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मनमोहन और रघुराम राजन के दिनों की बैंकिंग ने सब बर्बाद किया: निर्मला सीतारमण

मोदी सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने कार्यकाल में सरकारी बैंकों की कथित बदहाली का बचाव करते हुए कहा है कि मनमोहन सिंह-रघुराम राजन काल में बैंकों की वित्तीय स्थिति का “सबसे बुरा दौर” था। बैंक अभी तक उसी से उबर नहीं पाए हैं। उन्होंने पब्लिक सेक्टर के बैंकों को ‘लाइफलाइन’ देने को अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी बताया। वित्त मंत्री कोलम्बिया विश्वविद्यालय के दीपक और नीरा राज भारतीय आर्थिक नीति केंद्र द्वारा आयोजित लेक्चर में बोल रहीं थीं।

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने हाल ही में ब्राउन यूनिवर्सिटी के एक लेक्चर के दौरान कहा था कि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में अर्थव्यवस्था के डूबने के का कारण सरकार का बहुत ज्यादा केन्द्रीयकृत हो जाना और नेतृत्व की ओर से आर्थिक विकास के लिए कोई स्पष्ट परिकल्पना न दे पाना रहा। इसके बारे में जब सीतारमण से पूछा गया तो जवाब में उन्होंने कहा कि राजन के समय में बैंक कर्जों में बहुत समस्याएँ थीं। उन्होंने कहा, “वह राजन के ही RBI प्रमुख रहने का समय था जब कर्ज महज़ भ्रष्ट नेताओं के फ़ोन कॉल से मिल जाया करते थे और भारत में पब्लिक सेक्टर बैंकों को आज तक उस दलदल से निकलने के लिए सरकार से पूँजी ले-ले कर काम चलाना पड़ रहा है।”

सीतारमण ने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, “डॉ. सिंह उस समय प्रधानमंत्री थे और मुझे लगता है कि डॉ. राजन इस बात से सहमत होंगे कि डॉ. सिंह के पास तो भारत के लिए ‘सुसंगत स्पष्ट परिकल्पना’ रही ही होगी।” उनकी बात सुनकर श्रोताओं की हँसी छूट पड़ी।

निर्मला सीतारमण ने आगे जोड़ा कि हालाँकि वे राजन का सम्मान करतीं हैं, लेकिन यह जानना और जनता के सामने रखना आवश्यक है कि यह बीमारी आखिर आई कहाँ से। उन्होंने कहा, “भारतीय पब्लिक सेक्टर बैंकों के लिए (रघुराम) राजन के RBI गवर्नर और (मनमोहन) सिंह के प्रधानमंत्री रहने के समय से बुरा समय नहीं हुआ है। उस समय हम में से किसी को इसके बारे में नहीं पता था।”

महाराष्ट्र में मोदी: विपक्ष को कहा- डूब मरो, सावरकर को याद कर बोले- अंतिम सॉंसें गिन रही कॉन्ग्रेस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के उन नेताओं को डूब मरने की सलाह दी जो पूछ रहे हैं कि महाराष्ट्र के चुनाव से
जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने का क्या वास्ता है। वे महाराष्ट्र के अकोला में बुधवार को चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएँगे। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में सावरकर को भारत रत्न देने का वादा किया है।

रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, “ये वीर सावरकर के ही संस्कार हैं कि राष्ट्रवाद को हमने राष्ट्र निर्माण के मूल में रखा है। वीर सावरकर को आए दिन गालियाँ देने वाले, उनका अपमान करने वाले वही लोग हैं जिन्होंने बाबा साहेब आंबेडकर का कदम-कदम पर अपमान किया। उनको दशकों तक भारत रत्न से वंचित रखा।”

