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भगोड़ा नित्यानंद के ख़िलाफ़ इंटरपोल ने जारी किया ‘ब्लू नोटिस’: गुजरात पुलिस ने किया था अनुरोध

बच्चियों से दुष्कर्म के आरोपी और हाईप्रोफाइल बाबा नित्यानंद के ख़िलाफ़ इंटरपोल ने गुजरात पुलिस के अनुरोध के बाद ब्लू नोटिस जारी किया है। हालाँकि, आरोप के बाद देश छोड़कर भागे नित्यानंद का अभी तक ऐजेंसियाँ सुराग नहीं लगा सकी हैं। नित्यानंद अलग देश ‘कैलासा’ बनाने वाली खबरों के बाद देशभर में चर्चा में आया था।

एएनआई द्वारा किए गए ट्वीट के मुताबिक ब्लू नोटिस ऐसे व्यक्ति को खोजने के लिए जारी किया जाता है जो लापता या अज्ञात अपराधी है या फिर सामान्य आपराधिक कानून उल्लंघन के लिए वॉन्टेड है। नित्यानंद के ख़िलाफ जारी किए गए नोटिस का अनुरोध स्वयं गुजरात पुलिस ने किया था।

आपकों बता दें कि नित्यानंद के खिलाफ 22 नवंबर को दो बच्चियों के अपहरण का मामला दर्ज करने वाली गुजरात पुलिस ने माना था कि नित्यानंद देश छोड़ कर भाग चुका है। उस पर कर्नाटक में भी अपनी शिष्याओं से दुष्कर्म का मामला दर्ज है। नित्यानंद का पासपोर्ट 2018 में ही रद्द हो चुका है। एजेंसियों को शक है कि वह नेपाल के रास्ते बिना पासपोर्ट भाग गया।

देश छोड़कर भागे हाईप्रोफाइल नित्यानंद का अभी तक एजेंसियाँ सुराग नहीं लगा सकी हैं। इतना ही नहीं देश छोड़ने की भनक नित्यानंद ने गुजरात पुलिस को भी नहीं लगने दी। वहीं इसके बाद नित्यानंद ने एक वीडियो जारी करके एजेंसियों को चेतावनी भी दी थी, जिसमें उसने कहा था कि कोई भी अदालत उसे सजा देकर सच बोलने से नहीं रोक सकती। नित्यानंद के मुताबिक वह भगवान शिव का परम रूप है और इस सच को दुनिया को बताना चाहता है। इसके बाद से ही विदेश मंत्रालय ने सभी देशों में भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों को अलर्ट कर रखा है।

कुछ दिनों पहले ऐसी रिपोर्टें आईं कि फरार नित्यानंद ने साउथ अमेरिका के देश इक्वाडोर से एक द्वीप खरीदा है और उसे अपना देश घोषित करते हुए उसका नाम ‘कैलासा’ रखा। नित्यानंद ने जो कैलासा देश बनाया है, उसकी एक वेबसाइट भी है Kailaasa.org। इसके बारे में वेबसाइट पर लिखा है कि कैलाशा एक ऐसा देश है, जिसे बिना किसी सीमाओं के हिंदुओं के लिए बनाया गया है। ये उनके लिए है जो अपने देश में हिंदू होने का अधिकार खो चुके हैं’। हालाँकि, सरकार ने इक्वाडोर में नित्यानंद के अलग देश बनाने के दावे को सिरे से खारिज कर दिया था।

नित्यानंद के देश ‘कैलासा’ की वेबसाईट


जब 23 साल बाद एक कश्मीरी पंडित पड़ोसन दिलशादा से मिलने गई, वही हुआ जो हम सोचते हैं…

देश में कश्मीरी पंडितों को लेकर एक बार फिर नई बहस छिड़ गई है। लिबरल गिरोह इसे ‘मुट्ठी भर आतंकियों’ की करतूत बता कर समुदाय विशेष को बचाने का प्रयास कर रहा है। जबकि सच्चाई ये है कि कश्मीरी पंडितों को समुदाय विशेष के कट्टरपंथियों ने घाटी से निकाल बाहर किया। उनकी महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, कइयों को बेरहमी से काट डाला गया और कइयों को तो शरण देने के नाम पर धोखा दिया गया। आज कश्मीरी पंडितों को ही उल्टा कट्टरपंथियों से सॉरी बोलने को कहा जा रहा है। सवाल ये है कि अपना सबकुछ लुटा कर पिछले 30 वर्ष से अपने ही देश में शरणार्थी बन कर रह रहे कश्मीरी पंडित कट्टरपंथियों से सॉरी क्यों बोलें?

