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मैं ट्विटर पर किए गए अटैक के आधार पर अपने विचार तय नहीं करता: Zoho चीफ ने ‘लिबरल्स’ को दिया करारा जवाब

20 फरवरी 2020 को चेन्नई में होने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक कार्यक्रम में भारतीय सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी जोहो के संस्थापक एवं सीईओ श्रीधर वेम्बु और एक्सेंचर के एमडी और चेन्नई ऑपरेशन्स के प्रमुख राम रामचंद्रन के चीफ गेस्ट और गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर शामिल होने की सहमति देने को लेकर सोशल मीडिया पर ‘बुली’ किया गया।

RSS के इसी प्रोग्राम में चीफ गेस्ट हैं जोहो चीफ श्रीधर वेम्बू

बता दें कि इन कॉरपोरेट लीडर्स इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए सहमत होने को लेकर स्वघोषित नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर ‘बुली’ किया गया।

इतना ही नहीं, लोगों ने तो जोहो के उत्पादों का बहिष्कार करने की भी धमकी दी

अब जब दो शीर्ष कॉरपोरेटर लीडर्स को बुली किया जा रहा था, तो भला वो लोग पीछे कैसे रहते, जिनका करियर ही ‘बुली’ करने पर टिका हुआ है। उन्होंने भी इसमें हिस्सा लिया और आरएसएस के प्रोग्राम में शामिल होने को लेकर सवाल उठाए।

हालाँकि, जोहो प्रमुख श्रीधर वेम्बु पर ‘लिबरलों’ द्वारा किए गए इस बुली का कोई असर नहीं पड़ा। वो काफी स्थिर और अविचलित दिखे।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “मैं ट्विटर पर किए गए अटैक के आधार पर अपने विचार तय नहीं करता। यदि आप उन इवेंट को नापसंद करते हैं जिसमें मैं हिस्सा लेता हूँ, तो कृपया वह करें जो आपका अंतरात्मा कहता है और मैं वही करूँगा जो मेरा अंतरात्मा कहता है। हम अपने काम की वजह से अपनी रोजी रोटी कमाते हैं और हम गुणवत्तापूर्ण काम करते रहेंगे। मैं इन हमलों का जवाब नहीं दूँगा।”

इसके बाद ‘लिबरल’ बुलियों ने जोहो के ग्राहकों और कर्मचारियों से कहा कि ‘वे वही करें जो उनका अंतरात्मा कहता है।’’ साथ ही वेम्बू को धमकी भी दी गई कि अगर वे इस लाइन से नहीं हटेंगे, तो उन्हें सोशल बायकॉट का भी सामना करना पड़ेगा।

वैसे यह पहली बार नहीं है जब ‘लिबरलों’ ने आरएसएस द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए लोगों को धमकाया है। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भी उस समय काफी रोष का सामना करना पड़ा था, जब उन्होंने 2018 में आरएसएस के एक कार्यक्रम में भाग लिया था।

तुम ‘दैनिक भास्कर’ से भी सस्ती बिकती हो: फ़िल्म निर्देशक ने मज़ाक-मज़ाक में स्वरा को जम कर लताड़ा

बॉलीवुड में जब कोई भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अथवा केंद्र सरकार के समर्थन में बोलता है, उसे वामपंथी गैंग की गालियाँ पड़ती हैं। जो हर मुद्दे पर बड़बोले की तरह अपनी राय नहीं रखता, उसे भी वामपंथी गैंग निशाने पर लेता है और रीढ़विहीन बताता है। इसी क्रम में आयुष्मान खुराना की फ़िल्म ‘ड्रीम गर्ल’ के निर्देशक राज शांडिल्य ने स्वरा भास्कर को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिससे वो भड़क गईं। हालाँकि, राज ने मज़ाक-मज़ाक में ये बात कही थी लेकिन अक्सर ट्विटर पर लोगों से लड़ते रहने वाले स्वरा भास्कर ने इसे गंभीरता से ले लिया और बौखलाहट में राज को झिड़क दिया।

दरअसल, राज ने लिखा कि स्वरा भास्कर से ज़्यादा महँगा तो ‘दैनिक भास्कर’ बिकता है, इसीलिए सस्ती चीजों पर लोगों को ध्यान नहीं देना चाहिए। बता दें कि ‘दैनिक भास्कर’ एक हिंदी समाचारपत्र है, जो भारत के कई राज्यों में अपनी सेवाएँ देता है। एक अख़बार से अपनी तुलना किए जाने और ख़ुद को ‘सस्ता’ बताने के राज के ट्वीट से भड़की स्वरा ने गुस्से में उन्हें भला-बुरा सुनाया। उन्होंने कहा कि राज उन्हें रोल ऑफर करते हैं और अपनी फ़िल्म का ट्रेलर शेयर करने का निवेदन करते हैं। स्वरा ने कहा कि राज को अगली बार ऐसा करने से पहले अपनी ‘सस्ती हरकतों’ के बारे में सोच लेना चाहिए।

इसके बाद बौखलाई स्वरा ने राज शांडिल्य को शुभकामनाएँ भी दी। बता दें कि शांडिल्य ‘वेलकम बैक और भूमि’ जैसी फ़िल्मों के लिए डायलॉग लिख चुके हैं। टीवी की दुनिया में ‘कॉमेडी सर्कस’ और ‘कॉमेडी नाइट्स विथ कपिल’ की सफलता के पीछे उनका अहम किरदार माना जाता है। उन्होंने इन शो के कई एपोसीड्स का निर्देशन किया व स्क्रिप्ट्स लिखे। राज शांडिल्य ने स्वरा भास्कर के बौखलाने के बाद उन्हें जवाब देते हुए लिखा:

“मेरी बात यदि आपको ठीक नहीं लगी तो दिल से माफ़ी चाहता हूँ। लेकिन आपसे भी मेरी एक गुज़ारिश है। आप भी किसी के बारे में कुछ बोलने से पहले सोचा करें, चाहे वो देश हो, लोग हों या फिर कोई व्यक्ति विशेष। रही बात मेरी तो अगली बार भी रोल ऑफर ज़रूर करूँगा क्योंकि मुझे आपके एक्टर होने पे कोई आपत्ति नहीं है।”

राज शांडिल्य के जवाब के बाद स्वरा ने आरोप लगाया कि राज ने उन्हें ‘सस्ती’ और ‘ओछी’ कहा है। स्वरा ने कहा कि ऐसे शब्दों से किसी भी सामान्य और शालीन इंसान को आपत्ति ही होगी। स्वरा ने दावा किया कि वो विचारधारा और तर्क के आधार पर विरोध करती हैं। साथ ही उन्होंने राज से पूछा कि वो किसी के एक्टर या नागरिक होने पर आपत्ति कैसे जता सकते हैं? बता दें कि ट्विटर ट्रोल बन चुकी स्वरा अक्सर ऐसे लड़ाई-झगड़ों में पड़ी रहती हैं।

CCTV सर्वर डैमेज होने से पुलिस परेशान, गुंडों का नेतृत्व करती देखी गई आइशी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

जेएनयू हिंसा मामले की जाँच में दिल्ली पुलिस को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऑपइंडिया ने एक ख़बर में बताया था कि शुक्रवार (जनवरी 3, 2019) को वामपंथी उपद्रवियों ने विश्वविद्यालय के कम्युनिकेशन सेंटर में घुस कर वहाँ के सिस्टम को तहस-नहस कर दिया था। कर्मचारियों को भगा दिया गया था और इंटरनेट सर्विस के तार भी काट डाले गए थे। इस कारण रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया ठप्प हो गई थी। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि सीसीटीवी के सर्वर को इतना नुक़सान पहुँचाया गया है कि फुटेज लेकर उपद्रवियों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है।

दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच ने इस मामले की जाँच अपने हाथ में ली है। शुक्रवार को सर्वर डैमेज होने को लेकर जेएनयू प्रशासन ने एफआईआर भी दर्ज कराई थी। इसके अगले दिन गुंडे फिर से कम्युनिकेशन सेंटर में घुस गए थे और उन्होंने फिर से कर्मचारियों को भगा कर तकनिकी सिस्टम को तोड़फोड़ डाला था। जाँच में सीसीटीवी फुटेज की अहम भूमिका होगी, इसीलिए पुलिस उन फुटेज का जुगाड़ करने के अन्य उपाय तलाश रही है। बता दें कि जामिया हिंसा मामले में भी जब पुलिस सीसीटीवी फुटेज लेने पहुँची थी, तब छात्रों ने हंगामा किया था। जामिया प्रशासन ने सीसीटीवी फुटेज देने से इनकार कर दिया था।

इसके अलावा कई स्क्रीनशॉट भी शेयर हो रहे हैं। विभिन्न व्हाट्सप्प स्क्रीनशॉट्स से पता चल रहा है कि वामपंथियों ने ख़ूब सोच-समझ कर इस हिंसा की साज़िश रची थी। एबीवीपी वालों के हॉस्टल के कमरे तोड़ डाले गए और उनकी पिटाई की गई। पुलिस ने उन स्क्रीनशॉट्स में दिख रहे नंबरों को खँगाला है। अधिकतर नंबर स्विच ऑफ कर दिए गए हैं। लेकिन, हिंसा के समय उनकी लोकेशन क्या थी- ये ‘कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)’ तकनीक की मदद से पता चल जाएगा। पुलिस उन नंबरों की जाँच कर रही है।

जेएनयू प्रशासन की शिकायत के बाद पुलिस ने छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष सहित 19 छात्रों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की है। जावेद अख्तर ने आइशी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने पर आपत्ति जताई। इस मामले में अब तक 3 एफआईआर दर्ज किए जा चुके हैं। हालाँकि, 3 दिन बीतने के बावजूद अभी तक कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है। आइशी घोष का दावा है कि उन पर भी हमला किया गया और उनका सिर फोड़ दिया गया। हालाँकि, वायरल वीडियो में वो नकाबपोश दंगाइयों के नेतृत्व करती दिख रही हैं। उनका सिर कैसे फूटा, इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं है।

मैं मंत्री बन गई हूँ, लेकिन अभी हमें अपनी जेबें भरनी बाकी है: महाराष्ट्र सरकार में कॉन्ग्रेसी मंत्री

तमाम विवादों के बाद जैसे ही महाराष्ट्र सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ, मंत्रियों को उनके विभाग मिले, उनका ओहदा मिला वैसे ही उनके विवादित बयान शुरू हो गए हैं। इसी की एक बानगी देखने को मिली महाराष्ट्र के वाशिम जिले में। जहाँ एक मंच पर महाराष्ट्र सरकार की नवनिर्वाचित कैबिनेट मंत्री यशोमति ठाकुर ने शायद अपने मन की बात कह दी, जो विवाद का मुद्दा बन गया है। कैबिनेट मंत्री यशोमति ठाकुर ने मंच से कहा कि अभी-अभी हमने मंत्री पद की शपथ ली है, अभी हमारी जेबें गरम नहीं हुई हैं।