अनुच्छेद 370 का मामला उठाते उन्होंने कहा, “राजनीति के स्वार्थ में डूबे हुए लोग, परिवार के कल्याण में खोए हुए लोग कहने की हिम्मत करते हैं कि महाराष्ट्र का कश्मीर से क्या लेना-देना? मैं हैरान हूँ कि छत्रपति शिवाजी की धरती पर आजकल राजनीतिक स्वार्थ के कारण ऐसी आवाजें उठाई जा रही हैं। इनकी बेशर्मी देखिए कि ये खुलेआम कह रहे हैं कि महाराष्ट्र के चुनाव से अनुच्छेद 370 का क्या लेना देना? महाराष्ट्र से जम्मू कश्मीर का क्या संबंध?”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर के बीच संबंध उठाने वालों को डूब मरने की सलाह दी और जवाब दिया, “मैं ऐसे लोगों को कहना चाहता हूँ कि जम्मू-कश्मीर और वहाँ के लोग भी माँ भारती की ही संताने हैं।” उन्होंने कहा, ” राजनैतिक फायदा लेने के लिए इन लोगों की सोच ने मुझे भीतर तक दुखी किया। ये कैसे पूछ सकते हैं महाराष्ट्र का और जम्मू-कश्मीर का क्या संबंध हैं…डूब मरो, डूब मरो।”

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान महाराष्ट्र की जनता से कहा, “जब आप सब आर्टिकल 370 के निष्प्रभावी होने पर खुश हैं, तब वे दर्द में हैं।” उन्होंने बताया कि ऐसे लोग भारत को विभाजित देखना चाहते हैं, सर्वश्रेष्ठ होते नहीं। वे बिखरा भारत देखना चाहते हैं, झगड़ता भारत देखना चाहते हैं। लेकिन उनकी हर कोशिश नाकाम हो रही है।

इसके बाद पीएम मोदी ने पुरतूर की बैठक में भाषण देते हुए कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “परिवारवाद के नीचे कॉन्ग्रेस का राष्ट्रवाद दब चुका है, परिवार भक्ति में ही कॉन्ग्रेस को राष्ट्र भक्ति नजर आती है। यही वजह है कि कॉन्ग्रेस आज लड़खड़ा रही है और अंतिम साँस ले रही है।”

कश्मीर में तीन आतंकी ढेर, श्रीनगर में कानून व्यस्था के लिए चुनौती हयात अहमद भट गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर के दक्षिणी भाग के अनंतनाग जिले में बुधवार को सुरक्षाबलों की ओर शुरू किये गए घेराबंदी एवं तलाशी अभियान के वक़्त मुठभेड़ हो गई जिसमें सुरक्षाबलों ने तीन आतंकवादियों को मार गिराया है। वहीं शांति और स्थिरता की स्थिति बनाए रखने के लिए जम्मू कश्मीर पुलिस ने श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके के प्रमुख दंगाई हयात अहमद भट को भी गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि अनंतनाग से तीन किलोमीटर दूर बिजबेहरा के पजालपोरा में बुधवार तड़के साढ़े तीन बजे आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना मिलने पर राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर), केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने एक संयुक्त अभियान शुरू किया।

बाहर भागने के सभी संभव रास्तों को करने के बाद वहाँ पहले से छिपे आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर स्वचालित हथियारों से गोलीबारी शुरू कर दी जिसके बाद सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई शुरू की तो दोनों के बीच मुठभेड़ की शुरुआत हो गई।

खबर है कि पिछले हफ्ते भी सैन्य-सुरक्षाबलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा की गई संयुक्त कार्रवाई में लश्कर-ए-तैय्यबा के दो स्थानीय आतंकवादी मारे गए थे। पुलिस का यह अभियान जम्मू-कश्मीर पुलिस को अवंतीपुरा जिले के कावनी गाँव में दो आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना मिलने के बाद शुरू हुआ।

साथ ही आज भी इलाके में तीन आतंकवादियों के खात्मे की खबर सामने आई है। आतंकवादियों ने जिस मकान में शरण ली थी उसे विस्फोट कर उड़ा दिया गया। बता दें की अभियान समाप्त हो गया मगर अभी तलाश अभियान जारी है। साथ ही मुठभेड़ वाले घटनास्थल तक जाने वाली सड़कों को सील कर दिया गया है। सभी स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी एहतियातन तैनात कर दिया गया है। कानून और व्यवस्था बनाये रखने के लिए श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।