इसी क्रम में आकाश नामक ट्विटर यूजर ने एक घटना के बारे में बताया। ये घटना उस समय की है, जब वो 2012 में अपनी माँ के साथ कश्मीर गए थे। हब्बा कदल में उनकी माँ का पैतृक निवास हुआ करता था, जहाँ वो लोग दोबारा गए। आकाश की माँ पड़ोसियों से भी मिलने को उत्सुक थीं, जिनमें एक अहमद नाम का दूधवाला भी शामिल था। कश्मीरी पंडितों को घाटी से भगाए जाने के बाद आकाश की माँ के पास किसी पड़ोसी के कोई कांटेक्ट नंबर वगैरह भी नहीं था।

आकाश बताते हैं कि जब उनकी माँ अपने पैतृक आवास पर पहुँचीं तो वहाँ सभी लोगों ने उन्हें पहचान लिया। वो सभी नाम से उन्हें पुकारते थे। 23 साल बाद भी उन्हें सबकुछ याद था। लेकिन, एक गौर करने वाली बात ये है कि उनमें से किसी ने भी ऐसा जाहिर नहीं किया कि वो उन्हें जानते हैं। आकाश की माँ इसके बाद गलियों से होते हुए अहमद से मिलने पहुँचीं। उस वक़्त रमजान का महीना था। अहमद अपने बेटे के साथ घर से निकल रहा था, तभी उसने आकाश और उसकी माँ को देखा। उसने आकाश की माँ को पहचान लिया और जाहिर भी किया वो उन्हें जानता है।

अहमद और उसका बेटा उस समय नमाज़ के लिए निकल रहे थे। उसने आकाश की माँ को सलाम किया और नमाज़ के लिए निकल गया। इसके बाद आकाश की माँ ने दिलशादा नामक एक महिला को पुकारा, जो बाहर निकलीं और उन्हें देखते ही रोने लगी। आकाश कहते हैं कि आजकल कश्मीर के किसी भी युवा को कश्मीरी पंडितों के बारे में कुछ भी पता नहीं है। दिलशादा जिस तरह से रो रही थी, उससे पता चल रहा था जैसे आकाश की माँ से मिल कर वो काफ़ी इमोशनल हो गई है।

अहमद और दिलशादा के घर से निकलने के बाद गाड़ी में आकाश की माँ ने कुछ ऐसा बताया, जो चौंकाने वाला था। आकाश की माँ ने बताया कि दिलशादा अपने परिवार वालों को कश्मीरी पंडितों के विरुद्ध भड़काया करती थी। आकाश को अचानक से विश्वास नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने अभी-अभी दिलशादा को रोते हुए देखा था। बकौल आकाश की माँ, 1989 में इसी महिला ने पूरे मोहल्ले में अफवाह फैला दी थी कि समुदाय विशेष के लोगों को मारने के लिए तत्कालीन राज्यपाल जगमोहन ने मोहल्ले की पानी सप्लाई में ज़हर मिला दिया है।

ये सोचने लायक बात है कि ज़हरीले पानी से किसी मोहल्ले के एक ही मजहब वाले लोग ही क्यों मरेंगे? उसका असर हिन्दुओं पर क्यों नहीं होगा? ये बानगी है उन अफवाहों की, जिनके कारण कट्टरपंथियों ने कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार की सारी हदों को पार कर दिया। दिलशादा एक ऐसी महिला थी, जो अपने बच्चों व परिजनों पर चिल्लाती थी कि वो बाहर जाएँ, सरकारी एजेंसियों के ख़िलाफ़ पत्थरबाजी करें, विरोध प्रदर्शन करें और उनके परिवार वालों को घाटी से बाहर खदेड़ डालें।

वही महिला, जो आकाश की माँ को देख कर ऐसे रो रही थी, जैसे उसका कोई अपना बिछड़ा हुआ बरसों बाद मिला हो। आकाश लिखते हैं कि कश्मीरी कट्टरपंथियों के भीतर वहाँ के हिन्दुओं के प्रति घृणा का भाव पहले से ही पनप रहा था। जब वो अपनी माँ के साथ दिल्ली लौट रहे थे, तब श्रीनगर एयरपोर्ट पर उन्हें भूख लगी। तब उन्होंने पास के एक कैफे में जाकर सैंडविच आर्डर किया और 100 रुपए दिए। वहाँ लोगों ने उनकी तरफ अजीब नज़रों से घूरा क्योंकि वो रमज़ान का महीना था और उस समय दिन में लोग रोजा रखते थे। बावजूद इसके कि आकाश ने स्थानीय भाषा का प्रयोग किया, उस कैफ़े वाले ने उन्हें जो कहा वो कश्मीरी कट्टरपंथियों की सोच के बारे में बहुत कुछ कहता है।

खुले पैसे माँगने पर कैफे वाले ने कहा कि वो ज़रूर देगा क्योंकि वो लोग ‘अतिथि’ हैं। वो जानता था कि आकाश और उनकी माँ कश्मीर में अतिथि नहीं हैं लेकिन फिर भी उसने जानबूझ कर ऐसा कहा। आकाश के मन में अचानक से कश्मीर से भगा दिए गए और मार डाले गए सम्बन्धियों के विचार आने लगे। उस कैफे वाले ने क्या यही याद दिलाने के लिए ऐसा कहा था? ख़ैर, इन घटनाओं से ये तो समझ आता ही है कि पंडितों के ऊपर जो जुल्म हुए, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।

चीन में तेजी से फैल रहा Corona Virus: कुल 450 मामले, भारत ने सभी एयरपोर्ट पर जारी किया अलर्ट

चीन में अचानक से फैला कोरोना वायरस अब तक नौ लोगों की जान ले चुका है। इतनी ही नहीं पड़ोसी देश चीन में इससे जुड़े अब तक 450 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। इससे पहले ही चीन ने अपने देश में अलर्ट जारी कर दिया, लेकिन इस वायरस से घबराए भारत सहित अन्य कई देशों ने भी अपने यहाँ अलर्ट जारी कर दिया है। वहीं भारत द्वारा जारी किए गए अलर्ट के बाद से सभी एयरपोर्ट्स पर चीन से आने वाले सभी यात्रियों की गहनता से जाँच की जा रही है।

