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तृप्ति देसाई का सबरीमाला में घुसना बड़ी साज़िश: वामपंथी मंत्री ने कहा- एक्टिविस्ट पर हमला ड्रामा

केरल सरकार ने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने का प्रयास करने वाली महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी लेने से इनकार कर दिया था। इस कारण सीपीआई पोलित ब्यूरो की बैठक में मुख्यमंत्री पिनरई विजयन को अन्य वामपंथी नेताओं का कोपभाजन बनना पड़ा था। बाद में सरकार ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के हिसाब से सभी काम किए जाएँगे। अब केरल सरकार के मंत्री का बड़ा बयान आया है। केरल देवस्वोम बोर्ड के मंत्री कदकामपल्ली सुरेंद्रन ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के लिए आंदोलन चला रहीं तृप्ति देसाई पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि तृप्ति देसाई और उनके नेतृत्व वाला गैंग केरल में शांति-व्यवस्था भंग करना चाहता है।

केरल के मंत्री ने कहा कि तृप्ति देसाई के आंदोलन के पीछे एक बहुत बड़ी साज़िश है। उन्होंने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने के लिए हंगामा करने वाली अन्य महिलाओं पर भी गंभीर आरोप लगाए। सुरेंद्रन केरल के पर्यटन मंत्री भी हैं। उन्होंने एक्टिविस्ट बिंदु अम्मिणी पर हुए हमले को भी एक साज़िश करार दिया। उन्होंने कहा कि ये सब पूर्व-नियोजित ड्रामा था। बता दें कि बिंदु सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने के लिए जा रही थीं, तभी किसी व्यक्ति ने उनपर मिर्ची स्प्रे से हमला कर दिया था। केरल के मंत्री ने इसे नाटक करार दिया।

वामपंथी मंत्री ने कहा कि शांति-व्यवस्था भंग करने की इन कोशिशों को केरल सरकार सफल नहीं होने देगी। उन्होंने साफ़ कर दिया कि अगर कोई महिला सबरीमाला में जबरन प्रवेश करना चाहती हैं तो सरकार उसे कोई स्पेशल प्रोटेक्शन नहीं देगी। मंगलवार (नवंबर 26, 2019) को देसाई सहित 5 अन्य महिलाओं ने सबरीमाला मंदिर के भीतर घुसने की फिर से चेष्टा की।

तृप्ति देसाई सहित 6 महिलाएँ कोच्चि सिटी पुलिस कमिश्नर के ऑफिस में काफ़ी देर तक बैठी रहीं। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर लगी रोक को हटा दिया था। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भारी विरोध-प्रदर्शन किया। वामपंथी सरकार की पुलिस द्वारा श्रद्धालुओं की पिटाई की कई घटनाएँ सामने आईं। सुप्रीम कोर्ट में कई समीक्षा याचिकाएँ दाखिल की गईं। इन याचिकाओं पर अब सुप्रीम कोर्ट की 7 सदस्यीय पीठ सुनवाई करेगी।

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिया इस्तीफा, डिप्टी CM अजित पवार ने भी पद छोड़ा

महाराष्ट्र में पल-पल बदल रही राजनीतिक गतिविधियों के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ख़ुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के मीडिया को सम्बोधित किया। 2-4 मिनट के संबोधन के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया।

फडणवीस ने कहा कि जनता ने गठबंधन को बहुमत दिया लेकिन शिवसेना ऐसी बात पर अड़ी रही, जिसकी कोई बात ही नहीं हुई थी। शिवसेना को लगा कि उसके पास संख्या बल इतना है, जिससे वो मोलभाव कर सके। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने चुनाव के पहले और बाद में हर इंटरव्यू में बताया कि भाजपा का सीएम होगा। फडणवीस ने कहा कि भाजपा का ये मत था कि जो तय नहीं हुआ, वो नहीं दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना ने भाजपा के बजाय एनसीपी से बात शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि मातोश्री से न निकलने वाले लोग वहाँ से बाहर जाकर होटलों में बातचीत कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि संख्या बल न होने के कारण राज्यपाल के बुलावे के बावजूद भाजपा ने सरकार बनाने से इनकार कर दिया क्योंकि संख्याबल नहीं था। इसके बाद शिवसेना को आमंत्रित किया गया लेकिन उन्होंने ज्यादा समय माँगा। एनसीपी ने भी कुछ ऐसा ही किया। उन्होंने कहा कि तीन ऐसी पार्टियाँ साथ आ गई हैं, जिनकी विचारधारा में कोई मेल नहीं है। उनका ‘कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ एक ही था- भाजपा को सत्ता से बाहर रखना। उनके पास इसके अलावा कोई प्रोग्राम नहीं था। देवेंद्र फडणवीस ने कहा-