तकरीबन 70 दिनों के बाद सोमवार से पोस्ट-पेड मोबाइल सेवा की बहाली के बाद सुरक्षाबलों के साथ आतंकवादियों की यह पहली मुठभेड़ की घटना है, बता दें कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद-370 को खत्म करने तथा राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के निर्णय के बाद से ही पूरे जम्मू-कश्मीर में संचार सेवा को स्थगित कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट में चिल्लाए बाबरी मस्जिद के पैरोकार, फाड़ डाले काग़ज़ात और नक़्शे: CJI ने फटकारा

सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन अचानक से उग्र हो उठे। सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के 72 वर्षीय वकील राजीव धवन ने हिन्दू महासभा के कुछ कागज़ात फाड़ डाले। हिन्दू महासभा ने उन्हें कुछ कागज़ात और नक़्शे दिए थे। अदालत में ही धवन ने उन्हें एक-एक कर फाड़ना शुरू कर दिया। जब मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने उन्हें टोका तो उन्होंने कुछ और पन्ने फाड़ डाले।

बता दें कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित जमीन पर अपना दावा छोड़ दिया है। सुन्नी वक्फ बोर्ड इस संबंध में शीर्ष अदालत में हलफनामा दायर कर सकती है। मध्यस्थता पैनल ने इसकी पुष्टि की है। इस ख़बर के बाद अयोध्या मामले का घटनाक्रम तेज़ी से बदलता नज़र आ रह है।

बुधवार को राम मंदिर मामले की सुनवाई का 40वाँ और अंतिम दिन है। सीजेआई ने साफ़-साफ़ कह दिया है कि सभी निर्धारित पक्षों को निश्चित समयावधि से अधिक नहीं दी जाएगी और आज शाम 5 बजे तक सुनवाई पूरी कर ली जाएगी। हिन्दू पक्ष की ओर से दलील पेश करते हुए वकील सीएस वैद्यनाथन ने इस तरफ कोर्ट का ध्यान दिलाया कि मुस्लिम पक्ष ने अभी तक ऐसा कोई भी सबूत नहीं दिया है, जिससे पता चले कि विवादित भूमि पर उनका एकाधिकार है। उन्होंने कहा कि 1857 से 1934 के बीच मुस्लिम पक्ष ने वहाँ नमाज़ पढ़ी होगी, लेकिन उसके बाद ऐसा कुछ भी होने का कोई सबूत नहीं है।

वैद्यनाथन ने ये कहते हुए अपनी दलीलें समाप्त की कि नमाज़ पढ़ने के लिए तो काफी सारी जगहें हो सकती हैं, लेकिन राम जन्मभूमि सिर्फ़ एक ही जगह है और उसे बदला नहीं जा सकता। वहीं राम मंदिर पर पहली याचिका दाखिल करने वाले गोपाल सिंह विशारद के वकील ने इस बात पर जोर दिया कि उस स्थल पर पहले से पूजा होती रही है। वकील रंजीत कुमार ने सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की याचिका खरिज करने की अपील के साथ अपनी बात समाप्त की। वहीं निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बाबा अभिराम दास विवादित स्थल पर स्थित स्ट्रक्चर में मुख्य पुजारी थे।

हिन्दू महासभा ने जो दस्तावेज पेश किए उनमें बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष रहे किशोर कुणाल की पुस्तक ‘अयोध्या रीविजिटेड’ के कुछ अंश का जिक्र था। इसमें कहा गया है कि विवादित स्थल पर शुरू से ही मंदिर का अस्तित्व था। राजीव धवन ने जब आपत्ति जताई तो सीजेआई राजन गोगोई ने कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो सभी जज उठ कर चले जाएँगे। हिन्दू महासभा के वकील विकास ने जब सीजेआई को पुस्तक देने की बात कही तो उन्होंने कहा कि पुस्तक उन्हें दे दी जाए ताकि वो दिवाली तक पढ़ते रहें और नवम्बर तक पढ़ते रहें। सीजेआई ने उन्हें पुस्तक पर हस्ताक्षर कर के देने को कहा। सीजेआई ने धवन को फटकारते हुए कहा कि चिल्लाना व्यर्थ है।

