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वेदों-उपनिषदों पर सेमीनार करेगी CPI: केरल में RSS के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए उठाया गया कदम

अक्सर देखा जाता है कि मार्क्सवादी लोग वेद और उपनिषदों के औचित्य को खारिज करते पाए जाते हैं, लेकिन इस बार कुछ अलग हो रहा है। मीडिया खबरों के मुताबिक केरल में वामपंथी दल कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया वेदों और उपनिषदों के सार पर सेमिनार आयोजित करने वाला है। कहा जा रहा है कि उनका ये कदम दक्षिण भारतीय प्रदेश केरल में संघ परिवार को बढ़ते प्रभाव को रोकने के प्रयास के रूप में उठाया जा रहा है। राज्य की सत्ताधारी गठबंधन एलडीएफ की सहयोगी पार्टी सीपीआई 3 दिन की इस संगोष्ठी को राज्य के कन्नूर में 25 अक्टूबर को आयोजित करेगी। इसका नाम ‘भारतीयम 2019’ रखा जाएगा।

इस कार्यक्रम को दिवगंत वामपंथी नेता एनई बलराम की जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन का पूरा दारोमदार एनई बलराम मेमोरियल ट्रस्ट के पास हैं। जानकारी के अनुसार इस कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय महासचिव डी राजा द्वारा होगा जबकि समापन समारोह में प्रदेश के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के शामिल होने की संभावना बताई जा रही है।

ट्रस्ट के अध्यक्ष और वरिष्ठ सीपीआई नेता सीएन चंद्रन ने इस आयोजन पर जानकारी देते हुए कहा है कि भारतीय दर्शनशास्त्र दिवंगत नेता एनई बलराम का पसंदीदा विषय था। इस कार्यक्रम में 9 विशेषज्ञ, वेद, उपनिषद, पुराण और एपिक पर अपने पत्र पेश करेंगे।

सीएन चंद्रन के अनुसार वे इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए ‘सांप्रदायिक ताकतों’ को अपने हित के लिए हिन्दू धर्म ग्रंथों का गलत इस्तेमाल किए जाने से रोकना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इस सेमिनार में भारतीय धर्मग्रंथों के वैज्ञानिक संदर्भों पर चर्चा की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीएन चंद्रन ने बताया कि पार्टी कार्यकर्ता इस आयोजन में भाग नहीं लेंगे। इसके अलावा कोई भी इच्छुक व्यक्ति इस संगोष्ठी में भाग ले सकता है। 

पीटीआई से बातचीत में भाकपा नेता ने बताया कि इस संगोष्ठी में ‘वेद और ईसायत’ तथा ‘वेद, बौद्ध धर्म और सूफी’ जैसे विषयों पर अलग से शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएँगे। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी में इस विषय पर चर्चा होगी कि वामपंथी विचारधारा का वेद और उपनिषद के प्रति क्या रवैया रहा है और पार्टी के विचारकों का इसके प्रति क्या नजरिया रहा।

सीएन चंद्रन के मुताबिक वेद और उपनिषद वैज्ञानिक विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन संघ परिवार के लोग इस विषयों पर अपना एकाधिकार मानते हैं और फिर उनकी गलत व्याख्या करते हैं।

उल्लेखनीय है कि अभी हाल ही में मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी ने भी कन्नूर में श्रीकृष्ण जयन्ती पर बालगोकुलम की शोभायात्रा निकालकर ऐसा ही आयोजन किया था। इसके अलावा अभी बीते दिनों कुछ वामपंथी नेता नवरात्रि पर बधाई देने को लेकर चर्चा में आए थे। जिसमें राजनीतिक दल सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी का नाम भी शामिल था। उन्होंने नवमी और विजयदशमी पर लोगों को बधाई दी थी। जिसके कारण लोगों ने उन्हें इन पर्वों का अर्थ समझाते हुए इनका महत्तव भी बताया था।

दुर्गा मूर्ति का सर तोड़ा, क्षत-विक्षत कर तालाब में फेंका: बंगाल में आरोपित युवक गिरफ्तार