“एनसीपी के कुछ नेता हमारे साथ चर्चा में आएँ और उन्होंने हमे समर्थन पत्र दिया, जिसके आधार पर हमने सरकार बनाई। अब हमारे पास बहुमत नहीं है। अजित पवार ने इस्तीफा दे दिया है। हम भी कोई हॉर्स ट्रेडिंग नहीं करेंगे और मैं भी इस्तीफा दूँगा। “

इससे पहले उप-मुख्यमंत्री अजित पवार की इस्तीफे की ख़बर आई। एनसीपी नेता जयंत पाटिल ने कहा कि उन्हें मीडिया के के माध्यम से ये बातें पता चली हैं और वो पूरी जानकारी लेने के बाद ही इसपर टिप्पणी करेंगे। हालाँकि, अजित पवार के बेटे पार्थ पवार ने अपने पिता के इस्तीफे की ख़बरों को नकार दिया।

संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चैंबर में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाक़ात की। भाजपा नेता राम माधव ने ग्रैंड हयात होटल में एनसीपी, शिवसेना और भाजपा के शक्ति प्रदर्शन पर तंज कसते हुए कहा कि बहुमत होटलों में या अन्य जगहों पर नहीं बल्कि सदन के फ्लोर पर साबित किया जाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा बहुमत साबित कर देगी और इसे लेकर वो आश्वस्त हैं। उधर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि अजित पवार अपने गुट के विधायक लेकर आएँगे और भाजपा आसानी से बहुमत साबित कर देगी।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि देवेंद्र फडणवीस बुधवार (नवंबर 27, 2019) को सदन में बहुमत साबित करें। साथ ही पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने का भी आदेश दिया गया है। शिवसेना नेता संजय राउत का कहना है कि उनकी पार्टी 30 मिनट के भीतर बहुमत साबित कर के दिखा देगी।

अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा, बेटे ने मीडिया रिपोर्ट्स को नकारा

‘अजित पवार की बगावत बालू पर गधे के मूतने पर हुई गंदगी जैसी हो गई है’

अब साल भर तक सरकारी घर में रह सकेंगे वीरगति प्राप्त सैनिकों के परिवार

युद्ध में या जिहादियों के साथ मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त होने वाले सैनिकों के परिजनों के लिए सरकारी आवास रखने की समय सीमा को रक्षा मंत्रालय ने बढ़ाकर एक साल तक कर दिया है। इसके पहले यह समय सीमा महज़ तीन महीने की थी। इससे संबंधित प्रस्ताव को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंज़ूरी दे दी है।

रक्षा मंत्रालय ने आज (मंगलवार, 26 नवंबर, 2019 को) ट्वीट कर इस बारे में जानकारी दी है। यह निर्णय थलसेना के अलावा नौसेना (नेवी) और वायुसेना पर भी लागू होगा।

ट्विटर पर मंत्रालय ने यह भी बताया कि यह निर्णय सैन्य बलों की माँग और ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इसके अलावा यह भी बताया है कि यह कदम सैनिकों के मनोबल में बढ़ोतरी के लिए उठाया गया है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के उनसे बात करते हुए कहा कि यह निर्णय केवल मनोबल में बढ़ोतरी से ही नहीं जुड़ा है, बल्कि परिवार की आय के मुख्य स्रोत रहे इंसान की मौत के बाद इतनी जल्दी मकान बदल पाना कई बार बेहद मुश्किल भी हो जाता है।

‘प्रियंका गाँधी हमारी नेता, लेकिन वह हमारे खिलाफ ऑर्डर नहीं दे सकतीं, हमने पूरा जीवन कॉन्ग्रेस को दिया है’