दरअसल महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री ने स्थानीय निकाय चुनाव में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी के लिए वोट माँगने के दौरान यह बातें कहीं। यशोमति ठाकुर ने कहा, “हमारी सरकार अब तक सत्ता में नहीं थी। लेकिन अब आ गई है। अब मैं मंत्री बन गई हूँ, लेकिन अभी हमें अपनी जेबें भरनी बाकी है।” यहाँ पर ‘जेब भरने’ का तात्पर्य घूस लेने से है।

इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी को निशाने पर लेते हुए कहा, “जो लोग विपक्ष में हैं उनकी जेबें काफी गहरी हैं। अगर वे आपके पास आएँ और अपनी जेब का कुछ हिस्सा दें तो उसे मना मत कीजिए। घर आई लक्ष्मी को कौन मना करता है, लेकिन वोट सिर्फ कॉन्ग्रेस को ही दीजिए।” वहीं नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने यशोमति ठाकुर पर निशाना साधते हुए कहा, “वे (कॉन्ग्रेस) सरकार में जनता की सेवा के लिए नहीं, बल्कि पैसा बनाने के लिए हैं।”

फिलहाल इस बयान पर कॉन्ग्रेस की ओर से अभी तक कोई टिप्पणी सामने नहीं आई है। न ही सहयोगी पार्टी शिवसेना और एनसीपी की तरफ से कोई बयान सामने आया है।

बता दें कि ठाकुर कुछ महीने पहले मुंबई के एक अस्पताल में पुलिस और मेडिकल स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार करने को लेकर भी चर्चा में थी। वहीं जब कॉन्ग्रेस नेता से इस विवादित बयान को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने टाइम्स नाउ से कहा कि उनके बयान को मीडिया ने तोड़ मरोड़ कर पेश किया है।

ईरानी कमांडर के जनाजे में इकट्ठा हुए 10 लाख लोग: भगदड़ में 48 से ज्यादा घायल, 35 की मौत

अमेरिकी ड्रोन हमले में 3 जनवरी को मारे गए ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी के जनाजे में आज 10 लाख लोग जुटे। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरान सुलेमानी के गृहराज्य केरमान में सुपुर्द-ए-खाक से पहले ही लोगों में भगदड़ मच गई। जिसके कारण वहाँ 35 लोगों की मौत हो गई। जबकि, 48 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इस खबर की पुष्टि समाचार एजेंसी एपी ने ईरानी टीवी के हवाले से की।

जानकारी के मुताबिक, एक ओर जहाँ रेवोल्यूशनरी गार्ड की विदेशी शाखा के कमांडर के गृह नगर में बहुत काफी बड़ी संख्या में लोग उन्हें अंतिम विदाई देने आए। वहीं, इतनी ही संख्या में तेहरान, कोम, मशहद और अहवाज में भी लोग सड़कों पर मौजूद थे। बड़ी संख्या में लोग आजादी चौक पर जमा हुए। जहाँ राष्ट्रीय झंडे में लिपटे दो ताबूत रखे गए। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि इनमें एक ताबूत सुलेमानी का और दूसरा ताबूत उनके करीबी सहयोगी ब्रिगेडियर जनरल हुसैन पुरजाफरी का है।

बता दें, जनाजे में शीराज से अपने कमांडर को अंतिम विदा देने के लिए केरमान आए लोगों में से एक ने मीडिया को बताया, “हम महान कमांडर को श्रद्धांजलि देने आए हैं।” वहीं, दूसरे ने कहा, “हज कासिम (सुलेमानी) से लोग ना सिर्फ केरमान या ईरान में मोहब्बत करते थे, बल्कि पूरी दुनिया में लोग उनसे मोहब्बत करते थे।”

गौरतलब है कि कमांडर के जनाजे में कई लाखों लोगों को इकट्ठा देख ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने कई ट्वीट किए। उन्होंने कहा, “क्या डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पूरी जिंदगी में इतनी भीड़ देखी है? क्या तुम अब भी क्षेत्र के बारे में जानकारी के लिए अपने जोकरों पर निर्भर रहोगे? क्या तुम्हें अभी भी लगता है कि तुम इस महान देश और इसके लोगों को तोड़ सकते हो। पश्चिमी एशिया से अमेरिका की शैतानी मौजूदगी का खात्मा शुरू हो गया है। 

बता दें जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या होने के बाद ईरान ने अमेरिका की सभी सेनाओं को आतंकी घोषित कर दिया है। इसके बाद अब ईरान अपने क्षेत्र के आसपास मौजूद अमेरिकी सेना पर कार्रवाई कर सकता है। ईरानी संसद के मुताबिक, अब पश्चिमी एशिया में इन सेनाओं की किसी भी तरह की मदद (खुफिया, तकनीकी, वित्तीय) को आतंक का सहयोग करार दिया जाएगा।

AIIMS में भेदभाव, प्रियंका गाँधी के घायलों को दिए शॉल कॉन्ग्रेस समर्थकों ने लिए वापस: JNU की जख्मी छात्रा का दावा

दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में रविवार को हुई हिंसा में घायल विश्विद्यालय की छात्रा कृतिका सेन ने इंडिया टुडे को बताया कि एम्स में डॉक्टरों ने विचारधारा के आधार पर घायल छात्रों के साथ भेदभाव किया।

आज तक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जेएनयू की छात्रा और एबीवीपी की सदस्य कृतिका सेन ने आरोप लगाया है कि जब घायल छात्रों को एम्स में भर्ती कराया जा रहा था, तो वहाँ के डॉक्टर प्रत्येक छात्र से पूछ रहे थे कि वे एबीवीपी से जुड़े हैं या फिर वामपंथी संगठन से। कृतिका ने मेडिकल स्टाफ द्वारा दुर्व्यवहार का भी आरोप लगाया है।

साथ ही कृतिका सेन ने यह भी कहा कि जेएनयू कैंपस में एबीवीपी के सदस्य वामपंथियों की तुलना में कम हैं, अल्पसंख्यक हैं। ऐसे में वो सुरक्षित नहीं हैं। उसने यह भी आरोप लगाया कि वह शाम 6 बजे एम्स में भर्ती हुई थी, जबकि जेएनयूएसयू अध्यक्ष आइशी घोष को 9 बजे भर्ती कराया गया था। लेकिन फिर भी घोष के समर्थकों का पहले इलाज किया गया था। उन्हें प्राथमिकता दी गई।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एम्स में इलाज करवाने वाले एबीवीपी सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया है कि जब कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा घायल छात्रों से मिलने एम्स गईं थी, तो उनके समर्थकों ने सबसे पहले घायल छात्रों से यही पूछा कि उनका संबंध किस विचारधारा से है। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने कहा कि प्रियंका गाँधी ने कुछ छात्रों को शॉल दी, लेकिन बाद में उनके कार्यकर्ताओं ने शॉल वापस ले ली।

कृतिका सेन ने कहा कि प्रियंका गाँधी एक नेता हैं। ऐसे में अगर वो शाम को हमला करने वाले लोगों पर सवाल कर रही हैं, तो फिर दिन में हमला करने वालों पर सवाल क्यों नहीं कर रही हैं? दिन में हमला करने वाले लोग कौन थे?

गौरतलब है कि जेएनयू में रविवार को बड़े पैमाने पर हिंसा और अराजकता देखी गई थी जब नकाबपोश हमलावरों ने हॉस्टल में प्रवेश किया था और छात्रों को लाठी और डंडों से पीटा था। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई सौ पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। इस हिंसा के दौरान 30 से अधिक घायल हुए थे। बहरहाल इस हिंसा को लेकर लेफ्ट और एबीवीपी दोनों एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

हालाँकि, बहुत सारी ऐसी खबरें चली थीं, जिसमें कहा गया था कि वामपंथियों ने छात्र समूहों पर हमला करने के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों को बुलाया था। जेएनयू प्रशासन ने एक लिखित बयान में कहा है कि आंदोलनकारी छात्र समूहों ने रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को रोकने के लिए कम्युनिकेशन रूम में सर्वर को क्षतिग्रस्त कर दिया था और गैर-आंदोलनकारी छात्रों को शैक्षणिक गतिविधियों के लिए अपने संबंधित संस्थानों में जाने से बलपूर्वक रोक दिया था।

‘तेरी माँ की…’ गाली देने वाला है The Hindu का पूर्व जर्निलस्ट, रेप पीड़िता को भी कह चुका है K*tti, har*#zadi

रविवार को नकाबपोश गुंडों ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) कैंपस में धावा बोला और हॉस्टल में छात्रों को निशाना बनाया। लाठी, पत्थरों और लोहे की छड़ों के साथ गुंडों ने हाथापाई, मारपीट और खिड़कियों, फर्नीचर सामानों में तोड़फोड़ की। बता दें कि हिंसा की शुरुआत सर्वर रूम से शुरू हुई थी। वामपंथी गुंडों ने छात्रों को विंटर सेमेस्टर के लिए रजिस्ट्रेशन से रोकने के लिए सर्वर रूम को लॉक कर दिया था, वाई-फाई काट दिया था। जेएनयू के पेरियार हॉस्टल के भीतर घुसकर छात्रों के साथ हुई हिंसा के बाद विश्वविद्यालय के बाहर काफी बवाल हुआ।

इसी दौरान रिपब्लिक भारत के रिपोर्टर पीयूष मिश्रा भी रिपोर्टिंग करने वहाँ पहुँचे थे। वहाँ पर उपस्थित छात्रों के साथ ही फ्रीलांस जर्नलिस्ट अभिमन्यु सिंह उर्फ अभिमन्यु कुमार ने भी गाली-गलौच और बदसलूकी की। बता दें कि अभिमन्यु सिंह मीडिया संस्थान द हिन्दू, संडे गार्डियन में काम कर चुके हैं और फिलहाल ऑनलाइन पोर्टल जनता की आवाज के साथ जुड़े हुए हैं।

अभिमन्यु सिंह ने रिपबल्कि टीवी के पत्रकार के साथ की बदसलूकी

इस वीडियो में लगभग 18 सेकेंड में नीली जैकेट और लाल दुपट्टे में एक व्यक्ति पीयूष मिश्रा के पास पहुँचता है और उसके साथ धक्का-मुक्की की। वह अभिमन्यु सिंह हैं।