दुर्गा पूजा के सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ उसकी भव्यता के लिए प्रख्यात पश्चिम बंगाल से दुर्गा मूर्ति की बुरी खबर आ रही है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक राज्य के केतुग्राम स्थित श्रीरामपुर गाँव में लोगों ने दशमी के अगले दिन (9 अक्तूबर, 2019) उठ कर पाया कि सरकारबाड़ी मन्दिर के ‘पूजो मंडप’ में प्रतिष्ठित दुर्गा मूर्ति का सर गायब है। साथ ही कुछ गहने भी नहीं हैं। बाद में मूर्ति का क्षत-विक्षत सर घर के पीछे एक तालाब में मिला।

आरोपित युवक गिरफ्तार

इस घटना से उत्तेजित हुए ग्रामीणों ने केतुग्राम थाने में मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में शक के आधार पर एक युवक को गिरफ्त में ले लिया है। लोगों के मुताबिक हमलावरों ने सरकारबाड़ी मन्दिर के पास खाली जगह में बनी काली ठाकुर बेदी को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया है।

हालाँकि सरकारबाड़ी मन्दिर कहने को गाँव के सरकार परिवार का है, लेकिन पिछले 300 सालों से सभी ग्रामीण सरकारबाड़ी मन्दिर के ‘दुर्गा पूजो’ में शरीक होते हैं। मंगलवार रात को पूजो खत्म होने के बाद मन्दिर का दरवाज़ा बंद किया गया था, लेकिन सुबह यहाँ की खिड़की टूटी मिली।

सरकार परिवार के प्रतुल सरकार ने स्थानीय मीडिया को बताया कि बारिश के चलते प्रतिमा का विसर्जन नहीं हो पाया था। इस कारण से बुधवार दोपहर को विसर्जन की विधि संपन्न की गई।

(खबर लिखे जाने तक इस घटना को किसी अंग्रेजी या हिंदी मीडिया के कवर करने की ऑपइंडिया को जानकारी नहीं है। हम यह खबर केवल स्थानीय बांग्ला मीडिया की कवरेज के अनुवाद के आधार पर लिख रहे हैं।)

मानवाधिकार कार्यकर्ता ने खोली इमरान खान और आर्मी की पोल, 90% जाहिल, कहा- Pak वफादार नौकर

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मानवाधिकार कार्यकर्ता और कराची के पूर्व मेयर आरिफ अजाकिया ने दशहरे की शुभकामना देते हुए पाकिस्तान को आईना दिखाया है। उन्होंने कहा कि किसी भी पर्व को मनाने में कोई बुराई नहीं है। त्योहार को मनाते समय धर्म को बीच में नहीं लाना चाहिए। आरिफ ने कहा कि बड़े ही अजीब हैं मुफ्ती लोग, पश्चिम बंगाल की टीएमसी सांसद नुसरत जहां मुस्लिम होकर दुर्गा पूजा करे तो गलत है, लेकिन उसी पंडाल में अगर अजान हो तो वाह-वाह। पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू अगर रोजा रखकर रमजान करें तो वह अच्छा।

आगे उन्होंने पाकिस्तानी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री को बार-बार पैसे की जरूरत है। अमेरिका अकेले इन्हें नहीं पाल सकता है। अमेरिका के अलावा सऊदी अरब, कतर, दुबई जैसे कई देशों से आर्थिक मदद की अपेक्षा करता है और भीख माँगकर गुजारा कर रहा है। साथ ही आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक से पैसे माँग कर ला रहा है इमरान खान।

इसके अलावा उन्होंने इमरान खान के हुकूमत पर बात करते हुए कहा कि उनकी हुकूमत जाने वाली है। उन्होंने कहा कि पाक सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने और फौज जबरन पीटीआई को लेकर शासन में आई है। उन्हें इमरान खान की काबिलियत के बारे में पता है। इमरान की टीम आज भी वही है जो चुनाव से पहले थी। उनके नंगे-पुंगे दोस्त, स्मगलर, चोर, चोरबाजारी वाले दोस्त की टीम है। ये सबकुछ बाजवा या फौज को पता था। ये लाना ही ऐसे लोगों को चाह रहे हैं। उन्‍होंने आर्मी के उस शख्‍स के नाम का भी खुलासा किया, जिसकी वजह से आज इमरान खान प्रधानमंत्री पद है। यह नाम जनरल फैज हामिद का है।