कॉन्ग्रेस पार्टी की अंदरूनी राजनीति और फूट अब सड़क पर आने लगी है। उत्तर प्रदेश में रविवार को कॉन्ग्रेस पार्टी के 11 बुज़ुर्ग नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। अनुशासनहीनता के आरोप में निकाले गए इन नेताओं में एक नाम 87 वर्षीय रामकृष्ण द्विवेदी का भी है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के करीबी रह चुके द्विवेदी को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से 6 साल के लिए निकाल दिया गया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इन सभी बुज़ुर्ग नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाने का यह फैसला प्रियंका गाँधी के इशारों पर लिया गया है। इन बुज़ुर्ग नेताओं पर आरोप है कि इन्होंने सार्वजानिक रूप से अपनी ही पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व की साख पर बट्टा लगाने का काम किया है। इसके अलावा उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों, अलग से मीटिंग कराने और पार्टी लाइन का विरोध करने के आरोप लगे हैं।

कॉन्ग्रेस से निकाले गए बुज़ुर्ग नेताओं में पूर्व सांसद संतोष सिंह, पूर्व एमएलसी सिराज मेहँदी, यूपी के पूर्व गृहमंत्री रामकृष्ण द्विवेदी, पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी, ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमिटी के मेम्बर राजेन्द्र सिंह सोलंकी, पूर्व विधायक भूधर नारायण मिश्रा, पूर्व विधायक नेकचन्द्र पाण्डेय, पूर्व विधायक हाफ़िज़ मोहम्मद उमर, पूर्व विधायक विनोद चौधरी, यूथ कॉन्ग्रेस के स्पीकर रहे स्वयं प्रकाश गोस्वामी और गोरखपुर के पूर्व जिलाध्यक्ष संजीव सिंह शामिल हैं।

इन नेताओं को पहले उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी की ओर से नोटिस भी दिया गया था। राज्य की कॉन्ग्रेस इकाई में प्रियंका गाँधी द्वारा पुराने नेताओं की जगह नए नेताओं को स्थापित करने के निर्णय से ये नेता नाराज़ चल रहे थे। बता दें कि पुराने नेताओं ने राज्य में अजय लल्लू को कॉन्ग्रेस चीफ बनाए जाने पर भी नाराजगी जताई थी।

एक प्रेस कांफ्रेंस में अपनी बात रखते हुए इन बुज़ुर्ग नेताओं ने खुद को पार्टी से किनारे किए जाने की बात कहते हुए खेद व्यक्त किया। इस दौरान अपनी बात रखते हुए रामकृष्ण द्विवेदी ने कहा कि पार्टी के संविधान के मुतबिक हमारा निलंबन अवैध और निंदनीय है। उन्होंने आगे कहा कि प्रियंका हमारी नेता हैं मगर वह भी हमारे खिलाफ यूपीसीसी को कार्रवाई करने का ऑर्डर नहीं दे सकतीं। एक ज़माने में इंदिरा गाँधी के विश्वासपात्र रहे द्विवेदी ने गोरखपुर की मनीराम सीट पर हुए एक उप-चुनाव में मुख्यमंत्री कैंडिडेट त्रिभुवन नारायण सिंह को भारी मतों से पराजित किया था।

पार्टी से अलग बैठक रखने के आरोप पर द्विवेदी ने कहा कि राज्य में प्रियंका गाँधी का नियुक्त किया हुआ नेतृत्व उनकी उपेक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा, “प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को श्रद्धान्जलि अर्पित करने के लिए हम गोमती नगर में इकट्ठा हुए थे। इस दिन पार्टी ने राज्य के मुख्यालय में कार्यक्रम रखा था। पार्टी के दफ्तर पर तो हमारी उपेक्षा ही होती है इसलिए हम अलग से मिले भी तो इसी बात पर चर्चा हुई कि कैसे पार्टी को मजबूती प्रदान की जाए।”

उन्होंने आगे कहा कि हम बागी नहीं हैं, मगर यह सच है कि निजी हितों को साध रहे कई नेता इस संगठन को डुबाने में लगे हुए हैं। पार्टी के दावे के उलट द्विवेदी ने कहा कि उन्हें अब तक ऐसा कोई नोटिस पार्टी की ओर से नहीं मिला है, जिसका उन्हें 24 घंटे में जवाब देना हो।