कोरोना वायरस चीन से निकलकर एशिया के दूसरे देशों में पाँव पसार रहा है। अब तक इस वायरस के तीन मामले जापान और थाइलैंड और एक मामला दक्षिण कोरिया में सामने आ चुका है। आस्‍ट्रेलिया में भी चीन से लौटे एक शख्‍स की गहन जाँच की जा रही है। पूरी दुनिया में कोरोना वायरस को लेकर कई देशों ने चीन की यात्रा करने वाले लोगों को अलर्ट जारी किया है।

इस वायरस से चीन में अब तक नौ लोगों की मौतें हो चुकी हैं। इनमें से तीन मौतें अकेले चीन के वुहान शहर में ही हुई हैं। चीन में इस वायरस से जुड़े अब तक कुल 450 मामले सामने आ चुके हैं, इतना ही नहीं इनमें से 198 मामले अकेले वुहान शहर से सामने आए हैं, लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि इसको लेकर अभी तक कई सारी जानकारियाँ सामने नहीं आ सकी हैं। यही कारण है कि जिस तेजी से वायरस लोगों में फैल रहा है, उसी तेजी से यह ख़बर देश दुनियाँ में वायरल हो रही है।

इसी को ध्यान में रखते हुए चीन ने पहले ही अपने यहाँ अलर्ट घोषित कर दिया है, जिसके बाद इसे गंंभीरता से लेते हुए भारत ने भी अपने सभी एयरपोर्ट पर अलर्ट जारी कर दिया है और इसी के चलते चीन से आने वाले सभी यात्रियों की गहनता से जाँच की जा रही है। वहीं इस वायरस के चलते जापान, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। इससे घबराए भारत ने भी अपने सभी एयरपोर्ट्स को अलर्ट जारी कर दिया है।

अभी तक इस वायरस के फैसले के पीछे चीन में मौजूद सीफूड मार्केट और पशुओं को माना जा रहा है। डब्‍ल्‍यूएचओ ने आशंका व्‍यक्‍त की है कि इस वायरस के फैलने का कारण पशु भी हो सकते हैं। साथ ही इसे लेकर एक जानकारी यह भी सामने आ रही है कि यह किसी भी संक्रमित व्‍यक्ति के संपर्क में आने से भी फैलता है।

इससे भी गंभीर बात यह कि अभी तक सीधे तौर पर कोरोना वायरस पर अटैक करने वाली कोई वैक्सीन मार्केट में नहीं आई है। लेकिन इसके लक्षणों के आधार पर ही डॉक्टर्स इसके इलाज में दूसरी जरूरी दवाईयों का उपयोग कर रहे हैं। साथ ही साथ इसकी वैक्सीन तैयार करने पर भी काम चल रहा है। आपको बता दें कि इसका सबसे पहला मामला चीन के वुहान शहर में सामने आया था, जिसके चलते वर्ष 2002 और 2003 में चीन और हांगकांग में करीब 650 लोगों की मौत हो गई थी।

भारत सरकार के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की तरफ से कोरोना वायरस से बचने के उपाय जारी किए गए हैं। जब तक कोरोना वायरस का प्रकोप शांत नहीं हो जाता, जितना हो सके सी-फूड से दूर रहें, कहीं भी बाहर से आने या कुछ भी खाने से पहले अपने हाथ अच्छी तरह साफ करें। सिर्फ पानी से नहीं बल्कि साबुन या हैंडवॉश से धोएँ, अपने साथ हैंड सेनिटाइजर हमेशा रखें। जहाँ पानी से हाथ धोने की व्यवस्था ना हो, वहाँ इसका इस्तेमाल करें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का यूज करने के बाद हाथ साफ किए बिना उन्हें अपने चेहरे और मुँह पर ना लगाएँ, बीमार लोगों की देखभाल के दौरान अपनी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें। अपनी नाक और मुँह को कवर करके रखें। उनके इस्तेमाल किए हुए बर्तन और कपड़ों का उपयोग करने से बचें।

केजरीवाल के 2 वीडियो, 1 टोटका: ‘बच्चों की कसम’ जैसी तो नहीं AAP गारंटी कार्ड

राजनीति में अपनी किस्मत आजमाने के लिए नेताओं की ओर से टोटके किए जाने की आपने कई कहानियॉं सुन रखी होंगी। ज्यादा दिन नहीं बीते जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया था कि लालू यादव और राबड़ी देवी ने पटना के एक अणे मार्ग वाला सीएम आवास खाली किया था तो वहॉं से मिट्टी ले गए थे और बंगले के कोनों में पुड़िया रखा दिया था। जवाब में राजद नेता शिवानंद तिवारी ने कहा था कि लालू को नुकसान पहुॅंचाने के लिए नीतीश ने दरभंगा के काली मंदिर में अनुष्ठान करवाया था।

अब इसे महज संयोग कहा जाए या कुछ और इस तरह के एक टोटके की चर्चा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा नामांकन पत्र दाखिल किए जाने के बाद से भी हो रही है। केजरीवाल ने नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिन 21 जनवरी को पर्चा भरा था। वे नई दिल्ली से चुनावी मैदान में हैं। इसके बाद आप नेता सौरभ भारद्वाज ने ट्वीट कर आरोप लगाया कि केजरीवाल के नामांकन में जानबूझकर देरी की गई। हालॉंकि केजरीवाल ने इसे ज्यादा तूल नहीं दिया। लेकिन, दिलचस्प है कि इसी तरह केजरीवाल के नामांकन में देरी 2015 में भी हुई थी।

