यूपी के हमीरपुर जिले में सपा शासनकाल में हुए 900 करोड़ रुपए से अधिक अवैध खनन घोटाले मामले की जाँच में जुटी सीबीआई की 3 सदस्यीय टीम ने हमीरपुर में 6 दिसंबर तक के लिए अपना डेरा डाल लिया है। जानकारी के मुताबिक सीबीआई टीम ने मौदहा डेम गेस्ट हाउस को अपना कैम्प कार्यालय बनाकर वहाँ पर जाँच शुरू कर दी है और कई खनिज कार्यालयों में छापा मारकर अहम दस्तावेज खँगाले हैं। इनकी सुरक्षा के लिए जिले के एसपी की ओर से कैंप कार्यालय के बाहर एक दरोगा और एक सिपाही भी तैनात किया गया है।
इस मामले में अब तक सीबीआई ने कई सपा नेता और IAS चंद्रकला समेत 78 लोगों को नोटिस भी सुपुर्द किया है। नेताओं में मुख्य रूप से सपा एमएलसी रमेश मिश्रा, पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संजय दीक्षित का नाम शामिल है। इसके अलावा कई मौरंग माफियों को भी इस संबंध में नोटिस भेजा गया है। बताया जा रहा है कि इन सभी लोगों की सीबीआई कैंप के कार्यालय में पेशी होनी है।
खनन घोटाला: CBI टीम ने हमीरपुर में डाला डेरा, IAS चंद्रकला सहित 78 लोगों को नोटिसhttps://t.co/tsBNEsrjmA
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सीबीआई मौरंग खनन के पूर्व से लेकर अब तक सभी पट्टों की जाँच करेगी। इसमें खनन के 25 पट्टे भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले इसी वर्ष जून महीने में सीबीआई की टीम ने सपा एमएलसी रमेश मिश्रा समेत 11 खनन माफियों और आईएएस चंद्रकला के ठिकाने पर छापेमारी करके हड़कंप मचा दिया था। इस दौरान 63 लोगों को मामले आरोपित बनाया गया था।
CBI is conducting raids at 22 locations in Uttar Pradesh and Delhi; CBI raid also underway at the premises former UP Minister Gayatri Prajapati in connection with illegal mining case. (Visual from premises of UP Minister Gayatri Prajapati in Amethi) pic.twitter.com/gfFjDnfC0k
इसके बाद अवैध खनन मामले में समाजवादी पार्टी में मंत्री पद पर रहे गायत्री प्रजापति और महिला के साथ गैंगरेप के आरोपित के निवास स्थान समेत लगभग 22 ठिकानों पर CBI ने छापेमारी की थी। अब इसी सिलसिले में एक बार फिर घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की खोज के लिए सीबीआई की टीम ने हमीरपुर में छापा मारा है।
नवंबर 26, 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले के दौरान मीडिया की भूमिका काफ़ी विवादित रही। ख़ासकर, बरखा दत्त जैसे पत्रकारों ने जिस तरह की रिपोर्टिंग की, उससे सैकड़ों लोगों की जान आफत में आ गई। देश की वित्तीय राजधानी को 10 आतंकियों ने एक तरह से 4 दिनों तक बंधक बना कर रखा। 166 लोग मारे गए, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी थे। 9 आतंकी मार गिराए गए और अजमल कसाब ज़िंदा पकड़ा गया। पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने इस पूरी वारदात की साज़िश रची थी। मुख्य साज़िशकर्ता हाफ़िज़ सईद और ज़कीउर्रहमान लखवी आज भी पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे। तत्कालीन मनमोहन सरकार ने पाकिस्तान को कई डोजियर सौंपे, लेकिन आतंकियों पर कार्रवाई नहीं हुई।
अगस्त 2012 में प्रोपगेंडा पोर्टल न्यूज़लॉन्ड्री को दिए गए इंटरव्यू में बरखा दत्त ने स्वीकार किया था कि मुंबई हमले के दौरान टीवी चैनलों और उनके पत्रकारों ने जिस तरह की रिपोर्टिंग की, उससे सैकड़ों लोगों की जान ख़तरे में आ गई थी। विवादित पत्रकार बरखा दत्त ने यह भी कहा कि टीवी चनलों की रिपोर्टिंग ऐसी थी कि कई सुरक्षा बलों के जवानों की जान भी ख़तरे में पड़ गई थी। उस दौरान बरखा दत्त वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपों में फॅंसी एनडीटीवी के लिए कार्य करती थीं और उनकी रिपोर्टिंग पर काफ़ी सवाल उठे थे। न्यूज़लॉन्ड्री के मधु त्रेहान ने इंटरव्यू के दौरान बरखा से इन्हीं चीजों को लेकर सवाल पूछे गए थे।
ब्लॉगर चैतन्य कुंते ने जब बरखा दत्त से पत्रकारिता की नैतिकता को लेकर सवाल पूछे तो बरखा ने उन्हें ही लीगल नोटिस भेज दिया। इंटरव्यू के दौरान बरखा ने अपने फ़ैसले को सही भी ठहराया। कुंते ने मुंबई हमले के दौरान हुई एक मौत को लेकर बरखा को जिम्मेदार ठहराया था। आरोप है कि बरखा दत्त ने मुंबई हमले के दौरान फँसे एक व्यक्ति के किसी संबंधी को फोन किया और उसकी लोकेशन उजागर कर दी। सब कुछ टीवी पर लाइव चल रहे होने के कारण आतंकियों को उस व्यक्ति के छिपे होने का स्थान मालूम पड़ गया। बरखा ने इन आरोपों को नकार दिया।