निष्कासित किए गए अन्य नेताओं ने भी पार्टी की ओर से लिए गए इस फैसले पर अपनी नाराज़गी जताई है। मामले पर बोलते हुए पूर्व विधायक भूधर नारायण मिश्रा ने कहा कि पार्टी में वरिष्ठ लोग नए नेतृत्व द्वारा अपनी उपेक्षा से परेशान हैं और यह मीटिंग में भी साफ़ झलक रहा है। वहीं एक अन्य निष्कासित बुज़ुर्ग नेता और सांसद रह चुके संतोष सिंह ने कहा कि वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेताओं में किसी तरीके से भी असुरक्षा का भाव बिलकुल भी नहीं है।

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संविधान दिवस पर कॉन्ग्रेस ने राष्ट्रपति के अभिभाषण का किया बहिष्कार

संविधान दिवस के 70वीं वर्षगाँठ के अवसर पर मंगलवार (नवंबर 26, 2019) को लोकसभा के केंद्रीय हॉल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला आदि ने इसमें हिस्सा लिया। इस अवसर पर पीएम मोदी और राष्ट्रपति कोविंद ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया।

कॉन्ग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने संविधान दिवस के मौके पर सरकार की तरफ से बुलाई गई संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक और राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार किया। उन्होंने संसद परिसर में भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष प्रदर्शन किया।

संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने इस कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण के साथ की। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, “हमारा संविधान वैश्विक लोकतंत्र की सर्वोत्कृष्ट उपलब्धि है। यह न केवल अधिकारों के प्रति सजग रखता है, बल्कि हमारे कर्तव्यों के प्रति जागरूक भी बनाता है।” उन्होंने कहा कि संविधान ने नागरिक की गरिमा (Dignity) और संपूर्ण भारत के लिए एकता और अखंडता (Unity for India) को अक्षुण्ण रखा है। इन्हीं दो मंत्रों ने भारत के संविधान को साकार किया है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, “हमारे संविधान में भारतीय लोकतंत्र का दिल धड़कता है। इस जीवंतता को बनाए रखने के लिए संशोधनों का भी प्रावधान किया गया है। 17वीं लोकसभा में 78 महिला सांसदों का चुना जाना हमारे लोकतंत्र की गौरवपूर्ण उपलब्धि है। यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन है।”

इधर, विपक्षी दलों ने महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति पर विरोध जताते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या बताया। विरोध प्रदर्शन में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह भी शामिल हुए। बता दें कि महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव के बाद राजनीतिक परिदृश्य से लंबे समय तक लापता रहने के बाद राहुल गाँधी कल (नवंबर 25, 2019) संसद के शीतकालीन सत्र के छठे दिन लोकसभा में पहुँचे थे। इस दौरान जब राहुल गाँधी का नाम प्रश्न पूछने के लिए पुकारा गया तो पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने सवाल पूछने से इनकार करते हुए कहा था कि महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या हुई है, ऐसे में उनके सवाल पूछने का कोई मतलब नहीं है।

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‘अजित पवार की बगावत बालू पर गधे के मूतने पर हुई गंदगी जैसी हो गई है’

महाराष्ट्र की सत्ता हाथ से जाती देख कर बौखलाई शिव सेना की हताशा उसके मुखपत्र सामना के सम्पादकीय में छलक रही है। पूर्व में साथी रही भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तो सामना के निशाने पर थे ही, अब शिव सेना ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर भी हमले को धार देना शुरू कर दिया है। आज के सम्पादकीय में उन पर शिव सेना ने आरोप लगाया है कि गवर्नर ने यह जानते हुए कि अजित पवार ने कथित तौर पर नकली हस्ताक्षर वाला समर्थन पत्र सौंपा है, राज्यपाल ने उसे स्वीकार कर लिया था।

इसके अलावा गवर्नर और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी की तुलना क्रान्तिकारी भगत सिंह से करते हुए शिव सेना ने सामना में कहा है कि एक भगत सिंह (क्रांतिकारी) देश के लिए फाँसी पर चढ़ गए और दूसरे “भगत सिंह (कोश्यारी) के हस्ताक्षर से रात के अंधेरे में लोकतंत्र और आजादी को वध स्तंभ पर चढ़ा दिया गया।” गौरतलब है कि सामना के प्रमुख सम्पादक शिव सेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और कार्यकारी सम्पादक शिव सेना के राजयसभा सांसद और प्रवक्ता संजय राउत हैं।