अभिमन्यु सिंह के फेसबुक से ली गई फोटो

ऑपइंडिया की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद हरियाणा की रहने वाली एक महिला मीना (बदला हुआ नाम) ने हमसे संपर्क किया और आरोप लगाया गया कि सिंह ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया और उसे ‘K*tti’ और ‘har*mzadi’ कहा।

मीना ने दावा किया कि जब उन्होंने डच निवासी पीटर डी ब्रुइजन पर बलात्कार का आरोप लगाया तो सिंह की पत्नी ऐलेट्टा आंद्रे, जो कि भारत में डच जर्नलिस्ट है, ने इंटरनेशनल पब्लिकेशन में उनको बदनाम कर दिया था।

मीना ने 7 जुलाई, 2018 को गुरुग्राम पुलिस स्टेशन में एक FIR दर्ज करवाया था। इसमें कहा गया था कि पीटर ने अपनी शादी के बारे में उससे झूठ बोला था और फिर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। इस FIR की एक कॉपी ऑपइंडिया के पास भी है। मीना ने आरोप लगाया कि पीटर ने शादी का वादा करके उसके साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाए थे। हालाँकि, जब मीना प्रेगनेंट हुई तो सिंह ने उस पर अबॉर्शन के लिए मजबूर किया गया।

मीना ने अपने FIR में कहा कि सितंबर 2014 में उन्होंने पीटर के खिलाफ रेप केस दर्ज करवाया था। हालाँकि मार्च 2019 में आरोपित पीटर नीदरलैंड चला गया, जिसके बाद वो फिर कभी वापस लौटकर नहीं आया। 

अपनी FIR में मीना ने पीटर के साथ ही कई अन्य लोगों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज करवाई थी। इसमें ऐलेट्टा आंद्रे, जियोरी बूम, सोज़र्ड वीमर सोजेरड्समा, फेरी स्टॉप, लोयस बॉमर्स, जेने पीटर, माने शर्मा और नताली राइटन के नाम शामिल हैं। मीना का कहना है कि ये लोग या तो पत्रकार हैं, राजनेता हैं या फिर आरोपित के दोस्त हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों में बलात्कार मामले को लेकर फर्जी खबरें छापने की कोशिश की।  

ऑपइंडिया से बात करते हुए मीना ने कहा कि उन्होंने ऑपइंडिया रिपोर्ट से सिंह की पहचान की और फिर उन्हें याद आया कि कैसे सिंह ने उन्हें कोर्ट रूम में इसलिए गाली दी थी क्योंकि उन्होंने उसकी डच पत्रकार पत्नी का नाम FIR में दिया था और साथ ही उस पर बदनाम करने का आरोप लगाया था। वो कहती हैं, “वह चिल्लाया और यौन उत्पीड़न पीड़िता को गाली दी। वह केस के सिलसिले में अदालत में आया था। उसने कोर्ट में जज के सामने और फिर अदालत के बाहर भी मुझे गाली दी। उसने जज और वकीलों के सामने मुझे ‘k*tti’ और ‘har*mzadi’ कहा।”

मीना ने अपनी शिकायतों के बारे में विदेश मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय के साथ ही एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया को भी लिखा है।

मोदी के कहने पर फोर्ब्स में कन्हैया का नाम, शेहला ने नए नोट पर लिख दिया- कन्हैबा बेब्फा है

फोर्ब्स की विश्व के टॉप-20 निर्णायक लोगों की सूची लीक होने के बाद लिबरल गिरोह में फूट पड़ने की खबर आ रही है। रक्तपिपासु वामपंथी कन्हैया कुमार के रक्त के प्यासे बताए जा रहे। खान मार्केट गैंग का कहना है कि मोदी-शाह ने साजिशन कन्हैया कुमार का नाम सूची में डलवाया है। इसके लिए अडानी से बकायदा फोर्ब्स को विज्ञापन दिलवाया गया है। कहा जा रहा है कि विज्ञापन का पैसा लेकर खुद अंबानी गए थे।

सूत्रों के अनुसार पेरियार हॉस्टल में इस मसले पर पोलित ब्यूरो की बैठक हुई थी। बैठक की भनक एबीवीपी के लोगों को नहीं लगे इसके लिए ड्रेस कोड तय किया गया- नकाब। बैठक में मौजूद लोगों के बीच का विभाजन साफ तौर पर दिख रहा था। एक पक्ष का कहना था कि साजिशन कन्हैया का नाम डलवाया गया है। वहीं, दूसरे गुट का कहना था कि इस साजिश में कन्हैया भी शामिल है। इस गुट के लोग कह रहे थे कि गिरिराज सिंह ने चूँकि अगला चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर दिया है, इसलिए कन्हैया ‘फूल’ बना रहा है। इस गुट को जिन प्रमुख लोगों का समर्थन हासिल है उनमें प्राइम टाइम प्रोपेगेंडा स्पेशलिस्ट रवीश कुमार, लिंगलहरी कुमार की खास दोस्त शेहला रशीद और टुकड़े-टुकड़े गैंग के उनके प्रमुख सिपहसलाहकार उमर खालिद शामिल हैं।