वहीं, विवादित ज़मीन पर अपना दावा छोड़ने के एवज में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने विचित्र शर्तें रखते हुए माँग किया कि अयोध्या में 22 मस्जिदों के रख-रखाव की जिम्मेदारी सरकार उठाए। सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने अंतिम शर्त रखी है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के नियंत्रण में जितने भी धार्मिक स्थल हैं, उनकी स्थिति की जाँच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट एक समिति बनाए। मुख्य न्यायाधीश आज सुनवाई के दौरान समय को लेकर एकदम सजग दिखे और निर्मोही अखरा के वकील ने जब डेढ़ घण्टे माँगे तो उन्हें समय की कमी का हवाला देकर 1 बजे तक का समय दिया गया।

मुमताज हॉस्टल में फंदे से लटका मिला अनस: AMU के छात्रों ने काटा बवाल, SP की गाड़ी में तोड़फोड़

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मंगलवार (अक्टूबर 15, 2019) रात एक छात्र ने फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। छात्र का शव मुमताज हॉस्टल के रूम में मिला। प्रशासन और पुलिस की देरी से पहुँचने पर छात्रों ने जमकर हंगामा किया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि आक्रोशित छात्रों ने पुलिस को ही दौड़ा लिया। बताया जा रहा है इस दौरान छात्रों ने एसपी की गाड़ी पर पत्थरबाजी भी की। बाद में कैंपस के बाहर पुलिस फोर्स तैनात की गई, लेकिन हंगामा देर रात तक जारी रहा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक छात्र का नाम मो. अनस शम्सी है। अनस, प्रदेश के पीलीभीत इलाके का रहने वाला था। वो एएमयू में एमएसडब्लू की पढ़ाई पूरी कर चुका था और अब पीएचडी की तैयारी में जुटा था। अनस मुमताज हॉस्टल में अपने तीन साथियों के साथ कमरा नंबर 22 में रहता था। लेकिन मंगलवार की रात जब उसका एक रूम पार्टनर अपने कमरे में पहुँचा तो वह फंदे पर लटका मिला। ये देखते ही अनस के रूम पार्टनर ने शोर मचा दिया और सारे छात्र जुट गए। फंदे से शव को उतारा गया और प्रॉक्टर टीम को सूचना दी गई।

मो. अनस शम्सी

हंगामा कर रहे छात्रों का आरोप है कि काफी देर बीत जाने के बाद भी प्रशासन का कोई अधिकारी समय से नहीं पहुँचा। जिस कारण सभी छात्र गुस्से में आए। इसके बाद छात्र खुदकुशी की जानकारी मिलते ही एएमयू कैंपस में पहुँचे एसपी सिटी अभिषेक पर भी छात्रों ने अपना गुस्सा उतारा।

आक्रोशित छात्रों ने पहले एसपी सिटी की गाड़ी देखकर नारेबाजी शुरू कर दी और फिर उनपर हमला बोला। बवाल अधिक होने के कारण उन्हें वापस होना पड़ा। लेकिन छात्रों की भीड़ उनकी गाड़ी के पीछे दौड़ी और पत्थर फेंककर उनकी गाड़ी का शीशा तोड़ डाला। बड़ी मशक्कत के बाद पुलिसकर्मियों ने एसपी की गाड़ी को कैंपस से बाहर निकलवाया।

एएमयू प्रशासन के पहुँचने के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया और देर रात तक थाना सिविल लाइल पुलिस द्वारा पोर्टमार्टम कराए जाने की प्रक्रिया पूरी की जाती रही। आत्महत्या का कारण अभी पता नहीं चल पाया है। जाँच जारी है।

चमका ParleG का धंधा: प्रॉफिट 15.2% बढ़ा, राजस्व बढ़कर ₹9030 करोड़,

‘पार्ले जी’ बिस्किट बनाने वाली कम्पनी पार्ले के वार्षिक लाभांश में 15.2% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आँकड़ा वित्तीय वर्ष 2018-19 का है। अर्थात, फाइनेंसियल ईयर 2018-19 में ‘पार्ले बिस्किट्स’ कम्पनी ने पिछले वित्तीय वर्ष के मुक़ाबले 15.2% ज्यादा लाभ कमाया है। पार्ले सहित कई बिस्किट कंपनियों ने सरकार से जीएसटी दर घटाने की भी माँग की थी। पार्ले बिस्किट ने इस वर्ष 410 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ प्राप्त किया है, जबकि पिछले वर्ष यह आँकड़ा 355 करोड़ रुपए था। इसके आल्वा पार्ले के कुल राजस्व में भी वृद्धि दर्ज की गई है। यह सब मंदी की चर्चाओं के बावजूद हुआ।