यही नहीं, सामना में अजित पवार पर हमला करने के लिए शरद पवार की तारीफ में भी कसीदे पढ़े गए हैं। उनके कॉन्ग्रेस छोड़ने, नई पार्टी बनाने और संसदीय राजनीति में 50 साल तक टिके रहने की तारीफ करने के अलावा लेख में कहा गया है, “कई गर्मियां-बरसात और तूफान झेलकर वे खड़े रहे। लेकिन भाजपा द्वारा मुकदमा दायर करते ही और ‘ईडी’ के नाम पर ब्लैकमेल करते ही अजीत पवार ने शरद पवार की राजनीतिक इस्टेट में सेंध लगा दी और वहां का माल चुराकर वे भाजपा के खेमे में चले गए।”

इसके पहले कल भी अजित पवार और भाजपा पर हमलावर होते हुए शिव सेना ने सामना में लिखा था कि अजित पवार की यह कथित बगावत बालू पर गधे के मूतने पर हुई गंदगी जैसी हो गई है। महाराष्ट्र में जो कुछ हो रहा है उसे ‘नाटक’ कहना रंगमंच का अपमान है। पहले उन्होंने (बीजेपी) शिवसेना जैसा मित्र खो दिया और अब वे शातिर चोर की तरह रात के अंधेरे में अपराध कर रहे हैं।

इसी लेख में अजित पवार की तुलना गधे के अलावा भैंसे से करते हुए कहा गया था, “अजित पवार के रूप में उन्होंने एक भैंसे को अपने बाड़े में लाकर बाँध दिया है और भैंसे से दूध दुहने के लिए ‘ऑपरेशन कमल’ योजना बनाई है। यही लोग सत्ता ही उद्देश्य नहीं है, ऐसा प्रवचन झाड़ते हुए नैतिकता बघार रहे थे। अब तुम्हारे पास बहुमत है ये देखकर ही राज्यपाल ने शपथ दिलाई है, ऐसा तुम कह रहे हो न? तो फिर ‘ऑपरेशन कमल’ जैसी ‘उठाईगिरी’ क्यों? हम उन्हें इस उठाईगिरी और भैंसागिरी के लिए शुभकामनाएँ देते हैं।”

उसमें यह भी था कि भाजपा के साथ जाकर अजित पवार ने राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस के विधायकों को फँसाया है। भाजपा ने अजित पवार को फँसाया और सबने मिलकर महाराष्ट्र को फँसाया। इस धोखाधड़ी में राजभवन का दुरुपयोग हुआ।

अयोध्या में राम मंदिर: पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करेगा सुन्नी वक्फ बोर्ड, 6-1 से लिया फैसला

अयोध्या भूमि विवाद में नौ नवंबर को आए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के खिलाफ सुन्नी वक्फ बोर्ड पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करेगा। लखनऊ में मंगलवार (नवंबर 26, 2019) को हुई बोर्ड की बैठक में यह फैसला किया गया। 6 सदस्य फैसले के समर्थन में थे, जबकि एकमात्र सदस्य अब्दुल रज्जाक ने इसका विरोध किया। एक अन्य सदस्य बैठक में मौजूद नहीं थे।

सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि रामलला को सौंपते हुए मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में मुस्लिम पक्ष को कहीं और पॉंच एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश दिय केंद्र सरकार को दिया था। सुन्नी वक्फ बोर्ड की बैठक में मस्जिद के लिए जमीन कबूल करने के संबंध में कोई फैसला नहीं हो पाया है। इसकी पुष्टि खुद अब्दुल रज्जाक खान ने की। उन्होंने कहा कि इस संबंध में बोर्ड की अगली बैठक में विचार किया जाएगा। हालाँकि कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बोर्ड जमीन लेगा लेकिन वहाँ मस्जिद की बजाय इस्लामिक यूनिवर्सिटी बनेगी।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड कई मौकों पर पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करने की बात कह चुका है। हालॉंकि आखिरी फैसला आज की बैठक में होने की बात कही गई थी। पिछली बैठक में बोर्ड के दो सदस्यों ने पु​नर्विचार याचिका दाखिल करने का समर्थन किया था। बोर्ड की बैठक से पहले जानी-मानी 100 मुस्लिम हस्तियों ने रिव्यू पीटिशन नहीं दाखिल करने अपील की थी। इनलोगों का कहना था कि पुनर्विचार दायर करना विवाद को जिंदा रखेगा और मुस्लिम समुदाय को नुकसान पहुँचाएगा।