गुप्त सूत्र बताते हैं कि उमर खालिद बेहद गुस्से में था। बैठक के दौरान ही उसने पूरी बकार्डी गटक ली। फिर खाली बोतल दीवार पर मार दी। उसका कहना था कि जब दिल्ली पुलिस की एफआईआर में उसका नाम कन्हैया के साथ है तो फोर्ब्स की सूची में साथ-साथ क्यों नहीं है। कांच के उन्हीं टुकड़ों से शेहला कलाई पर कुछ लिखने जा रही थी। लेकिन जामिया की जेहादिनों ने मजहब का वास्ता देकर रोक लिया। समझाया कि कन्हैया कुमार वैसे भी काफिर ही है। काफिरों के लिए खून बहाया नहीं जाता है। उनका खून बहाया जाता है। नारा-ए-तकबीर के बाद शेहला ने पास बैठे कॉमरेड से एक नया नोट मॉंगा और उस पर लिख डाला- कन्हैया कुमार बेवफा है। यह नोट जैसे ही ट्वीट किया गया वायरल हो गया।

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार इसके बाद रवीश फट पड़े। उन्होंने कहा कि इस प्रोपेगेंडा में सबसे ज्यादा मेरी ही स्याही लगी है। फिर कैसे कन्हैया का नाम आया। पहले मेरा हक बनता है। उन्होंने कन्हैया पर जात भाई को ही दगा देने का गंभीर आरोप लगाया। प्राइम टाइम नहीं करने का ऐलान करते हुए वे बीच बैठक से ही निकल गए। कन्हैया ने सफाई देने की कोशिश की तो उसे बोलने नहीं दिया गया। इसी दौरान हुई गर्मागर्म बहस में एक बोतल आइशी घोष के कपार पर बजर गया।

अपना ही खून देख नकाबधारी पतली गली से निकल गए। कॉमरेडों ने इसकी सूचना सलीम उर्फ योगेंद्र यादव को दी। बरखा को भी काम पर लगाया गया। तय किया गया कि आइशी के खून को भगवा में रंगना है। जनपथ तक खबर पहुँची तो राहुल गाँधी के नाम से सुरजेवाला ने ट्वीट दागा। लिखा, “मोदी-शाह ने आपका पैसा लूट कर अपने दोस्तों को दिया। फिर उन उन दोस्तों से फोर्ब्स को पैसा दिलवाया। विपक्षी एकता को तोड़ने के लिए उन्हीं पैसों से कन्हैया का नाम सूची में डलवाया गया है।” इस क्रोनोलॉजी को समझने की अपील करते हुए ​प्रियंका गॉंधी रवीश कुमार को मनाने उनके घर पहुॅंचीं। लेकिन रवीश ने स्पष्ट कर दिया- बोलना ही है। कम से कम पुस्तक मेला तक तो ‘बोलना ही है’।

इस मसले की गूँज सदन में भी सुनाई पड़ी। अधीर रंजन चौधरी ने इसे आंतरिक मामला मानने से इनकार करते हुए संयुक्त राष्ट्र से दखल देने की मॉंग की है। कॉन्ग्रेस की अपील पर संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि वह इसके लिए तैयार है। चीन ने कहा है कि वह सुरक्षा परिषद में यह मामला उठाएगा। इमरान खान ने आईएसआई से पूरे मामले की जॉंच करवाने का ऐलान किया है।

बढ़ते दबाव के बीच कन्हैया ने ट्वीट किया है;

“कितनी बेशर्म सरकार है। पहले निर्णायक लोगों की सूची में मेरा नाम डलवाती है। फिर कॉमरेड येचुरी पर प्रेशर डाल पोलित ब्यूरो का बैठक बुलवाती है। बैठक में बोतल तुड़वाती है। फिर भी नहीं झुकने पर प्रियंका गॉंधी को सीधे रवीश के घर भेजती है। जब से ये सत्ता में आए हैं तब से लिबरलों की फाड़ कर रखी है।”

इस बीच दिल्ली वाले सर जी ने भी बयान जारी कर अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है- मैंने तो पहले ही कहा था सब मिले हुए हैं जी!

‘माँ’ को छोड़ ‘मर्दानगी’ पर अटके मुनव्वर, ‘मर्दाना कमज़ोरी’ के शर्तिया इलाज के लिए वामपंथियों ने लगाई लाइन

NDTV के पत्रकार ने इमरान खान को फेक वीडियो भेज कर कराई Pak की फजीहत, रवीश ने जारी किया बयान!

खोज उस क्रिएटिव डॉक्टर की, जिसने नकली पीड़ितों के हिजाब और जैकेट पर बैंडेज लगाया

22 जनवरी, सुबह 7 बजे: निर्भया के गुनहगारों की फाँसी का समय तय, माँ ने कहा- बेटी को मिला न्याय

दिल्ली के बहुचर्चित निर्भया गैंगरेप मामले में पटियाला हाउस कोर्ट का बहुप्रतीक्षित फ़ैसला आ गया है। कोर्ट ने चारों दोषियों के ख़िलाफ़ डेथ वारंट जारी कर दिया है। 2012 के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा आदेश के बाद बुधवार (जनवरी 22, 2020) को उन्हें फाँसी के तख्ते पर चढ़ा दिया जाएगा। इन चारों को पहले ही बलात्कार और हत्या के मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। एडिशनल सेशन जज सतीश कुमार अरोड़ा ने कहा कि वो 14 दिनों के भीतर अन्य क़ानूनी विकल्प का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस फ़ैसले के बाद निर्भया की माँ ने ख़ुशी जताई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर्ट में निर्भया की माँ और दोषी मुकेश की माँ के बीच तीखी झड़प भी हुई। जज के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। निर्भया का परिवार पिछले 8 वर्षों से दोषियों की फाँसी के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ रहा है। आज सुनवाई के दौरान चारों आरोपितों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया। फ़ैसला आने के बाद दोषियों के वकील ने कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट में क्यूरिटिव याचिका दायर करेंगे। फाँसी का समय सुबह 7 बजे तय किया गया है।