अगर पार्ले बिस्किट्स के कुल राजस्व की बात करें तो इस वर्ष यह 6.4%की वृद्धि के साथ 9030 करोड़ रुपए रहा, इसमें केवल ऑपरेशन से आने वाले राजस्व की हिस्सेदारी 8780 करोड़ रुपए रही। अगर कम्पनी की अन्य आमदनी की बात करें तो यह भी 26% की बड़ी उछाल के साथ इस वर्ष 250 करोड़ रुपए रहा। इससे पहले काफ़ी ख़बरों में कहा गया था कि पार्ले जीएसटी रेट को 18% किए जाने से निराश है और इसके कारण हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल सकती है।

दरअसल, केंद्र सरकार ने बिस्किट्स पर जीएसटी की दरें बढ़ा दी थीं। इसके बाद कई कथित बुद्धिजीवियों और मीडिया रिपोर्ट्स ने मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि गलत आर्थिक नीतियों से आई मंदी के कारण पार्ले ‘काफी बुरी स्थिति’ में है। इससे नौकरियाँ जा सकती है और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। पार्ले की ख़बर को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर भी निशाना साधा गया था। अब पार्ले के राजस्व और शुद्ध लाभ में उछाल के साथ इन चर्चाओं पर विराम लग गया है।

पार्ले के सीनियर केटेगरी हेड मयंक शाह ने इन रिपोर्ट्स को आधारहीन बताते हुए जानकारी दी कि पार्ले में कर्मचारियों की किसी भी प्रकार की छँटनी नहीं की गई है। उन्होंने बताया था कि चीजों को ग़लत तरीके से पेश कर नकारात्मकता फैलाई गई। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा था कि यह इंडस्ट्री के विकास दर और बिस्किट्स की बिक्री में बढ़ोतरी पर तय होता है कि कर्मचारियों की छँटनी की जाएगी या नहीं।

3 महीने में ही भाजपा विधायक का कॉन्ग्रेस से हो गया मोहभंग, कर ली घर वापसी

मध्यप्रदेश विधानसभा में तीन महीने पहले कॉन्ग्रेस सरकार के विधेयक के पक्ष में मतदान करके खलबली मचाने वाले भाजपा के बागी विधायक नारायण त्रिपाठी दोबारा से पार्टी में लौट आए हैं। मंगलवार (अक्टूबर 15, 2019) को वे पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के साथ भाजपा कार्यालय पहुँचे। यहाँ उन्होंने ऐलान किया कि वह कॉन्ग्रेस में कभी गए ही नहीं। उनके कॉन्ग्रेस में जाने की खबरें झूठी थीं। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह भी मौजूद थे।

कॉन्ग्रेस विधेयक को दिए अपने समर्थन पर उन्होंने अपना पक्ष साफ किया और कहा, “विधानसभा में एक विधेयक को लेकर हमने वोटिंग की थी। हमें लगा था कि सब (भाजपा-कॉन्ग्रेस) वोटिंग में एक साथ हैं। मैं जान नहीं पाया कि भाजपा ने वोटिंग नहीं की। इस दौरान मैं और शरद कौल एक साथ ही थे पर कॉन्ग्रेस ने इसके बाद इस मामले पर भ्रम फैलाया।”

उन्होंने बताया कि विधानसभा क्षेत्र मैहर को जिला बनाने से लेकर स्मार्ट सिटी सहित कई मामलों पर वे मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ संपर्क में थे। इसका मतलब यह नहीं है कि वे कॉन्ग्रेस में चले गए। उन्होंने साफ किया, “मैं भाजपा का था और भाजपा में ही रहूँगा।” उन्होंने कहा “कांग्रेस दिशाहीन पार्टी है। यहॉं कोई नेतृत्व नहीं है, कोई सोच नहीं है। मैं भाजपा से अलग नहीं हुआ था। मैं मैहर को जिला बनाने के लिए सीएम कमलनाथ से संपर्क में था। सरकार किसी की रहे, क्षेत्र विकास के लिए हर नेता को मुख्यमंत्री से मिलना होता है। इसी संबंध में मैं सीएम कमलनाथ के संपर्क में था।”