आरोप लगा था कि बरखा दत्त ने ओबेरॉय होटल के मैनजरों को कॉल किया, जिसके बाद पता चला कि वहाँ कई लोग बंधक बनाए गए हैं। आतंकियों को ये बात भी टीवी से पता चल गई। बरखा दत्त ने बताया कि चैतन्य कुंते ने उन्हें हेमंत करकरे की मौत का जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने दावा किया कि जब हेमंत वीरगति को प्राप्त हुए, तब वो दिल्ली में थीं। बरखा ने स्वीकार किया कि पत्रकारों ने मुंबई हमले के दौरान गलतियाँ की। बरखा ने साथ ही ये भी कहा कि जब पत्रकारों को अपनी ग़लती का एहसास हुआ तो उन्होंने दूसरे दिन से लाइव विजुअल को 15 मिनट की देरी से दिखाना शुरू कर दिया। बरखा ने अजीबोग़रीब कारण देते हुए कहा कि मीडिया को नहीं पता था कि आतंकी भी टीवी देख रहे हैं।
केरल के सबरीमाला मंदिर में इसी साल जनवरी के महीने में पहली बार छुप कर प्रवेश करने वाली दो महिलाओं में से एक बिन्दू अम्मिनी पर मिर्ची पाउडर फेंका गया है। अम्मिनी ने कहा, “आज सुबह एर्नाकुलम शहर के पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर एक आदमी ने मेरे चेहरे पर मिर्च पाउडर छिड़क दिया।”
Kerala: Bindu Ammini, one of the two women who first entered the #Sabarimala temple in January this year, says, “a man sprayed chilli and pepper at my face,”outside Ernakulam city police commissioner’s office today morning. pic.twitter.com/lt2M58264k
बता दें कि 16 नवंबर को दो महीने तक चलने वाले तीर्थयात्रा के लिए सबरीमाला मंदिर के कपाट खोले गए थे। कपाट खुले 10 दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक मंदिर में किसी महिला को प्रवेश करने नहीं दिया गया है। 10 साल की नाबालिग लड़की से लेकर 50 साल की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश करने नहीं दिया जा रहा है।
इधर, सबरीमाला मंदिर का दर्शन करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई, कोच्चि पहुँच चुकी हैं। उन्होंने सबरीमाल मंदिर में प्रवेश करने की योजना बनाई है। उन्हें रोकने के लिए भी वहाँ पर कुछ लोग पहरा दे रहे हैं। तृप्ति ने कहा, “हम आज संविधान दिवस पर सबरीमाला मंदिर जाएँगे। हमें मंदिर जाने से न तो राज्य सरकार और न ही पुलिस रोक सकती है। चाहे हमें सुरक्षा मिले या न मिले, हम आज मंदिर जाएँगे।” त़प्ति ने 15 नवंबर को भी कहा था कि वो 20 नवंबर के बाद सबरीमाला जाएँगी।
Women’s rights activist Trupti Desai at Kochi, early morning today: We’ll visit #Sabarimala temple today on Constitution Day. Neither state government nor police can stop us from visiting the temple. Whether we get security or not we will visit the temple today. pic.twitter.com/7f4WMK6opI
वहीं बताया जा रहा है कि मंगलवार (नवंबर 26, 2019) सुबह बिंदू अम्मिनी, एर्नाकुलम पुलिस आयुक्त के कार्यालय के पास खड़ी थी, तभी एक अज्ञात व्यक्ति ने उन पर मिर्च पाउडर छिड़क दिया। बिंदू वहाँ पर पुलिस सुरक्षा लेने के लिए गई थीं, क्योंकि वह इस साल फिर से सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करना चाहती हैं।
बिंदू ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि पुलिस बहुत गैर जिम्मेदार है और उन्होंने उस बदमाश को गिरफ्तार करने की कोशिश नहीं की, जिसने उन पर हमला किया। बिंदू ने कहा कि उन्होंने पुलिस से उस आदमी को गिरफ्तार करने का अनुरोध भी किया, लेकिन पुलिस फिर भी सक्रिय नहीं हुई।
उल्लेखनीय है कि मंदिर की परंपराओं को जबरन तोड़ने के लिए कम्युनिस्ट सरकार द्वारा पिछले साल बिंदू और कनकदुर्गा नाम की एक अन्य महिला को सबरीमाला मंदिर में घुसा दिया गया था। वे दोनों कथित तौर पर सीपीएम कार्यकर्ता थे और उनके साथ पुलिसकर्मी भी थे, जो धर्मस्थल के अंदर सादे कपड़ों में थे। सबरीमाला मंदिर में उपस्थित भक्तों ने आरोप लगाया था कि इन दोनों को पिछले साल 2 जनवरी को सुबह-सुबह वीआईपी प्रवेश द्वार से चोरी-छिपे आँख बचाकर प्रवेश करवाया गया था।
दो सीपीआईएम महिला कार्यकर्ताओं बिंदू और कनकदुर्गा को मंदिर में प्रवेश कराने के लिए उठाए गए अनधिकृत कदम को लेकर हाईकोर्ट की निगरानी समिति ने केरल पुलिस और पठानमित्त प्रशासन को लताड़ लगाई थी, जिससे पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली केरल सरकार को भारी शर्मिंदगी उठानी पड़ी।
पिनाराई विजयन की अगुवाई वाली केरल सरकार को एक समुदाय की परंपराओं और भावनाओं की अवहेलना करने और मंदिर के अंदर कार्यकर्ताओं और नास्तिकों को प्रवेश कराने के लिए बल का उपयोग करने को लेकर हिंदुओं के भायनक विरोध और क्रोध का सामना करना पड़ा था।