इमरान ने सत्ता में आने के लिए अपनी पूरी साख को दांव पर लगा दी। बाजवा इससे जो कहता है, ये करता है और जब ये बाजवा के कहने चुपचाप पर चल रहा है तो फिर ये इसको क्यूँ हटाएँगे? उन्होंने कहा कि बाजवा जब इसे भीख माँगने के लिए भेजता है तो ये कभी सऊदी चला जाता है, तो कभी कहीं और। बाजवा ने कश्मीर पर हल्ला मचाने के लिए कहा तो कर दिया। खुद बाजवा, जिसने 70 साल तक इस कौम को कश्मीर के नाम पर लूटा, वो चुप है। इसके साथ ही उन्होंने FATF पर बात करते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि अमेरिका पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट करेगा, क्योंकि अमेरिका के पार्टनर तो बहुत सारे हैं, लेकिन वफादार नौकर एक ही है और वो है पाकिस्तान।

उन्‍होंने अपने वीडियो में भारत के धर्मनिरपेक्ष राष्‍ट्र होने का सराहा है जबकि पाकिस्‍तान को कट्टरपंथी इस्‍लामी राष्‍ट्र की छवि को लेकर कोसा भी है। उनका कहना है कि भारत में जो अल्‍पसंख्‍यक हैं उन्‍हें वहाँ पर बराबरी का हक मिला हुआ है, जबकि पाकिस्‍तान में गैर-मुस्लिमों को कोई हक नहीं है। उन्‍होंने यहाँ तक कहा कि पाकिस्‍तान में 90 फीसद लोग जाहिल हैं जो बिना सोचे-समझे ही मौलवियों की बातों पर वाह-वाह करते हैं। 

इस दौरान उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि जो पीएम मोदी को गलत ठहराने की कोशिश में लगे हैं उन्‍हें एक बार अपने गिरेबान में झाँक लेना चाहिए। भारत में जितने हक वहाँ के अल्‍पसंख्‍यकों को दिए गए हैं इतने तो पाकिस्‍तान में सोचे भी नहीं जा सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्‍तान की पोल खोलते हुए कहा कि कराची जैसे शहर में पानी माफिया जबरदस्‍त फल-फूल रहा है। उनका कहना है कि पाकिस्‍तान में सिर्फ कराची ही नहीं हर छोटी और बड़ी जगहों का यही हाल है।

Pak हिन्दू लड़की नमृता चंदानी की संदिग्ध मौत पर चौंकाने वाला खुलासा, दावा दम घुटने से हुई मौत

पाकिस्तान में नमृता चंदानी नाम की हिन्दू लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत पर एक नया खुलासा हुआ है। डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही नमृता की मौत पर एक रिपोर्ट में बताया गया है कि उनकी मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण दम घुटने से हुई।

पाकिस्तानी चैनल जियो न्यूज के अनुसार हिस्तोपैथोलॉजिकल जाँच रिपोर्ट ने संकेत दिए हैं कि नमृता की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई। इस रिपोर्ट को 26 सितंबर को जम्होरो में लियाकत यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज द्वारा संकलित किया गया था। इसमें दावा किया गया है कि छात्रा की मौत अप्राकृतिक कारणों से नहीं बल्कि जहर खाने से हुई है। रिपोर्ट में बताया गया कि इसी कारण से उसके शरीर में बदलाव दिखा।

वहीं, बता दें कि पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट में नमृता की मौत के कारणों को नहीं बताया गया है, उसमें कहा गया है कि सबूतों से मालूम चलता है कि उन्होंने आत्महत्या ही की। लेकिन इस बात के कोई सबूत नहीं मिले जिससे पता चले उनकी हत्या हुई।

गौरतलब है कि नमृता का शव पिछले महीने 16 सितंबर को लरकाना के शहीद मोहतरमा बेनजीर भुट्टो मेडिकल यूनिवर्सिटी में उनके हॉस्टल के कमरे में छत के पंखे पर लटका मिला था। वह विश्वविद्यालय में बैचलर ऑफ डेंटर सर्जरी की पढ़ाई कर रही थीं। वे घोटकी के मीरपुर मथेलो की रहने वाली हैं, जहाँ इस घटना से कुछ दिन पहले ही दंगे हुए थे।

