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पति दे रहा खुशी-खुशी तलाक, पत्नी करना चाहती है पुराने प्रेमी से शादी

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक अचम्भित कर देने वाले वाकये में एक पति ने अपनी पत्नी को तलाक देने की अर्ज़ी दी है। इसमें अचम्भित कर देने वाली बात यह है कि इस तलाक के पीछे उसकी मंशा है अपनी पत्नी को उसके प्रेमी से मिलाने की, जिससे पत्नी ने रिश्ते सात साल की शादी के दौरान भी कथित तौर पर कायम रखे। पति-पत्नी के दो बच्चे भी हैं, और पति उन्हें भी अपने पास रख कर पालने को तैयार हो गया है। उसने पत्नी को उनसे जब चाहे मिलने देने की बात भी कही है।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति भोपाल के कोलार क्षेत्र का रहने वाला है। उसने फैमिली कोर्ट में कहा है कि उसने पत्नी को मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन पत्नी ज़िद पकड़ कर बैठी है कि उसे अब पति नहीं, प्रेमी के साथ ही रहना है जिससे वह और दूर नहीं रह सकती। मैरिज काउंसिलर के पास जाने का भी कोई फायदा नहीं हुआ है।

पत्नी और उसके प्रेमी का अफ़ेयर शादी के पहले से चल रहा था। उसके पिता अंतर्जातीय विवाह के लिए तैयार नहीं हुए और पत्नी को तथाकथित रूप से मजबूरी में वर्तमान पति से शादी करनी पड़ी। लेकिन, नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद भी दोनों के संबंध बरकरार रहे। इस बीच उसके दो बच्चे भी पैदा हो गए।

जब बच्चे बड़े हुए तो, मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पति-पत्नी के बीच दूरियाँ बढ़ने लगीं और मामला फैमिली कोर्ट पहुँचा, जहाँ दोनों को मैरिज काउंसिलर के पास भेजा गया। इसके बाद पत्नी ने प्रेमी से अपने संबंधों का खुलासा किया, कथित तौर पर पति के साथ रहने से इंकार कर दिया और प्रेमी के साथ जाने की ज़िद पकड़ ली।

इसके बाद पत्नी को हर हालत में खुश देखने की इच्छा का दावा करने वाले पति ने तलाक की अर्ज़ी दे दी है। उसने बच्चों की कस्टडी अपने पास रख कर उनके पालन-पोषण की भी इच्छा जताई है, बावजूद इसके कि पत्नी ने कहा था वह प्रेमी के पास जाते समय बच्चों को अपने साथ ले जाने के लिए राज़ी है।

26/11 पर एक और दहशतगर्दी: J&K में एक ही दिन में 2 धमाके – दो की मौत, 7 घायल

कश्मीर में जिहादियों के आतंक का नंगा नाच रोके नहीं रुक रहा है। दो हफ्ते पहले एक बेकसूर दुकानदार मेहराजुद्दीन की सरेआम बेरहमी से हत्या करने के बाद आज (मंगलवार, 26 नवंबर, 2019 को) उन्होंने घाटी में दो धमाके कर दो लोगों की हत्या कर दी है। साथ ही धमाकों में कई लोग घायल भी हुए हैं। दोनों ही धमाके सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील इलाकों अनंतनाग और राजधानी श्रीनगर में हुए हैं।

अनंतनाग के हाकुरा में हुए धमाके का स्रोत इलाके के ‘बैक टू विलेज’ में फेंका गया ग्रेनेड (हथगोला) बताया जा रहा है। दोनों मौतें इसी धमाके में हुई हैं। मरने वालों में एक सरकारी अधिकारी और एक किसी गाँव का सरपंच बताया जा रहा है। दोनों की पहचान अभी तक जारी नहीं की गई है। इसके अलावा इस धमाके में 4 लोग घायल भी बताए जा रहे हैं

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार धमाके के बाद वहाँ अफ़रा-तफ़री मच गई और पुलिस को आनन-फानन में स्थिति के नियंत्रण के लिए एक टीम वहाँ भेजनी पड़ी। यह धमाका श्रीनगर के हज़रतबल धमाके के बाद हुआ था।