गौरतलब है कि गुरुवार (नवंबर 14, 2019) को सबरीमाला मामले पर सुप्रीम कोर्ट से निर्णायक फैसला नहीं आया। क्योंकि 5 जजों की पीठ में से 3 जज इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेजे जाने के पक्ष में रहे जबकि 2 जजों ने इससे संबंधित याचिका पर ही सवाल उठा दिए। जिसके बाद पीठ ने सबरीमाला मामले में फैसला सुनाने के लिए बड़ी पीठ (7 जजों की बेंच) को प्रेषित कर दिया।
काशी हिन्दू विश्विद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के छात्रों द्वारा डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति का विरोध सतत जारी है। छात्रों ने बेशक प्रशासन के 10 दिन की मोहलत माँगने के बाद अपना धरना समाप्त कर दिया हो लेकिन उनका आंदोलन थमा नहीं है बल्कि छात्र हर दिन दोगुनी ऊर्जा के साथ अपने विरोध को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
#BHU के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के छात्रों का आंदोलन जारी है। आज छात्रों ने परिसर स्थित विश्वनाथ मंदिर में बाबा का रुद्राभिषेक किया। शाम को बीएचयू सिंहद्वार गेट पर करेंगे मीटिंग। इस दौरान शशिकांत, चक्रपाणि, कृष्ण, शुभम, आनंद सहित बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे। pic.twitter.com/66SWPC2EZE
पिछले तीन दिनों का व्यौरा आपको संक्षेप में देते हुए आपको ऑपइंडिया इस बात से अवगत करा रही है कि किस तरह से छात्रों के आंदोलन को न सिर्फ BHU के पूर्व और वर्तमान प्रोफेसरों का, बल्कि काशी के अन्य आचार्यों-धर्माचार्यों, काशी विद्वत परिषद, महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ के कुलपति सहित, बनारस के सभी सुधी जनों का भारी सहयोग मिल रहा है। BHU के 50 से अधिक प्रोफेसरों ने छात्रों के समर्थन में, और फिरोज खान की नियुक्ति को रद्द करने के लिए विश्वविद्यालय के विजिटर महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सम्बोधित करते हुए पत्र लिखकर उनसे आवश्यक कार्यवाही का अनुरोध किया। जिसका संज्ञान BHU की कार्यकारिणी ने भी लिया है और 7 दिसम्बर को कार्यकारिणी की मीटिंग बुलाई गई है।
#BHU के सिंहद्वार पर धर्म सभा करते #SVDV के छात्र, इस आयोजन में काशी के कई धर्माचार्य, विद्वतजन और बड़ी संख्या में छात्र शामिल हैं। प्रशासन के पास 7 और शेष हैं, #FerozeKhan मामले में अपने निर्णय लेने के लिए… छात्रों का आन्दोलन सतत जारी है…… pic.twitter.com/VnRKP50ees
बता दें कि ऑपइंडिया की रिपोर्टिंग के बाद मीडिया के एक बड़े धड़े द्वारा फैलाए भ्रम पर काशी और BHU के तमाम लोगों ने आभार व्यक्त किया। महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ के कुलपति (VC) ने एक सभा में मीडिया के झूठ पर तंज कसते हुए यहाँ तक कहा, “आप जज क्यों बन जाते हो, ‘संस्कृत विभाग और मुस्लिम विरोध लिखकर’ पूरे देश को गुमराह कर दिया। आप बताओ तो सही कि मामला क्या है? नियुक्ति संस्कृत विभाग में नहीं बल्कि ‘संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय’ में हुई है और ये मुस्लिम विरोध नहीं बल्कि सनातन धर्म की रक्षा का प्रश्न है। बाकी निर्णय क्या होगा ये आप छोड़ दीजिए, पहले सही मुद्दा तो सामने आए।”
गौरतलब है कि छात्रों ने रुइया छात्रावास में 24 नवम्बर की शाम को एक आम सभा की जिसमें आंदोलन के रुपरेखा, इसकी कमियों और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। 25 नवंबर की शुरुआत परिसर स्थित विश्वनाथ मंदिर में SVDV के छात्रों द्वारा रुद्राभिषेक से हुआ।
रुद्राभिषेक के बाद मीडिया के इस सवाल पर कि एक तरफ JNU का आंदोलन है जहाँ विरोध की हर सीमा लाँघी जा रही है और दूसरी तरफ आपका आंदोलन जिसमें आप मन्त्रों, श्लोक, भजन, हनुमान चालीसा का पाठ, यज्ञ-हवन और रुद्राभिषेक के जरिए आंदोलन कर रहे हैं। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे? चक्रपाणि ओझा ने इस प्रश्न के जवाब में कहा, “देखिए हमारी एक परंपरा है, एक तौर-तरीका है हम कुछ भी करेंगे यहाँ तक कि बोलेंगे भी तो हमारे गुरुजनों द्वारा दिए संस्कार झलक ही जाएँगे। जो हमें परम्परा से मिला हम वही प्रदर्शित कर रहे हैं। और यही वो मूल्य है जिसकी रक्षार्थ हम लड़ रहे हैं।”
#SVDV के छात्रों का आन्दोलन जारी है, आज एक आम सभा में छात्रों ने #BHU के ही रणवीर संस्कृत विद्यालय से पढ़े ‘आजाद को भी याद किया जिन्होंने काशी से आजादी की लड़ाई की शुरुआत की, बड़ी रणनीति पर मंत्रणा करते छात्र….. pic.twitter.com/MYa7dg4P9I
