के लिए जनरेटर की व्यवस्था में जुटे हुए हैं।

दरअसल, शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ क़रीब 40 दिनों से मुस्लिम महिलाएँ विरोध-प्रदर्शन कर रही हैं। इस दौरान एक ऐसा पोस्टर भी सामने आया था जो हिन्दू-विरोधी कल्पना से भरा था। इस पोस्टर में तीन महिलाओं को बुर्क़ा पहने और माथे पर बिंदी लगाए दिखाया गया था।

इसके अलावा, पोस्टर के नीचे, फ़ैज़ की कविता ‘हम देखेंगे’ शीर्षक से कुछ पंक्तियाँ भी लिखी हुई हैं। अंत में, हिन्दू स्वस्तिक को खंडित कर उसका विघटित रूप दर्शाया गया था। हिजाब पहने और माथे पर बिंदी लगाए महिलाओं के इस पोस्टर को देखकर ऐसा साफ लगता है कि मुस्लिम समुदाय हिन्दू महिलाओं को किस नज़रिए से देखता है।

मुस्लिम महिलाओं की इमेज के ठीक नीचे फैज़ की कविता का शीर्षक ‘हम देखेंगे’ तो लिखा था, लेकिन उसके नीचे की पंक्तियों को बदल कर नई पंक्तियों को गढ़ा गया। इसके अनुसार

जब ज़ुल्म-ओ-सितम मोदी-शाह के, 
खाक में मिल जाएँगे, 
जनता के एक इशारे पे,
सब कुर्सी से उतारे जाएँगे, 
लाज़िम है कि हम देखेंगे।    

इस पोस्टर के अंत में, हिन्दुओं के पवित्र स्वास्तिक चिन्ह को खंडित कर उसके विघटित रूप को दिखाया गया था। बता दें कि बीते दिनों CAA के ख़िलाफ़ हुए दंगों में देश ने मुस्लिमों की भीड़ का एक अलग ही चेहरा देखा गया। ये याद रखने वाली बात है कि खुद को भारत का नागरिक कहने वाले लोग एक तरफ देश में धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देते हैं, वहीं दूसरी तरफ ये लोग हिन्दुओं से आजादी की माँग कर रहे थे। और हिन्दू विरोधी नारों के साथ उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली में हिंसा और दंगा कर रहे थे। ख़िलाफत 2.0 का संदेश दे रहे थे और ला इलाहा इल्लल्लाह के नारे लगा रहे थे।

वाराणसी में दूसरा ‘शाहीन बाग़’ बनाने की कोशिश: पुलिस पर पत्थरबाजी, UP में 1200 के ख़िलाफ़ केस दर्ज

‘…अब तो मैं जिंदा घर नहीं जा पाऊँगी’ – शाहीन बाग से जान बचाकर भागी लड़की की आपबीती

स्वास्तिक से छेड़छाड़: ‘इस्लामी राज्य’ का सपना पाले, हिंदू घृणा से सना है शाहीन बाग का नया पोस्टर

छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘मीसा पेंशन’ पर लगाई रोक, कहा- वह स्वतंत्रता सेनानी नहीं, तो पेंशन क्यों?

छत्तीसगढ़ की सरकार ने अपने राज्य के लोगों को दी जाने वाली मीसा पेंशन पर रोक लगा दी है, जिसे फरवरी माह से पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाएगा। इस पेंशन योजना को कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा बंद करते ही बीजेपी ने सीएम पर निशाना साधा है और कहा है कि वह राज्य सरकार के फैसले के ख़िलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।

छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस सरकार बने अभी कुछ ही वक्त हुआ है, लेकिन सीएम भूपेश बघेल ने सत्ता में आते ही 2008 से लागू मीसा पेंशन स्कीम को बँद करने का फैसला किया है। सरकार ने फैसले के पीछे पेंशन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की बात कही है। बल्कि बीजेपी का आरोप है कि सरकार ने इस सम्मान निधि को हमेशा के लिए बंद कर दिया है। वहीं राज्य में विपक्षी पार्टी बीजेपी ने सीएम को चेतावनी दी है कि वह राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएँगे।

बीजेपी की चेतावनी पर सीएम भूपेश बघेल ने कहा है कि मीसा बंदी स्वतंत्रता सेनानी नहीं हैं, तो ऐसे में उन्हें पेंशन क्यों दी जाए। बताया जा रहा है कि इसके बाद राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने गुरुवार को ही अधिसूचना जारी कर लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि नियम 2008 को रद्द कर दिया। हालाँकि, इस आदेश को अगले माह, यानी फरवरी से, प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा।

इसके बाद बीजेपी ने बघेल सरकार को अपने निशाने पर ले लिया। विपक्ष के नेता धरमलाल कौशिक ने सीएम भूपेश बघेल को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राज्य सरकार का यह निर्णय अनुचित है। कौशिक ने आगे कहा कि राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार हमेशा की तरह जनविरोधी फैसला ले रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने मौलिक अधिकारों का निलंबन करते हुए पूरे देश में आपातकाल लगा दिया था। इसके विरोध में जब देश में आवाज बुलंद होने लगी तो लाखों प्रदर्शनकारियों को जेल भेज दिया गया था। लम्बे अंतराल तक जेल में रहने के बाद और कॉन्ग्रेस के आम चुनावों में पराजय के बाद मीसा बंदियों की रिहाई हो सकी थी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने मीसा बंदियों के लिए सम्मान निधि शुरू की थी जिसे अब वर्तमान की कॉन्ग्रेस सरकार ने बंद करने का फैसला लिया है यह अनुचित है और यह लोकतंत्र की हत्या करने जैसा है।

दरअसल भारतीय जनता पार्टी की रमन सिंह सरकार ने वर्ष 2008 में मीसा पेंशन की शुरूआत की थी। इसके तहत राज्य में करीब तीन सौ से अधिक मीसाबंदियों को सम्मान निधि दी जा रही थी, जिसके तहत हर एक पेंशन धारक को 15 से 25 हजार रुपये प्रति माह की राशि दी जाती थी।

अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते हुए शाहीन बाग के गुंडों ने की पत्रकार दीपक चौरसिया से मारपीट, कैमरा भी तोड़ा

शाहीन बाग़ में चल रहे CAA-विरोधी प्रदर्शन में आज न्यूज़ नेशन के वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया के साथ वहाँ प्रदर्शन कर रहे गुंडों ने बदसलूकी की। यही नहीं, उनके साथ हाथापाई करने के बाद उनका कैमरा भी तोड़ दिया गया। इस दौरान सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो में धक्का-मुक्की कर रही भीड़ को अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते भी सुना गया।

यह घटना तब हुई जब न्यूज़ नेशन के पत्रकार दीपक चौरसिया शाहीन बाग़ घटना को कवर करने गए थे। उन्होंने एक वीडियो के जरिए बताया कि शाहीन बाग में प्रदर्शन के नाम पर कई असामाजिक तत्व हिंसा फैला रहे हैं। साथ ही न्यूज नेशन के कैमरामैन का कैमरा तोड़ दिया गया है।

हाल ही में दीपक चौरसिया को उनके ही न्यूज़ डिबेट के दौरान CPI के पार्टी प्रवक्ता अमीर जैदी ने भड़वा पत्रकार कहकर गालियाँ दी थीं।