2020 की ही तरह केजरीवाल ने 2015 में भी 20 जनवरी को पर्चा दाखिल करने का ऐलान किया था। लेकिन, उस बार भी उन्होंने पर्चा दाखिल किया आखिरी दिन यानी 21 जनवरी को। उस वक्त केजरीवाल ने कहा था कि सात किमी लंबे रोड शो में इतना वक्ता लग गया कि वे समय से पर्चा दाखिल करने नहीं पहुॅंच पाए। इस बार उनकी पार्टी के नेता इसका ठीकरा अन्य उम्मीदवारों के मत्थे मढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, दिल्ली की फिजाओं में यह चर्चा चलने लगी है कि क्या यह केजरीवाल को कोई टोटका है?

आप ने 21 जनवरी को केजरीवाल का एक वीडियो ट्वीट किया। इसमें कॉन्ग्रेस और राजद तथा भाजपा, जदयू और लोजपा के गठबंधन को लेकर वे प्रतिक्रिया दे रहे हैं। 38 सेकंड के इस वीडियो में केजरीवाल दावा करते हैं कि वे भ्रष्टाचार से लड़ रहे हैं, जबकि सारी पार्टियों का एक ही मकसद है केजरीवाल को हराओ। ये वीडियो आप नीचे सुन सकते हैं,

भ्रष्टाचार। साल 2012 में केजरीवाल ने अपनी राजनीति की शुरुआत इसी को आधार बनाकर की थी। उन्होंने बकायदा भ्रष्टाचारी नेताओंं की लिस्ट जारी की थी। स्विस बैंक खातों के नंबर भी। लेकिन, सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार पर ही तमाम तरह के भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। वैसे इस मसले पर उनका स्टैंड कितना ढुलमुल है यह आप नीचे के वीडियो से समझ सकते हैं।

यह वीडियो बीते साल हुए लोकसभा चुनाव से पहले का है। केजरीवाल ने 24 फरवरी 2019 को इंडिया टुडे को एक इंटरव्यू दिया था। उस वक्त आप दिल्ली में कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन बनाने की फेर में लगी थी। इस साक्षात्कार के दौरान( 15 से 20 मिनट के बीच) पूछे गए सवाल और केजरीवाल के जवाब को गौर से सुनिए। इंटरव्यू लेने वाले अंकित त्यागी केजरीवाल को वे नाम गिनाते हैं जिन्हें उन्होंने 2013 में भ्रष्टाचारी बताया था और पूछते हैं कि आज आप उनके साथ ही हाथ मिलाने को तैयार हैं। जवाब में केजरीवाल कहते हैं कि देश की मजबूरी है, बीजेपी को हराना जरूरी है। इसके बाद अंकित त्यागी पूछते हैं कि देश की मजबूरी है कि अरविंद केजरीवाल करप्ट लोगों के साथ खड़े हों? जवाब में केजरीवाल कहते हैं- जैसे कि मैंने कहा इस वक्त देश की मजबूरी है कि कुछ भी करो लेकिन मोदी और अमित शाह की जोड़ी को हराना जरूरी है।

वैसे, करप्शन को लेकर केजरीवाल ने अपना स्टैंड उसी दिन स्पष्ट कर दिया जब वे फिलहाल चारा घोटाले में कारावास की सजा काट रहे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के हाथ में हाथ डाले नजर आए थे। इस वीडियो में केजरीवाल दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं होने के कारण वादों को पूरा करने में हो रही परेशानियॉं भी गिनाते हैं। यहॉं तक दावा करते हैं कि मोदी लौटे तो देश में चुनाव नहीं होंगे।

आज वही केजरीवाल साल भर के भीतर ही फिर से करप्शन और काम की बात करने लगे हैं। सत्ता में वापसी के लिए जनता को गारंटी दे रहे हैं। दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा के लिए आठ फरवरी को वोट डाले जाएँगे। नतीजे 11 फरवरी को आएँगे। उसी दिन पता चलेगा कि केजरीवाल नई दिल्ली से जीत की हैट्रिक लगा पाते हैं या नहीं? आप की सत्ता में वापसी होती है या नहीं? ले​किन यह अजीब है कि जो नेता अपने बातों की गारंटी नहीं दे पाता, वह दिल्ली की जनता को गारंटी कार्ड बाँट रहा है।

‘बच्चों की कसम है’ से लेकर, उसी कॉन्ग्रेस सपोर्ट के लिए ‘लालायित’ सड़जी… और कितना गिरेंगे?