चक्रपाणि ओझा से जब ऑपइंडिया ने प्रश्न किया कि आपकी इसी शैली में बोलने के कारण इंडियाटुडे के डिबेट में एंकर राहुल कँवल ने आपके साथ बदतमीजी की थी। इस पर आपका क्या कहना है? चक्रपाणि ने इस सवाल के जवाब में बस इतना ही कहा, “देखिए जो हमारे संस्कार है जिसके लिए हम लड़ रहे हैं वो हमने प्रदर्शित किया और जो उनके (राहुल कँवल) संस्कार है वो उन्होंने, देश ने उस व्यवहार को देखा। उनका JNU और SVDV के छात्रों से व्यवहार का अंतर भी मीडिया में आया जिससे बाद काफी लोगों ने उन्हें लताड़ा और हमें उसका भी फायदा मिला।”
बता दें कि कल 25 नवम्बर को ही BHU के सिंहद्वार पर काशी विद्वत परिषद के तत्वाधान में छात्रों ने एक सभा भी की। जिसमे SVDV के ही पूर्व संकायध्यक्ष एवं व्याकरणविभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर रामयत्न शुक्ल सहित कई विद्वानों ने धर्म की रक्षार्थ छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया और अपने विचार रखे।
#BHU के सिंहद्वार पर सनातन और मालवीय मूल्यों की रक्षार्थ सभा करते #SVDV के छात्र, इस दौरान काशी के कई विद्वान और धर्माचार्यों ने छात्रों के आन्दोलन को अपना समर्थन दिया। सभा में चक्रपाणि, शशिकांत, कृष्ण, शुभम, अमन, आनंद सहित बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे। pic.twitter.com/bEo5yb6csW
आज के कार्यक्रम के बारे में पूछे जाने पर शशिकांत मिश्र ने बताया, “महामना मूल्यों व धर्म के रक्षार्थ जारी आंदोलन के क्रम में में आज 26 नवंबर को दिन में 3 बजे से अस्सी घाट के सुबह ए बनारस के मंच पर एक विचार सभा का आयोजन किया गया है। जिसमें 3 बहुत ही प्रमुख व्यक्तित्व को अतिथि व वक्ता के रूप में हमने आमंत्रित किया है। जिसमे प्रमुख हैं, महामना की गोद में खेले, खाये, उनके आँगन में रहे, संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के पूर्व छात्र व पूर्व वेद विभागाध्यक्ष वरिष्ठ प्रोफेसर हृदय रंजन शर्मा जी मुख्य वक्ता के रूप में। दूसरे हैं, देश के मूर्धन्य न्याय शास्त्र के विद्वान, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित, संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान के पूर्व छात्र व प्राध्यापक तथा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व प्रति कुलपति (रेक्टर) प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी जी एवं SVDV के साहित्य विभाग के पूर्व छात्र व अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध कवि डॉ. अनिल चौबे जी की महनीय उपस्थित रहेगी।
सम्पूर्ण कार्यक्रम और आंदोलन में शशिकांत मिश्र, कृष्ण कुमार, शुभम, आनंद मोहन, अमन, विनायक सहित बड़ी संख्या में छात्रों और गणमान्य अथितियों की उपस्थिति छात्रों की आवाज को बल प्रदान कर रहा है। ऑपइंडिया से बात करते हुए शशिकांत मिश्र ने कहा, “यदि आप धर्म और सच्चाई के रास्ते पर हों तो ईश्वर स्वतः मदद करता है। आज जिस तरह आप सभी का खासतौर से ऑपइंडिया ने हमारे सच को सभी के सामने रखा उसके लिए हम आभारी हैं और उन सभी देशवासियों का भी आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने मीडिया द्वारा फैलाए जा रहे झूठ के बावजूद सच को समझा और साथ दिया, आप सभी इस आंदोलन के अंजाम तक पहुँचने तक अपना साथ और सहयोग बनाए रखें। आपसे हमारी इतनी अपील है।”
राजस्थान के अलवर जिले के भिवाड़ी से मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। 25 वर्षीय एक मुस्लिम महिला को पहले उसके शौहर ने सुबह-सुबह तीन तलाक दे दिया और रात में ससुर ने हथियार के दम पर अपने साथी के साथ मिलकर उसका बलात्कार कर डाला। पीड़िता ने शिकायत भिवाड़ी के महिला थाने में दर्ज करवाई है। पुलिस ने उसका मेडिकल करवाकर आरोपितों पर केस दर्ज किया है।
25 वर्षीय पीड़िता के अनुसार, साल 2015 में उसका निकाह भिवाड़ी के चौपानकी थाना इलाके के एक गाँव में हुआ था। हालाँकि, उसके निकाह में उसके पिता ने अपनी क्षमता के अनुसार दहेज भी दिया था। लेकिन फिर भी उसके पति, देवर, ससुर ने उनसे और दहेज की माँग की और महिला को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इस बीच उसने एक बेटी को भी जन्म दिया। मगर, फिर भी ससुराल पक्ष की ओर से उस पर हो रहे अत्याचार नहीं थमे।
महिला के बयान के मुताबिक, दहेज के लिए आरोपितों ने पीड़िता से बहुत मारपीट की। उसे कमरे में बंधक बनाकर प्रताड़ित किया। 22 नवंबर की सुबह उसका पति कमरे में आया और तीन तलाक दे दिया, जो गैरकानूनी है। उसी रात करीब 11-12 बजे महिला का ससुर एक अन्य व्यक्ति के साथ उसके कमरे में आ घुसा और कहा ‘तुझे मेरे बेटे ने तलाक दे दिया है, इसलिए अब तू मेरी बहू नहीं है।’