सुन्नी वक्फ बोर्ड और इकबाल अंसारी इस मामले के दो मुख्य मुस्लिम पक्ष थे। अंसारी भी पुनर्विचार याचिका दाखिल करने से इनकार कर चुके हैं। लेकिन, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का फैसला किया है।

अयोध्या में राम मंदिर: 75 साल बाद वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों से हटेगा बाबरी मस्जिद का नाम

‘शरीयत के ख़िलाफ़ है सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला, मुस्लिम समर्थन भी करें तो फर्क़ नहीं पड़ता’

अयोध्या अधिनियम 1993 की वो धारा, जिसके तहत बनेगा राम मंदिर के लिए ट्रस्ट

अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा, बेटे ने मीडिया रिपोर्ट्स को नकारा

महाराष्ट्र की राजनीति में उठा-पटक अब फिर से चालू हो गई है। हाल ही में शपथ लेकर उप-मुख्यमंत्री पद संभालने वाले NCP नेता अजित पवार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कहा जा रहा है उनकी पार्टी के नेता काफी समय से उन पर इस फैसले को लेने का दबाव बना रहे थे।

ताजा जानकारी के अनुसार उन्होंने सीएम देवेंद्र फडणवीस को अपना इस्तीफा सौंपा है। इसके अलावा देवेंद्र फडणवीस भी दोपहर 3:30 बजे मीडिया से बात करने वाले हैं। कहा जा रहा है कि इस दौरान खुद देवेंद्र फडणवीस पद से इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं। बता दें कि आज सुबह से ही अजित पवार को लेकर कयास लगने लगे थे।

NCP के जयंत पाटिल की मानें तो अजित पवार के इस्तीफे से संबंधित खबर का उन्हें पता नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्हें यह खबर मीडिया से मिली है।

पिता (अजित पवार) के इस्तीफे की मीडिया रिपोर्ट्स को बेटे ने नकार दिया

इससे पहले के घटनाक्रम को देखें तो महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और एनसीपी के अजित पवार अपनी पार्टी से बगावत कर के उप-मुख्यमंत्री बने। अजित को मनाने के लिए शरद पवार ने अपने विश्वस्त क्षत्रपों को भेजा लेकिन सब नाकाम हुए। अजित पवार ने सोशल मीडिया पर मिल रही बधाइयों का जवाब देते हुए सबका धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि पूरे 5 साल सरकार चलेगी। हालाँकि, एनसीपी ने उन्हें विधायक दल का नेता पद से तो हटा दिया है लेकिन पार्टी से नहीं निकाला है।

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राजस्थान में क्यों नहीं याद आया संविधान: BSP ने कॉन्ग्रेस पर साधा निशाना

देश आज 70वाँ सविधान दिवस मना रहा है। इस अवसर पर मंगलवार (नवंबर 26, 2019) को लोकसभा के केंद्रीय हॉल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। मगर कॉन्ग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने मंगलवार को संविधान दिवस के मौके पर सरकार की तरफ से बुलाए गए संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक और राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार किया। और साथ ही संसद परिसर में भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष प्रदर्शन भी किया। 

अब कॉन्ग्रेस के इस रवैये पर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के सांसद मलूक नागर ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस को महाराष्ट्र के मुद्दे पर दिक्कत हो रही है। इसीलिए उन्हें बार-बार सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ रहा है। लेकिन उनको शायद याद नहीं है कि राजस्थान में सहयोगी पार्टी होने के बावजूद बसपा के सभी विधायकों को उन्होंने तोड़ लिया था, तब उन्हें संविधान की याद नहीं आ रही थी।”