आज पटियाला हाउस कोर्ट के फ़ैसले पर पूरे देश की नज़र टिकी हुई थी। निर्भया गैंगरेप मामले में कुल 6 आरोपित थे, जिनमें से एक नाबालिग था। एक आरोपित की जेल में ही मृत्यु हो गई थी। आरोपितों को सितम्बर 2013 में ही ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहरा दिया था। मार्च 2014 में हाईकोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले पर मुहर लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने मई 2017 के फ़ैसले में फाँसी की सज़ा को सही ठहराते हुए दोषियों की सारी समीक्षा याचिकाएँ भी खारिज़ कर दी थी।

निर्भया के पिता बद्रीनाथ सिंह ने कहा कि दोषियों को फाँसी की सज़ा मिलने के बाद कोई और इस तरह का कुकृत्य करने से डरेगा। निर्भया की माँ आशा देवी ने कहा कि दोषियों को सज़ा मिलने से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों बाद उनकी बेटी को न्याय मिला है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से न्यायपालिका में लोगों का विश्वास दृढ़ होगा।

‘माँ’ को छोड़ ‘मर्दानगी’ पर अटके मुनव्वर, ‘मर्दाना कमज़ोरी’ के शर्तिया इलाज के लिए वामपंथियों ने लगाई लाइन

भारत में जब भी हालिया दौर के शेरो-शायरी की बातें होती हैं तो राहत इंदौरी और मुनव्वर राना की चर्चा ज़रूर होती है। दोनों पिछले कई दशकों से देश-विदेश में घूम कर कई मंचों से अपना हुनर पेश कर चुके हैं। अब जब भारत में नरेंद्र मोदी की सरकार दोबारा लौट कर आई है, दोनों के ही अंदर छिपा ‘मुसलमान’ बाहर आ गया है। और वो ‘डर का माहौल’ वाले समूह के मार्गदर्शक मंडल में शामिल हो गए हैं। अब इस उम्र में दोनों को वामपंथी तवज्जो देने से तो रहे, इसीलिए उनकी सेवाएँ मार्गदर्शक मंडल से ही ली जा रही हैं।

जहाँ इंदौरी ने अपना पूरा जीवन ‘बाप-बाप’ करते हुए गुज़ार दिया, राना विभिन्न मंचों से ‘माँ-माँ’ चिल्लाते हुए दिखे। जनता ने रात इंदौरी को बता दिया है कि ये किसके ‘बाप का हिंदुस्तान’ है, लेकिन मुनव्वर राना को उतनी तवज्जो नहीं दी गई। अपने आप को इंदौरी से पिछड़ना उन्हें कभी मंजूर नहीं रहा है, ऐसा वो कई बार स्वीकार भी कर चुके हैं। ऐसे में, भला वो यहाँ भी कैसे पीछे रहते। मुनव्वर राना ने ‘माँ से लेकर नामर्द तक’ का सफर तय करते हुए बता दिया कि उनकी शायरी का स्तर कहाँ जा पहुँचा है, ये देखिए:

अगर दंगाइयों पर तेरा कोई बस नहीं चलता,
तो फिर सुन ले हुकूमत, हम तुझे नामर्द कहते हैं।

इसमें कोई शक की बात नहीं है कि इस शेर में ताज़ा जेएनयू हिंसा के सम्बन्ध में बात की जा रही है। मुनव्वर राना इल्ज़ाम लगा रहे हैं कि केंद्र सरकार, मोदी के नेतृत्व वाली सरकार, दंगाइयों और उपद्रवियों से निपटने में नाकाम सिद्ध हो रही है। मुनव्वर राना का एक वीडियो भी आया है, जिसमें वो छाती ठोकते हुए इस शेर को पढ़ते दिख रहे हैं। उनकी आदत रही है कि जब वो एक शब्द को पकड़ते हैं तो उसे सालों नहीं छोड़ते। वैसे अब उन्हें अपने शेर भी याद नहीं रहते और मंच से लोग बार-बार याद दिलाते हैं, तब जाकर वो आधा-अधूरा कुछ पढ़ पाते हैं।

अब उनकी डिक्शनरी में ‘नामर्द’ शब्द आया है तो ये भी लम्बा चलेगा, ऐसा प्रतीत होता है। मुनव्वर राना कहते हैं कि वो ऐसा ही हिंदुस्तान देखना चाहते हैं, जैसा उन्होंने पैदा होने के समय देखा था। अब 1952 में उन्होंने पैदा होते ही कैसा हिंदुस्तान देख लिया था, ये तो नहीं पता, लेकिन उस समय इतना ज़रूर था कि अधिकतर स्वतंत्रता सेनानी देश के मार्गदर्शन के लिए ज़िंदा थे और उस साल हुए चुनाव में देश ने सत्ता की बागडोर कॉन्ग्रेस को थमाई थी। पैदा होते ही देश के हालात भाँपने की मुनव्वर वाली क्षमता शायद औरों में नहीं हो।