इसके बाद ससुर के साथ आए व्यक्ति ने महिला की कनपटी पर कट्टा लगा दिया और दोनों ने मिलकर उसके साथ बलात्कार किया। महिला के अनुसार, ससुर और उसके साथी ने उसे धमकी भी दी। उन्होंने कहा कि अगर किसी को इस बारे में बताया तो जिंदा नहीं रहेगी। लेकिन अगली सुबह वह मौका पाकर वह से निकली और पिता को फोन कर आपबीती बताई। इसके बाद पिता की मदद से पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने बताया है कि महिला की शिकायत पर आरोपितों के ख़िलाफ धारा 498ए, 323, 376 डी सहित 3, 4 मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) एक्ट- 2019 में मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जाँच भिवाड़ी सीओ हरिराम कुमावत कर रहे हैं। तीन तलाक को प्रतिबंधित करने के लिए बने कानून के दर्ज जिले का यह पहला मामला है।
पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश आशिफ सईद खोसा ने पाकिस्तानी फौज के मुखिया जनरल कमर जावेद बाजवा का कार्यकाल बढ़ाने सम्बन्धी आदेश को निलंबित कर दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार (नवंबर 27, 2019) को होगी। तब तक बाजवा का एक्टेंशन वाला नोटिफिकेशन सस्पेंडेड रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस सम्बन्ध में संघीय सरकार, रक्षा मंत्रालय और जनरल बाजवा को नोटिस जारी किया है। बाजवा 29 नवंबर को रिटायर होने वाले थे, लेकिन इमरान ख़ान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान सरकार ने अगस्त में उनका कार्यकाल 3 साल के लिए बढ़ा दिया था। इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर वहाँ के सीजेआई ने सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान जस्टिस खोसा ने कहा कि जनरल बाजवा का कार्यकाल बढ़ाने का अधिकार सिर्फ़ राष्ट्रपति को है। इसके बाद पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल ने उन्हें बताया कि राष्ट्रपति की अनुमति के बाद ही पाकिस्तान की कैबिनेट ने ये क़दम उठाया है। जस्टिस खोसा ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि 25 कैबिनेट मंत्रियों में से मात्र 11 ने ही जनरल बाजवा का कार्यकाल बढ़ाए जाने वाले आदेश पर हस्ताक्षर किया है। बाकी के 14 मंत्री अनुपस्थित रहे और उन्होंने इस मामले में अपनी राय ज़ाहिर नहीं की है।
SC suspends notification extending tenure of Army chief General Qamar Javed Bajwa
अगस्त में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के कार्यालय द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन में कहा गया था कि जनरल बाजवा का कार्यकाल ख़त्म होने के बाद से अगले तीन सालों तक इसकी अवधि बढ़ाई जाती है। जनरल बाजवा को नवंबर 2016 में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने पाक फौज का जनरल नियुक्त किया था। इससे पहले 2010 में युसूफ रज़ा गिलानी की सरकार ने भी तत्कालीन राष्ट्रपति आशिफ जरदारी की अनुमति से उस समय पाक सेनाध्यक्ष रहे जनरल अशफ़ाक़ परवेज कियानी का कार्यकाल 3 वर्षों के लिए बढ़ाया था।
हाल ही में पाकिस्तान से कई ऐसे खबरें आई है जो सेना और इमरान सरकार के बीच दूरी बढ़ने का संकेत दे रहे हैं। कुछ दिनों पहले जनरल बाजवा से मुलाक़ात के बाद इमरान ख़ान अचानक से छुट्टी पर चले गए थे। मीडिया में कहा जा रहा था कि उन्होंने अपने क़रीबी दोस्तों व रिश्तेदारों के साथ क्रिकेट पर चर्चा करते हुए अपनी छुट्टियाँ मनाई। कहा गया था कि इन्हों छुट्टियों के दौरान उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट में ढाँचागत सुधार की रूपरेखा तय की। इसे जनरल बाजवा और ख़ान के बीच मतभेद के रूप में भी देखा गया। कई मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया है कि बाजवा अब इमरान की जगह बेनजीर भुट्टो के बेटे बिलावल को आगे कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षाबल लगातार प्रयासरत हैं। आतंकी मंसूबों को नाकाम करने के साथ-साथ अशांति फैलाने की कोशिश करने वालों की धड़-पकड़ की जा रही है। इसी कड़ी में पुलिस ने बशीर अहमद कुरैशी को गिरफ्तार किया है। उसने श्रीनगर के आंचर में देश-विरोधी प्रदर्शन आयोजित किया था। इसके अलावे शोपियाँ और पुलवामा में एक-एक आतंकी मार गिराने में भी कामयाबी मिली है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार को पुलवामा में मारे गए आतंकी की पहचान इरफान शेख के रूप में हुई है। वह हिजबुल मुजाहिद्दीन से जुड़ा था। वहीं, शोपियाँ में सुरक्षाबलों के ऑपरेशन में मारे गए आतंकी की पहचान अभी सार्वजानिक नहीं की गई है।
#UPDATE Jammu & Kashmir Police: One more terrorist killed in exchange of fire in Pulwama; has been identified as Irfan Sheikh.