दरअसल कुछ दिनों पहले ही राजस्थान में बसपा के सभी 6 विधायक कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए थे। जिसकी वजह से अशोक गहलोत सरकार को राज्य में पूर्ण बहुमत हासिल हो गया था। कॉन्ग्रेस को इसी घटना की याद दिलाते हुए बसपा सांसद ने निशाने पर लिया।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी कॉन्ग्रेस को निशाने पर लेते हुए ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “संविधान दिवस पर संविधान शिल्पी बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर का केवल नाम जपते रहने से काम नहीं चलेगा, क्योंकि यही छल कॉन्ग्रेस भी करती रही है। केन्द्र व राज्य सरकारों को संविधान की जनहित/जनकल्याण की सही मंशा के हिसाब से पूरी निष्ठा व ईमानदारी से काम करना होगा यही मेरी सलाह है।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियाँ विरोध करते हुए संविधान की रक्षा को लेकर नारेबाजी कर रहे हैं। उनका आरोप है कि महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या हुई है, इसलिए वो इसका विरोध कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना और कॉन्ग्रेस विधान परिषद दल के नेता दीपक सिंह ने विशेष सत्र का बहिष्कार करते हुए कहा कि भाजपा संविधान की हत्या कर रही है। कॉन्ग्रेस संविधान की हत्या करने वालों के साथ खड़ी नहीं हो सकती।

वानखेड़े स्टेडियम में होगा महाराष्ट्र की सत्ता का फाइनल मैच: आज रात BJP का शक्ति प्रदर्शन

महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी भी अपनी ताक़त दिखाएगी। राज्य में हालिया विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी भाजपा ने अपने सभी विधायकों को मंगलवार (नवंबर 26, 2019) रात 9 बजे बुलाया है। महाराष्ट्र का सियासी संग्राम अब होटलों और रिसॉर्ट्स से निकल कर क्रिकेट के मैदान तक पहुँच गया है क्योंकि भाजपा ने अपने शक्ति प्रदर्शन के लिए वानखेड़े स्टेडियम को चुना है। यही वो मैदान है, जहाँ 2011 में भारतीय क्रिकेट टीम ने दूसरी बार विश्वकप जीत कर सचिन तेंदुलकर को अपने कंधे पर उठा कर घुमाया था। बुधवार को फ्लोर टेस्ट से पहले भाजपा अपना आखिरी शक्ति प्रदर्शन यही करेगी।

भाजपा विधायकों के साथ-साथ पार्टी का समर्थन कर रहे निर्दलीय विधायक भी वानखेड़े स्टेडियम बुलाया गया है। ये बैठक स्टेडियम के गरवारे क्लब में होगी। यानी महाराष्ट्र की सत्ता का फाइनल भी वहीं खेले जाने की तैयारी चल रही है, जहाँ भारत ने क्रिकेट वर्ल्ड कप का फाइनल खेल कर जीता था। भाजपा के अंदर भी बैठकों का दौर जारी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद भूपेंद्र यादव समेत कई बड़े नेताओं ने कोर कमिटी की बैठक में हिस्सा लिया।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया है, जिसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सदन में बहुमत साबित करना होगा। उससे पहले सदन के सबसे वरिष्ठतम सदस्य को प्रोटेम स्पीकर चुना जाएगा। शाम 5 बजे तक पूरी प्रक्रिया संपन्न करा ली जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने पूरी प्रकिया की वीडियोग्राफी का भी आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद संसद भवन में भी हलचल देखने को मिली। वहाँ गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रधानमंत्री के चैंबर में नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की।

मंगलवार की रात एनसीपी, कॉन्ग्रेस और शिवसेना का शक्ति प्रदर्शन हुआ था, जहाँ तीनों दलों के विधायकों को सोनिया गाँधी, उद्धव ठाकरे और शरद पवार के नाम पर पार्टी के प्रति निष्ठावान बने रहने की शपथ दिलाई गई। तीनों विपक्षी दलों ने दावा किया कि वहाँ पर उनके 162 विधायक उपस्थित हैं। हालाँकि, भाजपा ने दावा किया कि तीनों दल मिल कर मात्र 125 विधायक ही गिना पाए और वहाँ उपस्थित बाकि लोग विधान पार्षद, सांसद और अन्य नेतागण थे।