आश्चर्य नहीं होना चाहिए अगर ‘अपने अंदर के मुसलमान’ का इशारा पाकर राहत इंदौरी कल को राजीव चौक के किसी मेट्रो पिलर के नीचे बैठ कर ‘मर्दानगी की दवा’ बेचते हुए दिखें। आधुनिकता के झंडाबरदार तो ‘मर्दानगी’ को ‘पुरुष तानाशाही’ का प्रतीक मानते हैं, फिर ‘मर्द’ होना मुनव्वर राना जैसे वरिष्ठ शायर की नज़र में गर्व की बात कब से हो गई? और किस मेडिकल संस्थान द्वारा चेक किया जाएगा कि हुकूमत ‘मर्द’ है या फिर ‘नामर्द’? क्या मुनव्वर राना ख़ुद अपने ‘उपकरणों’ का प्रयोग कर के सर्टिफिकेट देंगे कि कौन ‘मर्द’ है और कौन ‘नामर्द’? मुनव्वर राना के अंदर के ‘मुसलमान’ का एक और शेर देखिए;

हमारे जैसे वफ़ादार कम ही निकलेंगे,
ज़मीन खोद के देखो तो हम ही निकलेंगे।

यहाँ मुनव्वर राना ये संकेत दे रहे हैं कि मुस्लिमों में दफनाने का रिवाज है, हिन्दुओं की तरह जलाने का नहीं, इसीलिए वो देश की मिट्टी में मिले हुए हैं, ज़्यादा वफ़ादार हैं। हिन्दुओं में जलाने का रिवाज है। मृत शरीर राख हो जाता है। राख मिट्टी में मिल जाता है। जलने से धुआँ होता है, जो हवा में मिल जाता है। हड्डियाँ पवित्र नदियों में बहाई जाती हैं। तो क्या अब कल को कोई हिन्दू शायर कह दे कि जल-थल-नभ में हम ही मिलेंगे, तो मुनव्वर जैसे शायर उसे सांप्रदायिक ठहरा देंगे। क्या अब वफादारी का फ़ैसला इसी आधार पर होगा कि किसको जलाया जाता है और किसको दफनाया जाता है? मुन्नवर राना के जवाब में कोई केंचुआ शायर कुछ यूँ शेर पढ़ सकता है:

तुम मिट्टी में दफ़न हो कर भी वफ़ादार हो गए,
आधी मिट्टी हमारी टट्टी है, हम कैसे बेकार हो गए?

इस हिसाब से केंचुआ तो इस देश का सबसे बड़ा वफादार हुआ क्योंकि उसकी टट्टी मिट्टी को उपजाऊ बनाती है, उसमें फसलें उपजती हैं और वही अन्न हमारी थालियों में आता है। मुनव्वर राना ने अब जब ‘मर्दानगी’ की बातें कर ही दी है और हमारे ‘सटायर विभाग’ के सूत्रों ने इसकी भी पुष्टि कर दी है कि वो जल्द ही ‘मर्दानगी’ वाली एक क्लिनिक खोलने वाले हैं, जिसका नाम होगा- ‘मुनव्वर की मर्दानगी क्लिनिक’। इसमें वो ‘मर्दानगी’ की दवाएँ देंगे और जाँच कर के बताएँगे कि कौन ‘मर्द’ है और कौन ‘नामर्द’। उनकी इस क्लिनिक में राहत इंदौरी की भी फंडिंग होगी। इसमें वामपंथियों का ‘इलाज’ मुफ़्त में किया जाएगा। हर बृहस्पतिवार को राना लाल कुआँ स्थित अपने तम्बू में भी मिलेंगे।

जाते-जाते एक और बात का जिक्र करना आवश्यक है। मुनव्वर राना ने दंगाइयों के ख़िलाफ़ कार्रवाई न करने का आरोप लगा कर केंद्र सरकार को ‘नामर्द’ का तमगा दे दिया। जब यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार दंगाइयों से सख्ती से निपटती है तो यही मुनव्वर राना सबसे पहले बिलबिलाते हुए बिल से निकलते हैं। उपद्रवियों द्वारा फेंके गए एक-एक पत्थर का हिसाब लेने वाली यूपी की भाजपा सरकार की उन्होंने इसीलिए आलोचना की, क्योंकि वो दंगाइयों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रही है। यानी, सरकार दंगाइयों को छोड़ दे तो दिक्कत और उन पर कार्रवाई करे तो दिक्कत। मुनव्वर का ये शेर देखिए:

हमारे कासा-ए-सर को ना रौंदो इस तरह भाई,
हमारा बाप तुम लोगों की दस्तारें बनाता था।
मुसाहिब की सफ़ों में भी मेरी गिनती नहीं होती,
यही वो मुल्क है जिसकी मैं सरकारें बनाता था।

मुनव्वर राना ने ये शेर तब ट्वीट किया था, जब योगी सरकार चुन-चुन कर दंगाइयों से सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई करवा रही थी। वैसे भी, मार्गदर्शक मंडल में बयान देना, ट्वीट करना और शेरो-शायरी करने से ज्यादा कोई काम होता नहीं। फ़िलहाल हम ये पुष्टि करने में जुटे हैं कि ‘मुनव्वर की मर्दानगी क्लिनिक’ का फी कितना होगा क्योंकि इस सूचना के बाद कई वामपंथियों ने ‘ऑपइंडिया व्यंग्य विभाग’ को कॉल कर के इस बारे में जानकारी चाही है।