नमृता की मृत्यु पर उनके भाई डॉ विशाल सुंदर का कहना था कि उनकी बहन के शरीर के अन्य हिस्सों पर भी निशान मिले हैं, जैसे कोई उसे पकड़ रहा हो। इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी ये बताया गया था कि गला घोंटने के साफ़ निशान दिखाई दे रहे थे। लेकिन फिर भी वहाँ की पुलिस और प्रशासन शुरू से इस घटना को आत्महत्या साबित करने की कोशिश करता रहा। कुछ दिन बाद वहाँ की एक अदालत ने इस मामले में न्यायिक जाँच की इजाजत देने से भी इंकार कर दिया था और अब ये रिपोर्ट जो बताती है नमृता ने जहर खाया।

आजम खान और उनके MLA बेटे अब्दुल्ला ने मुझ पर कराया जानलेवा हमला: कॉन्ग्रेस नेता

कॉन्ग्रेस के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष मतिउर्रहमान खां उर्फ बबलू ने सपा सांसद आजम खां और उनके बेटे विधायक अब्दुल्ला आजम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मतिउर्रहमान खां ने पुलिस अधीक्षक अजय पाल शर्मा को तहरीर देकर कहा है कि सांसद उनकी हत्या कराना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि पिछले दिनों लखनऊ से लौटते समय शाहजहांपुर में उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट भी सांसद आजम खान ने ही करवाया था, जिसमें वह बाल-बाल बच गए।

एसपी को दी तहरीर में पूर्व कॉन्ग्रेस नेता ने कहा है कि वह सांसद और उनके बेटे के विरुद्ध मुकदमों और भ्रष्टाचार के मामलों में प्रभावी कार्रवाई करने के लिए शिकायत करते रहे हैं। सांसद के सताए लोगों की पैरवी करते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सीबीआइ, ईडी, मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन को कई बार पत्र भी लिखे। जनता के साथ सांसद के खिलाफ धरने प्रदर्शन किए। इसकी वजह से आजम खान और उनके पुत्र उनसे रंजिश रखते हैं। उन्होंने कहा कि वो अपने लोगों से उन्हें धमकियाँ दिलवाते हैं।

बता दें कि 3 अक्टूबर को मतीउर्रहमान लखनऊ से कार में सवार होकर रामपुर जा रहे थे। जैसे ही उनकी कार शाहजहांपुर पहुँची तो एक ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में मतीउर्रहमान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस दौरान उनकी पसलियों और कंधे में फ्रैक्चर हो गया था। इसके साथ कार भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। हादसे के बाद मतीउर्रहमान उर्फ बबलू को शाहजहांपुर स्थित शीतल ट्रामा सेंटर में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। अब उनकी हालत में सुधार को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

कॉन्ग्रेस नेता मतीउर्रहमान ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर सांसद आजम खान व उनके विधायक बेटे को आरोपित बताया है। मतीउर्रहमान ने आरोप लगाया कि ट्रक चालक ने उनकी गाड़ी को जानबूझकर टक्कर मारी थी। उन्होंने एसपी डाॅ अजय पाल शर्मा को तहरीर देते हुए कहा है कि 6 अक्टूबर को उनके चचेरे भाई का निधन हो गया था। इसलिए परिवार के सभी लोग वहाँ गए हुए थे। जिला अस्पताल में वह अकेले थे। इसी बीच रात करीब 11 बजे एक व्यक्ति अस्पताल पहुँचा और वह उन्हें धमकी देने लगा। उस व्यक्ति ने कहा कि आजम खान के विरोध करने का अंजाम तो देख लिया होगा। अगर आगे से कुछ ऐसा किया तो जान से हाथ धो बैठोगे। उन्होंने जिलाधिकारी को भी पत्र दिया है। कॉन्ग्रेस नेता की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जाँच के आदेश दिए हैं।

गोरखपुर: विसर्जन के रास्ते में माँस का टुकड़ा, गुस्साई भीड़ ने मचाया हड़कंप, 400 के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के बस्ती जिले में मूर्ति विसर्जन के रास्ते पर कथित तौर पर माँस का टुकड़ा मिलने पर इलाके में हिंसा भड़क गई। मामला इतना ज्यादा बिगड़ गया कि पुलिस को 400 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करना पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मूर्ति विसर्जन के लिए जाने वाले रास्ते में माँस का टुकड़ा देखकर श्रद्धालुओं का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने वहाँ नारेबाजी शुरू कर दी। घटना 8 तारीख यानी मंगलवार को दशहरे के अवसर पर घटी।