श्रीनगर में हुई बशीर अहमद की गिरफ्तारी भी बेहद अहम सफलता मानी जा रही है। अनुच्छेद 370 के निष्क्रिय होने के बाद 8 अगस्त 2019 को आंचर इलाके में हुए विरोध-प्रदर्शन में उसकी मुख्य भूमिका थी।
पुलिस के एक अधिकारी ने इस बारे में सूचना देते हुए बताया कि उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में तंगधार के बागी-मेहताब इलाके में रहने वाले बशीर अहमद कुरैशी को रविवार को चानपोरा से गिरफ्तार किया गया।
#JammuAndKashmir : Police arrested the main organiser of the Anchar protest (post abrogation of Article 370), Bashir Ahmad Qureshi in Chanpora of South Zone Srinagar, yesterday. pic.twitter.com/9hLsFgJNy6
अधिकारी ने बताया कि पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कुरैशी श्रीनगर में विशेषकर सौरा इलाके के आंचर में राष्ट्र-विरोधी हिंसक प्रदर्शन आयोजित करने में शामिल था। इसके अलावा वह कई अन्य मामलों में भी शामिल रहा है। प्राथमिक जाँच में पाया गया कि उसका अलगाववादियों से नाता था।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पुलिस और सुरक्षा बलों पर पथराव करने और राष्ट्रविरोधी प्रदर्शन करने के लिए युवकों को उकसाने में बशीर अहमद की अहम भूमिका थी। इसके अतिरिक्त उसने गैरकानूनी बैठकें और हिंसक प्रदर्शन आयोजित करने में भी भूमिका निभाई, जिसमें जान-माल का नुकसान हुआ।
वो नवंबर 26, 2008 की तारीख थी, जब पाकिस्तान से आए 10 आतंकियों ने मुंबई में कत्लेआम मचाया। देश की वित्तीय राजधानी में घुसे इन आतंकियों ने 12 सार्वजनिक ठिकानों पर गोलीबारी की और 166 लोगों की जान ली। 4 दिनों तक देश के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले महानगर को आतंकियों ने एक तरह से बंधक बनाए रखा। इसके बाद मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने आतंकियों के ख़िलाफ़ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की। पाकिस्तान के ख़िलाफ़ डोजियर ज़रूर तैयार किए गए और दुनिया को इस हमले में उसके हाथ के बारे में बताया गया। लेकिन, इसका कुछ असर नहीं हुआ।
कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी ने 26/11 की 11वीं बरसी पर पूछा कि अगर ऐसा हमला अमेरिका में हुआ होता तो उसके बाद पाकिस्तान का क्या हश्र होता? उन्होंने कहा कि वे हमेशा सोचते हैं कि अगर अमेरिका में दुर्भाग्य से ऐसा कुछ होता हुआ तो उसने पाकिस्तान का बुरा हाल किया होता। 2008 में मनीष तिवारी की पार्टी कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए की ही सरकार थी। वो अलग बात है कि तिवारी 2004 का लोकसभा चुनाव हार गए थे, लेकिन 2009 में जीत दर्ज कर वे यूपीए-2 में मंत्री बने थे। मनीष तिवारी सही हैं। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ कैसे जंग छेड़ी, ये सब जानते हैं।
अमेरिका ने पेट्रियट एक्ट और होमलैंड सिक्योरिटी एक्ट जैसे कड़े क़ानून पास किए। उस हमले की जाँच हुई और क़रीब 800 लोगों को गिरफ़्तार किया गया। अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में ढूँढ निकाला गया और उसे मार गिराया। मनीष तिवारी का ये ट्वीट इस ओर इशारा करता है कि सोनिया गाँधी और मनमोहन सिंह की सरकार ने 26/11 के बाद मजबूत क़दम नहीं उठाए और आतंकवाद को लेकर ढुलमुल रवैया अपनाया।
ऐसा नहीं है कि सेना तैयार नहीं थी। भारतीय वायुसेना पाकिस्तान में घुस कर आतंकियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए तैयार थी। लेकिन, कॉन्ग्रेस सरकार ने इसके लिए आदेश नहीं दिया। उस वक़्त सुखोई स्क्वाड्रन का नेतृत्व कर रहे वायुसेना अधिकारी ने बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद खुलासा किया कि उस समय भी मुजफ्फराबाद में ऐसे ही किसी ऑपरेशन की बात चली थी, लेकिन मनमोहन सरकार ने इसके लिए इजाजत नहीं दी। रिटायर्ड अधिकारी ने बालाकोट एयरस्ट्राइक की प्रशंसा करते हुए बताया था कि मुंबई हमले के बाद उनके स्क्वाड्रन को 1 महीने तक तैनात कर रखा गया, लेकिन स्ट्राइक करने की इजाजत नहीं मिली।