हज़रतबल धमाका केंद्र-शासित प्रदेश की राजधानी श्रीनगर में स्थित कश्मीर यूनिवर्सिटी के परिसर में हुआ था। यह मुस्लिमों के पवित्र स्थल हज़रतबल दरगाह से महज़ 10 मिनट की दूरी पर स्थित है। धमाका हालाँकि कुछ मीडिया रिपोर्टों में ‘कम तीव्रता का’ बताया जा रहा है, लेकिन इसमें भी कई लोग घायल हुए हैं।

इन सभी (और इनके पहले की भी) जिहादी वारदातों में एक समान बात यह है कि इनका मकसद कश्मीर में हालात सामान्य होने न देना है। अनुच्छेद 370 को मोदी सरकार द्वारा निष्प्रभावी कर दिए जाने के बाद से जिहादी और उनके पाकिस्तानी आका इस कोशिश में लगे हैं कि ज़मीनी तौर ओर इसका कोई प्रभाव न पड़े- न जनजीवन सामान्य हो, न व्यापार और अन्य दैनिक गतिविधियाँ चालू हों, और न ही इस हिंसा के डर से बाकी के भारत से लोग वहाँ पर आ पाएँ। इसके पहले मेहराजुद्दीन की हत्या के समय भी सुरक्षा एजेंसियों ने अंदेशा जताया था कि यह हत्या जिहादियों की हड़ताल को अनसुना करने वालों को धमकी के रूप में की गई है।

भारत के किशोर (लड़का-लड़की दोनों) अन्य देशों के मुकाबले ज्यादा सक्रिय: WHO की रिपोर्ट में खुशखबरी

तकनीक की घुसपैठ आज के समय में सबसे बड़ी चिंता का विषय है। इसके बढ़ते प्रभाव के कारण युवाओं की जीवनशैली प्रभावित होती है, शारीरिक सक्रियता कम होती है और मानसिक स्तर पर भी प्रभाव पड़ता है। हालाँकि, इस विषय की गंभीरता पर विश्व के हर कोने में चिंतन-मनन हो रहा है, लेकिन फिर भी इसका समाधान ढूँढ पाना असंभव ही लगता है। इसी बीच वैश्विक स्तर पर भारत के लिए थोड़ी राहत वाली खबर आई है।

दरअसल, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक अध्य्यन में सामने आया है कि भारत के किशोर अन्य देशों के किशोरों की तुलना में अधिक सक्रिय हैं। अध्य्यन ने इस निष्कर्ष के पीछे का कारण बताते हुए स्पष्ट किया कि भारत की लड़कियों का घेरलू कामकाज और लड़कों का क्रिकेट जैसे खेलों पर ध्यान केंद्रित होने की वजह से वे शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय रहते हैं। ये अध्ययन लैंसेट चाइल्ड & एडॉलसेंट हेल्थ जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

यहाँ बता दें कि WHO ने वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर 11 से 17 साल के छात्रों को लेकर इस तरह का पहला अध्य्यन किया है। जिसमें उसने पाया कि एक ओर जहाँ स्वस्थ शरीर के लिए विशेषज्ञ रोजाना कम से कम 60 मिनट व्यायाम, खेलकूद जैसी शारीरिक गतिविधियाँ करने की सलाह देते हैं। तो वहीं, विश्व भर में करीब 80 प्रतिशत स्कूल जाने वाले बच्चे प्रतिदिन 60 मिनट से भी कम समय के लिए शारीरिक गतिविधि करते हैं। इस निराशाजनक आँकड़े में 85 % लड़कियाँ और 78% लड़के शामिल हैं।

प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इस अध्य्यन में पूरे विश्व से 16 लाख बच्चों को शामिल किया गया था। लेकिन निष्कर्षों को देखते हुए WHO को सिफारिश करनी पड़ी कि लोगों को दिन में कम से कम एक घंटा कोई शारीरिक गतिविधि अवश्य ही करनी चाहिए। हालाँकि अध्य्यन की सहलेखिका लिएने रिले ने कहा कि 2001 से 2016 के बीच इस आयु में शारिरिक सक्रियता के मामले में कोई बदलाव नहीं आया। लेकिन आस-पास की स्थिति को देखकर इस तथ्य पर संदेह उत्पन्न होता हैं।