भड़की भीड़ ने इसके बाद इलाके के पास मौजूद माँस की कुछ दुकानों को भी निशाना बनाया और वहाँ खड़ी मोटरसाइकल में तोड़फोड़ की गई।

हालाँकि, अधिक नुकसान होने से पहले मौक़े पर पहुँची पुलिस ने स्थिति को संभाल लिया और भीड़ को शांत करवाकर मामले में जाँच शुरू की। घटना के बाद भारी बल की पुलिस की मौजूदगी में मूर्ति विसर्जन हुआ।

बस्ती क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक आशुतोष कुमार ने इस मामले के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि मूर्ति विसर्जन के रास्ते पर माँस का टुकड़ा देखकर लोग नाराज हो गए और एक मोटरसाइकिल एवं 3 माँस की दुकान को निशाना बनाया गया। इस घटना के बाद पुलिस ने 400 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया है।

डीआईजी ने बताया कि हिंसा ज्यादा भड़कती उससे पहले मौके पर भारी पुलिस फोर्स ने पहुँचकर हालात को काबू में किया। उपद्रवी आगजनी के बाद मौके से फरार हो गए। डीआईजी ने बताया कि स्थानीय लोगों द्वारा बनाई गई वीडियो क्लिप और लोगों के मोबाइल फोन की क्लिप के जरिए आरोपितों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल इलाके में शांति है। लेकिन अभी कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

गौरतलब है कि विजयादशमी के अवसर पर उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में भी प्रतिमा विसर्जन जूलूस में हिंसा की खबर सामने आई। यहाँ पर 2 पक्षों के बीच जमकर बवाल हुआ और दोनों तरफ से पथराव भी किए गए। पूरी घटना में 8 लोगों के गिरफ्तार होने की खबर है, जबकि इस हिंसा में 16 घायल बताए जा रहे हैं।

कॉन्ग्रेस द्वारा राफेल की शस्त्र पूजा को नौटंकी बताने के बाद पंडित नेहरू सहित कॉन्ग्रेस नेताओं की VIDEO वायरल

वायुसेना दिवस पर देश को मिले पहले राफेल की रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा फ्रांस में शस्त्र पूजा किए जाने पर बवाल हो गया है। कॉन्ग्रेस ने राफेल पर शस्त्र पूजा के दौरान ‘ऊँ’ लिखे जाने को तमाशा बताया है और कहा है कि मोदी सरकार के साथ सबसे बड़ी समस्या है कि वे बिना ठोस काम किए हर चीज को नौटंकी बना देते हैं। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने कॉन्ग्रेस के इस बयान पर उसे भारतीय रीति रिवाजों व परंपराओं का विरोधी बताया है।

ऐसे जुबानी तकरार में इसी बीच सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें और पुरानी वीडियो वायरल होने लगी है, जो दर्शाती है कि कॉन्ग्रेस आज भले ही मोदी सरकार को राफेल की शस्त्र पूजा करने पर घेर रही है, लेकिन उनके खुद के नेता भी इन क्रियाकलापों को करते आए हैं।

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल होती वीडियो पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की है। जिसमें वे एक जहाज के जलावतरण के मौक़े पर उसकी पूजा करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में होती कमेंट्री से साफ हो रहा रहा है कि पंडित नेहरू नारियल तोड़कर जहाज को पानी में उतारने की रस्म की विधि से पूरा कर रहे हैं।

पंडित नेहरू की ये वीडियो सैयद अतहर देहलवी द्वारा 14 मार्च 2018 को ट्विटर पर ट्वीट की गई थी। जिसमें उनका दावा था कि ये वीडिया 14 मार्च 1948 का है। जिस समय आजादी के बाद भारत ने अपने पहले जहाज ‘जल ऊषा’ को वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हिंद महासागर में उतारा था। वीडियो में साफ है कि कुछ पंडित मंत्र पढ़ते दिख रहे हैं और पीछे होती कमेंट्री बता रही है कि पूर्व प्रधानमंत्री नारियल तोड़कर जहाज को समुद्र में उतारने की रस्म पूरी कर रहे हैं।

अब ऐसे में जब राफेल की पूजा पर विवाद छिड़ा, तो सैयद अतहर देहलवी ने बुधवार को अपने पुराने ट्वीट को दोबारा रिट्वीट करते हुए लिखा कि राजनाथ सिंह ने फ्रांस में जो किया उसमें कुछ भी नया नहीं हैं।