अनुसूचित जातियों और गरीब बच्चों के साथ खिलवाड़: दिल्ली की ‘शिक्षा क्रांति’ का काला सच

दिल्ली में शिक्षा क्रांति के दावे ऊँचे, हकीकत फीकी: 500 स्कूल नहीं खुले, कमरे गिनवा रही केजरीवाल सरकार

अनुपम खेर जोकर है, मनोरोगी है, मुझे मुस्लिम होने का अहसास कराया जा रहा: नसीरुद्दीन शाह

वरिष्ठ फ़िल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का ‘डर’ एक बार फिर नए रूप में सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि अगर उनका 70 साल भारत में रहना और यहाँ अपने मन मुताबिक़ वो सभी काम करना जिससे वो प्यार करते हैं- ये सब अगर उनके यहाँ के होने की निशानी नहीं है तो फिर क्या है? नसीरुद्दीन शाह ने इस दौरान भारत के बड़े फ़िल्मी सितारों पर सीएए को लेकर चुप्पी साधने का भी आरोप लगाया। उनका इशारा महानायक अमिताभ बच्चन और शाहरुख़ ख़ान जैसे बड़े फ़िल्मी सितारों की ओर था। नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि एक मुस्लिम होने के कारण आज के भारत में उन्हें डर लगता है।

प्रोपेगंडा पोर्टल ‘द वायर’ को दिए गए इंटरव्यू में शाह व्यक्तिगत टिप्पणी करने से भी नहीं हिचके। उन्होंने बॉलीवुड के ही एक अन्य वरिष्ठ अभिनेता अनुपम खेर को अपने निशाने पर लिया। बता दें कि अनुपम खेर अक्सर वामपंथी गैंग की ख़बर लेते रहते हैं, जिसके कारण शाह जैसे लोग उनसे नाराज़ रहते हैं। नसीरुद्दीन ने अनुपम को जोकर बता दिया। नसीर ने कहा कि खेर एक जोकर हैं और उन्हें गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है।

नसीर ने कहा कि अनुपम खेर के साथ एनएसडी से उनके साथ पढ़ा कोई भी व्यक्ति इस बात की पुष्टि कर सकता है कि वो एक मनोरोगी हैं। नसीर ने कहा कि खेर के ख़ून में ही मनोरोगी वाली प्रकृति है।

बता दें कि एफटीआईआई के पूर्व अध्यक्ष अनुपम खेर भारत व विदेश की कई भाषाओं की मनोरंजन इंडस्ट्री में काम कर चुके हैं और आज भी वो अपने काम में खासे व्यस्त रहते हैं। 500 से भी अधिक फ़िल्मों में विभिन्न प्रकार के किरदार अदा कर चुके अनुपम खेर ने हॉलीवुड के महानायक रॉबर्ट डी नीरो के साथ भी काम किया हुआ है। उन्होंने हॉलीवुड की कई बड़ी फ़िल्मों में भी अभिनय किया है। इसके अलावा कनाडा की टीवी सीरीज ‘द इंडियन डिटेक्टिव’ में भी अभिनय किया, जिसके बाद उन्हें वहाँ भी लोकप्रियता मिली।

जहाँ तक नसीरुद्दीन शाह की बात है, वो मोदी सरकार के ख़िलाफ़ कई बार अनाप-शनाप बयान दे चुके हैं। नसरुद्दीन ने इस दौरान जेएनयू जाकर पब्लिसिटी स्टंट करने वाली अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की ख़ूब तारीफ की। उन्होंने कहा कि आवाज़ उठाने के लिए दीपिका जैसी हिम्मत चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘आज के भारत’ में उन्हें हर पल मुस्लिम होने का अहसास कराया जा रहा है। इस इंटरव्यू में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहा कि जो कभी स्कूल नहीं गया, वो शिक्षा को लेकर कैसे कुछ समझेगा?

नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि वो डरे हुए नहीं हैं बल्कि काफ़ी गुस्से में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ट्विटर पर गालीबाजों को फॉलो करते हैं। बता दें कि नसीरुद्दीन को अनुपम खेर ने अपने शो में बुला कर उनका इंटरव्यू लिया था। बावजूद इसके उनका इस तरह बयान देना चौंकाने वाला है।

आर्मी कैंप में सौम्यदीप ने आतंकी हमले से माँ और बहन को बचाया: राष्ट्रपति ने दिया 22 बच्चों को वीरता पुरस्कार

राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार (जनवरी 22, 2019) को राष्‍ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री राष्‍ट्रीय बाल पुरस्‍कार 2020 (राष्‍ट्रीय वीरता पुरस्‍कार) का वितरण किया। इसके तहत कुल 22 बच्‍चों को सम्‍मानित किया गया। वीरता पुरस्कार पाने वाले 22 बच्‍चों में से 10 लड़कियाँ और 12 लड़के हैं। एक बच्चे को मरणोपरांत यह पुरस्कार दिया गया। ये बहादुर बच्चे 26 जनवरी को होने वाली परेड में भी शामिल होंगे। ये सभी बहादुर बच्चे देश के 12 अलग अलग राज्यों से हैं।

सम्मानित बच्चों में जम्मू के सौम्यदीप जाना भी शामिल है। सौम्यदीप ने आतंकवादियों के हमले से अपनी माँ और बहन को बचाया था। इस दौरान सौम्यदीप को गोलियाँ भी लगीं और वह करीब 6 महीने से ज्यादा तक अस्पताल में रहा। सौम्यदीप आज भी व्हीलचेयर पर चलने को मजबूर है। बता दें कि 10 फरवरी 2018 को कुछ आतंकवादियों ने जम्मू के सुंजवन आर्मी कैंप पर हमला कर दिया था। वे लगातार फायरिंग कर रहे थे और अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे। तब साहसी सौम्यदीप ने इसका डटकर मुकाबला किया।