इस अध्य्यन में 2001-16 तक पढ़ाई करने वाले 146 देशों के छात्र-छात्राओं के आँकड़े लिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि टोंगा, समोआ, अफगानिस्तान और जाम्बिया को छोड़कर अन्य देशों में लड़कियाँ लड़कों के मुकाबले कम सक्रिय रहीं।

किशोरों की पर्याप्त सक्रियता के मामले में अमेरिका, बांग्लादेश और भारत का प्रदर्शन बेहतर रहा। अध्ययन के अनुसार भारत और बांग्लादेश में क्रिकेट जैसे खेलों के कारण बच्चे मैदान में जाते हैं और गृह कार्यों में हाथ बँटाने के कारण किशोरियाँ भी इसमें अच्छा प्रदर्शन करती हैं। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘हमारे अध्ययन के अनुसार दोनों देशों में किशोरियों के अपर्याप्त रूप से सक्रिय होने की दर सबसे कम रही। संभवत: इसका कारण सामाजिक कारक हैं, जैसे कि लड़कियों को गृह कार्यों में हाथ बंटाना।”

गौरतलब है कि इस अध्य्यन में फिलीपींस और दक्षिण कोरिया के बच्चे सबसे ज्यादा निष्क्रिय पाए गए। फिलीपींस में 93 फीसदी लड़कों और दक्षिण कोरिया में शोधकर्ताओं को 97 फीसदी लड़कियों में व्यायाम की बेहद कमी दिखाई दी। वहीं उच्च आय वाले यूरोपीय देशों और दक्षिण अफ्रीका के अलावा बड़ी आबादी वाले भारत, अमेरिका और बांग्लादेश में लड़के ज्यादा शारीरिक गतिविधियों वाले मिले। जबकि बांग्लादेश और भारत में लड़कियाँ सबसे ज्यादा सक्रिय दिखीं।

भ्रष्ट अधिकारियों पर पाँचवीं बार गिरी मोदी सरकार की गाज, 21 को जबरन दी गई सेवानिवृत्ति

केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार पर बड़ी चोट की है। सरकार ने 21 भ्रष्ट अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। भ्रष्टाचार में फँसे इन 21 अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए इन अधिकारियों की जबरन सेवानिवृत्ति करवा इन्हें सेवा से मुक्त कर दिया है। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड सीबीडीटी के अनुसार ग्रुप बी के 21 ऐसे अधिकारियों को केंद्र सरकार की नियमावली के नियम 56(जे) के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर भेजा जा रहा है जोकि भ्रष्टाचार या सीबीआई की इन्क्वारी में फँसे हुए हैं अथवा जिन पर जाँच चल रही है।

बता दें कि यह पाँचवाँ राउंड है, जब सरकार द्वारा भ्रष्ट टैक्स अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही सेवा से मुक्त किए गए अधिकारियों की संख्या 85 हो जाएगी, जिनमें 64 टैक्स अधिकारी टॉप ग्रेड से हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों की खबर है कि इस मामले राउंड में मुंबई के ऑफिस से तीन, पास के ही ठाणे जिले से दो टैक्स अफसर शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मुंबई और ठाणे के अलावा सेवानिवृत्ति पर भेजे गए अधिकारियों में विशाखापटनम, हैदराबाद, राजमुंदरी, झारखंड के हजारीबाग, महाराष्ट्र के नागपुर, गुजरात के राजकोट, राजस्थान के माधोपुर, बीकानेर, जोधपुर तथा मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल के अधिकारी भी इस लिस्ट शामिल हैं।

बता दें कि सरकार के इस फैसले को प्रधानमंत्री मोदी के उस कथन से जोड़कर देखा जा रहा है जो उन्होंने लाल किले की प्राचीर से कहा था। पीएम ने अपने संबोधन में कहा था कि “कुछ काले भेड़ प्रशासन में अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं और करदाताओं को परेशान किया जाता रहा है, ऐसे अधिकारियों पर हम कार्रवाई कर उन्हें दंडित करेंगे।”