उन्होंने लिखा कि आजाद और सेक्यूलर भारत में पंडित नेहरू के समय से ही सरकारी योजनाओं और समारोहों की शुरुआत मंत्रोच्चार, दीपक, नारियल और अन्य भारतीय व क्षेत्रीय परंपराओं के साथ होती रही है।

इसके बाद, इसी बीच पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी गुरुशरण कौर की भी एक तस्वीर वायरल हुई। जिसे खुद कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया सेल के राष्ट्रीय संयोजक सरल पटेल ने ट्वीट किया है। इसमें मनमोहन सिंह की पत्नी एक हाथ में नारियल पकड़े नजर आ रही हैं और उनके बगल में नेवी के कुछ अफसर खड़े हैं।

खास बात ये है राफेल की पूजा को तमाशा करार देने वाली कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया संयोजक ने ही यह तस्वीर ये दर्शानेे को शेयर की है कि कॉन्ग्रेस भी भारतीय परंपराओं का सम्मान करती रही है।

इस तस्वीर के बारे में पटेल ने दावा किया है कि यह 2009 की तस्वीर है जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी गुरुशरण सिंह नारियल तोड़कर आईएनएस अरिहंत को लॉन्च कर रही थीं।

राहुल गाँधी जैसे नेता विरले ही होते हैं: अधीर रंजन चौधरी ने सलमान खुर्शीद और सिंधिया को याद दिलाया ‘त्याग’

लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की हार के बाद पार्टी नेता राहुल गाँधी के अध्यक्ष पद छोड़ने पर उनकी आलोचना के बीच लोकसभा में पार्टी नेता अधीर रंजन चौधरी ने बुधवार (अक्टूबर 9, 2019) को कहा कि राहुल जैसे नेता मौजूदा राजनीति में विरले ही होते हैं जिन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना पद त्याग दिया। लोकसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद राहुल गाँधी के पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने पर राज्य और केंद्रीय स्तर के कई नेताओं ने उनकी आलोचना की थी। 

पार्टी में सुधार को लेकर दिए बयानों पर सलमान खुर्शीद और आत्मचिंतन की बात पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को अधीर रंजन चौधरी ने नसीहत दी। अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि उन्होंने कुछ नेताओं के बयानों के बारे में सुना है। उन्होंने कहा, “इस बारे में वो सिर्फ इतना कहना चाहते हैं कि अच्छा होता अगर राहुल गाँधी पार्टी अध्यक्ष के रूप में वापस आते। लेकिन साथ ही, हमें नैतिक जवाबदेही के उदाहरण की भी सराहना करनी चाहिए जो उन्होंने सबके सामने पेश की है। यह राहुल गाँधी का निर्णय था और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।”

अधीर रंजन चौधरी ने पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी का बचाव किया और कहा कि राज्य विधानसभाओं के चुनाव के माहौल में पार्टी नेताओं को ऐसे बयानों से बचना चाहिए जिससे हमें नुकसान हो। अगर कोई मुद्दा है तो इन्हें पार्टी स्तर पर उठाया जाए न कि सार्वजनिक रूप से। उन्होंने कहा कि जब पार्टी चुनाव में उतरने वाली हो, तब इस तरह की टिप्पणियाँ कॉन्ग्रेस को फायदा पहुँचाने वाली नहीं हैं। बाहर बयानबाजी करने की बजाए खुर्शीद को अपनी राय पार्टी के भीतर ही जाहिर करनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि सलमान खुर्शीद ने मंगलवार (अक्टूबर 8, 2019) को कहा था, “हम विश्लेषण के लिए भी एकजुट नहीं हो सके कि हम लोकसभा चुनाव में क्यों हारे। हमारी सबसे बड़ी समस्या यही है कि हमारे नेता ने हमें छोड़ दिया।” इस पर पार्टी नेता राशिद अल्वी ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि पार्टी में आग लगाने वाले नेता मौजूद हैं, बाहरी दुश्मन की जरूरत नहीं। मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा कि जब सत्ता नहीं होती, तो बोलने वालों की बाढ़ आ जाती है। वहीं सिंधिया के आत्मचिंतन वाले बयान पर अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “हम सभी आत्मनिरीक्षण कर रहे हैं। सभी विचारों और स्थितियों का आकलन करने के बाद ही ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमिटी ने सोनिया गाँधी से अध्यक्ष पद संभालने की अपील की थी।”