सौम्यदीप ने आतंकियों से अपनी माँ और बहन को बचाने के लिए एक कमरे में बंद कर दिया। फिर घर के मुख्य द्वार को स्टील के बक्से से ब्लॉक कर दिया, ताकि आतंकवादी अंदर नहीं घुस पाएँ। तब उन्होंने घर के अंदर एक हैंड ग्रेनेड फेंक दिया और फायरिंग करने लगे। लेकिन सौम्यदीप ने पूरी ताकत से उनका सामना किया। इस दौरान सौम्यदीप को काफी ज्यादा चोटें आईं और वह कोमा में चला गया। तीन महीने से ज्यादा समय तक वह कोमा में रहा। उसके कई ऑपरेशन भी हुए और उसके शरीर का बायाँ हिस्सा पैरालाइज्ड हो गया। इस चोट की वजह से उसके देखने और सुनने की क्षमता भी कम हो गई। लेकिन चेहरे पर मुस्कान लिए वह कहते हैं, “मुझे मेरे परिवार के लिए यह करना था। मैं उन्हें मरने के लिए नहीं छोड़ सकता था।”

इसी तरह हिमा ने भी इस आतंकी हमले में अपनी माँ की जान बचाई थी। आतंकवादियों के हाथों में बंदूकें थी, लेकिन हिमा ने बिना डरे पूरी बहादुरी से उनका सामना किया। काफी देर तक आतंकवादियों से लड़ने के बाद आखिरकार वह खुद और अपनी माँ को वहाँ से सुरक्षित निकाल पाने में सफल हुई।

हिमाचल प्रदेश की मुस्कान और सीमा ने लड़कियों को परेशान करने वाले बदमाशों को बढ़िया सबक सिखाया था। एक सरकारी स्कूल की कुछ छात्राओं ने अपने प्रिंसिपल से इस बात की शिकायत की थी कि कुछ लड़के स्कूल आते-जाते उन्हें परेशान करते हैं, उनको छेड़ते हैं और गंदे इशारे करते हैं। एक दिन मुस्कान और सीमा अपनी सहेलियों के साथ स्कूल जा रही थीं। उनके साथ भी बदतमीजी करने की कोशिश की गई। इस पर दोनों ने उस आदमी को पकड़ा और उसकी खूब पिटाई कर दी। फिर उस पर केस भी दर्ज कराया। दोनों की हिम्मत देख कर लोग हैरान रह गए। इन्हें भी राष्ट्रपति की तरफ से सम्मानित किया गया।

‘मुस्लिम परस्त है कॉन्ग्रेस, CAA की आड़ में हिंदुओं को गाली देने का काम किया है’

कुछ राजनीतिक पार्टियॉं नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनपीआर को लेकर देश में भ्रम का माहौल बना रही हैं। खासकर, कॉन्ग्रेस। विरोध की आड़ में उन्होंने हिंदुओं को गाली देने का काम किया है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने बुधवार (जनवरी 22, 2020) को कॉन्ग्रेस को मुस्लिम परस्त पार्टी बताते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को अपना नाम बदलकर मुस्लिम लीग रख लेना चाहिए।

पत्रकारों से बात करते हुए पात्रा ने कहा कि विरोध के बहाने उन्होंने हिन्दुओं को गाली दी है। दो दिन पहले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान सरकार में मंत्री अशोक चव्हाण ने एक सभा में कहा कि हमने मुस्लिम भाइयों के कहने पर महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ सरकार बनाई है। मुस्लिमों का कहना था कि भाजपा हमारी सबसे बड़ी दुश्मन है, इसलिए हमने शिवसेना के साथ सरकार बनाई।

उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि कॉन्ग्रेस मुस्लिमों से पूछकर ही सरकार बनाती है। किसी और धर्म के लोगों को ध्यान में रखकर नहीं। उसे हिंदुओं और अन्य लोगों की चिंता नहीं है। पात्रा ने महाराष्ट्र सरकार में शामिल एनसीपी नेता जितेन्द्र आव्हाड के बयान का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आव्हाड ने कहा था कि मुस्लिम कह सकते हैं कि उनके पुरखे यहॉं की ज़मीन में दफन हैं, लेकिन हिन्दू नहीं कह सकते कि उनके पुरखों का अंतिम संस्कार कहॉं हुआ। 

इसी प्रकार से मंगलवार (जनवरी 21, 2020) को एआईएमआईएम के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मुस्लिमों ने 800 वर्ष तक इस मुल्क में हुक्मरानी और जांबाजी की है। उन्होंने कहा, “हमारे पुरखों ने इस मुल्क को कुतुबमीनार, चार मीनार, जामा मस्जिद दिया है। लाल किला भी उन्होंने ही बनाया, तुम्हारे पूर्वजों ने क्या बनाया है?” पात्रा ने कहा कि आखिर ये सवाल किससे था?