आधे से ज्यादा टैक्स अधिकारियों को सीबीआई ने रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था। इनमें से एक को तो रंगे हाथ पचास हज़ार की घूस लेते हुए पकड़ा गया था। इससे पहले जून और अगस्त में भी कई अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया था। इन अधिकारियों पर भी भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे थे। इनमें रिश्वत की लेन देन से लेकर क्रिमिनल कांस्पीरेसी जैसे आरोप शामिल थे।

गुड़िया ने गला रेत कर करवाई पति शौकत की हत्या, आशिक इमरान के साथ 5 गिरफ्तार

बिहार के बक्सर जिले में पुलिस ने एक युवक की हत्या का खुलासा करते हुए आरोपित पत्नी और उसके दो प्रेमियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरी घटना बक्सर जिले के औद्योगिक थाना क्षेत्र के अहिरौली बाँध के बधार की है। पुलिस ने सोमवार (नवंबर 25, 2019) की सुबह बधार इलाके में एक युवक का शव बरामद किया। साथ ही घटनास्थल से चाकू भी बरामद किया। पुलिस ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए मृतक की पत्नी सहित पाँच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

मृतक की पहचान भभुआ जिले के शौकत शाह के रूप में हुई है। शौकत शाह की हत्या के आरोप में उसकी पत्नी गुड़िया साह के अलावा इमरान खान, बाबर खान, तवरेज खान और परवेज खान को गिरफ्तार किया गया है। गुड़िया का इमरान खान के अलावा भी एक अन्य के साथ अवैध प्रेम संबंध था। वो दोनों के साथ बातचीत किया करती थी। हालाँकि वो इमरान के साथ शादी करके अलग रहना चाहती थी। इसके बारे में शौकत को पता चल गया था।

वो इस शादी के खिलाफ था। उसने गुड़िया को समझाया-बुझाया भी था और इस बात को लेकर कुछ दिन पहले इमरान और शौकत के बीच लड़ाई भी हुई थी। गुड़िया अपने पति को अपनी राह का रोड़ा मान चुकी थी। शौकत की हत्या करने के बाद वह सोमवार को ही वो प्रेमी के साथ मुंबई भागने की तैयारी में थी। लेकिन स्थानीय लोगों की निशानदेही पर उसे पकड़ लिया गया। थानाध्यक्ष दिनेश कुमार मालाकार ने बताया कि शौकत की पत्नी गुड़िया ने कबूल किया है कि उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर हत्या की साजिश की और फिर प्लानिंग के तहत उसकी हत्या कर दी।

हत्यारों ने पुलिस को बताया कि हत्या की प्लानिंग प्रेमी इमरान ने अपने साथियों के साथ मिलकर की। जिसमें तबरेज खान, परवेज खान व बाबर खान शामिल थे। उन्होंने शौकत को अहरौली बाँध के पास बुलाया और मारपीट करने लगे। उसके बाद चारों उसे बधार में ले गए। जहाँ बाबर ने चाकू निकाला और तबरेज व परवेज ने उसके हाथ पैर पकड़ लिए। इमरान व बाबर ने शौकत का गला रेतना शुरू किया। जिसके बाद उसकी मौत हो गई।

दरअसल जब शौकत अली रविवार (नवंबर 24, 2019) की देर शाम घर नहीं पहुँचा, तो उसकी पत्नी गुड़िया साह ने इसके बारे में ससुराल वालों को बताया। इसके बाद शौकत के पिता पिता शमशाद साह रात में ही बक्सर पहुँचे और इसकी सूचना औद्योगिक थाने की पुलिस को दी। पुलिस ने जब जाँच शुरू किया तो उन्हें गुड़िया पर शक हुआ।

फिर मामले में इमरान खान और बाबर खान को हिरासत में लिया गया। उन दोनों ने पूछताछ में शौकत की हत्या में गुड़िया का हाथ बताया। जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गुड़िया साह, तरवेज और परवेज खान को भी गिरफ्तार कर लिया। एसपी उपेंद्रनाथ वर्मा ने ने इस बात की पुष्टि की है कि पत्नी ने अपने प्रेमियों के साथ मिलकर पति की हत्या कराई है।