जामा मस्जिद के पास मूर्ति विसर्जन के दौरान हुई पत्थरबाज़ी, थानाध्यक्ष की अमर्यादित भाषा से बिगड़ा माहौल

बिहार के गया में मूर्ति विसर्जन के दौरान थानाध्यक्ष की अमर्यादित भाषा पर लोगों के भड़कने और क्षेत्रीय तनाव की ख़बर सामने आई है। विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार (8 अक्टूबर) की रात को प्रशासन द्वारा निर्गत पाँच लाइसेंसी माँ दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन दुखहरणी मंदिर के पास कराया जा रहा था। पहले तो हालात बिल्कुल सामान्य थे और मूर्ति को लेकर हर्षोल्लास के साथ आगे बढ़ रहे थे।

दैनिक जागरण की ख़बर के अनुसार, भक्तजनों की भीड़ एक स्थल पर पहुँची तो पाकिस्तान के ख़िलाफ़ नारेबाजी शुरू हो गई। यह नारेबाजी कुछ समुदाय विशेष के लोगों को इतनी नागवार गुज़री कि उन्होंने भक्तों की भीड़ से नारेबाजी के ख़िलाफ़ अपनी आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन, पड़ोसी देश के ख़िलाफ़ नारेबाजी जारी रही। स्थिति को संभालने के लिए कोतवाली थानाध्यक्ष संजय कुमार ने अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया, जिससे वहाँ मौजूद लोगों के बीच ग़ुस्सा भड़क गया। इस बीच दो पक्षों के बीच ईंट-पत्थर से हमले किए गए।

हालात इतने बिगड़ गए कि दुखहरणी द्वार से पाँच मूर्ति को गुज़ारने के लिए पाँच घंटे का समय लग गया। इसकी ज़िम्मेदारी सिटी एसपी के कंधे पर थी, जिनके सहयोग के लिए एएसपी अरूण कुमार सिंह को लगाया गया था। दो पक्षों के बीच हुए हंगामे और पत्थरबाज़ी के दौरान पुलिसकर्मियों ने सुरक्षा कवच धारण किया हुआ था। बिगड़े हालातों के बीच बुधवार (9 अक्टूबर) की सुबह तीन बजे मूर्ति पास कराया गया।

बता दें कि दुखहरणी चौक रोड प्रमुख मार्ग है, जो इस तनाव के चलते ईंट-पत्थरों से भर गया था। इस तरह के हालात को देखकर दशहरे का मेला देखने आए लोगों में काफ़ी दहशत का माहौल था। भगदड़ के माहौल में कई लोगों को चोटें भी आईं। चौक रोड पुलिस छावनी में तब्दील हो गई। इस दौरान ज़िला पुलिस बल, वरिष्ठ अधिकारी, दंगा नियंत्रण वाहन सहित अन्य सुरक्षा बल भी मौजूद थे।

हिंदुस्तान में प्रकाशित ख़बर

भारी तनाव की सूचना मिलते ही डीएम अभिषेक सिंह एवं एसएसपी राजीव मिश्रा मौक़े पर पहुँचे और हालात का मुआयना किया। दोनों अधिकारियों ने कमान संभाली और बुधवार की सुबह 3:30 बजे तक चौक रोड पर डटे रहे। ख़बर के अनुसार, एसएसपी राजीव मिश्रा ने बताया कि मूर्ति विसर्जन के दौरान जामा मस्जिद के पास पत्थरबाज़ी मामले में FIR की जाएगी। पुलिस पर पथराव के मामले में कई युवकों को गिरफ़्तार किया गया है। इनमें एक पुलिस जवान के सिर पर चोट लगी थी। इन युवकों ने मंगलवार की रात से सुबह तीन बजे तक लगातार पुलिस पर पथराव किया। जवाब में पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।

प्रभात ख़बर में प्रकाशित ख़बर

मीडिया में ख़बरों के अनुसार, कोतवाली थानाध्यक्ष ने बताया कि मूर्ति विसर्जन के दौरान कुछ शरारती तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। साथ ही थानाध्यक्ष ने 12 लोगों को गिरफ़्तार किए जाने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इन 12 में से पाँच लोग नशे में धुत्त पाए गए। सभी को कोर्ट में पेशी के बाद जेल भेज दिया गया।