इस दौरान नारायण त्रिपाठी ने ये भी जानकारी दी कि वे झाबुआ उपचुनाव में प्रचार करने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आर्टिकल 370 हटने के बाद उन्होंने पीएम की प्रशंसा करते हुए ट्वीट भी किया था। उन्होंने कहा कि अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए वह कमलनाथ से मिलते हैं और हमेशा मिलते रहेगें।

उल्लेखनीय है कि जुलाई के आखिर में विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा के विधायक नारायण त्रिपाठी और शरद कौल ने क्रॉस वोटिंग की थी। जिसके बाद खुद सीएम कमलनाथ ने इन दोनों विधायकों के कॉन्ग्रेस में शामिल होने का दावा किया था और शिवराज सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। इस दौरान भाजपा के दोनों विधायकों ने भी कॉन्ग्रेस सरकार को समर्थन देने की घोषणा की थी। लेकिन अब नारायण त्रिपाठी की घर वापसी से साफ़ हो गया है कि तीन महीने में ही उनका कॉन्ग्रेस से मोह भंग हो चुका है।

ED ने पूछताछ के बाद चिदंबरम को किया गिरफ्तार, कार्ति ने कहा- पॉलिटिकल ड्रामा है सब

आईएनएक्स मीडिया मामले के आरोपित पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को प्रवर्तन निदेशायल (ईडी) ने बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से पहले एजेंसी के अधिकारियों ने उनसे तिहाड़ जेल में पूछताछ की। पूछताछ के दौरान चिदंबरम की पत्नी नलिनी और सांसद बेटे कार्ति भी तिहाड़ जेल पहुॅंचे थे।

दिल्ली की विशेष अदालत ने मंगलवार को ईडी को चिदबंरम से तिहाड़ जेल में पूछताछ की इजाजत दी थी। साथ ही कहा था कि पूछताछ के निष्कर्षों के आधार पर एजेंसी उन्हें गिरफ्तार भी कर सकती है।

पिता से मुलाकात के बाद कार्ति चिदंबरम ने मीडिया को बताया कि उनके पिता के खिलाफ चल रही जॉंच फर्जी है। उन्होंने कहा कि जॉंच के नाम पर जो कुछ चल रहा है वह पॉलिटिकल ड्रामा है।

इससे पहले मंगलवार को विशेष न्यायाधीश अजय कुमार ने कहा था, “मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी को प्रवर्तन निदेशालय अरेस्ट कर सकती है अगर पर्याप्त सबूत हैं तो, इसमें कोर्ट को दखल देने की जरूरत नहीं है।” सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट के समक्ष चिदंबरम की गिरफ्तारी की दलील पेश की थी। उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री की गिरफ्तारी की माँग करते हुए कहा था, “आईएनएक्स मामले में मनी लॉन्ड्रिंग, सीबीआई के केस से अलग है और इसमें उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ करने की जरूरत है।” इसके जवाब में चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल का कहना था कि ये एफआईआर पर आधारित है, इसमें अलग से गिरफ्तारी की कोई आवश्यकता नहीं है।

आईएनएक्स मीडिया समूह को 2007 में 305 करोड़ रुपये का विदेशी धन प्राप्त करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी देने में अनियमितता बरतने का आरोप चिदंबरम पर है। उस समय वे केंद्र में वित्त मंत्री थे। सीबीआई ने 15 मई 2017 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद, ईडी ने 2017 में इस संबंध में धन शोधन का मामला दर्ज किया था।

राम मंदिर पर मुस्लिमों की विचित्र शर्तें: सरकार करे अयोध्या के मस्जिदों का रखरखाव