बैरंग घर लौटेंगी तृप्ति देसाई, अय्यप्पा स्वामी को चुनौती देने की अकड़ साल भर में दूसरी बार हवा

सबरीमाला के देवता स्वामी अय्यप्पा को चुनौती देने और उनके मंदिर के नियम भंग कर प्रवेश करने का तृप्ति देशाई का मंसूबा एक साल में दूसरी बार धराशायी हो गया है। उन्होंने इसका ठीकरा केरल पुलिस पर कथित तौर पर फोड़ा है और कहा है कि पुलिस उन्हें सुरक्षा नहीं दे रही है। मीडिया खबरों के अनुसार तृप्ति देसाई कोच्चि हवाई अड्डे से अपने गृह नगर पुणे बैरंग लौट रही हैं। इसके पहले आज (मंगलवार, 26 जुलाई, 2019 को) सुबह वे इस घोषणा के साथ कोच्चि पहुँची थीं कि चाहे सुरक्षा मिले या न मिले, वे मंदिर में घुस कर रहेंगी।

उन्होंने यह घोषणा सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के आलोक में की थी, जिसमें पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई ने अपने कार्यकाल के अंतिम मुकदमे में करीब दो हफ्ते पहले सुप्रीम कोर्ट के ही पिछले आदेश को पलट दिया था। उनकी अध्यक्षता में पाँच जजों की बेंच ने अपने सितंबर, 2018 के फैसले पर प्रभावी रूप से रोक लगाते हुए मंदिर की प्रथा को तात्कालिक रूप से बहाल कर दिया था और अंतिम निर्णय के लिए मुकदमे को बड़ी बेंच के पास पास भेज दिया था। गौरतलब है कि प्रथा के अनुसार 10 से 50 वर्ष के आयु वर्ग की (रजस्वला उम्र की) महिलाएँ सबरीमाला के मंदिर में प्रवेश नहीं करती हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि उनकी उपस्थिति से मंदिर के देवता स्वामी अय्यप्पा की नैष्ठिक ब्रह्मचारी साधना में विघ्न पड़ता है।

वहीं तृप्ति देसाई और अन्य नारीवादियों का गिरोह इसे पीरियड्स से जोड़कर महिलाओं के खिलाफ भेदभाव, अन्धविश्वास आदि बताता रहा है। महाराष्ट्र के शनि शिगनापुर में भी आध्यात्मिक कारणों से महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक का अपमान कर मंदिर में जबरन घुस चुकीं तृप्ति ने नवंबर, 2018 में सबरीमाला में जबरन प्रवेश की घोषणा की थी। लेकिन जब वे कोच्चि पहुँचीं, तो उन्हें लोगों के विरोध के कारण वहीं से उलटे पैर लौटना पड़ा था।

सितंबर, 2018 के मंदिर की प्रथा को अमान्य करार देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर की परंपराओं को जबरन तोड़ने के लिए केरल की कम्युनिस्ट राज्य सरकार द्वारा बिंदू और कनकदुर्गा नाम की एक अन्य महिला को सबरीमाला मंदिर में घुसा दिया गया था। वे दोनों कथित तौर पर सीपीएम कार्यकर्ता थीं और उनके साथ पुलिसकर्मी भी थे, जो धर्मस्थल के अंदर सादे कपड़ों में थे। सबरीमाला मंदिर में उपस्थित भक्तों ने आरोप लगाया था कि इन दोनों को इस साल 2 जनवरी को सुबह-सुबह वीआईपी प्रवेश द्वार से चोरी-छिपे आँख बचाकर प्रवेश करवाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला आने के बाद एक बार फिर तृप्ति ने 15 नवंबर को कहा था कि वो 20 नवंबर के बाद सबरीमाला जाएँगी। आज कोच्चि पहुँचने तृप्ति ने कहा था, “हम आज संविधान दिवस पर सबरीमाला मंदिर जाएँगे। हमें मंदिर जाने से न तो राज्य सरकार और न ही पुलिस रोक सकती है। चाहे हमें सुरक्षा मिले या न मिले, हम आज मंदिर जाएँगे।” लेकिन आज भी उनका मंसूबा पिछले नवंबर की तरह अय्यप्पा भक्तों ने पूरा नहीं होने दिया।