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि हमारे दादा-परदादा ने इसे देश को सहिष्णु, विराट, क्षमतावान, गरिमावान बनाया और कॉन्ग्रेस तथा उसके सहयोगी इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं। पात्रा ने बताया कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के 6 लोगों को कर्नाटक मेंं गिरफ्तार किया गया है। यह वही संस्था है जिसने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी के बड़े नेताओं की हत्या की साजिश रची थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएफआई को सोनिया गॉंधी और राहुल गॉंधी का समर्थन मिलता रहा है।

उन्होंने कॉन्ग्रेस नेताओं पर हिन्दू विरोधी राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि 17 मई 2017 युवक कॉन्ग्रेस के एक नेता केरल में गाय की हत्या करते हैं और सार्वजनिक रूप से गौ मांस भक्षण करते हैं। 2016-17 में राहुल गॉंधी जेएनयू जाते हैं और वहॉं देश विरोधी नारे लगते हैं। 16 मई 2017 को कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में भगवान राम की तुलना तीन तलाक और हलाला से करते हैं।

11 जुलाई 2018 को राहुल गॉंधी ने साफ कहा कि हॉं, कॉन्ग्रेस मुस्लिमों की पार्टी है। 9 जुलाई 2018 को कॉन्ग्रेस के जेडए खान कहते हैं कि देश के हर जिले में शरिया अदालत होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि 2008 में समझौता एक्सप्रेस विस्फोट में कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने हिंदू आंतकवाद पर ऊँगली उठाई। 2006 में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि देश के संसाधनों पर पहला हक मुस्लिमों का है। 2004 में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गॉंधी ने काँची कामकोटि के शंकराचार्य को गिरफ्तार कराया। पात्रा ने कहा कि इन बातों से जाहिर है कि कॉन्ग्रेस केवल मुस्लिमों की बात करती है। वह उनके ध्रुवीकरण की कोशिश में है। लिहाजा उसे अपना नाम भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस की बजाए ‘मुस्लिम लीग कॉन्ग्रेस’ कर लेना चाहिए।

वामपंथियों और कॉन्ग्रेसी सरकारों की सिब्बल ने खोली पोल, कहा- CAA लागू करने से मना नहीं कर सकते राज्य

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राहुल गाँधी पर जो कहा उस पर कायम हूँ: जबरन छुट्टी पर भेजे गए मुंबई यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर

जबरन छुट्टी पर भेजे गए मुंंबई यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर योगेश सोमन ने कहा है कि उन्होंने जो कहा उस पर वे कायम हैं। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी को लेकर कथित तौर पर विवादित टिप्पणी के बाद उन्हें अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया गया था। सोमन मुंबई यूनिवर्सिटी के एकेडमी ऑफ आर्ट के डायरेक्टर हैं।

उन्होंने कहा कि जबरन अवकाश पर भेजे जाने की मुझे जानकारी नहीं है। इस संबंध में जो भी जानकारी मिली है वह मीडिया के माध्यमों से मिली है। मामले में आधिकारिक जॉंच होने के बाद ही मैं अपना आधिकारिक बयान दूँगा। इससे पहले बताया गया था कि विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर को इस मामले में दोषी मानते हुए अवकाश पर जाने का आदेश दे दिया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रोफेसर सोमन ने 14 दिसंबर को फेसबुक पर एक वीडियो ब्लॉग लिखा था। इस वीडियो में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को NSUI द्वारा और कुछ शब्दों को विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा आपत्तिजनक बताया गया था। बताया गया था कि NSUI ने प्रोफेसर योगेश सोमन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद विश्वविद्यालय की फैक्ट-फाइंडिंग ने उन्हें दोषी पाया और छुट्टी पर जाने के लिए कह दिया गया।

इस वीडियो में सोमन ने सावरकर को लेकर राहुल गॉंधी के बयान पर प्रतिक्रिया दी थी। 51 सेकंड के इस वीडियो में वे राहुल गाँधी से कहते हुए दिखाई दे रहे हैं, “आप वास्तव में सावरकर नहीं हैं, आपके अंदर उनके कोई गुण मोजूद नहीं हैं। सच तो यह है कि आप एक सच्चे गाँधी ही नहीं हैं…।” गौरतलब है कि राहुल गाँधी ने दिल्ली में एक रैली के दौरान कहा था, “मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं है, मैं माफी नहीं माँगूँगा”।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मुद्दे पर कहा था कि प्रोफेसर को जबरन अवकाश पर भेजना असहिष्णुता है। वहीं महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि राहुल गाँधी पर टिप्पणी करने वाले प्रोफेसर के खिलाफ जल्द ही बड़ा एक्शन लिया जाएगा। देशमुख ने आगे कहा कि एक प्रोफेसर का काम छात्रों को पढ़ाना होता है न कि इस तरह की बयानबाजी करना। अभी उन्हें जबरन छुट्टी पर भेजा गया है, लेकिन जल्द ही उनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।

वहीं, यूनिवर्सिटी का कहना था कि प्रोफेसर के खिलाफ फेसबुक पोस्ट के अलावा और भी कई अन्य आरोप थे।

JNU के सर्वर रूम में हुई थी तोड़फोड़, FIR भी दर्ज हुई थी: RTI के नाम पर प्रपंच फैला रहे हैं वामपंथी

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने आरटीआई के नाम पर अफवाह फैलाने वालों को करारा जवाब दिया है। जेएनयू में सर्वर रूम में वामपंथियों ने जम कर तोड़फोड़ मचाई थी, ताकि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी न की जा सके। बाद में सीसीओटीवी फुटेज में क़ैद अपनी करतूतों को छिपाने के लिए भी वामपंथियों ने सर्वर रूम में कम्युनिकेशन सिस्टम को तहस-नहस कर दिया। जेएनयू ने तभी पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी थी, जब पहली बार सर्वर रूम में तोड़फोड़ मचाई गई थी।