What would happened to Pakistan if 26/11 would have unfortunately happened in the US & the smoking gun would have nailed Pakistan conclusively as it did in the case of the Mumbai outrage? – I often wonder………
उस वक़्त कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री रहे एआर अंतुले ने वीरगति को प्राप्त हेमंत करकरे के बारे में कहा था कि उन्होंने कई आतंकी हमलों में कुछ हिन्दुओं का हाथ होने की बात पता लगाई थी और इसीलिए उन्हें अपनी जान गँवानी पड़ी। अंतुले का कहना था कि आतंकवाद की जड़ों में जाकर गहराई से जाँच करने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया। उस समय भारत में अमेरिका के राजदूत रहे डेविड मुल्फोर्ड ने यूएस स्टेट डिपार्टमेंट को लिखा था कि कॉन्ग्रेस ने पहले तो अंतुले के आधारहीन बयानों से पल्ला झाड़ लिया, लेकिन 2 दिन बाद उसी तरह का बयान जारी किया। एक विकिलीक्स केबल से हुए खुलासे के अनुसार, मुल्फोर्ड ने अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट को लिखा कि अंतुले के बयान को भारतीय मुस्लिम समुदाय के एक बड़े तबके का समर्थन भी मिला।
मुल्फोर्ड ने लिखा था कि कॉन्ग्रेस पार्टी आगामी चुनावों में फ़ायदा लेने के लिए ऐसी साज़िश रच रही थी। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ’26/11 आरएसएस की साज़िश’ नामक पुस्तक लॉन्च किया और इस हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ होने का बचाव किया। अगर अजमल कसाब नहीं पकड़ा जाता तो कॉन्ग्रेस शायद अपनी साज़िश में सफल भी हो जाती। गौर करने लायक बात है कि कसाब ने अपने हाथ में कलावा बाँध रखा था, जिससे लगे कि वह हिन्दू है। उरी और पुलवामा हमले के बाद मोदी सरकार ने जो इच्छाशक्ति दिखाई और आतंकियों को नेस्तनाबूत किया, कॉन्ग्रेस के वक़्त यब सब एक सपना ही हुआ करता था।
इसी साल अक्टूबर के अंतिम हफ्ते में मुंबई के कमिश्नर रहे दत्ता पडसलगीकर को उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (डिप्टी एनएसए) बनाया गया। सुरक्षा के मामलों में सीधा प्रधानमंत्री को सलाह देने वाले अधिकारियों में वह अजीत डोभाल के बाद नंबर 2 हैं। महाराष्ट्र के डीजीपी रहे पडसलगीकर को उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बना कर आतंरिक सुरक्षा मामलों की कमान सौंपी गई है। आईबी में पडसलगीकर और अजीत डोभाल कई वर्षों तक साथ काम कर चुके हैं, इसीलिए दोनों के बीच ट्यूनिंग भी ख़ासी अच्छी है। 1982 बैच के आईपीएस अधिकारी पडसलगीकर ने पूरे 26 साल आईबी में व्यतीत किए हैं।
नवंबर 26, 2008 को मुंबई दहल गई। पाकिस्तान से आए 10 आतंकियों ने मुंबई के 12 ठिकानों को निशाना बनाया और 166 लाशें गिरा दीं। इनमें से 9 आतंकी मार गिराए गए और अजमल कसाब ज़िंदा पकड़ा गया। पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के इस हमले में कई विदेशी भी मारे गए थे। भारत सरकार ने दुनियाभर में कई देशों को इस घटना में पाकिस्तान की भागीदारी के सबूत दिखाए। हमले के बाद हुई जाँच में दत्ता पडसलगीकर का रोल काफ़ी अहम रहा।
पडसलगीकर का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क काफ़ी तगड़ा है और समय-समय पर विभिन्न मामलों में सूचनाएँ जुटाने में उनका यह नेटवर्क काफी कारगर रहा है। अमेरिकी दूतावास में तैनात रहने के कारण उन्हें कूटनीतिक अनुभव भी रहा है। उन्होंने फ्रेंच भाषा की पढाई की है और साहित्य में गहरी रूचि रखते हैं। वे पहले अधिकारी थे जिसने सबूतों के साथ मुंबई हमलों में पाकिस्तान का हाथ होने की बात कही थी। अमेरिकी दूतावास में तैनात रहने के कारण उन्हें कूटनीतिक अनुभव भी रहा है। उन्होंने फ्रेंच भाषा की पढाई की है और साहित्य में गहरी रूचि रखते हैं।