लुंगी पहन कर राजस्व दफ़्तर पहुँचा ग्रामीण तो अधिकारियों ने भगाया, कहा- तुम्हारी समस्या नहीं सुनेंगे

बिहार के अररिया में नरपतगंज स्थित मधुरा दक्षिणी प्रखंड के अधिकारी को लुंगी पसंद नहीं आई। उक्त अधिकारी का नाम दिलीप करन है। दरअसल, हुआ यूँ कि एक ग्रामीण किसी कार्य से कचहरी पहुँचा लेकिन अधिकारी दिलीप उसे देख कर आग-बबूला हो गए। उनके गुस्से का कारण ये था कि वो ग्रामीण लुंगी में दफ्तर में घुस गया था। इसे लोग उनकी मनमानी बता कर आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने उस व्यक्ति की समस्या भी नहीं सुनी और उसे फटकार लगाई। इसके बाद उसे अपने कार्यालय से भगा भी दिया गया।

ग्रामीणों ने बताया कि ‘कर्मचारी साहेब’ ने उक्त ग्रामीण से कहा– “हमारे कचहरी में आना हो तो लुंगी पहन कर मत आइए।” इसके बाद अपनी समस्या लेकर आया उक्त व्यक्ति वापस अपने घर लौट गया। इस बाबत सीओ निशांत कुमार को लिखित आवेदन दिया गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस घटना की जानकारी दी गई है। लोगों ने कर्मचारी के इस व्यवहार पर आपत्ति जताई है।

पीड़िता का नाम रामस्वरूप महतो है। वह वह मधुरा दक्षिणी पंचायत के वार्ड संख्या 7 में स्थित कोसी कॉलोनी में रहता है। उसके पिता का नाम गणेश महतो है। वह बुधवार (नवंबर 20, 2019) को अपनी वंशावली सम्बंधित जानकारियाँ निकलवाने के लिए राजस्व कार्यालय गया। वहाँ कर्मचारियों के साथ-साथ कई ‘बाबू’ लोग भी मौजूद थे। पीड़ित की बस इतनी ही ग़लती थी कि वो लुंगी पहन कर वहाँ पहुँच गया था।

उसे लुंगी में देखते राजस्व कार्यालय के अधिकारियों ने फटकार लगाते हुए वापस जाने को कहा। अधिकारियों ने कहा कि वो कपड़े बदल कर आए, तब उसकी समस्या सुनी जाएगी। इस मामले को लेकर अभी तक सीओ की तरफ़ से कोई टिप्पणी नहीं आई है।

…वो शख्स जिसने चूस लिया अजित पवार का पावर: 3 दिन में सरकार गिरने की अंदरुनी कहानी!

महाराष्ट्र के सियासी ड्रामे में एक और नया अध्याय जुड़ गया। जिस अजित पवार के भरोसे पर भाजपा राज्य में अपनी सरकार बनाने का दावा कर रही थी, उन्होंने उप-मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

इससे पहले 24 नवम्बर की सुबह देवेन्द्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। इसी शपथ ग्रहण में अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की भी शपथ ली थी। दूसरी ओर महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए कॉन्ग्रेस, शिवसेना और एनसीपी के बीच भी लम्बे समय से खिचड़ी पाक रही थी।

हालाँकि जब अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो शरद पवार ने खुद को उनके इस फैसले से दूर रखा था। उनको पार्टी से तो नहीं हटाया गया था लेकिन पद से जरूर हटा दिया था। इस राजनीतिक समीकरण के बाद से तीनों पार्टियाँ (शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस) अपने-अपने विधायकों को इकठ्ठा करने में लग गई थीं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के इस सियासी संकट में सबसे हैरान कर देने वाली घटना तब हुई जब सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार सदन में 27 नवम्बर को होने वाले फ्लोर टेस्ट से ठीक एक दिन पहले अजित पवार ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया।

इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 27 नवम्बर को फ्लोर टेस्ट का आदेश आने के बाद अजित पवार ने उनसे खुद संपर्क किया और कहा कि वह इस गठबंधन को आगे अपना समर्थन नहीं दे पाएँगे। इसके बाद ही देवेन्द्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने का निर्णय कर लिया। आने वाले समय में सरकार बनाने वालों को उन्होंने अपनी शुभकामनाएँ दीं। हालाँकि इस दौरान उन्होंने सोनिया गाँधी के नेतृत्व में शपथ ले लेने की ओर इशारा करते हुए शिवसेना पर निशाना भी साधा।

टाइम्स नाउ की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डिप्टी सीएम पद से अजीत पवार के इस्तीफे के पीछे तीन कारण हो सकते हैं। दरअसल अजित को उम्मीद थी कि भाजपा संग उनके गठबंधन को समर्थन देने के लिए कम से कम 30 विधायक ज़रूर साथ होंगे हालाँकि अंत तक उन्हें सिर्फ 12 विधायकों का ही समर्थन मिल सका। इस सियासी घटनाक्रम में धनंजय मुंडे द्वारा यू-टर्न ले लेने से पवार के फैसले पर काफी असर पड़ा। 24 नवम्बर को ही धनंजय मुंडे ने ट्वीट कर यह साफ कर दिया था कि शरद पवार का समर्थन करेंगे।

महाराष्ट्र की सियासत के इन बदलावों के बाद संजय राउत ने कहा है कि अजित पवार शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस गठबंधन के साथ हैं। उन्होंने कहा कि सदन में बहुमत साबित करने के बाद उद्धव ठाकरे पूरे पाँच साल के लिए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिया इस्तीफा, डिप्टी CM अजित पवार ने भी पद छोड़ा

भाजपा को सरकार बनाने से रोकने की वो साजिश जब डिप्टी सीएम को हवाई जहाज पर छापेमारी के लिए भेजा गया

41 सालों में 4 बार CM रहे लेकिन कभी जनता ने शरद पवार को बहुमत नहीं दिया: बोया पेड़ बबूल का…

19 साल बाद बीवी और 4 बच्चों के साथ फिर से हिंदू बना सलीम, पड़ोसी दे रहे जान से मारने की धमकी

उत्तर प्रदेश के शामली में एक युवक ने हिंदू धर्म अपना लिया है। 27 वर्षीय सलीम पत्नी व चार बच्चों के साथ इस्लाम छोड़ हिंदू बना है। इसके बाद से उसे जान से मारने की धमकी मिल रही है। उसने अपने परिवार की सुरक्षा के लिए पुलिस से गुहार लगाई है। पीड़ित की तहरीर के बाद पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।

मामला सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला सरवरपीर का है। दरअसल, सलीम के बचपन का नाम सुशील था। बाद में मुस्लिम धर्म अपना कर वह सलीम बन गया था। उसने बताया कि उसकी पैदाइश हिंदू परिवार में हुई थी। जब वह आठ साल का था तो उसके माता-पिता की मौत हो गई। इसके बाद एक मुस्लिम ट्रक चालक सबदर ने उसका पालन-पोषण किया।

सुशील के मुताबिक सबदर ने उसका धर्म परिवर्तन करा उसे सलीम बना दिया। सबदर ने उसका निकाह भी इस्लामी तरीके से करवाया। सुशील के अनुसार जब उसका धर्म बदला गया तो उसे उतनी समझ नहीं थी। अपने अतीत की जानकारी होने के बाद उसने दोबारा से हिंदू धर्म अपना लिया और सलीम से एक बार फिर सुशील बन गया। लेकिन उसका ऐसा करना पड़ोसियों का नागवार लग रहा है और वे उसे धमकी दे रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पड़ोसी राशिद के खिलाफ उसने पुलिस से शिकायत भी की है। राशिद से पुलिस पूछताछ कर रही है। सीओ सिटी जितेंद कुमार का कहना है कि सलीम ने धर्म परिवर्तन करने को लेकर जानकारी दी थी। उसका आरोप है कि इसके बाद से कुछ लोग उसे अंजाम भुगतने की धमकी दे रहे हैं।