अब जेएनयू ने कहा है कि आरटीआई में एक ‘ख़ास जगह’ को लेकर जानकारी माँगी गई थी। अब जेएनयू ने इस आरटीआई के जवाब को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है। जेएनयू ने कहा है कि आरटीआई में किसी ‘स्पेसिफिक लोकेशन’ के लिए जानकारी माँगी गई थी। जेएनयू ने पुलिस व जाँच एजेंसियों के समक्ष जो शिकायत दर्ज कराई थी, वो सभी सार्वजनिक हो चुकी हैं, ऐसे में एक आरटीआई के नाम पर अफवाह फैलाने वालों को जेएनयू के इस बयान से काफ़ी धक्का लगा है।

बता दें कि 5 जनवरी को जेएनयू के हॉस्टलों में घुस कर वामपंथियों ने तांडव मचाया था। एबीवीपी के छात्रों को चुन-चुन कर पीटा गया था और कइयों का सिर लोहे के रॉड से प्रहार कर तोड़ दिया गया था। वामपंथी गुंडों का नेतृत्व करती हुई जेएनयू छात्र संगठन की वर्तमान अध्यक्ष आईसी घोष और पूर्व अध्यक्ष गीता कुमार के वीडियो वायरल हुए थे। नकाबपोश वामपंथी बदमाशों ने महिलाओं तक को नहीं बख्शा था। कॉमरेड चुनचुन को डंडा और पत्थर लेकर हिंसा करते हुए देखा गया था।

दरअसल, सर्वर रूम में तोड़फोड़ मचाने का असली उद्देश्य ये था कि जो छात्र पढ़ना चाहते हैं, वो रजिस्ट्रेशन ही न कर पाएँ। साथ ही ऐसे छात्रों को रोकने के लिए उनसे मारपीट भी की गई थी। सीसीटीवी फुटेज को तहस-नहस करने के लिए वामपंथियों ने दोबारा सर्वर रूम में घुस कर सिस्टम को तबाह करने के लिए तोड़फोड़ मचाई। इस मामले में दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच की जाँच चल रही है।

म्यांमार से लाई संदिग्ध चीजें छिपाने के लिए महिला IPS ऑफिसर ने लगाया छेड़खानी का आरोप: असम राइफल्स

एक महिला पुलिस अधिकारी ने असम राइफल्स के एक जवान पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। अब असम राइफल्स ने बयान जारी करके इन आरोपों को आधारहीन और बनावटी करार दिया है। असम राइफल्स ने अपने जवाब के ख़िलाफ़ लगे आरोपों को सिरे से नकार दिया है। बता दें कि 2 दिन पहले ही महिला आईपीएस अधिकारी ने असम राइफल्स के जवान पर यौन शोषण के आरोप मढ़े थे। महिला ने बताया था कि ये घटना तब हुई, जब वो भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित मोरेह में ड्यूटी कर रही थी।

इस मामले में मणिपुर महिला आयोग के पास भी शिकायत दर्ज कराई गई है। असम राइफल्स ने अपने बयान में कहा कि यौन शोषण का आरोप लगाने वाली अधिकारी ने अपने साथी के साथ सड़क पर बने चेकपॉइंट को धता बताते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की। महिला व उसके साथ हथियारबन्द व्यक्ति ने असम राइफल्स के जवानों को गालियाँ बकीं और उनके साथ अभद्रता की। घटना के समय दोनों के सादी वर्दी में होने की बात कही जा रही है।

असम राइफल्स ने अपने बयान में कहा है कि लाख पूछने के बावजूद महिला आईपीएस अधिकारी ने अपनी पहचान बताने से इनकार कर दिया और उलटा असम राइफल्स के जवानों से ही सवाल पूछने लगीं, जो तय नियम-कायदे के हिसाब से ड्यूटी कर रहे थे। असम राइफल्स के जवानों ने आरोप लगाया कि महिला अधिकारी ने चेकपॉइंट के फोटो भी लिए। शक जताया जा रहा है कि उसकी गाड़ी में कुछ ऐसी चीजें थीं, जिन्हें छिपाने के लिए ये सारा का सारा ड्रामा रचा गया।

एनएच-102 पर गणतंत्र दिवस के कारण सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और चेकपॉइंट को अलर्ट पर रखा गया है। असम राइफल्स ने गंभीर आरोप लगाया है कि उक्त महिला पुलिस अधिकारी म्यांमार जाकर वहाँ से कुछ संदिग्ध चीजें अपनी गाड़ी में ला रही थीं। असम राइफल्स ने कहा कि उसके पास इस बात के वीडियो सबूत हैं कि महिला पुलिस अधिकारी ने अपनी गाड़ी में म्यांमार से संदिग्ध चीजें उठाई। सुरक्षा बल ने सही समय पर वीडियो रिलीज करने की बात कही है। इससे पता चलता है कि अधिकारी ऑफिसियल ड्यूटी पर नहीं थी।

जिस रास्ते में ये घटना हुई, उसी मोरेह-इम्फाल रोड पर जनवरी 2019 से लेकर अब तक 500 करोड़ रुपए की अवैध वस्तुएँ जब्त की जा चुकी हैं। इससे यहाँ सुरक्षा चेकपॉइंट के महत्व का अंदाज़ा लग जाता है। असम राइफल्स का पूछना है कि 2 बजे दोपहर में कई लोगों के सामने उसका कोई जवाब यौन शोषण अथवा छेड़खानी कैसे कर सकता है? सुरक्षा बल ने कहा कि इसके बावजूद अधिकारी की शिकायत की जाँच की जाएगी।