अयोध्या विवाद के मुस्लिम पक्षकारों में से एक सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने राम मंदिर मामले में विवादित जमीन पर अपने मालिकाना हक़ का दावा छोड़ दिया है। इस सम्बन्ध में आज ही बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करेगा। दावा छोड़ने के लिए बोर्ड की ओर से कुछ शर्तें रखी गई है। बोर्ड ने माँग की है कि ‘THE PLACES OF WORSHIP (SPECIAL PROVISIONS) ACT, 1991 ACT NO. 42 OF 1991’ को पूर्णरूपेण लागू कर इसे अभेद्य बनाया जाए। साथ ही सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने यह भी कहा है कि अयोध्या में 22 मस्जिदों के रख-रखाव की जिम्मेदारी सरकार उठाए।

सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने अंतिम शर्त रखी है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के नियंत्रण में जितने भी धार्मिक स्थल हैं, उनकी स्थिति की जाँच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट एक समिति बनाए। उल्लेखनीय है कि अयोध्या विवाद में मुस्लिमों की छह पार्टियॉं है। लेकिन सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के पीछे हटने से उन सब के लिए भी दबाव वाली स्थिति होगी।

इससे पहले सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के नेताओं और साधु-संतों के बीच एक बैठक भी हुई, जिसमें इस फ़ैसले को लेकर चर्चा हुई थी। इस बैठक में एक-दूसरे को मिठाई भी खिलाई गई। अयोध्या मामले में आज बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) को सुनवाई का अंतिम दिन है और सुप्रीम कोर्ट इस मामले को और लम्बा खींचने के पक्ष में नहीं है।

उधर, राम मंदिर मामले की अदालती सुनवाई को लेकर सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा है कि आज शाम 5 बजे तक इस मामले की सुनवाई पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने सभी पक्षों को अंतिम दलील रखने के लिए समयावधि प्रदान की है, जिसके बाद सुनवाई समाप्त हो जाएगी।

तिहाड़ में आधे घंटे तक ED ने की चिदंबरम से पूछताछ, पत्नी और बेटा भी जेल पहुँचे

आईएनएक्स मीडिया मामले के आरोपित पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम से प्रवर्तन निदेशायल ईडी के अधिकारियों ने आधे घंटे तक तिहाड़ जेल में पूछताछ की। मंगलवार (अक्टूबर 15, 2019) को विशेष अदालत ने ईडी को पूछताछ की अनुमति दी थी। पूछताछ के लिए अधिकारी आज सुबह ही तिहाड़ पहुॅंच गए। उनके पहुॅंचने के कुछ देर बाद चिंदबरम की पत्नी नलिनी और सांसद बेटे कार्ति भी तिहाड़ जेल पहुॅंचे।

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अदालत ने मंगलवार को ईडी को पूछताछ की अनुमति देने के साथ ये भी कहा था कि अधिकारी पूछताछ में आए निष्कर्षों के आधार पर गिरफ्तार करने का फैसला ले सकते हैं। विशेष न्यायाधीश अजय कुमार ने कहा था, “मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी को प्रवर्तन निदेशालय अरेस्ट कर सकती है अगर पर्याप्त सबूत हैं तो, इसमें कोर्ट को दखल देने की जरूरत नहीं है।”

अदालत ने जाँच एजेंसी को चिदंबरम से पूछताछ के लिए 30 मिनट का समय निर्धारित किया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट के समक्ष चिदंबरम की गिरफ्तारी की दलील पेश की थी। उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री की गिरफ्तारी की माँग करते हुए कहा था, “आईएनएक्स मामले में मनी लॉन्ड्रिंग, सीबीआई के केस से अलग है और इसमें उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ करने की जरूरत है।” इसके जवाब में चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल का कहना था कि ये एफआईआर पर आधारित है, इसमें अलग से गिरफ्तारी की कोई आवश्यकता नहीं है।

इससे पहले तिहाड़ में बंद पूर्व चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि सीबीआई ने केवल उन्हें अपमानित करने के लिए जेल में रखा है। उनका कहना है कि उनके ऊपर या उनके परिवार के ऊपर ऐसा कोई भी आरोप नहीं है कि उन्होंने मामले में कभी किसी गवाह से संपर्क करने या उसे प्रभावित करने की कोशिश की हो।