मुंबई हमलों के दौरान देश की वित्तीय राजधानी में घुसे आतंकी पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से लगातार संपर्क में थे। आतंकी आका शागिर्दों को निर्देश दे रहे थे और न्यूज़ चैनल देख कर बता रहे थे कि बाहर क्या कार्रवाई चल रही है। पडसलगीकर ने अमेरिका से ‘वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VOIP)’ प्राप्त कर आतंकियों और उनके आकाओं के बीच हुई बातचीत की जाँच की। मुंबई हमले के दौरान एकमात्र ज़िंदा पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब को लम्बे ट्रायल के बाद नवंबर 21, 2012 को फाँसी की सज़ा दे दी गई थी। कसाब से पूछताछ और उसके ख़िलाफ़ ट्रायल में भी दत्ता पडसलगीकर ने बड़ी भूमिका निभाई। पडसलगीकर के बारे में मुंबई पुलिस के लोग कहते हैं कि वो अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं।
जब वो मुंबई के पुलिस कमिश्नर बन कर आए थे, तब वहाँ उन्हें सरकारी आवास कई दिनों बाद मिला था। तब तक पडसलगीकर वर्ली स्थित आईपीएस ऑफिसर्स मेस में ही रहा करते थे। वह रोज़ सुबह पास के ही एक बेकरी में बिना किसी सुरक्षा के जाया करते थे। उन्होंने पुलिस बल में मानवीय भावनाओं को मजबूती दी। गणेश चतुर्थी व अन्य महत्वपूर्ण मौक़ों पर वह कॉन्स्टेबलों के घर जाकर उनकी ख़ुशी का हिस्सा बनते थे। उन्होंने जवानों को अपने परिवार के साथ समय व्यतीत करने को प्राथमिकता दी। उन्होंने 12 घंटे की शिफ्ट को घटा कर 8 घंटे किया।
जवानों के बीच भाईचारा बढ़ाने के लिए पडसलगीकर अक्सर खेलकूद का सहारा लेते थे। पुलिस और आम नागरिकों के बीच सामंजस्य को सही करने के लिए भी उन्होंने यही तरीका अपनाया। वो ख़ुद एक अच्छे टेनिस खिलाड़ी हैं। क्राइम ब्रांच और इकनोमिक ऑफिस विंग में डायरेक्टर रह चुके पडसलगीकर महाराष्ट्र के लोकायुक्त के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
बिहार के कैमूर जिले में नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप और उसका वीडियो वायरल करने के मामले में सोमवार (नवंबर 25, 2019) को लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने मोहनियां शहर में जमकर तोड़फोड़, पथराव व आगजनी की। इस दौरान आधा दर्जन बाइकें, एक गुमटी व दो झोपड़ीनुमा दुकानों को आग के हवाले कर दिया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि मात्र पाँच मिनट के भीतर ही बाजार की सभी दुकानों के शटर बंद कर दिए गए। इसके बाद पूरे शहर में सन्नाटा पसर गया।
कहा जा रहा है कि प्रदर्शनकारी आरोपितों का घर जलाना चाहते थे, लेकिन मौक़े पर पहुँची पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर कर दिया। सुरक्षा के लिहाज से राज्य सरकार ने कैमूर में इंटरनेट सेवाओं को भी बंद कर दिया है। गृह विभाग के आदेशानुसार 25 से 26 नवंबर तक जिले में इंटरनेट सेवा बंद रहेगी।
‘प्रभात खबर’ के कैमूर संस्करण में प्रकाशित खबर
प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में पुलिस ने अरबाज और सोनू को गिरफ्तार कर लिया है। कलाम और सिकंदर अब भी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पटना से आई एसटीएफ की टीम स्थानीय पुलिस के साथ छापेमारी कर रही है। पीड़िता की आत्महत्या की फैली अफवाह ने भी लोगों के आक्रोश को बढ़ाने का काम किया।
गौरतलब है कि रविवार को वीडियो वायरल होने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ा था। वायरल वीडियो में देखा गया था कि एक कार में कुछ लड़के नाबालिग लड़की का मुँह बंद करके उसका बलात्कार कर रहे हैं और गाड़ी का शीशा लॉक है। इसके बाद रविवार को ही पीड़िता भभुआ स्थित महिला थाने पहुँची और मोहनियां के चारों लड़कों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई।
लड़की ने बताया कि अरबाज उसे कोचिंग आने-जाने के दौरान मिला था। इस दौरान उसने उसे प्रेम जाल में फँसाया। फिर शादी का झाँसा देकर पिछले 5 महीने से वह उसका यौन शोषण कर रहा था। मंगलवार को पीड़िता को कलाम ने मोहनिया में मुंडेश्वरी गेट के पास बुलाया। वहाँ अरबाज और उसके साथी पहले ही गाड़ी लेकर मौजूद थे। लड़की के आते ही उसे गाड़ी में खींच लिया गया। जब लड़की ने चिल्ला कर विरोध किया तो उसके मुँह पर पट्टी बाँध दी गई और हत्या कर फेंकने की धमकी देकर रतवार नदी के पास ले गए। जहाँ चारों ने मिलकर उसके साथ पहले बलात्कार किया और फिर उसका वीडियो वायरल कर दिया।