ईसाई स्कूल में जबरन धर्म परिवर्तन, विरोध करने पर वार्डन ने 9वीं के लड़के को इतना मारा कि वो मर गया

मुस्लिमों के ख़ौफ़ से 150 हिन्दू धर्मांतरण और पलायन को मजबूर: रिपोर्ट्स

98 ईसाई आदिवासियों ने पुनः अपनाया हिंदू धर्म, 9 साल पहले प्रलोभन से कराया गया था धर्मान्तरण

6 महीने में 2 करोड़ रुपए की ठगी: बांग्लादेशी सलीम मोहम्मद को CCTV की मदद से पुलिस ने दबोचा

कई व्यापारियों से पैसा ऐंठने के आरोप में कोलकाता पुलिस ने बांग्लादेश के सलीम मोहम्मद को रविवार को गिरफ्तार कर लिया। दरअसल आरोपित सलीम पिछले कई महीनों से शहर की बुर्राबाज़ार, न्यू मार्केट समेत कई बाजारों की दुकानों के मालिकों से ठगी कर पैसे लूट रहा था। पुलिस को जब पैसा लूटे जाने की इन घटनाओं की खबर मिली तो उनका पहला शक बांग्लादेशी मूल के सलीम मोहम्मद पर ही गया।

मामले की जाँच करते हुए जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को खंगालना शुरू किया तो उनका शक यकीन में बदल गया। कुछ ही दिन पहले पुलिस ने फुटेज खंगालते वक़्त देखा कि दो अलग-अलग घटनाओं के दौरान आरोपित शख्स ने दो व्यापारियों को अपनी ठगी का शिकार बनाया। इसी के बाद पुलिस ने सलीम को कोलकाता के बो-बाज़ार के एक होटल से धर लिया।

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो पुलिस के सूत्रों के मुताबिक सलीम ने अपनी इस करतूत को अजमाते हुए पिछले छः महीने में करीब दो करोड़ रुपए जमा कर लिए थे। घटना को अंजाम देने के लिए सलीम शाम को बंद होती दुकानों पर अपनी नज़र रखता था। सलीम दुकानदारों की आवाजाही पर पूरी नज़र रखता था। एक बार जब उसे इस बात का अंदाज़ा हो जाता कि कौन दुकानदार दिन भर की कमाई अपने साथ लेकर अपने साथ जाने वाला है, दुकान बंद करते वक़्त सलीम किसी बहाने से उसका ध्यान भटकाता और दुकान के मालिक का ध्यान भटकते ही उसका बैग लेकर रफू-चक्कर हो जाता। कभी-कभी तो वह पैसों वाला बैग उठाकर उसकी जगह वैसा ही एक डुप्लीकेट बैग छोड़ जाता था। सलीम की इस चाल से दुकानदार को ठगे जाने का तुरंत पता तक नहीं चलता था।

पुलिस द्वारा धरा गया आरोपित सलीम मोहम्मद बांग्लादेश की राजधानी ढाका के नारायणगंज का रहने वाला है। कई होटलों में रहने के दौरान उसने अपना पासपोर्ट और वीजा आईडी प्रूफ के तौर पर पेश किया था। हालाँकि इन सब कागजातों के बावजूद भारत में सलीम गैरकानूनी तरीके से घुसा था और अपने ठगी के काम से इकट्ठा किए पैसों को मणि ट्रान्सफर सर्विस के ज़रिये बांग्लादेश भेज दिया करता था। बता दें कि गिरफ़्तारी के वक़्त सलीम के पास से लाखों रुपए बरामद हुए थे, वहीं पुलिस के मुताबिक सलीम ने पिछले छ: महीने में पैसों से भरे तकरीबन 40 बैग चुराए।

इस मामले में सोमवार को आरोपित सलीम मोहम्मद को कोलकाता की एक स्थानीय अदालत बैंकशाल कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने सलीम को 30 नवम्बर तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। वहीं पुलिस इस बात की छानबीन में जुटी है कि सलीम अकेले ही इस धंधे में काम करता था या वह किसी गिरोह का एक सदस्य है।