MP में नई स्कीम: कमलनाथ सरकार से चाहिए ₹51000 तो दूल्हे को भेजना होगा शौचालय से सेल्फी

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने एक नई स्कीम शुरू की है। अब दूल्हे के शौचालय में खड़े होकर सेल्फी भेजने पर मुख्यमंत्री कन्या विवाह / निकाह योजना के तहत 51,000 रुपए मिलेंगे। मगर इसके लिए आवेदन तभी स्वीकार किए जाएँगे जब दुल्हन यह साबित कर दे कि उसके पति के घर में शौचालय है।

खबर के अनुसार, चूँकि सरकारी अधिकारी हर जगह शिथिलता की वजह से जाँच नहीं कर सकते हैं, इसलिए वे दूल्हे से एक #सेल्फी-स्टैंडिंग-इन-टॉयलेट की माँग करते हैं। बता दें कि शौचालय में खड़े होकर सेल्फी लेने की यह माँग ग्रामीण क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है। प्रदेश की राजधानी भोपाल नगर निगम (BMC) के अधिकारी भी इसकी माँग करते हैं।

भोपाल में सेंट्रल लाइब्रेरी में सामूहिक विवाह में शामिल होने वाले 74 जोड़ों में से एक समीर (बदला हुआ नाम), जो कि जहांगीराबाद के रहने वाले हैं, का कहना है कि शादी के प्रमाण पत्र की कल्पना कीजिए, जिसमें शौचालय में खड़े दूल्हे की तस्वीर लगी होगी। उन्होंने कहा कि उनसे कहा गया कि जब तक वो तस्वीर नहीं देते, काजी निकाह नहीं पढ़ेंगे।  

2013 में स्कीम लॉन्च करने के बाद से ही टॉयलेट की शर्त शामिल थी, लेकिन हाल ही में इसमें तस्वीर देने की बात जोड़ी गई है। सीएम विवाह योजना के प्रभारी बीएमसी अधिकारी सी बी मिश्रा ने कहा कि पहले इस नीति में छूट दी गई थी। पहले दूल्हे को शादी के 30 दिन के भीतर शौचालय बनाने के लिए कहा जाता था। मिश्रा ने कहा कि शौचालय में दूल्हे की फोटो संलग्न करने में कुछ भी गलत नहीं है। यह शादी के कार्ड का हिस्सा नहीं है।

बीएमसी कॉर्पोरेटर और स्थानीय कॉन्ग्रेस नेता रफीक कुरैशी ने कहा कि यह तब और भी अजीब हो जाता है जब दुल्हन दूसरे शहर या जिले में रहती है। उन्होंने बताया कि भोपाल से करीब 90 किलोमीटर दूर सिलवानी में एक शादी हुई थी। स्थानीय सरकारी अधिकारी ने शादी को तब तक मंजूरी नहीं दी जब तक कि दूल्हे ने भोपाल में वापस आकर उसे शौचालय में खड़े होने का सबूत नहीं दिया। उनका कहना है कि शौचालय स्वच्छ भारत मिशन का आंतरिक हिस्सा है, लेकिन यह प्रक्रिया बेहतर हो सकती है। उन्होंने इस साल तीन सामूहिक विवाह आयोजित किए हैं और 2020 के लिए होने वाले नागरिक चुनावों के साथ अधिक सामूहिक विवाह होने की संभावना है। जिसके लिए सैकड़ों दूल्हे की शौचलाय में खड़ी तस्वीर आ सकती है।

दोनों पक्षों के राजनेता स्वीकार करते हैं कि दूल्हे इस सफाई मिशन के अंतिम प्रक्रिया में हैं और चाहते हैं कि यह दूल्हे को यह साबित करने का एक और सुंदर तरीका साबित हो कि उनके पास शौचालय है। बता दें कि मुख्‍यमंत्री कन्या विवाह / निकाह योजना आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए है। पिछले साल 18 दिसंबर को सत्ता में आने के एक दिन बाद ही कॉन्ग्रेस सरकार ने इसके तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता को 28,000 रुपए से बढ़ाकर 51,000 रुपए कर दी थी। इसके बाद आवेदन करने वालों की तादाद काफी बढ़ गई। जिससे अधिकारियों के लिए प्रत्येक घर के शौचालय का आकलन करना काफी मुश्किल हो गया।